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महाशिवरात्रि पर आदि देव भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग और उनकी महिमा: एक नजर

यूँ तो देश भर में लाखों शिव मंदिर और शिव धाम हैं, लेकिन शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का सबसे खास महत्व है।

“सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारंममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
एतेशां दर्शनादेव पातकं नैव तिष्ठति।”

हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रकट हुए, उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। ये संख्या में 12 हैं। सौराष्ट्र प्रदेश (काठियावाड़) में श्री सोमनाथ, श्री शैल पर श्री मल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्री महाकाल, ॐकारेश्वर अथवा ममलेश्वर, परली में वैद्यनाथ, डाकिनी नामक स्थान में श्री भीमशंकर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्री नागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्री केदारनाथ और शिवालय में श्री घृष्णेश्वर।

सनातन धर्म में मान्यता है कि जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों का किया हुआ पाप इन द्वादश ज्योतिर्लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है।

शिव महापुराण के द्वादश्ज्योतिर्लिन्ग्स्तोत्रं में उल्लेखित बारह ज्योतिर्लिंगों में से कुछ की भौगोलिक स्थितियों के बारे में भक्तों के मत अलग-अलग हैं। कारण यह है कि स्तोत्र (श्लोक) में इन ज्योतिर्लिंगों की भौगोलिक स्थिति अस्पष्ट है, जिस कारण लोग अपने अपने तरीके से व्याख्या करते हैं।

1- गंगा घाट: श्री विश्वनाथ जी

जब बात काशी की है तो शुरुआत गंगा घाट से ही होनी चाहिए। वाराणसी (उत्तर प्रदेश) स्थित काशी के श्री विश्वनाथजी सबसे प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में एक हैं। गंगा तट स्थित काशी विश्वनाथ शिवलिंग दर्शन हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र है।

गंगा घाट

वाराणसी में श्री गंगा आरती का दृश्य –

काशी विश्वनाथ मंदिर –

2 – श्री त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग, नासिक 

श्री त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र प्रांत के नासिक जिले में पंचवटी से 18 मील की दूरी पर ब्रह्मगिरि के निकट गोदावरी के किनारे है। इस स्थान पर पवित्र गोदावरी नदी का उद्गम भी है।

3 – श्रीघुश्मेश्वर (गिरीश्नेश्वर) ज्योतिर्लिंग

ज्योतिर्लिंग को घुसृणेश्वर या घृष्णेश्वर भी कहते हैं। इनका स्थान महाराष्ट्र प्रांत में दौलताबाद स्टेशन से बारह मील दूर बेरूल गाँव के पास है।

4 – औंढा नागनाथ ज्योतिर्लिंग, महाराष्ट्र

स्थान निर्धारण में सबसे ज्यादा विवादित दो ज्योतिर्लिंग हैं, एक है नागेश्वरज्योतिर्लिंग, जिसके बारे में कुछ लोगों का मत है कि यह गुजरात स्थित द्वारका के समीप है। वहीं, अन्य लोगों का मत है यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के औंढा नमक गाँव में स्थित श्री नागनाथ मंदिर में है।

श्रीनागेश्वर ज्योतिर्लिंग, गुजरात 

5 – श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

ठीक इसी प्रकार श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में भी मतभेद है, कुछ लोगों का मानना है की यह ज्योतिर्लिंग झारखंड राज्य में देवघर कसबे में स्थित है, वहीं अन्य लोग मानते हैं की यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के बीड जिले में स्थित परली वैजनाथ स्थान पर स्थित है।

6 – श्री भीमशंकर ज्योतिर्लिंग

श्री भीमशंकर का स्थान मुंबई से पूर्व और पूना से उत्तर भीमा नदी के किनारे सह्याद्रि पर्वत पर है। यह स्थान नासिक से लगभग 120 मील दूर है

7 – श्रीमल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

आन्ध्र प्रदेश प्रांत के कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तटपर श्री शैल पर्वत पर श्री मल्लिकार्जुन विराजमान हैं। इसे दक्षिण का कैलाश कहते हैं।

8 – श्री रामेश्वर ज्योतिर्लिंग

श्री रामेश्वर तीर्थ तमिलनाडु प्रांत के रामनाड जिले में है। यहाँ लंका विजय के पश्चात भगवान श्रीराम ने अपने अराध्यदेव शंकर की पूजा की थी। ज्योतिर्लिंग को श्रीरामेश्वर या श्रीरामलिंगेश्वर के नाम से जाना जाता है।

9 – श्री ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

मालवा क्षेत्र में श्री ॐकारेश्वर स्थान नर्मदा नदी के बीच स्थित द्वीप पर है। उज्जैन से खण्डवा जाने वाली रेलवे लाइन पर मोरटक्का नामक स्टेशन है, वहां से यह स्थान 10 मील दूर है। यहाँ ॐकारेश्वर और मामलेश्वर दो पृथक-पृथक लिंग हैं, परन्तु ये एक ही लिंग के दो स्वरूप हैं। श्री ॐकारेश्वर लिंग को स्वयंभू समझा जाता है।

श्री मामलेश्वर ज्योतिर्लिंग

10 – श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग  

श्री महाकालेश्वर (मध्यप्रदेश) के मालवा क्षेत्र में क्षिप्रा नदी के तटपर पवित्र उज्जैन नगर में विराजमान है। उज्जैन को प्राचीनकाल में अवंतिकापुरी कहते थे।

11 – श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

श्री सोमनाथ सौराष्ट्र, (गुजरात) के प्रभास क्षेत्र में विराजमान है।

12 – श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

श्री केदारनाथ हिमालय के केदार नामक श्रृंगपर स्थित हैं। शिखर के पूर्व की ओर अलकनन्दा के तट पर श्री बदरीनाथ अवस्थित हैं और पश्चिम में मन्दाकिनी के किनारे श्री केदारनाथ हैं

नोट- इस फोटो फीचर को मनीष श्रीवास्तव ने प्रस्तुत किया है।

असम में बोडोलैंड टेरीटोरियल कॉउन्सिल (BTC) चीफ की पत्नी की कार पर हमला

कल गुरुवार को असम में भाजपा की सहयोगी, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के अध्यक्ष और बोडोलैंड टेरीटोरियल कॉउन्सिल ( बीटीसी ) के चेयरपर्सन हाग्रामा मोहिलारी की पत्नी सेउली ब्रह्मा मोहिलारी की कार पर कुछ अज्ञात लोगों ने पत्थर फेंके।

पुलिस ने बताया है कि वह इस घटना की जाँच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में है कि बीटीसी चीफ की पत्नी पर किसने और किन कारणों से हमला किया। पत्थरबाजी की यह घटना अप्रैल में होने जा रहे बीटीसी चुनाव से जोड़ कर देखी जा रही है।

खबरों के अनुसार यह घटना शाम 6 बजे हुई जब सेउली कोकराझार जिले के भारत-भूटान सीमा पर स्थित शिव मंदिर से दर्शन कर लौट रही थीं। हालाँकि इस घटना में कार में सवार किसी व्यक्ति को चोटें नहीं आई हैं, लेकिन कार के क्षतिग्रस्त होने की खबरें हैं।

बोडोलैंड क्षेत्र के आईजी पुलिस अनुराग अग्रवाल ने बताया कि यह घटना बीच जंगल में हुई है जिसके संदर्भ में कुछ संदिग्धों से पूछताछ जारी है, पर अभी तक उनके इसमें शामिल होने को लेकर कुछ स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता।

जानकारों के अनुसार 2003 में बीटीसी बनने के साथ ही उस पर काबिज बीपीएफ को इस चुनाव में विपक्षियों से कड़ा मुकाबला मिलने की संभावना जताई जा रही है।

जनवरी में केंद्र सरकार के साथ बोडो शांति समझौते पर साइन करने वाले नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड के सभी लीडर्स के इन चुनावों से पहले किसी राजनैतिक पार्टी बनाने या बीपीएफ की विरोधी पार्टी यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल ज्वाइन करने की अटकलें तेज हैं।

नागौर के बाद अब राजस्थान के बाड़मेर में युवक के प्राइवेट पार्ट में रॉड डालने का आरोप, VIDEO वायरल

राजस्थान के नागौर (Nagaur) जिले में एक दलित युवक की बर्बर पिटाई और गुप्तांग में पेंचकस डालने का मामला उजागर होने के दो ही दिन बाद अब बाड़मेर से भी एक युवक को ऐसी ही यातनाएँ दिए जाने की खबरें आ रहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोबाइल चोरी के आरोप में पहले एक युवक को कुछ लोगों ने पकड़ा और फिर बेहद बर्बर तरीके से उसे यातनाएँ दी गईं।

पीड़ित युवक ने आरोप लगाया कि उसके गुप्तांग में सरिया (रॉड) डाला गया और उसे तड़पते हुए मरणासन्न हालत में फेंक कर चले गए। जानकारी के अनुसार यह मामला ग्रामीण थाना क्षेत्र के भादरेश गाँव का है। यहाँ ग्रामीण थाना पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है जबकि दो अन्य की तलाश जारी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक तीन आरोपितों ने 22 साल के मुस्लिम युवक की पिटाई की और उसके बाद उसके गुप्तांग में लोहे की रॉड डाल दी। बताया जा रहा है कि मुस्लिम युवक पर मोबाइल चोरी करने का आरोप था। यह मामला एक महीना पुराना है, जो सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद सामने आया।

पीड़ित के भाई मजीद ने बताया कि उसने सोशल साइट्स पर अपने भाई को दो तीन युवकों द्वारा मारने का वीडियो देखा तो भाई को फोन किया, जिसके बाद उसको पूरी घटना की जानकारी मिली और फिर उसने गुरुवार रात को मोतीसिंह, भरत सिंह और हिगलाज के खिलाफ ग्रामीण थाने में केस दर्ज करवाया। मजीद ने आरोप में लिखवाया है कि इन तीन लोगों ने मेरे भाई की पिटाई की और उसके बाद प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डालकर यातनाएँ दीं।

‘अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास नहीं, भूमि पूजन करेंगे पीएम नरेंद्र मोदी’

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से पहले केवल भूमिपूजन किया जायेगा। राममंदिर निर्माण के लिए अब फिर से शिलान्यास का कार्यक्रम नहीं किया जा सकता। मीडिया से शुक्रवार को हुई बातचीत में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने उपरोक्त बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि साल 1992 में राममंदिर का शिलान्यास हो चुका है, इसलिए बार-बार मंदिर का शिलान्यास नहीं हो सकता है। महंत नृत्य गोपाल दास ने यह भी कहा कि भूमि पूजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है।

बताते चलें कि गुरुवार को ही महंत नृत्य गोपाल दास की अगुवाई में ट्रस्ट के सदस्यों ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। और इस दौरान ट्रस्ट के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रस्ट की पहली बैठक के दौरान हुई चर्चा की जानकारी दी। ट्रस्ट के सदस्यों ने भूमिपूजन के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी को अयोध्या आने का न्योता भी दिया था।

श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने पीएम मोदी से मिलने के बाद कहा कि अब प्रतीक्षा करने का अधिक समय नहीं है, इसलिए मंदिर का निर्माण अब तेज गति से होनी चाहिए। महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा, “हम लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा है कि दिव्य और भव्य राम मंदिर जल्द से जल्द बनें, जनता ने इसलिए आपको प्रधानमंत्री बनाया है। आप संतों और जनता की इच्छा पूरी करें, इसके जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वो चाहते हैं कि जल्द से जल्द और भव्य राम मंदिर बनें। भगवान राम टाट में रह रहे हैं, इसलिए जल्द से जल्द राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया जाना चाहिए।”

महंत नृत्य गोपाल दास ने मीडिया से बातचीत में बताया कि भूमि पूजन समारोह के लिए अयोध्या आने के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री ने उनसे कहा है कि वह शीघ्र ही अयोध्या आएँगे।

शाहीनबाग के CAA विरोधी प्रदर्शन में फूट, अलग-अलग बने गुटों में दरार लेकिन अड़ियल रवैया बरक़रार

दिल्ली चुनाव समाप्त होते ही शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ चल रहा धरना अब बिखरा-बिखरा सा हो गया है। इसके पीछे की वजह ये कि अब कोई धरने का नेतृत्व करने के लिए तैयार नहीं है। वहीं कोर्ट द्वारा धरने पर भेजे गए वार्ताकार भी धरने पर बिखरे हुए माहौल और महिलाओं द्वारा पूछे जा रहे तरह-तरह के सवालों से परेशान हैं।
वहीं शुक्रवार को धरने पर पहुँचे वार्ताकारों के सामने प्रदर्शनकारी महिलाएं ऐसे-ऐसे तर्क दिए कि, जिसे सुनकर देश की सर्वोच्च अदालत में बहस करने में माहिर दोनों वरिष्ठ वकील भी हैरान रह गए।

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त वार्ताकार संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन शुक्रवार को शाहीन बाग धरने पर प्रदर्शनकारी महिलाओं से बात करने पहुँचे, जहाँ वार्ताकारों से महिलाओं ने ऐसे अजीब और अटपटे सवाल पूछे कि वार्ताकार भी परेशान होकर छल्ला उठे और बोले बात करनी है तो 20-20 महिलाओं के गुट बनाकर करो नहीं तो हमें मजबूरन यहाँ से वापस जाना होगा। वार्ताकारों द्वारा की गई इस पेशकश को शाहीन बाग की प्रदर्शनकारी महिलाओं ने पल भर में ठुकरा दिया और कहा कि बात करनी है तो यहीं होगी, जिस हाल में हम यहाँ बैठे हुए हैं।

इसी बीच वार्ताकार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आपका यही व्‍यवहार रहा तो हम कल से यहाँ नहीं आएंगे। इससे पहले एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि हम पिछले दो महीने से प्रधानमंत्री मोदी का पलकें बिछाए इंतजार कर रहे हैं। वो शाहीन बाग आएँ और हमसे बात करें।

वार्ताकारों संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने प्रदर्शनकारी महिलाओं से यही अपील की कि शाहीन बाग के धरना स्थल को बदलने पर विचार किया जाना चाहिए क्योंकि इस धरने के कारण उन्हीं के जैसे देश के सामान्य नागरिकों को परेशानी हो रही है। इस पर महिलाओं ने तर्क दिया कि देश की आजादी के समय भी इसी तरह के धरने, प्रदर्शन हुए थे। उससे भी लोगों को परेशानी हुई थी। अगर उस परेशानी को न उठाया गया होता तो आज देश को आजादी ही नहीं मिली होती।

इस दौरान बार-बार नागरिकता कानून को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर वार्ताकार दोनों वरिष्ठ वकीलों ने प्रदर्शनकारियों को साफ़ कहा कि यह मसला केवल प्रदर्शन स्थल को लेकर हो रही परेशानी को लेकर है। नागरिकता संशोधन के मुद्दे भी सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन हैं और उस समय प्रदर्शनकारियों का पूरा पक्ष सर्वोच्च अदालत के समक्ष रखा जाएगा, लेकिन इसके बाद भी सामान्य महिलाओं द्वारा दिए जा रहे तर्कों को सुनकर वार्ताकार धैर्य रखने की बात कहते रहे और लगातार महिलाओं का विश्वास जीतने में लगे रहे।

वहीं जैसे-जैसे शाहीन बाग प्रदर्शन दिन रोज खींचता चला जा रहा है, वैसे-वैसे लोगों में दूरियाँ भी बढ़ती जा रही है। शाहीन बाग में एक से अधिक गुट बनते नजर आ रहे हैं और उस गुट की कोई न कोई अगुवाई भी करता है। सबसे मजेदार बात तो यह है कि हर गुट के लोग संचालक बने हुए हैं, जिससे कुछ भी तय नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उनके बीच अनबन होती है और फैसला लेने में परेशानी आती है, लेकिन इस मतभेद के बावजूद भी सभी कानून को वापस लेने की बात कहते हैं और यह भी कहते हैं कि हम यहाँ से नहीं उठेंगे। ऐसे में मंच और धरने को दादियों के हवाले कर दिया गया है।

आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून और राष्‍ट्रीय नागरिकता रजिस्‍टर के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में 15 दिसंबर से महिलाओं का धरना प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शन के चलते दिल्‍ली से नोएडा को जोड़ने वाला मार्ग भी पिछले दो महीने से भी अधिक समय से बंद है, जिसके चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। गौरतलब है कि रोड़ पर चल रहे धरने के विरोध में आम लोगों ने भी एक विरोध मार्च निकाला था। साथ ही कोर्ट ने प्रदर्शनकारी महिलाओं से बात करने के लिए वार्ताकारों को नियक्त किया है, जिनकी वार्ता अभी जारी है।


‘दी क्विंट’ ने किया आमूल्या लियोना का फैक्ट चेक, ताकि लोग ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारों को भूल जाएँ

कल ही बैंगलुरू में AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के मंच से पाकिस्तान के समर्थन में लगे नारों और उन्हीं की पार्टी के नेता वारिस पठान के मुस्लिमों को हिन्दुओं के खिलाफ भड़काने वाले बयान के बाद सियासत गरमा गई है। अभी तक जहाँ इन मंचों से नागरिकता कानून के विरोध कि आड़ में सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिंदुत्व के खिलाफ ही अपशब्द निकलते थे, तो वहीं बृहस्पतिवार को ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ की नारेबाजी भी होने लगी। इसी घटना पर भाजपा ने ओवैसी से सवाल भी पूछा है कि कहीं यह सब प्रायोजित तो नहीं?

बीजेपी मीडिया सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने भी ओवैसी के मंच से पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वाली लड़की अमूल्या लियोना की एक वीडियो को ट्वीट किया और आशंका जाहिर की है कि कहीं जो हाल में दिख रहा है, उसके पीछे भी कोई बड़ी साजिश तो नहीं? क्योंकि इस वीडियो में अमूल्या लियोना ये कहते दिख रही है कि मंच पर जो बोलना होता है उसके पीछे पूरी टीम होती है।

अब हालाँकि, यह बात सब जानते हैं कि ‘स्टेज के पीछे पूरी टीम’ होने की बात करती अमूल्या लियोना की ये वीडियो पुरानी है और वर्तमान घटना के साथ इसका सम्बन्ध ढूँढने के लिए एक बार फिर उत्सुकतावश शेयर की जा रही है। वैसे भी कल के वीडियो से स्पष्ट देखा जा सकता है कि पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने के बाद तो अमूल्या की स्थिति ऐसी नहीं रह गई थी कि वो इतनी शान से और आत्मविश्वास के साथ इंटरव्यू दे पाती। लेकिन सोशल मीडिया पर लोग जो सवाल पूछ रहे हैं, वो इस बिनाह पर पूछ रहे हैं कि जब अन्य विरोध प्रदर्शन और भाषणों के पीछे अमूल्या की एक पूरी टीम होती है, उनके सलाहकार होते हैं, कई कार्यकर्ता होते हैं, उनके साथी होते हैं, तो क्या ऐसा इस बार भी तो नहीं?

ये सवाल वाजिब है, और वर्तमान परिस्थियों के मुताबिक पूछा भी जाना चाहिए। क्योंकि सीएए विरोध प्रदर्शन में पाकिस्तान जिंदाबाद के साथ ही देश विरोधी और हिंदुत्व विरोधी नारे लगना आम बात नहीं रह गया है। वो भी तब, जब एक पूरा समुदाय इसी बात को आधार बनाकर धरना दे रहा हो कि यह कानून किस न किसी तरह से उनके समुदाय के खिलाफ साजिश है।

मगर, ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग से लेकर असम को भारत से काटने की योजना बनाने वाले शरजील इमाम तक का समर्थन करने वाले वामपंथी मीडिया गिरोह का क्या..जो समय दर समय केवल ये साबित करने पर जुटा हुआ है कि न ही कन्हैया कुमार और न ही उनकी यह पूरी गैंग गलत है, न जामिया में हिंसा करने वाले लोग, न शरजील इमाम और न ही अमूल्या लियोना।

अमूल्या के पक्ष में उतरा ‘ दी क्विंट’

अमूल्या लियोना का पक्षधर बनकर ‘द क्विंट’ ने एक फैक्ट चेक किया है। जिसमें बताया है कि किस तरह ट्विटर पर लोग इस पुराने वीडियो को शेयर कर रहे हैं और यूजर्स में भ्रम की स्थिति फैला रहे हैं। जबकि स्पष्ट है कि यहाँ भ्रम की स्थिति नहीं फैलाई जा रही? यहाँ केवल एक सवाल हो रहा है कि कहीं इस बार भी अमूल्या के नारों में पूरी एक टीम का हाथ तो नहीं? लेकिन ‘द क्विंट’ इसे फिर भी जस्टिफाई करने पर आमादा है, ताकि CAA विरोधी मंच से निकली ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ की गूँज को किस तरह से धीमा किया जा सके।

प्रोपेगैंडा वेबसाइट ‘द क्विंट’ अपने इस फैक्ट चेक के जरिए खुद ही बताता है कि उन्होंने इस वीडियो को खोजने का प्रयास किया और पाया कि जिस वीडियो को आज प्रासंगिक बनाकर शेयर किया जा रहा है, वो तो 31 जनवरी की है और उसका तो बैंगलुरू वाले किस्से से कोई लेना-देना ही नहीं है। दी क्विंट ने स्पष्टीकरण दिया है कि अमूल्या तो उन प्रोटेस्ट के बारे में कह रही थी, जो उसने 31 जनवरी से पहले किए।

यहाँ सोचने वाली बात है कि 31 जनवरी से पहले ऐसा तो नहीं था न कि सीएए/एनआरसी/एनपीआर के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन नहीं हो रहे थे और अगर हो रहे थे, तो अमूल्या इसमें शामिल नहीं थीं? दोनो चीजें थीं और अमूल्या की इन प्रदर्शनों में सहभागिता उसके सोशल मीडिया अकॉउंट से लगाई जा सकती है।

इसलिए, अमूल्या लियोना की बातों को सुनकर संदेह उत्पन्न होना जाहिर है। लेकिन इन सवालों को खारिज करने के लिए की गई कोशिश भी बताती हैं कि आज ये वामपंथी मीडिया अपने इन्हीं फैक्ट चेक और एंजेंडाधारी पत्रकारिता से लोगों की सोचने की क्षमता पर चोट कर रहा है, ताकि पाठक भ्रमित हो और इनकी तरह से सोचना शुरू करे।

गौरतलब है कि ‘द क्विंट’ के फैक्ट चेक के अलावा एनडीटीवी ने अमूल्या के ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे को जस्टिफाई करने का प्रयास किया है। अमूल्या के एक पुराने फेसबुक पोस्ट को शेयर करते हुए एनडीटीवी ने इस बिंदु पर लिखा है कि अमूल्या ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में पिछले सप्ताह पाकिस्तान सहित सभी पड़ोसी देशों की तारीफ की थी। एनडीटीवी के अनुसार अमूल्या ने लिखा था, “हिन्दुस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद, बांग्लादेश जिंदाबाद, श्रीलंका जिंदाबाद, नेपाल जिंदाबाद, अफगानिस्तान जिंदाबाद, चीन जिंदाबाद, भूटान जिंदाबाद। अमूल्या ने कन्नड़ भाषा में लिखे पोस्ट में कहा था कि अपने देश से प्यार करें और दूसरे देशों का सम्मान करें।”

बता दें कि वामपंथी मीडिया गिरोह द्वारा देश के ख़िलाफ़ नारे लगाने वालों के प्रति ये उदारवादी रवैया कोई नया नहीं। इससे पहले भी कई बार ऐसे मौके आए हैं, जब फैक्ट के जरिए, पाठकों को ये समझाने का प्रयास हुआ कि उन्हें जो स्पष्ट दिख रहा है, वो गलत है, और सही सिर्फ़ वो है, जिसको उनकी वेबसाइट या उनके गिरोह के चैनल अंतिम सत्य बता रहे हैं।

इसका सबसे हालिया उदाहरण, ऑल्ट न्यूज़ द्वारा जामिया हिंसा से संबंधित फैक्ट चेक का है। जिसमें पत्थर को वॉलेट बताकर पेश किया गया। इसलिए अगर अब दी क्विंट जैसे प्रोपेगैंडा-धारी स्रोत अमूल्या को भी क्लीन चित देने का प्रयास करते नजर आएँ तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

‘कश्मीर मुक्ति, मुस्लिम मुक्ति’ का बैनर लिए लड़की को पुलिस ने लिया हिरासत में, ‘पाक जिंदाबाद’ कहने का भी है आरोप

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ गुरुवार (फरवरी 21, 2020) को बेंगलुरु में आयोजित रैली में अमूल्या लियोना द्वारा ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए जाने की घटना उजागर होने के बाद शुक्रवार को एक और लड़की को बेंगलुरू के एक कार्यक्रम से हिरासत में लिया गया।

लड़की की पहचान अरुद्रा के रूप में हुई है। मालूम हुआ है कि वह एक प्रदर्शन में “कश्मीर मुक्ति, दलित मुक्ति, मुस्लिम मुक्ति” नारे लिखे पोस्टर लेकर बैठी थी। इस प्रदर्शन को हिंदू जागरण वेदिके नाम के संगठन ने अमूल्या के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया था। टीवी9 भारतवर्ष की खबर के अनुसार लड़की पर पाकिस्तान जिंदाबाद चिल्लाने का भी कथित आरोप है।

बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर भास्कर राव का कहना है कि हिंदू जागरण वेदिके के प्रोटेस्ट के दौरान लोगों के बीच एक लड़की आकर बैठ गई। उसके हाथ में कन्नड़ भाषा में लिखा एक बैनर था, जिस पर दलित मुक्ति, कश्मीर मुक्ति और मुस्लिम मुक्ति लिखा था। इसे देख वहाँ काफी भीड़ इकट्ठा हो गई थी, लोगों ने उसे वहाँ से जाने को कहा, इसलिए हमने उसे किसी तरह मौके से रेस्क्यू किया और उसे हिरासत में लिया।

पुलिस आयुक्त ने पत्रकारों से कहा, “लड़की की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे हिरासत में ले लिया गया है। हम उसके बारे में जानकारी जुटाएँगे, कि वह कहाँ रहती है और उसके पीछे कौन है।”

मीडिया खबरों के अनुसार, पुलिस आयुक्त का कहना है कि लड़की ने प्रदर्शन में नारेबाजी नहीं की और जाँच के बाद तय होगा कि उसकी गिरफ्तारी होगी या नहीं। जाँच से पहले कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि उसे थोड़ी देर पहले ही हिरासत में लिया गया है।

गौरतलब है कि इस घटना से पहले यानी कल AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के मंच से पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जाने की घटना सामने आई थी। बेंगलुरु में गुरुवार को ओवैसी ने CAA विरोधी रैली की थी। इसी दौरान एक लड़की मंच पर चढ़ गई थी और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए थे। नारों को सुनते ही वहाँ हंगामा मच गया था। ओवैसी के चेहरे की हवाइयाँ उड़ गईं थीं। मगर लड़की फिर भी माइक पकड़कर अपनी बात कहने की कोशिश कर रही थी। माहौल इतना बिगड़ गया था कि वहाँ मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने जबरन मंच से उतारना पड़ा।

बाबरी विध्वंश के बाद मुस्लिम महिलाओं ने उकसाने के लिए भेजी थी दाऊद इब्राहिम को चूड़ियाँ

उत्तर प्रदेश में 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंश के बाद देश की मुस्लिम महिलाओं ने अडंरवर्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को चूड़ियाँ भेजीं थीं। यह खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर राकेश मारिया ने अपनी किताब ‘Let Me Say It Now’ (लेट मी से इट नाउ) में किया है। किताब में दावा किया गया है कि मुंबई की मुस्लिम महिलाओं ने दाऊद को चूड़ियाँ भेजीं थीं। ज्ञात हो कि हमारे देश में आज भी किसी पुरुष को चूड़ियाँ भेजना उसकी कायरता का प्रतीक मान कर उसे अपमानित करने के उद्देश्य से भेजा जाता है।

राकेश मारिया ने अपनी किताब में लिखा है कि आईएसआई (पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI) भारत को अस्थिर करने के लिए भारतीय अल्पसंख्यकों के बीच अपने पैर जमाने की निरंतर कोशिश कर रहा था, हालाँकि तब तक उन्हें कोई ख़ास सफलता नहीं मिल पा रही थी। लेकिन 1991 में बाबरी मस्जिद विध्वंस और देशव्यापी दंगों के कारण, आईएसआई का काम आसान हो गया था। ISI अब मुंबई के डॉन को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते थे।

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर राकेश मारिया ने अपनी किताब में कहा है कि दाऊद ने बाबरी विध्वंस और दिसंबर में भड़के दंगों का बदला लेने के लिए आईएसआई के साथ मिलकर काम किया।

किताब के अनुसार, “अंडरवर्ल्ड की उड़ती हुई खबरों में तब यह बात चल रही थी कि दिसंबर, 1992 के दंगों के पहले चरण के बाद, मुंबई के कुछ पीड़ित मुस्लिमों ने दाऊद इब्राहिम को मदद के लिए एक संदेश भेजा था; लेकिन वह कुछ नहीं कर सका। बताया जाता है कि उस समय दाऊद इब्राहिम को उकसाने और बाबरी विध्वंश के बदले में कार्रवाई के लिए कुछ मुस्लिम महिलाओं ने उसकी मर्दानगी पर सवाल उठाते हुए, एक पुरुष को अपमानित करने का अंतिम पारम्परिक भारतीय तरीका भी अपनाया। अब चूड़ियाँ वास्तव में भेजी गई थीं या नहीं, या वह आईएसआई ने वह खुद ही भेजी थीं, दाऊद ने बाबरी मस्जिद और दिसंबर के दंगों के पतन का बदला लेने के लिए आईएसआई के साथ अपने बहुत लोगों को भेज दिया।”

“.. इसका उद्देश्य और कुछ नहीं बल्कि भारत के मुस्लिमों को भारत सरकार के खिलाफ उकसा कर देशभर में हिन्दू-मुस्लिम दंगे करवाना और हमले करवाना था। इस योजना का मुख्य हिस्सा 1993 में मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी की जयंती पर पूरे देशभर में हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़काना था। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण मेट्रो शहर जैसे- बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, सूरत, अहमदाबाद आदि शहर थे। दिसंबर 1992 और जनवरी 1993 के बीच, टाइगर मेमन के माध्यम से, दाऊद और अनीस इब्राहिम ने दुबई में आठ अन्य षड्यंत्रकारियों को बुलाया।इनमें मोहम्मद डोसा और टाइगर मेमन के दो भाई, याकूब मेमन और अयूब मेमन भी शामिल थे। दंगों के बाद दोनों भाई बुरी तरह से परेशान थे, गुस्से से भरे और बदला लेने के लिए बेताब थे। षड्यंत्रकारियों ने विस्तृत योजनाओं को चाक-चौबंद करने के लिए बैठकें कीं और कुछ पाकिस्तानियों ने भी इन बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लिया।”

किताब में बताया गया है कि किस तरह से आईएसआई द्वारा मुंबई के डॉन से मिलकर देश में हथियारों, गोला-बारूद और धन के वितरण के लिए एक नेटवर्क तैयार किया गया। इसका सिर्फ एक मकसद था भारत की अखंडता और स्थिरता पर प्रहार। इसके लिए भारतीय मुस्लिमों की सांप्रदायिक भावनाओं का इस्तेमाल कर भारत को खत्म करने की योजना बनाई गई और समुदाय विशेष को आतंकवादी कृत्यों का सहारा लेने के लिए उकसाया गया।

राकेश मारिया ने ‘Let Me Say It Now’ नाम की लिखी अपनी एक किताब में एक नहीं बल्कि ऐसे कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जिनमें मुंबई हमलों के गुनेहगार अजमल कसाब को ‘हिन्दू आतंकी’ साबित करने की साजिशों को लेकर भी कई खुलासे किए गए हैं। मारिया की किताब ने उन कई रहस्यों से भी परदा उठाया है, जो अभी तक सिर्फ एक राज बने हुए थे। किताब में राकेश मारिया ने लिखा है कि सुबह साढ़े चार बजे वो कसाब से कहते हैं कि वो अपना माथा ज़मीन से लगाए… और उसने ऐसा ही किया। इसके बाद जब कसाब खड़ा हुआ तो राकेश मारिया ने कहा, “भारत माता की जय बोल” कसाब ने फिर ऐसा ही किया। मारिया दोबारा भारत माता की जय बोलने के लिए कहते हैं और ऐसा ही करता है। तब के पुलिस कमिश्नर मारिया कसाब को शव-गृह भी ले गए थे, जहाँ उसे मुर्दों को देख कर उल्टी आ गई थी।

RSS के विद्या भारती के स्कूलों में 3 साल में बढ़े 30% मुस्लिम विद्यार्थी, ज्ञान के साथ राष्ट्र प्रेम की शिक्षा भी

विश्व के सबसे बड़े सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को अक्सर समुदाय विशेष का विरोधी संगठन माना जाता है, लेकिन आरएसएस की प्रेरणा से शिक्षा के क्षेत्र में चलने वाले संगठन विद्या भारती से आए आँकड़ों ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। ऐसा इसलिए कि पूरे उत्तर प्रदेश में चलने वाले विद्या भारती के स्कूलों मे पिछले करीब 3 साल में 30 प्रतिशत मुस्लिम विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है।

प्रदेशभर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की प्रेरणा से शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे विद्या भारती के स्कूलों में मुस्लिम छात्रों की संख्या में पिछले तीन सालों में करीब 30% की बढ़ोतरी देखी गई है। आँकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में 49 जिलों वाले पूर्वी यूपी में विद्या भारती के स्कूलों में मुस्लिम छात्रों की संख्या 6,890 थी, जो कि वर्ष 2019 में बढ़कर 9,037 हो गई। उत्तर प्रदेश के इन स्कूलों में लगभग 12,000 से अधिक मुस्लिम और ईसाई छात्र पढ़ते हैं। इतना ही नहीं, ये छात्र पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी आगे रहने की कोशिश में लगे हुए हैं।

ऐसे ही एक स्कूल में पढ़ने वाले छात्र के पिता मोहम्मद चाँद कहते हैं, “हमने इस स्कूल में (सरस्वती शिशु मंदिर) में शिक्षा की गुणवत्ता देखी, फिर वहाँ अपने बच्चे को भेजने का फैसला किया। इससे पहले मिथक था कि ये स्कूल केवल हिंदुओं के लिए हैं और वे अल्पसंख्यकों का एडमिशन नहीं करते हैं। हमारे बच्चे को भी वहाँ पढ़कर काफी अच्छा लग रहा है।”

विद्या भारती के अतिरिक्त सचिव (पूर्वी उत्तर प्रदेश) चिंतामणि सिंह कहते हैं, विद्यालय में शिक्षा के साथ बच्चों को संस्कार मिलना कहीं न कहीं अभिवावकों को विद्यालय की ओर आकर्षित करता है। साथ ही हमारे विद्यालयों में अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाती हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में मुस्लिम छात्रों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में विद्या भारती के स्कूलों में करीब छह लाख छात्र पढ़ते हैं, जिनमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं।

विद्या भारती के स्कूलों में पढ़ने वाले ये सभी मुस्लिम छात्र सुबह में होने वाली सरस्वती वंदना और उसके बाद संस्कृत भाषा में होने वाले श्लोकों और मंत्रों के साथ होने वाली प्रार्थना में हिस्सा लेकर अपने दिन की शुरुआत करते हैं, यहाँ हर रोज संगठन की रीति-नीति से विद्यालय बंद से पूर्व वंदे मातरम भी कराया जाता है।

आपको बता दें कि शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती को भारत का सबसे बड़ा ग़ैर सरकारी संगठन माना जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1977 में हुई थी। इससे पहले वर्ष 1952 में गोरखपुर में पाँच रुपए किराए के मकान से संघ की प्रेरणा से कुछ स्वयंसेवकों ने शिशु मंदिर की शुरूआत की थी। आज पूरे देश में विद्या भारती के अंतर्गत कुल मिलाकर 30,000 शिक्षण संस्थाओं में 9,00,000 शिक्षकों के मार्गदर्शन में 45 लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा और संस्कार प्राप्त कर रहे हैं।

मोदी वाले लिट्टी चोखा स्टॉल पर उमड़ी भीड़, तो वहीं बंद हो गई राहुल बाबा वाली दुकान, लोगों ने लिए मजे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू कह लीजिए या उनके प्रति देशवासियों का प्रेम और स्नेह कि वे अगर मिट्टी भी छू लें तो सोना हो जाए। यह कुछ उनके किसी चुनावी रैली में दिए गए भाषण का अंग नहीं है, जब उन्होंने खुद को भाग्यशाली कहा था। न ही लिट्टी चोखा कोई ‘मिट्टी’ ही है जिसे छूकर सोना बनाया जा सकता है। उदाहरण थोड़ा कम उपयुक्त हो सकता है, पर आप ‘उपमा’ का क्या कीजिएगा, जब संदर्भ-प्रसंग का अंदाजा आप को हो ही चुका होगा तो केवल ‘भाव’ पकड़िए न!

खैर राजपथ के लॉन में आयोजित हुनर हाट में मोदी ने रुक कर जो पूर्वांचल विशेषकर बिहार के सबसे लोकप्रिय स्नैक/भोजन लिट्टी चोखा का स्वाद क्या लिया, लिट्टी-चोखा ट्रेंड करने लगा।

एक तरफ जहाँ लिट्टी चोखा के उस स्टॉल पर टूट रही भीड़ संभाले नहीं सम्भल रही, वहीं मोदी के लिट्टी-चोखा खाते हुए वायरल हो चुकीं तस्वीरें लिबरल्स को बुरे सपनों की तरह रात-रात भर परेशान कर रही हैं।

लिबरल्स की परेशानी तो समझी जा सकती है पर उस लिट्टी चोखा स्टॉल के रंजन राज की तो जैसे किस्मत ही खुल गई। पटना के रहने वाले रंजन राज बताते हैं कि उनके स्टॉल पर इतनी भीड़ हो रही है- लिट्टी चोखा खाने वालों की, कि उन्हें बुजुर्गों के लिए अलग से लाइन लगानी पड़ रही है!

रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक जो स्टॉल लगभग गुमनाम था, अब वहाँ लोगों की भीड़ उमड़ रही है, लिट्टी चोखा खाते हुए लोग सेल्फी ले रहे हैं। पीएम मोदी के यहाँ पर लिट्टी चोखा खाने के बाद एक तरफ परिजन से मिलने वाली बधाइयां और दूसरी तरफ लिट्टी-चोखा खाने के लिए आने वाले लोगों की संख्या को देखकर, पटना के रहने वाले स्टॉल संचालक रंजन राज गदगद हैं।

यह तो हुई नरेंद्र मोदी के किसी लिट्टी चोखा स्टॉल पर रुकने और लिट्टी चोखा खाने की कहानी, अब जरा मोदी को लेकर अनर्गल बयानबाजी करते हुए घूमने वाले राहुल गाँधी के ही ऐसे किसी किस्से पर बात हो जाए वर्ना छेनू कुमार गोदी मीडिया कहकर रोने लगेंगे।

तो हुआ कुछ यूँ था कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान रायचूर पहुँचे ‘शिव भक्त जनेऊधारु’ राहुल जी भी किसी चाय पकोड़ा वाली दुकान पर ठहरे थे, अपने “जनेऊधारी” ने वहाँ मिर्ची वाले पकौड़े भी खाए थे। जिसके बाद ‘मौलाना ढाबा’ नामक उस दुकान के मालिक ने उनकी तस्वीर भी मढ़वा कर दुकान पर टाँग दी थी। अब सुनते हैं वो दुकान बंद हो गई है। सोशल मीडिया पर इसको लेकर खूब मजे लिए जा रहे हैं वहीं कुछ का कहना है कि दुकान के मालिक के यहाँ कोई शादी है और इस कारण दुकान बंद हुई है।

खैर कारण जो भी हो पर अगर यहाँ भी कुछ लोगों को लगे कि इसमें भी मोदी का हाथ है और उनको इस्तीफा देना चाहिए, तो वे बेशक अपने ‘पनौती’ बाबा के नाम का बिल मोदी के नाम फाड़ सकते हैं। आखिर इतनी तो आजादी हैए है अभी।