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‘गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग हिंदुस्तानी नागरिक, पाकिस्तान का खिलौना था अनुच्छेद-370’

पाकिस्तान के कब्ज़े वाले गुलाम कश्मीर (POK) स्थित गिलगित-बाल्टिस्तान के एक्टिविस्ट सेंगे सेरिंग ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने का समर्थन किया है। समाचार एजेंसी ANI को दिए बयान में उन्होंने साफ़ कहा कि यह पाकिस्तान में एक विशेष समूह को दूसरे सम्प्रदायों के ऊपर वीटो-पावर जैसा विशेषाधिकार देता था। यही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि इस विशेषधिकार का इस्तेमाल करने वाले पाकिस्तानी सेना के मित्र बन गए थे।

पाक के रणनीतिक हित साध रहे थे

वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) स्थित इंस्टिट्यूट फ़ॉर गिलगित-बाल्टिस्तान स्टडीज़ के निदेशक सेंगे सेरिंग के मुताबिक अनुच्छेद-370 कश्मीर के उन लोगों के हाथ का खिलौना था, जिन्हें वह प्रावधान अन्य पंथों और जातीय समूहों से इतर ‘वीटो’ देता था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इस वीटो का फायदा उठाने वाले लोग पाकिस्तानी सेना के पाले में जा बैठे और पाकिस्तान के रणनीतिक हित जम्मू-कश्मीर में पूरे कर रहे थे।

पहले भी उठाते रहे हैं हिंदुस्तानी आवाज़

सेरिंग इसके पहले भी हिंदुस्तान-समर्थक आवाज़ गुलाम कश्मीर को लेकर आवाज़ उठाते रहे हैं। इसी साल मार्च में उन्होंने साफ किया था कि गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग हिंदुस्तानी नागरिक हैं। यही नहीं, उन्होंने पाकिस्तान के ज़मीन या लोगों पर किसी भी तरह के अधिकार को नकार दिया था। साथ ही सेरिंग पाकिस्तान के साथ हिंदुस्तान के सिंधु जल समझौते को पूरी तरह तोड़ने की वकालत करते हैं।

कश्मीर पर हमारे स्टैंड में कोई बदलाव नहीं: UN ने फिर ठुकराई पाक की मध्यस्थता की अपील

कश्मीर मुद्दे को वैश्विक पटल पर उठाकर लगातार अपनी फजीहत करवाने वाले पाकिस्तान को एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र ने झटका दे दिया हैं। जिससे साफ़ हो गया है कि यूएन कश्मीर मामले पर मध्यस्ता को लेकर पाक की अपील नहीं स्वीकारेगा।

दरअसल, इस बार यूएन के महासचिव के प्रवक्ता ने अपनी ओर से जारी बयान में स्पष्ट रूप कहा है कि दोनों देशों को ये मुद्दा आपसी सहमति के साथ सुलझाना होगा। इस मुद्दे पर मध्यस्ता को लेकर उनके स्टैंड में कोई बदलाव नहीं होगा।

यूएन के सेक्रेटरी जनरल के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया, “मध्यस्थता पर हमारा स्टैंड पहले जैसा ही है, उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। महासचिव ने दोनों देशों की सरकार से संपर्क किया है। जी-7 की बैठक में भारत के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर इस पर चर्चा की और पाकिस्तान के विदेश मंत्री से इस पर बात हुई है।”

मीडिया खबरों की मानें तो यूएन ने बार-बार पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दे को उछालने पर कहा है कि दोनो देशों को शांतिपूर्ण तरीके से इस मामले का समाधान ढूँढना होगा। इसपर उनकी ओर से मध्यस्ता का अभी कोई विचार नहीं हैं।

हालाँकि, भारत शुरुआती समय से ही कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बताता आया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप के आगे भी इस बात को विनम्रता से बता चुके हैं कि ये दो देशों का मामला है और वह इसमें किसी और देश को परेशान नहीं करना चाहते। लेकिन, 5 अगस्त के बाद से पाकिस्तान लगातार इस मामले में तीसरे पक्ष को दखल देने के लिए गुहार लगा रहा है और अलग-अलग मौक़ो पर सभी देशों से इसपर आवाज उठाने की माँग कर रहा हैं।

कॉन्ग्रेस की साड़ियॉं लेकर जा रहे वाहन ने मारी टक्कर, वोटरों के बीच बॉंटा जाना था

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा उपचुनाव में प्रचार अभियान के साथ ही मतदाताओं को लुभाने के हथकंडे भी जारी हैं। मंगलवार (सितंबर 10, 2019) देर शाम पुलिस ने साड़ियों से भरे एक वाहन को पकड़ा है। आरोप है कि उक्त साड़ियाँ वोटरों के बीच बाँटने के लिए कॉन्ग्रेस ने भिजवाई थी। घटना कुआकोण्डा थाना क्षेत्र की है।

जानकारी के मुताबिक, कॉन्ग्रेस कार्यालय से साड़ियों का बंडल लादकर गाड़ी रवाना हुई थी। इसी दौरान गाड़ी ने एक बाइक सवार को ठोकर मार दी। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और पिकअप वाहन के चालक से पूछताछ की।

जानकारी के मुताबिक, कुआकोण्डा थाना क्षेत्र में साड़ी से भरे वाहन क्रमांक सीजी 18 एन 2879 को पकड़ा गया। वाहन में चालक के साथ रेंगनार निवासी मासा मौजूद था। पूछताछ के दौरान मासा ने सारी सच्चाई उगल दी और साड़ियों का बंडल कॉन्ग्रेस कार्यालय से लाने की बात स्वीकार कर ली। उसने बताया कि वह कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता है और यह साड़ियाँ वो रेंगनार गाँव में बाँटने ले जा रहा था।

बता दें कि, उपचुनाव को लेकर पुलिस द्वारा जिलेभर में वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है। इसके बावजूद साड़ियों से भरी गाड़ी मुख्यालय से पार होने की घटना ने पुलिस की मुस्तैदी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, वाहन चालक द्वारा दी गई जानकारी के बाद कुआकोण्डा पुलिस विस्तृत जाँच में जुट गई है।

दंतेवाड़ा में इस महीने की 23 तारीख को वोट डाले जाएँगे। बीते साल इस सीट से भाजपा के भीमा मंडावी ने जीत दर्ज की थी। उनके निधन के कारण यहॉं उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने मंडावी की पत्नी ओजस्वी मंडावी को मैदान में उतारा है तो कॉन्ग्रेस की ओर से देवती कर्मा चुनाव लड़ रही हैं।

‘कश्मीरी पोर्न स्टार’ के साथ लगाई शेहला रशीद की फोटो, दिल्ली पुलिस से अरेस्ट करने की गुहार

सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति ने जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक ट्वीट किया। इस ट्वीट के बाद शेहला भड़क गईं और उन्होंने दिल्ली पुलिस से इसकी शिकायत की। आपत्तिजनक ट्वीट में शेहला रशीद को लीजेंडरी पोर्न स्टार जॉनी सिन्स के साथ दिखाया गया है। बता दें कि ये तस्वीर फोटोशॉप्ड है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है।

इस एडिटेड तस्वीर में देखा जा सकता है कि पोर्न स्टार जॉनी सिन्स किसी लड़की की छाती पर स्टेथोस्कोप लगा कर ‘मेडिकल चेक-अप’ कर रहे हैं। उस लड़की के चेहरे की जगह शेहला रशीद का चेहरा लगा दिया गया है। इस ट्वीट के साथ लिखा हुआ है- “शेहला रशीद की हुई तबीयत ख़राब। एस्कॉर्ट के डॉक्टर जॉनी करेंगे इलाज।” ट्वीट में शेहला के लिए प्रार्थना करने की भी अपील की गई है।

इस ट्वीट में लिखा गया है कि प्रत्येक रीट्वीट पर शेहला के इलाज के लिए एक डॉलर दिया जाएगा। साथ ही इसमें
जॉनी सिन्स की पहचान ‘अमेरिका के डॉक्टर जनार्दन सिन्हा’ के रूप में दी गई है। साथ ही ‘जनार्दन सिन्हा उर्फ़
जॉनी सिन्स’ को अमेरिका का मशहूर आँखों का डॉक्टर भी बताया गया है। ट्वीट के अनुसार, शेहला पैलेट गन्स का शिकार बनी हैं और इसलिए उनका इलाज किया जाएगा।

शेहला रशीद ने इस आपत्तिनजक ट्वीट के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस को टैग कर कार्रवाई की माँग की। शेहला रशीद ने कहा कि उनके चेहरे के साथ छेड़छाड़ कर उसे एक अश्लील तस्वीर में लगा दिया गया है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने दिल्ली पुलिस ने माँग करते हुए कहा कि ऐसा करने वाले ट्विटर यूजर पर कार्रवाई की जाए।

शेहला रशीद ने दावा किया कि उक्त व्यक्ति को केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ट्विटर पर फॉलो करते हैं। उन्होंने इसे शर्मिंदगी भरा वाकया करार दिया। इससे पहले पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक अब्दुल बासित ने जॉनी सिन्स को जम्मू-कश्मीर में ‘भारतीय सेना द्वारा प्रताड़ित व्यक्ति’ समझ लिया था, जिसका ख़ुद जॉनी सिन्स ने खंडन किया और बासित का जम कर मज़ाक बना।

22 की उम्र, ₹108 करोड़ संपत्ति: कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार की बेटी ऐश्वर्या से ED करेगी पूछताछ

कर्नाटक कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेता डीके शिवकुमार के बाद अब मनी लॉन्ड्रिंग की आँच उनकी बेटी तक भी पहुँच गई है। डीके शिवकुमार को ईडी पहले ही गिरफ़्तार कर चुकी है। वह 13 सितम्बर तक ईडी की हिरासत में रहेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि डीके शिवकुमार ने अपनी बेटी ऐश्वर्या शिवकुमार के नाम से विभिन्न कंपनियों में भारी रक़म निवेश किया है। ऐश्वर्या की उम्र तो मात्र 22 साल है लेकिन उनके नाम पर 108 करोड़ रुपए से भी अधिक की संपत्ति है।

अगर 2018 के चुनावी शपथपत्र की बात करें तो डीके शिवकुमार ने 618 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की थी। ऐश्वर्या को कैफे कॉफी डे से 20 करोड़ रुपए क़र्ज़ मिलने की बात भी समाने आई है। कैफे कॉफी डे के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ कॉन्ग्रेस की सरकार के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके एसएम कृष्णा के दामाद थे। सिद्धार्थ ने कुछ दिनों पहले आत्महत्या कर ली थी। डीके शिवकुमार ने किसी बिजनेस करार के लिए 2017 में सिंगापुर की भी यात्रा की थी।

प्रवर्तन निदेशालय ने शिवकुमार की बेटी ऐश्वर्या को नोटिस भेजा है। डीके शिवकुमार अक्टूबर 1990 में ही पहली बार मंत्री बन गए थे और वह कर्नाटक की 4 अलग-अलग सरकारों में मंत्री रह चुके हैं। ईडी ने उनकी बेटी ऐश्वर्या को गुरुवार (सितम्बर 12, 2019) को पूछताछ के लिए बुलाया है। इस दौरान सिंगापुर ट्रिप से लेकर विभिन्न डाक्यूमेंट्स उनके सामने रखे जाएँगे और ईडी ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ के तहत उनसे पूछताछ करेगी। ऐश्वर्या ईडी के सामने पेश होने के लिए दिल्ली निकल गई हैं।

टैक्स धोखाधड़ी और हवाला डीलिंग मामले में शिवकुमार के ख़िलाफ़ इनकम टैक्स विभाग ने मामला दर्ज किया था। शिवकुमार नोटबंदी के बाद से ही सरकारी एजेंसियों के राडार पर थे। अगस्त 2017 में उनके घर से 8.59 करोड़ रुपए कैश जब्त किया गया था। इसके बाद उनके ख़िलाफ़ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

मुस्लिमों को पीरियड के हिसाब से निकाह की आजादी चाहिए, फिर कैसे लागू होगी समान नागरिक संहिता?

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड को चर्चा में ला दिया है। अदालत ने शाहबानो मामले में अपने फैसले का हवाला देते हुए इस दिशा में कोई पहल नहीं होने पर नाराजगी भी जताई है।

पर सोचिए, जब धर्म के नाम पर एक कौम 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी को भी जायज ठहराए, समय-समय पर इसके पक्ष में अदालत पहुॅंच जाए, जब उस कौम के प्रतिनिधि अच्छी पहल को भी अपने धर्म में दखल और हिंदुओं का कानून थोपने के आरोप लगाए तो समान नागरिक संहिता लागू करना कितना मुश्किल हो जाता है।

हाल ही में 16 साल की एक मुस्लिम लड़की ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा है कि मुस्लिम कानून के अनुसार, एक बार जब लड़की यौवन की आयु प्राप्त कर लेती है, अर्थात 15 साल की हो जाती है तो वह अपने जीवन के फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है और वह अपनी पसंद से किसी से भी शादी करने के लिए आजाद है।

उत्तर प्रदेश की इस नाबालिग लड़की की शादी को हाई कोर्ट ने शून्य करार देते हुए उसे शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया था। लेकिन लड़की का कहना है कि मुस्लिम कानून के हिसाब से उसका निकाह वैध है, क्योंकि वह प्यूबर्टी (रजस्वला) की उम्र पा चुकी है।

माहवारी क्या है, इसका निकाह से कैसा रिश्ता?

माहवारी महिलाओं के शरीर में होने वाली एक सामान्य वैज्ञानिक क्रिया है। किशोरवय से शुरू होकर अमूमन अधेड़ावस्था तक यह मासिक प्रक्रिया चलती है। विज्ञान के नजरिए से देखें तो पीरियड गर्भाशय की आंतरिक सतह एंडोमेट्रियम के टूटने से होने वाला रक्त स्राव है। गर्भधारण और शरीर में हार्मोन नियंत्रण के लिए इस प्रक्रिया का सामान्य होना आवश्यक है।

अमूमन माहवारी 15 साल की उम्र में शुरू हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्ययन बताते हैं कि 20 साल की उम्र से पहले शादी और मॉं बनने का महिलाओं के आगे के जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

पीरियड आते ही निकाह कैसे जायज?

दकियानूसी सोच, कठमुल्लों के दबाव और मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट 1937 की वजह से यह स्थिति है। यूनिसेफ के आँकड़े बताते हैं कि भारत में 27 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल और 7 फीसदी की 15 साल की उम्र से पहले हो जाती है। इसमें एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम समुदाय का है।

पीसीएमए 2006 से मुस्लिम बाहर हैं?

जवाब हाँ भी है और ना भी है। कानूनी स्थिति बेहद स्पष्ट नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2012 में एक 15 साल की लड़की की अपनी मर्जी से शादी को वैलिड मानते हुए कहा था कि इस्लामिक कानून के मुताबिक लड़की मासिक धर्म शुरू होने के बाद अपनी इच्छा के मुताबिक शादी कर सकती है। गुजरात हाई कोर्ट ने 2015 में कहा था कि बाल विवाह निषेध कानून (पीसीएमए) 2006 के दायरे में मुस्लिम भी आते हैं। अक्टूबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एमबी लोकुर और दीपक गुप्ता ने मुस्लिमों के अलग विवाह कानून को पीसीएमए के साथ मजाक बताया था। सितंबर 2018 में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय पर यह कानून लागू नहीं होता। अदालत का कहना था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ स्पेशल एक्ट है, जबकि पीसीएमए एक सामान्य एक्ट है।

ब्याह की उम्र कितनी, बहस पुरानी

शादी की न्यूनतम उम्र कितनी हो इस पर भारत में अरसे से बहस चल रही है। अंग्रेजी राज में इस संबंध में पहली बार कानून बना। बाद में कई बार बदलाव हुए। लेकिन, मुस्लिम बदलाव से अछूते रहे।

1860 के इंडियन पीनल कोड में शादी की उम्र का कोई जिक्र नहीं था, लेकिन 10 साल से कम उम्र की लड़की के साथ शारीरिक संबंध को गैरकानूनी बताया गया था। फिर धर्म के आधार पर शादी की उम्र को लेकर कानून आए। इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872 में लड़के की न्यूनतम उम्र 16 साल और लड़की की न्यूनतम उम्र 13 साल तय की गई। 1875 में आए मेजोरिटी एक्ट में पहली बार बालिग होने की उम्र 18 साल तय की गई। इसमें शादी की न्यूनतम उम्र का तो कोई जिक्र नहीं था, लेकिन लड़के और लड़की दोनों के बालिग होने की उम्र 18 साल मानी गई।

1927 में ‘एज ऑफ कंसेट बिल’ लाकर 12 साल से कम उम्र की लड़की की शादी को प्रतिबंधित किया गया। 1929 में पहली बार शादी की उम्र को लेकर कानून बना। बाल विवाह निरोधक कानून 1929 के अनुसार शादी के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 18 साल और लड़की की न्यूनतम आयु 16 साल तय की गई।

1955 में हिंदू मैरिज एक्ट बना जो हिंदुओं के साथ जैन, बौद्ध और सिखों पर भी लागू था। इसके मुताबिक शादी के लिए लड़के की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़की की 15 साल रखी गई। पारसी मैरिज एक्ट में भी लड़के की उम्र 18 और लड़की की उम्र 15 साल रखी गई।

1978 में बाल विवाह कानून में संशोधन किया गया। इसमें लड़के की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल कर दी गई। 2012 में सिखों के लिए अलग से आनंद मैरिज बिल लागू किया गया।

1929 के बाल विवाह निषेध अधिनियम को निरस्त कर केंद्र सरकार बाल विवाह निषेध कानून 2006 लेकर आई। नवंबर 2007 से यह कानून लागू किया गया। यह कानून सभी धर्मों पर लागू होता है। लेकिन, मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट 1937 की वजह से यह पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पा रहा।

तुष्टिकरण नीति से कठमुल्लों की बल्ले-बल्ले

1929 के कानून का मुस्लिमों ने विरोध किया। अंग्रेजों ने भारत में सांप्रदायिकता की लकीर खींचने के लिए, जो बाद में देश के विभाजन की वजह बनी, उनकी मॉंग मान ली। मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट 1937 अमल में आया। इसके मुताबिक मुस्लिम लड़कियों की शादी की कोई न्यूनतम उम्र नहीं होगी। मासिक धर्म शुरू होने की उम्र पर पहुॅंचने के बाद मुस्लिम लड़कियों की इच्छा के मुताबिक किसी भी उम्र पर शादी की जा सकेगी।

क्या है शून्य विवाह?

कानूनी तौर पर देश में शादी के तीन प्रकार माने जाते हैं। पहला, शून्य विवाह या वॉइड मैरिज। यानी ऐसी परिस्थिति है जिसमें हुई शादी का कोई कानूनी आधार नहीं होता। बाल विवाह इसी के दायरे में आता है। दूसरा, मान्य विवाह या वैलिड मैरिज। यानी शादी कानूनी कायदों के हिसाब से हुई है। तीसरा, अमान्यकरणीय विवाह या वॉइडेबल मैरिज। यानी विवाह कानूनी तौर पर वॉइड मैरिज हो, लेकिन परिस्थितियों के आधार पर कोर्ट इसे शून्य विवाह या मान्य विवाह करार देता है।

शादी की उम्र हो एकसमान

हाल में दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सभी धर्मों में शादी की उम्र को लड़के और लड़कियों के लिए एक समान न्यूनतम 21 साल करने की माँग की गई है। इस पर सुनवाई 30 अक्टूबर को होनी है। बीते साल लॉ कमीशन ने भी शादी की उम्र लड़के-लड़कियों के लिए समान करने की सलाह दी थी। कमीशन ने कहा था कि शादी की उम्र में अंतर रखना रूढ़िवाद को बढ़ावा देता है और इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

हादिया मामले का हवाला देकर 16 साल की मुस्लिम लड़की ने ठहराया अपना निकाह जायज, SC करेगा विचार

साल 2018 में हादिया और शफीन जहाँ के मामले में शरिया के प्रावधान को मान्य करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक फैसला लिया गया था, जिसका लब्बो-लुआब था कि अगर एक मुस्लिम लड़की के पीरियड शुरू हो चुके हैं तो उसके निकाह को वैध माना जाएगा।

ऐसे में अब एक साल बाद खबर है कि यूपी की एक 16 साल की लड़की ने कोर्ट के इस फैसले का हवाले देते हुए अपने निकाह को मान्य देने की गुहार लगाई है। जिसके लिए उसने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर किया है। उसने ये याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के ख़िलाफ़ दाखिल की है। जहाँ लड़की की शादी को शून्य करार देकर उसे शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया गया था।

लड़की ने अपनी याचिका में कहा है कि वह शादीशुदा है और उसने मुस्लिम कानून के हिसाब से निकाह किया है, वह अपने सयानेपन की उम्र भी प्राप्त कर चुकी है, इसलिए उसे अब अपना शादीशुदा जीवन बसर करने की इजाजत दी जाए।

पूरा मामला यूपी के अयोध्या का है। जहाँ से इस मुस्लिम लड़की ने वकील दुष्यंत पराशर के माध्यम से SC में याचिका दाखिल की है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच ने इस पर सुनवाई करने के लिए सहमति देते हुए सरकार को नोटिस जारी करके दो हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा है।

बता दें कि लड़की की उम्र चूँकि फिलहाल 16 साल है, इसलिए अयोध्या की एक निचली अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान उसे शेल्टर होम भेजने की बात कही गई थी। लेकिन लड़की ने निचली अदालत के इस फैसले को इलाहाबाद कोर्ट में चुनौती दे दी। बाद में, इलाहाबाद हाइकोर्ट ने भी इस मामले पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को भारतीय कानून के अनुसार नाबालिग करार देते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया था और निकाह को शून्य करार दे दिया।

जिसके बाद लड़की ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और कहा कि उसके निकाह के मामले में इलाहाबाद कोर्ट इस चीज पर गौर नहीं कर पाया कि उसका निकाह मुस्लिम कानून के अनुसार हुआ हैं। उसे अपने जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा का अनुरोध करते हुए दलील दी कि वह एक युवक से प्रेम करती है (जिसकी उम्र 24 साल है) और इस साल जून में मुस्लिम कानून के अनुसार उनका निकाह हो चुका हैं। लड़के का नाम जावेद हैं।

लड़की का केस दायर करने वाले वकील की मानें तो उन्होंने शफीन जहाँ के मामले में लिए गए कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि एक औरत को अपना जीवन साथी चुनने का अधिकार हैं। लेकिन लड़की का पिता इस मामले में दखलअंदाजी करके लड़की से उसके जीने का अधिकार और उसके जीवनसाथी को चुनने का अधिकार छीन रहा हैं, जबकि लड़की अपने यौवन की आयु को प्राप्त कर चुकी हैं और निकाहनामा के जरिए उसकी शादी भी हो चुकी हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि जून में लड़की की शादी के बाद लड़की के पिता ने पुलिस में युवक के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसकी बेटी का अपहरण कर लिया गया है। लेकिन, मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए बयान में लड़की ने कहा था कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है और वह उसके साथ रहना चाहती हैं। इसके बाद ही 24 जून को इस मामले के मद्देनजर बहराइच की निचली अदालत ने भारतीय कानून का हवाला देते हुए कहा था कि लड़की की उम्र 18 साल से कम होने की वजह से ये शादी मान्य नहीं हैं और चूँकि, लड़की अपने माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती है, इसलिए उसे आश्रय घर भेजा जाता है।

उन्नाव रेप मामला: AIIMS में लगी अदालत, कैमरे पर होगा पीड़िता का बयान

उन्नाव गैंगरेप की पीड़िता का बयान लेने के लिए AIIMS में विशेष अदालत लगा कर कार्रवाई शुरू हो गई है। बुधवार (11 सितंबर, 2019) को लगी इस अदालत का मकसद एम्स में ज़िंदगी-मौत से जूझ रही पीड़िता का विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ बयान दर्ज करना है। इसके लिए AIIMS में विशेष अदालत लगाने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट से ली गई थी

नाबालिग के साथ बलात्कार, बाद में पिता की हत्या और गैंगरेप का आरोप

अपने साथ 2017 में बलात्कार और बाद में सामूहिक बलात्कार का आरोप पीड़िता ने विधायक कुलदीप सेंगर पर लगाया था। साथ ही आरोप लगाया था कि उसके पिता को पहले झूठे आर्म्स एक्ट मामले में हिरासत में ले लिया गया, और बाद में हिरासत में पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी गई। उपरोक्त मामलों में सीबीआई जाँच के बाद कुलदीप सेंगर पर दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 120B, गैंगरेप के अतिरिक्त पीड़िता के पिता को झूठे आर्म्स एक्ट मुकदमे में फँसाने को लेकर आरोप तय कर दिए थे

28 जुलाई को 19-वर्षीया पीड़िता, उसके वकील और अन्य रिश्तेदारों की कार उलटी दिशा से तेज़ गति में आ रहे ट्रक से भिड़ गई थी। इसमें उसकी दो महिला रिश्तेदारों की मौत हो गई, और उसके वकील की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। उसकी माँ ने कुछ ही दिन पहले अदालत में सेंगर और अन्य आरोपितों की शिनाख्त की है

पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसे की जाँच सीबीआई के हाथों में है, जिसे जस्टिस दीपक गुप्ता के नेतृत्व वाली बेंच से पिछले हफ्ते ही मामले की तफ्तीश पूरी करने के लिए दो हफ्ते की अतिरिक्त मोहलत मिली है। 19 अगस्त को एजेंसी को पहले भी दो हफ्ते का समय-सीमा विस्तार दिया गया था।

सेंगर को लाया गया, पब्लिक, प्रेस को अनुमति नहीं

कानूनी खबरों के पोर्टल LiveLaw.in के मुताबिक इस कार्रवाई में पब्लिक या प्रेस को आने की अनुमति नहीं है। सेंगर को सह-अभियुक्त शशि सिंह के साथ अस्थायी अदालत में पेश किया गया। इसके लिए दोनों को एम्स के जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में लाया गया, जहाँ पीड़िता 28 जुलाई से भर्ती है। इस अस्थायी कोर्ट के लिए दिल्ली हाई कोर्ट प्रशासन ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि विशेष जज धर्मेश शर्मा की अदालत पीड़िता का बयान रिकॉर्ड करेगी।

POK के जलसे में आतंकी आकाओं को खुश करने के लिए ख़ुद मुजरा करेंगे इमरान खान: सूत्र

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने जलसे का ऐलान किया है। यह जलसा पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में होगा। इससे पहले उन्होंने पूरे पाकिस्तान से कुछ देर मौन खड़े होकर जम्मू-कश्मीर के प्रति समर्थन दर्शाने का आह्वान किया था। बस और ट्रेनें रोक दी गई थीं। लेकिन, फ्लाइट्स वगैरह नहीं रोके गए थे। वो तो अच्छा हुआ कि अच्छी पत्नी मिलने से 40 जीबी डेटा बचाने का दावा करने वाले पाकिस्तान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी की नहीं चली वरना उन्होंने 5 मिनट तक फ्लाइट्स को भी हवा में रोक कर कश्मीर के प्रति कथित समर्थन दर्शाने का आदेश दे दिया होता।

खैर, इमरान ख़ान ने जलसे का ऐलान तो कर दिया लेकिन यह नहीं बताया कि उस जलसे में होगा क्या? वह शुक्रवार (सितम्बर 13, 2019) को मुजफ्फराबाद पहुँचेंगे। ट्वीटू सुल्तान ने यह नहीं बताया कि जलसे में क्या-क्या चीजों की व्यवस्था रहेगी। हालाँकि, ऑपइंडिया के गुप्त सूत्रों को इस बारे में कुछ नई जानकारियाँ मिली हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि जलसे में शामिल होने वाले लोगों से कुछ रुपए दान में माँगे जाएँगे और यह बात पहले नहीं बताई जाएगी क्योंकि लोगों ने कहीं आने से इनकार कर दिया तो?

पाकिस्तान की लगातार गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए इमरान ख़ान ने अपने दफ्तर को ही ‘निकाह भवन’ में बदल दिया। आख़िर यह बात लोगों के समझ से परे है कि इमरान को शादियाँ और जलसे इतने पसंद क्यों हैं? हालाँकि, श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने पहले ही पाकिस्तान आने से मना कर दिया है। पीसीबी को जो भी थोड़े-बहुत कमाई की आस जगी थी, वो उम्मीदें भी अब धूमिल हो चुकी हैं। जलसे के लिए इमरान को किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो नृत्य के कई विधाओं में पारंगत हो।

अब विभिन्न नृत्य शैलियों के लिए अलग-अलग लोगों को बुलाने से अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ते, इसीलिए इमरान ने कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रवक्ता संजय झा को कॉल किया, जो नृत्य की तीन विधाओं- बेली डांस, बैलेट डांस और कत्थक डांस में एक साथ समान रूप से पारंगत माने जाते रहे हैं। हालाँकि, झा से उन्हें निराशा हाथ लगी क्योंकि कॉन्ग्रेस पार्टी इमरान से जलती है। यह जलन इस बात को लेकर है कि वो जोक्स और मीम्स के मामले में राहुल गाँधी को भी पीछे छोड़ रहे हाँ और कॉन्ग्रेस नेतागण राहुल के प्रतिद्वंद्वी को कभी एंटरटेन कर ही नहीं सकते।

इमरान ख़ान के कई मंत्री ख़ुद मुजरा करने में सिद्धहस्त हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से वे ऐसा करने से बचते रहे हैं। अगर पाकिस्तान की विकास दर थोड़ी और गिरती है तो इस विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। अब पीओके के जलसे में स्थानीय लोग तो आने से रहे क्योंकि वहाँ के सामाजिक कार्यकर्ता पाकिस्तान सरकार के दोहरे रवैये को उजागर करने में लगे हैं। पाकिस्तान के आतंकी आकाओं ने भी साफ़-साफ़ कह दिया था कि उनके लिए एक सार्वजनिक मनोरंजन कार्यक्रम का आयोजन होना चाहिए। अब ये काम करने का तरीका कैसा हो?

ऐसे किसी भी कार्यक्रम पर विश्व समुदाय की नज़र पड़ेगी, इसीलिए पाकिस्तान ने इसे कश्मीर का मुखौटा पहना दिया। वैसे सही भी है जब भारत में जगह-जगह ‘इन्वेस्टर्स समिट’ हो रहे हैं, पाकिस्तान के ‘भटके हुए नौजवानों’ के लिए भी मनोरंजन का कोई न कोई इंतजाम तो होना ही होना चाहिए। बस इमरान को इस बात का डर है कि कहीं किसी भी कलाकार का इंतजाम नहीं हुआ तो पाकिस्तानी फ़ौज और आतंकी संगठनों के आका उन्हें ही न नचा बैठें!

‘भारत विरोधी लोगों के इशारे पर काम कर रहा अमेरिकी मीडिया, कश्मीर पर दिखा रहा एकतरफा तस्वीर’

कश्मीर पर एकतरफा रिपोर्टिंग को लेकर अमेरिकी मीडिया को भारत ने फटकार लगाई है। अमेरिका में भारतीय राजदूत हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा है कि अमेरिकी मीडिया का एक तबका जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से ही एकतरफा रिपोर्टिंग कर रहा है। ऐसा उन पक्षों के कहने पर किया जा रहा है, जो भारतीय हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।

श्रृंगला ने कहा कि भारत ने पिछले महीने जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को समाप्त करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का फैसला वहाँ के लोगों की भलाई के लिए लिया है।

भारतीय राजनयिक ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह एक अराजकतावादी प्रावधान था, जिससे अर्थव्यवस्था का दम घुट रहा था और पाकिस्तानी आतंकवाद को बढ़ावा मिल रहा था। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश अमेरिका में मीडिया के एक तबके ने अपने कारणों से इस पक्ष को सामने नहीं लाने का विकल्प चुना है। जबकि यह बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वे तस्वीर के उस पहलू पर फोकस कर रहे हैं जिसे उन पक्षों द्वारा आगे बढ़ाया गया है जो देश के हितों से बैर रखते हैं।

श्रृंगला ने कहा कि उन्होंने और भारतीय दूतावास ने भारत के बारे में तथ्यात्मक स्थिति को लेकर कॉन्ग्रेस सदस्यों, सीनेटरों और थिंक टैंक से संपर्क कायम करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है। हर्षवर्धन श्रृंगला का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से वहाँ का माहौल बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के लोगों को अपने अधिकारों को हासिल करने में मदद मिलेगी जिससे वे दशकों से वंचित थे। भारतीय राजदूत ने कहा कि वो लोगों को इस वास्तविकता से रूबरू करवाने की कोशिश कर रहे हैं।

गौरतलब है कि, हाल ही में कश्मीरी पंडितों ने जम्मू-कश्मीर में हुए घटनाक्रमों की एकतरफा खबरें प्रकाशित करने के खिलाफ अमेरिका में ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ के कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने अखबार पर पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाते हुए कहा था, “वाशिंगटन पोस्ट मीडिया की खबरों में कहीं यह जिक्र नहीं है कि इस अराजक राज्य में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ सबसे जघन्य नरसंहार हुआ जिससे उन्हें निर्वासित होना पड़ा।”