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दिल्ली का एक कोरोना मरीज, उसका CAA-विरोधी कनेक्शन और… 500 से ज्यादा लोगों पर संक्रमण का खतरा!

दिल्ली में कोरोना वायरस के फैलते प्रभाव को देखकर हर कोई हैरान है। धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजधानी में इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है। अब ऐसे में जब सरकार हर जरूरी प्रयास करके जनता को जागरूक करने का काम कर रही है, उन्हें कोरोंटाइन कर रही है, तब ये सवाल उठता है कि आखिर कैसे ये संक्रमण दिल्ली में बढ़ा? तो इस सवाल के जवाब को जानने के लिए हमें दिल्ली में कोरोना के 10वें मामले पर गौर करने की जरूरत है, जिसने सऊदी अरब से लौटकर लापरवाही दिखाई और यहाँ कई लोगों को संदिग्धों की कतार में खड़ा कर दिया। 

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली में अब तक 30 मामले सामने आए हैं जिनमें से 5 का संबंध इस महिला से है। महिला द्वारा दिखाई लापरवाही के कारण संक्रमित हुए लोगों में महिला की दो बेटियाँ, उसका भाई, माँ और एक डॉक्टर शामिल है। 

जानकारी के मुताबिक, महिला के घरवालों के अलावा जिस डॉक्टर ने उसके बीमार होने पर उसका चेकअप किया, वो दिल्ली का 30वाँ कोरोना से संक्रमित मरीज बनकर सामने आया है। अब डॉक्टर के संक्रमित होने के बाद उनकी पत्नी और बेटी में भी संक्रमण के लक्षण नजर आए हैं, जिसके मद्देनजर उनका टेस्ट कर लिया गया है, अभी उनकी रिपोर्ट्स आना बाकी हैं।

जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के खुलासे के मुताबिक, महिला के आस-पड़ोस में रहने वाले कुल 74 लोगों को देखरेख में रखा गया है। उनके अनुसार जब महिला को ये संक्रमण पॉजिटिव आया तो उन्होंने उनके परिजनों से बात की और जानना चाहा कि 10 मार्च को महिला के दुबई से लौटने के बाद उसके और उसके परिवार के संपर्क में कौन-कौन आया। अब हालाँकि, मानवता के आधार पर इन सवालों का जवाब देना उन सबका कर्तव्य था लेकिन अधिकारियों के अनुसार, महिला के परिजनों ने इस पूछताछ में उनका बिलकुल भी सहयोग नहीं किया। जिस कारण उन्हें स्थानीय पुलिस की मदद लेकर जानकारी जुटानी पड़ी। अधिकारियों ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों से फुटेज लेकर उनका इस्तेमाल किया और कुछ लोगों की शिनाख्त की जिन्हें निगरानी पर रखा जाना था।

जानकारी के अनुसार, महिला का भाई और उसकी माँ दिल्ली के उत्तरपूर्वी इलाके जहाँगीरपुरी में रहते हैं। ये दोनों महिला के दुबई से लौटने के बाद उसके संपर्क में आए थे, जिसके कारण इन्हें निगरानी में रखा गया। ज्ञात हो कि दुबई से लौटी बहन से मिलने के बाद उसका संक्रमित भाई जहाँगीरपुरी के CAA विरोधी प्रदर्शनों में जाता था जो बाद में कोरोना पॉजिटिव पाया गया। अब उक्त महिला के भाई की वजह से करीब 400-450 लोगों के संक्रमित होने का डर बना हुआ है। इनके अलावा महिला के जीटीबी अस्पताल में भर्ती होने से पहले वो डॉक्टर भी उसके संपर्क में आया जो अब प्रदेश का 30वाँ मामला बना है।

अब, इस खुलासे के बाद अधिकारियों की चिंता उन मरीजों के प्रति बनी हुई है, जिन्हें उस डॉक्टर ने मोहल्ला क्लिनिक में जाँचा, जो संक्रमित महिला के संपर्क में आने के कारण कोरोना वायरस से संक्रमित हुआ।

गौरतलब है कि ये पहला मामला नहीं है जहाँ किसी एक संक्रमित व्यक्ति की गलती के कारण किसी नगर में संक्रमण कम्यूनिटी के बीच फैलना शुरू हुआ हो। साउथ कोरिया की स्थिति यदि रखें तो पता चलेगा कि वहाँ की बिगड़ती हालत के लिए वहाँ का 31वाँ केस जिम्मेदार था। जिसके कारण 1000 से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आए और अब वहाँ 8,799 के करीब संक्रमित लोगों की संख्या पहुँचने वाली है।

दिल्ली: अधेड़ उम्र के शख्‍स ने मणिपुर की महिला पर थूका पान फिर कहा- Corona, पुलिस ने केस दर्ज शुरू की छानबीन

कोरोनावायरस के संक्रमण से बचने की जद्दोजहद के बीच देश की राजधानी दिल्‍ली में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। दरअसल, उत्तरी दिल्‍ली में एक शख्‍स ने मणिपुर की एक महिला पर पान थूका और फिर कोरोना (Corona) कहकर वहाँ से भाग गया। इसके बाद मणिपुर की महिला ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई।

विजयनगर थाने की पुलिस ने आरोपित शख्‍स के खिलाफ आईपीसी की धारा 509 के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक अधेड़ उम्र का आरोपित महिला पर थूक कर सफेद रंग की स्‍कूटी से मौके से भाग गया। बताया जा रहा है कि शख्स ने महिला के ऊपर इसलिए थूका, क्योंकि वह चाइनीज की तरह दिख रही थी। 

बता दें कि इन दिनों कोरोनावायरस के संक्रमण के खौफ चलते दिल्‍ली को लॉकडाउन कर दिया गया है। इस दौरान आवश्‍यक सेवाओं को छोड़कर सभी बंद रहेंगे। इसका उद्देश्‍य संक्रमण को तीसरे स्‍टेज में जाने से रोकना है। कोरोनावायरस के कारण जहाँ पूरा देश सहमा हुआ है, वहाँ इस तरह की हरकतें काफी शर्मनाक है। यह एक-साथ होने का समय है, बेवकूफों की तरह व्यवहार करने का नहीं।

कोरोना के बढ़ते कहर के बीच अब देश भर में राज्य सरकारें लॉकडाउन कर रही हैं। इसी क्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी खतरे को बढ़ता देख 23 से 31 मार्च तक के लिए राजधानी को लॉकडाउन करने का आदेश दिया है। अब इस अवधि में अनिवार्य और आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर सभी प्रतिष्ठान, निजी कार्यालय बंद रखे जाएँगे।

इसके साथ ही दिल्ली की सीमा भी सील कर दी गई हैं, जिसके चलते कोई भी ट्रक, बस या अन्य वाहन राजधानी में प्रवेश नहीं कर सकेगा। केवल अनिवार्य और आपातकालीन वस्तुओं को लाने वाले वाहनों को ही प्रवेश दिया जाएगा। रेलवे और मेट्रो की सेवाएँ भी इस दौरान पूरी तरह से बंद रहेंगी। इसके साथ ही कंस्ट्रक्‍शन के सभी कामों पर रोक लगा दी गई है। सभी धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे।

गौरतलब है कि कोरोनावायरस से भारत में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर कुल 415 पहुँच गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि रविवार को गुजरात, बिहार और महाराष्ट्र में कोरोना वायरस से मौत के एक-एक मामले सामने आए हैं। इससे पहले कर्नाटक, दिल्ली, महाराष्ट्र और पंजाब में एक-एक मौत हुई थी।

पटना की मस्जिद में छिपा रखे थे 12 विदेशी, कोरोना की जाँच के बिना घूम-घूम कर रहे थे अपने मजहब का प्रचार

बिहार की राजधानी पटना में स्थित एक मस्जिद में विदेशियों को छिपाने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, ये मामला राजधानी के भीड़भाड़ वाले इलाके कुर्जी का है। यहाँ गेट नं 74 के पास स्थित एक मस्जिद में कुछ विदेशी लोगों को छिपाकर रखा गया था। छिपे हुए विदेशी लोगों की संख्या 12 बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी सोमवार (16 मार्च) को पटना पहुँचे थे। मगर, पहले इस बारे में किसी को सूचना नहीं थी। लेकिन, खुलासा होते ही आसपास के मोहल्ले में ये खबर फैल गई और लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी फौरन इलाके में पहुँची और 12 विदेशियों को अपनी कस्टडी में ले लिया। पुलिस फिलहाल पूरे इलाके में छापेमारी कर रही है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों की मानें तो कुछ इन्हें तुर्की का बता रहे हैं, कुछ तुर्कमेनिस्तान का। इनकी कद-काठी देखते हुए चाइनीज उइगर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। फिलहाल पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है।

न्यूज 18 की खबर के अनुसार, स्थानीय लोगों का कहना था कि सरकार को इन विदेशियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए थी लेकिन कुछ लोगों की मदद से इन लोगों को धार्मिक स्थल की आड़ लेकर छिपाया गया। साथ ही इन लोगों ने अपनी मेडिकल जाँच भी नहीं करवाई। इन पर आरोप है कि धार्मिक स्थल में छिपकर ये लोग बिहार में घूम-घूमकर धर्म विशेष का प्रचार करते हैं।

अब हालाँकि, खबर के अनुसार, पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है और मालूम हुआ है कि ये सभी जनवरी में यहाँ आए थे और इनके पास से मिला वीजा, पासपोर्ट भी सही है। जिस कारण इन्हें केवल मेडिकल जाँच के लिए भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मेडिकल जाँच के बाद इन्हें छोड़ दिया जाएगा।

बार-बार नहाने से लेकर बाहर का न खाने तक: डॉक्टर से जानिए कोरोना वायरस से जुड़े उन 9 सवालों के जवाब जो आपके मन में हैं

कोरोना वायरस को लेकर तरह-तरह की बातें कही जा रही हैं। भारत में अब तक कोरोना के 410 मरीज सामने आ चुके हैं। इन सबके बीच एक सकारात्मक बात ये है कि फ़िलहाल इनमें से कोई भी इंटेंसिव केयर में नहीं डाला गया है। दुःखद ये है कि 8 लोगों को इस ख़तरनाक वायरस के कारण जान गँवानी पड़ी है। इन सबके बीच 24 लोग ठीक होकर घर भी जा चुके हैं। लेकिन, लोगों के बीच अफवाहों का बाज़ार भी गर्म है। ख़ासकर भारत जैसे बड़े देश में व्हाट्सप्प-फेसबुक वगैरह के माध्यम से कुछ ऐसी बातें फैलाई जा रही हैं, जिन्हें लेकर लोग शंकित हैं कि ये सच है या नहीं। यहाँ हम उन चीजों पर डॉक्टर क्या कहते हैं, ये बताएँगे।

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के ‘चीफ ऑफ इन्फेक्शस डिजीज’ फहीम यूनुस ने ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब दिया है। उन्होंने 10 ऐसे मिथकों की चर्चा की है जो लोगों के मन में बस गए हैं और साथ ही सच्चाई भी बताई है। यहाँ हम उन्हीं 9 मिथकों को डॉक्टर यूनुस के जवाब के साथ पेश कर रहे हैं।

  1. मिथक: कोई शिपिंग पैकेज न लें। गैस पम्प, शॉपिंग कार्ट अथवा एटीएम का इस्तेमाल न करें।
    सच्चाई: किसी भी चीज की सरफेस पर कोरोना वायरस का ज़िंदा रहना अलग बात है और उस सरफेस से आपके शरीर का संक्रमित हो जाना दूसरी बात है। बस अपना हाथ धोते रहें और अपनी ज़िंदगी जीते रहें।
  2. मिथक: आप बाहर से खाना मँगाते हैं। हो सकता है कि वो चाइनीज फ़ूड हो। इसे खाने या इसका लेन-देन करने से कोरोना वायरस के संक्रमण का ख़तरा है।
    सच्चाई: ये संक्रमण से सम्बंधित बीमारी है, फ्लू की तरह। ये साल्मोनेला वगैरह की तरह खाने-पीने की सामानों से फैलने वाला रोग नहीं है। अभी तक ऐसा कोई भी उदाहरण नहीं मिला है, जहाँ बाहर का खाना लेने से कोरोना वायरस का संक्रमण हुआ हो।
  3. मिथक: 20 मिनट तक सॉना (ड्राई बाथ) अथवा स्टीम-बाथ लेने से कोरोना का ख़तरा टल जाता है। इससे कोरोना सहित 90% वायरस मारे जाते हैं।
    सच्चाई: इस दावे की पुष्टि के लिए कोई वैज्ञानिक तथ्य मौजूद नहीं है। हाँ, ये जान लीजिए कि ऐसे नहाने से आपको न्यूमोनिया और फॉलिक्युलिटिस सहित अन्य बीमारियाँ होने का ख़तरा ज़रूर बढ़ जाता है।
  4. मिथक: अगर आपने सूँघने की क्षमता खो दी है तो आप कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं।
    सच्चाई: ऐसा बहुतों बार होता है कि किसी के सूँघने की क्षमता चली जाती है। कई अन्य वायरल इन्फेक्शन व एलर्जी के कारण भी ऐसा होता है। ज़रूरी नहीं है कि ये लक्षण तभी दिखे जब आपको कोरोना हुआ हो।
  5. मिथक: हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन या फिर एजिथ्रोमाइसिन का डोज लेने से कोरोना के संक्रमण का ख़तरा टल जाता है।
    सच्चाई: इन एक्सपेरिमेंटल ड्रग्स को कोरोना वायरस के कुछ ख़ास मरीजों पर ही इस्तेमाल किया जाता है। बिना डॉक्टर की सलाह के इसे लेना दिल से सम्बंधित स्वास्थ्य परेशानियों को जन्म दे सकता है।
  6. मिथक: अगर आप रूम में लहसुन, निम्बू, प्याज और गरम पानी का प्रयोग करते हैं तो कोरोना का ख़तरा ख़त्म हो जाता है।
    सच्चाई: ये एकदम से बनी-बनाई बात है। कोविड-19 के ख़िलाफ़ इनमें से किसी भी उपाय की मेडिकल रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मैसेज शेयर ही न करें। इससे लोगों के बीच संशय का माहौल बनता है।
  7. मिथक: अगर सरकार ने ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ घोषित कर दी है तो इसका मतलब है कि सभी लोग मरने वाले हैं।
    सच्चाई: ये एक लीगल प्रक्रिया है, पूरी तरह से मेडिकल प्रक्रिया नहीं। इससे प्रशासन को (अमेरिका में) को इमरजेंसी फंड का प्रयोग करने या कर्मचारियों का अधिक उपयोग करने में सहूलियत होती है।
  8. मिथक: बाहर से जब भी आएँ, अपने कपड़े बदल लें। नहाएँ। अगर ऐसा नहीं होता है तो हो सकता है कि आप बाहर से कोरोना वायरस लेकर घर के भीतर आ गए हों।
    सच्चाई: साफ़-सफाई ज़रूरी है लेकिन इसे लेकर साइको बनना ज़रूरी नहीं है। लोगों को डराएँ नहीं। सबसे ज़्यादा आवश्यक है सही तरीके से हाथ धोना। भीड़भाड़ से दूर रहें और लोगों से कम से कम 6 फ़ीट की दूरी बना कर रखें।
  9. मिथक: मुझे तो इटली और चीन के डॉक्टरों के व्हाट्सप्प वगैरह पर मैसेज मिले हैं। उनका विश्वास तो करना पड़ेगा न।
    सच्चाई: नहीं। सेंटर सोशल मीडिया पर ऐसी चीजें रिलीज नहीं करते। वो साइंस जर्नल्स में अपने रिसर्च प्रकाशित करते हैं। हालाँकि, अभी तक कई अच्छे रिसर्च इस सम्बन्ध में प्रकाशित हो चुके हैं। अफवाह न फैलाएँ।

ऊपर के सभी तथ्यों को बार-बार पढ़ें और अन्य लोगों को भी पढ़ाएँ क्योंकि ये एक ऐसे व्यक्ति की राय है जो लगातार इन चीजों पर रिसर्च कर रहे हैं और मरीजों की जाँच भी कर रहे हैं। ऐसे समय में व्हाट्सप्प पर आए किसी भी रैंडम मैसेज को फॉरवर्ड कर देना सही नहीं है। ‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ के व्हाट्सप्प नंबर ‘+41 798931892’ पर मैसेज कर के अन्य जानकारी ली जा सकती है। या फिर भारत सरकार के हेल्पलाइन नंबर ‘+91 9013151515’ पर मैसेज कर के ज़रूरी सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती है।

शाहीन बाग में खाली पड़ी कुर्सी-टेबल, घंटाघर में दिख रहे सिर्फ दुप्पटे-बैनर, मुंबई में धरना ही कर दिया खत्म!

देश में बढ़ रहे कोरोना के मामलों को देखते हुए कई राज्यों में एवं जिलों में लॉकडाउन की स्थिति आ गई है। दिल्ली में भी 31 मार्च तक लॉकडाउन है। यूपी के भी कई जिलों में इसकी घोषणा हो गई है। महाराष्ट्र में तो संक्रमण के सबसे अधिक मामले होने के कारण प्रशासन सकते में है। पूरे देश की बात करें तो दिल्ली मुंबई समेत 16 राज्यों के 331 शहरों में लॉकडाउन है और 60 करोड़ से ज्यादा आबादी घरों में है। अब इस स्थिति का असर महीनों से चल रहे नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ़ प्रदर्शन पर भी दिखने लगा है।

शाहीन बाग की बात करें तो एक समय में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों से घिरे रहने वाली ये जगह सोमवार की सुबह बिलकुल खाली दिखी। केवल 2-3 लोग ही वहाँ पर बैठे नजर आए, वह भी सोते हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनस्थल पर कुर्सी, टेबल और मेजें अपनी-अपनी जगह पर हैं, लेकिन उन पर बैठने वाला वहाँ कोई नहीं है। मंच पर भी केवल महापुरुषों की तस्वीरें जस की तस है मगर उनका हवाला देकर सीएए के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं है।

इधर, लखनऊ के घंटाघर पर नागरिकता कानून के खिलाफ 17 जनवरी से चल रहा धरना प्रदर्शन भी अचानक स्थगित कर दिया गया है। महिलाओं की ओर से पुलिस कमिश्नर को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि कोरोना वायरस के चलते वह अपना प्रदर्शन खत्म कर रही हैं। उनका कहना है कि सरकार जब हालात के बेहतर हो जाने का ऐलान करेगी। उसके बाद वे दोबारा सीएए, एनआरसी के विरोध में घंटाघर पर प्रदर्शन करेंगी। हालाँकि बता दें कि यहाँ इन महिलाओं ने सांकेतिक तौर पर अपने दुप्पटे और बैनर को प्रदर्शनस्थल पर छोड़ा है और पुलिस कमिश्नर को कहा है कि वह उनकी इन चीजों को धरना स्थल से न हटाएँ।

इसके बाद मुंबई में भी सीएए, एनआरसी व एनपीआर के खिलाफ 50 दिनों से मुंबई के मोरलैंड रोड पर जारी धरने को कोरोना वायरस की वजह से खत्म करने का निर्णय लिया गया है। जोनल डीसीपी अभिनाश कुमार के मुताबिक, महिला प्रदर्शनकारियों ने कोरोना वायरस के कारण धरने को खत्म करने का निर्णय लिया है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर इन प्रदर्शनों का खत्म होना बेहद आवश्यक माना जा रहा था। लेकिन बीते दिनों शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों की मनमानियों के कारण काफी दिक्कतें आ रही थीं। क्योंकि दो प्रदर्शनकारियों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बावजूद इन लोगों ने कोई सबक नहीं लिया था और लगातार सरकार के आदेशों का उल्लंघन कर रहे थे। ऐसे में आज ये तीन प्रदेशों से आईं खबरें थोड़ी राहत देने वाली है।

बता दें कि शाहीन बाग के पास प्रदर्शनकारियों के दो गुटों में प्रदर्शन खत्म करने को लेकर शनिवार को आपसी मतभेद भी देखने को मिले थे। इस दौरान एक गुट धरना खत्म करने की अपील कर रहा था जबकि दूसरा धरना जारी रखने पर अड़ा हुआ था। जिसे देखते हुए सरिता विहार, जसोला और आसपास के रहने वाले लोगों ने कहा था कि शाहीन बाग में चल रहा प्रदर्शन अब सरकार नहीं बल्कि मानवता के खिलाफ हो गया है।

SC में अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई, CJI ने कहा- वकीलों को कोर्ट आने की जरूरत नहीं

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते अब सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही मामलों की सुनवाई होगी। इसके जरिए भी केवल जरूरी मामलों की सुनवाई की जाएगी। वकील घर से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बहस कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने परिसर में वकीलों के चेंबर बंद करने के आदेश दिए हैं।

इसके लिए वकीलों को मंगलवार (मार्च 24, 2020) शाम पाँच बजे तक का वक्त दिया गया है और उन्हें फाइल और अपना सामान निकाल लेने के लिए कहा है। सभी वकीलों के चैंबरों को मंगलवार शाम को सील कर दिया जाएगा। उसके बाद किसी को भी सुप्रीम कोर्ट परिसर में आने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

सीजेआई बोबडे ने कहा कि अब अदालत कोर्ट रूम में नहीं लगेंगी। इसलिए वकीलों को भी आने की जरूरत नहीं। उन्होंने कहा कि हफ्ते भर बाद फिर से समीक्षा की जाएगी। उसके बाद निर्णय लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट अगले आदेश तक केवल बेहद जरूरी मामलों की ही सुनवाई करेगा। वकीलों को लिंक मुहैया कराया जाएगा, जिससे वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर पाएँगे।

इस दौरान वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से चार हफ्तों में खत्म होने वाले केसों की तारीख चार हफ्ते तक बढ़ाने की अपील की। हालाँकि कोर्ट ने कहा कि जरूरी सुनवाई होगी, लेकिन पर्सन हियरिंग नहीं होगी। अर्जेंट हियरिंग के दौरान भी जस्टिस कोर्ट नहीं आएँगे और मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही होगी।

गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस के 30 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमित लोगों की संख्या सोमवार को बढ़कर 415 हो गई। इन आँकड़ों में 41 विदेशी नागरिक और अब तक हुई सात मौत शामिल है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि गुजरात, बिहार और महाराष्ट्र में रविवार को एक-एक मौत हुई जबकि पहले चार अन्य मौत कर्नाटक, दिल्ली, महाराष्ट्र और पंजाब में हुई थीं। वहीं, देश की राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में 31 मार्च तक के लिए लॉकडाउन कर दिया गया है।

‘इसे देखकर मुझे मेरे स्कूल का चपरासी याद आ गया’ – AAP नेता ने की CM योगी पर घटिया टिप्पणी

कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए रविवार (मार्च 22, 2020) को जनता कर्फ्यू के दिन शाम को ठीक 5 बजे लोगों ने घरों से निकलकर ताली बजाकर उन लोगों का आभार भी जताया, जो कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिए मोर्चा थामे हुए हैं। जैसे ही घड़ी की सूई ने 5 बजने का इशारा किया, लोग अपने घरों की छतों, बालकनी, खिड़की और छज्जों पर जमा होकर ताली, थाली, घंटी और शंख बजाने लगे।

कोई थाली और चम्मच बजा रहा था, तो कोई पूजा घर में बजाई जाने वाली घंटी लेकर जनसेवकों का आभार प्रकट करने में जुट गए। समाज के हर वर्ग का आदमी इस ऐतिहासिक पल में शामिल था। गली-मोहल्ले, शहर और कस्बे थाली-चम्मच, घंटे-घड़ियाल, ताली और ढोलकों की आवाजों से गूँजने लगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घंटा बजाकर लोगों का अभिनंदन किया। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा समेत तमाम मंत्री भी इस पल में भागीदार बने।

पीएम मोदी के इस आह्वान का देश की जनता ने और विभिन्न क्षेत्रों की तमाम हस्तियों ने पूरा साथ दिया और इस कदम की प्रशंसा की। हालाँकि कुछ लोगों ने पीएम की इस बात का मजाक भी उड़ाया और मीम्स भी बनाए। इन्हीं में से एक है आम आदमी पार्टी (AAP) का नेता सुधीर यादव। सुधीर यादव इस संवेदनशील समय में भी तुच्छ, घटिया और स्तरहीन बयानबाजी करने से बाज नहीं आया। 

https://twitter.com/SudhirRTI/status/1241896985923223552
अगर AAP नेता ने ट्वीट डिलिट कर दिया तो स्क्रीनशॉट से समझें उसकी मानसिकता

हरियाणा आम आदमी पार्टी का प्रवक्ता और आईटी एवं सोशल मीडिया प्रमुख सुधीर यादव ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के घंटा बजाने को लेकर घटिया बयानबाजी करते हुए ट्विटर पर लिखा, “इसे देखकर मुझे मेरे स्कूल का चपरासी का याद आ गया और आपको?” AAP के इस नेता का ये बेहद ही नीच और स्तरहीन बयानबाजी इसके व्यक्तित्व को दर्शाता है, जो एक सीएम के ऊपर इस तरह की टिप्पणी करता है।

इससे पहले भी सुधीर यादव ने चुनाव के समय EVM को लेकर अजीबोगरीब बयान देते हुए कहा था, “अभी EVM प्रेग्नेंट है। अगर नॉर्मल डिलिवरी हुई तो आम आदमी पार्टी पैदा होगी और अगर ऑपरेशन हुआ तो BJP।”

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के संकट को लेकर पीएम मोदी ने गुरुवार (मार्च 19, 2020) को देश के नाम संबोधन दिया। जहाँ पीएम मोदी ने 22 मार्च को देशवासियों से जनता कर्फ्यू का पालन करने के लिए कहा था। पीएम मोदी की अपील पर 22 मार्च को कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिए पूरा हिन्दुस्तान एकजुट दिखा। जनता कर्फ्यू का पालन करते हुए लोगों ने आज घरों में रहने की ठानी। सड़के सूनी, बाजार में सन्नाटा पसरा दिखा। लोग घर में बैठकर, बेहद धैर्य का परिचय देकर कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोक रहे हैं।

जब पूरा देश जता रहा था आभार, जामिया की अबु फजल कॉलोनी में लगे आजादी-आजादी के नारे: Video वायरल

दिल्ली के जामिया नगर इलाके में एक कॉलोनी है- अबुल फजल। ये कॉलोनी रविवार को जनता कर्फ्यू के दौरान चर्चा में रही। कारण यहाँ की गलियों में गूँजे ‘आजादी’ के नारे! ये वैसे ही आजादी के नारे थे, जिन्हें कभी कश्मीर में अलगाववादियों द्वारा गला फाड़ चिल्लाया जाता था और जिनका समर्थन पाकिस्तान के आतंकी कश्मीरी हिंदू महिलाओं का बलात्कार करने और उन्हें मारने के दौरान किया करते थे।

22 मार्च को जिस समय पूरा देश एकजुट होकर प्रधानमंत्री की अपील पर स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए अपने-अपने तरीके से आभार व्यक्त कर रहे थे, उस वक्त जामिया नगर के पास स्थित इस इलाके में आजादी के नारे लग रहे थे।

मुस्लिम मिरर की पत्रकार खुशबू खान ने इस वाकये का विडियो अपने ट्वीटर पर खुद शेयर किया और लिखा कि अबु फजल के निवासियों ने आजादी के नारे लगाए। विडियो देखें तो पता चलेगा कि इन लोगों ने वही नारे अपनी छतों से लगाए, जिन्हें अभी तक ये प्रदर्शनों में ढपली और माइक लेकर लगा रहे थे। विडियो में ताली-थाली बजाने की आवाज भी सुनी जा सकती है।

गौरतलब है कि देश में बढ़ रहे कोरोना के प्रभाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 तारीख को जनता कर्फ्यू का ऐलान किया था। इस दौरान पीएम ने देशवासियों से 5 बजे बालकनी में निकलकर स्वास्थ्यकर्मियों और देश की सेवा में जुटे लोगों का आभार ताली-थाली बजाकर प्रकट करने को कहा था। लेकिन ओखला के इस इलाके के लोगों ने उनको धन्यवाद देने से ज्यादा अपनी आजादी के लिए माँग करना जरूरी समझा और माहौल का राजनीतिकरण करने से नहीं चूके।

बता दें कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों में और जेएनयू द्वारा किए गए प्रदर्शनों में हमने खुलेआम उन आजादी के नारों को गूँजते देखा और सुना है। ये नारे एक समय में कश्मीर में पंडितों के नरसंहार के दौरान अस्तित्व में आए थे और उस समय इन्हें पाकिस्तानियों, आतंकवादियों, अलगाववादियों का पूरा समर्थन था। मगर, आज के संदर्भ में ये नारे विशेष समुदाय और लिबरल लोगों के लिए आम हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में हजारों पाकिस्तानियों ने घोषणा की थी कि वे LOC पार करके भारत में घुसपैठ करेंगे और ‘कश्मीर को आज़ाद करेंगे’। ऐसा करते समय, पाकिस्तानियों ने ऐसी ही आज़ादी ’के नारे लगाए थे और LOC पर मार्च किया था।

चीन-अमेरिका दावा ही करते रह गए, IIT Delhi ने बना डाली सस्ती कोरोना वायरस टेस्ट किट

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में देश के शोधकर्ताओं को बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। दिल्ली आआईटी के शोधकर्ताओं ने इसकी जाँच का बहुत ही सस्ता और पूरी तरह से सटीक तरीका इजाद कर लिया है। यह तरीका सिर्फ सस्ता ही नहीं, बल्कि मौजूदा तकनीक से बहुत ही आसान भी बताया जा रहा है। अब सिर्फ इसे औपचारिक मान्यता मिलने की देर है, जिसकी प्रक्रिया शुरू भी की जा चुकी है। 

बता दें कि शनिवार (मार्च 21, 2020) को ही सरकार ने इसकी जाँच प्राइवेट लैब में कराए जाने की भी इजाजत दी थी और साफ-साफ निर्देश दिया था कि कोरोना टेस्ट का कॉस्ट 4500 रुपए से अधिक नहीं हो सकता है। जिन प्राइवेट लैब के पास NABL मान्यता होगी, वही इस टेस्ट को कर सकते हैं। ऐसे में अगर स्वदेशी तकनीक को मान्यता मिल गई और वह सभी परीक्षणों पर फिट बैठा तो संकट की इस घड़ी में न सिर्फ भारत के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकता है।

चीन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कोरिया ने जहाँ सबसे कम समय में कोरोना वायरस की टेस्ट किट विकसित करने का दावा किया है तो आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने कोरोना की सबसे सस्ती किट विकसित भी कर ली है। अब पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) इसके क्लीनिकल सैंपल पर इसकी जाँच को प्रमाणित करने की प्रक्रिया में जुट गया है। आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने ‘प्रोब-फ्री डिटेक्शन एस्से’ (probe-free detection assay) को यहाँ के प्रतिष्ठित संस्थान कुसुमा स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज की प्रयोगशालाओं में विकिसत किया है और अनुकूल परिस्थितियों में इसे परखा भी गया है और इसकी संवेदनशीलता की भी जाँच की गई है।

आईआईटी दिल्ली का दावा है कि उसने कोरोना वायरस की जाँच के लिए जो तकनीक विकसित की हैस वह बहुत ही सस्ता और गुणवत्तापूर्ण है और इसका इस्तेमाल आम जनता के लिए बड़े पैमाने पर किया जा सकता है। आईआईटी के निदेशक और शोधकर्ताओं की टीम का नेतृत्व कर रहे प्रोफेसर विवेकानंद पेरुमल ने कहा है, “तुलनात्मक अनुक्रम विश्लेषण का उपयोग करके हमने कोविड-19 में अनोखे क्षेत्रों की पहचान की है। ये अनोखे क्षेत्र दूसरे इंसानी कोरोनावायरस में में नहीं पाए जाते हैं, जिसके चलते विशेष तौर पर कोविड-19 का पता लगाने का मौका मिल जाता है।”

उनके मुताबिक अगर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी जाँच को मान्यता दे देता है तो हमारे में देश में बढ़ती आवश्यकता के मद्देनजर इसका तेजी से उत्पादन भी किया जा सकता है। वहीं प्रोफेसर मनोज मेनन इसके किफायती होने का कारण बताते हुए कहते हैं कि जो मौजूदा टेस्ट के तरीके उपलब्ध हैं, वे ‘जाँच-आधारित'(probe-based)हैं, जबकि आईआईटी की टीम ने जिसका विकास है, वह तरीका ‘जाँच-रहित’ (probe-free) है, जिससे जाँच का खर्च घट जाता है, जबकि प्रमाणिकता से कोई समझौता नहीं किया जाता।

स्वदेशी तकनीक विकसित करने वाले शोधकर्ताओं के मुताबिक कोविड-19 की जाँच के लिए जो किट अभी उपलब्ध हैं, नई तकनीक उसके मुकाबले का है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस जाँच को बिना किसी ज्यादा उपकरणों के इस्तेमाल से किया जा सकता है और फिर भी इसकी जाँच गुणात्मकता (हाँ या नहीं) सटीक होती है। शोधकर्ताओं ने कोविड-19 की जाँच के लिए इस किफायती तकनीक का विशेष तौर पर इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया है। इस रिसर्च टीम में पीएचडी स्कॉलर प्रशांत प्रधान, आशुतोष पांडे और प्रवीण त्रिपाठी, पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोज डॉक्टर पारुल गुप्ता और अखिलेश मिश्रा एवं प्रोफेसर विवेकानंद पेरुमत, मनोज बी मेनन, जेम्स गोम्स और बिश्वजीत कुंडु शामिल हैं।

जनता कर्फ़्यू में ईदगाह मैदान में CAA विरोध-प्रदर्शन: 12 आयोजकों, 150 अज्ञात पर FIR – जान से खिलवाड़ का आरोप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद रविवार (मार्च 22, 2020) को जहाँ पूरा देश जनता कर्फ्यू का पालन कर रहा था, वहीं मुरादाबाद के ईदगाह मैदान में हजारों लोग सीएए और एनआरसी के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे थे। आरोप है कि आयोजकों ने एक साजिश के तहत 21 मार्च की रात से ही मैसेज वायरल कर हजारों लोगों को इकट्ठा किया। इसके बाद रविवार सुबह जहाँ पूरा शहर कोरोनावायरस से लड़ने के लिए घरों में कैद था, वहीं ईदगाह मैदान में प्रदर्शनकारी धरने पर थे। इन सभी लोगों पर दूसरों की जान से खिलवाड़ करने के आरोप में FIR दर्ज किया गया है।

मुरादाबाद में 29 जनवरी से चल रहा धरना रविवार को भी बदस्तूर जारी रहा। जबकि एसीएम प्रथम ने इसे स्थगित करने के लिए नोटिस भी दिया था। प्रधानमंत्री के जनता कर्फ्यू के आह्वान के बाद प्रशासन ने इस संबंध में आदेश जारी किया था। इस आदेश के बाद एसीएम प्रथम की ओर से ईदगाह में धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों को नोटिस दिया गया था। उन्हें 21 मार्च को शाम 5 बजे तक धरना खत्म करने के लिए अल्टीमेटम दिया गया था। अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम ने शनिवार (मार्च 21, 2020) को ईदगाह मैदान में धरने का संचालन करने रहे 12 लोगों को नोटिस जारी किया था। जिसमें उन्हें चेतावनी दी गई थी कि 21 मार्च की शाम पाँच बजे तक धरना प्रदर्शन खत्म किया जाए। यदि जनहित में धरना स्थगित नहीं किया गया तो कार्रवाई की जाएगी।

इस नोटिस के बावजूद रविवार को ईदगाह मैदान में लोगों ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसमें अन्य दिनों की अपेक्षा रविवार को अधिक लोग नजर आए। इस दौरान मंच से भाषण भी दिए गए। इस संबंध में एसएसपी अमित पाठक ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को सचेत किया गया था। इसके बावजूद उन्होंने जनता के लिए खतरा उत्पन्न किया है। मामले में 12 आयोजकों और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किया गया है।

सभी के खिलाफ गलशहीद थाने में आईपीसी की धारा 269, 270 और 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने कोरोनावायरस को महामारी घोषित किए जाने के बाद विनियमावली 2020 की धारा 12 में वर्णित प्रावधानों के उल्लंघन में ईदगाह मैदान में चल रहे विरोध प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। गलशहीद थाना प्रभारी अजीत रोरिया ने बताया कि सीएए एवं एनआरसी बिल के विरोध में विरोध प्रदर्शन की कमिटी के सदस्य चाँद खान उर्फ़ अतहर, शाकिर हुसैन, जाकी राईनी, वाकी रशीद, आसिफ चौधरी, साहिल शम्सी, गुड्डू उर्फ़ अजीम, बब्बन अब्बासी, अनवर नवेद, असलम खान, एहतेशाम मंसूरी और हाफिज इरफ़ान अंसारी व 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किया गया है।