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जाहिल पाकिस्तानियों ने मगरमच्छों को भी नहीं छोड़ा, Zoo में ‘अत्याचार’ से इनके शरीर को कर देते हैं लाल

फोटो देखकर आप चौंक सकते हैं! आपको लगेगा कि मगरमच्छों के शरीर पर खून कैसे? लेकिन यह खून नहीं जाहिल पाकिस्तानियों की सोच है, जो इन मूक जानवरों के शरीर पर पीक-थूक बन कर गिर रही है। द न्यूज में प्रकाशित पान और गुटखे की पीक से सने दो मगरमच्छों की एक फ़ोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस फ़ोटो को देखकर इस बात का अंदाज़ा बख़ूबी लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान में बेज़ुबान जानवरों के साथ कितना बुरा व्यवहार किया जाता है।

पत्रकार जिया उर रहमान ने प्रकाशित फ़ोटो पर कैप्शन के साथ ट्वीट किया कि कराची चिड़ियाघर का यह एक खेदजनक दृश्य है, जहाँ आने वाले आगंतुक मगरमच्छों पर पान और गुटखे की पीक थूकते हैं। इस दौरान मगरमच्छों के शरीर पर लाल रंग के धब्बे पड़ जाते हैं।

सांसद और पीपीपी नेता शेरी रहमान ने भी टिप्पणी की कि वह “यह देखकर शर्मिंदा हैं।”

पत्रकार सनम मैहर और अंबर शम्सी ने भी ट्विटर पर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए लिखा कि कैसे जाहिल लोग हैं जो चिड़ियाघर के जानवरों पर पान-गुटखे की पीक थूकते चलते हैं।

पाकिस्तान में पशुओं के साथ क्रूरता भरा व्यवहार किए जाने की यह कोई नई ख़बर नहीं है। चिड़ियाघर में जानवरों को टॉर्चर करना और उन्हें परेशान करके मज़े लेना वहाँ के लोगों की आम बात है।

पिछले साल, एक्टिविस्ट और वकील जिब्रान नासिर ने एक लड़के की तस्वीरें ट्वीट की थीं, जिसने बिल्ली के बच्चे को प्रताड़ित करते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया था।

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‘अपनी बेटी के बलात्कारियों को माफ कर दो’ – निर्भया की माँ ने SC की वरिष्ठ महिला वकील को इस सलाह पर लताड़ा

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (17 जनवरी) को निर्भया के दोषियों के लिए नए सिरे से डेथ वारंट जारी कर दिया। कोर्ट के आदेश के मुताबिक़, चारों दोषियों को 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फाँसी दी जाएगी। निर्भया केस में राष्ट्रपति ने दोषी मुकेश की दया याचिका ख़ारिज कर दी थी, जिसके बाद तिहाड़ जेल की तरफ से दिल्ली की अदालत को जानकारी दी गई थी कि राष्ट्रपति ने दोषी मुकेश की दया याचिका ख़ारिज कर दी है। सरकारी वकील ने फाँसी की नई तारीख और वक्त बताने का आग्रह किया था। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने निर्भया की माँ से दोषियों को माफ़ करने का अनुरोध किया है।

निर्भया की माँ आशा देवी ने दिल्ली की अदालत द्वारा दोषियों की फाँसी की अगली तारीख तय करने पर अपनी निराशा व्यक्त की थी, इस पर इंदिरा जयसिंह ने ट्वीट कर कहा, “मैं आशा देवी के दर्द को अच्छी तरह से समझती हूँ, मैं उनसे आग्रह करती हूँ कि वह सोनिया गाँधी के उदाहरण का अनुसरण करें। उन्होंने नलिनी को माफ़ कर दिया था और कहा था कि वह उसके लिए मौत की सज़ा नहीं चाहती हैं। हम आपके साथ हैं लेकिन मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ हैं।”

इंदिरा जय सिंह के इस ट्वीट पर निर्भया की माँ ने अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करते हुए कहा, “मुझे ऐसा सुझाव देने वाली इंदिरा जयसिंग कौन हैं? पूरा देश चाहता है कि दोषियों को फाँसी दी जाए। सिर्फ़ उनके जैसे लोगों की वजह से बलात्कार की पीड़िताओं के साथ न्याय नहीं हो पाता है।”

बता दें कि 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या में शामिल होने के लिए नलिनी को गिरफ़्तार किया गया था और अदालत ने उसे दोषी ठहराया था। दरअसल, शुक्रवार को निर्भया की माँ चारों दोषियों की फाँसी में हो रही देरी को लेकर राजनीतिक पार्टियों के आरोप-प्रत्यारोप के दौर से नाराज़ थीं और उन्होंने इसको लेकर अपना ग़ुस्सा जाहिर किया था। वहीं, कोर्ट द्वारा फाँसी की तारीख बढ़ाए जाने पर उन्होंने कहा था कि मुजरिम जो चाहते थे, वही हो रहा है, फिर से तारीख पर तारीख मिल रही है।

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‘…अब तो मैं जिंदा घर नहीं जा पाऊँगी’ – शाहीन बाग से जान बचाकर भागी लड़की की आपबीती

दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले एक महीने से नागरिकता संशोधन कानून(CAA) और ‘अदृश्य’ राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी सड़क छोड़कर हटने को तैयार नहीं है। पुलिस इस तथाकथित धरना को खत्म करने की अपील कर रही है, लेकिन ये लोग हटने का नाम नहीं ले रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाया है कि वो लोग यहाँ पिकनिक मना रहे हैं।

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जो इन ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों’ से जान बचा कर भाग कर आई एक लड़की की है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में जो लड़की दिख रही है, उनका नाम डॉ दीपा शर्मा है। दीपा जयपुर की रहने वाली हैं और पेशे से डॉक्टर हैं। दीपा ने खुद ट्विटर पर वीडियो शेयर करते हुए आपबीती बयाँ की है। उन्होंने बताया कि वो जयपुर ऑफिस जा रही थीं, लेकिन फिर वो शाहीन बाग में CAA और NRC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखकर रुक गईं। उन्होंने सोचा कि वो खुद जाकर देखेंगी कि विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है। वो लोगों से सीधा बात करेंगी।

डॉक्टर दीपा ने आगे बताया कि वो उनके विचार जानना चाहती थीं और साथ ही ये भी जानना चाहती थीं कि अखबारों में जो दिखाया जा रहा है कि वहाँ पर पीसफुल प्रोटेस्ट हो रहा है, उसकी सच्चाई कितनी है। वो प्रदर्शनकारियों की आवाज लोगों तक पहुँचाना चाहतीं थीं, लेकिन उन्हें खुद ही वहाँ से जान बचाकर भाग निकलना पड़ा।

उन्होंने आपबीती बयाँ करते हुए उन्होंने कहा, “मैं मेट्रो लेकर वहाँ पहुँची थी। सब लोगों ने मुझे काफी मना किया था कि वहाँ पर नहीं जाना है, वहाँ खतरा है। फिर भी मैंने सोचा कि एक बार जाकर तो देखा जाए… हो सकता है कि लोगों ने अफवाहें फैला रखी हों। मैं वहाँ पर पहुँची और फिर वहाँ पर एक बुजुर्ग से परमिशन लेकर एक वीडियो बनाया। मैंने उनसे पूछा कि वो प्रोटेस्ट क्यों कर रहे हैं? और वो जो भी बात बोलना चाह रहे थे, मैं बस उसे कैप्चर कर रही थी। इसी बीच में वहाँ की भीड़ ने मुझे घेर लिया और बोला कि कौन से चैनल से हो? मैंने कहा कि मैं बस एक स्टूडेंट हूँ और मैं आपकी आवाज जनता तक पहुँचाने के लिए आई हूँ। फिर वो लोग मुझसे कार्ड के बारे में पूछने लगे।”

आगे दीपा ने बताया, “मैंने कहा कि मेरे पास कार्ड नहीं है। तो उन लोगों ने कहा कि तुरंत के तुरंत इस वीडियो डिलीट कर। वरना जाने नहीं देंगे। मैंने कहा कि मैंने कुछ भी नहीं किया है। मैंने बस इनसे पूछकर एक वीडियो बनाया है। मैं अभी-अभी यहाँँ आई हूँ तो उन्होंने कहा कि जब तक वीडियो डिलीट नहीं करोगी, जाने नहीं देंगे। फिर उन्होंने औरतों-लड़कियों को बुला लिया और सभी लड़कों ने आकर मुझे घेर लिया। उस समय मुझे वाकई ऐसा लगा कि आज मेरी जान चली जाएगी, मैं घर पर जिंदा नहीं पहुँच पाऊँगी।”

फिर दीपा कहती हैं, “असल में मैंने वहाँ जाने के बारे में अपने घर पर किसी को भी नहीं बताया था, क्योंकि मुझे पता था कि अगर मैं उन्हें बताऊँगी तो वो लोग मुझे मना करेंगे। इस बीच कुछ लड़कियाँ मुझे कहीं और ले जाने लगीं तो मैंने कहा कि मुझे पता है कि रास्ता किधर है, मैं अपने आप चली जाऊँगी। वे लोग लगातार बोल रहे थे कि वीडियो डिलीट करवाओ, वीडियो डिलीट करवाओ और इस बीच…।” इस डॉक्टर की आपबीती से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि शाहीन बाग का विरोध प्रदर्शन कितना शांतिपूर्ण है।

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रेप केस में जमानत पर आए महबूब, जमील, फिरोज सहित 6 ने पीड़िता की माँ को सबके सामने मार डाला, Video Viral

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक नाबालिग से रेप की कोशिश की जाती है। जब पीड़िता की माँ इसके लिए पुलिस में बयान दर्ज करने के अपने फैसले से पीछे नहीं हटती है, तो उन्हें सबके सामने बेरहमी से मारा जाता है, इतना मारा जाता है कि वो मर जाती हैं। आरोपितों के नाम भी जान लीजिए – आबिद, मिंटू, महबूब, चाँद बाबू, जमील और फिरोज।

दरअसल, नाबालिग से बलात्कार का यह मामला 2018 का है। तब इन आरोपितों ने दिन-दहाड़े 13 साल की लड़की को अगवा कर लिया था और उसके साथ रेप की कोशिश की थी। पुलिस ने इस मामले में महबूब समेत उसके पाँच साथियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। इनमें आबिद, मिंटू, महबूब, चाँद बाबू, जमील और फिरोज शामिल हैं। हाल ही में आरोपितों को ज़मानत मिली थी। पुलिस के अनुसार, रिहा होते ही 9 जनवरी को ये सारे आरोपित पीड़िता के घर में जबरन घुसे और फिर उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया।

बलात्कार के प्रयास मामले में पीड़िता की माँ मुख्य गवाह थीं। पीड़िता की माँ ने जब केस वापस लेने से इनकार कर दिया तो बबलू, मिंटू और महबूब समेत आधा दर्जन लोगों ने मिलकर चापड़ व डंडों से पीड़िता की माँ और मौसी को इतनी बुरी तरह से पीटा कि वो दोनों अधमरी हो गईं। इस हमले में पीड़िता की माँ रूबी की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि मौसी रुखसाना गंभीर रुप से घायल हैं, जिनका इलाज अभी जारी है।

पीड़िता के परिजनों की शिक़ायत पर थाना चकेरी में आरोपितों के ख़िलाफ़ छेड़छाड़, जान से मारने के प्रयास समेत कई धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। पीड़िता की माँ की मौत के बाद इलाक़े में तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालात पर नियंत्रण रखने के लिए मृतका के घर के बाहर और पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की गई है। यह मामला चकेरी थाना क्षेत्र का है। आरोपितों में से चार को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है।

सोशल मीडिया पर हमलावरों का एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि पीड़िता की माँ को कितनी बुरी तरह से मारा जा रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि आरोपी अपने जूतों से पीड़िता का माँ का सिर कुचल देता है।

ख़बर के अनुसार, वर्ष 2018 में 13 साल की नाबालिग लड़की के साथ आरोपितों ने बलात्कार करने की कोशिश की थी। इस सन्दर्भ में थाना चकेरी में आईपीसी की धारा- 323, 336, 354ख और 11/12 पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल की थी। कुछ महीनें जेल में सज़ा काटने के बाद जब वो ज़मानत पर बाहर आए थे। फ़िलहाल, पुलिस ने फ़रार आरोपितों की धड़-पकड़ के लिए पाँच टीमों का गठन किया है।

कानपुर छेडख़ानी की शिकायत करने गई युवती के साथ अभद्रता करने वाला पुलिसकर्मी निलंबित

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‘सभी मूर्तियों को हटा दिया जाएगा… केवल अल्लाह का नाम रहेगा’: IIT कानपुर में जाँच कमिटी गठित, 15 दिन में रिपोर्ट

‘2024 में दोबारा राहुल गाँधी को चुनने की गलती न करें’ – PM मोदी के कट्टर आलोचक ने खुद कही यह गंभीर बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक माने जाने वाले इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में वायनाड से राहुल गाँधी को चुनकर केरल के लोगों ने विनाशकारी काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने राहुल गाँधी का कोई भविष्य नहीं है। केरल साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार (17 जनवरी, 2019) को ‘राष्ट्र भक्ति बनाम अंधराष्ट्रीयता’ विषय पर बोल रहे रामचंद्र गुहा के सुर बदले-बदले से रहे। उन्होंने कहा कि ‘खानदान की पाँचवी पीढ़ी’ के राहुल गाँधी के पास भारतीय राजनीति में ‘कठोर परिश्रमी और खुद मुकाम बनाने वाले’ नरेंद्र मोदी के सामने कोई मौका नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं निजी तौर पर राहुल गाँधी के खिलाफ नहीं हूँ। वह सौम्य और सुसभ्य व्यक्ति हैं लेकिन युवा भारत एक खानदान की पाँचवी पीढ़ी को नहीं चाहता। अगर आप (मलयाली लोग) साल 2024 में भी दोबारा राहुल गाँधी को चुनने की गलती करेंगे तो आप नरेंद्र मोदी को फायदा पहुँचाएँगे।’’ वहाँ मौजूद केरल वासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केरल ने भारत के लिए कई बेहतरीन काम किए हैं, लेकिन उन्होंने संसद के लिए राहुल गाँधी को चुनकर एक विनाशकारी कार्य किया है।

अपनी बात को विस्तार से समझाते हुए रामचंद्र गुहा ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वो राहुल गाँधी नहीं हैं। नरेंद्र मोदी और राहुल गाँधी के बीच अंतर समझाते हुए इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा, “नरेंद्र मोदी ने अपनी शख्सियत खुद बनाई है। उन्होंने खुद यह मुकाम हासिल किया है। वे सेल्फमेड हैं। उन्होंने 15 वर्षों तक एक राज्य को चलाया है। उनके पास प्रशासनिक अनुभव है। वे जबर्दस्त रूप से परिश्रमी हैं और कभी यूरोप में छुट्टियाँ मनाने नहीं जाते। विश्वास करें, मैं ये बातें पूरी गंभीरता के साथ कह रहा हूँ।”

गुहा ने कहा कि आजादी के दौरान ‘महान पार्टी’ रही कॉन्ग्रेस अब ‘दयनीय पारिवारिक कंपनी’ बन चुकी है। हिंदुत्व और अंधराष्ट्रवाद के विकास का यह भी एक महत्वपूर्ण कारण है। गुहा ने कहा कि अगर राहुल गाँधी ‘ज्‍यादा समझदार, ज्‍यादा मेहनती होते और कभी यूरोप में छुट्टियाँ नहीं मनाते’ तो भी वह पाँचवीं पीढ़ी के शासक के नाते, अपनी मेहनत से आगे बढ़ने वाले मोदी के आगे फायदेमंद नहीं रहते। इतिहासकार ने सोनिया गाँधी पर भी निशाना साधा। गुहा ने कहा कि सोनिया गाँधी उन्‍हें ‘खत्‍म हो चुके मुगल वंश’ की याद दिलाती हैं जो अपने साम्राज्‍य की स्थिति से अंजान थे।

गुहा ने कहा, ‘भारत लोकतांत्रिक बन रहा और सामंतवाद कम हो रहा है और गाँधी परिवार इसे अभी समझ नहीं रहा है। आप (सोनिया गाँधी) दिल्‍ली में हो, आपका साम्राज्‍य लगातार सिकुड़ रहा है लेकिन आपके चमचे आपको अभी भी बता रहे हैं आप अभी भी बादशाह हो।’ 

उन्‍होंने गाँधी-नेहरू परिवार के बारे में कहा कि आपके गलतियों की सजा आने वाली सात पीढ़‍ियों को भुगतना होगा। गुहा ने कहा कि राहुल गाँधी की वजह से नरेंद्र मोदी जवाहर लाल नेहरू का मुद्दा उठाते हैं और कहते हैं कि नेहरू ने ‘चीन में यह किया, कश्‍मीर में यह किया, तलाक में यह किया।’ उन्‍होंने कहा कि अगर राहुल गाँधी राजनीतिक परिदृश्‍य से गायब हो जाते हैं तो मोदी को अपनी नीतियों और उनकी असफलता के बारे में मजबूरन बात करना ही होगा।

दरबारी लेखक रामचंद्र गुहा कॉन्ग्रेस की हार से नाराज, माँगा ‘युवराज’ राहुल का इस्तीफा

नींद से जागे ‘उपन्यासकार’ रामचंद्र गुहा, कहा अब तो कॉन्ग्रेस में वंशवाद ख़त्म करो

रामचंद्र गुहा को मुक्का किसने मारा? पुलिस ने धमकी दी या मार दिया? – शशि थरूर के Viral वीडियो का सच

AMU के छात्र नेताओं ने जूता दिखाकर प्रोफ़ेसर को कहा- ‘दल्ला’, VC ने कहा- सरकार हमें 1100 करोड़ देती है…

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में CAA के ख़िलाफ पिछले 32 दिनों से धरना दे रहे छात्रों का गुस्सा शक्रवार को सातवें आसमान पर पहुँच गया। छात्रों का वीसी के ख़िलाफ गुस्सा कुछ इस कदर फूटा कि उन्होंने प्रॉक्टर प्रोफेसर को पहले तो जूता दिखाया और फिर “दल्ला” कहकर अपने पास बुलाया। इस दौरान छात्रों की प्रॉक्टर टीम के साथ जमकर नोंकझोंक हुई।

एएमयू में 32 दिनों से CAA के ख़िलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है और न ही इस विरोध के कम होने के आसार दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि धरने पर बैठे छात्रों का गुस्सा अब फूट-फूट कर बाहर आने लगा है। शुक्रवार को कुछ ऐसा ही हुआ, कि धरना-प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रॉक्टर टीम के साथ नोंकझोंक हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि गुस्साए आंदोलनकारी छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रोफेसर को ‘दल्ला’ कह दिया। इसके जवाब में प्रोफेसर अफीफुल्लाह ख़ान ने कहा कि “हाँ मैं दलाल हूँ।”

इस बीच छात्र नेताओं ने वीसी और रजिष्ट्रार को अपने निशाने पर लेते हुए कहा कि कैंपस में पिछले कई महीनों से दो सिपाही अवैध रूप से रह रहे हैं। तो ऐसे में सवाल उठता है कि कैंपस में असामाजिकतत्व छात्र हैं या फिर कि ये दोनों? इतना ही नहीं छात्रों ने एएमयू के कुलपति तारिक मंसूर को जनरल डायर तक कह दिया। छात्रों ने आगे कहा कि इन लोगों का बॉयकॉट होना बहुत ही जरूरी है। क्यों कि हम पुलिसिया कार्रवाई में अपने एक छात्र का हाथ खो चुके हैं।

वहीं महीनों में चल रहे आंदोलनकारी छात्रों के धरने में गुरुवार शाम को अचानक से एएमयू कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर पहुँच गए। उन्होंने जाते ही छात्रों को सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट से सम्बन्धित कागज को दिखाते हुए नाराजगी जताई, जिसके जवाब में छात्रों ने कहा कि वायरल हो रही खबर के कारण हम 32 हजार छात्रों को कटघरें में खड़ा नहीं कर सकते।

वहीं वीसी तारिक मंसूर ने कहा कि कैंपस में जो भी कुछ हुआ उसके लिए मुझे अफ़सोस है, मैंने कभी सोचा भी नहीं था। मैं यहाँ मगरमच्छी आँसू बहाने नहीं आया। हमदर्दी है, इसलिए आया हूँ। रही बात एसएसपी को पत्र लिखने की तो सरकार हमें 1100 करोड़ रुपए हर साल देती है। अग़र कोई बड़ा हादसा हो गया तो सरकार हमसे पूछेगी। वहीं वीसी ने इसके इतर मीडिया को बयान ज़ारी करते हुए कहा कि पुलिस को केवल शाँति व्यवस्था बनाने की अनुमति दी थी, पुलिस को किसी भी हॉस्टल में प्रवेश नहीं करना चाहिए था।

दैनिक जागरण द्वारा प्रकाशित ख़बर की कटिंग

एएमयू वीसी तारिक मंसूर के अचानक छात्रों के बीच धरने में पहुँचने पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक निगरानी समिति के सदस्य मानवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि वीसी का छात्रों के बीच धरने पर जाना उनका दोहरा चरित्र दर्शाता है। एक तरफ़ वह पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाते हैं औऱ दूसरी ओर आंदोलनकारी छात्रों को धरने पर समर्थन देने के लिए पहुँचते हैं। यह धरने को संचालन करने की ही एक नीति है। इस सम्बन्ध में केन्द्रीय मानव विकास मंत्रालय को अवगत कराया जाएगा। साथ ही हम सरकार से माँग करेंगे कि यहाँ सेना के अधिकारी को इनके स्थान पर वीसी नियुक्त किया जाए।

देवेंदर के बहाने सेना पर सवाल, आतंकी बेगुनाह? अजीत भारती का वीडियो | Ravish’s CAA tune, Questions security forces

रवीश कुमार ने लिखा कि आतंकवादियों से क्या नाता रहा डीएसपी देवेंदर सिंह का। उन्होंने लिखा, “दरअसल हैरानी इसलिए कि बार-बार मना करने के बाद भी बहुत लोग आतंकवाद को मजहब की निगाह से देखते हैं।” तो किस निगाह से देखें रवीश जी। बिल्कुल मजहब है आतंक का। पूरी दुनिया में दिखता है कि बम फोड़ने से पहले कौन सा नारा लगता है? आईएसआईएस के झंडे पर कौन सा नारा लिखा हुआ है?

तो क्या आप एक देवेंदर सिंह, जो कि सिख हैं, के नाम पर तमाम उदाहरण को झूठला देंगे कि इस्लामी आतंक दुनिया या इस देश में नहीं है। सारे आतंकी मुसलमान निकल रहे हैं और एक अपवाद मिल गया है आपको तो आप उसे झूठा कह रहे हैं। भगवा आतंक के समय पर भी आपलोग यही थ्योरी लेकर आए थे।

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

हिन्दू ब्राह्मणों को निशाना बनाने के लिए पाकिस्तान ने की राणा अयूब की तारीफ

यह अब कोई छुपी हुई बात नहीं रह गई है कि भारत में कुछ ‘पाक ऑक्युपाइड पत्रकार’ (POP) पकिस्तान के हितों के लिए काम करते हैं। समय-समय पर पाकिस्तान इन पत्रकारों की भारत को खराब छवि में पेश करने ले लिए तारीफ भी करता है। इसी क्रम में पकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने ‘मुस्लिम पत्रकार राणा अयूब’ की तारीफ ‘फासिस्ट मोदी सरकार का पर्दाफाश’ करने के लिए की है।


पकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने अपने आधिकारिक अकाउंट से लिखा है कि सूचना एवं प्रसारण में विशेष सहयोगी डॉक्टर फिरदौस आशिक अवान ने मोदी के फासिस्ट एजेंडा को बेनक़ाब करने वाली मुस्लिम महिला जर्नलिस्ट राणा अयूब की तारीफ की है।

डॉक्टर फिरदौस आशिक अवान ने लिखा है- “शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वालों को इतिहास के सुनहरे पन्नों में याद रखा जाता है। जो साहस भारतीय मुस्लिम जर्नलिस्ट ने अपनी ड्यूटी में दिखाया है वह तारीफ के लायक है।”

कश्मीर को ‘इंडियन ऑक्युपाइड कश्मीर’ बताते हुए फिरदौस आशिक ने राणा अयूब की तारीफ की है।

फिरदौस आशिक अवान द्वारा शेयर किए गए वीडियो की शुरुआत मुहम्मद अली जिन्ना और नेल्सन मंडेला की शोषण के विरुद्ध संघर्ष की तारीफ से शुरू होती है। इसके बाद वो राणा अयूब को मुहम्मद अली जिन्ना की लिस्ट में शामिल करते हुए आगे बढ़ती हैं और बताती हैं वर्तमान में ही ऐसा उदाहरण शोषण से लड़ने वाली एक पत्रकार ने पेश किया है।

इसमें फिरदौस कश्मीर और नागरिकता संशोधन अधिनियम की ओर इशारा करते हुए कहती हैं कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करना और CAA, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे दमनकारी इस्लामी देशों से उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रयास करता है, आधुनिक विश्व में भारत के दमनकारी राज्य का उदाहरण पेश करते हैं।

इसके बाद वीडियो में बताया जाता है कि पाकिस्तान जैसे एक आतंक के पर्याय देश द्वारा ‘बहादुर मुस्लिम पत्रकार’ की तारीफ क्यों की जा रही है। हाल ही में, विवादास्पद पत्रकार राणा अय्यूब ने जम्मू-कश्मीर के भारतीय केंद्र शासित प्रदेश में एक विदेशी पत्रकार को अनुच्छेद-370 हटाने के बाद घाटी में मौजूदा स्थिति पर रिपोर्ट करने के लिए नियुक्त किया था। पत्रकार डेक्सटन फिल्किंस ने ‘न्यू यॉर्कर’ पर अपने लेख में बेशर्मी से स्वीकार किया था कि अयूब द्वारा उसे अवैध रूप से कश्मीर में घुसाया गया था।

फिल्किंस लिखते हैं कि उन्हें राणा अयूब द्वारा मुंबई आमंत्रित किया गया था, जहाँ से वे कश्मीर में विदेशी संवाददाताओं पर प्रतिबंध लगाने के भारत सरकार के आदेश की अवहेलना करने की कोशिश करने वाले थे। इसमें लिखा गया है कि राणा अयूब ने उसे स्कार्फ की एक जोड़ी सौंपी और उससे कहा कि वह एक कुर्ता, ठेठ भारतीय अंगरखा खरीदे, जिससे वह खुद को भारतीय समझ सके।

राणा अयूब का बयान लिखते हुए फिल्किंस ने लिखा है- “मुझे निन्यानबे प्रतिशत यकीन है कि आप पकड़े जाएँगे, लेकिन आपको वैसे भी आना ही चाहिए। लेकिन अपना मुँह मत खोलना।”

फिल्किंस ने लेख में आगे उल्लेख किया है कि जब वे श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरे थे, तो राणा अयूब ने उन्हें ‘विदेशियों के लिए पंजीकरण’ डेस्क पर दाखिला दर्ज किए बिना ही दूर ले गई। हवाई अड्डे पर पुलिसकर्मियों और हंगामे का फायदा उठाते हुए, फिल्किंस और राणा श्रीनगर के लिए निकल गए।

इस पूरे प्रकरण में राणा अयूब और फिल्किंस के इस कृत्य ने भारत सरकार द्वारा अनिवार्य कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन किया है। ‘विदेशियों के लिए आदेश, 1958‘ के अनुसार, विदेशी नागरिकों, पर्यटकों के साथ-साथ पत्रकारों को, ‘प्रतिबंधित क्षेत्रों’ या ‘संरक्षित क्षेत्रों’ में प्रवेश करने के लिए उन्हें सरकार की अनुमति की आवश्यकता होती है।

पाकिस्तान द्वारा जारी वीडियो में आगे कहा गया है- “भारत में ब्राह्मण हिंदुओं के इतिहास को देखते हुए, ‘CJ पोस्ट’ राणा अयूब की जान की सुरक्षा को लेकर आशंकित है।” ब्राह्मण और हिन्दुओं से घृणा, पाकिस्तान और उसकी राणा अयूब जैसी बहनों के लिए कोई नया विषय नहीं है। हालाँकि, पाकिस्तान का यह प्रोपेगंडा आखिर में यही साबित करता है कि भारत में CAA जैसे कानून क्यों जरुरी हैं।

यह स्पष्ट है कि राणा अयूब और पाकिस्तान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिन्दू ब्राह्मणों से कितनी नफरत है। वास्तव में, पाकिस्तान ने राणा अयूब को ‘ब्राह्मण हिंदुओं’ से डरे हुए ‘मुस्लिम पत्रकार’ के रूप में संदर्भित किया, जो खुद उनकी बेशर्मी की ओर इशारा करता है।

दिलचस्प बात यह है कि, राणा अयूब की विवादास्पद पुस्तक- ‘गुजरात फाइल्स’, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मनगढ़ंत, बताते हुए कहा था कि सबूत के तौर इसकी कोई कीमत नही है, ने भी शुद्ध झूठ के आधार पर नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। पाकिस्तान और राणा अयूब के बीच कम से कम यह बात तो कॉमन है। मुस्लिम भीड़ द्वारा एंटी-सीएए दंगों के बाद, राणा अय्यूब एक समाचार चैनल पर लाइव प्रसारण में झूठ भी बोला था कि समुदाय विशेष के लोग शांति से विरोध कर रहे थे। इस प्रकार, पाकिस्तान और राणा अयूब के बीच एक और समानता उजागर होती है। यानी, उम्माह की खातिर झूठ।

AMU में छात्रों के ‘उपद्रव’ के बाद CAA विरोध के नाम पर शिक्षकों ने लगाए ‘आज़ादी के नारे’

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में CAA के ख़िलाफ शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन योगी-मोदी, अमित शाह और हिन्दुत्व की कब्र खोदने, पुलिस से आज़ादी, आरएसएस से आज़ादी की माँग करते हुए आज तिरंगे के नीचे एक दूसरी आज़ादी की माँग तक पहुँच गया है। इस माँग को अब तक एएमयू के छात्र उठा रहे थे, लेकिन अब इस आज़ादी की माँग को उन शिक्षकों ने दोहराया है, जिनके ऊपर विश्वविद्यालय के छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की राह दिखाने की जिम्मेदारी है। अब इस आज़ादी के मायने क्या हैं? तो ज़रा आप भी जान लीजिए।

एएमयू में पिछले करीब एक महीने से विश्वविद्यालय के छात्र CAA के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में बाबे सैयद गेट पर 32वें दिन ज़ारी धरने के बीच गुरुवार दोपहर को विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने एक विरोध मार्च निकाला, जिसमें छात्रों ने सीएए और बीजेपी के ख़िलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही छात्रों ने एएमयू के वीसी तारिक मंसूर और रजिस्ट्रार को अपने निशाने पर रखा और उनके ख़िलाफ भी जमकर नारेबाजी करते हुए ऐलान किया कि जब तक वीसी अपना त्यागपत्र नहीं देंगे तब तक हम कक्षाओं का बहिष्कार करेंगे। इस दौरान छात्रों ने वीसी मुर्दाबाद के भी नारे लगाए।

यह विरोध यहीं खत्म नहीं हुआ। इस विरोध को अपना समर्थन देते हुए शिक्षकों ने भी एक मार्च निकालकर इस विरोध को आगे बढ़ाया। अलीगढ़ मुस्लिम टीचर्स एसोसिएशन के सचिव प्रोफेसर नजमुल इस्लाम की अनुवाई में एएमयू के शिक्षकों ने CAA के विरोध में एक तिरंगा यात्रा निकाली। इस यात्रा के दौरान शिक्षकों ने हाथों में तख्तियाँ लेकर नारेबाजी की और कहा कि जो देश पूर्वजों ने बनाया था, अब हम उस देश के वासी नहीं रहे। नया कानून हिन्दुओं और समुदाय विशेष को बाँटने वाला है। इतना ही नहीं शिक्षकों ने छात्रों की तरह ही रास्ते में तिरंगे के नीचे आज़ादी के नारे लगाए।

एएमयू में शिक्षकों ने लगाए आज़ादी के नारे। दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर की कटिंग

अब आप जान लीजिए कि इस आज़ादी का मतलब एएमयू में खुलकर विरोध प्रदर्शन करने से नहीं बल्कि उस आज़ादी से है, जिस आज़ादी जिक्र अक्सर कश्मीर में होता है और वहाँ के प्रदर्शनों में अक्सर माँगी जाती है, जिस आज़ादी को दिल्ली के जेएनयू और जामिया में सीएए के खि़लाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हाथों में पोस्टर लेकर माँगा गया था। इन दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगा तो जरूर दिखाई दिए, लेकिन किसी ने भी ‘भारत माता की जय’ तक नहीं बोला। बोला भी तो क्या हमें चाहिए ‘जिन्ना वाली आज़ादी।’

इतनी ही नहीं इस दौरान एक नहीं बल्कि सैकड़ों हिन्दूघृणा से लबरेज पोस्टर प्रदर्शनकारियों के हाथों में देखे गए, जिनके माध्यम से हिंदुओं को कैलाश भैजने की बात कही गई, कहीं ख़िलाफ़त 2.0 को काली स्याही से दीवार पर लिख दिया गया। जोर-जोर से ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे लगे और पूरी दुनिया में ‘ऊँ’ के चिन्ह को अपमानित करते हुए पोस्टरों में ‘फक हिंदुत्व’ लिखा गया। इसके अलावा इन प्रदर्शनों में हिंदू राष्ट्र को रेपिस्ट कहा गया। साथ ही ‘फक हिंदू राष्ट्र’ जैसे नारे लड़कियों के गाल पर लिखे देखे गए। इन नारे और पोस्टरों के माध्यम से बहुसंख्यक हिंदू की भावनाओं को तो आहत किया ही गया बल्कि इन नारों ने इन प्रदर्शनकारियों की मंशाओं को उजागर कर दिया।

जिन मुस्लिमों का खतना नहीं हुआ वो भी मोदी-शाह से नहीं डरता: मौलवी की धमकी, देखें वीडियो

सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के नाम पर इन दिनों सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर वामपंथी गिरोह और कट्टरपंथी समुदाय लगातार आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है। इस बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर और वायरल हुई है। जिसमें एक मौलवी दिग्गज़ नेताओं और भाजपा-आरएसएस कार्यकर्ताओं को सरेआम धमकी देता नजर आ रहा है। हालाँकि, ये वीडियो कहाँ की है, इसका पता नहीं चल पाया है। लेकिन, इस वीडियो में मौलवी को मुस्लिम समुदाय के लोगों से कहते हुए सुना जा सकता है, “जिन मुस्लिमों ने खतना नहीं करवाया, वो भी मोदी सरकार से नहीं डरता। और जो सुसु भी नहीं करना जानता वो भी नहीं डरता।”

मौलवी को वीडियो में केंद्र सरकार और अमित शाह के ख़िलाफ़ बयान देते साफ सुना जा सकता है। वो पहले कहता है कि वे बाबा अम्बेडकर की इज्जत करते हैं और यहाँ उनके संविधान को बचाने के लिए बैठे हैं। लेकिन आगे अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहता हैं, “वो आटे का थैला अमित शाह बोलता है कि मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं है। अमित शाह तुम्हें पता होना चाहिए कि जिन मुस्लिमों का खतना भी नहीं हुआ वो भी तुमसे नहीं डरता और जिसकी सुसु भी नहीं होती, वो भी तुमसे नहीं डरता। मुस्लिम तुमसे नहीं डरते।”

गौरतलब है कि मौलवी ने यहाँ गृहमंत्री अमित शाह द्वारा 11 दिसंबर को संसद में दिए बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मौलवी ने भले ही यहाँ सीएए को लेकर लोगों को और मुस्लिम समुदाय को सुनिश्चित किया कि इस कानून से उनका कुछ नहीं बिगड़ने वाला, लेकिन साथ ही उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और यूपी सीएम योगी को लेकर बहुत आपत्तिजनक बातें की। इस्लामिक साफे को सर पर बाँध वीडियो में मौलवी ने भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ताओं को धमकाया।

मौलवी ने वीडियो में दावा किया कि अगर भाजपा और आरएसएस के ख़िलाफ़ मुस्लिम लोग सड़कों पर उतर आए, तो उनके कपड़े तक खुल जाएँगे। मौलवी को वीडियो में कहते सुना जा सकता है, “हम तुम्हें असली तस्वीर दिखाएँगे। इंशाल्लाह। हिंदुस्तान के झंडे तिरंगे में मौजूद तीन अलग-अलग रंग हैं। जो देश में अलग-अलग धर्मों (हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई) को दर्शाता है। उसमें से ये लोग मुस्लिमों को निकालने के चक्कर में हैं। लेकिन, जरा अमित शाह, मोदी, योगी नीचे झाँक कर देखें, झंडे के नीचे डंडा है। डंडे से हम ऐसा मारते हैं कि भाजपा और आरएसएस की चड्ढी खुल जाती है।”

इसके बाद इस वीडियो में मौलवी को भाजपा, आरएसएस को नीचा दिखाने के लिए ये भी कहते हुए सुना जा सकता है कि उनकी चड्ढी से बड़ी मुस्लिमों की जेब रहती है और अगर मुस्लिम अपनी पगड़ी खोल दे, तो 25 चड्ढियाँ बन जाएँ।

इस वीडियो को देखने के बाद अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी मजहब के पैरोकार मोदी-शाह से नफरत करते-करते भाषाई स्तर इतने गलीच हो चुके हैं कि अब उन्हें खुद ही नहीं मालूम रह गया कि उन्हें क्या बोलना है और क्या नहीं। इससे पहले भी भारत के मुस्लिमों में डर फैलाने के लिए कई बार इस तरह की धमकियाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री को दी जा चुकी है। इनके अलावा ऐसे ही नफरत भरे भाषण देकर समुदाय विशेष के लोगों को भड़काया जाता रहा है।