दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आज (नवंबर 25, 2019) राजधानी में एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए IED के साथ 3 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। तीनों आतंकी ISIS से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक सामान बरामद किया है।
#JustIn – A terror strike averted and three persons apprehended with IEDs by Delhi Police’s Special Cell. More details awaited.
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के डीसीपी प्रमोद कुशवाहा ने इस खबर की जानकारी देते हुए बताया कि, राजधानी में एक बड़े आतंकी हमले को नाकाम किया गया है। साथ ही IED विस्फोटक के साथ 3 आतंकी गिरफ्तार भी किए गए हैं, जो ISIS से प्रेरित मॉड्यूल से थे। ये आतंकी दिल्ली और असम के लोकल मेले गोलपारा में बड़ा हमला करने की साजिश रच रहे थे। इन पकड़े गए आतंकवादियों के नाम इस्लाम, रणजीत अली और जमाल है। इन्हें असम से गिरफ्तार किया गया है।
DCP Pramod Kushwaha, Delhi Police Special Cell: The three arrested persons were from an ISIS inspired module and were planning to attack using an IED blast a local fair in Goalpara (Assam). They were planning to replicate it in Delhi. pic.twitter.com/mjRkIk8EN1
गौरतलब है कि बीते दिनों दिल्ली में जैश के 4 आतंकियों के घुसने की सूचना मिलने के बाद से राष्ट्रीय राजधानी अलर्ट पर रह चुकी हैं और अब इन आतंकियों की गिरफ्तारी ने इस बात को और पुख्ता कर दिया है कि अलग अगल संगठन के आतंकी इस समय दिल्ली पर घात लगाए बैठे हैं।
ANI quotes DCP Pramod Kushwaha, Delhi Police special cell: A terror strike has been averted as three persons have been apprehended with Improvised explosive devices (IED) pic.twitter.com/2RsMuQ3rdF
#BREAKING: Delhi Police Special Cell arrests three terrorists from Assam with Improvised Explosive Device (IED). Major terror attacks averted in Assam & New Delhi. Terrorists were inspired by #ISIS Bangladesh module. DCP Special Cell to give details shortly in a press conference.
पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना में हिंदू लड़की नमृता चंदानी की संदिग्ध परिस्थितियों पर हुई मौत मामले में पुलिस द्वारा की गई लापरवाही का एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अभी तक जहाँ रिपोर्ट्स का हवाला देकर कहा जा रहा था कि नमृता के शरीर पर पुरुष का डीएनए पाया गया है। तो वहीं दूसरी ओर, ताजा जानकारी के अनुसार पाकिस्तानी मी़डिया द्वारा खुलासा किया गया है कि नमृता के डीएनए जाँच के लिए बेहद जरूरी चीजें फॉरेंसिक लैब में समय से भेजी ही नहीं गईं। इसमें उसका दुपट्टा और उसके फिंगरप्रिंट्स जैसी चीजें शामिल थीं। जिनके समय से लैब में न पहुँचने के कारण रिपोर्ट में सारी बातें स्पष्ट नहीं हो पाईं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नमृता के गले से बंधे दुपट्टे की डीएनए रिपोर्ट लरकाना पुलिस को मिल गई है। जिसे लाहौर स्थित फरेंसिक लैब के महानिदेशक ने जारी किया है। हालाँकि, पुलिस ने इसे न्यायिक जाँच अधिकारी को सौंप दिया है। लेकिन वहाँ की मीडिया रिपोर्ट्स ने खुलासा किया है कि फ़ोरेंसिक विशेषज्ञों को दुपट्टे से त्वचा के टुकड़े या खून के धब्बे नहीं मिले, जिसके कारण उनका डीएनए हासिल नहीं किया जा सका। उनका कहना है कि कपड़े पर मौजूद त्वचा के टुकड़ों से 72 घंटे के अंदर डीएनए हासिल किया जा सकता है, लेकिन अगर इससे देर हो तो फिर डीएनए मिलना नामुमकिन हो जाता है।
बता दें, नमृता चंदानी की मौत के बाद परिवारजनों द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बाद भी उसके गले में बंधे दुपट्टे को मौत के एक हफ्ते बाद फॉरेंसिक लैब भेजा गया था, जिसकी वजह से डीएनए नहीं लिया जा सका।
इसके अलावा पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट में यह भी खुलाया किया गया है कि नेशनल डेटाबेस ऐंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी (नादरा) ने नमृता मामले में भेजे गए उँगलियों के निशान को वापस लरकाना पुलिस को यह कहते हुए भेज दिया है कि उसके डेटाबेस में मौजूद निशानों से इन उंगलियों के निशान का मिलान नहीं हो सका है और अब इनकी आगे जाँच के लिए जरूरत नहीं है।
जानकारी के अनुसार नादरा ने लरकाना पुलिस को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पुलिस द्वारा भेजे गए उँगलियों के निशानों की गुणवत्ता बेहद खराब थी। बता दें, पुलिस ने नमृता की मौत के एक महीने बाद उंगलियों के इन निशानों को भेजा था।
उल्लेखनीय है कि इस खुलासे के बाद पुलिस पर उठ रहे मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए लरकाना के एसएसपी मसूद बंगश ने सफाई पेश की है। उन्होंने कहा है कि पुलिस को घटना की जानकारी 3 घंटे बाद मिली थी। पुलिस जब तक हॉस्टल पहुँची, तब तक वहाँ कई लोग क्राइम सीन (नमृता के कमरे में) जा चुके थे। उसकी सहपाठियों ने खुद बताया कि उन्होंने नमृता को देखकर उसके गले से दुपट्टा निकाल दिया था और उसके शव को ठीक से लिटाया था। जिस कारण से पुलिस तत्काल कोई फिंगरप्रिंट जाँच के लिए नहीं भेज सकी।
गौरतलब है कि नमृता का शव दो महीने पहले 16 सितंबर को लरकाना के शहीद मोहतरमा बेनजीर भुट्टो मेडिकल यूनिवर्सिटी में उनके हॉस्टल के कमरे में छत के पंखे पर लटका मिला था। वह विश्वविद्यालय में बैचलर ऑफ डेंटर सर्जरी की पढ़ाई कर रही थीं और घोटकी के मीरपुर मथेलो की रहने वाली थीं, जहाँ इस घटना से कुछ दिन पहले ही दंगे हुए थे।
नमृता की मृत्यु पर उनके भाई डॉ विशाल सुंदर का कहना था कि उनकी बहन के शरीर के अन्य हिस्सों पर भी निशान मिले हैं, जैसे कोई उसे पकड़ रहा हो। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी ये बताया गया था कि गला घोंटने के साफ़ निशान दिखाई दे रहे थे। लेकिन फिर भी वहाँ की पुलिस और प्रशासन शुरू से इस घटना को आत्महत्या साबित करने की कोशिश करता रहा। कुछ दिन बाद वहाँ की एक अदालत ने इस मामले में न्यायिक जाँच की इजाजत देने से भी इंकार कर दिया था और अब ये रिपोर्ट जो बताती है नमृता ने जहर खाया।
महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम पल-पल बदल रहा है। चुनाव से पहले भाजपा-शिवसेना एक साथ लड़ी और कॉन्ग्रेस ने एनसीपी के साथ मिल कर चुनाव लड़ा। चुनाव के बाद शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री का पद लेने के लिए अड़ गई और उसने कॉन्ग्रेस व एनसीपी के साथ बातचीत शुरू कर दी। पहले आदित्य ठाकरे को सीएम बनाने की बात कही गई, बाद में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बनी। तभी अजित पवार के साथ एनसीपी का एक धड़ा भाजपा से जा मिला और देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अजित पवार उप-मुख्यमंत्री बने। अब एनसीपी द्वारा अजित पवार को मनाने की कोशिशें जारी हैं।
ऑपइंडिया को सूत्रों ने बताया है कि एनसीपी के 27 विधायक अजित पवार के साथ हैं। सूचना मिली है कि ये 27 विधायक फ्लोर टेस्ट के दौरान भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के पक्ष में वोट करेंगे। अजित पवार लगातार ट्विटर पर मिल रही बधाइयों का धन्यवाद दे रहे हैं, इसीलिए लगता नहीं है कि उन्हें मनाने की कोशिशें कामयाब होंगी। पूर्व उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल ने अजित पवार को बताया है कि पार्टी में 30-35 ऐसे विधायक हैं, जो अजित की अनुपस्थिति में असहज महसूस कर रहे हैं। ये आँकड़ा बढ़ भी सकता है।
मिलिंद नार्वेकर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के पर्सनल असिस्टेंट हैं। शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे पूर्व मंत्री हैं। ऑपइंडिया के सूत्रों ने पुष्टि की है कि शनिवार (नवंबर 23, 2019) की देर शाम ये दोनों नेता आपस में ही लड़ बैठे। नार्वेकर ने शिंदे पर भाजपा का एजेंट होने का आरोप लगाया। इससे पहले भी ख़बर आ चुकी है कि शिवसेना के कई विधायक उद्धव ठाकरे से असंतुष्ट हैं और भाजपा के साथ गठबंधन के पक्षधर हैं। एनसीपी और शिवसेना के इस आंतरिक कलह से कॉन्ग्रेस भी सकते में आ गई है। उद्धव ने सोनिया से मुलाक़ात के दौरान भी उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी पार्टी में सब ठीक है।
मीडिया लगातार ऐसी ख़बरें चला रही है कि एनसीपी की बैठक उसके कुछ ही विधायक अनुपस्थित थे, जबकि उस बैठक में एनसीपी के कई विधायक नहीं पहुँचे थे। उस बैठक में उद्धव ने भी एनसीपी के विधायकों को ढाँढस बँधाया कि सब ठीक हो जाएगा।
All BJP MLAs today congratulated Shri @Dev_Fadnavis & Shri @AjitPawarSpeaks for taking oath as CM & DCM of Maharashtra. State President @ChDadaPatil moved this resolution and was seconded by many leaders Vinay Kore, Mahadev Jankar, Sadabhau Khot, some independent and BJP MLAs. pic.twitter.com/cvOvDgVaRe
कॉन्ग्रेस की स्थिति और भी बुरी है। राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और अहमद पटेल विधायक दल के नेता के चुनाव को लेकर एकमत नहीं हैं। कॉन्ग्रेस के विदर्भ क्षेत्र के कई विधायक असंतुष्ट हैं। हो सकता है कि वो फ्लोर टेस्ट के दौरान सदन में आएँ ही नहीं। राहुल गाँधी धड़ा चाहता था कि शिवसेना के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं हो, जबकि सोनिया गाँधी का धड़ा गठबंधन के पक्ष में था। अहमद पटेल इस धड़े का नेतृत्व कर रहे थे। पटेल की इच्छा है कि बीएमसी में कॉन्ग्रेस का प्रभाव बने। इसका कारण बीएमसी का भारी-भरकम बजट है। उद्धव ने भी सोनिया को आश्वस्त किया था कि बीएमसी में कॉन्ग्रेस को हिस्सा दिया जाएगा।
ऑपइंडिया ने भाजपा के विश्वस्त सूत्रों से बातचीत की, जिसके बाद पता चला कि पार्टी सदन में बहुमत साबित करने को लेकर एकदम आश्वस्त है। विश्वासमत के दौरान 170 वोट हासिल करने का उसे पूरा यकीन है। भाजपा न सिर्फ़ एनसीपी और निर्दलीय, बल्कि शिवसेना के कई विधायकों को भी अपने पाले में मान रही है। चूँकि शिवसेना के कई विधायकों की आपस में लड़ाई की ख़बरें सार्वजनिक हो चुकी हैं, भाजपा की उधर भी नज़रें हैं। ख़बर आई थी कि कई शिवसेना विधायकों ने उस होटल को छोड़ दिया था, जिसमें वो पहले रुके हुए थे।
महाराष्ट्र का सियासी संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष अपनी आबरू बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने पहुँच गया है। फडणवीस सरकार के गठन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से तीखी बहस हुई। मामले में बहस पूरी होते ही अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
दरअसल अदालत में बहस के दौरान देवेन्द्र फडणवीस का पक्ष रखते हुए वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि विपक्ष ने सरकार बनाने का दावा तक पेश नहीं किया। उन्होने यहाँ तक कह दिया कि विपक्ष के इन दलों ने एक भी साझा प्रेस कांफ्रेंस नहीं की, न ही इन तीन दलों का कोई एक वकील है।
बता दें कि महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे आने के बाद शिवसेना और भाजपा के बीच मतभेद गहरा गए थे। हालाँकि चुनाव में दोनों दलों ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन के नाम वोट माँगा था लेकिन बाद में दोनों दलों के बीच सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर मतभेद के चलते यह गठबंधन टूट गया। शिवसेना इस सरकार में आधे कार्यकाल के लिए उद्धव ठाकरे को सीएम बनाने की माँग कर रही थी जबकि भाजपा की ओर से यही कहा गया कि पूरे पाँच साल तक मुख्यमंत्री तो फडणवीस ही रहेंगे।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रोहतगी ने कहा कि चुनाव नतीजे आने के बाद शिवसेना और भाजपा में मतभेद गहरा गए। इसके बाद अजित पवार ने उन्हे समर्थन देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि अजित ने दावा किया कि उनके पास 53 विधायक हैं और वह उन विधायकों के दल के नेता। इसके बाद ही उन्होंने (भाजपा ने) राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया।
रोहतगी ने अपनी दलील में विधायकों की खरीद-फरोख्त की बात को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि एनसीपी के एक पवार हमारे साथ हैं तो दूसरे उनके विरोध में, मगर इनके पारिवारिक झगडे से हमें (भाजपा को) कोई लेना देना नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि अजित पवार ने उन्हें (भाजपा को) 53 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी भी दिखाई थी। इस चिट्ठी में उन्होंने कहा था कि विधानसभा में मत-विभाजन होगा मगर हम चाहते हैं कि देवेन्द्र फडणवीस को मुख्यमंत्री की शपथ दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि यहाँ एक संवैधानिक पहलू शामिल है, हो सकता है कि विपक्ष विधायकों के दस्तखत वाली चिट्ठी को ही फर्जी कह दे।
हरियाणा में भाजपा ने दुष्यंत चौटाला की जेजेपी और महाराष्ट्र में अजित पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी के धड़े के साथ सरकार क्या बनाई, फिर से पुराना रोना रोया जा रहा है। गोवा और मणिपुर में भाजपा ने किस तरह सरकार बनाई, इसे याद किया जा रहा है। इन दो राज्यों में ज्यादा वोट पाने के बावजूद भाजपा को सीटें कम मिली थी और उसने छोटे दलों को साध कर सरकार बना ली।
दूसरे शब्दों में कहे तो यह हमारी चुनावी लोकतंत्र की वो विशेषता है जिसके कारण कम वोट पाने के बावजूद कॉन्ग्रेस को ज्यादा सीटें मिली। संसदीय प्रणाली की इसी अनूठेपन का फायदा उठा भाजपा ने दोनों राज्यों में सरकार बना ली।
यकीनन, अपनी दलगत निष्ठा के आधार पर लोग यह तय करेंगे कि किस पार्टी ने ‘लोकतंत्र की हत्या’ की। इसी दरम्यान मेरी नजर इस ट्वीट पर पड़ी;
चिदंबरम के इस ट्वीट को देख कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि इसमें कितनी गंभीरता छिपी है। ऐसा लगता है कि यह ट्वीट ‘बूरा ना मानो होली है’ वाले मूड में की गई है। महाराष्ट्र के सियासी उठापठक के बाद भी कुछ इसी तरह की बातें सुनाई पड़ रही। खैर, इन बातों को छोड़िए। मैं आपको 2005 के एक राजनीतिक घटना के बारे में बताता हूँ। यह पॉलिटिकल थ्रिलर उसी झारखंड में देखने को मिला था जहॉं हाल ही में विधानसभा चुनाव होने हैं।
फरवरी 2005 में झारखंड विधानसभा चुनाव (कुल 81 सीटें) के परिणाम (PDF लिंक) यहाँ दिए गए हैं।
उस चुनाव में भाजपा सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी थी। उसने 63 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 30 पर जीत हासिल की थी। भाजपा के चुनाव पूर्व गठबंधन सहयोगी जद (यू) ने 18 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 जीते। इस तरह 81 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए को 36 सीटें मिली थी।
यूपीए में शामिल दल उनसे काफी पीछे थे। जेएमएम को 17 और कॉन्ग्रेस को 9 सीटें मिली थी। यदि एनसीपी को मिली 1 सीट भी इनके खाते में जोड़ दे तो संख्या 27 ही हो रही थी।
नतीजों के बाद भाजपा को पाँच अन्य विधायकों का समर्थन प्राप्त हुआ: 2 AJSU (ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन) से, झारखंड पार्टी के इकलौते विधायक और दो अन्य निर्दलीय का। इस तरह एनडीए का आँकड़ा 41 सीटों तक पहुँच गया, जो स्पष्ट बहुमत था।
(नोट: सांगठनिक ढॉंचे और कायदों के अभाव के कारण कई मीडिया रिपोर्टों में भाजपा को समर्थन करने वाले पॉंच विधायकों को निर्दलीय बताया जाता है)
भाजपा ने विधिवत रूप से सरकार बनाने का दावा किया और झारखंड के माननीय राज्यपाल के समक्ष पाँच समर्थक विधायकों की परेड करवाई।
लेकिन, राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी ने कुछ ऐसा किया जिसने पूरे झारखंड को स्तब्ध कर दिया। उन्होंने झामुमो (झारखंड मुक्ति मोर्चा) सुप्रीमो शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। सोरेन को सीएम और स्टीफन मरांडी को डिप्टी सीएम के रूप में शपथ दिलाई गई।
यह कितना अनैतिक था इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि डिप्टी सीएम बने मरांडी जेएमएम से बगावत कर चुनाव जीते थे। वे सीएम बने शिबू सोरेन के बेटे हेमंत को हराकर विधानसभा पहुॅंचे थे। असल में हेमंत उस चुनाव में दुमका की सीट पर 20 हजार वोट हासिल कर तीसरे नंबर पर रहे थे। दूसरे नंबर पर भाजपा का उम्मीदवार था।
राज्यपाल के इस कदम के विरोध में एनडीए ने राज्यव्यापी बंद और आंदोलन का आह्वान किया, लेकिन यह बेहद कारगर नहीं रहा। उनके लिए एकमात्र विकल्प यह था कि 41 विधायकों की राष्ट्रपति कलाम के सामने परेड करवाने के लिए दिल्ली ले जाया जाए, जो जनता के दृष्टिकोण में “नैतिक जीत” होती। इसके लिए 3 मार्च 2005 की तारीख चुनी गई। रांची से दिल्ली की उड़ान 90 मिनट की है। 5 निर्णायक निर्दलीयों के साथ 41 विधायकों को दिल्ली लाना पहली नजर में सामान्य सी बात लगती है।
हाँ, आपने सही पढ़ा है! उप मुख्यमंत्री स्टीफन मरांडी और उनके लोगों ने रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे के रनवे पर उस चार्टर्ड विमान को रोक दिया जो उड़ान भरने के लिए तैयार था! विमान को वापस लौटने का आदेश दिया गया और फिर विमान में सवार निर्दलीय विधायकों पर अपने कब्जे में लेने के लिए छापा मारा गया। यह कोई हॉलीवुड फ़िल्म की स्क्रिप्ट नहीं है। यह हमारी यूपीए सरकार द्वारा निर्मित एक कम बजट की थ्रिलर फ़िल्म थी।
यूपीए ने इन पाँच विधायकों को पकड़ने के बाद क्या किया?
कुछ भी तो नहीं, क्योंकि विमान में पाँच विधायक बिल्कुल भी नहीं थे।
जब कॉन्ग्रेस सरकार रांची हवाई अड्डे पर व्यस्त थी, पाँच निर्दलीय राज्य की सीमा से बाहर निकल रहे थे। वे कहॉं जा रहे थे? स्वभाविक तौर पर भाजपा शासित पड़ोसी प्रदेश छत्तीसगढ़। वे वहॉं महफूज रह सकते थे। लेकिन, वे छत्तीसगढ़ नहीं जा रहे थे। यूपीए सरकार को जब अहसास हुआ कि विधायक उनके दायरे से निकल चुके हैं तो छत्तीसगढ़ पहला राज्य था जिससे लगी सीमा सील की गई। तो यकीनन वे ओडिशा जा रहे होंगे? उस समय एनडीए के हिस्सा रहे वहॉं के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पास भी खुद को महफूज मान सकते थे।
आपकी सोच एक बार फिर गलत साबित हो सकती है। असल में विधायक माकपा शासित पश्चिम बंगाल की तरफ निकल चुके थे। उन्हें रोकने के लिए हर तिकड़म में जुटी यूपीए सरकार ने बंगाल की सीमा से सटे इलाकों में सबसे कम निगरानी रख रखी थी। शायद यह सोचकर कि भाजपा कभी भी वाम शासित प्रदेश को विधायकों को भेजने के लिए नहीं चुन सकती!
दुर्गापुर पहुॅंचने के बाद विधायकों को वेंकैया नायडू का संदेशा मिला। उन्होंने विधायकों से खड़गपुर रेलवे स्टेशन जाने को कहा। वहॉं से 3 मार्च को रात के 2:30 बजे उन्होंने भुवनेश्वर की ट्रेन पकड़ी। तीन मार्च की सुबह पॉंच बजे आखिरकार वे पूरी तरह महफूज हो चुके थे।
इस बीच, भाजपा लगातार अपने बयानों से यूपीए के रणनीतिकारों को गुमराह करती रही। उन्हें बार-बार भ्रम में डालती रही। अफवाह उड़ी कि विधायक अभी भी रांची में हैं। इसके बाद कहा गया कि वे दिल्ली में हैं। एक मौके पर भाजपा ने यह भी हवा उड़ाई कि विधायक अहमदाबाद में हैं।
उस दोपहर, पाँच समर्थक विधायकों ने आख़िरकार भुवनेश्वर से दिल्ली के लिए इंडियन एयरलाइंस की फ़्लाइट पकड़ी। फिर उनकी राष्ट्रपति के सामने परेड कराई गई।
नौ दिन बाद, झारखंड के राज्यपाल सिब्ते रज़ी ने शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री के पद से बर्खास्त कर दिया और अर्जुन मुंडा को राज्य में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।
नोट: निजी तौर पर मैं गोवा में सरकार बनाने के लिए भाजपा के प्रयासों का समर्थन नहीं करता। यदि वे सरकार नहीं बनाते तो वह पर्रिकर और पार्टी की छवि के लिए ज्यादा बेहतर होता।
अभिषेक बनर्जी की मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई खबर पढ़ने के लिए आप यहॉं क्लिक कर सकते है। इसका हिंदी अनुवाद प्रीति कमल ने किया है।
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन दिन प्रतिदिन अधिकाधिक नकारात्मकता से भरता जा रहा है। अब जेएनयू कैम्पस में ब्राह्मणविरोधी नारे लिखे जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई है, जिसमें जेएनयू के छात्रों ने कैम्पस में ‘ब्राह्मण, भारत छोड़ो’ लिखा हुआ है। इस आपत्तिजनक नारे के जरिए जेएनयू के छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस फोटो को ट्वीट करते हुए ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के पत्रकार राजशेखर झा ने पूछा कि अगर इस नारे में ब्राह्मण की जगह दलित या मुस्लिम लिखा होता, तब क्या होता?
आगे उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि अगर ब्रह्मण की जगह दलित या मुस्लिम लिखा होता तो कई कथित लिबरल व सेक्युलर लोग ‘नॉट माय इंडिया’ (ये मेरा भारत नहीं हो सकता) जैसी ‘कूल’ बातें लिख कर सोशल मीडिया पर ज़हर फैला रहे होते। लेकिन, ब्राह्मणों के बारे में आपत्तिजनक बातें लिखी गईं और किसी के कानों में जूँ तक न रेंगी। झा ने जेएनयू के छात्रों को सलाह देते हुए कहा कि जिसने भी ऐसा किया है, उसे आत्ममंथन करने की ज़रूरत है। ऐसी घृणास्पद हरकतें विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा नहीं होनी चाहिए।
राज शेखर झा ने लिखा कि जिसने भी ये लिखा है, कल को हो सकता है कि कोई उसके समुदाय के बारे में लिख दे। इस तरह से तो सभी आपस में जाति को लेकर लड़ बैठेंगे। उन्होंने ‘ये मेरा भारत नहीं’ वाले गैंग पर निशाना साधते हुए कहा कि वो लोग देश तो नहीं छोड़ेंगे लेकिन यहाँ रह कर आपस में लड़ते-लड़ाते ज़रूर रहेंगे। दुनिया बेहतर करती जाएगी और ऐसे लोग भारत को इन्हीं चीजों में उलझा कर रखे रहेंगे। किसी भी व्यक्ति को किसी अन्य समुदाय के बारे में ऐसी आपत्तिजनक बातें नहीं लिखनी चाहिए।
अभी हाल ही में जेएनयू के छात्रों ने वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन को अपने ही डिपार्टमेंट के लैब में घुसने से रोक दिया था। उनके साथ बदतमीजी भी की गई थी। कई अन्य लोगों ने भी ट्विटर पर जेएनयू के ब्राह्मणविरोधी नारे को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। लोगों ने पूछा कि ये कैसा विरोध प्रदर्शन है, जहाँ देश के ही लोगों को गालियाँ दी जाती हैं और उन्हें भागने को कहा जाता है? जेएनयू में छात्र हॉस्टल फी को 10 रुपए से 300 रुपए प्रतिमाह किए जाने के ख़िलाफ़ हंगामा कर रहे हैं।
You will write this, somebody will write about your community. While no one will leave the country, be rest assured, but we will remain here and keep fighting amongst ourselves as the world proceeds towards better things. Better to do away with contempt for the other community.
छात्रों के विरोध प्रदर्शन के कारण जेएनयू के डीन उमेश कदम की तबियत बिगड़ गई थी। नारेबाजी के कारण प्रोफेसर कदम की तबियत और बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। एम्बुलेंस के रास्ते में भी छात्र लगातार नारेबाजी करते रहे। इस दौरान प्रोफेसर के बीवी-बच्चे भी वहीं मौजूद थे। इसी तरह छात्राओं ने एक महिला प्रोफेसर के कपड़े फाड़ने का प्रयास किया। महिला पत्रकार के साथ भी छात्रों ने बदतमीजी की। वामपंथी छात्र नेताओं में कैम्पस में सरकार द्वारा सीआरपीएफ के जवानों को तैनात किए जाने की झूठी अफवाह भी फैलाई। वामपंथी छात्रों ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के साथ भी छेड़छाड़ की और उनका अपमान किया था।
संसद के शीतकालीन सत्र में सोमवार (नवंबर 25, 2019) को महाराष्ट्र में सरकार गठन के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस समेत विपक्ष ने सदन में जबर्दस्त हंगामा किया। स्पीकर ने मार्शल को कॉन्ग्रेस के दो सांसदों- टीएन प्रथापन और हीबी इडेन को बाहर निकालने का आदेश दिया। इस पर धक्का-मुक्की हुई। विपक्ष की लगातार नारेबाजी के कारण लोकसभा की कार्यवाही 2 बार स्थगित करनी पड़ी।
भाजपा ने कॉन्ग्रेस सांसदों की हरकत की निंदा करते हुए स्पीकर से कार्रवाई की मॉंग की है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कॉन्ग्रेस सासंदों की हरकत बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन किया है। प्रसाद ने कहा कि स्पीकर इस मामले में फैसला करेंगे। वहीं, इडेन का कहना है कि वो लोकसभा में महाराष्ट्र के मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे थे, मगर दुर्भाग्य से मार्शल ने उन्हें निकाल दिया। उन्होंने स्पीकर से इसकी शिकायत की है।
Congress MP Hibi Eden on reports of clash with Lok Sabha Marshals today: We had raised a very genuine issue (Maharashtra) in LS & protested in democratic manner. Unfortunately we were taken out by Marshals who tried to push us forcefully. We’ve filed complaint with the Speaker. pic.twitter.com/sElHCNtY9K
Delhi: Congress Interim President Sonia Gandhi leads party’s protest in Parliament premises over Maharashtra government formation issue. pic.twitter.com/B98L3uHqq0
कॉन्ग्रेस सांसदों ने सोनिया गाँधी की अगुआई में संसद परिसर में प्रदर्शन भी किया। सदन की कार्यवाही आरंभ होने के साथ ही कॉन्ग्रेस सदस्य नारेबाजी करते और पोस्टर लिए हुए आसन के निकट पहुँच गए। टीएन प्रथापन और हीबी इडेन ने बड़ा पोस्टर ले रखा था जिस पर ‘स्टॉप मर्डर ऑफ डेमोक्रेसी’ लिखा था। विपक्षी नेताओं ने ‘संविधान की हत्या बंद करो, बंद करो’ के नारे लगाए। नारेबाजी के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने प्रश्नकाल शुरू कराया और अनुसूचित जाति के लड़के-लड़कियों के छात्रावास विषय पर पूरक प्रश्न पूछने के लिए कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का नाम पुकारा।
Congress leader Rahul Gandhi in Lok Sabha: I wanted to ask a question in the House but it doesn’t make any sense to ask a question right now as democracy has been murdered in #Maharashtra. pic.twitter.com/eZUCONJfop
इस सत्र में पहली बार सदन में पहुँचे गाँधी ने सवाल पूछने से इनकार करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या हुई है, ऐसे में उनके सवाल पूछने का कोई मतलब नहीं है। इसी बीच स्पीकर बिड़ला ने पोस्टर लहरा रहे इडेन और प्रथापन को ऐसा नहीं करने की चेतावनी दी। फिर भी न मानने पर स्पीकर ने मार्शलों को दोनों कॉन्ग्रेस सांसदों को सदन से बाहर करने का आदेश दिया।
बता दें कि आज शीतकालीन सत्र की कार्यवाही का छठा दिन है। कॉन्ग्रेस, माकपा और अन्य विपक्षी दलों ने दोनों सदन में महाराष्ट्र के मुद्दे पर चर्चा की माँग की। लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी और पार्टी के चीफ व्हिप के सुरेश ने महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात पर स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। वहीं, माकपा समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी इसी मुद्दे को लेकर राज्यसभा की कार्यवाही निलंबित करने की माँग की।
पश्चिम बंगाल में भाजपा प्रत्याशी के साथ मारपीट की गई है। मामला करीमपुर का है, जहाँ विधानसभा उपचुनाव हो रहे हैं। भाजपा ने करीमपुर से जयप्रकाश मजूमदार को प्रत्याशी बनाया है। उनके साथ मारपीट का एक वीडियो सामने आया है। भाजपा प्रत्याशी को न सिर्फ़ थप्पड़ से मारा गया, बल्कि उन्हें धक्का भी दिया गया। वे उपचुनाव के दौरान पोलिंग बूथों का निरीक्षण कर रहे थे, तभी तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया। लाठ-घूसों से भाजपा प्रत्याशी की पिटाई की गई।
तृणमूल कार्यकर्ताओं ने बेख़ौफ़ होकर भाजपा प्रत्याशी के साथ मारपीट की। स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाते देख सीआरपीएफ के जवानों ने लाठियाँ भाजी, तब जाकर तृणमूल के गुंडे वहाँ से भागे। मजूमदार बंगाल भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं। दरअसल, मजूमदार को सूचना मिली थी कि एक पोलिंग बूथ पर मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। उन्हें वोट नहीं देने दिया जा रहा। इसकी सूचना मिलते ही भाजपा प्रत्याशी जयप्रकाश मजूमदार उक्त पोलिंग बूथ की तरफ़ निकल पड़े। तभी तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया।
फिर चुनावी हिंसा !!!
पश्चिम बंगाल में हो रहे तीन विधानसभा उपचुनाव में #TMC के गुंडे जमकर हिंसा और मारपीट कर रहे हैं। करीमपुर के #BJP उम्मीदवार श्री जयप्रकाश मजूमदार के साथ तो खुलकर मारपीट की गई! दरअसल, ये हार का वो भय है, जो #TMC कार्यकर्ता महसूस कर रहे हैं!#mamatakegundepic.twitter.com/XZn1kV5CmP
पश्चिम बंगाल में करीमपुर, खड़गपुर सदर और कालियागंज विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हो रहे हैं। भाजपा नेता मुकुल रॉय ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कर तत्काल मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कम से कम तृणमूल कॉन्ग्रेस के 50 गुंडों ने जयप्रकाश मजुमदार को घेर कर उनकी पिटाई की। ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि जब तृणमूल कार्यकर्ताओं ने मजूमदार को लात-घूँसे से मारा, तब वे सड़क किनारे एक गड्ढे में जा गिरे। मजूमदार तृणमूल कार्यकर्ताओं की पिटाई के बाद गड्ढे में स्थित झाड़ियों में फँस गए।
चुनाव आयोग ने उक्त बूथ पर तैनात अधिकारी से रिपोर्ट तलब किया है। ये घटना पीपलखोला बूथ की है। बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि तृणमूल कार्यकर्ताओं की ये हरकत दिखाती है कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी पहले ही हार स्वीकार कर ली है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कॉन्ग्रेस फिर से हिंसा का वैसा ही तांडव दिखा रही हुई, जैसा उसने लोकसभा चुनाव के दौरान किया था।
बिहार में एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप कर घटना का वीडियो वायरल करने का मामला सामने आया है। मामला कैमूर जिले का है। मोहम्मद अरबाज नामक युवक ने नाबालिग को शादी का झांसा देकर फँसाया और फिर अपने 3 दोस्तों के साथ मिल उससे बलात्कार किया। इतना ही नहीं, इस पूरी वारदात को आरोपितों ने मोबाइल में रिकॉर्ड भी कर लिया और बाद में उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
मामला संज्ञान में आते ही पुलिस पदाधिकारियों के होश उड़ गए और लड़की के परिवारवाले सन्न रह गए। वायरल वीडियो में देखा गया कि एक चलती कार में कुछ लड़के नाबालिग लड़की का मुँह बंद करके उसका बलात्कार कर रहे हैं और गाड़ी का शीशा लॉक है।
जानकारी के अनुसार इन आरोपितों की पहचान मोहनियां नगर के वार्ड नं.-15 अंतर्गत इस्लामगंज निवासी अरबाज उर्फ अयान, सोनू उर्फ कलाम, सिकंदर व सोनू के रूप में हुई है। लेकिन फिलहाल इनमें से अभी कोई गिरफ्तार नहीं हुआ है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस छात्रा की मेडिकल जाँच कराने की प्रक्रिया में जुट गई है।
लड़की के मुताबिक आरोपित अरबाज उसे कोचिंग आने-जाने के दौरान मिला था। उसे प्रेम जाल में फँसाया। शादी का झाँसा देकर पिछले 5 महीने से वह लड़की का यौन शोषण कर रहा था। मंगलवार को पीड़िता को कलाम ने मोहनिया में मुंडेश्वरी गेट के पास बुलाया। वहाँ अरबाज और उसके साथी पहले ही गाड़ी लेकर मौजूद थे। लड़की के आते ही उसे गाड़ी में खींच लिया गया। लड़की के आते ही उसे गाड़ी में खींच लिया गया और फिर चारों ने मिलकर उसका बलात्कार किया। जब लड़की ने चिल्ला कर विरोध किया तो उसके मुँह पर पट्टी बाँध दी गई।
यह है वो बलात्कारी अरबाज,जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर उस लड़की का बलात्कार किया और विडियो वायरल की। pic.twitter.com/N8Wbnhgc3M
बता दें, रविवार (नवंबर 24, 2019) की देर शाम महिला थाना पहुँचकर पीड़िता के घरवालों ने मामला दर्ज करवाया। पुलिस भी वीडियो के आधार पर अपराधियों को पहचानने का दावा कर चुकी है।
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक दिलवाज अहमद ने बताया है कि शनिवार की रात सोशल मीडिया पर एक नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म का वीडियो वायरल हुआ। जिसके बाद रविवार को पुलिस पदाधिकारियों के संज्ञान में यह मामला सामने आया।
पुलिस ने आश्वासन दिया है कि आरोपितों को हर हाल में सजा मिलेगी। उन्होंने बताया है कि चारों युवकों की गिरफ्तारी के लिए उनके अभिभावकों पर दबाव डाला जा रहा है और छापेमारी भी जारी है।
महाराष्ट्र में जारी सियासी ड्रामे के बीच मध्य प्रदेश की पॉलिटिक्स में भी हलचल की खबरें आ रही है। कॉन्ग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने की अटकलें फिर से तेज हो गई है। इसकी वजह बनी है सिंधिया द्वारा अपने ट्विटर बॉयो में किए गए कुछ बदलाव।
सिंधिया का ट्विटर बॉयो अब केवल “लोक सेवक, क्रिकेट में दिलचस्पी रखने वाला” है।
Jyotiraditya Scindia to ANI, on no mention of Congress party in his Twitter bio: A month back I had changed my bio on Twitter. On people’s advice I had made my bio shorter. Rumours regarding this are baseless. pic.twitter.com/63LAw9SIvb
दिलचस्प बात यह है कि उनके नए ट्विटर बायो में, इस बात का कोई संकेत नहीं है कि वो कॉन्ग्रेस का हिस्सा हैं। उस कॉन्ग्रेस का जिसकी कमलनाथ के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में सरकार चल रही है।
इससे पहले, उनके प्रोफाइल में गुना से 2002-2019 तक सांसद रहने का जिक्र था। साथ ही उन महकमों का भी जिक्र था जिसकी जिम्मेदारी मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने सॅंभाली थी।
सिंधिया के पहले के ट्विटर बॉयो में लिखा था कि वह 2002 से 2019 तक गुना के पूर्व सांसद थे। यह भी लिखा था कि वे पूर्व ऊर्जा मंत्री, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय और MoS कम्युनिकेशन्स, IT विभाग के मंत्री थे।
सिंधिया ने अब बॉयो से इन जानकारियों का हटा दिया है। इससे पता ही नहीं चलता कि वे कॉन्ग्रेस से जुड़े हुए हैं। शायद वे अपने अतीत से पीछा छुड़ाना चाहते हों! हालॉंकि सिंधिया ने एएनआई को बताया है कि ट्विटर बॉयो में बदलाव उन्होंने एक महीने पहले ही किया था। उनके मुताबिक बॉयो को संक्षिप्त रखने के लिए लोगों की सलाह पर ऐसा किया। इस संबंध में लग रही अटकलों को उन्होंने खारिज किया है।
बावजूद इसके कयास लगाए जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश में कहीं कोई सियासी भूचाल तो नहीं आने वाला। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस तीन खेमों में बॅंटी है। एक गुट मुख्यमंत्री कमलनाथ का, दूसरा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का और तीसरा सिंधिया का है। कमलनाथ और सिंधिया गुट के मतभेद तब भी सामने आ गए थे जब विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री चुना जाना था। इसके बाद से सिंधिया के समर्थक लगातार उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने को लेकर लॉबिंग कर रहे हैं।
बता दें कि सिंधिया को मध्य प्रदेश राज्य इकाई का अध्यक्ष नहीं बनाए जाने पर उनके समर्थक सामूहिक इस्तीफ़े की धमकी भी दे चुके हैं। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का पद कमलनाथ के इस्तीफ़े के बाद खाली हो गया था। उस समय, भले ही सिंधिया ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था, लेकिन ऐसी ख़बरें सामने आईं थीं कि उन्होंने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को ‘अल्टीमेटम’ दिया था कि उन्हें राज्य इकाई का प्रमुख बनाया जाना चाहिए, अन्यथा वो अन्य विकल्प के बारे में सोचेंगे। अन्य विकल्प से उनका मतलब ख़ुद पार्टी छोड़ने से था।
सिंधिया के ट्विटर बॉयो बदलने के साथ, इस बात के कयास भी लगाए जा रहे हैं कि कहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कॉन्ग्रेस को तलाक़ देने का फ़ैसला तो नहीं कर लिया है!