छत्तीसगढ़ के कोरबा में छेड़खानी और अश्लील हरक़त करने के आरोपित ने जेल से बाहर आने के कुछ दिन बाद ही शुक्रवार (6 दिसंबर) को पीड़िता को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा और हंसिये से एक के बाद एक वार से उन्हें लहूलुहान कर दिया। यह मामला शहर के बुधवारी-खपराभट्टा मोहल्ला का है।
मौके पर वहाँ मौजूद लोगों ने आरोपित को पकड़कर उसे पुलिस के हवाले कर दिया। उधर पीड़िता की हालत बेहद गंभीर थी, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमलावर कुछ दिनों पहले ही जेल से ज़मानत पर बाहर आया था। उसके बारे में पता चला है कि उसने पीड़िता का आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसे वायरल भी किया था।
ख़बर के अनुसार, सीएसईबी चौकी क्षेत्र में बुधवारी के गाँधी चौक के पास कुछ महीने पहले मुंगेली के लोरमी क्षेत्र की एक महिला परिवार समेत किराए पर रहती थी। वहीं लोरमी का ही इंद्रपाल टोंडे (40) भी आकर किराए पर रहने लगा। महिला से एक तरफा प्यार के चक्कर में उसने नजदीकियाँ बढ़ानी शुरू कर दी।
महिला उसकी रोज़-रोज़ की हरक़तों से काफ़ी तंग आ चुकी थी। इसलिए परेशान वो अपने परिवार समेत बुधवारी के ही खपराभट्टा क्षेत्र में जाकर किराए पर रहने लगी। इसके बाद हुआ यह कि सितंबर के महीने में इंद्रपाल भी पास ही किराए का मकान लेकर रहने लगा और उसने फिर से अपनी पुरानी हरक़तों को दोहराना शुरू कर दिया। इससे वो महिला परेशान रहने लगी थी।
हद तो तब पार हो गई जब अक्टूबर में आरोपित इंद्रपाल ने अपने मोबाइल से महिला का उस समय वीडियो बना लिया जब वो अपने आंगन में नहा रही थी। वीडियो बनाने के बाद उसने बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए उसे सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया। इस बारे में जब महिला को पता चला तो उसने इंद्रपाल से उस वीडियो को हटाने के लिए कहा, लेकिन वो नहीं माना।
इसके बाद पीड़ित महिला ने इंद्रपाल के ख़िलाफ़ पुलिस में शिक़ायत दर्ज करा दी। पुलिस ने आरोपित को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया। कुछ दिनों पहले ही वो ज़मानत पर बाहर आया था। लेकिन, वो बदले की भावना से अंदर ही अंदर जल रहा था और उसके मन में महिला के लिए ज़हर भरा हुआ था। इसलिए उसने शुक्रवार की सुबह जब महिला घर में अकेली थी, हंसिए से उस पर हमला कर दिया। महिला बचने के लिए मोहल्ले में भागी लेकिन इंद्रपाल उसके पीछे हंसिया लेकर दौड़ता रहा और मौक़ा पाते ही महिला पर ताबड़तोड़ वार करता रहा।
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने आरोपित को गिरफ़्तार कर लिया था। उसे कोर्ट में पेश किया गया। यहाँ से मजिस्ट्रेट के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। घायल महिला का बयान अभी दर्ज नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि स्थिति में सुधार होते ही पीड़िता का बयान दर्ज किया जाएगा।
पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी शनिवार (दिसंबर 7, 2019) को अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड पहुँचे। यहाँ उन्होंने सुल्तान बाथरी में नए ‘मानसिक रोग व व्यसन-निरोधी केंद्र’ का उद्घाटन किया। इस अवसर को राहुल ने मोदी सरकार पर निशाना साधने के लिए भी इस्तेमाल किया। एजम्पशन हॉस्पिटल में ‘साइकेट्री एन्ड डी-एडिक्शन डिपार्टमेंट ब्लॉक’ का उद्घाटन करने पहुँचे राहुल गाँधी ने कहा कि वो मानसिक रोगियों के लिए इस फैसिलिटी का उद्घाटन करते हुए काफ़ी ख़ुश हैं। उन्होंने उक्त हॉस्पिटल के कार्यों की सराहना करते हुए उससे जुड़े लोगों को बधाई दी।
राहुल गाँधी ने बताया कि ये व्यसन-निरोधी सेंटर है और यहाँ मानसिक रोगों का इलाज किया जाता है। राहुल गाँधी ने इस दौरान व्यसन अथवा एडिक्शन से जुड़ी बीमारियों से निपटने के गुर भी बताए। उन्होंने कहा कि युवाओं को तरह-तरह के खेल खेलने चाहिए, ताकि एडिक्शन की बीमारी दूर हो। उन्होंने कहा कि तरह-तरह के खेलों में संलिप्त रहने वाले युवा शराब इत्यादि के व्यसन में नहीं पड़ते क्योंकि उनके पास इन सबके लिए समय ही नहीं होता। वहाँ उपस्थित लोगों ने राहुल गाँधी के इस सुझाव का तालियाँ पीट कर स्वागत किया।
राहुल गाँधी ने माना कि वायनाड में मेडिकल सुविधाओं की स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि यहाँ एक मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने की वर्षों से माँग चल रही है। वायनाड में साँप काटने के बाद एक छात्रा की मौत हो गई थी क्योंकि उसे समय पर मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं मिला। राहुल ने इस घटना पर दुःख जताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के मामलों में हमें आक्रामक रूप से आगे बढ़ने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के लिए ज़मीन की दिक्कत आ रही है, जिसे हल करने की वो कोशिश कर रहे हैं।
राहुल ने वायनाड में रेलवे के विस्तार को लेकर बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को संसद में उठाया है। उन्होंने भारत को सभी धर्मों का देश बताते हुए कहा कि कोई भी धर्म ऐसा नहीं है, जो घृणा, हिंसा और क्रोध को बढ़ावा देता हो। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में बैठे लोग इस देश को धर्म और संप्रदाय के आधार पर बाँटना चाह रहे हैं। अपने पिता राजीव गाँधी और दादी इंदिरा गाँधी की हत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वो पूरी ज़िंदगी हिंसा से पीड़ित रहे हैं, इसीलिए व्यक्तिगत तौर पर उनका मानना है कि हिंसा से समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता है।
Shri @RahulGandhi inaugurates a new department block of Psychiatry & De-Addiction at Assumption Hospital in Sultan Bathery, Wayanad. pic.twitter.com/d1teku5NeH
उन्होंने कहा कि हिंसा को आधार बना कर देश नहीं चलाया जा सकता। राहुल गाँधी ने कहा कि देश में ‘डर का माहौल’ है। पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं के ख़िलाफ़ अत्याचार हो रहा है और रोज़ अख़बारों में लोगों के पिटे जाने की ख़बरें आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी 9% की दर से विश्व की सबसे ज्यादा तेज़ी से बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर आज मात्र 4% रह गई है। उन्होंने दावा किया कि जीडीपी की ये विकास दर भी कैलकुलेशन के नए मेथड के अनुसार है जबकि पुरानी प्रक्रिया के अनुसार देखा जाए तो यह मात्र 2% ही रह जाता है।
राहुल गाँधी ने इसे त्रासदी करार दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को आज की परिस्थिति में नौकरियाँ नहीं मिल रही। बकौल राहुल, देश आज विभाजित हो गया है और इसीलिए पिछले 45 सालों में बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा हो गई है। उन्होंने कहा कि देश आज एक साथ काम नहीं कर रहा है। राहुल ने कहा कि केरल इस बात का उदाहरण है कि विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ ख़ुशी से रह सकते हैं।
कर्नाटक की पाठ्यपुस्तक सोसाइटी (कर्नाटक टेक्सटबुक्स सोसाइटी) स्कूल पाठ्यपुस्तकों के बारे में अपनी रिपोर्ट को दबा कर बैठी हुई है। कारण? वह येदियुरप्पा सरकार की उन मंशा से इत्तेफाक नहीं रखती कि 8000 मंदिरों को ढहाने और लाखों हिन्दुओं और ईसाईयों को तलवार की नोंक पर इस्लाम कबूल करवाने बनाने वाले टीपू सुल्तान को कन्नड़ इतिहास के नायकों में से हटाए जाने के खिलाफ है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वह अपने द्वारा तैयार मसौदे में टीपू को बनाए रखने के लिए अड़ी हुई है।
बंगलुरु मिरर के मुताबिक राजनीतिक टकराव के अलावा हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा उपचुनावों में व्यस्तता भी सोसाइटी की रिपोर्ट में देरी का एक कारण है। लेकिन द हिन्दू का दावा है कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि टीपू सुल्तान के बारे में “एक शब्द भी नहीं” हटाया जाना चाहिए, जबकि मुख्यमंत्री, मदिकेरी के भाजपा विधायक अपचू रंजन समेत कई नेता हिन्दू समाज की भावनाओं के अनुरूप टीपू से जुड़े अध्याय को हटाने की वकालत कर चुके हैं। इसके पहले येदियुरप्पा सरकार ने टीपू की जयंती भी इस साल मनाने से मना कर दिया था, और इस बारे में कोर्ट की ‘सलाह’ के बाद भी अपने रुख पर कायम रही।
जहाँ कमेटी टीपू को एक नायक के रूप में ज़िंदा रखने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार बैठी है, वहीं मुख्यमंत्री ने भी अक्टूबर में ही जनता से वादा कर लिया था कि किसी भी कीमत पर वे टीपू सुल्तान को हटवा कर रहेंगे। इस बारे में विधायक अपचू रंजन के पत्र लिखने पर प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री एस सुरेश कुमार ने उन्हें भी इस कमेटी का हिस्सा बनाने की बात कही थी।
यहाँ यह जान लेना ज़रूरी है कि हिन्दू समाज में टीपू को किताबों में बनाए रखने को लेकर दो तरह के विचार हैं। एक तरफ़ येदियुरप्पा समेत कुछ लोग पूरी तरह इस आततायी इस्लामी शासक के चिह्नों और स्मृतियों को मिटाए जाने के पक्ष में हैं, वहीं कुछ अन्य लोग इस मत के हैं कि पूरी तरह हटाए जाने की बजाय टीपू सुल्तान के शासन की असलियतें, जैसे कालीकट में बच्चों को अपनी माँओं के ही शव के गले में फंदे डालकर फाँसी पर लटकाना, नंगे ईसाईयों और हिन्दुओं को चलते-फिरते हाथियों के पैरों से बाँध कर दर्दनाक मौत मारना, इतिहास के पाठ्यक्रम में शामिल कर इस्लामी शासन की पोल खोली जाए। लेकिन कर्नाटक की वर्तमान इतिहास की किताबें, जिनमें यह कमेटी टीपू के बारे में “एक भी शब्द नहीं” बदलने की पैरवी कर रही है, इन पहलुओं को नज़रंदाज़ कर टीपू को किसी स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर पेश करतीं हैं।
हैदराबाद के बाहरी इलाके शादनगर में पशु चिकित्सक ‘प्रीति रेड्डी’ (बदला हुआ नाम) के साथ गैंगरेप कर निर्मम हत्या करने वाले चारों आरोपितों के ख़िलाफ़ ‘पुलिस पर हमला’ करने का मामला दर्ज कर लिया गया है। बता दें कि गुरुवार (दिसंबर 5, 2019) की देर रात इस मामले के चारो आरोपित पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मारे गए थे।
ख़बर के अनुसार, आरोपितो के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा-307 (हत्या का प्रयास), 176 (सूचना या इत्तिला देने के लिए क़ानूनी तौर पर आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप) और भारतीय शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस टीम के प्रभारी द्वारा चार आरोपितों के साथ दायर एक शिक़ायत के आधार पर, शुक्रवार (6 दिसंबर) को FIR दर्ज की गई थी। इसके अलावा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम शनिवार को उस जगह का दौरा करेगी जहाँ यह एनकाउंटर हुआ था।
26 वर्षीय महिला पशु चिकित्सक के बलात्कार और हत्या के सभी चारों आरोपी शुक्रवार तड़के यहाँ चट्टनपल्ली में उस समय पुलिस की ‘जवाबी’ गोलीबारी में मारे गए जब उन्हें पीड़िता का फोन और मामले से जुड़े अन्य सामान बरामद करने के लिए घटनास्थल पर ले जाया गया था। साइबराबाद पुलिस ने बताया था कि दो आरोपियों ने उनके हथियार छीनकर उन पर गोलियाँ चलाई और बाकी के आरोपितों ने पत्थर और डंडों से हमला किया जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।
साइबरबाद के आयुक्त वीसी सज्जनर ने कहा, “वे गोलीबारी करते रहे। हमारे द्वारा आत्मसमर्पण करने के लिए कहने के बावजूद उन्होंने गोलीबारी और हमला करना जारी रखा।” पुलिस के मुताबिक, इस घटना में अरविंद गौड़ और वेंकटेश्वरुलु नाम के दो पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए, इस बीच उनके सिर पर भी गंभीर चोटें लगी।
चार आरोपितों का पोस्टमार्टम महबूबनगर ज़िले के सरकारी ज़िला अस्पताल में किया गया और इसकी वीडियो ग्राफी भी की गई। 20 और 26 साल की आयु के बीच के चारों आरोपितों को महिला का बलात्कार करने, उनकी गला घोंटकर हत्या और बाद में उनके शव को जलाने के आरोप में 29 नवंबर को गिरफ़्तार किया गया।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में रेप पीड़िता को 5 आरोपितों ने उस पर पेट्रोल डालकर जला दिया। अब पाँचों आरोपितों के चेहरे सामने आए है। आरोपितों में से एक शिवम त्रिवेदी पीड़िता के साथ हुए गैंगरेप का मुख्य आरोपित हैं। उन्नाव पीड़िता की मृत्यु पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, बालिका की मौत अत्यंत दुखद है। उन्होंने पीड़िता के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सभी अपराधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी। हिन्दुस्तान ने अपनी रिपोर्ट में आरोपित शिवम त्रिवेदी, शुभम त्रिवेदी, उमेश बाजपेई, राजकिशोर और हरिशंकर की तस्वीर दी है।
बता दें कि गैंग रेप आरोपित शिवम त्रिवेदी ने पीड़िता के साथ जिंदगी भर साथ निभाने का वादा करके लगभग 2 साल तक शारीरिक शोषण करता रहा और फिर जब पीड़िता ने शादी की बात की तो आरोपित ने 3 लाख रुपए देकर उससे पीछा छुड़ाना चाहा। मगर जब पीड़ित परिवार इसके लिए नहीं माना तो आरोपित पक्ष ने बिहार थाने की पुलिस से भी दबाव बनवाया। इसके बाद भी पीड़िता नहीं डरी और आरोपितों को जेल भिजवा दिया। जेल से छूटने पर उसने पीड़िता के ऊपर केरोसिन तेल डालकर जलाकर जान से मारने की कोशिश की।
दरअसल 18 जनवरी 2018 को रायबरेली कोर्ट में पीड़िता और आरोपित शिवम त्रिवेदी ने शादी के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया था। जिसमें कहा गया था कि पीड़िता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी शिवम की है। मगर शिवम कुछ ही दिन बाद उसे छोड़कर भाग गया। जिसके बाद पीड़िता ने शिवम के घर की बहू होने का दर्जा माँगा। आरोपित के परिवार को यह मंजूर नहीं था। उन्होंने पैसे देकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की। लेकिन पीड़िता ने उसे जेल पहुँचा दिया। और जेल से निकलने के बाद आरोपितों ने उसे जान से मारने के लिए घिनौनी वारदात को जन्म दिया।
12 दिसंबर 2018 को आरोपी शिवम त्रिवेदी ने अपने चचेरे भाई शुभम त्रिवेदी के साथ मिलकर गैंगरेप किया। कोर्ट के आदेश के बाद मार्च 2019 में एफआईआर दर्ज हुई और पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। 30 नवम्बर को इन्हें बेल मिली थी। पीड़िता ने मरने से कुछ देर पहले अपने भाई से कहा था- “भैया, बचा लो! मैं मरणा नहीं चाहती। जिन्होंने मेरे साथ ग़लत किया है, उन्हें मैं मौत की सज़ा पाते देखना चाहती हूँ।”
23 वर्षीय पीड़िता के साथ ये घटना तब हुई, जब वह रायबरेली कोर्ट में सुनवाई के लिए जा रही थी। आरोपितों ने उसका पीछा कर के उस पर केरोसिन तेल डाला और आग लगा दी। आरोपितों से बचने के लिए पीड़िता 1 किलोमीटर तक बदहवास अवस्था में भागती रही। यहाँ तक कि उसने 112 नंबर पर पुलिस को भी कॉल किया था। जब पुलिस मौके पर पहुँची, तब तक वह 90 प्रतिशत जल चुकी थी। यूपी सरकार ने कहा था कि वो पीड़िता के इलाज का पूरा ख़र्च उठाएगी। परिजनों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए बल्कि वो आरोपितों को मौत की सज़ा मिलते देखना चाहते हैं।
“पिछले 1000 वर्षों में आखिर क्यों भारतीयों को इतने कष्टों का सामना करना पड़ा, जबकि भारतीय सामान्यतः सरल स्वभाव के होते हैं और न ही इन्होंने कभी किसी पर आक्रमण किया।” किसी ने यह प्रश्न सद्गुरु श्री जग्गी वासुदेव से किया। इस प्रश्न ने मुझे भी परेशान किया। सद्गुरु ने इस दिशा में जवाब दिया कि भारतियों ने कभी शत्रु को समझने का काम नहीं किया।
उदाहरण स्वरूप आखिर क्यों पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को जिन्दा छोड़ दिया यह जानने के बावजूद कि उसने कभी युद्ध के किसी नियम का पालन नहीं किया। युवा राजा ने निश्चित ही इस बात विश्लेषण नहीं किया कि, कैसे वह आक्रमण कारी इतना अनैतिक बना। राजा को शायद इस्लाम की कोई जानकारी ही नहीं थी जो कि उनके अपने हिन्दू धर्म से एकदम अलग था।
आज भी स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। आज भी शत्रु के बारे में स्पष्टता बहुत कम ही है जबकि स्वामी विवेकानंद और श्री अरोबिन्दो यह देख चुके थे की खतरा कहाँ से आता है। विवेकानंद ने तो कहा भी था कि किसी के हिन्दू धर्म छोड़ने का सिर्फ यह मतलब नहीं कि एक हिन्दू कम हुआ बल्कि यह है कि एक शत्रु बढ़ गया। कैसे? क्या यह संभव है कि धर्म इंसानों को शत्रु बना देता है? इस पर जरूर गहन विचार की आवश्यकता है।
बहुत बड़ा अंतर है एक ओर हिन्दू धर्म में और दूसरी ओर इस्लाम और ईसाई धर्म में, जिसका हमें सामान्यतः पता ही नहीं। हमें इनके बारे में पता होना चाहिये और इन पर उंगली उठाने का साहस होना चाहिए, ऐसा मानवता की भलाई के लिए आवश्यक है।
पहला बड़ा अंतर यह है: जहाँ सनातन धर्म और वेद सबसे प्राचीन हैं और भारत की महान और भद्र सभ्यता का आधार हैं, वहां ईसाई धर्म और इस्लाम नए नवेले हैं जिन्होंने प्रचलित संस्कृतियों को नष्ट कर उनके स्थान पर कट्टरआस्था पर आधारित व्यवस्था थोप दी।
बहुत सारी सभ्यताएँ जैसे इंका, माया, एज़टेक्, बेबीलोन, ग्रीस, पर्शिया, अफगानिस्तान समाप्त हो गयीं और इनके इतिहास को झुठला दिया गया। पाकिस्तान और बांग्लादेश में ही देखो, प्राचीन हिन्दू संस्कृति गायब हो चुकी है। भारत भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, लाखों लोग मारे गए और ज्ञान का खजाना आग की लपटों के भेंट चढ़ गया जब अनगिनत ग्रंथों से भरे पुस्तकालय जला दिए गए।
पर क्या धर्म का ध्येय लाभप्रद नहीं होना चाहिए? क्या धर्म भगवान के बारे में नहीं है, हमारे अस्तित्व के कारण के बारे में नहीं है, और मानव का उस महान शक्ति के साथ सम्बन्ध के बारे में नहीं है? और उस दैविक शक्ति की पूजा और उसके प्रति समर्पण के बारे में नहीं है? क्या दुनिया के संविधानों में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार नहीं है जिसे संयुक्त राष्ट्र का समर्थन प्राप्त है। फिर क्यों इतनी बर्बरता? आखिर कहाँ गलती हुई?
इसे आसानी से देखा जा सकता है परन्तु कोई इस तरह देखना नहीं चाहता। इसका कारण यह है कि ‘ईश्वर की आज्ञा’ जैसे असंभव दावे बलात लागू किये गए, पहले हिंसा के साथ और बाद में बच्चों को सिखा कर और धर्म छोड़ने वालों पर कठोर सजा लगा कर। इस तरह समय के साथ इनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गयी। क्या गलत था बहुत ही कम लोग कह पाए क्योंकि कोई अपने जीवन को खतरे में नहीं डालना चाहता। इन धर्मों ने असहमति को वस्तुतः ख़त्म कर दिया।
क्या गलत था इसे और ढंग से समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा
वेद जो कि हमारे ब्रम्हांड की उत्पत्ति और हमारे अस्तित्व का सबसे प्राचीन ज्ञान है एक महान हस्ती ( अक्सर जिसे ब्रह्म कहा जाता है ) की अवधारणा करते है, जिससे ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति हुई जो हर जगह व्याप्त है। इसका मतलब है कि ब्रह्म हमारे अंदर भी है और माया शक्ति के बल से हमारे विचारों और चित्त में समाया है। प्राचीन ऋषियों ने इसकी उत्पत्ति का विश्लेषण किया और हमारे अस्तित्व के लिए जिम्मेदार शक्तियों को खोजा जिन्हें हम देव कहते हैं। वो देख पाए कि सूक्ष्म अंतरिक्ष भी स्थूल अंतरिक्ष की तरह ही है और इस तरह अपने अंदर की गहराईयों में जाकर वो अंतरिक्ष में पहुँच पाए, आकाश का मानचित्र बनाया और भावी पीढ़ी के लिए मानव पहुँच के सभी क्षेत्रों में अथाह ज्ञान का सृजन किया। अथाह ज्ञान जो कि विराट चेतन में शुरू से मौजूद था ऋषियों ने पाया अपनी गहन तपस के श्रम से।
इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि प्राचीन समय में भारतीय सभ्यता ने विश्व के कई भागों पर अपना प्रभाव छोड़ा है। लाखों वर्षों के लम्बे इतिहास में (भारतीय ग्रंथों के अनुसार जिन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए), बहुत सारे देवी-देवताओं की अलग-अलग प्रकार की पूजा विकसित हुई, जो कि एक ही ब्रह्म का प्रतिरूप थे, परन्तु भिन्न-भिन्न वर्गों में कोई वैमनस्य नहीं था। उनका सह अस्तित्व था। किसी ने भी एक मार्ग को थोपने की वकालत नहीं की।
यह बदल गया जब सम्राट अशोक ने अपने राज्य के सभी लोगों को लिए एक ही ऋषि गौतम बुद्ध के मार्ग को अपनाने पर जोर दिया। बुद्ध तो अशोक के पैदा होने से पहले ही मर चुके थे परन्तु कई सभाओं में बुद्ध के प्रवचनों को संकलित करके नियम बनाये गए जो कि अशोक की प्रजा को मानने होते थे। उसने दूसरे देशों में धर्म प्रचारक भी भेजे।
इस तरह अशोक ने उस परंपरा को तोड़ दिया जिसमें हर कोई अपने अंदर मौजूद ब्रह्म को अपने मूल में जानने का मार्ग चुने और स्थापित किया जिसे ब्रिटिश लोगों ने बाद में सर्वोपरि भारतीय मार्ग कहा। हर वो जो अलग होकर अपने अनुयायी चाहता है स्वाभाविक रूप से इस बात पर जोर देगा की उसका पंथ सबसे अच्छा है। और अगर लोग इससे सहमत नहीं हुए तो इसे एक दबाव बना कर फैलाया जा सकता है अगर सत्ता हाथ में है तो। बाद में आदि शंकराचार्य ने बुद्धों को शास्त्रार्थ में चुनौती दी और अधिकतः भारतीय पुनः अपने कम सख्त धर्म में वापस आ गए।
उसी दौरान, भारत से बहुत दूर सिर्फ 1700 साल पहले रोमन सम्राट ने एक ईसाई धर्म के एक छोटे पंथ को राज्य का धर्म बना दिया। उसने सोचा होगा कि उसकी सारी प्रजा अगर एक ही धर्म को माने तो इसमें फायदा होगा। संक्षेप में वह मसीहा जिसका यहूदी इंतजार कर रहे थे जीसस क्राइस्ट के रूप में आ चुका था नहीं पहचाना जा सका और यहूदियों द्वारा ही मारा गया।
हालाँकि, राज्य का शह पाते ही इस पंथ ने एक सत्तावादी और हिंसक दौर दिखाया। इसने मौजूदा मंदिरों को ढहा दिया, ग्रंथों को जलाया और मिश्र की एक महिला दार्शनिक हिपटीया की भी हत्या कर दी। और जल्दी ही ईसाई मध्य-पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और यूरोप को कुचलने लगे और एक नए आस्थावादी पंथ को लोगों पर थोपने लगे।
वो इतने असहिष्णु कैसे बने? उसका कारण उनका वह दावा था जिसमें एक महान सच्चा ईश्वर, जो कि ब्रह्माण्ड का निर्माता था और पिता था जो स्वर्ग में रहता था ने अपने एकलौते पुत्र जीसस क्राइस्ट को पृथ्वी पर भेजा मानवों को अपने मूल पाप से बचाने के लिए, और कहा कि सभी को जीसस का कहा मानना चाहिए। और जीसस ने क्या कहा? ऐसा कहते हैं कि उन्होंने कहा कि बिना जीसस के कोई भी पिता (ईश्वर) तक नहीं पॅंहुच सकता। इस तरह चर्च यह दावा करता है कि जीसस में विश्वास सर्वथा जरूरी है नरक की अनंत आग से बचने के लिए।
कुछ शताब्दियों बाद वही कहानी दोहराई गयी: सातवीं शताब्दी के मोहम्मद ने ऐलान किया कि एक सच्चे अल्लाह ने उससे एक देवदूत गेब्रियल के जरिये बात की है और उसने जो कहा है वही सारी मानव जाति को मानना होगा। और अल्लाह मनुष्य से क्या चाहता है? वह चाहता है कि सब लोग मोहम्मद को अंतिम पैगम्बर के रूप में कबूल करें जिसे उसने (अल्लाह ने) अपना सारा ज्ञान दे दिया है। और उनकी सबसे बड़ी इच्छा यह है कि अल्लाह में और उस पैगम्बर में आँख बंद कर भरोसा करें: वह चाहता है कि उसके मानने वाले तब तक युद्ध (जिहाद) करें जब तक कि सारे लोग अल्लाह को न मानने लगें। जो विरोध करेंगे वो लोग हमेशा के लिए जहन्नुम (नरक) में अत्यधिक कष्ट भोगेंगे।
मोहम्मद ने खुद दिखाया कि जिहाद कैसे की जाती है। उदाहरण के लिए उसने यहूदी टोलियों पर हमला किया, आदमियों को समर्पण के बावजूद काट डाला, उनकी महिलाओं को रखैल बना लिया और उनकी संपत्ति को लूट लिया। उसकी मृत्यु के बाद उसके अनुयायिओं ने मध्य-पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और यूरोप के भागों को कुचलना शुरू कर दिया और जो लोग पहले बलात ईसाई बना दिए गए थे उनसे जबरन इस्लाम कबूल करवा दिया गया। यह एक ख़ूनी मुहिम थी और भयानक बर्बरता की वजह से अत्यधिक सफल थी।
इस्लामी आततायी भारत में भी घुसे और खून की नदियाँ बहा दीं। फिर भी प्राचीन भारतीय संस्कृति को पूरी तरह नहीं उखाड़ पाए क्योंकि नया धर्म इस सभ्यता के आगे बहुत गौण था। फिर भी भयानक बर्बरता के बूते इस्लामी आक्रांताओं ने भारतीय समाज में बड़ी घुसपैठ कर ली और बहुत सारे हिन्दुओं का धर्म बदल कर इस्लाम हो गया और बाद में पुर्तगाली और ब्रिटिश राज्य में ईसाई धर्म हो गया।
भारत के स्वतन्त्र होने के बाद भी ईसाई धर्म और इस्लाम ने हिन्दू संस्कृति को ख़त्म करने का प्रयास नहीं छोड़ा है। सभी प्रकार के चर्च इस काम को गर्मजोशी और बहुत सारे धन के साथ कर रहे हैं और दुर्भाग्यवश उन्हें इसमें विभिन्न ‘योजनाओं’ जैसे कि जोशुआ योजना, के माध्यम से सफलता भी मिल रही है। इस्लाम इस काम को बहुत सारे बच्चे पैदा करके और लव जिहाद के द्वारा कर रहा है और हिन्दुओं और ईसाइयों को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि इस्लाम बेहतर है उस धर्म से जो बंदरों और चूहों की पूजा करता है। जो कोई भी इस दबाव डाल कर धर्म परिवर्तन करने के तरीके पर एतराज करता है वह बेरहमी से मारे जाने का खतरा उठाता है।
इतनी शताब्दियों में एक बात तो साफ़ हो चुकी है कि ईसाई धर्म और इस्लाम दूसरों के लिए खतरनाक हैं और उन अपने ही धर्म वालों जो पूरी तरह से उनके मत में विश्वास नहीं रखते और ‘सिर्फ एक सत्य की अवधारणा’ पर संदेह प्रकट करते हैं के लिए भी खतरनाक है। इस्लाम और ईसाई धर्म ने करोड़ों समान्य लोगों को मार डाला, सिर्फ इसलिए कि उन्होंने इन धर्मों से निष्ठा नहीं रखी या दूसरे धर्म के साथ जुड़े रहे।
आज भारत में 20 करोड़ मजहब विशेष के लोग हैं और शायद 4 करोड़ से ज्यादा ईसाई है, क्योंकि बहुत से ईसाई जातिगत फायदे के लिए अपने हिन्दू नाम को बरक़रार रखते है। क्या वे भारत के शत्रु हैं, जैसा स्वामी विवेकानन्द ने बताया था?
दुश्मन एक कटु शब्द है। फिर भी जिन लोगों का धर्मपरिवर्तन हुआ है अगर वो उस पर भरोसा करने जो उन्हें सिखाया गया है तो वो निश्चय ही हिन्दुओं को हेय दृष्टि से देखेंगे। उनके मन में ये बात बैठ जाती है कि वे (हिन्दू) सच्चे ईश्वर को स्वीकार नहीं करते। जब मैं छोटी थी तब हम कैथोलिक लोग प्रोटेस्टेंट को तिरस्कृत दृष्टि से ही देखते थे। हम कैथोलिकों को लगता था की हम सही थे और दूसरे गलत और हेथन लोग तो बहुत ही गलत थे।
उन्नीस सौ अस्सी के दशक में, मैंने शांतिवन के एक ईसाई आश्रम में कुछ समय बिताया था, जो कि हम विदेशियों जो हिन्दुओं और बौद्धों के प्रति मित्रता पूर्ण व्यव्हार रखते थे, के प्रति उदार था। फिर एक बार मैंने एक बेनडिक्टिन मोंक, बेडे ग्रिफिथ्स को वहाँ की नौसिखिया भारतीय ननों से बात करते सुना। मैं स्तंभित थी यह देख कर कि कितना डट कर वह ननों को सिखा-पढ़ा रहा था कि सिर्फ उनकी आस्था सच्ची है और मैंने बाद में उससे प्रश्न किया। उसका जवाब था, “मुझे इनकी आस्था को मजबूत करना है ताकि वो जान सकें कि हिन्दू धर्म की सीमा कहाँ तक है।”
हिन्दू सीमाओं की चिंता नहीं करते। वे सभी आस्थाओं को स्वीकारते हैं। हर उस तरीके को स्वीकारते हैं जो अपने सत्व को पहचानने में मदद कर सकता है। परन्तु ऐसी सोच दूसरे धर्म के अनुयायिओं की नहीं है, जिन्हें गुजारे के लिए सीमाओं की जरुरत है। हिन्दू सामान्यतः इस सोच को नहीं समझते। वो अपनी सहज बुद्धि का उपयोग करते हैं और इस तरह की बातों को कि अगर उन्होंने धर्मांतरण नहीं किया तो वे नरक की आग में जलेंगे, अनदेखा कर देते हैं। वो कभी इस बात की कल्पना नहीं करते कि कोई इस तरह की बकवास को गंभीरता से लेता होगा।
पर वे गलत हैं। बहुत से लोग इन बातों (बकवास) पर भरोसा करते हैं। इस तरह की धारणा खतरनाक और विभाजनकारी है। इससे घृणा प्रेरित अपराधों का सृजन होता है। चूंकि इन बातों के कोइ प्रमाण नहीं हैं और कभी हो भी नहीं सकते, इसलिए इन खतरनाक धारणाओं की तरफ उंगली उठाने और आलोचना करने की जरुरत है। इस को बच्चों को नहीं सिखाया जाना चाहिए
हालाँकि ईसाईयों ने हाल के दशकों में हत्याएँ करना बंद कर दिया है, लेकिन ख़ास मजहब ने नहीं किया। और यह रोज होता है। और वो आतंकवादी असल में भरोसा करते हैं कि वो सही कर रहे हैं और उन्हें जन्नत (स्वर्ग) में ऊँचा स्थान मिलेगा (Q 4. 95)। कौन-सा युवा अपनी जान आत्मघाती हमले में गँवा देगा अगर उसे यह भरोसा न दिला दिया गया होता कि काफिरों को मारने के बाद उसके साथ अच्छा होगा।
यह स्थिति गंभीर है। यह बहुत बुरा है कि खुद को पवित्र समझने वाले ईसाई हिन्दुओं को नीची दृष्टि से देखते हैं। यह और भी बुरा है कि पवित्र ‘मजहबी’ दूसरों को हेय दृष्टि से देखें, हमसे सफेद झूठ (तक़ैय्या) बोलें और हमें नुकसान पहुँचाएँ और मार भी दें, और उनका जमीर भी इसको बुरा न माने। एक सामान्य तर्क कि कुरान 5.32 एक भी आदमी को मारने को वर्जित करता है एक धोखा है। पहली बात तो यह कि, अल्लाह इजराइल के पुत्रों को सम्बोधित कर रहा है और दूसरी, एक व्यक्ति अगर बुरा करे तो उसे मारा जा सकता है। और एक कट्टर आस्थावादी के नज़रों में इससे बड़ी बुराई क्या होगी कि कोई अल्लाह और उसके पैगम्बर में भरोसा नहीं करे?
भाग्यवश, बहुत से लोग हैं जिनकी आस्था खो चुकी है। खास तौर से ईसाईयों के बड़े समूह, जब से विरुद्ध मत के लिये सजा बंद हुई है, चर्च से मुक्त हो चुके हैं। बहुत सारे अल्पसंख्यकों के मन में भी संदेह है। एक परिचित के अनुमान के अनुसार सऊदी अरब में 10 प्रतिशत लोग नास्तिक हो चुके हैं। ऐसे बहुत से विडियो हैं जिनमें समुदाय विशेष वाले अपनी पूर्व-आस्था की खुलेआम आलोचना करते हैं। ये उनके लिए खतरनाक है। सामाजिक दबाव बहुत बड़ा होता है और उनका अपना परिवार उन्हें मार सकता है। ऊपर से कई देशों में धर्मत्याग के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है।
और यहाँ फिर हिन्दू अपना काम नहीं करते हैं। वे उन्हें सहारा नहीं देते जो अपने कट्टर धर्म को छोड़ देते हैं। उससे भी बुरा तो जब सरकार भी लोगों को अपने धर्म में ही रहने के लिए प्रोत्साहन देती है ‘अल्पसंख्यक लाभ’ देकर।
क्या किया जा सकता है? हम मिल कर इस बारे में सोंचे। पर एक बात की अवश्य जरुरत है: हमें ईमानदार होना पड़ेगा और निडर होना होगा इस्लाम और ईसाई धर्म के हानिकारक पक्ष को उघाड़ने में, दोनों को ही इस बात में कोई दुराव छिपाव नहीं है कि वे हिन्दू धर्म को ख़त्म करना चाहते हैं।
हर किसी को अधिकार है कि वो उस परम शक्ति कि उपासना करे। इसकी गारंटी धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि इस अविश्वसनीय ब्रह्माण्ड के मूल में एक महान बुद्धि और शक्ति है। परन्तु किसी को भी इस तरह के आधारहीन दावे करने का हक़ नहीं है कि वह परमशक्ति कुछ से प्रेम करता है और किन्हीं दूसरों से नहीं और यहाँ तक कि ऐसे अधिकांश मानवों को हमेशा के लिए नरक की आग में फ़ेंक देता है जो इस बात को नहीं स्वीकारते कि परम सत्य सिर्फ एक व्यक्ति (यहाँ दो है…) को दिया गया है। इस बात को कोई मतलब नहीं है। और इसने मानवता को इतना कष्ट पहुँचाया है।
स्पष्ट रूप से इस तरह का दावा (कि सिर्फ एक व्यक्ति का ही अनुसरण किया जाये ) सत्य नहीं है। फिर भी काफी लम्बे समय से हिन्दुओं ने अपनी जान के डर से इस का विरोध नहीं किया। पर अब धीरे धीरे हिन्दुओं को ताकत मिलने लगी है। कई लोगों को अपनी विरासत की बड़ी कीमत महसूस होने लगी है और पता लगने लगा है कि उन्हें धोखा दिया गया है इस बात का विश्वास दिला कर कि हिन्दू धर्म का कोई मोल नहीं।
क्या उनमें इतना साहस आ पाएगा जब वो आग्रह करें कि उनकी धरोहर का सम्मान किया जाये और भारत और विश्व भर में छात्रों को पढ़ाया जाये? ऋषियों की अंतर्दृष्टि कभी भी किसी भी परीक्षण में गलत साबित नहीं हुई और इसने विज्ञान, कला और तारतम्य को प्रेरित किया है।
सुप्रीम कोर्ट में सपा की राज्यसभा सांसद जया बच्चन और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई 2 याचिकाओं में हैदराबाद पुलिस द्वारा डॉक्टर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) गैंगरेप व हत्याकांड के आरोपितों के एनकाउंटर को न्यायेतर बताया गया है। एक याचिका अधिवक्ता जीएस मणि व प्रदीप कुमार यादव ने दायर की है। वहीं दूसरी याचिका वरिष्ठ वकील मनोहर लाल शर्मा ने दायर की है। मणि व यादव की याचिका में एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की माँग की गई है।
वहीं एमएल शर्मा ने अपनी याचिका में बच्चन और मालीवाल पर ‘अवैध हत्याओं को बढ़ावा देने’ का आरोप लगाया गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से दरख्वास्त की है कि जब तक इस मामले में चारों आरोपित दोषी साबित नहीं हो जाते, तब तक मीडिया को इस मामले पर डिबेट आयोजित करने से रोका जाए। मणि व यादव की याचिकाओं में कहा गया है कि इस एनकाउंटर में 2014 के सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया। बता दें कि डॉक्टर रेड्डी गैंगरेप व हत्याकांड के आरोपितों को पुलिस घटनास्थल पर क्राइम सीन रीक्रिएट करने ले गई थी लेकिन उन्होंने पुलिस पर पत्थरबाजी की और हथियार छीन लिए, जिसके बाद पुलिस की आत्मरक्षा की कार्रवाई में चारों ढेर हो गए।
एमएल शर्मा वही वकील हैं, जिन्होंने दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया गैंगरेप कांड में आरोपितों की पैरवी की थी। पहले तो उन्होंने 23 वर्षीय निर्भया गैंगरेप व हत्याकांड के सभी 5 आरोपितों की तरफ़ से पैरवी की लेकिन अंत में उन्होंने आरोपित मुकेश की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में जिरह की। उन्होंने उस वक़्त कहा था कि उन्होंने आज तक ऐसा कभी नहीं सुना कि किसी ‘सम्मानित महिला’ का कभी बलात्कार हुआ हो। उन्होंने उस वारदात के लिए निर्भया के पुरुष मित्र को जिम्मेदार ठहरा दिया था। शर्मा ने कहा था कि अविवाहित जोड़ों को रात के बाद बाहर निकलना ही नहीं चाहिए।
एमएल शर्मा ने राफेल मामले में भी केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी। 2016 में एक बयान देते हुए उन्होंने ख़ुद के ही बयान से दो क़दम आगे बढ़ाया था। शर्मा ने तब कहा था कि निर्भया के साथी ने ही उसके ख़िलाफ़ गैंगरेप की वारदात की साज़िश रची। निर्भया के शरीर में लोहे का रॉड घुसा कर आँत निकाले जाने के आरोप पर एमएल शर्मा ने कहा था कि ये संभव ही नहीं है। उनका आरोप था कि पुलिस ने पूरे मामले को सनसनीखेज बनाने के लिए लोहे की रॉड वाली कहानी गढ़ी। उन्होंने बीबीसी की विवादस्पद डॉक्यूमेंट्री ‘इंडियाज डॉटर’ में भी कई विवादित बयान दिए थे।
एमएल शर्मा ने इशरत जहाँ एनकाउंटर मामले में भी याचिका दायर की थी। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले जब सरकार ने अंतरिम बजट पेश किया, तब शर्मा इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। उन्होंने अजीबोगरीब दलील दी थी कि संविधान में कहीं भी अंतरिम बजट का जिक्र नहीं है, इसीलिए यह असंवैधानिक है। बजट पेश होने के कुछ ही घंटों बाद वकील शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से इसे रद्द करने की माँग की थी।
निर्भया गैंगरेप काण्ड को पुलिस ने सनसनीखेज बनाया: वकील एमएल शर्मा
बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में एमएल शर्मा ने कहा था कि बलात्कार के लिए पुरुष से ज्यादा महिलाएँ जिम्मेदार होती हैं। उन्होंने कहा था कि बलात्कार होते समय महिलाओं को संघर्ष नहीं करना चाहिए बल्कि जो हो रहा है, उसे होने देना चाहिए। साथ ही वो कहते हुए दिखे थे कि निर्भया मामले में अगर पीड़िता चुपचाप रेप होने देती तो आरोपित ‘सब कुछ कर के’ उसे घर तक छोड़ देते और केवल उसके साथी की पिटाई करते। बाद में इस बयान पर हंगामा होने पर शर्मा ने सफाई दी कि ये स्क्रिप्टेड शो था और उन्होंने डायरेक्टर के कहने अनुसार एक्टिंग की थी।
वहीं आम लोगों की बात करें तो अधिकतर लोग पुलिस की कार्रवाई से ख़ुश नज़र आ रहे हैं। हैदराबाद में पुलिस पर लोगों ने फूल बरसाए। पुलिसकर्मियों को कंधे पर उठा कर घुमाया गया। स्कूल छात्राओं ने पुलिस को देखते ही अपनी ख़ुशी का इजहार किया। सोशल मीडिया पर लोगों ने तारीफ़ की। वहीं कुछ मानवाधिकार संगठनों को बलात्कार के आरोपितों का एनकाउंटर में मारा जाना नागवार गुजरा और उन्होंने तेलंगाना हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाओं की लाइन लगा दी। तेलंगाना हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर तक चारों आरोपितों के शवों को दफ़नाने या जलाने पर रोक लगाई हुई है।
हैदराबाद में गैंगरेप और ब्रूटल मर्डर के आरोपितों का एनकाउंटर हो चुका है लेकिन अभी भी कुछ दरिंदे सबक लेने को तैयार नहीं हैं। ताजा मामला हरियाणा के पलवल शहर का है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पलवल जिले से 17 वर्षीय लड़की का अपहरण कर गैंगरेप करने का मामला सामने आया है।
पुलिस के मुताबिक पलवल में चार दरिंदों ने नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप की वारदात को उस समय अंजाम दिया जब रात के समय पीड़िता टॉयलेट के लिए घर से बाहर निकली थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला थाना प्रभारी हीरामणी ने बताया कि पीड़िता की माँ ने शिकायत दर्ज कराई है कि उसकी 17 वर्षीय बेटी चार दिसंबर की रात 11 बजे टॉयलेट करने के लिए घर से बाहर निकली थी। तभी चार युवकों ने उसका अपहरण कर लिया और खेत में ले जाकर बारी-बारी से उसका रेप किया।
पीड़िता की माँ ने पुलिस को बताया कि बेटी के शौच के लिए घर से बाहर जाने के दौरान आरोपित अल्ताफ, सरफराज उर्फ सफ्फू, इरशाद उर्फ मंगली व सौयब ने नाबालिग का अपहरण कर लिया और खेत में ले जाकर उसके साथ गैंगरेप जैसी दरिंदगी की। चारो आरोपितों ने लगभग दो घंटे बाद पीड़िता नाबालिग को खेत में ही छोड़ कर फरार हो गए। घटना के बाद पीड़िता ने घर आकर आपबीती अपनी माँ को बताई तो वह दंग रह गई। उसके बाद पीड़ित परिवार ने थाने पहुँचकर गैंगरेप की शिकायत दर्ज कराई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला थाना पुलिस ने पीड़िता नाबालिग की माँ की शिकायत पर चारों नामजदआरोपितों उसी दौरान गाँव रुपड़ा के रहने वाले अल्ताफ, सरफराज उर्फ सफ्फू, इरशाद उर्फ मंगली और सौयब के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। सभी आरोपित फरार बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह छापेमारी कर रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला थाना प्रभारी हीरामणी के अनुसार पीड़िता की माँ का यह भी आरोप है कि इन्ही चारों आरोपितों अल्ताफ, सरफराज उर्फ सफ्फू, इरशाद उर्फ मंगली और सौयब ने ही 13 अगस्त 2019 को भी उनकी बेटी से गैंगरेप किया था। तब इसकी शिकायत उन्होंने बहीन थाने में दर्ज कराई थी। जिसे बाद में पुलिस ने कैंसिल कर दिया था। महिला थाना पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर बीती रात नामजद इन चारों आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि आरोपितों की धड़पकड़ के लिए दबिश दी जा रही है।
कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी सशस्त्र सेना झंडा दिवस के मौके पर शनिवार (दिसंबर 7, 2019) केरल के कालपेट्टा में एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने देश में हो रहे रेप वारदातों को लेकर बयान दिया – अमूमन जैसा होता है, बयान विवादित ही दिया! उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की रेप कैपिटल के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इंटरनैशनल न्यूजपेपर में भारत को रेप कैपिटल कहा जाता है।
#WATCH Rahul Gandhi in Wayanad,Kerala: India is known as the rape capital of the world. Foreign nations are asking the question why India is unable to look after its daughters & sisters. A UP MLA of BJP is involved in rape of a woman & the Prime Minister doesn’t say a single word pic.twitter.com/FOE35sflGT
उनका कहना है कि विदेशी राष्ट्र सवाल पूछ रहे हैं कि भारत अपनी बेटियों और बहनों की देखभाल क्यों नहीं कर पा रहा है। विदेशी मीडिया हमारे देश के बारे में क्या कहता है, इस पर हमारा बस नहीं है लेकिन विपक्ष के बड़े नेता होने की गरिमा के तहत आप क्या कहते हैं, यह तो राहुल गाँधी को पता होना ही चाहिए। लेकिन नहीं! इन्हें तो सिर्फ राजनीति करनी है। मुद्दा फिर चाहे रेप जैसा गंभीर ही क्यों न हो, ये करेंगे राजनीति ही! शायद राहुल गाँधी को यह भी नहीं पता कि विदेशों में भी रेप होते हैं और बहुत ही विभत्स होते हैं।
चूँकि राहुल गाँधी आज विपक्ष में हैं इसलिए सत्ता पक्ष को टारगेट कर रहे हैं वो भी रेप के मुद्दे पर लेकिन शायद यह भूल रहे हैं कि 16 दिसंबर 2012 को जब देश को झकझोर देने वाला निर्भया रेप कांड हुआ था, तब इनकी ही सरकार थी। दरअसल सरकार के बाहर रहकर सरकार के ऊपर दोषारोपण करना बेहद आसान होता है। और यही काम राहुल गाँधी ने अब तक किया, कर रहे हैं।
राहुल गाँधी ने देश की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए। राहुल गाँधी ने कहा कि देश भर में महिलाओं के खिलाफ अपराध और हिंसा के मामले बढ़े हैं। महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बढ़ता जा रहा है। हर दिन देश में महिलाओं से रेप, छेड़छाड़ और उत्पीड़न की खबरें सामने आती हैं, यह कानून के नदारद होने की स्थिति है।
Rahul Gandhi, Congress: Violence against minority communities, hatred being spread against them. Violence against Dalits, thrashing them, cutting off their arms. Atrocities against Tribals, snatching their land. There is a reason for this dramatic increase in violence. https://t.co/fDZUwaIyknpic.twitter.com/CbP4gZsHbl
इसके अलावा उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है। उनके खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है। दलितों को पीटा जा रहा है, उनकी बाहों को काटा जा रहा है। आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे हैं, उनकी जमीनें छीनी जा रही है। हम रोज पढ़ते हैं कि यहाँ दुष्कर्म हुआ, छेड़छाड़ हुई। देश को चलाने वालों को लगता है कि सारी ताकतें उन्हीं के हाथ में हैं। हमारी संस्थागत ढांचा नाटकीय रूप से टूट रहे हैं। इसका बड़ा कारण है, लोग कानून अपने हाथ में ले रहे हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इस देश को चलाने वाला व्यक्ति हिंसा और आँखें बंदकर सत्ता में विश्वास करता है।
हमेशा अपनी घृणास्पद टिप्पणियों के लिए विवादों में रहने वाले चंद्रागुट्टा के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष आज सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन डाल रहा है, इसका मतबल यह है कि 70 बरस की नाइंसाफ़ी के बाद भी उन्हें इंसाफ़ पर यक़ीन है। लेकिन यह तो बहुत ही सभ्य वक्तव्य है… विवादित और जहरीला सुनने के लिए वीडियो को थोड़ी देर और सुनिए।
अपने तल्ख़ अंदाज़ में ओवैसी ने कहा कि मुस्लिमों के साथ कहाँ-कहाँ नाइंसाफ़ी नहीं हुई। पढ़ाई-लिखाई से लेकर नौकरियों और अधिकारों को लेकर भी नाइंसाफ़ी हुई है। अपने क्षेत्र का हलावा देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ भी आधारभूत आवश्यकताओं को लेकर नाइंसाफ़ी होती है। इसके आगे उन्होंने कहा कि मुस्लिमों की बस्तियों में स्कूल और बैंक होने की जगह वहाँ पुलिस स्टेशन बनाए जाते हैं। यह सब नाइंसाफ़ी है।
ओवैसी ने कहा कि मुस्लिमों के साथ इतनी नाइंसाफियाँ होती हैं, बावजूद इसके हमें इंसाफ़ पर यक़ीन है। इसी यक़ीन को आधार बनाते हुए मुस्लिम पक्ष अयोध्या मामले पर आए फ़ैसले के ख़िलाफ़ रिव्यू पिटिशन दाखिल करने के लिए प्रेरित कर रहा है। लोगों को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, “हमको इस मुल्क़ के दस्तूर पर भरोसा है, हमको इस मुल्क़ की अदालत पर भरोसा है। इसको ग़लत नज़र से न देखें। हमारे बुज़ुर्गों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फ़ैसला होगा उसे मानेंगे।”
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर बात करते-करते उन्होंने रिव्यू पिटिशन के बारे में कहा… और यहीं पर उन्होंने जहर भी उगला। एक तरह से सुप्रीम कोर्ट को चुनौती भी दे डाली।
“रिव्यू पिटिशन पर जो भी फ़ैसला होगा, वो चाहे हमारे हक़ में आए या न आए, हमको वो फ़ैसला भी क़बूल है। लेकिन, यह भी एक हक़ीक़त है कि क़यामत तक बाबरी मस्जिद जहाँ थी, वहीं रहेगी। चाहे वहाँ पर कुछ भी बन जाए। वो मस्जिद थी, मस्जिद है… मस्जिद ही रहेगी।”
बता दें कि नवंबर के महीने में हैदराबाद की 16वीं अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने सैदाबाद पुलिस को जुलाई 2019 के दौरान करीमनगर में एक सार्वजनिक बैठक के दौरान घृणास्पद भाषण के लिए विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।
शहर के एक वकील के करुणासागर ने 1 अगस्त को उक्त न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि चंद्रांगुट्टा के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने करीमनगर में एनएन गार्डन फंक्शन हॉल में 23 जुलाई को एक सार्वजनिक सभा ‘जलसा-ए-यादे फखर-ए-मिलात’ के दौरान जहरीले और नफरत फैलाने वाली भाषा का प्रयोग किया था।
एक जनसभा के दौरान विवादित बयान देते हुए उन्होंने कहा था, “हम 25 करोड़ हैं और तुम (हिन्दू) 100 करोड़ हो, 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो, देख लेंगे किसमें कितना दम है।” इसके आगे उन्होंने कहा था, ”लोग उन्हीं को डराते हैं जो आसानी से डरते हैं। वह (RSS) क्यों हम से घृणा करते हैं। क्योंकि वह हमारा सामना 15 मिनट भी नहीं कर सकते हैं।”