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हिन्दू लड़की की मौत का मामला उलझा: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या बताने पर शक गहराया

पाकिस्तान में हिन्दू लड़की नमृता चंदानी की हत्या के मामले में अटॉप्सी रिपोर्ट पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अटॉप्सी रिपोर्ट में कई खामियाँ हैं। बता दें सिंध प्रांत के एक डेंटल कॉलेज के हॉस्टल में मृत पाई गई चंदानी एक सोशल एक्टिविस्ट थीं। वह डेंटल कॉ़लेज के फाइनल ईयर में थीं।

Dawn में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा “नमृता चंदानी के गले पर पड़े ‘निशान रस्सी के थे।’ पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि ‘आत्महत्या का मामला है लेकिन गला घोंटने के साफ निशान दिखाई देते हैं।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कराची में स्वास्थ्य विभाग के मेडिको-लीगल डिपार्टमेंट के विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि ऑटोप्सी रिपोर्ट में कई खामियाँ हैं और रिपोर्ट में प्रमुख तथ्यों का जिक्र नहीं किया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि तस्वीर में गले पर पड़ा निशान दुपट्टे के कारण नहीं था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु और पोस्टमार्टम के बीच का समय 11-12 घंटे था, लेकिन तस्वीर लगभग 24 घंटे पुरानी थी। विशेषज्ञों ने कहा कि सड़न के बारे में लरकाना में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। विशेषज्ञों ने कहा कि यह भी संदेहास्पद था कि पाँच फीट लंबी लड़की कैसे छत के पंखे से लटक गई, जो 15 फीट ऊँची थी।

बता दें कि नमृता का जबरन धर्मांतरण कराने की कोशिश की गई थी। बाद में उसकी लाश हॉस्टल के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मिली। उसका शव बिस्तर पर पड़ा था और गले में रस्सी बॅंधी थी। प्रशासन इसे आत्महत्या का मामला बताकर रफा-दफा करना चाहता है, जबकि नमृता के भाई का कहना है कि उसकी हत्या की गई है।

नमृता चंदानी लरकाना के बीबी आसिफ़ा डेंटल कॉलेज में बीडीएस की फाइनल ईयर की छात्रा थीं। बहन की मृत्यु पर नमृता के भाई डॉ. विशाल सुंदर ने कहा, “उसके शरीर के अन्य हिस्सों पर भी निशान हैं, जैसे कोई उसे पकड़ रखा हो। हम अल्पसंख्यक हैं, कृपया हमारे लिए खड़े हों।”

नमृता के भाई विशाल जो कि खुद मेडिकल कंसलटेंट हैं का कहना है प्राथमिक जाँच से पता चलता है कि
नमृता की हत्या की गई है। विशाल ने कहा, मैंने नमृता की गर्दन पर तार के निशान देखे हैं। ऐसे ही निशान उसके हाथ पर थे। लेकिन उसकी दोस्त का कहना है कि उसने नमृता को जब देखा तो उसके गले में दुपट्टा बॅंधा था।

कॉलेज प्रशासन ने हिन्दू लड़की की मृत्यु को आत्महत्या करार देने की कोशिश की, लेकिन सबूत उसकी हत्या की ओर इशारा करते नज़र आ रहे हैं।

घटनास्थल की स्थिति से ऐसा पता चलता है कि मृतका ने अपनी जान बचाने के लिए काफ़ी संघर्ष किया था। उसका फोन भी ग़ायब था, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया। अब सवाल यह है कि रस्सी से लटकने के बजाय उसका शरीर बिस्तर पर क्यों पड़ा था, जैसा कि आमतौर पर फाँसी लगाकर आत्महत्या के मामलों में होता है।

बता दें कि सिंध प्रांत के घोटकी में हिंदू लड़की लड़की नमृता चंदानी की हत्या ने लोगों को झकझोर दिया था। विरोध में देर रात बड़ी संख्या में लोग कराची की सड़कों पर उतरे और हत्यारों की गिरफ़्तारी की माँग भी की थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू छात्रा की मौत के मामले में पाकिस्तान के कराची में विरोध प्रदर्शन बढ़ने पर वहाँ की एक अदालत ने बुधवार को न्यायिक जाँच का आदेश दिया था। लड़की के परिवार ने भी दावा किया है कि उसकी हत्या की गई है। चंदानी के परिवार ने उसके आत्महत्या करने से इनकार किया है। परिवार ने उसकी मौत की परिस्थितियों की एक ‘पारदर्शी जाँच’ की माँग की है।

बाप के बनाए काले कानून से बेटे के कैद होने का कर्मफल: फ़ारूक़ अब्दुल्ला और कश्मीरियत

हाल के दौर में जिन्होंने फर्नीचर खरीदने की सोची होगी, उसे शायद कीमतों का अंदाजा होगा। मामूली प्लाईवुड का बना पाँच बाई तीन का टेबल भी चार-पाँच हज़ार का आता है। ऐसे में प्लाईवुड के बने चालीस-पचास हज़ार के पलंग/सोफे को अगर लकड़ी से बनवाया जाए तो कितनी कीमत आएगी? लाख में? ये लकड़ी अगर साधारण आम-जामुन के पेड़ के बदले शीशम की हो तब कितनी कीमत होगी? शीशम से भी महंगे सागवान का इस्तेमाल कर रहे हों तब?

शायद समझ में आ गया होगा कि चालीस हज़ार का पलंग दो लाख का हो चला है। अब सोचिए कि आपके पास ही जंगल हो, और ढेरों लकड़ी की तस्करी करने का मौका मिले तो स्थानीय माफिया क्या ऐसा मौका जाने देगा? हरगिज़ नहीं, जंगलों से लकड़ी चुराने के लिए पेड़ तो काटे ही जाएँगे।

करीब पचास साल पहले जम्मू-कश्मीर में भी ऐसा ही होता था। जंगलों की अवैध कटाई से पर्यावरण को तो नुकसान होता ही था ऊपर से तस्करों को पकड़ने वालों के लिए दूसरी समस्या भी थी। ये बिलकुल गौ-तस्करी या चोरी जैसा मामला था। एक बार गाय का अगर कीमा बना दिया, तो किसकी गाय थी, या गाय ही थी भैंस नहीं, ये कैसे सिद्ध होगा? लकड़ी का भी एक बार फर्नीचर बना डाला तो चोरी का पेड़, तस्करी की लकड़ी ये सब सिद्ध करना करीब नामुमकिन होता था।

अभी भी वैष्णो देवी जाने वाले कई युवा लौटते समय कटरा इत्यादि से क्रिकेट-बेसबॉल बैट या हॉकी स्टिक जैसी चीज़ें खरीदते आते हैं। पुराने दौर में तस्कर अगर पकड़े भी जाते थे, तो उनपर मामूली धाराएँ लगती और वो जल्दी ही छूटकर फिर से तस्करी के धंधे में जुट जाते। शायद उनकी अम्मा सिखाती होगी कि कोई भी धंधा छोटा नहीं होता और धंधे से बड़ा धर्म नहीं होता।

खैर 1970 के ऐसे ही दौर में जम्मू-कश्मीर में पब्लिक सेफ्टी एक्ट बना। पीएसए (1970) नाम से जाने जाने वाले इस एक्ट को भूतपूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के अब्बू यानी शेख अब्दुल्ला ने लागू किया था। ये मुख्य रूप से लकड़ी के तस्करों के खिलाफ चला। शुरुआत में इसमें 16 साल से ऊपर के किसी भी व्यक्ति को दो साल तक के कारावास की सजा बिना मुकदमा चलाए ही दी जा सकती थी। बाद में (2011 में) न्यूनतम उम्र को 16 से बढ़ाकर 18 साल किया गया।

बाद में जब इलाके में कश्मीरियत (कश्मीर + शरियत) का बोलबाला हुआ तबसे ये एक्ट अलगाववादी, आतंकी, दहशतगर्द जेहादी, कश्मीरियत दिखाने वाले (यानि पत्थरबाज) सभी पर लगने लगा। हिजबुल मुजाहिद्दीन (इस्लाम की राह में लड़ने वाले पाक योद्धाओं का दल) के बुरहान वानी (जिसे एक कुख्यात पक्षकार हेडमास्टर का बेटा बता रही थी) के मारे जाने के बाद इसी कानून से पाँच सौ से ज्यादा अलगाववादी कैद किए गए थे।

पीएसए के तहत किसे कैद रखा जाए किसे नहीं, इसे बीच-बीच में एक समिति जाँचती रहती है। इसे हाई कोर्ट में चैलेंज भी किया जा सकता है। इस धारा में किसी को कैद करने के लिए स्थानीय डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या डिवीज़नल कमिश्नर का आदेश काफी है। हाल में फारुख अब्दुल्ला के 83 की उम्र में कैद होने पर कई लोगों ने छाती कूट कुहर्रम मचाना शुरू किया है। तेरासी साल के व्यक्ति को रिटायर होने लायक, लाचार, बूढ़ा मानने वाले ये वही लोग हैं जो उससे ज्यादा उम्र के अडवानी के रिटायर होने की तरफ बढ़ने पर छाती कूटते इसे मोदी की साजिश बता रहे थे।

शोर यहाँ तक फैला कि बिहार में “हंसुए की शादी में खुरपी के गीत गाते” अपने छोटे मोदी (सुमो) ने आईएफएस अफसरों की मीडिया से संपर्क बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गोष्ठी में भी मीडिया के बदले कश्मीर और फारुक अब्दुल्ला का जिक्र कर डाला।

बाकी जम्मू में एएफ(एसपी)ए लागू होने से करीब दो दशक पहले के कानून की तुलना नए ट्रैफिक जुर्मानों से करना भी हंसुए की शादी में खुरपी के गीत कहा भी जा सकता है। हाँ, बाप के बनाए काले कानून से बेटे के कैद होने में जो कर्मफल का सिद्धांत है, सो तो हइये है!

शबनम को निकाह के 4 साल बाद ससुराल वालों ने 3 माह की दुधमुँही बच्ची के साथ ज़िंदा जलाया

उत्तर प्रदेश के रामपुर में दहेज़ के लालची ससुराल वालों द्वारा माँ-बेटी को ज़िंदा जलाने की दर्दनाक ख़बर सामने आई है। यह घटना हाज़ीपुर मोहल्ले की है जहाँ शबनम नाम की महिला को ससुराल वालों ने दहेज न दिए जाने पर उसकी तीन माह की दुधमुँही बच्ची के साथ ज़िंदा जला दिया। इस घटना के संदर्भ में रामपुर के एसपी अजय शर्मा ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच जारी है। उन्होंने बताया कि सबूतों के आधार पर जाँच कर आरोपित को पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

इस घटना के बारे में जब शबनम के मायके को पता चला तो उसके भाई ने बताया कि उसकी बहन का निकाह 4 साल पहले हुआ था। उन्होंने ससुराल पक्ष पर आरोप लगाया कि वो उसकी बहन को दहेज के लिए आए दिन सताते थे। ससुराल वाले लगातार उस पर दहेज़ लाने का दबाव बना रहे थे। पीड़िता के भाई ने इस बात की जानकारी भी दी कि शबनम का एक तीन साल का बेटा है और तीन माह की एक बच्ची थी। उन्होंने बताया कि बुधवार (18 सितंबर) को ससुरालवालों ने उनकी बहन और तीन माह की बच्ची को ज़िंदा आग के हवाले कर दिया।

ससुराल पक्ष द्वारा महिलाओं को ज़िंदा जला देने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले दिल्ली के हज़रत गंज निज़ामुद्दीन बस्ती के कोट मोहल्ला में 32 वर्षीय यास्मीन को प्रॉपर्टी विवाद में जेठ-जेठानियों ने मिट्टी का तेल डालकर ज़िंदा जलाया। यास्मीन की तीन नाबालिग बेटियाँ जब मौक़े पर पहुँची तो उन्होंने पानी डालकर अपनी माँ को बचाने की कोशिश की, लेकिन यास्मीन 80 फ़ीसदी तक जल चुकी थी।

ज़िंदा जलाने का एक मामला बिहार के भागलपुर से सामने आया था। इस घटना में बेगम खातून को उसके शौहर मोहम्मद सनोवर ने आग में झोंक दिया था जिससे वो 80 फ़ीसदी तक जल गई थी। पीड़िता के बयान के आधार पर उसके शौहर, जेठ, सास और ननद के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था।

16 मस्जिद, 1 गुरुद्वारा: अमेरिका में ‘हाउडी मोदी’ रैली का विरोध करने के लिए अलगाववादियों का यह है प्लान

अमेरिका के ह्यूस्टन में 22 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘हाउडी, मोदी’ रैली का आयोजन किया जाएगा। इसमें एक मेगा शो के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शामिल होने की संभावना है। भारत-विरोधी कुछ अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा इस रैली के सामने विरोध-प्रदर्शन की योजना बनाई गई है। बता दें कि मानवाधिकारों के नाम पर असल में यह विरोध अलगाववादी समूहों द्वारा योजनाबद्ध किया गया है। इनकी माँग स्वतंत्र कश्मीर और स्वतंत्र पंजाब है- हास्यास्पद है, लेकिन है।

इस विरोध-प्रदर्शन के लिए आयोजक बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटाने की कोशिश में हैं। साथ ही प्रदर्शनकारियों के लिए यात्रा करने के लिए बसों की व्यवस्था भी की गई है। शनिवार (14 सितंबर) को, प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन के लिए एक ‘ड्रेस रिहर्सल’ भी आयोजित किया, जिसमें उन्होंने विरोधी-नारे लिखे झंडों के साथ ट्रैक्टर-ट्रेलर्स को सिख नेशनल सेंटर से एनआरजी तक चलाया।

विरोध-रैली के लिए जो रिहर्सल किया गया, उसमें ‘गो बैक मोदी’, ‘कश्मीर में हत्या बंद करो’, ‘पंजाब जनमत संग्रह 2020 खालिस्तान’, ‘फ्री कश्मीर’ आदि जैसे संदेश देखे गए।

यह विरोध-प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय मानवतावादी फाउंडेशन के बैनर तले हो रहा है। इसके अलावा फाउंडेशन ने प्रदर्शनकारियों के लिए परिवहन सुविधा का विवरण भी प्रकाशित किया है। ग़ौर करने वाली बात यह है कि विरोध-प्रदर्शन रैली जिस रास्ते से होकर गुज़रेगी, वहाँ धार्मिक संस्थान हैं। आयोजकों ने उन 17 स्थानों की सूची प्रकाशित की है, जहाँ बसें तैनात होंगी। इनमें से 16 मस्जिदें या अन्य इस्लामी केंद्र हैं, जबकि एक सिख गुरुद्वारा भी है।

धार्मिक संस्थानों की सूची इस प्रकार है:

  1. मस्जिद अबू बक्र
  2. मरयम इस्लामिक सेंटर
  3. मस्जिद अत-तक्वा
  4. मस्जिद हमज़ा (मिशन बेंड इस्लामिक सेंटर)
  5. बीयर क्रीक इस्लामिक सेंटर/ मस्जिद अल-मुस्तफा
  6. वुडलैंड्स मस्जिद
  7. इस्लामिक सेंटर ऑफ बेटाउन
  8. एमएएस कैटी सेंटर
  9. मदरसा इस्लामिया
  10. अल-नूर सोसायटी ऑफ ह्यूस्टन
  11. इस्लामिक एजुकेशन सेंटर
  12. पियरलैंड इस्लामिक सेंटर
  13. मस्जिद अल सलाम
  14. सिख नेशनल सेंटर
  15. मिशकाह सेंटर
  16. सिप्रस मस्जिद
  17. बिलाल मस्जिद नॉर्थ

इन मस्जिदों में से कुछ की पहचान क्लेरियन प्रोजेक्ट द्वारा कट्टरपंथी इस्लाम को बढ़ावा देने के रूप में की गई है। इनमें से एक इस्लामिक एजुकेशन सेंटर और मस्जिद अत-तक्वा है।

विरोध-प्रदर्शन करने वाले सिख आयोजकों ने ह्यूस्टन क्रॉनिकल से बात की और उनकी टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि वे खालिस्तानी आंदोलन से जुड़े हुए हैं। विरोध करने वाले सिख आयोजकों में से एक जगदीप सिंह है, जो 2020 पंजाब जनमत संग्रह की दिशा में काम कर रहा है। सिख नेशनल सेंटर के अध्यक्ष हरदाम सिंह आज़ाद ने कहा, “यह स्वतंत्रता के लिए एक विरोध रैली है।” इससे यह बात स्पष्ट है कि यह विरोध रैली अलगाववादियों द्वारा आयोजित की जाएगी।

दूसरी ओर, जो समुदाय विशेष वाले ह्यूस्टन में मोदी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं, वे कश्मीर अलगाववादी हैं। वे खुलेआम भारत से कश्मीर की आज़ादी की गुहार लगा रहे हैं। 

22 सितंबर को ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में आयोजित होने वाली हाउडी मोदी रैली में शामिल होने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई थी। फ़िलहाल, 50,000 से अधिक लोग इसमें शामिल होने के लिए पंजीकृत हो चुके हैं।

गधा पीठ पर सवार: इमाम ने कहा- ये है इमरान खान का नया पाकिस्तान और ये West को कोसते हैं, देखें VIDEO

गधों की सबसे बड़ी आबादी में से एक पालने वाले इमरान खान के नया पाकिस्तान में कौन सा नया तराना गढ़ा जा रहा है, इसका ट्विटर पर नज़ारा देखने को मिल रहा है। ट्विटर के एक वीडियो में पाकिस्तान के दो-तीन बाशिंदे मिल कर एक गधे को सीढ़ियाँ लगाकर बस की छत पर चढ़ा रहे हैं। इनमें से एक ने तो गधे को अपनी पीठ पर ढोया हुआ है! और आस-पास के लोग जिस तरह से आराम से देख रहे हैं, साफ़ ज़ाहिर है कि यह वहाँ पर आम बात है।

इस घटना का वीडियो पाकिस्तानी मूल के कनाडाई लेखक और पत्रकार तारिक फ़तेह ने शेयर किया है। और कैप्शन में लिखा है, “Donkey Kong.”

‘और यह लोग पश्चिमी सभ्यता को गरियाते हैं!’

फतेह के मित्र और इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ बोलने के लिए मशहूर ऑस्ट्रेलिया के ईरानी इमाम मोहम्मद तौहीदी ने भी वीडियो को शेयर करते हुए पाकिस्तान पर तंज़ कसा। उन्होंने लिखा, “ये वो लोग हैं जो पश्चिमी सभ्यता को गालियाँ देते हैं। कृपया इन्हें गौर से देख लें।”

चीन के साथ प्रमुख व्यापार जिंस

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में गधे कितने ज़रूरी हैं, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान के पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी (50 लाख) गधों की आबादी है। यही नहीं, वह गधों को चीन को बेचकर, जहाँ उन्हें मारकर उनके चमड़े से पारंपरिक चीनी दवाएँ बनाने के लिए उनकी हमेशा माँग बनी रहती है, पाकिस्तान अपना विदेशी कर्ज पाटने की उम्मीद पाले है। यही नहीं, अपनी बदहाल अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए पाकिस्तान इसके पहले बालों का निर्यात भारी मात्रा में करने का भी काम कर चुका है।

अमेरिका दौरा: गाँधी जयंती होगी संयुक्त राष्ट्र में, हफ्ते भर में 21 नेताओं से मिलेंगे मोदी, ‘Howdy Modi’ भी होगा

अपने आगामी अमेरिका दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक हफ़्ते में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अलावा 20 अन्य नेताओं से मुलाक़ात करेंगे। मोदी के विदेश दौरे की घोषणा करते हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने यह जानकारी दी। 21 सितंबर की दोपहर से 27 सितंबर तक चलने वाले इस दौरे में वह दो अमेरिकी शहरों न्यूयॉर्क और टेक्सास राज्य के ह्यूस्टन में मौजूद होंगे। इसी दौरे का अंग भारतीयों और भारतवंशियों के साथ उनकी मुलाकात का कार्यक्रम ‘Howdy Modi’ भी होगा।

2014 के बाद UN महासभा को संबोधन

इसी दौरान मोदी संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी सदस्य संस्था संयुक्त राष्ट्र महासभा को भी सम्बोधित करेंगे। इसके पहले उन्होंने 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री निर्वाचित होने पर सभा को सम्बोधित किया था, जिसकी उस समय बहुत चर्चा हुई थी।

गाँधी जयंती होगी संयुक्त राष्ट्र में, महासचिव से लेकर कोरिया-जमैका के राष्ट्राध्यक्ष भी होंगे शामिल

गोखले ने जानकारी दी कि 24 सितंबर को गाँधी जी की आगामी 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में मोदी की मौजूदगी में संयुक्त राष्ट्र में विशेष समारोह होगा। कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने ‘Leadership matters: Relevance of Gandhi in contemporary times’ नामक समारोह में शामिल होने के लिए हामी भरी है। इनमें संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ऍन्तोनिओ गुतेरेश के अलावा सिंगापुर, कोरिया, न्यूज़ीलैंड आदि के राष्ट्राध्यक्षों के भी शमिल होने की उम्मीद है।

22 को ‘Howdy Modi’

22 को मोदी भारतीय समुदाय को सम्बोधित करेंगे। इस समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी आएँगे, जो इस बार अपने पुनर्निर्वाचन के लिए भारतवंशी अमेरिकियों पर नज़र टिकाए हैं। ट्रम्प ने कश्मीर मामले पर भी पाकिस्तान के सुर में बात करने और पाकिस्तान के पक्ष में ‘गैर-हस्तक्षेप’ की नीति को पलटते हुए इस बार भारत के रुख के समर्थन में कश्मीर-विवाद को ‘दोनों देशों का आपसी मसला’ और जम्मू-कश्मीर से 370 हटा कर पूर्ण विलय को भारत का आंतरिक मुद्दा करार दिया है।

राम मंदिर पर अनाप-शनाप न बोलें, बयान बहादुरों और बड़बोलों को PM मोदी ने चेताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी गुरुवार (सितंबर 19, 2019) को महाराष्‍ट्र के नासिक में रैली को संबोधित करते हुए कई समसामायिक विषयों पर बात की। उन्होंने इस बीच राम मंदिर को लेकर बयानबाजी कर रहे नेताओं को सलाह भी दी कि वे बयान बहादुर बनने की जगह न्यायपालिका और संविधान पर भरोसा रखें।

उन्होंने कहा, “मैं देख रहा हूँ कि पिछले दो-तीन सप्ताह से कुछ बयान बहादुर लोग, कुछ बड़बोले लोग राम मंदिर को लेकर अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं। देश के सभी नागरिकों का भारत की सुप्रीम कोर्ट के प्रति सम्मान बहुत आवश्यक है।”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, “जब मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा हो, सब पक्ष अपनी बात रख रहे हों, सुप्रीम कोर्ट लगातार समय निकालकर बातों को सुन रही हो, तब मैं हैरान हूँ ये बयान बहादुर कहाँ से आ गए। हमारा सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा होना चाहिए। बाबा साहब अम्बेडकर ने जो संविधान दिया है उस पर भरोसा होना चाहिए। हमारा भरोसा भारत की न्यायप्रणाली पर होना चाहिए। इसलिए मैं आज नासिक की पवित्र धरती से देश भर में जो बड़बोले लोग हैं और जो बयान बहादुरों लोग हैं, उनसे हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि प्रभु श्रीराम के खातिर सिर्फ़ और सिर्फ भारत की न्याय प्रणाली के प्रति अपनी श्रद्धा रखें।”

उल्लेखनीय है कि अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट में लगातार सुनवाई चल रही हैं। कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट इस मसले पर आने वाले एक महीने यानी 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी कर लेगा और 17 नवंबर तक इस मामले पर फैसला आने की उम्मीद हैं। लेकिन इससे पहले कुछ लोग और नेता ऐसे हैं जो लगातार इस विषय को बढ़ा-चढ़ाकर जनता के समक्ष पेश कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के प्रयासों को जनता के सामने दरकिनार कर रहे हैं। जिसके चलते ही आज प्रधानमंत्री ने आवाज उठाई।

यूपी में मुस्लिमों ने लिया आबादी से ज़्यादा लाभ, हमारा उद्देश्य है सबका विकास: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि अब तक उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों को उनकी आबादी के अनुपात से ज़्यादा विकास का लाभ पहुँचाया गया है। 20% से कम की आबादी पर राज्य सरकार की स्कीमों का हर तीसरा लाभार्थी (यानि 33%) मुस्लिम है। उन्होंने यह बातें न्यूज़18 को दिए साक्षात्कार में कहीं। उनका साक्षात्कार नेटवर्क के मुख्य सम्पादक राहुल जोशी ने लिया।

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‘सरकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव हर गरीब को मिलना चाहिए’

“गरीब गरीब होता है। बिना किसी भेदभाव के सरकारी योजनाएँ सभी तक पहुँचनी चाहिए। हमारा उद्देश्य है कि सभी का विकास हो।” योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि उनकी सरकार में भी 25 लाख आवासों में से 30-35% मकान मुस्लिमों को ही आवंटित हुए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में उनकी आबादी महज़ 18% है। यह उनकी आबादी के लिहाज से दोगुना है। लेकिन उन्होंने चूँकि मज़हबी आधार पर मकान आवंटन की कोई नीति नहीं बनाई थी, अतः मकानों के लिए जिसने भी अर्हता पूरी की, उसे मकान आवंटित हुए।

समाज को बाँटकर नहीं देखता, परिस्थिति देखकर बोला हरा वायरस

योगी आदित्यनाथ ने साफ़ किया कि उनकी मुस्लिम-विरोधी मुख्यमंत्री की छवि गलत है। उन्होंने दावा किया कि वे समाज को बाँटकर नहीं देखते, और केरल की मुस्लिम लीग को “हरा वायरस” उन्होंने वहाँ की परिस्थिति-विशेष के हिसाब से बोला था। लेकिन साथ ही प्रदेश में हिंसक तत्वों को बर्दाश्त न करने का भी स्पष्ट संदेश दिया। “लेकिन हाँ यह सच है कि हमने सांप्रदायिकता या उपद्रवियों को कभी बर्दाश्त नहीं किया और न भविष्य में करेंगे।”

2030 के लक्ष्य 2024 में हासिल करने का है दावा

अपनी सरकार का आधा कार्यकाल (2.5 साल) पूरे होने के उपलक्ष्य में योगी आदित्यनाथ एक-के-बाद-एक मीडिया इंटरव्यू दे रहे हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने हाल ही में दैनिक जागरण को साक्षात्कार दिया था। इसमें उन्होंने दावा किया था कि फ़िलहाल 8% की दर से विकास कर रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था अपने आप ही 2030 तक ₹10 खरब के आकार को पा लेगी, लेकिन उनका लक्ष्य रफ़्तार बढ़ाकर यह लक्ष्य 2024 तक पा लेने का है। उन्होंने इसके लिए अगले 4 सालों में प्रदेश में ₹40 लाख करोड़ का निवेश, कोऑपरेटिव खेती को बढ़ावा, आधारभूत ढाँचा, औद्योगिक विकास आदि उपायों की योजनाएँ गिनाईं। साथ ही निवेश का माहौल सुधरने के लिए बेहतर कानून-व्यवस्था के साथ पुलिस के आधुनिकीकरण पर ज़ोर देने का वादा किया था।

यही नहीं, योगी ने कानपुर में चमड़ा उद्योग को राहत के नाम पर गंगा को दोबारा प्रदूषित करने की छूट देने से भी साफ़ इंकार कर दिया था। इसके अलावा योगी ने अपनी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियाँ पूछे जाने पर अयोध्या में दीपोत्सव और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा, कुंभ की सफलता और प्रयागराज, वाराणसी, मथुरा में पर्यटन की संभावना और उद्योगों की आवक को बताया था।

अमित शाह से मिलीं ममता, कहा- NRC से डरे हुए हैं लोग, नागरिकों को न करें परेशान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बुधवार (सितंबर 18, 2019) को मिलने के बाद बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार (सितंबर 19, 2019) को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने गृहमंत्री के समक्ष NRC को लेकर अपनी चिंता जताई।

माडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने इस मुलाकात के बाद कहा, “मैं पहली बार गृह मंत्री से मिली। मेरा अक्सर दिल्ली आना नहीं होता। कल मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिली थी। यह मुलाकात गृह मंत्री के साथ संवैधानिक दुरुपयोग समेत कई मामलों को लेकर हुई।”

यहाँ बता दें कि ममता बनर्जी ने गृहमंत्री के सामने एनआरसी को लेकर उठाए मुद्दे के बारे बताया कि उन्होंने गृहमंत्री को एक पत्र सौंपा है और साथ ही एनआरसी से बाहर किए गए 19 लाख लोगों के बारे में बात की है, जिनमें बंगाली, गोरखा और हिन्दी बोलने वाले लोग भी है। उनकी मानें तो कई वास्तविक मतदाताओं के नाम भी इस सूची में नहीं हैं, जिससे उनके जीवन में अनिश्चता आ गई हैं। इसलिए सही नागरिकों को मौका दिया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि वो दिल्ली कई मसलों पर चर्चा करने के लिए आईं थीं, (जिसमें उन्होंने एनआरसी का भी मुद्दा उठाया)। उन्होंने कहा कि एनआरसी से लोग डरे हुए हैं, इसलिए नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

हालाँकि, ममता बनर्जी ने आगे जानकारी देते हुए बताया है कि गृहमंत्री ने अभी पश्चिम बंगाल में एनआरसी को लेकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन उन्होंने उनकी बातों को ध्यान से सुना है और उन्हें (ममता को) लगता है कि वो इसके लिए पॉजिटिव रोल प्ले करेंगें।

अमित शाह से मिलीं बंगाल सीएम।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने गृहमंत्री शाह से मिलने की इच्छा उस वक्त जताई, जब सीबीआई कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के ख़िलाफ़ कार्रवाई में जुटी हैं। वरना इससे पहले उनका रुख किसी से छिपा नहीं हैं।

यहाँ उल्लेखनीय है कि इस मुलाकात से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री से भी शिष्टाचार मुलाकात की, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी को बंगाल आने का न्यौता भी दिया है और भाजपा ने उनके इस बदले रुख का स्वागत भी किया।

14 दिन और रहेंगे तिहाड़ में चिदंबरम, 3 Oct तक राउज एवेन्यू कोर्ट ने बढ़ाई न्यायिक हिरासत

INX मीडिया मामले में CBI ने पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम की न्यायिक हिरासत अवधि को बढ़ाने का अनुरोध किया, इसके बाद राउज एवेन्यू कोर्ट ने चिदंबरम की 14 दिन की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है। कोर्ट ने पी चिदंबरम को 3 अक्टूबर तक के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया है। दरअसल, आज गुरुवार को न्यायिक हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद पी चिदंबरम को राऊज एवेन्‍यू कोर्ट में पेश किया गया था।

चिदंबरम की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाने के CBI के अनुरोध पर अपना विरोध जताया था। कपिल सिब्बल ने अदालत से अनुरोध किया था कि उनके मुव्वकिल को न्यायिक हिरासत के दौरान तिहाड़ जेल में रहते हुए समय-समय पर मेडिकल जाँच तथा पर्याप्त मात्रा में पूरक आहार उपलब्ध कराया जाए।

सिब्बल ने कहा कि चिदंबरम को कई बीमारियाँ हैं और हिरासत में रहने के कारण उनका वज़न भी कम हुआ है। बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता पाँच सितंबर से न्यायिक हिराासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं।

ख़बर के अनुसार, पी चिदंबरम की तरफ़ से पैरवी करने वाले दूसरे वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि चिदंबरम पहले से ही 14 दिन की पुलिस हिरासत और 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रह चुके हैं। उन्होंने चिदंबरम की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने का विरोध किया।