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विकिपीडिया का एडिटर जो मुस्लिम दंगाइयों को बचाने में लगा है: दिल्ली दंगे से लेकर ‘चौकीदार चोर है’ तक

दिल्ली में हुए हिन्दुविरोधी दंगों में उलटा हिन्दुओं को ही दोषी साबित करने की कोशिश की जा रही है और इसमें विकिपीडिया भी शामिल है। विकिपीडिया पर जब भी हिन्दुओं पर हुए अत्याचार की बात डाली जाती है, उसे वहाँ से हटा दिया जाता है और इन दंगों को मुस्लिम-विरोधी ठहराया जाता है। इसके लिए प्रोपेगंडा पोर्टलों की ख़बरों का भी सहारा लिया जाता है। विकिपीडिया पर वरिष्ठ एडिटर DBigXray नामक यूजर ने 25 फ़रवरी को ‘नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगे’ नाम से एक पेज बनाया। जब आप इस पेज पर जाएँगे तो आपको दंगों की जगह भाजपा नेता कपिल मिश्रा की फोटो दिखेगी।

कपिल मिश्रा को बदनाम करने के लिए उन पर एक अलग सेक्शन ही डाल दिया गया है और उन्हें ‘भड़काने वाले’ की केटेगरी में रखा गया है। कुछ एडिटर्स ने आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान के एक भड़काऊ भाषण का जिक्र किया, जिसे एक साजिश के तहत पेज से हटा दिया गया। मोहम्मद शाहरुख़ ने पुलिस पर गोलीबारी की थी लेकिन इस पेज पर उसके बारे में काफ़ी कम मेंशन किया गया है और ये भी छिपा लिया गया है कि वो सीएए का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों में से एक था। सीनियर एडिटर का कहना है कि उसके बारे में जानकारी देने की ज़रूरत नहीं है।

विकिपीडिया के इस लेख में मस्जिदों पर हमले का तो जिक्र है लेकिन मुस्लिम भीड़ की किसी भी करतूत का कोई जिक्र नहीं है। विकिपीडिया को कोई भी एडिट कर सकता है लेकिन नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों को उस श्रेणी में रखा गया है, जिसे सिर्फ़ रजिस्टर्ड वरिष्ठ एडिटर ही एडिट कर सकते हैं। मुस्लिम भीड़ ने ‘नारा-ए-तकबीर’ और ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए विनोद कुमार को ब्रह्मपुरी में मार डाला लेकिन इसका इस लेख में कोई जिक्र नहीं है। मास्टर एडिटर-3 की श्रेणी में रखा गया DBigXray लगातार ये नज़र रखता है कि यह लेख हिन्दुफोबिया से ग्रसित रहे।

विकिपीडिया गूगल रिजल्ट्स में सबसे पहले आता है और इसीलिए इसपर पक्षपाती सूचनाएँ नहीं रहनी चाहिए। रेडिट पर उपलब्ध एक सूचना के अनुसार दावा किया गया है कि विकिपीडिया के इस सिनोर एडिटर का नाम दीपेश राज है। वो आइआइटी कानपुर से पढ़ा हुआ है और फ़िलहाल इंटेल की बेंगलुरु ऑफिस में कार्यरत है। दीपेश ने एक स्कूल के बारे में भी विकिपीडिया पेज बनाया है, जिसके बारे में शायद ही किसी को पता हो। हो सकता है उस स्कूल से उसका कोई व्यक्तिगत हित जुड़ा हो।

रेडिट की पोस्ट में यह भी कहा गया कि दीपेश अरविन्द केजरीवाल का समर्थक है लेकिन इस बारे में कुछ पुष्टि नहीं हो पाई है। इससे पहले विकिपीडिया पर उसका नाम Deepeshraj1 था, जो अब बदल कर DBigXray कर दिया गया है। उसने बताया है कि वो अपना असली नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहता, इसीलिए उसने विकिपीडिया पर अपना यूजरनेम बदल लिया है। उसने वारिस पठान और उसके भड़काऊ बयान को छिपा लिया। उसने ताहिर हुसैन का नाम भी छिपा लिया। उसने कारण बताया है कि जब तक उसे कानून द्वारा दोषी नहीं ठहरा दिया जाता, तब तक उसका नाम डालना सही नहीं होगा।

पाकिस्तान में वीरगति को प्राप्त हुए कैप्टेन सौरभ कालिया के नाम के साथ भी उसने ‘शहीद’ की जगह ‘मार डाले गए’ का प्रयोग किया है जबकि उन्हें पाकिस्तान में प्रताड़ित करके मार डाला गया था और वो देश के लिए बलिदान हो गए थे। पंडित दीन दयाल उपाध्याय के पेज से उसने ‘पंडित’ हटा दिया है। उसने ही ‘चौकीदार चोर है’ नामक विकिपीडिया आर्टिकल बनाया था। इसी तरह दीपेश लगातार विकिपीडिया पर वामपंथी और हिन्दू-घृणा से सनी हुई एडिटिंग करने में लगा हुआ है।

(ये ऑपइंडिया अंग्रेजी की सम्पादक नूपुर शर्मा द्वारा लिखे गए लेख का हिंदी अनुवाद है)

‘मारो सालों को’: मेरी आँखों के सामने मेरे दोस्त की गर्दन में गोली मार दी, दुकान लूट कर फूँक डाला

कॉलोनी की हर एक गली में दंगाइयों के नाम पर इस्लामी भीड़ प्रवेश कर चुकी थी, किसी के हाथों में ईंट-पत्थर, किसी के हाथों में सरिया-रॉड तो किसी के हाथों में हथियार लगे हुए थे। गली में घुसने के बाद भीड़ ने मोहल्ले की हर एक ऊँची इमारत पर अपना कब्जा जमा लिया था और इसके बाद वही जो हर एक युद्ध के मैदान में या फिर किसी फिल्मी पर्दे पर होता दिखाई देता है। लेकिन यह कहानी कश्मीरी पंडितों के पलायन पर बनी फ़िल्म शिकारा या फिर ईरान-ईराक युद्ध के मैदान की नहीं बल्कि यह कहानी उस दिल्ली की है, जिसे भारत की राजधानी कहा जाता है।

इस कहानी को अपने शब्दों में उस पीड़ित ने बयाँ किया, जिसकी आँखों के सामने दंगाइयों ने न सिर्फ उसकी ही करोड़ों की सम्पत्ति को आग के हवाले किया बल्कि उसकी ही आँखों के सामने उसके ही दोस्त की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हर किसी की आँखें खोल देने वाली बात यह कि इस घटना से पहले एक कार के नीचे डरे हुए बैठे समुदाय विशेष के तीन बच्चों को और घटना के बाद समुदाय विशेष के चार परिवारों को पीड़ित ने खुद अपनी निगरानी में इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला था।

हम दिल्ली में सीएए विरोध के नाम पर हुई हिंदू विरोधी हिंसा के पीड़ितों से बातचीत कर ही रहे थे कि हमारी मुलाक़ात शिव विहार निवासी और दंगा पीड़ित अंकित से हुई। हमसे पहले भी अंकित मीडिया वालों को अपनी व्यथा सुना रहे थे। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कि वह अपनी पीड़ा लोगों को बता-बताकर थक चुके थे। वैसे भी अंकित के पास अपना दुःख-दर्द कम करने के लिए दूसरों को अपनी पीड़ा बताने के शिवा कोई चारा नहीं था।

खैर, अंकित पॉल हमारे अनुरोध के बाद अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताते हैं,

“हर रोज की तरह बीते सोमवार (24 फरवरी) को मैं शिव विहार स्थित अपनी दुकान पर बैठा हुआ था। चाँद बाग से सीएए विरोध के नाम पर हिंसा शुरू हो गई थी। घड़ी में एक बजते ही मैंने देखा कि मुस्तफाबाद की ओर से हज़ारों की इस्लामी भीड़ हाथों में ईंट-पत्थर, लाठी-डंडे, सरिया-रॉड आदि तमाम तरह के हाथों में हथियार लिए हमारी गली की ओर बढ़ी चली आ रही है। उसे देखते ही मैंने अपने शटर को अंदर से बंद कर लिया। उस समय मेरे साथ बड़े भाई अमित, चचेरा भाई सचिन और पिता जी दुलाचंद थे। हम सब दुकान के अंदर ही छिप गए।”

उन्होंने आगे कहा:

इतने में ही दंगाइयों ने दुकान पर ईंट-पत्थरों से हमला बोल दिया और लोहे की रॉड से दुकान के शटर को तोड़न में लग गए। दंगाइयों को पता था हम दुकान के अंदर हैं वह लगातार निकालो-निकालो, ‘मारो सालों को-मारो’ चिल्ला रहे थे।”

अंकित आगे बताते हैं, “हमें लगा आज हम बच नहीं पाएँगे और सब मारे जाएँगे। इतने में ही देखा कि भीड़ एक दूसरी दुकान पर हमला कर रही रही है और इसी बीच हम मौक़ा पाकर सभी 30 सेकंड के भीतर दुकान से बाहर निकलकर बराबर वाली गली में मौजूद गोदाम के पास मकान की छत पर जाकर छिप गए। इसके बाद दंगाई दुकान से गोदाम की तरफ आए और गेट तोड़कर गोदाम की छत से हमारे (जिस मकान में छिपे थे) ऊपर पत्थरबाजी करने लगे। इतने में ही देखा कि राजधानी की छत पर जमा सैकड़ों की भीड़ ने हमारी ओर पेट्रोल बम फेंकना शुरू कर दिया। और चिल्लाते हुए बोले, रोक सके तो रोक ले हमने तेरी दुकान को आग लगा दी। इसी के साथ हमारे एक गोदाम में आग लगा दी गई।”

अंकित अपनी आपबीती बताते हुए थोड़ा भावुक होते हैं और आगे बताते हैं, “हम वहाँ से भी अपनी जान बचाने के लिए भाग ही रहे थे कि एक कंबल ओढ़े दंगाई ने हमारी दुकान की ओर आ रहे मेरे दोस्त और पड़ोसी राहुल सोलंकी (इंजीनियर) को गोली मार दी, जो कि उसकी गर्दन में जाकर लगीइससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उसको नहीं पता था कि घर के बाहर क्या हो रहा है। देर शाम हो चुकी थी हम अपनी जान बचाते घूम रहे थे। इसी बीच दंगाइयों ने फिर से दुकान पर धावा बोल दिया। पहले तो दुकान में जमकर लूटपाट की ओर फिर देखते ही देखते उसे आग के हवाले कर दिया। इसी बीच पता चला कि गोदाम में रहने वाले हमारे कर्मचारी दिलबर नेगी के हाथ पैर काट कर उसे मार दिया गया और फिर दूसरे गोदाम में भी देर रात दंगाइयों नें आग लगा दी।”

अंकित बताते हैं, “दंगाई इतने पर भी थमने का नाम नहीं ले रहे थे उन्होंने गोदाम से निकाले सिलेंडरों में आग लगाकर उसमें ब्लास्ट कर दिया, जिससे गोदाम की पूरी इमारत तबाह हो गई। दंगाई हमारी एक दुकान और दो गोदाम में लूटपाट करने के बाद उसे आग के हवाले कर चुके थे। इसके बाद दंगाइयों से हमारी जो एक मात्र ऑफिस बची हुई थी। लेकिन, उसमें भी देर रात पहले तो लूटपाट की फिर उसमें भी आग लगा दी।”

अंकित पाल के मुताबिक दंगाई दुकान में रखे करीब 40 हजार रुपए कैश और करीब 15 लाख रुपए का दूध, घी, खोवा आदि कीमती सामान लूटकर ले गए। वहीं दंगाइयों द्वारा दुकान में पहले लूटपाट फिर आग, फिर गोदाम में आग और फिर उसके बाद ऑफिस में आग से करीब 3 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। वह कहते हैं, दंगाइयों ने हमारी जीवनभर की कमाई को पलभर में हमारी ही आँखों के सामने आग के हवाले कर दिया। वह यह भी दावा करते हैं कि दंगाइ इसके लिए करीब एक महीने पहले से ही योजना बना रहे थे।

कर्नाटक: कलबुर्गी में दीवार पर लिखे ‘पाकिस्‍तान जिंदाबाद’ के नारे और PM मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी

कर्नाटक के कलबुर्गी में रविवार (मार्च 1, 2020) की सुबह पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे और दीवार पर मोदी विरोधी टिप्पणी करने की एक और घटना सामने आई है। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस ने इसके पीछे जिम्मेदार अपराधियों को पकड़ने के लिए जाँच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक कलबुर्गी के हफ्त गुम्बज इलाके के एक स्थानीय निवासी किशन राव हगरगुंडगी के घर की दीवार पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का विवादास्पद नारा लिखा हुआ पाया गया। इसके अलावा अज्ञात बदमाशों ने दीवार पर चारकोल से पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी हुई थी। मकान में रहने वाले किराएदार मनोज चौधरी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। जिसके बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 153A, 153B, 124A, और 505 (2) के तहत चौक पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया।

स्थानीय लोगों ने पुलिस से तुरंत कारर्वाई की माँग करने के साथ ही पुलिस को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ न हों। पुलिस ने स्थानीय लोगों को इसका आश्वासन दिया और फिर दीवार पर लिखे हुए शब्दों को मिटा दिया। 

इस घटना के सामने आने के बाद बीजेपी नेता दिव्या हगारगी ने चौक पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया। उन्होंने और भाजपा की अन्य महिला कार्यकर्ताओं ने दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की माँग की। दिव्या ने पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि 15 फरवरी को कलबुर्गी में आपत्तिजनक भाषण दिया था तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हेने के बाद ही मामला दर्ज किया गया था।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही कर्नाटक के हुबली ग्रामीण तालुक के बुदरसिंगी गाँव में एक स्कूल की दीवारों पर पाकिस्तान समर्थक नारे लिखे गए थे। बताया जा रहा है कि शिक्षकों और छात्रों ने स्कूल की दीवारों पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ और ‘टीपू सुल्तान शाले’ लिखा था।

वहीं पिछले दिनों वामपंथी कार्यकर्ता अमूल्या लियोना ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ बेंगलुरु में आयोजित AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की रैली में मंच से ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए थे। फिलहाल वो देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद है। अमूल्या के गिरफ्तारी के बाद उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अमूल्या ने हाल ही में खुलासा किया है कि वो एक पेड प्रोटेस्टर है। उसने पुलिस को बताया कि पिछले साल दिसंबर में सीएए के खिलाफ आंदोलन शुरू होने के बाद से सीएए के विरोध में रैली आयोजित करने वाले आयोजक उसका खर्च उठा रहे हैं।

15 साल के लड़के ने अपनी बहन के हाथ-पाँव बाँधकर कई बार किया रेप, बच्ची की आपबीती सुनकर उड़े होश

चेन्नई में 15 साल के एक नाबालिग लड़के पर अपनी 4 साल छोटी बहन के साथ कई बार बलात्कार करने का आरोप लगा। पुलिस ने सूचना मिलते ही लड़के के ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि घरेलू विवाद के कारण बच्चों के पिता ने 1 साल पहले घर छोड़ दिया था और माँ ने भी दूसरी शादी कर ली थी। दोनों बच्चे अपनी माँ के साथ रहते थे।

जानकारी के अनुसार, पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब लड़की ने ये आपबीती अपनी स्कूल की एक दोस्त को बताई। लड़की की बात सुनकर उसकी सहेली हैरान रह गई। उसने तुरंत अपने माता-पिता को इस बारे में सारी बात बताई और मामले में शिकायत दर्ज हुई। शिकायत के आधार पर, विल्लिवक्कम-ऑल विमिन पुलिस स्टेशन में पॉक्सो एक्ट एफआईआर दर्ज हुई।

पुलिस को पूछताछ में पता चला कि लड़की के भाई ने अपनी बहन के हाथ-पैर बाँधकर कई बार उसके साथ रेप किया था। मालूम हुआ कि दिसंबर से लेकर अब तक दोनों भाई-बहन घर में अकेले रहते थे, इसी दौरान उसके भाई ने दुष्कर्म को अंजाम दिया।

पीड़ित बच्ची ने बताया कि उसके भाई ने उसका रेप करने के बाद उसे धमकी दी थी कि अगर उसने किसी को इन सब बातों के बारे बताया तो वो उसका खत्म कर देगा।

बता दें, पुलिस ने लड़की की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करके दोनों भाई-बहन को थाने बुलाया था और उनसे पूछताछ की थी, तभी इस मामले में आगे का खुलासा हुआ।

फिलहाल, बच्ची की शिकायत पर उसके भाई को गिरफ्तार कर लिया गया। अब उसकी काउंसलिंग की जा रही है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। उन्हें शक है कि कहीं आरोपित ने अपने मोबाइल में रेप का वीडियो तो नहीं बनाया। इसलिए आरोपित के मोबाइल को भी खँगाला जा रहा है।

‘बता…तुझ पर पेट्रोल डालें या गाड़ियों पर’ जब दंगाइयों ने रखी हिन्दू दुकानदार की जान बख्शने की शर्त: ग्राउंड रिपोर्ट

उत्तरपूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के बीच काफी जान-माल का नुकसान हुआ। जाफराबाद, भजनपुरा, चाँदबाग, करावल नगर, कई ऐसे दंगा प्रभावित इलाके रहे जहाँ से दंगाइयों ने गुजरने के बाद केवल बर्बादी के मंजर की कहानी अपने पीछे छोड़ी। ऐसी ही कहानियाों के बारे में पता करने जब हम उत्तरपूर्वी दिल्ली के हालातों का जायजा लेते-लेते खजूरी खास इलाके की ओर बढ़े तो हमारी नजर गिरी ऑटोमोबाइल्स वर्कशॉप पर पड़ी। ये दुकान आप निगम पार्षद ताहिर हुसैन के घर से थोड़ी दूरी पर स्थित थी। अंदर जाकर देखा तो इसके अंदर जली हुई गाड़ियों का ढेर था, काली दीवारें थी, टूटी छत थी।

गिरी ऑटो मोबाइल -1

हालाँकि, माहौल देखकर समझ आ रहा था कि यहाँ किस तरह दंगाइयों ने क्या-क्या किया होगा, लेकिन हमने फिर भी और जानकारी जुटाने के लिए दुकान के मालिक दिलीप से बात की।

देखें रिपोर्ट की वीडियो:


गिरी ऑटो मोबाइल -2

दिलीप ने बताया, उस दिन पथराव 2 बजे से शुरू हुआ था। लेकिन, हम अपनी दुकान को 1 बजे बंद कर चुके थे। हम उस समय दुकान में ताला मारकर अंदर बैठे थे, जब दंगाइयों ने हमपर अचानक हमला किया। उनके मुताबिक 2 से ढाई बजे के बीच 40-50 ऐसे लोग उनकी दुकान का ताला तोड़कर अंदर घुस आए। जिनके हाथ में 20 लीटर के पेट्रोल के कैन थे।


गिरी ऑटो मोबाइल -3

दंगाइयों ने उनसे पूछा, बता…ये पेट्रोल तुझपर छिड़कें या फिर गाड़ियों पर। दंगाइयों की बात सुनकर वर्कशॉप के मालिक ने उनके आगे बड़ी मिन्नतें की और अपनी जान को किसी तरह उनसे छुड़वाया। मगर, अपनी दुकान और वहाँ रखे सामान को वह उनसे न बचा सके। उनके सामने उपद्रवियों ने सर्विसिंग के लिए आई 15 गाड़ियो पर पेट्रोल डाला और सबको आग के हवाले कर दिया। इसके बाद वे दिलीप से बोले बता तेरे पास मोबाइल है क्या? तूने रिकॉर्डिंग तो नहीं की। जब मालिक ने रिकॉर्डिंग करने की बात से मना किया, तो फिर उनसे उनका मोबाइल फोन ले लिया गया।

ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए गिरी ऑटोमोबाइल वर्कशॉप के मालिक दिलीप ने बताया कि दंगाइयों ने उनसे करीब 30-40 हजार रुपए की लूटपाट की। उनके अलावा एक प्रधानजी के भी ढाई लाख रुपए छीन ले गए। भारी मन से बात करते हुए दिलीप ने अपने नुकसान का अंदाजा करोड़ो में बताया और कहा कि उनकी सारी जमा पूँजी दंगाइयों ने जलाकर खाक कर दी। आज इन सबके कारण वो 20 साल पीछे चले गए। उनके पास कुछ नहीं बचा।

गिरी ऑटोमोबाइल के साथ व्यापार मंडल ऑफिस भी फूँक दिया गया:

मेरे भाई को जिहाद ने मारा है, एक-एक मस्जिदों व मदरसों की तलाशी ली जाए: दलित दिनेश के भाई

चश्मदीद प्रदीप वर्मा का बयान जिन्होंने चाकू से गोदकर मारे गए IB अधिकारी को आखिरी बार देखा था

बच गई ‘नो CAA, नो NRC’ लिखी दुकानें, बाकी को कर दिया ख़ाक: सामने आया दिल्ली दंगों का ‘ट्रेंड’

ताहिर हुसैन के गुंडे आए, लूटी अमन ई-रिक्शा वर्कशॉप, कर दिया पूरी दुकान खाक, 30 लाख का नुकसान: ग्राउंड रिपोर्ट

राजधानी दिल्ली में बीते दिनों हुए हिन्दू विरोधी दंगों में ताहिर हुसैन और उसकी बिल्डिंग की भूमिका रह-रह कर सामने आ जाती है। हिन्दू विरोधी दंगों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करने गए हमारे रिपोर्टर ने उस अमन ई-रिक्शा कम्पनी के मालिक से भी बात की जो आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन की बिल्डिंग के ठीक 3-4 मकान बाद मौजूद थी। हिन्दुओं की इस दुकान, अमन ई-रिक्शा कम्पनी को पहले ताहिर हुसैन के लोगों ने लूटा और फिर उसमें आग लगा दी।

अमन ई-रिक्शा वर्कशॉप -1

इसके मालिक ने ऑपइंडिया को बताया कि आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के यहाँ से एक दंगाइयों की भीड़ आई और उसने पहले जो कुछ लूटने लायक था उसको लूटा, उसके बाद दुकान को फूँक दिया। इस अमन रिक्शा कम्पनी के मालिक ने ऑपइंडिया को यह भी बताया कि उनकी रिक्शा कम्पनी में उस समय उनका गार्ड मौजूद था जिसने ताहिर हुसैन बिल्डिंग से आने वाली दंगाई भीड़ को दुकान फूँकने से मना भी किया पर ताहिर हुसैन के लोग नहीं माने।

अमन ई-रिक्शा कम्पनी के मालिक ने इस आगजनी और लूटमार के कारण 25-30 लाख रूपए का नुक़सान होने की बात बताई।


अमन ई-रिक्शा वर्कशॉप -2

अमन ई-रिक्शा कम्पनी के मालिक मालिक ने आगे ऑपइंडिया को बताया कि ताहिर हुसैन की बिल्डिंग की छत पर 500-600 की भीड़ मौजूद थी, जहाँ से गोलियाँ भी चल रही थीं। हमारी ग्राउंड रिपोर्ट के वीडियो में फूँकी गई दुकान के भीतर इधर-उधर बिखरी पड़ी पेट्रोल बम की खाली बोतलों को देखा जा सकता है।


अमन ई-रिक्शा वर्कशॉप -3

देखें पूरी रिपोर्ट का वीडियो:

याद रहे कि इस हिन्दू विरोधी दिल्ली के दंगों में जिस तरह बर्बरता पूर्वक तरीके से हिन्दुओं को मारा गया, वह न कभी देखा गया न कभी सुना, कम से कम भारत में। आईबी के अंकित शर्मा को 4-6 घंटों तक 400 बार चाकुओं-तलवारों से गोदा गया तो वहीं दिलबर नेगी के हाथ पैर काट जलती दुकान में फेंक दिया गया। यह हिन्दू विरोधी दंगा न केवल बर्बरता के मामले में अभूतपूर्व था साथ ही इसकी प्लानिंग भी बेहद सुनियोजित थी जिसमें महीनों लगे होंगे। दुकानों के शटरों पर NO CAA NO NRC लिखकर उन्हें अलग से चिन्हांकित करना, छतों पर बोरियों में भर-भर पत्थर एकत्र करना, पेट्रोल और तेज़ाब की भारी मात्रा में मौजूदगी, सीरिया की तर्ज पर गुलेल वगैरह का इस्तेमाल, आदि.. इस दंगे को अलग तरह से परिभाषित करने की माँग करते हैं।

बच गई ‘नो CAA, नो NRC’ लिखी दुकानें, बाकी को कर दिया ख़ाक: सामने आया दिल्ली दंगों का ‘ट्रेंड’

दिल्ली दंगा ग्राउंड रिपोर्ट: छतों से एसिड बरसा रही थीं मुस्लिम औरतें, गुलेल से दाग रहे थे पेट्रोल बम

जो हिंदू लड़की करती थी दुआ सलाम, उसी की शादी को जला कर राख कर डाला: चाँद बाग ग्राउंड रिपोर्ट

मुस्लिम भीड़ ने फूँक दी दुकान, ‘श्याम चाय वाले’ की मदद के लिए आएँ आगे, ये रहे बैंक डिटेल्स

तुम देखोगे? हम दिखाएँगे…: लिबरलों, वामपंथियों के लिए दंगा साहित्य से उपजी एक कविता

तुम देखोगे?
हम दिखाएँगे!
क्या नेगी जी को देखा है
काटे होंगे जब दोनों हाथ
जब काटे होंगे दोनों पाँव
फिर फेंक दिया धड़ जलने को
भस्मीभूत हुए जब वो
पहचान नहीं पाए हम लाश
ये अंत्येष्टि जो तुमने की
ये याद रहे जब तक हम हैं
न भूले हैं, न भूलेंगे
तुम कहते हो- ‘हम देखेंगे…’

तो देखो न इन लाशों को
मुंशी की है, दिनेश की है
समझा दो उसकी बच्ची को
कि उनके बाबा अब कहाँ गए?
आलोक तिवारी का लड़का
जब ढूँढेगा उनको घर में
तब तुम कहना ‘हम देखेंगे…’
वो दूध की थैली लेने को
निकले थे अपने ही घर से
डेढ़ साल के बच्चे को
समझाना जा कर इस दंगे को
और तब कहना ‘हम देखेंगे…’

तुम देखोगे?
हम दिखाएँगे
अंकित शर्मा की नियति भी
उस परमपिता ने कैसी लिखी
दंगे हटवाने गया था वो
समझाने उनको गया था वो
ताहिर के घर में खींच लिया
छः लोगों ने फिर चाकू से
घंटों तक उन पर वार किया
एक हिस्सा नहीं बचा तन का
जो कटा नहीं, जो बच पाया
मन भरा नहीं, आँखें नोंचीं
आँतों को तुमने फाड़ दिया
वो देश का एक सिपाही था
तुमने नाले में फेंक दिया
ये याद रहे जब तक हम हैं
न भूले हैं, न भूलेंगे
तुम कहते हो- ‘हम देखेंगे…’

तुम कहते हो न देखेंगे
फिर देखो फैसल की छत पर
जो गुलेल बना कर रक्खा है
पेट्रोल बमों की शीशी को
क्यों वहाँ बिछा कर रक्खा है
एसिड की हजारों बोतल को
गंगाजल तुमने लिखा-कहा
अपने घर की महिलाओं से
हिन्दू भीड़ों पर फिंकवाया
हर 10-15वें छत पर से जब
हिन्दू के घरों पर जब सब ने
पेट्रोल की बारिश कर दी थी
तब देखा था क्या तुमने
जो अब कहते हो ‘देखेंगे’

तुम देखोगे?
हम दिखाएँगे
चाँद बाग में हिन्दू की
बच्ची ट्यूशन से लौट रही
छीने तुमने उनके कपड़े
नग्नावस्था में भेज दिया
वो बच्ची भगिनी थी मेरी
वो बहन हमारी भी तो है
वो मुझको राखी बाँधती थी
कैसे उसको मैं देखूँगा
जब पूछेगी वो मुझसे कि
‘भैया, ये मेरे साथ ही क्यों
क्या मेरा भी है इसमें दोष?’
क्या बोलूँगा उन बहनों से?
मैं चूक गया, मैं चूक गया…
उन बहनों की सौगंध मुझे
न भूले हैं, न भूलेंगे
ये याद रहे जब तक हम हैं
न भूले हैं, न भूलेंगे
तुम कहते हो- ‘हम देखेंगे…’

तुम देखोगे?
हम दिखाएँगे
राजस्थान का लाल रतन
जिसको तुमने गोली मारी
उसने तो माँ को बोला था
होली पर घर को आएगा
बिटिया है उसकी सिद्धि, कनक
और राम जो उनका बेटा है
तुम नजरें मिला क्या पाओगे
क्या तुम उनको ये बताओगे
कि शाहरूख ने सड़कों पर
जब धड़-धड़ गोली जलाई थी
कोई शाहरूख ही तो वो होगा
जिसकी गोली से रतनलाल
वीरगति को प्राप्त हुए
पत्नी पूनम को छोड़ गए
और बसते हैं बस यादों में
क्या उनको भी देखोगे?
ये याद रहे जब तक हम हैं
न भूले हैं, न भूलेंगे
तुम कहते हो- ‘हम देखेंगे…’

तुम देखोगे?
हम दिखाएँगे
लोकेन्दर की एक बिटिया थी
जो उन्हें सलाम भी करती थी
भाई जान भी जिसको कहती थी
उन भाईजानों ने ही जब
शिवानी के शादी मंडप पर
पेट्रोल बम फेंका होगा
पत्थर जब बरसाए होंगे
जब टाइल भी फेंकी होगी
क्या उसने तब सोचा होगा
कि ये मुझे भाई कहती थी?
रिश्तों पर थूका है तुमने
उन पर भी आग लगाई है
उसकी मेंहदी के हाथों पर
तुमने कालिख पुतवाई है
ये याद रहे जब तक हम हैं
न भूले हैं, न भूलेंगे
तुम कहते हो- ‘हम देखेंगे…’

तुम देखोगे?
हम दिखाएँगे
राहुल ठाकुर के पेट में जब
या राहुल सोलंकी की गर्दन में
ताहिर, फैसल के गुंडों ने
छत से गोली मारी होगी
क्या गंगा और जमुनी तहजीब को
ये बातें प्यारी होंगी?
इन तहजीबों के नाम पे अब
इन सेकुलर-सेकुलर बातों पर
अब मुँह में उल्टी आती है
जमुना को लील गए हो तुम
तुमने उसको बर्बाद किया
ये झाग जो उजले दिखते हैं
इससे भी छुपा न पाओगे
तहजीबों का जो हाल किया
तुम उसको बचा न पाओगे
ये नग्न सत्य सब सामने है
गंगा-जमुनी-सेकुलर-सेकुलर
ये नौटंकी अब बंद करो
और आँखें खोल के तुम देखो
तुमने ही कहा- ‘हम देखेंगे…’
लो देखो अब, लो देखो तुम

तुम देखोगे?
हम दिखाएँगे
तुम सब बुत उठवा क्या पाओगे
हम प्राण प्रतिष्ठा करते हैं
मिट्टी में प्राण भी भरते हैं
हर नवरात्रि पर दुर्गा को
अस्त्रों-शस्त्रों से भरते हैं
तुम कितने मंदिर तोड़ोगे?
हम रोज ही उनको बनाते हैं
आशीष शारदा का ले कर
लक्ष्मी को घर में पाते हैं
गणपति विशाल को देखो
शिव के विकराल को देखो
तुम देखो विष्णु अनंत रूप
बजरंगी के जीवंत रूप
तुम कितने बुत उठवाओगे
तुम कितने मंदिर ढाहोगे?
क्या-क्या मैं दिखाऊँ अब तुमको
तुम देख कहाँ कब पाओगे!

आजाद जो लब तुम्हारे हैं
कुछ बोल वो क्यों नहीं पा रहे हैं?
इन लाशों का दे दो हिसाब
बच्चों को दे दो तुम जवाब
रिक्शा वाले इमरान का गम
पंचर वाले जुबैर का गम
हमको भी है, तुमको भी है
लेकिन इन हिन्दू लाशों को
तुम देख नहीं क्यों पाते हो?
गोकुलपुरी की नाली तक
टहल के क्यों नहीं आते हो?

बिकती जमीर की किश्तों में
आँख गँवा दी क्या पहले?
फिर भी कहते हो ‘देखेंगे’
कब देखोगे… और वो कैसे?
ये हरा-हरा सा एक फिल्टर
जो तुमने चढ़ा कर रक्खा है
उससे भगवा छँट जाता है
हिन्दू गायब हो जाता है
दिखता है बस इमरान-जुबैर
अंकित-दीपक छुप जाता है
ओ वामपंथ के रखवाले
ओ लम्पट लिबरल तुम साले!
तुम क्या अब घंटा देखोगे
जब दिखा नहीं तुमको गुलेल
जब दिखा नहीं बोतल का तेल
जब दिखा नहीं हाथों में बम
जब दिखा नहीं हिन्दू का गम
तुम क्या अब घंटा देखोगे

तुम देखोगे?
हम दिखाएँगे
सब याद रखा जाएगा ना?
तो हम अब कौन-सा भूल रहे
तुम इन नारों को रटते रहो
हम लाशों को हैं याद रखे
अंकित, दीपक, राहुल, रतन
वीरभान, दिलबर नेगी
शिव विहार का मंदिर भी
मुंशी जी और पुजारी जी
जिन्हें नालों में तुमने फेंका
जिन मंदिर को तुमने तोड़ा
हम भी तो याद करेंगे अब
लाशों को भी, मंदिर को भी
लोगों को भी, इस धरम को भी
ये धरती सनातन है मेरी
ये धर्म सनातन है मेरा
हम भी तो याद रखेंगे ही
तुम्हें जो रखना है याद रखो

सब याद रखा जाएगा अब!
ये याद रहे जब तक हम हैं
न भूले हैं, न भूलेंगे
तुम कहते हो- ‘हम देखेंगे…’

DU में क्लास करने वाले छात्रों को बनाया जा रहा निशाना, विरोध करने पर दी जा रही धमकी और प्रताड़ना

दिल्ली हिंसा के बाद अब तरह-तरह से अफवाहें भी फैलाईं जा रही है। दिल्ली पुलिस ऐसे लोगों पर नजर बनाए हुए जो सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें फैला रहे हैं। इसी बीच दिल्ली यूनिवर्सिटी में कुछ छात्र जबरन कक्षाओं को बंद करा कर पठन-पाठन का कार्य बाधित करने में लगे हुए हैं। एमए अंग्रेजी विभाग में तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, ताकि छात्रों को क्लास से दूर रखा जाए। इस विभाग के छात्र व्हाट्सप्प ग्रुप से तरह-तरह की अफवाहें फैला रहे हैं और क्लास का बहिष्कार करने के लिए कह रहे हैं।

क्लास का बहिष्कार करने के लिए पोस्टर तक तैयार किया गया और राजनीति से दूर रह कर पढ़ाई करने वाले छात्रों से कहा गया कि वो भी उनका साथ दें। जिन छात्रों ने इसका विरोध किया, उन्हें असंवेदनशील बताया गया, उनका मजाक बनाया गया। इसके साथ ही अब वो लोग क्लास करने वालों छात्र-छात्राओं को निशाना भी बना रहे हैं।

इस बारे में अपनी बात करते हुए डीयू की एक छात्रा ने ऑपइंडिया के साथ अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय एक ईको चैंबर बन गया है। जहाँ सिर्फ वामपंथी विचारधारा के अनुरूप ही बात कर सकते हैं। आप सभी को वहाँ वामपंथी विचारधारा का प्रचार करना होगा।

वो आगे कहती हैं, “यहाँ का नैरेटिव है कि वामपंथी जिस विचारधारा को मानते हैं, उसी के बारे में बात किया जाएगा और यदि कोई छात्र इस विचारधारा से इतर अपनी राय के साथ खड़े होने का साहस करते हैं, यदि आप सच बोलने का साहस करते हैं तो आपको टारगेट किया जाएगा। आपको सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाएगा। वे आपके ऊपर कई तरह के आरोप लगाएँगे और आपको डराने के लिए झूठ को बढ़ा-चढ़ाकर बताने लगेंगे। इसके बाद पूरा वामपंथी गिरोह आपके बारे में झूठी बातें फैलाना शुरू कर देते हैं, क्योंकि वो जानते हैं कि जब किसी के बारे में इस तरह की झूठी बातें फैलाई जाती है तो यह मानसिक रूप से कितना दर्दनाक होता है।”

पीड़ित छात्रा के अनुसार विश्वविद्यालय एक ऐसा स्थान बन गया है जहाँ सच, घुटन और जकड़न महसूस करता है। हालिया दंगे की वास्तविकता वह नहीं है जो मेनस्ट्रीम मीडिया हाउस दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। जैसा कि हम सभी ने देखा कि किस तरह से CAA के पास होने और लागू बनने के साथ ही इसके खिलाफ एक्टर्स, मीडिया और नफरत फैलाने वालों ने अफवाह फैलाने शुरू कर दिए। क्योंकि यह कानून उन महिलाओं को आश्रय प्रदान करता है जो अपने जीवन और सम्मान के लिए एक सुरक्षित जगह पाने के लिए आशांवित हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन देशों में इन महिलाओं का बलात्कार किया जाता था, उनके शरीर का इस्तेमाल जिहाद के लिए किया जाता था। अभी भी पड़ोसी इस्लामिक देशों में गैर-मुस्लिम महिलाओं के साथ इस तरह की घटनाएँ हो रही हैं। उनके साथ ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि वे मुस्लिम नहीं हैं।

वहाँ पर महिलाओं का अपहरण, बलात्कार और जबरदस्ती धर्मपरिवर्तन कराया जाता है और उनसे काफी बड़ी उम्र के पुरुषों से शादी कर दी जाती है। इन अत्याचारों से बचाने के लिए वहाँ के गैर मुस्लिम परिवार जो यहाँ पहले उनके लिए ये कानून लाया गया है।

वो कहती हैं, “अभी भी हमारे तथाकथित बुद्धिजीवी इन महिलाओं, इन परिवारों की दुर्दशा को अनदेखा करके मानवता, धर्मनिरपेक्षता, संविधान और न जाने किस-किस नाम पर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं। उनके खिलाफ हो रहे अत्याचार से उन्हें कोई मतलब नहीं है। इसका उनके जीवन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। ये लोग सीएए के खिलाफ विरोध कर रहे हैं, यह सब करके वो विश्वविद्यालय में अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे व्यक्तिगत रूप से बार-बार इस तरह के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए दबाव डाला जा रहा था। मेरे विभाग ने सभी छात्रों से बात किए बिना ही इस तरह के विरोध में एक बयान जारी कर दिया।”

उन्होंने कहा कि यहाँ जो कुछ कहा जा रहा है वह सर्वसम्मत नहीं है लेकिन जो लेफ्ट कह रहे  हैं, वह सही है। यदि आप उनके खिलाफ जाते हैं, तो वो अलग-थलग कर देंगे और धमकियाँ देंगे। वे आपके अस्तित्व पर सवाल उठाएँगे। अब, दिल्ली के दंगों में, जहाँ हमने देखा है कि हिन्दुओं का कितनी बेरहमी से नरसंहार किया जा रहा है और हम जानते हैं कि यह एक सुनियोजित हमला था क्योंकि हम देख रहे हैं कि कैसे इन आंदोलनों में लोगों को मुस्लिम के रूप में एकजुट होने और सड़कों पर आने के लिए कहा गया था। फिर भी वामपंथी इन दंगों को मुस्लिम विरोधी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए बीजेपी और आरएसएस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यह एक सच्चाई है लेकिन वे किसी को सच बोलने नहीं देते।

हिंदू कॉलेज के अंग्रेजी विभाग ने एक बयान जारी किया जिसमें एकतरफा प्रोपेगेंडा को हवा देते हुए दंगों को समुदाय विशेष पर प्रायोजित हमला बताया गया है। कुछ छात्रों ने हिंदू कॉलेज के नाम पर इसी मुद्दे पर विरोध किया। हमारे आस-पास जो हो रहा है, उसे देखना मुश्किल और दिल दहला देने वाला हो गया है। सत्य को दबाया जा रहा है। बोलने की हिम्मत करने वालों को निशाना बनाया जाता है और परेशान किया जाता है।

वहीं एक अन्य पीड़ित छात्रा ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि यहाँ पर वामपंथी विचारधारा का विरोध करने वाले छात्रों को धमकाया जा रहा है और उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैं खुद सिर्फ इसलिए इनकी गुंडई का शिकार हुई क्योंकि मेरे विचार उनके विचार से मेल नहीं खाते थे। मेरे कुछ सहपाठियों ने कक्षाओं का बहिष्कार करने का फैसला किया और 27 फरवरी, 2020 को विरोध प्रदर्शन का फैसला किया। मैंने सद्भाव लाने के लिए कक्षाओं के बहिष्कार के विचार से असहमति जताई और आवाज उठाई, तो कुछ छात्रों ने मुझे केवल एक अलग राय रखने के लिए उकसाना शुरू कर दिया।”

वो आगे कहती हैं, “मुझे बिना किसी मतलब के इस तरह की आलोचना का सामना करने से डर लगने लगा वो भी अपने सहपाठियों द्वारा, जहाँ पर कभी हमलोग कक्षा की अपडेट के बारे में बात किया करते थे। मुझे परेशान किया गया। मुझे मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया गया। मैं अच्छी तरह से सो नहीं सकी। मैं बहुत अकेला महसूस करती थी और कोई भी मेरे लिए बोलने वाला नहीं था। मैं काफी घबरा गई, काफी विचलित हो गई। मुझे रोने जैसा महसूस हुआ। सड़कों पर चलते हुए मुझे डर लगता था। मुझे खुद को शांत करने में कुछ दिन लगे।”

अपना दर्दनाक अनुभव साझा करते हुए वो कहती हैं, “दोस्तों और परिवार के साथ बात करने से थोड़ी मदद मिली क्योंकि यह एक बहुत ही परेशान करने वाला अनुभव था। जब मैंने क्लास का अपडेट भेजा, तब भी मुझे निशाना बनाया गया और धमकाया गया। मुझे ऐसा लगा कि बोलने की आजादी नहीं है। कई अन्य लोग हैं जो महसूस करते हैं कि ये विचारधाराएँ उन पर थोपी गई हैं और उनके लिए बोलने के लिए कोई जगह नहीं बची है। वे सामाजिक और बौद्धिक रूप से बहिष्कृत होने का और हमला होने का डर महसूस करते हैं। अब भी जब मैं यह बयान दे रही हूँ तो मैं बेचैन महसूस कर रही हूँ। आज यह मैं थी, कल यह आप या कोई भी हो सकता है।”

उनसे तेल, दवाइयाँ मत खरीदो, उनकी गाड़ी पर मत चढ़ो: खुलेआम हिन्दुओं का आर्थिक बहिष्कार, Video Viral

वामपंथियों और इस्लामी कट्टरवादी नेताओं ने समुदाय विशेष के पक्ष में अफवाहें फैलाईं और उन्हें भड़काने के लिए ऐसे-ऐसे तिकड़म आजमाए कि दिल्ली में हिन्दू-विरोधी दंगे हुए, जिसमें कई लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी। मौलवियों व मदरसा शिक्षकों से लेकर लोकल इस्लामी नेताओं तक, दंगों को भड़काने में सबका हाथ रहा। इसी क्रम में हम एक वीडियो लेकर आए हैं, जो कब का है या कहाँ का है, इस सम्बन्ध में कुछ भी पता नहीं चल पाया है। लेकिन, इस वीडियो से समुदाय विशेष के कुछ लोगों की सोच सामने आती है, जो देश के लिए काफ़ी खतरनाक है। इस वीडियो में इस्लामी नेता कहता दिख रहा है कि उन लोगों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

इस्लामी नेता ने अपने समाज के लोगों को चेतावनी दी कि किसी भी हिन्दू के पेट्रोल पंप पर अपनी गाड़ियों में तेल भराने न जाएँ और मुस्लिम के पट्रोल पम्पों पर ही तेल लें। उसने कहा कि अगर तुम ‘रसूल के गुलाम’ हो तो तुम्हें ‘ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुन रसूलुल्लाह’ की कसम है कि तुम हिन्दुओं के पट्रोल पंप पर नहीं जाओगे। साथ ही समुदाय विशेष को सलाह दी कि वो न तो हिन्दुओं की गाड़ियों पर चढ़ें और न ही उनकी दुकानों से दवाइयाँ खरीदने जाएँ। उसने हिन्दुओं का आर्थिक बहिष्कार करने की सलाह दी। नीचे संलग्न किए गए विडियो में आप उस इस्लामी नेता का संबोधन देख सकते हैं:

हिन्दुओं का सम्पूर्ण आर्थिक बहिष्कार की योजना बनाते समुदाय विशेष के लोग

उसने समुदाय विशेष को ‘अल्लाह, गुलाम-ए-रसूल के बच्चों और कलमे’ का वास्ता देते हुए कहा कि वो हिन्दुओं से कुछ न ख़रीदें। उसने कहा कि पास में ही मुस्लिमों के भी पेट्रोल पंप हैं, वहाँ से तेल ले सकते हैं। इस वीडियो को देख कर आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि किस तरह स्थानीय स्तर पर गली-मुहल्लों में समुदाय विशेष के लोग अपनी कौम के अन्य लोगों को हिन्दुओं के ख़िलाफ़ घृणा का सबक सिखा रहे हैं, जो बाद में हिन्दू-विरोधी दंगों का रूप ले लेती है।

सोशल मीडिया पर मौलवियों और मौलानाओं के कई भड़काऊ भाषण वायरल होते रहते हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंदीय गृह मंत्री अमित शाह को मार डालने की बातें की जाती हैं। उन वीडियो में हिन्दुओं के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है।

मुस्लिमों को मारोगे? गुरुग्राम वालो, तुम्हारी बहन को $#@ दूँगा: गालीबाज युवकों में से 2 गिरफ़्तार

गुरुग्राम पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने हिन्दुओं को गन्दी-गन्दी गलियाँ बकी थीं और महिलाओं के लिए भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। लेखिका अद्वैता काला ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का ध्यान इस तरफ़ आकृष्ट कराया था। अद्वैता ने मुख्यमंत्री खट्टर से कहा था कि वो गुरुग्राम पुलिस को इन गालीबाज युवकों को गिरफ़्तार करने का आदेश दें क्योंकि ये लोग समाज में घृणा फैलाने का काम कर रहे हैं, ताकि हिंसा भड़के। उन्होंने कहा कि अब तक गुरुग्राम में हिन्दू-मुस्लिम हिंसा की कोई ख़बर नहीं आई है, जो राहत की बात है।

मुख्यमंत्री ने तुरंत अद्वैता को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस तरफ उनका ध्यान दिला कर एक जिम्मेदार नागरिक के कर्तव्य का वहन किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही सीएम खट्टर ने गुरुग्राम पुलिस को भी निर्देश दिया कि वो तत्परतापूर्वक कार्रवाई करे। इसके बाद गुरुग्राम साइबर पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज करते हुए मामले की जाँच की और उनमें से दो आरोपितों को जयपुर से धर-दबोचा गया। सारे आरोपितों की पहचान कर ली गई है।

दरअसल, इन मुस्लिम युवकों ने वीडियो बना कर कहा कि वो गुरुग्राम वालों की बहन को *$# देंगे। उसमें से एक लड़के ने कहा था- “तुम मुस्लिमों पर हाथ उठाओगे? तुम्हारी बहन को %$# दूँगा।” इसके बाद एक अन्य युवक ने गुरुग्राम वालों को ‘दलाल’ कह कर संबोधित किया था। साथ ही एक मुस्लिम युवक ने अपना फोन नंबर शेयर किया था और कहा था कि जिसको जो करना है, कर ले।

इस विडियो में कुल 7 युवक दिखाई दे रहे थे, जिनमें से 2 को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी मिली है। उन मुस्लिम युवकों के मुखिया को बाकी लड़के ‘एजाज भाई’ कह कर संबोधित कर रहे थे और वीडियो बनाने के बाद उन्होंने ‘एक नम्बर, एक नम्बर’ कह कर सराहना भी की।

‘₹डी की बेटी को घर से उठा लेंगे’, ‘कभी हमारा ले लो’: तनवीर हुसैन, अरशद खान

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