सोशल मीडिया पर इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। जिसमें प्रधानमंत्री अरबी साफा पहने नजर आ रहे हैं। तरह-तरह के संदेशों के साथ इस तस्वीर को फॉरवर्ड/शेयर किया जा रहा है। साथ ही दावा भी किया जा रहा है कि ये तस्वीर उस समय की है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दौरे पर गए और उन्होंने सऊदी अरब के किंग को खुश करने के लिए इसे पहना।
हालाँकि, इस तस्वीर में कितनी सच्चाई है, इसकी पड़ताल किए बिना देश के प्रधानमंत्री के लिए कोई भी धारणा बनाना नैतिक रूप से गलत है, लेकिन हैरानी की बात है देश की सबसे पुरानी पार्टी ‘कॉन्ग्रेस के आईटी सेल’ ने भी ये तस्वीर अपने फेसबुक से शेयर की हुई है। जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा है, “भक्तों… तुम मु##मों का बायकाट करो और तुम्हारे पापा…”
चूँकि, कॉन्ग्रेस के आईटी सेल एंड सोशल मीडिया पेज नाम से शेयर किए गए इस पोस्ट पर तरह-तरह कमेंट थे, जिसमें तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे। इसलिए हमने इस तस्वीर की सच्चाई सामने लाने के लिए कोशिश की। जिसके बाद बिना किसी अधिक मेहनत के साफ हो गया कि प्रधानमंत्री की ये तस्वीर डॉक्टर्ड यानी फर्जी है। यहाँ एक और बात जानकारी के लिए बता दें कि बेशक कॉन्ग्रेस आईटी सेल का यह पेज सत्यापित नहीं है और बहुत ही कम समय में इसके तीन बार नाम बदले गए हैं लेकिन इस संदिग्ध पेज के 3000000 से ज़्यादा फॉलोवर हैं।
जिसे शेयर करने के कारण कुछ सोशल मीडिया यूजर्स कॉन्ग्रेस को लताड़ लगा रहे हैं और जिन यूजर्स ने इस तस्वीर को शेयर किया है उन्हें भी फर्जी तस्वीर वायरल करने पर जमकर आड़े हाथों लिया जा रहा है।
Landed in the Kingdom of Saudi Arabia, marking the start of an important visit aimed at strengthening ties with a valued friend. Will be taking part in a wide range of programmes during this visit. pic.twitter.com/3MskcllePr
तस्वीर की सच्चाई के बारे में बता दें कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपने ट्विटर हैंडल से रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद 29 अक्टूबर को वहाँ की तस्वीरें शेयर की थी। जिसमें साफ देखा जा सकता है कि उन्होंने अपने सिर पर साफा जैसी कोई चीज नहीं पहनी और डॉक्टर्ड तस्वीर का वायरल होना सिर्फ़ कॉन्ग्रेस आईटी सेल के प्रोपगेंडा का हिस्सा है। जिसे पीएम मोदी की छवि बिगाड़ने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
पटियाला हाउस कोर्ट ने विकास पांडे द्वारा दायर मानहानि मामले को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा उनके ख़िलाफ़ जारी किए गए समन आदेश के ख़िलाफ़ दायर पुनरीक्षण याचिका को ख़ारिज कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद, केजरीवाल को अब AAP समर्थक ब्लॉगर ध्रुव राठी द्वारा अपलोड किए गए एक निंदनीय वीडियो को शेयर करने के मामले में कोर्ट में पेश होना पड़ेगा।
दिल्ली के सीएम ने पटियाला हाउस कोर्ट की सत्र अदालत में मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन के ख़िलाफ़ अपील की थी। फ़ैसले में, विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहर ने कहा, “लगाए गए आदेश (मजिस्ट्रेट के आदेश) ने समन के चरण में शामिल मुद्दों के सभी प्रासंगिक पहलुओं से निपटा है। इस स्तर पर, अदालत को केवल यह देखना है कि आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं और यदि इस पैमाने पर लगाए गए आदेश की तुलना की जाए, तो मुझे आदेश में कोई अवैधता, असंगतता या अनियमितता नहीं मिली।”
मानहानि का मामला AAP समर्थक ब्लॉगर ध्रुव राठी द्वारा अपलोड किए गए एक निंदनीय वीडियो से संबंधित है, जिसमें उन्होंने कहा था कि विकास पांडे बीजेपी आईटी सेल के सक्रिय सदस्य थे और उन्होंने महावीर प्रसाद को 50 लाख रुपए की रिश्वत देने की पेशकश की थी। यद्यपि वीडियो में राठी ने दावा किया उसने महावीर को रिश्वत दिए जाने संबंधी बातचीत को रिकॉर्ड करने की सलाह दी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। उनके पास ‘50 लाख रिश्वत की पेशकश’ संबंधी कोई रिकॉर्डिंग नहीं है, जिसकी पेशकश कथित तौर पर विकास ने की थी। अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं होने के बावजूद राठी ने विकास पांडे के ख़िलाफ़ झूठे आरोप लगाना जारी रखा।
इसके अलावा, राठी ने यह भी तर्क दिया कि महावीर प्रसाद को रिश्वत देने के लिए विकास पांडे ने अभिषेक मिश्रा का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन, राठी के पास इस बात को प्रूव करने के लिए कोई भी कोई सबूत नहीं था। आरोपों को सही सााबित करने के लिए राठी के पास कोई कॉल रिकॉर्डिंग नहीं थी जिससे यह स्पष्ट हो जाए पांडे ने महावीर प्रसाद को रिश्वत देने के लिए मिश्रा का इस्तेमाल किया हो। सच तो यह है कि राठी ने वीडियो में ख़ुद इस बात को स्वीकार किया कि उसके पास अपने दावों को सही साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
केजरीवाल ने राठी के इसी वीडियो को शेयर किया था, जिससे विकास पांडे के बारे में झूठी बातें प्रचारित हुईं। इसके ख़िलाफ़ क़दम उठाते हुए विकास पांडे ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और यूट्यूब ब्लॉगर के ख़िलाफ़ मानहानि का केस दर्ज करवाया। बता दें कि विकास पांडे पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों के समर्थक हैं।
जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बुधवार (30 अक्टूबर) मध्यरात्रि को ख़त्म हो गया। इसके साथ ही दो नए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख आस्तित्व में आ गए। अनुच्छेद-370 के तहत मिले विशेष दर्जे को संसद द्वारा निरस्त किए जाने के बाद आज से यह निर्णय प्रभावी हो गया है। गृह मंत्रालय ने बुधवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी थी।
रिटायर्ड IAS राधाकृष्ण माथुर ने गुरुवार को लद्दाख के पहले उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ़ से IAS उमंग नरुला को लद्दाख के उपराज्यपाल के सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, IPS अधिकारी एसएस खंडारे को लद्दाख पुलिस का प्रमुख बनाया गया है। लद्दाख के अलावा जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल गिरिश चंद्र मुर्मू होंगे।
Leh: Radha Krishna Mathur takes oath as the first Lieutenant Governor of Union Territory of Ladakh. pic.twitter.com/lYpybg1YD0
ग़ौरतलब है कि 6 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को पारित कर दिया था। इसके तहत तय हुआ था कि दो अलग-अलग केंद्र शासित राज्यों जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के रूप में 31 अक्टूबर 2019 से अस्तित्व में आएगा। ऐसा पहली बार है जब किसी राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील कर दिया गया है। इस सिससिले में श्रीनगर और लेह में दो अलग-अलग शपथग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। पहला समरोह लेह में हुआ जहाँ आरे माथुर ने लद्दाख के उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली। दूसरा शपथग्रहण समारोह श्रीनगर में आयोजित होगा, जहाँ मुर्मू उपराज्यपाल का पद भार सँभालेंगे।
इसके साथ ही भारत में राज्यों की संख्या अब 28 हो गई है और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या सात से बढ़कर नौ हो गई है। अब जम्मू-कश्मीर के संविधान और रणबीर दंड संहिता का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा। केंद्र शासित प्रदेश बनने के साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की क़ानून व्यवस्था और पुलिस पर केंद्र का सीधा नियंत्रण होगा, जबकि भूमि वहाँ की निर्वाचित सरकार के अधीन होगी।
बता दें कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों ही अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बने हैं। केवल अंतर इतना है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश बना है और लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश है। लद्दाख की ओर से पिछले कई वर्षों से इस माँग को रखा जा रहा था।
शुरुआत में दोनों राज्यों का एक ही हाईकोर्ट होगा लेकिन दोनों राज्यों के एडवोकेट जनरल अलग होंगे। सरकारी कर्मचारियों के सामने दोनों केंद्र शासित राज्यों में से किसी एक को चुनने का विकल्प होगा।
ISIS के खूंखार आतंकी अबु बकर अल बग़दादी पर रेड की पहली वीडियो सामने आ गई है। खुद अमेरीकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इसे बुधवार (अक्टूबर 23 , 2019 ) को जारी किया। हालाँकि, ये वीडियो ब्लैक एंड व्हाइट है लेकिन इसमें देखा जा सकता है कि अमेरिकी सैनिक बगदादी पर हमला करने की तैयारियों में जुटे हैं। बता दें कि इस ऑपरेशन को ‘मिशन कायला’ नाम दिया गया था। जोकि एक अमेरिकी मानवाधिकार कार्यकर्ता के नाम पर था जिसका बगदादी ने लगातार रेप किया था और बाद में उसकी हत्या कर दी गई थी।
“…at the compound, fighters from two locations in the vicinity of the compound began firing on U.S. aircraft participating in the assault.” – Gen Frank McKenzie CDR USCENTCOM pic.twitter.com/SkrtHNDs7w
ये वीडियो ड्रोन कैमरे से रिकॉर्ड किया गया है, यहाँ वो परिसर साफ-साफ देखा जा सकता है जहाँ अबु बकर अल बगदादी छुपा था। जिसको टारगेट बनाते हुए ही अमेरिकी सेना ने वहाँ पर हमला बोला। लेकिन जब बगदादी के आतंकियों ने अमेरिकी सेना के एयरक्रॉफ्ट करीब आते देखे तो उन्होंने उनपर फायरिंग की। जारी वीडियो में अमेरिकी सेना पर हुई फायरिंग भी कैद है। इसके अलावा इस वीडियो में अमेरिकी असॉल्ट फोर्स के कमांडों को उस परिसर की तरफ बढ़ते भी दिखाया गया है जिसमें बगदादी छिपा था।
इस वीडियो को जारी करते हुए अमेरिकी सेना के जनरल फ्रैंक मैंकेजी ने बताया, “परिसर के आसपास के इलाकों में 2 जगहों से बगदादी के आतंकियों द्वारा अमेरिकी एयकक्राफ्ट्स पर गोलीबारी शुरू की गई। परिसर के आस-पास हमले के दौरान हमने बार-बार उन लोगों से शांति से बाहर आने का आग्रह किया। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि बगदादी की तरफ से किए हमलों के बावजूद भी हमने आम नागरिकों को बचाने और बच्चों की सुरक्षा करने का हर संभव प्रयास किया।”
यहाँ बता दें कि अभी चार दिन पहले रविवार (अक्टूबर 2 7, 2019 ) को अमेरिकी सेना ने बगदादी को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के इरादे से उसके सीरिया स्थित ठिकाने पर छापा मारा था। जहाँ खुद को घिरा देखकर उसने खुद को अपने तीन बच्चों समेत बम से उड़ा लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, थोड़ी देर बाद बगदादी का डीएनए टेस्ट किया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर जनरल फ्रैंक ने कहा कि बगदादी का डीएनए सैंपल इराक के कैंप बुका में हिरासत के दौरान साल 2004 में लिया गया था। इसके बाद एफ-15 फाइटर जेट से उस परिसर को उड़ा दिया गया।
हमले के बाद जारी हुई विस्फोट की तस्वीरों में हमने जगह-जगह खून के निशान और मांस के लोथड़े पड़े देखे थे। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने इस बात की पुष्टि की थी कि लोगों को अपने आतंक से भयभीत करने वाला बगदादी कुत्ते की मौत मारा गया। अपने बयान में ट्रंप ने बगदादी के आखिरी समय का उल्लेख करते हुए बताया था कि बगदादी अपने अंतिम समय में डरपोकों की तरह इधर-उधर भाग रहा था। वो इतना बदहवास हो चुका था कि उसने अंत में एक सुरंग में जाकर अपने तीन बच्चों समेत खुद को विस्फोटक जैकेट से उडा लिया।
अभी तक ढाई साल सीएम की कुर्सी से कम किसी भी कीमत पर नहीं तैयार हो रही शिव सेना ने रुख बदल लिया है। एक हफ्ते (24 अक्टूबर, 2019 से आज, 30 अक्टूबर तक) तक मुख्यमंत्री पद के लिए खींचा-तानी मचाने और भाजपा की बजाय कॉन्ग्रेस और शरद पवार की एनसीपी के साथ सरकार बनाने की धमकी के बाद यू टर्न लेते हुए पार्टी ने इशारा किया है कि अब वह सीएम की कुर्सी को लेकर और अड़ने को इच्छुक नहीं है। मीडिया से बात करते हुए शिव सेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ अपनी युति की कद्र करती है।
बकौल राउत, “हमें पता है कि गठबंधन में बने रहना ही बेहतर है और यही राज्य के भी हित में है। जो हम चाहते हैं, वह यह कि हमें सम्मान दिया जाए।” लेकिन इसी के साथ राउत ने यह भी जोड़ा कि पार्टी सरकार बनाने के लिए भी किसी तरह की उत्सुकता नहीं दिखाना चाहती। उन्होंने कहा, “हमें इसे ठंडे दिमाग से करना होगा।”
Shiv Sena spokesperson Sanjay Raut has said that the party valued its partnership with the BJPhttps://t.co/L2vDKmN4Ok
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक कल पहले शिव सेना विधायकों की बैठक होगी और उसके बाद शिव सेना और भाजपा के नेता बैठ कर सरकार की रूप रेखा तय करेंगे।
कल ही तक शिव सेना के बोल भाजपा के साथ एनडीए युति को सहेजने के आज के सुर से बिलकुल उलट थे। शिव सेना न केवल 50-50 फॉर्मूला के अंतर्गत ढाई साल सीएम की कुर्सी और मंत्री परिषद में बड़ी हिस्सेदारी से कम के लिए तैयार नहीं थी, बल्कि भाजपा के हरियाणा में जेजेपी के साथ गठजोड़ पर भी तंज़ कस रही थी। संजय राउत ने ही ताना मारते हुए कहा था कि जेजेपी के उलट शिव सेना में किसी के पिताजी जेल में नहीं पड़े, जिन्हें निकालने के लिए सरकार का हिस्सा बनने की जल्दी हो।
इसके पहले शिव सेना के मुखपत्र सामना में भी भाजपा पर जम कर आग उगली गई थी। सामना के सम्पादकीय के मुताबिक यह जनादेश कोई “महा जनादेश” नहीं था। यह उनके लिए सबक है जो “सत्ता की मद में चूर” हैं। सामना में शिव सेना ने यह भी कहा था कि इस जनादेश ने वह ग़लतफ़हमी भी दूर कर दी कि चुनाव जीतने का रास्ता दल-बदल की इंजीनियरिंग करना और विपक्षी पार्टियों को तोड़ना है। यही नहीं, तस्वीर पूरी तरह साफ़ होने के पहले ही आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने के नारे भी शिव सैनिक लगाने लगे थे।
एक समय तो फडणवीस ने भी शिव सेना पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए पार्टी छोड़ कर गए नाराज़ बागियों को मनाने की कवायद शुरू कर दी थी। हालाँकि मोदी ने उन्हें 5 साल का कार्यकाल पूरा कर चुनाव में जाने और फिर जीत कर आने वाले पहले मराठी सीएम होने की बधाई देते हुए एक तरह से ठाकरे को बता दिया था कि वे झुकेंगे नहीं। इसके अलावा फडणवीस को भाजपा ने दोपहर में न केवल अपने विधायक दल का नेता चुन लिया था, बल्कि उनके नेतृत्व में और शिव सेना के साथ सरकार बनाने का ऐलान भी कर दिया था।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी (पीटीआई) ने पंजाब सरकार के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए अपने कोटे से निमंत्रण भेजा है। 9 नवंबर 2019 यानी शनिवार को करतारपुर कॉरिडोर का अनावरण इसके दोनों छोरों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इमरान खान को करना है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पीटीआई ने बयान जारी कर कहा, “पीटीआई ने तय किया है कि नवजोत सिंह सिद्धू को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह के लिए निमंत्रण भेजा जाए।” ज़ी न्यूज़ के अनुसार पीटीआई के सीनेटर फैसल जावेद खान ने इस बाबत सिद्धू से इमरान खान के निर्देशों के अनुसार फ़ोन पर बात की और उन्हें 9 नवंबर के समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया। टाइम्स नाउ के दावे के अनुसार सिद्धू ने यह निमंत्रण स्वीकार कर लिया है और आश्वासन दिया है कि वे करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह का हिस्सा बनेंगे।
#BREAKING: Pakistan Govt invites Congress leader from Punjab Navjot Singh Sidhu for the opening of the Kartarpur Corridor to Pakistan. PTI Senator @FaisalJavedKhan calls Sidhu on the directions of Pak PM Imran Khan. My friend @ghulamabbasshah reports.
यहाँ यह दिलचस्प बात है कि खुद सिद्धू की पार्टी कॉन्ग्रेस का जो प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जा कर करतारपुर कॉरिडोर के समारोह का हिस्सा बनेगा, उसमें सिद्धू का नाम नहीं था। कॉन्ग्रेस के प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह करेंगे, जिन्हें न्यौता पीटीआई नहीं पाकिस्तान सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से भेजा गया है। इसके अलावा वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरपीएन सिंह, रणदीप सुरजेवाला, दीपेंदर हुड्डा और जितिन प्रसाद एवं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह करतारपुर कॉरिडोर के अनावरण में हिस्सेदारी करेंगे।
गौरतलब है कि सिद्धू पहले अमरिंदर सिंह की कैबिनेट का हिस्सा भी थे, लेकिन पहले तो एंटी-नेशनल और पाकिस्तान-समर्थक देखी जाने वाली बयानबाजी, और उसके बाद राजनीतिक अनुशासनहीनता के चलते कैप्टेन ने उनका मंत्रिपद छीन लिया था। मीडिया सूत्रों के मुताबिक पहले सिद्धू का भी नाम इस प्रतिनिधिमंडल में था, लेकिन उनकी पिछली पाकिस्तान यात्राओं के बवाल को देखते हुए उसे हटा लिया गया।
सिद्धू इमरान खान के खास दोस्तों में गिने जाते हैं और इमरान के शपथ समरोह में वे पाकिस्तान के तत्कालीन सेनाध्यक्ष कमर बाजवा और खालिस्तानी गोपाल सिंह चावला के साथ भी खासे करीबी नज़र आए थे। इमरान ने यह भी कहा था कि सिद्धू अगर कभी पाकिस्तान में चुनाव लड़ें तो वे वहाँ भी जीत हासिल कर सकते हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अम्बानी ने मंगलवार को सऊदी अरब में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में आई मंदी अस्थाई है और सरकार द्वारा लिए जा रहे फैसले आने वाले वक़्त में इसके प्रभावों को पूरी तरह से पलट देंगे। सऊदी अरब के निवेश कार्यक्रम के मंच से बोलते हुए कारोबारी मुकेश अम्बानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा लिए गए फैसलों पर भरोसा जताते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों में जो कदम भारत की सरकार ने उठाए हैं, आने वाले समय में उनसे अर्थव्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। अम्बानी ने कहा
“नई-नई टेक्नोलॉजी के आने से दुनिया प्रतिदिन बदल रही है, इसी से दुनिया की अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदल रहा है, जो भले ही अनिश्चितता लाए मगर साथ ही साथ यह नए अवसर भी लेकर आती है।”
भारत में निवेश करने वाले एक कारोबारी के नाते मुकेश अम्बानी ने विश्वास दिलाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में आ रही मंदी का असर आने वाली तिमाही में धीरे-धीरे कम होता दिखेगा। वे बोले कि पिछले 2-3 सालों में बड़े बदलाव हुए हैं। अम्बानी ने बताया कि पिछली पाँच तिमाही के दौरान अर्थव्यवस्था में गिरावट आई है। सरकार ने पिछले कुछ महीनों मे एहतियात के लिए कई ऐसे नियम बनाए हैं, जिनसे आर्थिक सुधार को बल मिल सकेगा। गौरतलब है कि मुकेश अम्बानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और सऊदी आर्मको के बीच इन दिनों 20 प्रतिशत शेयर्स की बिक्री पर बातचीत चल रही है, जिसकी अनुमानित कीमत तकरीबन 15 बिलियन यूएस डॉलर बताई जा रही है।
PM Modi at Future Investment Initiative (FII), Riyadh (Saudi Arabia): By 2024, we aim to invest US$ 100 Billion in refining, pipelines, gas terminals. I am happy that Saudi Aramco has decided to invest in West Coast Refinery Project – which will be the largest refinery of Asia. pic.twitter.com/82FbDiq68V
बता दें कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सऊदी अरब के इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद थे। पीएम मोदी ने निवेशकों की मदद का वादा करते हुए कहा कि राजनीतिक स्थिरता, बड़े स्तर और बड़े बाज़ार में नीतियों की स्थिरता वाले भारत में निवेश करना, निवेशकों के लिए हितकर साबित होगा। पीएम मोदी ने बताया कि पाँच ट्रिलियन डॉलर वाली इकॉनमी का रास्ता तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई बड़े बदलाव किए हैं जोकि आने वाले समय विकास को गति देंगे। इस दौरान मोदी ने वर्ल्ड बैंक के ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ में भारत के योगदान का भी ज़िक्र किया।
Leaving with a marked upswing in bilateral relations.
PM @narendramodi departs from Riyadh after steering the India-Saudi relationship on a upward trajectory pointing towards greater collaboration in future. pic.twitter.com/xZyLRhtDdB
बता दें कि पीएम मोदी इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य-वक्ता सऊदी अरब के दो दिवसीय दौरे पर पहुँचे थे। इस कार्यक्रम में दुनिया भर के कई उद्योगपति भी शामिल हुए थे। इस दौरान पीएम ने अपने संबोधन में खाड़ी देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की। इसके बाद भारत और सऊदी के बीच रूपे कार्ड को लेकर एमओयू पर भी दस्तखत किया गया, जिसके बाद बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के बाद भारत के रूपे कार्ड को डिजिटल पेमेंट की मान्यता देने वाला सऊदी तीसरा खाड़ी देश हो जाएगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट कर बताया, “द्विपक्षीय बातचीत में एक उल्लेखनीय अध्याय जुड़ गया। भारत और सऊदी के संबंधों को एक नई पहचान मिली है, दोनों देशों के आपसी रिश्तों को उज्जवल भविष्य की दिशा देकर पीएम मोदी रियाद से विदा हुए।”
‘थूक कर चाटने’ मुहावरे का अर्थ होता है पहले किसी चीज़ को ऐंठ में ठुकरा देने के बाद बाद में खिसिया कर उसके लिए खुद आगे से माँग रखना। और बिहार में सत्तारूढ़ नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ऐसा ही करती दिख रही है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी का बयान आया है कि अब उनकी पार्टी केंद्र सरकार में शामिल होने को तैयार है, अगर उसे मंत्री पदों की पेशकश संख्या बल के आधार पर (प्रपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन में) हो तो।
केसी त्यागी ने उदाहरण के तौर पर बिहार की भाजपा और जदयू की मिली जुली एनडीए सरकार में भारतीय जनता पार्टी सरकार को उप मुख्यमंत्री पद दिए जाने का भी ज़िक्र किया। गौरतलब है कि बिहार में भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी उप मुख्यमंत्री पद पर आसीन हैं।
इसके पहले लोकसभा चुनावों के नतीजे आने पर जब मोदी सरकार 2.0 की एनडीए कैबिनेट बनाने की कवायद शुरू हुई, तो जदयू ने सरकार में शामिल होने से इंकार कर दिया था। नीतीश कुमार के हवाले से केसी त्यागी ने ही बयान दिया था कि महज़ एक कैबिनेट मंत्री पर उनकी पार्टी संतुष्ट नहीं है, इसलिए जदयू राजग का हिस्सा रहते हुए भी केंद्रीय कैबिनेट से बाहर रहेगी।
तब केसी त्यागी ने ही इसे ‘अंतिम निर्णय’ बताया था और भविष्य में भी इससे पलटने की संभावना से इंकार किया था। उन्होंने कहा था, “जो प्रस्ताव दिया गया था वह जेडीयू के लिए अस्वीकार्य था, इसलिए हमने फैसला किया है कि भविष्य में भी जेडीयू एनडीए के नेतृत्व वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं होगी, यह हमारा अंतिम निर्णय है।”
KC Tyagi,JDU: The proposal that was given was unacceptable to the JDU therefore we have decided that in future also JDU will never be a part of the NDA led Union Cabinet, this is our final decision pic.twitter.com/Nag1j19D8E
लोकसभा चुनाव में जदयू ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से पार्टी को 16 सीटों पर जीत मिली थी। भाजपा अपने कोटे के सभी 16 सीट जीतने में सफल रही थी, वहीं लोजपा के खाते में 6 सीटें आईं थीं।
इसके बाद इसका ‘बदला’ लेते हुए जदयू ने इस घटना के बाद हुए नीतीश कुमार के कैबिनेट विस्तार में भाजपा को स्थान नहीं दिया था। इसके बाद से बिहार में भाजपा और जदयू के बीच लगातार तनातनी चल रही है। कभी गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार के इफ़्तार पार्टी देने पर निशाना साधा, जिसकी शिकायत जदयू ने अमित शाह तक कर दी, तो कभी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे संजय पासवान ने कहा कि जदयू-भाजपा गठबंधन का मुख्य चेहरा अब भारतीय जनता पार्टी से होना चाहिए।
ऐसे में माना जा रहा है कि जदयू का यह पैंतरा आगामी बिहार विधान सभा चुनाव को लेकर खेला जा रहा है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (इंटरनेशनल मोनेटरी फंड, आईएमएफ) के इशारे पर अपने देश में बिक्री कर (सेल्स टैक्स) बढ़ाया तो बिफरे हुए पाकिस्तानी व्यापारी सड़क पर उतर आए हैं। पाकिस्तान में सारी व्यापार संबंधी गतिविधियाँ ठप पड़ गईं हैं। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी माँगें माने जाने तक हालात ऐसे ही बने रहेंगे। वे सेल्स टैक्स में कमी के अलावा पाकिस्तान में सीएनआइसी (कम्प्यूटराइज़्ड नेशनल आइडेंटिटी कार्ड) के इस्तेमाल संबंधी नियमों में छूट की माँग भी कर रहे हैं।
#Pakistani traders on Tuesday began a two-day shutter-down strike against the government’s tax policies, & the #business activities remain suspended.
The traders say that the markets will remain closed until the government accepts their demands. They want the condition requiring a CNIC for large transactions revoked and lower sales taxhttps://t.co/uXdi08i1kL
पकिस्तान के लिए ऐसी हड़ताल का इससे बुरा समय हो नहीं सकता। एक तरफ़ पाकिस्तान टेरर फाइनेंसिंग पर नज़र रखने वाली संस्था एफएटीएफ की ग्रे सूची से डार्क ग्रे में डाले जाने के बाद ब्लैक लिस्ट किए जाने से बचने के लिए जद्दोजहद कर रहा है, दूसरी ओर तेज़ी से बढ़ती पाकिस्तानी रुपए के मुकाबले डॉलर की कीमतों के साथ वह 3.3% पर दम तोड़ती अर्थव्यवस्था का शिकार बना हुआ है।
इस बीच हड़तालियों के नेताओं में से एक और ऑल कराची ट्रेडर्स अलायंस के अध्यक्ष अतिक मीर के मुताबिक यह नया टैक्स सिस्टम व्यापारियों को मार देगा। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इसी साल के मध्य में (जुलाई 2019) हुए प्रदर्शनों के बाद यह दूसरा विरोध प्रदर्शन है। इसमें पाकिस्तान के ज्यादातर दुकानें, मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बंद रहे।
जिन टैक्स नियमों के खिलाफ यह प्रदर्शन हो रहा है, वे पाकिस्तान को आईएमएफ से मिले 6 अरब डॉलर के कर्ज के बदले में लादे गए नियमों में से एक है। आईएमएफ ने जिन शर्तों पर पाकिस्तान को कर्ज दिया था, उनमें से एक थी कि इमरान खान सरकार अपना टैक्स राजस्व बढ़ाने के उपाय करे। इसी के चलते इमरान खान ने सेल्स टैक्स बढ़ाया था। गौरतलब है कि यह अंदेशा पहले से ही जताया जा रहा था कि आईएमएफ से कर्ज लेने के बाद पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था इस एजेंसी के नियमों और शर्तों के इशारों पर नाचने के लिए मजबूर हो जाएगी।
इसके अलावा इमरान खान के सीएनआइसी (कम्प्यूटराइज़्ड नेशनल आइडेंटिटी कार्ड) के इस्तेमाल संबंधी नियमों से भी वहाँ के व्यापारी परेशान हैं। नियमों के अनुसार 50 हजार पाकिस्तानी रुपए से ऊपर की किसी भी खरीददारी पर पहचान पत्र ज़रूरी होगा। व्यापारी इसे बढ़ाकर 1 लाख पाकिस्तानी रुपए किए जाने की माँग कर रहे हैं।
मलाड पश्चिम के रहने वाले और मुंबई के फिल्म उद्योग से जुड़े कलाकार विश्व भानु उस समय सुर्ख़ियों में आ गए जब उनकी एक फेसबुक पोस्ट वायरल होने लगी। उसमें उन्होंने लिखा था कि दिवाली के मौक़े पर सोसायटी के लोग (मुस्लिम) उन्हें और उनकी पत्नी को घर में दीये जलाकर रोशनी करने और रंगोली बनाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। भानू ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनकी सोसायटी के लोगों ने न सिर्फ उनके घर की लाइट्स को नष्ट किया बल्कि बाक़ी लगी लाइट्स को हटाने के लिए मजबूर भी किया।
उन्होंने इसकी पुलिस में शिकायत भी की थी।
लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह स्तब्ध कर देने वाला है। न केवल पत्रकारिता के समुदाय विशेष ने उनके बयान को तोड़ना मरोड़ना और उन्हें पब्लिसिटी की भूख में झूठ बोलने वाला बताना शुरू कर दिया, बल्कि मुंबई पुलिस ने भी उनके ऊपर दबाव डालकर फेसबुक पर अपनी शिकायती पोस्ट डिलीट करने और मामले के सुलट जाने की झूठी पोस्ट लिखने के लिए उन्हें मजबूर किया।
इसके बाद पुलिस के बयान के आधार पर उन्हें हर किसी मीडिया हाउस ने झूठा बताना शुरू कर दिया, जिसमें एनडीटीवी से लेकर के टाइम्स ऑफ़ इंडिया और रिपब्लिक तक शामिल हैं।
और विश्व भानु से इस मामले को लेकर किसी ने भी बात नहीं की- सिवाय क्विंट के पत्रकार मेघनाद बोस के, जिसने इसमें राजनीतिक ‘विंग’ का एंगल निकाल लिया।
क्विंट की हैडलाइन से ही साफ़ है कि असल में यह साम्प्रदायिक शत्रुता, हिन्दू-मुस्लिम विवाद की घटना नहीं थी, और ‘राइट विंग’ इसे ऐसा बना रहा है। मेघनाद बोस की रिपोर्ट में भानु के हवाले से कहा गया, “मैं कम्युनिस्ट हूँ और हमेशा से संघ, भाजपा और हिन्दूवादी दक्षिणपंथियों का विरोधी रहा हूँ। उदाहरण के तौर पर, मैं गायों की रक्षा के नाम पर भारत में होने वाली मॉब लिंचिंग का विरोधी रहा हूँ। जैसे मैं हिन्दू कट्टरपंथ का विरोधी हूँ, वैसे ही मैं मुस्लिम कट्टरपंथ के भी खिलाफ हूँ।”
बोस की रिपोर्ट में इसके बाद पड़ोसियों के बच्चों को झालरों (फेयरी लाइट्स) से बिजली का झटका लगने और यह बात भानु द्वारा खुद भी माने जाने की बात कही गई है। इसके बाद रिपोर्ट में मामले के मुख्य आरोपित इमरान खान का बयान है, जिनका कहना है कि उन्होंने भानु से केवल या तो झालरों को ऊपर उठा लेने या जहाँ से तार कटा था वहाँ पर टेप लगा देने के लिए कहा था। बकौल क्विंट की रिपोर्ट, प्रियंका (भानू की पत्नी) ने इसके लिए मना कर दिया, जिससे बात बढ़ी।
इस मुद्दे पर भानु का कहना है कि क्विंट ने उनकी बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। क्विंट ने रिपोर्ट ऐसी लिखी है मानो भानु ने इमरान के आरोप को स्वीकार ही कर लिया हो, जबकि असल में, बकौल भानु, उन्होंने इसकी संभावना से इंकार भले नहीं किया, लेकिन इसे स्वीकारा भी नहीं। उन्होंने यह सवाल पूछा था कि अगर बच्चों को वहाँ झटका लगा तो उसके बाद भी बच्चे वहाँ खेल क्यों रहे थे।
अपने कम्युनिस्ट होने को लेकर भी विश्व भानु ने कहा कि वे एक कलाकार हैं, और वामपंथी थियेटर जैसे जन नायक मंच के साथ उनका सालों पहले जुड़ाव था। लेकिन इसके आधार पर उन पर ‘वामपंथी’ या ‘कम्युनिस्ट’ का ठप्पा लगा देना गलत होगा। “अगर मैं लेफ्ट वाले लोगों के साथ कोई थियेटर कर लूँ, या मुस्लिमों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठा दूँ, तो इससे मैं वामपंथी कैसे हो गया?” उन्होंने कहा कि उनका संघ की विचारधारा से विरोध 20 साल पहले के थियेटर के दिनों में था, लेकिन वे कभी राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं रहे।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके मामले में सहायता करने के लिए आगे आए हिंदूवादी कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा था कि वे उनकी विचारधारा से इत्तेफाक नहीं रखते। इसके बावजूद ‘जगाओ हिन्दू’ समेत हिंदूवादी संगठनों ने उनकी सहायता की, क्योंकि हिन्दू धर्म में पैदा हुए हर इंसान को वे अपना भाई मानते हैं, और उनकी सहायता करने को वे तैयार हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि बालकृष्ण नामक एक हिन्दू कार्यकर्ता 60 साल की उम्र होने के बावजूद चेम्बूर से मलाड तक उनका हाल जानने आए, जबकि भानु के पड़ोसियों ने उन्हें पता तक बताने से मना कर दिया। जब भानु ने बाहर आकर उन्हें खुद घर ले आने की बात की, तो बालकृष्ण ने मना किया और कहा कि वे घर के भीतर सुरक्षित रहें, वे खुद उनका मकान ढूँढ़ लेंगे।
मुंबई पुलिस को लेकर भानु का कहना है कि पुलिस ने कई तरह से उन पर मामले से पीछे हटने का दबाव डाला। न केवल उन पर मामले के आपसी सुलह से सुलझ जाने की झूठी पोस्ट लिखने का, बल्कि उन्हें धमकी भी दी गई कि उनकी फेसबुक पोस्ट से मुंबई में हिन्दू-मुस्लिम दंगे हो सकते हैं। उनसे कहा गया कि उनकी पोस्ट से संभावित दंगों की आग मुंबई से आगे कर्नाटक तक भी जा सकती है। पुलिस ने उनसे कहा था, “अगर आप ऐसे करेंगे तो कितने मुस्लिमों को मार दिया जाएगा, जहाँ हिन्दू बहुसंख्या में हैं।”
इसके अलावा भानु का दावा है कि उन पर ऐसा दबाव बनाने के बाद पुलिस ने उनके घर आ कर उन्हें दोबारा लाइट्स लगाने और दिवाली पर धूमधाम करने के लिए मजबूर किया क्योंकि भानु ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग कर सहायता माँगी थी, और अब उनसे जवाब माँगा जाएगा कि भानु दिवाली मना पाए या नहीं।
अगर भानु की बात को सही माना जाए तो, अपनी जवाबदेही से बचने के लिए पुलिस ने बिना कोई कार्रवाई किए ही भानु को हुक्म दिया कि वे ऐसा दिखाएँ कि कार्रवाई हुई है और भानु कार्रवाई से संतुष्ट होकर दीवाली मना रहे हैं, ताकि पुलिस वाले अपना कोरम पूरा कर सकें।
बिल्डिंग में रहे रहे अन्य हिन्दुओं के असहयोग के बारे में भानु का कहना है कि उन्होंने सहयोग इसलिए नहीं किया है, क्योंकि या तो वे किराए पर रह रहे हैं और उनके मकान मालिक मुस्लिम हैं, इसलिए वे चुप हैं, या फिर वे मुस्लिम प्रभुत्व वाले इलाके में डर के कारण चुप हैं।
क्विंट की रिपोर्ट में जिस बिल्डिंग सचिव गुंडु राडेकर का ज़िक्र है और उनके हवाले से घटना को हल्का करके दिखाने की कोशिश हुई है, उनके बारे में भी भानु का कहना है कि वे खाली नाम भर के सचिव हैं। उनकी कोई सुनता नहीं है, और उन्हें ‘मुस्लिम प्रभुत्व वाली सोसाइटी का हिन्दू सचिव’ का कोरम पूरा करने के लिए ही रखा गया है।
इसके अलावा उन्होंने यह भी ज़िक्र किया है कि कैसे उनके खुद के मुस्लिम और ‘सेक्युलर’ थियेटर वाले दोस्त सोशल मीडिया पर उन्हें वे आर्टिकल भेज रहे हैं, जिनमें उन्हें झूठा बताया गया है। वे भानु से पूछ रहे हैं कि उन्होंने झूठ क्यों बोला। उन्हें ऐसा भी इशारा किया जा रहा है कि थियेटर मुस्लिम प्रभुत्व वाली इंडस्ट्री है, जहाँ उन्हें अब काम नहीं मिलेगा। हालाँकि भानु को ऐसा लगता है कि यह सब बकवास है और थियेटर को इसकी परवाह नहीं है।
उनका कहना है कि उन्हें झूठा कहने वाले एनडीटीवी में उन्हीं के कई दोस्त काम करते हैं, जो उन्हें भी जानते हैं और यह भी कि भूतकाल में भानु कई बार मुस्लिमों के हक के लिए खड़े हुए थे, लेकिन वे दोस्त उनके साथ खड़े नहीं हुए। जिस भानु को कम्यूनिस्ट बताया जा रहा है, उसी कम्युनिस्ट पार्टी के बृंदा करात और सीताराम येचुरी भी उनके नाटक देख चुके हैं, लेकिन वहाँ से भी सहायता नहीं आई। अगर वे ‘लेफ्टिस्ट’ हैं, तो उनके समर्थन में और कोई लेफ्टिस्ट क्यों नहीं आ रहा?
ऑपइंडिया से बात करते हुए भानु ने कहा, “अगर मैं लेफ्टिस्ट हूँ, तो मैं आज से छोड़ देता हूँ लेफ़्टिज्म।”
(मूलतः अंग्रेजी में प्रकाशित नूपुर शर्मा की इस रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद मृणाल प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव ने किया है।)