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दिल्ली हिंसा: AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन का भाई शाह आलम गिरफ्तार

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंदू विरोधी हिंसा मामले में आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम को पुलिस ने आज गिरफ्तार कर लिया। शाह आलम का नाम चाँदबाग में भड़की हिंसा के मद्देनजर जाँच में सामने आया था। उसपर चाँदबाग हिंसा में शामिल होने का आरोप है। साथ ही ये भी आरोप है कि अंकित शर्मा की हत्या के वक्त वह घटनास्थल पर मौजूद था। इसलिए अब केस में उससे पूछताछ की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंसा के काफी समय बाद तक पुलिस का शक शाह आलम की तरफ नहीं गया था। जिसके कारण उसके ऊपर कोई एफआईआर नहीं हुई और न ही उससे कोई पूछताछ हुई। बस फिर क्या, इसी का फायदा उठाकर वह फरार हो गया।

जानकारी के अनुसार, शाह आलम का नाम गवाहों ने अपने बयान में लिया था। इसके मद्देनजर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उससे पूछताछ करनी चाहती थी। मगर, जब उसकी खोजबीन हुई तो पता चला कि वह फरार है। प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया था कि हिंसा वाले दिन शाह आलम अपने भाई यानी ताहिर हुसैन की छत पर दंगाइयों के साथ मौजूद था और हिंसा भड़काने में उसका बहुत बड़ा हाथ है।

हालाँकि, शाह आलम के खिलाफ तब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी, लेकिन क्राइम ब्रांच को पूछताछ में लोगों ने उसका नाम बताया था। इसलिए उसकी तलाश की जा रही थी। चश्मदीदों ने बताया था कि अंकित शर्मा को ताहिर के गुंडे उसकी इमारत में ले घसीटकर ले गए थे। बाद में उनका शव नाले से बरामद किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि उन्हें 400 से अधिक बार गोदा गया था।

चश्मदीदों ने ये भी बताया था कि इस इमारत में शाह आलम भी मौजूद था। इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद ताहिर हुसैन भी फरार हो गया था। बाद में उसने दिल्ली की एक अदालत में अग्रिम जमानत याचिका डाली। लेकिन पिछले गुरुवार को अदालत में सरेंडर करने से पहले ही पुलिस ने दबोच लिया।

सीताराम येचुरी के लिए तीसरी बार भी राज्यसभा का रास्ता बंद, अपनी पार्टी के नेता ही बने रोड़ा

भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी के लिए तीसरी बार भी राज्यसभा तक पहुँचने का रास्ता बंद हो गया। उन्हें उच्च सदन भेजने को लेकर उनकी खुद की पार्टी में आपसी मतभेद नजर आए। बताया जा रहा है कि पार्टी की केंद्रीय समिति ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल से कॉन्ग्रेस के समर्थन से उन्हें उच्च सदन में भेजने की माँग को रद्द कर दिया।

जानकारी के अनुसार, येचुरी को तीसरी बार भी राज्यसभा भेजने से रोकने के लिए केंद्रीय समिति के 45-50 सदस्यों ने वोट किया। जबकि केवल 25-30 ने उनका समर्थन किया।

इधर, बंगाल के नेताओं का तर्क है कि यदि वह उनके दिए ऑफर यानी समर्थन का फायदा नहीं उठाते हैं तो पार्टी का उच्च सदन में पश्चिम बंगाल से कोई प्रतिनिधित्व नहीं रह जाएगा। लेकिन, CPIM के कुछ नेताओं का मत है कि यदि येचुरी निर्विरोध चुने जाते हैं तो कॉन्ग्रेस के वोट लेने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी। वहीं कुछ का तर्क है कि येचुरी को विपक्षी राजनीति में सब जानते हैं और संसद में उनकी उपस्थिति से पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर पैठ बढ़ेगी। 

बता दें, पश्चिम बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों के लिए 26 मार्च को चुनाव होने हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल में विधायकों के आँकड़े के लिहाज से 4 राज्यसभा सीटें टीएमसी के हिस्से में जाना तय हैं और बाकी एक सीट अन्य के खाते में जा सकती है।

ऐसे में इस एक राज्यसभा सीट पर कॉन्ग्रेस और मार्क्सवादी पार्टी मिलकर अपना कब्जा जमा सकती हैं। लेकिन, बंगाल में सीपीएम ही नहीं पूरे वामपंथी दलों को भी मिलाने के बाद इतने विधायक नहीं हो रहे हैं कि वे अपने दम पर सीताराम येचुरी को राज्यसभा भेज सकें।

हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सीताराम येचुरी को राज्यसभा न भेजना एक और ऐतिहासिक गलती होगी। वहीं, पोलित ब्यूरो के सदस्य प्रकाश करात के नेतृत्व में एक वर्ग का मत है कि वह कॉन्ग्रेस के समर्थन से येचुरी के राज्यसभा जाने का समर्थन किसी भी रूप में नहीं करते हैं। उनका कहना है कि पार्टी के महासचिव का कॉन्ग्रेस के समर्थन से चुना जाना पार्टी की उस विचारधारा के खिलाफ है जिसमें उस पार्टी के साथ गठबंधन न करने का फैसला लिया गया है।

गौरतलब है कि येचुरी 2005 से 2017 तक राज्यसभा सदस्य रहे थे, लेकिन 2017 में पार्टी ने उन्हें फिर राज्यसभा में भेजने से इनकार कर दिया। हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी ने पहले भी उन्हें राज्यसभा में भेजने का ऑफर दिया था। मगर, यह तीसरी बार है जब येचुरी को राज्यसभा भेजने में उनकी पार्टी ही रोड़ा बन गई हो।

इंडिया टुडे से बातचीत में एक पार्टी लीडर ने येचुरी को राज्यसभा न भेजे जाने पर कहा कि ये पार्टी की पुरानी परंपरा है कि महासचिव इलेक्शन नहीं लड़ सकता। जबकि दूसरे नेताओं का कहना है कि राज्यसभा जाने के लिए पार्टी एक नेता को दो बार से ज्यादा नॉमिनेट नहीं किया जा सकता।

अलीगढ़ में रंग-बिरंगे तिरपालों से ढक दी गई मस्जिद: होली पर सुरक्षा चाक-चौबंद, 5000 को नोटिस जारी

उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द बनाने रखने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है। संवेदनशील इलाक़ों पर ख़ास नज़र रखी जा रही है। ऐसे में अलीगढ़ में एक मस्जिद को ढक दिया गया ताकि कोई भी अप्रिय घटना न हो। देश और दुनिया में होली का त्यौहार मंगलवार (मार्च 10, 2020) को है लेकिन इसका खुमार इसके कई दिनों पहले से ही चढ़ जाता है और रंग-गुलाल उड़ने लगते हैं। इसीलिए एहतियातन मस्जिद को शामियाने से ढका गया है।

अलीगढ़ के एसपी अभिषेक ने बताया कि शहर के अति संवेदनशील अब्दुल करीम चौराहे पर स्थित हलवाईयान मस्जिद को शामियाने से ढक दिया गया है। उन्होंने बताया कि ऐसा इसीलिए किया गया है ताकि कहीं कोई मस्जिद पर रंग न फेंक दे। इस क्षेत्र में सांप्रदायिक घटनाओं का पुराना इतिहास रहा है और इसीलिए प्रशासन पहले से ही तैयार है। हालाँकि, ये भी कहा जा रहा है कि इस मस्जिद को पहले भी ढका जाता रहा है। लेकिन, इस बार सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शनों को देखने हुए प्रशासन ज्यादा सावधानी बरत रहा है।

मस्जिद को ढकने के लिए दो तरह के तिरपालों का प्रयोग किया गया है। एक काले तिरपाल और एक लाल-पीले तिरपाल का प्रयोग किया गया है। अलीगढ़ में होली पर व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए क़रीब 5000 लोगों नोटिस जारी किया गया है और 1000 लोगों को पाबंद किया गया है। किसी छत पर पत्थर वगैरह या कोई संवेदनशील चीज न रखी हो, इसके लिए ड्रोन कैमरों से छतों की निगरानी की जा रही है। पुलिस बल लगातार पेट्रोलिंग में लगी हुई है।

रैपिड एक्शन फोर्स को भी पेट्रोलिंग के काम में लगाया गया है। अब्दुल करीम चौक पर बड़ी संख्या में लोग होली खेलने आते हैं, इसीलिए यहाँ ख़ास सुरक्षा-व्यवस्था रखी गई है। जहाँ तक लोगों की होली की तैयारी की बात है, बाजारों में मोदी-योगी के चित्र वाले पतंगों की धूम मची हुई है। अलीगढ़ में होली के साथ-साथ पतंगबाजी का प्रचलन रहा है और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए प्रशासन भी इसे बढ़ावा देता रहा है।

2 बाइक की टक्कर, 2 संप्रदाय के लोग… और एक दर्जन घायल: ‘हिंदू-मुस्लिम तनाव वाली मीडिया रिपोर्ट फर्जी’

मेरठ के लिसाड़ीगेट थानाक्षेत्र में रविवार (मार्च 8, 2020) की दोपहर 2 अलग-अलग संप्रदायों के 2 पक्षों में टकराव व मारपीट का मामला सामने आया। जानकारी के अनुसार, ये तनाव बाइक टकराने के कारण भड़का। लेकिन, देखते ही देखते इसने इतना तूल पकड़ लिया कि दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सांप्रदायिक झगड़े की खबर सुनकर पुलिस भी एक्शन में आ गई और सूचना के आधार पर फौरन मौक़े पर पहुँची। साथ ही झगड़ा करने वाले दोनों पक्षों को पकड़कर थाने ले गई, जहाँ इन पर आगे की कार्रवाई हुई।

खबरों के मुताबिक, मेरठ के लिसाड़ीगेट थानाक्षेत्र में 2 युवकों की बाइक टकराने पर आपस में बहस शुरू हुई थी। मगर, धीरे धीरे मामला गाली-गलौच तक पहुँच गई और थोड़ी देर में दोनों युवकों के बीच मारपीट हो गई। हाथापाई शुरू होते ही कुछ अन्य लोग भी यहाँ पहुँचे और उन्होंने भी घटनास्थल पर माहौल बिगाड़ने का काम किया। इस झड़प में एक दर्जन लोगों के घायल होने की सूचना है, जिन्हें बाद में इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

बताया जा रहा है कि घटना की सूचना मिलने के बाद कई थानों की पुलिस फोर्स मौक़े पर पहुँची और दोनों पक्ष के लोगों को अपने साथ थाने ले गई। मगर, थाने में भी ये मामला शांत नहीं हुआ और दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी। पुलिस ने किसी प्रकार वहाँ भी उन्हें समझा बुझाकर शांत करवाया और आगे की कार्रवाई की।

रिपोर्ट के अनुसार पुलिस का कहना है कि होली के त्योहार पर माहौल खराब करने की आशंका को लेकर दोनों पक्षों पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी तरह क्षेत्र का माहौल नहीं  बिगाड़ने दिया जाएगा।

यहाँ बता दें कि बाइक टकराने को लेकर हुई इस झड़प को मीडिया रिपोर्ट्स में साम्प्रदायिक हिंसा का रूप देकर पेश किया जा रहा है। लेकिन ऑपइंडिया ने जब थाने में संपर्क किया तो पुलिस ने कहा कि इस घटना में साम्प्रदायिक हिंसा जैसा कोई मामला नहीं है।

गौरतलब है कि मेरठ में ही कल पुलिस ने होली पर हुड़दंग मचाने की तैयारी करने के आरोप में 250 लोगों को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि इनमें कई ऐसे लोग भी गिरफ्तार किए गए हैं, जिन्होंने पूछताछ में होली पर हिंसा करने की प्लानिंग की बात कही है। एसएसपी का कहना है कि होली पर हिंसा करने वाले वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। होली पर हुड़दंग करने वालों का 5 साल का रिकॉर्ड खंगालने के बाद ही यह कार्रवाई की गई है।

सरफराज ने 8 साल की बच्ची से किया रेप, सजा मिली – टकला कर जूते-चप्पल की माला पहनाया और छोड़ दिया

झारखंड के गिरिडीह जिले के तिसरी थाना क्षेत्र के एक गाँव में 8 वर्षीय बच्ची के साथ 30 वर्षीय युवक द्वारा दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। घटना शनिवार (मार्च 7, 2020) की बताई जा रही है। पीड़िता के घर पर कोई नहीं था। वो अकली थी। बच्ची के पिता किसी काम से चंदौरी गए थे और उसकी माँ भी दो बच्चों के साथ एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए गई थी।

इसी बीच आरोपित सरफराज मौका पाकर पीड़िता के घर में घुस गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसका विरोध करने पर सरफराज ने बच्ची का मुँह दबा दिया। तभी बच्ची के पिता वापस आ गए और उन्होंने घर का दरवाजा बंद देख खटखटाया। उन्होंने बच्ची को दरवाजा खोलने के लिए कहा। मगर सरफराज ने उसका मुँह बंद कर दिया था। थोड़ी देर बाद सरफराज ने दरवाजा खोला और पीड़िता के पिता को धक्का देकर भागते बना।

अंदर की स्थिति देख कर पीड़िता के पिता को सारा माजरा समझ में आ गया। उन्होंने गाँव के लोगों को बुला कर घटना की जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीण आरोपित मोहम्मद सरफराज को पुलिस के हवाले करने के बजाए पंचायत ले गए। पंचायत का फैसला आश्चर्यजनक रहा। फैसले के अनुसार, आरोपित सरफराज का बाल मुड़ाकर जूते-चप्पल की माला पहनाकर गाँव में घुमाया गया और फिर छोड़ दिया गया। पीड़िता के पिता थाना में केस करना चाह रहे थे, लेकिन कुछ लोगों ने मना कर दिया।

हालाँकि गाँव की पंचायत के फैसले से पीड़िता के पिता संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने रविवार (मार्च 8, 2020) को थाना प्रभारी तिसरी को आवेदन देकर कार्रवाई की माँग की। आवेदन के आधार पर पोक्सो एक्ट के तहत आरोपित पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पीड़िता के पिता ने पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई एफआईआर में कहा है कि आरोपित सरफराज घर आया और बच्ची से पूछा कि घर में कौन-कौन है। बच्ची बोली कि माता-पिता बाहर गए हैं तो वह अंदर घुस गया और दरवाजा बंद कर दुष्कर्म किया।

पीड़िता के पिता के एफआईआर के बाद पुलिस आरोपित की तलाश में जुट गई है। थाना प्रभारी उत्तम कुमार उपाध्याय ने बताया कि आवेदन मिलने के बाद आरोपित की गिरफ्तारी के लिए तीन ठिकानों पर छापेमारी की जा चुकी है। आरोपित फरार है। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। डीएसपी नवीन कुमार इस मामले की जाँच करने घटना स्थल पहुँचे और पीड़िता को मेडिकल जाँच के लिए सदर अस्पताल भेजा गया है।

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दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में जिन-जिन की हुई नृशंस हत्या, सभी परिवारों को 3-3 लाख रुपए: कपिल मिश्रा का ऐलान

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में दिलबर नेगी की नृशंस हत्या का मामला रुह कँपाने वाला है। उन्हें जिस प्रकार दोनों हाथ काटकर जिंदा जलाया गया, उसे शायद ही उनका परिवार भूल पाए। इसी बीच मानवीय संवेदना और मदद के तौर पर भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अपने प्रयासों से उनके परिवार को आर्थिक रूप से राहत मुहैया कराने के लिए 3 लाख रुपए देने का ऐलान किया है।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इसकी जानकारी अपने ट्विटर पर दी। उन्होंने बताया कि वे दंगा पीड़ित हिंदू परिवारों से मिले और उन्होंने सबकी मदद करने का फैसला किया। उन्होंने ऐलान किया कि इन दंगों में जिन 7 लोगों की नृशंस हत्या की गई, उन सभी को 3-3 लाख रुपए दिए जाएँगे। वहीं, 5 गंभीर रूप से घायलों को 2-2 लाख रुपए दिए जाएँगे जबकि 3 पीड़ित परिवारों को 1-1 लाख रुपए दिए जाएँगे। उन्होंने ट्वीट के जरिए ऐलान किया कि वे इस काम के लिए जल्द से जल्द फंड इकट्ठा करने का काम शुरू करने वाले हैं।

इस ट्वीट के बाद कपिल मिश्रा ने एक और ट्वीट किया और बताया कि जिनकी निर्ममता से हत्या हुई है, वे उन सभी परिवारों की मदद करने के लिए तत्पर हैं। उन्होंने लिखा, “कुल 14 लोगों का पता चल चुका हैं जिनकी निर्ममता से हत्या हुई है, हम उन सभी परिवारों की मदद करेंगे। कई लोगो को गोलियाँ लगी हैं, किसी की चाय की, पान की दुकान, रिक्शा, रेहड़ी जला दिया गया हैं। हम किसी भी एक परिवार को टूटने या कमजोर होने नहीं देंगे। ये संकल्प हैं।”

गौरतलब है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा के दौरान 24 फरवरी को शिव विहार में दिलबर नेगी हत्या मामले में क्राइम ब्रांच की SIT-2 ने शहनवाज नाम के आरोपित को गिरफ्तार किया था। शहनवाज पर आरोप है कि उसने हिंसा के दौरान मिठाई की दुकान में काम करने वाले 22 वर्षीय दिलबर नेगी को बेहरमी से मारा और उसके दोनों हाथ काटकर उसे जिंदा जला दिया। उधर अंकित शर्मा की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन को गिरफ्तार करके उससे पूछताछ जारी है।

हाथ काटा, पैर काटा, माँस के टुकड़े की तरह आग में फेंक दिया: मृतक दिलबर नेगी का विडियो वायरल

दिलबर सिंह नेगी के हाथ-पैर काट दंगाइयों ने दुकान की आग में झोंका: बचकर भागे श्याम ने बताई आपबीती

…जिन दिलबर नेगी का हाथ-पैर काटकर आग में फेंका था, उनकी हत्या के आरोप में शाहनवाज गिरफ्तार

होली पर हिंसा की प्लानिंग: UP पुलिस ने 5 साल पुराना रिकॉर्ड खँगाल 250 लोगों को किया गिरफ्तार

मंगलवार (मार्च 10, 2020) को होली और सोमवार मतलब आज (मार्च 9, 2020) को होलिका दहन है। इसके लिए उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। राज्य के मेरठ में सीएए के विरोध में हिंसा के इनपुट मिलने के बाद पुलिस अलर्ट मोड पर है। मेरठ जनपद को तीन सुपर जोन, 9 जोन और 31 सेक्टरों में बाँटकर सुरक्षा की जा रही है। होली पर हुड़दंग करने वालों का पिछले पाँच साल का रिकॉर्ड खँगालकर उनको पकड़ने के लिए पुलिस ने अभियान चला रखा है। इसमें अभी तक 250 बवालियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

होली पर हुड़दंग मचाने की तैयारी करने वाले इन 250 लोगों को पुलिस ने अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों ने पूछताछ में होली पर हिंसा करने की प्लानिंग की बात कबूली है। एसएसपी अजय साहनी का कहना है कि होली पर हिंसा करने वाले वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होली पर हुड़दंग करने वालों का पाँच साल का रिकॉर्ड खँगालने के बाद ही गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है।

बताया जा रहा है कि मेरठ जनपद में 1421 जगहों पर होलिका दहन का कार्यक्रम होने वाला है। इनमें से 7 अतिसंवेदनशील इलाके हैं, जबकि 48 स्थान संवेदनशील हैं। इन जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सुपर जोन में जोनल मजिस्ट्रेट के साथ एसपी सिटी, एसपी देहात व एसपी क्राइम को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। 6 एडिशनल एसपी, 8 सीओ, 40 इंस्पेक्टर, दो कंपनी आरएएफ, चार कंपनी पीएसी और 1400 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। यह सुरक्षा व्यवस्था 12 मार्च की रात तक लागू रहेगा।

रविवार (मार्च 8, 2020) की शाम शहर के एसपी डॉ अखिलेश नारायण सिंह के नेतृत्व में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस ने पैदल मार्च निकाला। इससे पहले एसएसपी अजय साहनी को सूचना मिली थी कि कुछ अराजत तत्व नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर होली पर हिंसा भड़का सकते हैं, जिसके बाद उन्होंने शनिवार (मार्च 7, 2020) देर रात जनपद के सभी थानेदारों को संदिग्ध लोगों के गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे। इसके बाद सभी थानेदारों ने अपने-अपने इलाकों में दबिश दी और 250 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया।

हिंदू युवा वाहिनी के UP अध्यक्ष पर हमला, घात लगाकर बैठे 4-5 अराजक तत्वों ने काफिले पर किया पथराव

उत्तर प्रदेश में हिंदूवादी नेताओं पर हमले की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। पिछले साल कमलेश तिवारी की निर्मम हत्या ने सबको झकझोर दिया था और अभी हाल में रणजीत बच्चन की हत्या से प्रदेश सकते में आ गया था। अब ऐसे ही हमले का एक और मामला सामने आया है। घटना आजमगढ़ की है। यहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संगठन हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश राय के काफिले पर कल रात मेंहनगर में पथराव किया गया।

पथराव की इस घटना में बैठे प्रदेशाध्यक्ष सहित उनके समर्थक बाल-बाल बचे। हालाँकि इस पत्थरबाजी के कारण उनका वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के फौरन बाद प्रदेश अध्यक्ष ने पुलिस को इस संबंध में सूचना दी और पुलिस बिना कोई देरी किए छानबीन में जुट गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राकेश राय जौनपुर जिले के केकरात स्थित सेनपुर गाँव में एक कार्यक्रम में भाग लेने गए थे। मगर कार्यक्रम के बाद लौटते हुए उनके काफिले पर ये हमला हो गया। बताया जा रहा है कि देर रात जब राकेश राय अपने काफिले के साथ मेंहनगर थाना क्षेत्र पहुँचे, तभी गौरा गाँव में मौजूद कुछ अराजक तत्वों ने उन पर हमला कर दिया।

न्यूज 18 की खबर के अनुसार, हिंदू युवा वाहिनी नेता राकेश राय ने बताया कि नहर के किनारे करीब 4 से 5 की संख्या में अराजक तत्वों ने उनके काफिले पर पथराव किया। इस हमले में वे और उनके कार्यकर्ता बाल-बाल बच गए, लेकिन उनकी गाड़ी का शीशा पूरी तरह से चकनाचूर हो गया।

इस मामले की जाँच में जुटे एसपी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने बताया कि मौक़े उन्हें पत्थर और चप्पलें मिली हैं। फिलहाल पुलिस इनकी जाँच कर रही है। इस घटना को अंजाम देने के पीछे जिसका भी हाथ होगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

‘…भारत में रहना है, तो मराठी सीखो’ – PM मोदी से वीरता पुरस्कार पा चुकी बच्ची के साथ शिवसेना नेताओं की बदसलूकी

अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भी नेता राजनीति करने से बाज नहीं आते हैं। इसी राजनीति का शिकार इस साल का राष्‍ट्रीय बहादुरी पुरस्‍कार जीतने वाली जेन सदावर्ते हुई हैं। सदावर्ते ने महिला दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शिवसेना नेता पर उन्‍हें अपमानित करने का आरोप लगाया है। हालाँकि, शिवसेना की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई सफाई नहीं दी गई है।

जेन सदावर्ते ने कहा कि महिला दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में शिवसेना नेताओं द्वारा उन्हें भाषण देने सिर्फ इसलिए रोक दिया गया क्योंकि वो मराठी में नहीं बोल रही थीं। उन्होंने कहा, “जब मैंने हिंदी और अंग्रेजी में बात की, तो हर किसी के पास मेरा संदेश पहुँचा। लेकिन मुझे नहीं पता कि मंच पर बैठे लोगों के साथ क्या हुआ। वे अचानक से गुस्सा हो गए और मुझ पर हमला किया। मंच पर पैनल में शिवसेना नेता भी मौजूद थे।”

सदावर्ते ने कहा, “मैं उन मुद्दों के बारे में बात कर रही थी जो भारत में गलत हो रहे हैं जैसे कि शनिवार और रविवार को बच्चों को मध्याह्न भोजन नहीं दिया जा रहा है। मैंने ट्रांसजेंडर को समानांतर आरक्षण दिए जाने के बारे में बात की है। ये वो मुद्दे हैं, जिसके बारे में मैंने बात की।” वो आगे कहती हैं, “मुझे नहीं पता कि वहाँ मौजूद विधायकों और शिवसेना के प्रतिनिधियों के साथ क्या हुआ। उन्होंने मुझे अपमानित करना शुरू कर दिया। वे मंच पर झूठ बोलने लगे कि हमने आरक्षण दिया है और दावा किया है कि वे उस राज्य के हैं और वो हमसे बेहतर जानते हैं।” 

सदावर्ते ने कहा कि उन्हें अपनी इच्छा से किसी भी भाषा में बोलने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने आगे कहा, “वे लोग हमारे अभिव्यक्ति के अधिकार का शोषण कर रहे हैं। मेरे पास अंग्रेजी और हिंदी दोनों संघीय भाषा में बोलने का अधिकार है। उन्होंने मुझसे कहा कि अगर मैं भारत में रहना चाहती हूँ तो मुझे मराठी सीखनी पड़ेगी।” उन्होंने कहा कि वो जिस भाषा को बोलना चाहती हैं, उसे बोलने का उनको पूरा अधिकार है।

बता दें कि सदावर्ते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीरता पुरस्कार से सम्मानित कर चुके हैं। वो सातवीं कक्षा में पढ़ती हैं, लेकिन समाज में फैली कुरीतियों को लेकर उनका नजरिया किसी वयस्‍क व्‍यक्ति से कम नहीं है। वह समाज की बुराइयों को लेकर आवाज उठाती रहती हैं। इससे पहले भी उन्होंने शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन के दौरान 4 महीने की बच्ची की मौत पर आवाज उठाते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बोबडे को पत्र लिखा था और इस मामले पर संज्ञान लेने के लिए कहा था।

जेन ने सीजेआई बोबडे को भेजे पत्र में लिखा था कि जनवरी 30, 2020 को शाहीन बाग में एक बच्ची की मौत पर संज्ञान लेते हुए ऐसे विरोध प्रदर्शनों में बच्चों को शामिल किए जाने पर रोक लगाई जाए। जिस पर सीजेआई ने संज्ञान लिया था।

प्रियंका गाँधी कनेक्शन के बाद अब सेक्रेट्री का खुलासा: कपूर की बेटियों वाली कंपनी से होता था लोन-दलाली का खेल

ईडी ने रविवार (मार्च 8, 2020) को राणा कपूर की रिमांड एप्लीकेशन को कोर्ट में जमा कर दिया। इस एप्लीकेश में ईडी ने राणा कपूर के सेक्रेट्री का हवाला देकर बताया कि राणा कपूर के सचिव ने ही DHFL के अधिकारियों के साथ कॉर्डिनेट किया था। जिसमें DOIT अर्बन वेंचर्स को कथित रूप से 600 करोड़ रुपए वापस मिले। बता दें कि DOIT अर्बन वेंचर्स को राणा कपूर की तीनों बेटियों द्वारा संचालित किया जाता है।

ईडी के अनुसार, यस बैंक द्वारा डीएचएफएल समूह की कंपनियों को 4,450 करोड़ रुपए के डिबेंचर निवेश और ऋण के बदले में ये उल्लेखित पैसा दिया गया था। इसके अलावा ईडी का यह भी आरोप है कि कपूर ने यस बैंक में अपने पद का कई मामलों में गलत इस्तेमाल करके करीब 2000 करोड़ रुपए अपनी कंपनी और अपने परिवार के सदस्यों द्वारा चलाई जा रही कंपनियों के लिए किकबैक (दलाली) के रूप में हासिल किए।

जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर, दीवान हाउसिंह (डीएचएफएल) और डीओआईटी अर्बन वेंचर्स कंपनी के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। इसके बाद ईडी और अन्य जाँच एजेंसियों ने इनके ख़िलाफ़ पड़ताल की और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में कपूर को गिरफ्तार कर लिया।

ईडी के मुताबिक यस बैंक पर यह भी आरोप है कि उसने अप्रैल-जून 2018 के बीच डीएचएफएल में 3,700 करोड़ रुपए निवेश किए और बाद में 750 करोड़ रुपए DHFL समूह की अन्य कंपनी को दिए। लेकिन बाद में बैंक ने धन की वसूली के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए।

कपूर (62) से इस संबंध में पूछताछ की जा रही है। जिसमें मालूम हुआ है कि डीओआईटी अर्बन वेंचर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड कपूर परिवार की ही कंपनी है और उसे घोटाले से प्रभावित गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी डीएचएफल को 3000 करोड़ रुपए का कर्ज देने के बाद 600 करोड़ रुपए की राशि मिली, जो कथित तौर पर रिश्वत थी।

इसके अतिरिक्त डीएचएफएल के अध्यक्ष राजेंद्र मिराशी ने अपने बयान में बताया कि ED कि DOIT अर्बन वेंचर्स ने डीएचएफएल को 735 करोड़ रुपए के वैल्यूएशन के साथ पांच प्रॉपर्टीज़ दी। लेकिन बाद में मालूम पड़ा कि संपत्ति की खऱीद प्राइज केवल 40 करोड़ रुपए ही है। यानी डीएचएफएल से एक कंपनी को लोन जारी करवाने के लिए 40 करोड़ की संपत्ति की कीमत को बढ़ा-चढ़ाकर 735 करोड़ रुपए का बताया गया। जिसमें आरोप है कि कंपनियों से मिली रिश्वत से राणा कपूर एंड फैमिली ने संपत्ति में 2000 करोड़ रुपए का निवेश किया। हालाँकि, अभी इन तमाम आरोपों पर राणा कपूर ने चुप्पी साध रखी है। हिरासत में जान से पहले जब मीडिया ने उनसे पूछताछ करने की कोशिश की तो भी वे चुप्पी साधते नजर आए।

मिराशी के अनुसार, वह कपूर की तीनों बेटियों से कभी नहीं मिले। लेकिन उन्होंने राणा कपूर की सीनियर एक्जिक्यूटिव सेक्रेट्री से कॉर्डिनेट किया था। उनके अनुसार, कपिल वाधवान या उनके असिस्टेंट एस गोविंदन ने ही मिराशी को ट्रांजेक्शन करने के लिए निर्देश दिए।

मिराशी ने ईडी को बताया कि उसके बाद से उनके बीच कोई बिजनेस एक्टिविटी नहीं हुई और न ही कोई राजस्व आता दिखाई दिया। मगर फिर फिर भी 600 करोड़ रुपए का ऋण इस तरह से संरचित किया गया था, जैसे 2023 में एकल भुगतान होना हो। लेकिन वास्तविकता में अब तक सिर्फ़ उनसे ब्याज लिया जाता रहा।

इन सब पहलुओं के अलावा ईडी के अधिकारी के मुताबिक, जाँच के दौरान कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनसे साफ होता है कि कपूर परिवार के पास लंदन में भी कुछ संपत्ति है। अब ईडी इस संपत्ति को हासिल करने के लिए इस्तेमाल की कई रकम का सोर्स तलाश रही है। ईडी ने कपूर के खिलाफ कार्रवाई शुक्रवार को शुरू की थी। इसी दिन देर रात को उनके घर पर छापा मारा था। जाँच एजेंसी की टीम ने मुंबई के समुद्र महल टॉवर स्थित कपूर के घर पर देर रात तक छानबीन की थी।

बता दें कि इससे पहले ने सीबीआई, दीवान हाउसिंग फाइनेंस लि (DHFL) पर उत्तर प्रदेश में बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों के भाविष्य निधि कोष से 2200 करोड़ रुपए के गबन के आरोप में पहले ही मुकदमा कायम कर चुकी है। इसके साथ ही इस बैंक के स्वामित्व का पुनर्गठन करने की योजना पर काम भी शुरू कर दिया है ताकि बैंक को बचाया जा सके और इसमें धन जमा करने वाले इसके ग्राहकों का हित सुरक्षित किया जाएगा। आरबीआई की योजना के मसौदे के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक यस बैंक में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगा।

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