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कमलेश तिवारी की हत्या से लेकर अब तक: इन 20 पॉइंट्स में समझें इस हत्याकांड का पूरा घटनाक्रम

हिन्दू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या के मामले में 5 दिन बाद सभी आरोपित पकड़े जा चुके हैं। इस क्रम में यूपी पुलिस की एसटीएफ और गुजरात एटीएस ने दिन-रात एक कर के कार्रवाई की। यहाँ हम इस हत्याकांड को लेकर अब तक क्या-क्या हुआ, इस सम्बन्ध में जानकारी दे रहे हैं। चूँकि, अलग-अलग शहरों से गिरफ्तारियाँ हुई हैं, हम आपको हर एक अपडेट के साथ बताएँगे कि इस केस में पुलिस कैसे आगे बढ़ी और सोशल मीडिया से लेकर मीडिया पर क्या-क्या चलता रहा। यहाँ देखें:

  1. दिल्ली के खुर्शेदबाग इलाक़े में स्थित कमलेश तिवारी के घर में 2 लोग भगवा वस्त्रों में आए और उन्होंने उनकी हत्या कर दी। मिठाई के डब्बे में हथियार ले गए थे हत्यारे। वह राम मंदिर मामले में पक्षकार रहे थे।
  2. कमलेश तिवारी के नौकर ने बताया कि उसे सामान लेने के लिए बाहर भेजा गया और जब वो वापस आया तो उसने कमलेश तिवारी की लाश पड़ी देखी। अल-हिन्द ब्रिगेड नामक संगठन के नाम से कुछ मैसेज वायरल हुए, जिसमें कहा गया कि उसने कमलेश तिवारी की हत्या की है और जंग शुरू हो चुकी है। हालाँकि, इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं हो पाई।
  3. कमलेश तिवारी के परिजनों ने जाँच से असंतुष्टि जताई। बाद में उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात के बाद हत्यारों के लिए मृत्युदंड की माँग की और जाँच से संतुष्टि जताई
  4. हालाँकि, मीडिया में लगातार उनकी माँ का ही बयान चलाया जाता रहा, जिसमें वो स्थानीय राजनीति के कारण अपने बेटे की हत्या की जाने की बात कहती रहीं।
  5. सोशल मीडिया पर कई मुस्लिमों द्वारा ‘हा हा’ रिएक्ट करने और जश्न मनाने की बातें सामने आईं। यूपी पुलिस ने ऐसे 14 मामलों में कार्रवाई की। 67 एकाउंट्स ब्लॉक किए गए
  6. सरकार ने घोषणा करते हुए कहा कि कमलेश तिवारी के परिजनों को सरकारी आवास दिया जाएगा। उनके बड़े बेटे को आत्मरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार देने की घोषणा की गई
  7. कई अन्य हिंदूवादी नेताओं ने भी धमकी मिलने की शिकायत की। राष्ट्रीय बजरंग दल के अध्यक्ष ने अपनी जान की चिंता जताई। नोएडा के हिंदूवादी नेता अमित जानी को धमकी मिली
  8. कमलेश तिवारी के साथ ही हिन्दू समाज पार्टी के यूपी प्रकोष्ट के अध्यक्ष गौरव गोस्वामी को भी मारने का प्लान था लेकिन वो वहाँ पहुँच नहीं पाए।
  9. गुजरात एटीएस ने इस हत्या के बाद सूरत से 3 लोगों को गिरफ़्तार किया। तीनों के नाम फैजान, रशीद और सलीम हैं। इन तीनों ने ही इस हत्याकांड की साजिश रची थी। बिजनौर से अनवारुल हक़ और नईम नामक दो मौलानाओं को गिरफ़्तार किया गया।
  10. नागपुर से आसिम अली नामक नेता को गिरफ़्तार किया गया, जिसने इस हत्याकांड के बाद हत्यारों का जमानत कराने और पूरा ख़र्च वहन करने की जिम्मेदारी उठाई थी। उसने नितिन गडकरी के ख़िलाफ़ चुनाव भी लड़ा था।
  11. पुलिस ने लखनऊ स्थित खालसा होटल के उस कमरे को ढूँढ निकाला, जहाँ दोनों हत्यारे रुके हुए थे। होटल में भगवा वस्त्र और खून से सने कपड़े मिले।
  12. दोनों हत्यारों की पहचान अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन के रूप में हुई। अशफ़ाक़ ने फ़र्ज़ी फेसबुक अकाउंट बना कर ख़ुद को हिंदूवादी दिखाया और राम मंदिर के लिए भीड़ जुटाने का लालच देकर कमलेश तिवारी से मिलने का समय माँगा था। दोनों पर ढाई-ढाई लाख का इनाम रखा गया
  13. राजनीतिक विश्लेषक अब्दुल रज्जाक ने कमलेश तिवारी की हत्या की निंदा करने से इनकार किया। ओवैसी का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वो कमलेश तिवारी को धमकी देते दिख रहे हैं।
  14. यूपी एसटीएफ को पता चला कि दोनों हत्यारे शाहजहाँपुर में छिपे हैं। एक ड्राइवर तौहीद को हिरासत में लिया गया, जिसने इन दोनों को गाड़ी मुहैया कराई थी। बरेली से एक मुफ़्ती को हिरासत में लिया गया, जिसनें इन दोनों का इलाज किया था।
  15. उधर जिस क्षेत्र में आरोपितों के छिपे होने की आशंका थी, उसी इलाक़े में स्थित लखीमपुर में टेरर फंडिंग का मामला सामने आया। पूर्व प्रधान सहित 14 लोग एटीएस की रडार में आए।
  16. 22 अक्टूबर की शाम को गुजरात एटीएस ने दोनों आरोपितों को शामलाजी के पास वाले इलाक़े से धर-दबोचा। उन्हें गुजरात-राजस्थान सीमा से गिरफ़्तार किया गया।
  17. कमलेश तिवारी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उन्हें 15 बार चाकू मारा गया। उनके सीने में 4 सेंटीमीटर सुराख़ मिला। उनके चेहरे पर गोली भी मारी गई थी। उनके सीने पर 7 बार वार किया गया और गर्दन पर 12 सेंटीमीटर।
  18. यूपी के क़ानून मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि आरोपितों की डे-टू-डे सुनवाई के लिए फ़ास्ट ट्रैक अदालत में मामला चलाया जाएगा। कोर्ट में सजा-ए-मौत की माँग की जाएगी।
  19. सभी आरोपितों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। गुजरात एटीएस ने आरोपितों को यूपी पुलिस को सौंपने की तैयारी शुरू की।
  20. कमलेश तिवारी पर 2015 में पैगम्बर मुहम्मद पर टिप्पणी करने का आरोप लगा था। यही उनकी हत्या का कारण भी बना।

कुल मिलकर देखें तो इस मामले में अब तक सूरत से फैजान, रशीद और मोहसिन गिरफ़्तार हुए हैं। बरेली से मुफ़्ती बेग अली को पुलिस ने शिकंजे में लिया। बिजनौर से मौलानाओं अनवारुल हक़ और नईम को पुलिस ने अपनी गिरफ़्त में लिया। महाराष्ट्र पुलिस ने नागपुर से आसिम अली को गिरफ़्तार किया। अंत में अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन को गिरफ़्तार किया गया। सीसीटीवी में दिख रही एक अन्य महिला शहनाज बानो का इस घटना से कोई लिंक सामने नहीं आया। बरेली से गिरफ़्तार ड्राइवर तौहीद से पूछताछ के लिए उसे हिरासत में लिया गया। वहीं सूरत में गिरफ़्तार आरोपित के पिता ने अपने परिवार के पाँच वक़्त के नमाजी होने और दाढ़ी बढ़ाने को बचाव के रूप में प्रस्तुत किया।

बजरंग बली के दर पर प्रियंका गाँधी, अटैची लेकर पहुँचे नेताओं का मोबाइल बाहर रखवाया

महासचिव प्रियंका गॉंधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण शिविर बुधवार को शुरू हुआ। यूपी में पार्टी को मजबूत करने के मकसद से यह शिविर प्रियंका की मॉं और कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में हो रहा है। शिविर में शामिल होने से पहले प्रियंका ने चुरुवा के हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की।

दो दि​वसीय प्रशिक्षण शिविर में कार्यकर्ताओं को भाजपा से लड़ने के गुर सिखाए जाएँगे। कॉन्ग्रेस नेताओं को समझ नहीं आ रहा है कि अनुच्छेद 370 और पाकिस्तान पर भाजपा को कैसे जवाब दें? इस कार्यशाला में इन्हीं बातों का तार्किक जवाब देने के गुर सिखाए जाएँगे और भाजपा के ख़िलाफ़ माहौल बनाने की योजना बनाई जाएगी। प्रशिक्षण छह सत्रों का होगा। इस दौरान कार्यकर्ताओं व नेताओं को सिखाया जायेगा कि भाजपा सरकार को किन-किन मुद्दों पर घेरना है। कार्यशाला को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है।

प्रशिक्षण कार्यशाला में कॉन्ग्रेस के चुने हुए 45 नेता भाग ले रहे हैं। रायबरेली शहर से कुछ किलोमीटर दूर भुएमऊ गेस्ट हाउस में कॉन्ग्रेस नेताओं का जमावड़ा लगा है। परिसर में ही सभी नेता रुके हुए हैं। सभी नेता अटैची में अपना सामान लेकर पहुँचे। शिविर शुरू होने से पहले हरेक नेता से मोबाइल फोन ले लिया गया ताकि कोई भी तस्वीर या सूचना लीक न हो।

प्रशिक्षण शिविर के लिए प्रियंका मंगलवार को ही यूपी पहुॅंच गईं थी। उन्होंने नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया और रणनीति को लेकर गुप्त चर्चा की। रायबरेली जाते समय रास्ते में कई जगहों पर मोदी सरकार पर आर्थिक मंदी के लिए और योगी सरकार पर ‘बढ़ते अपराध के लिए’ निशाना साधा।

कमलेश तिवारी हत्याकांड: हत्यारे अशफाक़ और मोईनुद्दीन ने ट्रेन में छोड़ दिया मोबाइल, शहर-शहर दौड़ती रही पुलिस

हिन्दू महासभा के सदस्य और हिन्दू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में नए नए खुलासे हो रहे हैं। ताज़ा जानकारी में पता चला है कि मुख्य आरोपित शेख अशफाक हुसैन व पठान मोईनुद्दीन अहमद ने पुलिस को 4 दिन तक चकमा देने के लिए बेहद शातिराना तरीके का इस्तेमाल किया था। उन्होंने पुलिस को अपनी लोकेशन ट्रेस करने से रोकने के लिए अपना मोबाइल ट्रेन में छोड़ दिया और ट्रेन के गंतव्य से इतर अलग ही दिशा में फ़रार हो गए। उत्तर प्रदेश पुलिस, STF और ATS उन्हें ढूँढ़ते हुए देश की सीमा के पास अम्बाला में उनके पाकिस्तान निकल भागने की आशंका को रोकने की जद्दोजहद में लगी रहीं, क्योंकि मोबाइल सिग्नल की आखिरी लोकेशन अम्बाला की ही थी, वहीं दूसरी ओर हत्या के आरोपित शहर के बाद शहर बदल कर पुलिस के हत्थे चढ़ने से बच कर निकल रहे थे।

इस बीच पठान और हुसैन के छोड़े हुए मोबाइल को किसी और ने उठा लिया। उसने मोबाइल में लगा हुआ सिम कार्ड निकाल कर अपना कार्ड लगा दिया और फ़ोन का इस्तेमाल करने लगा। इधर पुलिस फ़ोन की पहचान संख्या (IMEI नंबर) का पीछा करने में लगी रही। हालाँकि, उत्तर प्रदेश पुलिस बरेली और शाहजहाँपुर पर भी नज़र बनाए थी, लेकिन दोनों आरोपित अम्बाला की ओर पुलिस का ध्यान भटकाकर पश्चिमी सीमा की ओर निकल भागने में सफ़ल हो गए। यह बात अलग है कि वहाँ भी वे गुजरात-राजस्थान बॉर्डर पार करने के चक्कर में गुजरात पुलिस के आतंकरोधी दस्ते (ATS) के हाथों में पड़ ही गए।

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार जिस समय उत्तर प्रदेश पुलिस शातिर जिहादियों के जाल में फँस कर उनकी गलत लोकेशन के पीछे भाग रही थी, उसी समय गुजरात एटीएस ने उन दोनों के परिजनों को ढूँढ़ निकाला था। गुजरात एटीएस के उप महानिदेशक (डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल) हिमांशु शुक्ल ने मीडिया को बताया कि दोनों के पैसे खत्म हो गए तो पहले तो उन्होंने रिश्तेदारों और दोस्तों को फ़ोन कर पैसे के लिए सम्पर्क किया, लेकिन पुलिस के डर से किसी ने उनके खाते में पैसे नहीं डाले। अंत में उन्हें हार कर पैसा नकद लेने के लिए गुजरात में घुसने का प्लान बनाना पड़ा। एटीएस को इसके बारे में आरोपितों में से एक की पत्नी के ज़रिए पता लग गया। पुलिस ने जाल बिछाया और राजस्थान बॉर्डर पर शामलजी से राज्य की सीमा में दाखिल होने की कोशिश में उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

अयोध्या: दीपोत्सव राजकीय मेला घोषित, योगी सरकार ने दिए ₹133 लाख

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अयोध्या में होने वाले दीपोत्सव को ‘स्टेट फेयर’ यानी राजकीय मेला घोषित किया है। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने 133 लाख के बजट को मंजूरी दी है। साथ ही कैबिनेट ने ऑडिट का प्रस्ताव भी पारित किया ताकि इस पैसे का दुरुपयोग न हो सके।

बता दें कि अयोध्या में तीन दिवसीय दीपोत्सव के दौरान अयोध्या की भव्यता देखते ही बनती है। पूरे शहर में रोशनी के खास इंतजाम किए जाते हैं। दीपावली पर होने वाले इस आयोजन में अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए देशभर से कलाकारों को बुलाया जाता है।

26 अक्टूबर को, दीपावली से एक दिन पहले शुरू होने वाले इस त्योहार में यूपी सरकार ने करीब 5.5 लाख दीप जलाने का फैसला किया है। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और मंत्री श्रीकांत शर्मा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि दीपोत्सव को राजकीय मेला घोषित करने की मांग अयोध्या के जिलाधिकारी की ओर से आई थी। उन्होंने बताया कि डीएम इस बात की माँग पहले भी (15 जनवरी और 3 जुलाई को) दो बार कर चुके थे।

कैबिनेट मंत्री शर्मा ने कहा, “मौजूदा समय में दीपोत्सव राज्य के पर्यटन विभाग द्वारा संचालित किया जाता है। लेकिन इसकी व्यापकता को देखते हुए इसे राजकीय मेले का दर्जा देने का फैसला किया गया है।।” उन्होंने बताया कि इस मेले का प्रबंधन जिलाधिकारी के पास रहेगा।

बता दें कि पिछले साल भी अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन किया गया था। इस दौरान सरयू नदी के तट पर करीब तीन लाख दीये प्रज्ज्वलित किए गए थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह आयोजन काफी चर्चित रहा था। दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम जंग सूक भी इस मौके पर मौजूद थीं। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 2017 में इस आयोजन की शुरुआत की थी। उस साल सरयू नदी के किनारे सभी घाट और मंदिरों में 1.5 लाख दीये प्रज्ज्वलित किए गए थे।

गौरतलब है कि बहुप्रतीक्षित अयोध्या विवाद में अगले महीने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की भी उम्मीद है। शीर्ष अदालत में 40 दिन चली सुनवाई के दौरान इतिहास और साक्ष्य हिंदुओं के पक्ष में नजर आए थे।

मुस्लिम हिंदुस्तान में कॉन्ग्रेस की रहम-ओ-करम पर नहीं हैं, हम यहाँ हैं तो अल्लाह की मेहरबानी से: ओवैसी

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहालदुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर आज फिर से (अक्टूबर 23, 2019) जोरदार निशाना साधा है। दरअसल, आज ओवैसी के नाम और तस्वीर के साथ उनकी पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक पोस्टर शेयर किया है। जिसमें लिखा है कि भारत में मुस्लिम कॉन्ग्रेस की मेहरबानी से नहीं बल्कि बाबा साहेब और अल्लाह की मेहरबानी से है।

बुधवार (अक्टूबर 23, 2019) की दोपहर में शेयर हुए इस पोस्टर को हिन्दी के साथ-साथ उर्दू में भी शेयर किया गया है। इसमें ओवैसी के नाम के ऊपर उनका कथन स्पष्ट लिखा है, “मुस्लिम हिंदुस्तान में है तो कॉन्ग्रेस की मेहरबानी या रहम ओ करम पर नहीं। हम यहाँ है तो बाबा साहेब के संविधान की वजह से और अल्लाह की मेहरबानी की वजह से।”

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी ओवैसी कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी पर खुलेआम तंज कस चुके हैं। महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार दौरान उन्होंने कहा था कि जब कोई जहाज डूबता है, तो जहाज का कैप्टन सभी को सुरक्षित निकाल लेता है, लेकिन राहुल गाँधी ऐसे कप्तान हैं जो कॉन्ग्रेस के जहाज को डूबता देख छोड़कर भाग गए।

बता दें AIMIM के प्रमुख ओवैसी ने कुछ दिन पहले अयोध्या राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद के मामले में भी एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने अपने ट्विटर अकॉउंट पर लिखा था, “मुझे नहीं पता क्या फैसला आएगा, लेकिन मैं चाहता हूँ फैसला ऐसा आए जिससे कानून के हाथ मजबूत हों। बाबरी मस्जिद को गिराया जाना कानून का मजाक था।”

इसके अलावा कुछ दिन पहले ओवैसी ने मोहन भागवत पर भी जमकर निशाना साधने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा था, “भारत को हिंदू राष्ट्र बताकर यह मेरा इतिहास नहीं मिटा सकते। ये काम नहीं करेगा। वह यह नहीं कह सकते कि हमारी संस्कृति, आस्था पहचान हिंदुओं से जुड़ी है।” ओवैसी के अनुसार भारत न कभी हिन्दू राष्ट्र था, न है और न कभी बनेगा। इंशाल्लाह!!

‘जिहादी’ और ‘एंटी-नेशनल’ अपराध श्रेणियाँ हुईं आधिकारिक: NCRB ने जारी किए 2017 के आँकड़े

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताज़ा आँकड़े जारी हो गए हैं। वर्ष 2017 अपराध की घटनाओं की संख्या के इन आँकड़ों में पहली बार ‘एंटी नेशनल एलिमेंट्स (राष्ट्र विरोधी तत्व)’ और ‘जिहाद’ का ज़िक्र किया गया है। एंटी नेशनल तत्वों में उत्तर पूर्व के आठ राज्यों (सिक्किम, असम, नागालैंड, मिज़ोरम, मेघालय, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा) के उग्रवादी संगठनों से जुड़े लोग, नक्सली, माओवादी आदि वामपंथी चरमपंथी आतंकी, ‘जिहादी’ (इस्लामी आतंकवादी) आदि शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर पूर्व के उग्रवादियों ने 10 लोगों की हत्याएँ की हैं, जिनमें से 8 लोग एक ही राज्य झारखंड के हैं।

नक्सलियों, माओवादियों और अन्य वामपंथी आतंकियों ने 82 हत्याएँ की हैं। एक बार फिर, इन मृतकों में 79 केवल एक ही राज्य छत्तीसगढ़ के हैं। इसी तरह जिहादी आतंकवाद के हाथों मारे गए 36 लोगों में से 34 मृतक केवल जम्मू कश्मीर के हैं।

NCRB के अनुसार नक्सलियों ने 2017 में 652 आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया था। जिहादी और आतंकवादी वारदातें 377 हुईं और उत्तर पूर्व के उग्रवादियों ने 421 अपराध किए थे। न्यूज़ पोर्टल The Week की रिपोर्ट के अनुसार NCRB ने अपराध के कुछ मापदंडों को शामिल इसलिए नहीं किया है क्योंकि उन पैमानों पर उपलब्ध जानकारी और आँकड़े “अस्पष्ट” और “भरोसे लायक नहीं” थे। गृह मंत्री के एक अधिकारी के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि जिन मापदंडों को रिपोर्ट से बाहर रखा गया है, उनमें मॉब लिंचिंग से हुई हत्याएँ, RTI कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं इत्यादि के साथ हुए अपराध भी शामिल हैं।

अपराधों की तहरीर (FIR) की बात करें तो उत्तर प्रदेश इसमें चोटी पर है, जहाँ 3 लाख से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का नंबर आता है। अगर राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज कुल आपराधिक मामलों की बात करें तो 2017 में 30,62,579 केस दर्ज किए गए थे। यह संख्या पिछले दो सालों 2016 और 2015 के क्रमशः 29,75,711 और 29,49,400 FIR से अधिक है। यह आँकड़े कल रात (22 अक्टूबर, 2019 को) जारी किए गए थे।

देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में 3,10,084 मामले दर्ज हुए थे, जो कि राष्ट्रीय कुल योग का 10% अकेले है। देश की ही तरह उत्तर प्रदेश में भी दर्ज FIR की संख्या लगातार तीसरे साल बढ़ी है- 2016 में 2,82,171 और 2015 2,41,920 मुकदमे लिखवाए गए थे। 2017 में महाराष्ट्र में देश की कुल 9.4% और मध्य प्रदेश में 8.8% तहरीरें लिखवाईं गईं।

AMU में भाजपा विधायक की गाड़ी से उतरवाया झंडा, कैंपस में नाती से हो चुका है गाली-गलौच भी

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) एक बार फिर चर्चाओं में हैं। इस बार वहाँ भाजपा विधायक दलवीर सिंह चौधरी की गाड़ी को यूनिवर्सिटी परिसर में अंदर जाने की अनुमति तभी मिली जब उस पर लगा बीजेपी का झंडा हटाया गया। अगस्त के आखिर में कैंपस में चौधरी के नाती के साथ गाली-गलौच की घटना भी हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बरौली सीट से भाजपा विधायक दलवीर सिंह का ड्राइवर मंगलवार (अक्टूबर 22, 2019) को दोपहर करीब 3:30 बजे उनके नाती को लेने के लिए गाड़ी लेकर यूनिवर्सिटी पहुँचा। गाड़ी पर बीजेपी का झंडा लगा देख उसे सैय्यद गेट के पास रोक लिया गया। गाड़ी से बीजेपी का झंडा उतरवाने के बाद ही प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम ने उसे कैंपस में प्रवेश की अनुमति दी।

मामले के तूल पकड़ने के बाद यूनिवर्सिटी ने कहा है कि परिसर में किसी भी दल का झंडा लगी गाड़ी को प्रवेश की अनुमति नहीं है। भाजपा विधायक ने इसकी शिकायत करते हुए कार्रवाई की माँग की है। विधायक ठाकुर दलवीर सिंह ने एएमयू की प्रॉक्टोरियल टीम पर ड्राइवर से अभद्रता करने का आरोप लगाया है। उनके ड्राइवर ने भी अलीगढ़ पुलिस के पास इस मामले में केस दर्ज करवाया है। ड्राइवर का कहना है कि परिसर के बाहर जबरदस्ती गाड़ी से झंडा उतरवाया गया।

विधायक ने घटना से अलीगढ़ के एसपी को अवगत करवा दिया है। साथ ही बताया है कि उन्होंने थाना सिविल लाइंस में तहरीर दे दी है। विधायक ने कहा है कि वे इस घटना की शिकायत मानव संसाधन विकास मंत्री से भी करेंगें।

चौधरी के नाती विजय कुमार सिंह ने इसी साल एएमयू के विदेशी भाषा विभाग (स्पेनिश) में दाखिला लिया है। 28 अगस्त को यूनिवर्सिटी में शिक्षकों के सामने ही कुछ सीनियर छात्रों ने उनसे अभद्रता की थी।

कॉन्ग्रेस ने चुनाव परिणाम से पहले ही हरियाणा में भंग किया संगठन: साधा EVM पर निशाना

हरियाणा में सोमवार (अक्टूबर 21, 2019) विधानसभा चुनाव के बाद सभी उम्मीदवारों की किस्मत मतपेटियों में बंद हो गई है और सभी की निगाहें अब गुरुवार को आने वाले चुनाव परिणाम पर टिकी हैं। अधिकतर एग्जिट पोल्स में मनोहर लाल खट्टर मुख्यमंत्री के रूप में वापस लौटते दिख रहे हैं। कॉन्ग्रेस चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चुनौती से जूझ रही थी, जिन्होंने बगावती तेवर अपना लिए थे। अब ख़बर आई है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने हरियाणा में पूरे संगठन को ही भंग कर दिया है। हालाँकि, मतगणना का इंतजार किए बिना यह फ़ैसला क्यों किया गया, इस सम्बन्ध में कुछ स्पष्ट नहीं हो सका है।

यह निर्णय हरियाणा कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष कुमारी शैलजा ने लिया। उन्हें चुनाव से ऐन पहले प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी दी गई थी क्योंकि पूर्व सीएम हुड्डा और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अशोक तँवर के बीच मतभेद काफ़ी बढ़ गए थे। यूपीए-2 में केंद्रीय मंत्री रह चुकीं शैलजा को कॉन्ग्रेस दलित चेहरे के रूप में पेश करती रही है। कहा जा रहा है कि संगठन में सुधार करने के लिए उन्होंने ये क़दम उठाया है। संगठन के सभी प्रकोष्ठों को भंग कर दिया गया है और साथ ही पार्टी पदाधिकारियों की भी छुट्टी कर दी गई है।

पार्टी ने बताया है कि जल्द ही नए सिरे से सदस्यता अभियान चलाया जाएगा और संगठन का विस्तार किया जाएगा। हालाँकि, कुमारी शैलजा ने चुनाव के दौरान आपात स्थिति में जो नियुक्तियाँ की थीं, उन्हें बरक़रार रखा गया है। विधानसभा के दौरान 18 ऐसे नेता थे, जिन्हें कॉन्ग्रेस ने पार्टी-विरोधी गतिविधियों में संलग्न रहने का आरोप लगा कर 6 साल के लिए निकाल बाहर किया था। वहीं अशोक तँवर को लेकर पार्टी ने अभी तक स्थिति साफ़ नहीं की है, जिन्होंने चुनाव के दौरान जम कर जेजेपी का प्रचार किया। उनका इस्तीफा स्वीकार हुआ है या नहीं, इस पर पार्टी चुप है।

वहीं हुड्डा ने एग्जिट पोल्स को नकारते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस की जीत होगी और फिर विधायक मिल कर सीएम चुनेंगे। वह इस सवाल पर कन्नी काट गए कि क्या उनके बेटे दीपेंद्र सिंह के सीएम बनने की सम्भावना है? वहीं कुमार शैलजा ने एक क़दम और आगे बढ़ते हुए बिना परिणाम आए ही ईवीएम पर टिप्पणी कर दी। हरियाणा में कॉन्ग्रेस की ये हालत आंतरिक कलह और गुटबाजी की वजह से हुई है। जहाँ राष्ट्रीय स्तर पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष विहीन होकर कई दिनों तक जूझती रही, हरियाणा में गुलाम नबी आज़ाद के कई प्रयासों के बावजूद पार्टी की स्थिति सुधर नहीं पाई।

भाई दिग्विजय सिंह के घर कॉन्ग्रेस MLA का धरना: झूठे वादे के लिए राहुल गॉंधी को भी लताड़ा था

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के विधायक लक्ष्मण सिंह मंगलवार को अपने भाई और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के घर पर ही समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित दिग्विजय के घर लक्ष्मण सिंह के नेतृत्व में करीब 200 लोग धरने पर बैठे। ये लोग चाचौड़ा को जिला बनाने की मॉंग कर रहे थे।

लक्ष्मण सिंह चाचौड़ा से ही विधायक हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ चाचौड़ा को जिला बनाने का भरोसा दिला चुके हैं। यदि चाचौड़ा जिला बनता है तो वह मध्य प्रदेश का 53वां जिला होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार धरने दिग्विजय जब घर पहुॅंचे तो धरने पर बैठे लोगों को नजरंदाज करते हुए सीधे घर के अंदर चले गए। लक्ष्मण सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री कमलनाथ सार्वजानिक रूप से चाचौड़ा को जिला बनाने की घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि वे दिग्विजय सिंह के साथ चाचौड़ा आएँगे। ऐसे में अब दिग्विजय सिंह को तारीख बतानी चाहिए कि वे कब आकर इस मॉंग को पूरा करेंगे।

लक्ष्मण सिंह ने बड़े भाई दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा, “चाचौड़ा ने उन्हें (दिग्विजय सिंह) सब कुछ दिया लेकिन इसके बावजूद वह पिछले 8 साल में एक बार भी वहाँ नहीं गए।” पहली बार लक्ष्मण सिंह ने अपनों के ही मुश्किल पैदा नहीं की है। इससे पहले किसान कर्जमाफी पर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी को भी घेर चुके हैं। 5 बार सांसद और 2 बार विधायक रहे लक्ष्मण सिंह ने कहा था कि क़र्ज़माफ़ी किसी भी क़ीमत पर संभव नहीं है। इसके लिए राहुल गॉंधी को माफी मॉंगनी चाहिए।

J&K: ब्लॉक चुनाव से पहले आतंकियों ने लगाई स्कूल में आग, सब्जी मंडी में फेंके पेट्रोल बम

जम्मू कश्मीर में आतंकियों ने फिर हमला बोलते हुए एक स्कूल और जनरल स्टोर में आग लगा दी है, और एक सब्जी मंडी पर भी पेट्रोल बम से हमला हुआ है। श्रीनगर में हुए इस हमले में हालाँकि किसी को भी जान से हाथ नहीं धोना पड़ा है, लेकिन कल (गुरुवार, 24 अक्टूबर, 2019) होने जा रहे स्थानीय BDC (ब्लॉक डेवलपमेंट कमेटी) के चुनावों के ठीक पहले हुए इस हमले से उनके मंसूबे साफ़ पता चल रहे हैं। इसीलिए राज्य की पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मामला दर्ज कर लिया है और ज़ोरों शोरों से अपराधियों की तलाश कर रही है

जिस स्कूल और जनरल स्टोर में आग लगाई गई है, वे दोनों ही श्रीनगर के कुलगाम में स्थित हैं। इन दोनों पर हमलों के अतिरिक्त घाटी के आतंक के गढ़ों में से एक माने जाने वाले इलाके पुलवामा में भी एक ट्रक को आग के हवाले कर दिया गया है

कल होने वाले चुनावों के बारे में जानकारी मीडिया को देते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बताया था कि 26,629 ग्राम स्तर पर पंच और सरपंच पदों पर आसीन उम्मीदवार BDC के अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी के योग्य पाए गए हैं। इनमें एक-तिहाई से ज़रा ही कम (8,313) अनुपात महिलाओं का है, और 18,316 पुरुष उम्मीदवार मैदान में हैं। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार यह संख्या (26,629) भी राज्य के कुल ऐसे पदों के तीन चौथाई से ही कुछ अधिक है, और करीब 24% पद (12,766) विभिन्न कारणों से रिक्त हैं। इन सरपंचों को ही अपने इलाके की BDC का चुनाव करना हैं।

राज्य की तीन मुख्य पार्टियाँ इन चुनावों से किनारा किए हुए हैं- जहाँ कॉन्ग्रेस ने चुनावों की घोषणा के पहले उससे मशविरा न किए जाने का आरोप लगाते हुए चुनावों में हिस्सा न लेने का ऐलान किया हुआ है, वहीं महबूबा मुफ़्ती की पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) और उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने भी चुनावों का बहिष्कार कर रखा है। ऐसे में लड़ाई में केवल भाजपा, निर्दलीय उम्मीदवार और पैंथर्स पार्टी ही बचे हुए हैं।

पीडीपी और नेशनल कॉन्फ़्रेंस के चोटी के नेता नज़रबंद हैं। इसका कारण है कि उन्होंने उस बॉन्ड पर साइन करने से इंकार कर दिया जिसमें उन्हें यह आश्वासन देना था कि बाहर आने पर वे शांति और कानून व्यवस्था के लिए किसी तरह खतरा नहीं बनेंगे। जहाँ महबूबा मुफ़्ती की तरफ से ट्विटर के ज़रिए संवाद उनकी बेटी इल्तज़ा कर रहीं हैं, वहीं उमर अब्दुल्ला की बहन और बुआ को कश्मीर पुलिस ने कुछ दिन पहले ही भड़काऊ तख्तियाँ लेकर शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया था