अमेरिका के लुइसियाना राज्य के न्यू ऑरलियंस शहर में गाड़ी से रौंद और फायरिंग करके 15 लोगों की हत्या करने वाले शमसुद दीन (शम्सुद्दीन) जब्बार को लेकर कई तथ्य सामने आए हैं। जब्बार ने यह आतंकी हमला टाइम्स स्क्वायर पर इजरायल विरोधी प्रदर्शनकारियों द्वारा ‘इंतिफादा क्रांति’ का आह्वान करने के एक घंटा बाद किया। आतंकी जब्बार का संबंध उसके पड़ोसी ‘मस्जिद बिलाल’ से भी बताया जा रहा है।
जब्बार ह्यूस्टन के बाहरी इलाके में एक गंदे ट्रेलर पार्क में रहता था, जहाँ ज़्यादातर मुस्लिम अप्रवासी रहते हैं। जब्बार ने अपने घर में बत्तख, मुर्गे-मुर्गियाँ और भेड़ें पाल रखी थीं और हमले के बाद जब मीडिया उसके घर के पास पहुँचे तो ये जीव वहाँ खुलेआम घूम रहे थे। जब्बार का स्थानीय मस्जिद ‘मस्जिद बिलाल’ से कुछ ही दूरी पर रहता था।
आतंकी हमले के बाद मस्जिद बिलाल के लोगों के मीडिया और एजेंसियों ने संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वहाँ किसी ने जवाब नहीं दिया। खुद को आतंकवाद विशेषज्ञ एवं पूर्व मुस्लिम बताने वाले ब्रदर रैचिड (ब्रदर राशिद नाम से X हैंडल) ने अपने सोशल मीडिया पर कहा कि जब्बार ने आतंकी हमले से पहले इस मस्जिद में गया था।
जब्बार ने अपने पोस्ट में कहा, “पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने, अधिकारियों के साथ सहयोग करने या अपनी शिक्षाओं के बारे में मीडिया को पारदर्शिता के साथ संबोधित करने के बजाय, उनका (मस्जिद बिलाल से जुड़े लोगों का) प्राथमिक ध्यान मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा पर था (सभी अमेरिकियों की सुरक्षा पर नहीं)। उन्होंने (मस्जिद के अधिकारियों ने) अपने सदस्यों को सलाह दी कि वे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन CAIR (The Council on American-Islamic Relations) से परामर्श किए बिना मीडिया से बात न करें या एफबीआई के साथ सहयोग न करें।”
ब्रदर राशिद नाम के हैंडल ने अपने पोस्ट के साथ एक नोट साझा किया है। इसमें लिखा है, “अस्सल्लाम वलैकुम भाइयों एवं बहनों। मुझे विश्वास है कि आप लोगों में से बहुत से लोगों ने न्यू ऑरलियंस में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में सुना होगा, जिसे FBI ने आतंकी हमला करार दिया है। हमें अपने आसपास को लेकर चौकन्ना रहना होगा। हमारे समुदाय की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। अगर मीडिया द्वारा किसी को संपर्क किया जाए तो आप लोग उनका जवाब ना दें। अगर FBI द्वारा संपर्क किया जाए और जवाब देना जरूरी हो तो उन्हें CAIR या ISGH भेज दें।”
The mosque possibly attended by the New Orleans terrorist in Houston, Texas, chose a troubling response. Instead of offering condolences to the victims’ families, pledging cooperation with authorities, or addressing the media with transparency about their teachings, their primary… pic.twitter.com/sMJ4BVxo2z
— Brother Rachid الأخ رشيد (@BrotherRasheed) January 2, 2025
फिलिस्तानियों के ‘इंतिफादा क्रांति’ वाले प्रदर्शन के घंटे भर बाद आतंकी हमला
बता दें कि यह हमला न्यू ईयर सेलिब्रेशन के दौरान जब्बार नाम के आतंकी द्वारा किया गया है। वह ह्यूस्टन का रहने वाला था और अमेरिकी सेना में भी रह चुका था। हाल फिलहाल में वह कुरान का संदर्भ देते हुए कई वीडियो भी बनाए थे। इन्हें अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों ने हासिल किया है और उसकी पर्याप्त जाँच कर रही है। उसकी गाड़ी से ISIS के झंडे भी मिले हैं।
दरअसल, नए साल के आगमन पर दुनिया के भर लोग पार्टी कर रहे थे। वहीं, टाइम्स स्क्वॉयर पर सैकड़ों फिलिस्तीन एवं आतंकी संगठन हमास समर्थक प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। वे इजरायल के विरोध में फिलिस्तीनी झंडे लहराते हुए ‘इंतिफादा क्रांति’ का आह्वान कर थे। इस घटना के एक घंटे के अंदर न्यू ऑरलियन्स के फ्रेंच क्वार्टर में एक आतंकी हमला कर दिया गया।
सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में दिख रहा है कि बुर्का या हिजाब पहनी एक महिला प्रदर्शनकारी ने बाहर मौजूद प्रदर्शनकारियों पर चिल्लाते हुए कहा, “हम तुम्हें वापस यूरोप भेज रहे हैं, तुम गोरे कमीने। वापस यूरोप जाओ! वापस यूरोप जाओ।” एक अन्य कहता है, “2024 यहूदियों के अपराधों के विरुद्ध संघर्ष का वर्ष था। हम पूर्ण मुक्ति तक यहाँ साल दर साल आएँगे।”
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘इज़राइल को दी जाने वाली सभी अमेरिकी सहायता बंद करो’, ‘यहूदीवाद को खत्म करो’ और ‘ईरान पर कोई युद्ध नहीं’ जैसे संदेशों वाले पोस्टर ले रखे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारी भीड़ ने ‘इंतिफादा क्रांति’ का नारा लगाया। इसके साथ हीयह भी कहा, “हम अपने सभी शहीदों का सम्मान करेंगे।” उसके एक घंटे बाद न्यू ऑरलियंस की यह घटना हो गई।
टाइम स्क्वायर पर फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारी (साभार: NYP)
यह विरोध प्रदर्शन फिलिस्तीनी युवा आंदोलन ‘सोशलिज्म एंड लिबरेशन पार्टी एंड पीपुल्स फोरम’ द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में इंतिफादा क्रांति के नारे लग रहे थे। प्रदर्शनकारी चिल्ला रहे थे, ‘सिर्फ एक ही समाधान है: इंतिफादा क्रांति’। ‘इंतिफादा’ शब्द फिलिस्तीन के आतंकी हमास से नहीं, बल्कि कई मुस्लिमों की गैर-मुस्लिमों के शासन के खिलाफ बगावत से जुड़ा है।
इंतिफादा एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है बगावत या विद्रोह। इंतिफादा शब्द का सबसे ज्यादा इस्तेमाल ‘तख्तापलट’ जैसे कामों में मिडिल-ईस्ट से लेकर उत्तरी-पश्चिमी अफ्रीकन देशों में हुआ है और पिछले कुछ दशकों से इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध में इसे ‘इजरायल’ के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। इजरायल के खिलाफ ‘इंतिफादा’ का ऐलान किया जाता है।
एक तरफ इसे प्रतिरोध बताया जाता है, तो दूसरी तरफ कायराना हमले भी इजरायल पर किए जाते हैं। इस समय हमास-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध को पाँचवाँ इंतिफादा भी कहा जा रहा है। इजरायल-फिलिस्तीन संकट के संदर्भ में इसे धर्मयुद्ध से भी जोड़ सकते हैं। एक तरफ यहूदी इजरायल का विरोध कर रहे मुस्लिम फिलिस्तीनी और अरबी हैं, तो दूसरी तरफ उन्हें समर्थन दे रहे मुस्लिम देश।
अमेरिका के न्यू ओर्लियंस शहर में बुधवार (1 जनवरी, 2025) को आतंकी हमला करने वाले की पहचान इस्लामी आतंकी शमसुद-दीन जब्बार के तौर पर हुई है। उसकी गाड़ी में ISIS का झंडा भी मिला है। जब्बार अमेरिकी नागरिक था और आर्मी में भी सेवाएँ दे चुका था।
अमेरिकी जाँच एजेंसियाँ उसके बारे में और भी जानकारियाँ जुटाने में लगी हुई हैं। इस बात की भी आशंका जताई गई है कि वह अकेला नहीं था बल्कि उसके साथ इस हमले में कई और लोग भी शामिल थे। इस इस्लामी आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या 15 हो चुकी है।
अमेरिकी मीडिया के अनुसार, शमसुद-दीन जब्बार (Shamsud-Din Jabbar) अमेरिकी नागरिक था और टेक्सास का निवासी था। उसकी उम्र 42 साल थी। वह 2007 से 2020 तक अमेरिकी सेना में भी अपनी सेवाएँ दे चुका था। वह 2007 से 2015 तक स्थायी सैनिक रहा था।
वह अमेरिकी सैनिक के तौर पर अफगानिस्तान भी भेजा गया था। 2009 से 2010 के बीच वह अफगानिस्तान में तैनात रहा था। उसे सेवा के दौरान 15 मैडल और सम्मान दिए गए थे। उसे आतंक से लड़ने के लिए भी एक मेडल दिया गया था।
जब्बार 2015 में सेना से रिटायर होने के बाद सैन्य रिजर्व बटालियन में काम करता था। 2015-20 के बीच उसने अमेरिकी सेना के लिए IT विशेषज्ञ के तौर पर काम किया था। सेना में जाने से पहले उसने अमेरी नौसेना में जाने का प्रयास भी किया था।
अमेरिकी सेना के लिए काम करने के अलावा वह डेलोइट जैसी कम्पनियों के लिए भी काम करता था। यहाँ वह लगभग $1,20,000 (लगभग ₹1 करोड़) कमाता था। उसकी पहली बीवी से उसका तलाक 2012 जबकि दूसरी बीवी से 2022 में हो गया था।
जब्बार ने हमले के लिए जो ट्रक इस्तेमाल किया, वह किराए का था। इसके अलावा उसने न्यू ओर्लियंस में एक कमरा भी कथित तौर पर किराए पर लिया था। कमरे और ट्रक दोनों में ही सुरक्षा एजेंसियों को विस्फोटक मिले हैं। जिस कमरे में वह रुका था वहाँ बम बनाने की तैयारी थी।
उसकी गाड़ी में ISIS का एक झंडा मिला है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वह बीते कुछ वर्षों में कट्टर इस्लामी बना और हमास के इजरायल पर हमले के बाद ही उसने यह कदम उठाने का फैसला किया। जब्बार की एक पुरानी वीडियो भी सामने आई है जिसमें वह खुद को रियल एस्टेट एजेंट बता रहा है।
FBI को शक है कि इस आतंकी हमले में उसके साहत कुछ और लोग शामिल थे। एक CCTV फुटेज में उसकी गाड़ी में कुहक लोग विस्फोटक भी रखते दिखे हैं। इनकी पहचान नहीं हो पाई है। इन विस्फोटकों को रिमोट से उड़ाने की योजना थी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने इस हमले पर दुख जताया है।
शमसुद-दीन का ताल्लुक ISIS से कैसा था और उसे कहाँ से बम बनाने और यह हमला करने को लेकर निर्देश दिए गए थे, यह अभी सामने नहीं आया है। जब्बार को लेकर और भी जानकारी जुटाने का प्रयास चल रहा है। इस आतंकी हमले में अब तक 15 लोग मारे जा चुके हैं। 35 लोग घायल हैं। शमसुद-दीन हमले के बाद मारा जा चुका है।
बीते साल यानी नवंबर 2024 में मोदी सरकार ने Wikipedia को एक नोटिस भेजा, जिसमें इस कथित ‘फ्री इनसाइक्लोपीडिया’ द्वारा प्रकाशित भ्रामक और पक्षपाती जानकारी पर सवाल पूछे गए।
यह नोटिस केंद्र सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय (I&B) द्वारा जारी किया गया। इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि Wikipedia की सामग्री पर एक छोटे समूह के संपादकों का नियंत्रण है, जो इसमें हेरफेर करने में सक्षम होते हैं और एकपक्षीय जानकारियाँ उपलब्ध कराते हैं।
सरकार ने Wikipedia से पूछा है कि उसे मध्यस्थ (Intermediary) की बजाय एक प्रकाशक (Publisher) क्यों न माना जाए। बता दें कि ऑपइंडिया ने 9 सितंबर 2024 को प्रकाशित किए अपने 187 पन्नों के डोजियर में भी इस मुद्दे को उठाया था।
इस पूरे मामले को समझने के लिए Wikimedia Foundation की पूर्व CEO कैथरीन माहेर के दो मुख्य भाषणों और Wikipedia के प्रोपेगैंडा टूल के रूप में काम करने के तरीके की पड़ताल करते हैं।
कैथरीन माहेर ने गलती से खोली थी विकिपीडिया की पोल
अगस्त 2021 में कैथरीन माहेर ने एक TED टॉक में अनजाने में यह खुलासा किया कि Wikipedia के माध्यम से फैलाई गई जानकारी सत्य पर आधारित नहीं होती।
कैथरीन माहेर ने अपने TED टॉक में कहा कि भले ही मीडिया और विज्ञान पर जनता का भरोसा कम हो, लेकिन लोग Wikipedia पर विश्वास करते हैं। उन्होंने इसे ‘सामान्य लोगों’ द्वारा ‘स्वैच्छिक’ रूप से किए गए संपादन(एडिटिंग) का नतीजा बताया।
हालाँकि, ऑपइंडिया अपने डोजियर में यह साबित कर चुका है कि कैसे Wikipedia पर कुछ गिने-चुने लोगों (एडिटरों) का कंट्रोल होता है। यही लोग तय करते हैं कि कौन-सी जानकारी प्रकाशित की जाए और कौन सी नहीं। अगर कोई लेख इनके प्रोपेगेंडा की पोल खोल सकता है, तो उसे तुरंत हटा दिया जाता है।
विकिपीडिया के इन एडिटर्स यानी मुट्ठी भर लोगों के पास एडिटिंग पर बैन लगाने, एडिटर्स को बैन करने, विवाद सुलझाने, पेज हटाने, पेज लॉक करने और सामग्री को ओवरराइड करने की ताकत होती है। दुनिया भर में केवल 435 सक्रिय एडमिनिस्ट्रेटर्स हैं, जो Wikipedia पर व्यापक नियंत्रण रखते हैं। ये 435 लोग चाहें तो विकिपीडिया पर मौजूद किसी भी जानकारी को तुरंत बदल सकते हैं और इन्हें कोई चुनौती भी नहीं दी जा सकती, क्योंकि वो उसे खुद ही खारिज कर देंगे।
कैथरीन माहेर ने अपने TED टॉक में दावा किया कि Wikipedia की जानकारी इस पर आधारित है कि “ज्यादातर लोग क्या उचित और सही मानते हैं।” लेकिन OpIndia इसे गलत ठहराते हुए बता चुका है कि Wikipedia की कार्यप्रणाली पारदर्शी होने के बजाय एक ठोस व्यवस्था के तहत चलती है, जो किसी भी पब्लिशिंग हाउस की तरह ही सख्त एडिटोरियल नियंत्रण और अनुशासन के साथ काम करती है।
अपने टेडटॉक में माहेर ने यह भी स्वीकार किया कि Wikipedia का उद्देश्य सत्य की खोज या दूसरों को सत्य के लिए राज़ी करना नहीं है। उन्होंने इसे ‘ध्यान भटकाने वाला’ बताया।
माहेर ने जोर देकर कहा, “हो सकता है कि हमारे सबसे कठिन मतभेदों के लिए, सत्य की खोज और दूसरों को सत्य के लिए मनाने की कोशिश सही जगह न हो। वास्तव में सत्य के प्रति हमारा सम्मान, साझा आधार खोजने और चीजों को पूरा करने में बाधा बन सकता है।”
विकिपीडिया ‘सत्य’ की बजाय ‘लोगों के लिए उपयुक्त जानकारी’ का साधन
कैथरीन माहेर ने अपने TED टॉक और अन्य सार्वजनिक भाषणों में स्पष्ट किया कि विकिपीडिया पर लिखने वाले लेखक ‘सत्य’ पर ध्यान केंद्रित नहीं करते। उन्होंने कहा, “जो लोग इन लेखों को लिखते हैं, वे सत्य पर नहीं, बल्कि वर्तमान समय में जो सबसे अच्छा संभव ज्ञान है, उस पर ध्यान केंद्रित करते हैं।”
उन्होंने ‘सत्य के कई वर्जन(संस्करण)’ की बात की और कहा कि सत्य की कठोर खोज लोगों के बीच विभाजन पैदा कर सकती है। माहेर ने तर्क दिया कि “हमारी सच्चाई हमारे अनुभवों से आती है, और जब हम सत्य पर जोर देते हैं, तो यह हमें विभाजन की ओर ले जाता है, न कि एकता की ओर।”
उन्होंने सुझाव दिया कि साझा समझ के लिए, ‘एक सत्य’ को आधार बनाने की बजाय ‘न्यूनतम व्यवहार्य सत्य’ (Minimum Viable Truth) को अपनाना चाहिए। माहेर के अनुसार, “न्यूनतम व्यवहार्य सत्य का मतलब है इतनी सटीक जानकारी देना, जो पर्याप्त समय तक पर्याप्त लोगों के लिए उपयोगी हो।”
कैथरीन माहेर ने स्वीकार किया कि विकिपीडिया में ‘वास्तविकता के सही और अंतिम रूप’ की खोज का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकिपीडिया की कार्यप्रणाली एक प्रकाशित सत्य की बजाय ज्ञान को वितरित करने के माध्यम के रूप में काम करती है।
उन्होंने कहा, “विकिपीडिया सत्य का प्रतिनिधित्व नहीं करता। यह ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जहाँ सत्य को विकसित, अस्थिर और परिवर्तनीय (बदलता) माना जाता है। यह प्लेटफ़ॉर्म इंसानों की दुनिया को समझने की प्रक्रिया को दर्शाता है, जो जटिल और समय के साथ बदलने वाली होती है।”
उन्होंने गैलीलियो, कोपरनिकस और मार्टिन लूथर जैसे ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देकर यह समझाने की कोशिश की कि सत्य समय के साथ विकसित होता है और इसकी खोज हमेशा आसान या परिणाम रहित नहीं होती।
विकिपीडिया में संपादकीय नियंत्रण
माहेर ने यह भी स्वीकार किया कि विकिपीडिया में पक्षपात और गलतियाँ मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “मेरे विकिपीडिया के प्रति प्रेम के बावजूद, मैं इसकी पूर्णता का दावा नहीं करती। यह बहुत बार सही हो सकता है, लेकिन यह त्रुटिपूर्ण और अधूरा भी हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि यह उतना ही पक्षपाती है, जितना हम सभी हैं।”
कैथरीन माहेर ने यह भी कहा कि शुरुआत में विकिपीडिया पर पश्चिमी गोरे मर्दों(श्वेत पुरुषों) का दबदबा था, जिसके लेखन में कई महत्वपूर्ण पूर्वाग्रह और खामियाँ थीं। माहेर ने जोर देकर कहा कि इस व्यवस्था को बदलने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं ताकि अधिक विविध आवाजें शामिल हो सकें।
उन्होंने कहा, “हमने महसूस किया कि विकिपीडिया में लेखन के तरीके और लेखों की दिशा पर गोरे पुरुषों का प्रभाव था। इसे सुधारने और इसे और अधिक समावेशी बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।”
विकिपीडिया एकदम ‘सच’ नहीं है: कैथरीन माहेर
कैथरीन माहेर नवंबर 2021 में हाउस ऑफ ब्यूटीफुल बिजनेस ‘कंक्रीट लव’ में भी शामिल हुईं थी और उन्होंने विकिपीडिया के कामकाज को व्यापक तरीके से समझाने की कोशिश की थी। माहेर ने एक और महत्वपूर्ण बिंदु उठाया कि विकिपीडिया की जानकारी ‘वर्तमान समय के सबसे अच्छे संभव ज्ञान’ पर आधारित है। उन्होंने कहा कि विकिपीडिया के लेखों को लिखने वाले सत्य की खोज में नहीं हैं, बल्कि लोगों के लिए उपयोगी और प्रासंगिक जानकारी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हमारे विवाद आमतौर पर इस बात पर होते हैं कि किसी मुद्दे का सत्य क्या है। विकिपीडिया पर भी राजनीति और धर्म पर चर्चा कठिन होती है। लेकिन विकिपीडिया के लेखक इन विषयों पर किसी अंतिम सत्य को खोजने के बजाय वर्तमान में सबसे अच्छी जानकारी देने का प्रयास करते हैं।”
कैथरीन माहेर के भाषणों से यह स्पष्ट होता है कि विकिपीडिया का प्राथमिक उद्देश्य सत्य को परिभाषित करना नहीं, बल्कि जनता के लिए सुविधाजनक और उपयोगी जानकारी प्रदान करना है। उनके शब्दों में, “विकिपीडिया चीजों को सही करने का प्रयास करता है, लेकिन यह यह दावा नहीं करता कि वह सत्य का प्रतिनिधित्व करता है।”
कैथरीन माहेर ने अपने भाषण में सत्य को “एक अस्थिर और व्यक्तिगत अवधारणा” बताया। उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि आप में से प्रत्येक के लिए सत्य मौजूद है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि आपके बगल में बैठे व्यक्ति के लिए वही सत्य हो।”
माहेर ने दावा किया कि सत्य व्यक्तिगत होता है और इसका उपयोग सामूहिक रूप से काम करने और एक मध्य मार्ग तक पहुंचने के लिए किया जाना चाहिए, भले ही वह सत्य का पूर्ण प्रतिनिधित्व न करे। उन्होंने कहा, “अगर हम यह तय करने लगें कि किसका सत्य सबसे अच्छा है, तो हम शुरुआत से अधिक दूरियाँ बना लेंगे। यह हमें मूल्यों और पहचान के सवालों में उलझा देगा और असहमति पर ध्यान केंद्रित करेगा, बजाय इसके कि हमें क्या जोड़ता है।”
माहेर ने कहा कि विकिपीडिया संपादकों के बीच सहयोग, जो अलग-अलग दृष्टिकोण रखते हैं, वास्तविक सत्य के प्रचार से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “सहयोगपूर्ण अस्तित्व, सहमति और कार्रवाई के लिए हमें एक सत्य की आवश्यकता है।” उन्होंने आगे कहा, “हमें एकीकृत सत्य पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, पर्याप्त सहमति खोजने की आवश्यकता है ताकि हम आगे बढ़ सकें। विकिपीडिया में हमारा उद्देश्य सब कुछ हल करना नहीं था, बल्कि अधिकांश लोगों के लिए इतनी सटीकता प्राप्त करना था कि यह उपयोगी हो सके।”
माहेर ने विकिपीडिया पर तटस्थता की अवधारणा पर भी बात की। उन्होंने कहा, “विकिपीडिया यह मानता है कि हम सभी में पूर्वाग्रह होते हैं। यही कारण है कि आपको अपने बारे में लेख लिखने की अनुमति नहीं है, क्योंकि आपके लिए खुद को निष्पक्ष दिखाना मुश्किल होगा।” हालाँकि, विकिपीडिया के सह-संस्थापक लैरी सेंगर सहित अन्य शोधों ने विकिपीडिया की स्पष्ट वैचारिक पक्षपात को उजागर किया है।
जून 2024 में डेविड रोज़ाडो द्वारा मैनहट्टन इंस्टीट्यूट के शोध के अनुसार, विकिपीडिया का झुकाव वामपंथ की ओर अधिक है। ‘द क्रिटिक’ नाम के रिसर्च ने इसके लिए विकिपीडिया की दो नीतियों – ‘न्यूट्रल पॉइंट ऑफ व्यू’ और ‘रिलायबिलिटी’ पर ध्यान केंद्रित किया।
1- शोध ने निष्कर्ष निकाला कि विकिपीडिया पर कौन से स्रोत विश्वसनीय हैं, यह संपादकों द्वारा तय किया जाता है। वामपंथी स्रोतों को विश्वसनीय माना जाता है, जबकि दक्षिणपंथी स्रोतों को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है।
2- इसी तरह से ‘न्यूट्रल पॉइंट ऑफ व्यू’ का मतलब केवल ‘विश्वसनीय स्रोतों’ का प्रतिनिधित्व करना होता है, न कि सभी दृष्टिकोणों को शामिल करना।
विकिपीडिया का असली चेहरा : इन शोधों और माहेर के भाषणों से यह स्पष्ट होता है कि विकिपीडिया की ‘तटस्थता’ और ‘सत्य’ की धारणा केवल दिखावा है। इसका वास्तविक उद्देश्य ऐसी जानकारी प्रदान करना है, जो संपादकों के विचारों के अनुरूप हो और जो बहुसंख्यक लोगों को ‘उपयुक्त’ लगे।
लैरी सेंगर भी खोल चुके हैं पोल: विकिपीडिया के सह-संस्थापक लैरी सेंगर मंच पर वामपंथी झुकाव, अविश्वसनीयता और पूर्वाग्रह होने का आरोप लगा चुके हैं। सेंगर का मानना है कि विकिपीडिया तटस्थ ज्ञान का स्रोत होने के बजाय वैचारिक एजेंडा के लिए एक मशीनरी बन चुका है।
ऑपइंडिया की डोजियर में विकिपीडिया और Wikimedia Foundation का पर्दाफाश
सितंबर 2024 में ऑपइंडिया अपने डोजियर में विकिपीडिया और Wikimedia Foundation का पर्दाफाश कर चुका है। ऑपइंडिया ने अपने रिसर्च में पाया है कि विकिपीडिया न तो मुफ्त(फ्री) है और न ही ये वैचारिक हस्तक्षेप से मुक्त है। विकिपीडिया भारत में मुफ्त सामग्री देने के नाम पर डोनेशन लेता है और फिर भारत के खिलाफ ही उसे इस्तेमाल करता है। हालाँकि वो बताता है कि वो अपने एडिटरों यानी संपादकों को कोई पैसा नहीं देता। विकिपीडिया से जुड़े कुछ अहम रहस्यों को इस तरह से जान सकते हैं –
Wikimedia और Tides Foundation का गठजोड़: Wikimedia Foundation का वित्तीय संबंध Tides Foundation से है, जिस पर अमेरिका में हमास समर्थक विरोध प्रदर्शनों और जॉर्ज सोरोस से जुड़े संगठनों को वित्तीय सहायता देने के आरोप हैं। Tides Foundation और Wikimedia Foundation ने कई संगठनों को वित्तीय सहायता दी है जो भारत के हितों के खिलाफ काम करते हैं, जैसे Hindus For Human Rights, Equality Labs, आर्ट+फेमिनिज्म, एक्सेस नाउ, भारतीय उद्योगपतियों के खिलाफ हिंडेनबर्ग जैसे संगठनों की वो मदद करता है।
भारत में Wikimedia की भूमिका: Wikimedia Foundation की भारत में 2019 से कोई औपचारिक उपस्थिति नहीं है। इसके बावजूद, यह भारत से भारी मात्रा में डोनेशन पाता है और इसे वो उन एनजीओ में बाँटता है, तो भारत में Wikimedia Foundation के व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देते हैं।
विकिपीडिया में एडिटिंग एकतरफा: शोध में पाया गया कि भारत से जुड़े विषयों पर विकिपीडिया के लेख सीमित संपादकों और प्रशासकों के एक ग्रुप द्वारा कंट्रोल किए जाते हैं। विकिपीडिया के इन संपादकों में से एक को मणिपुर राज्य में वैमनस्य फैलाने के आरोप में पकड़ा जा चुका है।
विकिपीडिया का स्पष्ट वैचारिक झुकाव: विकिपीडिया के लेखों में हिंदू विरोधी और भारत विरोधी पूर्वाग्रह स्पष्ट रूप से दिखते हैं। यह पक्षपात Google और Wikimedia Foundation के साझेदारी के कारण और बढ़ता है, जो विषयों को परिभाषित करने में एकतरफा दृष्टिकोण अपनाते हैं।
विकिपीडिया और Wikimedia Foundation का दावा है कि वो तटस्थ है और अपने कामकाज में पारदर्शिता बरतता है, वो पूरी तरह से भ्रामक है और सच्चाई से कोसों दूर है। क्योंकि विकिपीडिया के संचालन और कंटेंट में इसका वामपंथी झुकाव, वैचारिक पक्षपात और भारत विरोधी रुख गहराई तक साफ तौर पर दिखता है।
अमेरिका के लुसियाना में नए साल का जश्न मना रहे लोगों पर आतंकी हमला हुआ है। हमला करने वाले ने एक मिनी ट्रक को भीड़ में घुसा दिया और लोगों को कुचल दिया। इसके बाद ट्रक ड्राईवर ने गोलीबारी भी की। रिपोर्ट लिखे जाने तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 30 के घायल होने की सूचना है। घटना बुधवार (1 जनवरी, 2025) की है।
मीडिया रिपोर्ट्सके मुताबिक, घटना लुसियाना के न्यू ऑरलियंस शहर की है। यहाँ बोरबन स्ट्रीट पर जमा हो कर बुधवार की सुबह सैकड़ों लोग साल 2025 का स्वागत कर रहे थे। इसी दौरान एक मिनी ट्रक भीड़ में से लोगों को कुचलते हुए घुस गया। कोई कुछ समझ पाता इस से पहले ट्रक के नीचे कई लोग दब गए।
इसके बाद यह ट्रक रुक गया। जब तक लोग हादसे में घायल हुए कुचल चुके लोगों की मदद के लिए दौड़े तब तक ट्रक ड्राइवर उतर कर लोगों पर गोलियाँ बरसाने लगा। इसमें भी कई लोग मारे गए। उसने 2 पुलिसवालों पर भी गोलियाँ बरसाई। रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रक ड्राइवर भी मारा गया है। यह स्पष्ट नहीं है कि वह किसी पुलिसकर्मी की गोली से मरा या खुद ही गोली मार ली।
इस घटना के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में लोगों को हमले से बच कर भागते और चीखते-चिल्लाते देखा जा सकता है। हमले की सूचना के बाद पुलिस और फायर डिपार्टमेंट समेत बाकी एजेंसियाँ पहुँच गए थे। घटनास्थल पर FBI भी पहुँच गई है।
? A truck plowed into a crowd in New Orleans, USA.
इसे आतंकी हमला बता कर शहर की मेयर ने लोगों से फिलहाल सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वो जाँच एजेंसियों सहित व्हाइट हॉउस के सम्पर्क में हैं। पुलिस ने हमले में इस्तेमाल किए गए ट्रक को भी जब्त कर लिया है। FBI द्वारा की गई वाहन की जाँच के दौरान उसमें बम बरामद हुआ है। इमरजेंसी सेवाओं को अलर्ट कर दिया गया।
BREAKING: The situation in New Orleans is "very active" says Mayor LaToya Cantrell.
She adds that she has been in direct contact with the White House following a mass casualty incident.https://t.co/abiVPfkfm0
अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 30 से अधिक लोग घायल हैं। इनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। घायलों में कुछ की हालत गंभीर है जिसकी वजह से मृतकों की तादाद में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। बताते चलें कि इस से पहले वाहनों को हथियार बना कर फ़्रांस और जर्मनी में भी हमले हो चुके हैं। ऐसे हमलों को ‘लोन वुल्फ अटैक’ कहा जाता है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित होने जा रहे महाकुंभ में हिन्दुओं के सर कलम करने और बम ब्लास्ट करने की धमकी दी गई है। यह धमकी नासर पठान नाम की एक इंस्टाग्राम आईडी से दी गई है। आईडी चलाने वाला शख्स खुद को कट्टर मिया और बिहार निवासी बता रहा है। सोशल मीडिया पर उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए अभियान चल रहा है।
एक्स पर वायरल एक पोस्ट के अनुसार, नासर पठान नाम से चल रही इस आईडी से एक और व्यक्ति को एक मैसेज भेजा गया। यह मैसेज इंस्टाग्राम पर भेजा गया। इसमें लिखा गया, “रे मा@र9@ हिन्दू तुम सब का सर कलम करूँगा इंशाअल्लाह। तुम लोग का कुंभ मेला आ रहा है ना उसमें देखो कम से कम 1000 सर कलम होगा। ऐसा ब्लास्ट होगा, अल्लाह हू अकबर।”
महोदय, उपरोक्त सूचना संज्ञान में ले ली गयी है, निश्चिन्त रहें आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
यह आईडी नासर पठान के नाम से बनी है जबकि इसका यूजर नेम नासर कट्टर मिया (Nasar_kattar_miya) है। आईडी चलाने वाले शख्स से जब उसका पता पूछा गया तो उसने धमकाते हुए खुद को पूर्णिया के भवानीपुर गाँव का निवासी बताया। उसने यह भी कहा कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
इसके बाद इस आईडी के स्क्रीनशॉटस को एक्स (पहले ट्विटर) पर शेयर किया गया। इन स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए प्रयागराज पुलिस से कार्रवाई की माँग की गई है। इसके अलावा बिहार पुलिस से भी इस व्यक्ति पर कार्रवाई के लिए लगातार माँग की जा रही है।
उत्तर प्रदेश में इस मामले का पुलिस ने संज्ञान लेकर आईडी चलाने वाले की जानकारी जुटाना चालू कर दिया है। पुलिस आईडी किस नम्बर और इमेल से बनाई गई, इसका पता लगाने की कोशिश कर रही है। पुलिस इसके बाद कार्रवाई करेगी।
महाकुंभ को लेकर इससे पहले खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने भी धमकी दी थी। पन्नू ने दावा किया था कि वह इस महाकुंभ में 14 जनवरी, 29 जनवरी और 3 फरवरी, 2025 को हमला करेगा। पन्नू ने दावा किया था कि यह हमला पीलीभीत में मारे गए खालिस्तानी आतंकियों की मौत का बदला होगा।
महाकुंभ में आए साधु संतो को इससे कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ की सुरक्षा के लिए 35,000 से भी अधिक पुलिस और होमगार्ड के जवानों को तैनात किया है। महाकुंभ क्षेत्र के भीतर 56 चौकियाँ बनाई गई हैं। पूरा क्षेत्र कैमरे से लैस है।
गणित में समय-दूरी-गति वाला सवाल सबने बनाया होगा। बना कर सही उत्तर मिलने पर इठलाए भी होंगे। अफसोस यह स्कूल तक ही चलता है। आगे की पढ़ाई करने वालों के लिए नोबेल विजेता हाइजनबर्ग भाई साहब ने यह खुशी भी छीन ली। अनिश्चितता का सिद्धांत दे दिया।
भौतिकी की शब्दावली में फँसने के बजाय मोटामोटी यह समझिए कि ‘एक समय में एक ही काम’ सटिक ढंग से हो सकता है, यही है हाइजनबर्ग की अनिश्चितता का सिद्धांत। जिस समय जो कार्य कर रहे हैं, ठीक उसी समय कोई और कार्य 100% सफलता के साथ हो जाए – यह असंभव है।
हर हिंदू हाइजनबर्ग के इसी सिद्धांत पर चले, यही अभी के समय की माँग है। हिंदू सिर्फ और सिर्फ हिंदू होकर सोचे, शत्रु-शक्तियों ने यही माहौल पैदा कर दिया है। जाति-भाषा-बोली-शैली-क्षेत्र-राज्य-देश के नाम पर आपको बाँटने का षड्यंत्र रचा जा चुका है, आपको हिंदू बने रहना है। इससे ध्यान भटकने पर असफलता की गारंटी है।
विकासशील से विकसित होते हिंदू पर हमले और तेज होंगे। समाज पर षड्यंत्र का असर और भी घातक होगा अगर बचाव हिंदू से परे होकर करने की रणनीति अपनाई तो। भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है, कोई नहीं जानता। भूतकाल से लेकिन यह सबक हमें बार-बार मिला है कि जब-जब हम हिंदू टुकड़े-टुकड़े बँट कर सोचे हैं, प्रतिकार/व्यवहार किए हैं – हम मुँह की खाए हैं, गुलाम तक बने हैं।
हर एक हिंदू को सजग रहना होगा। सजग रहेंगे तभी जागृत वाली प्रक्रिया में जाएँगे। जागृति आएगी तो वो समृद्धि की ओर ले जाएगी। नागरिक के तौर पर हर ईकाई की समृद्धि ही परिवार-समाज-गाँव-देश की उन्नति का रास्ता तैयार करेगी। विकसित भारत का सपना नागरिक विकास की कड़ी-दर-कड़ी से जुड़ा हुआ है, इस बात को हम सभी को गाँठ बाँध लेना चाहिए।
किसी RSS, किसी BJP ने अखंड भारत का सपना देखा, इसलिए आप भी मत देखिए। वो सिर्फ दिवास्वप्न होगा। सपना देखिए क्योंकि यह सभी हिंदुओं के अस्तित्व की लड़ाई है। आप सपना देखिए क्योंकि आपके निर्माण से अखंड भारत का निर्माण होगा। आपकी नींव जितनी मजबूत होगी, अखंड भारत उतनी तेजी से हकीकत में बदलेगा।
लेकिन कैसे? ऊपर दिए हाइजनबर्ग के उदाहरण से। रास्ता यही है। मंदिर जाकर पूजा कर लेने भर से आप हिंदू हो गए, इस भूलावे से बाहर आना होगा। समय की माँग इससे अधिक है।
दैनिक जीवन, सोशल मीडिया या फिर कहीं किसी के साथ बात-व्यवहार-प्रतिकार – हर समय आपको हिंदू बने रहना है – पढ़िए तो हिंदू बन कर, लड़िए तो हिंदू होकर। तन-मन-धन… विकसित हो रहे हिंदू समाज को इन तीनों की जरूरत है।
सजग-जागृत-समृद्ध हिंदू की आवश्यकता क्यों है अभी? पहले नहीं थी? आगे नहीं होगी? उत्तर है – पहले भी थी। हमने उसके उलट काम किया। फलस्वरूप हम गुलाम हुए। अभी पहले के मुकाबले जरूरत ज्यादा है, दुश्मन क्योंकि शातिर है, कुछ घर के भेदी भी हैं। सबसे बचते-लड़ते हुए आगे जाना है।
भविष्य में तो हम हिंदुओं को और भी इसकी जरूरत पड़ेगी। क्योंकि तब हमले डायरेक्ट होंगे। लड़ाई डायरेक्ट ताकत की होगी। इसलिए पहले की गलतियों से सीखते हुए, भविष्य में और मजबूती से डटे रहने के लिए… वर्तमान में हमें हिंदू बने रहना है, सजग रहना है, समृद्धि की ओर बढ़ते जाना है।
हिंदुओं के सामने वर्तमान में जो लड़ाई है, वो किसी तीर-धनुष, गोली-बंदूक या मिसाइल से नहीं जीती जा सकती। हिंदू सिर्फ हिंदू होकर सोचे-जिए-बोले-लड़े, तभी हम सशक्त भी होंगे, अखंड भारत का हिस्सा भी होंगे।
अगर आप चाहते हैं कि…
बांग्लादेशी/रोहिंग्या घुसपैठियों की खबरें नहीं मिले।
इस्लामी मुल्कों में रह रहे हिंदू भाइयों-बहनों-माताओं की स्थिति सुधरे।
इस्लामी मुल्कों की ज्यादतियों से तंग आकर भारत भाग आए लोगों, विस्थापितों की भाँति यहाँ रह रहे लोगों को नागरिकता मिलने में और भी आसानी हो।
न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आए, ऐसा कोई सिस्टम विकसित हो। आम लोगों को न्यायालय से न्याय की जगह जो नाउम्मीदी मिलती है, वो दूर हो।
अयोध्या में जैसे रामलला आ गए, वैसे ही काशी-मथुरा में भी हिंदू समाज अपने आराध्य को बिना रोक-टोक देख पाएँ।
ईसाई मिशनरियों का काला-जादू और षड्यंत्र हिंदुओं के धर्मांतरण से पहले ही छू-मंतर हो जाए।
लव-जिहाद और इस्लामी कंवर्जन माफिया के जाल में कोई बहन-बेटी-भाई न फँसे।
जो भाई-बहन कभी किसी कारण से सनातन से दूर चले गए, उन सभी की घर-वापसी हो।
…तो आपको सिर्फ और सिर्फ हिंदू ही रहना होगा।
हिंदुओं और हिंदुस्तान का उत्थान बँटने से नहीं होगा। न ही यह एक दिन का संकल्प है। 1 जनवरी 2025 हो या 31 दिसंबर 2025 या अगली सदी… हम हिंदुओं को हिंदू बन कर ही रहना होगा!
मणिपुर में हिंसा की हालत को लेकर पीएम मोदी को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रही कॉन्ग्रेस को मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने आईना दिखाया है। बिरेन सिंह ने जयराम रमेश को जवाब देते हुए बताया है कि कैसे कॉन्ग्रेस ने राज्य में लगातार म्यांमार के घुसपैठियों को बसने दिया और साथ म्यांमार में अड्डा बनाकर भारत में आतंक फैलाने वाले आतंकी समूहों से भी समझौते किए। उन्होंने कॉन्ग्रेस से कहा है कि वह राज्य की स्थिति पर राजनीति करना छोड़ कर मुद्दे सुलझाने में सहायता करे।
मणिपुर की स्थिति कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान क्या थी, यह बताते हुए बिरेन सिंह ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “आप और बाकी सारे लोग जानते हैं कि में मणिपुर के आज उथल पुथल में होने का कारण कॉन्ग्रेस के अतीत के पाप हैं। जैसे कि मणिपुर में बर्मी (म्यांमार) शरणार्थियों को लगातार बसाना और म्यांमार के लड़कों के साथ SOO समझौते पर हस्ताक्षर करना, इसकी अगुवाई पी चिदंबरम ने भारत के गृह मंत्री रहते हुए अपने कार्यकाल में की थी।”
Everyone, including yourself, is aware that Manipur is in turmoil today because of the past sins committed by the Congress, such as the repeated settlement of Burmese refugees in Manipur and the signing of the SoO Agreement with Myanmar-based militants in the state, spearheaded… https://t.co/A0X9urZ7M6
बिरेन सिंह ने आगे लिखा, “आज मैंने जो माफी माँगी है, वह उन लोगों के लिए है जो जिन्हें इस हिंसा जो विस्थापित हो गए हैं और बेघर हुए हैं। एक मुख्यमंत्री के रूप में मेरी यह अपील थी कि जो हुआ उसे भोऊ जाएँ और माफ़ कर दें। हालाँकि, आप इसमें भी राजनीति घसीट लाए।”
इसके बाद बिरेन सिंह ने जयराम रमेश को याद दिलाया कि कैसे कॉन्ग्रेस के राज के दौरान मणिपुर जलता रहा था। उन्होंने लिखा, “मैं आपको याद दिला दूँ कि मणिपुर में नागा-कुकी संघर्ष के चलते लगभग 1,300 लोग मारे गए और हज़ारों लोग बेघर हुए थे। यह हिंसा कई सालों तक जारी रही थी। 1992 और 1997 के बीच समय-समय पर हिंसा भड़कती रही थी। सबसे ज्यादा हिंसा 1992-93 के दौरान हुई थी। यह पूरी हिंसा 1992 में शुरू हुई थी और लगभग पाँच वर्षों 1992-1997 तक जारी रही थी।”
Why can't the Prime Minister go to Manipur and say the same thing there? He has deliberately avoided visiting the state since May 4th, 2023, even as he jets around the country and the world. The people of Manipur simply cannot understand this neglect https://t.co/38lizNtiAy
उन्होंने आगे लिखा, “यह दौर पूर्वोत्तर भारत में सबसे हिंसक संघर्षों में से एक था। इसके चलते मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों के बीच संबंधों प्रभावित हुए। क्या पीवी नरसिम्हा राव, जो 1991 से 1996 तक भारत के प्रधानमंत्री थे और इस दौरान कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी थे, तब माफी माँगने मणिपुर आए थे? कुकी-पाईते की लड़ाई में राज्य में 350 लोगों की मौत हुई थी। कुकी-पाईते हिंसा (1997-1998) के दौरान, IK गुजराल भारत के प्रधानमंत्री थे। क्या उन्होंने मणिपुर का दौरा किया और लोगों से माफ़ी माँगी?
बिरेन सिंह ने पूछा कि कॉन्ग्रेस मणिपुर मामले को हल करने में प्रयास करने के बजाय इस पर राजनीति क्यों कर रही है। बिरेन सिंह का यह जवाब जयराम रमेश के उस सवाल पर आया जिसमें उन्होंने पूछा था कि पीएम मोदी खुद मणिपुर आकर माफी क्यों नहीं माँगते। जयराम रमेश ने दावा किया था पीएम मोदी जानबूझकर मणिपुर नहीं जा रहे। उन्होंने यह बात सीएम बिरेन सिंह के राज्यवासियों से माफी माँगने के बाद कही थी। बिरेन सिंह ने 31 दिसम्बर, 2024 को वर्ष 2024 में हुई हिंसा के लिए दुख जताया था और माफ़ी माफी माँगी थी।
गौरतलब है कि कुकी और नागा समुदाय के बीच वर्ष 1990 के दशक से लड़ाई चल रही है। यह लड़ाई कुकी समुदाय की कुकीलैंड को पाने के लिए चालू किए गए आंदोलन के बाद शुरू हुई थी। इस कथित कुकीलैंड का बड़ा हिस्सा मणिपुर की पहाड़ियों में है, यहाँ पर नागाओं का कब्जा था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह लड़ाई तब चालू हुई जब जब कुकी लड़ाकों ने नागाओं पर हमला किया, उनके गाँव जलाए और नागा समुदाय के सैकड़ों लोगों को मार डाला या उन्हें बेघर कर दिया।”
तब नागाओं ने कूकी समुदाय को चेतावनी भी दी थी कि वह हिंसा बंद कर दें लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद, नागाओं ने कूकी समुदाय पर हमले करना शुरू कर दिया और अगले 3 वर्षों में, कुकी समुदाय के 230 से अधिक लोग मारे गए। कई हजार लोग नागा इलाके से बाहर भी कर दिए गए। यह संघर्ष 1997 में जाकर रुका जब कूकी और पाईते के बीच लड़ाई चालू हुई। कुकी और पैती एक ही समूह से संबंधित हैं, लेकिन दोनों अपनी भाषा के आधार पर खुद को अलग करते हैं।
1992 में जब नागाओं ने जबरदस्ती बस रहे कूकी समुदाय के लोगों को भगाया तो वह पाईते के इलाकों में बसने लगे। इनमें से एक चुराचांदपुर भी है जो पाईते का मूलनिवास रहा है। कुकी मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में बसने लगे, जो पैतियों का गृहस्थान है। यहाँ आकर बसने वाले लोगों को कूकी उग्रवादियों ने समर्थन दिया और पाईते को परेशान करना चालू कर दिया। उन्हें अपने ही इलाके छोड़ने को कहा गया। बाद में पाईते ने सुरक्षा के लिए एक उग्रवादी समूह भी बनाया।
इसके बाद यहाँ हालात लगातार खराब होते रहे। कूकी उग्रवादी समूह ने जून 1997 में सैकुल नामक पाईते के गाँव पर हमला किया और 13 पाईते को मार डाला। इसके बाद दोनों के बीच बड़े पैमाने पर हिंसा हुईं, जिसमें लगभग 15000 लोग मारे गए और बेघर हुए। दोनों समुदाय के बीच शान्ति तब आई जब अक्टूबर 1998 में एक ‘शांति समझौते’ पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत 2 अलग-अलग संप्रदायों कुकी और ज़ोमिस को मान्यता मिली।
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने जिस समझौते के विषय में बात की वह 2005 में कॉन्ग्रेस सरकार ने किया था। यह समझौता कूकी लड़ाकों और भारतीय सेना के बीच सस्पेंशन ऑफ़ ऑपरेशन था। इसके तहत कूकी लड़ाकों को संघर्ष रोकना था। इसके अलावा केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और 25 कूकी लड़ाका संगठनों के बीच एक और समझौता हुआ था। शांति समझौते के अनुसार लड़ाका समूहों को हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल न करने के लिए कहा गया था, लेकिन इसके बाद भी कई बार झड़प और वसूली के चलते चिंता की स्थिति बनी रही।
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र में एक कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक स्थलों पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ और अश्लील इशारे करने का मामला सामने आया है। यह घटना ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम के दौरान हुई, जहाँ आरोपित ने मंच से ऐसी हरकतें कीं, जिसने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि वह व्यक्ति हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली बातें कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति ‘लंगड़ा ग्रुप ऑर्केस्ट्रा’ का मालिक है।
कार्यक्रम में मौजूद एक बुजुर्ग व्यक्ति ने जब यह सब सुना, तो वह गुस्से में आ गए और आरोपित को जमकर फटकार लगाई। बुजुर्ग ने उसे गालियाँ देकर उसकी हरकतों का विरोध किया। लेकिन इसके बावजूद कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोगों ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया। मामला तब सामने आया जब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोग और धार्मिक संगठनों के सदस्य नाराज हो गए।
भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं ने इसे हिंदू धर्म का अपमान बताते हुए मुबारकपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने माँग की कि आरोपित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। भाजपा नेताओं ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद आरोपित के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नेताओं ने इसे पुलिस की निष्क्रियता और हिंदू धर्म का अपमान बताते हुए विरोध जताया और थाने के प्रभारी से तत्काल कार्रवाई की माँग की।
थाना प्रभारी मुबारकपुर को जांच एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की नाराजगी देखने को मिली। एक सोशल मीडिया यूजर ने इस घटना पर पुलिस से सख्त कार्रवाई की माँग की। इसके जवाब में आजमगढ़ पुलिस ने कहा कि मुबारकपुर थाना प्रभारी को मामले की जाँच करने और जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बादशाह खान नाम के एक पुलिस कॉन्स्टेबल पर लव जिहाद का आरोप लगा है। उसके खिलाफ विभागीय जाँच भी शुरू कर दी गई है। बादशाह पर नर्सिंग का कोर्स कर रही हिन्दू छात्रा से खुद को अमित बता कर मेलजोल बढ़ाने और बाद में शारीरिक संबंध बना कर पैसे ऐंठने का आरोप है। पीड़िता ने यह भी बताया कि उसे इस्लाम कबूल करने का दबाव भी दिया जा रहा था।
यह घटना लखनऊ के थानाक्षेत्र चिनहट की है। मूल रूप से शाहजहाँपुर की रहने वाली पीड़िता एक कॉलेज में नर्सिंग का कोर्स कर रही है। सोमवार (30 दिसंबर 2024) को पीड़िता ने शाहजहाँपुर जिले में तैनात कॉन्स्टेबल बादशाह के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि 2014 में उसकी मुलाकत बादशाह खान से हुई थी। तब बादशाह खान ने खुद को अमित बताया था।
UP की राजधानी लखनऊ में सिपाही पर प्रेम जाल में फंसाकर रेप का आरोप है। लड़की ने लव जेहाद का आरोप लगाते हुए सिपाही बादशाह खान पर FIR कराई है। उसका कहना था की बादशाह खान ने अपना नाम अमित बताकर उसे प्रेम जाल में फंसाया। उससे शादी का वादा किया और शादी अपने समाज की लड़की से कर ली। 2014… pic.twitter.com/NXnyLBOgeE
पीड़िता बताती है कि अमित बना बादशाह खान दोस्ती होने के बाद उसे कई जगह घुमाने ले गया। साल 2015 में बादशाह खान का चयन UP पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर हो गया। सिपाही बनने के बाद बादशाह ने एक मुस्लिम लड़की से निकाह भी कर लिया। जब पीड़िता को अमित बने बादशाह की शादी के बारे में पता चला तो उसने बातचीत बंद करनी चाही। आरोप है कि तब बादशाह ने कुछ ही दिनों में अपनी बीवी को तलाक देने का झाँसा दिया।
बात न बनने पर बादशाह पीड़िता के कॉलेज के आसपास भी चक्कर लगाने लगा। ऐसा करके कॉन्स्टेबल खान ने 6 साल तक पीड़िता को अपने झाँसे में रखकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। दैनिक भास्कर को पीड़िता ने बादशाह को झाड़-फूँक और टोना टोटका करने वाला बताया है। इसके लिए वह पीड़िता व उसके परिजनों के कपड़े मँगवाता था। थोड़े ही समय में उसने पीड़िता के परिवार में कलह करवानी शुरू कर दी। नतीजा यह रहा कि पीड़िता अपने परिजनों से दूर हो गई।
इसी बीच बादशाह खान ने एक बार पीड़िता से 50 हजार रुपयों की डिमांड की। ये पैसे पीड़िता ने बादशाह को ऑनलाइन दिए। दावा है कि तब पहली बार पीड़िता को उसके मुस्लिम होने की जानकारी हो पाई थी। जब इस बाबत पीड़िता ने सवाल-जवाब किया तो बादशाह ने उसे इस्लाम कबूल करने का दबाव दिया। बादशाह ने कहा कि उसके मजहब में 4 निकाह जायज है और वह मुस्लिम बन जाती है तो उसे अपनी दूसरी बीवी बनाकर रखने को तैयार है।
फिलहाल बादशाह एक बेटे का अब्बा बन चुका है, लेकिन उसकी पीड़िता से ब्लैकमेलिंग 2024 तक जारी रही। 27 दिसंबर 2024 को सिपाही खान ने पीड़िता से 10 लाख रुपयों की डिमांड की। इनकार करने पर पीड़िता के अश्लील वीडियो को वायरल करने की धमकी दी। बादशाह ने पीड़िता को हड़काते हुए यहाँ तक कहा कि उसके परिवार को भी खत्म कर दिया जाएगा।
पैसे न मिलने पर बादशाह ने पीड़िता छात्रा के मोबाइल नंबर से उसकी लोकेशन ट्रेस करवा ली। वह अपनी बीवी के साथ पीड़िता के पास पहुँचा। यहाँ मियाँ-बीवी ने पीड़िता को बेरहमी से पीटा। शिकायत में पीड़िता का दावा है कि बादशाह खान अब तक उससे लगभग 55 लाख रुपए ऐंठ चुका है। पैसे ऐंठने में बादशाह खान के साथ उसके भाई भी शामिल बताए जा रहे हैं।
प्रकरण का संज्ञान लेते हुए एसीपीगोमतीनगर द्वारा जाँच की जा रही है। प्रार्थिनी से तहरीर हेतु संपर्क किया गया तो अकब से उपलब्ध कराने की बात कही गयी है। तहरीर प्राप्त होने पर आवश्यक विधिक कार्यवाही की जायेगी ।
शिकायत के अंत में पीड़िता ने सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। बादशाह खान के खिलाफ दर्ज इस शिकायत पर विभूति खंड के ACP राधारमण सिंह ने मीडिया को बताया कि पूरे मामले की गहराई से जाँच की जा रही है। सामने आए सबूतों व तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पाटन तहसील के जय बजरंग अखाड़े में बजरंगबली की प्रतिमा को तोड़ कर जमीन में गाड़ दिया गया। इसके बाद अखाड़े की दीवारों पर “मुस्लिमों का प्रवेश पूर्णतः मना है, अंजाम कुछ भी हो सकता है” लिखकर हिंदुओं ने चेतावनी जारी की है, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाटन तहसील के जय बजरंग बली अखाड़े में घुसकर 14 साल के नाबालिग मुस्लिम लड़के ने बजरंगबली की प्रतिमा को खंडित कर जमीन में गाड़ दिया। आरोप है कि उसने प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ के अलावा अखाड़े में रखे डंबल इत्यादि उपकरणों को भी इधर-उधर फेंक दिया। इस कृत्य की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता भड़क गए। उन्होंने मौके पर पहुँचकर प्रदर्शन किया और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।
पुलिस ने आरोपित नाबालिग को तुरंत हिरासत में ले लिया। जाँच में यह पता चला है कि वह मानसिक रूप से अस्थिर है, जिसके चलते उसके इलाज की भी व्यवस्था की जा रही है।
इस घटना के बाद विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अखाड़े की दीवारों पर चेतावनी लिखवाई। संगठन के जिला संयोजक राजा ठाकुर ने इसे धार्मिक भावनाओं पर हमला बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रखंड अध्यक्ष दिलीप श्रीवास ने भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले किसी भी कृत्य के खिलाफ सख्त कदम उठाने की माँग की।
एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि मामला बेहद संवेदनशील है। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है। घटना के बाद पाटन थाना क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से धार्मिक सौहार्द्र प्रभावित होता है। वहीं, हिंदूवादी संगठनों का कहना है कि यह उनकी आस्था पर सीधा हमला है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।