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दंगाइयों का डर ऐसा: पति लहूलुहान सड़क पर पड़ा था, पत्नी लगाती रही गुहार लेकिन कोई न आया

वे खाना खा घर से निकले। रास्ते में पत्थर आकर सिर पर लगा। सड़क पर ही गिर पड़े। सिर से खून बह रहा था। उनके मोबाइल से पत्नी को कॉल आया। आवाज किसी अनजान शख्स की थी। पत्नी घर से दौड़े-दौड़े पहुॅंची तो देखा कि पति लहूलुहान पड़े हैं। सॉंसे चल रही है। मदद के लिए गुहार लगाती रही। लेकिन कोई न आया। एंबुलेंस भी नहीं पहुॅंचा। आखिर में एक बाइक सवार की मदद से वह पति को अस्पताल ले गई, लेकिन अपना सुहाग नहीं बचा पाई।

ये कहानी है आलोक तिवारी की। उस आलोक तिवारी की जो एक गत्ते की फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। उनकी जान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों के दौरान चली गई। उन्हें उन्हीं दंगाइयों ने मारा जो शिव विहार में फैसल फ़ारूक़ के राजधानी स्कूल से हिंदुओं को निशाना बना रहे थे। जिस स्कूल की छत पर गुलेल सेट किया गया था। इतना बड़ा गुलेल की दूर तक हिंदुओं को निशाना बनाया जा सके। दंगों में राजधानी स्कूल को तो मामूली नुकसान हुआ है लेकिन उससे सटा एक स्कूल जो पंकज शर्मा का है जिसे भारी नुकसान पहुँचा है।

आलोक की पत्नी कविता तिवारी को जब पति के बारे में सूचना मिली तो उनके होश ही उड़ गए। उन्हें बताया जाता है कि उनके पति पर धारदार हथियार से वार किया गया है और तुरंत अस्पताल पहुँचाए जाने की ज़रूरत है। घर में रुपए-पैसे नहीं थे। कोई मददगार भी नहीं था। मोहल्ले में कोई मदद को तैयार नहीं था, क्योंकि मुस्लिम दंगाई भीड़ हिंसा पर उतारू थी। हर कोई अपनी जान बचने में लगा था। ऐसे समय में सोचिए कविता ने क्या किया होगा? आइए, पूरा मामला आपको समझाते हैं।

राजधानी स्कूल में जमा दंगाइयों के शिकार हुए लोगों में दिनेश कुमार खटीक और आलोक तिवारी शामिल हैं। दलित समुदाय से आने वाले दिनेश अपने बच्चों के लिए दूध लेने निकले थे, वहीं आलोक खाना खा कर बाहर टहल रहे थे। इन दोनों की तो न तो दंगाइयों से कोई मुठभेड़ हुई थी और न ही उन्होंने उनसे झड़प किया था, लेकिन फिर भी उनकी हत्या कर दी गई।

ऑपइंडिया की टीम मृतक आलोक तिवारी के घर पर पहुँची, जहाँ उनकी पत्नी कविता, सास और साले से हमारी बातचीत हुई। हमारी नज़रें आलोक तिवारी के माँ-बाप को ढूँढ रही थी लेकिन स्थानीय लोगों ने बताया कि अपने बेटे का दाह-संस्कार करने के बाद वो घर भी नहीं आए और सीधा कानपुर स्थित अपने गाँव चले गए। स्थानीय लोग बताते हैं कि मजहबी दंगाइयों के डर के कारण आलोक तिवारी के माता-पिता श्मशान घाट से घर आने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। आर्थिक रूप से भी उनकी पत्नी और उनके परिवार की स्थिति बिलकुल ही दयनीय है। अंतिम संस्कार भी चंदा जुटाकर ही किया गया था।

जब ऑपइंडिया की टीम वहाँ पर पहुँची, तब आलोक तिवारी के साले मुआवजा सम्बन्धी फॉर्म वगैरह भरने में व्यस्त थे और वहाँ कुछ पुलिसकर्मी इस काम में उनकी मदद कर रहे थे। उनकी पत्नी बात करने की अवस्था में नहीं थी, लेकिन हमारे अनुरोध के बाद उन्होंने अपनी बात रखी। मृतक की पत्नी ने बताया कि 26 फरवरी के दिन आलोक तिवारी रात का भोजन करने के बाद बाहर टहलने निकले थे। जब उन्हें लौटने में देर हुई तो उनकी पत्नी को चिंता सताने लगी। इसके थोड़ी ही देर बाद फोन आया कि उनके पति गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और वो जल्दी से उन्हें लेने आ जाएँ।

उनकी पत्नी ने बताया कि जब आलोक तिवारी टहलने निकले थे, तब उनकी पत्नी ने उन्हें रोका था लेकिन वो नहीं माने। जब उनके घायल होने का समाचार आया, तब उनकी पत्नी अपने मोहल्ले में घर-घर जाकर लोगों से गुहार लगाती रही कि वो उनकी मदद करें लेकिन कोई भी आगे नहीं आया। घायल आलोक तिवारी की देखभाल कुछ हिन्दू कर रहे थे लेकिन उन्हें तुरंत अस्पताल पहुँचाए जाने की ज़रूरत थी। इसके बाद एक स्थानीय व्यापारी ने आलोक तिवारी की पत्नी की मदद की और उन्हें अपनी बाइक दी। उसी बाइक पर एक व्यक्ति के साथ पीछे बैठ कर वह अपने घायल पति को लेने गईं।

जब आलोक तिवारी की पत्नी वहाँ पहुँचीं तब उन्होंने देखा कि उनके पति के सिर से लगातार ख़ून निकल रहा था। उन्होंने एम्बुलेंस बुलाया लेकिन एम्बुलेंस वाले ने भी आने से मना कर दिया क्योंकि उस क्षेत्र में स्थिति काफ़ी तनावपूर्ण थी। इसके बाद उन्हें घर लाया गया। बाइक पर व्यक्ति ड्राइविंग कर रहा था और आलोक तिवारी की पत्नी पीछे बैठी थीं। घायल आलोक तिवारी को बीच में बिठाया गया था। उन्हीं 250 रुपयों के साथ उनकी पत्नी अपने घायल पति को अस्पताल लेकर गईं। सोचिए, उस वक़्त उस महिला ने ऐसे माहौल में भी कितने साहस से काम लिया।

आलोक तिवारी के घर के बाहर उनके परिजन व रिश्तेदार (फोटो: ऑपइंडिया)

इसके बाद बाकी के परिजन आए। ऐसा नहीं है कि कविता तिवारी की हालत बहुत अच्छी थी। वो ख़ुद काफ़ी दिनों से बीमार थीं और उनके सिर पर आलमीरा गिर जाने के कारण गहरी चोट लगी थी। ऐसी अवस्था में भी घर में रुपए-पैसे न होने के बावजूद उन्होंने इतना सब कुछ किया। ऑपइंडिया की टीम से कविता तिवारी की माँ ने बताया कि कविता बार-बार बेहोश हो रही हैं।

जहाँ तक आलोक तिवारी के बच्चों की बात है, उनकी एक 8 साल की बेटी सोनाक्षी है। एक 4 साल का लड़का भी है, जिसका नाम आरुष है। आरुष को अपने पिता की मौत के बारे में कुछ पता नहीं था, वो वहीं पर हँस-खेल रहा था। पत्नी गुमसुम से ज़मीन पर चादर बिठा कर बैठी हुई थी। आलोक तिवारी की सास ने बताया कि अगर मुस्लिम दंगाई भीड़ थोड़ा आगे आ जाती तो उनके घरों में घुस जाती। स्थानीय महिलाओं ने भी इस बात की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि अगर दंगाई भीड़ आगे आती तो उनकी इज्जत-आबरू पर बन आती।

स्थिति ये है कि आलोक तिवारी की पत्नी के पास ये उनके घर में उनकी कोई फोटो तक नहीं है। वो बताती हैं कि यात्रा के दौरान एक स्टेशन पर उनका सामान चोरी हो गया था, जिसमें शादी वाला एल्बम भी चला गया। फोटो के नाम पर कविता के पास अपने पति का आधार कार्ड है जो वो दिखाती हैं।

‘उनके’ डर से बच्चों के साथ घर में दुबके रहते हैं, रात भर नींद नहीं आती: महिलाओं ने सुनाया अपना दर्द – ग्राउंड रिपोर्ट

मेरे भाई को जिहाद ने मारा है, एक-एक मस्जिदों व मदरसों की तलाशी ली जाए: दलित दिनेश के भाई

कपिल मिश्रा के बयान से पहले ही मुस्लिम भीड़ ने शुरू कर दिए थे दंगे: ‘Live Video’ से खुलासा

कुतिया, उल्लू की पट्ठी, तेरे जिस्म में है क्या? कोई थूकता तक नहीं: ‘मेरा जिस्म, मेरी मर्जी’ से भड़के लेखक खलील

पाकिस्तान के जाने-माने लेखक खलील-उर-रहमान ने एक टीवी डिबेट के दौरान एक महिला के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद उनका विरोध शुरू हो गया है। खलील ने लाइव टीवी न्यूज़ डिबेट के दौरान पाकिस्तानी महिला पत्रकार मारवी सिरमद के ख़िलाफ़ टिप्पणी की। दरअसल, खलील पाकिस्तान में चल रहे ‘औरत मार्च’ पर चर्चा में हिस्सा लेने स्टूडियो में पहुँचे थे। मारवी इस चर्चा में फोन कॉल से जुड़ी हुई थीं। खलील उन पर अचानक से भड़क उठे और लगातार अभद्र भाषा का प्रयोग करने लगे। औरत मार्च में ‘मेरा जिस्म, मेरी मर्जी’ वाले नारे को लेकर खलील भड़क उठे थे।

सोशल मीडिया पर खलील के बयान का विडियो भी ख़ूब शेयर हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि अदालत ने माना है कि अगर ‘मेरा जिस्म, मेरी मर्जी’ जैसे नारे लगते हैं तो ये मुल्क के लिए सही नहीं है। इसके बाद जैसे ही वो ‘पाकिस्तान की संस्कृति’ का बखान करने जा रहे थे, मरवी ने ‘मेरा जिस्म, मेरी मर्जी’ बोलना शुरू कर दिया। भड़के खलील ने सवाल दागा कि आख़िर तेरे जिस्म में है क्या? यही आपत्तिजनक सवाल वो बार-बार दोहराते रहे। उन्होंने पूछा कि तेरे जिस्म में है क्या और उस पर मर्जी चलाता कौन है? खलील का दावा था कि मारवी उनके बीच में बोल कर उन्हें टोक रही हैं।

खलील ने मारवी से पूछा; “Who the hell are you? अपना जिस्म देखो जाकर। आप इस तरह से बात मत करिए।” न्यूज़ एंकर लगातार खलील को ये सब बोलने से मना करती रही लेकिन वो नहीं रुके। खलील ने मारवी से कहा कि उनके जिस्म पर कोई थूकता तक नहीं है। उन्होंने कहा कि बेहया औरत के जिस्म पर कोई थूकता तक नहीं है। इसके बाद उन्होंने उलटा मारवी को ही फटकारा कि वो काफ़ी बेहूदा बातें कर रही हैं। उन्होंने कहा- “चुप रह कुतिया, उल्लू की पट्ठी कहीं की। एकदम चुप रह।” जब न्यूज़ एंकर ने खलील को तहजीब से बात करने की सलाह दी तो उन्होंने मारवी को ‘बद्तमीज औरत’ कह कर सम्बोधित किया।

उन्होंने मारवी को ‘तेरी ऐसी की तैसी‘ कह कर धमकाया भी। उन्होंने मारवी को आईने में जाकर अपनी शक्ल देखने की सलाह दी और उनकी बातों को बकवास करार दिया। मारवी ने हैरान होते हुए कहा कि ये आदमी एक तरफ उन्हें उन्हें भर-भर के गालियाँ दे रहा है और दूसरी तरह ‘तमीज’ की बातें भी कर रहा है। खलील ने न्यूज़ एंकर को भी डाँट पिलाते हुए कहा कि किस ‘घटिया औरत’ को उनके साथ डिबेट में डाल दिया गया है।

अफगानिस्तान: 11 दिनों में पहली बार अमेरिकी एयरस्ट्राइक, तालिबानी हमले में मारे गए थे 20 जवान

अफगानिस्तान के बहु प्रचारित शांति समझौते पर खतरा मंडराने लगा है। अमेरिका ने तालिबानी ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि बीते 11 दिनों में तालिबानियों को निशाना बनाकर पहली बार हमला किया गया है। हमला दक्षिणी हेलमंद प्रांत के नाहर-ए-सराज में किया गया।

इससे पहले तालिबान के हमलों में मंगलवार रात अफगान सेना और पुलिस के कम से कम 20 कर्मियों की मौत हो गई थी। सरकारी अधिकारियों ने बुधवार को एएफपी को यह जानकारी दी। ख़ास बात यह है कि इस हमले से कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि उनकी बागियों के राजनीतिक प्रमुख (तालिबान नेता मुल्ला बरदार) से ‘बहुत अच्छी’ बातचीत हुई है। ज्ञात हो कि अफगानिस्तान करीब 40 साल से हिंसाग्रस्त है। वहाँ सबसे पहले सोवियत संघ (अब रूस) की सेनाएँ रहीं और अब अमेरिकी सेना मौजूद है।

ट्रम्प की तालिबानी नेता से, अफगान सरकार और अमेरिका के बीच 29 फरवरी को हुए शांति समझौते को लागू करने पर चर्चा हुई थी। ट्रम्प ने इस बातचीत को सफल बताते हुए तालिबान को ‘गुड लक’ भी कहा था। ट्रम्प और
मुल्ला बरदार की बातचीत के बाद व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी किया था। इसके मुताबिक, किसी आतंकी संगठन के नेता और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच यह पहली ऐसी चर्चा है, जिसकी सार्वजनिक पुष्टि की जा रही है। इस वार्ता के चंद घंटे बाद हुए हमले ने शांति समझौते पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

व्हाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति ने तालिबान नेता से साफ कहा कि समझौते की सफलता के लिए हिंसा का फौरन बंद होना जरूरी है। दोनों पक्षों की बातचीत सकारात्मक रही। अमेरिका ने साफ किया है कि वो अफगानिस्तान में अमन बहाली के लिए कोशिशें जारी रखेगा।”

प्रांतीय काउंसिल के सदस्य सैफुल्लाह अमीरी ने बताया, “तालिबान के लड़ाकों ने कल रात कुंदुज जिले के इमाम साहिब जिले में सेना की कम से कम तीन चौकियों पर हमला किया। इसमें कम से कम 10 सैनिकों और चार पुलिस कर्मियों की मौत हो गई है।” विद्रोहियों ने मंगलवार रात मध्य उरूज़गन में भी पुलिस पर हमला कर दिया।

पहाड़ी से हटाई गई जीसस की प्रतिमा, अतिक्रमण और धर्मांतरण की शिकायतों के बाद कार्रवाई

कर्नाटक के बेंगलुरु ग्रामीण जिले की एक पहाड़ी से जीसस की विवादित प्रतिमा हटा दी गई है। यह कार्रवाई मंगलवार को की गई (मार्च 03, 2020)। इससे पहले इसी तरह का विवाद रामनगर जिले में देखने को मिला था।डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, बारह फीट ऊँची जीसस की प्रतिमा को स्थानीय अधिकारियों ने पुलिस सुरक्षा में हटाया। इस मामले में बजरंग दल और हिन्दू रक्षा दल की आपत्ति के बाद यह कार्रवाई की गई।

पहाड़ी के ऊपर अतिक्रमण कर प्रतिमा स्थापित करने के शिकायत की गई थी। साथ ही जबरन धर्मांतरण का भी आरोप था। कुछ राइट विंग समूहों ने पिछले हफ्ते स्थानीय प्रशासन से यीशु की 12 फुट की मूर्ति को हटाने की माँग की थी। इसके बाद देवनहल्ली तहसीलदार के नेतृत्व में स्थानीय अधिकारियों ने मंगलवार को प्रतिमा हटा दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को सोमवार तक का समय दिया था बाद में अधिकारियों ने खुद ही इसे हटाया। इससे पहले पिछले बृहस्पतिवार (फरवरी 27, 2020) को ही गाँव में एक शांति बैठक के बाद हुई जहाँ अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया था कि प्रतिमा को हटा दिया जाएगा।

हालाँकि, एक ग्रामीण ने मीडिया को बताया कि मूर्ति और पास में एक क्रॉस के लिए सभी आवश्यक अनुमति प्राप्त थी। उसने कहा, “हमारे पास प्रतिमा और उसके चारों ओर क्रॉस के लिए भी सभी आवश्यक अनुमति है। हम नहीं जानते कि वास्तव में क्या अवैध है, लेकिन हमने अधिकारियों की आपत्ति के बाद इस कार्रवाई का विरोध नहीं किया। हमने उनके साथ सहयोग किया। प्रतिमा अब गाँव के चर्च में है।” अधिकारियों ने बताया कि मूर्ति और क्रॉस को कपड़े में लपेटकर चर्च के अधिकारियों को सौंप दिया गया है, जबकि अन्य सामान, जैसे फर्नीचर को बाहर स्थानांतरित कर दिया गया है।

गाँव के तहसीलदार अजित राय ने बताया कि मूर्ति ने पहाड़ी के नीचे चर्च के पास सड़क के एक हिस्से को अवरुद्ध कर दिया था। उन्होंने कहा, “जब ग्रामीणों ने सड़क चौड़ी करनी चाही तो मूर्ति हटाकर पहाड़ी पर स्थानांतरित कर दी गई थी। यह सार्वजनिक कब्रिस्तान है, इसलिए किसी विशेष धार्मिक का प्रतीक होना सही नहीं है।”

मीडिया से बातचीत में अधिकारियों ने कहा, “हमें इस मामले में कुछ हिंदुत्ववादी समूहों से ज्ञापन मिला था। हालाँकि, हमें ग्रामीणों की कोई शिकायत नहीं मिली थी। हमने ग्रामीणों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की और उन्होंने मूर्ति को हटाए जाने पर सहमति जताई।” साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने मूर्ति को हटाने के दौरान पुलिस को सहयोग लिया, ताकि कुछ भी गलत न हो।

दिग्विजय गिरा रहे कमलनाथ की सरकार? बोले शिवराज- इतने गुट हैं कॉन्ग्रेस में कि आपस में ही मारामारी मची है

मध्य प्रदेश में सियासी गतिविधियॉं जोरों पर है। कॉन्ग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। कॉन्ग्रेस ने बीजेपी पर प्रदेश की कमलनाथ सरकार को अस्थिर करने और अपने समर्थक विधायकों को बंधक बनाने का आरोप लगाया है। हालॉंकि बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज किया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बीजेपी ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं है। लेकिन, अंदरुनी वजहों से सरकार जाती है तो कॉन्ग्रेस खुद जाने।

उन्होंने कहा, “यह मामला उनके (कॉन्ग्रेस) घर का है, आरोप हम पर लगाते हैं। उनका काम केवल आरोप लगाना है। अब इतने गुट हैं कांग्रेस में कि आपस में ही मारामारी मची हुई है।” मीडिया खबरों के अनुसार प्रदेश भाजपा प्रमुख वीडी शर्मा भी कॉन्ग्रेस के आरोपों को तथ्यों के परे करार देते हुए इसे उनका आपसी मामला बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ, पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह को इसका जवाब देना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रदेश सरकार में मंत्री जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर कमलनाथ सरकार को गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। जीतू पटवारी ने इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड शिवराज सिंह चौहान को बताया था। पटवारी ने आरोप लगाया था कि भाजपा नेता हरियाणा के एक होटल में आठ विधायकों को लेकर गए हैं। विधायकों को 50-60 करोड़ रुपये की पेशकश की जा रही है।

हालॉंकि इस सियासी घटनाक्रम के पीछे दिग्विजय की भूमिका भी बताई जा रही है। वे भले भाजपा पर आरोप लगा रहें हो और कमलनाथ सरकार को कोई खतरा नहीं होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इस उठापठक में जिन विधायकों के नाम सामने आए हैं उनमें 3 उनके ही करीबी बताए जाते हैं। एक विधायक सिंधिया खेमे के बताए जा रहे हैं। बताया जाता है कि दो विधायक मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज हैं। मीडिया की खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस और उसे समर्थन दे रहे निर्दलीयों में से 14 कमलनाथ सरकार से नाराज चल रहे हैं और बीजेपी के संपर्क में हैं। गौरतलब है कि 2018 के आखिर में हुए विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस ने राज्य की सत्ता में 15 साल बाद वापसी करने में भले सफल रही थी, लेकिन अपने दम पर वह बहुमत का आँकड़ा जुटाने में नाकाम रही थी।

होली मिलन से दूर रहेंगे मोदी-शाह, कोरोना वायरस की आहट के बाद बरतें सावधानी

कोरोना वायरस ने अब भारत में दस्तक दे दी है। ताज़ा आँकड़े चिंताजनक हैं। चीन से अपने छात्रों को वापस बुलाने के बाद ऐसा लग रहा था कि भारत इस वायरस की चपेट में आने से अछूता रहेगा। लेकिन, भारत में अभी इसके 28 मरीज सामने आए हैं। दिल्ली, नोएडा व आगरा जैसे शहरों में इसके फैलने की आशंका जताई जा रही है। भारत के चीन के नेतृत्व वाले ‘ग्रेट एशियाई सप्लाई चेन’ में शामिल होने के कारण यहाँ इसका असर कम होने की उम्मीद थी। अर्थशास्त्री रोबर्ट सुब्बरमान ने भी इस ओर सबका ध्यान दिलाया था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर इस वायरस के प्रति आगाह करते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से लोगों को अवगत कराया है। जैसे, दिन भर में कई बार अपने हाथों को अच्छी तरह साफ़ करें। लोगों से मिलने-जुलने के समय एक निश्चित दूरी का ध्यान रखें। अपनी आँखों, नाक और मुँह को न छुएँ तो बेहतर है। छींक या सर्दी के समय टिश्यू पेपर या रूमाल का प्रयोग करें। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग करते समय मास्क पहनें और कोहनियों को भी ढके रहें। बुखार या सर्दी के मामले में तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया है कि वो इस बार किसी भी ‘होली मिलन समारोह’ का हिस्सा नहीं बनेंगे। साथ ही उन्होंने लोगों से भी ऐसा करने की अपील की है। एक जगह ज्यादा लोगों के मिलने-जुलने या पार्टी वाला माहौल होने से COVID-19 के फैलने का ख़तरा ज़्यादा है, ऐसा दुनिया भर के विशेषज्ञों ने बताया है। प्रधानमंत्री ने ख़ुद इस वायरस से बचने की सरकारी तैयारी की समीक्षा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और सभी राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री मिल कर इस सम्बन्ध में काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने जानकारी दी कि विदेश से भारत आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है और सभी राज्यों में त्वरित मेडिकल अटेंशन की व्यवस्था हो रही है।

कोरोना वायरस से बचने के लिए बरतें सावधानी: पीएम ने किया ट्वीट

जहाँ तक भारत में कोरोना वायरस के मरीजों का सवाल है, दिल्ली की एक जन्मदिन की पार्टी के बाद इसके फैलने की आशंका जताई जा रही है। दिल्ली के एक मरीज ने अपनी जन्मदिन की पार्टी में एनसीआर के कई दोस्तों को बुलाया था, जिसके बाद उसके कॉन्टेक्ट में आने वाले लोगों की जाँच की जा रही है। नोएडा के तीन स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया, क्योंकि इनके कई छात्र एक ऐसे व्यक्ति की जन्मदिन पार्टी में गए थे, जो संक्रमित है। संक्रमित व्यक्ति को दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अब तक इस वायरस के संक्रमण से दुनिया भर में 3000 से भी अधिक लोगों की मौत हो चुकी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी ऐलान किया होली देश के सबसे और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, लेकिन वे किसी ‘होली मिलन समारोह’ का हिस्सा नहीं बनेंगे। पूरे विश्व में अब तक कोरोना वायरस के 90,000 से भी अधिक मरीज सामने आ चुके हैं और विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि ये आँकड़ा जल्द ही 1 लाख पार सकता है। भारत सहित दुनिया भर के उद्योग जगत और शेयर बाजारों को भी इस वायरस के कारण झटका लगा है।

अपने ही जहर में फँस गए हर्ष मंदर, SC ने BJP नेताओं की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

भाजपा के 3 नेताओं के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में FIR की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर बुधवार को खुद अदालत में घिर गए। सीएए के ख़िलाफ प्रदर्शनकारियों को भड़काने का विडियो सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया । कोर्ट ने उनसे विवादित विडियो पर सफाई माँगी और चीफ जस्टिस ने कहा कि याचिकाकर्ता हर्ष मंदर के खिलाफ लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। जब तक इन आरोपों पर सफाई नहीं आ जाती, हम उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं करेंगे।

जानकारी के मुताबिक, आज दिल्ली हिंसा मामले में कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर की माँग से जुड़ी याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई शुरू होते ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिकाकर्ता हर्ष मंदर के वायरल भाषण की जानकारी कोर्ट को दी। इसमें उन्होंने कहा था कि यह सिर्फ एक संयोग है कि हम भारतीय हैं। हमने सुप्रीम कोर्ट का ट्रैक रिकॉर्ड देखा है। अंततः हमे इंसाफ सड़क पर ही संघर्ष कर मिलेगा। इस पर जस्टिस गवई ने हर्ष मंदर के भाषण की ट्रांसस्क्रिप्ट की माँग की।

इसके बाद तुषार मेहता ने कहा कि अगर कोर्ट चाहे तो वह याचिकाकर्ता हर्ष मंदर की स्पीच को कोर्ट में चला सकते हैं। हर्ष मंदर के वकील ने इससे इनकार करते हुए कहा कि ऐसी स्पीच के लिए उन्हें कोई नोटिस भी नहीं मिला है।

इस पर कोर्ट ने कहा कि हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हम नोटिस जारी करेंगे और जब तक आपके भाषण को लेकर स्थिति साफ नहीं हो जाती, तब तक हम आपको नहीं सुनेंगे। आपके बजाए हम दूसरे याचिकाकर्ताओं को सुनेंगे। जानकारी के अनुसार, हर्ष मंदर को इस मामले में फटकार लगाते हुए कोर्ट ने अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर की गई अर्जी पर सुनवाई शुरू कर दी।

गौरतलब है कि वायरल विडियो में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए मंदर कहते हैं, “ये लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में नहीं जीती जाएगी, क्योंकि हमने सुप्रीम कोर्ट को देखा है- एनआरसी के मामले में, कश्मीर के मामले में, अयोध्या के मामले में। उन्होंने (सुप्रीम कोर्ट) इंसानियत, समानता और सेक्युलरिज्म की रक्षा नहीं की है।” वे आगे कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में हम कोशिश जरूर करेंगे। लेकिन इसका फैसला न संसद में होगा, न सुप्रीम कोर्ट में होगा, बल्कि ये फैसला सड़कों पर होगा।

राम मंदिर में टाँग अड़ाने सुप्रीम कोर्ट पहुँचा लिबरल गिरोह, 40 में से कोई नहीं था मूल मुकदमे में पक्षकार

‘तुम सड़क पर उतरो, कॉन्ग्रेस तुम्हारे साथ खड़ी’ – सोनिया, राहुल, प्रियंका के हेट स्पीच पर HC का नोटिस

मुस्लिम कोटा पर शिवसेना ने सुर बदले, BJP नेता ने कहा- कॉन्ग्रेस-एनसीपी ने साथ छोड़ा तो उद्धव को हम देंगे समर्थन

महाराष्ट्र में मुस्लिम आरक्षण के मसले पर सत्ताधारी महाविकास अघाड़ी के साझेदारों के बीच मतभेद बढ़ते दिख रहे हैं। राज्य के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने सदन में कहा था कि 5% मुस्लिम आरक्षण के लिए सरकार कानून लाएगी। कॉन्ग्रेस भी इसका श्रेय लेना चाहती है। लेकिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने यह कहकर कि सरकार के सामने अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है, इस मुद्दे की हवा निकाल दी है। इस संकट को देखते हुए बीजेपी ने भी खुद के लिए संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पार्टी नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा है कि यदि इस मुद्दे पर शिवसेना का कॉन्ग्रेस और एनसीपी साथ छोड़ती है तो उनकी पार्टी उद्धव का समर्थन करेगी।

उद्धव ने बताया कि मुस्लिमों को पॉंच फीसदी कोटा का मसला अभी तक आधिकारिक रूप से उनके सामने नहीं आया है। इस संबंध में पार्टी ने आखिरी फैसला नहीं लिया है। इसके बाद मुनगंटीवार ने कहा, “मुझे लगता है कि उद्धव ठाकरे ने सही रुख अपनाया है। शिवसेना के साथ हमारा गठबंधन विचारों पर आधारित था। उन्हें कॉन्ग्रेस और एनसीपी के दबाव की चिंता नहीं करनी चाहिए। यदि वे सरकार से निकल जाते हैं तो इस मुद्दे पर हम सरकार का साथ देंगे।” देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली पिछली बीजेपी-शिवसेना सरकार में मुनगंटीवार वित्त मंत्री थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, “संविधान धर्म आधारित आरक्षण की पैरवी नहीं करता। सिखों और ईसाइयों की क्या गलती है? जब केंद्र सरकार ने आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था कर दी है तो क्या उसमें ईसाई और मुस्लिम शामिल नहीं होते।”

गौरतलब है कि एक तरफ उद्धव मुस्लिम कोटे को लेकर किसी प्रस्ताव से इनकार करते हैं, वहीं उनकी सरकार में शामिल कॉन्ग्रेस और एनसीपी के बीच इसका श्रेय लेने की होड़ लगी हुई है। महाराष्ट्र सरकार में अल्पसंख्यक विकास मंत्रालय एनसीपी के पास है। इस महकमे के मंत्री नवाब मलिक ने पिछले सप्ताह मुस्लिमों को आरक्षण देने की घोषणा की थी। मुस्लिम वोटबैंक पर होती एनसीपी की सेंधमारी से आशंकित प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और राजस्व मंत्री बालासाहब थोराट ने मंगलवार को यह कहकर इसका श्रेय लेने का प्रयास किया कि मुस्लिमों को आरक्षण का विचार मूल रूप से कॉन्ग्रेस का है। शिवसेना ऐसे किसी पहल से दूरी बनाकर रखना चाहती है। इससे उसे अपने कोर वोट बैंक के छिटकने का खतरा है। साथ ही मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर बीजेपी उसे घेर सकती है।

अब्बा तो अब्बा, शाहरुख की अम्मी भी सुभानअल्लाह: मौसा भी ड्रग तस्कर, जा चुका है जेल

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद में मोहम्मद शाहरुख ने 24 फरवरी को गोलियॉं दागी थी। एक पुलिसकर्मी पर भी रिवॉल्वर तान दी थी। उसे उत्तरप्रदेश के बरेली से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस की पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उसके परिवार का भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उसका अब्बा ड्रग तस्करी में जेल जा चुका है। उसकी अम्मी के भी ड्रग तस्करों से ताल्लुकात बताए जाते हैं। उसका मौसा भी ड्रग तस्करी में जेल जा चुका है।

शाहरुख का ननिहाल बरेली के मीरंगज के खानपुरा मोहल्ले में है। यह उन इलाकों में से एक है जहॉं कई बड़े ड्रग तस्कर रहते हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उसने पुलिस को बताया है कि 24 फरवरी को उसने पूरी रात कनॉट प्लेस की कार पार्किंग में गुजारी। कपड़े-कपड़े बदल बदलकर हौजखास इलाके में घूमता रहा। इसके बाद उसने अपनी कार कनॉट प्लेस की एक पार्किंग में लगाई और उसी में रात भर सोया। इस बीच उसने अपने कई साथियों से पनाह पाने के लिए संपर्क किया। फिर वह एक करीबी के घर जालंधर चला गया।

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जालंधर से वह बरेली के लिए निकल गया। यहाँ कुछ दिन वह ड्रग तस्करों के पास छिपा रहा। बाद में उसने शामली-कैराना जाने का फैसला किया। मंगलवार को बरेली से शामली जाने की कोशिश में वह बस स्टैंड से दबोचा गया था।

हालाँकि, शाहरुख के ख़िलाफ अभी तक किसी आपराधिक रिकॉर्ड की पुष्टि नहीं हुई है। जाफराबाद की घटना के बाद उस पर दंगा फैलाने, अवैध हथियार रखने और सिपाही की हत्या के प्रयास का आरोप लगा है। उसके पास से घटना के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली पिस्तौल भी बरामद कर ली गई है।

अभी तक की पूछताछ में शाहरुख ने बताया कि वह शौकिया पिस्तौल रखता था। उसके घर में जुराब बनाने की अवैध फैक्ट्री चलती है। फैक्ट्री में काम करने वाले एक कर्मचारी के जरिए दो वर्ष पहले उसने बिहार के मुंगेर से पिस्तौल मँगाई थी। दंगे वाले दिन वह आठ कारतूस लेकर निकला था, इसमें तीन फायर किए थे, 2 कारतूस उससे कहीं गुम हो गए और 3 उसके पास से बरामद हुए।

गौरतलब है कि मौजपुर जाफराबाद के बीच खुलेआम भीड़ से निकलकर हेड कॉन्स्टेबल पर बंदूक तानने वाले शाहरुख ने बीए द्वितीय वर्ष तक की पढ़ाई की है। उसे मॉडलिंग, जिम और टिक टॉक का शौक है। उसने हाल ही में एक म्यूजिक वीडियो भी बनाया था, लेकिन वह रिलीज नहीं हुआ।

यहाँ बता दें कि मोहम्मद शाहरुख का पिता साबिर भी ड्रग्स तस्कर है। उस पर फेक करेंसी के मामले में भी केस दर्ज है। जानकारी के अनुसार, मीरगंज में रिश्तेदारी होने के कारण उसका वहाँ आना-जाना था। इसी कस्बे से 15 किमी दूर फतेहगंज पश्चिमी में बड़े पैमाने पर ड्रग्स तस्करी होती है। साबिर वहाँ के कई तस्करों के संपर्क में भी रहता था। यही वजह रही कि मीरगंज में ननिहाल होने और फतेहगंज में पिता के ड्रग्स तस्करी कनेक्शन होने के कारण शाहरुख को ये इलाका छिपने के लिए सबसे ठीक लगा। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार शाहरुख की अम्मी इन्नो के भी बरेली के ड्रग तस्करों से अच्छे ताल्लुकात हैं।

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स्थानीय अखबारों से मिली जानकारी के मुताबिक, शाहरुख का मौसा बब्बू भी ड्रग्स तस्करी में जेल जा चुका है। इसके अलावा उसके मौसेरे भाई सलमान पर भी शक की सुई आकर अटक रही है, क्योंकि जब से शाहरुख गिरफ्तार हुआ है तब से सलमान अपने घर से गायब है। जाँच के दौरान केवल मौसा बब्बू और मौसी मुन्नी ही घर पर मिले। मीडिया ने जब इन लोगों से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने पुलिस कार्रवाई के डर से कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। लेकिन मुहल्ले वालों का कहना है कि दो दिन पहले तक सलमान था, मगर उसके बाद से नहीं दिखा।

पुलिस का कहना है कि दंगे के बाद शाहरुख जिन भी लोगों के संपर्क में रहा। उनके नाम जुटाने के लिए दिल्ली पुलिस शाहरुख के मोबाइल की कॉल डिटेल्स खंगाल रही है। साथ ही उसकी मोबाइल की लोकेशन जाँच भी जारी है। लोकेशन के जरिए पुलिस उसके द्वारा बताई गई बातों को क्रॉस चेक करेगी और ये भी पता लगाएगी कि उसकी मदद करने वाले कौन थे और उसने किसके कहने पर फायरिंग की।

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असली नाम: रुखसाना और तस्लीमा, नकली नाम: रीना और तान्या, हिंदू बन फर्जीवाड़ा कर रहे रोहिंग्या

रोहिंग्या समुदाय देश की सुरक्षा के लिए कितने खतरनाक है, इसके कई वाकए सामने आ चुके हैं। अब दो ऐसी रोहिंग्या महिलाएँ पकड़ी गई हैं, जो हिंदू नाम से फर्जी पासपोर्ट बनवाकर विदेश भागने की फिराक में थीं। इन्हें कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़ा गया। इससे पहले यूपी के कानपुर में रुपयों के बदले नकली डॉलर देकर व्यापारी को ठगने वाले बांग्लादेश से आए रोहिंग्या गिरोह के सरगना अलामीन को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर दो रोहिंग्या मुस्लिम महिलाओं को फर्जी पासपोर्ट के साथ पकड़ा गया। सूत्रों के अनुसार दोनों कुछ महीने पहले बांग्लादेश से भारत आईं थी। इनका नाम रुखसाना अख्तर और तस्लीमा है। हिन्दू नाम से फर्जी पासपोर्ट बनवा दोनों विदेश भागने की फिराक में थीं।

लेकिन, इमिग्रेशन विभाग के अधिकारियों ने रविवार की रात कोलकाता से बैंकॉक जाने वाली फ्लाइट में सवार होने से पहले ही इन्हें गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों के अनुसार रविवार की रात लगभग 12.50 बजे कोलकाता से बैंकॉक जाने वाली थाई एयरवेज की फ्लाइट की दो महिला यात्रियों पर इमीग्रेशन विभाग को संदेह हुआ। उनके पासपोर्ट की जाँच की गई तो पता चला कि एक का नाम रीना साहा और दूसरे का तान्या बिस्वास है। उनके कागजों की सावधानीपूर्वक दुबारा जाँच करने पर पता चला कि पासपोर्ट फर्जी हैं।

खुद को तान्या बताने वाली का असली नाम तस्लीमा और रीना नाम से यात्रा करने की कोशिश करनेवाली महिला का असली नाम रुखसाना अख्तर है। दोनों म्यांमार के तंगसुरिया की निवासी हैं। पूछताछ के बाद इमीग्रेशन विभाग ने दोनों को एनएससीबीआइ थाने  की पुलिस के हवाले कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों महिलाओं के पासपोर्ट पर भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे उत्तर 24 परगना जिले का पता है। भारतीय पासपोर्ट इन्होंने किस प्रकार बनवाया? किसकी मदद से उन्होंने फर्जी पासपोर्ट तैयार किया? उनके साथ और भी रोहिंग्या हैं? इन सवालों के जवाब दोनों से पूछताछ के बाद मिलने की उम्मीद है।

आशंका जताई जा रही है कि फर्जी पासपोर्ट के तार किसी बड़े रैकेट से तो जुड़े हो सकते हैं। इंटेलीजेंस सूत्रों के अनुसार उन्हें कुछ दिन पहले बांग्लादेश से लगभग 30 रोहिंग्याओं के एक समूह के उत्तर 24 परगना स्थित घोजाडांगा सीमा के जरिए प्रवेश करने की सूचना मिली थी। यदि दोनों महिलाएँ उसी समूह से हैं तो अन्य 28 कहाँ गए? यह सवाल खुफिया विभाग के लिए सिरदर्द बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार घुसपैठिए दलालों के माध्यम से हिन्दू नाम पर फर्जी पासपोर्ट का जुगाड़ कर लेते हैं। ऐसा पहली नजर में संदेह से बचने के लिए किया जाता है।बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट से गिरफ्तार दोनों महिलाओं की योजना इंडोनेशिया जाने की थी। इनमें से एक का पति इंडोनेशिया में ही काम करता है।

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