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पार्टी के बाद नाश्ता करने राष्ट्रपति भवन गए थे दुष्यंत सिंह, राष्ट्रपति कराएँगे चेकअप; कनिका पर FIR के आदेश

कोरोना वायरस की आपदा के बावजूद लापरवाही बरतने के कारण सैकड़ों लोगों की जिन्दगी संकट में डालने वाली कोरोना वायरस से पीड़ित बॉलीवुड गायिका कनिका कपूर के खिलाफ लखनऊ के डीएम अभिषेक प्रकाश ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

कनिका कपूर ने संवेदनशील माहौल के बावजूद सरकार द्वारा जारी की गई तमाम एडवाइजरी को नजरअंदाज कर लगातार पार्टियाँ अटेंड की और बिना कोरोना के परिक्षण के लोगों से मेलजोल जारी रखा। कनिका कपूर के साथ लखनऊ में शुक्रवार को पाँच और लोगों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो गई है। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में तीन अन्य लोगों के साथ भर्ती कराया गया।

बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर की घोर लापरवाही के कारण लखनऊ में बड़ी आबादी संकट में है। लंदन से लौटने के बाद उनके द्वारा अटेंड की गई हाई प्रोफाइल पार्टी में अफसरों से लेकर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत बड़े नेता मौजूद थे, जिनमें से कईयों ने खुद को घर पर ही सेल्फ क्वारंटाइन कर लिया है। इस मामले में प्रमुख सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने कनिका कपूर की सभी पार्टियों की जाँच का आदेश दिया है। उन्होंने डीएम अभिषेक प्रकाश से 24 घंटे में जाँच रिपोर्ट माँगी है।

कनिका की पार्टी में शामिल होने वाले दुष्यंत राष्ट्रपति भवन भी गए थे

लंदन से लौटने के बाद 8 दिन के भीतर कनिका कपूर कई लोगों से मिलीं, और दो पार्टियों में भी शामिल हुई। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इस में एक पार्टी पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी के रिश्तेदार ने दी थी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार (15 मार्च) को आयोजित हुई इस पार्टी में शामिल होने वाले दुष्यंत सिंह इसके बाद भी कई समारोह में पहुँचे।

बुधवार की सुबह राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यूपी और राजस्थान के सांसदों के लिए राष्ट्रपति भवन में ब्रेकफास्ट की मेजबानी की थी। इस कार्यक्रम की एक ऐसी तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें दुष्यंत सिंह, जिन्होंने कि कनिका कपूर के साथ पार्टी अटेंड की थी, राष्ट्रपति कोविंद के पीछे खड़े दिख रहे हैं। हालाँकि, बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति कोविंद ने दुष्यंत सिंह और अन्य सांसदों से हाथ नहीं मिलाया।

पार्टी से लौटे दुष्यंत सिंह ने के साथ लोकसभा में उनके बगल में बैठे टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन भी अब सेल्फ क्वारन्टाइन में हैं। वह दो दिन पहले स्थायी समिति की एक बैठक में दुष्यंत सिंह के बगल में बैठे थे।

हिन्दू लड़के से मुस्कान ने किया प्यार तो भाइयों ने माँ को बाथरूम में बंद कर खटिया के पाए से पीट-पीट कर मार डाला

बरेली से एक बेहद दुखद, सनसनीखेज वारदात की खबर आ रही जिसमें दो भाइयों ने अपनी सगी छोटी बहन की निर्ममता पूर्वक पीट-पीट कर हत्या कर दी है। इस नृशंस हत्या की वजह लड़की का दूसरे धर्म के लड़के से प्रेम करना था। बताते चलें कि लड़का हिन्दू था, जबकि लड़की मुस्लिम। जो लड़की के भाइयों को कतई नागवार गुजरा और उन्होंने अपनी माँ को बाथरूम में बंद कर, खटिया के पाए से पीट-पीट कर अपनी बहन की हत्या कर दी। रूह कँपा देने वाली यह घटना बरेली के सीबीगंज थाना क्षेत्र के गोविंदापुर की है। पुलिस ने दोनों आरोपित भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है।

17 वर्षीय मुस्कान नाम की इस किशोरी की हत्या उसके उन्हीं भाइयों ने कर डाली जिन पर उसकी रक्षा का भार था। रिपोर्ट्स के अनुसार मुस्लिम लड़की मुस्कान को एक हिन्दू लड़के से प्यार हो गया था जिसके बाद वह उसी हिन्दू लड़के के साथ हिमाचल प्रदेश चली गई थी। लेकिन पुलिस ने उसे गुरुवार को वहाँ से बरामद किया और बगैर कोर्ट में बयान करवाए लड़की को उसकी माँ सलमा को सौंप दिया। जिसके बाद आज शुक्रवार को मुस्कान के भाइयों ने अपनी माँ को बाथरूम में बंद करने के बाद मुस्कान को खटिया के पाए से तबतक पीटा जबतक वह मर नहीं गई।

मुस्कान फाइल फोटो साभार : न्यूज़ 18

इस जघन्य हत्याकांड के बाद बरेली के एसपी सिटी रवीन्द्र कुमार ने बताया कि माँ की तहरीर पर मृतक किशोरी मुस्कान के दोनों भाइयों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और मुस्कान के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस हत्या की जाँच कर रही है और हत्या में इस्तेमाल खटिया के पाए आदि को बतौर साक्ष्य एकत्र कर लिया है। दैनिक जागरण के अनुसार जानकारी मिलने पर अफसरों के आदेश पर फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुँच गई। जहाँ टीम निरीक्षण कर रही है। हालाँकि, मामले में किशोरी को नशीला पदार्थ खिलाए जाने की भी संभावना व्यक्त की जा रही है। 

बॉलीवुड के बाद संसद में CORONA की एंट्री: कनिका की पार्टी में दुष्यंत, संसद में उनके बाजू में बैठे TMC नेता भी सेल्फ आइसोलेशन में

आज ही बॉलीवुड गायिका कनिका कपूर के कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद अचानक से बॉलीवुड से लेकर संसद तक खलबली मच गई है। दरअसल, 15 मार्च को लंदन से लौटने के बाद कनिका एक हाई प्रोफाइल पार्टी में शामिल हुई, जिसमें प्रदेश के बड़े नेता, अफसर शामिल हुए थे। इनमें से एक हैं भाजपा नेता वसुंधरा राजे। लेकिन एक तस्वीर के सामने आने से पूरी कड़ी में अफरा-तफरी मच गई है।

कनिका कपूर कि पार्टी की तस्वीरों में देखा जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नेता और राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी इस पार्टी में शामिल हुईं। उनके साथ सांसद और उनके बेटे दुष्यंत सिंह भी इसमें शामिल थे। इस पार्टी में मौजूद लोग कई और जगहों पर भी जा चुके हैं, जिसके बाद वसुंधरा राजे सिंधिया और दुष्यंत सिंह ने खुद को आइसोलेट कर लिया है। लेकिन इसमें सबसे अहम् मोड़ जो सामने आया है, वो ये कि दुष्‍यंत सिंह इस पार्टी के बाद संसद भी गए थे, जहाँ उनके बगल बैठने की वजह से अब TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी अब खुद को सेल्फ आइसोलेशन में रखा है।

इस पार्टी में मौजूद उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह व उनकी पत्नी ने खुद को आइसोलेट कर लिया है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्री, उनकी पत्नी व घर में काम करने वाले लोगों के सैंपल लैब भेजे गए हैं। 

कनिका कपूर के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की बात सामने आते ही TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन जो संसद की कार्यवाही के दौरान वसुंधरा राजे के सांसद बेटे दुष्यंत सिंह के साथ बैठे थे, ने एहतियातन खुद को एकांतवास में कर लिया है। दुष्यंत सिंह की कनिका के पार्टी में शामिल होने की खबर आने के बाद टीएमसी सांसद ने कहा, “यह सरकार सभी को खतरे में डाल रही है। पीएम खुद को एकांतवास में रखने के लिए कह रहे हैं, लेकिन संसद चल रही है। पार्टी के अगले दिन मैं दुष्यंत के साथ ढाई घंटे तक उनके बगल में बैठा था। दो सांसद और हैं जिन्होंने खुद को एकांतवास में रखा है। इस सत्र को स्थगित कर देना चाहिए।”

वहीं भाजपा नेता वसुंधरा राजे सिंधिया ने भी ट्वीट में लिखा है, “कुछ दिन पहले दुष्यंत (वसुंधरा के बेटे) और उनके ससुराल वालों के साथ मैं लखनऊ में एक डिनर पर गई थी। कनिका कपूर, जोकि #Covid19 संक्रमित पाई गई हैं, वह भी उस डिनर में बतौर अतिथि मौजूद थीं। सावधानी के तौर पर मैं और दुष्यंत सेल्फ आइसोलेशन में हैं और हम सभी आवश्यक निर्देशों का पालन कर रहे हैं।”

कनिका के संक्रमण की खबर सार्वजनिक होने के बाद उनकी लन्दन से आने के बाद की पूरी ट्रेवल हिस्ट्री का विश्लेषण किया जा रहा है। जिसमें पता चला है कि लखनऊ के अलावा कनिका कपूर कानपुर में अपने एक रिश्तेदार की पार्टी में भी गईं। कनिका कपूर के रिश्तेदार संजय टंडन का कहना है कि गृह प्रवेश की पार्टी में 15-20 लोग आए थे।

सांसद दुष्यंत सिंह और डेरेक ओ ब्रायन के बाद सांसद अनुप्रिया पटेल ने भी दुष्‍यंत सिंह के साथ एक कार्यक्रम में मौजूद होने की वजह से सेल्‍फ आइसोलेशन का फैसला लिया है। इस तरह से पता चल रहा है कि इस वायरस के संक्रमण का तरीका कितने स्तर पर प्रभावित कर सकता है।

कनिका कपूर ने लखनऊ पहुँचने के बाद महानगर में मौजूद गैलेंट अपार्टमेंट में लोगों को पार्टी दी। पार्टी में करीब 125 लोग शामिल हुए थे। कनिका कपूर लखनऊ के ताज होटल में एक पार्टी में भी शामिल हुई थी। पार्टी में तमाम बड़े अफसर और कई नेता शामिल थे। महानगर के अपार्टमेंट के साथ लखनऊ में काफी खलबली मची है। कनिका के साथ उनकी मेड की रिपोर्ट पॉजिटिव है। वह जिस-जिस पार्टी में गईं वहाँ के सैकड़ों नौकर-चाकर और पार्टी कैटरर के तमाम कर्मी भी दहशत में हैं। जिन दोनों ही पार्टियों में कनिका कपूर गई वहाँ कैटरिंग स्टाफ व होटल स्टाफ को हटाकर 500-700 लोग शामिल हुए थे।

लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने के आरोप में पश्चिम बंगाल से कॉलेज छात्रा तानिया परवीन गिरफ्तार, बैंक खाते से हो रहे थे करोड़ों के लेन-देन

पंश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास से कोलकाता पुलिस ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने के आरोप में एक प्रतिष्ठित कॉलेज से छात्रा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि आरोपित छात्रा की पहचान तानिया परवीन के रूप में की गई है। वहीं गिरफ्तारी के बाद आरोपित छात्रा को 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

दरअसल, एसटीएफ अधिकारियों के एक टीम ने गुरुवार को बदुरिया पुलिस थाने क्षेत्र के गाँव मावलीपुर ने छापा मारा था और टीम ने पहचान करने के बाद परवीन को उसके घर से ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की जानकारी के मुताबिक आरोपित छात्रा क्षेत्र के प्रतिष्ठित मौलाना आज़ाद कॉलेज में प्रथम वर्ष की एमए अरबी की छात्रा है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने छात्रा के राजद्रोह, धार्मिक उत्पीड़न और आपराधिक साजिश आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

दरअसल, पुलिस को जानकारी मिली है कि उसके बैंक खाते में करोड़ों रुपए का आए दिन लेन-देन हो रहा था, इसके बाद से ही परवीन की गतिविधियों पर संदेह होने लगा। बताया जा रहा है कि परवीन पर स्थानीय युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने का आरोप भी है। वहीं गिरफ्तार की गई छात्रा को बारासात में एक सत्र अदालत में पेश किया गया, जिसे वहाँ से 14 दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

वहीं बीते रविवार को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी हासिल हुई थी। सुरक्षा बलों ने 4 आतंकियों को इस मुठभेड़ में मार गिराया था, जिसमें मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन का कमांडर तारिक अहमद भी शामिल था, जबकि बाकी तीन मारे गए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी थे।

COVID-19: 10,000 से ऊपर हुआ मौत का आँकड़ा, इटली में 3405, अंतिम संस्कार के लिए लगाई सेना

चीन के वुहान से शुरू हुए कोरोना वायरस के संक्रमण से होने वाली मौतों में इटली कहीं आगे निकल चुका है। चीन के बाद इटली दूसरा सबसे बड़ा ऐसा शहर है जहाँ पर इस वायरस के कारण अब तक सर्वाधिक मौतें हो चुकी हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि इटली में मरने वालों का अंतिम संस्कार करने के लिए अब सेना को लगाया गया है।

विश्वभर में कोरोना के कारण मरने वालों की संख्या दस हजार को पार करते हुए 10,405 पहुँच चुकी है, जिनमें से 3400 अकेले इटली के हैं। यूरोप महाद्वीप में अब तक 4,932 और एशिया महाद्वीप में 3,431 मौतें हो चुकी हैं।

एक ओर जहाँ चीन में वायरस के कारण होने वाली मौतों में ठहराव देखा गया है, वहीं इस वायरस से बुरी तरह प्रभावित इटली मौतों के मामले में चीन से आगे निकल गया है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान इटली में 427 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। इस यूरोपीय देश में अब तक 3405 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। जबकि चीन में 3248 लोगों की जान गई है। वहीं इरान में मरने वालों की संख्या 1433 तक पहुँच चुकी है।

वहीं भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक अभी तक कुल 223 पॉजिटिव केस हैं। इनमें से 32 विदेशी नागरिक हैं। जबकि 23 लोगों के पूरी तरह से स्वस्थ होने की बात भी सरकार कह रही है। आज सबसे ज़्यादा मामले बढ़े हैं, एक ही दिन में 50 मामले सामने आए हैं। भारत में इस वायरस के कारण मरने वालों की संख्या पाँच हो चुकी है।

भारत में सबसे ज्यादा ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र है। ताजा आँकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में अभी तक 48 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 44 भारतीय और तीन विदेशी नागरिक शामिल हैं। वहीं, एक की जान भी चली गई। महाराष्ट्र के बाद केरल में 31 पॉजिटिव केस सामने आए हैं। इनमें से 26 भारतीय और दो विदेशी नागरिक हैं।

कोरोना के खतरे से निपटने के लिए कल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए देशवासियों से 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगाने का आह्वान किया है। पीएम ने यह भी कहा है कि यह वैश्विक महामारी हो चुकी है। इससे पूरा विश्व परेशान है। उन्होंने देशविसयों से वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए साथ आने की अपील की है। साथ ही उन्होंने बुजुर्ग लोगों से घर से बाहर नहीं निकले की अपील की है।

‘घर में भी तो हो सकता है Corona, प्रोटेस्ट से कोई लेना-देना नहीं’: शाहीन बाग़ ने बताया कोरोना को CAA विरोध शांत करवाने की साजिश

शाहीन बाग़ में पिछले कई महीनों से प्रदर्शनकारियों का मानना है कि कोरोना वायरस की ख़बरें गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की एक चाल है, जिसकी आड़ में वो शाहीन बाग़ में चल रहे नागरिकता कानून के विरोध प्रदर्शन को खत्म करवाना चाहते हैं।

इस वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी कहती है, “कोरोना वायरस तो मेट्रो में भी हो सकता है, कोई उन्हें नहीं रोकता। लेकिन सभी बस शाहीन बाग़ प्रोटेस्ट खत्म करवाना चाहते हैं।” महिला आगे कहती है कि क्या यह जरुरी है कि उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमण तभी होगा जब वो प्रोटेस्ट में जाएगी? उन्होंने कहा कि यह तो हमारे घरों में भी हो सकता है तो क्या हम अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे? वीडियो में महिला ने कहा- “हम अपने घरों से बाहर जा रहे, बच्चे स्कूल जा रहे, लोग बैंक जा रहे, 10 लोग जो संसद में बैठ कर बात कर रहे क्या उन्हें कोरोना संक्रमण नहीं हो सकता? ये केवल एक बहाना है अमित शाह या केजरीवाल का जिससे हमारा प्रोटेस्ट खत्म किया जा सके।”

उल्लेखनीय है कि इस महामारी के कारण दिल्ली में सारे शॉपिंग माल्स, सिनेमा हॉल्स तथा सभी गैर जरूरी सार्वजनिक स्थानों को बंद कर दिया गया है। केंद्र तथा राज्य सरकारों ने भीड़-भाड़ वाले इलाकों से दूरी बनाने और सामाजिक मेल-जोल को कमतर करने की अपील की हैं। हालाँकि सरकारी नियम कानून की धज्जियाँ उड़ा रहीं शाहीन बाग़ की महिलाओं के लिए शायद उतना ही कम नहीं था, जो अब उन्हें कोरोना वायरस में भी साजिश नजर आने लगी है।

इससे पहले भी शहीन बाग़ की प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कोरोना के चलते अपने धरना प्रदर्शन को बंद करने से मना किया था। कुछ दिन पहले एक टीवी चैनल से बातचीत में महिला प्रदर्शनकारी ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि मोदी सरकार उनसे डरती है और शाहीन बाग में सभाओं को प्रतिबंधित करने के लिए सरकार का हालिया निर्देश उनके द्वारा जारी आंदोलन को कमजोर करने की ही एक चाल है।

दरअसल, हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 1897 में महामारी रोग अधिनियम लागू किया था और अत्यधिक संक्रामक रोग के प्रसार को सीमित करने के लिए प्रतिबंधों का एक नया सेट घोषित किया था। इसके बाद मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने फैसला किया कि कम लोग ही धरने पर रहेंगे, लेकिन न तो धरने को समाप्त करेंगे और न ही घरना स्थल को खाली करेंगे।

केजरीवाल सरकार की अपील के बाद भी शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों का सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। एक ओर चीन के वुहान शहर से तेजी से फैली महामारी ने दुनियाँ को बंद कर दिया है। तो वहीं, दूसरी ओर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी धरना स्थल पर कुरान पढ़ रहे हैं, यह मानते हुए कि अल्लाह उन्हें कोरोना के संकट से बचाएगा।

प्राइम टाइम स्क्रिप्ट: जनता कर्फ्यू आपातकाल की टेस्टिंग, थाली बजाना गरीबों को बेइज्जत करने की मुहिम

नमस्कार, मैं कौन हूँ, आप जानते ही हैं, नहीं भी बताऊँगा तब भी समझ में आ ही जाना है, तो फिर क्या बोलना। हें हें हें… और मैं कोई भारत का प्रधानमंत्री तो हूँ नहीं जो थाली और गिलास बजवाने के चक्कर में 29 मिनट बोल जाता है!

आठ बजे बड़ा ही रोमांचक समय है (और रोमेंटिक भी जिनकी महबूबाएँ हैं, हमारा क्या हम तो सिंगल हैं)। यूँ तो ऐतिहासिक रूप से अगर देखा जाए तो कमरे में ही कैमरा लगवा कर रात-बेरात हमारे प्राइम टाइम पर मुँह उठा कर चले आने वाले फैजान मुस्तफा कमाल पासा भी बताते हैं कि संविधान में तो आठ बजे भी वैसे ही बजता है जैसे नौ या ग्यारह, लेकिन मोदी जी के आने से आठ बजे का महत्व बढ़ जाता है।

जी, मैं नोटबंदी की बात कर रहा हूँ। उन्हीं नोटों के बंदी की जो कभी नेहरू जी की हुआ करती थी। लेकिन नेहरू की बनवाई चीजों से आज कल के कुछ विचारधाराओं को इतनी समस्या है कि कह दिया कि सारे नोट बंद कर दो। ध्यान रहे कि अगर नेहरू न होते, न नोट होता, न अर्थव्यवस्था होती, न ये देश होता, न ये स्टूडियो, न मोदी, न भाजपा… आखिर जो भी है, वो नेहरू जी का ही तो है… IIT, IIM, प्राइमरी स्कूल, मिडिल स्कूल, भारत रत्न, एडविना… सब नेहरू की थी, हैं और रहेंगी। इस तथ्य को कोई मोदी नहीं झुठला सकते, न ही उनके आईटी सेल का अजीत भारती।

खैर, 29 मिनट कल रात आठ बजे से प्रधानमंत्री ने सिर्फ डींगे हाँकी है। नहीं, आप ही बताइए कि क्या प्रधानमंत्री के बोलने से कोरोना मर जाएगा? तब तो हर देश के प्रधानमंत्री को माइक ले कर, स्क्रिप्ट पढ़ कर संबोधन दे देना चाहिए, कोरोना मर जाएगा। जबकि हमारे फैजान मुस्तफा बताते हैं कि भारतीय दंड विधान और संविधान में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि भाषण देने से कोरोना मर जाता है।

सॉल्टन्यूज सेक्सी सैंया चेक वाले जुब्बू रंगरसिया ने भी पंचर की दुकान पर बारह वोल्ट वाले बैटरी के डब्बे में पानी भरने के बाद, ट्यूब को डुबा कर बुलबुला चेक करते हुए किसी के बिना पूछे ही बताया कि भाषण देने से कोरोना नहीं मरता। लेकिन आप नहीं मानेंगे क्योंकि आपको मजहब पर बात करनी है, आपको ये चेक करना है कि अरे शुक्रवार की नमाज में कितने टोपीवाले जमा हुए!

इसीलिए कहता हूँ कि टीवी देखना बंद कर दीजिए। आपको कोई यह नहीं बताएगा कि योगी जी रामनवमी का मेला करवा रहे हैं… लीजिए बताया जा रहा है कि दो बार इस बात का खंडन हो चुका है, आज भी कहा गया कि मेला नहीं होगा। लेकिन मुझे तो नहीं बताया न? फिर मैं कैसे मान लूँ? मेरा तो काम है सवाल पूछना। सवाल तो यही है कि नमाज पर सवाल करने वाले रामनवमी पर चुप कैसे हैं?

बल्लीमाराँ से बल्ली खरीदने गया था, उधर एक ठेले पर कोई बाँस बेच रहा था। दूर से लगा आईटी सेल का आदमी होगा क्योंकि उसके घड़ी की चेन भगवा रंग की थी। मैं गया ही नहीं और वैसे भी बाँस खरीदने से कोरोना का क्या मतलब!

खैर, मोदी जी के 29 मिनट में काम का एक भी मिनट नहीं था। आप ये सोचिए कि ऐसे संबोधनों के कारण देश 29 मिनट के लिए ठहर जाता है। किसी फल वाले के ठेले से कोई सामान खरीदता उतनी देर, लेकिन वो टीवी देखने लगता है। किसी फुटपाथ पर बैठे गरीब की सब्जी कोई खरीदता उस समय, लेकिन खरीदने वाला तो मोदी जी को देख रहा है। लगातार गिरती अर्थ व्यवस्था को एक तय तरीके से बर्बाद करके, उस गरीब को इतना गरीब बनाने की यह मुहिम है कि उसे NRC से बाहर कर दिया जाए।

फैजान मुस्तफा बताते हैं कि गरीबों के पास कागज नहीं होते। पैसे ले-दे कर मान लीजिए वो कागज बनवा भी लेगा, तो जब वो कमाने वाला है, तभी इस तरह के संबोधन कर देना, लोकल इकॉनमी को तबाह करना ही है। उन्होंने आगे बताया कि संविधान में आठ बजे संबोधन के बारे में न तो नेहरू जी ने कुछ कहा, न ही अंबेदकर जी ने। हमने सॉल्ट न्यूज के गंजे लौंडे को खोजने को कहा, तो उन्होंने भी कहा कि फैजान भाई सच बोल रहे हैं।

अब बात करेंगे थाली, ग्लास और ताली की। जैसा कि समाजशास्त्री विशाल बदनामी ने सवाल उठाया है कि देश में कितने लोगों के घरों में बालकनी है, ये सवाल अच्छा है। लोकतंत्र में सवाल करना जरूरी है चाहे वो जो भी हों। जैसे कि गाँव-घर में लोग पूछते हैं, ‘खैनी है क्या जी?’, या मुझसे कई बार मैथिल झा जी सब पूछते हैं कि ‘की यौ, भाँग खाइक प्राइम टाइम करै छी की अहाँ?’ मैं बुरा नहीं मानता क्योंकि सवाल नहीं तो लोकतंत्र नहीं।

अब आप बताइए कि किसी को भूख लगी हो, उसके घर में एक ही थाली हो, जिसे बार-बार धो कर लोग खाते हों, उसी वक्त बगल के घर वाला थाली बजाने लगे, तब क्या होगा? खास कर के गरीब और अल्पसंख्यक लोगों के घर में थाली-गिलास की कमी होती है। आपने कह दिया कि थाली बजाना है, उधर आईटी सेल वाला अजीत भारती ट्वीट कर दिया जिसमें श्री सर्केश्वर उर्फ सर्किट जी कह रहे हैं कि ‘भाई ने बोला करना है, मतलब करना है’, फिर तो अल्पसंख्यक डर कर थाली बजाएगा ही।

नहीं बजाएगा तो कल को बहुसंख्यक जनता या फिर सरकार ही कोई अध्यादेश ले आएगी जिसमें उनकी तस्वीरें चौराहों पर लग जाएगी कि ये आदमी शाम को थाली नहीं बजा रहा था। अध्यादेशों से ही तो सब चल रहा है आज कल। ये निजता का हनन है। बड़े लोग बड़ी थाली निकालेंगे। गरीब टिन या अलमूनियम की थाली निकालेगा, जिसमें वो एक ग्लास जोर से मार दे तो वो मुड़ जाएगा, अमीर स्टील की थाली निकालेगा, उससे ज्यादा अमीर चाँदी की… ये क्या विभाजनकारी बात नहीं है?

दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्राध्यापक एवम् मारवल कॉमिक यूनिवर्स, रोहित शेट्टी कॉप यूनिवर्स से ले कर मल्टीवर्स तक के हर मामलों के जानकार संपूरवानंद ने बताया कि यह अमानवीय और खतरनाक है। इससे गरीबों में हीन भावना भरेगी और वो इस फिराक में लगा रहेगा कि कैसे वो स्टील की थाली पा जाए… आप सोचिए कि जिस आदमी के लिए चावल-गेहूँ जुटाना मुश्किल है, वो अब स्टील की थाली के लिए पागल हो रहा है। प्रधानमंत्री इस समाज को किस दिशा में ले जाना चाह रहे हैं? घरों में लड़ाइयाँ होंगी, पति-पत्नी उलझेंगे कि भोजन जरूरी है या थाली… ये अंतहीन समस्या है!

जनता कर्फ्यू

अब बात जनता कर्फ्यू की। आपने ध्यान दिया कि यहाँ कोई और शब्द इस्तेमाल हो सकता था। लेकिन कर्फ्यू कहा गया। फासीवादियों को काफी प्रिय है ये शब्द। अगर आप जर्मनी के फलाँ संग्रहालय के नाज़ी दौर की किताबों वाले हिस्से में जाएँगे और महसूस करेंगे उन पन्नों को तो आपको पता चलेगा कर्फ्यू क्या होता है। यहाँ तो अब पीएम ही इन शब्दों को खेल-खेल में इस्तेमाल कर रहे हैं।

आपको लगता होगा आपातकाल क्या होता होगा जो मैं सोते-जागते बोलता रहता हूँ। यही है आपातकाल जब बड़े-बड़े, भयावह शब्दों को प्रोपेंगेंडा मशीनरी के इस्तेमाल से कूल बना दिया जाए, आईटी सेल के पेड बेरोजगार युवाओं की भीड़ से उसे दुनिया का नंबर एक ट्रेंड बना दिया जाता है। और आप भूल जाते हैं कि कर्फ्यू में तो मौलिक अधिकारों को सस्पेंड कर दिया जाता है। यूँ तो इस पर फैजान साहब बोलते तो बेहतर रहता लेकिन हमने डेढ़ किलो नकली से पूछा तो उन्होंने बताया कि लोगों को घरों में बंद कर देना, कोलोनियल कानून है।

जब मन में आया कहा घर से बाहर मत निकलो। अब देखिए कि मोदी जी का क्या है, घर में ही बगीचा है, टहल लेंगे। असली समस्या तो उन लोगों को होने वाली है जिनके पास पालतू जानवर हैं। उस कुत्ते को कौन समझाए कि भाई जनता कर्फ्यू है क्योंकि वो समझ भी गया तो पूछेगा पलट के कि कुत्ता कर्फ्यू तो है नहीं, उसे क्या! बात भी सही है कि उसने तो वोट भी नहीं दिया था, मोदी तो 27 करोड़ लोगों के ही प्रधानमंत्री हैं, उतने लोगों का ही वोट मिला था।

चलिए गायों को भी मान लेते हैं कि दिया होगा मोदी जी को वोट… एक बार भूरे और लाल के शेड वाले कुत्तों का भी मान लेते हैं कि वो सॉफ्ट और हार्ड शेड्स ऑफ सैफ्रन हैं, लेकिन काले कुत्तों का क्या? सफेद कुत्तों का क्या? काले और सफेद कुत्तों का क्या? वो क्यों मानें इस कर्फ्यू को? बताइए आप इन लोगों को कि वो उन्हें किसका संबोधन दिखाएँ कि चौदह घंटे का कर्फ्यू लगा है।

कुत्तों से आगे बढ़ते हुए चुनाल चामरा की बात करते हैं जिनके पास मोदी की आलोचना का बहुत बड़ा सर्टिफिकेट है। उन्होंने इस मामले पर कहा कि फक शिट, शिट फक, फक फक, शिट शिट! आप सोचिए कि एक नवयुवक जो पहले से ही मालनरिश्ड है, वो अब ऐसे सदमे में चला गया है कि वो सिर्फ कोड वर्ड में बात कर रहा है! इस युवक के रोजगार पर पहले ही हमला हो चुका है।

मेरे दुकानदार गुरुजी राजदीप सरदेसाई जी ने कल एक रोचक सवाल पूछा। संघी लोग बच कर निकल लेंगे। लेकिन मैं सवाल पूछता रहूँगा। उन्होंने पूछा कि ये जो कर्फ्यू होगा उसमें पुलिस क्या उनके घरों के बाहर होगी? राजदीप को मैं काफी समय से जानता हूँ, वो जो भी बोलते हैं बहुत सोच समझ कर बोलते हैं। जैसे कि एक बार उन्होंने कहा था कि संसद पर जब आतंकी हमला हुआ था तो उनकी आँखें चमक गई थीं क्योंकि वो तो गिद्ध हैं, ऐसे मौकों के इंतजार में रहते हैं।

अब आप मुझे बताइए कि एक मँजा हुआ पत्रकार, आखिर जब यह पूछने लगता है कि उसके घर के बाहर पुलिस भी होगी, तो आपको सोचना चाहिए कि कहीं आपके घरों के आगे सेना तो नहीं लगा दी जाएगी? आप तो छोटे लोग हैं, चलिए मैं थोड़ा बड़ा हूँ, मैं तो बच जाऊँगा, लेकिन सेना आ गई आपके घर तो? और सेना क्या पैदल आएगी? वो तो राफेल पर आएगी, टैंक ले कर आएगी, मिसाइल से लैस हो कर आएगी… और हाँ, अगर आप अल्पसंख्यक हैं, तब तो कपड़ों से आपकी पहचान होगी और आगे का आपको पता ही है!

तो हम क्या करें ऐसे बुरे दौर में?

अब सवाल उठता है कि हम इस खतरनाक दौर में क्या कर सकते हैं। हमें एकजुट होना ही होगा। हमें शाहीन बाग की तर्ज पर जगह-जगह इकट्ठा होना होगा और इस दमनकारी शासन की तानाशाही नीतियों के विरोध में आवाज बुलंद करनी ही होगी। आपने देखा होगा कि कैसे डीडी न्यूज के होते हुए भी सारे चैनलों ने न सिर्फ आधा घंटा लाइव दिखाया वो भाषण, बल्कि अगले दिन के आठ बजे तक उसी पर चर्चा भी करते रहे।

नहीं करेंगे, तो ऊपर से फोन आ जाएगा कि आपके यहाँ तो तीन ही बार दिखाया गया, आपके यहाँ तो स्पेशल बनाया ही नहीं। फिर आपको विज्ञापन नहीं मिलेंगे, और आपका धंधा चौपट हो जाएगा। यहाँ कुछ भी सीधे तरीके से नहीं होता, सब पीछे से चलता है। लेकिन इस सबसे ऊपर जनता है जिसे मैं कहता हूँ कि टीवी मत देखो, वो कहती है सर, हम तो बस आपके लिए देखते हैं। मैं कहता हूँ टीवी फेंक दो, वो कहते हैं हैशटैग, सर आपसे ही उम्मीद है।

व्हाट्सएप्प बंद कर लेता हूँ, मैंसेंजर पर मैसेज आते हैं। प्राइम टाइम करता रहता हूँ, तो कई कहता है कि देखिए सर आईटी सेल वाले आपको गाली देने पर तुल गए हैं। झबरा से कह कर हिट जॉब करवाता हूँ, लेकिन अजीत भारती मेरे ऊपर स्पेशल प्रोग्राम करना नहीं छोड़ता। मैंने सोचा लिखना ही कम कर देता हूँ, वो अब एक सप्ताह तक इंतजार करता है कि एक ही दिन बैठ कर प्रोग्राम बनाएगा!

इस स्थिति में वामपंथी, लिब्रांडू समूह में ही मेरी आस्था बची है। न्यूजलौंडी वाले झबरे ने मुझे बताया कि वो लोग एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाने वाले हैं जिसमें इस तानाशाही के खिलाफ योजना बनाई जाएगी कि किसे क्या करना है। मैं आपको बताने जा रहा हूँ कि आपको क्या करना है, कैसे करना है। सब ध्यान से सुनिए, और लोगों तक पहुँचाइए।

पहली बात तो यही है कि हमारा संविधान कहता है कि हमें सरकार के खिलाफ होना चाहिए, हमेशा। हर स्थिति में। सरकार जो बोले, उसका उल्टा करो, तभी लोकतंत्र समृद्ध होता है। आज जब बोला जा रहा है कि घर में रहो, तो मैं कहता हूँ आप सड़कों पर आइए, नाचिए, झूमिए, कंधे पर रेडियो ले कर आइए। कोई कहे कि थाली बजाओ, तो आप केले के पत्ते पहन कर बाहर आइए और पुरुष स्वच्छंदता के ब्रांड अंबेसडर बनिए। हाँ, ये ध्यान रहे कि आस पास किसी की बकरी न खुली हो, दिक्कत हो जाएगी। हें हें हें…

एक झा जी मेरे गहरे मित्र हैं, उन्होंने बड़ी गूढ़ बात कह दी है कि ये चौदह घंटों का आपातकाल टेस्टिंग है। अगर मोदी ने ये देख लिया कि ये सफल हो गया है, तो वो आपको कोरोना के नाम पर पूरे दिन घर में रहने बोलेगा, फिर पूरे सप्ताह, फिर पूरे महीने, फिर पूरे साल… ऐसा करते हुए वो आपको लगातार डराएगा कि बाहर में वायरस है। आप डरे रहेंगे, बाहर नहीं निकलेंगे।

उधर पता चलेगा कि चुनाव पर चुनाव हो रहे हैं, संविधान में संशोधन कर दिया गया और अगली बार के तीन आम चुनाव मोदी ने आपको घर में बंद कर के संघियों से वोट करवा कर पूर्ण बहुमत से जीत लिया। आप बाहर निकलेंगे तो बालमुकुंद पुतिन और जिनपिंग झा की तर्ज पर मोदी जी अगले बीस सालों तक के लिए प्रधानमंत्री सुनिश्चित हो चुके होंगे।

फिर पता चलेगा संविधान बदल दिया गया है। चूँकि, संसद में इन्हीं के लोग हैं, और अब तो जज भी राज्यसभा पहुँच रहे हैं (हें हें हें), तो सुप्रीम कोर्ट भी मुट्ठी में। फिर कहा जाएगा कि यहाँ सिर्फ अमीर लोग रहेंगे। एक दिन घोषणा होगी कि यहाँ सिर्फ वही लोग रहेंगे जो मंगल और गुरुवार को मुर्गा नहीं खाते, बल्कि बारह बजने का इंतजार करते हैं, तब तक तरी खाते रहते हैं।

आपके पैरों तले की जमीन किसी आईटीसेल वाले के नाम हो जाएगी जो मेरे प्रोग्राम के समय, जब आप फोन साइलेंट में करके मुझे देखते हैं, तब वो ‘हैशटैग रबिश कुमार’ ट्रेंड कराता है। फिर आपसे कागज माँगा जाएगा। आप कहेंगे आपके पास तो कागज है। लेकिन आपको ये हवा भी नहीं लगेगी कि जब तक आप जनता कर्फ्यू खेल रहे थे, यहाँ बता दिया गया कि सिर्फ आईटी सेल वाले लोगों की दस्तखत वाले कागज ही चलेंगे।

देख रहे हैं आप ये खेल? कैसे ‘गोली मारो’ कहने वालों को ये सरकार आपकी जमीन देने जा रही है? आप तब नहीं समझे थे जब मैंने कहा था कि सड़कों पर आओ और शाहीन बाग वाली बुजुर्ग आसमाँ के साथ खड़े हो जाओ। आपने सोचा था कि आपके पास तो कागज है, आपको क्या डर! अब कागज बदल दिया गया, अब वो आपके लिए आ रहे हैं।

झा जी ने इसीलिए प्रगतिशील चमन जी लोगों से कहा कि जनता कर्फ्यू नरेंद्र मोदी की गहरी चाल है। इस बहाने मोदी देश में इमरजेंसी लागू करना चाहते हैं। अगर यह सफल रहा तो देश में आपातकाल लागू कर दिया जाएगा। सभी सेकुलर प्रगतिशील चमन जी को इसका विरोध करना चाहिए। चमन जी एक दूसरे के साथ लिप लॉक करें और एक दूसरे के मुँह का लार अपने मुँह में लें।

बात समझिए, वरना देर हो चुकी होगी। और आपके कानों में जब-जब ‘देर न हो जाए, कहीं देर ना हो जाए, आ जा रे, आ जा मेरा मन घबराए, देर न हो जाए, कहीं देर न हो जाए’ गीत सुनाई देगा तो आप जो आँसू रोएँगे उसका नमक मोदी की संदूक में होगा, और पानी आप पी नहीं पाएँगे।

टीवी देखना बंद कीजिए, हजार बार कहा है। कल मेरी बात मान लेते तो आज ये दिन न देखना पड़ता। चलता हूँ, चलते रहिए, बाकी जे है से त हइए है… ऐ जी, ऊ नया वाला भोजपुरी गाना लगा दो ‘कॉल करें क्या, कॉले न की हो’… हैं? चलिए रहा है अभी तक? रिकॉर्ड हो रहा है क्या? ले लोटा! नमस्कार पर काटते हो? हद है यार… नमस्कार!

नोट: वामपंथी मगजमारी और बकलोल लोगों के लिए बोल्ड अक्षरों में बताया जाता है कि ये कटाक्ष है! न्यूजलॉन्ड्री के अभिनंदन सेखरी के लिए विशेष रूप से बताया जाता है कि हमने रवीश कुमार से फोन पर बात कर के कुछ भी कन्फर्म नहीं किया है। (पाठकों, ये आदमी ढहलेल है, इसलिए लिखना पड़ता है। कहा-सुना माफ करें।)

तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने निर्भया को मिले न्याय को बताया- बदले की कार्रवाई, एमनेस्टी इंडिया ने कहा- ‘काला दाग’

दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को एक 23 वर्षीय फिजियोथैरेपी की छात्रा निर्भया के साथ हुए सामूहिक बलात्कार एवं हत्या के मामले के चारों दोषियों को शुक्रवार (मार्च 20, 2020) की सुबह साढ़े पाँच बजे फाँसी दे दी गई। इसके साथ ही देश को झकझोर देने वाले, यौन उत्पीड़न के इस भयानक अध्याय का अंत हो गया। दोषी मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह तिहाड़ जेल में फाँसी के फंदे पर लटकाए जाने के बाद चहुँओर न्याय की जीत के जयकारे लग रहे हैं। 

How supposed human rights activists claimed, "moral high ground" to denounce justice to Nirbhaya by classifying it as an act of revenge?
ट्वीट का स्क्रीनशॉट

वहीं कुछ स्वघोषित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने दोषियों को मिली मौत की सजा को बदले की कार्रवाई बताया। ऐसे ही जयंत भट्टाचार्य ने निर्भया की माँ आशा देवी पर अपनी बेटी के लिए न्याय माँगने के लिए ‘गंदी मानसिकता’ और ‘खून की लालसा’ रखने का आरोप लगाया।

एक अन्य ट्विटर यूजर प्रकाश शास्त्री ने कहा कि कोई बलात्कारियों को फाँसी की सजा नहीं दे सकता। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अगर मृत्युदंड देना बंद नहीं किया जाता है, तो भारत एक ‘प्रतिगामी समाज’ बन जाएगा। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि निर्भया मामले में दोषियों को फाँसी देने से उन्हें यह कहने में खुशी नहीं होगी कि न्याय दिया गया है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का छात्र होने का दावा करने वाले मोहम्मद मोजाहिद के नाम से एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि मृत्युदंड ‘पलायनवाद’ और ‘हिंसा की संस्कृति’ का संकेत है।

जस्टिस वर्मा कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, एमनेस्टी इंडिया, जो चुनिंदा आक्रोश और फेक प्रोपेगेंडा के लिए प्रसिद्ध है, ने दावा किया कि मौत की सजा कभी भी समाधान नहीं हो सकती और शुक्रवार के फाँसी की सजा से कथित तौर पर भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड में ‘एक और काला दाग’ लगा है।

गुरुवार (मार्च 19, 2020) को कारवाँ मैगजीन, जो कि अपनी पतित प्रोपेगेंडा के लिए जाना जाता है, ने अपनी लेख में दोषी मुकेश सिंह के लिए सहानुभूति दिखाया था, जबकि असली पीड़िता निर्भया के लिए उसकी लेख में कोई सहानुभूति नहीं थी।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के विवादित जज (रिटायर) कुरियन जोसेफ ने पूछा था कि अगर बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के दोषियों को फाँसी दी जाती है तो क्या ये बंद हो जाएगा? उन्होंने कहा कि मृत्युदंड जैसी सजा दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों में दिया जाना चाहिए। यानी कि इनके हिसाब से क्रूर गैंगरेप और हत्या दुर्लभ मामला नहीं है। 

बता दें कि दुष्कर्म के मामले में आखिरी फॉंसी 14 अगस्त 2004 को धनंजय चटर्जी को अलीपुर सेंट्रल जेल में दी गई थी। वह कोलकाता में 14 साल की छात्रा से दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने का दोषी था। इसके बाद 3 आतंकियों अफजल गुरु, अजमल कसाब और याकूब मेनन को सूली पर लटकाया गया था।

अगर हम भारत में मिले मृत्युदंड की संख्या का दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र यानी संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ तुलना करें तो जानकर आश्चर्य होगा कि सिर्फ 2019 में ही वहाँ पर 22 लोगों को फाँसी की सजा दी गई। इसके मुकाबले भारत काफी सावधानी पूर्वक मृत्युदंड के सजा का इस्तेमाल करता है। 

हालाँकि, निर्भया के दोषियों के वकील ने अंत तक अपनी कोशिशें जारी रखी। इस कोशिश में पहले हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट में इस फाँसी को टालने की कोशिश की लेकिन वो काम नहीं आई। गुनहगारों को बचाने के लिए उनके वकीलों ने हर दॉंव आजमाया। यहॉं तक कि 19 मार्च की रात भी फॉंसी टालने की हरसंभव कोशिशें हुई।

निर्भया की माँ आशा देवी ने 7 वर्षों तक यह लंबी लड़ाई लड़ी, जो कि आखिरकार दोषियों की फाँसी के साथ समाप्त हुई। इसके साथ ही शुक्रवार की सुबह दोषियों की फाँसी ने समाज को एक कठोर संदेश भी दिया कि इस तरह के अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कोरोना पॉजिटिव कनिका कपूर के साथ पार्टी में मौजूद थीं वसुंधरा राजे और बेटे दुष्यंत, ट्वीट कर दी-आइसोलेट होने की जानकारी

बॉलीवुड के मशहूर गाने ‘बेबी डॉल’ को गाने वाली कनिका कपूर आज कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गईं। इस बात की पुष्टि खुद उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर की। उनके खुलासे के साथ ही हर जगह हलचल मच गई। थोड़ी देर में मालूम चला कि वे 15 मार्च को लंदन से लौटीं थी और उन्होंने लखनऊ में पार्टी में शिरकत की थी। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी की नेता और राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी इस पार्टी में शामिल हुई। उनके साथ उनके बेटे दुष्यंत भी इसका हिस्सा बने। साथ ही पार्टी के कुछ अन्य नेताओं ने भी कनिका से मुलाकात की। अब ऐसे में ये खबर आने के बाद वसुंधरा राजे ने इस बात का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कनिका के कोरोना वॉयरस पॉजिटिव होने की खबर जानने के बाद उन्होंने और उनके बेटे ने खुद को आइसोलेट कर लिया है।

वसुंधरा राजे ने इस मामले में ट्वीट करते हुए लिखा,“लखनऊ में रहते हुए मैंने अपने बेटे दुष्यंत और उसके ससुराल वालों के साथ रात्रि भोज में भाग लिया था। कनिका जो दुर्भाग्यवश पॉजिटिव आई हैं, वह भी वहाँ एक अतिथि थी। सावधानी के लिए मेरे बेटे और मैंने तुरंत खुद को क्वारंटाइन किया है। हम सभी आवश्यक सावधानी बरत रहे हैं।”

यहाँ बता दें, कि कहा जा रहा है इस पार्टी में शिरकत करने के बाद दुष्यंत सिंह लगातार लोकसभा में भी उपस्थित रहे। वहीं उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राजस्थान व उत्तरप्रदेश के सांसदों के साथ राष्ट्रपति भवन में आयोजित बैठक में भी हिस्सा लिया था। इसलिए अब फिलहाल कनिका के संपर्क में आए सभी लोगों की जाँच की जाएगी और संदिग्धों का भी चेक अप होगा। बताया जा रहा है लखनऊ में रहने के दौरान पार्टियों में कनिका की कुल 500 लोगों से मुलाकात हुई। इसमें कई बड़े अफसर और नेता भी शामिल थे। पुलिस अब सभी लोगों की लिस्ट तैयार कर रही है। इन सभी लोगों की जाँच कराई जाएगी।

यहाँ बता दें, कनिका कपूर ने आज अपने ऑफिसियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर खुद के संक्रमित होने की जानकारी देते हुए लिखा, “सभी को नमस्कार, पिछले 4 दिनों से मुझे फ्लू के लक्षण थे, मैंने खुद की जाँच कराई और यह Covid 19 पॉजिटिव आया। अब मेरा परिवार और मैं अभी पूरी तरह से आइसोलेशन में हैं और आगे बढ़ने के तरीके के बारे में चिकित्सा सलाह का पालन कर रहे हैं। जिन लोगों के साथ मैंने संपर्क किया है, उनके बारे में भी जानकारी ली जा रही है। मुझे हवाई अड्डे पर सामान्य प्रक्रिया के अनुसार 10 दिन पहले स्कैन किया गया था जब मैं घर वापस आई, तो लक्षण 4 दिन पहले विकसित हुए हैं। इस स्तर पर मैं आप सभी से आग्रह करना चाहूँगी कि यदि आपके पास संकेत हैं तो अलग हो जाएँ और परीक्षण करवाएँ। मैं अब एक सामान्य फ्लू और हल्के बुखार की तरह ठीक महसूस कर रही हूँ, हालाँकि हमें इस समय समझदार नागरिक होने की जरूरत है।”

ईरान में भारत ने पहुँचाई अपनों को मदद: अब तक लाए जा चुके 590 लोग, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की हुई व्यवस्था

भारत सरकार लगातार दूसरे देशों में फँसे अपने देश के नागरिकों को बचाने और उनकी मदद करने के लिए प्रयासरत है। इस समय सरकार की ओर से कई कदम उठाए जा रहे हैं जिनकी तारीफ पूरा विश्व कर रहा है। अभी ताजा जानकारी के अनुसार यदि बताएँ तो ईरान में रह रहे भारतीयों के लिए सरकार आगे आई है और ईरान के बन्दर अब्बास में मौजूद तमिलनाडु, गुजरात और केरल के 1000 भारतीय मछुआरों को आवश्यक सामानों की आपूर्ति शुरू कर दी है। इस खबर की जानकारी खुद ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने दी है।

कुछ दिन पहले बता दें, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया था कि इस समय वे बहुत ही विपरीत परिस्थितियों में काम कर रहे हैं कई देशों में आने-जाने पर प्रतिबंध है, जबकि कई देशों में खाने पीने की वस्तुओं का इंतजाम करना भी मुश्किल हो रहा है। इन सब के बावजूद उनके राजदूत व मिशन लगातार प्रभावित भारतीयों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं और उन्हें चिकित्सा के अलावा दूसरी सुविधाएँ भी देने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा था कि ईरान और इटली की स्थिति सबसे गंभीर है और इन देशों में फँसे नागरिकों को हम हरसंभव मदद कर रहे हैं।

उस समय विदेश मंत्रालय में कोरोना मामले पर नियुक्त अतिरिक्त सचिव दम्मू रवि ने बताया था कि ईरान के दूर दराज स्थित किश द्वीप भारतीय मछुआरों तक राशन पानी पहुँचाने के लिए एक स्थानीय आपूर्तिकर्ता से संपर्क किया गया है और उसने आपूर्ति भी शुरू कर दी है। साथ ही ईरान में जिन भारतीय के वायरस से प्रभावित होने की सूचना मिली थी, उन्हें भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की व्यवस्था हो गई है। वायरस का प्रभाव खत्म होने के बाद इन्हें स्वदेश लाया जाएगा।  गौरतलब है कि गुरुवार को हुई विदेश मंत्रालय की कॉन्फ्रेंस में धम्मू रवि ने यह भी बताया था कि उन्होंने अब तक ईरान से 590 लोगों को निकाला है, जहाँ की स्थिति बहुत गंभीर है।