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आगरा के एत्माद्दौला में हनुमान मूर्ति की आँखें निकाली, तनाव के बाद पुलिस तैनात

उत्तरप्रदेश के आगरा में भगवान हनुमान की मूर्ति क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना सामने आई है। घटना शहर के एत्माद्दौला क्षेत्र के घनी आबादी वाले महावीर नगर की है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कुछ शरारती तत्वों ने हनुमान मूर्ति की आँखें निकाल ली। लोगों को इसकी भनक मंगलवार (19 नवंबर 2019) की सुबह लगी जब वे मंदिर पहुँचे।

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। आनन-फानन में पुलिस भी पहुॅंची और लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। तनाव को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई है। अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर पुलिस जॉंच कर रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, मंदिर के पुजारी महावीर दास ने बताया कि घटना सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात घटी। वहीं एत्माद्दौला थाने के स्टेशन ऑफिसर उदयवीर सिंह मलिक का कहना है कि मंगलवार की सुबह घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस हरकत में आई। खंडित मूर्ति को हटाकर उसकी जगह नई मूर्ति स्थापित करा दी गई है। इस मामले में पुलिस द्वारा अज्ञात शरारती तत्वों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया है कि वे इलाके में किसी सीसीटीवी कैमरे को ढूँढने का प्रयास कर रही है, ताकि मंदिर के पास घूम रहे संदिग्धों की पहचान करके आरोपितों की पहचान की जा सके।

गौरतलब है कि हिंदुओं की भावना आहत करने के इरादे से मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्ति खंडित करने का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी आगरा के पड़ोसी जिलों से कम से कम 15 ऐसी घटनाओं की खबर बीते कुछ दिनों में सुनने को मिल चुकी हैं। इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में भी हिंदू मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ तोड़फोड़ की खबर ने तूल पकड़ा था। जब पुलिस ने मोहम्मद जुबेर और अनस नाम के शख्स को गिरफ्तार किया था और बाद में 10 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।

इसके अलावा जून महीने में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के रोहनिया गाँव में एक मुस्लिम भीड़ द्वारा लाउडस्पीकर का विरोध करने पर भी एक मंदिर में तोड़-फोड़ की गई थी। जिसके बाद इलाक़े में साम्प्रदायिक तनाव फैल गया था। इस दौरान भीड़ ने लाउडस्पीकर को तोड़ दिया था और मंदिर की मूर्तियों को अपने साथ ले गए। इस घटना में महबूब, मोनिस, इज़राइल, आज़ाद और अलनूर को गिरफ्तार किया गया था।

फिर, खतौली से भी खबर आ चुकी है कि वहाँ एक मुस्लिम युवक ने कुछ समय पहले मंदिर में प्रवेश करके वहाँ स्थापित हनुमान जी की मूर्ति को तोड़ने का प्रयास किया था। इस दौरान आरोपित ने मंदिर में पूजा करने वाले भक्तों के साथ दुर्व्यवहार भी किया था। हालाँकि इस घटना में घटनास्थल पर मौजूद लोग अपराधी को पकड़ने में क़ामयाब रहे, लेकिन वह उसे मंदिर के शीशे को तोड़ने से नहीं रोक सके। पुलिस ने आकर उसे गिरफ़्तार किया। आरोपी की पहचान मूसा के रूप में हुई।

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पाक परस्त संगठन के साथ जुड़ेंगे शशि थरूर, लंदन के कार्यक्रम में NDTV की निधि राजदान भी हुई थी शामिल

राहुल गॉंधी सहित कई कॉन्ग्रेसी नेताओं के बयानों का हवाला देकर कश्मीर पर पाकिस्तान अपने प्रोपगेंडा को हवा देता रहता है। अब कॉन्ग्रेस के चर्चित सांसद शशि थरूर ने एक ऐसे संगठन से जुड़ने का फैसला किया है जो पाक परस्त माना जाता है। हाल ही में इस संगठन ने लंदन में कार्यक्रम आयोजित कर कश्मीर पर पाकिस्तानी प्रोपगेंडे को हवा दी थी। कार्यक्रम के दौरान भारत विरोधी बातें की गई थी। इस कार्यक्रम में एनडीटीवी की एंकर निधि राजदान भी शामिल हुई थीं। ब्रिटेन की इस पाकिस्तान परस्त संस्था का नाम है सीटीडी एडवाइज़र्स। थरूर इस संस्था के रणनीतिक सलाहकार का पद संभालेंगे।

सीटीडी एडवाइज़र्स का गठन पिछले साल पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश बैंकर शोएब बाजवा ने किया था। उनकी संस्था ने 7 नवम्बर को लन्दन में एक कार्यक्रम आयोजित किया था। “द कॉस्ट टू ब्रिटेन ऑफ़ द कश्मीर क्राइसिस-इज़ देयर अ सोल्यूशन” नाम यह कार्यक्रम भारत विरोधी एजेंडे का हिस्सा था। कार्यक्रम में कश्मीर को लेकर कई तरह के भ्रम और झूठ फ़ैलाने की कोशिश की गई।

इस कार्यक्रम में एनडीटीवी की एंकर निधि राजदान भी शामिल हुई थीं। निधि ने भी कश्मीर पर उसी सुर में बात की जैसे पाकिस्तान करता रहता है। निधि ने कश्मीर में भारत की कार्रवाई को विश्व का सबसे बड़े लोकतंत्र पर धब्बा बताया था।

इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की दूत रहीं मलीहा लोधी और ब्रिटेन के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ल्या ग्रांट भी मौजूद थे। ग्रांट ने भी विवादित बयान देते हुए कहा था कि मोदी सरकार का कदम कश्मीरियों को कट्टरपंथ की ओर ढकेल रहा है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा प्रभाव ब्रिटेन की सुरक्षा पर पड़ेगा, क्योंकि यहाँ करीब 10 लाख कश्मीरी रहते हैं।

गौरतलब है कि इस कार्यक्रम का समर्थन जेकेएलएफ जैसे आतंकी संगठन ने भी किया था। कश्मीर में कट्टरपंथ और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले जेकेएलएफ ने निधि को भी शाबाशी दी थी। निधि राज़दान के भाषण की सराहना करते हुए जेकेएलएफ ने इसे कश्मीरियों को एक मंच पर लाने का अच्छा प्रयास बताया था। थरूर के साथ ब्रिटेन के पूर्व एनएसए ग्रांट भी सीटीडी एडवाइज़र्स को ज्वाइन करेंगे। ब्रिटेन की खुफिया सुरक्षा सेवा के पूर्व प्रमुख क्रिस निकोलस और फ्रेंड्स ऑफ इजरायल ग्रुप्स के मानद अध्यक्ष लॉर्ड स्टुअर्ट पोलॉक भी इस संस्था के साथ जुड़ने जा रहे हैं।

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एक छात्र पर सालाना खर्च ₹7 लाख, नतीजा नील बटे सन्नाटा: JNU की कहानी, आँकड़ों की जुबानी

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में हॉस्टल मैन्युअल अपडेट किए जाने को लेकर विवाद चल रहा है। इस सम्बन्ध में कुछ बातें हैं, जो आपके लिए जाननी ज़रूरी है। इसे आँकड़ों के माध्यम से समझने की ज़रूरत है। दरअसल, इस यूनिवर्सिटी में सबसे ज्यादा छात्र आर्ट्स, सोशल स्टडीज, लैंग्वेज कोर्स और इंटरनेशनल स्टडीज पढ़ते हैं। जेएनयू में लगभग 8,000 छात्र हैं। इनमें से आधे से ज्यादा आर्ट्स, लैंगवेज, लिटरेचर और सोशल साइंस के हैं। 57% छात्र इन्हीं चार विषयों की पढ़ाई करते हैं। बाकी बचे छात्रों में से 15% इंटरनेशनल स्टडीज में हैं। कुल छात्रों में से 55% एमफिल और पीएचडी कर रहे हैं।

एजुकेशन को लेकर ट्विटर पर अक्सर जानकारी साझा करने वाले अनुराग सिंह ने इन आँकड़ों को ट्वीट किया है। सवाल उठता है कि सरकार जेएनयू पर कितना ख़र्च करती है? अनुराग सिंह ने इस सवाल का जवाब भी दिया है। उन्होंने 2014 से लेकर 2018 तक जेएनयू को हुए वित्तीय लाभ और हानि का विवरण दिया है। ये आँकड़े जेएनयू के एनुअल रिपोर्ट से लिए गए हैं, जो क़रीब 600 पन्नों का है। अनुराग लिखते हैं कि जिन आँकड़ों को पहले पन्ने पर होना चाहिए, वो बीच में कहीं दबे रहते हैं।

जेएनयू को सब्सिडी और सहायता के रूप में सरकार से 352 करोड़ मिलते हैं। जेएनयू प्रतिवर्ष 556 करोड़ ख़र्च करता है। यूनिवर्सिटी के सभी कार्यों को मिला कर सालाना ख़र्च होने वाली रक़म यही है। अब सवाल उठता है कि अगर छात्रों की हिसाब से देखें तो यूनिवर्सिटी प्रति छात्र सालाना कितनी रक़म ख़र्च करता है? छात्रों की संख्या लगभग 8,000 है। कुल ख़र्च 556 करोड़ है। कैलकुलेट करने पर पता चलता है कि जेएनयू हर एक छात्र पर सालाना 6.95 लाख रुपए ख़र्च करता है। अगर हम बाकी चीजों को हटा दें और केवल सरकारी सब्सिडी और ग्रांट्स की बात करें, तब भी आँकड़ा 352 करोड़ होता है। यानी, 4.40 लाख रुपए प्रति छात्र।

अब आपको लगता होगा कि इतनी ज्यादा रक़म ख़र्च हो रही है तो छात्र ज़रूर बेहतर अकादमिक प्रदर्शन करते होंगे? आपको लगता होगा कि काफ़ी उम्दा गुणवत्ता वाले रिसर्च पेपर्स प्रकाशित होते होंगे। दुनिया भर के नामी जर्नल्स में जेएनयू के छात्रों के रिसर्च पेपर्स छपते होंगे और उनकी वाहवाही होती होगी। अनुराग बताते हैं कि ऐसा नहीं है। रिसर्च और प्लेसमेंट के बारे में जेएनयू कुछ स्पष्ट नहीं बताता। अपनी रिपोर्ट्स में वह नहीं बताता कि प्लेसमेंट्स की स्थिति क्या है? फिर भी, उपलब्ध आँकड़ों पर गौर करें तो एमफिल और पीएचडी के छात्रों की संख्या भले ही 4360 हो पर रिसर्च पेपर्स की संख्या 1000 छूने में भी हाँफ जाती है।

अनुराग सिंह ने आगे कैलकुलेट कर के बताया कि प्रतिवर्ष औसतन 4.5 छात्रों में से 1 के ही ‘आर्टिकल’ जर्नल में छप पाते हैं। हर साल 2000 से भी अधिक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में छात्र हिस्सा लेते हैं। जब रिसर्च पेपर नहीं छप रहे और न कोई पेटेंट्स आ रहे, तो फिर उन कॉन्फ्रेंस से क्या प्राप्त होता है, ये तो भगवान ही जानें। हर साल क़रीब 600 पीएचडी धारक निकलते हैं और न कोई उम्दा रिसर्च पेपर और न कोई पेटेंट।

तो फिर हंगामा क्यों? फी बढ़ाने का आरोप लगा कर विरोध-प्रदर्शन क्यों? जेएनयू में ट्यूशन फी मात्र 240 रुपए प्रतिवर्ष है। लाइब्रेरी फी के नाम पर प्रतिवर्ष मात्र 6 रुपए लिए जाते हैं। सिक्योरिटी डिपाजिट मात्र 40 रुपए है, जो वापस भी मिल जाते हैं। ये आँकड़े एमफिल और पीएचडी के हैं।

आईआईटी दिल्ली जेएनयू के बगल में ही स्थित है। वहाँ छात्रों के प्रतिवर्ष 2.25 लाख ख़र्च होते हैं। इसी तरह आईआईएमसी में प्रतिवर्ष 5 से 10 लाख रुपए फी लगते हैं। जब चार्जेज में मामूली बढ़ोतरी की गई है, तब इस सवाल का उठना लाजिमी है कि जेएनयू छात्र संगठन के इस विरोध-प्रदर्शन का औचित्य क्या है? वैसे भी जेएनयूएसयू के विभिन्न पदों पर वामपंथी छात्र संगठन के लोग काबिज हैं।

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2017 में घर से निकला इंजीनियर 2 साल बाद पाक में पकड़ा गया, कहा- गर्लफ्रेंड से मिलने तुर्की जा रहा था

पाकिस्तान ने 2 भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान हैदराबाद के सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत मैदाम और मध्यप्रदेश के किसान डुरमी लाल के रूप में हुई है। दोनों को पिछले हफ्ते पंजाब के बहावलपुर के रेगिस्तानी इलाके से पकड़ा गया। बहावलपुर पुलिस ने 14 नवंबर को इनके खिलाफ मामला दर्ज किया। बताया जा रहा है कि दोनों युवकों बिना किसी वैध कागजात के पाकिस्तान के सीमा में प्रवेश कर गए थे। इनके पास न तो वीजा था और न ही पासपोर्ट।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रशांत मैदाम ने बताया है कि वह तुर्की में रहने वाली महिला से प्यार करता है। पाकिस्तान-अफ्गानिस्तान के रास्ते वह उससे मिलने जा रहा था। वहीं, डुरमी लाल का कहना है कि वह बॉर्डर देखना चाहते था और गलती से सीम पार कर गया।

बहावलपुर के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने स्थानीय पुलिस को इन दोनों भारतीयों को मुल्तान में संघीय जाँच एजेंसी को सौंपने को कहा। जाँच के बाद एजेंसी ने दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया। फिलहाल दोनों युवक बहावलपुर पुलिस की हिरासत में हैं।

पाकिस्तान के एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “प्रशांत खुशनसीब है कि वो यहीं गिरफ्तार हो गया। हमें नहीं मालूम अगर वो पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान पहुँच गया होता, तो उसका क्या होता।” बताया जा रहा है कि जरूरी कार्रवाई पूरी होने के बाद जल्द ही दोनों युवकों को भारत भेजा जा सकता है।

वहीं, तेलंगाना पुलिस के मुताबिक प्रशांत साल 2017 से ही हैदराबाद से गायब है। लेकिन अब इस सूचना के बाद साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनर ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखा है, जिससे विदेश मंत्रालय को संपर्क किया जा सके और प्रशांत की वापसी संभव हो सके।

पाकिस्तान में बेटे के पकड़े जाने की खबर मिलने के बाद से प्रशांत मैदाम के पिता बाबू राव परेशान हैं। उनके अनुसार उन्हें प्रशांत के पाक में होने की खबर न्यूज चैनलों से मिली। उन्होंने पुलिस कमिश्नर सज्जानर से मिलकर अपने बेटे को वापस लाने की अपील की है। उन्होंने बताया है कि 2 साल पहले उनका लड़का घर से ऑफिस के लिए निकला था, लेकिन वापस नहीं है। जिसके संबंध में उन्होंने 11 अप्रैल को लड़के के गुमशुदगी की शिकायत साइबराबाद की माधापुर पुलिस में दर्ज भी करवाई थी।

उस पादरी ने पहले मुझे अपनी जाँघों पर बिठाया, फिर छूने लगा, धीरे-धीरे…

वेटिकन चर्च से एक बार फिर यौन शोषण के मामले उजागर हुए हैं। एक समय में सामुदायिक सेवाओं के दौरान सहयोग करने वाले 3 लड़कों ने आरोप लगाया है कि चर्च के कम से कम 2 पादरियों ने उनका यौन उत्पीड़न किया। वेटिकन चर्च द्वारा फादर गैबरिल मार्टिनेली ( Father Gabriele Martinelli) और फादर एनरिको रेडिक (Father Enrico Radice) को यौन अपराध के आरोपों पर सुनवाई करने की जिम्मेदारी देने के 2 महीने के भीतर ये मामले प्रकाश में आए हैं।

इससे पहले इस मामले के संबंध में एक इटेलियन टीवी प्रोग्राम ली लेने (द हाइनास) ने भी साल 2017 में खुलासा कर बताया था कि रोम की कैथोलिक पाठशाला में पढ़ाने वाले सेमिनेरियन, जो फिलहाल पादरी है ने सेंट पीटर बेसिलिका में सामुदायिक सेवाओं में सहयोग करने वाले किशोरों का यौन शोषण किया था। जानकारी के अनुसार पादरियों पर पर लगे सभी आरोप 1980 और 1990 के समय के हैं जब पीड़ित लड़के 10 या 14 साल की उम्र के थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आयोजन में शामिल एक लड़के ने एक पादरी पर इल्जाम लगाते हुए आपबीती सुनाई। लड़के ने बताया, “स्कूल में कम्यूनल शॉवर का प्रबंधन करने वालों में से एक पादरी ने पहले मुझे अपनी गोद में बिठाया और फिर मेरे प्राइवेट पार्ट को छूने लगा। धीरे-धीरे पादरी मेरे कपड़े उतारने की कोशिश करने लगा और मैं उसे दूर हटाने का प्रयास करता रहा। तब मैं केवल 13 साल का था। मैं जमीन पर गिर गया और उससे पूछा कि ये आप क्या कर रहे हैं? इसके बाद मैं उठा और वहाँ से भाग गया।”

इसके बाद दूसरे पीड़ित लड़के के मुताबिक उसका उत्पीड़न कासा सांता मारता में हुआ था, जहाँ बहुत से पादरी रहते थे। पीड़ित के मुताबिक उसे एक पादरी ने यूथ पाठशाला के दौरान पकड़ लिया था। उस समय वो करीब 10 साल का था। इसके बाद पादरी ने उसे सीढ़ियों के ऊपर अपने कमरे में जाने को कहा और वहाँ उसके साथ छेड़खानी करने लगा। लड़के के अनुसार, “पादरी ने कमरे में पहले मुझे अपनी जाँघों पर बिठाया और मेरी जाँघों पर हाथ फेरने शुरू कर दिए। इसके बाद उसने अपना हाथ मेरे प्राइवेट पार्ट पर रख दिया। लेकिन थोड़ी देर बाद मेरे बार-बार विरोध करने पर उसे रुकना पड़ा।”

जानकारी के अनुसार आज इन पीड़ितों की उम्र 37-40 के बीच की है और अब ये खुलकर सार्वजनिक पटल पर आकर अपनी आपबीती दुनिया को सुना रहे हैं। दो पीड़ितों की तरह तीसरे ने भी एक पादरी पर ऐसे ही आरोप लगाए हैं, लेकिन उसने अपने साथ हुई घटना को विस्तार से बताने से मना कर दिया। इसके अलावा एक चौथा लड़का भी है, जिसके बारे में बताया जा रहा है कि उसने इन लड़कों से भी बुरा यौन उत्पीड़न झेला। लेकिन बोलने को तैयार नहीं हुआ। यहाँ बता दें कि यौन शोषण के आरोप के अलावा कई लोगों ने दावा किया है कि वे इनमें से कई उत्पीड़नों के चश्मदीद हैं।

बता दें बीते कुछ समय से वेटिकन चर्च ऐसी खबरों को लेकर कई बार चर्चाओं में आ चुका है। पिछले साल कार्डिनल जियॉर्ज पेल को 1990 के दशक में 2 लड़कों का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में 6 साल की सजा मुकर्रर की गई थी। इसी साल जनवरी में वेटिकन चर्च और पोप फ्रांसिस को तब बेहद शर्मिंदा होना पड़ा था, जब हरमैन गेस्लर नामक पादरी को उन्होंने यौन उत्पीड़न से संबंधित मामलों की सुनवाई करने के लिए नियुक्त किया था। लेकिन वह खुद ऐसे मामलों में लिप्त था। इसके कारण उसे दो महीने में ही अपना पद छोड़ना पड़ा।

J&K में हालात कब होंगे सामान्य: सांसद माजिद मेमन के सवाल पर शाह ने कहा- हो चुका है

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार (नवंबर 20, 2019) को राज्यसभा में बयान दिया। जम्मू-कश्मीर के हालात पर उन्होंने बात रखी। शाह ने कहा कि राज्य में दवाओं की कोई कमी नहीं है और दवा दुकानों से लेकर अस्पतालों तक, हर जगह दवाओं की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि सिर्फ़ सितम्बर में श्रीनगर में 7,67,000 लोगों का ओपीडी में इलाज किया गया। अक्टूबर में ये आँकड़ा 7,91,000 रहा। जब एनसीपी के सांसद माजिद मेमन ने पूछा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति समान्य कब होगी तो शाह ने कहा कि स्थिति सामान्य हो चुकी है। शाह ने कहा कि 5 अगस्त के बाद से अब तक एक भी निर्दोष व्यक्ति की जान पुलिस की गोली से नहीं गई है।

पत्थरबाजी के आँकड़े गिनाते हुए गृहमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष इस वक़्त तक 802 पत्थरबाजी की घटनाएँ हुई थी, लेकिन इस साल ये आँकड़ा उससे कम होकर 544 पर जा पहुँचा है। उन्होंने बताया कि सभी 20,400 स्कूल खुले हैं। उन्होंने कहा कि 50,000 से भी अधिक (99.48%) छात्रों ने 11वीं की परीक्षा दी है। घाटी के सभी हॉस्पिटल खुले हैं। शाह ने बताया कि चावल और केरोसिन की बिक्री में गत साल से 8 से 16% तक वृद्धि हुई है। उन्होंने आगे कहा कि इस बार 22.5 लाख मीट्रिक टन सेब की उपज हुई है, जिनमें से भारी मात्रा में सेब बाहर भी गए हैं।

इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी और भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने साफ़ कर दिया कि गाँधी परिवार की एसपीजी सिक्योरिटी हटाना कोई राजनैतिक निर्णय नहीं है बल्कि गृह मंत्रालय ने ‘थ्रेट परसेप्शन’ ख़तरे के स्तर को देखते हुए प्रोटोकॉल के तहत निर्णय लिया है। आनंद शर्मा ने इस फ़ैसले को राजनीतिक करार दिया। उनके बयान का जवाब देते हुए स्वामी ने कहा कि लिट्टे के ख़त्म होने के बाद गाँधी परिवार को कोई ख़तरा नहीं है।

लिट्टे ख़त्म हो गया तो गाँधी परिवार को खतरा कैसा, SPG सुरक्षा हटाना सही निर्णय: स्वामी

राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी की एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने पर कॉन्ग्रेस नेताओं को करारा जवाब दिया है। कॉन्ग्रेस नेताओं ने बुधवार को राज्यसभा में एक सुर में आलोचना करते हुए कहा कि सरकार राजनीतिक रंजिश के कारण गाँधी परिवार की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है। इसके बाद भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने साफ़ कर दिया है कि यह निर्णय किसी राजनेता का नहीं बल्कि गृह मंत्रालय का है और नियमानुसार ही हुआ है। नड्डा ने कहा कि किसी भी नेता के ‘थ्रेट परसेप्शन’ को देखते हुए मंत्रालय तय प्रोटोकॉल के तहत निर्णय लेता है।

स्वामी ने कहा कि राजीव गाँधी की हत्या के बाद गाँधी परिवार को लिट्टे से ख़तरा था। अब लिट्टे ख़त्म हो गया है और इसलिए गाँधी परिवार को भी कोई ख़तरा नहीं है। बता दें कि मई 2009 में श्रीलंका ने प्रभाकरण को मार गिराया था। वह लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) का संस्थापक था। तमिल कट्टरवादी संगठन लिट्टे ने ही राजीव गाँधी की हत्या की साज़िश रची थी। लिट्टे के ख़िलाफ़ लड़ाई में राजीव ने श्रीलंका सरकार की मदद की थी, जिससे वह ख़फ़ा था। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि लिट्टे के खात्मे के बाद गाँधी परिवार को एसपीजी सिक्योरिटी की कोई ज़रूरत नहीं है।

बता दें कि गाँधी परिवार ने राजीव गाँधी के हत्यारों की सज़ा कम करने की माँग की थी। स्वामी ने जब इस मामले को सदन में उठाया तो हँगामा मच गया। कॉन्ग्रेस नेताओं ने स्वामी के इस बयान की आलोचना करते हुए शोर-शराबा किया। राजीव गाँधी के दोनों हत्यारे पेरारिवलन और नलिनी जेल में बंद हैं। प्रियंका गाँधी और सोनिया गाँधी अक्सर उनकी सज़ा कम करने की बात कहते हैं। कई लोगों का ये भी कहना है कि उस आत्मघाती हमले में कई और लोग भी मारे गए थे और उन सबकी तरफ़ से हत्यारों को क्षमादान देने का गाँधी परिवार को कोई अधिकार नहीं है।

स्वामी के बयान के बाद राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी कहा कि वो राजीव गाँधी के हत्यारों की सज़ा कम किए जाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ये एसपीजी सुरक्षा कवर हटाने से अलग मुद्दा है, लेकिन वे भी नहीं चाहते हैं कि नलिनी और पेरारिवलन की सज़ा कम की जाए। वहीं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष आनंद शर्मा ने कहा कि सुरक्षा के मामलों में राजनीति से हैट कर काम किया जाना चाहिए।

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समुदाय विशेष, ईसाइयों पर आंध्र सरकार मेहरबान: हज और यरुशलम जाने के लिए मिलेगा ज्यादा पैसा

हज पर जाने वाले समुदाय विशेष को दी जाने वाली आर्थिक मदद में आंध्र प्रदेश की सरकार ने वृद्धि की है। यरुशलम और बाइबल में उल्लेखित स्थानों की यात्रा करने वाले ईसाइयों को भी अब सरकार ज्यादा आर्थिक मदद देगी। हज यात्रियों को दी जाने वाली आर्थिक मदद जारी करने को लेकर राज्य सरकार ने एक फाइनेंशियल ऑर्डर जारी किया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मंगलवार को सरकार ने बताया, “तीन लाख रुपए से कम की सालाना आय वाले लोगों को हज के लिए 60 हजार रुपए की मदद दी जाएगी। जिनकी सालाना आय तीन लाख रुपए से ज्यादा होगी उन्हें 30 हजार रुपए मिलेंगे।” इसके अलावा आंध्र प्रदेश हज कमेटी हज कैंप में रिपोर्ट करने से लेकर उनकी रवानगी तक उनके रहने और खाने का भी इंतजाम करेगी।

इसी तरह की मदद ईसाइयों को भी यरुशलम की यात्रा के लिए मिलेगी। सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक तीन लाख रुपए से कम की सालाना आय वाले ईसाइयों को यरुशलम, बेथलेहम, नाज़रेथ, जॉर्डन नदी, मृत सागर और गैलिली सागर की यात्रा करने के लिए अब 60,000 रुपए की मदद दी जाएगी।

राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेट्री मोहम्मद इलियास रिजवी ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। रिपोर्ट्स के अनुसार ये फैसला आँध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी का वादा था, जो उन्होंने ईसाई समुदाय के लोगों से पिछले साल अपनी 3,648 किमी की पदयात्रा में किया था।

इससे पहले 40,000 रुपए की मदद दी जाती थी जिसकी घोषणा 2016 में चंद्र बाबू नायडू की सरकार ने की थी। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रधान सचिव मोहम्मद इलियास रिज़वी की ओर से जारी आदेश के मुताबिक जिनकी आय तीन लाख रुपए से अधिक है उन्हें अब 20,000 के बजाय 30,000 रुपए की मदद दी जाएगी। इस योजना की शुरुआत 2013 में एकीकृत आंध्रप्रदेश में हुई थी। तब यरुशलम की धार्मिक यात्रा करने पर सरकार 20,000 रुपए की आर्थिक मदद देती थी।

उल्लेखनीय है कि भारत में धार्मिक यात्राओं के मद्देनजर ईसाइयों और मुस्लिमों को सरकार की ओर से अनुदान या सहायता राशि दी जाती है। लेकिन हिंदू समुदाय के लिए किसी भी धार्मिक यात्रा पर सरकार कोई अनुदान या सहायता राशि नहीं देती। साल 2012 में ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को साल 2022 तक चरणबद्ध तरीके से हज सब्सिडी ख़त्म करने का निर्देश दिया था। लेकिन ये फैसला कितना कार्यन्वित किया जाएगा, ये देखना बाकी है।

हम सब के PM हैं नरेंद्र मोदी, उनसे मिलने का मतलब ये थोड़े है कि खिचड़ी पक रही: शिवसेना सांसद संजय राउत

शिवसेना सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनसीपी के मुखिया शरद पवार की बुधवार (नवंबर 20, 2019) को होने वाली बैठक को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। मीडिया ने संजय राउत से पूछा कि पीएम मोदी और पवार की बैठक के क्या मायने हैं? जवाब देते हुए राउत ने सवाल दागा कि अगर प्रधानमंत्री से कोई मिलता है तो इसका मतलब खिचड़ी पकती है क्या? राउत ने इस दौरान किसानों की स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि उद्धव ठाकरे और शरद पवार हमेशा से किसानों को लेकर चिन्तित रहे हैं।

संजय राउत ने कहा कि संसद के बाहर या भीतर, कोई भी प्रधानमंत्री से मुलाक़ात कर सकता है और इसका ग़लत अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य करने के लिए जाना जाता है। बकौल शिवसेना सांसद संजय राउत, पवार महाराष्ट्र की स्थिति को अच्छी तरह जानते और समझते हैं। राउत ने आगे कहा:

“मान लीजिए शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे दिल्ली आते हैं और सभी सांसदों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करते हैं। तो क्या इसका मतलब कोई खिचड़ी पकती है क्या? हमनें भी शरद पवार से निवेदन किया है कि वो किसानों के मुद्दे को प्रधानमंत्री के सामने रखें।”

शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र के सभी सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करेंगे। उन्होंने कहा कि ये सांसद भले ही किसी भी राजनीतिक पार्टी के हों, वे पीएम मोदी से मुलाक़ात कर राज्य में किसानों की स्थिति की चर्चा करेंगे। राउत ने कहा कि शिवसेना यह सुनिश्चित करना चाहती है कि महाराष्ट्र के किसानों को हरसंभव सहायता मिले। बुधवार को ही ‘सामना’ में किसानों की आत्महत्या का मामला उठा कर भाजपा पर निशाना साधा गया है।

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि इसके लिए अब ज्यादा इतंजार करने की ज़रूरत नहीं है, बस 5-6 दिन और लगेंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले 10-15 दिनों में राज्य में सरकार गठन के रास्ते में कई समस्याएँ आई हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि एक सप्ताह के भीतर सरकार बना लिया जाएगा। राउत ने दावा किया कि महाराष्ट्र को एक मजबूत और लोकप्रिय सरकार मिलने जा रही है।

संजय राउत ने सरकार गठन की राह में आ रही समस्याओं के ख़त्म होने का समय भी बता दिया। उन्होंने कहा कि गुरुवार (नवंबर 21, 2019) को दोपहर 12 बजे तक ये सारी रुकावटें चली जाएँगी। राउत ने कहा कि गुरुवार दोपहर 12 बजे महाराष्ट्र में तस्वीर साफ़ हो जाएगी।

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जुनैद ने रची सांसद की हत्या की साजिश: फेसबुक पर वीडियो पोस्ट कर कहा- इसे जहन्नुम भेजना है

हॉलैंड की अदालत ने डच सांसद ग्रीट विल्डर्स को मारने की साजिश रचने के आरोप में एक पाकिस्तानी युवक को 10 साल की सजा सुनाई। पाकिस्तानी की पहचान 27 वर्षीय जुनैद के रूप में हुई। वह धुर दक्षिणपंथी सांसद गीर्ट विल्डर्स की हत्या करना चाहता था। इसके लिए उसने पिछले साल एक वीडियो भी जारी किया था। लेकिन उसके मंसूबों को भाँपते हुए अगस्त 2018 में उसे द हेग के एक रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विल्डर्स ने इस्लाम में पैगंबर माने जाने वाले मुहम्मद साहब पर कॉर्टून प्रतियोगिता आयोजित करने का ऐलान किया था। हालाँकि बाद में वह इससे पीछे हट गए थे। लेकिन जुनैद के जहन में ये बात बस गई। उसने विल्डर्स को मारने के इरादे से फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट की थी और कहा था कि वह विल्डर्स को जहन्नुम में भेजना चाहता हैं। इसके बाद उसने डच सासंद को मारने के लिए दूसरे लोगों से भी मदद माँगी थी। माना जाता है कि वह फ्रांस से हॉलैंड भी इसी कारन से पहुँचा था।

अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए जुनैद को ‘आतंकी मकसद के साथ हत्या की योजना बनाने व एक आतंकवादी कृत्य के लिए उकसाने’ का दोषी बताया। इसके अलावा अदालत ने ये भी पाया कि आरोपित ने एक से अधिक बार यह कहा था कि विल्डर्स की मौत एक ‘अच्छी’ बात होगी। वह चाहता था कि वह यह हत्या संसदीय भवन में करे।

हालाँकि बता दें कि मामले की सुनवाई के दौरान जुनैद ने अपने ऊपर लगे आरोपों से साफ मना किया है और खुद को ‘शांतिप्रिय’ बताया है। खुद के फ्रांस आने के पीछे उसने कहा कि वह हालैंड केवल विल्डर्स की कॉर्टून प्रतियोगिता का विरोध करने के लिए आया था।