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शिशु के लिंग के हिसाब से बदलता है माँ के दूध का गुण: सद्गुरु का मजाक उड़ाने वालों की रिसर्च ने खोली पोल

सोशल मीडिया पर हिन्दू संतों का मजाक बनाने का एक चलन सा चल पड़ा है। जब किसी प्रतिष्ठित हिंदुत्ववादी या संत के मुँह से कोई बात निकलती है तो वामपंथी मीडिया उसे मजाक की विषय-वस्तु बना देता है। लाइक और रिट्वीटस’ के लिए इतना नीचे गिर जाता है कि उसके पीछे का कारण जानने की चेष्टा तक नहीं करता। कुछ ऐसा ही सद्गुरु वाले मामले में हुआ। सद्गुरु ने अपने एक सम्बोधन में बताया था कि किसी महिला को अगर बच्चा (मेल चाइल्ड) होता है तो महिला के शरीर में बनने वाले दूध की गुणवत्ता अलग होती है और बच्ची (फीमेल चाइल्ड) के केस में अलग।

‘ऑल्टन्यूज़’ की संस्थापक ने जब ये वीडियो देखा तो उन्होंने इस संबंध में कोई रिसर्च करने की जरूरत नहीं समझी। पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर ट्विटर पर इसका मजाक उड़ा दिया। क्यों? क्योंकि एक संत ने ऎसी बात कही थी। ऐसा करने वाले प्रतीक सिन्हा या ज़ुबैर नहीं, ‘ऑल्टन्यूज़’ की तीसरी संस्थापक सैम जावेद थी। उसने सद्गुरु जग्गी वासुदेव का मजाक उड़ाते हुए लिखा कि इस तरह की बातों को सुन कर उसकी बौद्धिकता को चोट पहुँचती है। साथ ही उसने हँसने वाला इमोजी भी ट्वीट किया।

दरअसल, सैम जावेद का विज्ञान से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है और न ही वो वैज्ञानिक रिसर्च व अध्ययनों की ख़बरों की ओर देखने की जहमत उठाती है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने जो भी कहा, वही बात कई वैज्ञानिक रिसर्चों में भी सामने आ चुकी है। सैम जावेद की तरह ही ‘ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस’ ने भी सद्गुरु जग्गी वासुदेव का मजाक बनाया। इसके बाद कई अन्य लोगों ने भी उनके बयान की हँसी उड़ाई। इसमें अधिकतर वामपंथी और उनके समर्थक शामिल थे।

दरअसल, साइंटिफिक रिसर्चों से पता चला है कि माँ का ब्रेस्ट मिल्क बच्चे की ज़रूरत के हिसाब से अपनी प्रवृत्ति में बदलाव करने में सक्षम होता है। न सिर्फ़ वो अपनी मात्रा बदल सकता है, बल्कि रंग और फ्लेवर भी बदल सकता है। ये बच्चे पर निर्भर करता है। बीमारी, दूध पिलाने का समय और अन्य कारणों से ये बदलाव हो सकते हैं। केन्या में हुए एक अध्ययन में ये भी स्पष्ट हुआ कि बच्चे और बच्ची के जन्म के हिसाब से माँ के दूध की प्रकृति अलग-अलग हो सकती है।

केन्या में ‘मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी एंड अदर इंस्टीट्यूशंस’ ने 72 महिलाओं पर ये रिसर्च किया। पाया गया कि जिन महिलाओं ने लड़के को जन्म दिया था, उनके दूध में फैट की मात्रा 2.8% थी, जबकि बच्चियों को जन्म देने वाले माँओं के दूध में फैट की मात्रा कम, यानी मात्र 1.4% थी। एक अन्य अध्ययन के मुताबिक, माँ के दूध में शुगर, प्रोटीन और मिनरल्स- इन सभी की मात्रा अलग-अलग हो सकती है, जो बच्चे के लिंग पर निर्भर करता है।हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर कैडटी हेण्डी द्वारा बंदरों पर किए गए रिसर्च में भी ये बात पता चली थी।

सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन ने प्रोपेगेंडा वेबसाइट के फर्जी आरोपों का दिया करारा जवाब

सद्गुरु कनकधारा स्तोत्रम की बात कर रहे थे, ‘लिबरल्स’ ढूँढ रहे थे यौन सुख

तुम कंट्रोवर्सी चाहते हो, देश का सवाल है, ऐसा मत करो: सद्गुरु ने राहुल कँवल की ली क्लास

शिवसेना के प्रभुत्व वाली BMC ने नहीं किया सहयोग, फिर भी RSS कार्यकर्ताओं ने बदल डाली बीच की तस्वीर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कॉलेज स्टूडेंट आर्गेनाईजेशन ‘महाविद्यालयीन विद्यार्थी’ ने मुंबई के प्रभादेवी नगर स्थित समुद्री बीच पर साफ़-सफाई का कार्य किया। रविवार (फरवरी 16, 2020) को दादर चौपाटी और प्रभादेवी नगर, दोनों क्षेत्र में स्थित बीचों पर साफ़-सफाई का कार्य किया गया। दोनों बीच पर संघ कार्यकर्ताओं ने सुबह 8 बजे से लेकर 10 बजे तक स्वच्छता कार्य किया। इस कार्य में कुल 50 आरएसएस कार्यकर्ता शामिल थे। इनमें बजरंग दल और स्थानीय कॉलेजों के एनएसएस यूनिट के कुछ छात्र भी शामिल थे, जिन्होंने इस स्वच्छता अभियान में अपना योगदान दिया।

हालाँकि, इसके लिए शिवसेना के प्रभुत्व वाली बृहन्मुम्बई महानगरपालिका को सूचना दे दी गई थी लेकिन वो लोग साजोसामान के साथ काफ़ी देर से पहुँचे। उन्हें एक सप्ताह पूर्व ही इस कार्यक्रम के सम्बन्ध में सूचित कर दिया गया था। बीएमसी ने छात्रों को सिर्फ़ ग्लव्स ही उपलब्ध कराए, जिससे उन्हें साफ़-सफाई के काम में देरी हुई। बीच पर चारों तरफ कचरा पड़ा हुआ था और ऐसा लग रहा था जैसे यहाँ कई दिनों से साफ़-सफाई का कार्य हुआ ही न हो।

प्रभादेवी बीच, संघ
बीच की सफाई के दौरान संघ कार्यकर्ता
बीच की सफाई करते संघ कार्यकर्ता

बीएमसी से बास्केट्स मुहैया कराने को कहा गया था, लेकिन उनके ढुलमुल रवैए के कारण छात्रों को बास्केट नहीं मिल सका। इससे उन्हें ख़ासी परेशानी हुई। छोटे-छोटे प्लास्टिक व अन्य कचरों को झुक कर उठाने और फिर उन्हें थैलों में डालने के कारण इस काम में और भी देरी हुई। बीच पर कई काँच के टुकड़े पड़े हुए थे, जिनसे छात्रों के घायल होने का ख़तरा था। बीच से 100 मीटर की दूरी पर ही सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध है, फिर भी कई लोगों ने वहीं पर मल-मूत्र त्याग रखे थे। उनके संपर्क में जाने पर साफ़-सफाई का कार्य कर रहे छात्रों को संक्रमण होने का भी ख़तरा था।

दरअसल, कुछ दिनों पहले संघ का एक कार्यकर्ता बीच पर घूमने आया था। उसने वहाँ काफी कचरा देखा। इसके बाद संघ के छात्र कार्यकर्ताओं की बैठक में इस बात को उठाया गया। इसके बाद बीच पर स्वच्छता अभियान चलाने का फैसला किया गया। समुद्र भी उफान के कारण वहाँ कचरे छोड़ जाता है, इसलिए नियमित साफ़-सफाई आवश्यक है। कार्य संपन्न होने के बाद संघ कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रगान गाया।

1927 में गंगा ने डाली नींव, 1984 में नाम ले गई इंदिरा: ऐसे दूसरों के काम का क्रेडिट छीनती है कॉन्ग्रेस

हाल ही में भारत सरकार ने ‘प्रवासी भारतीय केंद्र’ का नाम बदल कर ‘सुषमा स्वराज भवन’ कर दिया और ‘फॉरेन सर्विस इंस्टीट्यूट’ का नाम बदल कर ‘सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस’ रख दिया गया। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्री के रूप में शानदार काम किया था। उनके इसी योगदान को याद करते हुए भारत सरकार ने ये फ़ैसला लिया। इसी तरह रक्षा मंत्रालय ने ‘इंस्टीट्यूट फॉर डिफेन्स स्टडीज एन्ड एनालिसिस’ का नाम बदल कर ‘मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस एंड एनालिसिस’ रखा गया। दिवंगत रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल के दौरान सर्जिकल स्ट्राइक और ओआरओपी सहित कई ऐतिहासिक फ़ैसले लिए गए थे।

सार ये कि किसी के योगदान को याद करने के लिए उनके नाम पर भवन, संसथान, सड़क इत्यादि का नाम रखना कोई नया चलन नहीं है। ऐसा होता रहा है। लेकिन, दिक्कत तब आती है जब पूर्व में किसी के द्वारा किए गए कार्यों को कमतर दिखाने के लिए किसी बड़े नेता के नाम पर इनका नाम रखा जाता है। जैसे, ‘राजीव गाँधी खेल रत्न अवॉर्ड’ भारत के पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर है, किसी खिलाड़ी के नाम पर नहीं। भारत की गली-गली में इंदिरा, नेहरू और राजीव के नाम पर सड़क, भवन, प्रोजेक्ट्स और चापाकल तक मिलेंगे। इन तीनों के नाम पर कई सरकारी योजनाएँ भी चली।

यहाँ हम ऐसा ही एक उदाहरण राजस्थान से लेकर आए हैं। वहाँ राजा गंगा सिंह के योगदान को लोग धीरे-धीरे लोग भुला रहे हैं, क्योंकि उनके द्वारा किए गए कार्यों का क्रेडिट किसी और ने लूट लिया। ‘राजस्थान कैनाल’ का काम चल रहा था, तभी 1983 में इंदिरा गाँधी यहाँ दौरे पर आईं और 1984 में नहर का नाम उनको समर्पित कर दिया गया। जबकि, इस नहर की परिकल्पना राजा गंगा सिंह ने की थी। अच्छा होता कि स्थानीय हस्ती गंगा सिंह के नाम पर इस नहर का नामकरण किया जाता ताकि लोग उन्हें याद रखें और उनके योगदान को सराहें, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

राजस्थान में उस नहर का नाम तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के नाम पर रख दिया गया। जबकि उसे राजस्थान के लोकप्रिय राजा रहे गंगा सिंह ने बनवाना शुरू किया था। बीकानेर के रेगिस्तानी इलाक़ों से लोगों को गुजरने में असुविधा हो रही थी, इसीलिए राजा गंगा सिंह ने 1927 में वहाँ नहर का निर्माण करवाया था। उसका नाम गंगनहर रखा गया था। इसके बाद बीकानेर-जैसलमेर के रास्ते पर एक और नहर के निर्माण की योजना तैयार की गई, जिस पर धन के आभाव में उस समय ग्रहण लग गया था। राजा ने तो उसका नक्शा तक बनवा दिया था।

बाद में नहर बना भी और क्रेडिट कॉन्ग्रेस ने लूटा, नाम इंदिरा गाँधी का हुआ। आज भारत के सबसे लंबे कैनाल का नाम उसी व्यक्ति के नाम पर नहीं है, जिसने इसका सपना देखा, जिसने इस पर काम शुरू करवाया था। पंजाब से लेकर बीकानेर तक जिसके नाम की कभी तूती बोलती थी और सम्मान में लोगों के सर अपने आप झुक जाते थे, उस हस्ती को उसके काम के क्रेडिट से भी वंचित कर दिया गया। बीकानेर रियासत की राजकुमारी राज्यश्री भी कहती हैं कि नेताओं ने राजा गंगासिंह द्वारा किए गए कार्यों को भुला दिया।

जामिया के PhD दंगाई के हाथ में वॉलेट नहीं पत्थर ही था: AltNews के झूठ की पोल खोलता Video

हाल में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की लाइब्रेरी के कई विडियो सामने आए हैं। ये विडियो 15 दिसंबर 2019 को हुई हिंसा के दौरान के बताए जा रहे हैं। एक विडियो के आधार पर दिल्ली पुलिस पर निर्दोष छात्रों को पीटने का आरोप लगाया गया था। लेकिन बाद में आए विडियोज से पता चल गया कि पुलिस ने उन दंगाइयों को चिह्नित कर कार्रवाई की थी जो भागते हुए लाइब्रेरी में घुस आए थे और पढ़ने का ड्रामा कर रहे थे। एक विडियो में एक लंबे बाल वाले छात्र के हाथ में पत्थर भी दिखा था। बाद में इसकी पहचान जामिया के पीएचडी छात्र अशरफ भट के तौर पर हुई। विडियो वायरल होने के बाद उसने सोशल मीडिया पर प्रोफाइल डिलीट/डीएक्टिवेट कर दिए। सूत्रों के अनुसार अपनी बाल और दाढ़ी भी कटवा ली।

इसके बाद प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘ऑल्टन्यूज़’ ने दावा किया कि विडियो में दिख रहे छात्र के हाथ में पत्थर नहीं, वॉलेट है। हालाँकि, अगर ऐसा होता तो अशरफ भागता नहीं और अपनी पहचान नहीं छिपाता। फिर भी, इस नए विडियो को देखिए, जिससे स्पष्ट पता चल रहा है कि उसके हाथ में पत्थर ही था। किस एंगल से लग रहा है कि ये पर्स है? झोंटा वाले दंगाई छात्र ने जो हाथ में ले रखा है, साफ़ दिख रहा है वो पत्थर है। अन्य छात्रों के हाथ में भी पत्थर दिख रहे हैं।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया लाइब्रेरी में पत्थर लेकर घुस रहे दंगाई छात्रों को बचाने के लिए ‘ऑल्टन्यूज़’ ने एक तरह से जंग का ऐलान कर दिया है। फैक्ट-चेकिंग का दावा कर के लोगों को बरगलाने में सतत व्यस्त रहने वाले प्रोपेगेंडा पोर्टल ने पत्थरबाजों का बचाव करने की कसम खा रखी है। तभी तो झूठा साबित होने के बावजूद उसने अभी तक अपनी वो ख़बर नहीं हटाई है, जिसमें दावा किया गया था कि लाइब्रेरी में दंगाई पत्थर नहीं बल्कि पर्स लेकर घुस रहे थे। पत्थर को पर्स बता कर उपद्रवियों, दंगाइयों और पत्थरबाजों को वाइटवॉश करने में लगा ‘ऑल्टन्यूज़’ दिल्ली पुलिस को बदनाम करने में मशगूल है।

हालाँकि, प्रोपेगेंडा पोर्टल के दोनों संस्थापक प्रतीक सिन्हा और ज़ुबैर यूँ तो सोशल मीडिया पर लड़ाई-झगड़े में लगे रहते हैं, लेकिन पोल खुलने के बाद से उन्होंने इस सम्बन्ध में लोगों को जवाब देना बंद कर दिया है। दोनों संस्थापक दुनिया-जहान की बातें कर रहे हैं लेकिन अब तक वो अपने लेख का बचाव करने में विफल रहे हैं। ‘ऑल्टन्यूज़’ की निर्लज्जता का आलम देखिए कि पत्थर को पर्स बताने वाले लेख को उसने अभी तक वेबसाइट की मुख्य खबर के रूप में लगा रखा है (ख़बर लिखे जाने तक)।

ऊपर संलग्न किए गए विडियो को फिर से देखिए। कल को ‘ऑल्टन्यूज़’ कह सकता है कि वो कोई इच्छाधारी वस्तु है, जो समय-समय पर रूप बदल लेता है। या फिर ये तक कहा जा सकता है कि वो संघी पर्स था, जो कैमरे को देखते ही पत्थर बन गया। वो उतना ही ‘कैमरा कॉन्शियस’ है, जितने कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। वैसे, आजकल मीडिया जिस स्तर पर खेल रहा है, ये सब भी होने लगे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने ‘ऑल्टन्यूज़’ की इस कला के कई और नमूने पेश किए, जिसमें वो दंगाइयों को बचाने के लिए सारी हदें पार कर देता है। व्यंगात्मक अंदाज़ में मज़े लेते हुए लोगों ने कहा कि ‘ऑल्टन्यूज़’ तो आतंकी ओसामा बिन लादेन को भी साईंभक्त साबित कर देता और कहता कि एक उँगली दिखा कर वो कह रहा है- ‘सबका मालिक एक।‘ कुछ ने फोटोशॉप के माध्यम से पत्थरबाजों को क्रिकेट के मैदान में फिट कर दिया और कहा कि ‘ऑल्टन्यूज़’ के मुताबिक पत्थरबाज दंगाई नहीं, बल्कि गेंदबाज हैं जो बॉलिंग कर रहे हैं।

दंगाइयों को बचाने के लिए जद्दोजहद करता प्रोपेगंडा पोर्टल ‘ऑल्टन्यूज़’

निष्कर्ष ये है कि अगर आतंकियों को बचाने के लिए ऐसे प्रोपेगंडा पोर्टल्स को ये भी कहना पड़े कि सूर्य पश्चिम से उगता है, तो वो कहेंगे।

जामिया विडियो: वामपंथियों की ऐसे लीजिए कि वो ‘दुखवा मैं का से कहूँ’ मोड में आ जाएँ

होली खेलता कसाब, साईंभक्त लादेन और PUBG खेलते आतंकी: लोगों ने ‘फॉल्ट न्यूज़’ के यूँ लिए मजे

संख्या नहीं गिनाएँगे, सैकड़ों प्रदर्शनकारी बताएँगे: AltNews ने किया शाहीन बाग़ के सन्नाटे का फर्जी फैक्ट चेक

4 मर्दों से फँसी है बीवी: न्यूड तस्वीर से शौहर को हुआ शक, सुपरग्‍लू से सील कर दिया प्राइवेट पार्ट

अफ्रीकी देश केन्‍या से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के एक शख्‍स ने अवैध संबंधों के शक में अपनी बीवी के प्राइवेट पार्ट को सील कर दिया। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक 36 वर्षीय डेनिस मुमो काम के सिलसिले में ज्‍यादातर समय घर से बाहर रहता था। उसे शक था कि उसकी बीवी का 4 मर्दों के साथ अफेयर चल रहा है। उसने बीवी के मोबाइल में कुछ आपत्तिजनक मैसेज और तस्‍वीरें भी देखी थी।

इस मामले का पता तब चला जब महिला वाशरूम जाने के लिए छटपटा रही थी। पड़ोसियों ने उसे बचाया। बताया जा रहा है कि अवैध संबंध के शक में मुमो ने बीवी को बाँधकर उसके प्राइवेट पार्ट को सुपरग्‍लू से सील कर दिया था। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है और महिला को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। मेडिकल रिपोर्ट में महिला के प्राइवेट पार्टी को काफी नुकसान पहुँचने की बात कही गई है।

जाम्बियन ऑब्जर्वर की रिपोर्ट में कहा गया है कि जब वह अपने काम के सिलसिले में घर से बाहर दूसरे शहर जा रहा था, तब उसने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। हालाँकि पुलिस की पूछताछ में आरोपित शख्स ने जुर्म कुबूल कर लिया है और कहा कि वह अपनी शादी बचाना चाहता था। पुलिस ने घरेलू हिंसा के मामले में मुमो पर केस दर्ज कर लिया है। आरोपित के वकील ने भी महिला पर अवैध संबंध के मामले में केस दर्ज करने और आर्थिक दंड की माँग की है।

मुमो ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसे इस मामले का पता तब चला जब उसने बीवी के मोबाइल में उसकी न्‍यूड तस्‍वीरें देखी, जो किसी अन्‍य शख्‍स के साथ शेयर की गई थी। उसने ये तस्‍वीर पत्‍नी के प्राइवेट मैसेज में देखी थी और उधर से भी रिप्‍लाई आया था।

मुगलों का है दिल्ली, अहमदाबाद और आगरा: एसिड अटैक पीड़िता को ‘चांडाल’ बताने वाला कॉमेडियन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते भारत दौरे पर होंगे। वे दिल्ली, अहमदाबाद और आगरा का दौरा करेंगे। अपने पहले भारत दौरे पर आ रहे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के स्वागत के लिए अहमदाबाद पूरी तरह से तैयार है। इन तैयारियों के बीच लिबरल गिरोह भी सक्रिय हो गया है जिसका एकसूत्री एजेंडा नरेंद्र मोदी की आलोचना करना है। इस सूची में एक नाम सोशल मीडिया पर सक्रिय बुजुर्ग कॉमेडियन अतुल खत्री का भी है।

अतुल खत्री, जो समय-समय पर मोदी सरकार की नीतियों को कोसते रहते हैं। रंगोली चंदेल जैसी एसिड सर्वाइवर को ‘चांडाल’ कहते हैं। सीएए का विरोध करते हैं। वही अतुल खत्री आज अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के भारत दौरे पर एक बार फिर अपनी कुंद और कुत्सित बुद्धि का प्रमाण देते पाए गए और दो लाइन के ट्वीट में ये भी दर्शा दिया कि वो लिबरल या प्रोग्रेसिव होने के नाम पर मुगलों के कितने अधीन हैं।

अतुल खत्री की परेशानी यह है कि जिन शहरों को नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति को दिखाएँगे, उसके निर्माता मुगल हैं। जी हाँ, बुजुर्ग कॉमेडियन लिखते हैं, “कमाल है, मोदी जी ट्रंप को जो तीन शहर- दिल्ली, अहमदाबाद, आगरा दिखाएँगे, उन्हें मुगलों ने बसाया था।”

अब हालाँकि, इस ट्वीट को पढ़ने के बाद अतुल खत्री जैसे मूढों के लिए कहने को कुछ नहीं बचता। लेकिन, जानकारी के लिए बता दें कि जिस दिल्ली, अहमदाबाद और आगरा का जनक अतुल खत्री मुगलों को बता रहे हैं। वास्तविकता में इन शहरों का विध्वंस मुगलों द्वारा किया गया था और उसी के खंडहर पर इन्होंने अपनी इमारतें बनवाईं, जिन्हें आज देश के ‘सेकुलर’ लोग भारत की शान कहते हैं। मुगलों के आने से कई सालों पहले से दिल्ली-अहमदादबाद और आगरा अस्तित्व में थे। ये अतीत में इंद्रप्रस्थ/ ढिल्लिका, कर्णावती और अग्रवन के नाम से जाने जाते थे।

ट्रू इंडोलॉजी के ट्वीट के अनुसार, पुराना किला के खंडहर में संस्कृत में लिखी एक शिलालेख मिली थी। इस शिलालेख के अनुवाद के अनुसार ढिल्लिका के निर्माता तोमर राजपूत थे और ये हरियाणा की राजधानी थी। आज ये शिलालेख दिल्ली म्यूजियम में है।

वैसे तो, मोदी विरोधी होने की भेड़चाल में अतुल खत्री जैसे लोग जो मान चुके हैं कि भारत का उद्भव ही मुगलों के आगमन से हुआ, उनके आगे तथ्य रखना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा होगा। खत्री ने जिन ट्विटर यूजर्स के लिए व्यंग्य लिखते हैं उन्होंने ही उन्हें इतिहास से रूबरू करवा दिया।

सोशल मीडिया पर यदि अतुल खत्री का ट्वीट खोला जाए तो उनके व्यंग्य पर हँसने वालों से ज्यादा उनकी बेवकूफी की खिल्ली उड़ाने वालों की संख्या ज्यादा दिखेगी। कम से कम फॉलोवर और हजारों की संख्या के फॉलोवर वाले यूजर अपने-अपने तरीके से अतुल खत्री को समझाते नजर आ रहे हैं। कोई उन्हें मुगलों का प्रोडक्ट बोल रहा है तो कोई उन्हें ‘पप्पू का भाई’ बता रहा।

‘Behen Ki Lohri’ हिन्दुओं व सिखों के त्योहार का उड़ाया मजाक, कंगना की बहन को बोला था ‘चांडाल’

इतिहास में गुम हैं मुगलों को 17 बार हराने वाले अहोम योद्धा: देश भूल गया ब्रह्मपुत्र के इन बेटों को

‘मुगलों ने हिंदुस्तान को लूटा ही नहीं, माल बाहर भी भेजा, ये रहा सबूत’

‘तेज रफ़्तार, तेजस्वी सरकार’: धीमी रह गई लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप की कार, छूट गई ट्रेन

बिहार में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू होने के साथ ही राजद कैम्प में हलचल शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के दोनों पुत्रों बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और छोटे बेटे के तेजस्वी यादव बीच अनबन की ख़बरें लगातार आ रही थी। लेकिन कुछ दिनों पहले तेज प्रताप यादव ने तेजस्वी को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लिया। इसके बाद लालू परिवार में सबकुछ ठीक-ठाक होने के कयास लगाए जाने लगे।

तेजस्वी के लिए तेज प्रताप ने एक नारा भी दिया है- ‘तेज़ रफ़्तार, तेजस्वी सरकार’। लेकिन, इसके लिए आयोजित कार्यक्रम में वे नहीं पहुँच सके। ‘तेज़ रफ़्तार, तेजस्वी सरकार’ कार्यक्रम में जाते समय उनकी कार की रफ़्तार धीमी रह गई और तेज प्रताप की ट्रेन छूट गई। बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव को पाटलिपुत्र स्टेशन से जनहित एक्सप्रेस से सहरसा जाना था, लेकिन वो समय से स्टेशन नहीं पहुँच सके और कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए।

सहरसा स्टेशन पर तेज प्रताप यादव के समर्थक काफी संख्या में जुटे थे और अपने नेता का इन्तजार कर रहे थे। जब उन्हें सूचना मिली कि उनके नेता की ट्रेन छूट गई है तो वे मायूस होकर लौट गए। इसके बाद तेज प्रताप सड़क के रास्ते ही निकल गए। ताज़ा सूचना के अनुसार, वो दरभंगा पहुँचे हुए थे और रास्ते में लोगों से मिलते चल रहे थे। विभिन्न हिन्दू देवी-देवताओं के गेट-अप के लिए चर्चा में रहने वाले तेज प्रताप यादव का राजद के एक ख़ास समर्थक वर्ग में बड़ा क्रेज है।

जहाँ तक बिहार विधानसभा चुनाव की बात है, कई विपक्षी दलों की माँग है कि वरिष्ठ नेता शरद यादव के नेतृत्व में समूचे विपक्ष को चुनाव में उतरना चाहिए लेकिन राजद इसके लिए तैयार नहीं है। जीतन राम माँझी, मुकेश साहनी और उपेंद्र कुशवाहा इस बात पर अड़े हैं कि शरद यादव को संयुक्त विपक्ष का मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चेहरा घोषित किया जाए। इन तीनों नेताओं ने पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के साथ बैठक भी की थी, जिसमें कॉन्ग्रेस और राजद को आमंत्रित नहीं किया गया था।

तेजस्वी यादव: शेर का बेटा हूँ; सुप्रीम कोर्ट: लालू चोर है; बिहारी: ये लेख पढ़ लो

NRC पर RJD में भी फूट: मुस्लिम विधायक ने कहा- पता नहीं रैली क्यों निकाल रहे तेजस्वी

’44 AC, 108 पंखे, 464 फैंसी लाइट्स, 35 क़ीमती सोफे: तेजस्वी ने सरकारी फंड से बंगले पर ख़र्च किए करोड़ों’

बुर्का पहनने के लिए मजबूर करते हैं बदमाश: कॉलेज छात्राओं की फरियाद पर हरकत में प्रशासन

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में कॉलेज जाने वाली छात्राओं को बुर्का पहनने के लिए मजबूर करने का मामला सामने आया है। खुर्जा की कॉलेज छात्राओं ने इस संबंध में सोमवार (फरवरी 17, 2020) को सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) ईशा प्रिया से मुलाकात की और उन्हें स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि बदमाश बुर्का पहनने के लिए मजबूर और उनका उत्पीड़न कर रहे हैं।

छात्राओं का कहना है कि कॉलेज के आसपास रहने वाले लोग और यहाँ से गुजरने वाले कुछ लड़के उनपर दबाव बनाते हैं कि वो बुर्का पहनें। बुर्का नहीं पहनने पर उनके धर्म को लेकर फब्तियाँ भी कसी जाती है। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए क्षेत्र के स्टेशन हाउस अधिकारी (SHO) के साथ SDM ईशा प्रिया मौके पर पहुँचीं और स्थानीय निवासियों के साथ बैठक की। अधिकारियों ने इलाके के लोगों को चेताया कि छात्राओं को परेशान करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।

SDM ईशा प्रिया ने कहा, “सराय मुर्तजा कॉलोनी में कुछ बदमाश लड़कियों को परेशान कर रहे थे और उन्हें बुर्का पहनने के लिए कह रहे थे। लड़कियों ने हमें बताया कि जब उनके परिवारों को बिना बुर्का के कॉलेज भेजने में कोई समस्या नहीं थी, तो ये लोग इस मामले पर कैसे सवाल उठा सकते हैं?”

SDM ने स्थानीय लोगों के साथ बैठक में और उन्हें अपनी बेटियों को कॉलेज भेजने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, “शुरुआत में हमने आरोपितों को सिर्फ चेताया है, लेकिन अगर उन्होंने अपना रवैया नहीं बदला तो हम मामले में केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करेंगे।” हालाँकि समुदाय के स्थानीय निवासियों और धार्मिक प्रमुखों ने SDM और पुलिस को आश्वासन दिया है कि इस तरह की घटना को दोहराया नहीं जाएगा।

बुर्का पहन भड़का रहा था AMU का छात्र नेता सज्जाद, पुलिस पहुँची तो महिलाओं के बीच छिपा, फिर भाग गया

जिस दिन हम उनसे ज्यादा हो गए, उस दिन हिन्दुओं को पटक-पटक कर मारेंगे: बुर्कानशीं युवती का वीडियो वायरल

इमरान खान का ‘न्यू पाकिस्तान’: PM की पार्टी का नेता स्कूली छात्राओं को पहना रहा बुर्का

संघ प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ मीडिया और सोनम कपूर दोनों खल्लास… विडियो से पूरा सच आया सामने

राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार (फरवरी 16, 2020) को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कई मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने समाज में कुटुंब का महत्व, परिवार का महत्व से लेकर हिंदू समाज जैसे विषयों पर चर्चा की थी। इन्हीं बातों के बीच उन्होंने कहा कि इन दिनों तलाक के अधिक मामले शिक्षित और सम्पन्न परिवारों से सामने आ रहे हैं, क्योंकि शिक्षा और संपन्नता अहंकार पैदा करती है, जिससे परिवार टूट रहे हैं। वामपंथी मीडिया ने उनकी इसी बात को पकड़ लिया, शीर्षक बनाया और खूब बेचा। लेकिन इस बात के आगे-पीछे की चीज को छुपा लिया, ताकि प्रोपेगेंडा चलता रहे।

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि संघ प्रमुख के कथन को प्रमाणित करने के लिए हमारे समाज में व्यवहारिक रूप से बहुत उदाहरण हैं। जहाँ अहंकार के चलते कई अपने एक दूसरे से अलग हो गए। लेकिन, सोशल मीडिया पर मोहन भागवत की टिप्पणी को गलत तरह से पेश किया गया। उनके बयान को इस प्रकार आगे बढ़ाया गया कि जैसे उन्होंने तलाक के पीछे का मुख्य कारण ‘शिक्षा’ को ही बताया। और तो और, वामपंथी मीडिया और उनके प्रोपेगेंडे में फँसकर सोनम कपूर समेत कई लोगों ने उनकी समझदारी पर सवाल तक उठा दिए। जबकि बिना पक्ष जाने, बिना पूरी विडियो देखे लगभग सभी मीडिया संस्थानों ने इस पूरे मामले पर रिपोर्टिंग की। रिपोर्टों में विशेष रूप से सोनम कपूर को नारीवाद का झंडा बुलंद करने वाली नायिका की तरह पेश किया गया और संघ प्रमुख को औरत के ख़िलाफ़ गलत बयान देने वाले के रूप में।

स्क्रॉल का अपना एक एजेंडा है, हेडलाइन में भी वो अजेंडे भरपूर दिखा। उन्होंने लिखा कि मोहन भागवत ने दावा किया है कि अधिक शिक्षित और समृद्ध परिवारों में तलाक ज्यादा पाए जाते हैं।

वहीं हिंदुस्तान टाइम्स ने भी इस खबर को सोनम कपूर के पक्ष में चलाया, आईबी टाइम्स, द पीजन एक्सप्रेस भी इस पहलू को देखे बिना, खबर चलाते पाए गए। हिंदी मीडिया का भी ज्यादातर यही हाल रहा। नतीजतन सोशल मीडिया पर कई लोगों ने संघ प्रमुख के ख़िलाफ़ बोलना शुरू कर दिया। उन पर सवाल उठाए जाने लगे।

सोशल मीडिया पर किसी ने उनके बारे में कहा कि मोहन भागवत बहुत ही धार्मिक उन्मादी व्यक्ति हैं, जो सदैव दंगा भड़काने और भेदभाव करने में विश्वास रखते है। तो किसी अन्य के मुताबिक जब वह संघ में थे तब उन्होंने मोहन भागवत के व्यक्तित्व को सुना और समझा है और उनके अनुसार भागवत सिर्फ़ भेदभाव और भारत को तोड़ने वाली राजनीति करते हैं। सोनम कपूर हो या कोई मीडिया हाउस या फिर आपकी-हमारी तरह का कोई आम इंसान… इन सबको नीचे का विडियो देखना-सुनना चाहिए।

अगर पूरी विडियो देखेंगें तो सवाल उठेगा कि जब मोहन भागवत ने अपने पूरे भाषण में ऐसी कोई बात कही ही नहीं, तो फिर उन पर इतने इल्जाम क्यों? क्या बयान की पूरी वीडियो देखने के बाद भी न माना जाए कि वाकई समाज में एक तय तबका है, जो चाहता है कि आरएसएस की छवि, उससे जुड़े लोगों की छवि पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठे, वो बदनाम हो।

हालाँकि, सोशल मीडिया पर कई ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने सोनम कपूर और अन्य मूर्खों को सच्चाई बताने की कोशिश की। लेकिन न सोनम का ध्यान उस ओर गया और न ही किसी मीडिया संस्थान का। क्योंकि जिस बिंदु के आधार पर उन्हें अपना अजेंडा भुनाना था, वो तो सोशल मीडिया पर चल पड़ा। सोनम जैसे कलाकारों ने इस पर ट्वीट किया। और भेड़चाल में सबसे आगे निकलने की चाह में मीडिया ने इसे प्राथमिकता से जगह दी।

एक यूजर ने लिखा भी कि मोहन भागवत ने शिक्षा और परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में बयान दिया और उसे डायवोर्स (तलाक) से जोड़ा। लेकिन अगर आप इसे एक महिला पर टिप्पणी मानते हैं, तो पिछड़ा हुआ कौन है?

पायल रोहतगी ने भी सोनम कपूर की बुद्धि पर तंज कसते हुए उन्हें जवाब दिया और बताया कि संघ प्रमुख ने जेंडर न्यूट्रल बयान दिया है।

होली खेलता कसाब, साईंभक्त लादेन और PUBG खेलते आतंकी: लोगों ने ‘फॉल्ट न्यूज़’ के यूँ लिए मजे

ख़ुद को फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट बताने वाले ‘ऑल्टन्यूज़’ ने फैक्ट-चेक करने के नाम पर इतना गंध फैलाया है कि अब लोग भी उससे तंग आ गए हैं। इस प्रोपेगेंडा पोर्टल के दोनों संस्थापक प्रतीक सिन्हा और ज़ुबैर का पूरा समय सोशल मीडिया पर लोगों से लड़ाई-झगड़ा करते हुए बीतता है। अब आम लोग भी इस पोर्टल की करतूतों से परेशान हो चुके हैं। जिहादियों, आतंकियों, हिन्दू विरोधियों और विपक्षी नेताओं को बचाने की होड़ में ‘ऑल्टन्यूज़’ कई बार हद पार कर चुका है और उसने उलटा-सीधा फैक्ट-चेक कर के लोगों के दिमाग में गोबर भरने की कोशिश की है।

ट्विटर पर आज काफी देर तक ‘फेक इट लाइक ऑल्टन्यूज़’ ट्रेंड में रहा। इस दौरान यूजर्स ने विभिन्न मीम्स के जरिए ये दिखाने का प्रयास किया कि प्रतीक सिन्हा और ज़ुबैर की वेबसाइट कैसे फैक्ट-चेक के नाम पर अपने गिरोह विशेष के लोगों का बचाव करती है। यहाँ हम उनमें से 5 ऐसे मीम्स लेकर आ रहे हैं, जो लोगों की क्रिएटिविटी का उदाहरण तो हैं ही, साथ ही मीडिया में कुकुरमुत्ते की तरह उग आए ‘ऑल्टन्यूज़’ जैसे प्रोपेगंडा पोर्टलों की पोल भी खोलते हैं।

1.) वो पत्थरबाज थोड़े हैं, गेंदबाज हैं

एक व्यक्ति ने पुलिस के ख़िलाफ़ हिंसा करने वालों का बचाव करने का आरोप लगाते हुए दिखाया कि कैसे ‘ऑल्टन्यूज़’ किसी पत्थरबाज का बचाव कर सकता है। वो पत्थरबाज की तस्वीर को क्रिकेट के मैदान में फिट कर देगा और कहेगा कि देखो, ये तो बेचारा गेंदबाज है, जो बॉलिंग कर रहा था।

2. कसाब गोली नहीं चला रहा था, होली खेल रहा था

मुंबई में नवम्बर 2008 में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब को ज़िंदा पकड़ा गया था। लेकिन, एक ट्विटर यूजर का दावा है कि ‘ऑल्टन्यूज़’ उसे भी निर्दोष साबित करने की कोशिश करता। कैसे? सीधा है, कसाब के हाथ में बन्दूक को गायब कर उसकी जगह पिचकारी डाल दीजिए। प्रोपेगेंडा पोर्टल फोटोशॉप के जरिए ऐसा करने में देरी नहीं करेगा।

3. जामिया के पत्थरबाजों के बचाव में

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पत्थरबाजों को लाइब्रेरी में घुसते हुए देखा गया। उनके हाथों में पत्थर थे। ‘ऑल्टन्यूज़’ सीएए विरोधियों को लगातार बचाता रहा है। लाइब्रेरी के पूरे सीसीटीवी फुटेज को देख कर वो भी पत्थरबाज छात्र को बचाने के लिए नया तर्क लेकर आ जाता। एक यूजर के अनुसार, ‘ऑल्टन्यूज़’ कह सकता है कि उक्त उपद्रवी के हाथ में पत्थर नहीं, तकनीकी रूप से एक ऐसा एडवांस्ड मोबाइल फोन है, जिसे बनाने के लिए सैमसंग और एप्पल जैसी कम्पनियाँ भी तरस रही हैं।

4. पत्थर नहीं, उपद्रवियों के हाथ में पर्स है

जामिया के एक धड़े ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे उपद्रवी के हाथ में पत्थर नहीं है, वो पर्स है। एक सोशल मीडिया यूजर ने दिखाया कि ‘ऑल्टन्यूज़’ की नज़र में पर्स को पत्थर और पत्थर को पर्स देखा जाता है। ये देखिए मीम:

5. साईं बाबा का भक्त लादेन

ओसामा बिन लादेन अगर जिन्दा होता, तो ‘ऑल्टन्यूज़’ उसे बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ता। ऐसा हम नहीं, सोशल मीडिया पर लोग लोग कह रहे हैं। ‘ऑल्टन्यूज़’ आतंकी संगठन अलकायदा के संस्थापक ओसामा की इस तस्वीर को दिखा कर लिखता कि इसमें ओसामा प्रवचन दे रहा है। वो एक उँगली दिखा कर कह रहा है- सबका मालिक एक। अर्थात, ओसामा भी साईंभक्त निकला।

इन सबके अलावा सोशल मीडिया पर ‘ऑल्टन्यूज़’ की करतूतों का मजाक बनाते हुए कई और मीम्स भी शेयर हुए, इस लिंक पर क्लिक कर के देख सकते हैं। एक ट्विटर यूजर ने तो आतंकी मसूद अज़हर और कथित कॉमेडियन कुणाल कमरा के फोटो को मिक्स करते हुए लिखा कि ‘ऑल्टन्यूज़’ ये साबित करने की कोशिश करता कि मसूद माइक पर स्टैंड-अप कॉमेडी कर रहा है। एक अन्य ट्विटर यूजर ने हथियारबंद नकाबपोश आतंकियों की तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘ऑल्टन्यूज़’ इन्हें रियल लाइफ में PUBG गेम खेलने वाला बताता।

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