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SC में अयोध्या मामला: पुरातत्व विभाग पर सवाल उठाने के लिए मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने माफ़ी माँगी

2003 की पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर सवाल उठाने के लिए मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से माफ़ी माँगी है। मुस्लिम पक्ष के मुख्य वकील ने माना कि इसमें अदालत के समय की हानि हुई है, और इस दिशा में बहस को मोड़ने का कोई अर्थ नहीं था कि ASI की रिपोर्ट के हर पेज पर हस्ताक्षर क्यों नहीं है।

मीनाक्षी अरोड़ा ने उठाया था मुद्दा

मुस्लिम पक्ष की एक दूसरी वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने बुधवार (25 सितंबर) को ASI की रिपोर्ट पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि चूँकि रिपोर्ट के बाकी अध्याय (चैप्टर) पर लिखने वाले है, लेकिन अंत में साराँश को किसने लिखा, यह तय नहीं है, अतः यह इस पर सवाल खड़े करने वाला है।

वहीं आज (गुरुवार, 26 सितंबर) धवन ने कहा कि रिपोर्ट और साराँश के लेखन पर सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता। “अगर हमने मी लॉर्ड लोगों का समय बर्बाद किया तो इसके लिए हम माफ़ी चाहते हैं। इस दिशा में जाने का कोई अर्थ नहीं है।” मुख्य न्यायाधीश गोगोई के अलावा जस्टिस बोबडे, चंद्रचूड़, अशोक भूषण, और एस अब्दुल नज़ीर की पीठ के सामने धवन ने हालाँकि यह जोड़ा कि वे उस रिपोर्ट पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं छोड़ रहे हैं, बल्कि यह मान ले रहे हैं कि अगर अदालत ने उसे साक्ष्य के तौर पर स्वीकार कर लिया है तो उसकी विश्वसनीयता को चुनौती नहीं दी जा सकती।

’18 अक्टूबर के बाद एक भी अतिरिक्त दिन नहीं’

मामले की रोज़ाना सुनवाई में 32वें दिन की सुनवाई शुरू करते ही बेंच ने हिन्दू-मुस्लिम पक्षों को साफ़ बता दिया कि 18 अक्टूबर के बाद सुनवाई के लिए एक दिन भी अतिरिक्त नहीं दिया जाएगा। “अगर हम चार हफ़्ते में कोई फैसला सुना पाए तो यह अपने आप में एक चमत्कार सरीखा होगा।” जस्टिस गोगोई ने कहा। इसके बाद बेंच ने मुस्लिम पक्ष को ASI रिपोर्ट पर अपने तर्क दिन भर में समाप्त कर लेने का निर्देश दिया। पीठ ने अक्टूबर में छुट्टियों का हवाला दिया, और कहा कि 4 हिन्दू पक्षों में से केवल एक ही वकील को मुस्लिम पक्ष की दलीलों का जवाब देने की अनुमति होगी।

मध्यप्रदेश में हनी ट्रैप गैंग के निशाने पर थे 13 IAS, कई नेता, इंजिनियर, बड़े व्यापारी: SIT के हाथ लगी ‘हिट लिस्ट’

मध्यप्रदेश हनी ट्रैप कांड का भंडाफोड़ होने के बाद जाँच एजेंसियों ने इस मामले में बड़ा खुलासा किया है। जानकारी के मुताबिक मालूम चला है कि इस गिरोह के सदस्यों के पास आईएस अधिकारियों के नाम की एक टारगेट सूची थी, जिन्हें गिरोह की लड़कियों ने अपने प्रेम जाल में फँसा लिया था और अब उनकी सेक्स वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करने की तैयारी में थे। गिरोह के पास अधिकारियों के नाम कोड लिस्ट में दर्ज पाए गए हैं।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस जाँच के दौरान SIT को जो लिस्ट मिली है उसमें 13 ऐसे अधिकारियों के नाम हैं, जो अलग-अलग समय पर कृषि, संस्‍कृति, उद्योग, जल संसाधन, जन संपर्क, शहरी प्रशासन, मत्‍स्‍य पालन, श्रम, वन, और प्रशासनिक विभागों में काम कर चुके हैं। जिनके नामों को इस गिरोह के संचालक ने एक सरकारी डायरी के पन्नों पर लिखा हुआ था।

जाँच से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार इस हिट लिस्ट में शामिल अफसरों के नामों के आगे टिक का निशान लगाकर कोड भाषा में कुछ लिखा हैं। इसके अलावा इस डायरी में कुछ लोगों के नाम के आगे घेरा भी बनाया हुआ और कुछ के नाम के आगे महत्वपूर्ण एवं ओके जैसी चीजें लिखी हैं। मामले में जाँच में जुटी टीम अब फिलहाल कोड वर्ड में लिखी बातों का मतलब पता लगा रही है।

एक अधिकारी के मुताबिक, “इस जाल में फँसे अधिकारियों की पहचान वीडियो क्लिप देखकर की जा रही है और बिना उनकी वरिष्ठता एवं पद का लिहाज किए उन्हें अब कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।”

गौरतलब है कि इस कांड को देश का सबसे बड़ा ब्लैकमेलिंग सेक्स स्कैंडल कहा जा रहा है। इस मामले में जाँच में जुटी एसआईटी की टीम अब तक 4 हजार से ज्यादा फाइलें जुटा चुकी हैं और बाकी के मिलने का सिलसिला जारी है। बताया जा रहा है गिरोह के शिकंजे में कई शीर्ष नेता, आईएस अधिकारी, इंजिनियर और बड़े व्यापारी फँस चुके हैं। जिनकी सेक्स वीडियो और अश्लील चैट, ब्लैकमेलिंग के सबूत गिरोह के सदस्यों के लैपटॉप और मोबाइल से बरामद हुए हैं।

जिसके बाद सवाल उठने लगा है कि पूरी तरह से महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे इस गिरोह के पीछे और कौन लोग हैं? जो इन महिलाओं को टारगेट देते थे।

जानकारी के लिए बता दें कि इस हनी ट्रैप कांड से पूरे मध्यप्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। जाँच टीम जहाँ भी अपनी तफ्तीश कर रही है, उसे हर बार इस मामले में कुछ नया मिल रहा है। इन 13 अधिकारियों के नाम के अलावा जो खुलासा इस मामले में हुआ है कि वो ये कि इस पूरे मायाजाल में करीब 40 कार्ल गर्ल्स थीं, जिसमें कुछ हिरोइनों के नाम भी सामने आ रहे हैं।

सॉरी अम्मा – यह उस बच्ची ने लिखा, जिसका 2 साल तक लगातार रेप किया गया, वो भी माँ-बाप की सहमति से!

हाल ही में एक दिल दहला देने वाली ख़बर सामने आई थी कि केरल के मल्लपुरम ज़िले में माता-पिता की सहमति से 12 साल की बच्ची के साथ 30 लोगों ने बलात्कार किया। इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है। हैरान कर देने वाली बात यह है कि एक अबोध बच्ची के साथ महज़ 10 वर्ष की उम्र से दुष्कर्म की घिनौनी हरक़त को अंजाम दिया जा रहा था, वो भी उसके माता-पिता की रज़ामंदी से और बच्ची का दिल आज भी अपने उन्हीं बेरहम माँ-बाप के लिए धड़कता है! यही वजह है कि जब बच्ची को शेल्टर होम ले जाया जा रहा था तो उसने घर के दरवाज़े पर चॉक से लिखा, ‘सॉरी अम्मा’।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के रिपोर्टर की पीड़िता बच्ची के काउंसलर से हुई बातचीत के आधार पर पता चला है कि जिस माँ-बाप ने उस बच्ची के बचपन को दरिंदगी से भर दिया, उनके लिए उस मासूम के दिल में न कोई गिला है और न कोई शिक़वा। अगर कुछ है तो वो है आत्मग्लानि!

आत्मग्लानि इस बात की कि अगर उसके पिता को सज़ा हुई तो घर का गुज़ारा कैसे चलेगा। घर में बीमार बूढ़ी दादी है, माँ है, किराए का कमरा है, घर की आर्थिक स्थिति बेहद ख़राब। इन सबसे निपटने का एकमात्र सहारा उसके पिता हैं, अगर उसके पिता को किसी भी तरह की कोई हानि हुई तो उसका ख़ामियाज़ा घर को भुगतना पड़ेगा। उसे दु:ख है तो केवल इस बात का कि अब वो अपने परिवार की कोई आर्थिक मदद नहीं कर पा रही है।

एक 12 साल की अबोध बच्ची इस बात से बिलकुल बेख़बर है कि उसके पिता ने उसके मासूम बचपन को न सिर्फ़ ठगा है बल्कि उसके जीवन में वो ज़हर घोला है, जिसे भुला पाना असंभव है। इतने के बाद भी बच्ची का दिल पिता के साथ कोई अप्रिय घटना के नाम पर सिहर उठता है। जिस पिता ने अपनी ही मासूम बच्ची के जिस्म का सौदा एक बार नहीं कई बार किया, उस पिता की गिरफ़्तारी के नाम पर वही बच्ची ढाह भरकर रोती है, बिलखती है।

ख़बर के अनुसार, पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने बताया कि उन्हें अक्सर बच्ची के चीखने और रोने की आवाज़े आती थीं, रात भर उसके घर लोगों का आना-जाना लगा रहता था। लेकिन पारिवारिक मामला होने की वजह से किसी ने कोई दखल नहीं दिया।

ग़ौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय लोगों ने स्कूल के ‘पेरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन’ को इस बारे में बताया। क्योंकि शिक्षकों ने पाया था कि वह कई दिनों तक क्लास में अनुपस्थित रहती थी और मानसिक रूप से काफ़ी परेशान लग रही थी। तब स्कूल ने इसकी सूचना चाइल्डलाइन अथॉरिटी को दी थी। अथॉरिटी के सदस्यों ने जब लड़की से पूछताछ की, तब उसके साथ बलात्कार और यौन शोषण का मामला सामने आया।

इसके बाद पीड़िता को चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उसे चिल्ड्रन शेल्टर होम भेज दिया गया है। रविवार (सितम्बर 22, 2019) को पुलिस ने इस सम्बन्ध में मामला दर्ज किया और उसी दिन पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होकर अपना बयान दर्ज कराया। फ़िलहाल, तीनों आरोपितों को जुडिशल कस्टडी में भेजा जा चुका है।

चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के अध्यक्ष ने बताया कि इस पूरे मामले में पीड़िता का पिता ही सबसे ज्यादा दोषी है। उन्होंने बताया कि लड़की के माता-पिता ने अपनी बेटी के साथ बलात्कार करने के लिए सहमति दी। चूँकि, इस मामले में कई लोग आरोपित हैं, कमिटी ने पुलिस से बड़े स्तर पर जाँच करने की अपील की।

यह एक ऐसा दर्दभरा वाकया है, जिस पर हर उस शख़्स को शर्मसार होना चाहिए जो मासूम बच्चों के कोमल मन को अपने निजी स्वार्थ की भेंट चढ़ा देते हैं। सच पूछो तो धिक्कार है ऐसे माता-पिता पर जो सुरक्षा कवच बनने की बजाए अपने ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को निगल लेते हैं।

SC में अयोध्या विवाद: CJI बोले- 18 अक्टूबर तक पूरी करें बहस, नहीं दूँगा एक भी एक्स्ट्रा दिन

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या भूमि विवाद मामले की सुनवाई का आज (सितंबर 26, 2019) 32वाँ दिन है। राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की 32वें दिन की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि इस मामले से जुड़े सभी पक्ष 18 अक्टूबर तक अपनी दलीलें खत्म करें। इसके बाद एक दिन का भी अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों से कहा कि आज का दिन मिलाकर 18 अक्टूबर तक हमारे पास साढ़े 10 दिन हैं। उन्होंने इस मामले पर 18 अक्टूबर तक बहस पूरी करने का आदेश दिया है। सीजेई के मुताबिक अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर चार हफ्ते के अंदर कोई फैसला लेना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने आगाह करते हुए कहा कि अगर 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी नहीं होती है, तो फैसला आने की उम्मीदें कम हो जाएँगी।

बता दें कि सीजेआई रंजन गोगई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इम मामले में फैसला जल्द आएगा। इससे पहले भी चीफ जस्टिस रंजन गोगोई इस बात पर टिप्पणी कर चुके हैं कि सभी पक्षों को कोशिश करनी चाहिए कि 18 अक्टूबर तक अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी हो सके। क्योंकि इसके बाद सुप्रीम कोर्ट को एक महीने का वक्त इस मसले का फैसला लिखने के लिए चाहिए। 

दरअसल, संविधान पीठ ने हिंदू पक्षकार और मुस्लिम पक्षकार को बहस के लिए समयसीमा तय कर दी थी। कोर्ट के अनुसार, ज्यादातर दलीलें 4 अक्टूबर तक पूरी हो जाएँगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में दशहरा की छुट्टियाँ हो जाएँगी। कोर्ट 14 अक्टूबर को फिर खुलेगा। ऐसे में कोर्ट के पास सुनवाई के लिए 18 अक्टूबर तक 5 दिन और बचेंगे। 

कपिल मिश्रा ने केजरीवाल के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत, NRC पर अफवाह फैलाने का आरोप

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में कपिल मिश्रा ने सीएम केजरीवाल और AAP विधायक सौरभ भारद्वाज पर
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के बारे में झूठी अफवाह फैलाने का आरोप लगाया है। यह शिकायत भाजपा नेता कपिल मिश्रा के साथ नीलकांत बख्शी ने भी दर्ज करवाई है।

नई दिल्ली के डीसीपी को संबोधित पत्र में मिश्रा ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और AAP विधायक सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली में NRC लागू करने के संबंध में झूठे अफवाह फैलाने, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों के बारे में झूठ बोलने, उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा के नागरिकों की तुलना घुसपैठियों से करने और साथ ही साथ राज्य की शांति व्यवस्था को भंग करने की साजिश रचने के संबंध में शिकायत दर्ज कराई है।

कपिल मिश्रा द्वारा की गई शिकायत (फोटो साभार: @kapilmishra_ind)

इसमें कहा गया है कि सीएम कोजरीवाल सीधे सीधे केंद्र सरकार व सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों में जारी योजना के बारे में जानबूझ कर जनता में अविश्वास पैदा करने के साथ ही अफवाह फैला रहे हैं। इससे राज्य में कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। सीएम केजरीवाल ने अपने सहयोगी AAP विधायक सौरभ भारद्वाज के साथ कहा कि अगर NRC को दिल्ली में लागू किया जाता है, तो उत्तर प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा और बिहार के प्रवासी जो राष्ट्रीय राजधानी में काम करते हैं, उन्हें दिल्ली से बाहर निकाल दिया जाएगा।

पत्र में आगे कहा गया है कि अवैध प्रवासियों के साथ प्रवासी श्रमिकों की तुलना ने उन लोगों की भावनाओं को आहत किया है, जिन्होंने दिल्ली को अपना घर बना लिया है। दिल्ली के लोग गुस्से में हैं और ये सामाजिक शांति भंग होने का मामला बन सकता है।


कपिल मिश्रा द्वारा की गई शिकायत (फोटो साभार: @kapilmishra_ind)

उन्होंने आगे पत्र में केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह भी संभव है कि दिल्ली में अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार का घुसपैठियों की पहचान करने का जो दिशा निर्देश है, उसके रास्ते में रोड़े अटकाने की साजिश हो। उन्होंने दिल्ली पुलिस से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और विधायक सौरभ भारद्वाज के खिलाफ अफवाह फैलाने, शांति भंग करने का प्रयास करने, जानबूझकर सोशल मीडिया के माध्यम से झूठ प्रचारित करने, दिल्ली में रह रहे यूपी-बिहार के निवासियों की भावनाओं को चोट पहुँचाने, सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को लागू करने से रोकने का प्रयास करने व दिल्ली में कानून व्यवस्था का संकट पैदा करने की कोशिश करने का मामला दर्ज करने का अनुरोध किया है।

गौरतलब है कि, बुधवार (सितंबर 25, 2019) को सीएम केजरीवाल और दिल्ली के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के बीच जमकर बयानबाजी हुई। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में NRC लागू होने के बाद तिवारी को दिल्ली छोड़नी पड़ेगी। जवाब में तिवारी ने कहा कि केजरीवाल पूर्वांचल से आए लोगों को दिल्ली से भगाना चाहते हैं। मनोज तिवारी केजरीवाल को ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का समर्थक करार देते हुए कहा, “वे इतना भी नहीं जानते हैं कि एनआरसी में विदेशी घुसपैठियों को चिह्नित किया जाता है।”

वहीं, सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यूपी, राजस्थान, बिहार और ओडिशा से लोग रोजगार के लिए दिल्ली आते हैं और मनोज तिवारी ने एनआरसी वाला बयान देकर दिखाया है कि वे इन लोगों के विरोध में हैं। भारद्वाज ने कहा कि ये लोग चोर नहीं हैं, बल्कि दिल्ली के विकास में बराबर के भागीदार हैं। भारद्वाज ने कहा कि अगर एनआरसी लागू होता है तो इन लोगों को दिल्ली छोड़ कर जाना पड़ेगा।

आतंकी हाफिज सईद को रोजमर्रा के खर्चों के लिए चाहिए 1.5 लाख/महीना, UNSC तक पहुँच गया पाकिस्तान

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और आतंकी संगठन के सरगना हाफिज सईद को पाकिस्तान की गुहार पर संयुक्त राष्ट्र से राहत मिली हैं। अब खूँखार आतंकी हाफिज, पाकिस्तान के रहम से अपने रोजमर्रा के खर्चों के लिए अपने बैंक खाते का इस्तेमाल कर पाएगा।

गौरतलब है कि हाफिज को यूएन से छूट दिलाने के लिए पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी लिखी थी। जिसमें यूएनएससी से हाफिज को उसके बैंक खाते इस्तेमाल करने देने की माँग की गई थी। अब निर्धारित समय में जब इस माँग को लेकर यूएनएससी के पास कोई आपत्ति नहीं पहुँची, तो परिषद ने पाकिस्तान की गुहार सुनते हुए उसे ये अनुमति दे दी। हाफिज के अलावा ये अनुमति हाजी मुहम्मद और जफर इकबाल को भी मिली हैं। क्योंकि पाकिस्तान द्वारा लिखे पत्र में हाफिज के साथ इन दोनों का नाम भी शामिल था।

जानकारी के मुताबिक, यूएनएससी के आदेश के बाद पाकिस्तान ने हाफिज सईद के बैंक खाते फ्रीज कर दिए थे। लेकिन बाद में पाकिस्तान ने खुद गुहार लगाई थी कि वह हाफिज को उससे बैंक से करीब 1.5 लाख रुपए (पाकिस्तानी रुपए) हर महीने निकालने की अनुमति दें, ताकि हाफिज और उसके परिवार की रोजमर्रा की जरूरत पूरी हो सकें। पाकिस्तान द्वारा लिखे पत्र में हाफिज के परिवार के 4 सदस्यों का हवाला देकर बताया गया था कि उसपर सभी सदस्यों के खाना, पीना, कपडे़ जैसे अन्य खर्चों की जिम्मेदारी हैं।

उल्लेखनीय है कि हाफिज को लेकर पाकिस्तान द्वारा लिखी चिट्ठी की खबर उस समय सामने आई है जब पूरा विश्व पाकिस्तान पर आरोप लगा रहा है कि वो आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली सरजमीं बन चुकी हैं। तब हाफिज को किया गया ये खुला समर्थन इस बात का पुख्ता सबूत है कि पाक पर लगे आरोप हवा में नहीं हैं, जिन्हें मानने से वो मना करता आया है। भले ही दुनिया को इस समय दिखाया जा रहा है कि 17 जुलाई को आतंकी फंडिग के मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई और वह लाहौर के कोट लखपत जेल में हैं, लेकिन उसे सुविधा दिलाने की ये कोशिशें साफ़ करती हैं कि ये कार्रवाई केवल दिखावा मात्र है, जिसे चलते भारत पहले भी इस गिरफ्तारी को एक नाटक बता चुका है।

रॉबर्ट वाड्रा सहयोग नहीं कर रहे, हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता, मनी लॉन्ड्रिंग में उनका सीधा संबंध: ED

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार (सितंबर 26, 2019) को दिल्ली हाई कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि रॉबर्ट वाड्रा को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उनका सीधा संबंध है।

ईडी ने न्यायाधीश चंद्रशेखर के सामने कहा कि कॉन्ग्रेस प्रमुख सोनिया गाँधी के दामाद वाड्रा अपने खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

हालाँकि, वाड्रा के वकील ने ईडी के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि एजेंसी जब भी वाड्रा को बुलाती है, वह उनके सामने पेश हो जाते हैं और जाँच में भी सहयोग करते हैं।

वाड्रा के वकील के अनुसार ईडी ने अब तक उनके क्लाइंट से जो प्रश्न किए हैं, उन्होंने उन सबका उत्तर दिया है। वकील के मुताबिक अगर वाड्रा अपने ऊपर लगे इल्जामों को नहीं स्वीकार रहे तो इसका पर्याय ये नहीं है कि वह सहयोग नहीं कर रहे।

पूरी सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस मामले की अंतिम बहस के लिए 5 नवंबर की तारीख तय की है।

यहाँ बता दें कि लंदन के 12 ब्रायनस्टन स्क्वायर स्थित 17 करोड़ रुपए की सम्पत्ति की खरीदारी में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपित रॉबर्ट वाड्रा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए निचली अदालत में अग्रिम जमानत दी थी, जिसे अब प्रवर्तन निदेशालय ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

‘मध्य प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या’ – कमलनाथ सरकार में अप्रत्यक्ष तरीके से होगा मेयर का चुनाव

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने बुधवार (सितंबर 25, 2019) को कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव को मंजूरी दे दी है। एक्ट में बदलाव के बाद अब राज्य में मेयर का चुनाव सीधे तौर पर यानी प्रत्यक्ष प्रणाली से नहीं होगा, बल्कि चुनाव में जीत कर आए पार्षद ही अपने बीच से मेयर और नगर निगम के अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने इसकी जानकारी दी।

बता दें कि अब तक जनता सीधे मेयर को चुनती थी, लेकिन अब इस फैसले के बाद मेयर और नगर निगम अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के मतों पर होगा। यानी जिस राजनीतिक दल के पार्षद ज्यादा होंगे, उनका ही मेयर चुना जाएगा। सरकार के नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव के फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है।

राज्य के पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस अप्रत्यक्ष तौर पर इसलिए चुनाव कराना चाहती है, क्योंकि वह जानती है कि अगर जनता के द्वारा चुनाव किया जाएगा, तो भाजपा ही जीतेगी। उन्होंंने कॉन्ग्रेस के इस फैसले को पराजय के भय से लिया गया फैसला बताया और कहा कि महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पंचायत अध्यक्ष को सीधे पार्षदों द्वारा चुनने का जो प्रस्ताव कॉन्ग्रेस लाई है, इससे जोड़-तोड़ और खरीद-फरोख्त के उसके कुत्सित प्रयास को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस खरीद-फरोख्त और जोड़-तोड़ करके चुनाव जीतना चाहती है। शिवराज सिंह ने महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पंचायत के अध्यक्ष को भी जनता द्वारा चुने जाने (जैसा पहले से होता आया है) की माँग की है।

पार्टी की नगरीय निकाय समिति के प्रमुख पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने कहा कि भाजपा, कमलनाथ सरकार के इस फैसले का राजनीतिक रूप से विरोध करेगी। दो-तीन दिन में पार्टी इस बारे में विचार के लिए बैठक बुला रही है, जिसमें आगे की रणनीति बनाई जाएगी। भाजपा का कहना है कि कॉन्ग्रेस को अहसास था कि वो चुनाव में हार जाएगी, इसलिए उन्होंने प्रक्रिया ही बदल दी।

‘भारत हिन्दू राष्ट्र है’ कहने पर मंजूनाथ की पिटाई: एक नाबालिग समेत मोइद्दीन और अब्दुल रहीम गिरफ़्तार

कर्नाटक के मंगलुरु में एक मॉल में युवक मंजूनाथ शिनॉय को पीटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में युवक कथित तौर पर यह कहता नज़र आ रहा है कि ‘भारत एक हिन्दू राष्ट्र’ है। पुलिस ने इस मामले में मोइद्दीन सफ़वान, अब्दुल रहीम साद और एक नाबालिग के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है।

यह घटना शहर के फोरम फिज़ा मॉल की है। ऑपइंडिया ने स्थानीय पांडेश्वर पुलिस थाने में सम्पर्क कर इस पूरी घटना की जानकारी जुटाई। जानकारी के अनुसार यह घटना बुधवार सुबह की है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मॉल के फूड कोर्ट में दूसरे मजहब के युवकों का एक समूह बातचीत कर रहा था। उस समय, मंजूनाथ शेनॉय भी एक ग्राहक से मिलने के लिए मॉल में मौजूद थे और फिर वो बाद में फूड कोर्ट गए।

पुलिस ने आगे बताया कि मंजूनाथ ने उन युवकों के बीच चल रही चर्चा में की गई कुछ टिप्पणियों को सुना। इसके बाद वो प्रतिक्रियावश अपनी राय साझा करने के लिए आगे बढ़ा और कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र था। बस इसी बात पर दूसरे मजहब के युवकों का वह समूह नाराज़ हो गया और मंजूनाथ को चर्चा से दूर रहने के लिए कहा। लेकिन अचानक इनके बीच बहस छिड़ गई और मंजूनाथ पर गुस्साए छात्रों ने हमला कर दिया। घटना के बाद मंजूनाथ ने पांडेश्वर पुलिस स्टेशन में शिक़ायत दर्ज कराई थी।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो को गंभीरता से लिया गया है और घटना की जानकारी देते हुए मंगलुरु पुलिस कमिश्नर ने बताया कि तीन आरोपितों की गिरफ़्तारी हो गई है। उन्होंने जानकारी दी कि नाबालिग आरोपित पर जुवेनाइल नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि उनके पास घटना से संबंधित पुख़्ता सबूत हैं।

ग़ौरतलब है कि दक्षिण कन्नड़ ज़िला, जिसका मुख्यालय मंगलुरु में है, वो साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है, जहाँ अक्सर इस तरह की घटनाएँ होती रहती हैं। 2018 में विधानसभा चुनाव से पहले ज़िले में कई राजनीतिक हत्याएँ हुई थीं, जिनमें हिन्दू और दूसरे मजहब के लोग एक-दूसरे पर आरोप लगाए थे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर हेट स्पीच को प्रसारित करने के आरोप में एक सितंबर को शहर में एक व्यक्ति को गिरफ़्तार भी किया गया था। तब पुलिस ने ज़ाकिर उल्लाल को हिरासत में ले लिया था, जिसके मोबाइल फोन से सबूतों की बरामदगी भी हुई थी।

1.74 लाख ESIC में जबकि 86000 EPFO से जुड़े: जुलाई 2019 (सिर्फ 1 महीने) में रोजगार का आँकड़ा

देश में रोजगार नहीं है, आर्थिक मंदी से अर्थव्यवस्था का बुरा हाल है… प्रोपेगेंडा के इन सब बातों के बीच एक आँकड़ा आया है। और ऐसा कहा गया है कि आँकड़े झूठ नहीं बोलते! तो आँकड़ा यह है कि देश में जुलाई महीने में कुल 1,74,831 नई नौकरियों के मौके पैदा हुए। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के ताजा आँकड़ों में यह जानकारी दी गई है। ईएसआईसी ने ये प्रेस रिलीज 20 सितंबर 2019 को जारी किया है।

ईएसआईसी के आँकड़ों के अनुसार, जून 2019 में कुल 12,49,394 लोग रजिस्टर्ड थे। जबकि जुलाई 2019 में यह आँकड़ा बढ़कर 14,24,225 हो गया। यानी जून की अपेक्षा जुलाई में 1,74,831 नई नौकरियों के अवसर पैदा हुए।

वहीं अगर अप्रैल 2018 से जुलाई 2019 तक की बात करें, तो कुल 1.49 करोड़ लोगों ने ईएसआईसी के साथ खुद को रजिस्टर किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर 2017 से मार्च 2018 के दौरान ईएसआईसी से 83.34 लाख नए सब्सक्राइबर्स जुड़े थे।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा जारी किए गए आँकड़े

ईएसआईसी के आँकड़ों के अलावा जुलाई 2019 में ईपीएफओ के साथ 11.61 लाख नौकरीपेशा लोग रजिस्टर्ड थे। जबकि जून में यही आँकड़ा 10.75 लाख लोगों का था। मतलब कुल 86,000 नौकरीपेशा लोगों ने सिर्फ जुलाई में खुद को ईपीएफओ के साथ रजिस्टर किया।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में करोड़ों कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया था। सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए कर्मचारी राज्य बीमा निगम स्कीम में अंशदान की दर को 6.5% से घटाकर 4% कर दिया था। इसमें नियोक्ता का अंशदान 4.75 फीसदी से घटाकर 3.25 कर दिया गया था। वहीं कर्मचारियों के योगदान को 1.75 फीसदी से घटाकर 0.75 फीसदी कर दिया गया था। केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी थी।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) पर जारी आँकड़ों की पूरी लिस्टआप यहाँ पर पढ़ सकते हैं।