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विडियो में दिख रहा है कमलेश तिवारी का संदिग्ध हत्यारा, यहाँ देखें

आज दोपहर हिन्दू महासभा नेता कमलेश तिवारी की गला रेत कर और गोली मार कर हत्या कर दी गई। उनके कार्यालय में उनकी मेज पर पीले रंग की पॉलीथीन मिली है, और एक विडियो में संदिग्ध हत्यारे के हाथ में वही पॉलीथीन देखी जा सकती है। दोनों संदिग्ध ने नारंगी रंग के कपड़े पहन रखे हैं और उनके साथ एक महिला भी देखी जा सकती है।

कमलेश तिवारी के संदिग्ध हत्यारे
कमलेश तिवारी के हत्या की जगह और वो मेज जिस पर विडियो वाली पॉलीथीन दिख रही है

सरकार ने इसकी जाँच के लिए एक SIT का भी गठन किया है और हत्यारों की तलाश में टीमें जुट गई हैं। आधिकारिक रिपोर्ट में बताया गया है कि कमलेश तिवारी को एक गनर और एक गार्ड मुहैया कराया गया था। गार्ड ने हत्यारों से नाम पूछ कर कमलेश तिवारी से पूछने के बात ही उन्हें भीतर जाने दिया था। लेकिन, हत्यारों ने सम्भवतः छद्म नामों का का प्रयोग किया था।

सरकार द्वारा एसआईटी का गठन

इससे पहले हिन्दू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की दिन-दहाड़े हत्याकांड मामले में उनके नौकर सतेंद्र ने मीडिया को रो-रोकर पूरे हत्याकांड का हाल बताया। यह पूछे जाने पर कि जिस समय हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया उस वक़्त उनकी सुरक्षा में तैनात गार्ड कहाँ थे, तो उनके नौकर ने जवाब दिया कि वो तो रात से ही मौजूद नहीं थे और जो सिपाही (सिक्योरिटी गार्ड) था वो लेटा हुआ था।

सतेंद्र ने बताया कि उन लोगों (हमलावर) ने तिवारी जी से 10 मिनट पहले फोन पर बात की, उसके बाद वो लोग तिवारी जी से मिलने आए। उस समय सिपाही (सिक्योरिटी गार्ड) सोया हुआ था। वो लोग तिवारी जी से मिलने ऊपर उनके रूम में चले गए। उन्हें देखकर तिवारी जी बाहर आए और उनसे आधे घंटे तक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने (हमलावर) दही-बड़ा खाया, और चाय भी पी।

इसके आगे सतेंद्र ने बताया कि आरोपितों और तिवारी के बीच किसी मुस्लिम लड़की की हिन्दू लड़के से शादी की कोई बात चल रही थी। इसके बाद उन गुंडों ने नौकर सतेंद्र को 100 रुपए का नोट दिया और गोल्ड फ्लैक्स पाँच सिगरेट लाने को कहा। वो पैसे लेकर बगल की दुकान से सिगरेट लेने चला गया, शायद वो लोग मौक़ा ढूँढ़ रहे थे, लेकिन सतेंद्र दो मिनट में सिगरेट लेकर पहुँच गया। इसके बाद तिवारी जी ने अपने नौकर को मसाला लाने के लिए बोला। सतेंद्र ने बताया कि जब वो मसाला लेने गया और वापस आने पर उसने देखा कि दोंनोंं आदमी वहाँ से ग़ायब थे। 

सतेंद्र ने रोते हुए बताया कि उसने देखा कि गुरू जी (कमलेश तिवारी) टेबल के नीचे थे और उनसे मिलने वाले दोनों हमलावर वहाँ से फ़रार हो गए थे, जैसे ही उसने टेबल के नीचे ख़ून देखा तो उसके होश उड़ गए।

सतेंद्र ने बताया कि वो हत्या के बाद आधे घंटे से पुलिस को फोन करता रहा, लेकिन फोन लग ही नहीं रहा था… 100 नंबर भी नहीं मिल रहा था। इसके बाद इतनी देर में तो वो लोग (हमलावर) पता नहीं कहाँ चले गए। सतेंद्र ने बताया कि कार्यालय में जो सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था वो भी काम नहीं करता। तिवारी जी ने कई बार कहा कि यहाँ पर फ़ोर्स बढ़ाओ, लेकिन तब भी यहाँ एक बुज़ुर्ग को रख दिया गया। वो जब भी यहाँ आते हैं, हमेशा सोए-लेटे हुए ही रहते हैं। हमलावरों के बारे में सतेंद्र ने बताया कि वो दोनों हमलावर यहाँ पहली बार आए थे। लेकिन, उसने दावा किया कि अगर वो लोग सामने आ जाएँगे तो वो उन्हें पहचान लेगा। उसने बताया कि एक हमलावर ने भगवा वस्त्र पहने हुआ था और दूसरा सादे वस्त्र में था। हमलावर बाइक से आए थे।

सीसीटीवी में क़ैद हुए संदिग्ध हमलावर

ख़बर के अनुसार, कमलेश तिवारी हत्याकांड में पुलिस को अहम सुराग मिला। वारदात को अंजाम देने वाले संदिग्ध हत्यारे सीसीटीवी फुटेज में क़ैद हो गए है। फुटेज में दिख रहे संदिग्धों के आधार पर पुलिस आरोपितों की तलाश में जुट गई है। एसपी कलानिधि नैथानी के निर्देश पर पुलिस की कई टीमें आरोपितों की तलाशी में जुट गई है। पुलिस दावा कर रही है कि जल्द ही हत्याकांड की गुत्थी को सुलाझा लिया जाएगा।

कानपुर में विकास यादव की लिंचिंग, अशरफ, इरफ़ान और जावेद गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जिले के बिन्दकी नगर में मुसलामानों द्वारा एक हिन्दू को घेरकर बेहिसाब मारने की घटना सामने आई है। इस घटना को लेकर एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें एक मजहबी भीड़ एक व्यक्ति को पेड़ से बाँधकर बुरी तरह मार रही है।

घटना तब शुरू हुई जब आटा खरीदने पहुँचा विकास यादव नाम के एक युवक की दुकान के मालिक शफी से किसी बात पर कहासुनी हो गई। इसके बाद यह विवाद इतना बढ़ गया कि विकास को खून की भूखी कट्टरपंथी भीड़ ने पेड़ पर बाँधकर मारते-मारते लहूलुहान कर दिया। हालाँकि इस पूरे मामले के दौरान विवाद करने वाले शफी को भी कुछ हल्की चोटें आईं मगर कट्टरपंथियों की भीड़ ने विकास को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विकास यादव पर दुकानवाले ने चोरी का इल्ज़ाम लगाया था। इसके बाद दोनों के बीच बहस शुरू हुई तो दुकान मालिक शफी ने आसपास के लोगों को इकठ्ठा कर भीड़ लगा ली, जिसके बाद इस भीड़ ने पुलिस के दखल देने से पहले तकरीबन बीस मिनट तक विकास के साथ पूरी निर्दयता से मारपीट की।

हिंसक भीड़ से किसी तरह जब विकास को बचाकर पास के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। मगर गंभीर चोटें आने की वजह से विकास के परिजनों ने उसे कानपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में रखने का फैसला किया। यहाँ पहले से ही मारपीट करने वाला दुकानदार शफी खुद भी इलाज के बहाने रुका टाँग पसारे पड़ा था। नतीजा यह हुआ कि विकास और उसके परिवार को इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ता। शफी के परिजन किसी न किसी तरीके से विकास और उसके परिवार को परेशान कर रहे थे। मामला तब थोडा ठंडा पड़ा जब परिवार द्वारा पुलिस की मदद ली गई, इसके बाद विकास को अस्पताल में भर्ती कराया जा सका।

गाँव में विकास के घर के आसपास लोग इकठ्ठा होने लगे जब वहाँ यह खबर फ़ैल गई कि विकास अब नहीं रहा। रिश्तेदारों ने जब किसी तरह यह समझाया कि विकास जीवित है, उसका इलाज कानपुर के एक अस्पताल में चल रहा है यह सुनकर कहीं भीड़ तितर-बितर हुई। इसके बाद से ही गाँव में तनाव का माहौल है। विकास के साथ हुई इस घटना के करीब दो दिन बाद पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के मुताबिक विवाद की शुरुआत विकास यादव ने की जिसके बाद दुकान वाले ने हल्ला मचा कर आसपास से लोगों को इकठ्ठा कर लिया।

बुधवार रात FIR दर्ज होने के बाद ही पुलिस ने मामले में गिरफ़्तारी शुरू कर दी। फतेहपुर के एसपी रमेश ने बताया कि जल्द ही मामले से जुड़ी अन्य गिरफ्तारियाँ भी होंगी। बता दें कि यह एफआईआर विकास के भाई धीरेन्द्र यादव ने कुछ नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी। अभी तक इस मामले में पुलिस ने मोहम्मद अशरफ, मोहम्मद इरफ़ान और मोहम्मद जावेद को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।

INX मीडिया घोटाला: महज़ ₹10 लाख में बिक गया देश का खजाँची?

INX घोटाले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम पर दायर चार्जशीट में आरोप हैरान और स्तब्ध कर देने वाले हैं। विशेष कोर्ट में सीबीआई की ओर से दायर इस आरोपपत्र के अनुसार चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति ने महज़ ₹9.96 लाख लेकर 2008 में INX में विदेश निवेश के लिए गैर-क़ानूनी मंज़ूरी दिलवाई थी। आरोपपत्र में नीति आयोग के पूर्व सीईओ सिंधुश्री खुल्लर को भी आरोपित बनाया गया है। INX मीडिया बहुचर्चित शीना बोहरा हत्याकांड के आरोपितों इन्द्राणी और पीटर मुखर्जी द्वारा स्थापित कंपनी है।

INX मामले के आरोपितों में पीटर मुखर्जी, खुल्लर, INX मीडिया, INC न्यूज़ समेत कुछ मीडिया और प्रबंधन फर्में, चार्टर्ड अकाउंटेंट एस भास्करमण और सरकारी अधिकारी अजित कुमार डुंगडुंग, रबिन्द्र प्रसाद पीके बग्गा, प्रबोध सक्सेना, अनूप के पुजारी आदि हैं। इन्द्राणी मुखर्जी को चिदंबरम के ख़िलाफ़ सरकारी ऍप्रूवर बन जाने के चलते सूची में होते हुए भी आरोपों का सामना नहीं करना पड़ेगा। चिदंबरम सहित आरोपितों पर आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, फोर्जरी, और रिश्वत लेना का आरोप है।

अलावा सीबीआई ने कार्ति चिदंबरम पर शेल कंपनी चलाने, कंसल्टेंसी फीस के तौर पर रिश्वत का अवैध पैसा लेने का भी आरोप लगाया है। सीबीआई सूत्रों के हवाले से एनडीटीवी का दावा है कि इंद्राणी के $50 लाख रिश्वत देने के आरोपों पर विदेशी सरकारों से अभी पुष्टि की दरकार है।

5 सितंबर से चिदंबरम न्यायिक हिरासत में जेल में हैं, हालाँकि उन्हें गिरफ़्तार 21 अगस्त को ही सीबीआई ने कर लिया था। कल (17 अक्टूबर को) उन्हें ईडी ने अपनी हिरासत में एक हफ्ते के लिए ले लिया था। दो बार देश के वित्त मंत्री रहने वाले चिदंबरम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।

हरियाणा और महाराष्ट्र की सत्ता में भाजपा की धमाकेदार वापसी के आसार: चुनाव पूर्व सर्वे

महाराष्ट्र और हरियाणा में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएँगे। उससे पहले सामने आए एक सर्वे के मुताबिक दोनों राज्यों की सत्ता में भाजपा वापसी करने जा रही है। यह सर्वे IANS-CVoter की तरफ से 16 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच किया गया। सर्वे के मुताबिक 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा नीत एनडीए को 182-206 सीट और कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन को 72-98 सीटें मिल सकती है। 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में भाजपा को 79-87 और कॉन्ग्रेस को एक से 7 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक महाराष्ट्र में एनडीए को 47.3 फीसदी और यूपीए को 38.5 फीसदी वोट मिलने का अनुमान सर्वे में लगाया गया है। अन्य को 14.3 फीसदी वोट मिल सकते हैं। 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 122 सीटों पर जीत मिली थी। 63 सीटों पर शिवसेना, 42 पर कॉन्ग्रेस और 41 सीटों पर उसकी सहयोगी एनसीपी को जीत मिली थी। उस चुनाव में भाजपा और शिवसेना अलग-अलग होकर लड़ी थी। उस समय भाजपा को 31.15 फीसदी, शिवसेना को 19.3 और कॉन्ग्रेस को 18 फीसदी वोट मिले थे।

हरियाणा में भाजपा को 47.5 फीसदी और कॉन्ग्रेस को 21.4 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। इनेलो से टूटकर बनी जननायक जनता पार्टी को 9.3 और अन्य के खाते में 21.4 फीसदी वोट जाने का अनुमान लगाया गया है। बीते चुनाव में भाजपा ने 33.2 फीसदी वोट के साथ 47 सीटें हासिल की थी। इनेलो को 19 सीटें और 24.1 फीसदी वोट मिले थे। कॉन्ग्रेस 20.6 फीसदी वोट पाकर 15 सीटों पर सिमट गई थी।

मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की बात की जाए तो हरियाणा के निवर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के समर्थन में 40.3% लोग हैं। कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा का समर्थन 19.9% तो JJP के दुष्यंत चौटाला का 14.2% लोगों ने समर्थन किया है। दोनों राज्यों में वोटों की गिनती 24 अक्टूबर को होगी।

बंगलुरु ही नहीं, मैसूर में भी सक्रिय JMB जिहादी सेल: गृहमंत्री कर्नाटक

कर्नाटक के गृह मंत्री बासवराज बोम्मई ने दावा किया है कि बंगलुरु और मैसूर शहर जिहादी गतिविधियों के केंद्र बनते जा रहे हैं। उन्होंने इन राज्यों में आतंकियों के स्लीपर सेल सक्रिय होने की बात कही है। उन्होंने जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) संगठन का नाम भी लिया है।

बोम्मई के अनुसार इन जिहादियों की गतिविधियाँ तटीय कर्नाटक के साथ-साथ राज्य के आंतरिक हिस्सों में भी बढ़ गईं हैं। उनके अलावा NIA प्रमुख वाईसी मोदी ने भी हाल ही में JMB की गतिविधियों को लेकर बयान दिया था। उन्होंने संगठन के कर्नाटक के अतिरिक्त झारखंड, महाराष्ट्र, केरल, असम में भी सक्रिय होने की बात कही थी। NIA के महानिरीक्षक ने भी बंगलुरु में इस संगठन के 20-22 ठिकाने होने का दावा किया था।

बोम्मई ने कहा, “हमारे पुलिस वाले सभी एहतियात बरत रहे हैं।” बोम्मई के अनुसार JMB की सक्रियता बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के तटों के किनारे बढ़ी है। NIA के खुलासों के बारे में पूछे जाने पर बोम्मई के कहा कि एजेंसी का ज़ोर बांग्लादेशी ultras की गतिविधि और कश्मीर पर है।

“पुलिस चौकन्नी हैं खासकर कि बंगलुरु और मैसूर में। हम लोगों की सार्वजनिक स्थानों पर तलाशी ले रहे हैं, संदेहास्पद लोगों के बारे में सूचना जुटा रहे हैं और उसका विश्लेषण कर रहे हैं।”

इसके अलावा उन्होंने बंगलुरु के लिए उसका खुद का ATS (एंटी टेरर स्क्वाड) बनाने की घोषणा की। गौरतलब है कि कर्नाटक के पास पहले से ही एक एटीएस पूरे प्रदेश के लिए है।

1 नवंबर से चालू हो जाने वाली इस एटीएस का गठन बंगलुरु और उसके आसपास बहुत सारे JMB जिहादियों की गिरफ़्तारी के बाद किया गया था।

राम मंदिर: हक हिन्दुओं का होना चाहिए, ‘सेक्युलरासुर’ सरकार का नहीं

राम मंदिर मामले पर अब फैसले में अधिक देर नहीं है। हिन्दू पक्ष मामले में अपनी जीत तय मानकर चल रहा है- केवल इसलिए नहीं क्योंकि “मंदिर वहीं बनाएँगे” के नारे पर ही हिन्दू समाज हजार साल की तंद्रा और कुंठा को अपने माथे से नोंच फेंक कर एकजुट हो गया था, बल्कि इसलिए भी कि हमने सुप्रीम कोर्ट में पूरी तरह न्यायोचित तरीके से अपनी न्यायपरक बात रखी है। हिन्दुओं ने “वराह मूर्ति तो खिलौने हैं”, “(कट्टर और क्रूर इस्लामी शासकों का राज होते हुए भी) हिन्दू मजदूरों ने संस्कृत के श्लोक लिख दिए होंगे बाबरी मस्जिद पर”, “(इतिहास के सबसे आततायी सुल्तानों में गिना जाने वाला) औरंगज़ेब तो उदारवादी शासक था”, “पुरातत्व तो कोई विज्ञान है ही नहीं (क्योंकि इसके नतीजे हमारे विरुद्ध जा रहे हैं)” जैसे तर्क नहीं रखे, हिन्दू पक्ष ने अदालत में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत दस्तावेज़ फाड़, या “मामला टाल दीजिए वरना फलानी पार्टी चुनाव जीत जाएगी” जैसी बातें कर मामले को अटकाने की कोशिश नहीं की है।

अतः यह मानते हुए कि इस देश की न्यायपालिका में अभी भी कानून, न्याय और सिद्धांत के आधार पर फ़ैसले होते हैं, हिन्दुओं के पक्ष में फैसले की उम्मीद जताई जा सकती है। ऐसे में यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न बन जाता है कि जब राम मंदिर बन गया तो उसे चलाएगा कौन!

और यह कोई ‘यूटोपियन’ ख्वाब नहीं, बहुत ही गंभीर मसला है- इसलिए भी कि हम एक मंदिर के बात कर रहे हैं, उसे देश जहाँ सरकारें मंदिरों को लूटतीं हैं और अदालतें “ये तो एक सेक्युलर मंदिर है” के फैसले देती हैं, और इसलिए भी कि यह राम मंदिर का सवाल है, जिसे मंदिर की जगह स्कूल-अस्पताल से लेकर के शौचालय तक बनवाने के लिए सेक्युलर गैंग सक्रिय शुरू से रहा है।

‘सेक्युलरासुर’ मशीनरी को समझना ज़रूरी

यह शब्द ‘सेक्युलरासुर’ मेरा नहीं है, सोशल मीडिया पर शायद किसी को इस्तेमाल करते देखा था- और इसी एक शब्द में हिन्दुओं की आधुनिक बदहाली के सारे बीज समाहित हैं। इस शब्द से बेहतर सेक्युलरिज़्म की धोखेबाज डफली बजाते भारतीय तंत्र वर्णन नहीं हो सकता। और हर असुर की तरह यह सेक्युलरासुर भी देवताओं और उनके मंदिरों का शत्रु है। और इसे समझना ज़रूरी है यह जानने के लिए कि क्यों मंदिरों का नियंत्रण किसी भी सरकार के हाथ में नहीं होना चाहिए, चाहे वह एक धर्मगुरु योगी आदित्यनाथ की ही सरकार क्यों न हो।

यह असुर पहले तो ‘अव्यवस्था दूर करेंगे’, ‘मंदिर में सभी जातियों के लोगों को प्रवेश देने के लिए हमारा हस्तक्षेप ज़रूरी है’ (चाहे मंदिर में यह प्रथा कभी रही ही न हो, या खुद ही समय के साथ इसका अंत हो गया हो), ‘मंदिर का सरकारी पैसे से जीर्णोद्धार करेंगे’ (भले ही मंदिर में चढ़ावे की कोई कमी न होती हो, और मंदिर जीर्ण न भी हो), ‘आस्था का संरक्षण करेंगे’ (भले ही संविधान में जबरन जोड़ा गया ‘सेक्युलर’ शब्द कायदे से सरकार को आस्था और उपासना के मामलों से दूर रहने का निर्देश देता हो), आदि नाना प्रपंच से मंदिरों का नियंत्रण हाथ में लेता है। फिर धीरे-धीरे कपटी, अधर्मी, भ्रष्ट अधिकारियों की नियुक्ति मंदिर के सरकारी नियंत्रक के तौर पर करता है। और फिर यहाँ से मंदिरों के, धर्म के क्षरण का खेल शुरू होता है।

सेक्युलर तंत्र के असुर मंदिरों को कई तरीके से नोंचते-खसोटते हैं- मंदिरों की मूर्तियों को गायब कर ‘एंटीक’ के काले बाजार में बेचा जाता है, चढ़ावे के, दान-दक्षिणा के पैसे में गबन होता है, पुजारियों को भूखा मार कर या उनका वेतन ₹2 हजार, ₹3 हजार, यहाँ तक कि ₹750 जैसी घटिया तनख्वाहें दे कर टरका दिया जाता है। मंदिर की सम्पत्तियाँ, मंदिर की ज़मीन कभी ‘गायब’ हो जाते हैं तो कभी उन पर चर्च बनते दिखते हैं। रामलला के अस्थाई मंदिर की ही बात करें तो मंदिर को दान में प्रति महीने ₹6 लाख मिलते हैं, लेकिन मूर्ति की पूजा-अर्चना पर ‘रामलला के भत्ते’ के तौर पर महज़ ₹30,000 महीना और मुख्य पुजारी समेत सभी पुजारियों के वेतन को मिलाकर खर्च ₹1.5 लाख महीने से अधिक नहीं है। यानि मंदिर की कमाई का केवल एक-चौथाई मंदिर और हिन्दुओं के हाथ में, बाकी की सरकार खुली लूट करती है। यह सरकारी कुव्यवस्था खुद गोरखधाम मंदिर के अध्यक्ष होने के नाते मंदिर प्रबंधन मामलों से अवगत माने जा सकने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समय में भी जारी है। क्यों?

फ़र्ज़ करिए अगर कल योगी सरकार न हो…

कोई सरकार हमेशा नहीं टिकेगी- न मोदी की, न योगी की। न ही मोदी-योगी अमृत पीकर आए हैं- जिन्हें विश्ववास न हो, वे अपने आसपास देखें और बताएँ अशोक सिंहल, महंत अवैद्यनाथ, गोपाल विशारद जैसे मंदिर आंदोलन से जुड़े लोग आस-पास दिख रहे हैं क्या।

सत्ता के परिवर्तन और समय के चक्र से कभी-न-कभी कॉन्ग्रेस, माकपा, हिन्दू कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले ‘मुल्ला मुलायम’ की सपा जैसे लोग वापिस आ ही जाएँगे। उस समय अगर राम मंदिर सरकारी नियंत्रण में रहे तो क्या होगा, ये कभी सोचा है?

उस समय मंदिर के साथ वही होगा, जो दक्षिण भारत के कई मंदिरों के साथ आज हिन्दुओं से नफ़रत करने वाली सरकार और सरकारी मशीनरी के राज में, हिन्दूफ़ोबिक मीडिया के समर्थन और इशारे पर हो रहा है। याद करिए इसी साल जब तमिल नाडु में सरकारी नियंत्रण में पड़े मंदिरों में यज्ञ-हवन के लिए मंदिर विभाग के सर्कुलर को The Wire ने कैसे ‘अन्धविश्वास’ का नाम देकर मंदिरों से पूजा-पथ बंद करवाने का माहौल बनाने की कोशिश की थी। ऐसा आपको क्यों लगता है कि यह श्री राम मंदिर के साथ सपा-बसपा-कॉन्ग्रेस के भविष्य में संभावित राज में नहीं किया जाएगा? ‘Secular fabric’ के नाम पर मंदिर में कुरान की आयतें चलवाने, या ‘शंतिप्रियों’ की भावनाएँ आहत होतीं हैं’ के नाम पर रामायण का पाठ रोकने की कोशिश बिलकुल होगी- जैसे आज ममता बनर्जी के राज में बंगाल में दुर्गा पूजा रोकी जा रही है।

राम मंदिर की जगह ‘All Faith Center’ बनवाने के लिए कई सारे गिरोह पहले से सक्रिय हैं। आपको लगता है कि इन्हें हमेशा के लिए सरकारी बलबूते पर रोक कर रखा जा सकता है?

आपको अगर ऐसा लग रहा है कि आप अदालत का सहारा लेकर इन्हें रोक लेंगे तो आगे देखिए। केरल हाई कोर्ट ने सबरीमाला में सरकारी नियंत्रण में मंदिर होने के चलते ही गैर-हिन्दुओं के मंदिर में घुसने पर से रोक हटा दी, क्योंकि इससे मंदिर की ‘मालिक’ राज्य सरकार ‘सेक्युलर’ न बचती। यानी पहले सरकार ने मंदिर पर जबरन कब्ज़ा किया, बिना यह सोचे कि सेक्युलरिज़्म मंदिर में घुसने से आड़े आ रहा है, और अब जबरन बने मालिक ‘सेक्युलर सरकार’ के लिए मंदिर अपनो प्रकृति बदले। जबकि मंदिर का यह नियम है कि हिन्दुओं में भी 41 दिन का कठिन व्रत रखने वाले ही प्रवेश कर सकते हैं, वह भी मंदिर के द्वारा नियत समय पर।

राम मंदिर वैष्णव होगा न? यानि माँस-मदिरा तो दूर की बात, लहसुन-प्याज भी मंदिर के भीतर नहीं आना चाहिए! क्या कल को अगर ओवैसी की पार्टी का कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बन गया और मंदिर में हलाल मटन ले कर आ गया यह कहते हुए कि ‘सेक्युलर’, सरकारी ज़मीन है, तो क्या करेंगे हिन्दू?

हिन्दू समाज ‘perfect’ भले न हो, लेकिन…

हिन्दू और दूसरे समुदाय के आधार पर हिंदुओं की पुण्यभूमि और पितृभूमि का बँटवारा करवाने वाले इक़बाल के शब्दों को रट कर भले ही कोई आज राम को कितना भी ‘इमाम-ए-हिन्द’ बता ले, लेकिन इससे ज़मीनी सच्चाई नहीं बदलेगी, मज़हबी सच्चाई नहीं बदलेगी। सच्चाई यह कि श्री राम हिन्दुओं की आस्था के अनुसार धरती पर आए भगवान थे, और हिन्दुओं के लिए ईश्वर के ही समकक्ष रहेंगे- कोई ‘पैगंबर’ या ‘नबी’ या ‘इमाम’ जैसा से ‘अल्लाह से निचले दर्जे वाला’ नहीं बन जाएँगे। यानि धर्म और ‘अल्लाह’ को सर्वोच्च और ‘दुनिया की किसी भी चीज़ को अल्लाह के समकक्ष’ बताने को पाप मानने वाले इस्लाम के बीच मज़हबी संधि हो सकती है, ऐक्य नहीं।

तो ऐसे में अगर राम मंदिर हिन्दू समाज की बजाय सेक्युलर सरकार के हाथों में रहता है, तो उसकी पवित्रता को, उसके धार्मिक स्वरूप को खतरा हमेशा बना रहेगा। और यह ‘धर्मनिरपेक्षता’ का ढिंढोरा पीटकर अधर्म-गामी, आसुरिक बनने की चाह रखने वाले सरकारी तंत्र को शोभा भी नहीं देता कि गंदे, बदबूदार काफ़िरों के मंदिर के बारे में सोच कर अपने उजले-चिकने-स्वच्छ-सेक्युलर स्वभाव को प्रदूषित करे, और अपना सेक्युलर समय बर्बाद करे।

पत्नी ने दी पुलिस में तहरीर: नईम और अनवारुल ने कराई कमलेश तिवारी की हत्या

हिन्दू महासभा के दिवंगत नेता कमलेश तिवारी की पत्नी ने अपने पति के साथ हुई इस घटना से पहले उन्हें मिली जानलेवा धमकियों का ज़िक्र करते हुए कमलेश की हत्या करने के लिए उकसाने वाले मौलाना और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में दफा 302 (हत्या के लिए उकसाने और षड्यंत्र रचने के जुर्म में) तहत तहरीर दे दी है।

बता दें कि कमलेश के 2015 में दिए एक बयान के चलते कई इस्लामिक संगठन उन्हें टारगेट कर रहे थे। माना भी यही जा रहा है कि कमलेश की हत्याके पीछे पैगम्बर पर उनके बयान से भड़के उन तमाम कट्टरपंथियों का हाथ है जो खुले-आम तिवारी का सर कलम करने की बात कर रहे थे। कमलेश का सर धड़ से अलग कर देने की बात करने पर कुछ ऐसे वीडियो भी खूब वायरल हुए थे जिसमें कट्टरपंथियों को यह कहकर उकसाया जा रहा है कि कमलेश तिवारी का सर कलम करने पर उन्हें 51 लाख रूपए का इनाम दिया जाएगा।

बता दें कि कमलेश तिवारी ने 2015 में एक बयान दिया था जिसके बाद देशभर के कट्टरपंथियों में खलबली मच गई थी। तिवारी ने खुले-आम पैगम्बर मुहम्मद की सेक्सुअल ओरिएंटेशन पर मुखर रूप से बोलते हुए उन्हें समलैंगिक कह दिया था। इसी के बाद देवबंद से लेकर पश्चिम बंगाल तक के मुसलामानों ने फतवा जारी करना शुरू कर दिया था।

इसी समय कई मजहबी संगठनों ने कमलेश तिवारी के खिलाफ नफरत और ज़हर उगलने का मोर्चा खोल दिया था। इसके बाद ऐसे ही एक फतवे वाला वीडियो खूब शेयर किया जा रहा था जिसमें कमलेश तिवारी का सर कलम करने वाले को 51 लाख रूपए का इनाम देने की बात कही गई थी।

कमलेश तिवारी की पत्नी ने अपनी तहरीर में साफ़ लिखा है कि यूपी में बिजनौर जिले के रहने वाले मोहम्मद मुफ़्ती नईम काज़मी और अनवारुल हक़ ने साल 2016 में उनके पति कमलेश का सर काटने के लिए डेढ़ करोड़ रूपए के इनाम की सार्वजनिक रूपसे घोषणा की थी। इस सम्बन्ध में कमलेश की पत्नी ने पुलिस में दोनों आरोपितों के खिलाफ दफा 302 के तहत मुक़दमा दर्ज करने की तहरीर दी है। कमलेश की पत्नी का यह दावा है कि इन दोनों कट्टरपंथियों ने साजिशन उनके पति कमलेश तिवारी की हत्या कराई है।

कमलेश तिवारी हत्याकांड: सभी एंगल से हो रही जाँच, कुछ ‘मीडिया गिरोह’ घुमा रहें हैं बात

कमलेश तिवारी हत्याकांड में पुलिस ने किसी भी एंगल, यानी हत्या की किसी भी वजह को असम्भव नहीं माना है। पुलिस सभी संभावनाओं पर तफ्तीश कर रही है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के वरिष्ठ पत्रकार राज शेखर झा ने ट्वीट कर पुलिस और इंटेलिजेंस के अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है।

फिर कैसे दे रहे ISIS को क्लीन चिट?

अगर राज शेखर झा के ट्वीट और उनकी जानकारी को सही मानें तो सवाल यह उठता है कि उस सूरत में उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) कैसे ISIS के हाथ और ईनाम के लालच में हत्या से इंकार कैसे कर रहे हैं। गौरतलब है कि टाइम्स नाउ ने उनके हवाले से यह दावा किया है कि पुलिस जिहादी संगठन ISIS (इस्लामिक स्टेट) और कमलेश तिवारी के सिर पर रखे गए ईनाम के एंगल पर जाँच नहीं कर रही है।

ज़्यादा संभावना इस बात की है कि पुलिस को मामले में किसी भी ‘एंगल’ के सबूत अब तक न मिले हों, जिसमें कोई आश्चर्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि हत्या को अभी 24 घंटे भी नहीं हुए हैं। ऐसे में सबूत न मिलने को बहुत सम्भव है कि मीडिया में क्लीन चिट मिलने के रूप में दिखाया जा रहा है। यही बात स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल-शर्मा ने भी कही।

दो साल पहले पकड़े गए थे कमलेश को मारने आए आतंकी

एक ट्विटर यूज़र ने इस बीच दो साल पहले की TV9 गुजराती की खबर साझा की है, जिसमें कमलेश तिवारी को ही मारने आए ISIS जिहादियों के पकड़े जाने की बात है। दोनों आतंकियों उबैद मिर्ज़ा और कासिम से पूछताछ गुजरात ATS के अलावा केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी की थी।

कमलेश तिवारी की हत्या पर ‘Ha-Ha’ और ‘Love’ रिएक्ट करते ऑनलाइन ‘शांतिदूतों’ की शंतिप्रियता

हिन्दू महासभा के कमलेश तिवारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई, हत्यारों ने जिस बन्दूक से कमलेश की हत्या की उसे वे मिठाई के डब्बे में छिपाकर लाए थे और मौका पाते ही हत्यारों ने कमलेश पर गोली दाग दीं और उसका गला भी रेत डाला। जैसे ही इस नृशंस हत्या की खबर लोगों तक सोशल मीडिया और अन्य साधनों के ज़रिए पहुँचने लगी उसी के साथ इसपर प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। एक हिन्दू नेता की सरे-आम हत्या कर दिए जाने पर कुछ लोगों ने इसकी भर्त्सना की मगर ज़्यादातर समुदाय विशेष के इन लोगों ने अपनी नीचता का परिचय यहाँ भी दे डाला। ऐसे निकृष्ट लोगों की अगुवाई करने का दम भरने वाले एनडीटीवी ने कमलेश तिवारी पर इसे एक “उग्र हिन्दू नेता की हत्या” करार दिया है।

Ha-Ha, Love रिएक्ट करने वाले एक ही ‘समुदाय विशेष’ से

“हाहा” करने वाले फहीम रहमान, नदीम अख्तर, मोहम्मद इमरान जैसा ही नाम रखने वाले अधिकांशतः हैं। इसी तरह “लव” रिएक्ट करने वाले भी सलाउद्दीन अंसारी और मुहम्मद समीउल्लाह जैसे ही दिख रहे हैं।

‘दिल से सलाम’, ‘खुदा के घर देर है, अंधेर नहीं’

इस पर आए कमेंट भी कम भयावह नहीं हैं। नाज़िर आलम कह रहा है कि खुदा के घर देर है, अंधेर नहीं; तो कोई सैफ अनवर ट्वीट कर रहा है कि ऐसा करने वाले को दिल से सलाम। इम्तियाज़ खान के लिए यह हत्या बिरयानी का मौका है, तो सोहैल खान ने इसके बाद अगला नाम सुपारी के लिए तय कर दिया है।

ट्विटर पर एक यूजर ने तो हिन्दुओं को धमकी देते हुए यहाँ तक कह दिया कि जिस तरह विकास यादव और कमलेश तिवारी की हत्या हुई अब वैसा ही अंजाम बाकी हिन्दुओं को भी भुगतना पड़ेगा। बता दें कि कुछ दिन पहले ही विकास यादव नाम के एक व्यक्ति को कट्टरपंथियों की एक भीड़ ने पेड़ से बाँधकर निर्दयता के साथ इतना मारा था कि उसके बाद विकास बुरी तरह जख़्मी हो गया।

तो वहीं एक और ट्विटर यूजर सैफ अनवर ने इस निर्मम हत्या की घटना पर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए तिवारी के मृत शरीर की तस्वीर शेयर करते हुए उसके हत्यारों की हौसला अफजाई तक की।

“We support Shehla Rashid” नाम के एक ग्रुप में तो जैसे हिन्दू महासभा के कमलेश तिवारी की हत्या के बाद बहार आ गई। ग्रुप को फॉलो करने वाले कई लोगों ने इसपर ख़ुशी ज़ाहिर की तो कुछ ने इस हत्या को अपनी निजी संतुष्टि बताते हुए लिखा कि तिवारी के साथ जो हुआ वह उसका हकदार था।

2015 में भड़का था दंगा

हिन्दू समाज पार्टी के संस्थापक कमलेश तिवारी को पैगम्बर मुहम्मद की सेक्सुअलिटी पर बयान के लिए अखिलेश यादव के राज में पुलिस ने 2015 में गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद देवबंद, सहारनपुर और पश्चिम बंगाल के कट्टरपंथियों ने तिवारी की मृत्यु की माँग करते हुए दंगा भड़का दिया था।

माना यही जा रहा है कि कमलेश की हत्या में पैगम्बर पर उनके बयान से भड़के कट्टरपंथियों का हाथ है। कमलेश तिवारी की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर आ रही प्रतिक्रियाओं से भी कुछ ऐसा ही पता चलता है जहाँ कई कट्टरपंथी कमलेश की हत्या को सेलिब्रेट कर रहे हैं, उत्साह से लबालब यह लोग बोल रहे हैं कि तिवारी की मुलाक़ात अपनी नियति से हो गई।

एनडीटीवी तो जैसे कमलेश तिवारी की इस नृशंस हत्या पर जश्न मानाने वालों की अगुवाई कर रहा है। अपने हर प्रयास में एनडीटीवी यही कोशिश करता दिख रहा है कि किसी तरह मामले को सामान्य बताकर एक हिन्दू की हत्या का मामला शांत किया जा सके।

Fact Check: क्या चेन्नई रेलवे डिवीजन में एक चूहे पकड़ने में खर्च किए ₹22000?, CNN-News 18 की रिपोर्ट भ्रामक

मेनस्ट्रीम मीडिया आउटलेट ने हाल ही में एक खबर चलाई कि चेन्नई रेलवे डिवीजन चूहे को पकड़ने के लिए भारी भरकम रकम खर्च कर रहा है। उन्होंने अपने रिपोर्ट में बताया कि रेलवे की चेन्नई डिवीजन ने एक चूहे को पकड़ने पर 22,334 रुपए खर्च किए। जबकि, रेलवे विभाग ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है।

बता दें कि CNN News 18 ने 9 अक्टूबर को छपी अपनी रिपोर्ट में कहा कि चेन्नई रेलवे डिवीजन चूहे को पकड़ने के लिए 22,300 रुपए प्रति चूहे की दर से खर्च किए। इस रिपोर्ट में कहा गया कि चेन्नई रेलवे डिवीजन ने मई 2016 से अप्रैल 2019 के बीच चूहे को पकड़ने के लिए 5.89 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

CNN में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

इसके दो दिन बाद यानी कि 11 अक्टूबर को अमर उजाला ने भी इसी हेडलाइन के साथ खबर बनाई और इसमें भी एक चूहे को पकड़ने पर  22,334 रुपए खर्च करने का दावा किया गया। जनसत्ता ने भी 9 अक्टूबर को यह रिपोर्ट प्रकाशित की।

अब दक्षिण रेलवे ने एक बयान जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि एक चूहे को मारने पर 22,000 रुपए से अधिक खर्च की बात को गलत और अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि ये गिनती तो मरे हुए उन चूहों की है जिन्हें पकड़ा गया। जो दवा के असर से कहीं और जाकर मरे उनका हिसाब नहीं है। अधिकारी ने बताया कि ट्रेन के कोच में लगे गोंद पर बड़े चूहे अटक नहीं पाते हैं, और किसी दूसरी जगह पर जाकर मर जाते हैं। जिसकी गिनती नहीं हो पाती है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि एक चूहे को पकड़ने पर 22 हजार से अधिक खर्च हुए।

रेलवे अधिकारियों ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि यात्रियों को ट्रेन और स्टेशन पर साफ-सफाई उपलब्ध कराना भारतीय रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक है और इस गतिविधि पर होने वाला खर्च यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए है।

तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करके रिपोर्ट पेश करना मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए कोई नई बात नहीं है। ऑपइंडिया नियमित रूप से इस बात पर रिपोर्ट करता आया है कि मुख्यधारा की मीडिया किस तरह से किसी तथ्य को गलत तरीके से पेश करके नैरेटिव गढ़ता है। अपूर्णता उनकी रिपोर्टिंग की एक विशेषता बन गई है और अब इसे रिपोर्ट में ‘गलती’ नहीं माना जा सकता है।

रेल मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय रेलवे मीडिया का पसंदीदा टारगेट रहा है और इसको लेकर गलत तथ्य फैलाए जाते रहे हैं। हाल ही में लिबरल मीडिया और कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँँधी ने रिलायंस जियो द्वारा जीते गए रेलवे टेंडर के बारे में झूठ फैलाया था। इसके अलावा एक और झूठ यह फैलाई गई थी कि ट्रेन में सामान बेचने वाले हॉकर को राजनेताओं का नकल उतारने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि सच्चाई यह थी कि उसे अवैध रूप से हॉकिंग करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इस तरह के अवैध हॉकिंग को लेकर उसकी इस तरह की गिरफ्तारी पहले भी हो चुकी थी।