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बंगाल में CAA के समर्थन में रैली की अनुमति नहीं, धारा-144 लगा कर रोक रही TMC सरकार

पश्चिम बंगाल सरकार सीएए को लेकर दोहरा रवैया अपना रही है। जहाँ एक तरफ़ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पदयात्रा कर के लगातार इस क़ानून के विरोध में रैलियाँ कर रही हैं, सीएए के समर्थकों को रोकने के लिए कर्फ्यू लगा दिया जा रहा है। बंगाल पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 144 लगा कर रविवार (जनवरी 12, 2020) को भाजपा को सीएए के समर्थन में रैलियाँ करने की अनुमति नहीं दी। इतना ही नहीं, कई भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ मामला भी दर्ज कर लिया गया। सीएए के समर्थन में नॉर्थ बंगाल में 2 रैलियाँ होनी थीं।

नॉर्थ बंगाल में अपनी कमज़ोर स्थिति को देखते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस ने पूरी ताक़त झोंक दी है। ये वही क्षेत्र है, जहाँ भाजपा ने तृणमूल को कई लोकसभा सीटों पर 2019 चुनाव में पटखनी दी। ममता बनर्जी की पार्टी ने अधिकतर सीटें साउथ बंगाल में जीती। जनवरी 12 को बंगाल भाजपा के महासचिव सायंतन बासु और कूच विहार यूनिट की पार्टी अध्यक्ष मालती रे को सीएए के समर्थन में आयोजित ‘अभिनन्दन यात्रा’ में भाग लेने से रोक दिया गया। पुलिस ने बहाना बनाया कि हिंसा की आशंका से कर्फ्यू लगा दिया गया है।

भाजपा ने तृणमूल सरकार की इन पैंतरेबाजियों के ख़िलाफ़ कोलकाता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। भाजपा का आरोप है कि ममता बनर्जी राज्य में भाजपा के बढ़ते प्रभाव से डर गई हैं और वो जनता को सीएए के समर्थन में रैली करने से रोक रही हैं। जिस रैली में जाने से भाजपा नेताओं को रोका गया, वहाँ पहले से ही बड़ी भीड़ जुट गई थी और मंच सज गया था। किसी ने सम्बोधन भी नहीं किया था। जब भाजपा नेताओं ने किसी अन्य स्थल पर बैठक की तो उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया।

तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान देने की बजाय आरोप-प्रत्यारोप की रणनीति अपनाई है। टीएमसी ने कहा कि भाजपा को पहले राज्य में पार्टी के अध्यक्ष दिलीप घोष को आक्रामक बयान देने से रोकना चाहिए। तृणमूल सरकार का दावा है कि क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये सब किया गया। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि भाजपा को कभी भी बैठक व रैलियाँ करने से नहीं रोका गया।

न सिर्फ़ भाजपा बल्कि वामपंथी पार्टियों को भी बंगाल में बैठक व रैलियाँ करने से रोका जा रहा है। सीपीएम नेता सूजन चक्रवर्ती ने दावा किया कि उनकी पार्टी के कई बैठकों को टालने के लिए भी पश्चिम बंगाल सरकार ने कई बार धारा-144 का सहारा लिया है।

शाहरुख़ हो गया बेगाना सनम: शाहीन बाग़ के CAA विरोधियों ने ‘खामोश किंग ख़ान’ पर साधा निशाना

शाहरुख़ ख़ान को सीएए विरोधियों ने निशाना बनाया है। बता दें कि शाहीन बाग़ में कई प्रदर्शनकारी कई दिनों से जमे हुए हैं और सरकार के विरोध के नाम पर अंडे व बिरयानी खा कर पिकनिक मना रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों को ख़ासी परेशानी का समाना करना पड़ रहा है, जिन्हें कहीं भी आने-जाने में घंटों लग जा रहे हैं। शाहरुख़ ख़ान से भी वामपंथी लगातार अपील करते रहे हैं कि वो सरकार के ख़िलाफ़ बोलें लेकिन तीनों ख़ान ने इस सम्बन्ध में अब तक कोई बयान नहीं दिया है।

अब स्थिति ये है कि शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने शाहरुख़ ख़ान को निशाना बनाया है। उन्होंने नाराज़गी जताई है कि वो इस मुद्दे पर सरकार के विरोध में क्यों नहीं बोल रहे? प्रदर्शनकारियों ने ‘किंग ख़ान’ के विरोध में ये गाना गाया:

तुझे देखा तो ये जाना सनम..
शाहरुख़ हो गया बेगाना सनम..
अब यहाँ से कहाँ जाएँ हम..
अब काग़ज़ कैसे दिखाएँगे हम..

प्रदर्शनकारियों ने पूछा कि जब वो लोग ‘लड़ाई’ लड़ रहे हैं, ऐसे में सुपरस्टार चुप क्यों हैं? उन्होंने शाहरुख़ पर ख़ामोश रहने का भी आरोप लगाया।

बता दें कि इस गाने को ‘दिलवाले दुहनिया ले जाएँगे’ के लोकप्रिय गाने के शब्दों में हेरफेर कर के तैयार किया गया है। 1995 में आई इसी फ़िल्म ने शाहरुख़ को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया था। अब इसी फ़िल्म के गाने का इस्तेमाल कर के सीएए विरोधी उनकी आलोचना कर रहे हैं।

शाहीन बाग़ में मंगलवार (जनवरी 14, 2020) को पुलिस भी पहुँची, जो प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटाएगी। पुलिस ने कहा है कि इसके लिए शांतिपूर्वक तरीके का सहारा लिया जाएगा और बलप्रयोग नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने ये कार्रवाई की है। स्थानीय लोगों की परेशानी को देखते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वो जनहित में क़ानू-व्यवस्था बहाल करने का कार्य करे।

प्रोफेसर को राहुल गाँधी पर फेसबुक पोस्ट पड़ा भारी, NSUI के विरोध के कारण MU ने उन्हें अनिवार्य ‘छुट्टी’ पर भेजा

मुंबई यूनिवर्सिटी के एक प्रोफ़ेसर को अनिवार्य ‘छुट्टी’ पर भेज दिया गया है। बताया गया है कि प्रोफेसर ने दिसंबर के महीने में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को लेकर फेसबुक पर एक आपत्तिजनक पोस्ट लिखा था। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की गठबंधन सरकार पर असहिष्णुता का आरोप लगाया है। मुंबई यूनिवर्सिटी के एकेडमी ऑफ थिएटर आर्ट्स के निदेशक योगेश सोमन ने कथित तौर पर वीडियो में कुछ आपत्तिजनक बातें कहीं थी, जिसकी वजह से यूनिवर्सिटी द्वारा यह निर्णय लिया गया।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोफेसर सोमन ने 14 दिसंबर को फेसबुक पर एक वीडियो ब्लॉग लिखा था। इस वीडियो में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को NSUI द्वारा और कुछ शब्दों को विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा आपत्तिजनक बताया गया। बताया जा रहा है कि NSUI ने प्रोफेसर योगेश सोमन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। जिसके बाद कल विश्वविद्यालय की फैक्ट-फाइंडिंग ने उसे दोषी पाया और फिर उन्हें छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया गया।

23 दिसंबर को NSUI के सदस्यों ने मुंबई विश्वविद्यालय के वीसी डॉ सुभाष पेडणेकर का घेराव किया था और योगेश सोमन के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। 51 सेकंड के इस वीडियो में मुंबई विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर सोमन, राहुल गाँधी से कहते हुए दिखाई दे रहे हैं, “आप वास्तव में सावरकर नहीं हैं, आपके अंदर उनके कोई गुण मोजूद नहीं हैं। सच तो यह है कि आप एक सच्चे गाँधी ही नहीं हैं… ”

रिपोर्ट्स के अनुसार NSUI ने कहा था कि सोमन विश्वविद्यालय में एक राजनीतिक वकील की तरह व्यवहार कर रहे हैं और छात्रों के बीच संघर्ष को भड़का सकते हैं।

वहीं, यूनिवर्सिटी का कहना है कि प्रोफेसर के खिलाफ फेसबुक पोस्ट के अलावा और भी कई अन्य आरोप थे। यह वीडियो पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा वीर सावरकर के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर था। गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने दिल्ली में एक रैली के दौरान कहा था, “मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है, मैं सच के लिए माफी नहीं माँगूँगा”, उन्होंने सावरकर पर अंग्रेजों से माफी माँगने का आरोप लगाया था।

प्रोफेसर के साथ हुई घटना अघाड़ी सरकार की असंतोष पर कार्रवाई का ताजा उदाहरण है। अभी कुछ दिनों पहले ही शिवसेना ने उद्धव ठाकरे की आलोचना करने के लिए उसकी पिटाई की थी और फिर जबरन उसका सिर मूँड़वा दिया था। विधायक आदित्य ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं के इस व्यवहार की निंदा करने के बजाय उन्होंने पीड़ित को ट्र्रोल कहा था।

इंडिया टुडे समूह की ‘बेकार’ पत्रकारिता के 5 नमूने जिसे वो ‘महान’ खबरों के नाम से परोस चुके हैं

मीडिया जगत में सबसे तेज और नंबर 1 बने रहने की चाह में इंडिया टुडे समूह ने अपने खोजी पत्रकारों से बीते दिनों फर्जी पड़ताल करवाई। उन्होंने एबीवीपी कार्यकर्ताओं को पूरी हिंसा के लिए दोषी साबित करने के लिए जी-जान लगा दी । लेकिन, झूठ का पर्दाफाश होते ही वे अपने दर्शकों को समझाने लगे कि आलोचना करने वालों पर ध्यान न दिया जाए। ऐसा इसलिए शायद, क्योंकि उनका मानना है कि उन्होंने जो अपने चैनल के माध्यम से दिखाया, वही अंतिम सत्य है।

खैर, ये पहली बार नहीं है, जब आजतक ने फर्जीवाड़ा फैलाकर ऑडियंस का ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास किया हो। इससे पहले भी कई ऐसे मौके आए, जब इंडिया टुडे की फैक्ट चेक टीम ‘एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम’ ने पत्रकारिता को शर्मसार किया।

इसलिए, आज हम आपके सामने इंडिया टुडे की पत्रकारिता की पोल खोलने के लिए उनकी 5 पुरानी ऐसी खबरें लेकर आए हैं। जब इस समूह ने अपने पाठक और दर्शक को सूचना देने के नाम पर या तो मजाक उड़ाया या फिर फेक न्यूज़ को खबर बताया।।

क्रिस गेल पर बने मीम पर किया फैक्ट चेक

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बीते समय जगहों के नामकरण के कारण चर्चा में रही थी। इस बीच कई सोशल मीडिया यूजर्स उनके ऊपर अलग-अलग मीम बनाकर शेयर कर रहे थे। जिनमें एक ये भी था कि योगी आदित्यनाथ ने क्रिस गेल का नाम कृष्ण गोयल कर दिया है और उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली है। हालाँकि, ये बात सुनकर कोई भी शख्स पहली बार में ही इसे मजाक बता सकता है। लेकिन आजतक की वॉर रूम में बैठी टीम ने इसपर बाकायदा अपना फैक्ट चेक किया और अपना पूरा जोर लगाकर प्रयास किया कि उनका दर्शक इसे एक संजीदा रिपोर्ट मानें।

एक और मीम पर बनाई खबर

क्रिस गेल पर बने मीम के अलावा इंडिया टुडे के वॉर रूम से एक और वायरल मीम को खबर बनाकर तैयार किया गया। ये मीम यूएस के पूर्व प्रेसिडेंट बराक ओबामा के ऊपर था। जिसमें वह नरेंद्र मोदी को दोबारा प्राइम मिनिस्टर बनने पर शपथ लेते हुए देखते दिखाए गए। अब हालाँकि इस मीम को देखकर भी साफ पता चल रहा था कि ये कुछ लोगों ने सिर्फ़ सोशल मीडिया पर मजे लेने के लिए किया है, जिसपर वारटरमार्क करके स्पष्ट भी किया गया है कि वो एक मीम है। लेकिन इंडिया टुडे को इससे क्या? उनके पास जब वॉर रूम है तो वो मीम को भी खबर बनाकर पेश करेंगे।

येदियुरप्पा और एनआरसी के ख़िलाफ़ फैलाई झूठी खबर

सीएए और एनआरसी मुद्दे पर बीते दिनों इंडिया टुडे ने मोदी सरकार के ख़िलाफ़ माहौल बनाने के लिए सीएम येदियुरप्पा के नाम का इस्तेमाल करके झूठ फैलाने की कोशिश की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कर्नाटक सीएम ने राज्य में एनआरसी लागू करने से मना कर दिया है। जबकि बाद में कर्नाटक मुख्यमंत्री ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा था कि वे राज्य में एनआसी और सीएए का स्वागत करते हैं। ऐसे में जब इंडिया टुडे को महसूस हुआ कि उन्होंने फर्जी खबर चला दी है और सीएम ने सामने से आकर इस बात का खंडन कर दिया है तो उन्होंने तुरंत अपनी खबर डिलीट कर दी।

इंडिया टुडे का ‘द लल्लनटॉप’ व्यंग्य का भी करता है फैक्ट चेक

इंडिया टुडे समूह का ‘द ललल्नटॉप’ डिजीटल प्लैटफॉर्म पर सक्रीय वेब पोर्टल है। ये पोर्टल दावा करता है कि ये अन्य संस्थानों से हटकर खबरें दिखाता है। अब ये कैसे करते हैं इसे समझिए, अभी बीते दिनों इन लोगों ने एक सटायर लिखने वाली वेबसाइटस पर लिखे व्यंग्य का फैक्ट चेक किया, फिर उसके प्रमाणिक होने का भी दावा किया। खबर को इस तरह से पेश किया गया कि बाद में यूजर्स उसे इंटरनेट पर तेजी से शेयर करने लगे। देखते ही देखते खबर इतनी फैल गई कि कई अन्य मीडिया संस्थान भी प्राथमिकता देकर उस खबर को कवर करने लगे। लेकिन जब असलियत खुली तो लल्लनटॉप के साथ इंडिया टुडे की काफी फजीहत हुई।

गोरखनाथ मंदिर पर भी फर्जी खबर

मोदी सरकार के कड़े विरोधी और इंडिया टुडे के मशहूर पत्रकार राहुल कंवल ने 26 दिसंबर 2018 को दावा किया था कि वो भारत की भद्दी सच्चाई उजागर करने वाले हैं। लेकिन बाद में सिर्फ़ ये बताया कि दलितों को भारत के कई मंदिरों में प्रवेश करने की इजाजत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इन मंदिरों की सूची में गोरखनाथ मंदिर भी है। जिसके महंत यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ हैं।

योगी आदित्यनाथ की छवि धूमिल करने के लिहाज से चलाए गए इस प्रोपगेंडा की धज्जियाँ तब उड़ी, जब भारी तादाद में दलित समुदाय के लोग खुलकर सामने आए और बताया कि उनका गोरखनाथ मंदिर में हमेशा स्वागत हुआ है। उन्हें कभी इस तरह का भेदभाव मंदिर में प्रवेश के दौरान महसूस नहीं हुआ।

NDTV पत्रकार की दलील: स्कूली छात्रों को CAA के बारे में बताना राजनीति है, क्योंकि इसे बड़े लोग नहीं समझ सके

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर अभी भी लोगों के बीच असमंजस है और यही वजह है कि इसको लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी लोगों के बीच इस नए संशोधित कानून को लेकर जारूकता फैलाने का काम कर रही है। इसको लेकर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जिसमें लोगों को CAA के बारे में विस्तार से समझाया जा रहा है।

मगर NDTV को बीजेपी का इस तरह से लोगों के बीच जा-जाकर नागरिकता संशोधन कानून के बारे में समझाना रास नहीं आ रहा है। इसी कड़ी में जब मुंबई में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन को लेकर प्रोग्राम किया गया और उसमें स्कूल के छात्रों को ले जाया गया तो NDTV ने इस पर सवाल खड़े कर दिए। NDTV के पत्रकार सोहित राकेश मिश्रा ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूल में छात्रों को नागरिकता कानून के बारे में बताना राजनीति है, क्योंकि इसे अभी तक बड़े लोग नहीं समझ सके हैं।

उन्होंने बीजेपी नेता किरीट सोमैया से सवाल करते हुए कहा कि क्या आपको नहीं लगता है कि जब बड़े लोग इस कानून को नहीं समझ पा रहे हैं तो फिर बच्चों को इसके बारे में बताना गंदी राजनीति है। हालाँकि, किरीट सोमैया ने इनके बेतुके सा सवाल का जवाब देना मुनासिब नहीं समझा और कहा कि उन्होंने पहले ही इसके बारे में बता दिया है। NDTV के पत्रकार का कहना है कि चूँकि बड़े लोग इसे समझ नहीं पा रहे हैं, इसलिए स्कूल के छात्रों को इसके बारे में बताना गलत है।

इस दौरान NDTV के पत्रकार ने आदित्य ठाकरे के ट्वीट का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि अगर आपको छात्रों से बात करना है तो पर्यावरण पर बात कीजिए, हेलमेट पर बात कीजिए, प्लास्टिक का इस्तेमाल कैसे करें… इस पर बात करें। CAA पर बात करके आप राजनीति कर रहे हैं।

यानी कि NDTV के पत्रकार के मुताबिक नए संशोधित कानून के बारे में बात करना, जागरूकता फैलाना राजनीति है। शायद उन्हें ये डर सता रही होगी कि यदि लोगों को CAA के बारे में सही-सही जानकारी मिल जाएगी तो फिर वो अपना प्रोपेगेंडा कैसे फैलाएँगे? वहीं मुंबई की उद्धव ठाकरे की सरकार ने CAA प्रोग्राम को लेकर स्कूल के खिलाफ नोटिस भेज दिया है।

हिन्दुओं के घरों व गाड़ियों को जलाया, मुस्लिमों पर आरोप: पीड़ितों से मिलने पहुँचे ‘टाइगर’ गिरफ़्तार

तेलंगाना के निर्मल जिले में स्थित भैंसा में कई हिन्दुओं के घरों को जला दिए जाने की बात कही जा रही है। हिन्दुओं के गाड़ियों पर पत्थरबाजी की गई और उनकी गाड़ियों को फूँक डाला गया। भाजपा नेता पी मुरलीधर राव ने एआईएमआईएम और टीआरएस के गठजोड़ को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। वहीं निज़ामाबाद के सांसद अरविन्द धर्मपुरी ने भी आरोप लगाया कि ओवैसी की पार्टी ने मुस्लिमों को भड़का कर हिंसा की वारदात को अंजाम दिया।

अब सूचना आई है कि तेलंगाना के एकमात्र भाजपा विधायक राजा सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया है। वो भैंसा के पीड़ित हिन्दुओं से मिलने के लिए जा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के इशारे पर उन्हें हिन्दू वाहिनी के पीड़ित लोगों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। तेलंगाना के फायरब्रांड हिंदूवादी नेता ‘टाइगर’ राजा सिंह ने आरोप लगाया कि जब वो भैंसा के लिए निकल रहे रहे थे, तभी उन्हें उनके आवास पर ही गिरफ़्तार कर लिया गया।

राजा सिंह ने ट्विटर पर एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें उनके आसपास पुलिसकर्मी दिख रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी से उनका वाद-विवाद भी हुआ। राजा सिंह ने आरोप लगाया है कि ओवैसी की पार्टी के गुंडों ने हिन्दुओं के घरों व गाड़ियों में आग लगाई। उन्होंने मुख्यमंत्री से माँग करते हुए कहा कि दोषियों को तुरंत गिरफ़्तार किया जाए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना के कई वीडियो शेयर किए थे। एक वकील ने सोशल मीडिया पर इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मुस्लिमों ने हिन्दुओं के 18 घरों को लूट लिया और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स में दोनों तरफ़ से पत्थरबाजी की बात कही जा रही है।

लेकिन, एक पूर्व-बैंकर ने इस घटना को लेकर बड़ा दावा किया है। उसने बताया कि ‘इज्तेमा’ के कारण कई बाहरी लोग इस इलाक़े में आए हुए थे। बता दें कि इज्तेमा में हज़ारों-लाखों की संख्या में मुस्लिम जुटते हैं और अपने मजहबी रीति-रिवाज वगैरह को पूरा करते हैं।

बॉक्स ऑफिस के बाद अब दीपिका के विज्ञापनों को भी तगड़ा झटका, किनारा कर रहे हैं बड़े ब्रांड्स

फ़िल्म ‘छपाक’ के प्रमोशन के लिए पब्लिसिटी स्टंट के चक्कर में जेएनयू जाने वाली दीपिका पादुकोण को बॉक्स ऑफिस पर तगड़ा झटका तो लगा ही है, साथ ही उनकी ब्रांड वैल्यू को भी चोट पहुँची है। दीपिका पादुकोण जिन ब्रांड्स का प्रचार करती हैं, उनकी विजिबिलिटी में कमी आई है। वामपंथियों के सरकार-विरोधी प्रदर्शन में जाकर फोटो क्लिक करवाने वाली दीपिका फ़िलहाल देश की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली अभिनेत्रियों में से एक हैं। ब्रांड्स के विज्ञापन के लिए रुपए लेने के मामले में उनकी सीधी टक्कर कंगना रनौत, प्रियंका चोपड़ा और करीना कपूर ख़ान और श्रद्धा कपूर से है।

दीपिका पादुकोण को लेकर सभी बड़े ब्रांड्स अब सेफ खेल रहे हैं। कई ब्रांड्स ने ऐसा कहा है कि वो दीपिका वाले प्रचार वीडियोज को कम दिखा रहे हैं। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में भी ‘ब्रांड दीपिका’ पर असर पड़ सकता है क्योंकि कलाकार या खिलाड़ी जो राजनीतिक रूप से सक्रिय रहते हैं, उनसे अधिकतर कम्पनियाँ दूरी ही बना कर रखती हैं। उन्हें लगता है कि इससे फालतू की कंट्रोवर्सी हो सकती है। दीपिका अपनी फ़िल्म की रिलीज से 3 दिन पहले जेएनयू गई थीं। वहाँ वामपंथी नेता कन्हैया कुमार और जेएनयू छात्र संगठन की अध्यक्ष आईसी घोष भी उपस्थित थीं।

फ़िलहाल दीपिका पादुकोण के हाथ में 23 ब्रांड हैं, जिनमें तनिष्क, विस्तारा एयरलाइन्स, गुड डे बिस्किट्स, एक्सिस बैंक और लक्स साबुन जैसे बड़े ब्रांड्स व प्रोडक्ट्स के एड हैं। अब उनके एड की विजिबिलिटी कम की जा रही है। ऐसा उस अभिनेत्री के साथ हो रहा है, जिन्हें 2019 में प्रतिदिन 11 घंटे टीवी स्पेस मिला। कहा जाता है कि वो प्रति फ़िल्म 10 करोड़ रुपए और प्रति विज्ञापन 8 करोड़ रुपए लेती हैं। एक बड़े ब्रांड के मैनेजर ने कहा कि वो अपनी कम्पनी से जुड़े सेलेब्रिटीज को राजनीति से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं।

वहीं कुछ ब्रांड्स के मैनेजरों का कहना है कि कुछ दिनों बाद लोग इस मुद्दे को भूल जाएँगे और सब ठीक हो जाएगा। महेश भट्ट और सोनम कपूर जैसी फ़िल्मी हस्तियों ने दीपिका पादुकोण का समर्थन किया है। इससे पहले आमिर ख़ान के साथ भी ऐसा हुआ है, जब उन्होंने अपनी पत्नी किरण के हवाले से देश छोड़ने की बात कही थी। तब ई-कॉमर्स कम्पनी स्नैपडील ने उन्हें अपने विज्ञापनों से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

जहाँ तक फ़िल्म ‘छपाक’ की बात है, बॉक्स ऑफिस पर इसने पहले 4 दिनों में मात्र 19.75 करोड़ रुपए की कमाई की है। वहीं इसके साथ रिलीज हुई ‘तान्हाजी’ ने 75.68 करोड़ रुपए की कमाई कर चुकी है। इन दोनों के साथ रिलीज हुई रजनीकांत और सुनील शेट्टी की ‘दरबार’ ने पहले 3 दिनों में 150 करोड़ की कमाई की है। यानी दोनों फ़िल्मों के सामने ‘छपाक’ कहीं नहीं टिकी।

लड़कियों के प्राइवेट पार्ट्स पर हमला करने वालों के साथ खड़ी हुईं दीपिका: स्मृति ईरानी

15 जनवरी के बाद Chhapaak की रिलीज पर रोक: दिल्ली HC का आदेश – चलानी है मूवी तो करो एडिट

हाईकोर्ट के आदेश के बाद शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों को ‘आज़ादी’ देने पहुँची दिल्ली पुलिस

आदेश के बाद अब दिल्ली पुलिस शाहीन बाग़ में पहुँच गई है। कोर्ट ने कहा है कि क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जनहित को देखते हुए पुलिस कार्रवाई करे। कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली पुलिस वहाँ पहुँच गई है। बता दें कि शाहीन बाग़ में हो रहे विरोध प्रदर्शन के नाम पर लोग अंडे व बिरयानी खा रहे हैं। वहाँ पिकनिक मनाए जाने व लोहड़ी का नाच-गान करने की ख़बरें भी आईं। दिक्कत ये है कि कई रास्तों के बंद होने से लोगों को अपने दफ्तर जाने-आने में कई घंटे ज्यादा लग रहे हैं। बच्चों को भी स्कूल जाने में परेशानी हो रही है।

बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध के नाम पर पूरे इलाक़े में अराजकता का माहौल बना कर बैठे प्रदर्शनकारियों को समझाएगी कि वो वहाँ से उठ कर जाएँ और आम लोगों की परेशानी का ख्याल करें। अगर वो नहीं मानते हैं कि पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। हालाँकि, पुलिस ने कहा है कि वो बलप्रयोग नहीं करेगी और लोगों को समझा-बुझा कर वहाँ से हटाया जाएगा।

पुलिस ने इस काम के लिए स्थानीय व्यापारियों से संपर्क साधा है। साथ ही क्षेत्र के मौलवियों व प्रबुद्धजनों को भी भरोसे में लिया जा रहा है। मुस्लिम समुदाय के बुजुर्गों को भी पुलिस समझा रही है। पुलिस चाहती है कि इसका समाधान शांति से निकल जाए। हाल ही में हज़ारों लोगों ने सड़क पर उतर कर इन प्रदर्शनकारियों का विरोध किया। स्थानीय लोग इनसे तंग आ चुके हैं जबकि मीडिया इन प्रदर्शनकारियों को लगातार फुटेज दे रहा है। बूढ़ी महिलाओं से लेकर 20 दिन की बच्चियों तक को आंदोलन का चेहरा बना कर पेश किया जा रहा है।

कई लोगों ने सोशल मीडिया पर ये भी कहा कि शाहीन बाग़ में प्रदर्शन के नाम पर पिकनिक मना रहे लोगों को दिल्ली पुलिस ने ‘आज़ादी देने’ की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बता दें कि ये आज़ादी स्लोगन वामपंथियों के चाहता नारा है, जिसे अलग-अलग रूप में पेश किया जाता है। इसका अधिकतर इस्तेमाल हिन्दुओं के विरोध के लिए हुआ। ‘जिन्ना वाली आज़ादी’ तक के नारे लगे।

आशंका ये भी है कि प्रदर्शनकारी दंगे जैसे हालात पैदा कर सकते हैं। सीएए विरोधी आंदोलन के फेल होने के बाद वामपंथियों ने महिलाओं को धरने पर बिठा कर मीडिया में बने रहने की तरकीब निकाली। आशंका है कि ‘महिलाओं के दमन’ का झूठा आरोप लगा कर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को बदनाम करने की साज़िश रची जा सकती है। कुछ लोगों का कहना है कि ये प्रदर्शनकारी पुलिस के वहाँ पहुँचने का ही इन्तजार कर रहे थे, जिससे वो लोग अराजकता फैला कर पुलिस को बदनाम कर सकें। हालाँकि, पुलिस हाईकोर्ट के आदेश पर वहाँ गई है।

IND Vs AUS के वनडे मैच में काले रंग पर प्रतिबन्ध? The Hindu के पत्रकार के झूठ का Fact Check

मीडिया का एक वर्ग लगातार अफवाह फैलाने के काम में लगा हुआ है। चाहे नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन हो या फिर सरकार के ख़िलाफ़ कोई ख़बर, उसे लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। इसी क्रम में ‘द हिन्दू’ जैसे बड़े मीडिया संस्थान के पत्रकार राहुल देसाई ने अफवाह फैलाने का काम किया। देसाई ने दावा किया कि वानखेड़े स्टेडियम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हो रहे मैच में दर्शकों को काले कपड़े पहन कर नहीं जाने दिया जा रहा है।

देसाई ने दावा किया कि पूरे स्टेडियम में काला रंग को ही प्रतिबंधित कर दिया गया है। यहाँ तक कि काले रंग की टीशर्ट या टोपी पहने लोगों को भी अंदर घुसने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि काला रंग ‘विरोध का प्रतीक’ है, इसीलिए ऐसा किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने ‘फक यू मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन, फक यू वैरी मच’ लिखा। बता दें कि आजकल सरकार के विरोध में लिखने वाले अनुराग कश्यप जैसे लोग इसी तरह की आपत्तिजनक भाषा में सोशल मीडिया में गंदगी फैला रहे हैं।

देसाई ने एक फ़र्ज़ी ख़बर के आधार पर अफवाह फैलाई और बड़े-बड़े दावे कर दिए। उन्होंने कहा कि उनके एक दोस्त ने काले रंग की टीशर्ट पहन रखी थी लेकिन उसे अंदर जाने दिया गया क्योंकि उसने काले टीशर्ट के ऊपर तिरंगा लपेट रखा था। देसाई ने इसी बहाने भारत के बड़े क्रिकेटरों को भी निशाने पर लिया और पूछा कि वो चुप क्यों हैं? दरअसल, वामपंथियों को सीएए के विरोध के मुद्दे पर बेरोजगार बॉलीवुड सेलेब्स के अलावा और किसी का साथ नहीं मिल रहा है, इसीलिए वो बौखलाए हुए हैं।

ऑपइंडिया ने जब बीसीसीआई से बात की तो पता चला कि ‘द हिन्दू’ के पत्रकार राहुल देसाई की एक-एक बात झूठी है और वानखेड़े स्टेडियम में ब्लैक कलर पर किसी भी प्रकार का बैन नहीं लगाया गया है। बीसीसीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध नंबर पर फोन करने पर सिक्योरिटी अधिकारी स्वप्निल ने इस ख़बर को नकार दिया। उन्होंने कहा कि स्टेडियम में काला रंग का कपड़ा पहन कर आने वाले लोगों के लिए कोई मनाही नहीं है। यानी, राहुल ने झूठ बोला और सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई।

बुधवार (जनवरी 14, 2020) को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहले वनडे मैच खेला जा रहा है। जहाँ भारतीय टीम विराट कोहली की कप्तानी में मैदान में उत्तरी, वहीं ऑस्ट्रेलिया एरोन फिंच की कप्तानी में खेल रही है। इस सीरीज में कुल तीन वनडे मैच होने हैं। अगले मैच 17 जनवरी को और अंतिम मैच 19 जनवरी को खेला जाएगा।

FACT CHECK: क्या CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही है पुलिस? जानें इन तस्वीरों का सच

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निर्भया के दोषियों की क्यूरेटिव याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज: 22 जनवरी को फाँसी देने का रास्ता साफ

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (जनवरी 14, 2019) को निर्भया के दोषियों विनय शर्मा और मुकेश सिंह की क्यूरेटिव पिटिशन पर सुनवाई करते हुए उसे खारिज कर दिया। बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा डेथ वारंट जारी होने के बाद दोनों दोषियों ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। ऐसे में 22 जनवरी को दी जाने वाली फाँसी का रास्ता साफ हो गया। हालाँकि, अब भी इन दोनों के पास सिर्फ राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने का ही एकमात्र विकल्प बचा है।

यह सुनवाई जस्टिस एनवी रमन्ना की अगुवाई वाली पाँच सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने की। इस बेंच में जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस आर भानुमती और जस्टिस अशोक भूषण शामिल थे। कोर्ट में दोषियों की याचिका खारिज होने के बाद निर्भया की माँ आशा देवी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज का दिन उनके लिए बहुत बड़ा दिन है। इसके लिए 7 साल से स्ट्रगल कर रही हैं, लेकिन सबसे बड़ा दिन 22 जनवरी को होगा, जब इन दोषियों को फाँसी के तख्ते पर लटकाया जाएगा।

कोर्ट की सुनवाई से ठीक पहले निर्भया की माँ ने अहम बयान देते हुए कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि दोषियों की क्यूरेटिव पेटिशन सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो जाएगी। निर्भया के दोषियों को 22 जनवरी को फाँसी दी जाएगी और निर्भया को न्याय मिलेगा।

इससे पहले निर्भया की माँ ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका दायर कर दोषियों के डेथ वारंट की माँग की थी, जिस पर कोर्ट ने 7 जनवरी को निर्भया की माँ के हक में फैसला सुनाया। कोर्ट ने 2012 के निर्भया गैंगरेप दोषी मुकेश, पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार सिंह के खिलाफ डेथ वारंट जारी करते हुए कहा था कि दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में फाँसी दी जाएगी।

बताया जा रहा है कि तिहाड़ जेल में फाँसी की तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। रविवार (जनवरी 12, 2019) को दोषियों की डमी को फाँसी दी गई थी। यह प्रक्रिया फाँसी से पहले की रिहर्सल मानी जाती है। इसके लिए पत्थरों और मलबे से चारों दोषियों की डमी उनके वजन के हिसाब से तैयार की गई थी। हालाँकि, इस प्रक्रिया के लिए जल्लाद नहीं बुलाया गया और जेल अधिकारियों ने ही इस प्रक्रिया को अंजाम दिया था।

जेल के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि दोषियों के वजन के मुताबिक ही डमी बनाई गई थी। डमी के बोरे में मलबा और पत्थर भरे थे। उन्होंने बताया कि दोषियों को जेल संख्या तीन में फाँसी दी जाएगी। उत्तर प्रदेश जेल प्रशासन ने पुष्टि कर दी है कि चारों दोषियों को फाँसी देने के लिए मेरठ से पवन जल्लाद को भेजा जाएगा।