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विकास के लिए पैसे चाहिए तो कॉन्ग्रेस में शामिल होना होगा: कमलनाथ के मंत्री का वीडियो वायरल

मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में चल रही कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री एक बार फिर गलत वजहों से चर्चा में हैं। राज्य के गृह मंत्री बाला बच्चन का एक वीडियो सोशल मीडिया में पर घूम रहा है। इसमें वे लोगों को कॉन्ग्रेस में शामिल होने की शर्त बता रहे हैं।

वीडियो में वे यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि अगर लोगों को विकास के लिए पैसे चाहिए तो कॉन्ग्रेस का सदस्य बनना पड़ेगा। वे यह उदाहरण भी देते हैं कि जहाँ कहीं उनकी पार्टी को 600-700 वोटों की लीड मिली, वहाँ पार्टी ने 50-50 करोड़ सड़क बनवाने के लिए मुहैया कराए।

वीडियो सोमवार (2 दिसंबर, 2019) की रात का बताया जा रहा है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक राजपुर से 4 बार विधायक बन चुके बच्चन ने कहा कि अब और पैसे तब मिलेंगे जब उनकी पार्टी को ‘लीड’ (चुनावों में बढ़त) मिलेगी। बताया गया है कि बच्चन राजपुर क्षेत्र के ही जलगाँव जिले में थे, जब उन्होंने यह बात कही। वहाँ वे पाटिल समाज द्वारा आयोजित एक समारोह में शिरकत करने पहुँचे थे।

वहाँ इकठ्ठा कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “क्योंकि हमें इनको सबको भी जवाब देना है… हम मूर्ख नहीं बनने वाले।” मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने ग्रामीणों को “फूल-फूल” करने (भाजपा का समर्थन करने) के लिए भी फटकारा। साथ ही दावा किया कि कई गाँवों के लोग 50 प्रतिशत लोगों का कर्ज माफ़ होने और पैसे मिलने के बाद भी कॉन्ग्रेस के खिलाफ हो गए। बकौल बाला बच्चन, बहुत लोग तो उनके और कॉन्ग्रेस सरकार के पैसे से बने मंदिर में बैठकर वादा करने के बाद में भी उनके ख़िलाफ हो गए थे।

मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी बताए जाने वाले बच्चन राजपुर सीट से 2013 में 11,000 वोटों के अंतर से जीते थे। 2018 में प्रदेश में 15 साल से चल रही बीजेपी सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर के बावजूद वे महज 900 वोटों से जीत पाए थे।

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब बच्चन विवादों में आए हैं। उनकी बड़ी बहन ताराबाई पर शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। ताराबाई उस समय वसावी गाँव की ग्राम पंचायत में सरपंच थीं। जाँच में उनके खिलाफ आरोप सही पाए गए थे। ताजा विवाद पर बच्चन ने सफाई देते हुए कहा है कि उनकी पार्टी की बैठक चल रही थी। मैंने कुछ गलत नहीं कहा। वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है।

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लालू-मनमोहन का सपना पूरा करने चले थे मोदी, टाँग अड़ा रही है सोनिया गाँधी की कॉन्ग्रेस

जब से महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस गठबंधन की सरकार बनी है, सालों पुराने एक सपने के पूरा होने पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार ने अब तक जो संकेत दिए हैं उससे बुलेट ट्रेन परियोजना के अधर में लटकने की आशंका बढ़ गई है। भले ही मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन का परिचालन शुरू करने की परियोजना की नींव मोदी सरकार ने डाली हो, लेकिन इस सपने को पंख तब लगे थे जब मनमोहन सिंह की अगुवाई में यूपीए-1 सरकार चल रही थी। उस समय राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री हुआ करते थे।

वही लालू जो आजकल चारा घोटाले में जेल की सजा काट रहे हैं। रेल मंत्री रहते लालू जापान की यात्रा पर गए थे। बुलेट ट्रेन की सवारी की। इतने प्रभावित हुए कि जनवरी 2009 में ऐलान किया कि देश में हाई स्पीड ट्रेनों के परिचालन पर सरकार गंभीरता से पहल कर रही है। उन्होंने कहा था, “वह दिन दूर नहीं जब देश में बुलेट ट्रेन दौड़ेगी। कुछ मार्गों पर बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने के लिए वैश्विक स्तर पर निविदाएँ आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”

उस जमाने में भी लालू आज ही की तरह कॉन्ग्रेस के भरोसेमंद साथी हुआ करते थे। उस समय भी कॉन्ग्रेस की कमान उन्हीं सोनिया गॉंधी के हाथों में थी जिनके पास आज है। अंतर केवल इतना ही है कि उस समय सोनिया पर्दे के पीछे से सरकार चला रही थी और आज विपक्ष में बैठी हैं। लालू ने केवल बुलेट ट्रेन की ही बात नहीं की थी। इसके संभावित मार्गों में मुंबई-अहमदाबाद रूट का जिक्र भी किया था। उन्होंने कहा था, “हम मुंबई-अहमदाबाद, दिल्ली-चंडीगढ़ और दिल्ली-पटना जैसे कुछ रूटों पर इस ट्रेन के परिचालन की संभावनाओं की पड़ताल कर रहे हैं।” बुलेट ट्रेन में सफर के अपने अनुभवों को लेकर उन्होंने कहा था, “यह बहुत अच्छा था। जापान में बुलेट ट्रेन का परिचालन बेहतरीन तरीके से हो रहा है।”

फरवरी में 2009-10 का रेल बजट पेश करते हुए लालू ने फिर से बुलेट ट्रेन का जिक्र किया। उन्होंने सदन में कहा, “मैंने जापान, जर्मनी और फ्रांस में 300 से 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली ट्रेनों को देखा है। 2007-08 के बजट में मैंने घोषणा की थी कि आवश्यकता, व्यवहारिकता को ध्यान में रख कर देश के विभिन्न इलाकों में बुलेट ट्रेन का परिचालन शुरू करने के लिए अध्ययन किया जाएगा। दिल्ली-अमृतसर, अहमदाबाद-मुंबई-पुणे, हैदराबाद-विजयवाड़ा-चेन्न्ई, चेन्न्ई- बेंगलुरु-एर्नाकुलम और हावड़ा-हल्दिया के बीच बुलेट ट्रेन परिचालन की व्यवहारिकता का अध्ययन करने के लिए कदम उठाए गए हैं।” उन्होंने कहा, “सम्मानित सदस्यों को यह बताते हुए मुझे खुशी हो रही है कि जल्द ही दिल्ली-पटना रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने की संभावनाओं की पड़ताल के लिए अध्ययन शुरू किया जाएगा।”

न केवल रेल मंत्री लालू, बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह भी बुलेट की ट्रेन की संभावनाओं को लेकर उत्साहित थे। जून 2012 में तो उनकी सरकार द्वारा मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाने की बात भी सामने आई थी।

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से न्यूज एजेंसी पीटीआई ने बताया था कि मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हाई स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें मुंबई-अहमदाबाद रूट पर पहला बुलेट ट्रेन चलाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई गई। अधिकारी के मुताबिक इस कॉरिडोर का आगे जाकर पुणे तक विस्तार किया जाना था। अधिकारी ने यह भी बताया था कि इस परियोजना पर 60,000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। धन जुटाने के तमाम विकल्पों पर सरकार गौर कर रही है। अधिकारी के अनुसार दो विकल्प उभरकर सामने आए थे। पहला, पीपीपी मॉडल। दूसरा, किसी अन्य देश के साथ इस संबंध में समझौता।

यूपीए सरकार में वो तमाम दल शामिल थे, जिन्हें आज बुलेट ट्रेन से परेशानी है। ज्यादातर विपक्षी दल तो उसी दिन से इस परियोजना के पीछे पड़े हैं जब मोदी सरकार ने इसकी नींव डाली। लेकिन, तब इन दलों को इससे कोई समस्या नहीं थी जब मनमोहन सिंह पीएम और लालू रेल मंत्री थे। ऐसे में उनका विरोध राजनीतिक ओछेपन के अलावा कुछ नहीं है। उन्हें बुलेट ट्रेन से समस्या नहीं है। उनको दिक्कत इस बात से है कि यदि यह परियोजना समय पर पूरी हो जाएगी तो इसका श्रेय नरेंद्र मोदी को जाएगा।

2009 में रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने कहा था कि जल्द ही देश में बुलेट ट्रेन दौड़ेगी। एक दशक बाद जब हम इस रास्ते आगे बढ़ रहे हैं तो कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दल परियोजना में ब्रेक लगाने की ताक में हैं। मनमोहन सिंह की ‘मौन’ वफादारी और हर मौसम में साथ टिके रहने की लालू की प्रतिबद्धता के बावजूद सोनिया गॉंधी बुलेट ट्रेन दौड़ने के उनके सपने में ब्रेकर बनी खड़ी हैं!

69 लोग एक झटके में अनफॉलो: राहुल बाबा नाराज़ क्यों? पार्टी में भीतरघात से लेकर JNU कनेक्शन पर शक!

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से लोकसभा सांसद राहुल गाँधी ने एक ही दिन में ट्विटर पर 69 लोगों को फॉलो करना छोड़ दिया है। पहले जहाँ वे 315 लोगों को ट्विटर पर फॉलो कर रहे थे, वहीं यह संख्या अब गिर कर 246 हो गई है। पहले का आँकड़ा उनके ट्विटर अकाउंट के आर्काइव्ड संस्करण से लिया गया है।

11 नवंबर को कुछ ऐसी थी राहुल गाँधी के ट्विटर अकाउंट की स्थिति
आज की तारीख में (5 दिसंबर, 2019 को) राहुल गाँधी ने कम कर दिया है लोगों को फॉलो करना

वेबसाइट socialblade.com पर राहुल गाँधी के अकाउंट की जानकारी खंगालने पर हमें पता चला कि उन्होंने 21 नवंबर, 2019 को एक ही झटके में 69 लोगों को अनफॉलो कर दिया था।


इस आकस्मिक बदलाव का कारण क्या है, इसको लेकर कयास ही लगाए जा सकते हैं

कॉन्ग्रेस IT सेल के नेतृत्व में बदलाव

“भाजपा आईटी सेल” को अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ का ज़िम्मेदार ठहराने वाली कॉन्ग्रेस की भी खुद की आईटी सेल है, जिसकी अध्यक्षा कन्नड़ फिल्मों की अभिनेत्री राम्या उर्फ़ दिव्या स्पंदना को मई, 2017 में बनाया गया था। लेकिन अपने दाहिने हाथ कहे जाने वाले चिराग पटनायक के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले को दबाने और पीड़िता को परेशान करने के आरोपों के बाद राम्या ने यह पद छोड़ दिया। बाद में राहुल गाँधी ने यह ज़िम्मेदारी रोहन गुप्ता को सौंपी

ऐसे में यह सम्भव है कि इन 69 लोगों में से कई स्पंदना के नेटवर्क के लोग रहे होंगे, जिन्हें राहुल ने केवल शिष्टाचारवश या स्पंदना के कहने पर फॉलो कर दिया होगा। अब जबकि आईटी सेल में नए निजाम रोहन गुप्ता हैं, तो ज़ाहिर सी बात है कि राम्या के लोगों को मिल रही सुविधाएँ, जिनमें लग रहा है कि राहुल बाबा द्वारा फॉलो किया जाना भी शामिल है, बंद होंगी।

JNU का बवाल

एक एंगल यह भी हो सकता है कि राहुल गाँधी के राजनीतिक सलाहकारों में से एक प्रमुख नाम संदीप सिंह इस कदम के पीछे हों। एक समय कॉन्ग्रेस के विरोधी रहे और जेएनयू में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को काले झंडे दिखाने वाले संदीप अब राहुल के भाषण भी लिखते हैं

एक संभावना यह भी हो सकती है कि अगर राहुल गाँधी का अकाउंट संभालने की ज़िम्मेदारी उन्हें दे दी गई होगी तो उन्होंने कॉन्ग्रेस के वामपंथी इकोसिस्टम का हिस्सा रहते हुए भी जेनएयू में फीस और अन्य नियमों को लेकर हुए बवाल पर कम्युनिस्टों से अलग लाइन लेने वाले या मौन साध लेने वाले अकाउंट्स को अनफॉलो कर दिया होगा। इस हाइपोथिसिस को बल इस बात से भी मिलता है कि जेएनयू का बवाल भी चरम पर 21 नवंबर के ही आसपास पहुँचा था।

विशुद्ध राजनीति?

महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस कई तरह की उथल-पुथल से जूझ रही है। मध्य प्रदेश में जहाँ ज्योतिरादित्य सिंधिया न केवल मुख्यमंत्री कमलनाथ के समानांतर शक्ति का केंद्र बनकर उभर रहे हैं बल्कि आलाकमान को भी पार्टी छोड़ने की मौन धमकी अपने ट्विटर बायो में से कॉन्ग्रेस हटा कर दे चुके हैं, वहीं महाराष्ट्र में भी चीज़ें उनकी मर्ज़ी के हिसाब से नहीं जा रहीं हैं।

माना जा रहा है कि ‘हिंदुत्ववादी’ के बिल्ले को छोड़ने से शिव सेना के परहेज के चलते राहुल उसके साथ जाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन सोनिया गाँधी, जिन्हें कमलनाथ ने कथित तौर पर मनाया था, ने अपनी मुहर इस बेमेल गठबंधन पर लगा दी थी। ऐसे में हो सकता है कि कॉन्ग्रेस के भीतर ही अपनी मनमर्ज़ी के रास्ते में खड़े होने वालों को राहुल गाँधी ने अनफॉलो कर दिया हो।

बहरहाल, चाहे इतने सारे लोगों को एक ही झटके में अनफॉलो करने की राहुल गाँधी की जो भी वजहें रहीं हों, बेहतर यही होगा कि वे अपने संसदीय क्षेत्र, अपनी पार्टी और देश के प्रति ज़िम्मेदारी को समझते हुए विपक्षी नेता के तौर पर ज़मीन पर उतरें, न कि ट्विटर पर ही सारी वीरता दिखाएँ। वायनाड, कॉन्ग्रेस, लोकतंत्र और खुद राहुल गाँधी- चारों का हित इसी में है।

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संसद की कैंटीन में नहीं मिलेगा सस्ता खाना, MPs को मिलने वाली सब्सिडी ख़त्म: हर साल 17 करोड़ रुपए की बचत

संसद की कैंटीन में सासंदों को मिलने वाली सब्सिडी अब ख़त्म हो सकती है। इसका परिणाम यह होगा कि सासंदों को खाने पर जो सब्सिडी मिलती है, उसे अब जल्द ख़त्म कर दिया जाएगा। सीधे-सरल शब्दों में कहें तो अब संसद की कैंटीन में जो खाना उपलब्ध होगा, उसकी क़ीमत खाने की लागत के आधार पर तय होगी और सांसदों को उसका भुगतान करना होगा। हालाँकि, इस सन्दर्भ में सभी पार्टियाँ एकमत हो गई हैं, इसलिए यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि जल्द ही संसद की कैंटीन की नई रेट लिस्ट आएगी।

ख़बर के अनुसार, लोकसभा स्पीकर ओम बिडला के सुझाव के मद्देनज़र बिज़नेस एडवाइज़री कमिटी ने इस मामले पर चर्चा की थी। इस चर्चा के दौरान अधिकतर राजनीतिक पार्टियों ने अपनी सहमति जताई थी। अगर भविष्य में संसद की कैंटीन से सब्सिडी हटा दी गई तो इससे 17 करोड़ रुपए सालाना की बचत होगी। दरअसल, पिछली लोकसभा में कैंटीन में खाने का दाम बढ़ाया गया था और सब्सिडी का बिल कम कर दिया गया था। लेकिन, अब सब्सिडी को पूरी तरह से ख़त्म करने की तैयारी है।

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संसद की कैंटीन की रेट लिस्ट (सौजन्य: आजतक)

संसद की कैंटीन में मिलने वाली सब्सिडी कई बार विवादों का हिस्सा रही है। बीते दिनों संसद की कैंटीन की रेट लिस्ट भी वायरल हुई थी। सब्सिडी के तहत देश के सांसदों के संसद की कैंटीन में खाना काफ़ी कम दाम पर मिलता था।

दरअसल, मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में साल 2016 में कैंटीन में मिलने वाले भोजन के दाम बढ़ाए गए थे। इसके बाद अब सब्सिडी ख़त्म करने का फ़ैसला लिया गया है। साल 2016 से अब तक शाकाहारी थाली के दाम 30 रुपए है, जबकि 2016 से पहले 18 रुपए थे। वहीं, नॉन-वेज थाली अब 60 रुपए में उपलब्ध है, जबकि पहले यह 33 रुपए में उपलब्ध थी। थ्री कोर्स मील का रेट अब 90 रुपए है, जबकि पहले इसका रेट 61 रुपए था।

सूचना के अधिकार के तहत दिए गए ब्योरे के अनुसार, वर्ष 2012-13 से वर्ष 2016-17 तक संसद कैंटीनों को कुल 73,85,62,474 रुपए बतौर सब्सिडी दिए गए। वहीं, अगर पिछले पाँच वर्षों की बात करें तो पता चला है कि वर्ष 2012-13 मे सांसदों के सस्ते भोजन पर 12,52,01867 रुपए, वर्ष 2013-14 में 14,09,69082 रुपए सब्सिडी के तौर पर दिए गए। ठीक इसी तरह, 2014-15 में 15,85,46612 रुपए, वर्ष 2015-16 में 15,97,91259 रुपए और वर्ष 2016-17 में सांसदों को कम क़ीमत पर खाना उपलब्ध कराने पर 15,40,53365 रुपए की सब्सिडी दी गई।

शेहला को परेश रावल ने दिखाया आईना, कहा- तुम्हें इंटरनेट की पड़ी है, कश्मीरी पंडित सालों से बेघर हैं

पार्ट टाइम प्रदर्शनकारी, ऑड दिनों में मुस्लिम और ईवन दिनों में वामपंथन शेहला रशीद ने एक बार फिर कश्मीर पर खटराग छेड़ने की कोशिश की है। उन्हें ट्वीट कर दुनिया को याद दिलाया है कि ‘भारत’ ने कश्मीर में 4 महीनों से इंटरनेट बंद कर रखा है। उनके ट्वीट की भाषा ऐसी है जैसे ‘भारत’ उनका देश न हो, बावजूद इसके नागरिकों की सभी सुविधाएँ लेने में वे एक कदम आज तक पीछे नहीं रहीं। चाहे वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हो या जेएनयू में मुफ़्त की रोटी। साथ ही बताया है कि 4 महीना ‘साल का एक चौथाई’ हिस्सा होता है।

गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत मिला विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था। साथ ही, सुरक्षा कारणों से घाटी की इलेक्ट्रॉनिक संचार व्यवस्था को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था।

शायद, शेहला रशीद की गणित भी उनकी राजनीतिक सोच की तरह ही ओछी है। इसलिए उन्हें ध्यान नहीं रहा कि 4 महीने साल का चौथाई नहीं, बल्कि एक-तिहाई हिस्सा होते हैं। इसके अलावा शेहला रशीद ने यह नहीं बताया कि बीच में सरकार ने लैंडलाइन टेलीफोन सेवाएँ, लैंडलाइन के ज़रिए आने वाला ब्रॉडबैंड इंटरनेट, पोस्टपेड मोबाइल आदि बहाल किए थे। लेकिन उसके बदले में उसी इंटरनेट के इस्तेमाल से कश्मीरियों ने घाटी में ऐसा आतंक मचाया, ऐसी हिंसा की कि सरकार को मजबूरन इंटरनेट सेवाएँ फिर से बंद कर देनी पड़ीं।

इस ट्वीट पर शेहला को आईना दिखाने वालों में अभिनेता और पूर्व भाजपा सांसद परेश रावल भी हैं। उन्होंने लिखा, “4 महीने के इंटरनेट की आपको पड़ी है? पंडितों के पास सालों से रहने के लिए घर नहीं है।”

रावल का इशारा उन कश्मीरी पंडितों की ओर था, जो कश्मीर में हिन्दुओं का आखिरी समुदाय थे। 1989-90 के बीच 5 से 7 लाख कश्मीरी पंडितों को मुस्लिमों ने हत्या, अपहरण, बलात्कार, मतांतरण की धमकी के इस्तेमाल से घाटी रातों रात छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। उस दिन से आज तक अधिसंख्य कश्मीरी पंडित दिल्ली, जम्मू, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, यूपी, उत्तराखण्ड समेत देश के अलग-अलग इलाकों में बेघर होकर रिफ्यूजी कैम्पों और कॉलोनियों में रह रहे हैं। इनमें से अधिकांश के हालात का औसत देश के सबसे आर्थिक और सामजिक रूप से विपन्न और पिछड़े हुए समाजों से भी गया-गुजरा है।

उल्लेखनीय है कि कश्मीर पर अफवाह फैलाने में शेहला रशीद पुरानी उस्ताद रही हैं। अगस्त में ट्वीट कर उन्होंने जम्मू-कश्मीर की हालत बेहद खराब होने का दावा करते हुए सशस्त्र बलों पर कश्मीरियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। सेना ने इसे खारिज करते हुए आरोपों को बेबुनियाद बताया था। साथ ही कहा था कि असामाजिक तत्व और संगठन लोगों को भड़काने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे हैं।

शेहला रशीद के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज, सेना पर लगाए थे झूठे आरोप

सुश्री शेहला जी, राजनीति तो आपने घंटा नहीं छोड़ी है और किसी को फर्क भी घंटा नहीं पड़ता

डियर शेहला डोंट वरी! कहना, कंडोम वाले लौंडों को चिढ़ा रही थी

भारतस्य महाख्यानम् – अनन्तत्वस्य परमसंरक्षणम्

कस्यापि देशस्य समृद्धये तद्देशीयानाम् एकच्छत्रम् ऐक्यम् आवश्यकम्। ध्वज-गीत-मुद्रादीनि चिह्नानि सन्ति एव। किन्तु आवश्यकता अस्ति कस्यचित् अमूर्तध्येयस्य, भविष्यतः चित्रस्य, यस्य प्राप्तये देशबान्धवाः यतेयुः।
अमेरिकीयसङ्घराज्यस्य राष्ट्रियस्वभावे एव ‘अमेरिकीय-लोकोत्तरता’ दृढतया निहिता। चीनानाम् अस्तित्वविषयः ‘त्यांक्स्या’ अथवा स्वर्गशासनम् इत्यनेन सिद्धान्तेन वर्ण्यते। आमातेरासोः राजवंशः जापानीयानां एकसूत्रीकरणाय अलम्। आङ्ग्लाः तेषां राजतन्त्रात् ऊर्जां प्राप्नुवन्ति।

आस्वातन्त्र्यात् भारतीयाः स्वस्य महाख्यानात् वञ्चिताः। सप्ततिवर्षेभ्यः लब्धस्वातन्त्र्यैः अस्माभिः, स्वस्य अस्तित्वहेतुः न व्याख्यातः। किमर्थं भारतस्य अस्तित्वम्? विश्वेऽस्मिन् भारतस्य किं स्थानम्? किंप्रयोजनाः भारतीयाः? एतेषां प्रश्नानाम् उत्तराणि अस्माभिः अन्वेष्टव्यानि, यदि जगति राजकीयं प्रभुत्वम् इच्छामः।

अस्तित्वविषयकान् एतान् प्रश्नान् अस्मिन् लेखे उत्तरितुं प्रयतिष्ये। अन्येऽपि बहवः बुद्धिधुरन्धराः सन्ति एव, ये एतेषां प्रश्नानां मदपेक्षया साधुतराणि उत्तराणि दद्युः। तथापि यथाबुद्धि, अतीव विनयेन एतं प्रयासम् आचष्टे, यत् सुदैवात् अनया प्रेरणया अन्येऽपि प्राज्ञाः एतेषु विषयेषु मतिं कुर्युः।

महाख्यानम्, स्वाभाविकतया, राष्ट्रस्य अस्तित्वस्य हेतुं स्पष्टतया विशदं कुर्यात्। राष्ट्रस्य प्राचीनतमः,न्यूनपक्षे आधुनिकपुनर्रचनायाः परं घटितः वा इतिहासः, सुदूरभविष्यचित्रैः सह, महाख्याने समाविशेत्।

भारतस्य सन्दर्भे अत्र किञ्चित् कष्टं यतो हि उदारमतीयानां भारतीयसङ्घराज्यस्य कल्पना यदि अनुमन्यते, तर्हि वयं मात्र सप्ततिवर्षीयाः स्मः। नैव च सप्ततिवर्षीयस्य राष्ट्रस्य इतिहासः सम्भवति। नात्र तर्हि आश्चर्यं यत् उदारमतीयैः मार्क्सवादिभिश्च कुण्ठितेषु देशस्य बुद्धिमार्गेषु न कीदृशमपि आख्यानरचनं समभवत्। अतः, भारतस्य महाख्यानं निर्मातुकामैः अस्माभिः उदारमतीयानां दृष्टिकोणः सर्वथा त्याज्यः।

अस्माकं सुदैवात्, अन्योऽपि पर्यायः अस्माकं समीपे सरलतया वर्तते। तन्नाम भारतस्य हिन्दुत्व-प्रतिबोधः। हिन्दुत्ववादिनां मतानुसारं भारतं नाम समस्तहिन्दूनां राजकीयदृष्ट्या एकच्छत्रीकरणम्। अतः भारतराज्यं तेषां मतेन भारतीयसभ्यतायाः संरक्षकं, तस्य आद्यकर्त्तव्यं नाम हिन्दूनां नैरन्तर्यस्य सुनिश्चितिः। इदं दर्शनं निश्चयेन भारतस्य महाख्यानस्य आधारभूतं भवितुम् अर्हति।

आदौ सद्यःकालीनां स्थितिं पश्यामः। जगति द्वाभ्याम् अब्राह्ममतानां वर्चस्वं विद्यते – ख्रैस्तमतं महामदीयं च। अन्यदपि एकम् अब्राह्ममतं वर्तते यत् स्वस्थाने महत् शक्तिमत् अस्ति – यहूदाः। एते सर्वेऽपि एकस्यैव मूलसूत्रस्य भिन्नाः आवृत्तयः – मृषेश्वरवादः। सद्यः अस्माकं विश्वं मृषेश्वरवादेन व्यापृतम्। भारत-चीन-जापानान् अन्यानि च कानिचन लघुराष्ट्रानि विहाय न कुत्रापि ईश्वरस्य अनन्तत्वं अङ्गीक्रियते। तत्रापि चीनाः आधिकारिकरूपेण साम्यवादिनः, किन्तु तैः अपि तेषां पारम्परिक-पैतृकसम्पत्ति-रक्षणे काले काले प्रवृत्तिः कृता। जापानीयाः अपि तेषां वंशसमानतया बद्धाः।

अतः, निष्कर्षः एवम्। भारतं जगतः एकमात्रं मतमतान्तरसमूहयुतं राष्ट्रं यत्र परब्रह्मणः अनन्तत्वं न केवलं प्रतिपादितम् अपितु दैनन्दिनजीवने कोटिशः जनैः जीव्यमानं सत्यम् अपि। कुत्र अन्यत्र ईदृशम् उल्लासपूर्णं समाजं द्रष्टुं शक्नुमः येभ्यः परमेश्वरस्य अनन्तरूपाणि सुसामान्यानि? दुर्दैववशात्, दुःखेन वदामि, तादृशः कोऽपि देशः अद्य जगति न विद्यते। भारतम् एकमेव। इदं तथ्यं महत्त्वपूर्णं, मन्ये भारतस्य महाख्यानस्य भागभूतं च।

अन्याप्येका सङ्कल्पना भारतीय-चिन्तने आ बहोः कालात् दृढा अस्ति। मन्यते यत्, आसीत् सः कालः, अद्यतनस्य कालस्य विपरीतः, यदा भारतं सम्पूर्णस्य जगतः विवेक-दीपः एव आसीत्। अस्माकं पूर्वजैः अपार-समृद्धेः कथाः कथिताः। अत्युकृष्टैः कला-शिल्पैः अस्माकं भूमिः सुसम्पन्ना। अनुपमवैभवशालिनः साहित्यकृतयः अस्माकं कविभिः रचिताः। एषा भूमिः नैकानां प्राज्ञानां जन्मभूः आसीत्, ये अन्यदेशेषु प्रव्रज्य आविश्वम् अत्रत्यं ज्ञानं प्रतिपादितवन्तः।

काः विदेशीयाः प्राज्ञाः विस्तीर्णान् भूभागान् लङ्घितवन्तः, भारतस्य पुण्यभूमौ पदं स्थापयितुम्, अत्रत्य-पुण्यसरितासु पाण्डित्यस्य उत्सम् आस्वादयितुम्। ‘विश्वगुरुः’ इति ख्याताः आस्म। अस्मिन् शब्दे अस्माकं हृद्याः भावनाः निहिताः, याः अस्माकं चेतनासु नैव अपसृताः।

एकः प्रश्नः स्थानेऽस्मिन् उत्तरणीयः। यदि भविष्यति कदापि पुनरपि ‘विश्वगुरुः’ भविष्यामः, किं वा वयं लोकं पाठयामः? कानि तानि प्रकरणानि यानि लोकेषु अज्ञातानि? इतिहासः वदति यत् अस्माकं ज्ञानपरम्परया वयं विश्वं प्रेरयन्तः स्मः। अतः विश्वगुरु इति किं तत् दर्शनं यत् वयं लोकं पाठयामः? यथा पूर्वोक्तम्, अस्ति किञ्चित् अत्यन्तं विशिष्टं यत् सर्वथा पाठ्यम्। यत् भारतीयाः प्रतिदिनम् अनुभवन्ति दैनन्दिनम् आचरन्ति च। ईश्वरस्य अनन्तत्वम्। सामान्यभाषया – अनेकेश्वरत्वम्।

एताः अमूर्तकल्पनाः अस्माभिः चर्चिताः। अत्र एकस्य महत्त्वपूर्णस्य प्रश्नस्य सपदि उत्तरम् आवश्यकम्। वयं के? राष्ट्ररूपेण वयं कदा उद्भूताः? ईदृशाः प्रश्नाः क्लिष्टाः किन्तु मम सुकृतात् एते ज्ञानिभिः पूर्वमेव उत्तरिताः, मम जन्मनः अपि पूर्वम्। तेषामेव निर्मिते मार्गे विनीतोऽहं चलामि, यः देवैः तेषु निहितया ज्ञानप्रभया उज्ज्वलः।

विषयभङ्गम् अकृत्वा, मम पूर्वजानाम् अतुलनीये ज्ञाने विश्वासं कृत्वा, साभिमानं उद्घोषामि ‘अहं हिन्दुः’ इति। यत् वयं हिन्दवः, हिन्दुः इत्येव अस्माकं परिचयः। किन्तु, हिन्दुः इति महद्दीपः इव। अस्माभिः तु लक्ष्यदीपः अभिलक्ष्यते। एतत् अपि कष्टं सौभाग्येन पूर्वमेव निराकृतम्। वयं हिन्दवः। वयं सम्राज्ञः भरतस्य वंशजाः यस्य नाम्ना अयं भारतदेशः अलङ्कृतः। वयं भरतस्य वंशजाः प्रजाः च। अयं, प्रियवाचकाः, अस्ति लक्ष्यदीपः।

अतः मम मतानुसारम् अस्माकं भारतीयानां महाख्यानस्य त्रयः भागाः। प्रथमं नाम भारतमेव ईश्वरस्य अनन्तत्वदर्शनस्य परमसंरक्षकम्। द्वितीयं नाम विश्वगुरुत्वेन अस्माभिः ईश्वरस्य अनन्तत्वं लोके पाठनीयम्। तृतीयं नाम वयं सम्राज्ञः भरतस्य वंशजाः प्रजाः च।

अतः त्रयाणां साररूपेण अस्मद्देशस्य महाख्यानम् एवं निर्दिश्यते – वयं भरतस्य वंशजाः प्रजाः येषां हस्ते ईश्वरस्य अनन्तत्वदर्शनस्य अस्तित्वं निहितम्। अपि च अनन्तस्य ज्ञानं नाम अस्माभिः विश्वाय दीयमानं किञ्चन अद्भुतम् उपायनम् एव।

प्राचीनरोमकाः गताः तेषां तेजस्विनः देवताः शतकेषु न पूजिताः। प्राचीनग्रीकाः गताः तेषां देवताभ्यः बलिं दातुं नाममात्राः अवशिष्टाः। प्राचीनमिस्रस्य अपि सैव स्थितिः। किन्तु वयं हिन्दवः अद्यापि अत्रैव स्मः। अस्माकं देवाः अस्मान् नात्यजन् न वा अस्माभिः अस्माकं देवाः त्यक्ताः।

एवं प्रकारेण मया भारतस्य महाख्यानकविषये मम मतं विशदीकृतम्। किन्तु इदम् आख्यानं विवरितुं कश्चन सरलः शब्दः अपेक्ष्यते। प्रतिवारं महाख्यानं जिज्ञासवे विवरितुं वाक्यद्वयस्य प्रयोगः न शोभते। एकः एव शब्दः, अहं मन्ये, यः अस्माकं महाख्यानं सम्यक्तया विवृणोति। सः शब्दः अस्माकं संस्कृतेः निदर्शकः। अतः पूर्णतया सयुक्तिकम् एव यदि एषः शब्दः अस्माकं महाख्यानं प्रतिपादयेत्।

वयं सर्वे तं शब्दं जानीमः। सः निसर्गनियमानां बोधकः। सः ब्रह्माण्डस्य ब्रह्माण्डात् परस्य च द्योतकः। सः अस्माकं संस्कृतिम् अवबोधयति। सः अस्माकं देवतानां प्रति प्रीतिं, भक्तिम् अनुरागं च व्याख्याति। सः पितृभिः अपत्य-कल्याणार्थं कृतं त्यागं प्रदर्शयति। सः महत्सु अपि विपत्सु अस्माकं पूर्वजैः प्रदर्शितं शौर्यम् अवगमयति। सः एकः शब्दः अस्माकं युगानुयुगं संवर्धितं सम्पूर्णं दर्शनं सम्पुटीकरोति। सः शब्दः अस्ति ‘धर्मः’।

भारतस्य धर्मः एव ईश्वरस्य अनन्तत्वदर्शनस्य मृषेश्वरवादान्धःकारात् रक्षणम्। एतदस्माकं दैवदत्तं कर्त्तव्यम्। एतदेव कर्त्तव्यम् अस्माकम् अस्तित्वस्य हेतुः।

अनुवादिका – याजुषी
पाठयेम संस्कृतं जगति सर्वमानवान्।

मूल लेखः – A Grand Narrative for India: The Last Bastion of Polytheism

टिप्पणी – मूल लेख में प्रयुक्त दो शब्दों का सामान्यतः किया जाने वाला अनुवाद मुझे अर्थावबोध की दृष्टि से असमर्थ लगा। वे शब्द हैं Monotheism और Polytheism. इन्हें प्रायः एकेश्वरवाद/एकान्तवाद और अनेकेश्वरवाद/अनेकान्तवाद/बहुदेववाद कहते हैं। किन्तु ईश्वर को अनन्त रूपों में देखने और पूजने के परिप्रेक्ष्य में इन दोनों दर्शनों के अन्य गुणावगुण अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।

‘एक ही ईश्वर है’, इससे उतनी आपत्ति नहीं, जितनी ‘तुम जो पूजते हो वो झूठ है, मृषा है’ इससे है। अतः मैंने एकेश्वरवाद न कहते हुए मृषेश्वरवाद कहा है। ऐसा दर्शन जो औरों के देवताओं को मृषा बताने पर टिका है।

इसी प्रकार अनेकेश्वरवाद की सामयिकता यहां परमेश्वर को अनन्त रूपों में देख पाने से है। अतः उसके लिए ‘ईश्वरस्य अनन्तत्वम्’ ऐसा शब्दप्रयोग किया है। अनन्त शब्द से न केवल ईश्वर के अनेक रूपों का अर्थबोध होता है, अपितु उन अनन्त रूपों में भी एक ही अप्रमेय ईश्वरतत्त्व व्याप्त है यह भी स्वतःसिद्ध है।

साथ ही Narrative शब्द के लिए ‘आख्यान’ शब्द का प्रयोग किया है।

…एक और ‘प्रीति रेड्डी’, उन्नाव में गैंगरेप पीड़िता पर लाठी-डंडे-चाकू से वार, केरोसिन डाल जलाया ज़िंदा

देश में बच्चियों, लड़कियों और महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल ही में एक के बाद एक दिल दहला देने वाली वारदातों को अंजाम दिया गया, जिससे किसी की भी आत्मा काँप जाए। मामला चाहे हैदराबाद का हो, आजमगढ़ का हो या फिर हो बिहार का, हर मामले में दरिंदगी ऐसी कि जिसे देख-सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए।

हैवानियत भरा ऐसा ही एक मामला उन्नाव से सामने आया है, जिसमें गैंगरेप की शिकार पीड़िता को ज़िंदा जलाने की भी कोशिश की गई। इस कोशिश में दरिंदे काफ़ी हद तक क़ामयाब भी रहे। पीड़िता बुरी तरह से झुलस गई जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़िता का इलाज सरकारी खर्च पर कराए जाने और आरोपितों के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई कराए जाने का निर्देश दिया है।

दरअसल, उन्नाव के बिहार थाना क्षेत्र के गौरा मोड के पास गुरुवार (5 दिसंबर) को सुबह तड़के एक गैंगरेप की पीड़िता अपने मुक़दमे की तारीख पर रायबरेली के लिए ट्रेन पकड़ने जा रही थी। इस बीच गैंगरेप के दो आरोपितों ने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर अचानक पीड़िता पर हमला बोल दिया। उन्होंने पीड़िता पर लाठी-डंडे और चाकू से कई वार किए। हैवानियत के नशे में चूर आरोपित इतने पर भी नहीं रुके, उन्होंने पीड़िता पर मिट्टी का तेल डाला और आग लगा दी। आग लगने से पीड़िता चीखने-चिल्लाने लगी जिसके बाद घटना स्थल पर आसपास के लोग पहुँचे। लोगों की भीड़ को आता देख सभी आरोपित वहाँ से भाग निकले।

पीड़िता को गंभीर हालत में पहले तो कानपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत बेहद नाज़ुक होने की वजह से लखनऊ रेफ़र कर दिया गया। फ़िलहाल, बर्न यूनिट में पीड़िता का इलाज चल रहा है। ख़बर के अनुसार, अस्पताल के निदेशक डॉ. डीएस नेगी ने बताया कि पीड़िता 90 फ़ीसदी तक झुलस गई है और उसकी हालत बेहद नाज़ुक है।

वही, पीड़िता ने एसडीएम दयाशंकर पाठक को दर्ज कराए अपने बयान में बताया कि आरोपित पक्ष उस पर केस वापस लेने के लिए लगातार दबाव बना रहा था। जब उसने केस वापस नहीं लिया तो आरोपितों ने उस पर यह जानलेवा हमला कर दिया। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई के तहत पाँचों आरोपितों को गिरफ़्तार कर लिया है।

इस मामले में शिवम त्रिवेदी और शुभम त्रिवेदी मुख्य आरोपित हैं, जिनके ऊपर अगवा कर गैंगरेप का आरोप लगा हुआ है। यह दोनों ही फ़िलहाल ज़मानत पर रिहा थे। इनके अलावा, पुलिस ने मुख्य आरोपितों की मदद करने वाले उमेश वाजपेई, हरिशंकर त्रिवेदी और राम किशोर त्रिवेदी को भी गिरफ़्तार किया है।

बता दें कि उन्नाव के हिन्दुनगर भाटनखेड़ा गाँव में रहने वाले शिवम त्रिवेदी और शुभम त्रिवेदी ने 12 दिसंबर 2018 को इलाक़े की एक महिला को अगवा कर रायबरेली ज़िले के लालगंज थानाक्षेत्र में गैंगरेप किया था। इसी मामले का केस रायबरेली ज़िले के थाना लालगंज में रजिस्ट्र्ड है, जहाँ इस मामले की सुनवाई चल रही है। गुरुवार की सुबह तड़के 4 बजे रेप पीड़िता रायबरेली जाने के लिए ट्रेन पकड़ने बैसवारा स्टेशन के लिए निकली थी और उनके साथ आरोपितों ने यह हैवानियत की।

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भारत से व्यापार बंद होने पर टूटी कमर, खाने के पड़े लाले: पाकिस्तानी मंत्री का कबूलनामा

खाने की चीजों की आसमान छूती कीमतों के बीच पाकिस्तान ने कबूल कर लिया है भारत के साथ व्यापार रद्द होने के कारण उसकी यह हालत हुई है। पाकिस्तानी सांख्यिकी ब्यूरो के आँकड़ों के मुताबिक खाद्य महँगाई दर 12.7 फीसदी पर पहुॅंच गई है। डॉन के मुताबिक बीते नौ साल में यह सबसे ज्यादा है। खाने के ही लाले नहीं पड़े हैं। कंगाली के कगार पर खड़ा पाकिस्तान अब सरकारी संपत्ति बेचने को भी मजबूर हो गया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पैसा जुटाने के लिए इमरान खान की सरकार ने उन संपत्तियों को बेचने का फैसला किया है, जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। दुबई एक्सपो में ये सम्पत्तियाँ बेची जाएँगी। डॉन के अनुसार इससे मिले पैसे का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन और आवास के क्षेत्र में चलाई जा रही योजनाओं के लिए किया जाएगा। प्राइवेटाइजेशन सेक्रेटरी रिजवान मलिक ने बताया, “जिन सरकारी संपत्तियों का इस्तेमाल नहीं हो रहा वे पाकिस्तानी और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए दुबई एक्सपो में बेचा जाएँगी।”

पाकिस्तान ने यह फैसला ऐसे वक्त में किया है जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) सख्त शर्तों के साथ उसे 6 बिलियन डॉलर का कर्ज देने को तैयार हो चुका है। आईएमएफ ने जुलाई में तीन साल के लिए पाकिस्तान को कर्ज देने को मँजूरी दी थी। इमरान ने सत्ता की बागडोर सॅंभालने के बाद अगस्त 2018 में आईएमएफ से बेलआउट पैकेज की गुहार लगाई थी। इसके अलावा पाकिस्तान को चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे साथी मुल्कों से भी अरबों डॉलर की मदद मिली है।

बावजूद इसके न तो उसकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है और न महॅंगाई पर काबू पाने में वह कामयाब हो रहा है। इस समय पाकिस्तान में टमाटर 300 रुपए किलो बिक रहा है। टमाटर वहॉं के खाने का मुख्य हिस्सा है। इसकी वजह से लोग बेहद परेशान है। पाकिस्तान के राजस्व मंत्री हम्माद अजहर ने दावा किया है कि जनवरी-फरवरी से महँगाई कम होने लगेगी। संघीय कैबिनेट की बैठक के बाद मंगलवार को वे वित्त और राजस्व मामलों के इमरान खान के सलाहकार डॉ. अब्दुल हफीज शेख के साथ मीडिया से बात कर रहे थे।

अजहर ने कहा कि महँगाई के लिए भारत के साथ व्यापार रद्द होना जिम्मेदार है। इसमें मौसमी तत्व तथा बिचौलियों की भी भूमिका है। उन्होंने बताया कि सरकार की योजना सस्ता बाजार शुरू करने की भी है। इसके लिए इमरान सरकार प्रांतीय सरकारों के साथ विचार कर रही है।

पाकिस्तान ने पॉंच अगस्त को जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद भारत के साथ व्यापार रद्द कर कूटनीतिक संबंध कमतर कर दिया था।

इमरान खान ने बढ़ाया टैक्स: सड़कों पर आए पाकिस्तानी व्यापारी, IMF के कर्जे से हुआ यह हाल

13 महीने में ही उतावले हो गए पाकिस्तानी, इतने कम समय में Pak को मदीना कैसे बनाऊँ: इमरान खान

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भारत का वो इस्लामी संगठन जिसने Pak को सौंप दिया POK, ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद लाइन पर आया

एक इस्लामिक संगठन है, नाम है – पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया। PFI के शॉर्ट नामकरण से ज्यादा कुख्यात है। यह अतीत में इस्लामिक चरमपंथ के कई मामलों में उलझा रहा है। यह वही संगठन है, जो भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की मेजबानी कर चुका है। अब इसी PFI ने एक प्रेस नोट जारी करके केंद्र सरकार द्वारा पारित नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) का विरोध किया है। सरकार के इस विधेयक का मक़सद पड़ोसी इस्लामिक राष्ट्रों के हिन्दुओं, बौद्धों, सिखों, ईसाइयों मतलब वहाँ के उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देना है। हैरान करने लायक बात यह है कि अपने प्रेस नोट में, PFI ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) पर भारत के अधिकार को भी नकार दिया है। मतलब एक ऐसा संगठन, जो भारत में है, जिसके लोग भी भारत में रहते हैं, यहीं खाते-कमाते हैं लेकिन POK को पाकिस्तान का बताते हैं… दिलचस्प है यह!

PFI की प्रेस विज्ञप्ति (OpIndia की रिपोर्ट से पहले वाली)

PFI ने नागरिकता संशोधन विधेयक को ‘असंवैधानिक’, ‘पक्षपातपूर्ण’ और ‘विवादास्पद’ करार दिया। PFI का कहना है कि नागरिकता संशोधन विधेयक पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश से हिन्दुओं, ईसाइयों, सिखों, पारसियों और जैनियों को नागरिकता प्रदान करने संबंधी है, लेकिन भाजपा सरकार ने मजहब विशेष को सूची से बाहर कर अपना ‘सांप्रदायिक रंग’ दिखाया है। इसके अलावा, प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भाजपा सरकार का दावा है कि पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता दी जानी चाहिए, लेकिन सरकार ने रोहिंग्याओं को नागरिकता देने से इनकार कर दिया है।

PFI की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों के ख़िलाफ़ गई है, लेकिन इस बात पर ग़ौर नहीं किया गया कि इस विधेयक का संबंध शरणार्थियों को नागरिकता देने से है न कि भारत के मौजूदा नागरिकों से संबंधित है।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि PFI की प्रेस विज्ञप्ति में ऐसा लगता है जैसे कि PFI ने पाक अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान को दे दिया हो।

भारत का मानचित्र,सौजन्य: भारत सरकार

रोहिंग्याओं को नागरिकता देने के लिए भारत की वक़ालत करते हुए PFI का कहना है कि भारत, अफ़ग़ानिस्तान के साथ सीमा साझा नहीं करता है, लेकिन, म्यांमार के साथ करता है। यह बयान देकर, PFI ने अनिवार्य रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर भारत के अधिकार को बड़ी चालाकी के साथ, शब्दों से खेलते हुए खत्म कर दिया।

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 को हटाए जाने और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के तौर पर घोषित किए जाने के बाद अगर कोई भारत के वर्तमान नक्शे को देखे तो यह स्पष्ट दिखाई देगा कि भारत, अफ़ग़ानिस्तान के साथ सीमा साझा करता है, क्योंकि गिलगित बाल्टिस्तान भारत का ही एक हिस्सा है।


केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले कश्मीर का नक्शा

इस नक्शे में, कोई भी यह स्पष्ट रूप से देख सकता है कि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के शीर्ष भाग में गिलगित बाल्टिस्तान शामिल है, जो पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से क़ब्ज़ा कर लिया गया है। और इस तरह अफगानिस्तान और भारत एक-दूसरे के साथ सीमा साझा करते हैं।

इसके अलावा, अगर हम जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित होने से पहले के नक्शे को देखें, तो उसमें भी भारत-अफ़ग़ानिस्तान सीमा साझा करते दिख जाएँगे। इस तथ्य को केवल इसलिए नहीं बदला जा सकता, क्योंकि पाकिस्तान ने उस भूमि पर अवैध रूप से क़ब्ज़ा कर रखा है। हर भारतीय को भारत के नजरिए से बने वैध नक्शे को देखने की जरूरत है न कि पाकिस्तान-चीन के प्रोपेगेंडा वाले नक्शे को ध्यान में रख कर राजनीति करने को!

कोई भी यह देख सकता है कि पाक अधिकृत कश्मीर अफ़ग़ानिस्तान के साथ सीमा साझा करता है और चूँकि POK भारतीय क्षेत्र है, जिस पर पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से क़ब्ज़ा कर लिया गया है। ऐसे में स्पष्ट है कि भारत, अफ़ग़ानिस्तान के साथ सीमा साझा करता है।

PFI द्वारा डिलीट किया गया ट्वीट

लेकिन PFI जैसे इस्लामिक संगठन को यह नहीं भूलना चाहिए कि अब वो 2014 से पहले समय-काल में नहीं हैं। अब उनके प्रोपेगेंडा को पढ़ा भी जाएगा, उसका काटा भी जाएगा, उनके खिलाफ लिखा भी जाएगा। और यही हुआ भी। PFI के इस भारत विरोधी पोस्ट, ट्वीट और प्रेस रिलीज पर जैसे ही ऑपइंडिया ने रिपोर्ट की, उसके बाद इस इस्लामिक संगठन ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया, प्रेस रिलीज को संशोधित कर सबको दोबारा से मेल भेजा।

PFI द्वारा दोबारा भेजा गया प्रेस रिलीज का मेल

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राष्ट्रवाद एक ‘जहर’ है जो वैयक्तिक अधिकारों का हनन करने से नहीं हिचकिचाता: हामिद अंसारी

‘हामिद अंसारी के क़रीबी ने वैज्ञानिक नाम्बी नारायणन के ख़िलाफ़ साज़िश रच उनका करियर तबाह किया’

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने पहचान उजागर कर खुफिया अधिकारियों का जीवन खतरे में डाला: पूर्व रॉ अधिकारी का दावा


चिदंबरम का बेल होगा कैंसल? कोर्ट ने मना किया था फिर भी कर रहे प्रेस कॉन्फ्रेंस

INX मीडिया मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। लेकिन यह जमानत सशर्त मिली है। शर्त जो कोर्ट ने बेल के लिए रखी थी, वो है – (i) इस संबंध (केस) में प्रेस को ब्रीफ नहीं करेंगे। (ii) मामले से जुड़े गवाहों से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे। (iii) कोर्ट की इजाजत के बगैर विदेश नहीं जा सकते (iv) 2 लाख रुपए का निजी मुचलका भरना होगा।

देश के पूर्व वित्त मंत्री खुद भी एक वकील हैं। लेकिन 106 दिनों तक पुलिस की हिरासत और तिहाड़ जेल में बंद रहने के कारण शायद वह वकालत भूल गए हैं। अगर याद रखते तो शायद जेल से निकलते ही कोर्ट की शर्तों का उल्लंघन करते नजर नहीं आते। जेल से निकलने के तुरंत बाद ही चिदंबरम ने कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष (अंतरिम) सोनिया गांधी से मुलाकात की। और तो और, उसके बाद ऐलान करते हुए कहा कि गुरुवार (5 दिसंबर, 2019) को वह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

इससे पहले 4 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आर बानुमति, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की तीन जजों की बेंच ने आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मामले में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम को जमानत दी गई थी। वे 106 दिन से हिरासत में थे। इसी मामले में सीबीआई के केस में सुप्रीम कोर्ट से पहले ही चिदंबरम को जमानत मिल चुकी थी।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आर्थिक अपराध काफी गंभीर अपराध होते हैं, लेकिन जमानत का भी कानूनी प्रावधान हैं। कोर्ट ने कहा, “जमानत का फैसला केस की मेरिट पर निर्भर करता है। जमानत देना कानून के प्रावधान में है।” कोर्ट ने चिदंबरम को 2-2 लाख के श्योरटी और निजी मुचलके पर जमानत दी।

‘एक भी सबूत दिखाओ’ – चिदंबरम के चैलेंज पर ED ने 16 देशों में 12 संपत्तियों और 12 बैंक खातों का दिया डिटेल

कार्ति चिदंबरम भी ED के रडार पर, रोक हटते ही हो सकते हैं गिरफ्तार: 16 कम्पनियाँ INX मीडिया जैसे घोटाले में शामिल

सिब्बल बोले- 90 दिन से जेल में हैं चिदंबरम, जल्दी करिए सुनवाई: CJI की पीठ ने कहा- देखेंगे