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फेस मास्क और सैनिटाइजर के दाम तय: मोदी सरकार के फैसले के बाद लाइन में आई कंपनियाँ, घटाई कीमतें

केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव में प्रयुक्त होने वाले फेस मास्क और सेनिटाइजर की कीमतों में हो रही अनाप-शनाप वृद्धि पर सख्त रुख अपनाते हुए उसके दाम तय करने की घोषणा की। केंद्रीय उपभोक्ता और खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने शुक्रवार (20 मार्च 2020) को यह जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने अपने ट्वीट में कहा कि 200 मिली सेनिटाइजर की कीमत अबसे 100 रुपए से ज्यादा नहीं होगी और अन्य आकार की बोतलों की कीमत भी इसी अनुपात में रहेंगी। ये कीमतें 30 जून 2020 तक पूरे देश में लागू रहेंगी।

इस ट्वीट के तुरंत बाद देश की बड़ी एफएमसीजी यानी फ़ास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर ने अपने प्रोडक्टस के दाम घटाने की घोषणा कर दी। उसने अपने प्रॉडक्ट्स – लाइफ ब्वॉय सेनिटाइजर, लिक्विड हैंड वॉश और फर्स क्लीनर के दाम 15 फीसदी तक कम कर दिए हैं।

केंद्रीय उपभोक्ता और खाद्य मंत्री रामविलास पासवान के अनुसार कोरोना वायरस के फैलने के बाद से बाजार में विभिन्न फेस मास्क और इनके निर्माण में लगने वाली सामग्री तथा हैंड सेनिटाइजर की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। जिसके चलते सरकार ने इस मामले की गंभीरता समझ इनकी कीमतें तय कर दी हैं। एक और ट्वीट में उन्होंने कहा, आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत 2 और 3 प्लाई मास्क में इस्तेमाल होने वाले फैब्रिक की कीमत वही रहेगी, जो 12 फरवरी 2020 को थी – मतलब 2 प्लाई मास्क की खुदरा कीमत 8 रुपए/मास्क और 3 प्लाई की कीमत 10 रुपए/मास्क से अधिक नहीं होगी।

भारत नहीं आ सकता कोरोना, CAA से ध्यान भटकाना है मकसद: SP नेता पर अफवाह फैलाने का केस दर्ज

कोरोना वायरस संक्रमण के मामले देश में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें कोरोना महामारी में षड्यंत्र नजर आ रहा है। शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी इसे CAA ​से ध्यान हटाने की कवायद बता रहे। समाजवादी पार्टी के एक नेता ने भी इसका समर्थन किया है।

यूपी के आजमगढ़ से सांसद रहे समाजवादी पार्टी के नेता रमाकांत यादव का कहना है कि कोरोना एक छलावा है। NRC, CAA और महँगाई से ध्यान भटकाने के लिए यह मुद्दा उछाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस का संक्रमण दुनिया में हो सकता है, लेकिन भारत में नहीं हो सकता है। यही नहीं, उनका यह भी कहना है कि देश में एक भी मौत कोरोना से हुई हो तो कोई उन्हें बताए। वे भारत में कोरोना से संक्रमित लोगों को गले लगाने के लिए तैयार हैं।

सपा के पूर्व सांसद रमाकांत यादव के इस बयान को गंभीरता से लेते हुए डीआईजी रेंज, आज़मगढ़, सुभाष चंद्र दुबे के आदेश पर सिधारी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। डीआईजी दुबे ने बताया कि जहाँ एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरा देश इस महामारी को लेकर गंभीर हैं, सतर्कता बरती जा रही है, वहीं रमाकांत यादव का यह बयान जनता को भ्रमित और गुमराह करने वाला है।

कोरोना वायरस पर किसी भी प्रकार की अफवाह और गुमराह करने वाली सूचना पर सरकार लगातार गंभीरता से निपट रही है। देश में अधिकतर ऐसे लोग लापरवाही बरतते हुए कई लोगों की जान संकट में डालते हुए देखे जा चुके हैं। ऐसा ही एक उदाहरण बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर का भी सामने आया है। लंदन से लौटने के बाद बिना किसी परीक्षण के ही उन्होंने कई पार्टियों में हिस्सा लिया और वहाँ मौजूद तमाम लोगों की जिन्दगी खतरे में डाल दी।

उल्लेखनीय है कि दुनियाभर में कोरोना वायरस के कारण अब तक 283,738 लोग प्रभावित हो चुके हैं और मरने वालों की संख्या 11,832 पर पहुँच चुका है। अकेले इटली में मरने वालों की संख्या 4,032 हो चुकी है।

इटली में फँसे भारतीय रविवार को लौटेंगे स्वदेश, 22 मार्च से 7 दिन तक इंटरनेशल फ्लाइट नहीं कर सकेंगे लैंड

विश्व के 180 से अधिक देश कोरोना वायरस की मार झेल रहे हैं। भारत सरकार विदेशों में फँसे अपने नागरिकों को वापस लाने को तत्पर है। इटली में फँसे सैकड़ों भारतीयों को सुरक्षित वहाँ से निकालने के लिए आज दिल्ली से एयर इंडिया का विशेष विमान इटली की राजधानी रोम के लिए रवाना होगा। साथ ही सरकार ने साफ कर दिया है 22 मार्च के बाद सात दिनों तक किसी भी अंतर्राष्ट्रीय विमान को भारत में उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

केंद्र ने एक बयान जारी कर कहा है कि कोरोना वायरस संकट के बीच इटली में फँसे भारतीयों को निकालने के लिए राष्ट्रीय वाहक एयर इंडिया 787 ड्रीमलाइनर विमान आज रोम के लिए भेजा जाएगा। यह रविवार सुबह तक भारतीयों को लेकर लौटेगा। इसके बाद सात दिनों तक किसी भी विदेशी विमान को भारत में उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान से 590, पाकिस्तान से 43, क्वालालंपुर से 185, चीन से 766, जापान से 124, ईरान से 389, ईटली से 211 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस से अब तक विश्वभर में 2,70,000 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं इससे दुनिया भर में 11,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में भी अब तक कोरोना वायरस से पाँच मौतें हो चुकी है और करीब 300 लोग संक्रमित हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की थी। साथ ही 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया है।

नान-टिमाटर वाला Pak 66वाँ खुशहाल देश, भारत 140वाँ: बकवास सर्वे और इसे शेयर करने वाले बेकार लोग!

बॉलीवुड के विवादित एक्टर और प्रोड्यूसर कमाल आर खान ने हाल ही में आई संयुक्त राष्ट्र विश्व खुशहाली रिपोर्ट का जिक्र करते हुए इसे भारत के लिए शर्मिंदगी बताया। कमाल खान ने ट्वीट करते हुए लिखा, “पाकिस्तान खुशहाल देशों की लिस्ट में 67वें नंबर पर है, जबकि भारत का स्थान 140वें पर है। अमेरिका 19वें और यूएई 21वाँ सबसे खुशहाल देश है और हमारी ड्रामा मीडिया यह दिखाती है कि पाकिस्तान सबसे खराब देश है। आज मैं वास्तव में शर्मिंदा हूँ अगर भारत पाकिस्तान की तुलना में बहुत पीछे है। यह सही नहीं है।” हालाँकि कमाल आर खान ने आँकड़ा लिखने में गलती है, क्योंकि रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की रैंकिंग 66वाँ है।

संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क ने हाल ही में यह रिपोर्ट जारी की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2012 में 20 मार्च को विश्व खुशहाली दिवस घोषित किया था। संयुक्त राष्ट्र की ये सूची 6 कारकों पर तय की जाती है। इसमें आय, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, सामाजिक सपोर्ट, आजादी, विश्वास और उदारता शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र की सातवीं वार्षिक विश्व खुशहाली रिपोर्ट, जो दुनिया के 156 देशों को इस आधार पर रैंक करती है कि उसके नागरिक खुद को कितना खुश महसूस करते हैं। कहा गया है कि इसमें इस बात पर भी गौर किया गया है कि चिंता, उदासी और क्रोध सहित नकारात्मक भावनाओं में वृद्धि हुई है।

इस रिपोर्ट में भारत को 140वाँ जबकि पाकिस्तान को 66वाँ खुशहाल देश बताया गया है। जो कि वाकई काफी आश्चर्यजनक और हैरान करने वाला है। ये वही पाकिस्तान है जो कुछ दिन पहले नान-रोटी के लिए उच्चस्तरीय बैठकें बुलवा रहा था। जो अंतरराष्ट्रीय कर्ज के चलते अपनी जनता को दो जून की नान-रोटी और टिंडे-टिमाटर उपलब्ध करा पाने तक की गारंटी नहीं दे पा रहा था। जिस पाकिस्तान से उनकी जनता रोटियाँ और सस्ते टिमाटर माँग रही थी। कहना गलत नहीं होगा कि नान-टिमाटर वाले देश को अगर खुशहाल रैंकिंग में जगह भी मिल गई तो बड़ी बात है और ऐसे रैंकिंग करने वालों पर सवाल उठना चाहिए। इस रैंकिंग में उस देश को 66वाँ खुशहाल देश बताया जा रहा है, जिस देश की अर्थव्यस्था मरणासन्न स्थिति में है। दिनों-दिन आसमान छूती महँगाई ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है।

पाकिस्तान इस समय घोर आर्थिक संकट और बेतहाशा महँगाई से जूझ रहा है। इससे उबरने के लिए पाकिस्तान के वजीरे आजम इमरान खान ने क्या कुछ नहीं किया। चाहे कारें बेचनी हों या गधे… यहाँ तक कि वहाँ नान और टमाटर के दाम तय करने को भी राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया गया था। बाकायदा उसके लिए कैबिनेट मीटिंग तक हुई थी। लेकिन कार और गधे बेचने के बाद भी पाकिस्तान की अर्थव्यस्था सुधर नहीं रही है। आतंक की खेती करने वाले पाकिस्तान में जेहादी हूरों के सपने दिखाकर आतंकवाद को पोषित करते आ रहे हैं। 

वह देश भला खुशहाल कैसे हो सकता है, जहाँ की जनता ही वहाँ के सरकार से खुश न हो। ये कहना गलत नहीं होगा कि पाकिस्तान इस वक्त सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। अर्थव्यवस्था से लेकर कानून व्यस्था हो, जहाँ देखो, वहाँ के हाल बुरे हैं। सभी जगह अव्यवस्था फैली हुई है। भारत के खिलाफ लगातार जहर उगल कर इमरान खान अपने देश के नजरों में ऊपर उठना चाहते हैं। लेकिन, वो शायद भूल गए कि देश में तरक्की और विकास करके ही जनता का प्यार जीता जा सकता है न कि पड़ोसी देश के लिए सिर्फ उल्टी-सीधी बातें करके। अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण संस्था गैलप की पाकिस्तान इकाई ने वहाँ एक सर्वे किया, जिसमें खुलासा हुआ है कि 66 प्रतिशत पाकिस्तानी इमरान सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं।

बता दें कि यह सर्वे फरवरी में किया गया है। इसमें सिर्फ 32 प्रतिशत लोगों ने ही सत्ताधारी पार्टी के कामकाज पर संतुष्टि जताई है। इसके अलावा 59 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इमरान सरकार का प्रदर्शन पिछली सरकारों से भी ज्यादा खराब है। सिर्फ, 22 प्रतिशत लोगों को इमरान सरकार पहले की सरकारों से बेहतर लगी। सर्वे में यह भी पूछा गया कि क्या देश सही दिशा में जा रहा है? इसके जवाब में 62 प्रतिशत ने नकारात्मक जवाब दिया है।

गैलप के सर्वे के मुताबिक इमरान सरकार के कामकाज से असंतुष्ट लोगों में पुरुषों की संख्या 70 फीसदी और महिलाओं की 60 फीसदी है। युवाओं में भी सरकार के काम को लेकर निराशा पाई गई। 30 साल से कम आयु के 66 फीसदी युवाओं ने कहा कि वे इमरान सरकार के कामकाज से खुश नहीं हैं। महँगाई की वजह से पाकिस्तान की आवाम को अपनी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पसीने छूट रहे हैं और वह खुशहाल देश है!

महँगाई की बात चली ही है तो आपको बता दें कि पिछले दिनों एक पाकिस्तानी दुल्हन ने गहने की जगह टमाटर और पाइन नेट के गहने पहने थे। जब दुल्हन से टमाटर के गहने पहनने का कारण पूछा गया तो उसने बड़ा ही मजेदार जवाब दिया। दुल्हन बड़ी ही संजीदगी से कहती है कि आजकल सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं और टमाटर व पाइन नट के भी। उसने बताया कि उसके देश में टमाटर के लिए हाय-तौबा मचा हुआ है। दुल्हन कहती है कि देश में इस समय टमाटर और पाइन नट्स की वैल्यू सोने के बराबर चल रही है। इसलिए उसने सोने की जगह पर टमाटर और पाइन नट्स के गहने पहने हैं। जब एंकर ने पूछा कि पाइन नट्स कहाँ हैं, तो दुल्हन एक शगुन का लिफाफा खोलती है और उसमें से पाइन नट्स निकाल कर दिखाती है। ये लिफाफा उसके बड़े भाई ने ‘सलामी’ (शादी के तोहफे) के रूप में भेजे थे। इस वीडियो को पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने ट्वीट किया था।

जब पड़ोसी देश में आम जनता महँगाई से त्रस्त थी, जनता बेसिक सुविधाओं के लिए मुँहताज हो रही थी, इमरान खान उनकी समस्याओं का समाधान न करके भारत के आंतरिक मामले में दखलअंदाजी करने में व्यस्त थे। इसको लेकर सोशल मीडिया पर पाकिस्तान का मजाक भी उड़ा। लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया कि अभी भी वक्त है संभाल लें इमरान कहीं ऐसा न हो कि जिहाद और आतंक की खेती के चक्कर में आम लोग विद्रोह कर बैठें। पहले अपना देश संभाल लें फिर दूसरे देश के आतंरिक मामलों में दखल देने की सोचें। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र विश्व खुशहाली रिपोर्ट में पाकिस्तान को 66वाँ खुशहाल देश बताना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। आखिर किस आधार पर उसे यह रैंकिंग दी गई, क्योंकि गैलप के सर्वे ने तो पाकिस्तान की जनता की नाखुशी और नापसंदगी को जाहिर कर ही दिया और वहाँ की अर्थव्यवस्था तो माशाल्लाह!!! ताज्जुब की बात है कि फिर भी रैंकिंग में 66वाँ खुशहाल देश?

अमानतुल्लाह से पिंड छुड़ाने की कोशिश में केजरीवाल, दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड अध्यक्ष की कुर्सी छीनी

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों और शाहीन बाग के प्रदर्शन से साख को लगे बट्टे की भरपाई की कोशिशों में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार लग गई है। दंगों और प्रदर्शन में पार्टी के कई नेताओं की भूमिका संदिग्ध बताई जाती है। पार्षद ताहिर हुसैन तो दंगों का मास्टरमाइंड बनकर उभरा है। हालॉंकि बाद में पार्टी ने उसे निलंबित कर दिया। बावजूद इसके अमानतुल्लाह ख़ान जैसे पार्टी विधायक उसका खुलकर बचाव करते रहे हैं। सीएए विरोध के नाम पर दिल्ली के जाकिर नगर में जब हिंसा भड़की थी तब भी अमानतुल्लाह मौके पर दिखा था। लेकिन, अब ऐसा लगता है कि डैमेज कंट्रोल के तहत केजरीवाल सरकार उससे पीछा छुड़ाने की कोशिश में है।

उसे दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। दिल्ली सरकार के रेवेन्यू विभाग ने इसकी जानकारी दी है। ओखला से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए अमानतुल्लाह को मुख्यमंत्री केजरीवाल का क़रीबी माना जाता है। उस पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।

रेवेन्यू विभाग के मुख्य सचिव कार्यालय ने कहा कि फ़रवरी 11, 2020 को छठी विधानसभा भंग होने के साथ ही ख़ान दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष व सदस्य नहीं रहे। इसके लिए ‘सेक्शन 14 (1) ऑफ वक़्फ़ बोर्ड 1995’ का हवाला दिया गया है। ख़ान को पिछली बार चुनाव जीतने के बाद 7 सदस्यीय वक़्फ़ बोर्ड में नॉमिनेट किया गया था। उन्हें सितम्बर 2018 में बोर्ड का अध्यक्ष चुना गया था। हालाँकि, दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने इस बात से इनकार किया कि ख़ान को उसके पद से हटा दिया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि केजरीवाल सरकार दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड का पुनर्गठन करेगी। हाल ही में दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के बाद अमानतुल्लाह बढ़-चढ़ कर कथित मुस्लिम पीड़ितों को मदद करने का दावा कर रहा था। उसने बोर्ड के माध्यम से कई ‘पीड़ित’ मुस्लिमों को वित्तीय मदद भी मुहैया कराई थी। सरकार के फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए विधायक ख़ान ने कहा कि सितंबर 2018 से 20 मार्च 2020 तक का दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड़ का सफ़र बहुत अच्छा रहा। मुझे खुशी है कि मैं ग़रीबों और ज़रूरतमंदों तक उनका हक़ पहुँचा पाया और उनकी मदद कर पाया।

हालाँकि, इस बात पर अब तक संशय बना हुआ है कि अमानतुल्लाह ख़ान ने हाल ही में जम कर वित्तीय मदद के नाम पर जो चेक बाँटे हैं, उनका क्या होगा? उसने कई हिन्दुओं की भी मदद करने का दावा किया है। अमानतुल्लाह ख़ान पर अपनी ही साली का यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज है, ऐसे में उसे फिर से इस पद पर बहाल किया जाएगा या नहीं, इसे लेकर सरकार ने फ़िलहाल चुप्पी साध रखी है। कहा जा रहा है कि कुछ ही दिनों में निर्णय होगा।

‘सजा-ए-मौत पर रोक लगाएँ सभी देश’: निर्भया के दोषियों की फाँसी के बाद UN ने दिया ज्ञान

लम्बे इन्तजार के बाद निर्भया के दोषियों को शुक्रवार (मार्च 20, 2020) सुबह फाँसी दे दी गई। लेकिन फाँसी पर संयुक्त राष्ट्र (UN) की भी प्रतिक्रिया आई है। सामूहिक बलात्कार के दोषियों को फाँसी दिए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) ने सभी देशों से मौत की सजा के इस्तेमाल को रोकने या इस पर प्रतिबंध लगाने की अपील की है।

गौरतलब है कि निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड के चार दोषियों को भारत में फाँसी दिए जाने के एक दिन बाद यह अपील की गई है। दिसंबर 16, 2012 को सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड के सात साल बीत जाने के बाद मामले के चार दोषियों- मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में शुक्रवार सुबह साढ़े पाँच बजे फाँसी दी गई।

निर्भया बलात्कार और हत्याकांड के मामले में चारों दोषियों और एक नाबालिग सहित कुल छह व्यक्ति आरोपित के तौर पर नामजद थे। छठे आरोपित राम सिंह ने मामले की सुनवाई शुरू होने के कुछ दिनों बाद मार्च 11, 2013 को तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। जबकि एक सुधार गृह में तीन साल गुजारने के बाद 2015 में नाबालिग को रिहा कर दिया गया था।

इस फाँसी पर प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि वैश्विक संगठन सभी देशों से मौत की सजा का इस्तेमाल बंद करने या इस पर प्रतिबंध लगाने की अपील करता है। दुजारिक ने नियमित संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा- “हमारा रुख स्पष्ट है कि हम सभी राष्ट्रों से मौत की सजा का इस्तेमाल बंद करने या इस पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान करते हैं।”

दिसंबर, 2012 में निर्भया के साथ हुए क्रूर सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड ने पूरे देश भर में आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया था। 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा (निर्भया, सांकेतिक नाम) से दिसंबर 16, 2012 को दक्षिणी दिल्ली में एक चलती बस में गैंगरेप किया गया था और उस पर बर्बरता से हमला किया गया था। निर्भया को इसके बाद बेहतर उपचार के लिए सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी मौत हो गई थी।

इसके बावजूद निर्भया के दोषियों को उनके अपराध की सजा मिलने में कई प्रकार के पेंच सामने आते रहे। यह पहली बार था जब चार लोगों को दक्षिण एशिया के सबसे बड़े जेल परिसर, तिहाड़ जेल में एक साथ फाँसी पर लटकाया गया।

कनिका कपूर के खिलाफ दर्ज FIR में गड़बड़ी, एयरपोर्ट पर ही कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने का दावा

लंदन से आकर लखनऊ में कई समारोहों में हिस्सा लेने वालीं बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद लखनऊ पुलिस ने शुक्रवार (मार्च 20, 2020) की देर रात उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की। लेकिन कनिका कपूर के खिलाफ सरोजिनी नगर थाने में दर्ज एफआईआर में भारी गड़बड़ी सामने आई है। केस दर्ज कराने वाले मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) ने एफआईआर में लिखा है कि कनिका को एयरपोर्ट पर ही संक्रमित पाया गया था। उन्हें होम क्वॉरेंटाइन के निर्देश दिए गए थे, जबकि एयरपोर्ट पर कोरोना के वायरस की जाँच का कोई इंतजाम ही नहीं है।

दरअसरल सीएमओ ने यह कहकर सरोजिनी नगर थाने में केस दर्ज कराया कि कनिका ने होम क्वॉरेंटाइन के निर्देशों का उल्लंघन किया। सीएमओ के चौंकाने वाले दावे से खुद शासन-प्रशासन सवालों के घेरे में है। पुलिस ने जिस तहरीर पर केस दर्ज किया है, उसमें सीएमओ ने कहा है कि कनिका कपूर कुछ दिनों पहले लंदन से वापस आईं और फिर 14 मार्च को लखनऊ आईं थीं। 14 मार्च को एयरपोर्ट पर कोरोना पॉजिटिव मिलने पर उन्हें होम क्वॉरेंटाइन में रहने के निर्देश दिए गए थे। जबकि जानकारी के मुताबिक कनिका 11 मार्च को लखनऊ गईं थीं और 11 मार्च से 16 मार्च के बीच वह लखनऊ के ताज होटल, शालीमार ग्रैंड अपार्टमेंट और गुलिस्ता कॉलोनी में आयोजित पार्टियों में शामिल हुई थीं। इसके अलावा एक फैमिली फंक्शन में शामिल होने कानपुर के कल्पना अपार्टमेंट में भी पहुँची थीं। 2 दिनों तक वह कानपुर में अपने मामा के घर पर भी रही थीं।

अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर कनिका कपूर एयरपोर्ट पर कोरोना पॉजिटिव पाई गई थीं तो उनके उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग को जरूरी निर्देश क्यों नहीं दिए गए थे। सीएमओ को कनिका के संक्रमण से ग्रसित होने की जानकारी थी तो भी उन्होंने उक्त मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया। कनिका के कोरोना से संक्रमित होने की सूचना डीएम और पुलिस आयुक्त क्यों नहीं दी गई। कनिका के संक्रमित होने की जानकारी अगर जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त को होती तो वे उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक लगा सकते थे। तब इतना बड़ा संकट न पैदा होता।

इस बाबत सरोजिनी नगर के एचएसओ आनंद शाही ने नवभारत टाइम्स से बात करते हुए कहा कि सीएमओ की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। हमारी जाँच में भी सामने आया है कि उनके लखनऊ आने की डेट गलत है। जाँच के आधार पर पुलिस तथ्यात्मक कमियों में सुधार करेगी। बता दें कि इससे पहले केजीएमयू माइक्रोबायोलॉजी विभाग में तैयार की गई कनिका की जाँच रिपोर्ट में भारी लापरवाही सामने आई थी। 20 तारीख को सामने आई जाँच रिपोर्ट में कनिका की उम्र 28 साल बताई गई थी, जबकि उनकी उम्र 40 साल है। वहीं कनिका को रिपोर्ट में ‘पुरुष’ भी बताया गया था। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब देश में कोरोना वायरस को लेकर इतने एहतियात बरते जा रहे हैं और इसके प्रसार को रोकने की हर संभव कोशिश की जा रही है तो फिर ताज होटल में थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था क्यों नहीं की गई थी? फिलहाल ताज होटल को बंद करने का आदेश दे दिया गया है।

बता दें कि कनिका के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 269 और 270 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। कनिका लखनऊ में कई पार्टियों में हिस्सा लेने पहुँची थीं, जिसके बाद तकरीबन 300-400 लोगों पर इस संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। हालाँकि कनिका कपूर ने दावा किया था कि वह सिर्फ 10-30 लोगों से मिली हैं। वहीं, कनिका का कहना था कि एयरपोर्ट पर उनकी स्क्रीनिंग हुई थी, लेकिन आइसोलेशन की सलाह नहीं दी गई थी।

सिंगर कनिका कपूर के कोरोना वायरस पॉजिटिव होने की सूचना के बाद से लखनऊ, कानपुर में उनसे मिले लोगों में घबराहट फैल गई है। लखनऊ में आयोजित तीन पार्टियों में शामिल कई नामचीन लोग, जिनमें कई बड़े नेता अपने घरों में क्वॉरेंटाइन हो गए हैं। लखनऊ की एक पार्टी में कनिका के साथ राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके सांसद बेटे दुष्यंत सिंह भी शामिल हुए। इसके बाद दुष्यंत सिंह ने संसद की कार्यवाही के दौरान कई लोगों से मुलाकात की थी।

ओडिशा के 5 जिलों व 7 शहरों में 1 सप्ताह के लिए पूर्ण लॉकडाउन: CM नवीन पटनायक की बड़ी घोषणा

ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। कोरोना वायरस से बढ़ते ख़तरे को देखते हुए जहाँ एक तरह जगन्नाथ मंदिर को आमजनों के लिए बंद कर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ 5 जिलों में टोटल लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई है। 5 जिलों के अलावा 7 शहरों में भी 22 मार्च सुबह 7 बजे से लेकर लॉकडाउन 29 मार्च रात 9 बजे तक लॉकडाउन की घोषणा की है। कोरोना वायरस के ओडिशा में अब तक 2 मामले आ चुके हैं लेकिन महाराष्ट्र व केरल जैसे राज्यों में स्थिति भयावह है।

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक बयान जारी कर के इस लॉकडाउन की घोषणा की है। इस दौरान हॉस्पिटल, क्लिनिक्स, सब्जी की दुकानें, ग्रोसरी की दुकानें और मीट की दुकानें खुली रहेंगी लेकिन रेस्टॉरेंट्स में बैठ कर खाना प्रतिबंधित रहेगा। खाना पैक करवा के घर ले जाया जा सकता है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी खुला रहेगा। पीडीएस डिस्ट्रीब्यूशन सहित उन सभी सरकारी सुविधाओं को बंद कर दिया गया है, जहाँ लम्बी लाइनें लगने की संभावना है।

सभी डीएम व स्थानीय अधिकारियों से कहा गया है कि बाकी सेवाएँ बंद करने का निर्णय वो स्थानीय स्तर पर समीक्षा करने के बाद कर सकते हैं। कंपनियों को कहा गया है कि वो अपने कर्मचारियों को घर से काम करने या छुट्टी देने के एवज में पूरा वेतन दें। मुख्यमंत्री ने लोगों से आग्रह किया है कि वो कोरोना से लड़ने में अपना सहयोग दें और सरकार के आदेश को सफल बनाएँ। ओडिशा में 3000 ऐसे लोग हैं जो विदेश से आए हैं।

बांग्लादेश से घुसी, बंगाल में ठिकाना: 26/11 के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को रिपोर्ट करती थी तानिया परवीन

पश्चिम बंगाल में शुक्रवार (मार्च 20, 2020) को 21 साल की एक कॉलेज छात्रा गिरफ्तार की गई थी। वह आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी है। उसे नॉर्थ 24 परगना जिले के बदुरिया से पकड़ा गया था। इसके बाद उसे बशीरहाट सब डिवीजन कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने उसे 14 दिनों की पुलिस रिमांड में भेज दिया। उसके ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत मामला चलाया जाएगा। गिरफ़्तार तानिया परवीन अरबी लिटरेचर की एमए फाइनल ईयर की छात्रा है। वह सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए आतंकी संगठन से जुड़ी थी। लश्कर ने उसे भड़काऊ डाक्यूमेंट्स और विडियो उपलब्ध कराए थे।

कहा जा रहा है कि तानिया 10 साल पहले बांग्लादेश से घुसपैठ कर भारत में आई थी। वह लश्कर के लिए भर्तियाँ करती थी। सरकारी सूचनाओं को पाने के लिए वो हनी-ट्रैपिंग का सहारा लेती थी। कई बड़े अधिकारियों व नेताओं तक उसकी पहुँच होने की बात कही जा रही है। एजेंसियाँ इस बात की जाँच करने में जुटी है कि उसने किस प्रकार की सूचनाएँ जुटा कर अपने आकाओं तक पहुँचाई थी। उसके पास से जब्त की गई डायरी और दस्तावेजों से पता चला है कि उसने काफ़ी संवेदनशील सूचनाएँ जुटा ली थी। इस घटना ने फिर से बांग्लादेशी घुसपैठ के खतरे को सामने ला दिया है।

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठिए अक्सर फेक करेंसी, ड्रग बेचने व अन्य अपराधों में संलिप्त पाए जाते रहे हैं। 2014 में हुए बर्दवान ब्लास्ट में घुसपैठी आतंकियों का हाथ होने की बात सामने आई थी। बिहार के बोधगया में हुए हमलों की जाँच के दौरान भी घुसपैठियों का रोल सामने आया था। तानिया के पास से कई पाकिस्तानी सिम कार्ड्स मिले हैं। ख़बरों के अनुसार, वह मुंबई के 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड और आतंकी सरगना हाफ़िज़ सईद से भी 2 बार बातचीत कर चुकी है। वो पिछले 2 साल से लश्कर के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही थी और उस क्षेत्र में कई बार भड़काऊ भाषण दे चुकी है।

अब देखना ये है कि पूछताछ के दौरान क्या निकल कर आता है और हनी-ट्रैपिंग के माध्यम से उक्त युवती ने कितने सरकारी अधिकारियों को फँसा रखा था। इससे पहले भी पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई द्वारा भारतीय सैन्य अधिकारियों को फँसाने के लिए हनी-ट्रैपिंग का प्रयोग करने की बात पता चली थी।

… ताकि कोरोना की न पड़े मार: मनोरंजन इंडस्ट्री के प्रभावितों के लिए Netflix का $100 मिलियन फंड

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर में लोगों का एक मानवीय पहलू भी सामने आया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन में कोरोना वायरस के कारण प्रभावित होने वाले गरीब वर्ग की आर्थिक रूप से मदद करने का ध्यान रखने की बात कही। कई नामी एमएनसी कंपनियों ने भी काम जारी न रहने के दौरान भी अपने कर्मचारियों को महीने भर की पूरी तनख्वाह देने की घोषणा की है। लोगों के घरों में कैद होने के बाद युवाओं की पसंदीदा ऑनलाइन विडियो स्ट्रीमिंग वेबसाइट नेटफ्लिक्स ने कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के लिए राहत फंड की घोषणा की है।

नेटफ्लिक्स ने $100 मिलियन की आर्थिक राहत निधि की घोषणा की है। इसका उपयोग मनोरंजन और रचनात्मक क्षेत्र के ऐसे सदस्यों की सहायता में किया जाएगा, जो COVD-19 के प्रभाव के कारण टेलीविजन और फिल्म निर्माण बंद होने के कारण रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नेटफ्लिक्स चीफ कंटेंट ऑफिसर टेड सरानडोस ने कहा कि नेटफ्लिक्स, कम्पनी में कार्यरत लोगों के अलावा अन्य लोगों की मदद के लिए भी आगे आना चाहती है।

एक बयान में उन्होंने कहा, “COVID-19 संकट रचनात्मक क्षेत्र सहित कई उद्योगों के लिए विनाशकारी है। लगभग सभी टेलीविजन और फिल्म निर्माण अब वैश्विक रूप से बंद हो गए हैं। इनमें इलेक्ट्रीशियन और ड्राइवर शामिल हैं, जिनमें से कई को प्रति घंटा मजदूरी के अनुसार भुगतान किया जाता है और प्रोजेक्ट्स के आधार पर काम मिलता है। इस वर्ग ने अच्छे समय में नेटफ्लिक्स की मदद की है। हम इस कठिन समय में उनकी मदद करना चाहते हैं, खासकर तब, जब कि सरकारें अभी भी विश्लेषण कर रही हैं कि वो मदद प्रदान करेंगी या नहीं?”

टेड सरानडोस ने कहा कि जो हो रहा है अभूतपूर्व है और हम इसका अनुमान नहीं लगा सकते हैं। हम लोग केवल उतने ही मजबूत हैं, जितने कि वो लोग जो हमारे साथ काम करते हैं और नेटफ्लिक्स भाग्यशाली है जो इस चुनौतीपूर्ण समय में उन लोगों की मदद कर पा रहा है, जिन्हें इस आपदा ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया है।

बता दें कि कोरोना वायरस के कारण आधी दुनिया घरों में कैद है। लाखों लोग घर से काम कर रहे हैं। चीन के बाद यूरोप महाद्वीप पर कोरोना ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया है। हाल ही में यूरोपियन यूनियन ने नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो स्ट्रीमिंग जैसे प्लेटफॉर्म्स से कहा था कि वे हाई डिफिनेशन (एचडी) क्वालिटी में विडियो दिखाना बंद करें, नहीं तो यूजर्स के बढ़ने के साथ इंटरनेट आउटेज की समस्या हो सकती है। इसके बाद नेटफ्लिक्स ने एचडी वीडियो बंद कर दिया है।

यूरोपियन यूनियन के आग्रह के बाद यूट्यूब ने भी नेटफ्लिक्स के रास्ते पर चलते हुए हाई डेफिनेशन (एचडी) और फुलएचडी की बजाय स्टैंडर्ड डेफिनेशन (एसडी) क्वालिटी में विडियो दिखाने का फैसला लिया है। हालाँकि यह फैसला फिलहाल सिर्फ यूरोप के लिए है।