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‘मेरी बहन को मुस्लिम लड़के ने प्रेमजाल में फँसा लिया है’ – वो फर्जी कहानी, जिससे गई कमलेश तिवारी की जान

कमलेश तिवारी की हत्या से पहले अशफाक और मोइनुद्दीन ने उन्हें हिन्दू लड़की की मुस्लिम लड़के से शादी की झूठी कहानी सुनाई थी। कमलेश तिवारी नृशंस हत्याकांड में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक जब रोहित सोलंकी बना अशफाक और संजय बना मोइनुद्दीन कमलेश तिवारी के घर पहुँचा तो कमलेश तिवारी ने अशफाक से मोइनुद्दीन के बारे में पूछा। इस पर अशफाक ने कमलेश तिवारी को उत्तेजित करने के लिए पहले से ही गढ़ी हुई झूठी और मनगढ़ंत कहानी सुनाई।

उसने कहा कि मोइनुद्दीन की बहन को एक मुस्लिम लड़के ने प्रेम जाल में फँसा लिया है। उसे उसके जाल से कैसे निकाला जाए? अशफाक के मुँह से मुस्लिम लड़के द्वारा हिन्दू लड़की को फँसा लिए जाने की कहानी सुनकर कमलेश तिवारी काफी आवेश में आ गए और कहा कि अपनी बहन को मुस्लिम लड़के से दूर रखो और एक हिन्दू लड़का देखकर उसकी शादी करा दो। कमलेश तिवारी ने उसे आश्वासन देते हुए कहा कि अगर वह मुस्लिम युवक या उसके परिजन उसकी बहन को परेशान करेंगे तो वो उसे अपने स्तर पर देख लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर उसकी बहन या उसके पति को कोई खतरा हो तो उसे लखनऊ भेज दे। वो उसकी बहन के पति को यहाँ रोजगार उपलब्ध करा देंगे।

अमर उजाला के लखनऊ संस्करण में प्रकाशित खबर

इसके साथ ही एक और बात सामने आई है कि कमलेश तिवारी खुद दोनों आरोपितों से मिलने के लिए होटल जाने वाले थे, मगर आरोपितों ने उन्हें यह कर कर मना कर दिया कि वो परेशान न हों। इसके बाद उन्होंने दोनों को अपने कार्यालय पर ही बुला लिया। बता दें कि आरोपित 17 अक्टूबर की रात को ही कमलेश तिवारी से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्होंने रात में मिलने से मना कर दिया था। हत्यारों ने 18 अक्टूबर की सुबह फिर उन्हें मिलने के लिए फोन किया तो कमलेश तिवारी ने खुद होटल आकर मिलने की बात कही। मगर हत्यारों के इरादे तो कुछ और थे, इसलिए उन लोगों ने कहा कि वो क्यों परेशान होंगे। इसके बाद तिवारी ने 18 अक्टूबर को 12 बजे से 1 बजे के बीच उन दोनों को अपने कार्यालय में बुला लिया।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर

अशफाक के पिता ने एक और खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने अशफाक को कुरान की कमस खिलाकर कमलेश तिवारी को भूल जाने के लिए कहा था। अशफाक ने पिता के सामने तो हत्या न करने की बात कह दी थी, मगर उस पर इसका कोई असर नहीं पड़ा था। वो पिछले चार साल से कमलेश तिवारी को जान से मारने की साजिश रच रहा था। इसके बारे में अशफाक की पत्नी और पिता को मालूम था। इसलिए उसके पिता ने अशफाक से कुरान की कसम देकर कहा था कि वो कमलेश तिवारी को भूल जाए, मगर इसका उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने अपनी योजना के मुताबिक ही इस साजिश को अंजाम दिया।

गौरतलब है कि हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की अशफाक और मोइनुद्दीन ने दिन-दहाड़े गोली मार कर और गला रेत कर हत्या कर दी थी। हाल ही में आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ कि हत्यारों ने पहले उन्हें गोली मारी और फिर धारदार चाकू से सीने पर ही 7 बार वार किए गए। चाकू के वार से गर्दन पर 12 सेंटीमीटर लंबा और 3 सेंटीमीटर गहरा घाव हुआ। गला रेतने के कारण ही कमलेश की मौत हो गई। आरोपित अशफाक की तरह मोइनुद्दीन ने भी सोशल मीडिया पर संजय नाम से फर्जी अकाउंट बनाया हुआ था। 

वामपंथी कन्हैया कुमार का प्रचार करने वाले एक्टर पर FIR, रामलीला को बताया था ‘बच्चों की ब्लू फिल्म’

अभिनेता से नेता बने प्रकाश राज के ख़िलाफ़ दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में शिक़ायत दर्ज हो गई है। उनके ख़िलाफ़ धार्मिक भावनाएँ भड़काने और दो समुदायों के बीच नफ़रत का बीज बोने का आरोप लगा है। प्रकाश राज के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के वकील कुलदीप राय, वरूण मिश्रा, जुगल किशोर गुप्ता, अभिनव और रूमा पाठक ने शिक़ायत दर्ज कराई है।

दरअसल, उन्होंने रामलीला की तुलना चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी से कर दी थी और कहा था कि इससे मजहब विशेष में डर की भावना आ रही है। प्रकाश राज अपनी इस विवादित टिप्पणी के चलते ट्रोल हो रहे हैं। 

इस विवादित टिप्पणी का संबंध एक न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम से है, जहाँ प्रकाश राज ने रामलीला के संदर्भ में कहा था, “ये बेहूदा है कि हेलीकॉप्टर एक पुष्पक विमान है। उसमें तीन मॉडल मेकअप करके राम, लक्ष्मण और सीता बनकर आते हैं। फिर वहाँ मौजूद लोग उनकी पूजा करते हैं। मैं इस देश में ये सब नहीं देखना चाहता हूँ। ये वाहियात है।”

इस पर एंकर ने उन्हें टोकते हुए कहा कि लोग इस पर वोट दे रहे हैं, लोगों को इसमें कोई समस्या नहीं है, वो इससे सहमत हैं। इस पर प्रकाश राज ने जवाब देते हुए कहा था, “अगर लोग वोट दे रहे हैं तो छोड़ देते हैं क्या? अगर बच्चे पोर्न देखते हैं तो आप उन्हें छोड़ देते हैं? ये दोनों ही समाज के लिए हानिकारक हैं।” इस पर एंकर का सवाल था कि क्या वो (प्रकाश राज) रामलीला के मंचन की तुलना चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी से कर रहे हैं? 

इस पर प्रकाश राज ने स्पष्ट तरीके से कहा था,

“रामलीला जैसे कार्यक्रम हमारी सोसायटी के लिए सही नहीं हैं। ये अल्पसंख्यकों में डर का माहौल पैदा करते हैं, मैं इसमें कम्फर्टेबल नहीं हूँ। मैं जानता हूँ कि क्या संस्कृति है और क्या नहीं। मंदिर जाना संस्कृति है, लोगों के सामने ऐसा नाटक क्यों? राम, लक्ष्मण, सीता को हेलीकॉप्टर से लाना मेरी संस्कृति का हिस्सा नहीं है।” 

प्रकाश राज की विवादित टिप्पणी पर फ़िल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने ट्वीट कर लिखा, “नाम में प्रकाश है पर अक्ल में घोर अंधकार। नाम में राज भी है पर बातें सारी अराजकता वाली। ऐसे भड़काऊ लोगों को ही #UrbanNaxals कहा जाता है।”

सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने प्रकाश राज के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया और उनकी गिरफ़्तारी की माँग की जाने लगी। यूज़र्स ने प्रकाश राज पर देवी-देवताओं के अपमान और हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया।

कमलेश तिवारी की पत्नी ने सॅंभाली हिन्दू समाज पार्टी की कमान, हत्यारों को फाँसी देने की दोहराई मॉंग

लखनऊ में हिन्दू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की नृशंस हत्या के बाद उनकी पत्नी किरण तिवारी को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया है। हिन्दू समाज पार्टी के द्वारा जारी किए गए बयान के अनुसार, किरण तिवारी आज शाम को प्रेस कॉन्फ्रेन्स को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने यूपी पुलिस पर अपने पति को सुरक्षा न देने के लिए निशाना साधा और साथ ही आरोपितों को फाँसी पर लटकाने की माँग की। उन्होंने कहा कि परिवार ने कभी वित्तीय मदद की माँग नहीं की।

पति की हत्या के बाद पत्नी किरण तिवारी ने पुलिस को बताया था कि उनके पति को जानलेवा धमकियाँ मिलती थीं। उन्होंने अपनी तहरीर में साफ़ लिखा था कि यूपी में बिजनौर ज़िले के रहने वाले मोहम्मद मुफ़्ती नईम काज़मी और अनवारुल हक़ ने साल 2016 में उनके पति का सिर काटने के लिए डेढ़ करोड़ रुपए के ईनाम की सार्वजनिक घोषणा की थी। इस सन्दर्भ में कमलेश तिवारी की पत्नी ने पुलिस में दोनों आरोपितों के ख़िलाफ़ दफ़ा-302 के तहत मुक़दमा दर्ज करने की तहरीर दी थी। उन्होंने दावा किया था कि इन दोनों ने साज़िशन उनके पति की हत्या कराई है।

उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात की थी और हत्यारों को फाँसी की सज़ा दिलाए जाने की माँग की थी। साथ ही उन्होंने यह माँग भी की थी कि उनके दिवंगत पति की हत्यारों को जेल में रोटी न खिलाई जाए।  

बता दें कि इस मामले में सभी साज़िशकर्ता और दोनों हत्यारे पकड़े जा चुके हैं। सूरत से मौलाना शेख, फैजान और रशीद पठान को गिरफ़्तार किया गया था। मंगलवार (अक्टूबर 21, 2019) को गुजरात एटीएस ने संदिग्ध हत्यारों अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन को दबोचा था। आरोपितों ने अपना गुनाह क़बूल भी कर लिया है। ये दोनों लगातार यूपी पुलिस को चकमा दे रहे थे, लेकिन इन्हें गुजरात और राजस्थान की सीमा से धर-दबोचा गया। अशफ़ाक़ एमआर का काम करता था, वहीं मोईनुद्दीन जोमाटो का डिलीवरी बॉय था।

क़रीब 6 घंटे की पूछताछ में मुख्य आरोपित अशफ़ाक और मोइनुद्दीन अपने ज़ुर्म पर बिना किसी ख़ौफ़ के बयान दिया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार (18 अक्टूबर) को सुबह क़रीब 10:30 बजे जब वो हत्या के मक़सद से भगवा कपड़े पहनकर खुर्शीदाबाद के लिए निकले थे, तो रास्ते में दरगाह में उन्होंने नामज़ पढ़ी थी।

महज़ डेढ़ मिनट के अंदर हत्या की इस वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों ने अपना ज़ुर्म क़बूलते हुए कि वो लोग कमलेश तिवारी का सिर धड़ से अलग करना चाहते थे। इसके बाद सिर को हाथ में लेकर वीडियो बनाकर दहशत फैलाना चाहते थे। ऐसा करके वो लोगों को चेताना चाहते थे कि अब कोई धार्मिक विवादित टिप्पणी न करे।

गौरतलब है कि कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर को उनके कार्यालय में हत्या कर दी गई थी। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में ख़ुलासा हुआ कि कमलेश तिवारी की नृशंस हत्‍या को मौलाना मोहसिन ने शरियत क़ानून के क़त्‍ल-ए-वाजिब के सिद्धांत के तहत जायज़ ठहराया था। उसने राशिद के भाई मोईनुद्दीन और अशफ़ाक़ को इसके लिए तैयार किया था।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद देगा कमलेश के हत्यारों को कानूनी मदद, मतलब स्पष्ट है- समुदाय को कोई आपत्ति नहीं!

हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की दिन-दहाड़े गला रेत कर, गोली मार कर हत्या कर दी जाती है। हत्या करने वाले जितने भी आरोपित अब तक पुलिस की पकड़ में आए हैं, उनकी मंशा भी स्पष्ट हो चुकी है कि वो किस तरह से पूरी घटना को वीडियो में कैद कर उसे वायरल करना चाहते थे, एक संदेश देना चाहते थे। हत्या की इस वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों ने अपना ज़ुर्म क़बूलते हुए कहा कि वो लोग कमलेश तिवारी का सिर धड़ से अलग करना चाहते थे। इसके बाद सिर को हाथ में लेकर वीडियो बनाकर दहशत फैलाना चाहते थे।

पढ़ें: कटी गर्दन हाथ में ले कर बनानी थी वीडियो, बाप खुश, बीवी खुश…

इस बीच एक और खबर सामने आ रही है, जो कि और भी हैरान करने वाली है। इस तरह की नृशंस हत्या का विरोध करने और हत्यारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात करने के बजाय जमीयत उलेमा-ए-हिंद हत्यारों के बचाव में सामने आया है। कमलेश तिवारी हत्यकांड में पुलिस ने अब तक पाँच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। तिवारी की पत्नी और माँ ने इनके लिए मृत्युदंड की माँग की है। वहीं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा है कि हत्यारों को बचाने में जो भी कानूनी खर्च आएगा, उसे वो वहन करेंगे।

खौफनाक: हत्यारे अशफाक का ऑडियो सुनिए, क़त्ल के बाद भी बाप-बीवी को गम नहीं, कहा ‘अल्लाह अच्छा करेगा तेरा’

इस्लामी विद्वानों की संस्था जमीयत ने लोगों से अपील की है कि वो हत्यारों की कानूनी लड़ाई लड़ने में उनका साथ दें, क्योंकि वो (हत्यारे) गरीब हैं। बता दें कि आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने पाँचों आरोपितों के परिवार से मुलाकात की और जब उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ने में असमर्थता जताई तो जमीयत ने अपने खर्चे पर वकील और अन्य सहायता करने का भरोसा दिलाया। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सचिव हकीमुद्दीन काशमी और महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वो पाँचों आरोपितों की हरसंभव मदद करेंगे।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद यह कह कर नहीं बच सकता कि भारतीय संविधान और कानून के तहत हर अपराधी को स्वतंत्र न्याय प्रणाली के तहत अपने बचाव में कानूनी सहायता लेने का अधिकार है। वो तो है ही! वो तो कसाब जैसे मास मर्डरर को भी मिली थी। लेकिन सवाल यह है कि आप खुद क्यों दे रहे कानूनी सहायता? क्योंकि इसी भारतीय कानून के अनुसार तय यह भी है कि अपराधी चाहे जो भी हो, जैसा भी हो और उसने अपराध कैसा भी किया हो, उसे राज्य अपनी ओर से कानूनी सहायता मुहैया (वकील देना) तो कराती ही है। फिर आप बजाय इस नृशंस हत्या के विरोध करने हत्यारों की ‘गरीबी का झुनझुना’ लेके मैदान में क्यों कूद गए? शायद इसलिए क्योंकि आप उसे अपने समुदाय का मानते हैं। ‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता’ के नारे लगाने वाले आप ‘हत्यारों का धर्म होता है, और वह हमारे समुदाय से है’ का गाना क्यों गाने लगे?

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के इस कदम ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि वो इस तरह के कुकृत्य और नृशंस हत्या करने वालों के साथ है। इस समुदाय को अभी भी ये हत्यारे सही लग रहे हैं। इस समुदाय के लिए यह एक मौका था, जब इनकी शीर्ष संस्थाएँ सामने आ कर कहतीं कि जो हुआ वो सही नहीं हुआ, मगर जिस तरह से समाज में इसे मौन और मुखर, दोनों तरह से, स्वीकृति मिल रही है, लगता नहीं है कि समुदाय को इससे कोई आपत्ति है।

इस स्थिति में जब समुदाय को सामूहिक तौर पर हत्यारों का बहिष्कार कर के भाईचारे का संदेश देना चाहिए था, इनकी सबसे पढ़ी-लिखी संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद खुलकर उनके बचाव में उतर रही है। यह बताता है कि यह कैंसर कितना भयावह हो चुका है और ऐसी सोच ऊपर से नीचे तक भारतीय समाज को खोखला कर रही है।

‘बंद करो IPS ऑफिसर और उनकी बेटियों की फोन टैपिंग’ – छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार को SC से फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (अक्टूबर 25, 2019) को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मुकेश गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार की खिंचाई की। पुलिस अधिकारी मुकेश गुप्ता ने अपनी याचिका में दावा किया कि राज्य पुलिस उनकी पुत्री व परिवार के अन्य सदस्यों का फोन टैप कर रही है। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से फोन टैपिंग पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया तथा गुप्ता के खिलाफ दर्ज मामलों में उनकी गिरफ्तारी से भी राहत प्रदान की।

मुकदमे की अगली सुनवाई चार नवंबर को होगी। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने छत्तीसगढ़ सरकार से कहा कि अधिकारी के खिलाफ दर्ज मुकदमों पर लगाई गई अंतरिम रोक जारी रहेगी। 

बता दें कि मुकेश गुप्ता पिछली भाजपा सरकार में राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के पुलिस महानिदेशक और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के प्रमुख थे। उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार उन्हें परेशान कर रही है। उन्होंने आगे आरोप लगाया और कहा कि राज्य पुलिस 2001 में एक महिला के आत्महत्या के मामले में उनकी बेटी और परिवार के सदस्यों के फोन टैप कर रही थी और साथ ही पीछा भी कर रही थी। उनका कहना है कि इस मामले में उन्हें दो बार क्लीन चिट मिल चुकी है, इसके बावजूद कॉन्ग्रेस सरकार ने इस केस को दोबारा से चालू किया है।

आईपीएस अधिकारी की तरफ से कोर्ट में पेश होने वाले वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार द्वारा गुप्त रूप से मुकेश गुप्ता, उनकी दोनों बेटियों, उनके ड्राइवर और दोस्त के कॉल को टैप किया जा रहा है। जेठमलानी ने आरोप लगाया कि सरकार गुप्ता के खिलाफ गलत ढंग से कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कोर्ट से गुप्ता के खिलाफ जाँच को रद्द करने की अपील की।

वहीं छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि IPS अधिकारी ने उच्च न्यायालय में भी एक ऐसी याचिका दायर की है, जहाँ याचिका लंबित है। रोहतगी ने कहा कि हाइकोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को जाँच में सहयोग करने के लिए कहा है और वो एक ही समय में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके दो नावों की सवारी कर रहे हैं। यह कानून का उल्लंघन है।

इस पर अदालत की बेंच ने कहा कि मुकेश गुप्ता के हाईकोर्ट में याचिका दायर करने में कोई आपत्ति नहीं है, वो हाईकोर्ट जा सकते हैं, लेकिन यहाँ पर सवाल यह पूछा गया है कि उनके फोन क्यों टैप किए जा रहे थे? रोहतगी ने कहा कि वो अदालत को आश्वासन देते हैं कि अगर मुकेश गुुप्ता का फोन टैप किया जा रहा था, तो उसे तुरंत रोक दिया जाएगा और वो इसका जवाब भी देंगे कि सरकार के निर्देश के बावजूद ऐसा क्यों किया जा रहा था।

गौरतलब है कि मुकेश गुप्ता और पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह पर 2015 में नागरिक आपूर्ति घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद जाँच के दौरान गैरकानूनी तरीके से फोन टैप करने और भारतीय टेलीग्राफ कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने के आरोप हैं। दोनों अधिकारी को इसी साल फरवरी में निलंबित कर दिया गया था। गुप्ता और सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 193, 201, 466, 471 और 120बी के साथ ही भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

Video: दुबई पुलिस के बैंड ने बजाया भारत का राष्ट्रगान, दिवाली के मौके पर लोगों ने किया स्वागत

दुबई में दिवाली की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं, इसके जश्न की तस्वीरें और वीडियो ट्विटर पर छाए हुए हैं। लेकिन, ख़ुशी की बात यह रही कि दुबई पुलिस बैंड ने दिवाली समारोह के एक अनूठे कार्यक्रम के दौरान भारत का राष्ट्रगान बजाया। इसे देखकर सोशल मीडिया पर लोग काफ़ी उत्साहित और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। इसका वीडियो भी काफ़ी तेज़ी से लोगों तक अपनी पहुँच बना रहा है।

दुबई पुलिस बैंड के प्रदर्शन के दौरान दर्शकों ने राष्ट्रगान गाया और आनन्द लिया। इस दौरान लेज़र शो का भी आयोजन किया गया था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि दिवाली समारोह के इस अनूठे कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। जैसे ही पुलिस बैंड ने लोगों के लिए ‘जन-गण-मन’ बजाया, भीड़ खड़ी हो गई और जब राष्ट्रगान ख़त्म हुआ उस वक़्त लोगों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई, वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। दुबई में हज़ारों लोग इस दिवाली समारोह कार्यक्रम के साक्षी बने।

दुबई में भी दिवाली समारोह के दौरान आतिशबाज़ी से पूरा आसमान भर गया।

समाचार एजेंसी IANS ने खलीज टाइम्स का हवाला देते हुए बताया कि दुबई में गुरुवार (24 अक्टूबर) को आतिशबाज़ी की गई, दीप जलाए गए। बॉलीवुड नृत्य प्रदर्शन, उत्सव बाज़ार के अलावा हाथी परेड प्रदर्शनी नामक एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन भी इस दौरान किया गया।

IANS ने अपनी ख़बर में लिखा कि मध्य पूर्व में आगंतुकों ने विश्व प्रसिद्ध हाथी परेड प्रदर्शनी का लुत्फ़ उठाया। इसमें विश्व स्तर पर हाथी संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाने के लिए 50 आदमकद शिशु हाथी मूर्तियाँ बनाई गई थीं।

इस बीच, सुपर मार्केट में लोग पारम्परिक भारतीय आभूषणों की ख़रीददारी करते दिखे। आभूषणों के लिए, दीरा और शारजाह गोल्ड सूक और बुर जिन्हें दुबई का छोटा भारत कहा जाता है, उस मीना बाज़ार में सोना ख़रीदने के लिए दुकानों में लोगों की भारी भीड़ थी।

हरियाणा में बीजेपी बनाएगी सरकार, JJP के पास होगा उपमुख्‍यमंत्री पद: अमित शाह ने की घोषणा

तमाम कयासों के बाद अब हरियाणा में बीजेपी और जेजेपी गठबंधन की सरकार बननी तय हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तस्वीर साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के लोगों के बहुमत को मानते हुए बीजेपी और जेजेपी ने तय किया है कि दोनों पार्टियाँ मिलकर राज्य में सरकार बनाएँगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा जबकि डिप्टी सीएम जेजेपी का होगा।

बता दें कि शुक्रवार की शाम काफी देर तक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के घर बैठक चल रही थी। बैठक के बाद अमित शाह ने ऐलान किया हरियाणा में जेजेपी ने बीजेपी को अपने 10 विधायकों सहित समर्थन दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह भी कहा जा रहा है कि JJP को गठबंधन सरकार में 4 मंत्री पद (2 कैबिनेट और 2 राज्य मंत्री) मिल सकता है। पहले 3 मंत्री (2 कैबिनेट और 1 राज्य मंत्री) पद की संभावना जताई जा रही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस राजनीतिक हलचल पर शाम से ही नजर बानी हुई थी। जब कुछ देर पहले ही दुष्यंत चौटाला बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने उनके निवास पर गए थे जिसके बाद दोनों के बीच सरकार बनाने को लेकर आपसी सहमति की बात अब सामने आई है। अब इस घोषणा के बाद मनोहर लाल खट्टर राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा विधायक दल की बैठक शनिवार को होगी, जिसमें खट्टर को दोबारा नेता चुना जाएगा। इसके बाद वह राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। शपथ समारोह दिवाली बाद ही होने की संभावना है।

POK असल में टेररिस्ट ओकुपाइड कश्मीर, गिलगित बाल्टिस्तान समेत पूरा POK हमारा: सेना प्रमुख

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने आज (25 अक्टूबर, 2019 को) पाकिस्तान के कश्मीर पर दावे की धज्जियाँ उड़ाते हुए दावा किया है कि अपने कब्जे वाले POK तक पर भी उसका खुद नियंत्रण नहीं है; वह तो जिहादी आतंकियों के कब्जे में है। जनरल रावत सेना के कमांडरों की एक कॉन्फ़्रेंस में भाषण दे रहे थे जब उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कश्मीर के जिन इलाकों पर अवैध कब्ज़ा कर लिया है, वे खुद उसके प्रशासन या कंट्रोल से नहीं चलते। “पीओके असल में पाकिस्तान का आतंकवादियों के नियंत्रण में चलने वाला हिस्सा है।” रावत ने कहा।

उन्होंने जम्मू कश्मीर की अखंडता और पूरे भूभाग पर भारत के अधिकार पर भी अपने भाषण में जोर देते हुए इस बात को रेखांकित किया। “जब हम जम्मू-कश्मीर की बात करते हैं, तो पूरे जम्मू कश्मीर में पीओके और गिलगित बाल्टिस्तान भी आते हैं। यानि पीओके और गिलगित बाल्टिस्तान एक ओकुपाइड क्षेत्र बन जाते हैं- ऐसे क्षेत्र जिन पर हमारे पश्चिमी पड़ोसी ने अवैध तरीके से कब्जा किया हुआ है।” जनरल रावत फील्ड मार्शल के एम् करियप्पा मेमोरियल लेक्चर में बोल रहे थे

उन्होंने संविधान के विवादित अनुच्छेद 370 की भी बात करते हुए कहा कि इसे एक अस्थायी प्रावधान के रूप में लाया गया था। “जब आर्टिकल 370 को प्रस्तावित करते समय इसमें ‘अस्थायी’ शब्द था तो इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं हुई थी… ऐसे में अचानक से पाकिस्तान ने क्यों अनुच्छेद 370 के मुद्दे को तूल देना शुरू कर दिया है?”

“ऐसा इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान जिस ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा किए बैठा है, उस पर उसका खुद का ही नियंत्रण नहीं है; वो आतंकियों से कंट्रोल होती है। पीओके असल में एक आतंकियों द्वारा नियंत्रित देश या पाकिस्तान के भीतर का आतंकियों द्वारा नियंत्रित हिस्सा है।” सेना प्रमुख ने कहा। उन्होंने पाकिस्तान पर कश्मीर में हालातों के सामान्य होने में रुकावट डालने का भी आरोप लगाया। इसी में उन्होंने कई सारे सेब व्यापर से जुड़े लोगों की हत्याओं का भी ज़िक्र किया।

उन्होंने कई अन्य मुद्दों पर भी अपने भाषण में बात की। सैनिकों के हथियारों के बारे में उन्होंने कहा कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ राइफलें सिग सॉइर (Sig Sauer) इसी साल के अंत तक भारत को मिलने लगेंगी

धनतेरस पर ‘लोहा लेने’ की तैयारी कीजिए, सोना तो आता ही रहेगा

अक्सर ‘मोटिवेशनल’ कहे जाने वाले विदेशी वीडियो नजर आते हैं जिसमें लोगों की बाँटने या देने के गुण को दर्शाया जाता है। इनमें आम तौर पर कोई साधारण सा दिखने वाला व्यक्ति खाने की तलाश में होता है और वो लोगों से किसी रेस्तरां इत्यादि के पास खड़ा, खाना माँगता है। ज्यादातर मामलों में जब ठीक-ठाक या अच्छी आर्थिक स्थिति वाले लोगों से वो कुछ खाने को माँगता है तो उसे भिखारियों की तरह झिड़क दिया जाता है। वहीं कहीं कोने में बैठा कोई गरीब घर-संपत्ति हीन भिखारी सी हालत में होता है जिससे वो खाना माँग लेता है।

जहाँ बाकी लोगों ने उसे दुत्कार दिया होता है, वहीं ये गरीब जिसके पास शायद अपने अगले भोजन के लिए भी पैसे नहीं, वो इसे अपने बर्गर में से आधा हिस्सा दे डालता है! आश्चर्य की बात तो है लेकिन इसके बारे में कुछ लोग कहते हैं कि जिसे भूख का अंदाजा हो, वो अपने खाने में से हिस्सा बाँटता है। जिन्हें अंदाजा नहीं कि भूख क्या होती है, वो लोग खाना माँग रहे व्यक्ति की तकलीफ समझ ही नहीं पाते। ऐसा आज होना शुरू हुआ है, ऐसा भी नहीं, भारतीय इतिहास में देखें तो काफी पहले इसके उदाहरण मिल जाते हैं।

भारत में सन्यासियों के लिए भिक्षाटन आम बात थी और आदिशंकराचार्य से जुड़ी कहानियों में भी उनके भिक्षा माँगने के किस्से मौजूद हैं। कहा जाता है ऐसे ही एक बार भिक्षा माँगते हुए वो एक बार एक बहुत गरीब ब्राह्मण के घर जा पहुँचे। गरीब के घर में कुछ नहीं था और ब्राह्मणी इधर-उधर कुछ भिक्षा में देने के लिए ढूँढने लगी। आखिर उसे घर में खाने को देने लायक सिर्फ एक सूखा सा आंवला मिला। ब्राह्मणी ने वही उठाकर आदिशंकराचार्य की झोली में डाल दिया। दरवाजे पर ही खड़े आदिशंकराचार्य काफी समय से ब्राह्मणी के प्रयास देख रहे थे।

अपनी दरिद्रता की स्थिति में भी याचक को निराश न करना पड़े, इसलिए घर में मौजूद एकमात्र खाने योग्य वस्तु का दान करते ब्राह्मणी को देख उनके मुख से देवी लक्ष्मी की स्तुति में एक स्त्रोत फूट पड़ा। उन्होंने माँ लक्ष्मी से उस परिवार की निर्धनता दूर करने के लिए जो प्रार्थना की, उसे ‘कनकधारा स्त्रोत’ के नाम से जाना जाता है। कुछ कथाएँ कहती है कि इस स्त्रोत से प्रसन्न माँ लक्ष्मी ने वहाँ सोने की बारिश कर दी। कुछ दूसरी कथाएँ बताती हैं कि इस स्त्रोत से घर के आँवले के पेड़ में स्वर्ण के आँवले उग आए और सुबह आँगन में सोने के आँवले बिखरे पड़े मिले।

कहानी कई दृष्टिकोणों से आश्चर्यजनक कही जा सकती है। याचक को निराश न लौटाने के ब्राह्मणी के प्रयास तो रोचक हैं ही, देने वाले को अगली बार कभी ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े इसके लिए आदिशंकराचार्य का सीधा माँ लक्ष्मी से माँगना भी आश्चर्यजनक है। कहानी में देवी, दान देने वाली, सभी पात्र स्त्रियाँ ही हैं, आदिशंकराचार्य एक निमित्त मात्र हैं, ये भी देखने लायक है। आयुर्वेद की दृष्टि से देखें तो आँवले की तुलना स्वर्ण से की गयी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि विटामिन सी के अलावा आँवले में आयरन, कैल्शियम जैसे तत्व भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये स्त्रियों के लिए एक औषधि नहीं बल्कि आवश्यकता है।

हाल ही में किसी बड़े स्वयंसेवी समूह ने स्त्रियों में आयरन की कमी पर एक अच्छा सा वीडियो भी बनाया है। विद्या बालन जैसी नामचीन हस्तियों ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर इसे शेयर किया था। इसमें मुख्यतः स्त्रियों से ये कहा गया था कि इस ‘धनतेरस’ पर आप क्या लेंगी? सोना खरीद लेना तो परंपरागत है, लेकिन स्त्रियों शरीर में आयरन की कमी देखी जाती है। भारत में करीब-करीब 40% स्त्रियाँ रक्ताल्पता (एनीमिया) से पीड़ित हैं। इसके लिए हाल में सरकार आयरन फॉलिक एसिड के टेबलेट भी बाँटना शुरू कर चुकी है। लोहे की कमी से ये भी याद आया कि हाल ही में कमलेश तिवारी और उससे पहले डॉ. नारंग जैसे कई लोगों का हाल तो हम सभी देख ही चुके हैं।

बाकी सवाल ये है कि इस धनतेरस में खरीदा क्या गया? लोहे के नाम पर कुछ बर्तन भर लिए गए, सिर्फ स्वर्ण की खरीदारी हुई, या आँवला भी नजर आया? लोहा लेने (जो कि कहावत भी है) के बारे में क्या सोचते हैं आप?

गिरीश चंद मुर्मू होंगे J&K के पहले LG, राधा कृष्ण माथुर संभालेंगे लद्दाख: 31 अक्टूबर से बदल जाएगी व्यवस्था

केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर से दो केंद्र शासित प्रदेशों में बँटने जा रहे जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए दो अलग-अलग उप राज्यपाल घोषित कर दिए हैं। आईएएस अफसर गिरीश चंद्र मुर्मू को जम्मू कश्मीर का कार्यभार सौंपा गया है, वहीं राधा कृष्ण माथुर बौद्ध बहुल लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के लेफ्टिनेंट गवर्नर होंगे। लद्दाख ने अपनी मर्ज़ी से जम्मू-कश्मीर राज्य की बजाय केंद्र द्वारा शासित होने की माँग की थी।

साथ ही खबर आ रही है कि वर्तमान राज्यपाल सत्यपाल मलिक को गोवा का गवर्नर बना कर भेजा जा रहा है। मलिक ने राज्य की प्रशासनिक सत्ता अनुच्छेद-370 के निरस्त किए जाने जैसे मुश्किल समय संभाली थी। वे इस कालखंड में राहुल गाँधी के साथ राज्य में निमंत्रण दिए जाने और वापिस लिए जाने को लेकर नोंकझोंक के लिए भी चर्चित रहे।

माथुर और मुर्मू के नामों की घोषणा राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने की है। इनके नामों को अप्रत्याशित माना जा रहा है।

(यह डेवलपिंग स्टोरी है। और जानकारी मिलने पर इसे आगे अपडेट किया जाता रहेगा।)