जम्मू-कश्मीर में 6 महीनों के बाद राजनीतिक गतिविधियाँ अब जोर पकड़ने लगी हैं। पिछले तीन हफ़्तों में पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NCP) के 17 बड़े नेताओं को भी रिहा कर दिया गया है। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री और पीडीपी नेता सैय्यद अल्ताफ बुखारी का बयान आया है। बुखारी ने केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटने के बाद एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है। इसका श्रेय उन्होंने राज्य की जनता और केंद्र सरकार को दिया है। उन्होंने कहा कि मैं दोनों को बधाई देना चाहता हूँ।
Syed Altaf Bukhari, Former J&K Finance Minister and PDP leader: No one died after the abrogation of Article 370 in J&K, for this the credit goes to the government as well as to the people of Jammu and Kashmir. I want to congratulate both of them. pic.twitter.com/Kd88De2eF7
गौरतलब है कि अनुछेद 370 हटने और राज्य के यूनियन टेरिटरी बनने के बाद कश्मीर में राजनीतिक गतविधियाँ थम गईं थीं। क्योंकि माहौल खराब होने से बचाने के लिए जम्मू-कश्मीर के कई बड़े नेताओं को या तो हिरासत में लिया गया था या फिर घरों में नज़रबंद कर दिया गया था।
वर्तमान में 36 केंद्रीय मंत्रियों का दल 6 दिवसीय जम्मू-कश्मीर के दौरे पर है। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर सभी मंत्री अनुच्छेद 370 हटाने के फायदे बताएँगें। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से पिछले वर्ष 05 अगस्त को अनुच्छेद 370 निरस्त कर दिया था। साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बॉंट दिया गया था।
मध्य प्रदेश के भोपाल से बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को धमकी भरा खत भेजने वाला शख्स गिरफ्तार हो गया है। उसकी पहचान 35 वर्षीय डॉक्टर सैयद अब्दुल रहमान खान के तौर पर हुई है। मध्य प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने उसे महाराष्ट्र के नांदेड जिले से पकड़ा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वह 3 महीने से एटीएस की रडार पर था। उसने अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा था कि उसकी मॉं और भाई आतंकियों के संपर्क में हैं।
प्रज्ञा ठाकुर को संदिग्ध लिफाफे मिलने के मामले में महाराष्ट्र से डॉक्टर गिरफ्तारhttps://t.co/WMw2pMPtR2
पुलिस ने बताया कि आरोपित अब्दुल रहमान खान ने भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को अक्टूबर में कथित तौर पर संदिग्ध लिफाफा और धमकी भरा पत्र भेजा था। 13 जनवरी की रात इसे खोला गया और पुलिस को इसके बारे में जानकारी दी गई।
इस चिट्ठी के बारे में प्रज्ञा ठाकुर ने कहा था, “एक भारी लिफाफा आया जिसमें एक पाउच था। मैंने अपने पीए से कहा कि ये पाउच है, इसे तत्काल फेंक दो। उसने फेंक भी दिया। लेकिन उसमें कुछ फोटो दिखे, जिसे देखने से स्पष्ट नजर आ रहा है कि पाउच के अंदर एक पत्र था। पत्र उर्दू में है लेकिन उसके साथ और भी कई पेपर्स लगे हुए हैं। उसमें मेरा एक फोटो है जिसे क्रॉस किया गया है।”
Madhya Pradesh: Police has arrested one person from Maharashtra’s Nanded, on charges of sending a suspicious letter to Bhopal MP, Pragya Singh Thakur. The accused is being taken to Bhopal for interrogation. More details awaited. pic.twitter.com/GEzegVrFh3
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह खत पढ़ने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने भोपाल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें किसी ने कुछ लिफाफे और पत्र भेजे हैं, जिसमें जहरीला रसायनिक पदार्थ है। पाउडर के साथ उर्दू में लिखा हुआ जो खत मिला था, उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और प्रज्ञा ठाकुर के फोटो पर क्रॉस बना हुआ था। साध्वी के स्टाफ ने पत्र को संदिग्ध देखते हुए पुलिस को सूचना दी थी।
पुलिस ने बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर के आवास से तीन लिफाफे बरामद किए थे। जिसमें से कुछ लिफाफों में उर्दू में लिखे हुए पत्र थे। नांदेड के इतवारा पुलिस थाने के निरीक्षक प्रदीप ककाडे ने बताया कि जाँच के दौरान मध्यप्रदेश एटीएस ने यह पाया कि यहाँ के धनगाँव इलाके के डॉक्टर सैयद अब्दुल रहमान खान ने यह संदिग्ध लिफाफे प्रज्ञा ठाकुर को भेजे हैं। डॉक्टर खान इस इलाके में अपना क्लीनिक चलाता है। प्रदीप ककाडे ने बताया, “पुलिस उसके मोबाइल फोन की लोकेशन के जरिए उस पर नजर रख रही थी। लेकिन वह मोबाइल फोन घर पर ही छोड़ कर इन पत्रों को डालने औरंगाबाद, नागपुर और अन्य स्थानों पर जाता था।”
ककाडे ने बताया, “खान तीन माह से पुलिस के रडार पर था। उसने पहले भी कुछ अधिकारियों को पत्र लिखे थे। इसमें दावा किया था कि उसकी मॉं और भाई के आतंकवादियों से संपर्क हैं और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।” पुलिस ने बताया कि ऐसे पत्र लिखने के लिए खान को पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
वीर सावरकर पर सियासत फिर से गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस और उसके पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को जमकर लताड़ लगाई है। स्मृति ईरानी ने कहा है कि राहुल गाँधी की दस पुश्तें भी वीर सावरकर के साहस का मुकाबला नहीं कर पाएगी। राहुल गाँधी ने कुछ दिनों पहले कहा था कि वे वो माफी नहीं माँगेंगे क्योंकि उनका नाम राहुल गाँधी है, राहुल सावरकर नहीं।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शनिवार को संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के समर्थन में BJP की जनसभा हुई। सभा को स्मृति ईरानी के अलावा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने भी संबोधित किया।
#NewsAlert – Rahul Gandhi recently said that I will not apologize I am not Rahul Savarkar. I want to tell Rahul Gandhi today that even if 10 generations of Rahul Gandhi come, they will not be able to match the courage of Savarkar: Smiriti Irani. pic.twitter.com/gbFEvZD5zu
स्मृति ईरानी ने कहा, “राहुल गॉंधी ने हाल में कहा था कि मैं माफी नहीं मॉंगूॅंगा। मैं राहुल सावरकर नहीं हूॅं। मैं आज उनसे कहना चाहती हूॅं कि आपके बाद की 10 पुश्तें भी सावरकर के हौसले का मुकाबला नहीं कर पाएँगी।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये वही कॉन्ग्रेस पार्टी है, जिन्होंने इमरजेंसी में अटल बिहारी वाजपेयी को कारावास में बंद किया। चौधरी चरण सिंह को कारावास में बंद किया, जेपी को कारावास में बंद किया और मुंबई में स्मगलर करीम लाला को खुला छोड़ दिया।
इससे पहले शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी वीर सावरकर को लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि जो लोग वीर सावरकर का विरोध करते हैं वे किसी भी विचारधारा या पार्टी से हों, उन्हें दो दिन के लिए अंडमान के सेल्यूलर जेल में भेज दो, जहाँ सावरकर को बंधक बनाया गया था। तब उन्हें उनके बलिदान और उनके योगदान का एहसास होगा। बता दें कि कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने एक दिन पहले ही यह बयान दिया था कि सावरकर के अंग्रेजों से माफी माँगने की बात मिटाई नहीं जा सकती है। ऐसे में अगर नरेंद्र मोदी सरकार सावरकर को भारत रत्न देती है तो पार्टी इसका विरोध करेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कटु आलोचकों में से एक रामचंद्र गुहा ने केरल साहित्य महोत्सव में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की खिंचाई की। इसके बाद कॉन्ग्रेस के कुछ फुल टाइम गालीबाज ट्रोल पत्रकार मैदान में आकर राहुल गाँधी की ओर से बैटिंग करने लगे। इन्हीं में से एक नाम है स्वाति चतुर्वेदी।
रामचंद्र गुहा के बयान से बौखलाई स्वाति चतुर्वेदी ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक के बाद एक जहरीले ट्वीट करने शुरू किए। स्वाति चतुर्वेदी ने रामचंद्र गुहा को रीट्वीट करते हुए लिखा, “मेरे लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि मीडिया सहित किसी को भी मोदी के बारे में कोई भ्रम था। मुझे अभी तक समझ में नहीं आ रहा है कि शिक्षाविद, नीति निर्माता और मीडिया किस तरह से मोदी मिथक में पड़ गए?”
इसके साथ ही स्वाति चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक झाँसा देने वाला व्यक्ति बताया है।
Sir, I find it difficult to believe that anyone at all including the media had any illusions about Modi. I still don’t understand how academics, policy makers & the media bought in to the Modi myth https://t.co/jfTbvYMoAr
केरल में राहुल गाँधी के चुने जाने को भयावह बताने वाले गुहा के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए स्वाति चतुर्वेदी ने लिखा है कि रामचंद्र गुहा राहुल गाँधी के बारे में भ्रमित नजर आ रहे हैं। इसके बाद स्वाति चतुर्वेदी ने राहुल गाँधी की तारीफ करते हुए लिखा है कि आप रामचंद्र गुहा की तरह चाहे राहुल गाँधी से नफरत करें या उनकी आलोचना करिए, लेकिन वह संघ के लिए एक चुनौती की तरह काम कर रहे हैं। जिस तरह से मोदी और आईटी सेल उनके विरुद्ध झूठ से आक्रमण करता है, उनके अंदर बहुत साहस भी है।
Dislike @RahulGandhi or hate him as @Ram_Guha seems to do, he is clearly a lightening rod for the Sangh. And, has huge courage considering the way Modi & IT fell had attacked him with lies
स्वाति चतुर्वेदी इसके बाद रामचंद्र गुहा के मुद्दे को पीछे छोड़कर वापस अपने चिरपरिचित अंदाज में लोगों को ट्वीट में जवाब देती रहीं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके CV में सिर्फ 2002 की हत्याओं का ही जिक्र है।
Factual. Could I remind you of the 2002 riots the only highlight of Modi’s CV. The lynchings or being bigoted is record enough? https://t.co/71IYyBZmwT
गौरतलब है कि गुहा ने कहा था कि लोकसभा चुनाव में वायनाड से राहुल गाँधी को चुनकर केरल के लोगों ने विनाशकारी काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने राहुल गाँधी का कोई भविष्य नहीं है। केरल साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार (17 जनवरी, 2019) को ‘राष्ट्र भक्ति बनाम अंधराष्ट्रीयता’ विषय पर बोल रहे रामचंद्र गुहा के सुर बदले-बदले से रहे। उन्होंने कहा कि ‘खानदान की पाँचवी पीढ़ी’ के राहुल गाँधी के पास भारतीय राजनीति में ‘कठोर परिश्रमी और खुद मुकाम बनाने वाले’ नरेंद्र मोदी के सामने कोई मौका नहीं है।
कश्मीरी पंडितों पर वर्ष 1990 में अपने ही देश में हुए अत्याचारों को आज 30 वर्ष गुजर चुके हैं। लेकिन कश्मीरी पंडितों के दिलों में वह याद आज भी ताजा हैं। आज उन दिनों को याद कर किसी पीड़ित की आँखों में आँसू हैं तो किसी पीड़ित की आँखों में एक आस कि “हम वापस आएँगे।”
अपने ही देश में शरणार्थी बन कर रहे कश्मीरी पंडितों को अपनी दास्तां सुनाते-सुनाते आज पूरे तीस साल गुजर चुके हैं। आज ही के दिन कश्मीर में पंडितों पर हुए नरसंहार के वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर याद कर रहे हैं और आने वाली फ़िल्म शिकारा के डायलॉग ‘हम आएँगे अपने वतन’ के जरिए अपनी भावना व्यक्त कर रहे हैं। इस फ़िल्म को विधु विनोद चोपड़ा ने लेखक राहुल पंडिता की किताब ‘Our Moon Has Clots’ पर बनाया है। ट्विटर पर हम वापस आएँगे (#HumWapasAyenge) ट्रेंड कर रहा है।
आगामी 7 फरवरी को रिलीज़ होने वाली फ़िल्म शिकारा में कश्मीरी पंडित पलायन की भयावह घटनाओं को दिखाया गया है, जो 19 जनवरी 1990 को हुई थी। जब इस्लामिक आतंकवादियों ने नरसंहार की धमकी देकर लाखों कश्मीरी पंडितों को घाटी स्थित अपने घरों से भागने के लिए मजबूर कर दिया था।
प्रसिद्ध राजनीतिक टिप्पणीकार #HumWapasAayenge के साथ अपने बचपन की एक फ़ोटो साझा करते हुए लिखा है कि मेरे पास अपने बचपन की कई तस्वीरें नहीं हैं। जीवन और फैमिली एलबम के बीच चयन करने में कोई विकल्प नहीं है। जान बचाने के दौरान फैमली एलबम पीछे छूट गए। 30 साल हो गए। घर वापस जाने का संकल्प केवल मजबूत हुआ है।
I don’t have many pictures left of my childhood. Choosing between life and family albums is really no choice at all. When lives were rescued, family albums got left behind. 30 years have passed. Resolve to go back home has only strengthened. #HumWapasAayengepic.twitter.com/mZr14n95a8
पत्रकार राहुल पंडिता ने एक वीडियो ट्वीट करते हुए कश्मीर वापस लौटने की इच्छा व्यक्त की। इसमें उन्होंने कहा है, “हम आएँगे अपने वतन हाजी साहब औऱ यहीं दिल लगाएँगे। यहीं पर मरेंगे और यहीं के पानी में हमारी राख बहाई जाएगी।
30 years of exile from Kashmir. Let us now pledge that we will return home.
We dont live in Kashmir any more but Kashmir lives in us. We left Kashmir with our body but left our soul there which is still wandering in the meadows, mountains, lakes and streams. One day we will return and reunite our body with our soul. #HumWapasAayenge#KashmiriPanditspic.twitter.com/Yimo8o8yZU
ट्विटर पर चलाए गए इस अभियान को बहुत से लोगों ने अपने-अपने करीक़े से अपना समर्थन दिया। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जुलाई 2019 में घोषणा की थी कि केंद्र सरकार कश्मीरी पंडितों को घाटी में वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इतना ही नहीं शाह ने कश्मीरी पंडितों को भरोसा दिलाया था कि एक समय आएगा कि जब वे प्रसिद्ध खीर भवानी मंदिर में प्रार्थना करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ह्यूस्टन में कश्मीरी पंडितों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करते हुए कहा था, ”आपको बहुत नुकसान हुआ है और नए कश्मीर के निर्माण की ओर बढ़ने का समय आ गया है।”
गीतकार और लेखक जावेद अख़्तर की पत्नी और अभिनेत्री शबाना आज़मी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई हैं। खालापुर टोल प्लाज़ा के पास पुणे-मुंबई एक्सप्रेस पर उनकी कार ट्रक से टकरा गई। इसके बाद उन्हें एमजीएम हॉस्पिटल पनवेल में भर्ती कराया गया। बता दें कि जिस वक्त यह हादसा हुआ उस समय कार में उनके पति जावेद अख़्तर भी बैठे हुए थे। हालाँकि, उन्हें कोई चोट नहीं आई है।
Raigad Police: Actor Shabana Azmi&her driver got injured in accident near Kahalpur on Mumbai-Pune Expressway. Javed Akhtar was also present in the car, but he is safe. Their vehicle was hit by a truck while they were travelling from Pune to Mumbai. Injured shifted to MGM Hospital https://t.co/bezuNWvUTapic.twitter.com/8YWtZoEUSF
मुंबई मिरर ने प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लिखा कि दोपहर क़रीब 3:30 बजे खालापुर टोल प्लाज़ा के पास उनकी कार और ट्रक में टक्कर हो गई। इस हादसे में उनका ड्राइवर भी घायल हो गया है, उसे भी इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सड़क हादसे में शबाना आज़मी गंभीर रूप से घायल हुईं (तस्वीर साभार: मुंबई मिरर)
इस सड़क हादसे की ख़बर जैसे-जैसे लोगों तक पहुँची, वैसी ही जावेद अख़्तर और शबाना आज़मी के जल्द ठीक होने की दुआएँ की जाने लगी। राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट कर उनके जल्द ठीक होने की कामना की।
Wishes for a speedy recovery to @AzmiShabana and @Javedakhtarjadu injured in a car accident on Mumbai Pune expressway. Both out of danger..
मुंबई में कल रात (17 जनवरी) अभिनेत्री शबाना आज़मी ने अपने पति जावेद अख़्तर का 75 वां जन्मदिन मनाया था। फ़िलहाल, इस बात का पता नहीं चल सका है कि जन्मदिन मनाने वो कहाँ गए थे।
अस्पताल के बाहर खड़े जावेद अख़्तर (तस्वीर साभार: मुंबई मिरर)
बीते कुछ दिनों से बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का नाम सुर्ख़ियों में बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह उनकी फ़िल्म ‘छपाक’ है, जिसमें उन्होंने एसिड सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल के किरदार को निभाया। यह फ़िल्म एक 15 साल की नाबालिग बच्ची लक्ष्मी अग्रवाल पर हुए एसिड हमले से जुड़े एक दर्दनाक हादसे पर आधारित है, जिसका किरदार निभाकर दीपिका पादुकोण समाज को यह संदेश देना चाहती थीं कि एसिड हमले की शिकार महिलाओं को अपने जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए और उन्हें हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए।
इतने गंभीर विषय पर फ़िल्म बनाना निश्चित तौर पर एक साहसिक काम है। साथ ही एसिड हमले की शिकार पीड़िता के किरदार को उसी गंभीरता से निभा ले जाना उससे भी बड़ी बात है। एक आम नागरिक होने के नाते मुझे यह बात जितनी अच्छी और न्यायसंगत लगती है, उतनी शायद छपाक फ़िल्म की हिरोइन दीपिका पादुकोण को नहीं लगती। इसकी वजह यह है कि सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो बड़ी तेज़ी से अपनी पहुँच बढ़ा रहा है। इस वीडियो में दीपिका पादुकोण अपनी एक साथी फेबी जोकि पेशे से मेकअप आर्टिस्ट हैं, उनके साथ एक मैकअप चैलेंज गेम खेलती नज़र आ रही हैं। इसमें दीपिका अपनी तीन फ़िल्मों का ज़िक्र करती हैं, जिनमें उनके द्वारा निभाए किरदार का मेकअप करके फेबी उस किरदार पर चुटकी लेती हैं।
And just when we thought that @deepikapadukone couldn’t mock Lakshmi anymore through her PR stunts in JNU she comes up with tick tok challenge on acid attack victims. Gross. pic.twitter.com/077Uz7hcEg
इनमें दीपिका अभिनीत फ़िल्म- ओम शांति ओम, पीकू और छपाक शामिल हैं। एक-एक कर दीपिका की साथी फेबी फ़िल्म के किरदारों का मेकअप करती नज़र आती है। इसमें ग़ौर करने वाली बात यह है कि जब फ़िल्म छपाक के किरदार यानी कि एसिड हमले की शिकार लक्ष्मी अग्रवाल की बारी आती है तो फेबी अधजले चेहरे का मेकअप करती है, जो बेहद शर्मनाक़ है।
इस वीडियो को देखकर शायद ही किसी के मन में यह सवाल नहीं उठेगा कि फ़िल्म ‘छपाक’ में एसिड हमले की शिकार हुई जिस लक्ष्मी अग्रवाल का किरदार दीपिका ने निभाया, उसे उन्होंने गंभीरता से लिया भी होगा या नहीं?
Dear @deepikapadukone are you mad or out of your mind?? When cheap publicity stunts like JNU visit did not work to promote the film, you fell so low that you brought ‛Acid Attacked Face Challenge’ on Tik Tok. Disgusting! pic.twitter.com/S9nDUkJu0F
वायरल हुए इस वीडियो में दीपिका के हँसी के ठहाके देखकर तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगता, इससे तो ऐसा ही लगता है कि लक्ष्मी अग्रवाल का दर्द दीपिका के लिए सिर्फ़ पर्दे तक ही सीमित था। टिक-टॉक पर बने इस वीडियो की सच्चाई यह है कि फ़िल्मी दुनिया की दीपिका पर्दे पर कुछ और होती हैं और असल ज़िंदगी में कुछ और। अपनी असल ज़िंदगी में वो एसिड हमले की शिकार महिलाओं का मखौल उड़ा कर खीसे निपोरती हैं।
कहने को तो यह फ़िल्म एक सामाजिक संदेश को लेकर सामने आई थी, लेकिन फ़िल्म की हीरोइन ख़ुद सोशल मीडिया पर जो सामाजिक संदेश देती नज़र आ रही हैं, वो उनके दिखावटी चेहरे को बड़े ही स्पष्ट तरीक़े से उजागर करता है। इस बनावटी चेहरे को लेकर वो न जाने कितने स्टंट करती नज़र आईं। सोशल कॉज़ की आड़ में फ़िल्म के प्रमोशन का दाँव खेलते हुए JNU हिंसा में उन वामपंथियों की साइड में जाकर भी खड़ी हो गईं, जिनके ख़िलाफ़ मामले दर्ज किए गए थे।
Honestly expected @deepikapadukone who has been through her own mental breakdowns to be more sensitive. But clearly..no. You do a movie on a acid attack victim, cry in every other promotional event n now this below the belt challenge where a acid attack face is her fav! https://t.co/dwqqwDuD2q
मेरी दिली ख़्वाहिश है कि कोई दीपिका पादुकोण को यह ज़रूर बताए कि फ़िल्मी दुनिया के रुपहले पर्दे पर किसी विक्टिम के किरदार को निभाने में और उसे जीने में फ़र्क़ होता है। बेहतर तो यह होता कि लक्ष्मी जैसी पीड़िताओं के दर्द को महसूस कर दीपिका उन्हें आगे बढ़ने का हौसला देतींं। लेकिन, उनसे यह उम्मीद भला कैसे की जा सकती है, क्योंकि फ़िल्म निर्देशकों ने तो एसिड सर्वाइवर लक्ष्मी का केस लड़ने वाली वकील अपर्णा भट्ट को ही क्रेडिट नहीं दिया और मामला कोर्ट की चौखट तक जा पहुँचा।
कहने को तो यह फ़िल्म सोशल कॉज़ पर बनी थी, लेकिन असल ज़िंदगी में फ़िल्म निर्माता से लेकर हिरोइन तक का सोशल कॉज़ से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। दीपिका पादुकोण को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं है कि जब किसी पर एसिड अटैक होता है तो उसका दर्द भयावह होता है। शरीर के अंगों पर गिरा एसिड न सिर्फ़ उनके शरीर को झुलसाता है बल्कि उनके मन, उनके जीने की चाह, भविष्य से जुड़े सपनों तक को भी झुलसा देता है। दीपिका पादुकोण इस बात से बिल्कुल बेख़बर हैं कि खीसे निपोरता उनका यह वीडियो न जाने कितनी एसिड सर्वाइवर्स के चेहरे की हँसी को एक झटके में छीन लेगा और उन्हें ग़म में बदल देगा।
मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस विधायक मुन्नालाल गोयल ने शनिवार (जनवरी 18, 2019) को अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने पार्टी पर घोषणा-पत्र में किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है। शनिवार सुबह विधानसभा पहुँचे मुन्नालाल गोयल पहले परिसर के अंदर घुसने के लिए बैरिकेडिंग से कूदते हुए नजर आए। इसके बाद विधानसभा में लगी गाँधी प्रतिमा पर पहुँचकर उन्होंने माल्यार्पण करने के बाद परिसर के गेट पर ही दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए।
मुन्नालाल गोयल ने कहा कि कमलनाथ सरकार में विधायकों की भी अनदेखी हो रही है। सरकार की बेरुखी से नाराज और सीएम को वादा याद दिलाने के लिए गोयल ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा, लेकिन इस पर कुछ नहीं हुआ। मुन्नालाल गोयल ने कहा, “यह हमारे चुनाव घोषणा-पत्र में किए गए वादों की याद दिलाने के लिए है। मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है जिसमें उनसे वादों को पूरा करने के लिए कहा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। यही वजह है कि आज मैं यहाँ धरने पर बैठा हूँ।” वैसे यह पहली बार नहीं है जब कमलनाथ सरकार का विरोध पार्टी विधायक की कर रहे हैं।
Madhya Pradesh: Congress MLA Munnalal Goyal sits on dharna outside Assembly in Bhopal. He says, “This is to remind govt of promises made in our poll manifesto. I wrote to the Chief Minister asking to fulfil the promises but nothing happened. That is why I am sitting here”. pic.twitter.com/lZxY27dpfa
मुन्नालाल गोयल का आरोप है कि कॉन्ग्रेस जिस घोषणा-पत्र के सहारे सत्ता पर काबिज हुई है, उन पर अब अमल नहीं कर रही। विधायक ने कॉन्ग्रेस के घोषणा-पत्र में शामिल झुग्गी वासियों को पट्टे देने के वचन को पूरा नहीं करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के 112 झुग्गी वासियों को कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र पर अमल का इंतजार है। उनकी सरकार से माँग है कि झुग्गी वासियों को जल्द से जल्द पट्टा दिया जाना चाहिए।
इससे पहले गोयल ने शुक्रवार (जनवरी 17, 2019) को मुख्यमंत्री कमलनाथ को चिट्ठी लिखकर धरने पर बैठने की घोषणा की थी। उन्होंने लिखा था कि सत्ताधारी दल का विधायक बनने के बाद अपने क्षेत्र के भूमिहीन परिवारों के आशियानों पर ठंड में बुल्डोजर चलते देख रहा हूँ। प्रशासन के अधिकारियों से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता का अपमान होते देख रहे हूँ। अब वो इसे नहीं देख सकते हैं। विधायक का कहना है कि पिछले 6 महीने में मुख्यमंत्री से लेकर संबंधित मंत्रियों को वे कई बार पत्र लिख चुके हैं। लेकिन समस्याएँ जस की तस हैं।
इस मुद्दे को उन्होंने विधानसभा में 6 महीने पहले भी उठाया था, जिसमें सरकार के मंत्री ने जल्दी ही झुग्गी वासियों को पट्टे देने का ऐलान किया था। हालाँकि 6 महीने बीतने के बाद भी इस पर अमल नहीं होने वे खासे नाराज हैं। मुन्नालाल गोयल ने माँग की है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के घोषणा-पत्र पर सरकार को तत्काल अमल करना चाहिए।
कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा कि वे झुग्गी वासियों को पट्टे दिए जाने की माँग को लेकर कई बार मुख्यमंत्री को भी पत्र लिख चुके लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ है। इतना ही नहीं विधानसभा के विशेष सत्र में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की थी लेकिन उनकी आवाज को सुना नहीं गया।
मध्यप्रदेश में गूंगी बहरी सरकार विपक्ष और जनता तो दूर अब अपने ही विधायकों की नहीं सुन रही। #mla श्रीमती सुनीता पटेल और अब श्री मुन्नालाल गोयल मुख्यमंत्री @OfficeOfKNath जी को वचन याद दिला रहे है। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार से कार्यप्रणाली से उसके ही विधायक भी खुश नहीं है।
— Gopal Bhargava (Leader of Opposition) (@bhargav_gopal) January 18, 2020
बीजेपी नेता गोपाल भार्गव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया, “मध्यप्रदेश में गूंगी बहरी सरकार विपक्ष और जनता तो दूर अब अपने ही विधायकों की नहीं सुन रही। विधायक सुनीता पटेल और अब मुन्नालाल गोयल, मुख्यमंत्री कमलनाथ जी को वचन याद दिला रहे है। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार से, उसकी कार्यप्रणाली से उसके ही विधायक भी खुश नहीं है।” राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान ने भी इस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा है, “धीरे-धीरे कॉन्ग्रेस सरकार की कलई खुलने लगी है। सच्चाई सामने आने लगी है। अब तो इनके अपने ही मोर्चा खोलने पर मजबूर हो गए हैं। सच भी है, आखिर झूठ के पैबंद से कब तक सच्चाई की रोशनी को रोका जा सकेगा?”
धीरे-धीरे कांग्रेस सरकार की कलई खुलने लगी है। सच्चाई सामने आने लगी है। अब तो इनके अपने ही उनके खिलाफ मोर्चा खोलने पर मजबूर हो गए हैं। सच भी है, आखिर झूठ के पैबंद से कब तक सच्चाई की रोशनी को रोका जा सकेगा? #MP_मांगे_जवाबhttps://t.co/R4O52h59Ap
एक दिन पहले कॉन्ग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कहा था कि सरकार को आम लोगों की आवाज सुननी होगी। उन्होंने कहा था कि 15 साल बाद जब हमारी सरकार आई तो कार्यकर्ताओं की बात जरूर सुनी जानी चाहिए। जिन मुद्दों के सहारे कॉन्ग्रेस सत्ता पर काबिज हुई है, उन मुद्दों पर खरा उतरना सरकार की जिम्मेदारी है।
पाकिस्तान दौरे पर जाने से पहले बांग्लादेश कोचिंग टीम के 5 सदस्यों ने इस दौरे से अपने हाथ खींच लिए हैं। इसके बाद से बांग्लादेश क्रिकेट टीम का पाकिस्तान दौरा खटाई में पड़ता हुआ नज़र आ रहा है। वहीं इससे पहले बांग्लादेश के विकेटकीपर ने दौरे से अपने हाथ पीछे खींचते हुए कहा था, “मेरा परिवार पाकिस्तान में सुरक्षा के माहौल से डरा हुआ है।”
आतंकियों को पनाह देने वाले देश के रूप में कुख्यात हो चुके पड़ोसी देश पाकिस्तान में जाने से पहले किसी भी व्यक्ति को एक नहीं बल्कि हज़ार बार सोचना पड़ता है। अब इस कड़ी में उन हस्तियों का भी नाम जुड़ चुका है, जिनको सुरक्षा के नाम पर बहुत सी सुविधाएँ दी जाती हैं और पहले से ही सुरक्षा की गारंटी दी जाती है। लेकिन इस सबके बाद भी बांग्लादेश की पूरी क्रिकेट टीम पाकिस्तान दौरे के लिए सहमत नहीं है। अब ख़बर आ रही है कि बांग्लादेश के 5 कोचिंग स्टाफ ने पाकिस्तान दौरे से अपना नाम वापस ले लिया है।
Members of Bangladesh coaching staff opt out of Pakistan tour
दरअसल बोर्ड द्वारा सीरीज खेले जाने की हामी भरने के बाद से ही बांग्लादेश क्रिकेट टीम आपस में बँटती हुई नज़र आ रही है, जिससे बांग्लादेश का पाकिस्तान दौरा खटाई में पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
इससे पहले बांग्लादेश के विकेटकीपर बल्लेबाज पूर्व कप्तान मुशफिकुर रहीम अपने पाकिस्तान दौरे पर जाने से मना कर चुके हैं। उन्होंने दौरे से अपना नाम वापस लेते हुए कहा था, “मेरा परिवार पाकिस्तान की सुरक्षा के माहौल से डरा हुआ है। इस हालात में मैं पाकिस्तान नहीं जा सकता और वहाँ जाकर खेल नहीं सकता। बांग्लादेश क्रिकेट टीम से एक सीरीज के दौरान बाहर बैठना मेरे लिए हमेशा ही बहुत कठिन रहा है।”
Mushfiqur Rahim “My family is afraid of the security conditions in Pakistan. In this situation, I can’t go to Pakistan and play cricket there. It is always tough for me to sit out a series for the Bangladesh national team” #PAKvBAN#cricket
आपको बता दें कि बांग्लादेश टीम को 24 जनवरी से पाकिस्तान दौरे पर तीन टी-20 मैच और दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। वहीं दोनों देशों के बोर्ड के बीच हुई बातचीत के बाद तैयार हुए नए कार्यक्रम के मुताबिक दोनों टेस्ट मैचों के बीच एक वनडे मैच खेला जाएगा। इससे पहले बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के अध्यक्ष नजमुल हसन ने कहा था कि सरकार ने बोर्ड को बहुत संक्षिप्त समय के लिए टीम भेजने की अनुमति दी है।
बेंगलुरु पुलिस ने आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर इस्लामी चरमपंथी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के 6 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में 22 दिसंबर को निकली रैली में शामिल आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या का प्रयास किया था। बताया जाता है कि इनके निशाने पर बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या थे।
गिरफ्तार संदिग्धों की पहचान इरफान, सैयद अकबर, सैयद सिद्दीकी, अकबर बाशा, सनाउल्ला और सादिक अमीन उर्फ साउंड अमीन के तौर पर की गई है। ये सभी शहर के केजी हल्ली इलाके के रहने वाले हैं। बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आतंकी बड़ी साजिश रच रहे थे। गिरफ्तार सभी लोग SDPI से ताल्लुक रखते हैं। ये लोग CAA के समर्थन में आयोजित रैली में अव्यवस्था फैलाना चाहते थे और जानेमाने हिन्दू नेता की हत्या करना चाहते थे। कमिश्नर ने बताया कि इन सभी को अपने आकाओं (हैंडलर) से एजेंडा पूरा करने के लिए हर महीने 10,000 रुपए मिलते थे। अब इस मामले की जाँच एंटी टेरर स्क्वॉयड को सौंप दी गई है।
Bhaskar Rao, Commissioner of Police, Bangalore:There were 6 people belonging to SDPI, who were here to carry out attacks on leaders supporting #CAA. These people were being paid Rs 10,000 from their handlers to create ruckus here. Now this will be handled by the Anti-Terror unit. pic.twitter.com/qa4zYMDH3J
बता दें कि इस्लामी चरमपंथी के इन आतंकी के निशाने पर बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या और हिन्दू नेता थे। हालाँकि पुलिस की मुस्तैदी की वजह से वो इस वारदात को अंजाम न दे सके। पिछले दिनों टाउन हॉल में बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या और दक्षिणपंथी नेता चक्रवर्ती सुलीबेले की अध्यक्षता में CAA और NRC के समर्थन में रैली की गई थी।
My god. Bengaluru police just arrested six Islamic fundamentalists who, for mere Rs 10,000 each, plotted to kill @Tejasvi_Surya because of his pro-CAA stand. They came to kill him but couldn’t so nearly killed an RSS worker instead.
एसडीपीआई के संदिग्ध चोरी की तीन बाइक से रैली स्थल पहुँचे थे। ये लोग रैली में मौजूद लोगों के बीच घुसकर हमला करना चाहते थे, लेकिन पुलिस बंदोबस्त के चलते ऐसा नहीं कर सके। इसके बाद ये लोग भीड़ पर पथराव कर भगदड़ की स्थिति उत्पन्न करना चाहते थे, ताकि भगदड़ के दौरान आसानी से हत्या कर सकें। हालाँकि इनके पत्थर अपना निशाना चूक गए।
दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में 18 जनवरी 2020 को प्रकाशित खबर
उन्होंने सम्मेलन में प्रमुख हिंदू नेता की हत्या करने के इरादे से एक आपराधिक साजिश रची और योजना बनाई थी। इन अभियुक्तों ने भी रैली में भाग लिया था और चूँकि पुलिस सुरक्षा कड़ी थी, इसलिए रैली के प्रमुख वक्ता और भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या को मारने की उनकी योजना विफल हो गई। इसके बाद उन्होंने कम से कम एक हिंदू कार्यकर्ता को मारने का फैसला किया और आरएसएस कार्यकर्ता वरुण पर हमला किया।
पुलिस ने बताया कि ये घटना कलसिपालिया में कुंभारगुंडी रोड के पास हुई। हमलावर दो बाइक पर थे। उन लोगों ने हत्या करने के इरादे से वरुण को बेरहमी से मारा। जख्मी वरुण के सिर, गर्दन और पीठ पर गंभीर चोटें आई। हालाँकि सही समय पर पुलिस और राहगीरों की मदद से अस्पताल पहुँचने की वजह से उनकी जान बच गई।
आरोपितों ने इस वारदात को गहरी साजिश के साथ अंजाम दिया था। इसके लिए उन्होंने पुख्ता इंतजाम किए थे। पहचान छुपाने के लिए हेलमेट पहन रखा था और एक के ऊपर एक करके लगभग 2-3 टी-शर्ट पहनी हुई थी। इन्होंने पास में मोबाइल फोन भी नहीं रखा था। मोबाइल फोन को घर पर ही छोड़ दिया था। इतना ही नहीं, इन्होंने अपने गाड़ियों की नंबर प्लेटों पर काली कालिख पोत दी थी, ताकि गाड़ी के नंबर का पता न चल सके।
आपराधिक वारदात को अंजाम देने के बाद उन्होंने पहनी हुई शर्ट को उतार दिया और बीच रास्ते में ही पेट्रोल डालकर उसे जला दिया। उन्होंने एंकल्याप के पास के एक झील में हथियार फेंक दिए और राममूर्तिनगर के पास एक तालाब में अपने हेलमेट उतार कर फेंक दिए। पुलिस ने बताया कि उन्होंने अपने जूते नाले में फेंक दिए थे और अपनी गाड़ियाँ भी छुपा दी थी। कमिश्नर भास्कर राव ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों के अंदर कट्टरपंथी सोच भरी गई और उनका काम अन्य कैडर की भर्ती करना, उन्हें प्रशिक्षण देना तथा कट्टर सोच भरना था ताकि वे शहर में तबाही फैलाने के लिए जाने-माने लोगों की हत्या कर सकें।
इस मामले में सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा, “SDPI एक संगठन है, जिसे अभी तक प्रतिबंधित नहीं किया गया है। अब यह संगठन इसलिए खतरनाक हो चुका है, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इसके सदस्यों के खिलाफ मामले वापस ले लिए थे।” उन्होंने 6 SDPI सदस्यों की गिरफ्तारी को ऊँट के मुँह में जीरे की तरह बताया और कहा कि वह SDPI की गतिविधियों की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुँचाएँगे।