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अय्याश था नेहरू और उसका खानदान, अंग्रेजों के चक्कर में देश का बँटवारा कर दिया: BJP विधायक

भाजपा विधायक विक्रम सिंह सैनी ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। सैनी ने न सिर्फ़ नेहरू को अय्याश बताया बल्कि उन्हें देश के बँटवारे के लिए भी ज़िम्मेदार ठहरा दिया। विक्रम सिंह सैनी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के खतौली से विधायक हैं। उन्होंने सपा प्रत्याशी चन्दन सिंह चौहान को 31,000 से भी अधिक वोटों से मात दी थी। सैनी ने अपने फेसबुक पोस्ट को लेकर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में नेहरू पर टिप्पणी की।

विक्रम सिंह सैनी ने नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमारे प्रधानमंत्री की निगाह केवल इसी पर है कि भारत को कैसे और शक्तिशाली बनाया जाए। वहीं, उन्होंने नेहरू और उनके पूरे परिवार को अय्याश बताया। भाजपा विधायक ने कहा कि अंग्रेजों के चक्कर में पड़ नेहरू ने देश का बँटवारा करा दिया था। उन्होंने कहा कि नेहरू का पूरा खानदान ही अय्याश था। उन्होंने इटली की लड़की से शादी करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी पर भी निशाना साधा।

भाजपा विधायक ने नेहरू और उनके परिवार पर टिप्पणी करते हुए कहा, “इनका तो काम-धंधा ही ऐसा रहा है।” विक्रम सिंह सैनी अक्सर अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि महिलाओं के साथ बदसलूकी करने वालों की पिटाई की जानी चाहिए। फ़रवरी 2018 में उन्होंने कहा था कि हिन्दुओं को अधिक से अधिक बच्चे पैदा करते रहना चाहिए, जब तक कि इस सम्बन्ध में कोई क़ानून न बन जाए। उन्होंने ‘भारत को असुरक्षित बताने वालों’ को देशद्रोही करार दिया था।

तीसरी कक्षा की बच्ची से गंदी हरक़त, 55 साल का प्रिंसिपल कदीर खां गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बदायूँ में एक स्कूल के 55 साल के प्रिंसिपल को बच्चियों के साथ अश्लील हरक़त करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है। शहर के नाज़िम सिटी मांटेसरी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली नौ साल की बच्ची ने स्कूल के प्रिंसिपल कदीर खां पर अश्लील हरक़त करने का आरोप लगाया। इसके अलावा बच्ची के परिजनों ने पुलिस को एक वीडियो क्लिप भी दिखाई जिसमें स्कूल की अन्य छात्राओं ने भी प्रिंसिपल पर अश्लील हरक़तें करने का आरोप लगाया है।

दैनिक जागरण के बदायूँ संस्करण में छपी ख़बर

दरअसल, मंगलवार (17 सितंबर) को तीसरी कक्षा की मासूम छात्रा को उसके पिता स्कूल छोड़कर अपनी दुकान पर वापस आ गए। इसके बाद सुबह क़रीब 10 बजे बच्ची की माँ ने उसके पिता को फ़ोन कर बताया कि स्कूल में उसकी बच्ची के साथ किसी ने ग़लत हरक़त की है। इसके बाद बच्ची के पिता घर पहुँचे और अपनी पत्नी समेत कुछ अन्य परिजनों के साथ स्कूल पहुँचे। वहाँ बच्ची ने बताया कि स्कूल के प्रिंसिपल कदीर खां ने उसके साथ शर्मनाक हरक़त की है, इसके बाद वहाँ मौजूद सभी लोग गुस्से से आग-बबूला हो उठे और प्रिंसिपल से इस संदर्भ में बात करने पहुँचे।

प्रिंसिपल ने परिजनों की शिक़ायत पर ग़ौर फ़रमाने की बजाए उन्हें धक्के देकर कार्यालय से बाहर निकलवा दिया। इस बीच परिजनों ने प्रिंसिपल के ख़िलाफ़ जमकर हंगामा किया, लेकिन उन्हें घर वापस आना पड़ा। थोड़े समय के बाद परिजन एक बार फिर से स्कूल पहुँचे और स्कूल में अन्य छात्राओं से कदीर खां के बारे में पूछताछ की तो पता चला कि वो अन्य मासूम बच्चियों के साथ भी अश्लील हरक़त करता था। 

इसके बाद उस वीडियो क्लिप को लेकर परिजन कोतवाली पहुँचे। शिक़ायत के आधार पर पुलिस ने कदीर खां के ख़िलाफ़ धारा-376 एबी और लैंगिक अराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम-2012 (पॉक्सो) के तीन और चार के तहत FIR दर्ज कर ली। इस मामले पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस कदीर खां को गिरफ़्तार कर कोतवाली ले आई। फ़िलहाल, इस मामले पर स्कूल प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है। जानकारी के अनुसार, कदीर खां उस स्कूल का प्रिंसिपल और मैनेजर दोनों है।

इस बात का भी पता चला है कि कदीर खां न सिर्फ़ स्कूल की छात्राओं को अपना निशाना बनाता था बल्कि छात्रों के साथ भी अश्लील हरक़त करता था। अपनी गंदी हरक़तों को छिपाने के लिए वो बच्चों को डराता-धमकाता था और कहता था कि अगर उसकी हरक़तों के बारे में किसी ने भी अपने घर में बताया तो उसकी पिटाई होगी और उसे फेल कर दिया जाएगा।

स्कूल के छात्र-छात्राओं के बीच कदीर खां का इतना ख़ौफ़ था कि उन्होंने ख़ुद के साथ हो रहे अभद्र व्यवहार के बारे में कभी किसी को कुछ नहीं बताया। लेकिन, अब जब मामला सामने आ गया तो कुछ बच्चों ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कदीर खां के अश्लील बर्ताव के बारे में बताना शुरू कर दिया है। एक छात्र ने बताया कि कदीर खां उसके कपड़े उतारकर उसके शरीर पर हाथ फेरता था।

सावरकर होते PM तो नहीं होता पाकिस्तान, मणिशंकर अय्यर को चप्पल से मारता: उद्धव ठाकरे

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि यदि वीर सावरकर देश के प्रधानमंत्री होते तो पाकिस्तान पैदा ही नहीं होता। साथ ही सावरकर पर कॉन्ग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर की एक पुरानी टिप्पणी को लेकर कहा कि यदि अय्यर सामने होते तो उन्हें चप्पल से मारता। ठाकरे ने मंगलवार (सितंबर 17, 2019) को ‘सावरकर: इकोज फ्राम अ फॉरगाटेन पास्ट” के विमोचन के मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए ये बातें कही।

उन्होंने कहा, “हमारी सरकार हिंदुत्व सरकार है और आज मैं उनसे वीर सावरकर के लिए भारत रत्न की भी माँग करता हूँ।” ठाकरे ने कहा, “सावरकर को भारत रत्न सम्मान से नवाजा जाना चाहिए। हम गांधी और नेहरू द्वारा किए गए काम से इनकार नहीं करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी और ने राष्ट्र के विकास में योगदान नहीं दिया।”

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो इस दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा, “मुझे नेहरू को वीर कहने में गुरेज नहीं होता यदि वह 14 मिनट भी जेल के भीतर सावरकर की तरह रहे होते। सावरकर 14 वर्षों तक जेल में रहे थे।” ठाकरे ने दुख व्यक्त करते हुए ये भी कहा कि सावरकर को जिस जेल में रखा गया था, उसे ‘पिकनिक स्पॉट’ में बदल दिया गया है और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, “जेल लोगों के लिए एक पिकनिक स्थल बन गया है। लेकिन, लोगों को यह नहीं पता है कि सावरकर को जेल में अपने दिनों के दौरान क्या दर्द हुआ था।”

इस दौरान शिवसेना प्रमुख राहुल गाँधी पर भी कटाक्ष करने से नहीं चूँके। उन्होंने कहा, “लोकसभा चुनाव के दौरान जब राहुल गाँधी ने सावरकर के खिलाफ बयान दिया, तो मैं पहला व्यक्ति था, जो यह कहता था कि राहुल गाँधी बेकार हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गाँधी को इस किताब की प्रति दी जानी चाहिए और उन्हें इसे पढ़ने के लिए कहा जाना चाहिए।”

कॉन्ग्रेस नेता अय्यर पर भी इस दौरान ठाकरे ने तीखे हमले किए। असल में, 2018 में अय्यर ने आरोप लगाया था कि सावरकर ने हिंदुत्व शब्द को उछालकर समाज को धर्म के आधार पर बॉंटने का काम किया था। अय्यर ने कहा था कि देश का बॅंटवारा मोहम्मद अली जिन्ना ने नहीं बल्कि सावरकर की वजह से हुआ था, उन्होंने टू स्टेट थ्योरी दी थी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहल शिवसेना प्रमुख राम मंदिर के मद्देनजर भी बड़ा बयान दे चुके हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा था कि जैसे जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया है, उसी प्रकार अयोध्या में राम मंदिर को बनाने का भी साहस दिखाएँ, क्योंकि राम मंदिर के लिए इंतजार करने का अब कोई मतलब नहीं बनता।

शिवकुमार के ख़िलाफ़ 200 शिकायतें, कर्नाटक महिला कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष को भी ED का समन

कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय गड़बड़ियों में फँसे शिवकुमार के ख़िलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को अब तक 200 से भी अधिक शिकायतें मिल चुकी हैं। ये शिकायतें पैसों के अवैध लेनदेन और वित्तीय अनियमितताओं से सम्बंधित है। अलग-अलग लोगों ने उनके ख़िलाफ़ कई शिकायतें भेजी हैं और ईडी उन मामलों की जाँच में जुट गई है। प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि शिकायतों की जाँच कर उनकी वैधता की पुष्टि की जा रही है।

इनमें से कई शिकायतकर्ता एक हाउसिंग प्रोजेक्ट के निवेशक हैं, जिन्होंने कहा है कि उनका सारा रुपया डूब गया। इसके अलावा कई अन्य किस्म के आरोप भी हैं। इनकम टैक्स द्वारा दायर की गई चार्जशीट के आधार पर ईडी शिवकुमार के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चला रही है। ये मामले टैक्स चोरी और हवाला लेनदेन से सम्बंधित है। कई करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं के इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कर्नाटक कॉन्ग्रेस के एक अन्य विधायक को भी समन जारी किया है।

विधायक लक्ष्मी हेब्बालकर को इससे पहले भी ईडी ने समन जारी किया था, लेकिन वह एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुईं। वह कर्नाटक प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उन्हें अब तक कई समन भेजे जा चुके हैं, जिनमें ईडी ने उन्हें जाँच में सहयोग करने के लिए कहा है। विधायक लक्ष्मी हेब्बालकर को कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेता डीके शिवकुमार का क़रीबी माना जाता है। इसी मामले में शिवकुमार की बेटी से भी ईडी पूछताछ कर चुकी है। उनसे 7 घंटे तक पूछताछ की गई है।

डीके शिवकुमार के एक अन्य क़रीबी सहयोगी सचिन नारायण से भी पूछताछ की गई। ईडी का कहना है कि शिवकुमार के विभिन्न देशों में 317 बैंक खाते हैं, जिनका इस्तेमाल 200 करोड़ से भी अधिक रुपयों की मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया। ईडी का आरोप है कि शिवकुमार और उनके परिवार ने ये सब कर के 800 करोड़ रुपए से भी अधिक की संपत्ति बनाई। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं।

हिन्दू छात्रा की हत्या पर उबला कराची, देर रात सड़कों पर उतरे लोग

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। सोमवार (16 सितंबर) को सिंध प्रांत के घोटकी में हिंदू लड़की लड़की नमृता चंदानी की हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने लोगों को झकझोर दिया है। विरोध में देर रात बड़ी संख्या में लोग कराची की सड़कों पर उतरे और हत्यारों की गिरफ़्तारी की माँग की।

बताया जाता है कि नमृता का जबरन धर्मांतरण कराने की कोशिश की गई थी। बाद में उसकी लाश हॉस्टल के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मिली। उसका शव बिस्तर पर पड़ा था और गले में रस्सी बॅंधी थी।

प्रशासन इसे आत्महत्या का मामला बताकर रफा-दफा करना चाहता है, जबकि नमृता के भाई का कहना है कि उसकी हत्या की गई है।

नमृता चंदानी लरकाना के बीबी आसिफ़ा डेंटल कॉलेज में बीडीएस की फाइनल ईयर की छात्रा थीं। बहन की मृत्यु पर नमृता के भाई डॉ. विशाल सुंदर ने कहा, “उसके शरीर के अन्य हिस्सों पर भी निशान हैं, जैसे कोई उसे पकड़ रहा हो। हम अल्पसंख्यक हैं, कृपया हमारे लिए खड़े हों।”

नमृता के भाई विशाल जो कि खुद मेडिकल कंसलटेंट हैं का कहना है प्राथमिक जाँच से पता चलता है कि
नमृता की हत्या की गई है। विशाल ने कहा, मैंने नमृता की गर्दन पर तार के निशान देखे हैं। ऐसे ही निशान उसके हाथ पर थे। लेकिन उसकी दोस्त का कहना है कि उसने नमृता को जब देखा तो उसके गले में दुपट्टा बॅंधा था।

कॉलेज प्रशासन ने हिन्दू लड़की की मृत्यु को आत्महत्या करार देने की कोशिश की, लेकिन सबूत उसकी हत्या की ओर इशारा करते नज़र आ रहे हैं।

घटनास्थल की स्थिति से ऐसा पता चलता है कि मृतका ने अपनी जान बचाने के लिए काफ़ी संघर्ष किया था। उसका फोन भी ग़ायब था, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया। अब सवाल यह है कि रस्सी से लटकने के बजाय उसका शरीर बिस्तर पर क्यों पड़ा था, जैसा कि आमतौर पर फाँसी लगाकर आत्महत्या के मामलों में होता है।

लरकाना डीआईजी इरफान अली बलूच ने एसएसपी मसूद अहमद बंगश को घटना की जाँच के आदेश दिए हैं। वहीं, डेंटल कॉलेज के कुलपति, डॉ अनिला अताउर रहमान ने इस घटना के संदर्भ में कहा, “पहली नज़र में यह घटना आत्महत्या लग रही है, लेकिन पुलिस और मेडिको-लीगल पोस्टमॉर्टम के बाद मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने में सक्षम होगी।”

‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाते हुए आया और सैनिक के गर्दन में घोंप दी कैंची

इटली के मिलान रेलवे स्टेशन पर मंगलवार (सितंबर17, 2019) को एक 23 वर्षीय हमलावर ने अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाते हुए एक सैनिक के गर्दन में कैंची घोंप दी। घटना को अंजाम दे वह मौके से फरार हो गया। लेकिन, पिआजा डूका डिऑस्टा (Piazza Duca d’Aosta ) से विया विट्टोर पिसानी (Via Vittor Pisani ) की ओर भागते वक़्त पैरामिलिट्री पुलिस अधिकारियों ने उसे धर दबोचा।

सैनिक की हालत खतरे से बाहर है। घटना के तार आतंकवाद से जुड़े हैं या नहीं, इसकी जाँच के आदेश दिए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक इटली की न्यूज एजेंसी ANSA ने बताया है कि हमलावर हमले से एक दिन पहले उसी इलाके में एक व्यक्ति को पेन घोंपने के कारण भी पकड़ा गया था। ANSA के अनुसार हमले का आरोपित यमन से आया प्रवासी है। उसने गिरफ्तारी के बाद भी अल्लाह हू अकबर का नारा तेज आवाज में बुलंद किया।

गौरतलब है कि अति उदार रवैया रखने वाले लोग जहाँ एक ओर हमेशा से ऐसी घटनाओं में जिहाद के एंगल को नकारते आए हैं, वहीं ऐसी घटनाओं की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। साल 2017 के इसी रेलवे स्टेशन पर एक ऐसे ही हमले की घटना सामने आई थी, जहाँ इटली-तुनिसियन मूल के व्यक्ति ने मिलेट्री और रेलवे पुलिस अधिकारी के 2 सदस्यों पर हमला किया था।

इसके अलावा साल 2018 में भी फ्रांस की राजधानी पेरिस में भी अज्ञात हमलावरों ने सेंट्रल पेरिस के ओपेरा जिले में बीच सड़क पर लोगों पर चाकू से वार किया था। जिसमें एक व्यक्ति की मौत भी हुई थी, वहीं कुछ लोग घायल हो गए थे। हमले के बाद आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि उसी ने यह हत्या करवाई है।

तमिलनाडु में मिशनरी विरोधी BJP नेता की हत्या, कार्यकर्ताओं ने धर्मान्तरण गिरोह पर जताया शक

तमिलनाडु के सलेम जिला के यरकौड में भाजपा नेता की हत्या कर दी गई। रविवार (सितम्बर 15, 2019) को ए चिनाराज की हत्या की गई। वे यरकौड भाजपा के उपाध्यक्ष थे। हत्या के मामले में पुलिस ने एक 28 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है। उसका नाम मणिवन्नन है। आरोपित वी रामकृष्णन का बेटा है और पुलिस ने दावा किया है कि उसने ज़मीन विवाद के कारण भाजपा नेता की हत्या की।

हालाँकि, भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि हत्या की कुछ और ही वजह है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि भाजपा नेता ने ईसाई मिशनरियों द्वारा कराए जा रहे धर्मान्तरण के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ रखा था। कार्यकर्ताओं का मानना है कि एक साज़िश के तहत धर्मान्तरण में लिप्त लोगों ने ही उनकी हत्या की है। वह हिन्दुओं को धर्मान्तरण के ख़िलाफ़ जागरूक कर रहे थे। कार्यकर्ताओं ने मृत भाजपा नेता को श्रद्धांजलि न देने के लिए स्थानीय भाजपा नेतृत्व से नाराज़गी जताई।

पुलिस की मानें तो रामकृष्णन और उसके कजन भाई चिनराज के बीच ज़मीन विवाद चल रहा था। रामकृष्णन की माँ वेलाईअम्मा यरकौड में 2 एकड़ ज़मीन की मालकिन है। उन्होंने ये ज़मीन चिनाराज की माँ करिअम्मल से 40 वर्ष पूर्व ले लिया था। चिनाराज को जब इसका पता चला तो उसने पुलिस में शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने आधी ज़मीन चिनाराज को दिए जाने की बात कही। रामकृष्णन को इस सम्बन्ध में सूचित किया गया।

रामकृष्णन का बेटा मणिवन्नन ज़मीन देने को तैयार नहीं था इसीलिए उसने भाजपा नेता चिनाराज के घर में घुस कर उन्हें चाकू से मार डाला। भाजपा नेता की मौके पर ही मौत हो गई। आरोपित मणिवन्नन भाग खड़ा हुआ लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया। उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चाकू भी जब्त कर लिया है। आरोपित को फ़िलहाल 15 दिन के लिए जेल भेज दिया गया है।

तुलसी बाबा ने यूॅं ही नहीं लिखा- झूठइ लेना झूठइ देना, झूठइ भोजन झूठ चबेना

तुलसीदास भी गजबे थे। राम पर पूरा रामचरितमानस लिख दिया। जन्म से लेकर कलयुग तक का खाका खींच दिया। पर जो लिखना था वो न लिखा। नहीं बताया कि राम किस गली के कितने नंबर मकान में पैदा हुए। कायदे से दशरथ के प्लॉट (राजमहल) का खतिहान ही लिखा जाना चाहिए था।

लेकिन, तुलसी बाबा उत्तर कांड में केवल इतना लिख ठहर गए;
जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि। उत्तर दिसि बह सरजू पावनि॥
जा मज्जन ते बिनहिं प्रयासा। मम समीप नर पावहिं बासा॥

यानी, यह सुहावनी पुरी मेरी जन्मभूमि है। इसके उत्तर दिशा में जीवों को पवित्र करने वाली सरयू नदी बहती है, जिसमें स्नान करने से मनुष्य बिना परिश्रम मेरे समीप निवास अर्थात मुक्ति पा जाते हैं।

इससे साबित क्या होता है? यह किस बात का साक्ष्य है? जानने से पहले इन दलीलों पर गौर करें,

  • यह विश्वास है कि भगवान राम वहॉं पैदा हुए थे। हमें साक्ष्य देकर बताया जाए कि आखिर किस जगह भगवान राम पैदा हुए थे।
  • ये दलील काफी नहीं है कि भगवान राम के जन्मस्थान के बारे में आस्था है कि वह अमुक जगह है और इसी आधार पर जन्मस्थान को कानूनी व्यक्ति मान लिया जाए।
  • पिलर पर भगवान की कोई तस्वीर नहीं है। कमल, गरूड़ की तस्वीर और सिंहद्वार होने भर से वह हिंदुओं का स्थान हो जाएगा ऐसा नहीं है। ये सजावट के लिए हो सकता है।
  • पूरे जन्मस्थान को पूजा की जगह बता मुस्लिम पक्ष के दावे को कमजोर करने की कोशिश की जा रही।

ये चुनिंदा दलीले हैं वरिष्ठ वकील राजीव धवन की। वे अयोध्या मामले की सुप्रीम कोर्ट में चल रही नियमित सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से अपना पक्ष रख रहे हैं। वैसे, दलीलें देने और सुनने की हमारी परंपरा पुरानी है। कैकेयी ने भी मंथरा और खुद राम ने धोबिन की दलीलें सुनी थी। नतीजा दोनों में एक जैसा ही निकला था- वन गमन!

राजीव धवन को बतौर वकील दलीलें पेश करने का अधिकार भी है और उसे सुनना मी लॉर्ड का दायित्व। दलीलों से यह भी जाहिर होता है कि धवन भी राम को मानते हैं। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा भी है, “भगवान राम की पवित्रता पर कोई विवाद नहीं है। इसमें भी विवाद नहीं है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में कहीं हुआ था।” उनकी आपत्ति केवल जन्मस्थान को कानूनी तौर पर व्यक्ति मानने को लेकर है। आपत्ति केवल यह है कि किसी भी पुस्तक में ये वर्णित नहीं है कि अयोध्या के किस खास जगह पर भगवान राम का जन्म हुआ था। राम में उनकी आस्था इतनी है गहरी है कि उन्होंने अदालत में इकबाल का एक शेर भी पढ़ा, “है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़, अहल-ए-नज़र समझते हैं उसको इमाम-ए-हिंद।”

कहने को कबीर भी कह गए हैं;
कबीर निरभै राम जपि, जब लग दीवै बाति।
तेल घट्या बाती बुझी, (तब) सोवैगा दिन राति॥

कहते हैं कि अवध के वाजिद अली शाह के कृपानिधान भी राम ही थे। किस्सा यूॅं है कि वाजिद अली शाह बेदखल हो कलकता जाने लगे तो अफवाह उड़ी कि अंग्रेज उन्हें लंदन ले जा रहे हैं। तब औरतों ने जमा होकर गाया था-हजरत जाते लंदन, कृपा करो रघुनंदन।लेकिन, जो सबसे जरूरी था वह किसी ने न लिखा, न गाया। राम किस प्लॉट में पैदा हुए थे?

हालाँकि, रामलला के वकील एससी वैद्यनाथन सुप्रीम कोर्ट को बता चुके हैं कि राम का जन्म बाबरी मस्जिद के गुंबद के नीचे हुआ था। भारतीय पुरातत्व विभाग की खुदाई से मिले सबूत भी बताते हैं कि बाबरी मस्जिद के नीचे जो स्ट्रक्चर था उसकी बनावट उसमें मिली भगवान की तस्वीरें, मूर्तियॉं सब पहले से मंदिर के होने की गवाही देते हैं। लेकिन, आपत्ति जताने वाले यह भी पूछते हैं कि एक ही कालखंड में होने के बावजूद तुलसीदास ने राम मंदिर को तोड़ कर मस्जिद बनाए जाने का जिक्र क्यों नहीं किया?

वैसे, तुलसी बाबा यह भी लिख गए हैं;
झूठइ लेना झूठइ देना। झूठइ भोजन झूठ चबेना॥
बोलहिं मधुर बचन जिमि मोरा। खाई महा अहि हृदय कठोरा॥

यह भी कि;
ऐसे अधम मनुज खल कृतजुग त्रेतॉं नाहिं।
द्वापर कछुक बृंद बहु होइहहिं कलजुग माहिं॥

यानी, ऐसे नीच और दुष्ट मनुष्य सतयुग और त्रेता में नहीं होते। द्वापर में थोड़े से होंगे और कलियुग में तो इनके झुंड-झुंड होंगे।

खैर, बहस जारी रहे…क्योंकि हमने तो पाहुन राम से कहा था- जो आनंद विदेह नगर में, देह नगर में कहूॅं ना।

‘स्त्री की मर्यादा कैसे रखी जाती है, रामायण में वर्णन हैं, स्त्री की मर्यादा के लिए युद्ध उचित है तो होना चाहिए’

केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में 5वें अंतरराष्ट्रीय रामायण महोत्सव में शिरकत करते हुए महाकाव्य रामायण को भारतीय संस्कृति का राजदूत बताया। इस दौरान उन्‍होंने कहा, “रामायण पर घंटो बोला जा सकता है। लेकिन, मैं ये कह सकता हूँ कि हजारों वर्षों के अविरत भारत के सांस्कृतिक धारा प्रवाह की अभिव्यक्ति किसी महाकाव्य के अंदर हुई है, तो वो रामायण है।

‘बहुत सालों से नहीं देखा रामायण मंचन, स्त्री की मर्यादा के लिए युद्ध उचित’

अमित शाह ने कहा, “हमने बहुत साल से रामायण मंचन कार्यक्रम नहीं देखा इसलिए यहाँ ये मंचन देखने आए हैं। रामायण को सभी ने मंच पर मंचित करने का प्रयास किया है। देश की सीमाओं को लाँघते हुए, रामायण पूर्ण महाकाव्य है। इस पूरे महाकाव्य रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने राम के सारे जीवन चरित्र का वर्णन किया है। प्रभु श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम थे जिससे उनका पूरा जीवन चरित्र उजागर होता है। रामायण में कई ऐसे काव्य हैं जो ज्ञान-विज्ञान, सुशासन सबका वर्णन करते हैं। स्त्री की मर्यादा कैसे रखी जाती है उसका रामायण में वर्णन है- स्त्री की मर्यादा के लिए युद्ध उचित है तो होना चाहिए।”

उन्होंने साथ में जोड़ा कि शायद ही कोई ऐसी भाषा होगी, जिसमें रामायण का अनुवाद न किया गया हो।

इसके अलावा उन्होंने बताया कि रामायण में केवल धर्म और संस्कृति ही नहीं, राजनीति, युद्ध, विज्ञान और प्रशासन भी है।

राम अयोध्या में तो पैदा हुए, लेकिन किस गली-मोहल्ले में, ये कैसे साबित होगा: मुस्लिम पक्ष

अयोध्या मामले में दलीलें रखते हुए मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने दावा किया कि भगवान श्री राम के अयोध्या में जन्म को तो मुस्लिम भी मानते हैं, लेकिन अयोध्या के भीतर उनका जन्म किस स्थान विशेष पर हुआ था, इसके कोई सबूत नहीं हैं। इसी आधार पर उन्होंने एक बार फिर रामजन्मभूमि स्थान को पहले देवता, और फिर कानूनी प्रावधान के अंतर्गत देवता से ‘न्यायिक व्यक्ति’ घोषित करने की प्रक्रिया का विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि अयोध्या के भीतर ही 3-4 जगहों के रामजन्मभूमि होने का दावा किया जाता है।

मैं भी राम को मानता हूँ, लेकिन…

राजीव धवन ने दावा किया कि शिया मुस्लिम श्री राम को वंदनीय मानते हैं। साथ ही, श्री राम मंदिर के निर्माण के खिलाफ मुकदमा लड़ रहे होने के बावजूद उन्होंने श्री राम को अपने लिए भी वंदनीय बताया, और पाकिस्तान के बौद्धिक पिता माने जाने वाले इक़बाल का निम्न शेर पढ़ा:

राम के वजूद पे हिन्दोस्तां को नाज
अहल-ए-नजर समझते हैं उसको इमाम-ए-हिंद

शेर पढ़ने के बाद धवन ने खुद ही जोड़ा कि बाद में इक़बाल पाकिस्तान-समर्थक निकले।

‘आप श्रीराम के जन्मस्थान को सही जगह बताइए, हम मस्जिद को वहाँ से शिफ्ट कर लेंगे’

धवन ने दावा किया कि बाबरी मस्जिद सुन्नी वक़्फ़ के एकाधिकार में हमेशा से रही है। 1885 के बाद पहली बार उसके बाहरी हिस्से पर मौजूद श्री राम चबूतरे को रामजन्मभूमि मानकर पूजा होने लगी। उन्होंने अपनी बात साबित करने के लिए कुछ शियाओं द्वारा हिन्दू और मुस्लिमों द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से नमाज और पूजा करने के बयान का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि अगर हिन्दू रामजन्मभूमि की सटीक जगह बता दें तो सुन्नी वक्फ बोर्ड श्री रामजन्मभूमि से मस्जिद हटा लेगा।