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‘अंतिम संस्कार से पहले CM योगी आएँ, तत्काल सख्त कार्रवाई करें, हमें नौकरी दें’ – उन्नाव मामले में परिवार की माँग

उन्नाव में दरिंदगी का शिकार हुई पीड़िता का शव उनके गाँव पहुँच चुका है। कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है। लेकिन अभी पीड़िता का परिवार शव के अंतिम संस्कार को राजी नहीं है। यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का फैसला किया है लेकिन परिजन अभी संतुष्ट नहीं हैं। पीड़िता के परिजनों ने सीएम योगी को बुलाने की माँग की है।

एसपी और डीएम सहित कई अधिकारी गाँव में मौजूद हैं। अधिकारी शव के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं मृतका के परिजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने के बाद शव की अंत्योष्ठी करने पर अड़े हुए हैं। इस बीच पीड़िता की बहन ने बयान देते हुए माँग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उसके घर आएँ और तत्काल सख्त कार्रवाई करें। साथ ही बहन ने सरकारी नौकरी देने की भी माँग की है। उन्होंने कहा, “मैं माँग करती हूँ कि मुझे सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए।”

किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए गाँव में भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात कर दिया गया है। दमकल की गाड़ियाँ भी मौके पर मौजूद हैं। वहीं, गाँव में पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सुबह से ही डेरा डाले हुए हैं। उल्लेखनीय है कि उन्नाव में पीड़िता को गुरुवार (दिसंबर 5, 2019) की सुबह केरोसिन तेल डालकर आग लगा दी गई थी। बता दें कि पीड़िता को जलाने वाले आरोपित वही लोग हैं, जिन्होंने उनका बलात्कार किया था। आरोपितों से बचने के लिए पीड़िता 1 किलोमीटर तक जलते हुए भी बदहवास अवस्था में भागती रहीं। यहाँ तक कि उसने 112 नंबर पर पुलिस को भी कॉल किया था। जब पुलिस मौके पर पहुँची, तब तक वह 90 प्रतिशत जल चुकी थीं।

पीड़िता के परिवार का कहना है कि वो अब पीड़िता के पार्थिव शरीर को जलाएँगे नहीं बल्कि दफनाएँगे। उनका कहना है कि पहले से ही दरिंदों द्वारा आग लगा कर जला दी जा चुकी पीड़िता के शरीर में जलाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है, इसीलिए उनके शव को दफनाया जाएगा। बलात्कार पीड़िता के भाई ने बताया कि उनकी बहन 90% जल चुकी है, ऐसे में अंतिम क्रियाकर्म हेतु जलाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है।

वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, बालिका की मौत अत्यंत दुखद है। उन्होंने पीड़िता के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सभी अपराधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

उन्नाव रेप पीड़िता के ऊपर केरोसिन तेल डालकर जिंदा जलाकर मारने वाले हैवानों के चेहरे आए सामने

मैं अपनी बहन को दफनाऊँगा क्योंकि जलाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है: उन्नाव पीड़िता का भाई

‘हैदराबाद के जैसा दौड़ा-दौड़ाकर गोली मारी जाए…’ – उन्नाव में जला कर मार दी गई बेटी के पिता का छलका दर्द

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आरिफ, शाहनवाज, शरीफ, आबिद ने एसिड से जलाया… क्योंकि पीड़िता ने रेप केस वापस लेने से किया इनकार

देश में महिलाओं के खिलाफ बर्बरता कम होने का नाम नहीं ले रही है। पहले हैदराबाद में महिला के साथ गैंगरेप के बाद उसे जिंदा जला दिया गया, उसके बाद उन्नाव रेप पीड़िता को कोर्ट जाते समय जिंदा जला दिया गया, जिसके कुछ समय बाद महिला ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इन दोनों घटनाओं के बाद देश भर में लोगों का गुस्सा अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब मेरठ में भी रेप पीड़िता पर तेजाब फेंकने का मामला सामने आया है।

पुलिस के अनुसार 30 वर्षीय महिला ने रेप का मामला कोर्ट से वापस लेने से इनकार कर दिया तो चारों आरोपितों ने बुुधवार (दिसंबर 4, 2019) को महिला पर तेजाब फेंक दिया। जानकारी के अनुसार महिला 30 फीसदी जल गई है और उसका मेरठ के अस्पताल में इलाज चल रहा है। शाहपुर स्टेशन के सर्किल ऑफिसर गिरिजा शंकर त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार रात को चारों आरोपित महिला के घर में जबरन घुस गए और उस पर तेजाब फेंक दिया, क्योंकि महिला ने आरोपितों के खिलाफ रेप का मामला वापस लेने से इनकार कर दिया।

गिरजा शंकर त्रिपाठी ने बताया कि जिन चार लोगों ने महिला पर तेजाब फेंका है, उनकी पहचान कर ली गई है। इन आरोपितों के नाम आरिफ, शाहनवाज, शरीफ और आबिद है। चारों कसेरवा गाँव के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि चारों आरोपित फिलहाल फरार हैं, मगर जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

वहीं जब पुलिस से पूछा गया कि आखिर क्यों महिला ने पुलिस से शिकायत की बजाए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो विभाग के सूत्र ने बताया कि महिला ने पहले पुलिस से इस मामले की शिकायत की थी। लेकिन जाँच के दौरान किसी भी तरह का सबूत नहीं मिलने की वजह से पुलिस ने केस बंद कर दिया था।

सर्किल ऑफिसर गिरिजा शंकर त्रिपाठी का कहना है कि एसिड अटैक मामले में आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 326ए के तहत मामला दर्ज कर लिया है। बता दें कि आईपीसी की धारा 326ए के तहत दोषी को 10 साल की सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा आरोपितों के खिलाफ जिन अलग-अलग धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है, उसमें धारा 452, धारा 504 और धारा 506 शामिल हैं।

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Breaking: दिल्ली में आग से 43 की मौत, 50+ गंभीर रूप से घायल – अनाज मंडी में हुआ यह हादसा

राजधानी दिल्ली के रानी झाँसी रोड पर रविवार (दिसंबर 8, 2019) सुबह अनाज मंडी में भीषण आग लग गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। आग इतनी भयानक थी कि आग पर काबू पाने के लिए दमकल की 27 गाड़ियाँ पहुँची। हालाँकि देखते ही देखते आग बढ़ती ही चली गई और ताजा जानकारी मिलने तक आग में झुलसने से 43 लोगों की मौत की खबर है। दिल्ली पुलिस ने इसकी जानकारी दी है।

दिल्ली फायर सर्विस के चीफ फायर ऑफिसर अतुल गर्ग ने कहा कि अब तक 50 से ज्यादा लोगों को बचाया गया है, जिनमें से अधिकतर धुएँ के कारण प्रभावित हुए हैं।

दरअसल घटना सुबह 5 बजे की है। मंडी में एक तीन मंजिला बेकरी है। बेकरी की ऊपरी मंजिल पर आग लगी थी। जिसके बाद आग ने पूरी इमारत को ही अपनी चपेट में ले लिया। आग के चलते इलाके में चारों तरफ धुआँ ही धुआँ हो गया। वहीं इलाके के काफी कन्जेस्टेड होने के चलते भी आग ज्यादा फैली। 43 की मौत के पहले जो सूचना आई थी, उसमें 35 लोगों की मौत के साथ ही कई अन्य गंभीर रूप से घायल की खबर थी।

डेप्युटी चीफ फायर ऑफिसर सुनील चौधरी ने मीडियाकर्मियों को बताया कि आग बुझा दी गई है। राहतकार्य जारी है। ऑपरेशन में दमकल के 27 वाहन लगे हुए हैं। घटनास्थल पर बड़ी संख्या में दमकलकर्मी मौजूद हैं और फँसे हुए लोगों को निकालने में लगे हुए हैं। मकान की खिड़कियों से काला धुआँ निकल रहा है जिससे जाहिर हो रहा है कि अंदर भीषण आग लगी थी। फिलहाल आग लगने की वजह का पता नहीं चल पाया है।

Note: यह डेवलपिंग स्टोरी है। जैसे-जैसे सूचना आती जाएगी, हम इस खबर को अपडेट करते रहेंगे।

17 साल की लड़की को किडनैप कर 2 महीने तक गैंगरेप… फिर जिंदा जला कर त्रिपुरा में मार डाला

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में रेप पीड़िता को जलाकर मार डालने की घटना के बाद त्रिपुरा में भी 17 साल की लड़की के साथ रेप के बाद जला देने की खबर सामने आई है। आरोपित के पड़ोसियों ने पीड़िता को अस्पताल पहुँचाया। जहाँ पीड़िता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) को पीड़िता को दक्षिण त्रिपुरा के शांतिर बाजार में उसके ब्वॉयफ्रेंड और और उसकी माँ ने आग के हवाले कर दिया। इस कारण से पीड़िता 90% जल गई थी।

पीड़िता की मौत की खबर फैलते ही अस्पताल में भीड़ जमा हो गई और आरोपित युवक और उसकी माँ पर हमला कर दिया। त्रिपुरा पुलिस ने शनिवार (दिसंबर 7, 2019) को नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने और परिजनों के साथ मिलकर जलाकर उसकी हत्या करने के आरोप में पीड़िता के ब्वॉयफ्रेंड अजय रूद्रपॉल को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने कहा कि मुख्य आरोपित अजय रुद्रपॉल ने दो महीने पहले लड़की से शादी करने का वादा किया और उसे दक्षिण त्रिपुरा के शांतिर बाजार इलाके में अपने घर ले गया। पुलिस ने बताया कि अजय ने यहाँ पीड़िता को फिरौती के लिए बंदी बनाकर रखा था और पिछले दो महीने से उसके साथ रेप कर रहा था। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि अजय और उसके परिवार के सदस्यों ने पिछले दो महीनों में लड़की को प्रताड़ित किया और उन्होंने उसे शुक्रवार शाम को आग लगा दी।

पीड़ित लड़की के परिवार ने आरोप लगाया कि अजय रुद्रपॉल ने पीड़िता की रिहाई के लिए 50,000 रुपए की माँग की थी, लेकिन वे शुक्रवार को केवल 17,000 रुपए ही दे पाए। पुलिस ने दावा किया कि इससे अजय गुस्से में आ गया और नाबालिग लड़की को जला दिया। दक्षिण त्रिपुरा की एसपी जल सिंह मीणा ने कहा कि मामले के मुख्य आरोपित अजय को अस्पताल में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसे शांति बाजार पुलिस स्टेशन लाया गया। आगे की जाँच की जा रही है।

पुलिस ने कहा कि पीड़ित लड़की आरोपित के साथ सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आई थी। इसके बाद आरोपित ने लड़की के घर जाकर शादी के लिए प्रपोज किया। उन्होंने बताया कि दिवाली के ठीक बाद लड़की आरोपित के साथ रहने लगी थी। पुलिस ने दावा किया कि उसके बाद आरोपितों ने उसे फिरौती के लिए किडनैप कर कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद आरोपित और उसके दोस्तों द्वारा पीड़ित नाबालिग के साथ गैंगरेप किया गया।

पीड़ित की माँ का कहना है कि उन्होंने लड़की के लापता होने के तुरंत बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। जब आरोपितों ने दूसरी बार पैसे माँगे, तो उन्होंने फिर से पुलिस से मदद माँगी, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। पीड़िता की माँ ने आरोप लगाया, “शुक्रवार की रात हमने चंद्रपुर आईएसबीटी में अजय की माँ को 17,000 रुपए दिए, लेकिन वह खुश नहीं थी। उन्होंने हमें चेतावनी दी कि अगर हम लड़की को वापस लेना चाहते हैं तो हमें पूरी रकम का भुगतान करना होगा। इस बीच, हमने उनके घर का पता जाना और आज उन तक पहुँचने की योजना बनाई थी, लेकिन आज सुबह हमें सूचित किया गया कि उसे आग लगा दी गई और फिर अस्पताल भेज दिया गया।”

लड़की की माँ ने आगे कहा, “हमने तुरंत पुलिस को मामले की सूचना दी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। जब हम उससे अस्पताल में मिले, तो मेरी बेटी की हालत बेहद गंभीर थी। उसने हमें बताया कि पिछले दो महीनों से उसके साथ बार-बार सामूहिक बलात्कार किया गया था और फिरौती के पैसे न देने के कारण उसे लगातार प्रताड़ित किया गया। और जब अजय को पता चला कि केवल 17,000 ही दिए गए, तो वह उग्र हो गया और रात में उसने उसे आग लगा दी।”

पीड़िता का हवाला देते हुए उसकी माँ ने मीडिया को बताया कि अजय बेंगलुरु में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है और उनकी बेटी से मिलने के लिए हमारे घर आया था। लड़की की माँ ने मीडिया को बताया, “जब तक मेरी बेटी लापता नहीं हुई, तब तक सब कुछ ठीक था। पहले दो दिनों के बाद अजय और उसकी माँ ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। कुछ दिनों के बाद अजय और उसके दोस्तों ने उसका बलात्कार करना शुरू कर दिया। उसे ठीक से खाना भी नहीं दिया गया और उससे लगातार कहा जाता था कि अगर फिरौती की पूरी रकम नहीं दी गई तो उसे मार दिया जाएगा।”

हैदराबाद एनकाउंटर: आरोपित की पत्‍नी ने पति का शव दफनाने से किया इनकार, रख दी ये बड़ी माँग

छेड़छाड़ और गंदी वीडियो बना वायरल करने वाला जमानत पर बाहर आया, आते ही पीड़िता को हंसिये से काटा

‘पुलिस पर हमला’ का मामला दर्ज: ‘प्रीति रेड्डी’ मामले के चारों आरोपित एनकाउंटर के बाद भी कानून के शिकंजे में

समाज एनकाउंटर पर जश्न मनाता है, तो उसका कारण है: उन्नाव की बेटी भी कल मर गई

हैदराबाद एनकाउंटर की जाँच शुरू: NHRC की टीम पहुँची शादनगर, केंद्र ने KCR सरकार से माँगी है विस्तृत रिपोर्ट

हैदराबाद में पशु चिकित्सक डॉ. ‘प्रीति’ (बदला हुआ नाम) रेड्डी के गैंगरेप और हत्या के आरोपितों के कथित एनकाउंटर की जाँच करने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की टीम शादनगर पहुँच गई है। हैदराबाद के पास स्थित शादनगर डॉ. प्रीति की गैंगरेप के बाद हत्या, और उनके हत्यारोपितों चेन्नाकेशवुलु, जोल्लू नवीन, जोल्लू शिवा, और मो. आरिफ़ के कथित एनकाउंटर, दोनों ही वारदातों का घटनास्थल है।

शादनगर पुलिस थाने में इस घटना की तहरीर स्थानीय एसीपी ने दर्ज की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप और हत्या के चारों आरोपित शुक्रवार को पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। इस मामले में तहरीर दर्ज की गई है। शादनगर के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) ने शिकायत दर्ज की है। शादनगर पुलिस स्टेशन में भी कंप्लेन दर्ज की गई है। हैदराबाद एनकाउंटर मामले की जाँच शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि एनएचआरसी की टीम ने महबूबनगर के उस सरकारी अस्पताल का भी दौरा किया, जहाँ चारों आरोपितों के शव पोस्टमॉर्टम के बाद रखे गए हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने राज्य शासन से भी हिरासत में मुठभेड़ का मामला देखते हुए विस्तृत रिपोर्ट की माँग की है।

गौरतलब है कि कल (6 दिसंबर, 2019 को) सुबह-सुबह साइबराबाद पुलिस ने दावा किया था कि डॉ. ‘रेड्डी के गैंगरेप और हत्या के चारों आरोपित पुलिस के साथ एनकाउंटर में मारे गए। अपनी ही हिरासत में पहले से मौजूद अभियुक्तों के एनकाउंटर के बारे में साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनर ने कहा कि मूल वारदात के घटनाक्रम को सूक्ष्मता से समझने के लिए पुलिस चारों आरोपितों को तड़के सुबह घटनास्थल पर लेकर गई थी। वहॉं उन्होंने पहले पुलिस पर लाठियों से हमला कर दिया और इसके बाद पुलिस के हथियार छीन उन पर फायरिंग की। पुलिस को आत्मरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई में उनको गोली मारनी पड़ी।

जहाँ देश की अधिकांश जनता ने इस घटना पर खुशी जाहिर की है, वहीं कॉन्ग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर समेत कुछ लोगों ने इस मुठभेड़ के तरीके पर सवाल खड़े किए थे। इसके बीच एनएचआरसी ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए एनकाउंटर की जाँच की घोषणा की थी।

इसके पहले इन चारों के ख़िलाफ़ त्वरित और सख्त कार्रवाई करने के लिए जनाक्रोश उबल पड़ा था। न केवल कई स्थानीय अदालतों की बार काउंसिलों और एसोसिएशनों ने इनकी पैरवी न करने की हिदायत और अपील अपने सदस्यों से की थी, बल्कि इस भयावह हत्याकाण्ड से बिफ़री जनता इन्हें खुद मौत के घाट उतारने के लिए पुलिस थाने के बाहर इकठ्ठा हो गई थी, जिसके बाद पुलिस ने आक्रोशित भीड़ को भगाने के लिए लाठीचार्ज भी किया था।

आज चेन्नाकेशवुलु की विधवा ने अपने पति के अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया है। कथित तौर पर पुलिस पर हमला करने और हिरासत से फ़रार होने की कोशिश में मारे गए अपने पति को दफ़नाने से मना करते हुए पत्नी ने माँग की है कि जैसे पहले उनके पति और अन्य आरोपितों को पुलिस ने गोली मारी, वैसे ही जेलों में बंद सभी आरोपितों को गोली मारी जाए। “जेलों में ऐसे कितने ही बंद हैं जिन्होंने गलतियाँ की हैं। उन्हें भी उसी तरह गोली मारी जानी चाहिए जैसे इन्हें (डॉ. ‘प्रीति’ रेड्डी के गैंगरेप और हत्या के आरोपितों) को मारी गई। हम तब तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। हम वह तभी करेंगे जब पहले ऐसा कर दिया जाए।” गर्भवती पत्नी कुछ अन्य के साथ नारायणपेट जिले स्थित अपने गाँव में इस माँग को लेकर धरने पर बैठी हुईं हैं। उनका आरोप है कि उनके पति के साथ अन्याय हुआ है।

नाबालिग से बलात्कार के मामले में दो महीने में पूरी हो जाँच: कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने नाबालिगों के साथ यौन अपराधों के मामलों में गति पकड़ाने के लिए निजी प्रयास भी शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि वे सभी राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों और राज्यों के उच्च न्यायालयों को पत्र लिखेंगे कि नाबालिगों के बलात्कार के मामले में जाँच दो महीने में पूरी कर दी जाए। उन्होंने इसके लिए अपने मंत्रालय में भी आवश्यक निर्देश जारी किए जाने की बात भी कही।

इसके पहले आज (शनिवार, 7 दिसंबर, 2019 को) खबर आई थी कि देश में बलात्कार के मामलों की बढ़ती संख्या और इनमें न्याय की धीमी प्रक्रिया को देखते हुए मोदी सरकार ने देश भर में 1023 फ़ास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का निर्णय लिया है। इनमें केवल पॉक्सो और बलात्कार के मामलों की सुनवाई होगी। बताया गया था कि इसके ज़रिए सरकार एक साल में लंबित 1,66,882 रेप और पॉक्सो मामलों का निपटारा कर देना चाहती है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने हर एक राज्य और हाई कोर्ट से इनके गठन और संचालन के लिए हाँ या न इसी साल 31 दिसंबर तक कर देने के लिए कहा है। इनके लिए सुझाव अगले वित्त आयोग (2020-25) की रिपोर्ट में भी होने की उम्मीद है।

इस बाबत रविशंकर प्रसाद ने राज्य सभा में बताया था कि 16 राज्यों ने केंद्र सरकार को इसके लिए हाँ कर दिया है। इसके अलावा 704 फ़ास्ट -ट्रैक अदालतों का गठन हो चुका है और उनमें न्यायिक काम चल रहा है।

हैदराबाद एनकाउंटर: आरोपित की पत्‍नी ने पति का शव दफनाने से किया इनकार, रख दी ये बड़ी माँग

हैदराबाद में पशु चिकित्सक डॉ. ‘प्रीति’ (बदला हुआ नाम) रेड्डी के गैंगरेप और हत्या के आरोपितों में चेन्नाकेशवुलु की विधवा ने अपने पति के अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया है। कथित तौर पर पुलिस पर हमला करने और हिरासत से फ़रार होने की कोशिश में मारे गए अपने पति को दफ़नाने से मना करते हुए पत्नी ने माँग की है कि जैसे पहले उनके पति, जोल्लू नवीन, जोल्लू शिवा, और मो. आरिफ़ को पुलिस ने गोली मारी, वैसे ही जेलों में बंद सभी आरोपितों को गोली मारी जाए। “जेलों में ऐसे कितने ही बंद हैं जिन्होंने गलतियाँ की हैं। उन्हें भी उसी तरह गोली मारी जानी चाहिए जैसे इन्हें (डॉ. ‘प्रीति’ रेड्डी के गैंगरेप और हत्या के आरोपितों) को मारी गई। हम तब तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। हम वह तभी करेंगे जब पहले ऐसा कर दिया जाए।”

गर्भवती पत्नी कुछ अन्य के साथ नारायणपेट जिले स्थित अपने गाँव में इस माँग को लेकर धरने पर बैठी हुईं हैं। उनका आरोप है कि उनके पति के साथ अन्याय हुआ है। इसके पहले कल (शुक्रवार, 6 दिसंबर, 2019 को) इस हत्याकाण्ड की खबर आने पर उन्होंने कहा था कि उन्हें भी पुलिस “वहीं ले जाए जहाँ (उनके पति को) ले गई, और (उन्हें) भी गोली मार” दे।

इस बीच न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में चारों आरोपितों के गाँव के लोगों से बातचीत का हवाला देते हुए दावा किया है कि यह चारों वैसे तो बहुत ही गरीब और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए थे, बहुत पढ़े-लिखे भी नहीं थे, और इनकी ज्ञात आमदनी भी कम थी, लेकिन इनकी जीवनशैली इस आमदनी से बहुत ज़्यादा खर्चीली थी। इससे इनका एनकाउंटर करने वाली पुलिस टीम के इस दावे को बल मिलता है कि चारों किसी संगठित आपराधिक गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं

गौरतलब है कि कल सुबह-सुबह साइबराबाद पुलिस ने दावा किया था कि हैदराबाद में पशु चिकित्सक डॉ. ‘प्रीति’ (बदला हुआ नाम) रेड्डी के गैंगरेप और हत्या के चारों आरोपित पुलिस के साथ एनकाउंटर में मारे गए। अपनी ही हिरासत में पहले से मौजूद अभियुक्तों के एनकाउंटर के बारे में साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनर ने कहा कि मूल वारदात के घटनाक्रम को सूक्ष्मता से समझने के लिए पुलिस चारों आरोपितों को तड़के सुबह घटनास्थल पर लेकर गई थी। वहॉं उन्होंने पहले पुलिस पर लाठियों से हमला कर दिया और इसके बाद पुलिस के हथियार छीन उन पर फायरिंग की। पुलिस को आत्मरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई में उनको गोली मारनी पड़ी।

इसके पहले इन चारों के ख़िलाफ़ त्वरित और सख्त कार्रवाई करने के लिए जनाक्रोश उबल पड़ा था। न केवल कई स्थानीय अदालतों की बार काउंसिलों और एसोसिएशनों ने इनकी पैरवी न करने की हिदायत और अपील अपने सदस्यों से की थी, बल्कि इस भयावह हत्याकाण्ड से बिफ़री जनता इन्हें खुद मौत के घाट उतारने के लिए पुलिस थाने के बाहर इकठ्ठा हो गई थी, जिसके बाद पुलिस ने आक्रोशित भीड़ को भगाने के लिए लाठीचार्ज भी किया था।

ये हमारे कार्यकर्ता नहीं, माओवादी हैं: केरल के CM पिनराई विजयन ने एलन सुहैब, थाहा फज़ल से पल्ला झाड़ा

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने माओवाद फ़ैलाने के आरोपित एलन सुहैब और थाहा फज़ल से पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने इन दोनों को अपनी पार्टी माकपा के कार्यकर्ता मानने से इंकार कर दिया है। मीडिया से तिरुवनंतपुरम में बात करते हुए आज (शनिवार, 7 दिसंबर, 2019 को) मुख्यमंत्री ने कहा, “कौन पार्टी कार्यकर्ता?… वे माकपा के कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि माओवादी हैं। इस बात की जाँच हुई है और यह बात (कि वे माकपा कार्यकर्ता नहीं हैं) सही साबित हुई है। सवालों का जवाब दे रहे थे जिनमें इन दोनों को उनकी पार्टी का कार्यकर्ता बताते हुए उन्हें अदालत से ज़मानत न मिलने के बारे में उनकी प्रतिक्रिया माँगी गई थी।

गौरतलब है कि माकपा के कार्यकर्ता बताए जा रहे एलन सुहैब और थाहा फज़ल को 1 नवंबर, 2019 को माओवाद का समर्थन करने वाले पर्चे रखने और बाँटने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था। इन दोनों की गिरफ़्तारी यूएपीए कानून के तहत हुई है, जिसमें हाल ही बदलाव कर मोदी सरकार ने संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित किए जाने के प्रावधान जोड़े हैं। केरल के विपक्षी दलों (कॉन्ग्रेस विधानसभा में प्रमुख विपक्षी दल है) ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया था

एलन सुहैब और थाहा फ़ज़ल को पंथीरनकवु से हिरासत में ले लिया गया था। उन पर सेक्शन-20 (एक आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होने की सज़ा), 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध) और 39 (ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों के लिए आतंकवादी संगठन को समर्थन देने से संबंधित अपराध) के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने ख़ुलासा किया था कि सुहैब और फ़ज़ल की तलाशी के दौरान उन्होंने माओवादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले पर्चे बरामद किए। साथ ही पुलिस ने उनके साथ मौजूद तीसरे ऐसे व्यक्ति की तलाश तेज़ करने की बात कही, जो पुलिस बल को देखकर मौके से भाग गया था।

एलन सुहैब और थाहा फ़ज़ल पर आरोप था कि वे अपनी गिरफ़्तारी के दो दिन पहले पलक्क्ड़ में अक्टूबर माह में मारे गए संदिग्ध माओवादियों के एनकाउंटर के विरोध के नाम पर माओवादी पर्चे बाँट रहे थे। इस एनकाउंटर के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल उच्च न्यायालय ने इसकी जाँच की अनुशंसा तो की, लेकिन इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जाँच की अनुशंसा भर को इस मुठभेड़ में कुछ संदेहास्पद या अवैध होने का सबूत न मान लिया जाए। अदालत अपना रुख मामले की जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही ज़ाहिर करेगी।

Sidhu के क़रीबी DSP ने मंत्री को कहा- ‘Dirty Dog’, पंजाब सरकार ने किया सस्पेंड

पंजाब सरकार ने शुक्रवार (6 दिसंबर) को लुधियाना के नगर निगम डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों को निलंबित कर दिया। बताया जा रहा है कि डीएसपी ने पंजाब के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री भारत भूषण आशु को अपमानजनक मैसेज भेजे थे और फेसबुक पेज पर उनके लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए भद्दी टिप्पणी की थी।

दरअसल, आशु उन तीन मंत्रियों में शामिल थे, जिन्होंने अपनी शिक़ायतों के संबंध में सरकार की सुनवाई नहीं होने की कैबिनेट की बैठक में शिक़ायत की थी। डीएसपी ने एक मैसेज में, आशु को एक “Dirty Dog” कहा और दूसरे में, उन्होंने मंत्री को स्पष्ट रूप से गाली दी। आशु ने पिछली बैठक में अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को वो मैसेज भी दिखाए। पंजाब के मंत्री आशु ने बुधवार (4 दिसंबर) को कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे को उठाया था।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद भी, सेखों ने अपने फेसबुक पेज पर कुछ भद्दी टिप्पणियाँ पोस्ट की थी। आशु का कहना है कि डीएसपी पिछले तीन महीने से उन्हें गालियाँ दे रहे हैं, वह इस इंतज़ार में थे कि डीएसपी उन्हें गालियाँ देना कब बंद करेंगे, उनका यह सिलसिला रुका ही नहीं।

जानकारी के अनुसार, मंत्री ने इस बात का भी ख़ुलासा किया डीएसपी सेखों पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के क़रीबी थे। उन्होंने कहा, “सिद्धू ने उनसे मेरे ख़िलाफ़ जाँच कराने को कहा था। सरकार द्वारा सेखों के ख़िलाफ़ भी जाँच का आदेश दिया गया था। मुझे जानकारी नहीं है।”

नवजोत सिंह सिद्धू ने आशु पर आरोप लगाते हुए फरवरी में लुधियाना में कई करोड़ के ग्रैंड मैनर होम्स को भूमि उपयोग (CLU) में नियमों के उल्लंघन और अनुदान के मुद्दे की जाँच का आदेश दिया था।

सिद्धू को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए, सेखों ने दावा किया था कि उन्हें आशु और कॉन्ग्रेस नेता कमलजीत सिंह करवाल द्वारा ‘धमकी’ दी गई थी और उन्होंने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पास एक शिक़ायत सौंपी थी।

वहीं, डीएसपी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “अगर कोई ऐसे लोगों द्वारा परेशान किया जाता है, जो ख़ुद सत्ता में हों, तो उनके पास प्रतिक्रिया देने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचता।” उन्होंने कहा, मुझे तत्कालीन स्थानीय सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के निर्देश पर मामले की जाँच करने का भुक्तभोगी होना पड़ा है।

वो तो हमने जब्र कर रखा था, वरना युद्ध हो गया होता: पाकिस्तानी विदेश मंत्री कुरैशी की डींगें

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने यूरोपीय राजदूतों के सामने डींगें हाँकने के चक्कर में बेहद हास्यास्पद बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि वह तो पाकिस्तान ने खुद पर नियंत्रण जैसे तैसे कर रखा है, वरना 5 अगस्त को कश्मीर के भारत के साथ पूर्ण विलय और उसका विशेष दर्जा ख़त्म करने की भारत की ‘हरकतों’ के बाद तो दोनों देशों में जंग हो ही जानी थी। साथ ही उन्होंने घाटी में भारत के ‘अत्याचारों’ का प्रोपेगंडा भी दोहराया, जबकि सच्चाई यह है कि 5 अगस्त के बाद से जहाँ जिहादियों ने वहाँ 88 आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया है और कई हत्याएँ की हैं, वहीं सुरक्षा बलों के हाथों इसी कालखंड में अब तक एक भी नागरिक की जान नहीं गई है।

कुरैशी ने इस बैठक में झूठों की झड़ी ही लगा दी। उन्होंने राजनयिकों को भरमाने की कोशिश में यह भी दावा किया कि कश्मीर में अब तक कर्फ़्यू लगा है, जबकि सच्चाई यह है कि वहाँ से कर्फ़्यू बहुत दिन पहले ही हटाया जा चुका है। यह तो स्थानीय और पाकिस्तान-समर्थित जिहादियों की साठ-गाँठ है जो जनजीवन सामान्य नहीं होने दे रही है। यहाँ तक कि लोग अपने बच्चों को जिहादियों के डर से स्कूल भी नहीं भेज पा रहे हैं, और स्कूल वाले अखबारों में इश्तिहार छाप कर बच्चों को पाठ्यपुस्तकों से पढ़ाई के निर्देश भेज रहे हैं ताकि उनकी शिक्षा कुछ-न-कुछ जारी रहे।

अपने यूरोपीय मेहमानों को बरगलाने के लिए कुरैशी ने यह भी कहा कि भारत खुद ही कोई कार्रवाई (फॉल्स फ़्लैग ऑपरेशन) कर उसका ठीकरा पाक के सिर फोड़ सकता है, जिसके बाद वह पाक की सीमा का अतिक्रमण कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि “भारत के उठाए हुए कदमों से” कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति दीर्घकालिक रूप से खराब हो सकती है। यह भी पूरी तरह झूठ है, क्योंकि अब कश्मीर में केवल वही नेता नज़रबंद या जेल में हैं, जो यह सामान्य सा आश्वासन देने के लिए तैयार नहीं हैं कि वे कश्मीर में हिंसा फैलाने वाली या भड़काऊ बातें नहीं करेंगे। यह बात खुद 370 हटने की बात भर से अलगाववाद-समर्थक के तौर पर सामने आ चुकीं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तज़ा ने कही है