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कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया, कुमारस्वामी पर राजद्रोह, मानहानि का मुक़दमा दर्ज

बेंगलुरु पुलिस ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्रियों सिद्धारमैया और एचडी कुमारस्वामी के ख़िलाफ़ एक निचली अदालत के आदेश के आधार पर राजद्रोह और मानहानि के आरोप में एक FIR दर्ज की है।

एक शिक़ायत पर कार्रवाई करते हुए, निचली अदालत ने पुलिस को कर्नाटक के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी और सिद्धारमैया के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार, परमेश्वरा, दिनेश गुंडु राव और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भी मामला दर्ज किया गया है। यह FIR बुधवार (27 नवंबर) को दर्ज की गई थी।

वहीं, कॉन्ग्रेस के डीके शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दर्ज करते हुए इसे भाजपा की साज़िश करार दिया है। उन्होंने कहा, “यह सब एक राजनीतिक प्रतिशोध है। सभी मामले भाजपा के अधिकारियों और मित्रों द्वारा किए जा रहे हैं। हम जानते हैं। हम इसे राजनीतिक रूप से लड़ेंगे। हम जेल जाने के लिए तैयार हैं, कोई बात नहीं।”

क्या है पूरा मामला

कॉन्ग्रेस और जनता दल (सेक्‍युलर) नेताओं ने लोकसभा चुनाव 2019 के समय आयकर विभाग की छापेमारियों का विरोध किया था। कार्यकर्ता मल्लिकार्जुन नाम के एक्टिविस्‍ट ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिक़ायत के अनुसार, तत्कालीन मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने जनता दल (सेक्‍युलर) और कॉन्ग्रेस नेताओं के ठिकानों पर छापेमारी करने से पहले ही आई-टी छापे के बारे में जानकारी लीक कर दी थी।

कुमारस्‍वामी ने अपने डिप्‍टी परमेश्‍वर, पूर्व सीएम सिद्धारमैया, गठबंधन सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को साथ लेकर 27 मार्च को IT विभाग के ऑफ़िस के बाहर प्रदर्शन किया था। शिक़ायतकर्ता ने दावा किया था कि यह धरना-प्रदर्शन साफ़ तौर पर आदर्श आचार संहिता का उल्‍लंघन था। इसके अलावा, अपनी शिक़ायत में मल्लिकार्जुन ने कहा था कि IT अधिकारियों को ‘बीजेपी एजेंट’ बताया जो कि ड्यूटी में व्यवधान डालने के समान है।

ग़ौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान सत्ताधारी जेडीएस और कॉन्ग्रेस ने अपने नेताओं के ख़िलाफ़ आयकर विभाग के छापों का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया था और नारेबाज़ी की थी। चुनाव के बाद पिछले दिनों कई दिन तक चले सियासी नाटक के बाद कुमारस्वामी की सरकार अल्पमत में आ गई थी। इसके चलते कुमारस्वामी सरकार की विदाई के बाद कर्नाटक में भाजपा ने सरकार बनाई और बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बने।

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साध्वी प्रज्ञा ने माँगी माफ़ी, लेकिन बोला- जिसने मुझे कहा आतंकवादी, वो कब माँगेंगे माफ़ी

भोपाल की भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताए जाने वाले अपने बयान पर लोकसभा सदन में माफ़ी माँग ली है। 

उन्होंने माफ़ी माँगते हुए कहा, “सदन में मेरे द्वारा की गई किसी भी टिप्पणी से यदि किसी भी प्रकार से किसी को कोई ठेस पहुँची हो तो उसके लिए मैं ख़ेद प्रकट कर क्षमा चाहती हूँ। परंतु मैं यह भी कहना चाहती हूँ कि संसद में मेरे बयानों को तोड़मरोड़ कर ग़लत ढंग से पेश किया गया है, मेरे बयान का सन्दर्भ कुछ और था, जिसे ग़लत ढंग से इस रूप में प्रस्तुत कर दिया गया। जिस प्रकार से मेरे बयानों को तोड़ा-मरोड़ा गया है वो निंदनीय है।”

इसके आगे उन्होंने कहा कि महात्मा गाँधी द्वारा देश के प्रति सेवा कार्य का वो सम्मान करती हैं। उन्होंने राहुल गाँधी का नाम लिए बिना कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा,

“मैं सदन को ध्यान दिलाना चाहूँगी कि इसी सदन के एक माननीय सदस्य द्वारा मुझे सार्वजनिक रूप से आतंकवादी कहा। मेरे साथ तत्कालीन सरकार (कॉन्ग्रेस) द्वारा रचे गए षणयंत्रों के बावजूद अदालत में मेरे ख़िलाफ़ कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। बिना दोषी सिद्ध हुए मुझे आतंकवादी कहना क़ानून के ख़िलाफ़ है। कोई आरोप सिद्ध हुए मुझे आतंकवादी बताना एक महिला के नाते, एक सन्यासी के नाते, एक सांसद के नाते मेरे सम्मान पर हमला करके मुझे अपमानित करने का प्रयास किया गया है।”

वहीं, इस मामले में बीजेपी सांसदो का कहना है कि राहुल गाँधी ने एक महिला सांसद को आतंकवादी कहा, वो ग़ैर-क़ानूनी है और इसके लिए उन्हें माँगनी चाहिए। सांसदों ने कहा कि राहुल गाँधी के इस बयान के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जाना चाहिए।  

सदन में कॉन्ग्रेस सदस्यों द्वारा हंगामा किए जाने पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि अब साध्वी प्रज्ञा ने  इस पर माफी माँग ली है और अब इस मसले पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने यह स्पष्ट किया है कि महात्मा गाँधी पर कोई भी आपत्तिजनक बात सदन के रिकॉर्ड में नहीं जाएगी। लेकिन, सदन में कॉन्ग्रेस समेत विपक्ष के तमाम सांसद ‘गोडसे डाउन-डाउन’ और ‘महात्मा गाँधी की जय’ के नारे लगाते रहे।

आजम खान ने रामलला के पुजारी को सौंपी 50 फीट की चुनरी, लिखा है- ‘जय जय श्री राम’

राष्ट्रीय मुस्लिम कारसेवक मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष आजम खान ने गुरुवार (नवंबर 28, 2019) को अयोध्या पहुँचकर रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने न्यास के अध्यक्ष से उनका आशीर्वाद लिया। साथ ही राम मंदिर के मुख्य द्वार पर मुस्लिम कारसेवकों के नाम वाले पत्थर लगाने की माँग की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आजम खान इस दौरान राम मंदिर के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास से भी मिले और उन्हें 50 फीट लंबी हरे रंग की चुनरी भेंट की। जिसपर बड़े-बड़े अक्षरों में गेरुए रंग से ‘जय जय श्री राम’ हिंदी और उर्दू में लिखा हैं।

इसके बाद उन्होंने परमहंस रामचंद्रदास की समाधिस्थल पर जाकर उन्हें पुष्पांजलि भेंट की और रामलला के दर्शन भी किए। उन्होंने न्यास अध्यक्ष से मिलने के बाद कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए फैसले ने राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया है और वर्षों से चला मंदिर निर्माण अब जाकर सफल हुआ है।

परमहंस रामचंद्रदास की समाधिस्थल पर पुष्पाांजलि अर्पित करते आजम खान

आजम खान ने इस दौरान अयोध्यावासियों को संदेश देते हुए कहा कि रामलला किसी एक नहीं, बाकी सब धर्मों के हैं। इसलिए अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद रामलला को पहली चुनरी वही चढ़ाई जाए, जिसे मुस्लिम कारसेवकों की ओर से आज पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास को दिया गया है। उनके अनुसार इस प्रकार आने वाले समय में ये संदेश कायम रहेगा कि सभी धर्मों की सहमति से रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण किया गया।

बता दें, मुस्लिम कारसेवक मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने न्यास अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान ये भी माँग उठाई कि मंदिर निर्माण के बाद मुख्य द्वार पर एक शिला लगाई जाए, जिसमें मुस्लिम कारसेवकों के नाम भी अंकित हों। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिए जाने वाली जमीन पर बनने वाली मस्जिद पर भी हिंदू संतों के नाम अंकित हों, जिससे अयोध्या में हमेशा सौहार्द बना रहे।

बाल ठाकरे को जिसने कराया था गिरफ़्तार, वही छगन भुजबल बने उद्धव के मंत्री: 1960 से 2019 की कहानी

राजनीति के अखाड़े में कभी भी कुछ भी हो सकता है। सब्जी बेचने से लेकर उप-मुख्यमंत्री पद के सफर तय करने वाले छगन भुजबल को महाराष्ट्र के मंत्रीमंडल में जगह मिलने से एक बार फिर उनकी क़िस्मत बदल गई। बता दें कि छगन भुजबल वही नेता हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ़्तार हो चुके हैं और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की गिरफ़्तारी के आदेश भी दे चुके हैं।

संयोग देखिए कि छगन भुजबल ने अपना राजनीतिक जीवन 1960 में शिवसेना से ही शुरू किया था। लेकिन 1991 में पार्टी छोड़ने से पहले वो कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। फिर 1999 में एनसीपी के गठन के बाद भुजबल शरद पवार के क़रीबी बन गए और उनके साथ रहे।

आज भले ही भुजबल राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों के पन्ने पर उतनी जगह न बना पा रहे हों, लेकिन जुलाई 2000 का समय कुछ ऐसा था कि उनका नाम सुर्ख़ियों में छाया रहता था। गृह विभाग के प्रभार के साथ महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री के रूप में, भुजबल ने कल्पना से परे कई काम किए थे। इनमें एक काम उद्धव के पिता और शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की गिरफ़्तारी का आदेश दिया जाना भी शामिल था।

दिसंबर 1992 से जनवरी 1993 का एक दौर था। उस समय शिवसेना के मुखपत्र सामना में संपादकीय लिखा करते थे बाल ठाकरे। तब के संपादकीय को लेकर साल 2000 में महाराष्ट्र की पुलिस ने बाल ठाकरे को गिरफ्तार करने का प्लान बनाया। क्यों? क्योंकि सामना के तब के संपादकीय लेख ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद कथित रूप से सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का काम किया था। लेकिन पुलिस को बाल ठाकरे जैसे नेता को गिरफ्तार करने का आदेश किसने दिया – राज्य के गृहमंत्री छगन भुजबल ने। इसके बाद बाल ठाकरे को 25 जुलाई 2000 को गिरफ़्तार किया गया और एक मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में ले जाया गया। हालाँकि, मजिस्ट्रेट ने यह कहते हुए मामले को ख़ारिज कर दिया कि यह समय बर्बाद करने जैसा है और चार्जशीट दायर करने में देरी पर भी सवाल उठाए।

बाल ठाकरे की गिरफ़्तारी से मुंबई में माहौल गर्माने के साथ-साथ सियासी समीकरण भी बिगड़े थे। ठाकरे की गिरफ़्तारी से पहले शेयर बाजार लुढ़का था। वहीं दूसरी तरफ बाल ठाकरे ने केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार से शिवसेना के मंत्रियों को इस्तीफ़ा देने के लिए भी कहा था।

बाल ठाकरे की गिरफ़्तारी और तत्काल रिहाई एक उपद्रव के रूप में सामने आई। तब शिवसेना प्रमुख के ख़िलाफ़ व्यक्तिगत प्रतिशोध के रूप में भुजबल को ही दोषी ठहराया गया था। उस समय मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया था कि वाजपेयी और तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने बाल ठाकरे के ख़िलाफ़ भुजबल के लिए एनसीपी के साथ वार्ता की थी।

2000 में बाल ठाकरे की गिरफ़्तारी शिवसेना के लिए एक भावनात्मक मुद्दा रहा है। और यह इतना रहा है कि पार्टी बार-बार इस घटना के लिए एनसीपी से माफ़ी की माँग करती रही। इसलिए इस बार के विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव प्रचार के दौरान, एनसीपी नेता अजित पवार ने दावा किया था कि उन्होंने और एनसीपी के अन्य नेताओं ने बाल ठाकरे की गिरफ़्तारी का विरोध किया था और इसे एक “ग़लती” बताया था।

भुजबल, जो 1970 के दशक में शिवसेना के कॉरपोरेटर थे, 1985 में मुंबई के मेयर बने। भुजबल ने 1991 में शिवसेना छोड़ दी थी। तब आरोप यह लगाया था कि बाल ठाकरे आरक्षण पर मंडल आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने के विरोध में थे। हालाँकि, रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि भुजबल को बाल ठाकरे ने नाराज़ कर दिया था और 1990 के विधानसभा चुनावों के बाद मनोहर जोशी को विपक्ष का नेता नियुक्त किया था। जोशी 1995 में शिवसेना के पहले मुख्यमंत्री बने थे।

1995 में ही कॉन्ग्रेस और भुजबल विधानसभा चुनाव हार गए और शिवसेना ने भाजपा के साथ गठबंधन में महाराष्ट्र में अपनी पहली सरकार का नेतृत्व किया। उस समय भुजबल को राजनीति से बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए था, लेकिन उनके नए संरक्षक शरद पवार ने उन्हें विधान परिषद में विपक्ष का नेता बना दिया। इस दौरान भुजबल ने दो-तीन वर्षों में, कई घोटालों को उजागर करके अकेले दम पर शिवसेना-भाजपा सरकार पर हमला किया। यहाँ तक कि उन्होंने राज ठाकरे को माटुंगा निवासी रमेश किनी की हत्या के मामले में कटघरे में खड़ा कर दिया, जिसे उसके मकान मालिकों ने अपना घर खाली करने के लिए मजबूर किया था। तब राज ठाकरे फ़रार हो गए थे, लेकिन दोनों के बीच दुश्मनी बनी रही।

इसके बाद कहानी NCP की। कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद जब पवार ने राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी का गठन किया, तो उन्होंने भुजबल को पार्टी का पहला प्रदेश अध्यक्ष बनाया। 1999 के विधानसभा चुनावों के बाद, कॉन्ग्रेस-एनसीपी ने सरकार बनाई और भुजबल उप-मुख्यमंत्री बने।

राज्य में जब कॉन्ग्रेस-एनसीपी सरकार बनी थी तब भुजबल ने लोक निर्माण विभाग संभाला था। तब उन्होंने क्या-क्या गुल खिलाए थे, इसका पता मार्च 2016 चला। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा 2016 की जाँच में पाया गया था कि उन्होंने पीडब्ल्यूडी परियोजनाओं के लिए ठेके देने में कथित रूप से अपने कार्यालय का दुरुपयोग किया, जिससे सरकारी खज़ाने को नुकसान हुआ।

मार्च 2016 से जेल में बंद 70 वर्षीय भुजबल को 4 मई को उनके बुढ़ापे और बिगड़ती सेहत को ध्यान में रखते बॉम्बे हाईकोर्ट ने ज़मानत दे दी थी। जब भुजबल जेल में थे तब उद्धव ठाकरे ने कहा था कि राजनीतिक स्कोर का निपटान करने के लिए क़ानूनी ताक़त का इस्तेमाल कई बार किया जाता है। लेकिन राजनीति ने पलटा खाया और वही भुजबल आज ठाकरे के मंत्री हैं।

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चलती बस में TV अभिनेत्री के यौन शोषण के प्रयास में अब्दुर्रहमान मुनव्वर अली गिरफ़्तार

चलती बस में यौन शोषण की घटना में, गुरुवार (28 नवंबर) की सुबह एक 25 वर्षीय जेंडर अधिकार कार्यकर्ता चलती बस में यौन हिंसा का शिकार हुई थी। इस घटना के सिलसिले में ज़िले की कोट्टक्कल पुलिस ने 23 वर्षीय कासरगोड मूल निवासी, अब्दुर्रहमान मुनव्वर अली को गिरफ़्तार कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, यह घटना कलमाडा ट्रैवल्स की एक स्लीपर बस के अंदर सुबह 2 बजे के आसपास हुई, जब वो बस तिरुवनंतपुरम से मंगलुरु की ओर जा रही थी। आरोपित कोल्लम और पीड़ित महिला अलुवा क्षेत्र से उस बस में सवार हुए थे। बस के ऊपरी बर्थ पर आराम कर रहे अब्दुर्रहमान मुनव्वर अली ने अपोज़िट बर्थ पर सो रही महिला को यौन शोषण के मक़सद से उसके शरीर को छूने का प्रयास किया। महिला जाग गई, उसने तुरंत आपत्तिजनक प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए बस कर्मचारियों से बस को पुलिस स्टेशन ले जाने की माँग की। इस घटना का आरोपित समेत वीडियो भी बनाया गया। महिला द्वारा कोट्टक्कल पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिक़ायत दर्ज कराने के बाद आरोपित को हिरासत में ले लिया गया।

ख़बर के अनुसार, एक प्रसिद्ध टेलीविजन रियलिटी शो की अभिनेत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के ज़रिए बस के अंदर की घटना को लाइव-स्ट्रीमिंग किया। वीडियो में महिला को आरोपित से पूछताछ करते हुए देखा गया जो इस घटना में अपनी ओछी हरक़तों से इनकार कर रहा था। बाद में उसने ‘सॉरी’ कहा और अनुरोध किया कि महिला उसे पुलिस स्टेशन न ले जाए। हालाँकि, उस आदमी को नीचे उतरने और दूसरी बस लेने के लिए कहा गया, लेकिन महिला ने उसे पुलिस स्टेशन ले जाने पर ज़ोर दिया।

कोट्टक्कल पुलिस ने कहा कि आरोपित ने ख़ुद पर लगे आरोप की खंडन किया और कहा कि वो महिला की बर्थ को बंद करने की कोशिश कर रहा था।

ज़िले में एक महीने पहले भी इसी तरह की घटना सामने आई थी, जिसमें चलती बस में एक महिला के साथ दुर्व्यवहार करने के लिए कान्हानगढ़ पंजीकरण कार्यालय के उप-रजिस्ट्रार को गिरफ़्तार किया गया था। तिरुवनंतपुरम से मैंगलोर जा रही एक निजी स्लीपर बस में आधी रात के दौरान भी यह घटना घटी थी। आरोपित, जो उसकी सीट के बगल में बैठा था, उसने उसे ग़लत तरीक़े से छूने का प्रयास किया था। इसके बाद महिला ने तुरंत केरल पुलिस के हेल्पलाइन नंबर पर सम्पर्क किया और पुलिस ने त्रिशूर-कोझीकोड राजमार्ग पर सभी पुलिस स्टेशनों को सतर्क कर दिया। जब वो बस कदंबुझा पहुँची, तो पुलिस ने उस व्यक्ति को हिरासत में ले लिया।

छ: महीने पहले हुई एक अन्य घटना में, ज़िले के तेहिप्पलम पुलिस ने एक निजी स्लीपर बस के एक सह-चालक को गिरफ़्तार किया था क्योंकि उसने एक महिला यात्री के साथ दुर्व्यवहार किया था।

TMC के गुंडों ने BJP के 4 दफ्तरों को हरे रंग से पोता, लगाया अपना झंडा: जीत के बाद पगलाई ममता सरकार!

पश्चिम बंगाल की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में मिली जीत के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता पूरे जोश में हैं। इसी जोश में होश खोते हुए टीएमसी कार्यकर्ताओं ने गुरुवार (नवंबर 28, 2019) को उत्तर 24 परगना जिले के पानपुर, नैहाटी, मद्राल और बैरकपुर में चार भाजपा कार्यालयों को पेंट (TMC वाले हरे रंग से) कर दिया। साथ ही भाजपा के पार्टी दफ्तरों पर टीएमसी के झंडे भी फहराए।

चुनावी नतीजे आने के बाद टीएमसी कार्यकर्ता उत्तर 24 परगना जिले के पानपुर, नैहाटी, मद्राल और बैरकपुर में स्थित भाजपा कार्यालयों में पहुँचे और उन्होंने पार्टी के दीवारों और छतों पर पेंट कर दिया। इसके बाद उन्होंने भाजपा के कार्यालय पर टीएमसी का झंडा फहराया। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने वहाँ नारेबाजी भी की। 

इसके बाद टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। बीजेपी का आरोप है कि जश्न के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनकी पार्टी के चारों कार्यालयों पर कब्जा करने की कोशिश की। जानकारी के मुताबिक टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भाजपा के कार्यालयों पर पार्टी का नाम पेंट कर पोत दिया और बीजेपी का झंडा उतारकर अपनी पार्टी का झंडा लगा दिया।

नतीजों के बाद पार्टी की जीत का श्रेय जनता को देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि भाजपा अपने अहंकार और राज्य के लोगों को अपमानित करने का परिणाम भुगत रही है। उन्होंने कहा था कि वो इस जीत का श्रेय बंगाल की जनता को देते हैं। भाजपा अपने अहंकार और बंगाल के लोगों को अपमानित करने का परिणाम भुगत रही है।

सीएम ने कहा कि ये उन लोगों की जीत है, जिन्होंने बीजेपी को दरकिनार किया। उन्होंने कहा कि नफरत की राजनीति कारगर नहीं होती। लोगों ने बीजेपी को नकारा है। उनका कहना था कि लोगों ने बीजेपी के खिलाफ वोट किया, क्योंकि जिस पार्टी को लोगों ने केंद्र में जीत दिलाई अब उनसे नागरिकता प्रमाण माँग रही है। इसके साथ ही उन्होंने उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीएम और कॉन्ग्रेस खुद को मजबूत करने के बजाय पश्चिम बंगाल में भाजपा की मदद कर रही हैं।

बता दें कि इससे पहले भाजपा जिलाध्यक्ष फाल्गुनी पात्रा के घर TMC के गुंडों ने हमला बोल दिया था। इसमें उनके घर और गाड़ी दोनों को भारी क्षति पहुँची थी। इसके साथ ही करीमपुर से जयप्रकाश मजूमदार के साथ तृणमूल कार्यकर्ताओं ने बेख़ौफ़ होकर मारपीट की थी। उन्हें न सिर्फ़ थप्पड़ से मारा गया था, बल्कि धक्का भी दिया गया था। इस मारपीट का एक वीडियो सामने आया था।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के समय से ही प्रदेश की सत्ताधारी टीएमसी और केंद्र में सत्तासीन बीजेपी के कार्यकर्ताओं में झड़प की कई घटनाएँ हो चुकी हैं। बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह पर भी हमले हुए, इन हमलों के लिए भी टीएमसी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया था।

अरबाज ने प्रेमजाल में फँसाया, फिर 3 दोस्तों के साथ किया गैंगरेप: कैमूर में लोगों ने जला डाला आरोपित का घर

बिहार के कैमूर में नाबालिग के साथ गैंगरेप कर वीडियो वायरल करने के मामले में लोगों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा। भारी तादाद में पुलिस तैनात होने के बाद भी वहाँ आक्रोशित लोग जमा होकर अपना गुस्सा जाहीर कर रहे हैं। पथराव, आगजनी, तोड़फोड़ और फायरिंग जैसी घटनाएँ तो वहाँ सोमवार से थोड़ी-थोड़ी देर में हो रही हैं। ऐसे माहौल में कल वहाँ 3 लोगों के घायल होने की खबर भी आई, जिन्हें बाद में पास के अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इसके अलावा ये भी मालूम चला कि गुस्साए लोगों ने चार आरोपितों में से एक का घर जला डाला।

जानकारी के मुताबिक इलाके में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ रहा हैं और धारा 144 भी तत्काल प्रभाव से लागू की जा चुकी है। खुद वहाँ के एसपी और डीएम माइक की मदद से बार-बार शांति बहाल करने की अपील कर रहे हैं। इस उपद्रव में अब तक करीब आधा दर्जन दुकानें आग के हवाले की जाने की खबर हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गुरुवार को पुलिस और प्रशासन को जानकारी मिली थी कि गैंगरेप के विरोध में बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन के लिए सुबह 10 बजे मोहनिया में एकत्रित होंगे। जिसके बाद सुरक्षा कारणों से सुबह ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती मोहनिया के विभिन्न चौक-चौराहों पर की गई। लेकिन, इसी बीच करणी सेना के लोग चांदनी चौक पर पहुँच गए और उन्होंने पुलिस को माँग पत्र दिया। इस पत्र में आरोपितों को फांसी की माँग की गई थी। इसके बाद धीरे-धीरे इलाके में बड़ी संख्या में भीड़ इकट्ठा हो गई और सब आरोपित के घर को जलाने के लिए आगे बढ़ने लगे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें चेन बनाकर रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन विरोध कर रहे सभी लोग दूसरे रास्ते से उसके घर में घुस गए।

इसके बाद इलाके में दोनों तरफ से पथराव शुरू हुआ। स्थिति इतनी बिगड़ गई की पथराव से मामला गोलीबारी तक पहुँच गया। करीब 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका। पुलिस ने दावा किया कि गुरुवार शाम तक दोनों पक्ष की ओर से 18 उपद्रवियों की गिरफ्तार हो चुकी है।

बता दें रविवार को वीडियो वायरल का मामला सामने के बाद से ही इलाके में तनाव वाली स्थिति बनी हुई। लोग लगातार लड़की के लिए इंसाफ की माँग करते हुए गुनहगारों को कड़ी से कड़ी सजा देने की गुहार लगा रहे हैं। गुरुवार से पहले सोमवार को भी आक्रोशित लोग आरोपित के घर की ओर उसे जलाने के लिहाज से आगे बढ़ चुके थे, लेकिन उस समय पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करके घटना को होने से पहले रोक लिया था। इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने राज्य में इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया था और शांति की अपील की गई थी।

अरबाज, सिकंदर, सोनू और कलाम ने नाबालिग को कार में खींचा, गैंगरेप कर Video किया वायरल

नाबालिग से गैंगरेप पर लोगों का फूटा गुस्सा: अरबाज गिरफ्तार, कलाम और सिकंदर अब भी फरार

कैमूर गैंगरेप मामला: अरबाज पर कार्रवाई के बाद अन्य आरोपितों को पकड़ने की माँग, आगजनी, खूनी संघर्ष

‘एक भी सबूत दिखाओ’ – चिदंबरम के चैलेंज पर ED ने 16 देशों में 12 संपत्तियों और 12 बैंक खातों का दिया डिटेल

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार (नवंबर 28, 2019) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दावा किया कि उसने जाँच के दौरान पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के 12 बैंक खातों की पहचान की है, जिनमें आईएनएक्स मामले से मिली रकम जमा की गई। ईडी ने कोर्ट को बताया कि पी चिदंबरम की संपत्तियाँ और बैंक खाते 16 देशों में मौजूद हैं। ईडी ने कहा कि चिदंबरम की 16 देशों में 12 संपत्तियाँ और 12 बैंक खाते पाए गए हैं।

न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश राय की पीठ के समक्ष ईडी की ओर से सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने दावा किया कि पूर्व वित्त मंत्री हिरासत में होने के बावजूद महत्वपूर्ण गवाहों पर अपना प्रभाव रखते हैं। हिरासत में 100 दिन पूरे करने वाले वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता की जमानत याचिका का विरोध करते हुए ईडी की तरफ से कहा गया कि अगर उन्हें जमानत दिया जाता है, तो वो महत्वपूर्ण गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। 

उनका दावा है कि पी चिदंबरम ने ‘निजी लाभ’ के लिए वित्त मंत्री के ‘प्रभावशाली कार्यालय’ का इस्तेमाल किया और इस अपराध की रकम को हड़प गए। निदेशालय का यह भी कहना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री होने की वजह से पी चिदंबरम की उपस्थिति ही गवाहों को भयभीत करने के लिये काफी है।

तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा, “ऐसा नहीं है कि पी चिदंबरम निर्दोष हैं, जिन्हें अंधेरे में रखा गया। यह मामला केवल INX मीडिया का ही नहीं है, बल्कि इसमें अन्‍य कंपनियाँ भी शामिल हैं। इन कंपनियों ने भी विदेशी निवेश प्रवर्तन बोर्ड के समक्ष अपना आवेदन दायर किया था।” उन्‍होंने आगे बताया कि लॉन्ड्रिंग व शेयर होल्डिंग पैटर्न में 16 कंपनियाँ शामिल थीं। 16 देशों में 12 विदेश खाता और 12 विदेशी संपत्तियों की पहचान की गई है, जिसका लिंक पी चिदंबरम से हो सकता है।

तुषार मेहता ने जस्‍टिस आर भानुमति की अध्‍यक्षता वाली बेंच से कहा कि ये आर्थिक अपराध गंभीर प्रकृति के हैं। जब कार्यालय में लोग भ्रष्ट गतिविधियों में लिप्त होते हैं, तो ये न केवल समाज, देश और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि पूरे सिस्टम के प्रति आम आदमी के विश्वास को भी हिलाकर रख देते हैं। साथ ही उन्होंने यह तर्क भी दिया कि इस तरह के अपराध एक झटके में नहीं किए जाते, बल्कि इसे विचार-विमर्श के साथ किया जाता है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में शेल कंपनियों का एक जाल देश और विदेश में ऐसे लोगों द्वारा स्थापित किया गया था, जो उनके एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब अपराध किया जा रहा था, तब वह (चिदंबरम) केवल एक तमाशाई/ दर्शक नहीं थे। चिदंबरम ने हिरासत में होने के बावजूद गवाहों को प्रभावित करना जारी रखा और इसी वजह से तीन प्रमुख गवाहों ने उनके सामने गवाही देने के लिए उपस्थित होने से इनकार कर दिया।

चिदंबरम की इस दलील का विरोध करते हुए कि वह एक कठोर अपराधी नहीं है और उनके साथ “रंगा या बिल्ला” की तरह पेश नहीं आना चाहिए, मेहता ने कहा कि आर्थिक अपराध सबसे बड़ा अपराध है और इसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए। वहीं चिदंबरम की तरफ से वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि उनके (चिदंबरम) के ऊपर लगाए जाने वाले आरोप निराधार हैं और ये आरोप उनकी छवि को धूमिल करने के लिए लगाए जा रहे हैं। चिदंबरम ने ED को चैलेंज करते हुए INX मीडिया घोटाला मामले में एक भी सबूत दिखाने को कहा था। इसी की प्रतिक्रिया में ED ने कोर्ट को 16 देश और 12 खातों से संबंधित जानकारी दी।

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देवेंद्र फडणवीस छोड़ रहे CM का सरकारी आवास: कुछ कब्जा जमा लेते हैं… तो कुछ ले जाते हैं टोटियाँ

महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस गठबंधन की सरकार बन गई है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है। उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने से पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकारी आवास पर कब्जा जमाए बैठने के बजाय नए घर की तलाश शुरू कर दी। और शायद उन्हें नया आसरा मिल भी गया है।

फडणवीस ने दक्षिण मुंबई में स्थित सरकारी आवास खाली करना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री आवास के पास तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गुरुवार (नवंबर 28, 2019) को दोपहर में पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी का एक वाहन मालाबार हिल इलाके में स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ‘वर्षा’ पहुँचा। फडणवीस के सरकारी आवास को खाली करने के बाद इसे फिर से नए मुख्यमंत्री के लिए तैयार किया जाएगा और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री के रूप में यहाँ रहेंगे।

बता दें कि भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार (नवंबर 26, 2019) को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। जानकारी के मुताबिक अक्टूबर 2014 में फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका परिवार मुंबई आ गया था और अब वो लोग मुंबई में ही रहेंगे। नागपुर दक्षिण पश्चिम सीट से जीत कर आए फडणवीस भाजपा विधायक दल के नेता हैं, साथ ही बताया जा रहा है कि नई विधानसभा में वह नेता प्रतिपक्ष बन सकते हैं।

इससे पहले दोबारा बनी मोदी सरकार में भाजपा नेता अरूण जेटली ने कोई भी ज़िम्मेदारी लेने से जब इनकार कर दिया था, तो उन्होंने भी अपना सरकारी बंगला खाली कर दिया था और अपने प्राइवेट बंगले में शिफ्ट हो गए थे। इसके साथ ही उन्होंने अपने कर्मचारियों की संख्या में भी कटौती कर दी थी। उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था कम कर दी थी और सरकारी गाड़ियाँ भी वापस कर दी थीं।

वहीं कुछ ऐसे भी पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और पूर्व सरकारी अधिकारी भी हैं, जो अपनी सरकारी सेवा समाप्त होने के बाद भी सरकारी बंगलों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। हालाँकि अब वो इसके हकदार नहीं हैं, लेकिन फिर भी बार-बार नोटिस दिए जाने के बाद भी वो बंगला खाली नहीं कर रहे हैं।

बिहार से आने वाले पूर्व सांसद पप्पू यादव जैसे कुछ ऐसे भी नेता हैं, जिन्हें सरकार ने बंगला खाली करने को कहा तो वे उसे ऐसे छोड़ कर गए हैं कि बिना भारी मरम्मत के किसी ‘माननीय’ के तो दूर की बात, किसी आम-से-आम आदमी के रहने लायक नहीं बचा है। उन्होंने आवास के कमरों से खिड़की-दरवाज़े के साथ ही दीवारों से टाइलें निकाल ली गईं थीं। इससे पहले ये हरकत उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हारने के बाद पहले तो उन्होंने ये-वो बहाने कर के बंगला छोड़ा ही नहीं, और जब छोड़ा, तो उसकी टोंटियाँ तक साथ ले गए।

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26 साल की ‘प्रीति रेड्डी’ का रेप, मर्डर: शमसाबाद में मिली आधी जली लाश, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

हैदराबाद के बाहरी इलाके शमसाबाद में 26 वर्षीय महिला डॉक्टर की जली हुई लाश मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। वारदात की सूचना मिलते ही जहाँ पुलिस सक्रिय रूप से मामले की जाँच में जुट गई, तो वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया यूजर्स भी कल रात से प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) कोल्लुरु स्थित पशु चिकित्सालय में काम करती थीं। बुधवार (नवंबर 27, 2019) को भी वह वहीं गई हुईं थीं। उन्होंने अपनी स्कूटी को शादनगर के टोल प्लाजा शमसाबाद के पास पार्क किया था। लेकिन रात में जब वह वहाँ वापस लौटीं तो उनकी स्कूटी पंक्चर थी। उन्होंने इसकी सूचना अपनी बहन को दी और कहा कि उन्हें डर लग रहा है, क्योंकि उनके आसपास सिर्फ लोडिंग ट्रक और अनजान लोग हैं।

प्रीति को डरा हुआ देखकर उनकी बहन ने उन्हें स्कूटी पार्क करके कैब से आने की सलाह दी। लेकिन प्रीति ने उन्हें बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें मदद ऑफर की है, इसलिए वो थोड़ी देर में कॉल बैक करेंगी।

इस वाकये के बाद प्रीति का कोई फोन नहीं आया, जब परिजनों ने उनसे कुछ मिनट बाद संपर्क करने का प्रयास किया तो उनका फोन स्विच ऑफ हो गया। परेशान परिवार वाले खुद प्रीति को ढूँढने के लिए टोल प्लाजा की ओर निकले। जब वह नहीं मिलीं तो उन्होंने थक हारकर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

फेसबुक पर भी प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) को लेकर दिख रहा गुस्सा

शिकायत मिलने के बाद गुरुवार (नवंबर 28, 2019) की सुबह पुलिस को हैदराबाद-बेंग्लुरु हाईवे के पास एक महिला का जला हुआ शव दिखाई पड़ने की जानकारी मिली। जब घटनास्थल पर पहुँची पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर प्रीति के घरवालों को संपर्क किया तो उन्होंने उसके कपड़े और गले का लॉकेट देखकर पुष्टि कर दी कि वो जली हुई लाश प्रीति की ही है। पुलिस ने मौत से पहले रेप की भी शंका जाहिर की। पुलिस की यह शंका निराधार नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि जहाँ प्रीति की आधी जली हुई लाश मिली, वहाँ से 100 मीटर की दूरी पर उसका अंडरवियर पाया गया है।

बता दें कि इस मामले में पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज खँगाली जा रही है, प्रीति के कॉल रिकॉर्ड्स चेक किए जा रहे हैं, पता लगाने की कोशिश जारी है कि प्रीति को मदद ऑफर करने वाले लोग कौन थे। इसके अलावा शमसाबाद के डिप्टी कमिश्नर प्रकाश रेड्डी ने मौका मुआयना करने के बाद कहना है कि अज्ञात व्यक्ति ने महिला की हत्या कर उसके शव को आग लगा दी।

यहाँ बता दें कि इस खबर की सूचना मिलने के बाद ही ट्विटर पर और फेसबुक पर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के लिए लोग न्याय की गुहार लगा रहे हैं, साथ ही लड़कियों के लिए चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि अब हमारा समाज इतना भी सभ्य नहीं बचा कि एक लड़की किसी सड़क पर अकेले खड़ी हो सके।

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