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दलित महिला की गैंगरेप के बाद हत्या: बाबू, शहाबुद्दीन और मकदूम ने कबूला जुर्म

हैदराबाद में 26 वर्षीय पशु​ चिकित्सक की गैंगरेप और हत्या के बाद अब ऐसा ही मामला तेलंगाना के आदिलाबाद जिले से सामने आया है। यह घटना रामन्यकतंडा और एलापट्टर गाँव के बीच हुई। 25 नवंबर को इसी क्षेत्र में पुलिस को एक महिला की लाश मिली। उसके साथ गैंगरेप हुआ था। सामूहिक बलात्कार के बाद दरिंदों ने उसे मार डाला।

30 वर्षीय पीड़िता निर्मल के खानपुर की रहने वाली थी और काफ़ी गरीब थी। वह गुब्बारे बेच कर अपना गुजारा किया करती थी। वह आसपास के कई गाँवों में गुब्बारे बेच कर अपना गुजर-बसर करती थी। उसके पति भी बैलून बेचने का ही काम किया करते थे। घटना के दिन उसके पति ने उसे गाँव तक छोड़ा था और दोनों अलग-अलग गाँवों में गुब्बारे बेचने चले गए थे।

पुलिस के अनुसार, रविवार (नवंबर 24, 2019) को जब उसका पति वापस आया तो उसने पाया कि महिला गायब है। उसके पति ने आसपास के गाँवों में भी खोज-खबर ली, लेकिन कहीं भी उसका पता नहीं चला। रिश्तेदारों को भी उसके बारे में कुछ नहीं पता था। हार कर उसने लिंगापुर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। बाद में पुलिस को एलापट्टर गाँव में उक्त महिला की लाश मिली। इसके बाद आदिलाबाद एक्स रोड से पुलिस ने तीन को धर-दबोचा।

शेख बाबू, शेख सहाबुद्दीन और शेख मकदूम को पुलिस ने गिरफ़्तार किया। तीनों ने पुलिस के समक्ष अपना गुनाह कबूल कर लिया है। आरोपितों ने बताया कि उन्होंने पीड़िता के साथ सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी। तीनों आरोपितों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। उन पर बलात्कार, हत्या और एससी-एससी एक्ट के तहत मामला चलाया जाएगा। आरोपितों ने पीड़िता का बलात्कार तब किया, जब वह गाँव के एक सुनसान इलाक़े से अकेली गुजर रही थी।

पुलिस ने घटनास्थल से सबूतों को हैदराबाद फॉरेंसिक लैब में जाँच के लिए भेजा है। असिफाबाद के डिप्टी एसपी इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जैनूर और लिंगापुर इलाक़े में दलित और आदवासी समूहों ने इस गैंगरेप व हत्याकांड के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि किसी भी नेता ने अब तक उनकी सुध नहीं ली है।

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सिटीजन बिल पर मोदी कैबिनेट की मुहर: पाक, बांग्लादेश के प्रताड़ित हिंदुओं को नागरिकता का प्रावधान

केंद्र की मोदी सरकार ने नागरिकता विधेयक में संशोधन का मसौदा कैबिनेट में पास कर दिया है। इस बिल के अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाने की उम्मीद है। इस बिल के प्रावधानों के मुताबिक भारत के तीन सबसे कट्टर रूप से मज़हबी पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के मज़हबी रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के प्रताड़ित लोगों को भारत की नागरिकता के लिए योग्य घोषित किया गया है। इसमें केवल हिन्दू धर्म ही नहीं, जैन, बौद्ध, सिख धर्म और ईसाई व अन्य पंथिक समुदाय के भी लोग शामिल हैं। यह बिल पिछली बार भी लोकसभा में लाया गया था, लेकिन इसके राज्यसभा में पास होने से पहले ही आम चुनावों के लिए निचले सदन को भंग कर दिया गया था।

सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों ने इसका स्वागत भी किया है, जिसमें स्वराज्य पत्रिका के सीईओ प्रसन्ना विश्वनाथन भी शामिल हैं। उन्होंने इस अधिनियम को शरणार्थी हिन्दुओं के लिए बड़ी राहत बताया है।

वहीं लिबरल गिरोह ने भी अपनी रुदाली शुरू कर दी है। कॉन्ग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने इसे लोकतंत्र के ही खिलाफ बता दिया है।

वहीं उनकी पार्टी की एक अन्य नेत्री शमा मोहम्मद ने इसे भारतीय संविधान के खिलाफ बताया है।

स्वराज्य के सम्पादक राघवन जगन्नाथन ने इस बिल के विरोधियों पर करारा प्रहार किया है। स्वराज्य के अपने कॉलम में उन्होंने इसे इन देशों के प्रताड़ित हिन्दुओं के खिलाफ साज़िश करार दिया है। उनके मुताबिक यह पहले से ही प्रताड़ित और अपमानित हिन्दू शरणार्थियों को दोबारा परेशान करने की कोशिश है।

उनके लेख को ट्विटर पर साझा करते हुए प्रसन्ना विश्वनाथन ने भी भारतीय सेक्युलरिज़्म को हिन्दूफ़ोबिया से भरा हुआ करार दिया है।

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अमजद और अजगर पठान ने दलित युवक को ‘पठानी’ सूट पहनने की ‘जुर्रत’ पर बुरी तरह पीटा

गुजरात में ‘पठानी’ सूट पहनने की ‘जुर्रत’ करने पर दलित की पिटाई का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक राजकोट के कच्छ जिले के गाँधीधाम शहर में एक दलित की पिटाई सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि उसने पठानी सूट पहना था।

पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए मंगलवार (दिसंबर 3, 2019) को 27 वर्षीय जयंत भाटी की पिटाई करने के आरोप में अमजद पठान और अजगर पठान के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बता दें कि आरोपित अमजद पठान और अजगर पठान ने 26 नवंबर को गाँधीधाम के ग्रीन पैलेस होटल के पास जयंत भाटी की पिटाई की थी। जयंत पेशे से ड्राइवर है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, घटना वाले दिन जयंत भाटी होटल के पास चाय पी रहा था, तभी आरोपित अमजद पठान और अजगर पठान मोटरसाइकल से वहाँ आए और उसके साथ बहस करने लगे। इस दौरान आरोपितों ने उसके ‘पठानी’ सूट पहनने पर आपत्ति जताई। इसके बाद बहस और बढ़ गई। तभी एक आरोपित ने भाटी के पठानी सूट को पीछे से उठाते हुए उसके चेहरे को ढँक दिया और फिर बुरी तरह से उसकी पिटाई कर दी।

इतना ही नहीं, पिटाई करने के बाद दोनों ने दलित को धमकी देते हुए कहा कि वो नीची जाति से है, इसलिए उसे पठानी सूट पहनने का कोई अधिकार नहीं है। अगर उसने दोबारा से पठानी सूट पहना तो वे उसे जान से मार देंगे।

इस घटना के बाद भाटी ने उसी दिन गाँधीधाम के ए डिवीजन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई और फिर जॉब पर चला गया। उसके लौटने के बाद आरोपित के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट, हमला और आपराधिक धमकी के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। फिलहाल दोनों आरोपितों का गिरफ्तार होना बाकी है।

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लोकसभा में सो रहे थे राहुल गाँधी, भारत-चीन पर बोल रहे थे अधीर रंजन: देखें वीडियो

लोकसभा में जब कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर बोल रहे थे, तब उनकी पार्टी के मुखिया रहे राहुल गाँधी सदन में सोते हुए नज़र आए। अधीर रंजन चौधरी के सम्बोधन के दौरान पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी काफी देर तक सोते हुए दिखे। उस समय लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला चेयर पर मौजूद थे। नीचे संग्लन की गई तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि कैसे सदन की कार्यवाही के दौरान राहुल सोते दिखे:

राहुल गाँधी केरल के वायनाड से सांसद हैं। उन्होंने इस वर्ष 2 सीटों से लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें अपने पारम्परिक गढ़ अमेठी से स्मृति ईरानी के हाथों हार का समाना करना पड़ा। राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं और उनकी माँ सोनिया गाँधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष हैं। ऐसे में, अपनी ही पार्टी के नेता के सम्बोधन के दौरान सदन में नींद लेने के कारण सोशल मीडिया पर राहुल गाँधी की ख़ासी आलोचना हुई। कई लोगों ने उनका मज़ाक भी बनाया।

ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में साफ-साफ़ दिख रहा है कि अधीर रंजन के भाषण के दौरान राहुल गाँधी काफ़ी देर तक सोते रहे। जब अधीर रंजन चौधरी ने अपना सम्बोधन शुरू किया, तभी राहुल झपकी लेने लगे और काफ़ी देर बार उनकी तन्द्रा टूटी।

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सड़कों पर उतरे गिलगिट-बाल्टिस्तान के छात्र, कहा- गुलाम बनाना चाहती है इमरान सरकार

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के गिलगिट-बाल्टिस्तान इलाके में छात्रों ने इमरान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कराकोरम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया है। छात्रों का आरोप है कि इमरान खान की सरकार उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित कर रही है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, प्रदर्शन कर रहे छात्र यूनियन के एक नेता ने कहा, “पाकिस्तान हमारे युवाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है। वह उन्हें गुलाम बनाना चाहता है। वह मानसिक तौर पर कमजोर लोग चाहता है। मैं कराकोरम यूनिवर्सिटी से यह बताने आया हूँ कि वे NSF (National Student Federation) को सरकार विरोधी तत्व करार देने की फिराक में हैं। छात्र सहमे हुए हैं क्योंकि उन्हें डर है कि विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने का उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ेगा।”

प्रदर्शन कर रहे एक अन्य छात्र ने कहा कि इस क्षेत्र में सिर्फ एक यूनिवर्सिटी है। शिक्षा के मामले में गिलगिट-बाल्टिस्तान काफी पिछड़ा हुआ है। उसका कहना है कि इस क्षेत्र के कई शिक्षित युवाओं को रावलपिंडी और इस्लामाबाद में विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने का मौका भी नहीं दिया गया है। ऐसी स्थिति में यहाँ के छात्रों को मजबूरन प्रोफेशनल कोर्सेस की जगह सामान्य कोर्स करना पड़ता है। उसने माँग की है कि यहाँ कम से कम एक मेडिकल और एक इंजीनियरिंग कॉलेज खोला जाए। 

बता दें कि 30 लाख से ज्यादा आबादी वाले गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र में सिर्फ एक यूनिवर्सिटी है। इस इकलौती यूनिवर्सिटी में भी प्रोफेसर्स की भारी कमी है। इस यूनिवर्सिटी में ना तो कोई प्रोफेशनल प्रोग्राम चलता है और ना ही प्रोफेसरों की पर्याप्त संख्या है। ऐसी स्थिति में छात्रों के पास इंजीनियरिंग और मेडिकल समेत तमाम प्रोफेशनल प्रोग्राम की पढ़ाई के लिए पाकिस्तान के अन्य शहरों में जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

गौरतलब है कि गिलगिट-बाल्टिस्तान समेत गुलाम कश्मीर में रहने वाले लोगों के साथ शिक्षा से लेकर हर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भेदभाव किया जाता है। इन लोगों को नागरिक अधिकारों से लेकर, समानता और मताधिकार तक की आजादी नहीं है।

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राहुल बजाज के बेटे ने कहा- साहस और बेहूदगी एक जैसे, बताया गडकरी ने कैसे की मदद

बजाज समूह के चेयरमैन राहुल बजाज ने एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सामने ‘डर का माहौल’ वाले नैरेटिव को बढ़ावा दिया। बजाज ने कहा कि आज के दौर में लोग सरकार को कुछ भी बोलने से डरते हैं। हालाँकि, अमित शाह ने उन्हें कहा कि डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। राहुल बजाज ने इस दौरान लिंचिंग का भी मुद्दा उठाया, जिसके जवाब में शाह ने उन्हें बताया कि मोदी सरकार के दौरान ऐसी घटनाओं में कमी आई है। अब राहुल बजाज के बेटे राजीव बजाज ने अपने पिता के बयान को लेकर प्रतिक्रिया दी है।

राजीव ने उस बयान के लिए अपने पिता राहुल बजाज के ‘असाधारण साहस’ की प्रशंसा करते हुए कहा है कि साहस और बेहूदगी एक जैसे ही होते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता कभी भी अपने मन की कहने से हिंचकते नहीं हैं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी व्यक्तिगत राय को इस तरह के सार्वजनिक मंच पर उठाना उचित है या नहीं, ये उन्हें नहीं पता। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट एक्सीलेंस को सम्मानित करने वाले मंच पर इस मुद्दे को उठाना सही है या ग़लत, वह इसका निर्णय नहीं कर पा रहे हैं। राजीव बजाज ने कहा कि उनके पिता राहुल बजाज को बोलने के लिए मंच उपलब्ध करवाना सांड को लाल कपड़ा दिखाने जैसा है।

राजीव बजाज ने कहा कि उन्होंने कहीं साहस की परिभाषा पढ़ी थी। बकौल राजीव, किसी कार्य को ये जानते हुए भी करना कि उससे कुछ लोगों को चोट पहुँच सकती है- ये साहस है। राजीव ने आगे कहा कि बेहूदगी की भी यही परिभाषा है और इसी कारण से दोनों में अंतर खोजना मुश्किल हो जाता है। राजीव ने बताया कि जब उन्होंने फ़रवरी 2017 में नोटबंदी के फ़ैसले का विरोध किया था, तब उनकी भी ख़ासी आलोचना हुई थी। राजीव ने कहा कि उनकी बड़े नेताओं या मंत्रियों से उतनी बातचीत नहीं होती।

राजीव बजाज ने इस दौरान एक वाकया भी सुनाया कि कैसे भाजपा सरकार ने उनकी मदद की। बजाज की कार प्रोजेक्ट Qute 8 सालों से केंद्र सरकार अनुमोदन के लिए पड़ी हुई थी। राजीव ने बताया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 8 सालों से लंबित बजाज के ऑटो व्हीकल Qute को अप्रूवल दिया। राजीव ने इसके लिए नीति आयोग को भी धन्यवाद दिया। इधर, लखीमपुर के सांसद अजय मिश्रा ने बजाज कम्पनी की चीनी मिलों पर किसानों का 10,000 करोड़ रुपया बकाया भुगतान न करने का आरोप लगाया है।

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इस्लामी आतंकवाद बर्दाश्त नहीं, मोदी के साथ मिल कर रोकेंगे: श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे

श्रीलंका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे गत दिनों भारत के दौरे पर आए थे। इस दौरान राष्ट्रपति भवन में उनके सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हुई। यह भी गौर करने लायक बात है कि राजपक्षे ने राष्ट्रपति बनने के बाद अपना सबसे पहले विदेश दौरा भारत का किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफ़ी अच्छा काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और विकास के मामले पर उनके भाई महिंदा राजपक्षे और पीएम मोदी के प्रशासन के बीच काफ़ी समानता है। महिंदा भी श्रीलंका के राष्ट्रपति रह चुके हैं।

गोटाभाया ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में इस्लामी आतंकवाद को लेकर अपने कड़े रुख को दोहराया है। उन्होंने कहा कि इस्लामी आतंकवाद आज एक वैश्विक मुद्दा है और इससे हर देश को ख़तरा है। गोटाभाया राजपक्षे ने आगे कहा कि इस्लामी आतंकवाद से निपटने के लिए हमें अभी से ही सचेत होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस्लामी आतंकवाद को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी और ख़ुफ़िया तंत्र को मजबूत करने की दिशा में प्रयास करेगी। उनका जोर ख़ुफ़िया सूचनाएँ जुटाने और तकनीकी क्षमता विकसित करने पर रहेगा।

गोटाभाया ने साइबर स्पेस और फोन पर बातचीत इत्यादि की निगरानी के लिए नई तकनीक अपनाने पर ज़ोर दिया। इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वो इस्लामी आतंकवाद से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार व अन्य पड़ोसियों के साथ मिल कर काम करेंगे और एक-दूसरे से ख़ुफ़िया सूचनाएँ साझा करेंगे। गोटाभाया ने कहा:

“लिट्टे से हम काफ़ी अच्छी तरह से निपटे। हमारी ख़ुफ़िया एजेन्सियाँ उस आंदोलन की पृष्ठभूमि, नेताओं, तौर-तरीकों और इतिहास से अच्छी तरह अवगत थे। ख़ुफ़िया एजेंसियों को उनके नेताओं के ठिकानों के बारे में पता था। लेकिन, इस्लामी आतंकवाद को लेकर दुर्भाग्य से ऐसा कुछ भी नहीं है। यह नया खतरा है। इससे निपटने के लिए हमें और क्षमता विकसित करनी पड़ेगी। लेकिन मैं अपने देश में इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं दूँगा और कभी बर्दाश्त नहीं करूँगा।”

‘हिंदुस्तान’ में प्रकाशित राजपक्षे के इंटरव्यू का एक अंश

श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे ने इस्लामी कट्टरता को आतंकवाद की जड़ बताते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग नौकरी के लिए मध्य-पूर्व जाते हैं। वहाँ उन्हें भड़काया जाता है। राजपक्षे ने कहा कि इंटरनेट पर इस्लामी टिप्पणियाँ व उपदेश आसानी से उपलब्ध हैं। इनका प्रयोग कर किसी को भी घर बैठे कट्टरपंथी बनाया जा सकता है। उन्होंने श्रीलंका की पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने ध्यान नहीं दिया, इसीलिए ईस्टर धमाके में कई लोग मारे गए।

श्रीलंका राष्ट्रपति चुनाव में भी खिला कमल, मुस्लिमों ने पूछा- हाय! हम कहाँ जाएँ?

श्रीलंका टीम को सुरक्षित निकालने के लिए कराची में कर्फ्यू लगाने वाले पूछ रहे हैं कि कश्मीर में कर्फ्यू क्यों?

श्रीलंका में 8वाँ धमाका: 187+ मौतें, 500 से ज्यादा जख्मी – हाशीम, मोहम्मद थे आत्मघाती हमलावरों में शामिल

INX मीडिया केस: तिहाड़ से बाहर आएँगे चिदंबरम, 21 अगस्त को हुई थी गिरफ्तारी

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आर बानुमति, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की तीन जजों की बेंच ने आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मामले में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम को जमानत दे दी है। वे 106 दिन से हिरासत में थे। फिलहाल वे तिहाड़ जेल में हैं। इसी मामले में सीबीआई के केस में सुप्रीम कोर्ट से पहले ही चिदंबरम को जमानत मिल चुकी है।

अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि चिदंबरम जमानत पर छूटने के बाद गवाहों से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे और कोर्ट की इजाजत के बगैर विदेश नही जाएँगे। साथ ही केस के बारे में प्रेस ब्रीफ़िंग नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आर्थिक अपराध काफी गंभीर अपराध होते हैं, लेकिन जमानत का भी कानूनी प्रावधान हैं। कोर्ट ने कहा, “जमानत का फैसला केस की मेरिट पर निर्भर करता है। जमानत देना कानून के प्रावधान में है।” कोर्ट ने चिदंबरम को 2-2 लाख के श्योरटी और निजी मुचलके पर जमानत दी है।

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने नवंबर में आईएनएक्स-मीडिया से जुड़े ED के मामले में पी चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की अध्यक्षता वाली हाई कोर्ट की एकल पीठ ने राहत प्राप्त करने की चिदंबरम की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और यह मामला उन्हें जमानत देने के लिए सही नहीं है।

हाई कोर्ट के इसी आदेश को चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते इस पर सुनवाई की और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार (4 दिसंबर, 2019) को कोर्ट ने कई शर्तों के साथ उन्हें जमानत दे दी।

उल्लेखनीय है कि आईएनएक्स मीडिया केस में सीबीआई ने पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के बाद उन्हें 6 सितंबर को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। सीबीआई ने मई 2017 को चिदंबरम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उस समय पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे। कॉन्ग्रेस नेता पर पद का दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

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JNU में 12 दिसंबर से सेमेस्टर एक्जाम, जो नहीं देंगे बाहर जाएँगे: प्रशासन की छात्रों को लास्ट वॉर्निंग

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने हॉस्टल फीस बढ़ोतरी के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्रों को सेमेस्टर परीक्षा में भाग न लेने पर विश्वविद्यालय से बाहर (दाखिला रदद) करने की चेतावनी दी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आंदोलनकारी छात्रों को लास्ट वार्निंग देते हुए कहा कि यदि छात्र 12 दिसंबर से शुरू होने वाली सेमेस्टर परीक्षाओं में नहीं बैठते हैं तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।

जेएनयू रजिस्ट्रार प्रोफेसर प्रमोद कुमार की ओर से मंगलवार (दिसंबर 3, 2019) शाम को सर्कुलर जारी किया गया है। इससे पहले जेएनयू प्रशासन की तरफ से 17 नवंबर, 28 नवंबर और 29 नवंबर के दिन भी इस मामले में सर्कुलर जारी करते हुए छात्रों को चेताया गया था। मंगलवार को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक मानदंडों और अकादमिक कैलेंडर का पालन करते हुए 12 दिसंबर से शुरू होने वाली अंतिम सेमेस्टर परीक्षा में अनिवार्य रूप से शामिल होना होगा। जो ऐसा नहीं करेंगे वे जेएनयू अकेडमिक ऑर्डिनेंस के तहत यूनिवर्सिटी के छात्र नहीं रह जाएँगे।

JNU प्रशासन द्वारा जारी किया गया सर्कुलर

साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि एमफिल कोर्स के नियमानुसार 5.00 सीजीपीए लाना अनिवार्य है। यदि कोई छात्र 5.00 सीजीपीए लाने में असफल रहता है तो जेएनयू अकेडमिक ऑर्डिनेंस के तहत दूसरे सेमेस्टर के अंत में उसका नाम ऑटोमेटिकली विश्वविद्यालय की नामांकन सूची से हट जाएगा। 

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि परीक्षा की अवधि को लेकर छात्रों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिलेगी। बीए ऑनर्स व बीए, एमए व एमएससी कोर्सेज में सभी सत्र की परीक्षाएँ निर्धारित सीजीपीए के साथ पास करना अनिवार्य है। यदि किसी छात्र की हाजिरी कम होती है तो उसे सेमेस्टर परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं होगी।

इसके बाद भी आंदोलन में बैठे छात्र कक्षाओं में जाने के लिए तैयार नहीं हैं। जेएनयू छात्रसंघ ने पहले ही सेमेस्टर परीक्षा का बहिष्कार का ऐलान किया है। उनका कहना है कि जब तक हॉस्टल फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस नहीं लिया जाता, उनका आंदोलन चलता रहेगा। बता दें कि पिछले करीब एक महीने से जेएनयू में छात्रों की तरफ से छात्रावास की फीस बढ़ोतरी और इसके नए नियमों को लागू करने के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है। छात्रों की माँग है कि इसे वापिस लिया जाए। प्रशासन का कहना है कि छात्रों के प्रदर्शन के कारण संस्थान में अकादमिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है।

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कमलेश तिवारी मर्डर: मौलाना कैफ़ी को बेल, मुस्लिम संगठन ने खड़ी कर दी थी वकीलों की फौज

हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या 18 अक्टूबर को लखनऊ में कर दी गई थी। इस हत्याकांड में कई मौलवियों के नाम सामने आए थे। इसके बाद यूपी पुलिस और गुजरात एटीएस की कार्रवाई में कई लोग गिरफ़्तार किए गए थे। मुख्य आरोपित अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन ने स्वीकार किया था कि पैगम्बर मुहम्मद पर दिए गए बयान के कारण उन्होंने हिन्दू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की बेरहमी से हत्या कर दी। इस मामले में बरेली के मौलाना सैयद कैफ़ी अली का नाम भी सामने आया था। उसने हत्यारोपितों की मदद की थी और उन्हें संरक्षण दिया था।

कैफ़ी आजमी ने अदालत में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुदेश कुमार ने मंजूर कर लिया। 20-20 हज़ार रुपए के 2 जमानत एवं निजी मुचलका राशि दाखिल करने पर उसे जमानत दी गई। मौलाना ने अदालत में कहा कि उस पर लगे आरोप जमानती हैं। इसे अदालत ने मान लिया। मौलाना पर आरोप है कि उसने कमलेश तिवारी के हत्यारों को अपने घर में शरण दी।

मौलाना ने तिवारी के हत्यारों की आर्थिक मदद की थी। उनका इलाज भी किया था। इसके बाद दोनों वहाँ से भागने में सफल रहे थे। मौलाना के ख़िलाफ़ पुलिस को कई साक्ष्य मिले थे। इन सबके आधार पर उसे 22 अक्टूबर को एसआईटी ने गिरफ़्तार किया था। बुधवार (दिसंबर 4, 2019) को मौलाना जेल से बाहर आ जाएगा। सैयद कैफ़ी ताजुशरिया दरगाह से जुड़ा हुआ है। उसके साथ अधिवक्ता नावेद और उसके पार्टनर कामरान को भी गिरफ़्तार किया गया था। ये दोनों दरगाह आला हजरत से जुड़े हुए हैं।

‘दैनिक जागरण’ के बरेली संस्करण में छपी ख़बर

मौलाना की जमानत करवाने के लिए ताजुशरिया के मुफ़्ती असजद रज़ा खाँ ने प्रयास किया था। परिजनों ने मुफ़्ती से इसके लिए अपील की थी। उसकी पैरवी आला हजरत दरगाह से जुड़े संगठन जमात रज़ा-ए-मुस्तफा ने की। संगठन के उपाध्यक्ष सलमान हसन खाँ कादरी ने बताया कि मौलाना की रिहाई के लिए उन्होंने वकीलों के एक पूरे पैनल को लगाया था।

कमलेश तिवारी की पत्नी को जान से मारने की धमकी, बंद लिफाफे में भेजा उर्दू में लिखा पत्र

‘मैं अली को जानती तो नहीं, लेकिन उसने कमलेश तिवारी की हत्या का जश्न मनाया… इसलिए उसे रिलीज करो’

‘मेरी बहन को मुस्लिम लड़के ने प्रेमजाल में फँसा लिया है’ – वो फर्जी कहानी, जिससे गई कमलेश तिवारी की जान