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‘उनके’ डर से बच्चों के साथ घर में दुबके रहते हैं, रात भर नींद नहीं आती: महिलाओं ने सुनाया अपना दर्द – ग्राउंड रिपोर्ट

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में महिलाओं के साथ भी ज्यादतियाँ की गईं। करावल नगर में हिन्दू समाज की बेटियों के साथ अश्लीलता की गई। शिव विहार में महिलाएँ अपने घरों में दुबकी बैठी हुई थीं क्योंकि अगर दंगाई इस्लामी भीड़ वहाँ स्थित ‘प्राचीन हनुमान मंदिर’ के बगल वाले नाले को पार कर जाती तो उनके साथ बहुत बुरा हो सकता था। अपने घर की बहू-बेटियों को बचाने के लिए हिन्दू समाज के लोग ईंट-पत्थर खाते रहे, जबकि फैसल फ़ारूक़ के राजधानी स्कूल के ऊपर से पत्थरबाजी, बमबारी और गोलीबारी होती रही। मंदिर को बचाने के लिए युवाओं ने पूरा जोर लगाया।

इसी क्रम में सैकड़ों घायल हुए। ऑपइंडिया की टीम ग्राउंड पर पहुँची और हमने वहाँ कई महिलाओं से बातचीत कर उनके मन की बात जानी। कई पुरुषों ने कैमरे के सामने सच्चाई बताने से इनकार कर दिया (उनका डर जायज भी है) लेकिन महिलाओं ने हिम्मत दिखाते हुए हमसे बातचीत की और खुल कर अपने अनुभव तो साझा किए ही, दंगाई भीड़ की क्रूरता को भी सामने रखा। ग़रीब घर की एक महिला ने बताया कि हिन्दू लोगों की कहीं और कोई नहीं सुनता।

एक अन्य दलित महिला ने बताया कि समुदाय विशेष के लोग आकर कहते हैं कि उनके घरों को आग के हवाले कर देंगे लेकिन कोई उन पर कार्रवाई नहीं करता। महिलाओं ने बताया कि अगर उनके घर के पुरुष बाहर डटे नहीं रहते तो दंगाई भीड़ उनके घरों में घुस जाती। एक अन्य महिला ने बताया कि उस क्षेत्र के समुदाय विशेष को सब पता था कि क्या होने वाला है जबकि हिन्दू अनजान थे। महिला ने हमसे बातचीत करते हुए कई बड़े खुलासे किए। उन्होंने ऑपइंडिया की टीम से कहा:

“समुदाय विशेष के लोग अपने बच्चों को स्कूल से पहले ही लेकर चले गए थे। हमें काफ़ी देर से ये चीजें पता चलीं। आख़िर इन्हें कैसे पता चला कि कुछ होने वाला है? ऐसा इसीलिए, क्योंकि सब इनकी ही सोची-समझी साजिश थी। राजधानी स्कूल में दिखावटी तोड़फोड़ हुई है। असली नुकसान तो हिन्दुओं को हुआ है। हम सब बहुत डरी हुई हैं। हमें रात-रात भर नींद नहीं आती है। वो लोग छोटे-छोटे पर पथराव करते हैं। हम निहत्थे लोग हैं। हमारे घर में डंडे भी हों तो हम उसे कचरा समझ के फेंक देते हैं। उनके पास काफ़ी सारे हथियार होते हैं। हमारे पास अपने बच्चों को लेकर घरों में दुबके रहने के अलावा कोई चारा नहीं है।”

ऑपइंडिया की टीम से बातचीत करती शिव विहार, प्रेम नगर और प्रेम विहार की महिलाएँ

ये महिलाएँ शिव विहार, प्रेम नगर, प्रेम विहार और उसके आसपास के इलाक़ों की हैं। उन्होंने बताया कि हिन्दुओं के घर के लोग रोजमर्रा के काम और अपनी ड्यूटी के कारण दिन भर घर से बाहर रहते हैं और अगर ऐसे समय में दंगाई भीड़ हमला करती है तो वो भला उनका सामना कैसे करेंगी? महिलाओं ने कहा कि ये सब सोची-समझी साज़िश थी, ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान उपद्रव किया जा सके।

महिलाओं ने पुलिस की भी आलोचना की। उन्होंने बताया कि जब मजहबी भीड़ दंगे कर रही थी, तब पुलिस कह रही थी कि उनके पास हथियार इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। लोग पुलिस ने नाराज़ दिखे। वहाँ कुछ युवा भी उपस्थित थे और उन सबने बताया कि समुदाय विशेष के लोगों ने अपने घरों में अब भी हथियार जमा कर के रखे हैं, जिसकी जाँच होनी चाहिए नहीं तो आगे और भी खतरा बढ़ सकता है।

इन महिलाओं की सरकार व प्रशासन से माँग है कि उनकी सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त किए जाएँ। उन्हें उम्मीद है कि जब मीडिया में ये ख़बर आएगी तो उनकी आवाज़ सुनी जाएगी और उन्हें दंगाइयों के भय से मुक्ति दिलाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। हालाँकि, उस क्षेत्र में अभी भी तनाव व्याप्त है और अफवाहों का बाजार गर्म है। हिन्दू अपनी जली हुई दुकानों की मरम्मत में लगे हुए हैं।

…अब निकला 8वाँ शव: दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में नालों से लाशें मिलने का सिलसिला जारी

स्कूल से पहले चले गए थे बच्चे, हिन्दू बच्चों को बनाया बंधक: दंगाइयों ने मुआवजे के लिए ख़ुद की दुकानें तोड़ीं

‘मारो सालों को’: मेरी आँखों के सामने मेरे दोस्त की गर्दन में गोली मार दी, दुकान लूट कर फूँक डाला

‘बता…तुझ पर पेट्रोल डालें या गाड़ियों पर’ जब दंगाइयों ने रखी हिन्दू दुकानदार की जान बख्शने की शर्त: ग्राउंड रिपोर्ट

‘धरने में भेजते थे शौहर, कहते थे खाना मिलेगा’ – मुस्लिम महिला ने CAA-विरोधी धरने का विडियो में खोला राज

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में अलीगढ़ में पुरानी चुंगी गेट के बाहर चल रहे धरने को हटवाने के बाद पुलिस ने सोमवार (मार्च 2, 2020) को उन इलाकों का दौरा किया, जहाँ से महिलाएँ धरने में आ रही थीं। इस दौरान उनको बड़ी सफलता भी मिली। धरने की पीछे की असलियत भी सामने आ गई कि आखिर धरने पर महिलाओं की भीड़ को किस तरह से जुटाया जाता था।

फिरदौस नगर में एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला ने धरने की पोल खोल दी। महिला ने पुलिस को बताया कि उसके शौहर ही उसे खाने-पीने का लालच देकर धरने में भेजते थे। कहते थे, शाहजमाल में धरना चल रहा है, वहाँ चली जाओ। यहाँ भी इन्होंने ही भेजा था। पति रोज जान खाते थे, इसलिए धरने पर जाती थीं। महिला व पुलिस की बातचीत का वीडियो भी वायरल हुआ है।

पुलिस को खबर मिली कि इलाके में अफवाहें फैलाई जा रही है और महिलाओं को जबरन धरने पर भेजा जा रहा है। जिसके बाद पुलिस ने संबंधित इलाकों का दौरा किया और एक-एक घर में जाकर उन्हें समझाया कि वो किसी की बातों में न आएँ। इसी दौरान एक महिला ने धरने की पोल खोल दी।

सोमवार दोपहर सीओ फिरदौस नगर स्थित बुजुर्ग महिला के घर पहुँचे। सीओ ने महिला के पति से पूछा कि आपकी बीवी रोजाना धरने में शामिल हो जाती हैं। बुजुर्ग ने कहा कि साहब इतना समझाया, पर क्या करें। इसी बीच अंदर से भागती हुई बुजुर्ग महिला आ गई और पति की बात को काटते हुए बोली, “तुमने कहा था कि धरने में जाओ।”

सीओ से महिला ने कहा कि वो झूठ नहीं बोल रही हैं। उनके शौहर ही रोज धरने पर जाने के लिए बोलते थे। इस पर सीओ ने कहा कि अब मत जाना अम्मा हाथ जोड़ रहे हैं। इसके बाद सीओ ने महिला के शौहर को नोटिस देने की बात कही। सीओ ने बुजुर्ग महिला के बेटे को भी चेतावनी दी कि आप लोग वहाँ जाकर महिलाओं को भड़का रहे हो। आप और आपकी अम्मी दोबारा धरने में न आएँ।

बता दें कि 23 दिसंबर को ऊपरकोट पर हुए बवाल के बाद से एएमयू के पास पुरानी चुंगी गेट पर छात्र व आसपास क्षेत्र की महिलाएँ धरने पर बैठ गई थीं। सोमवार सुबह पुलिस ने यहाँ से महिलाओं को समझाकर हटाया और प्रदर्शनकारी दोबारा न जमें, इसलिए पुलिस ने वहाँ डेरा जमा लिया। यहाँ धरने देने वाले 15 लोगों के घरों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं।

…अब निकला 8वाँ शव: दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में नालों से लाशें मिलने का सिलसिला जारी

दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान नालों से लाशें बरामद होने का सिलसिला जारी है। ताजा जानकारी के अनुसार, सोमवार को भी भागीरथी विहार के नाले से एक शव मिला। इससे पहले आईबी के अंकित शर्मा समेत 7 शव क्षेत्र के अलग-अलग नालों से निकाले जा चुके थे।

इनमें सबसे पहला शव 26 फरवरी को आईबी कॉस्टेबल का ही था, जिसे चांद बाग पुलिया स्थित एक नाले से निकाला गया। लेकिन, इसके अगले दिन 27 फरवरी को पुलिस ने गोकुलपुरी और नालों से 2 शव बरामद किए। इसके बाद भागीरथी विहार, शिव विहार, गोकुलपुरी के नालों से 4 लाशें मिली।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक इलाके के नालों से निकलती लाशों से वहाँ पर हड़कंप मचा हुआ है। 2 दिन की तबाही देखते हुए लोगों का कहना है कि अभी नालों में और भी शव निकल सकते हैं। स्थानीयों की मानें तो दंगाइयों ने हत्या करने के बाद शव को छिपाने के लिहाज से उन्हें नाले में फेंका था, इसलिए उनका अनुमान है कि नालों में अभी और भी लाशें हो सकती हैं।

गौरतलब है कि जिन हिंसा प्रभावित इलाकों के नालों से शवों के मिलने का सिलसिला जारी है, वहाँ के अधिकाँश नाले कूड़े से ढके हुए हैं। पानी के ऊपर पॉलीथिन की झिल्लियाँ, प्लॉस्टिक की बोतलें और कागज के टुकड़े तैरते हुए नजर आ रहे हैं। इन नालों में कूड़े इस कदर भरे पड़े हैं कि नाले का पानी दिखाई ही नहीं देता है। इसके अतिरिक्त नालों की गहराई अधिक होने से उसमें उतरकर शवों की तलाश करना आसान नहीं है।

यहाँ बता दें कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लोगों का कहना है कि इन नालों का प्रयोग शव को ठिकाने के लिहाज से अक्सर होता रहता है। इन नालों से अक्सर शव बरामद होते हैं। हालाँकि, इन नालों को लोहे की जाली और पक्की दीवारें बनाकर सुरक्षित करने का प्रयास किया गया है, लेकिन कुछ जगहों पर लोगों ने जाली और दीवार को तोड़कर रास्ता बना दिया है। जिससे यहाँ तक आना सभी के लिए आसान है।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली में बीते दिनों हुई हिंसा के बाद भले ही अब स्थिति शांत है, लेकिन माहौल में अब भी तनाव का एहसास किया जा सकता है। दंगों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 46 पहुँच चुकी है। इनमें 38 मौतें गुरुतेग बहादुर अस्पताल और 3 लोक नायक अस्पताल में हुई हैं। बाकी नालों में फेंकी गई लाशों का बरामद होना तो लगातार जारी है।

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खुद के शोरूम से हटा ली सभी बाइक… फिर लगाई अपनी ही दुकान में आग: दंगों से पहले Vs बाद की ग्राउंड रिपोर्ट

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‘संघी केजरीवाल की खाकी चड्डी दिख गई’: अंकित शर्मा के परिवार को मुआवजा मिलने से लिबरल गिरोह खफा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन के गुंडों द्वारा मारे गए आईबी के अंकित शर्मा के परिवार को 1 करोड़ रुपए बतौर मुआवजा देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि साथ ही पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। हालाँकि, अपनी पार्टी के नेता और निगम पार्षद ताहिर हुसैन पर केजरीवाल ने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी और कुछ नहीं कहा। दूसरी तरफ़ संसद में भगवंत मान और संजय सिंह सरीखे आप नेता भाजपा को दंगाइयों का सम्मान करने वाला बताते हुए विरोध प्रदर्शन करते नज़र आए।

फेक न्यूज़ फैलाने वाले अशोक स्वेन ने लिखा कि अगर नरेंद्र मोदी में से गाय को हटा दिया जाए तो अरविन्द केजरीवाल निकलेंगे। उनका इशारा इस ओर था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह ‘हिन्दुत्ववादी’ हो गए हैं?

कर्नाटक कॉन्ग्रेस सोशल मीडिया सेल के अध्यक्ष श्रीवत्स ने लिखा कि उस फैजान का क्या, जिसे दिल्ली पुलिस ने ‘लाठी से पीट-पीट कर मार डाला?’ उन्होंने दावा किया कि बाकी के 40 पीड़ित परिवारों को यूँ ही छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि अंकित शर्मा का परिवार इतना मुआवजा डिजर्व करता है लेकिन बाकियों का क्या? उन्होंने केजरीवाल पर मौतों को बाँटने का आरोप लगाया और कहा कि सभी जिंदगियाँ बराबर हैं।

इसी तरह श्रुति चतुर्वेदी नामक महिला ने भी कहा कि फैज़ान की मौत का क्या? कुछ मुस्लिमों ने तो अरविन्द केजरीवाल को संघी तक ठहरा दिया और कहा कि उनकी चड्डी दिख गई है।

इसी तरह ‘ऑल्ट न्यूज़’ के संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने केजरीवाल को सलाह दी कि वो ‘दिल्ली पुलिस द्वारा मारे गए’ व्यक्ति के लिए भी 1 करोड़ रुपए का मुआवजा घोषित करें। इसी तरह इस्लामी कट्टरपंथी और उनसे सहानुभूति रखने वाले लोगों ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और दिल्ली सरकार को निशाने पर लिया क्योंकि देश की सेवा करने वाले एक जांबाज जवान की हत्या के बाद उनके परिवार के लिए मुआवजे की घोषणा की गई है।

वे 20-25,000 के बीच थे, हम केवल 200: जख्मी ACP ने सुनाई उस दिन की आपबीती जब बलिदान हुए थे रतनलाल

‘गंगाजल’ लिखा हुआ तेजाब, मुस्लिम इलाके में सप्लाई: दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में फिरोज की फैक्ट्री बेनकाब

Thappad से सीख: हर बार थप्पड़ हिन्दुओं के ही गाल पर क्यों? सेक्युलरिज़्म सिर्फ हिंदुओं की जिम्मेदारी नहीं

सोशल मीडिया छोड़ने की सोच रहा हूँ: फेसबुक, ट्विटर, इंस्टा और यूट्यूब को अलविदा कहेंगे PM मोदी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया है कि वो इस रविवार को अपने सारे सोशल मीडिया एकाउंट्स को छोड़ देने का मन बना रहे हैं। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट कर ये जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि वो अपने फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम हैंडल्स को अलविदा कहने के बारे में विचार कर रहे हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल पर 5.33 करोड़ से भी ज्यादा फॉलोवर हैं। वहीं फेसबुक की बात करें तो वहाँ प्रधानमंत्री के 4.59 करोड़ से भी अधिक फॉलोवर्स हैं। इंस्टाग्राम पर भी दुनिया भर के नेताओं में पीएम मोदी की ही तूती बोलती है और उनके वहाँ 3.52 करोड़ से भी अधिक फॉलोवर हैं। यूट्यूब पर नरेंद्र मोदी को 45 लाख लोग फॉलो करते हैं।

अब देखना यह है कि पीएम मोदी ने तीनों सोशल प्लेटफॉर्म्स को छोड़ने की बात क्यों कही है? ये भी जानने लायक बात होगी कि क्या उनके दफ्तर के एकाउंट्स इन तीनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चालू रहेंगे? उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं बताया है कि वो सोशल मीडिया से दूर क्यों जाना चाहते हैं।

पीएम के इस निर्णय के बाद तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोगों ने अंदेशा जताया कि जिस तरह से सोशल मीडिया पर हिंदुत्व और राष्ट्रवादी विचारधारा के लोगों को बदनाम किया जाता है, कहीं इसीलिए तो पीएम सोशल मीडिया को अलविदा नहीं कहने जा रहे हैं?

पुलिस पर गोली चलाने वाले शाहरुख़ का परिवार भी हुआ फरार, घर से मिली बड़ी मात्रा में संदेहास्पद सामग्री

दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में पुलिस पर 8 राउंड फायर करने वाले शाहरुख़ का परिवार फरार हो गया है। आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन और इस शूटर शाहरुख़ के साथ साथ अब दिल्ली पुलिस शाहरुख़ के घर वालों की भी तलाश में सक्रिय है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में नाम न छपने की शर्त पर दिल्ली पुलिस में मौजूद कुछ सूत्रों के अनुसार शाहरुख़ के घर से बड़ी मात्रा में संदिग्ध सामान की बरामदगी हुई है।

दिल्ली पुलिस में जॉइन्ट कमिश्नर की रैंक के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन दंगों की जाँच में शाहरुख़ और ताहिर हुसैन बेहद अहम कड़ी हैं। पुलिस अधिकारी के अनुसार अबतक पुलिस अपनी जाँच के दौरान घरों गलियों से भारी संख्या में पेट्रोल और डीजल कैन बरामद कर चुकी है, और अभी भी बरामदगी का यह सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा; इसके साथ साथ हजारों मिर्ची पाउडर के पैकेट्स, 20 किलो कीलें और पेट्रोल बम बनाने के काम आने वाली अन्य सामग्री भी बड़ी मात्रा में बरामद की जा चुकी है।

इसके अलावा दंगों की जाँच के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के अधिकारी ने यह भी बताया, “जफराबाद और मुस्तफाबाद में कई घरों की छतों पर गुलेल लगाई गईं थीं, इस बात का अंदेशा है कि इन्हीं गुलेलों के जरिए 100 मीटर दूर तक पेट्रोल बम तेज़ाब और मिर्ची बमों से हमला किया गया होगा।”

अमर उजाला के अनुसार शाहरुख़ और ताहिर हुसैन के भाई अभी हाल ही में सिरसा में एक साथ देखे गए थे। सिरसा के परौरा गाँव के लोगों ने दावा किया था कि ताहिर हुसैन का भाई और शूटर शाहरुख़ एक साथ कुछ मिनट के लिए एक शादी में दिखाए पड़े थे, हालाँकि दिल्ली पुलिस ने इस दावे का खंडन कर दिया था।

दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में व्यस्त होने का फायदा उठा शाहरुख़ पुलिस को चकमा दे निकल भागा था, अब उसके पिता और भाई के भी फरार हो जाने की खबरें आ रही हैं।

स्कूल से पहले चले गए थे दूसरे मजहब के बच्चे, हिन्दू बच्चों को बनाया बंधक: दंगाइयों ने मुआवजे के लिए ख़ुद की दुकानें तोड़ीं

आप तैयारी देखिए… हिंदुओं के खिलाफ उन कट्टरपंथियों की। उन्होंने खुद को पीड़ित साबित करने के लिए सड़क पर संतरे भी फैलाए, दुकानों को ही नहीं बल्कि अपनी ठेलों को आग के हवाले कर दिया। जहाँ भी उन्हें लगा कि बीमा और सरकारी मुआवजे का लाभ मिल सकता है, वहाँ दुकान से दो फर्नीचर बाहर निकाले और खुद ही लगा दी आग। इतना ही नहीं, अपनी ही हिंसा की चपेट में आए युवक की मौत के बाद उसके शव को 24 घंटे घर में रखने से भी गुरेज नहीं किया, क्योंकि केजरीवाल सरकार मृतकों को मुआवजा देने की घोषणा जो करने वाली थी।

जिहादी मानसिकता का आलम देखिए। उन्होंने उन मासूम बच्चों को भी अपनी साजिश का शिकार बनाया, जिसे यह भी ठीक से पता नहीं कि हिंदू विरोधी दंगा या हिंदू-मुस्लिम क्या होता है और आग कैसे लगाई जाती है। लेकिन, कट्टपंंथी मासूम बच्चों को भी अपना हथियार बनाने से नहीं चूके। दिल्ली हिंसा के बाद आई खबरों से एक बात तो साफ़ हो गई कि दंगाई महीनों से हिंदुओं को अपना शिकार बनाने की साजिश रच रहे थे। बस उनको तलाश थी तो अच्छे मौके की, जो कि उन्हें सीएए विरोध के नाम पर मजहबी महिलाओं द्वारा शुरू किए गए धरने के साथ ही मिल गया।

मौक़ा मिलते ही शुरू होता है हिंदुओं के खिलाफ़ हिंसा फैलाने का एक सफ़र। अपनी योजना को सफल बनाने के लिए मजहबी दंगाइयों की भीड़ करावल नगर स्थित ताहिर हुसैन के मकान को और शिव विहार में राजधानी पब्लिक स्कूल को अपना केन्द्र बनाती है। यहाँ दंगाइयों को सुविधा देने के लिए पहले से ही बेहतर इंतजाम किए जाते हैं। छतों पर पैट्रोल बम बनाकर बड़ी संख्या में रख दिए जाते है, ईंट-पत्थरों को ऊपर पहुँचा दिया जाता है, देसी हथियार से ज्यादा मारक क्षमता वाली गुलेल को तैनात कर दिया जाता है।

इसके बाद अपने आकाओं का आदेश मिलते ही दोनों ही स्थानों पर दंगाइयों की भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है। योजना आखिरी पड़ाव पर थी। वह ये कि राजधानी स्कूल में पढ़ने वाले समुदाय विशेष के बच्चों को पहले ही सुरक्षित घर भेज दिया जाए और हिंदुओं के बच्चों को स्कूल में ही बंधक बना लिया जाए। आगे कुछ ऐसा ही होता है। जानिए चश्मदीद की जुबानी…

शिव विहार में रहने वाले दंगा पीड़ित अंकित बताते हैं,

“इलाके में सबसे ऊँची इमारत राजधानी स्कूल ही थी, जिसे दंगाइयों ने अपनी योजना को अंजाम देने के लिए बेहतर समझा। सोमवार को इलाके में हिंदुओं के खिलाफ कट्टरपंथियों का आतंक जारी था। इसी बीच राजधानी स्कूल से दूसरे मजहब के सभी बच्चों को सुरक्षित निकालकर घर भेज दिया जाता है। वहीं स्कूल में मौजूद हिदुओं के बच्चों को बंधक बना लिया जाता है। दूसरी ओर पास के ही हिंदू मालिक के स्कूल डीआरपी में समुदाय विशेष के अभिवावक जाते हैं और इलाके में हिंसा शुरू होने से पहले ही अपने बच्चों को बिना कारण बताए स्कूल से ले आते हैं। इनकी योजना पूरी थी और इसी के बाद राजधानी स्कूल की जमीन को अपनी साजिश कामयाब बनाने के लिए बखूबी इस्तेमाल किया जाता है।”

दंगाइयों द्वारा की गई योजना का परिणाम देखिए कि राजधानी स्कूल के पास स्थित डीआरपी स्कूल को पूरी तरह से ख़ाक में मिला दिया जाता है और वहीं मौजूद राजधानी स्कूल में मामूली सी तोड़फोड़ करके दंगाई खुद को पीड़ित दिखाने का ढ़ोंग करने लगते हैं। साजिश को अंजाम तक जाने में और दंगाइयों की भीड़ को अपना समर्थन देने में राजधानी पब्लिक स्कूल की भूमिका का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि स्कूल के गेट पर लिखा हुआ था, नो सीएए, नो एनपीआर

अब आप खुद ही विचार करें कि जो स्कूल अपने ही मासूम बच्चों को कट्टरपंथियों की साजिश का शिकार बना सकता है, आखिर वह भला बच्चों को क्या शिक्षा देता होगा? अब कैसेे मान लिया जाए कि वह स्कूल अपने और अपने बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है।

वैन में बैठ कर पुलिस को गरिया रहा था शौकत, फिर जवान पर थूक दिया: रगड़ के हुई पिटाई

मुंबई पुलिस जहाँ एक तरफ बड़े-बड़े अपराधियों और गुंडों को सीधा कर देती है, न्यायिक हिरासत में भेजे गए एक व्यक्ति ने उसे ही गालियाँ बकनी शुरू कर दी। शौकत अली मंसूरी ने मुंबई पुलिस के सामने अपना दुस्साहस दिखाया और जम कर गालियाँ बकीं। दरअसल, शौकत इसीलिए नाराज़ था क्योंकि उसे घर का खाना नहीं दिया गया था। उसे डिंडोशी अदालत ने हिरासत में भेजा था। पुलिस जब उसे वैन में लेकर जा रही थी, तब उसने इस बात से गुस्सा जताया कि उसे घर का बना खाना क्यों नहीं दिया गया?

वो वैन में ही पुलिस को गाली देने लगा। लेकिन, पुलिस ने धीरज बनाए रखा और उसे कुछ नहीं किया। इसके बाद शौकत ने हद पार कर दी। उसने वैन में सामने बैठे एक पुलिसकर्मी पर ही थूक दिया। इसके बाद पुलिस आग-बबूला हो गई और उसकी जम कर पिटाई की। पुलिसकर्मी उसकी गालियाँ काफ़ी देर से सुन रहे थे लेकिन थूकने के बाद उन्होंने शौकत की अच्छे तरीके से मरम्मत की। ये विडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया और मुंबई पुलिस एक बार फिर से चर्चा का विषय बनी।

सोशल मीडिया में मुंबई पुलिस पहले से ही चर्चा में रही है। ट्रैफिक नियमों और अन्य चीजों के लिए पुलिस अपने अधिकारिक हैंडल से ऐसे फोटो डालते रहती है, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बनते हैं। लेकिन, इस बार कुछ अलग हुआ, इसीलिए लोगों ने इस वीडियो को लेकर ख़ूब मजाक-मस्ती की।

जहाँ तक शौकत की बात है, इस घटना के बाद वो और भी ज्यादा फँस गया है। उस पर पुलिसकर्मियों ने और भी कई केस ठोक दिए हैं। उस पर पहले से जो मामले चल रहे थे सो अलग। घर के खाने को लेकर पुलिस से की गई अभद्रता का उसे अच्छा सबक मिला है।

‘जम्मू कश्मीर में शांति बनाए रखने के लिए उमर अब्दुल्लाह को हिरासत में रखना जरूरी’

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्‍यमंत्री उमर अब्दुल्लाह की रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई उनकी बहन सारा अब्दुल्लाह पायलट की याचिका पर आज जम्मू कश्मीर प्रशासन ने अपना पक्ष रखा। जम्मू कश्मीर प्रशासन ने पिछले 7 महीने से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह को हिरासत में रखे जाने को जरुरी बताया।

सारा अब्दुल्लाह पायलट की इस याचिका में उमर को जम्मू-कश्मीर नागरिक सुरक्षा कानून (जेके-पीएसए) के तहत हिरासत में लिए जाने को चुनौती दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कोर्ट से कहा है कि कोर्ट उमर अब्दुल्लाह को हिरासत में रखे जाने के निर्णय की समीक्षा नहीं कर सकता।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता जम्मू कश्मीर प्रशासन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा और इंदिरा बनर्जी वाली पीठ के सामने पेश हुए। तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा की उमर अब्दुल्लाह के “पूर्व की घटनाओं से नजदीकी जुड़ाव” रहे हैं, इसलिए उन्हें लम्बे समय से हिरासत में रखा गया है।

उमर अब्दुल्लाह की हिरासत के निर्णय का बचाव करते हुए जम्मू कश्मीर प्रशासन ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख की पाकिस्तान से भौगोलिक समीपता को भी एक कारण बताया।

जम्मू-कश्मीर पब्लिक सुरक्षा कानून, 1978 के तहत नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला पर मामला दर्ज किया गया है। जिस पर उनकी बहन सारा अब्दुल्लाह पायलट ने 10 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अपने भाई उमर अब्दुल्ला को जेके-पीएसए-1978 के तहत हिरासत में रखे जाने को अवैध बताया था।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जहाँ जवाब दाखिल किया जेके प्रशासन की तरफ से वहीं अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने शीर्ष अदालत के एक पूर्व फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि हिरासत में रखने के मामले में याचिकाकर्ता को पहले उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

याद रहे कि इस कानून के तहत 6 महीने से 2 साल तक शख्‍स को हिरासत में रखा जा सकता है। पीएसए को राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने साल 1978 में लागू किया था।

दिल्ली में अफवाह बाजों पर कसेगी नकेल, हो सकती है 3 साल तक की सजा: केजरीवाल सरकार

दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों को रोकने में अपनी नाकामी के बाद दिल्ली सरकार लोगों का ध्यान खुद की नाकामियों से हटाने के लिए जीतोड़ कोशिश में जुटी है। इसी बीच दिल्ली विधानसभा की ‘शांति और सद्भाव’ कमेटी के चेयरमैन आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कमेटी की पहली मीटिंग के बाद आज अफवाह फैलाने वालों के प्रति दिल्ली सरकार के सख्त रवैये को दर्शाने की कोशिश की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सौरभ भारद्वाज ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अफवाह फैलाने वालों को चेताते हुए कहा कि IPC 153A and 505C and IT act 66A के अंतर्गत अफवाह फैलाते पकड़े जाने पर 3 साल तक की सजा हो सकती है।

दिल्ली में फिर से दोबारा दंगा ना फैले इसके लिए जरुरी एहतियात बरतने के साथ-साथ अफवाहों पर लगाम लगाना सबसे जरूरी हो गया है। कल रविवार को भी अफवाहों के चलते कई इलाकों में तनाव की स्थिति बनी रही। जिसके बाद दिल्ली पुलिस की तरफ से लगातार अफवाहों का खंडन किया जाता रहा।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उनकी कमेटी जल्द ही फोन नंबर और ईमेल अड्रेस रिलीज करेगी जिस पर कोई भी उन ऑनलाइन मैसेजेस को फॉरवर्ड कर सकता है जिन्हें वो दो समुदायों के बीच नफरत और हिंसा फैलाने वाला समझता है।