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‘सरकार में आते ही दिल्ली की सभी 54 अवैध मस्जिद-मदरसे, कब्रिस्तान को गिराएगी BJP’

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर बनाई गई मस्जिदों और कब्रिस्तानों का मसला एक बार फिर से उठा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने शनिवार (जनवरी 18, 2020) को बयान दिया है कि अगर भाजपा दिल्ली में सत्ता में आती है, तो शहर की सरकारी जमीनों को धार्मिक संरचनाओं के अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा।

‘कोई भी मंदिर या गुरुद्वारा सरकारी जमीन पर बना हुआ नहीं’

दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए मतदान फरवरी 08, 2020 को होगा और 11 फरवरी को चुनाव परिणाम की घोषणा होगी। BJP सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने ट्वीट में लिखा है, “दिल्ली में भाजपा की सरकार बनते ही उन सरकारी जमीनों को खाली कराया जाएगा, जिन पर धार्मिक स्थलों का निर्माण किया गया है। दिल्ली में 54 से ज्यादा मस्जिद, मदरसे सरकारी जमीन पर बने होने की शिकायत अभी तक आई है। सूची दिल्ली के उपराज्यपाल को पहले ही दी जा चुकी है।”

गत सोमवार को ही वर्मा ने कहा था कि अगर उन्हें दिल्ली में किसी भी मंदिर या गुरुद्वारा द्वारा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायत मिलेगी तो वह इस मामले को प्रशासन के समक्ष उठाएँगे। हालाँकि, उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में यह भी कहा, “लेकिन कोई भी मंदिर या गुरुद्वारा सरकारी जमीन पर बना हुआ नहीं मिला। सिर्फ मस्जिद ही सरकारी जमीन पर बने हुए मिले हैं।”

दिल्ली में 54 सरकारी जमीनों पर मस्जिद-कब्रिस्तान का अवैध कब्जा

लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले दिल्ली में केजरीवाल सरकार पर सरकारी जमीनों पर मस्जिद और कब्रिस्तानों को लेकर चुप्पी साधे रहने को लेकर दबाव बनाया गया था। दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने जुलाई 11, 2019 को सरकारी जमीनों पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की थी।

इस दौरान 54 ऐसी सरकारी जमीनों की लिस्ट उपराज्यपाल को सौंपी गई थी, जिन पर अवैध रूप से मजार, मस्जिद और कब्रिस्तान बनाए गए हैं। उपराज्यपाल ने कहा था कि इन सभी जगहों की पड़ताल की जाएगी और अगर ऐसा कुछ पाया जाएगा तो उन कब्जों को हटाया जाएगा।

दिल्ली में सरकारी जमीनों पर बनी ‘अवैध’ मस्जिदों का टूटना निश्चित: BJP सांसद का दावा

‘मस्जिदों से ऐलान हुआ, पहले से पता था कि क्या करना है’ – दिल्ली में उपद्रव और दंगों के पीछे मुल्ला-मौलवी?

दिल्ली में 54 सरकारी जमीनों पर मस्जिद-कब्रिस्तान का अवैध कब्जा, BJP सांसद ने उपराज्यपाल को भेजी लिस्ट

किनके बच्चे आतंकी की ऊँगली थामते हैं, हाथों में पत्थर और जुबान जिहाद से रंगा होता है

कानपुर की एक मस्जिद के बाहर सादे कपड़ों में खड़े एसटीएफ अधिकारी ने जब आवाज दी- अंसारी चच्चा कैसे हो… तो एक बच्चा आतंकी जलीस अंसारी की ऊँगली थामे चल रहा था। ये बच्चा कौन था? किसका बच्चा था? इस बच्चे की पहचान जानने से ज्यादा जरूरी यह समझना है कि दूर-दूर तक इस बच्चे से जलीस अंसारी का कोई रिश्ता नहीं था।

फिर वो कौन सी बात होगी जिसने किसी को 50 से अधिक बम धमाकों में शामिल रहे, 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे, सिमी और हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों को बम बनाना सिखाने वाले जलीस अंसारी उर्फ डॉ. बम के हवाले अपना बच्चा कर देने को प्रेरित किया होगा। मीडिया रिपोर्टों से जाहिर है पुलिस की आँखों में धूल झोंकने के लिए ही जलीस मस्जिद से बच्चे को साथ लेकर निकला था।

परोल पर जेल से निकला जलीस मुंबई से गायब हुआ था। उसने बताया है कि वह कानपुर अपने दो दोस्तों की तलाश में आया था। उसने इनकी मदद से देश के बाहर निकलने के मंसूबे पाल रखे थे। लेकिन जब जलीस कानपुर पहुँचा तो उसे पता चला कि जिनकी तलाश में वह आया है उसमें से एक का इंतकाल हो चुका है। दूसरा कहीं और जा चुका है। फिर भी उसने मुंबई लौटने की नहीं सोची। उसे यकीन था कि अब भी वह अपने मंसूबे में कामयाब रहेगा। यह यकीन पैदा होता है एक अनजान शहर में ​अपनी पहचान छिपाने के लिए किसी का बच्चा हाथ लगने से।

आतंकियों और कट्टरपंथियों द्वारा इसी तरह बच्चों का इस्तेमाल किए जाने को लेकर पिछले दिनों चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने चिंता जताई थी। जनरल रावत ने रायसीना डायलॉग को संबोधित करते हुए कहा था, “हम देख रहे हैं कि छोटे बच्चों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है। उन्हें पहचानने की जरूरत है। उन्हें ऐसे सेंटर में डालने की जरूरत है जहॉं वो इस रास्ते से वापस आ सकें।” रावत ने यह बात कश्मीर के संदर्भ में कही थी।

लेकिन, खतरा कहीं ज्यादा पसरा है। यही कारण है कि एक अनजान शहर में ढाल बनाने के लिए जलीस को बच्चा मिल जाता है। मुजफ्फरनगर में पुलिस पर बच्चे पत्थरबाजी करते हैं। शाहीन बाग के प्रदर्शन में उनका इस्तेमाल होता है। इसी खतरे को भॉंप मुजफ्फरनगर पुलिस ने 33 लोगों पर बच्चों को उकसाने का मामला दर्ज किया है। भड़काऊ नारे लगाते बच्चों को देख गैर सरकारी संगठन सेव चाइल्ड इंडिया ने नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) का दरवाजा खटखटाया है। क्योंकि, ये बच्चे केवल किसी मदरसे में कट्टरपंथी नहीं बनाए जा रहे। न ही जहर भरने के लिए से सीमा पार भेजे जा रहे। उन्हें अपने घर में, आस-पड़ोस से कट्टरपंथ की ये ट्रेनिंग मिल रही है।

बच्चों को जिहादी रंग में रंगने वाला खतरा जब गली-गली पसर रहा है जनरल रावत की चिंता को मजहबी और सियासी रंग देने की कोशिशें भी शुरू हो गई है। इसी को ध्यान में रख हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि रणनीति बनाना प्रशासन का काम है। कोई जनरल कट्टरपंथ को लेकर रणनीति तय नहीं कर सकता। वे इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने कहा आप किस-किस को डी-रैडिकलाइज़ करेंगे? जुनैद, तबरेज, पहलू के हत्यारे को कौन डी-रैडिकलाइज़ करेगा? ओवैसी का ऐसा कहना न केवल मजहबी कट्टरपंथ पर पर्दा डालने की कोशिश है, बल्कि मॉब लिंचिंग से जोड़कर इसे सामान्य घटना की तरह पेश करना भी है। ताकि आप पैर पसार रहे इस खतरे को लेकर निश्चिंत हो जाएँ।

यकीनन, हत्या अपराध है, चाहे वह चोरी करते हुए पकड़े गए तबरेज की ही क्यों न हो। सभ्य समाज में किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती। लेकिन, तबरेज की हत्या की आड़ लेकर उन सैकड़ों-हजारों घटनाओं को दबाया नहीं जा सकता जब अल्लाहु अकबर का नाम लेते हुए कोई जुनैद दर्जनों लोगों के साथ खुद को उड़ा लेता है। जिसके नाम पर कोई कमलेश तिवारी का गला रेत जाता है। जिसके नाम पर संसद से लेकर स्कूली बच्चों के बसों तक को निशाना बनाया जाता है।

ये मजहबी कट्टरपंथ के सिलसिलेवार ट्रेनिंग से पैदा होता है। जनरल रावत ने भी कहा था, “यह स्कूलों, यूनिवर्सिटी, धार्मिक स्थलों हर जगह हो रहा है। ऐसे कुछ लोगों का समूह है, जो ये फैला रहे हैं। इस तरह के लोगों की पहचान कर दूसरे लोगों को धीरे-धीरे इनसे अलग करने की जरूरत है।” आखिर, 10 से 11 साल के बच्चे बिना किसी ट्रेनिंग के ‘जो हिटलर की चाल चलेगा, वो हिटलर की मौत मरेगा’ और ‘जामिया तेरे ख़ून से, इंकलाब आएगा’ जैसे नारे कैसे लगा सकते हैं? कोई बच्चा अपनों का इशारा पाए अनजान जलीस की ऊँगली भला क्यों थामेगा?

पुलिस और सेना आतंकवाद का सफाया कर सकती है। आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुॅंचा सकती है। लेकिन, ये मजहबी कट्टरवाद तभी दफन होगा जब हम एक समाज के तौर पर इससे लड़ेंगे। तभी एक एमबीबीएस डॉक्टर जलीस अंसारी की पहचान डॉ बम से होनी रुकेगी। उनसे बच्चों को दूर करना होगा जो बचपन में कट्टरपंथ का बीज बोते हैं। यही बीज जब एएमयू पहुॅंचता है तो नारे हिंदुत्व से लेकर देश के प्रधानमंत्री की कब्र खोदने तक के में बदल जाता है। एक इंजीनियर जिहादी जॉन बन जाता है। इस खतरे से नहीं चेते तो आज का कोई अशफाक, मोइनुद्दीन आपके कमलेश का गला रेत जाएगा।

कॉन्ग्रेस का डबल स्टैंडर्ड: पंजाब में CAA के खिलाफ बिल, राजस्थान में पाक से आए हिंदुओं को रियायती जमीन

नागरिकता संशोधन कानून (CAA), नेशनल रजिस्टर आफ सिटिजन्स (NRC) और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) को लेकर कॉन्ग्रेस का दोहरा मापदंड छिपा नहीं है। सत्ता में रहते हुए वह इन सब की पैरोकार थी। लेकिन, आज न केवल विरोध कर रही है, बल्कि विरोध के नाम पर हुई हिंसा में भी उसके कई नेता नामजद हुए हैं। इस मसले पर गोवा से लेकर मध्य प्रदेश तक कई नेता पार्टी स्टैंड का विरोध कर चुके हैं। यहॉं तक कि प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकारें भी इस मसले पर एकमत नहीं दिख रहीं।

कॉन्ग्रेस शासित पंजाब की सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में CAA के खिलाफ प्रस्ताव पास किया था। CAA पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का मार्ग प्रशस्त करता है। दूसरी ओर, कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान की सरकार पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को सहूलियत देने की बात कर रही है। गहलोत सरकार ने पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने के बाद अब रियायती दर पर जमीन आवंटित करने का ऐलान किया है।

गहलोत सरकार ने 100 हिंदू शरणार्थी परिवारों को करीब 50 फीसदी रियायत पर जमीन के कागज देगी। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यूटर्न लेते हुए पाकिस्तान से आकर भारत में बसे 100 हिंदू परिवारों को आधी कीमत पर जमीन देने का निर्णय लिया है। इससे पहले भी गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने हिन्दुओं के लिए भारत छोड़कर पाकिस्तान चले जाने का आदेश निकाला था। मगर गृह मंत्रालय ने बड़ा क़दम उठाते हुए इस आदेश पर रोक लगा दी थी।

पाक से आए हिन्दू शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने में कॉन्ग्रेस ने सबसे ज्यादा रोड़े अटकाए और अब अशोक गहलोत हिन्दू शरणार्थियों को जमीन देने की बात कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि बीते दिनों जोधपुर में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की CAA के समर्थन रैली में उमड़ी भीड़ को देखकर अशोक गहलोत डर गए हैं। और अब अपने वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए राजस्थान की गहलोत सरकार ने पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को अपना बनाने के लिए मुहिम शुरू की है।

इससे इनका डबल स्टैंडर्ड साफ-साफ दिख रहा है। अगर अशोक गहलोत वाकई में विस्थापितों की मदद करना चाहते हैं तो उन्हें अपने राज्य में विरोध बंद करवाकर सीएए को लागू करना चाहिए, ताकि नागरिकता पाने वाले को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। विपक्षी पार्टी बीजेपी ने भी गहलोत सरकार पर डबल स्टैंडर्ड का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ राजस्थान सरकार नए संशोधित नागरिकता कानून का विरोध कर रही है और वही दूसरी तरफ राज्य में शरणार्थियों को सस्ती कीमतों पर जमीन दे रही है।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया ने कहा, “यह गहलोत सरकार का दूसरा यू-टर्न है। मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वो CAA का समर्थन कर रहे हैं या विरोध। उनकी बातें और काम एक दूसरे के विपरीत हैं।”

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5 साल तक केजरी तू घोड़े बेच कर सोया, मगरमच्छ के आँसू रोया: BJP का रैप सॉन्ग

दिल्ली विधानसभा की चुनावी जंग सबसे ज्यादा रोमांचक सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही है। हाल ही में MEME (मीम्स) और ट्वीट्स के जरिए सोशल मीडिया पर एक दूसरे पर तंज करने वाली बीजेपी और आम आदमी पार्टी अब रैप सॉन्ग के जरिए युवाओं तक पहुँच रही है।

दिल्ली बीजेपी ने आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी पर हमला बोलते हुए एक रैप सॉन्ग रिलीज किया है। दिल्ली बीजेपी ने अपने ट्विवटर हैंडल पर एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में मास्क पहने हुए तीन युवक दिल्ली की सरकार से प्रश्न करते दिखाई दे रहे हैं, जो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की पार्टी को पलटू आदमी पार्टी बताया गया है।

दिल्ली का असली मालिक जनता को बताते हुए रैप सॉन्ग में ‘AAP’ पर कॉन्ग्रेस से गठबंधन करने को लेकर भी निशाना साधा गया है। बीजेपी ने इस रैप सॉन्ग का विडियो ट्वीट करते हुए लिखा है- “यह रैप सॉन्ग केजरीवाल के खराब गवर्नेंस को एक्सपोज करता है।”

‘पूरे पाँच साल सिर्फ तूने जनता को बनाया है…’ बोल वाले इस रैप सॉन्ग में अरविंद केजरीवाल पर 5 सालों में दिल्ली से किए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया गया है। अन्ना का नाम लेकर सत्ता में आने और एक भी वादा पूरा न करने का आरोप लगाते हुए रैप सॉन्ग में कहा गया है कि अब पलटू राम केजरीवाल के जाने की बारी है।

वीडियो में ये तीन युवा कह रहे हैं कि पलटू राम ने दिल्ली की जनता का ‘काटा’ है। वीडियो में दिख रहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में पलटू आदमी पार्टी को वोट देकर फिर से अपना कटाएँ… 2 मिनट 10 सेकेंड के इस वीडियों में आम आदमी पार्टी के लिए कहा गया है कि पिछले पाँच सालों में अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने दिल्ली में कुछ भी नहीं किया है केवल दिल्ली की जनता को लूटा है। इसमें दिल्ली में गंदे पानी की शिकायत से लेकर कई अन्य ऐसी समस्याओं को उठाया गया है, जिन्हें पूरा करने में आम आदमी पार्टी पूरी तरह से विफल रही है।

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रच दिया नया इतिहास: पाकिस्तानी हिंदू महिला भारत में बनीं सरपंच, 5 महीने पहले ही मिली थी नागरिकता

राजस्थान के पंचायती चुनाव ने शुक्रवार (17 जनवरी) को एक नया इतिहास रच दिया। प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है जब पाकिस्तान मूल की रहने वाली कोई महिला सरपंच बनी हो। पंचायत चुनाव के पहले चरण में टोंक के नटवाड़ा से पाकिस्तान के सिंध से भारत लौटीं नीता कँवर (36 वर्षीय) ने सरपंच का चुनाव जीत लिया है।

शुक्रवार को पहले चरण के लिए राजस्थान की 2726 ग्राम पंचायतों पर वोटिंग हुई। 17,000 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे, लेकिन सभी की निगाहें पाकिस्तान की मूल निवासी नीता कँवर पर टिकी थीं। टोंक ज़िले की नटवाड़ा ग्राम पंचायत की उम्मीदवार नीता कँवर को 2,494 वोटों में से 1,073 वोट मिले। उन्होंने अपनी प्रतिद्वंदी सोना देवी को 362 वोटों से मात दी। बता दें कि टोंक ज़िले की नटवाड़ा ग्राम पंचायत में सात महिलाओं ने इस पद के लिए चुनाव लड़ा था।

दरअसल, नीता पाकिस्तान के सिंध प्रांत की निवासी थीं और पाँच महीने पहले ही उन्हें भारत की नागरिकता मिली। जीत दर्ज़ करने के बाद नीता ने कहा, “मैं सभी ग्रामीणों को धन्यवाद देना चाहती हूँ जिन्होंने मुझे सपोर्ट करके मुझे जीत दिलाई। मैं अपनी पूरी ईमानदारी के साथ काम करूँगी और पंचायत के विकास के लिए कड़ी मेहनत करूँगी।” इसके साथ उन्होंने अपने ससुर का भी धन्यवाद दिया क्योंकि उन्होंने इस चुनाव में उनका बहुत साथ दिया था।

बता दें कि नीता ने जिस सीट से मैदान में थीं उस पर उनके ससुर का क़ब्ज़ा था। वह टोंक जिले के उपखंड निवाई की पंचायत नटवाड़ा के एक राजपूत परिवार की बहू हैं। दैनिक भास्कर ने नीता के हवाले से बताया है की 2011 में उनकी शादी पुण्य प्रताप करण से हुई थी। उनके ससुराल की पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रही है। राजनीति में आने की प्रेरणा उन्हें अपने ससुर ठाकुर लक्ष्मण करण से ही मिली थी।

ग़ौरतलब है कि भारत आने के 18 साल बाद नीता कंवर को पिछले साल सितंबर में नागरिकता मिली थी। वह 2001 में अपनी बड़ी बहन अंजना सोढा के साथ पाकिस्तान के सिंध के मीरपुर-खास से राजस्थान के जोधपुर आई थीं। उन्होंने 17 जनवरी को नामांकन दाखिल किया। उनका कहना है कि सीएए के जरिए भारत में अच्छा जीवन-यापन करने और अच्छी शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी।

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‘…जो सावरकर का विरोध करते हैं, उन्हें 2 दिन के लिए अंडमान जेल भेजो, बलिदान का एहसास हो जाएगा’

शिवसेना सांसद संजय राउत ने वीर सावरकर को लेकर फिर एक बार कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग वीर सावरकर का विरोध करते हैं वे किसी भी विचारधारा या पार्टी से हों, उन्हें दो दिन के लिए अंडमान के सेल्यूलर जेल में भेज दो। जहाँ सावरकर को बंधक बनाया गया था। तब उन्हें उनके बलिदान और उनके योगदान का अहसास होगा। बता दें कि कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने एक दिन पहले ही यह बयान दिया था कि सावरकर के अंग्रेजों से माफी माँगने की बात मिटाई नहीं जा सकती है। ऐसे में अगर नरेंद्र मोदी सरकार सावरकर को भारत रत्न देती है तो पार्टी इसका विरोध करेगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले सावरकर को लेकर कॉन्ग्रेस के सेवा दल की किताब ‘वीर सावरकर कितने वीर’ में किए गए दावे पर भी संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। संजय राउत ने कहा था कि सावरकर महान थे और महान रहेंगे। जो लोग उनकी देशभक्ति पर सवाल उठा रहे हैं और उनकी आलोचना कर रहे हैं, उनके दिमाग में गंदगी भरी है।

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश के भोपाल में कॉन्ग्रेस द्वारा चलाए जा रहे अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस सेवा दल के प्रशिक्षण शिविर में विनायक दामोदर सावरकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर कॉन्ग्रेस द्वारा जारी की गई विवादित पुस्तिका में दावा किया गया था, “महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के साथ हिंदू महासभा के सह-संस्थापक का शारीरिक संबंध था।”

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा था कि ‘मेरा नाम राहुल सावरकर’ नहीं है। इस पर संजय राउत ने कहा था कि हिंदुत्व विचारक के प्रति श्रद्धा को लेकर कोई “समझौता” नहीं किया जा सकता। संजय राउत ने कहा था, “वीर सावरकर को लेकर राहुल गाँधी ने जो कुछ भी कहा, वो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेताओं से अपील करता हूँ कि वो वीर सावरकर के साहित्य को राहुल गाँधी को भेजें। महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेताओं को दिल्ली जाकर राहुल गाँधी को सावरकर की किताबें गिफ्ट करनी चाहिए, ताकि वो सावरकर को समझ सकें और उनकी गलतफहमी दूर हो सके। कॉन्ग्रेस नेताओं को राहुल गाँधी को यह भी बताना चाहिए कि वीर सावरकर ने अंग्रेजों के खिलाफ किस तरह संघर्ष किया था और लड़ाई लड़ी थी।”

संजय राउत ने ट्वीट करते हुए लिखा था, ‘‘वीर सावरकर न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश के लिए आदर्श हैं। सावरकर का नाम राष्ट्र और स्वयं के बारे में गौरव को दर्शाता है। नेहरू और गाँधी की तरह सावरकर ने भी देश के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया। ऐसे प्रत्येक आदर्श को पूजनीय मानना चाहिए। इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता।”

‘राजीव गाँधी के साथ जान गँवाने वाले 13 लोगों के परिजनों की तरफ से सोनिया गाँधी कैसे फैसला ले सकती हैं’

21 मई 1991 को जब तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक आत्मघाती बम हमले में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या कर दी गई थी, तब उनके साथ-साथ 13 अन्य लोगों की भी जान चली गई थी। और जब कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी सहित राजीव गाँधी के परिवार ने दोषियों को ‘माफ’ कर दिया और कहा कि हत्यारों को रिहा करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, तो राजीव गाँधी के साथ मरने वालों के परिजन उनके इस कदम से खुश नहीं थे। राजीव गाँधी के साथ जान गँवाने वालों 13 लोगों के परिजनों की तरफ से सोनिया गाँधी या उनके बच्चे कैसे फैसला ले सकते हैं?

बता दें कि जब तमिलनाडु सरकार ने 2018 में मामले में सात आजीवन दोषियों को रिहा करने की सिफारिश की, तो परिवार के सदस्यों ने तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मुलाकात की और उनसे सहमति न देने का आग्रह किया। 

एस अब्बास, जिनकी माँ की मौत राजीव गाँधी के साथ विस्फोट में हुई थी, ने 2018 में द न्यूज मिनट से बात करते हुए कहा था, “हम सभी को मेरी माँ के टुकड़े खून से सने कंबल में लिपटे हुए मिले थे। राजीव गाँधी पर हमले ने मुझे और मेरे भाई-बहनों को अनाथ कर दिया। 12 अन्य परिवार भी इसके शिकार हुए। लेकिन राजनेता इस आघात को उस तरह से नहीं देखते, जिस तरह से हम देखते हैं। वे हत्यारों को अपने राजनीतिक लाभ के लिए रिहा करना चाहते हैं और हम सभी इस बात की निंदा करते हैं।”

राजीव गाँधी की हत्या के दौरान मारे गए अलग-अलग परिवारों के दर्द को आप राजनीतिक नजरिए से नहीं देख सकते। सोनिया गाँधी या राजीव गाँधी के परिवार के सदस्यों ने पूर्व प्रधानमंत्री के उन हत्यारों पर फैसला लिया, जिन्होंने उसी विस्फोट में अन्य 13 लोगों को भी मार डाला। उन्होंने ये फैसला लेकर दिखा दिया कि कैसे नेहरू-गाँधी परिवार के सदस्यों के लिए आम आदमी की भावनाएँ मायने नहीं रखतीं। उन्होंने भले ही पूर्व प्रधानमंत्री के हत्यारों को माफ कर दिया हो, लेकिन उन परिजनों का क्या, जिन्होंने इस आत्मघाती बम धमाके में अपनी जान गँवाईं? उनका क्या, जिन्हें विस्फोट में अपनों को खोने के बाद सालों तक संघर्ष करना पड़ा?

अब, सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह ने आग्रह किया है कि 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली सामूहिक बलात्कार पीड़िता निर्भया की माँ को भी सोनिया गाँधी के नक्शेकदम पर चलना चाहिए और बलात्कारियों को क्षमा करना चाहिए, जिन्होंने उसकी बेटी के साथ क्रूरता से बलात्कार किया।

दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी किया है। अब उन्हें 1 फरवरी सुबह 6 बजे फाँसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि उन्हें पहले 22 जनवरी को फाँसी दी जानी थी, लेकिन एक दोषी ने दया याचिका दायर की थी। उसकी दया याचिका खारिज होने के बाद प्रक्रिया के तहत नया डेथ वारंट जारी करना पड़ा और फाँसी की तारीख बढ़ानी पड़ी। जिसके बाद निर्भया की माँ आशा देवी ने कहा कि किस तरह से राजनेताओं के लिए उनकी बेटी के साथ हुआ बलात्कार एक राजनीतिक हथकंडा बन गया है। जिसके बाद जयसिंह ने मौके का फायदा उठाते हुए उन्हें नैतिकता का पाठ पढ़ाया।

ईसाई से हिंदू बने रूसी बिजनसमैन, चर्च के आक्रामक कट्टरपंथी दे रहे लगातार धमकी

रूस एक ऐसा देश है जिसकी जनसंख्या 144,000,000 से अधिक है। इस बर्फीले देश में रहने वाले भारतीयों की कुल संख्या 10,000 है जो यह स्पष्ट रूप से दिखा देता है कि रूस में बसने की चाह रखने वाले भारतीयों के लिए यह पसंदीदा नहीं। इतनी छोटी संख्या की तुलना में अमेरिका में रहने वाले 3.2 मिलियन भारतीयों की आबादी चौंका देने वाली और अकल्पनीय है। रूस में इस तरह की नीरस तस्वीर का कारण यह तथ्य है कि यह देश अभी भी दूर-दराज़ के लोगों को पूरे दिल से गले लगाने की राह पर नहीं है।

जब हम धर्म के बारे में बात करते हैं तो चीजें और भी दिलचस्प हो जाती हैं। यह एक विडंबना है कि रूस में हिन्दुओं की संख्या भारतीय नागरिकों की संख्या से 14 गुना अधिक है। यह वास्तव में अद्भुत आँकड़ा है। हम इस तस्वीर को देखते हैं क्योंकि इनमें से 92 प्रतिशत हिन्दू रूसी हैं। लगभग 1,40,000 रूसी खुद को हिन्दू कहते हैं। अगर रूस या दोनों देशों की सरकारें इन लोगों को नज़रंदाज़ करती हैं तो यह एक बड़ी ग़लती होगी। 2018 की घटनाएँ जो अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में सुर्ख़ियों में थीं, उनमें से रूस में हिन्दू धर्मगुरू- श्री प्रकाश जी के साथ होने वाले अत्याचार को दर्शाती हैं।

ऊपर दिए गए आर्टिकल में अलेक्जेंडर ड्वोर्किन से जुड़े आक्रामक कट्टरपंथी ईसाई समूह का उल्लेख है। ड्वोर्किन एक रूसी पंथ विरोधी कार्यकर्ता है, जो ऑर्थोडॉक्स ईसाई धर्म को छोड़कर सभी सम्प्रदायों को दूषित समझता है और उन्हें सेक्ट और कल्ट कहता है। वह हर उस चीज़ की निंदा करता है, जिसका संबंध हिन्दू धर्म से जुड़ा हो। वर्ष 2011 में वह भगवदगीता की पवित्र पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने वाला था। हाल ही में वर्ष 2017 की शुरुआत में श्री प्रकाश जी के परिवार पर हमला करने के लिए दिल्ली में रूसी दूतावास के सामने ड्वोर्किन का पुतला जलाया गया था। इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र और ओएससीई में भी चर्चा हुई।

डेनिस स्टेपानोव (Denis Stepanov) नाम के एक रूसी का हालिया मामला, ड्वोर्किन और उसके संगठन के अलग-अलग और बहुत ही अनछुए पहलुओं को दर्शाता है। डेनिस रूस के मास्को में पैदा हुए थे और अब 35 वर्ष की आयु में एक युवा, ऊर्जावान और होनहार एंटरप्रेन्योर हैं। वह एक मेडिकल फर्म के मालिक हैं जो भारत और रूस के बीच व्यापार संबंधों को बेहतर बनाने की तर्ज़ पर काम करती है। चार साल पहले जब कुछ नहीं बदला था, तब उन्हें बहुत कम उम्र में सफलता मिली। डेनिस आधिकारिक रूप से एक हिन्दू बन गए लेकिन कुछ ही समय में उनकी ज़िंदगी बुरे दौर में प्रवेश कर गई। डेनिस के लिए यह सब भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म के प्रति रुचि रखने के कारण हुआ।

वर्ष 2016 में वह हिन्दू शास्त्रों के सम्पर्क में आए, जो रूसी भाषा में उपलब्ध थे। उसके बाद उसी वर्ष के अंत में उन्होंने समर्पित रूप से हिन्दू धर्म के अनुसार जीवन के मार्ग पर चलने का फ़ैसला किया। रूस में अल्पसंख्यक धर्मों की कठोर वास्तविकता को जानते हुए डेनिस ने कहा था, “यह मेरे जीवन का सबसे ख़ूबसूरत क्षण था। उस समय मुझे यह पता था कि यह मेरे काम और मेरे व्यवसाय को प्रभावित कर सकता है।” अगले साल की शुरुआत में डेनिस के व्यापार में तेजी आई। हालाँकि इससे जुड़ी बुरी ख़बर बहुत जल्द सामने आने वाली थी। धार्मिक घृणा और साम्प्रदायिक हिंसा में डूबे अपने नुकीले पंजे दिखाने से पहले उन्हें 4 महीने तक डॉर्किन और उनके लोगों ने अपने रडार पर रखा था। डेनिस कहते हैं, “वो मेरा पीछा 2017 के फरवरी के शुरुआत से कर रहे थे। यह लगभग 3-4 महीने तक जारी रहा और फिर उन्होंने मेरे घर आकर मुझे धमकाना शुरू कर दिया।”

यह सब इस लेख के पाठकों को विचित्र लग सकता है, लेकिन यह रूस के अल्पसंख्यकों की दुखद वास्तविकता है। बात यहीं नहीं रुकी, डेनिस के लिए बुरा समय अभी बस शुरू ही हुआ था। नवंबर के महीने में डेनिस के पास मास्क पहने और बंदूक रखने वाले लोग आए। ये कोई आम गुंडे नहीं थे और उन्होंने ख़ुद को पुलिस अधिकारियों के रूप में पेश किया।

इसके अलावा, उन्होंने डेनिस को बताया कि वो RATSIRS नाम के एक संगठन से जुड़े हैं और अगर उन्होंने हिन्दू धर्म नहीं छोड़ा, तो वे व्यवसायों से निपटने वाली सरकारी संस्थाओं में उनके ख़िलाफ़ झूठी कम्प्लेंट दर्ज करा देंगे। पुलिस की वर्दी पहने गुंडों ने उनके कार्यालय में तबाही मचाई और यहाँ तक ​​कि डेनिस पर शारीरिक हमला भी किया। उन्होंने डेनिस को RATSIRS के खातों में पैसा ट्रांसफर करने का आदेश दिया। ऐसा करने से जब डेनिस ने इनकार कर दिया, तो उन्होंने डेनिस को उनके जीवन पर ख़तरा मँडराने की चेतावनी दे डाली।

जो पाठक रूसी प्रणाली से थोड़ा कम परिचित हैं, उनके लिए इस तथ्य का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि रूसी रूढ़िवादी चर्च के लिए काम करने वाले ड्वोर्किन को हिन्दुओं से लड़ने के लिए पदक भी मिल चुके हैं। ड्वोर्किन के कई ऐसे सहयोगी हैं जो पुलिस विभाग, मंत्रालय और एंटी मनॉपली ब्यूरो में काम करते हैं।

डेनिस का दावा है, “मैंने अपना शोध किया था और कुछ ही दिनों में मुझे पता चल गया था कि मेरे आसपास क्या हो रहा है।” ड्वोर्किन RATSIRS का आधिकारिक अध्यक्ष है, यह वो संगठन है जो हिन्दुओं का शोषण करने से जुड़े सभी कामों में लिप्त रहता है। डेनिस यह बात अच्छी तरह से जानते थे कि उन्हें इस अत्यातार के ख़िलाफ़ सबसे पहले पुलिस में शिक़ायत दर्ज करनी थी। डेनिस ने जिन यातनाओं का सामना किया, वो इतनी भयंकर थीं कि उस सबका उल्लेख कर पाना संभव नहीं है। उन्हें एसएमएस और कॉल के ज़रिए धमकाया व प्रताड़ित किया गया। डेनिस अब उन एंटरप्रेन्योर्स की कतार में शामिल हो गए, जिनका एकमात्र दोष हिन्दू धर्म चुनना था। इसके अलावा, भारत और रूस के बीच स्वस्थ व्यापार का निर्माण करने की कोशिश करना भी इस दोष का हिस्सा था।

डेनिस को भरोसा है कि ड्वोर्किन इस धर्मयुद्ध की शुरुआत इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वो नहीं चाहते हैं कि हिन्दू आर्थिक रूप से एक ऐसे देश में मजबूत हो सकें, जहाँ की बहुसंख्यक आबादी रूढ़िवादी ईसाई धर्म का पालन करती हो। डेनिस जैसे युवा एंटरप्रेन्योर को परेशान करने का उद्देश्य रूसी रूढ़िवादी चर्च के खजाने की ओर नकदी प्रवाह को निकालना है। यदि रूस में हिन्दू धर्म या उससे जुड़े लोग सफल हो जाएँगे, तो यह चर्च की नीति के सन्दर्भ में एक नकारात्मक संदेश का संचार करेगा। डेनिस को 2019 के दौरान ही इस बात का पता चल गया था।

डेनिस ने बताया था, “ड्वोर्किन ने हाल ही में रूस के संघीय एंटीमोनोपॉली ब्यूरो के श्रमिकों को मेरी आजीविका पूरी तरह से नष्ट करने के लिए रिश्वत दी थी।” डेनिस के लिए यह विपरीत स्थिति काफ़ी मुश्किल हो चुकी है, लेकिन वह अभी भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। ब्यूरो उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित होने की धमकी दे रहा है और यदि वो ऐसा करने से मना करते हैं, तो वो (ब्यूरो) उनसे धन उगाही करेंगे। सोशल मीडिया में इस मामले को लेकर सार्वजनिक रूप से हंगामा मचा हुआ है क्योंकि एक अन्य रूसी हिन्दू कार्यकर्ता सर्गेई केवशिन ने अपने पत्रों में डेनिस के मामले को उजागर किया था।

डेनिस ने ड्वोर्किन के संगठन के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने का वादा किया है। वह रूस के राष्ट्रपति पुतिन को शिक़ायती पत्र और याचिकाएँ लिखेंगे। ब्यूरो के साथ अदालत की सुनवाई 21 जनवरी 2020 को होने वाली है। जब डेनिस ने हिन्दू धर्म अपनाया था, तब उन्हें हिन्दू नाम ‘हरदास’ दिया गया। वह इस नाम को रखना चाहते हैं। यह वह नाम है जो धर्म की स्वतंत्रता का एक प्रतीक है, यह वह नाम है जो डेनिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इससे उन्हें अपना संघर्ष जारी रखने की ताक़त भी मिलती है।

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‘जिन्हें नहीं मालूम कि उनके माता-पिता कौन हैं, वो कर रहे CAA का विरोध, दूसरे की जेब पर निर्भर रहते हैं ये चाटूकार’

पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) का विरोध करने वाले बुद्धिजीवियों को ‘जीव, शैतान और चाटूकार’ करार दिया। दरअसल, उनका यह बयान पश्चिम बंगाल में CAA और NRC के विरोध में बुद्धिजीवियों के सड़कों पर उतरने के फ़ैसले के बाद आया है।

दिलीप घोष को उनके विरोधियों के खिलाफ कड़े रुख़ के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा,

“कोलकाता की सड़कों पर बुद्धिजीवियों नामक कुछ जीव बाहर आ गए हैं। ये चाटूकार बुद्धिजीवी, जो दूसरे की जेब पर निर्भर करते हैं और उनके पैसों का लाभ उठाते हैं, जब  बांग्लादेश में उनके पूर्ववर्तियों को यातनाएँ दी गई थीं, तब वे कहाँ थे?”

ख़बर के अनुसार, कोलकाता की सड़कों पर रंगमंच की हस्तियों द्वारा निकाले गए एक विरोध मार्च का उल्लेख करते हुए घोष ने उन्हें, “हमारे भोजन पर रहने वाले और हमारा विरोध करने वाले शैतान” कहा।

इसके आगे उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन क़ानून का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें नहीं मालूम कि उनके माता-पिता कौन हैं। उन्होंने कहा, “यही कारण है कि वे कहते हैं कि वे अपने माता-पिता का जन्म प्रमाण पत्र नहीं दिखा सकते हैंं।” उन्होंने कहा कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के शासनकाल के दौरान पश्चिम बंगाल “देशद्रोहियों के केंद्र” के रूप में उभर रहा है।

उनके बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, रंगमंच के दुलाल मुखर्जी ने इस बात पर हैरानी जताई कि बंगाल में एक बंगाली इस तरह से कैसे बात कर सकता है। उन्होंने कहा कि बंगाल ने हमेशा लड़ाई लड़ी और जीती है, और दिखाया है कि अपने अधिकार के लिए कैसे लड़ना पड़ता है।

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार (17 जनवरी) को घोष ने CAA के बारे में जानकारी देते हुए कहा था कि आधार और पैन कार्ड नागरिकता के प्रमाण नहीं हैं। उन्होंने शरणार्थियों से आग्रह करते हुए कहा था कि वो CAA के प्रावधानों के तहत भारत की नागरिकता प्राप्त करें। CAA के समर्थन में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए घोष ने कहा था कि लोग पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कॉन्ग्रेस के अन्य नेताओं के जाल में न फँसे।

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रेप के बाद लड़कियों-औरतों को गुलाम बनाने का फतवा दिया था ‘मोटे आतंकी’ ने, ट्रक में लादकर ले जाना पड़ा जेल

हाल ही में इराक के मोसुल में एक छापे के दौरान रेप और धर्म के नाम पर सफाया (कत्लेआम) करने का समर्थन करने वाले एक बेहद मोटे आईएसआईएस कट्टरपंथी मुफ्ती को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार करने के बाद पुलिस उसे एक फ्लैटबेड ट्रक पर लाद कर ले गई, क्योंकि वह पुलिस की गाड़ी में फिट नहीं हो रहा था।

बताया जा रहा है कि इसका वजन 130 किलोग्राम था। इसे ट्रक में बिठाकर ले जाने की तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं। मुफ्ती अबू अब्दुल बारी, जिसे शिफा अल-नीमा के नाम से भी जाना जाता है, को मोसुल शहर में नौवें रेजिमेंट की एक स्वाट पुलिस टीम द्वारा गुरुवार (जनवरी 16, 2019) को गिरफ्तार किया गया था।

इराकी पुलिस का कहना है कि मुफ्ती को ISIS गिरोह के टॉप नेताओं में से एक माना जाता है। बताया जा रहा कि कई हत्या, बलात्कार और अपहरण के पीछे मुफ्ती का हाथ था। इसके साथ ही मुफ्ती ने मोसुल के धार्मिक विरासत स्थलों को भी नष्ट करने का आदेश दिया था।

इराकी पुलिस ने अपने एक बयान में कहा कि मुफ्ती अबू अब्दुल बारी फतवे जारी करने के लिए जिम्मेदार था, जिसके कारण विद्वानों और मौलवियों की हत्या हुई। जानकारी के मुताबिक मुफ्ती ने अपने अनुयायियों को हत्या करने, रेप करने, गुलाम बनाने जैसे सभी गंदे कामों को अंजाम देने के लिए फतवा दिया था। मुफ्ती पर 2014 में मोसुल में पैगंबर यूनुस के मकबरे को नष्ट करने का आदेश देने का भी आरोप है।

मैकर गिफोर्ड, जो सीरिया में ISIS के खिलाफ लड़ रहे हैं और फिलहाल ‘मानवाधिकार कार्यकर्ता और आईएसआईएस विरोधी प्रचारक’ हैं, ने मुफ्ती की गिरफ्तारी पर खुशी जाहिर करते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में इसे पुरुष, महिलाओं और बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया और लिखा कि इस जानवर ने बलात्कार किया और हत्या कर दी। ब्रिटिश कार्यकर्ता और काउंटर-चरमपंथी थिंक-टैंक के संस्थापक मौजिद नवाज ने भी इस गिरफ्तारी का स्वागत किया।

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