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गाजियाबाद और मेरठ से भी आए थे दंगाई, बांग्लादेशी आतंकियों के भी मिले हैं लोकेशन

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के सुनियोजित होने के लगातार सबूत मिल रहे हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक दंगाई पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और मेरठ जैसे इलाकों से भी आए थे। जिस जगह आईबी के अंकित शर्मा की निर्मम हत्या हुई, वहॉं बांग्लादेशी आतंकियों के लोकेशन मिलने की बात पहले ही सामने आ चुकी है। कट्टरपंथी संगठन पीएफआई की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (मार्च 6, 2020) को खुलासा किया कि पिछले दिनों दंगाइयों की भीड़ में शामिल कुछ लोग गाजियाबाद और मेरठ से भी आए थे। यह अहम जानकारी दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की बीच हुई बैठक के बाद सामने आई। यह बैठक उत्तर-पूर्वी दिल्ली में डीसीपी कार्यालय में आयोजित की गई थी। दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार के अलावा उत्तर पूर्वी डीसीपी वेद प्रकाश सूर्या, मेरठ के आईजी प्रवीण कुमार और गाजियाबाद के एसएसपी इसमें शामिल थे।

कुमार ने कहा, “दिल्ली हिंसा के संबंध में कुछ बिंदु बैठक के दौरान उठाए गए थे। बैठक को पूर्वी रेंज के पुलिस अधिकारियों द्वारा घटना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के लिए बुलाया गया था।” कहा जा रहा है कि हिंसा जाँच करने वाले विशेष जाँच दल (SIT) ने हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल के हत्यारे और उन दंगाइयों की पहचान की है जिन्होंने डीसीपी अमित शर्मा और एसीपी अनुज शर्मा पर हमला किया था।

इससे पहले न्यूज 18 ने एक विडियो शेयर किया था, जिसे देखकर हमले की पूरी साजिश समझी जा सकती है। हिंसा भड़कने से पहले कुछ लोग सीसीटीवी को तोड़ते साफ तौर पर देखे गए। इसके बाद इन लोगों ने पुलिस को घटना वाले दिन 1 बजे के करीब कॉल किया। एसीपी अनुज, डीसीपी अमित शर्मा और हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल व अन्य पुलिसकर्मी वहाँ पहुँचे, तो हिंसक भीड़ ने सोची-समझी साजिश के तहत उन पर पथराव कर दिया।

दावा किया जा रहा है कि पुलिस पर हमले से पहले ही वहाँ पर सारे सीसीटीवी को तोड़ा-फोड़ा गया था ताकि उपद्रवियों की पहचान न हो सके। लेकिन, अब इसी सीसीटीवी फुटेज के कारण सैकड़ों की तादाद में दंगाइयों की पहचान हुई है। इसी के आधार पर उनकी धर-पकड़ की जा रही है। वहीं आधे दर्जन से अधिक दंगाइयों की पहचान स्थानीय निगरानी, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी की सहायता से की गई है। अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस अब दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर रही है।

बता दें कि शनिवार (मार्च 7, 2020) को दिल्ली पुलिस ने 24 फरवरी को दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों के दौरान 20 वर्षीय दिलबर सिंह नेगी की नृशंस हत्या में शामिल शाहनवाज नामक एक आरोपित को पकड़ा था। दिलबर का शव बृजपुरी के अनिल स्वीट हाउस में 26 फरवरी को क्षत-विक्षत अवस्था में मिला था।

दिलबर सिंह नेगी को दंगाइयों की भीड़ ने तलवार से काटने के बाद जलते हुए घर में फेंक दिया था। दंगाइयों ने दिलबर सिंह नेगी के हाथ और पैर काटने के बाद उनके शरीर के बाकी हिस्से को जलती आग में फेंक दिया था। दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों में तकरीबन 53 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 200 से अधिक जख्मी हैं।

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1 दिन में 2 बार लात-जूता: कपिल मिश्रा पर झूठ के बाद अब संजय गुप्ता पर NDTV की छीछालेदर

प्रोपेगैंडा ऊँचा रहे हमारा! यह वाक्य शायद NDTV ने अब पूरी तरह से अंगीकृत कर लिया है। दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में अपना अलग सामानांतर एजेंडा जारी रखने के लिए NDTV हर तरह की घटिया हारकत करने के लिए तैयार नजर आ रहा है। पहले आठ राउंड फायरिंग करने के बाद फरार चल रहे मोहम्मद शाहरुख़ को मैग्सेसे पुरस्कार विजेता रवीश कुमार ने ‘अनुराग मिश्रा’ साबित करने की कोशिश की तो वहीं अब NDTV को भाजपा नेता कपिल मिश्रा को दंगों का जिम्मेदार साबित करने के लिए पूरा जोर लगाते हुए देखा जा सकता है।

NDTV ने एक वीडियो जारी कर के यह साबित करने का प्रयास किया था कि संजय गुप्ता नाम का यह व्यक्ति उन्हें मिल चुका है और वो कपिल मिश्रा का मकान मालिक है। NDTV ने यह दावा किया कि वे कपिल मिश्रा के मकान मालिक को ‘ट्रैक’ करने में कामयाब रहे, जिन्होंने दंगों के लिए कपिल मिश्रा को दोषी ठहराया, जबकि सच्चाई कुछ और थी।

कपिल मिश्रा ने इसके बाद स्पष्ट किया कि संजय गुप्ता उनके मकान मालिक नहीं हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने स्पष्ट किया कि संजय गुप्ता उनके मकान मालिक नहीं थे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि संजय गुप्ता कभी भी उनके मकान मालिक नहीं रहे हैं। कपिल मिश्रा ने यही बात अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर भी कही है। उन्होंने कहा कि NDTV ने राह चलते किसी शख्स को पकड़ लिया और दावा किया कि कपिल मिश्रा के मकान मालिक हैं।

कपिल मिश्रा के इस ट्वीट के कुछ देर बाद ही NDTV ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए सूचना जारी करते हुए कहा कि उन्हें पता चला है कि संजय गुप्ता ने उनसे झूठ कहा था और वो उनके मकान मालिक नहीं थे। सारा आरोप संजय गुप्ता (जिसे NDTV ने ट्रैक करने की बात कही थी) पर थोपते हुए NDTV ने ट्वीट में लिखा है कि संजय गुप्ता ने ही उनसे यह बात कही कि वो कपिल मिश्रा के मकान मालिक थे।

ट्वीट में NDTV ने बताया है कि हो सकता हो कि संजय गुप्ता ने कपिल मिश्रा के लिए मकान ढूँढने में ‘ब्रोकर/दलाल’ की भूमिका निभाई हो। इसके साथ ही NDTV ने अपने फैलाए हुए झूठ के रायते पर स्पष्टीकरण देने के लिए कपिल मिश्रा और संजय गुप्ता की निजी जानकारी शेयर करते हुए दो दस्तावेज भी सार्वजनिक किए हैं।

झूठ और प्रपंच के इस सिलसिले में NDTV ने यह नया मुकाम हासिल किया है और हमेशा की ही तरह इस बार भी उन्होंने किसी से माफ़ी नहीं माँगी है। NDTV ने सिर्फ यह साबित करने का प्रयास किया है कि संजय गुप्ता ने ही उनसे झूठ कहा।

NDTV द्वारा अँधेरे में तीर छोड़ने की यह पहली घटना नहीं है। NDTV और इसके पत्रकार, जिनमें रवीश कुमार भी शामिल हैं, अक्सर भाजपा नेता और उनसे विपरीत विचार रखने वाले लोगों पर अपने प्राइम टाइम से लेकर खबरों में भ्रामक तथ्यों के साथ ही मनगढ़ंत आरोप लगते हुए देखे जाते हैं।

इस पर कई बार मानहानि के आरोप लगाने तक की भी नौबत आ चुकी है, लेकिन हर बार रवीश कुमार यह दुहाई देते हुए देखे जाते हैं कि ‘मानहानि मीडिया की स्वतन्त्रता’ के लिए बाधक है। हालाँकि जो काम NDTV, रवीश कुमार और उनके ही जैसे प्रोपेगैंडा चलाने वाले दी वायर, दी क्विंट, स्क्रॉल आदि करते हैं, उसे ‘मीडिया’ कहना ही अपने आप में सबसे बड़ा भ्रामक तथ्य है। उसकी स्वतन्त्रता तो बाद की बात है।

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तस्वीर पाकिस्तान की, प्रियंका गाँधी ने यूपी का बता शेयर की: फजीहत होते ही ट्वीट डिलीट

कॉन्ग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी ने पाकिस्तान की फोटो का प्रयोग कर के झूठ फैलाया है। किसानों के मुद्दे पर योगी सरकार को घेरने के चक्कर में प्रियंका ने पाकिस्तान के किसानों की फोटो शेयर कर दी। बाद में फजीहत होने पर प्रियंका गाँधी ने अपनी ट्वीट डिलीट कर ली और सारे फोटो भी डिलीट कर लिए। इसके बाद प्रियंका गाँधी ने दोबारा एक विडियो शेयर किया और उसके माध्यम से किसानों के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की आलोचना की।

ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान की बात करते हुए प्रियंका गाँधी ने लिखा कि भारी बारिश और ओले पड़ने की वजह से यूपी में तमाम स्थानों पर किसानों की फ़सलें बर्बाद हो गईं। उन्होंने लिखा कि उन किसानों का दर्द सुना जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कई किसानों की तो 80% तक फसल बर्बाद हो गई है। उन्होंने यूपी सरकार पर कोरे दावे करने का आरोप लगाते हुए सलाह दी कि नुकसान का पूरा आकलन कर किसानों को पूरा मुआवजा दिया जाना चाहिए।

इस ट्वीट के साथ उन्होंने कई फोटो शेयर किए जिनमें से एक पाकिस्तान की थी। यानी, पाकिस्तान के किसानों की फोटो शेयर कर के यूपी के किसानों का दर्द बयाँ करने का दावा किया और योगी सरकार को घेरा भी:

प्रियंका गाँधी ने जो फोटो शेयर की, वो अप्रैल 17, 2019 को ‘शुहदा ऑफ पाकिस्तान आर्मी’ नामक पेज द्वारा शेयर की गई थी। इसे फेसबुक पर शेयर करते हुए पाकिस्तानी पेज ने लिखा था कि किसान भाइयों के लिए दुआ करें। अब एक साल बाद पाकिस्तान के किसानों की उसी फोटो को ओलावृष्टि प्रभावित यूपी का किसान बताते हुए प्रियंका गाँधी ने योगी सरकार की आलोचना की। फजीहत होने के बाद उन्होंने अपनी ट्वीट को डिलीट कर लिया है।

प्रियंका गाँधी की इस हरकत के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी जम कर आलोचना की। लोगों ने प्रियंका गाँधी के प्रोपेगेंडा को बेनकाब करते हुए मजाकिया अंदाज़ में लिखा कि देखो प्रियंका को किसानों की कितनी चिंता है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस नेताओं के लिए ऐसी हरकतें नई नहीं है और वो पहले भी इस तरह से झूठ फैलाते रहे हैं।

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19 साल के इस्लाम ने अमेजन से खरीदा बम बनाने का सामान, जैश आतंकियों को दिए: पुलवामा हमले में 2 और गिफ्तार

बीते साल जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ (CRPF) जवानों को निशाना बनाकर हमला किया गया था। जैसे-जैसे जॉंच आगे बढ़ती जा रही है हमले की साजिशों की परतें खुलती जा रही है। इस मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने दो और युवकों को गिरफ्तार किया है। साथ ही एक बड़ा खुलासा किया है। इसके मुताबिक बम बनाने के सामान ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट अमेज़न (Amazon) से खरीदकर मॅंगवाए गए थे। अमेज़न ने इस खरीदारी की डिटेल्स भी साझा की है।

एनआईए ने श्रीनगर के उन्नीस साल के वजीर उल इस्लाम और पुलवामा के रहने वाले मोहम्मद अब्बास राठेर (32) को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में इस्लाम ने बताया कि उसने आईइडी (IED) विस्फोटक बनाने के लिए अमेजन से केमिकल, बैटरी और अन्य सामान मँगाए थे। ये सामान लेकर वह खुद जैश आतंकियों के पास गया था।

वहीं, मोहम्मद अब्बास राठेर जैश-ए-मोहम्मद का पुराना ओवर ग्राउंड वर्कर है। जब जैश आतंकवादी और आईईडी एक्सपर्ट उमर अप्रैल-मई, 2018 में कश्मीर पहुँचा, तब उसने ही उसे अपने घर में ठहराया था। इसके अलावा उसने इस मामले में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों आदिल अहमद डार, समीर अहमद डार और पाकिस्तानी आतंकवादी कामरान को भी कई बार उसने अपने घर में शरण दी थी।

वजीर उल इस्लाम और अब्बास की गिरफ्तारी के बाद पुलवामा आतंकी हमले में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या 5 हो गई है। ज्ञात हो कि पहले गिरफ्तार किए गए लोगों में एक पिता-पुत्र और आत्मघाती बम हमलावर के करीबी शामिल थे।

पिछले साल 14 फरवरी को दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में बड़ा आतंकी हमला हुआ था। आत्मघाती बम हमलावर आदिल अहमद डार ने विस्फोटकों से भरी कार सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले में घुसा दी थी। हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे।

कुछ ही दिन पहले सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ जिले के मारवा इलाके से हिजबुल मुजाहिदीन के पाँच ओवर ग्राउंड वर्करों (OGW) को गिरफ्तार किया था। किश्तवाड़ पुलिस को सूचना मिली थी कि मारवा इलाके के रहने वाले गुलाम हुसैन, मोहम्मद यासीन, जाकिर हुसैन, मोहम्मद इकबाल और बशीर अहमद हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों को पनाह देने के साथ उनकी मदद करते थे।

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गंगाजल स्टाइल में दबोचा गया ताहिर हुसैन, चकमा देने के लिए बुर्का की जगह पहन रखा था…

2003 में एक फिल्म आई थी। नाम था गंगाजल। 5 मार्च 2020 को दिल्ली की एक अदालत में कुछ ऐसा हुआ लगा जैसे गंगाजल के दृश्य फिल्माए जा रहे हों। दरअसल, उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के सरगना ताहिर हुसैन को जिस तरह दबोचा गया वह इस फिल्म की कहानी से मिलती-जुलती है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राऊज एवेन्यू कोर्ट की पार्किंग से AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को उस समय पकड़ा, जब वह अपने वकील के साथ पार्किग में मास्क लगाए पहुँचा।

उसे अंदाजा नहीं था कि क्राइम ब्रांच की टीम सादी वर्दी में उसका इंतजार कर रही है। फिल्म गंगाजल में भी अपराधी सुंदर यादव बुर्का पहनकर कोर्ट में सरेंडर करने जाता है और एसपी अमित कुमार का किरदार निभाने वाले अजय देवगन के नेतृत्व में पुलिस टीम साडी वर्दी में पहले से ही उसे दबोचने के लिए फिल्डिंग लगाए बैठी रहती है। ठीक इसी तरह की तैयारी ताहिर हुसैन को दबोचने के लिए की गई थी। फर्क सिर्फ इतना था कि ताहिर ने बुर्के की जगह अपने चेहरे को मास्क से ढक रखा था।

बता दें कि ताहिर हुसैन पर आइबी कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या में शामिल होने के साथ-साथ, हिंसा भड़काने, साजिश रचने समेत कई अन्य मामले दर्ज किए गए हैं। ताहिर हुसैन अपने वकील के साथ राऊज एवेन्यू कोर्ट में सरेंडर करने के लिए पहुँचा था, लेकिन पहले से वहाँ मौजूद दिल्ली पुलिस के विशेष जाँच दल ने गिरफ्तार कर लिया।

करीब 40 पुलिसकर्मियों ने गुरुवार सुबह 9 बजे से ही कोर्ट में घेराबंदी कर ली थी। वे अलग-अलग वेशभूषा में मौजूद थे। कोई छोले-कुलचे वाले के पास ग्राहक बनकर खड़ा ​था तो कोई पार्किंग अटेंडेंट बनकर। कोई चायवाला बना था तो कोई टाइप राइटर रखकर मुंशी का वेश बनाए था। कई पुलिसवाले वकील बने घूम रहे थे। जैसे ही ताहिर पार्किंग में पहुँचा, पुलिस ने उसे धर-दबोचा।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज होने के बाद ताहिर पार्किंग में पहुँचा था। लेकिन पुलिस को चकमा नहीं दे पाया। इससे पहले उसके वकील मुकेश कालिया ने गुरुवार (मार्च 5, 2020) सुबह ही अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट विशाल आहूजा के पास सरेंडर के लिए आवेदन किया था। मुकेश कालिया ने कोर्ट को कहा था कि ताहिर रास्ते में हैं और कुछ ही देर में राऊज एवेन्यू कोर्ट में सरेंडर कर देगा।

ताहिर दंगों में अपना नाम सामने आने के बाद से ही फरार था। इस बीच उसकी संलिप्तता की गवाही देते कई विडियो सामने आए। चश्मदीदों के अनुसार उसकी इमारत में करीब तीन हजार दंगाई जमा थे। वहॉं से हिंदुओं को निशाना बना पत्थरबाजी हुई। पेट्रोल बम फेंके गए। गोलियॉं चलाई गई। उसकी इमारत से पत्थरों और पेट्रोल बम का जखीरा बरामद किया गया था। शुरुआत में आप ने उसका बचाव करने की कोशिश की। लेकिन, जब एक के बाद एक सबूत सामने आते गए तो निलंबित कर पार्टी ने उससे पल्ला झाड़ने की कोशिश की।

ताहिर हुसैन को शुक्रवार को कड़कड़डूमा कोर्ट में जज के घर पेश किया गया, जहाँ से उसे 7 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया। वहीं दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच का कहना है, “घटना वाले दिन ताहिर हुसैन ने सबसे ज्यादा और लगातार जिन लोगों के साथ बात की थी, एसआईटी ने शुक्रवार को उन 15 लोगों की पहचान कर ली। यह बातचीत मोबाइल के जरिए हुई। ताहिर ने इन सबसे उसी दिन इतनी ज्यादा देर तक क्यों और क्या लंबी बातचीत की? इसका खुलासा नहीं हो सका है।”

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच का कहना है कि मुस्तफाबाद में तीन से चार लोगों ने ताहिर हुसैन की मदद की थी। क्राइम ब्रांच की राडार पर अब ये चारों लोग हैं। बताया जा रहा है कि जल्द ही इन चारों लोगों को जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम की तलाश: जहाँ हुई IB के अंकित शर्मा की हत्या वहाँ मौजूद था

ताहिर हुसैन के निशाने पर पहले से थे IB के अंकित शर्मा, हत्या के वक्त बांग्लादेशी आतंकी भी थे मौजूद!

दंगों के वक़्त 15 पिस्टलधारियों के साथ घूम रहा था ताहिर हुसैन, सीसीटीवी में कैद है हर हरकत

NDTV का नया प्रपंच: राह चलते शख्स को बताया कपिल मिश्रा का मकान मालिक, रिपोर्टिंग से फँसाने की साजिश!

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों ने मीडिया गिरोह की हिपोक्रेसी को उजागर कर दिया है। दंगों के दौरान और उसके बाद भी कुछ मीडिया गिरोह झूठे नैरेटिव को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है कि ये दंगे मुस्लिम विरोधी थे, जबकि हकीकत यह है कि यह दंगे इस्लामी भीड़ के आक्रामक रवैये का परिणाम थे। इनका ये आक्रामक रवैया दिसंबर में तब शुरू हुआ था, जब इन्होंने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर दंगे भड़काए थे।

ऐसे कई चैनल, पत्रकार और पोर्टल्स हैं, जिन्होंने दिल्ली के दंगों के बारे में झूठे नैरेटिव को आगे बढ़ाया है। हालाँकि, NDTV वो चैनल है, जिसने प्रभावी रुप से इस नैरेटिव का नेतृत्व किया। इसी कड़ी में बात अब कपिल मिश्रा को घेरने तक के प्रोपेगेंडा तक पहुँच गई है। दिल्ली के दंगों के लिए बीजेपी नेता कपिल मिश्रा को दोषी ठहराने के लिए मीडिया समूह किसी भी हद तक जाने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रहा है।

बता दें कि 22 जनवरी को जाफराबाद और चाँद बाग में रोड बंद किए जाने के खिलाफ सड़क पर उतरे कपिल मिश्रा ने कहा था, “दिल्ली पुलिस तीन दिन में रास्तों को खाली कराए। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के बाद वापस जाने तक हम यहाँ से शांतिपूर्वक जा रहे हैं, लेकिन अगर तीन दिन में रास्ते खाली नहीं हुए, तो हम फिर सड़कों पर उतरेंगे।” मीडिया उनके इस बयान पर हावी हो गई और कपिल मिश्रा को ‘दंगा भड़काने’ के लिए दोषी ठहराने की कोशिश की।

ऐसा करने करके उन्होंने निश्चित रूप से उन इस्लामवादियों को एक ढाल दिया, जिन्होंने और अधिक भड़काऊ बयान दिए थे। शरजील इमाम ने दिल्ली को बंद करने और देश को तोड़ने के बारे में बात कही थी और हकीकत में उमर खालिद ने लोगों को सड़कों पर आने के लिए कहकर हिंसा भड़काई थी, वो भी तब जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यहाँ थे। इसके अलावा वारिस पठान ने कहा था कि मुस्लिम हिंदुओं पर हावी हो सकते हैं और AAP के विधायक अमानतुल्लाह खान पर तो पहले ही हिंसा भड़काने का मामला दर्ज है।

मीडिया ने हिंसा के लिए उकसाने वाले इन सभी लोगों को बचाते हुए कपिल मिश्रा को दोषी ठहराने के लिए ओवरटाइम काम किया। NDTV ने इसकी अगुवाई करते हुए 6 मार्च को एक वीडियो पब्लिश किया, जिसमें उनके झूठ बोलने वाले एंकर श्रीनिवासन जैन, कपिल मिश्रा के मकान मालिक से बात कर रहे थे।

NDTV के वीडियो का स्क्रीनशॉट

वीडियो में संजय गुप्ता नाम के एक शख्स से बात की जा रही है, जिसकी पहचान NDTV द्वारा कपिल मिश्रा के मकान मालिक के रूप में की गई है। NDTV यह दावा करता है कि कि वे कपिल मिश्रा के मकान मालिक को ट्रैक करने में कामयाब रहे, जिन्होंने दंगों के लिए कपिल मिश्रा को दोषी ठहराया, जबकि सच्चाई कुछ और थी।

कपिल मिश्रा ने दावा किया है कि संजय गुप्ता उनके मकान मालिक नहीं हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दावा किया कि संजय गुप्ता उनके मकान मालिक नहीं थे। उन्होंने तो यहाँ तक कहा कि संजय गुप्ता कभी भी उनके मकान मालिक नहीं रहे हैं। कपिल मिश्रा ने यही बात अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर भी कही है। उन्होंने दावा किया कि NDTV ने राह चलते किसी शख्स को पकड़ लिया और दावा किया कि कपिल मिश्रा के मकान मालिक हैं। 

वैसे देखा जाए तो वीडियो में भी संजय गुप्ता यह दावा नहीं करते हैं कि वह मिश्रा के ‘मकान मालिक’ हैं। गुप्ता जिस तरह से बोल रहे हैं, उससे लगता है कि वह प्रॉपर्टी ब्रोकर हो सकते हैं, मकान मालिक नहीं। इसके साथ ही कपिल मिश्रा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए यह भी दावा किया कि NDTV के एंकर श्रीनिवास जहाँ पर खड़े हैं, वह जगह भी वो नहीं है, जहाँ कपिल मिश्रा रहते हैं।

NDTV ने दिल्ली दंगों के दौरान तनाव को बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए। इसके लिए मीडिया संस्थान ने कई झूठे आरोप भी लगाए। गौरतलब है कि इससे पहले NDTV ने शिव विहार क्षेत्र के दो स्कूलों के बारे में गलत रिपोर्टिंग किया था, जिसका ऑपइंडिया ने पर्दाफाश किया था। शिव विहार में दो स्कूल हैं, जो अगल-बगल में स्थित हैं। एक फैसल फ़ारूक़ का राजधानी स्कूल और एक एक पंकज शर्मा का डीआरपी स्कूल। राजधानी स्कूल दंगाइयों का मुख्य अड्डा बना और सारी गोलीबारी, पत्थरबाजी और बमबारी यहीं से हुई।

दूसरी तरफ डीआरपी स्कूल को जला कर ख़ाक कर दिया गया। राजधानी स्कूल के ऊपर से रस्सी के सहारे उतरे दंगाइयों ने डीआरपी स्कूल को फूँक दिया। ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग में तहकीकात की तो पाया कि राजधानी स्कूल में दिखावटी तोड़फोड़ हुई थी और कुछ बेंच-डेस्क को पलट दिया गया था। NDTV ने बिना किसी सबूत के दावा किया कि यह मुस्लिम स्वामित्व वाला स्कूल है, जिस पर सबसे पहले हिंदू लोगों ने हमला किया था। यह हिंदुओं को फँसाने की NDTV की साजिश थी। 

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‘UP में मेरी जान को खतरा, मेरा केस कहीं और ट्रांसफर कर दो’ – कमलेश तिवारी का हत्या आरोपी पहुँचा सुप्रीम कोर्ट

हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या के आरोपितों ने उत्तर प्रदेश में में अपनी जान को खतरा बताया है और इसी का हवाला देते हुए आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट में केस को लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर करने की गुहार लगाई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

गुरुवार को कमलेश तिवारी की हत्या के मुख्य आरोपी अशफाक की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें मुख्य आरोपी अशफाक ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर कहा है कि यूपी में उसकी जान को खतरा है, इसलिए हत्या के केस को दिल्ली या किसी अन्य राज्य में शिफ्ट किया जाए। इस मामले पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

दरअसल कमलेश तिवारी हत्याकांड में यूपी पुलिस ने जाँच के बाद दो लोगों पर हत्या करने और 11 लोगों पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में चार्जशीट दायर किया है। इसी बीच हत्या के आरोपित अशफाक ने यूपी में अपनी जान को खतरा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से केस को दिल्ली या किसी अन्य जगह भेजने की माँग की।

बता दें कि पिछले वर्ष 18 अक्टूबर को हिंदू महासभा के पूर्व नेता और हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की दो बदमाशों ने लखनऊ में बेरहमी से हत्या कर दी थी। दोनों बदमाश भगवा कपड़े पहने हुए थे और मिठाई के डिब्बे में पिस्टल व चाकू छिपाकर लाए थे। दोनों नाका स्थित खुर्शेदबाग की तंग गलियों में स्थित कमलेश के घर पहुँचे। पहली मंजिल स्थित पार्टी दफ्तर में पहले उनकी गर्दन पर गोली मारी थी। फिर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर गला रेत दिया था।

कमलेश तिवारी मर्डर: मौलाना कैफ़ी को बेल, मुस्लिम संगठन ने खड़ी कर दी थी वकीलों की फौज

कमलेश तिवारी की पत्नी को जान से मारने की धमकी, बंद लिफाफे में भेजा उर्दू में लिखा पत्र

‘मैं अली को जानती तो नहीं, लेकिन उसने कमलेश तिवारी की हत्या का जश्न मनाया… इसलिए उसे रिलीज करो’

…जिन दिलबर नेगी का हाथ-पैर काटकर आग में फेंका था, उनकी हत्या के आरोप में शाहनवाज गिरफ्तार

पिछले दिनों दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगे का शिकार हुए दिलबर सिंह नेगी की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शाहनवाज नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है। शाहनवाज पर गोकुलपुरी हिंसा के दौरान दिलबर नेगी की नृशंसता से हत्या किए जाने का आरोप है। गोकुलपुरी थाना क्षेत्र में दिलबर नेगी की हत्या को लेकर मामला दर्ज किया गया था। बृजपुरी के अनिल स्वीट हाउस में 26 फरवरी को दिलबर का शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिला था।

दिलबर अनिल स्वीट हाउस में काम करते थे। दिलबर सिंह नेगी को दंगाइयों की भीड़ ने तलवार से काटने के बाद जलते हुए घर में आग के हवाले कर दिया था। दंगाइयों ने दिलबर सिंह नेगी के हाथ और पैर काटने के बाद उनके शरीर के बाकी हिस्से को जलती आग में फेंक दिया था। 

बता दें कि दिलबर सिंह नेगी उत्तराखंड के पौड़ी जिले स्थित थलीसैण ब्लॉक से सम्बन्ध रखते थे। उनके करीबी श्याम सिंह ने ऑपइंडिया को बताया था कि 23 फरवरी की शाम कुछ दंगाई शाहदरा इलाके में शोर मचाते हुए घुसे। दंगाइयों ने नेगी को अपना पहला निशाना बनाया। उनके हाथ-पैर काट दिए। फिर पास की दुकान में लगी आग में झोंक दिया। उनके साथ बिल्डिंग में उनके दो अन्य साथी भी मौजूद थे लेकिन वो वहाँ से भाग निकलने में कामयाब रहे।

26 फरवरी को जब दुकान मालिक अनिल पाल पुलिस के साथ अपनी दुकान का हाल जानने वहाँ पहुँचे तो उन्हें मृतक नेगी का शरीर दूसरी मंजिल पर सीढ़ी के पास मिला, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो दंगाइयों को देखकर बिल्डिंग से कूदने की कोशिश कर रहे थे। दिलबर उत्तराखंड से सिर्फ 6 महीने पहले ही दिल्ली आए थे। नेगी के शव से हाथ और पैर गायब थे, जबकि शरीर का बाकी हिस्सा राख के ढेर में मौजूद था। यानी जलने से पहले उनके शरीर के इन भागों को काट दिया गया था।

हाथ काटा, पैर काटा, माँस के टुकड़े की तरह आग में फेंक दिया: मृतक दिलबर नेगी का विडियो वायरल

दिलबर सिंह नेगी के हाथ-पैर काट दंगाइयों ने दुकान की आग में झोंका: बचकर भागे श्याम ने बताई आपबीती

शाहीन बाग में सिर्फ 19 महिला प्रदर्शनकारी: हकीकत सामने आई तो महिला पत्रकारों से बदसलूकी, सब कुछ कैमरे में कैद

कुछ समय पहले पूरे देश में सीएए विरोध का केन्द्र बना दिल्ली का शाहीन बाग इन दिनों दम तोड़ता दिखाई दे रहा है। इसकी सच्चाई तब सामने आई कि जब शुक्रवार दोपहर को धरने पर पहुँची इंडिया टीवी ने वहाँ की लाइव तस्वीरों को सभी के साथ साझा किया। इस बात की जानकारी जैसे ही शाहीन बाग के आकाओं को लगी तो समझो आग लग गई। इसके बाद धरने पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ महिला पत्रकारों से धक्का-मुक्की की बल्कि उनके कैमरे को भी तोड़ने की कोशिश की गई।

दिल्ली स्थित शाहीन बाग में 83वें दिन महिलाओं का सीएए के खिलाफ धरना-प्रदर्शन जारी रहा, लेकिन इस धरने का वह असली रूप अब ग़ायब सा हो गया है, जो कि पिछले महीने तक दिल्ली राजनीति का ही नहीं बल्कि पूरे देश की राजनीति का केन्द्र बना हुआ था। यहाँ की लाइव तस्वीरों को दिखाने के लिए शुक्रवार को जब शाहीन बाग में इंडिया टीवी की दो महिला पत्रकार मौके पर पहुँचीं तो वहाँ मौजूद प्रदर्शनकारियों में कैमरे को देख भगदड़ मच गई। और ज्यादा भीड़ को एकत्र करने के लिए इमरजेंसी हूटर बजा दिया गया। इसके बाद तो किसी ने महिला पत्रकार के माइक को थामा तो किसी ने कैमरे के सामने हाथ लगा दिया। और तो और, लाइव कवरेज को रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों ने महिला पत्रकार के कैमरे तक को तोड़ने की कोशिश कर डाली।

शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे का समय था। न्यूज चैनल इंडिया टीवी की पत्रकार मीनाक्षी जोशी अपनी टीम के साथ लाइव कवरेज के लिए शाहीन बाग धरने पर पहुँचती हैं। यहाँ मीनाक्षी जोशी ने देखा कि धरने पर कुछ चुनिंदा महिला प्रदर्शनकारी ही बैठी हुई हैं। जब महिला पत्रकार ने लाइव कैमरे पर ही प्रदर्शकारियों की गिनती की तो वह 19 हुई। इस गिनती को सुन धरने पर मौजूद महिलाएँ भड़क उठीं और इसके बाद उन्होंने इमरजेंसी सायरन को बजा दिया। इसके बाद एक के बाद एक वहाँ सैकड़ों लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। धरने पर जो भी पहुँचा, उसने सबसे पहले चैनल पर धरने की झूठी खबरें चलाने का आरोप लगाते हुए लाइव कवरेज को बंद करने की कोशिश की।

बाद में भीड़ की शक्ल में पहुँचे प्रदर्शनकारियों ने उस महिला प्रदर्शनकारी को बात करने से मना कर दिया, जिससे महिला पत्रकार सवाल कर रही थीं। इसके बाद प्रदर्शकारियों ने पत्रकार का माइक पकड़ा, कैमरे के सामने हाथ लगाया और फिर इसके बाद भी कवरेज को बंद न करने पर कैमरे को तोड़ने की कोशिश की। इतना ही नहीं, इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने महिला पत्रकार से अभद्रता तक की और गो बैक-गो बैक के साथ-साथ गोदी मीडिया के नारे लगाने लगे। चौंकाने वाली बात यह है कि कोई भी कैमरे के सामने आने के लिए तैयार नहीं था और जो आ भी रहा था तो वह पहले अपने चेहरे को ढकता था या फिर मुँह पर उँगली लगाकर कुछ न बोलने का पत्रकार के सामने इशारा करता था।

खैर, अब शाहीन बाग पर बैठी 19 प्रदर्शनकारी महिला की तस्वीरें और लाइव कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों से की गई अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इसमें आप साफ तौर पर देख सकते हैं कि किस तरह से शाहीन बाग का धरना दम तोड़ता दिखाई दे रहा है और जब इसी हकीकत को कैमरे में कैद किया गया तो किस तरह महिला पत्रकारों से बदतमीजी की गई।

शाहरुख के घर से पिस्टल और 3 कारतूस बरामद: बिहार के मुंगेर से है कनेक्शन, क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे के दौरान जाफराबाद इलाके में गोली चलाने वाले शाहरुख की गिरफ्तारी के बाद अब उसकी पिस्टल भी बरामद कर ली गई है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में शाहरुख के घर से पिस्टल और तीन कारतूस बरामद किए हैं। बता दें कि दिल्ली हिंसा के दौरान शाहरुख ने पुलिस कॉन्स्टेबल दीपक दहिया पर भी पिस्टल तानी थी। वहीं छानबीन के दौरान पुलिस ने शाहरुख का एक दूसरा मोबाइल फोन भी बरामद किया है। इससे पहले पुलिस ने उसकी कार और एक फोन भी बरामद किया था। दिल्ली पुलिस ने बरामद की गई सभी चीजों की जाँच के लिए फोरेंसिक लैब में भेज दिया है।

गोली चलाने के बाद से ही शाहरुख फरार चल रहा था, लेकिन पुलिस ने 3 मार्च को उसे शामली के कैराना बस स्टॉप से गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहाँ उसे 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया था। रिमांड पर लेने के बाद पुलिस ने शाहरुख की वो कार भी बरामद कर ली थी, जिसमें वो फरार हुआ था। इसके अलावा क्राइम ब्रांच की टीम उसे शामली भी लेकर गई थी। पुलिस उसे उन-उन जगहों पर भी लेकर गई, जहाँ पर वो फरार होने के दौरान रुका था।

शाहरुख ने 24 फरवरी को दिल्ली हिंसा के दौरान जाफराबाद इलाके में 8 राउंड फायरिंग की थी। फायरिंग करते हुए यह शख्स फिर भीड़ में गायब हो गया था। कार से वह सीधा नई दिल्ली में कनाट प्लेस स्थित एक पार्किंग में पहुँचा। वहाँ पुलिस से बचने के लिए वह कई घंटे तक कार के भीतर ही सोता रहा। जब उसे विश्वास हो गया कि पुलिस अब दंगों में पूरी तरह फँस चुकी होगी, तो वो पंजाब चला गया।

शाहरुख की गिरफ्तारी के बाद एसीपी अजित कुमार सिंगला ने बताया था कि वह पानीपत, कैराना, अमरोहा, बरेली में छिपते हुए शामली पहुँचा था। उसने जिस पिस्तौल से गोलीबारी की थी, उसके दो कारतूस जब्त हो चुके हैं। अभी एक कारतूस के बारे में उसने बताया है कि वो कहीं गिर गया। उन्होंने तब बताया था कि पिस्तौल बरामद नहीं हुई है। उनके अनुसार शाहरुख ने जिस पिस्तौल से गोली चलाई है, वो बिहार के मुंगेर में बनी है।

शाहरुख ने पूछताछ के दौरान बताया था कि उसने दो साल पहले अपने एक दोस्त से पिस्टल खरीदी थी। वो बस रौब झाड़ने के लिए पिस्टल का इस्तेमाल किया करता था और उसने इसीलिए इसे खरीदा था। शाहरुख ने पुलिस को बताया कि जब प्रदर्शन चल रहे थे और पत्थरबाजी हो रही थी, तभी वह तैश में आ गया और खुद को गोली चलाने से रोक नहीं पाया। फिलहाल शाहरुख चार दिन की पुलिस रिमांड पर है और उसे शनिवार (मार्च 7, 2020) को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

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