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भारत अद्भुत है, अफ्रीका को इससे सीखना चाहिए: नॉर्थ-ईस्ट का दौरा कर चकित हुए केविन पीटरसन

इंग्लैंड के दिग्गज क्रिकेटर और स्विच हिट मारने के लिए विख्यात केविन पीटरसन भारत आकर अभिभूत नज़र आ रहे हैं। वो कई दिनों से ‘नेशनल जियोग्राफिक’ चैनल के लिए हो रहे एक डॉक्यूमेंट्री शूट के लिए भारत आए हुए हैं और उत्तर-पूर्व का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी के तटवर्ती इलाक़ों से लेकर नॉथ-ईस्ट के जंगलों तक का भ्रमण किया और भारत के लोगों की ख़ूब प्रशंसा की। केविन पीटरसन ने माना है कि भारत के लोग जानवरों से काफ़ी प्यार करते हैं और उनकी ख़ूब देखभाल करते हैं।

पीटरसन ने एक कुत्ते के साथ फॉरेस्ट अधिकारियों की एक फोटो शेयर की। इनमें फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के जवान हथियारों के साथ दिख रहे हैं। उन्होंने कुत्ते के बारे में लिखा कि ये भले ही हिंसक हो लेकिन ये उतना ही अनुशासित और प्रभावशाली हैं। उन्होंने लिखा कि वो जितना भी भारत भ्रमण करते हैं, जानवरों की देखभाल को लेकर यहॉं के लोगों के समर्पण से उतना ही अभिभूत हो जाते हैं। उन्होंने लिखा कि भारत को ऐसे लोगों पर गर्व होना चाहिए, जो निःस्वार्थ भाव से अपने काम में लगे हुए हैं।

एक बात के लिए तो पीटरसन ने अफ्रीका को भी भारत से सीखने की सलाह दी। पीटरसन ने कहा कि भारत में गैंडों की जनसँख्या तेज़ी से बढ़ रही है और अफ्रीका को इस मामले में भारत से सीख लेकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी दुर्लभ प्रजातियों को बचाना हमारी जिम्मेदारी है और भारत में ये काम बखूबी किया जा रहा है।

केविन पीटरसन अपने भारत प्रवास के दौरान असम स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क भी पहुँचे। वहाँ पर गैंडों की संख्या को देखते हुए उन्होंने इसे ‘वन हॉर्न नेशन’ कहा। उन्होंने लिखा कि भारत अद्भुत है। पीटरसन ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में उन्हें इस देश ने काफ़ी कुछ दिया है। बकौल पीटरसन, भारत के सुदूर क्षेत्रों में घूमने का उन्हें मौका मिला है, जो उनकी यात्रा का सबसे रोचक भाग है। उन्होंने नॉर्थ-ईस्ट के दृश्यों को शानदार करार दिया।

केविन पीटरसन जो डॉक्यूमेंट्री शूट कर रहे हैं, उसमें बताया जाएगा कि कैसे आपदा आने पर ब्रह्मपुत्र के किनारे से जानवरों व लोगों को वहाँ से भागना पड़ता है। उन्होंने बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे हाथियों से उनकी मुलाक़ात होती रहती है और ये काफ़ी उपजाऊ इलाक़ा है। पीटरसन ने भारत की महिलाओं को प्रेरणादायी बताया है।

24 मार्च को बुलेटप्रूफ मंदिर में शिफ्ट होंगे रामलला, फाइबर से बनाया जाएगा अस्थायी मंदिर

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण से पहले रामलला अस्थायी मंदिर में शिफ्ट किए जाएँगे। इसको लेकर काफी समय से अटकलें लगाई जा रही थी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने शनिवार को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट कर दी। उन्होंने बताया कि रामलला को वर्तमान टेंट वाले स्थान से अस्थायी मंदिर में 24 मार्च को शिफ्ट किया जाएगा।

श्रद्धालु 25 मार्च यानी चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से अस्थायी मंदिर में ही रामलला के दर्शन कर सकेंगे। बताया जा रहा है कि अस्थायी मंदिर का ब्लू प्रिंट तैयार हो गया है। यह गर्भ गृह से 150 मीटर की दूरी पर होगा। फाइबर से बना अस्थायी मंदिर बुलेटप्रूफ होगा। इस बार रामनवमी के दिन फाइबर के बने इस अस्थायी मंदिर मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन करेंगे।

खबरों के अनुसार रामलला मंदिर और रामभक्तों की सुरक्षा को और सख्त किया जाएगा। रामभक्तों की सुविधा का भी ख्याल रखते हुए ऐसे मार्ग बनाए जाने की योजना है जिससे दर्शन मार्ग को छोटा किया जा सके। चंपत राय ने बताया, “सुरक्षा विभाग नए स्‍थान का विकास कर रहा है। कमिश्नर और जिला मजिस्‍ट्रेट सभी कार्यों को देख रहे हैं। एक नए स्‍थान पर भगवान आएँगे तो उस स्‍थान और वहाँ देवताओं को भी प्रसन्‍न करना होगा। 25 मार्च यानी प्रथम नवरात्र से भक्‍तों के दर्शन भगवान के नए आसन पर हों, इसको लेकर तैयारी कर रहे हैं। अब रामलला टेंट में नहीं रहेंगे। मंदिर इतना मजबूत होगा कि हथौड़े से भी नहीं तोड़ पाना संभव नहीं होगा। अब तक भक्‍तों को दर्शन 50 फीट की दूरी से हो रहे थे। नए आसन पर भगवान के विराजने के बाद दूरी कम होगी।”

इसके पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए कार्यालय स्थल फाइनल किया। ट्रस्ट का कार्यालय राम कचहरी मंदिर में खोला जाएगा। राय के साथ जिलाधिकारी अनुज झा ने शनिवार को इस कार्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद राय ने यह भी बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की दूसरी बैठक रामनवमी के बाद 4 अप्रैल को अयोध्या में ही होगी।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 9 नवंबर को रामजन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुनाने के बाद केंद्र सरकार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट गठित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का गठन किया था। अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास तथा महासचिव विहिप के चंपत राय को बनाया गया था।

इस ट्रस्ट के मंदिर निर्माण विभाग के प्रमुख बनाए गए नृपेंद्र मिश्रा जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव भी रह चुके हैं। मंदिर निर्माण से संबंधित तैयारियों के सिलसिले में 20 फरवरी को वे अयोध्या पहुँचे थे। मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी लेने के बाद नृपेंद्र मिश्रा का यह पहला अयोध्या दौरा था, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की थी।

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होलिका बहुजन और दुर्गा वेश्या: दानवी को दलित आइकॉन बता बाल हत्या को बढ़ावा देती JNU वाली जड़ता

होली प्रह्लाद का पर्व है। यानी अत्यधिक आनंद का। वैसे ही आनंद का जिसका जिक्र सुदर्शन ने अपनी कहानी ‘हार की जीत’ के पहले ही वाक्य में ये कहकर किया है कि माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था। यह नवान्न के आनंद का पर्व है। इस रात जो अग्नि जलाई जाती है और उसमें गेहूँ की जो बालियाँ अग्नि में जलाई जाती हैं, उनका बाहरी हिस्सा जल जाता है, भीतर का अन्न बचा रहता है। वह जो बाहर की बाली के अंक में था, प्रह्लाद वही है। बाहर की बाली होलिका की तरह उसे लिए हुए है।

यह एक अच्छा संयोग था, जिससे प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु की घटना जुड़ गई। निःसंदेह कोई गेहूँ का अन्न प्रार्थना के स्तोत्र नहीं गढ़ता। प्रह्लाद का नृसिंह स्तोत्र श्रीमद्भागवत पुराण में दिया हुआ है। अतः होली एक युगान्तर का पर्व है। तब जब सभ्यता ने कृषि का आविष्कार किया और तब जब नृसिंह का अवतार हुआ।

अब JNU में जिस तरह की जड़ता आश्रय पाती है, वहाँ कुछ लोग ऐसे पोस्टर लगाते हैं, जिनमें होली को स्त्री विरोधी त्यौहार की तरह बताया जाता है। एक पोस्टर की भाषा देखिए: “Why does Brahmanical Patriarchal India celebrate burning of Holika, an Asura Bahujan woman? What is holy about Holi ? Holi will not only remain anti-bahujan, anti-dalit and anti-adivasi women in character, but is against womanhood itself. SAY NO TO HOLI!”

यह जड़ता यदि स्त्री के लिए वाकई आदर रखती तो महिषासुरमर्दिनी दुर्गा को वैश्या नहीं बता रही होती। इसके लिए तो वैसा ही IQ level चाहिए, जिसमें बुआ होलिका तो असुर बहुजन स्त्री हो, लेकिन भतीजा प्रह्लाद ब्राह्मनिकल हो। वो प्रह्लाद जो अपनी प्रार्थना में यह कहता हो:

“जो ब्राह्मण धन, कुलीनता, रूप, तप, विद्या, ओज, तेज, प्रभाव, बल, पौरुष, बुद्धि और योग के बारह गुणों से युक्त है किन्तु भगवान कमलनाभ के चरणों से विमुख है, उससे तो मैं उस चांडाल को श्रेष्ठ समझता हूँ जिसने अपने मन, वचन, कर्म, धन और प्राण श्रीहरि में लगा रखे हैं। वह अपने कुल को पवित्र कर देता है, किन्तु अधिक प्रभावशाली ब्राह्मण वैसा नहीं कर सकता।”

प्रॉब्लम ये है कि हमारी परंपरा की एक बड़ी कटी-पिटी सी पढ़ाई हमारे विश्वविद्यालयों में होती है। समाज में भी उनका एक बड़ा अबौद्धिक किस्म का निर्वहन सा होता है। इसी कारण अपने समय के सबसे निरंकुश सत्तावाद के प्रतिरोध और उसकी पराजय के प्रतीक हमारे त्यौहार अपनी गतानुगतिकता में अपनी चमक खोते गए हैं। नहीं तो होली, दशहरा, दीपावली सब अधिनायकवादी सत्ता के खिलाफ संघर्ष के स्मृति-संदर्भ हैं।

रावण हों या महिषासुर या हिरण्यकशिपु इनमें से कोई भी दलित-वंचित नहीं था। सब अधिकारिता का अधिकतम संघनन थे। इन्हें बहुजन जैसे चालू जुमलों का लाभ वही दे सकता है जिसका IQ level ही निगेटिव हो। आज के प्रतिरोध आंदोलनों की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि वे पुराने रेसिस्टेंस मूवमेंट्स से सबक नहीं लेते, बल्कि उनका मूर्खतापूर्ण तिरस्कार करते हैं, उन लोगों के चक्कर में आकर जिनका लक्ष्य भारतीय जीवन-शक्ति का दुर्दमन है।

आज होलिका जैसी दानवी के माध्यम से यदि वे वूमेनहुड का कोई विमर्श रचना चाहें तो प्रह्लाद की बाल-हत्या के प्रयास क्या कहलाएँगे? यह कौन सा वूमेनहुड है जो infanticide पर पनपता है? पूतना और होलिका को खलनायिका से नायिका बनाने की कोशिश बाल-हत्या के महिमामंडन की कोशिश है। उसे ब्राह्मणवाद के विरोध के नाम पर ढका नहीं जा सकता। ब्राह्मण तो वे दधीचि थे, जिन्होंने वृत्रासुर को मारने के लिए अपनी अस्थियाँ दे दीं। वज्र का निर्माण करने वास्ते अपनी हड्डियाँ देने वाले ऋषि।

जब दलित अस्मिता का आइडेंटिफिकेशन पूतना, होलिका और महिषासुर से किया जाता है तब ब्राह्मनिज्म को नुकसान नहीं होता, दलितों की आत्म-छवि को होता है। इन तीनों असुरों की दलित आइकॉन के रूप में प्रशंसा न इन्हें कहीं पहुँचाती है, न दलितों को। स्वयं ही सोचें कि यदि ये वाकई ऐसे आइकॉन हैं जिन पर गर्व कर सकें तो क्या आंबेडकर को आज महिषासुर कह के हम संतुष्ट होंगे या सावित्री फुले को होलिका कह सकेंगे।

यह कोई संयोग नहीं है कि फाल्गुन पूर्णिमा के दिन एक बालक की देह को जलाकर मार देने की कोशिश करने वाली होलिका असुर कहलाई और आज ही के दिन जनकल्याण के लिए अपना देहोत्सर्ग करने वाले दधीचि ब्राह्मण कहलाए।

महिलाओं के साथ ‘छेड़छाड़’ के लिए होली है: लेफ्ट लिबरल और इस्लामिक गैंग प्रोपेगेंडा के साथ लौटा

बरसाने की लट्ठ मार होली देखने पहुँचे देश-विदेश से लाखों लोग, नंदगाँव के हुरियारों पर सखियों ने बरसाईं प्रेम की लाठियाँ

होली खेलता कसाब, साईंभक्त लादेन और PUBG खेलते आतंकी: लोगों ने ‘फॉल्ट न्यूज़’ के यूँ लिए मजे

(लेखक आशुतोष सिंह ठाकुर ‘यंग थिंकर्स फोरम’ के फाउंडिंग डायरेक्टर हैं)

कोई ऐसा देश बताइए जो कहता हो कि दुनिया के हर व्यक्ति का स्वागत है: CAA पर विदेश मंत्री एस जयशंकर

देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर भारत की आलोचना करने वालों पर निशाना साधते हुए शनिवार (मार्च 07, 2020) को कहा कि दुनिया में कोई भी ऐसा देश नहीं है, जो कहे कि उसके यहाँ हर किसी का स्वागत है।

दिल्ली में आयोजित ग्लोबल बिजनेस समिट को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “मैं आज इस बात को बहुत विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि अगर आप किसी भारतीय दूतावास में जाते हैं, तो वहाँ आपका स्वागत ऐसा होगा जिससे कि आप प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि हम अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए मुकाम पर ले जाना चाहते हैं जो पहले नहीं था।”

एस जयशंकर से जब सवाल पूछा गया कि क्या भारत वैश्विक स्तर पर दोस्त खो रहा है? इस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा, “शायद अब देश समझ रहा है कि हमारे असली दोस्त कौन हैं।”

विदेश मंत्री ने कहा, “एक ऐसा समय था जब भारत बहुत रक्षात्मक था, हमारी क्षमताएँ कम थीं, जोखिम अधिक थे, खतरे ज्यादा थे, इसलिए हमने दुनिया को संभालने की रणनीति अपनाई लेकिन उससे दूर रहे। हम ऐसा आगे नहीं कर सकते। हम दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। अब दुनिया का स्वरूप बदल गया है।”

ग्लोबल समिट के दौरान जब जयशंकर से पूछा गया कि क्या भारत सीएए पर स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाया है या गलत समझा जा रहा है? इस पर विदेश मंत्री ने जवाब दिया, “मीडिया के बाहर भी दुनिया के कुछ वर्ग हैं। मैंने सरकारों से बात की है। मैं ब्रसेल्स में था जहाँ मैंने एक कमरे में 27 विदेश मंत्रियों के साथ बात की। हम सीएए को लेकर इस नतीजे पर पहुँचे कि यह किसी का मामला नहीं है कि सरकार और संसद के पास नागरिकता की शर्तें निर्धारित करने का कोई अधिकार नहीं है। हमने देश में शरणार्थियों की संख्या कम करने की कोशिश की है। इसकी सराहना होनी चाहिए। हर कोई नागरिकता को एक संदर्भ में देखता है, मुझे कोई भी ऐसा देश बताइए जो कहता हो कि दुनिया के हर व्यक्ति का वहाँ स्वागत है।”

विदेश मंत्री से जब कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के निदेशक आपसे (CAA पर) सहमत नहीं दिखते तो उन्होंने कहा, “हो सकता है। वह पहले भी गलत रही हैं। मैंने जम्मू-कश्मीर पर इस संस्था की रिपोर्ट देखी है। जिसमें बहुत ही सावधानीपूर्वक यह बताया गया है कि देश सीमापार की आतंकवादी गतिविधियों की वजह से प्रभावित हो रहा है।”

एस जयशंकर का पूरा सम्बोधन इस लिंक पर देख सकते हैं-

दिल्ली पुलिस ने हिन्दुओं को छोड़ मुस्लिमों पर लाठियाँ चलाई: रुबिका के शो में भद पिटवाने वाली स्वरा भास्कर

दैनिक सस्ते इंटरनेट के माध्यम से ‘विचारक’ बनकर सनसनी बनने की कला यदि किसी से सीखी जा सकती है तो इसके लिए स्वरा भास्कर का नाम सबसे ऊपर आता है। कुणाल कामरा और ध्रुव राठी जैसे नाम इसके बाद आते हैं। हाल ही में एबीपी न्यूज़ चैनल की एंकर रुबिका लियाकत के शो में बुरी तरह से फजीहत करवाने के कारण चर्चा में आई स्वरा भास्कर ने फिर एक पैंतरा अपनाया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में वे दिल्ली पुलिस पर आरोप लगा रही हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने दंगों के दौरान हिन्दुओं को छोड़कर मुस्लिमों पर लाठियाँ बरसाई।

मध्य प्रदेश सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शुक्रवार (मार्च 06, 2020) को आयोजित ‘बिटिया उत्सव’ सेमिनार में स्वरा भास्कर ने ये बात कही।

इस वीडियो में स्वरा भास्कर कह रही है, “अगर मैं दिल्ली दंगों में जाऊँगी तो मेरी पहचान हिन्दू बताई जाएगी… क्योंकि मैं हिन्दू हूँ, तो शायद दिल्ली पुलिस मेरे ऊपर शायद उस हक़ से लाठी नहीं मारेगी, जिस बर्बरता और हक़ से उसने एक मुस्लिम पर लाठी चलाई है। मैं माफ़ी चाहती हूँ कि मैं ऐसी कड़वी बात कर रही हूँ। लेकिन जो हुआ है वो हम सब के सामने है देखने के लिए।”

स्वरा भास्कर ने कहा कि जिस तरह की राजनीति हो रही है और मानसिकता आ गई है कि एक ही आइडेंटिटी होगी। ‘वन नेशन-वन लैंग्वेज और ‘वन नेशन-वन आइडेंटिटी होगी, क्यों? जहाँ पर इतनी विविधता होगी, वहाँ लड़ाइयॉं और विवाद होगी। किसी भी सभ्य समाज के लिए इतना होना चाहिए कि जो भी विवाद हों वे एक कानून की ढाँचे में डील किया जाए।

स्वरा भास्कर इस विडियो में किसी सांसद का भी जिक्र करते हुए देखी जा सकती हैं। स्वरा का कहना है, “हमने पिछले साल संसद में एक आतंक आरोपी को विजयी बनाकर भेजा है, हमें ये एंटी नेशनल नहीं लगता है।” स्वरा भास्कर ने कहा कि अब हम ऐसे वक्त में आ गए हैं जहाँ सवाल करने पर आप पर एंटीनेशनल होने के आरोप लगते हैं। उन्होंने कहा, “मेरे ऊपर भी एक केस कानपुर में दर्ज हो चुका है और हो सकता है कि यहाँ भी केस दर्ज हो जाए।”

हालाँकि, प्रतिदिन सोशल मीडिया पर अफवाह और उन्माद फैलाने वाली स्वरा भास्कर शायद तथ्यों के साथ भी दुश्मनी कर बैठी हैं और उन्हें अभी तक आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की निर्मम हत्या से लेकर मात्र 20 साल के दिलबर नेगी को जला देने जैसी घटनाओं का शायद ज्ञान नहीं।

VIDEO: स्वरा भास्कर ज्ञानगंगा के तीन मिनट जिसने वामपंथियों के प्रचलित तरीकों को फिर एक्सपोज किया

भगवान जब लोगों को अक्ल बाँट रहे थे, तब स्वरा भास्कर NRC के ‘रिलीवेंट सेक्शन्स’ पढ़ने में व्यस्त थी

जामिया हिंसा में हाथ सेंकने ट्विटर पर लौट आए अनुराग कश्यप, स्वरा भास्कर ने भी उगला जहर

महिलाओं के साथ ‘छेड़छाड़’ के लिए होली है: लेफ्ट लिबरल और इस्लामिक गैंग प्रोपेगेंडा के साथ लौटा

रंगों का त्योहार होली नजदीक है। इसके साथ ही वामपंथियों, लिबरलों और इस्लामवादियों का प्रोपेगेंडा भी शुरू हो गया है। वो हमेशा की तरह हिंदू त्योहार को नीचा दिखाने की अपनी हरकत में लग गए हैं। इस्लामवादियों और उनके वैचारिक कॉमरेडों ने एक बार फिर से हिंदू पर्व की छवि को खराब करने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने होली के पर्व को महिलाओं के खिलाफ दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने आरोप लगाया कि होली के त्योहार के दौरान हिंदू पुरुष, महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करते हैं और उनका उत्पीड़न करते हैं।

एक सोशल मीडिया यूजर ने ट्विटर पर सेक्सिस्ट टिप्पणी करते हुए लिखा कि होली के नाम पर पूरे देश में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ किया जाता है।

मिनी नायर नाम की एक महिला, जो कि लेखक होने का दावा करती है, लिखती है कि होली उसके लिए काफी भयानक थी, क्योंकि पिछले साल वह केरल में इस त्योहार के दौरान बेचैनी महसूस कर रही थी। ‘फेमिनिस्ट’ मिनी नायर पुरुषों को ‘राक्षस’ बुलाते हुए कहती है कि भांग उसकी परेशानी का सबब बना था।

शची नेली नाम की एक अन्य हिंदूफोबिक सोशल मीडिया यूजर ने शनिवार को ट्विटर पर दावा किया कि वह होली नहीं खेलती है, क्योंकि अतीत में होली खेलने खेलने के दौरान उसके साथ छेड़छाड़ की गई थी। नेली यह भी कहती है कि इस त्योहार को मनाते समय जब ‘होली है’ का उद्घोष किया जाता है, तो ये उसे एक युद्ध की तरह लगता है।

सोशल मीडिया पर एक इस्लामिक ट्रोल Opus of Ali ने भी इसी तरह के हिंदूफोबिक ट्वीट्स का सहारा लिया है, जिसमें कहा गया कि होली छेड़छाड़ का त्योहार है। कट्टरपंथी इस्लामवादी ने लगातार एक के बाद एक कई ट्वीट करते हुए लिखा कि छेड़छाड़ से बचने के लिए लोगों को होली को ना कहना चाहिए।


एक अन्य ट्वीट में Opus of Ali ने होली मनाने वाले हिंदुओं पर झूठे दावे करते हुए कहा कि इस दौरान महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया जाता है।

इसके साथ ही ‘Baudhkaro’ नामक एक अल्ट्रा-लेप्ट समूह ने होली पर हमला किया। ये खुद को डॉ. बीआर अंबेडकर की शिक्षाओं का फॉलोवर होने का दावा करता है। इसमें दो वामपंथी कट्टरपंथी द्वारा ‘त्योहार- द एंटी होली सॉन्ग’ गाया जाता है। इसमें से एक कट्टरपंथी विवादास्पद वामपंथी विश्वविद्यालय जेएनयू से पीएचडी छात्र है, जो भड़काऊ टिप्पणी करता है और दावा करता है कि होली एक जातिवादी त्योहार है, जिसमें ऊँची जाति के हिंदुओं द्वारा निचली जातियों की महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया जाता है।

इनका रीति-रिवाजों और परंपराओं को कोसना केवल हिंदू त्योहारों तक ही सीमित है। गैर-हिंदू त्योहारों की प्रतिगामी प्रथाओं की बात आते ही ये आँखें मूंद लेते हैं। हकीकत यह है कि लिबरल देश की गैर-स्वदेशी संस्कृति के सभी पहलुओं को छुपाते हैं, जबकि वे सभी हिंदू त्योहारों को खत्म करने का प्रयास करते हैं।

उल्लेखनीय है कि लेफ्ट मीडिया ने पिछले साल भी होली पर निशाना साधा था। फेक न्यूज वेबसाइट ‘द क्विंट’ ने हिंदुओं के रंगों के त्योहार की छवि को खराब करने के लिए इस पर्व को बच्चों द्वारा सड़कों पर आतंक फैलाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अवसर के रूप में ब्रांड बनाने के लिए आगे बढ़ाया था। इसी तरह से वामपंथी मीडिया पोर्टल स्क्रॉल ने भी होली के खिलाफ जहर उगले थे।

लोकसभा, विधानसभा क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन: जम्मू-कश्मीर समेत पूर्वोत्तर के 4 राज्यों के लिए बना आयोग

नवगठित केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर समेत पूर्वोत्तर के चार राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड के लिए केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग का गठन कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस संदर्भ में केंद्रीय विधि मंत्रालय ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी की। यह परिसीमन आयोग केंद्र शासित क्षेत्र जम्मू-कश्मीर के साथ साथ पूर्वोत्तर के राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर तथा नगालैंड के लिए भी लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन करेगा। इस अधिसूचना में कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा और जम्मू-कश्मीर तथा अन्य चार राज्यों के चुनाव आयुक्त इसके सदस्य होंगे। आयोग को एक साल में अपनी रिपोर्ट देनी होगी।

जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के बाद अब इस केंद्र शासित प्रदेश में सात विधानसभा सीटें बढ़नी हैं। जहाँ पहले जम्मू कश्मीर राज्य में विधानसभा के सदस्यों की संख्या 107 थी, वो अब बढ़कर 114 हो गई है। इनमें से 24 सीटें पाक अधिकृत कश्मीर के लिए आरक्षित की गई हैं। परिसीमन एक देश या एक प्रांत की सीमाओं या संसदीय क्षेत्रों का नए सिरे गठन होता है। यहाँ स्पष्ट कर दें कि यह परिसीमन 2011 की जनसंख्या के आधार पर ही होगा।

केंद्र द्वारा जारी इस अधिसूचना में कहा गया है कि परिसीमन अधिनियम, 2002 की धारा-3 के तहत निहित शक्तियों से ही केंद्र सरकार ने परिसीमन आयोग का गठन किया है। केंद्र सरकार का लक्ष्य नवगठित केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के अलावा असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड राज्यों में संसदीय क्षेत्रों और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन करना है। आयोग जम्मू-कश्मीर के संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन और चार पूर्वोत्तर राज्यों की सीमाओं का भी पुनर्गठन करेगा।

पिछली 28 फरवरी को सुरक्षा वजहों के चलते केंद्र सरकार ने असम, नगालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के परिसीमन की अधिसूचना को रद्द कर दिया था। इसलिए अब इन चार राज्यों में भी यह कवायद जम्मू-कश्मीर के परिसीमन के साथ शुरू होगी।

शाहीन बाग से भी जुड़े ताहिर हुसैन के तार: गाड़ियों में भरकर लोग भेजे जाते थे, कंटेनर और बोरियों में सामान

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में आप के निलंबित निगम पार्षद ताहिर हुसैन की संलिप्तता के कई सबूत सामने आए हैं। अब शाहीन बाग से भी उसका कनेक्शन सामने आया है। चॉंदबाग और खजुरी खास के लोगों का कहना है कि ताहिर लोगों को गाड़ियों में भरकर शाहीन बाग भेजता था। वहॉं भेजने के लिए लोगों को ताहिर कहॉं से लाता था इसके बारे में अभी तस्वीर स्पष्ट नहीं है। शाहीन बाग में अरसे से नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ धरना चल रहा है।

बताया जाता है कि ताहिर हुसैन अपने नेटवर्क के जरिए एक के बाद एक ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों में व्यस्त था। ‘TV9 भारतवर्ष’ कर एक रिपोर्ट में बताया गया है कि शाहीन बाग़ में चल रहे धरने, दिल्ली दंगे और ताहिर हुसैन के आपस में तार जुड़े हुए हैं। चाँदबाग़ की एक पार्किंग में जाकर चैनल के रिपोर्टर ने इस बारे में अहम जानकारी जुटाई। यहॉं ओला-उबर और प्राइवेट गाड़ियॉं पार्क की जाती है। इन्हीं गाड़ियों में से एक के बारे में कहा जा रहा है कि वह रोज शाहीन बाग़ जाया करती थी।

एक चश्मदीद ने बताया कि रात को उसने कई बार देखा है कि ताहिर हुसैन के घर के सामने टैक्सियों को हायर कर शाहीन बाग़ ले जाया जाता था। उसने बताया कि उसे भी अपनी गाड़ी शाहीन बाग़ ले जाने के लिए कहा गया था। क़रीब 50-60 लोग रोज़ ताहिर हुसैन की इमारत से शाहीन बाग़ ले जाए जाते थे। उबर के एक अन्य ड्राइवर ने बताया कि उससे भी कई बार वहाँ चलने के लिए कहा गया था। उसने बताया कि 100 लोगों को भी ले जाता जाता था और क़रीब 5-10 गाड़ियाँ रोज शाहीन बाग़ जाती थीं।

एक अन्य ओला ड्राइवर ने बताया कि वो ताहिर हुसैन और उसके सेक्रेट्री व ड्राइवर को पहचानता है क्योंकि वो उसके ऑफिस में जा चुका है। उसने बताया कि उसने अपने मोहल्ले के लोगों को पहले भी मना कर चुका था कि ताहिर हुसैन के कहने पर कोई शाहीन बाग़ नहीं जाएगा। उसने आगे बताया कि यहाँ से कंटेनर व बोरियों में रख कर कई सामान भी शाहीन बाग़ ले जाए जाते थे। उनमें क्या होता था, इस बारे में किसी को भी नहीं पता। न सिर्फ़ शाहीन बाग़, बल्कि 5 बसों में सामान और लोग सम्भल भी ले जाए जाते थे। वहाँ भी सालों से भारी मात्रा में सामान ले जाए जाते थे। लोग कहते हैं कि वे बसें अवैध हैं।

ताहिर हुसैन के घर से कई गाड़ियाँ रोज शाहीन बाग़ जाती थीं

लोगों ने बताया कि वे अभी भी बच्चों के स्कूल नहीं भेज रहे हैं, क्योंकि वे भयभीत हैं। लोगों का कहना है कि वहाँ लोग बच्चों को पकड़ कर उनके साथ क्या कर देंगे, ये सोच कर ही उनकी रूह काँप उठती है। अब सवाल ये उठता है कि आख़िर ताहिर हुसैन के घर से गाड़ियों में भर-भर कर लोगों को व सामान को शाहीन बाग़ क्यों ले जाया जाता था?

गंगाजल स्टाइल में दबोचा गया ताहिर हुसैन, चकमा देने के लिए बुर्का की जगह पहन रखा था…

ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम की तलाश: जहाँ हुई IB के अंकित शर्मा की हत्या वहाँ मौजूद था

ताहिर हुसैन के निशाने पर पहले से थे IB के अंकित शर्मा, हत्या के वक्त बांग्लादेशी आतंकी भी थे मौजूद!

GST में 150 करोड़ का घोटाला, श्रीनगर की दो कंपनियाँ सिर्फ कागजों पर: UP से लेकर जम्मू-कश्मीर तक छापेमारी

जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) में इनपुट टैक्स के नाम पर 150 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ है। बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने फर्जी कंपनियाँ बनाकर लोगों के साथ जीएसटी टैक्स के नाम पर अवैध वसूली की है।

इस मामले की जानकारी जैसे ही जीएसटी के अधिकारियों को हुई, वैसे ही विभाग की टीमों ने शुक्रवार को दिल्ली, उत्तर प्रदेश के अलावा जम्मू-कश्मीर में भी कई जगह छापेमारी की। जानकारी के मुताबिक कुछ लोगों द्वारा बनाई गई फर्जी कंपनियाँ पिछले करीब दो सालों से अवैध रूप से टैक्स वसूल कर रही थीं। इन कंपनियों ने 1500 करोड़ रुपए की बिक्री करने के नाम पर 150 करोड़ रुपए का इनपुट टैक्स वसूल किया है। बताया जा रहा है कि इनमें से दो कंपनियाँ श्रीनगर की थीं, जो केवल कागजों पर थीं और उन्होंने जीएसटी के नाम पर इनपुट टैक्स वसूल किए थे।

विभागीय टीमों ने शुक्रवार को श्रीनगर में इन कंपनियों के ठिकानों पर दबिश देकर आवश्यक दस्तावेज जब्त किए। फिलहाल इस मामले की जाँच में पुलिस जुट गई है। दरअसल फर्जी बिलों के जरिए जीएसटी घोटाला करने वालों पर सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

इससे पहले बीते बुधवार को रीमा पॉलीकैम के एक निदेशक को गिरफ्तार किया गया था। वहीं तीन कंपनियों पर 4198 करोड़ रुपए से ज्यादा के फर्जी चालान जारी करते हुए 660 करोड़ रुपए के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की धोखाधड़ी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के मुताबिक, जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) मुख्यालय ने 3 मार्च को फॉर्च्यून ग्राफिक्स प्राइवेट लिमिटेड, रीमा पॉलीकैम प्राइवेट लिमिटेड और गणपति एंटरप्राइजेज के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। जाँच के दौरान सामने आया कि इन तीनों कंपनियों ने 4198 करोड़ रुपए के फर्जी चालान जारी किए थे।

आपको बता दें कि जीएसटी को 1 जुलाई 2017 को मोदी सरकार ने भारत में पेश किया था और इसी के साथ इसे पूरे भारत में लागू किया गया था। जीएसटी लागू होने के बाद इसे सरकार व कई अर्थशास्त्रियों ने स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बताया था। हालाँकि इसका राजनीति कारणों से कई पार्टियों ने विरोध भी किया था।

एक MLA जिसकी खदानें सील कर दी, रिसॉर्ट ढाह दिया, फिर भी बोले- मर जाऊँगा BJP नहीं छोड़ूँगा

मध्य प्रदेश में एक जिला है कटनी। इस जिले के विजयराघवगढ़ से विधायक हैं बीजेपी के संजय पाठक। तीन बार के विधायक हैं। पूर्ववर्ती सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। राज्य के पल-पल बदलते सियासी घटनाक्रमों के बीच पाठक सुर्खियों में हैं। शनिवार (मार्च 7, 2020) को बांधवगढ़ स्थित उनका रिसॉर्ट जिला प्रशासन ने तोड़ दिया। इससे पहले सरकार ने जबलपुर में आयरन की उनकी 2 खदानें सील कर दी थी।

रिसॉर्ट पर हुई कार्रवाई को लेकर प्रशासन का कहना है कि पहले ही भूमि अतिक्रमण को लेकर नोटिस दे दिया गया था। वहीं पाठक ने कॉन्ग्रेस पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। यह होटल 12 साल पुराना है। इसे पाठक के पिता ने बनवाया था। इस होटल में BJP और कॉन्ग्रेस नेता भी रुकते रहे हैं।

पाठक के खिलाफ सख्ती राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर संकट के बादल मॅंडराने के बाद से शुरू हुए हैं। कॉन्ग्रेस के कुछ विधायकों ने बगावती तेवर अपना रखे हैं। समर्थन दे रहे सपा व बसपा के विधायक भी बागी रूख अख्तियार कर चुके हैं। कॉन्ग्रेस का आरोप है कि बीजेपी उसके विधायकों को खरीदने की कोशिश कर रही है। इन विधायकों को बंधक बनाने का आरोप भी बीजेपी पर लगाया था। हालॉंकि ये विधायक ही कॉन्ग्रेस के इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कॉन्ग्रेस इस सबके पीछे संजय पाठक की महत्वपूर्ण भूमिका मान रही है। कहा जा रहा है कि पाठक के चार्टर्ड प्लेन से ही कॉन्ग्रेस विधायक दिल्ली भेजे गए थे।

हालाँकि पाठक इन आरोपों से इंकार करते हैं। उन्होंने कहा है, “मेरे ऊपर काफी दबाव बनाया जा रहा है। मुझे बीजेपी छोड़कर कॉन्ग्रेस में शामिल होने के लिए कहा जा रहा है। अगर मैं ऐसा नहीं करता हूँ तो मेरे और मेरे परिवार के सदस्यों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। मेरी जान को लगातार खतरा है। मैं मर जाऊँगा लेकिन बीजेपी नहीं छोड़ूँँगा।”

2 दिन पहले सरकार ने उनकी जबलपुर में आयरन की 2 खदानें सील कर दी थीं। ये खदानें मेसर्स निर्मला मिनरल्स के नाम से सिहोरा तहसील के अगरिया और दुबियारा में है। इसको लेकर भी पाठक ने सरकार पर विपक्ष में रहने की सजा के तहत कार्रवाई के आरोप लगाए थे। इस कार्रवाई को भी विधायक संजय पाठक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं।

जबलपुर में खदान सील किए जाने के बाद चर्चा थी कि संजय पाठक ने गुरुवार (मार्च 5, 2020) देर रात मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात की। लेकिन, शुक्रवार (मार्च 6, 2020) सुबह संजय पाठक ने ट्वीट कर मुलाकात का खंडन किया और राजनैतिक षड्यंत्र के तहत हत्या की आशंका जताई थी। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा था, “मैं सीएम कमलनाथ से नहीं मिला हूँ। बीती रात मुझे अगवा करने की कोशिश की गई थी। मेरे ऊपर बहुत दबाव बनाया जा रहा है। मैं हमेशा बीजेपी के साथ रहूॅंगा।” पाठक के इस ट्वीट के बाद शनिवार सुबह प्रशासन ने उनके रिसॉर्ट का एक हिस्सा ढहा दिया।

गौरतलब है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस के इकलौते सिख विधायक हरदीप सिंह डंग ने अपनी ही पार्टी के राज्य सरकार को भ्रष्ट बता इस्तीफा दे दिया था। हरदीप डंग ने कहा था कि दूसरी बार लोगों का जनादेश मिलने के बावजूद पार्टी द्वारा उनकी लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति को भेजे अपने इस्तीफा पत्र में कहा था, “कोई भी मंत्री काम करने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि वे एक भ्रष्ट सरकार का हिस्सा हैं।”

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