Home Blog Page 5171

370 हटाने के बाद J&K में नहीं हुई एक भी मौत: PDP नेता अल्ताफ बुखारी

जम्मू-कश्मीर में 6 महीनों के बाद राजनीतिक गतिविधियाँ अब जोर पकड़ने लगी हैं। पिछले तीन हफ़्तों में पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NCP) के 17 बड़े नेताओं को भी रिहा कर दिया गया है। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री और पीडीपी नेता सैय्यद अल्ताफ बुखारी का बयान आया है। बुखारी ने केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटने के बाद एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है। इसका श्रेय उन्होंने राज्य की जनता और केंद्र सरकार को दिया है। उन्होंने कहा कि मैं दोनों को बधाई देना चाहता हूँ।

गौरतलब है कि अनुछेद 370 हटने और राज्य के ​यूनियन टेरिटरी बनने के बाद कश्मीर में राजनीतिक गतविधियाँ थम गईं थीं। क्योंकि माहौल खराब होने से बचाने के लिए जम्मू-कश्मीर के कई बड़े नेताओं को या तो हिरासत में लिया गया था या फिर घरों में नज़रबंद कर दिया गया था।

वर्तमान में 36 केंद्रीय मंत्रियों का दल 6 दिवसीय जम्मू-कश्मीर के दौरे पर है। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर सभी मंत्री अनुच्छेद 370 हटाने के फायदे बताएँगें। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से पिछले वर्ष 05 अगस्त को अनुच्छेद 370 निरस्त कर दिया था। साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बॉंट दिया गया था।

साध्वी प्रज्ञा को धमकी देने वाले अब्दुल रहमान ने अफसरों से कहा था- आतंकियों के संपर्क में हैं माँ और भाई

मध्य प्रदेश के भोपाल से बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को धमकी भरा खत भेजने वाला शख्स गिरफ्तार हो गया है। उसकी पहचान 35 वर्षीय डॉक्टर सैयद अब्दुल रहमान खान के तौर पर हुई है। मध्य प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने उसे महाराष्ट्र के नांदेड जिले से पकड़ा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वह 3 महीने से एटीएस की रडार पर था। उसने अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा था कि उसकी मॉं और भाई आतंकियों के संपर्क में हैं।

पुलिस ने बताया कि आरोपित अब्दुल रहमान खान ने भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को अक्टूबर में कथित तौर पर संदिग्ध लिफाफा और धमकी भरा पत्र भेजा था। 13 जनवरी की रात इसे खोला गया और पुलिस को इसके बारे में जानकारी दी गई।

इस चिट्ठी के बारे में प्रज्ञा ठाकुर ने कहा था, “एक भारी लिफाफा आया जिसमें एक पाउच था। मैंने अपने पीए से कहा कि ये पाउच है, इसे तत्काल फेंक दो। उसने फेंक भी दिया। लेकिन उसमें कुछ फोटो दिखे, जिसे देखने से स्पष्ट नजर आ रहा है कि पाउच के अंदर एक पत्र था। पत्र उर्दू में है लेकिन उसके साथ और भी कई पेपर्स लगे हुए हैं। उसमें मेरा एक फोटो है जिसे क्रॉस किया गया है।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह खत पढ़ने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने भोपाल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें किसी ने कुछ लिफाफे और पत्र भेजे हैं, जिसमें जहरीला रसायनिक पदार्थ है। पाउडर के साथ उर्दू में लिखा हुआ जो खत मिला था, उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और प्रज्ञा ठाकुर के फोटो पर क्रॉस बना हुआ था। साध्वी के स्टाफ ने पत्र को संदिग्ध देखते हुए पुलिस को सूचना दी थी।

पुलिस ने बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर के आवास से तीन लिफाफे बरामद किए थे। जिसमें से कुछ लिफाफों में उर्दू में लिखे हुए पत्र थे। नांदेड के इतवारा पुलिस थाने के निरीक्षक प्रदीप ककाडे ने बताया कि जाँच के दौरान मध्यप्रदेश एटीएस ने यह पाया कि यहाँ के धनगाँव इलाके के डॉक्टर सैयद अब्दुल रहमान खान ने यह संदिग्ध लिफाफे प्रज्ञा ठाकुर को भेजे हैं। डॉक्टर खान इस इलाके में अपना क्लीनिक चलाता है। प्रदीप ककाडे ने बताया, “पुलिस उसके मोबाइल फोन की लोकेशन के जरिए उस पर नजर रख रही थी। लेकिन वह मोबाइल फोन घर पर ही छोड़ कर इन पत्रों को डालने औरंगाबाद, नागपुर और अन्य स्थानों पर जाता था।”

ककाडे ने बताया, “खान तीन माह से पुलिस के रडार पर था। उसने पहले भी कुछ अधिकारियों को पत्र लिखे थे। इसमें दावा किया था कि उसकी मॉं और भाई के आतंकवादियों से संपर्क हैं और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।” पुलिस ने बताया कि ऐसे पत्र लिखने के लिए खान को पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

ज़िंदा जलाने की धमकी देने वाले कॉन्ग्रेस MLA के ख़िलाफ़ ‘सत्याग्रह’ पर बैठीं साध्वी प्रज्ञा, मंत्री ने बताया नौटंकी

साध्वी प्रज्ञा ने माँगी माफ़ी, लेकिन बोला- जिसने मुझे कहा आतंकवादी, वो कब माँगेंगे माफ़ी

साध्वी प्रज्ञा: जिसने टूटी रीढ़ के साथ हिन्दू टेरर के नैरेटिव को छिन्न-भिन्न कर दिया

राहुल गाँधी की 10 पुश्तें भी नहीं कर पाएँगी सावरकर के साहस की बराबरी: स्मृति ईरानी

वीर सावरकर पर सियासत फिर से गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस और उसके पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को जमकर लताड़ लगाई है। स्मृति ईरानी ने कहा है कि राहुल गाँधी की दस पुश्तें भी वीर सावरकर के साहस का मुकाबला नहीं कर पाएगी। राहुल गाँधी ने कुछ दिनों पहले कहा था कि वे वो माफी नहीं माँगेंगे क्योंकि उनका नाम राहुल गाँधी है, राहुल सावरकर नहीं।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शनिवार को संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के समर्थन में BJP की जनसभा हुई। सभा को स्मृति ईरानी के अलावा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने भी संबोधित किया।

स्मृति ईरानी ने कहा, “राहुल गॉंधी ने हाल में कहा था कि मैं माफी नहीं मॉंगूॅंगा। मैं राहुल सावरकर नहीं हूॅं। मैं आज उनसे कहना चाहती हूॅं कि आपके बाद की 10 पुश्तें भी सावरकर के हौसले का मुकाबला नहीं कर पाएँगी।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये वही कॉन्ग्रेस पार्टी है, जिन्होंने इमरजेंसी में अटल बिहारी वाजपेयी को कारावास में बंद किया। चौधरी चरण सिंह को कारावास में बंद किया, जेपी को कारावास में बंद किया और मुंबई में स्मगलर करीम लाला को खुला छोड़ दिया।

इससे पहले शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी वीर सावरकर को लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि जो लोग वीर सावरकर का विरोध करते हैं वे किसी भी विचारधारा या पार्टी से हों, उन्हें दो दिन के लिए अंडमान के सेल्यूलर जेल में भेज दो, जहाँ सावरकर को बंधक बनाया गया था। तब उन्हें उनके बलिदान और उनके योगदान का एहसास होगा। बता दें कि कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने एक दिन पहले ही यह बयान दिया था कि सावरकर के अंग्रेजों से माफी माँगने की बात मिटाई नहीं जा सकती है। ऐसे में अगर नरेंद्र मोदी सरकार सावरकर को भारत रत्न देती है तो पार्टी इसका विरोध करेगी।

रामचंद्र गुहा पर टूट पड़ी गालीबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी, राहुल गाँधी के समर्थन में धड़ाधड़ दागे ट्वीट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कटु आलोचकों में से एक रामचंद्र गुहा ने केरल साहित्य महोत्सव में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की खिंचाई की। इसके बाद कॉन्ग्रेस के कुछ फुल टाइम गालीबाज ट्रोल पत्रकार मैदान में आकर राहुल गाँधी की ओर से बैटिंग करने लगे। इन्हीं में से एक नाम है स्वाति चतुर्वेदी।

रामचंद्र गुहा के बयान से बौखलाई स्वाति चतुर्वेदी ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक के बाद एक जहरीले ट्वीट करने शुरू किए। स्वाति चतुर्वेदी ने रामचंद्र गुहा को रीट्वीट करते हुए लिखा, “मेरे लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि मीडिया सहित किसी को भी मोदी के बारे में कोई भ्रम था। मुझे अभी तक समझ में नहीं आ रहा है कि शिक्षाविद, नीति निर्माता और मीडिया किस तरह से मोदी मिथक में पड़ गए?”

इसके साथ ही स्वाति चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक झाँसा देने वाला व्यक्ति बताया है।

केरल में राहुल गाँधी के चुने जाने को भयावह बताने वाले गुहा के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए स्वाति चतुर्वेदी ने लिखा है कि रामचंद्र गुहा राहुल गाँधी के बारे में भ्रमित नजर आ रहे हैं। इसके बाद स्वाति चतुर्वेदी ने राहुल गाँधी की तारीफ करते हुए लिखा है कि आप रामचंद्र गुहा की तरह चाहे राहुल गाँधी से नफरत करें या उनकी आलोचना करिए, लेकिन वह संघ के लिए एक चुनौती की तरह काम कर रहे हैं। जिस तरह से मोदी और आईटी सेल उनके विरुद्ध झूठ से आक्रमण करता है, उनके अंदर बहुत साहस भी है।

स्वाति चतुर्वेदी ने अगले ट्वीट में लिखा कि इससे पहले कि आप राहुल गाँधी को रिटायर होने की सलाह दें, मुझे बताइए कि उन्होंने किस बड़े हत्यारे को पछाड़ा है?

स्वाति चतुर्वेदी इसके बाद रामचंद्र गुहा के मुद्दे को पीछे छोड़कर वापस अपने चिरपरिचित अंदाज में लोगों को ट्वीट में जवाब देती रहीं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके CV में सिर्फ 2002 की हत्याओं का ही जिक्र है।

गौरतलब है कि गुहा ने कहा था कि लोकसभा चुनाव में वायनाड से राहुल गाँधी को चुनकर केरल के लोगों ने विनाशकारी काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने राहुल गाँधी का कोई भविष्य नहीं है। केरल साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार (17 जनवरी, 2019) को ‘राष्ट्र भक्ति बनाम अंधराष्ट्रीयता’ विषय पर बोल रहे रामचंद्र गुहा के सुर बदले-बदले से रहे। उन्होंने कहा कि ‘खानदान की पाँचवी पीढ़ी’ के राहुल गाँधी के पास भारतीय राजनीति में ‘कठोर परिश्रमी और खुद मुकाम बनाने वाले’ नरेंद्र मोदी के सामने कोई मौका नहीं है।

दरबारी लेखक रामचंद्र गुहा कॉन्ग्रेस की हार से नाराज, माँगा ‘युवराज’ राहुल का इस्तीफा

नींद से जागे ‘उपन्यासकार’ रामचंद्र गुहा, कहा अब तो कॉन्ग्रेस में वंशवाद ख़त्म करो

रामचंद्र गुहा को मुक्का किसने मारा? पुलिस ने धमकी दी या मार दिया? – शशि थरूर के Viral वीडियो का सच

कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचारों के तीस साल: ट्रेंड कर रहा ‘हम वापस आएँगे’

कश्मीरी पंडितों पर वर्ष 1990 में अपने ही देश में हुए अत्याचारों को आज 30 वर्ष गुजर चुके हैं। लेकिन कश्मीरी पंडितों के दिलों में वह याद आज भी ताजा हैं। आज उन दिनों को याद कर किसी पीड़ित की आँखों में आँसू हैं तो किसी पीड़ित की आँखों में एक आस कि “हम वापस आएँगे।”

अपने ही देश में शरणार्थी बन कर रहे कश्मीरी पंडितों को अपनी दास्तां सुनाते-सुनाते आज पूरे तीस साल गुजर चुके हैं। आज ही के दिन कश्मीर में पंडितों पर हुए नरसंहार के वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर याद कर रहे हैं और आने वाली फ़िल्म शिकारा के डायलॉग ‘हम आएँगे अपने वतन’ के जरिए अपनी भावना व्यक्त कर रहे हैं।
इस फ़िल्म को विधु विनोद चोपड़ा ने लेखक राहुल पंडिता की किताब ‘Our Moon Has Clots’ पर बनाया है। ट्विटर पर हम वापस आएँगे (#HumWapasAyenge) ट्रेंड कर रहा है।

आगामी 7 फरवरी को रिलीज़ होने वाली फ़िल्म शिकारा में कश्मीरी पंडित पलायन की भयावह घटनाओं को दिखाया गया है, जो 19 जनवरी 1990 को हुई थी। जब इस्लामिक आतंकवादियों ने नरसंहार की धमकी देकर लाखों कश्मीरी पंडितों को घाटी स्थित अपने घरों से भागने के लिए मजबूर कर दिया था।

प्रसिद्ध राजनीतिक टिप्पणीकार #HumWapasAayenge के साथ अपने बचपन की एक फ़ोटो साझा करते हुए लिखा है कि मेरे पास अपने बचपन की कई तस्वीरें नहीं हैं। जीवन और फैमिली एलबम के बीच चयन करने में कोई विकल्प नहीं है। जान बचाने के दौरान फैमली एलबम पीछे छूट गए। 30 साल हो गए। घर वापस जाने का संकल्प केवल मजबूत हुआ है।

पत्रकार राहुल पंडिता ने एक वीडियो ट्वीट करते हुए कश्मीर वापस लौटने की इच्छा व्यक्त की। इसमें उन्होंने कहा है, “हम आएँगे अपने वतन हाजी साहब औऱ यहीं दिल लगाएँगे। यहीं पर मरेंगे और यहीं के पानी में हमारी राख बहाई जाएगी।

पंडिता के इस वीडियो के जरिए कई अन्य पीड़ितों ने भी कश्मीर लौटने का अपना इरादा जताया है।

ट्विटर पर चलाए गए इस अभियान को बहुत से लोगों ने अपने-अपने करीक़े से अपना समर्थन दिया। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जुलाई 2019 में घोषणा की थी कि केंद्र सरकार कश्मीरी पंडितों को घाटी में वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इतना ही नहीं शाह ने कश्मीरी पंडितों को भरोसा दिलाया था कि एक समय आएगा कि जब वे प्रसिद्ध खीर भवानी मंदिर में प्रार्थना करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ह्यूस्टन में कश्मीरी पंडितों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करते हुए कहा था, ”आपको बहुत नुकसान हुआ है और नए कश्मीर के निर्माण की ओर बढ़ने का समय आ गया है।”

शबाना आज़मी का एक्सिडेंट, साथ में बैठे थे जावेद अख्तर: गंभीर हालत में ले जाया गया अस्पताल

गीतकार और लेखक जावेद अख़्तर की पत्नी और अभिनेत्री शबाना आज़मी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई हैं। खालापुर टोल प्लाज़ा के पास पुणे-मुंबई एक्सप्रेस पर उनकी कार ट्रक से टकरा गई। इसके बाद उन्हें एमजीएम हॉस्पिटल पनवेल में भर्ती कराया गया। बता दें कि जिस वक्त यह हादसा हुआ उस समय कार में उनके पति जावेद अख़्तर भी बैठे हुए थे। हालाँकि, उन्हें कोई चोट नहीं आई है।

मुंबई मिरर ने प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लिखा कि दोपहर क़रीब 3:30 बजे खालापुर टोल प्लाज़ा के पास उनकी कार और ट्रक में टक्कर हो गई। इस हादसे में उनका ड्राइवर भी घायल हो गया है, उसे भी इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सड़क हादसे में शबाना आज़मी गंभीर रूप से घायल हुईं (तस्वीर साभार: मुंबई मिरर)

इस सड़क हादसे की ख़बर जैसे-जैसे लोगों तक पहुँची, वैसी ही जावेद अख़्तर और शबाना आज़मी के जल्द ठीक होने की दुआएँ की जाने लगी। राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट कर उनके जल्द ठीक होने की कामना की।

मुंबई में कल रात (17 जनवरी) अभिनेत्री शबाना आज़मी ने अपने पति जावेद अख़्तर का 75 वां जन्मदिन मनाया था। फ़िलहाल, इस बात का पता नहीं चल सका है कि जन्मदिन मनाने वो कहाँ गए थे।

अस्पताल के बाहर खड़े जावेद अख़्तर (तस्वीर साभार: मुंबई मिरर)

आजम खान के बोल अभद्र और असभ्य, ऐसा सबक सिखाएँ कि याद रहे: जावेद अख्तर

जावेद अख़्तर : स्क्रिप्ट-राइटर और गीतकार से लेकर ट्रोल तक का सफ़र

‘लीगल एक्सपर्ट’ जावेद अख्तर की बोलती बंद, जामिया पर IPS अधिकारी ने पूछा- हमें भी बताएँ एक्ट

एसिड अटैक सर्वाइवर का दीपिका ने TikTok पर उड़ाया मजाक… JNU कांड के बाद फिर पड़ रही गाली

बीते कुछ दिनों से बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का नाम सुर्ख़ियों में बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह उनकी फ़िल्म ‘छपाक’ है, जिसमें उन्होंने एसिड सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल के किरदार को निभाया। यह फ़िल्म एक 15 साल की नाबालिग बच्ची लक्ष्मी अग्रवाल पर हुए एसिड हमले से जुड़े एक दर्दनाक हादसे पर आधारित है, जिसका किरदार निभाकर दीपिका पादुकोण समाज को यह संदेश देना चाहती थीं कि एसिड हमले की शिकार महिलाओं को अपने जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए और उन्हें हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए।

इतने गंभीर विषय पर फ़िल्म बनाना निश्चित तौर पर एक साहसिक काम है। साथ ही एसिड हमले की शिकार पीड़िता के किरदार को उसी गंभीरता से निभा ले जाना उससे भी बड़ी बात है। एक आम नागरिक होने के नाते मुझे यह बात जितनी अच्छी और न्यायसंगत लगती है, उतनी शायद छपाक फ़िल्म की हिरोइन दीपिका पादुकोण को नहीं लगती। इसकी वजह यह है कि सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो बड़ी तेज़ी से अपनी पहुँच बढ़ा रहा है। इस वीडियो में दीपिका पादुकोण अपनी एक साथी फेबी जोकि पेशे से मेकअप आर्टिस्ट हैं, उनके साथ एक मैकअप चैलेंज गेम खेलती नज़र आ रही हैं। इसमें दीपिका अपनी तीन फ़िल्मों का ज़िक्र करती हैं, जिनमें उनके द्वारा निभाए किरदार का मेकअप करके फेबी उस किरदार पर चुटकी लेती हैं।

इनमें दीपिका अभिनीत फ़िल्म- ओम शांति ओम, पीकू और छपाक शामिल हैं। एक-एक कर दीपिका की साथी फेबी फ़िल्म के किरदारों का मेकअप करती नज़र आती है। इसमें ग़ौर करने वाली बात यह है कि जब फ़िल्म छपाक के किरदार यानी कि एसिड हमले की शिकार लक्ष्मी अग्रवाल की बारी आती है तो फेबी अधजले चेहरे का मेकअप करती है, जो बेहद शर्मनाक़ है।   

इस वीडियो को देखकर शायद ही किसी के मन में यह सवाल नहीं उठेगा कि फ़िल्म ‘छपाक’ में एसिड हमले की शिकार हुई जिस लक्ष्मी अग्रवाल का किरदार दीपिका ने निभाया, उसे उन्होंने गंभीरता से लिया भी होगा या नहीं? 

वायरल हुए इस वीडियो में दीपिका के हँसी के ठहाके देखकर तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगता, इससे तो ऐसा ही लगता है कि लक्ष्मी अग्रवाल का दर्द दीपिका के लिए सिर्फ़ पर्दे तक ही सीमित था। टिक-टॉक पर बने इस वीडियो की सच्चाई यह है कि फ़िल्मी दुनिया की दीपिका पर्दे पर कुछ और होती हैं और असल ज़िंदगी में कुछ और। अपनी असल ज़िंदगी में वो एसिड हमले की शिकार महिलाओं का मखौल उड़ा कर खीसे निपोरती हैं।  

कहने को तो यह फ़िल्म एक सामाजिक संदेश को लेकर सामने आई थी, लेकिन फ़िल्म की हीरोइन ख़ुद सोशल मीडिया पर जो सामाजिक संदेश देती नज़र आ रही हैं, वो उनके दिखावटी चेहरे को बड़े ही स्पष्ट तरीक़े से उजागर करता है। इस बनावटी चेहरे को लेकर वो न जाने कितने स्टंट करती नज़र आईं। सोशल कॉज़ की आड़ में फ़िल्म के प्रमोशन का दाँव खेलते हुए JNU हिंसा में उन वामपंथियों की साइड में जाकर भी खड़ी हो गईं, जिनके ख़िलाफ़ मामले दर्ज किए गए थे। 

मेरी दिली ख़्वाहिश है कि कोई दीपिका पादुकोण को यह ज़रूर बताए कि फ़िल्मी दुनिया के रुपहले पर्दे पर किसी विक्टिम के किरदार को निभाने में और उसे जीने में फ़र्क़ होता है। बेहतर तो यह होता कि लक्ष्मी जैसी पीड़िताओं के दर्द को महसूस कर दीपिका उन्हें आगे बढ़ने का हौसला देतींं। लेकिन, उनसे यह उम्मीद भला कैसे की जा सकती है, क्योंकि फ़िल्म निर्देशकों ने तो एसिड सर्वाइवर लक्ष्मी का केस लड़ने वाली वकील अपर्णा भट्ट को ही क्रेडिट नहीं दिया और मामला कोर्ट की चौखट तक जा पहुँचा। 

कहने को तो यह फ़िल्म सोशल कॉज़ पर बनी थी, लेकिन असल ज़िंदगी में फ़िल्म निर्माता से लेकर हिरोइन तक का सोशल कॉज़ से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। दीपिका पादुकोण को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं है कि जब किसी पर एसिड अटैक होता है तो उसका दर्द भयावह होता है। शरीर के अंगों पर गिरा एसिड न सिर्फ़ उनके शरीर को झुलसाता है बल्कि उनके मन, उनके जीने की चाह, भविष्य से जुड़े सपनों तक को भी झुलसा देता है। दीपिका पादुकोण इस बात से बिल्कुल बेख़बर हैं कि खीसे निपोरता उनका यह वीडियो न जाने कितनी एसिड सर्वाइवर्स के चेहरे की हँसी को एक झटके में छीन लेगा और उन्हें ग़म में बदल देगा।

‘छपाक’ की रियल स्टोरी: 15 साल की लक्ष्मी ने शादी से इनकार किया तो 32 साल के नईम ने तेजाब फेंका

दीपिका जानती हैं कि वो क्या कर रही हैं, लेकिन मैं टुकड़े-टुकड़े गैंग से साथ खड़ी नहीं होती: कंगना

बॉक्स ऑफिस के बाद अब दीपिका के विज्ञापनों को भी तगड़ा झटका, किनारा कर रहे हैं बड़े ब्रांड्स

15 जनवरी के बाद Chhapaak की रिलीज पर रोक: दिल्ली HC का आदेश – चलानी है मूवी तो करो एडिट

ये कैसी सरकार, अपने भी लाचार: धरने पर कॉन्ग्रेस विधायक, कहा- वादे पूरे करें कमलनाथ

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस विधायक मुन्नालाल गोयल ने शनिवार (जनवरी 18, 2019) को अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने पार्टी पर घोषणा-पत्र में किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है। शनिवार सुबह विधानसभा पहुँचे मुन्नालाल गोयल पहले परिसर के अंदर घुसने के लिए बैरिकेडिंग से कूदते हुए नजर आए। इसके बाद विधानसभा में लगी गाँधी प्रतिमा पर पहुँचकर उन्होंने माल्यार्पण करने के बाद परिसर के गेट पर ही दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए।

मुन्नालाल गोयल ने कहा कि कमलनाथ सरकार में विधायकों की भी अनदेखी हो रही है। सरकार की बेरुखी से नाराज और सीएम को वादा याद दिलाने के लिए गोयल ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा, लेकिन इस पर कुछ नहीं हुआ। मुन्नालाल गोयल ने कहा, “यह हमारे चुनाव घोषणा-पत्र में किए गए वादों की याद दिलाने के लिए है। मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है जिसमें उनसे वादों को पूरा करने के लिए कहा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। यही वजह है कि आज मैं यहाँ धरने पर बैठा हूँ।” वैसे यह पहली बार नहीं है जब कमलनाथ सरकार का विरोध पार्टी विधायक की कर रहे हैं।

मुन्नालाल गोयल का आरोप है कि कॉन्ग्रेस जिस घोषणा-पत्र के सहारे सत्ता पर काबिज हुई है, उन पर अब अमल नहीं कर रही। विधायक ने कॉन्ग्रेस के घोषणा-पत्र में शामिल झुग्गी वासियों को पट्टे देने के वचन को पूरा नहीं करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के 112 झुग्गी वासियों को कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र पर अमल का इंतजार है। उनकी सरकार से माँग है कि झुग्गी वासियों को जल्द से जल्द पट्टा दिया जाना चाहिए।

इससे पहले गोयल ने शुक्रवार (जनवरी 17, 2019) को मुख्यमंत्री कमलनाथ को चिट्ठी लिखकर धरने पर बैठने की घोषणा की थी। उन्होंने लिखा था कि सत्ताधारी दल का विधायक बनने के बाद अपने क्षेत्र के भूमिहीन परिवारों के आशियानों पर ठंड में बुल्डोजर चलते देख रहा हूँ। प्रशासन के अधिकारियों से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता का अपमान होते देख रहे हूँ। अब वो इसे नहीं देख सकते हैं। विधायक का कहना है कि पिछले 6 महीने में मुख्यमंत्री से लेकर संबंधित मंत्रियों को वे कई बार पत्र लिख चुके हैं। लेकिन समस्याएँ जस की तस हैं।

इस मुद्दे को उन्होंने विधानसभा में 6 महीने पहले भी उठाया था, जिसमें सरकार के मंत्री ने जल्दी ही झुग्गी वासियों को पट्टे देने का ऐलान किया था। हालाँकि 6 महीने बीतने के बाद भी इस पर अमल नहीं होने वे खासे नाराज हैं। मुन्नालाल गोयल ने माँग की है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के घोषणा-पत्र पर सरकार को तत्काल अमल करना चाहिए।

कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा कि वे झुग्गी वासियों को पट्टे दिए जाने की माँग को लेकर कई बार मुख्यमंत्री को भी पत्र लिख चुके लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ है। इतना ही नहीं विधानसभा के विशेष सत्र में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की थी लेकिन उनकी आवाज को सुना नहीं गया।

बीजेपी नेता गोपाल भार्गव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया, “मध्यप्रदेश में गूंगी बहरी सरकार विपक्ष और जनता तो दूर अब अपने ही विधायकों की नहीं सुन रही। विधायक सुनीता पटेल और अब मुन्नालाल गोयल, मुख्यमंत्री कमलनाथ जी को वचन याद दिला रहे है। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार से, उसकी कार्यप्रणाली से उसके ही विधायक भी खुश नहीं है।” राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान ने भी इस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा है, “धीरे-धीरे कॉन्ग्रेस सरकार की कलई खुलने लगी है। सच्चाई सामने आने लगी है। अब तो इनके अपने ही मोर्चा खोलने पर मजबूर हो गए हैं। सच भी है, आखिर झूठ के पैबंद से कब तक सच्चाई की रोशनी को रोका जा सकेगा?”

एक दिन पहले कॉन्ग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कहा था कि सरकार को आम लोगों की आवाज सुननी होगी। उन्होंने कहा था कि 15 साल बाद जब हमारी सरकार आई तो कार्यकर्ताओं की बात जरूर सुनी जानी चाहिए। जिन मुद्दों के सहारे कॉन्ग्रेस सत्ता पर काबिज हुई है, उन मुद्दों पर खरा उतरना सरकार की जिम्मेदारी है।

मध्य प्रदेश में 1 साल में 7 लाख नए बेरोजगार, बेरोजगारी भत्ते वाले वादे से मुकरी कमलनाथ सरकार

कर्जमाफी के बाद अब सिंधिया ने ट्रांसफर-पोस्टिंग पर कमलनाथ सरकार को घेरा

कमलनाथ सरकार ने 8 महीने में 11 बार किया तबादला: परेशान थाना प्रभारी पहुँचा हाईकोर्ट

‘सीरीज से बाहर बैठना कठिन… लेकिन मेरा परिवार डरा हुआ’: पाकिस्तान-बांग्लादेश क्रिकेट सीरीज खटाई में!

पाकिस्तान दौरे पर जाने से पहले बांग्लादेश कोचिंग टीम के 5 सदस्यों ने इस दौरे से अपने हाथ खींच लिए हैं। इसके बाद से बांग्लादेश क्रिकेट टीम का पाकिस्तान दौरा खटाई में पड़ता हुआ नज़र आ रहा है। वहीं इससे पहले बांग्लादेश के विकेटकीपर ने दौरे से अपने हाथ पीछे खींचते हुए कहा था, “मेरा परिवार पाकिस्तान में सुरक्षा के माहौल से डरा हुआ है।”

आतंकियों को पनाह देने वाले देश के रूप में कुख्यात हो चुके पड़ोसी देश पाकिस्तान में जाने से पहले किसी भी व्यक्ति को एक नहीं बल्कि हज़ार बार सोचना पड़ता है। अब इस कड़ी में उन हस्तियों का भी नाम जुड़ चुका है, जिनको सुरक्षा के नाम पर बहुत सी सुविधाएँ दी जाती हैं और पहले से ही सुरक्षा की गारंटी दी जाती है। लेकिन इस सबके बाद भी बांग्लादेश की पूरी क्रिकेट टीम पाकिस्तान दौरे के लिए सहमत नहीं है। अब ख़बर आ रही है कि बांग्लादेश के 5 कोचिंग स्टाफ ने पाकिस्तान दौरे से अपना नाम वापस ले लिया है।

दरअसल बोर्ड द्वारा सीरीज खेले जाने की हामी भरने के बाद से ही बांग्लादेश क्रिकेट टीम आपस में बँटती हुई नज़र आ रही है, जिससे बांग्लादेश का पाकिस्तान दौरा खटाई में पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

इससे पहले बांग्लादेश के विकेटकीपर बल्लेबाज पूर्व कप्तान मुशफिकुर रहीम अपने पाकिस्तान दौरे पर जाने से मना कर चुके हैं। उन्होंने दौरे से अपना नाम वापस लेते हुए कहा था, “मेरा परिवार पाकिस्तान की सुरक्षा के माहौल से डरा हुआ है। इस हालात में मैं पाकिस्तान नहीं जा सकता और वहाँ जाकर खेल नहीं सकता। बांग्लादेश क्रिकेट टीम से एक सीरीज के दौरान बाहर बैठना मेरे लिए हमेशा ही बहुत कठिन रहा है।”

आपको बता दें कि बांग्लादेश टीम को 24 जनवरी से पाकिस्तान दौरे पर तीन टी-20 मैच और दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। वहीं दोनों देशों के बोर्ड के बीच हुई बातचीत के बाद तैयार हुए नए कार्यक्रम के मुताबिक दोनों टेस्ट मैचों के बीच एक वनडे मैच खेला जाएगा। इससे पहले बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के अध्यक्ष नजमुल हसन ने कहा था कि सरकार ने बोर्ड को बहुत संक्षिप्त समय के लिए टीम भेजने की अनुमति दी है।

₹10-10 हजार की पगार पर रखे गए थे आतंकी, BJP सांसद तेजस्वी सूर्या को मार गिराने का था प्लान

बेंगलुरु पुलिस ने आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर इस्लामी चरमपंथी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के 6 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में 22 दिसंबर को निकली रैली में शामिल आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या का प्रयास किया था। बताया जाता है कि इनके निशाने पर बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या थे।

गिरफ्तार संदिग्धों की पहचान इरफान, सैयद अकबर, सैयद सिद्दीकी, अकबर बाशा, सनाउल्ला और सादिक अमीन उर्फ साउंड अमीन के तौर पर की गई है। ये सभी शहर के केजी हल्ली इलाके के रहने वाले हैं। बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आतंकी बड़ी साजिश रच रहे थे। गिरफ्तार सभी लोग SDPI से ताल्लुक रखते हैं। ये लोग CAA के समर्थन में आयोजित रैली में अव्‍यवस्‍था फैलाना चाहते थे और जानेमाने हिन्दू नेता की हत्या करना चाहते थे। कमिश्नर ने बताया कि इन सभी को अपने आकाओं (हैंडलर) से एजेंडा पूरा करने के लिए हर महीने 10,000 रुपए मिलते थे। अब इस मामले की जाँच एंटी टेरर स्क्वॉयड को सौंप दी गई है।

बता दें कि इस्लामी चरमपंथी के इन आतंकी के निशाने पर बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या और हिन्दू नेता थे। हालाँकि पुलिस की मुस्तैदी की वजह से वो इस वारदात को अंजाम न दे सके। पिछले दिनों टाउन हॉल में बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या और दक्षिणपंथी नेता चक्रवर्ती सुलीबेले की अध्यक्षता में CAA और NRC के समर्थन में रैली की गई थी।

एसडीपीआई के संदिग्ध चोरी की तीन बाइक से रैली स्थल पहुँचे थे। ये लोग रैली में मौजूद लोगों के बीच घुसकर हमला करना चाहते थे, लेकिन पुलिस बंदोबस्त के चलते ऐसा नहीं कर सके। इसके बाद ये लोग भीड़ पर पथराव कर भगदड़ की स्थिति उत्पन्न करना चाहते थे, ताकि भगदड़ के दौरान आसानी से हत्या कर सकें। हालाँकि इनके पत्थर अपना निशाना चूक गए।

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में 18 जनवरी 2020 को प्रकाशित खबर

उन्होंने सम्मेलन में प्रमुख हिंदू नेता की हत्या करने के इरादे से एक आपराधिक साजिश रची और योजना बनाई थी। इन अभियुक्तों ने भी रैली में भाग लिया था और चूँकि पुलिस सुरक्षा कड़ी थी, इसलिए रैली के प्रमुख वक्ता और भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या को मारने की उनकी योजना विफल हो गई। इसके बाद उन्होंने कम से कम एक हिंदू कार्यकर्ता को मारने का फैसला किया और आरएसएस कार्यकर्ता वरुण पर हमला किया।

पुलिस ने बताया कि ये घटना कलसिपालिया में कुंभारगुंडी रोड के पास हुई। हमलावर दो बाइक पर थे। उन लोगों ने हत्या करने के इरादे से वरुण को बेरहमी से मारा। जख्मी वरुण के सिर, गर्दन और पीठ पर गंभीर चोटें आई। हालाँकि सही समय पर पुलिस और राहगीरों की मदद से अस्पताल पहुँचने की वजह से उनकी जान बच गई।

आरोपितों ने इस वारदात को गहरी साजिश के साथ अंजाम दिया था। इसके लिए उन्होंने पुख्ता इंतजाम किए थे। पहचान छुपाने के लिए हेलमेट पहन रखा था और एक के ऊपर एक करके लगभग 2-3 टी-शर्ट पहनी हुई थी। इन्होंने पास में मोबाइल फोन भी नहीं रखा था। मोबाइल फोन को घर पर ही छोड़ दिया था। इतना ही नहीं, इन्होंने अपने गाड़ियों की नंबर प्लेटों पर काली कालिख पोत दी थी, ताकि गाड़ी के नंबर का पता न चल सके।

आपराधिक वारदात को अंजाम देने के बाद उन्होंने पहनी हुई शर्ट को उतार दिया और बीच रास्ते में ही पेट्रोल डालकर उसे जला दिया। उन्होंने एंकल्याप के पास के एक झील में हथियार फेंक दिए और राममूर्तिनगर के पास एक तालाब में अपने हेलमेट उतार कर फेंक दिए। पुलिस ने बताया कि उन्होंने अपने जूते नाले में फेंक दिए थे और अपनी गाड़ियाँ भी छुपा दी थी। कमिश्नर भास्कर राव ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों के अंदर कट्टरपंथी सोच भरी गई और उनका काम अन्य कैडर की भर्ती करना, उन्हें प्रशिक्षण देना तथा कट्टर सोच भरना था ताकि वे शहर में तबाही फैलाने के लिए जाने-माने लोगों की हत्या कर सकें।

इस मामले में सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा, “SDPI एक संगठन है, जिसे अभी तक प्रतिबंधित नहीं किया गया है। अब यह संगठन इसलिए खतरनाक हो चुका है, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इसके सदस्यों के खिलाफ मामले वापस ले लिए थे।” उन्होंने 6 SDPI सदस्यों की गिरफ्तारी को ऊँट के मुँह में जीरे की तरह बताया और कहा कि वह SDPI की गतिविधियों की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुँचाएँगे।

CAA समर्थकों पर हमला करने वाले 6 गिरफ्तार, कट्टरपंथी इस्लामी संगठन SDPI से है रिश्ता

मस्जिद के अंदर नमाज़ अदा करते समय BJP नेता पर बेरहमी से हमला, इस्लामी चरमपंथी SDPI गुंडों की हरकत

CAA के विरोध के बहाने, आतंक समर्थक वामपंथी संगठन SDPI ने रोकी बीमार बेटे को ले जा रही कार