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मैंने ईश्वर को नहीं देखा, लेकिन आपको देखा है: लकवाग्रस्त महिला की बातें सुन भावुक हुए PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘जन औषधि दिवस’ पर इसके कई लाभार्थियों के साथ चर्चा की। पीएम मोदी ने इस दौरान कई महिलाओं से उनकी बातें सुनीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके का इस्तेमाल कोरोना वायरस को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए भी किया और लोगों को एक-दूसरे से हाथ मिलाने की जगह ‘नमस्ते’ कह के अभिवादन करने की सलाह दी। उन्होंने जनता को अफवाहों से बचने की सलाह दी। पीएम ने जन औषधि केंद्रों की उपयोगिता की चर्चा की और उसकी अब तक की उपलब्धियों के बारे में बताया।

इस चर्चा के दौरान एक ऐसा पल भी आया जब प्रधानमंत्री भावुक हो गए। दीपा शाह नामक महिला ने कुछ ऐसा कहा, जिससे पीएम इमोशनल हो उठे। महिला ने बताया कि वह लकवा की मरीज हैं। दीपा ने कहा कि उन्होंने भगवान को तो नहीं देखा है, लेकिन नरेंद्र मोदी को देखा है। उक्त महिला ने बताया कि पहले जब वो दवाएँ खरीदती थीं तो 5000 रुपए से भी अधिक ख़र्च होते थे, जबकि अब मात्र 1500 रुपए प्रतिमाह में उनकी दवाओं का ख़र्च निकल आता है।

महिला ने बताया कि दवाओं से रुपए बचते हैं तो वो घर के ख़र्च में इस्तेमाल किए जाते हैं। उससे वह फल वगैरह भी खरीद लेती हैं। महिला ने रोते हुए अपना दर्द बयाँ दिया और ये भी बताया कि कैसे ‘जन औषधि केंद्र’ से उसे फायदा पहुँचा है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि जन औषधि केंद्रों के साथ-साथ डिस्ट्रिब्यूशन, क्वालिटी टेस्टिंग लैब जैसे अनेक दूसरे साधनों का भी विस्तार हो रहा है। उन्होंने बताया कि इससे हज़ारों युवाओं को रोज़गार मिल रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि एक हजार से अधिक जरूरी दवाइयों की कीमत नियंत्रित होने से मरीजों के 12,500 करोड़ रुपए बचे हैं। स्टेंट्स और नी-इम्प्लांट्स की कीमत कम होने से लाखों मरीजों को नया जीवन मिला है।

‘आज़ाद कश्मीर’ कहाँ है?: मध्य प्रदेश की बोर्ड परीक्षा में पूछा गया भारत-विरोधी सवाल

मध्य प्रदेश में दसवीं की बोर्ड परीक्षा में एक ऐसा सवाल पूछा गया, जो पाकिस्तान के नैरेटिव को आगे बढ़ाता है। परीक्षा में ‘आज़ाद कश्मीर’ को लेकर सवाल पूछे गए। ‘आज़ाद कश्मीर’ शब्द का इस्तेमाल पाकिस्तान कश्मीर के उस हिस्से जिस पर उसने कब्जा कर रखा है, यानी ‘पाक अधिकृत कश्मीर’ अथवा ‘Pakistan Occupied Kashmir (PoK)’ के लिए करता है। पाक द्वारा कब्जा किए हुए इलाक़े को ‘आज़ाद’ कह कर मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने भारत विरोधी स्टैंड को आगे बढ़ाया है।

राज्य में विपक्षी पार्टी भाजपा ने भी इस प्रश्न-पत्र को लेकर सवाल उठाए हैं। मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल की सामाजिक विज्ञान की परीक्षा में सही जोड़ी मिलाने वाले सवाल (प्रश्न संख्या- 4) में एक विकल्प ‘आज़ाद कश्मीर’ का दिया गया है। इसके बाद प्रश्न नंबर 26 में भी ये दिखाने को कहा गया है कि नक़्शे में ‘आज़ाद कश्मीर’ कहाँ है? इन सवालों के बाद राजनीतिक गलियारों में भी विवाद शुरू हो गया है।

मध्य प्रदेश की परीक्षा में पूछे गए आपत्तिजनक सवाल

भाजपा ने कहा है कि राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार है, ऐसे में इन सवालों का पूछा जाना आश्चर्य वाली बात नहीं है। पार्टी ने कहा कि कॉन्ग्रेस तो वैसे भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अलगाववादी आन्दोलनों का समर्थन करती रही है। मध्य प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता हितेश वाजपेयी ने इस सवाल को निंदनीय करार दिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा:

“दिग्विजय सिंह जैसे कॉन्ग्रेस नेता लंबे समय से देश विरोधी और पाकिस्तान के समर्थन वाले बयान देते रहे हैं। अब वे सरकार में हैं तो यह सब होना ही है। हमारा प्रयास है कि जल्द यह सरकार जाए, जिससे कि इस तरह की चीजों पर रोक लगाई जा सके।”

इस विषय में अभी तक बोर्ड या मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग की तरफ से कोई जवाब या स्पष्टीकरण नहीं आया है। पूरे पेपर में कुल मिला कर दो बार आपत्तिजनक सवाल पूछे गए और दोनों ही बार ‘आज़ाद कश्मीर’ का प्रयोग किया गया।

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भारत विश्व का सबसे विविधतापूर्ण राष्ट्र है जो भाषा, वेशभूषा, भोजन, पर्व, परंपरा आदि अनेक सांस्कृतिक एवं भौगोलिक विविधताओं का अद्भुत मिश्रण है। विविधता किसी भी राष्ट्र की समृद्धि व गौरवपूर्ण समावेशी इतिहास का सूचक है l फिर क्यों इस देश की विविधताओं पर प्रश्न उठा कर उनमें अलगाववाद का बीजारोपण किया जाता है? जिसमें मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत को ही लक्षित किया जाता है। भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र (सम्प्रति असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा राज्यों का समूह) भौगोलिक, पौराणिक, ऐतिहासिक एवं सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्राचीन ग्रंथों में पूर्व की पर्वत घाटियों एवं कन्दराओं के निवासी को “किरात” संज्ञा दी गई है। किरात शब्द संस्कृत की “कृ विक्षेपे” धातु से बना है जिसका अर्थ है विक्षिप्त अर्थात् टेड़ी मेडी गति वाला। पर्वत पहाड़ों के घुमावदार होने के कारण वहाँ के निवासियों की मैदानी भाग की भाँति सीधी गति न होकर विक्षिप्त गति होती है इसलिए पर्वत-कन्दरा के निवासी को किरात कहा गया। सर्वप्रथम यजुर्वेद में ‘किरात’ शब्द का प्रयोग मिलता है। सरोभ्यो धैवरम्उ पस्थावराभ्यो…..गुहाभ्य: किरातं सानुभ्यो जम्बकं पर्वतेभ्य: किम्पूरुषम्{यजु. (30.16)}। प्रस्तुत मन्त्र में बताया गया है कि देश की उत्तम व्यवस्था के लिए क्षेत्र-विशेषज्ञ के अनुसार ही व्यक्ति की नियुक्ति करनी चाहिए। ऋषि कहता है कि (गुहाभ्य:) पर्वत कंदराओं के लिए (किरातं) किरात को नियुक्त करें। इस प्रसंग में पर्वत-कंदराओं में नियुक्त व्यक्ति को किरात कहा गया है।

इसी प्रकार अथर्वेद {कैरातिका कुमारिका सका खनति भेषजम् — अथर्वेद (10/414)} में भी पर्वत के शिखरों पर औषधि का खनन करने वाली कन्या को भी कैरातिका (किरात की पुत्री) कहा है। इसके उपरांत शतपथ ब्राह्मण {11.4.14} और पंचविंश ब्राह्मण {13.1.2.3} में किरातों के विशिष्ट परिवारों के कुल के संकेत मिलते हैं, जिसके अनुसार वे इस क्षेत्र के मूल निवासी हैं। मनुस्मृति के अनुसार भी सरस्वती और दृषद्वती (ब्रह्मपुत्र) नदी के मध्य का भूभाग आर्यावर्त कहलाता है {सरस्वतीदृषद्वत्योर्देवनद्योर्यदंतरम् ।- मनु. (2/17)} और इसके पूर्व में रहने वाला जनसमुदाय किरात कहलाता है जो गुण और कर्म के अनुसार क्षत्रिय है {शनकैस्तु क्रियालोपादिका: क्षत्रियजातय: । – मनु. (10/43)}

रामायण के किष्किन्धा काण्ड में जब राम सीता को खोज रहे हैं तब वे किरातों से भी मिलते हैं। इस प्रसंग में वाल्मीकि किरात जनसमुदाय के वैशिष्ट्य का वर्णन करते हैं कि किरात स्वर्ण वर्ण के, प्रियदर्शी हैं तथा अपने क्षात्र धर्म में तीक्ष्ण हैं {किराता: तीक्ष्ण चुडा: च हेमाभा: प्रियदर्शिना: । (4/40/27)}। महाभारत के सभा पर्व के अनुसार उस समय किरात वासुदेव पौंड्रक राजा के अधीन थे {वङ्ग पुण्ड्र किरातेषु राजा बलसमन्वितः, पौण्ड्रकॊ वासुदेवेति यॊ ऽसौ लॊकेअभिविश्रुतः । (14.20)}। विष्णु पुराण के अनुसार भी समुद्र के उत्तर से लेकर तथा हिमालय के दक्षिण तक का समग्र भूभाग भारत कहलाता था {उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् । वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र संततिः ।।}

विष्णु पुराण में प्राग्ज्योतिषपुर के राजा नरकासुर और श्री कृष्ण के युद्ध का वर्णन है । इस युद्ध में नरकासुर द्वारा नगर की रक्षार्थ तीक्ष्ण धार वाले पाशों के प्रयोग का उल्लेख किया गया है- ‘प्राग्ज्योतिषपुरस्यापि समन्ताच्छशतयोजनं, आचिता मौरवैः पाशैः क्षुरान्तैर्भूर्द्विजोत्तम:’ {विष्णु पुराण (5.29.16)}। ब्रह्म पुराण के अनुसार भी भारत के पूर्व में किरातों का निवास है {पूर्वे किराता यस्यान्ते पश्चिमे यवनस्थिताः}। कालिका पुराण में तो विस्तार से किरात और उनके निवास का वर्णन किया गया है। कालिकापुराण के अनुसार ब्रह्मा ने प्राचीन काल में यहाँ स्थित होकर नक्षत्रों की सृष्टि की थी। इसलिए इंद्रपुरी के समान यह नगरी प्राग् (पूर्व या प्राचीन) + ज्योतिष (नक्षत्र) कहलायी– ‘अत्रैव हि स्थितो ब्रह्मां प्राङ् नक्षत्रं समार्ज ह, ततः प्राग्ज्योतिषाख्येयं पुरी शक्रपुरी समा’

शास्त्रीय प्रमाणों के अनुसार इन किरात जनसमुदाय द्वारा शासित प्रदेश प्राग्ज्योतिष और कालान्तर में कामरूप कहलाता था जिसका वर्णन शतपथ ब्राह्मण, रामायण तथा महाभारत में उपलब्ध होता है। रामायण में किष्किन्धाकाण्ड में राम जब सीता को खोज रहे हैं तब उस प्रसंग में प्राग्ज्योतिष का उल्लेख मिलता है। सुग्रीव कहता है कि समुद्र के मध्य वराह नाम का 64 योजन का पर्वत है जिसके उत्तर में नरक राजा द्वारा शासित प्राग्ज्योतिष प्रदेश है, वहाँ की प्रत्येक गुहा में सीता को खोजना है {योजनानि चतु:षष्टि: वराहो नाम पर्वत: ।……रावण: सह वैदह्या मार्गितव्यस्तत्स्तत: । ।- किष्किन्धा. (4/42/30-32)}

महाभारत काल से पूर्वोत्तर का गहरा संबंध है। महाभारत के विख्यात योद्धा राजा भगदत्त पूर्वोत्तर भारत के थे {प्राग्ज्योतिषधिपो शूरो म्लेच्छानामधिपो बली}। पांडवों ने अपना अज्ञातवास इसी क्षेत्र में व्यतित किया था। महाभारत के सभापर्व में अर्जुन और किरात वेशधारी के मध्य युद्ध का उल्लेख है। इस प्रसंग के आधार पर ही संस्कृत के यशस्वी कवि भारवि ने अपने काव्य “किरातार्जुनीयम्” की रचना की है। महाभारत में विभिन्न प्रसंगों में प्राग्ज्योतिष का 20 से अधिक बार उल्लेख हुआ है। कामरूप-नरेश भगदत्त ने महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से भाग लिया था।

महाभारत में भगदत्त को प्राग्ज्योतिष-नरेश भी कहा गया है– ‘तत: प्राग्ज्योतिषः क्रुद्धस्तोमरान् वै चतुर्दश, प्राणिहोततस्य नागस्य प्रमुखे नृपसत्तम {भीष्म पर्व (95.46)}। कालिदास ने रघुवंश में रघु द्वारा प्राग्ज्योतिष नरेश की पराजय का काव्यमय वर्णन किया है {चकम्पे तीर्णलौहित्येतस्मिन् प्राग्ज्योतिषेश्वर: तद्गजालानतां प्राप्तैः सहकालागुरुद्रुभैः। (4.81)}। दिग्विजय यात्रा के लिए निकले हुए रघु के लौहित्य या ब्रह्मपुत्र को पार करने पर प्राग्ज्योतिषपुर नरेश उसी प्रकार भयभीत होकर कांपने लगा जैसे उस देश के कालागुरु के वृक्ष जो रघु के हाथियों से बंधे थे।

ऐतिहासिक तथ्यों के अतिरिक्त आज भी पूर्वोत्तर का समाज अपने को रामायण-महाभारत के पात्रों का वंशज मानती हैं । अरुणाचल प्रदेश का मिश्मी समुदाय खुद को भगवान कृष्ण की पटरानी रुक्मिणी का वंशज मानता है। रुक्मिणी अद्यतन अरुणाचल के भीष्मकनगर की राजकुमारी थीं। इस प्रदेश के सियांग जिले में स्थित मालिनीथान और ताम्रेश्वरी मंदिर का संबंध श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी से है। लोहित जिले में अवस्थित परशुराम कुंड एक प्रमुख तीर्थस्थल है जो भगवान परशुराम से संबंधित है। अरुणाचल में शिव मंदिर का वर्णन शिव पुराण के 17वें अध्याय के रुद्र खंड में आता है। आज अरुणाचल प्रदेश स्थित जीरो घाटी की करडा पहाड़ी पर सबसे बड़ा शिवलिंग है इतना विशाल शिवलिंग अभी तक कहीं और नहीं देखा गया है। धरती के ऊपर इसकी ऊंचाई 20 फीट है, जबकि इसका चार फीट हिस्सा धरती के नीचे है। कुल मिलाकर 24 फीट ऊंचा यह शिवलिंग आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।

अद्यतन मेघालय की खासी पहाड़ी में रहने वाला जन समुदाय आज भी तीरंदाजी में प्रवीण है और वे तीरंदाजी करते समय यह अंगूठे का प्रयोग नहीं करता। क्योंकि उनका विश्वास है कि उनके पूर्वज ने अपना दाहिना अंगूठा गुरु दक्षिणा में दे दिया था, इसलिए तीर चलाते समय अंगूठे का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार नगालैंड के दीमापुर में रहनेवाली दिमाशा जन समुदाय खुद को भीम की पत्नी हिडिंबा का वंशज मानता है। वहाँ आज भी हिडिंबा का वाड़ा है, जहां राजवाड़ी में स्थित शतरंज की ऊँची-ऊँची गोटियाँ पर्यटकों के आकर्षण के केंद्र मानी जाती हैं। इन गोटियों से हिडिंबा और भीम का बाहुबली पुत्र घटोत्कच शतरंज खेलता था।

बोडो जन समुदाय खुद को सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का वंशज तथा कार्बी आंगलंग में रहनेवाला कार्बी जन समुदाय स्वयं को सुग्रीव का वंशज मानता है। महाभारत काल में पूर्वोत्तर के राजवंशों के साथ वैवाहिक संबंधों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है । नगालैण्ड में नगा कन्या उलुपी से अर्जुन ने विवाह किया था। अर्जुन की दूसरी पत्नी चित्रांगदा को मणिपुर के ही मैतेयी समाज का माना जाता है। असम का तेजपुर नगर (महाभारतकालीन शोणितपुर) श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध और बाणासुर की पुत्री ऊषा के प्रेम का साक्षी है।

महाभारत के बाद इनका पहला उल्लेख समुद्रगुप्त द्वारा प्रयाग में स्थापित पाषाण स्तम्भ पर उल्लिखित शिलालेख पर मिलता है {समतट-डवाक-कामरूप-नेपाल-कर्त्तृपुरादि-प्रत्यन्त-नृपतिभिर्म्मालवार्जुनायन-यौधेय-माद्रकाभीर-प्रार्जुन-सनकानीक-काक-खरपरिकादिभिश्च5 सर्व्व-कर -दानाज्ञाकरण-प्रणामागमन}। जिसमें कामरूप को गुप्त साम्राज्य के अधीन बताया गया है। महाभारतोत्तर प्राग्ज्योतिष/कामरूप जिसे आज पूर्वोत्तर के नाम से जाना जाता है, में तीन अलग अलग वंशों ने शासन किया- वर्मन वंश, मलेच्छ वंश और पाल (या भौम पाल) वंश। तीनों वंशों के राजा नरकासुर से अपना रिश्ता जोड़ते थे और इसी आधार पर राजा की पदवी पर अधिकार करते थे।

असम में मिले शिलालेखों के अनुसार वर्मन वंश के विभिन्न राजाओं ने बड़ी तीव्रता से कामरूप का विस्तार किया। राजा भूतिवर्मन द्वारा अश्वमेध यज्ञ करने का भी उल्लेख है। कई वर्षों तक एक सशक्त राज्य के निर्माण और विस्तार के पश्चात् वर्मन वंश पर गौर राजा का आक्रमण हुआ जिसमें वे परास्त हुए और कुछ समय के लिए गौर वंश के अधीन हुए। परन्तु भूतिवर्मन के छोटे बेटे राजा भास्करवर्मन ने थानेसर के राजा हर्षवर्धन से मित्रता की और संयुक्त आक्रमण से गौर राजा शशांक पर विजय पायी।

इतिहासकार विलक्षण महाकवि कल्हण ने महाभारत युद्ध से कश्मीर की क्षात्र-परम्परा को काव्य की विषय वस्तु बनाकर ‘राजतरंगिणी’ में क्रमबद्ध विशद वर्णन किया है। जिसका रचना काल 10 वीं से 12 वीं शताब्दी के मध्य माना जाता है। कश्मीर का सम्बन्ध उस समय पूर्वोतर भारत से था। कश्मीर के राजकुमार का विवाह कामरुप की राजकन्या के साथ हुआ था। 8 वीं शताब्दी में कश्मीर के राजा ललितादित्य ने स्त्री-राज्य (मेघालय) तथा प्राग्ज्योतिष तक अपने राज्य का विस्तार किया था। उस समय प्राग्ज्योतिषपुर वर्मन वंश के कामरूप राज्य की राजधानी थी जो सम्प्रति गोहाटी (असम) है। मूल्यवान कालागुरु अर्थात् अगुरु या अगर के लिए सर्वोत्तम अनुकूल मौसम उत्तर पूर्व भारत का क्षेत्र है जो असम में प्राकृतिक रूप से बहुलता में उपलब्ध होते हैं। अगुरु का प्रयोग सुगन्धित इत्र, धूपधूम आदि बनाने में किया जाता है। जिसका वर्णन कल्हण ने भी किया है {शून्ये प्राग्ज्योतिषपुरे निर्जिहानं ददर्श सः । धूपधूमं वनप्लुष्टात्कालागुरुवनात्परम् । । (4. 171)}

ललितादित्य उसके बाद ‘स्त्री राज्य’ पहुँचते हैं । स्त्री राज्य से अभिप्राय अद्यतनीय मेघालय है । प्राचीन असम का वर्णन करते हुए Calcutta Review {H. Lyngdoh, Introduction, pp. X-XI.} में भी H. Lyngdoh {Homiwell Lyngdoh, 1877-1958, Khasi physician, political leader, and social activist} लिखते हैं कि असम में Hieun Tsang के भ्रमण के समय कश्मीर के राजा ललितादित्य ने जैन्तिया साम्राज्य पर आक्रमण किया जिसे स्त्री राज्य कहतें हैं तथा पद्म श्री से सम्मानित असम इतिहासकार ‘सूर्य कुमार भुयान’ {Studies in the History of Assam, Laksheswari Bhuyan, 1965 के आधार पर} (1894–1964) के अनुसार अनेक इतिहासकारों का मानना है कि ‘स्त्री राज्य’ का अभिप्राय वर्त्तमान मेघालय के खासी और जयंती के मातृवंशीय समाज से है।

कल्हण तत्कालीन ‘स्त्री-राज्य’ का वर्णन करते हुए कहते हैं कि ललितादित्य की सेना को ‘स्त्री राज्य’ के मतवाले हाथियों के मस्तकों ने नहीं अपितु स्त्री-सौन्दर्य ने ही निष्प्रभ कर दिया, परन्तु स्त्री-राज्य की रानी ने ललितादित्य के प्रताप-भय से कांपते हुए समर्पण कर दिया {तद्योधान्विगलद्धैर्यान्स्त्रीराज्ये स्त्रीजनोऽकरोत् । तुङ्गौ स्तनौ पुरस्कृत्य न तु कुम्भौ कवाटिनाम् । । स्त्रीराज्यदेव्यास्तास्याग्रे वीक्ष्य कम्पादिविक्रियाम् । संत्रासमभिलाषं वा निश्चिकाय न कश्चन । । (4. 173-174) }। ललितादित्य ने अपने शासनकाल में व्यापार, चित्रकला, मूर्तिकला धार्मिक उत्सवों को महत्व दिया। अतः कलाप्रिय ललितादित्य ने विजयोपरांत अपनी विजय के चिह्न के रूप में उस विजित प्रदेश में मंदिर या मूर्ति आदि का निर्माण भी कराया था। स्त्री-राज्य (मेघालय) में भी नृसिंह भगवान की विलक्षण चुम्बकीय निराधार विलक्षण मूर्ति स्थापित की {एकमूर्ध्वं नयद्रत्नमधः कर्षत्तथापरम् । बद्ध्वा व्यधान्निरालम्बं स्त्रीराज्ये नृहरिं च सः । । (4. 185)}

उपरोक्त वैदिक, ऐतिहासिक,पौराणिक आख्यानों, अभिलिखों, शिलालेखों, भग्नावशेषों, लोकमान्यताओं एवं प्रादुर्भूत हुए इन शिवलिंगों को देखकर यह सिद्ध होता है कि पूर्वोत्तर भारत सदियों से भारतवर्ष का ही अभिन्न अंग है। इस क्षेत्र के साथ भारतीय संस्कृति के सूत्र हजारों वर्षों से गूँथे हैं। पूर्वोत्तर भारत इस देश की भौगोलिक तथा सांस्कृतिक विविधता में एकत्व का एक अनुपम उदाहरण है। यह विविधता यहां के प्राकृतिक सौन्दर्य एवं जन-जीवन में सहज रूप से दृष्टिगोचर होती है। यह क्षेत्र 1947 तक मुख्य रूप से असम एवं बंगाल क्षेत्र में विभाजित था। देश-विभाजन के पश्चात् तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) के उत्तरी एवं पूर्वी क्षेत्र में असम एवं कुछ अन्य क्षेत्रों से अलग होकर धीरे-धीरे कालान्तर में असम, मेघालय, नागालैण्ड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा तथा अरुणाचल प्रदेश इन सात राज्यों का गठन हुआ।

वर्तमान में भारत का यह क्षेत्र बांग्लादेश, भूटान, चीन, म्यांमार और तिब्बत- इन पांच देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमा से संलग्न है। यह क्षेत्र अपने गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति, भाषा, परंपरा, रहन-सहन, पर्व-त्योहार आदि की दृष्टि से इतना वैविध्यपूर्ण है कि इस क्षेत्र को भारत की सांस्कृतिक प्रयोगशाला कहना अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा। असंख्य भाषाएं व बोलियाँ, भिन्न-भिन्न प्रकार के रहन-सहन, खान-पान और परिधान, आध्यात्मिकता तथा नैसर्गिक सौन्दर्य के कारण यह क्षेत्र अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। जैव-विविधता, सांस्कृतिक कौमार्य, सामुहिकता-बोध, प्रकृति-प्रेम, अपनी परंपरा के प्रति सम्मान भाव पूर्वोत्तर भारत की अद्वितीय विशेषताएँ हैं।

पौराणिक और सांस्कृतिक दृष्टि से पूर्वोत्तर भारत का शेष भारत से गहरा संबंध है परंतु शेष भारतवासी अल्प संपर्क होने के कारण इस क्षेत्र की विशिष्टताओं से अनभिज्ञ हैं अथवा वे भ्रांत धारणाओं से ग्रस्त हैं। अंग्रेजों की औपनिवेशिक, विभाजनकारी तथा जनजातीय नीतियों और ईसाई शिक्षा ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में अलगाववाद और उग्रता का बीजारोपण किया तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरान्त उसको निरंतर उपेक्षित किया गया। आज भी अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो नीति’ को मजबूत करने वाली मैकॉले की शिक्षा पद्धति में अलगाववादी शिक्षा दी जाती है कि इस क्षेत्र की सभी जनजातियां मंगोल हैं, वे क्रूर जंगली तथा हिंसक हैं। परन्तु उनमें प्रचलित अनेक रीतियाँ, लोक-मान्यताएँ, जीवन-मूल्य तथा परम्पराएँ शेष भारत की परम्पराओं से लेशमात्र भी अलग नहीं हैं।

अंततः इन सब तुच्छ नीतियों ने पूर्वोत्तर के अधिकांश क्षेत्र को अलगाव की आग में झोंक दिया और उग्र रूप धारण किए इस अलगाववाद की जड़ें बहुत गहराई तक फैल गई हैं। सौभाग्य से इस समय भारत सरकार की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के क्रियान्वयन से आशा बढ़ी है। जिससे सांस्कृतिक आधार पर भारत के सुदूर प्रांतों-पूर्वोत्तर में समरसता, आत्मीयता बढ़ेगी। भारत के पड़ोसी देशों के साथ सुदृढ़ सम्बंधों का आधार भी यही होगा। इतना ही नहीं, भारत विश्व में न केवल आर्थिक या सामरिक बल्कि विश्व बन्धुत्व तथा विश्व कल्याण की उच्चतम सांस्कृतिक भावना को सशक्त, सुदृढ़ तथा सुसंगठित करेगा।

लेखिका: डॉ सोनिया (सहायकाचार्या, संस्कृत विभाग), हिन्दू महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय

गाजियाबाद और मेरठ से भी आए थे दंगाई, बांग्लादेशी आतंकियों के भी मिले हैं लोकेशन

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के सुनियोजित होने के लगातार सबूत मिल रहे हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक दंगाई पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और मेरठ जैसे इलाकों से भी आए थे। जिस जगह आईबी के अंकित शर्मा की निर्मम हत्या हुई, वहॉं बांग्लादेशी आतंकियों के लोकेशन मिलने की बात पहले ही सामने आ चुकी है। कट्टरपंथी संगठन पीएफआई की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (मार्च 6, 2020) को खुलासा किया कि पिछले दिनों दंगाइयों की भीड़ में शामिल कुछ लोग गाजियाबाद और मेरठ से भी आए थे। यह अहम जानकारी दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की बीच हुई बैठक के बाद सामने आई। यह बैठक उत्तर-पूर्वी दिल्ली में डीसीपी कार्यालय में आयोजित की गई थी। दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार के अलावा उत्तर पूर्वी डीसीपी वेद प्रकाश सूर्या, मेरठ के आईजी प्रवीण कुमार और गाजियाबाद के एसएसपी इसमें शामिल थे।

कुमार ने कहा, “दिल्ली हिंसा के संबंध में कुछ बिंदु बैठक के दौरान उठाए गए थे। बैठक को पूर्वी रेंज के पुलिस अधिकारियों द्वारा घटना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के लिए बुलाया गया था।” कहा जा रहा है कि हिंसा जाँच करने वाले विशेष जाँच दल (SIT) ने हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल के हत्यारे और उन दंगाइयों की पहचान की है जिन्होंने डीसीपी अमित शर्मा और एसीपी अनुज शर्मा पर हमला किया था।

इससे पहले न्यूज 18 ने एक विडियो शेयर किया था, जिसे देखकर हमले की पूरी साजिश समझी जा सकती है। हिंसा भड़कने से पहले कुछ लोग सीसीटीवी को तोड़ते साफ तौर पर देखे गए। इसके बाद इन लोगों ने पुलिस को घटना वाले दिन 1 बजे के करीब कॉल किया। एसीपी अनुज, डीसीपी अमित शर्मा और हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल व अन्य पुलिसकर्मी वहाँ पहुँचे, तो हिंसक भीड़ ने सोची-समझी साजिश के तहत उन पर पथराव कर दिया।

दावा किया जा रहा है कि पुलिस पर हमले से पहले ही वहाँ पर सारे सीसीटीवी को तोड़ा-फोड़ा गया था ताकि उपद्रवियों की पहचान न हो सके। लेकिन, अब इसी सीसीटीवी फुटेज के कारण सैकड़ों की तादाद में दंगाइयों की पहचान हुई है। इसी के आधार पर उनकी धर-पकड़ की जा रही है। वहीं आधे दर्जन से अधिक दंगाइयों की पहचान स्थानीय निगरानी, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी की सहायता से की गई है। अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस अब दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर रही है।

बता दें कि शनिवार (मार्च 7, 2020) को दिल्ली पुलिस ने 24 फरवरी को दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों के दौरान 20 वर्षीय दिलबर सिंह नेगी की नृशंस हत्या में शामिल शाहनवाज नामक एक आरोपित को पकड़ा था। दिलबर का शव बृजपुरी के अनिल स्वीट हाउस में 26 फरवरी को क्षत-विक्षत अवस्था में मिला था।

दिलबर सिंह नेगी को दंगाइयों की भीड़ ने तलवार से काटने के बाद जलते हुए घर में फेंक दिया था। दंगाइयों ने दिलबर सिंह नेगी के हाथ और पैर काटने के बाद उनके शरीर के बाकी हिस्से को जलती आग में फेंक दिया था। दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों में तकरीबन 53 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 200 से अधिक जख्मी हैं।

दिल्ली दंगा ग्राउंड रिपोर्ट: छतों से एसिड बरसा रही थीं मुस्लिम औरतें, गुलेल से दाग रहे थे पेट्रोल बम

इस्लामी मुल्ला यासिर दिल्ली पुलिस को बोल रहा आतंकी, दंगाई शाहरुख़ को कहा- ‘हीरो’

विकिपीडिया का एडिटर जो मुस्लिम दंगाइयों को बचाने में लगा है: दिल्ली दंगे से लेकर ‘चौकीदार चोर है’ तक

1 दिन में 2 बार लात-जूता: कपिल मिश्रा पर झूठ के बाद अब संजय गुप्ता पर NDTV की छीछालेदर

प्रोपेगैंडा ऊँचा रहे हमारा! यह वाक्य शायद NDTV ने अब पूरी तरह से अंगीकृत कर लिया है। दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में अपना अलग सामानांतर एजेंडा जारी रखने के लिए NDTV हर तरह की घटिया हारकत करने के लिए तैयार नजर आ रहा है। पहले आठ राउंड फायरिंग करने के बाद फरार चल रहे मोहम्मद शाहरुख़ को मैग्सेसे पुरस्कार विजेता रवीश कुमार ने ‘अनुराग मिश्रा’ साबित करने की कोशिश की तो वहीं अब NDTV को भाजपा नेता कपिल मिश्रा को दंगों का जिम्मेदार साबित करने के लिए पूरा जोर लगाते हुए देखा जा सकता है।

NDTV ने एक वीडियो जारी कर के यह साबित करने का प्रयास किया था कि संजय गुप्ता नाम का यह व्यक्ति उन्हें मिल चुका है और वो कपिल मिश्रा का मकान मालिक है। NDTV ने यह दावा किया कि वे कपिल मिश्रा के मकान मालिक को ‘ट्रैक’ करने में कामयाब रहे, जिन्होंने दंगों के लिए कपिल मिश्रा को दोषी ठहराया, जबकि सच्चाई कुछ और थी।

कपिल मिश्रा ने इसके बाद स्पष्ट किया कि संजय गुप्ता उनके मकान मालिक नहीं हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने स्पष्ट किया कि संजय गुप्ता उनके मकान मालिक नहीं थे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि संजय गुप्ता कभी भी उनके मकान मालिक नहीं रहे हैं। कपिल मिश्रा ने यही बात अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर भी कही है। उन्होंने कहा कि NDTV ने राह चलते किसी शख्स को पकड़ लिया और दावा किया कि कपिल मिश्रा के मकान मालिक हैं।

कपिल मिश्रा के इस ट्वीट के कुछ देर बाद ही NDTV ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए सूचना जारी करते हुए कहा कि उन्हें पता चला है कि संजय गुप्ता ने उनसे झूठ कहा था और वो उनके मकान मालिक नहीं थे। सारा आरोप संजय गुप्ता (जिसे NDTV ने ट्रैक करने की बात कही थी) पर थोपते हुए NDTV ने ट्वीट में लिखा है कि संजय गुप्ता ने ही उनसे यह बात कही कि वो कपिल मिश्रा के मकान मालिक थे।

ट्वीट में NDTV ने बताया है कि हो सकता हो कि संजय गुप्ता ने कपिल मिश्रा के लिए मकान ढूँढने में ‘ब्रोकर/दलाल’ की भूमिका निभाई हो। इसके साथ ही NDTV ने अपने फैलाए हुए झूठ के रायते पर स्पष्टीकरण देने के लिए कपिल मिश्रा और संजय गुप्ता की निजी जानकारी शेयर करते हुए दो दस्तावेज भी सार्वजनिक किए हैं।

झूठ और प्रपंच के इस सिलसिले में NDTV ने यह नया मुकाम हासिल किया है और हमेशा की ही तरह इस बार भी उन्होंने किसी से माफ़ी नहीं माँगी है। NDTV ने सिर्फ यह साबित करने का प्रयास किया है कि संजय गुप्ता ने ही उनसे झूठ कहा।

NDTV द्वारा अँधेरे में तीर छोड़ने की यह पहली घटना नहीं है। NDTV और इसके पत्रकार, जिनमें रवीश कुमार भी शामिल हैं, अक्सर भाजपा नेता और उनसे विपरीत विचार रखने वाले लोगों पर अपने प्राइम टाइम से लेकर खबरों में भ्रामक तथ्यों के साथ ही मनगढ़ंत आरोप लगते हुए देखे जाते हैं।

इस पर कई बार मानहानि के आरोप लगाने तक की भी नौबत आ चुकी है, लेकिन हर बार रवीश कुमार यह दुहाई देते हुए देखे जाते हैं कि ‘मानहानि मीडिया की स्वतन्त्रता’ के लिए बाधक है। हालाँकि जो काम NDTV, रवीश कुमार और उनके ही जैसे प्रोपेगैंडा चलाने वाले दी वायर, दी क्विंट, स्क्रॉल आदि करते हैं, उसे ‘मीडिया’ कहना ही अपने आप में सबसे बड़ा भ्रामक तथ्य है। उसकी स्वतन्त्रता तो बाद की बात है।

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तस्वीर पाकिस्तान की, प्रियंका गाँधी ने यूपी का बता शेयर की: फजीहत होते ही ट्वीट डिलीट

कॉन्ग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी ने पाकिस्तान की फोटो का प्रयोग कर के झूठ फैलाया है। किसानों के मुद्दे पर योगी सरकार को घेरने के चक्कर में प्रियंका ने पाकिस्तान के किसानों की फोटो शेयर कर दी। बाद में फजीहत होने पर प्रियंका गाँधी ने अपनी ट्वीट डिलीट कर ली और सारे फोटो भी डिलीट कर लिए। इसके बाद प्रियंका गाँधी ने दोबारा एक विडियो शेयर किया और उसके माध्यम से किसानों के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की आलोचना की।

ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान की बात करते हुए प्रियंका गाँधी ने लिखा कि भारी बारिश और ओले पड़ने की वजह से यूपी में तमाम स्थानों पर किसानों की फ़सलें बर्बाद हो गईं। उन्होंने लिखा कि उन किसानों का दर्द सुना जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कई किसानों की तो 80% तक फसल बर्बाद हो गई है। उन्होंने यूपी सरकार पर कोरे दावे करने का आरोप लगाते हुए सलाह दी कि नुकसान का पूरा आकलन कर किसानों को पूरा मुआवजा दिया जाना चाहिए।

इस ट्वीट के साथ उन्होंने कई फोटो शेयर किए जिनमें से एक पाकिस्तान की थी। यानी, पाकिस्तान के किसानों की फोटो शेयर कर के यूपी के किसानों का दर्द बयाँ करने का दावा किया और योगी सरकार को घेरा भी:

प्रियंका गाँधी ने जो फोटो शेयर की, वो अप्रैल 17, 2019 को ‘शुहदा ऑफ पाकिस्तान आर्मी’ नामक पेज द्वारा शेयर की गई थी। इसे फेसबुक पर शेयर करते हुए पाकिस्तानी पेज ने लिखा था कि किसान भाइयों के लिए दुआ करें। अब एक साल बाद पाकिस्तान के किसानों की उसी फोटो को ओलावृष्टि प्रभावित यूपी का किसान बताते हुए प्रियंका गाँधी ने योगी सरकार की आलोचना की। फजीहत होने के बाद उन्होंने अपनी ट्वीट को डिलीट कर लिया है।

प्रियंका गाँधी की इस हरकत के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी जम कर आलोचना की। लोगों ने प्रियंका गाँधी के प्रोपेगेंडा को बेनकाब करते हुए मजाकिया अंदाज़ में लिखा कि देखो प्रियंका को किसानों की कितनी चिंता है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस नेताओं के लिए ऐसी हरकतें नई नहीं है और वो पहले भी इस तरह से झूठ फैलाते रहे हैं।

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19 साल के इस्लाम ने अमेजन से खरीदा बम बनाने का सामान, जैश आतंकियों को दिए: पुलवामा हमले में 2 और गिफ्तार

बीते साल जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ (CRPF) जवानों को निशाना बनाकर हमला किया गया था। जैसे-जैसे जॉंच आगे बढ़ती जा रही है हमले की साजिशों की परतें खुलती जा रही है। इस मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने दो और युवकों को गिरफ्तार किया है। साथ ही एक बड़ा खुलासा किया है। इसके मुताबिक बम बनाने के सामान ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट अमेज़न (Amazon) से खरीदकर मॅंगवाए गए थे। अमेज़न ने इस खरीदारी की डिटेल्स भी साझा की है।

एनआईए ने श्रीनगर के उन्नीस साल के वजीर उल इस्लाम और पुलवामा के रहने वाले मोहम्मद अब्बास राठेर (32) को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में इस्लाम ने बताया कि उसने आईइडी (IED) विस्फोटक बनाने के लिए अमेजन से केमिकल, बैटरी और अन्य सामान मँगाए थे। ये सामान लेकर वह खुद जैश आतंकियों के पास गया था।

वहीं, मोहम्मद अब्बास राठेर जैश-ए-मोहम्मद का पुराना ओवर ग्राउंड वर्कर है। जब जैश आतंकवादी और आईईडी एक्सपर्ट उमर अप्रैल-मई, 2018 में कश्मीर पहुँचा, तब उसने ही उसे अपने घर में ठहराया था। इसके अलावा उसने इस मामले में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों आदिल अहमद डार, समीर अहमद डार और पाकिस्तानी आतंकवादी कामरान को भी कई बार उसने अपने घर में शरण दी थी।

वजीर उल इस्लाम और अब्बास की गिरफ्तारी के बाद पुलवामा आतंकी हमले में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या 5 हो गई है। ज्ञात हो कि पहले गिरफ्तार किए गए लोगों में एक पिता-पुत्र और आत्मघाती बम हमलावर के करीबी शामिल थे।

पिछले साल 14 फरवरी को दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में बड़ा आतंकी हमला हुआ था। आत्मघाती बम हमलावर आदिल अहमद डार ने विस्फोटकों से भरी कार सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले में घुसा दी थी। हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे।

कुछ ही दिन पहले सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ जिले के मारवा इलाके से हिजबुल मुजाहिदीन के पाँच ओवर ग्राउंड वर्करों (OGW) को गिरफ्तार किया था। किश्तवाड़ पुलिस को सूचना मिली थी कि मारवा इलाके के रहने वाले गुलाम हुसैन, मोहम्मद यासीन, जाकिर हुसैन, मोहम्मद इकबाल और बशीर अहमद हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों को पनाह देने के साथ उनकी मदद करते थे।

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गंगाजल स्टाइल में दबोचा गया ताहिर हुसैन, चकमा देने के लिए बुर्का की जगह पहन रखा था…

2003 में एक फिल्म आई थी। नाम था गंगाजल। 5 मार्च 2020 को दिल्ली की एक अदालत में कुछ ऐसा हुआ लगा जैसे गंगाजल के दृश्य फिल्माए जा रहे हों। दरअसल, उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के सरगना ताहिर हुसैन को जिस तरह दबोचा गया वह इस फिल्म की कहानी से मिलती-जुलती है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राऊज एवेन्यू कोर्ट की पार्किंग से AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को उस समय पकड़ा, जब वह अपने वकील के साथ पार्किग में मास्क लगाए पहुँचा।

उसे अंदाजा नहीं था कि क्राइम ब्रांच की टीम सादी वर्दी में उसका इंतजार कर रही है। फिल्म गंगाजल में भी अपराधी सुंदर यादव बुर्का पहनकर कोर्ट में सरेंडर करने जाता है और एसपी अमित कुमार का किरदार निभाने वाले अजय देवगन के नेतृत्व में पुलिस टीम साडी वर्दी में पहले से ही उसे दबोचने के लिए फिल्डिंग लगाए बैठी रहती है। ठीक इसी तरह की तैयारी ताहिर हुसैन को दबोचने के लिए की गई थी। फर्क सिर्फ इतना था कि ताहिर ने बुर्के की जगह अपने चेहरे को मास्क से ढक रखा था।

बता दें कि ताहिर हुसैन पर आइबी कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या में शामिल होने के साथ-साथ, हिंसा भड़काने, साजिश रचने समेत कई अन्य मामले दर्ज किए गए हैं। ताहिर हुसैन अपने वकील के साथ राऊज एवेन्यू कोर्ट में सरेंडर करने के लिए पहुँचा था, लेकिन पहले से वहाँ मौजूद दिल्ली पुलिस के विशेष जाँच दल ने गिरफ्तार कर लिया।

करीब 40 पुलिसकर्मियों ने गुरुवार सुबह 9 बजे से ही कोर्ट में घेराबंदी कर ली थी। वे अलग-अलग वेशभूषा में मौजूद थे। कोई छोले-कुलचे वाले के पास ग्राहक बनकर खड़ा ​था तो कोई पार्किंग अटेंडेंट बनकर। कोई चायवाला बना था तो कोई टाइप राइटर रखकर मुंशी का वेश बनाए था। कई पुलिसवाले वकील बने घूम रहे थे। जैसे ही ताहिर पार्किंग में पहुँचा, पुलिस ने उसे धर-दबोचा।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज होने के बाद ताहिर पार्किंग में पहुँचा था। लेकिन पुलिस को चकमा नहीं दे पाया। इससे पहले उसके वकील मुकेश कालिया ने गुरुवार (मार्च 5, 2020) सुबह ही अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट विशाल आहूजा के पास सरेंडर के लिए आवेदन किया था। मुकेश कालिया ने कोर्ट को कहा था कि ताहिर रास्ते में हैं और कुछ ही देर में राऊज एवेन्यू कोर्ट में सरेंडर कर देगा।

ताहिर दंगों में अपना नाम सामने आने के बाद से ही फरार था। इस बीच उसकी संलिप्तता की गवाही देते कई विडियो सामने आए। चश्मदीदों के अनुसार उसकी इमारत में करीब तीन हजार दंगाई जमा थे। वहॉं से हिंदुओं को निशाना बना पत्थरबाजी हुई। पेट्रोल बम फेंके गए। गोलियॉं चलाई गई। उसकी इमारत से पत्थरों और पेट्रोल बम का जखीरा बरामद किया गया था। शुरुआत में आप ने उसका बचाव करने की कोशिश की। लेकिन, जब एक के बाद एक सबूत सामने आते गए तो निलंबित कर पार्टी ने उससे पल्ला झाड़ने की कोशिश की।

ताहिर हुसैन को शुक्रवार को कड़कड़डूमा कोर्ट में जज के घर पेश किया गया, जहाँ से उसे 7 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया। वहीं दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच का कहना है, “घटना वाले दिन ताहिर हुसैन ने सबसे ज्यादा और लगातार जिन लोगों के साथ बात की थी, एसआईटी ने शुक्रवार को उन 15 लोगों की पहचान कर ली। यह बातचीत मोबाइल के जरिए हुई। ताहिर ने इन सबसे उसी दिन इतनी ज्यादा देर तक क्यों और क्या लंबी बातचीत की? इसका खुलासा नहीं हो सका है।”

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच का कहना है कि मुस्तफाबाद में तीन से चार लोगों ने ताहिर हुसैन की मदद की थी। क्राइम ब्रांच की राडार पर अब ये चारों लोग हैं। बताया जा रहा है कि जल्द ही इन चारों लोगों को जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

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NDTV का नया प्रपंच: राह चलते शख्स को बताया कपिल मिश्रा का मकान मालिक, रिपोर्टिंग से फँसाने की साजिश!

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों ने मीडिया गिरोह की हिपोक्रेसी को उजागर कर दिया है। दंगों के दौरान और उसके बाद भी कुछ मीडिया गिरोह झूठे नैरेटिव को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है कि ये दंगे मुस्लिम विरोधी थे, जबकि हकीकत यह है कि यह दंगे इस्लामी भीड़ के आक्रामक रवैये का परिणाम थे। इनका ये आक्रामक रवैया दिसंबर में तब शुरू हुआ था, जब इन्होंने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर दंगे भड़काए थे।

ऐसे कई चैनल, पत्रकार और पोर्टल्स हैं, जिन्होंने दिल्ली के दंगों के बारे में झूठे नैरेटिव को आगे बढ़ाया है। हालाँकि, NDTV वो चैनल है, जिसने प्रभावी रुप से इस नैरेटिव का नेतृत्व किया। इसी कड़ी में बात अब कपिल मिश्रा को घेरने तक के प्रोपेगेंडा तक पहुँच गई है। दिल्ली के दंगों के लिए बीजेपी नेता कपिल मिश्रा को दोषी ठहराने के लिए मीडिया समूह किसी भी हद तक जाने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रहा है।

बता दें कि 22 जनवरी को जाफराबाद और चाँद बाग में रोड बंद किए जाने के खिलाफ सड़क पर उतरे कपिल मिश्रा ने कहा था, “दिल्ली पुलिस तीन दिन में रास्तों को खाली कराए। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के बाद वापस जाने तक हम यहाँ से शांतिपूर्वक जा रहे हैं, लेकिन अगर तीन दिन में रास्ते खाली नहीं हुए, तो हम फिर सड़कों पर उतरेंगे।” मीडिया उनके इस बयान पर हावी हो गई और कपिल मिश्रा को ‘दंगा भड़काने’ के लिए दोषी ठहराने की कोशिश की।

ऐसा करने करके उन्होंने निश्चित रूप से उन इस्लामवादियों को एक ढाल दिया, जिन्होंने और अधिक भड़काऊ बयान दिए थे। शरजील इमाम ने दिल्ली को बंद करने और देश को तोड़ने के बारे में बात कही थी और हकीकत में उमर खालिद ने लोगों को सड़कों पर आने के लिए कहकर हिंसा भड़काई थी, वो भी तब जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यहाँ थे। इसके अलावा वारिस पठान ने कहा था कि मुस्लिम हिंदुओं पर हावी हो सकते हैं और AAP के विधायक अमानतुल्लाह खान पर तो पहले ही हिंसा भड़काने का मामला दर्ज है।

मीडिया ने हिंसा के लिए उकसाने वाले इन सभी लोगों को बचाते हुए कपिल मिश्रा को दोषी ठहराने के लिए ओवरटाइम काम किया। NDTV ने इसकी अगुवाई करते हुए 6 मार्च को एक वीडियो पब्लिश किया, जिसमें उनके झूठ बोलने वाले एंकर श्रीनिवासन जैन, कपिल मिश्रा के मकान मालिक से बात कर रहे थे।

NDTV के वीडियो का स्क्रीनशॉट

वीडियो में संजय गुप्ता नाम के एक शख्स से बात की जा रही है, जिसकी पहचान NDTV द्वारा कपिल मिश्रा के मकान मालिक के रूप में की गई है। NDTV यह दावा करता है कि कि वे कपिल मिश्रा के मकान मालिक को ट्रैक करने में कामयाब रहे, जिन्होंने दंगों के लिए कपिल मिश्रा को दोषी ठहराया, जबकि सच्चाई कुछ और थी।

कपिल मिश्रा ने दावा किया है कि संजय गुप्ता उनके मकान मालिक नहीं हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दावा किया कि संजय गुप्ता उनके मकान मालिक नहीं थे। उन्होंने तो यहाँ तक कहा कि संजय गुप्ता कभी भी उनके मकान मालिक नहीं रहे हैं। कपिल मिश्रा ने यही बात अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर भी कही है। उन्होंने दावा किया कि NDTV ने राह चलते किसी शख्स को पकड़ लिया और दावा किया कि कपिल मिश्रा के मकान मालिक हैं। 

वैसे देखा जाए तो वीडियो में भी संजय गुप्ता यह दावा नहीं करते हैं कि वह मिश्रा के ‘मकान मालिक’ हैं। गुप्ता जिस तरह से बोल रहे हैं, उससे लगता है कि वह प्रॉपर्टी ब्रोकर हो सकते हैं, मकान मालिक नहीं। इसके साथ ही कपिल मिश्रा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए यह भी दावा किया कि NDTV के एंकर श्रीनिवास जहाँ पर खड़े हैं, वह जगह भी वो नहीं है, जहाँ कपिल मिश्रा रहते हैं।

NDTV ने दिल्ली दंगों के दौरान तनाव को बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए। इसके लिए मीडिया संस्थान ने कई झूठे आरोप भी लगाए। गौरतलब है कि इससे पहले NDTV ने शिव विहार क्षेत्र के दो स्कूलों के बारे में गलत रिपोर्टिंग किया था, जिसका ऑपइंडिया ने पर्दाफाश किया था। शिव विहार में दो स्कूल हैं, जो अगल-बगल में स्थित हैं। एक फैसल फ़ारूक़ का राजधानी स्कूल और एक एक पंकज शर्मा का डीआरपी स्कूल। राजधानी स्कूल दंगाइयों का मुख्य अड्डा बना और सारी गोलीबारी, पत्थरबाजी और बमबारी यहीं से हुई।

दूसरी तरफ डीआरपी स्कूल को जला कर ख़ाक कर दिया गया। राजधानी स्कूल के ऊपर से रस्सी के सहारे उतरे दंगाइयों ने डीआरपी स्कूल को फूँक दिया। ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग में तहकीकात की तो पाया कि राजधानी स्कूल में दिखावटी तोड़फोड़ हुई थी और कुछ बेंच-डेस्क को पलट दिया गया था। NDTV ने बिना किसी सबूत के दावा किया कि यह मुस्लिम स्वामित्व वाला स्कूल है, जिस पर सबसे पहले हिंदू लोगों ने हमला किया था। यह हिंदुओं को फँसाने की NDTV की साजिश थी। 

दिल्ली के जमनापार में थी बड़े कत्लेआम की तैयारी, क्या कपिल मिश्रा ने राजधानी को बड़ी हिंसा से बचा लिया?

कपिल मिश्रा के बयान से पहले ही मुस्लिम भीड़ ने शुरू कर दिए थे दंगे: ‘Live Video’ से खुलासा

जब घर में आग लगेगी तो 200 लिटर फ्री पानी काम नहीं आएगा: कपिल मिश्रा की ऑपइंडिया से बातचीत

जुटाए ₹72 लाख: दिल्ली दंगे में मारे गए हिन्दुओं के परिवारों के लिए आगे आए कपिल मिश्रा और तजिंदर बग्गा

‘UP में मेरी जान को खतरा, मेरा केस कहीं और ट्रांसफर कर दो’ – कमलेश तिवारी का हत्या आरोपी पहुँचा सुप्रीम कोर्ट

हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या के आरोपितों ने उत्तर प्रदेश में में अपनी जान को खतरा बताया है और इसी का हवाला देते हुए आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट में केस को लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर करने की गुहार लगाई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

गुरुवार को कमलेश तिवारी की हत्या के मुख्य आरोपी अशफाक की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें मुख्य आरोपी अशफाक ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर कहा है कि यूपी में उसकी जान को खतरा है, इसलिए हत्या के केस को दिल्ली या किसी अन्य राज्य में शिफ्ट किया जाए। इस मामले पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

दरअसल कमलेश तिवारी हत्याकांड में यूपी पुलिस ने जाँच के बाद दो लोगों पर हत्या करने और 11 लोगों पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में चार्जशीट दायर किया है। इसी बीच हत्या के आरोपित अशफाक ने यूपी में अपनी जान को खतरा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से केस को दिल्ली या किसी अन्य जगह भेजने की माँग की।

बता दें कि पिछले वर्ष 18 अक्टूबर को हिंदू महासभा के पूर्व नेता और हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की दो बदमाशों ने लखनऊ में बेरहमी से हत्या कर दी थी। दोनों बदमाश भगवा कपड़े पहने हुए थे और मिठाई के डिब्बे में पिस्टल व चाकू छिपाकर लाए थे। दोनों नाका स्थित खुर्शेदबाग की तंग गलियों में स्थित कमलेश के घर पहुँचे। पहली मंजिल स्थित पार्टी दफ्तर में पहले उनकी गर्दन पर गोली मारी थी। फिर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर गला रेत दिया था।

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‘मैं अली को जानती तो नहीं, लेकिन उसने कमलेश तिवारी की हत्या का जश्न मनाया… इसलिए उसे रिलीज करो’