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शाहीन ने की खालिद से मोहब्बत की खता! अब्बा और चाचा ने खेत में ले जाकर मारी गोली

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में 5 मार्च की रात शाहीन नाम की एक विवाहिता रहस्यमय तरीके से गायब हो गई। बाद में उसकी लाश मिली। उसके परिजनों ने गाँव के 5 लोगों पर हत्या का आरोप मढ़ा था। हालाँकि, पुलिस को उस समय परिजनों की बात पर यकीन नहीं था, क्योंकि शाहीन के अब्बा और शौहर का बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे। अब पुलिस ने इस मामले की गुत्थी सुलझा ली है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, शाहीन को मारने वाला कोई और नहीं बल्कि उसका अब्बा और चाचा हैं। उन्होंने शाहीन के प्रेम संबंधों के बारे में जानकर उसकी हत्या कर दी।

पूरा मामला लखीमपुर खीरी जिले के धौरहरा कोतवाली क्षेत्र के गाँव शेखनपुरवा का है। यहाँ पुलिस ने मामले की तह को खोलने के बाद शाहीन के अब्बा और चाचा दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मामले में छानबीन करने के बाद बताया कि शाहीन एक दिन ससुराल में रहने के दौरान अपने प्रेमी के घर चली गई थी। तब ससुराल पक्ष ने उसे पीटकर मायके भेज दिया। अब्बा और चाचा ने इसे अपनी बेइज्जती समझी और दोनों ने उसे खेत में ले जाकर गोली मार दी।

खबर के अनुसार, शेखनपुरवा में रहने वाले मुबारक की बेटी खालिद से प्यार करती थी। लेकिन उसके घरवालों ने उसकी शादी गाँव में ही गुड्डू से करवा दी। ऐसे में गुड्डू का घर खालिद के घर के ठीक सामने था। इसलिए दोनों का मिलना निकाह के बाद भी कम नहीं हुआ। दोनों एक-दूसरे से मिलते रहे।

घटना से एक दिन पहले भी शाहीन अपने प्रेमी से मिली थी। इसी की भनक उसके ससुराल वालों को लगी और वह उसे पकड़कर अपने घर पर ले आए। यहाँ उसके साथ पहले मारपीट हुई। बाद में उसे मायके भेज दिया गया। मायके में जब जानकारी हुई तो पिता व चाचा शाहीन से नाराज हो गए और देर रात उसे खेत लेकर गए। जहाँ दोनों ने मिलकर उसे उसे गोली मारी।

सीने में गोली लगने के कारण शाहीन की वहीं मौत हो गई। बाद में पूरी घटना से पल्ला झाड़ने के लिए अब्बा और चाचा ने थाने में मामला दर्ज कराया। साथ ही पूरा इल्जाम उसके प्रेमी समेत 5 लोगों पर मढ़ दिया। मगर, जब पुलिस ने घटना की जाँच शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इससे जाँच की पूरी दिशा ही बदल गई।

पुलिस को शक हो गया कि शाहीन की हत्या पिता और चाचा ने ही की है। पुलिस ने इसी दिशा में अपनी जाँच शुरू कर दी और जल्द ही आरोपितों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इसके बाद पुलिस ने सभी को जेल भेज दिया है।

50 साल पहले पिता को देने पड़े थे ₹101, ₹5 में ही हो जाएगा बेटे का काम: तब अटल थे, आज मोदी हैं

ग्वालियर राजघराने का भाजपा और जनसंघ से पुराना नाता रहा है। राजमाता विजयराजे सिंधिया भाजपा के संस्थापकों में शामिल थीं। उनके बेटे माधवराव सिंधिया भी कॉन्ग्रेस से पहले जनसंघ में ही थे। उन्होंने अपनी माँ की उपस्थिति में पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी से जनसंघ की सदस्यता ली थी। वो फ़रवरी 23, 1970 का दिन था, जब उन्होंने 101 रुपए सदस्यता शुल्क जमा कर जनसंघ की सदस्यता ग्रहण की थी। अगले ही साल 1971 में पार्टी के टिकट पर उन्होंने गुना लोकसभा क्षेत्र से जीत भी दर्ज की।

इसे भी एक संयोग कह लीजिए कि बाद में जब सिंधिया कॉन्ग्रेस में चले गए तो 1984 में ग्वालियर की सीट पर उनका मुकाबला अटल बिहारी वाजपेयी से ही हुआ। सिंधिया उस चुनाव में वाजपेयी को हराने में कामयाब रहे थे। उन्होंने लगातार 9 लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री नटवर सिंह ने तो यहाँ तक कहा कि अगर माधवराव की असामयिक मौत नहीं होती तो उनका प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचना तय था। आपातकाल के बाद जब 1977 में जनता पार्टी की लहर थी, तब भी सिंधिया निर्दलीय चुनाव लड़ कर अपना गढ़ बचाने में कामयाब रहे थे।

अब माधवराव सिंधिया के बेटे और विजयराजे सिंधिया के पोते ज्योतिरादित्य के भाजपा का दामन थामने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाक़ात और कॉन्ग्रेस से इस्तीफे के बाद अब सिर्फ़ औपचारिकता ही बाकी है। सिंधिया को भाजपा का सदस्य बनने के लिए 5 रुपए का सदस्यता शुल्क देना होगा। पार्टी की वेबसाइट पर उपलब्ध फॉर्म के अनुसार, सदस्य बनने के लिए 5 रुपए का शुल्क अनिवार्य है। वहीं स्वैच्छिक रूप से न्यूनतम 100 रुपए या उससे अधिक का अतिरिक्त योगदान दिया जा सकता है।

माधवराव सिंधिया की सदस्यता पर्ची, जिस पर वाजपेयी के भी हस्ताक्षर हैं

जब माधवराव सिंधिया जनसंघ के सदस्य बने थे, तब उनकी उम्र मात्र 25 साल थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया की उम्र 49 वर्ष है। वे पिछले 18 वर्षों से कॉन्ग्रेस में थे। जैसे कमलनाथ सरकार में बेटे की उपेक्षा की गई, ऐसे ही दिग्विजय सरकार में पिता को दरकिनार किया गया था। तब माधवराव ने 1993 में ‘मध्य प्रदेश विकास कॉन्ग्रेस’ बनाई थी। बाद में वो फिर कॉन्ग्रेस में वापस लौट आए थे। इसी तरह 1967 में विजयराजे सिंधिया को नज़रअंदाज़ किया गया था, तब उन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ कर जनसंघ का दामन थमा था।

जब माधवराव जनसंघ के सदस्य बने थे, तब उन्होंने अपना पेशा खेती बताया था। माधवराव सिंधिया पीवी नरसिम्हा राव और राजीव गाँधी मंत्रिमंडल के अहम सदस्यों में से एक रहे। उनकी क्रिकेट प्रशासन में भी दिलचस्पी थी। वो 1990-93 तक बीसीसीसाई के अध्यक्ष भी रहे। उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे हैं।

2 कपूर, 4 बेटियाँ और यस बैंक का डूबना: 26/11 से कैसे जुड़े हैं इस सफर के तार

यस बैंक घोटाले के आरोप में इन दिनों राणा कपूर का नाम सुर्खियों में हैं। राणा कपूर के साथ उनकी तीनों बेटियाँ भी बड़े स्तर पर हुए फर्जीवाड़ा का हिस्सा बताई जा रही हैं। तीनों का नाम- राखी कपूर टंडन, राधा कपूर और रोशनी कपूर है। इनके ख़िलाफ़ ईडी ने लुकआउट नोटिस जारी किया है। इनके अलावा इस बैंक से एक और बेटी का नाम जुड़ा है। लेकिन इस बेटी को बैंक में अपनी हिस्सेदारी पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। अदालत के हस्तक्षेप से जब हक मिला तब तक शायद काफी देर हो चुकी थी। लेकिन, अब भी उनका मानना है कि यदि आज उनके पिता जिंदा होते तो बैंक इस तरह नहीं डूबता।

हम बात कर रहे हैं- शगुन कपूर गोगिया की। शगुन, यस बैंक की स्थापना करने वाले अशोक कपूर की बेटी हैं। उन्हें राणा कपूर से एक समय में बड़ा धोखा मिला। लेकिन, पिता की मौत के बाद आई इस परेशानी की घड़ी में उन्होंने हार नहीं मानी और बैंक में अपनी जगह पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। नतीजतन, बाद में जाकर वह बैंक के बोर्ड में शामिल हो ही गईं।

शगुन कपूर मीडिया को दिए साक्षात्कार में कहती हैं कि यस बैंक का मूल आइडिया उनके पिता का ही था। जिन्होंने इसे एनबीएफसी से बैंक और फिर अहम मुकाम तक पहुँचाने में योगदान दिया। उनका मानना है कि उनके पिता के रहते बैंक ऐसी परेशानियों में कभी नहीं घिरता। वे इसके संचालन में इतनी गड़बड़ियाँ कभी नहीं होने देते।

अब सवाल है कि जब अशोक कपूर मूल रूप से इस बैंक के कर्ता-धर्ता थे, तो फिर फ्रेम में राणा कपूर का नाम और उनकी बेटियों का नाम कैसे आया और आखिर क्यों अशोक कुमार की बेटी को अपने पिता के बैंक में ही जगह पाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी?

दरअसल, ये मनमुटाव की कहानी शुरू होती है 2008 के बाद से। लेकिन इससे पहले ये जानने की जरूरत है कि यस बैंक की शुरुआत में अशोक कपूर और राणा कपूर का आपस में क्या संबंध हैं? तो बता दें, साल 1999 में अशोक कपूर (ABN Amro Bank के पूर्व कंट्री हेड) हरकीरत सिंह ( पूर्व कंट्री हेड Deutche Bank) और राणा कपूर (पूर्व प्रमुख कॉर्परेट और फाइंनेस ANZ Grindlays Bank) ने रोबोबैंक के साथ मिलकर नॉन बैंकिंग फाइंनेंस कंपनी की शुरुआत की। मगर, बाद में हरकीरत सिंह इससे बाहर निकल गए। साल 2003 में अशोक और राणा कपूर को बैंक चलाने का लाइसेंस मिला और वर्ष 2004 में यस बैंक की शुरुआत हुई।

इस शुरुआत के बाद अशोक कपूर बैंक के अध्यक्ष बने, जबकि राणा को बैंक का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया। बैंक ने ग्राहकों के सेविंग अकाउंट पर 6 परसेंट का ब्याज दर देना शुरू किया। लिहाजा कुछ ही सालों में बैंक के पास लाखों ग्राहक पहुँच गए। बैंक बड़े कंपनियों को ऊँचे दर पर लोन दिया करती थी। इसी बीच अशोक कपूर और राणा कपूर की दोस्ती रिश्तेदारी में बदल गई। अशोक कपूर की पत्नी मधु कपूर की बहन से राणा कपूर ने शादी कर ली। ये वो समय था जब दोनों बिजनेस पार्टनर और दोस्त से साढू बने। यानी राणा कपूर बने शगुन के मौसा।

इस दौरान सब कुछ बढ़िया चलता रहा। बैंक भी तेजी से तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ा, लेकिन साल 2008 में मुंबई हुए 26/11 हमले ने पूरी कहानी को ही पलट दिया। अशोक कपूर आतंकी हमले का शिकार हो गए।

दिवंगत अशोक कपूर और उनकी बेटी शगुन कपूर

अशोक की मौत के बाद उनकी पत्नी ने अपने बेटी यानी शगुन को बैंक का निदेशक बनाने का प्रस्ताव रखा। लेकिन बैंक ने उस समय ये कहते हुए उनकी दावेदारी खारिज कर दी कि वो RBI के गाइडलाइंस को पूरा नहीं करती। बाद में मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँचा और साल 2015 में फैसला अशोक कपूर के हक में आया।

लंबी कानूनी के बाद 2019 में शगुन काे यस बैंक के बोर्ड में जगह मिल पाई। 26 अप्रैल 2019 को शगुन बैंक की एडिशनल डायरेक्टर बनाई गईं। इससे पहले साल 2012 में एक और वाकया हुआ जिसने शगुन के सामने उसके मौसा की हकीकत को खोलकर रख दिया।

दरअसल, राणा कपूर ने वर्ष 2012 में अपने बैंक का इतिहास छपवाया था। लेकिन उसने इस इतिहास में अशोक कपूर का कोई ज़िक्र नहीं करवाया। इसे देखने के बाद अशोक कपूर के परिवार ने इसे अपने दोस्त के साथ धोखा करार दिया।

आज बैंक की स्थिति देखकर भी शगुन का कहना है कि उनका और उनके परिवार का भरोसा बैंक पर बरकरार है। इसलिए उन्होंने अपनी 8.5% हिस्सेदारी नहीं बेची। उनका कहना है कि वे इसे उबारने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। बैंक के एस्क्रो अकाउंट में 3600 करोड़ रुपए (50 करोड़ डॉलर) हैं। इससे जमाकर्ताओं का पैसा लौटाने में मदद मिलेगी।

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16 को करेंगे कमाल, राजा-महाराजाओं के दिन लद चुके: MP में कॉन्ग्रेस की रस्सी जल गई, ऐंठन बाकी

मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत और इस्तीफे के बाद कॉन्ग्रेस की हालत पस्त है। एक तरफ कमलनाथ ने कई नेताओं को बागी विधायकों से बातचीत के काम में लगाया है, वहीं दूसरी तरफ़ भाजपा भी अब ‘विधायक बचाओ’ की नीति पर काम कर रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया कभी भी भाजपा का दामन थाम सकते हैं। मंगलवार (मार्च 10, 2020) को होली के दिन उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात भी हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की इस पूरे प्रकरण में अहम भूमिका रही है। उनका ग्वालियर-चम्बल क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है।

आज बुधवार की सुबह भोपाल में मुख्यमंत्री आवास पर कॉन्ग्रेस विधायकों का जमावड़ा लगा। वहाँ से 3 बसों में भर के उन विधायकों को रिसॉर्ट ले लाने की तैयारी की जा रही है। सभी विधायकों को जयपुर ले जाया जाएगा। 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद अब राज्य में बहुमत का आँकड़ा घट कर 104 रह गया है। कॉन्ग्रेस के विधायकों की संख्या 114 से 92 हो गई है। कमलनाथ ने अपने दो मंत्रियों सज्जन सिंह वर्मा और गोविन्द सिंह को बेंगलुरु भेजा है, ताकि वो बागी विधायकों को मना कर वापस ला सकें।

उधर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सिंधिया को विश्वासघाती करार दिया है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में सिंधिया परिवार द्वारा की गई ‘गद्दारी’ और 1967 में राजमाता विजयराजे सिंधिया द्वारा कॉन्ग्रेस विधायकों को तोड़ने वाली घटना याद करते हुए निशाना साधा। गहलोत ने कहा कि सिंधिया जैसे लोग सत्ता के बिना ज्यादा दिन तक नहीं रह सकते और इसलिए जितनी जल्दी निकल लें, सही है। वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सिंधिया ने व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण पार्टी छोड़ी है।

उधर मध्य प्रदेश में भाजपा के सभी विधायकों को कैलाश विजयवर्गीय और गोपाल भार्गव गुरुग्राम लेकर पहुँचे। वो सभी आईटीसी ग्रैंड भारत में रुके हुए हैं। हालाँकि, कुछ भाजपा विधायकों का कहना था कि वे होली खेलने दिल्ली आए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 15 महीनों से सत्ता से दूर शिवराज सिंह चौहान जल्द ही चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। चिंतित कॉन्ग्रेस आलाकमान ने मुकुल वासनिक और हरीश रावत को आनन-फानन में भोपाल भेजा है।

मध्य प्रदेश में भाजपा के नेता नरोत्तम मिश्रा ने स्पीकर एनपी प्रजापति के आवास पर पहुँच कर उन्हें 19 कॉन्ग्रेस विधायकों का इस्तीफा सौंपा। हालाँकि, कॉन्ग्रेस अभी तक उम्मीद हारी नहीं है। पीसी शर्मा ने दावा किया कि अभी तो कमलनाथ का मास्टरस्ट्रोक बाकी है। हरियाणा में कॉन्ग्रेस के विधायक कुलदीप बिश्नोई ने अपनी ही पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में अभी कई नेता है जो अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस विधायक अर्जुन सिंह ने भी दावा किया है कि उनकी पार्टी विधानसभा में बहुमत साबित कर देगी। उन्होंने कहा कि 16 मार्च को सब कुछ साफ़ हो जाएगा, जब पता चलेगा कि नंबरगेम में कॉन्ग्रेस ही आगे है। उन्होंने दावा किया कि कमलनाथ सरकार अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करेगी। उन्होंने कहा- “राजा -महाराजाओं के दिन लद चुके हैं।” उन्होंने कहा कि सिंधिया के पार्टी छोड़ने का कोई असर नहीं पड़ेगा।

दिल्ली दंगे का केन्द्र बना राजधानी स्कूल का मालिक फैजल फारुख गिरफ्तार: पुलिस ने सील किया स्कूल

सीएए विरोध के नाम पर दिल्ली में हुई हिंदू विरोधी हिंसा के दौरान दंगाईयों की शरणगाह बने शिव विहार के राजधानी पब्लिक स्कूल के मालिक को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं दिल्ली पुलिस ने दंगों में स्कूल की भूमिका संदिग्ध होने पर पूरे स्कूल को सील कर दिया है। दरअसल दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में अब तक 53 लोगों की मौत सामने आ चुकी है वहीं घटना में कुल 400 लोग घायल हुए थे।

दिल्ली पुलिस ने स्कूल और स्कूल के मालिक की दिल्ली दंगों में संदिग्ध भूमिका की जाँच के चलते स्कूल मालिक फैसल फारुख को बीते शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। वहीं दिल्ली पुलिस ने आगे की कार्रवाई करते हुए बीते शुक्रवार को राजधानी स्कूल को सील कर दिया है।

इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हमने शिव विहार में राजधानी पब्लिक स्कूल के मालिक को गिरफ्तार किया है, और दंगों में उसकी भूमिका की जाँच की जा रही है। वहीं 12 से स्कूल में शुरू होने वाली बच्चों की वार्षिक परीक्षाओं के लेकर DoE के निदेशक विनय भूषण ने कहा कि वे इस मामले को देख रहे हैं। “हमें घटना के बारे में पता चला है। हमने अधिकारियों को परीक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। हम छात्रों का समय बर्बाद नहीं कर सकते। उन्होंने हिंसा के कारण पहले ही बहुत कुछ झेला है।

वहीं वाइस चेयरमैन सदफ फैसल का कहना है कि दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने उसके पति और स्कूल के मालिक फैसल फारूक को शनिवार शाम गिरफ्तार कर लिया था “हमें पता नहीं है कि हमें सजा क्यों दी जा रही है? मैंने और मेरे पति ने जीवन भर शिक्षा के क्षेत्र में काम किया है। हमें नहीं पता कि पुलिस मेरे पति का नाम हिंसा से जोड़कर हमें बदनाम करने की कोशिश क्यों कर रही है। वहीं फैसल के वकील शम्स ख्वाजा ने सोमवार को दिल्ली की एक अदालत का दरवाजा खटखटाया और सीलिंग और उसके मालिक को हिरासत में लेने की चुनौती दी।

दरअसल 24 फरवरी को दिल्ली में सीएए विरोध के नाम पर हुई हिंदू विरोधी हिंसा के दौरान दंगाइयों ने पहले तो करावल नगर खजुरी खास स्थित ताहिर हुसैन के मकान को और फिर शिव विहार स्थित राजधानी पब्लिक स्कूल को अपना केन्द्र बनाया था, क्योंकि यह दोनों ही इमारतें हिंदू इलाके में ऊँची और मुस्लिम मालिकों की थीं। यही वो राजधानी स्कूल है जिसकी सबसे ऊपरी छत को दंगाइयों ने अपना केन्द्र बनाते हुए वहाँ बड़ी गुलेल को लगाया था। इसके साथ ही बड़ी संख्या में ईंट-पत्तर और पेट्रोल बम और तेजाब की बोतलों को छत पर पहले ले ही तैयारी के साथ रखा गया था।

इतना ही नहीं चश्मदीदों के मुताबिक स्कूल से सभी मुस्लिम बच्चों को पहले ही निकाल दिया गया था और फिर इसी स्कूल में शेष हिंदुओं के बच्चों को बंधक भी बनाया गया था। इसके बाद ही स्कूल की छत का अपना केन्द्र बनाकर हजारों दंगाइयों ने हिंदुओं के घरों और संपत्तियों को अपना निशाना बनाकर उनको तबाह किया था।

आज नहीं, 12 मार्च को BJP में शामिल होंगे सिंधिया, भाजपा मुख्यालय में मंथन जारी

कॉन्ग्रेस से इस्तीफा वाले दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया अब आज नहीं बल्कि 12 मार्च को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। ऐसा मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है। सिंधिया के कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद उनके समर्थक माने जाने वाले 22 विधायकों ने राज्यपाल के पास इस्तीफा भेज दिया है।

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक ज्योतिरादित्य सिंधिया गुरुवार सुबह यानी 12 मार्च को 9 बजे बीजेपी में शामिल होंगे। सिंधिया मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता लेंगे, आज शिवराज भोपाल में हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शिवराज सिंह आज रात दिल्ली आ सकते हैं। वहीं, सपा और बसपा के एक-एक विधायकों ने शिवराज सिंह चौहान के घर जाकर उनसे मुलाकात की है। खबर है कि वे दोनों भी बीजेपी का दामन थाम सकते हैं।

मध्यप्रदेश के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देते ही देश की राजनीति में भू-चाल आ गया है। एक तरफ कमलनाथ सरकार के विधायकों का इस्तीफा देने का सिलसिला जारी है, जो कि इस्तीफा देने वालों की संख्या 19 से बढ़कर 22 पहुँच गई है। वहीं एक तरफ तो कमलनाथ सरकार का गिरना तय माना जा रहा है तो दूसरी ओर बीजेपी ने अपना गणित फिट करने की जुगत शुरू कर दी है। इसी बीच दिल्ली बीजेपी मुख्यालय पर चुनाव समिति की बैठक जारी है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई बड़े नेता शामिल हैं।

वहीं पहले कहा जा रहा था कि कॉन्ग्रेस को अलविदा कहने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया आज ही बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। कयास यह भी लगाए जा रहे थे कि चुनाव समिति की बैठक में राज्यसभा के उम्मीदवारों का फैसला भी हो सकता है। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक सिंधिया को बीजेपी या तो राज्यसभा की टिकिट दे सकती है या फिर उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

उधर बेंगलुरु में रह रहे 19 कॉग्रेसी विधायकों ने कर्नाटक के DGP को पत्र लिखकर सुरक्षा, पुलिस रक्षक दल की माँग की है। पत्र में उन्होंने लिखा-हम कुछ महत्वपूर्ण काम के लिए अपनी मर्जी से कर्नाटक आए हैं, जिसके लिए हमें बेंगलुरु के अंदर और आसपास अपनी सुरक्षित आवाजाही के लिए सुरक्षा की आवश्यकता है। वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल लाल जी टण्डन को चिट्ठी लिखकर 6 मंत्रियों को बर्खास्त करने की सिफारिश कर दी है।

Holi: कहीं लड्डू मार तो कहीं होली पर लड़की भागकर करती है शादी, लोग अंगारों पर चलकर मनाते हैं रंगोत्सव

पूरे देश में आज होली का त्यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है, लेकिन होली का त्यौहार देश के अलग-अलग- हिस्सों में कई तरीके से भी मनाया जाता है। कहीं भाषा के साथ परंपरा बदल जाती है तो कहीं रंग के साथ होली का त्यौहार मनाने की पद्धती बदल जाती है।

आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही स्थानों के बारे में जहाँ होली का त्यौहार विशेष और विचित्र रूप से मनाया जाता है। होली के नाम आते ही सबसे पहले ब्रज की होली ध्यान में आती है, क्यों कि यहाँ होली का त्यौहार सबसे लंबे समय तक यानि कि 40 दिनों तक मनाया जाता है। ब्रज क्षेत्र में फाल्गुन माह लगते ही होली की शुरूआत हो जाती है, लेकिन इसके सबसे खास बरसाने की लड्डू मार होली और लट्ठ मार होली मानी जाती है। वृंदावन मथुरा और खासकर बरसाना में मनाई जाने वाली लट्ठ मार होली और लड्डू मार होली को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों की भीड़ एकत्र होती है।

नेशनल मीडिया के जमावड़े के बीच नंदगाँव से बरसाना पहुँचे हुरियारों के देखते ही तैयार खड़ी बरसाने की हुरियारिन उन पर लाठी लेकर टूट पड़ती है। यहाँ की हर एक गली से लेकर विशेष तौर पर मंदिरों में मनाई जाने वाली होली लोगों के जेहन में हमेशा के लिए यादगार बनकर रहती है। इसके पीछे का आध्यात्मिक कारण यह कि मथुरा में भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, नंदगाँव के कुँवर थे और बरसाने की उनकी राधा प्यारी थीं।

अब बात करते हैं मध्य प्रदेश की तो यहाँ भील आदिवासी समुदाय अनोखे अंदाज में होली का त्यौहार मनाते हैं। इस त्यौहार का विशेष तौर पर लड़के-लड़कियाँ पूरे साल बेसब्री से इंतजार करते हैं। भील होली को भगोरिया भी कहते हैं। होली के अवसर पर ग्रामीण बाजार लगता है जिसे हाट कहा जाता है। यहाँ पर लोग होली की खरीदारी करने आते हैं। इस दौरान लड़के-लड़कियाँ अपने लिए जीवनसाथी भी ढूँढने आते हैं। आदिवासी लड़के एक खास तरह का वाद्ययंत्र बजाकर डांस करते हैं। इस दौरान कोई लड़की किसी लड़के को गुलाल लगा देती है और बदले में वो भी लड़का वैसा ही करता है तो दोनों की रजामंदी मान ली जाती है। इसके बाद लड़का लड़की को भगाकर ले जाता है। फिर दोनों की शादी हो जाती है।

वहीं मालवा में होली के दिन लोग एक दूसरे पर अंगारे फेंकते हैं। होली के दिन ये लोग एक दूसरे पर अंगारे फेंकते हैं। यह धार्मिक मान्यता है। ऐसा कहा जाता है कि एक दूसरे पर अंगारा फेंकने से होलिका राक्षसी मर जाती हैं।

राजस्थान बांसवाड़ा और डूंगरपुर ज‌िले में लोग अंगारों पर चलकर होली मनाते हैं। होलिका दहन के अगले सुबह होलिका दहन की राख के अंदर दबी हुआ आग पर चलते हैं। इस दौरान एक दूसरे पर पत्थरबाजी करते हुए खून की होली खेलते हैं। ऐसी मान्यता है कि अगर पत्थर लगने से खून निकल आती है तो उसका पूरा साल अच्छा जाता है।

‘हम सभी जरूरी काम से आए हैं, हमें सुरक्षा दी जाए’ – बेंगलुरु में ठहरे MP के बागी विधायकों ने DGP को लिखा पत्र

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के खेमे में ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे ने बड़ी खलबली मचा दी है। सिंधिया के इस्तीफा देते ही उनके समर्थक सभी विधायक, जो बेंगलुरू में हैं, उन्होंने सुरक्षा की माँग की है। इन सभी विधायकों ने डीजीपी को पत्र लिखकर सुरक्षा की माँग की है।

उन्होंने पत्र में लिखा है कि बेंगलुरू और आस-पास के इलाकों में सुरक्षा को बढ़ाया जाए। साथ ही नेताओं ने माँग की है कि स्थानीय पुलिस उन्हें सुरक्षा और एस्कॉर्ट उपलब्ध कराए। खबरों के अनुसार, सिंधिया ग्रुप के ये विधायक बेंगलुरु के एक रिजॉर्ट में ठहरे हुए हैं।

विधायकों द्वारा डीजीपी को लिखा गया पत्र

विधायकों ने यह पत्र कर्नाटक के डीजीपी को लिखा है। पत्र में लिखा है कि सभी मध्य प्रदेश के विधायक और सांसदों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए। विधायकों ने लिखा है कि वो वहाँ पर जरूरी काम से आए हैं, जिसकी वजह से उन्हें सुरक्षा और एस्कॉर्ट स्थानीय पुलिस द्वारा मुहैया कराई जाए, ताकि सभी लोग बेंगलुरू में सुरक्षित रह सकें और कहीं भी आ जा सकें।

गौरतलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया। सिंधिया ने अपना इस्तीफा कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को सौंप दिया है।

वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा कॉन्ग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देने के कुछ मिनटों बाद ही सिंधिया खेमे के 14 अन्य कॉन्ग्रेस विधायकों ने भी प्रदेश के राजभवन को विधानसभा सदस्यता से अपने इस्तीफे ई-मेल कर दिए हैं।

अमित शाह के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की प्रधानमंत्री से मुलाकात, बदले सियासी समीकरण

पूरा देश होली का त्यौहार मनाने में जुटा हुआ है, कुछ इसी तरह से मध्य प्रदेश के लोग और सीएम कमलनाथ भी लोगों के साथ होली का त्यौहार मनाने में जुटे हुए थे, लेकिन ज्योतिरादित्य के एक पत्र ने मध्य प्रदेश की ही नहीं बल्कि पूरी देश की राजनीति में तूफान ला दिया। वह पत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया का कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के लिए पार्टी से अपना इस्तीफा देने के संबंध में था।

सिंधिया का कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने के बाद कमलनाथ के विधायकों में भगदड़ सी मच गई है। अभी तक कॉन्ग्रेस के 19 विधायक कमलनाथ सरकार से अपना इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं 19 विधायकों के इस्तीफे के बाद मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार का गिरना तय माना जा रहा है। दूसरी ओर गृहमंत्री अमित शाह के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की है। इसके बाद अमित शाह सिंधिया को अपने साथ अपने आवास पर ले गए। अटकलें लगाई जा रही हैं कि सिंधिया आज शाम छह बजे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

दूसरी ओर सपा विधायक राजेश शुक्ला और बसपा विधायक संजीव कुशवाहा ने भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान के आवास पर पहुँचकर पूर्व सीएम चौहान से मुलाकात की है। उधर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल लाल जी टण्डन को चिट्ठी लिखकर 6 मंत्रियों को बर्खास्त करने की सिफारिश भी कर दी है।

दरअसल, मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने सरकार तो बनाई लेकिन बहुत कोशिशों के बावजूद ज्योतिरादित्य सिंधिया सीएम नहीं बन सके। इसके छह महीने बाद ही लोकसभा चुनाव में हार सिंधिया के लिए दूसरा बड़ा झटका साबित हुई। सीएम ना बन पाने के बावजूद लगभग 23 विधायक ऐसे हैं, जिन्हें सिधिया के खेमे का माना जाता है। इसमें से छह को मंत्री भी बनाया गया। इन्हीं में से कुछ विधायकों ने कमलनाथ की सरकार को मुश्किल में डाल दिया है।

वहीं लोकसभा चुनाव में हार के बाद से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। बार-बार माँग करने के बावजूद उन्हें मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष का पद भी नहीं मिला, जिसने आग में घी काम का काम किया है, लेकिन इस बार सिंधिया समझौते के मूड में नहीं हैं। उधर 13 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए नॉमिनेशन का आखिरी दिन है। कहा जा रहा है कि सिंधिया खुद के लिए राज्यसभा सीट या मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष का पद चाहते थे। लेकिन अब बात बिगड़ चुकी है।

उधर मध्य प्रदेश सरकार के छह मंत्री समेत कुल 17 विधायक बेंगलुरु में हैं। आशंका जताई जा रही हैं कि सिंधिया अपने समर्थकों के साथ बीजेपी जॉइन करने वाले हैं।

गौरतलब है कि 9 मार्च को होली के दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कॉन्ग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया था। सिंधिया ने कॉन्ग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिखते हुए कहा था कि वह 18 वर्षों से कॉन्ग्रेस के प्राथमिक सदस्य रहे हैं, लेकिन अब राह अलग करने का वक्त आ गया है। सिंधिया ने सोनिया पर सब कुछ जानते हुए कुछ नहीं करने आरोप लगाया था और लिखा था, “मैं भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूँ और जैसा कि आपको अच्छी तरह पता है कि पिछले एक साल से यह मार्ग प्रशस्त किया गया है।” आज भी मैं अपने राज्य और देश के लोगों की रक्षा करने के अपने लक्ष्य और उद्देश्य पर अडिग हूँ।

धोखेबाज, गद्दार- ज्योतिरादित्य सिंधिया के विकिपीडिया पेज पर कॉन्ग्रेस का हमला

मध्य प्रदेश की राजनीति में सोमवार शाम से शुरू हुआ सियासी उथल-पुथल का ताज़ा दौर अब अपने मुकाम पर पहुँच चुका है। राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ से नाराज़ चल रहे कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

जब सारा देश होली के उन्माद में डूबा था उसी समय उन्होंने सोनिया गाँधी को अपना इस्तीफा भेजा जिसे पार्टी ने स्वीकार कर लिया है। हालाँकि, पार्टी ने यह कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया है।

सिंधिया के इस्तीफ़े के बाद कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं के साथ ही पार्टी समर्थकों ने भी अपनी-अपनी तरह से अपना गुस्सा व्यक्त किया। पार्टी समर्थकों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को गद्दार और धोखेबाज जैसे विशेषणों से पुकारना शुरू कर दिया है।

यही नहीं, कुछ समर्थकों ने सिंधिया के विकिपीडिया पेज को अपने गुस्से का निशाना बनाया और वहाँ पर अपशब्दों के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया से जुड़ी तमाम जानकारियों को ‘अपडेट’ कर दिया। एक ट्विटर यूजर ने यह भी लिखा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया से नाराज किसी पार्टी समर्थक ने विकिपीडिया पेज अपडेट कर उनको ‘गधा’ भी लिखा।

संलग्न ट्वीट में देखा जा सकता है कि सिंधिया के लिए ‘भारतीय कॉमेडियन’ और ‘सत्ता का भूखा सिंधिया’ जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। विकिपीडिया पेज पर ढूँढने पर पता चलता है कि कुछ और भी जानकारियों से छेड़छाड़ की गई है।

कुछ ऐसे भी वाक्य थे, जिनमें उन्हें कॉन्ग्रेस का सबसे समझदार नेता बताया गया था। इसमें लिखा गया कि यह पार्टी कि भी गलती है कि वो ऐसे पार्टी के प्रति वफादार नेता को इस्तेमाल नहीं कर पाए। एडिट करने के बाद लिखा गया है कि उन्होंने भाजपा ज्वाइन करने का फैसला इसीलिए लिया क्योंकि कॉन्ग्रेस उनके टेलेंट का सम्मान नहीं कर पाई।

साभार- विकिपीडिया

एडिट की गई एक अन्य जानकारी में सिंधिया को ‘धोखेबाज’ भी लिखा गया। हालाँकि, इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के विकिपीडिया पेज पर उपलब्ध जानकारी को दोबारा सही कर लिया गया है लेकिन यह दर्शाता है कि कॉन्ग्रेस किस स्तर तक गिर सकती है।

साभार- विकिपीडिया