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₹25000 का चालान कटते ही शराबी युवक ने बाइक में लगा दी आग, देखें वीडियो

देश में नया मोटर व्हीकल एक्ट-2019 लागू होने के बाद से ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर भारी भरकम जुर्माना लगाया जा रहा है। एक के बाद एक कई गाड़ियों के चालान उनकी कीमत से भी ज्यादा के काटे जा चुके हैं। पुलिस की सख्ती से लोगों में काफी डर भी बना हुआ है। चालान से बचने के लिए कोई अपने दो पहिया वाहनों को पैदल सड़क पर लेकर चलता दिखाई दे रहा है तो कोई पुलिस वालों से मिन्नतें करता दिख रहा है। इन सबके बीच एक चालान कटाने के बाद एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर थानाक्षेत्र के शेख सराय-1 में शराब के नशे में धुत युवक का यातायात पुलिसकर्मी ने चालान काटा तो युवक ने अपनी ही बाइक में आग लगा दी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एडिशनल डीसीपी साउथ परविंदर कुमार ने कहा कि बृहस्पतिवार शाम ट्रैफिक पुलिसकर्मी शेख सराय-1 में त्रिवेणी कांप्लेक्स के पास चेकिंग कर रहे थे। तभी एक बाइक सवार बिना हेलमेट के आता दिखा, उसे फ़ौरन रुकने का इशारा किया गया। रोकने पर पता चला कि बाइक सवार राकेश ने शराब पी रखी है।

यातायात पुलिसकर्मी ने उससे जब बाइक के दस्तावेज दिखाने को कहा तो वह कोई दस्तावेज नहीं दिखा सका। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने उसका चालान काटते हुए बाइक जब्त कर ली। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शराब पीने समेत अन्य नियमों के उल्लंघन के चलते कुल 25000 हजार रुपए का चालान काटा गया था।

भारी भरकम चालान देखकर, युवक ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से भीड़ गया। वह गुस्से बोला, पुरानी बाइक इसकी कीमत ही 15 हजार रुपए बची है। इसे छुड़ाने के लिए 25000 जुर्माना क्यों दूँ। यह कहते हुए आरोपित राकेश ने जब्त की गई बाइक में आग लगा दी।

फिलहाल, पुलिस ने राकेश के खिलाफ आईपीसी की धारा-453 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक राकेश ने वाहन चेकिंग के दौरान शराब पी रखी थी। राकेश का मेडिकल कराने के बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया गया है।

वैसे यह पहली घटना नहीं है, बता दें कि नया मोटर व्हीकल एक्ट-2019 लागू होने के बाद दिल्ली में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं। इससे पहले गुरुग्राम में 15 हजार की स्कूटी का 23000 रुपए का चालान कर दिया गया था। जिस पर कई मीम्स की बाढ़ आ गई थी और सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया था।



अगर आप भी ट्रैफिक नियमों के पालन में कोताही बरतने वाले हों या लापरवाही आदत रही हो तो एक बार नियमों में बदलाव और नए एक्ट के लागू होने के बाद क्या परिवर्तन हुआ है उसे ठीक से जान लें। कहीं अगली बार आप ही चपेटें में न आ जाएँ।

नया मोटर व्हीकल एक्ट-2019 की कुछ खास बातें

  • बिना ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने पर अब 5000 रुपए का चालान, पहले सिर्फ 500 रूपए था।
  •  अगर कोई नाबालिग वाहन चलाता है तो अब 500 रुपए की जगह 10000 रुपए का चालान कटेगा। इसके साथ ही वाहन से किसी भी ट्रैफिक नियम को तोड़ने पर वाहन मालिक के खिलाफ केस चलाने का प्रावधान है।
  • नए नियमों के मुताबिक शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 6 महीने तक की कैद या 10000 रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। अगर दूसरी बार ऐसा किया तो 2 साल तक की कैद या 15000 रुपए का जुर्माना किया जा सकता है।
  • अगर गाड़ी तेज चलाई तो ओवरस्पीडिंग पर 1000 रुपए से 2000 रुपए तक का चालान काटा जाएगा। एलएमवी के लिए जुर्माना 400 से बढ़ाकर 1000 रुपए और मीडियम पैसेंजर व्हीकल के लिए 2000 रुपए किया गया है।
  • बिना सीट बेल्ट गाड़ी चलाने पर 100 रुपए की जगह 1000 रुपए का चालान कटेगा।
  • मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग करने पर 1000 रुपए की जगह 5000 रुपए तक जुर्माना लगेगा।
  • सड़क नियमों को तोड़ने पर 100 रुपए की जगह 500 रुपए का चालान कर दिया गया है।
  •  दो पहिया वाहन पर ओवरलोडिंग करने पर 100 रुपए की जगह 2000 रुपए का चालान और 3 साल के लिए लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान है।
  •  बिना इंश्योरेंस के ड्राइविंग पर 1000 रुपए की जगह 2 हजार रुपए का चालान कटेगा।
  • इमरजेंसी व्हीकल को रास्ता न देने पर 1000 रुपए का चालान कटेगा और ओवरसाइज्ड व्हीकल पर 5000 रुपए का चालान कटेगा।

उन्नाव रेप मामला: AIIMS में अदालत लगा लिया जा सकता है पीड़िता का बयान, ट्रायल की समयसीमा बढ़ी

उन्नाव मामले में एक महत्वपूर्ण प्रगति के तहत सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय को अधिकार दिया है कि वह पीड़िता की गंभीर हालत को ध्यान में रखकर उसका बयान लेने के लिए AIIMS में अस्थायी अदालत लगाने के बारे में निर्णय ले। The Hindu के अनुसार ऐसा ट्रायल की सुनवाई कर रहे जज धर्मेश शर्मा की याचिका का निपटारा करते हुए कहा गया है। समाचारपत्र के अनुसार, इसके अलावा उच्चतम न्यायालय ने CBI को पीड़िता के साथ हुई सड़क दुर्घटना की जाँच के लिए 15 दिन और दिए हैं, और जज शर्मा से कहा है कि वे 45 दिन के भीतर ही मामले की सुनवाई खत्म करने को कोई दबाव न मानें; यदि उन्हें लगता है कि मामले में न्याय के लिए और समय चाहिए तो सुप्रीम कोर्ट को बता दें

सीबीआई को और समय

पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसे की जाँच सीबीआई के हाथों में है, जिसे जस्टिस दीपक गुप्ता के नेतृत्व वाली बेंच ने मामले की तफ्तीश पूरी करने के लिए दो हफ्ते की अतिरिक्त मोहलत दी है। 19 अगस्त को एजेंसी को पहले भी दो हफ्ते का समय-सीमा विस्तार दिया गया था।

अपने साथ 2017 में बलात्कार और बाद में सामूहिक बलात्कार का आरोप पीड़िता ने विधायक कुलदीप सेंगर पर लगाया था। साथ ही आरोप लगाया था कि उसके पिता को पहले झूठे आर्म्स एक्ट मामले में हिरासत में ले लिया गया, और बाद में हिरासत में पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी गई। उपरोक्त मामलों में सीबीआई जाँच के बाद कुलदीप सेंगर पर दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 120B, गैंगरेप के अतिरिक्त पीड़िता के पिता को झूठे आर्म्स एक्ट मुकदमे में फँसाने को लेकर आरोप तय कर दिए थे

28 जुलाई को हुआ था हादसा, उसके बाद मिला CJI को लिखा पत्र

28 जुलाई को 19-वर्षीया पीड़िता, उसके वकील और अन्य रिश्तेदारों की कार उलटी दिशा से तेज़ गति में आ रहे ट्रक से भिड़ गई थी। इसमें उसकी दो महिला रिश्तेदारों की मौत हो गई, और उसके वकील की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। उसकी माँ ने कुछ ही दिन पहले अदालत में सेंगर और अन्य आरोपितों की शिनाख्त की है

सड़क हादसे के बाद यह बात भी सामने आई कि 12 जुलाई को भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को पत्र लिखकर पीड़िता ने अपनी जान को खतरा बताते हुए गुहार लगाई थी। लेकिन यह समाचार मीडिया के हवाले से मिलने से पहले तक उन्हें वह पत्र प्राप्त नहीं हुआ था। इस बात को गंभीरता से लेते हुए जस्टिस गोगोई ने इसके बारे में भी स्पष्टीकरण माँगा था कि 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में आ चुका पत्र 30 जुलाई तक उन तक क्यों नहीं पहुँचा।

सिमी का पूर्व अध्यक्ष शाहिद बद्र आजमगढ़ से गिरफ्तार, देशद्रोह सहित भड़काऊ भाषण के कई आरोप

देशद्रोह के मामले में एक मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष शाहिद बद्र को गिरफ्तार करके गुजरात पुलिस ने आज बड़ी सफलता हासिल की है। जानकारी के मुताबिक कुछ समय पहले गुजरात की भुज अदालत ने शाहिद बद्र के ख़िलाफ़ वारंट जारी किया था। जिसमें वह पेश नहीं हुआ था, इसके बाद ही शाहिद को गुजरात पुलिस ने यूपी के आजमगढ़ से गिरफ्तार किया।

हालाँकि, शाहिद का इस गिरफ्तारी पर कहना है, “मैं सिमी का अध्यक्ष रहा हूँ। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में मैं केस लड़ा रहा हूँ। मेरे खिलाफ जो भी केस चल रहे हैं, मैं उनमें पेश होता रहा हूँ, मुझे नहीं मालूम कब वारंट जारी किया गया था।” वहीं शाहिद के घरवालों का भी ये कहना है कि उनको इस वारंट के बारे जानकारी नहीं थी। क्योंकि जब से सिमी पर प्रतिबंध लगा है तब से उनके (शाहिद) नाम पर कोई गतिविधि नहीं हुई।

उल्लेखनीय है कि आजमगढ़ के एसपी पंकज पांडेय ने इस बारे में बात करते हुए मीडिया को बताया है कि शाहिद आजमगढ़ निवासी हैं और उनको गुजरात पुलिस ने आईपीसी की धारा 353 / 143 ,147 के तहत दर्ज मुकदमें में गिरफ्तार किया है।

जानकारी के मुताबिक गुजरात में वर्ष 2001 में दर्ज भड़काऊ भाषण के एक मामले में गुजरात की भुज व कच्छ पुलिस को शाहिद बद्र की तलाश थी। इसके अलावा बताया जा रहा है कि शाहिद के ख़िलाफ़ 2012 में भी भुज में मामला दर्ज हुआ था और पुलिस का यह भी कहना है कि आजमगढ़ में उनके ख़िलाफ़ बहुत से मामले दर्ज हैं।

गौरतलब है कि जिस संगठन का शाहिद पूर्व अध्यक्ष रहा है, उस सिमी को भारत में आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण 2002 में केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। लेकिन फिर 6 अगस्त 2008 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस प्रतिबंध को हटा दिया गया था। लेकिन शाहिद इस प्रतिबंध के ख़िलाफ़ कोर्ट में केस लड़ रहा है।

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस में छिड़ा घमासान: चार कोनों पर सूरमा, सुलह के लिए बीच में कूद रहीं सोनिया

कहने को कॉन्ग्रेस आज भी सबसे बड़ा विपक्षी दल है, लेकिन उसके सीधे नियंत्रण में आने वाले इकलौते बड़े राज्य मध्य प्रदेश में वह अंदरूनी कलह और असंतुष्टि ही नहीं, लगभग खुले विद्रोह से जूझ रहा है। उसके चार बड़े क्षत्रप आपस में भिड़े पड़े हैं, और वयोवृद्ध-अस्वस्थ अंतरिम अध्यक्षा सोनिया गाँधी को बीच-बचाव के लिए कूदना पड़ रहा है।

संगठन सिरमौरी के लिए भिड़े कमलनाथ-सिंधिया

अपने आप को इस कार्यकाल के पहले ही दिन से भाजपा से बड़ा ‘गौभक्त’ साबित करने में जुटे मुख्यमंत्री कमलनाथ एक साथ सरकार और संगठन की कुर्सी पर काबिज रहना चाहते हैं। वहीं बताया जा रहा है कि उनके प्रतिद्वंद्वी, गुना के पूर्व सांसद और राजघराने के वारिस ज्योतिरादित्य सिंधिया भी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी चाहते हैं।

यह रेस इसलिए है क्योंकि न केवल इससे संगठन पर पकड़ मज़बूत रख कर आलाकमान की नज़रों में चढ़ना आसान होगा, बल्कि बहुत सम्भव है कि प्रदेश अध्यक्ष सरकार के बीच में ही विधायकों का पाला बदलवा कर खुद को या अपने किसी चहेते को मुख्यमंत्री बनवा सकता है। विधानसभा चुनावों में पसीना बहाने के बाद भी मुख्यमंत्री पद से हाथ धोने वाले सिंधिया जहाँ इस ‘सुपरपावर’ को तख्तापलट के लिए चाहेंगे, वहीं कमलनाथ की नज़र इसी स्थिति को रोकने पर है।

कमलनाथ लोकसभा चुनावों तक प्रदेश अध्यक्ष थे, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था। लेकिन वह अपने खास और जनजातीय समाज के नेता गृह मंत्री बाला बच्चन को प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी का अध्यक्ष बनाना चाहते थे। वहीं सिंधिया का ज़ोर इस पद को अपने कैम्प में करने पर इतना ज़्यादा था कि इस माँग के बाकायदा इश्तिहार भी अख़बारों में छपने लगे, और पोस्टर भी प्रदेश की दीवारों पर लगने लगे। फ़िलहाल तो राष्ट्रीय स्तर पर स्थायी अध्यक्ष के चुनाव पहले होने का हवाला देकर कमलनाथ को ही सेवा-विस्तार दे दिया गया है, लेकिन यह युक्ति कब तक सिंधिया को काबू रख पाएगी, यह देखने लायक होगा।

दिग्विजय पर पर्दे के पीछे से सरकार चलाने का आरोप

दूसरी ओर पूर्व मंत्री उमंग सिंघर ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर पर्दे के पीछे से प्रदेश सरकार के सूत्र अपने हाथ में रखने का आरोप लगाया है। पलट कर प्रदेश कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल ने सिंघर पर भाजपा एजेंट होने का आरोप लगाया और छवि धूमिल करने के लिए उनके निलंबन की माँग की है

गौरतलब है कि पिछले साल जीते विधानसभा चुनावों के बाद दिग्विजय सिंह भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे। लेकिन उनके विरोध में उनकी हिन्दू-विरोधी छवि और यह बात गई कि उनका पिछला कार्यकाल इतना बुरा था कि भाजपा अगले तीन चुनाव उनके कार्यकाल की याद दिलाकर जीतती रही।

फ़िलहाल एक ओर दिग्विजय सिंह ने सिंघर के साथ किसी सीधे संघर्ष से इंकार तो किया है, लेकिन दूसरी ओर अनुशासनहीनता पार्टी में बर्दाश्त न होने की बात भी उसी साँस में कह डाली। इसके अलावा सिंधिया ने यहाँ भी कूदते हुए कमलनाथ को नसीहत दी कि प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उन्हें इन दोनों नेताओं के बीच सुलह के लिए कोशिश करनी चाहिए।

आजिज सोनिया ने मंगाई रिपोर्ट

इन सबके बीच अंतरिम अध्यक्षा और स्वास्थ्य कारणों से पूर्णकालिक अध्यक्ष का पद छोड़ने वालीं सोनिया गाँधी ने भोपाल के बवाल पर पूरी रिपोर्ट मंगाई है। साथ ही सभी गुटों को मामले सुलझाने और एक-दूसरे के खिलाफ मीडिया में बयान न देने की भी हिदायत दी है।

कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय समिति में प्रदेश के प्रभारी दीपक बाबरिया ने The Week को बताया कि वे अगले हफ्ते भोपाल में होंगे, और उस दौरे के बाद आलाकमान को रिपोर्ट जाएगी। उन्होंने सिंघर समेत कई नेताओं से पहले ही व्यक्तिगत रूप से बात कर चुकने की भी The Week को पुष्टि की।

चिदंबरम के तिहाड़ जेल जाने पर कपिल सिब्बल को सताने लगी ‘मौलिक अधिकारों’ की चिंता

INX मीडिया घोटाले में कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के तिहाड़ जाने के बाद कपिल सिब्बल ने ट्विटर के जरिए इस मामले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल किया है कि अब आखिर हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा कौन करेगा।

कपिल सिब्बल ने ट्वीट करते हुए आज सुबह लिखा, “हमारी मौलिक स्वतंत्रता की रक्षा कौन करेगा? सरकार? सीबीआई? ईडी? या आयकर अधिकारी? या अदालतें? अगर अदालतें मान लेंगी कि ईडी और सीबीआई सही बोल रही हैं तो वह दिन दूर नहीं जब भगवती से वेंकटाचलिया युग में निर्मित आजादी के स्तंभ ढह जाएँगे।”

हालाँकि, उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाँ आई हैं। जिसमें यूजर्स ने उन्हें जवाब देते हुए बहुत खरी-खोटी सुनाई हैं। एक यूजर ने सिब्बल को जवाब देते हुए लिखता है कि अब भ्रष्टाचार का समय खत्म हो चुका हैं। अब जेल भ्रष्टाचारियों का इंतजार कर रही हैं।

वहीं, दूसरा उनसे पलटकर सवाल करता नजर आया कि जब उनकी पार्टी सत्ता में थी तब उन्होंने ऐसे सवाल क्यों नहीं किए? क्या तब ये उचित नहीं था?

गौरतलब है कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की कस्टडी में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था और गुरुवार की रात ही पूर्व वित्त एवं गृह मंत्री को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। जिसके बाद सुबह कपिल सिब्बल ने अपनी ये प्रतिक्रिया दी।

यहाँ बता दें कि तिहाड़ जाने से पहले चिदंबरम ने अदालत से कहा था कि वह जेड-श्रेणी की सुरक्षा के साथ जेल में रहना चाहते हैं, जहाँ पर एक बिस्तर दवाई की सुविधा, बाथरूम और वेस्टर्न टॉयलेट भी हो। अदालत द्वारा उनके इस निवेदन को स्वीकार कर लिया गया था और उन्हें उनके मुताबिक जेल में रहने की अनुमति दी गई थी

सलमान खान के ख़िलाफ़ पत्रकार से बदसलूकी के आरोप में कोर्ट ने दिए जाँच के आदेश

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान पर पत्रकार से बदसलूकी करने के आरोप में मुंबई की एक कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ पुलिस को जाँच के आदेश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उन पर इसी साल अप्रैल में एक पत्रकार से कथित तौर पर मारपीट करने का आरोप लगा था। जिसके बाद जून महीने में पत्रकार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर सलमान खान और उनके 2 बॉडीगार्ड के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने की माँग की थी।

अब इसी मामले पर सुनवाई करते हुए अंधेरी के मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने डीएन नगर पुलिस को सलमान खान और उनके 2 बॉडीगार्ड्स के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं और मामले की जाँच करने को कहा है। जानकारी के अनुसार इस साल के अप्रैल महीने में हुई इस घटना में पत्रकार ने सलमान खान को साईकिल चलाते देख उनकी वीडियो बनाने की कोशिश की थी, जिसके बाद ये घटना घटी।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने पुलिस को आदेश दिए हैं कि पुलिस सलमान खान और उनके 2 बॉडीगार्ड्स के ख़िलाफ़ एक पत्रकार से मारपीट व बदसलूकी करने के आरोप की जाँच करें और 14 अक्टूबर तक कोर्ट में जाँच रिपोर्ट पेश करे।

गौरतलब है कि जिस पत्रकार ने बॉलीवुड के भाईजान के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया है, उसका नाम अशोक पांडेय हैं। अशोक ने अंधेरी के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट आर आर खान की अदालत में आईपीसी की धारा 323 (चोट पहुँचाने), 392 (लूटपाट) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत ‘शिकायत’ दर्ज कराई थी।

अशोक ने अपनी शिकायत में बताया था कि 24 अप्रैल की सुबह सलमान साईकिल चला रहे थे और उनके 2 अंगरक्षक भी उनके साथ मौजूद थे। इस दौरान वह भी वहाँ कार से गुजरे। सलमान को देखकर उन्होंने बॉडीगार्ड्स की सहमति से उनकी वीडियो बनानी शुरू की। लेकिन सलमान को यह चीज पसंद नहीं आई और उनके बॉडीगार्ड उनके(अशोक) के पास आकर उनसे मारपीट करने लगे। पत्रकार का आरोप है कि इस दौरान उसका फोन भी छीन लिया गया। और जब उसने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई तो उन्होंने भी एफआईआर नहीं लिखी, जिस कारण उन्हें कोर्ट का सहारा लेना पड़ा।

शेहला रशीद के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज, सेना पर लगाए थे झूठे आरोप

JNU की पूर्व छात्र नेता से शाह फैसल की पार्टी से नेतागिरी की आगाज करने वाली शेहला रशीद के खिलाफ दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल ने देशद्रोह के साथ कई अन्‍य धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। शेहला रशीद पर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद मौजूदा हालात को लेकर भारतीय सेना के खिलाफ झूठी खबरें फैलाने का आरोप है।

बता दें कि शेहला ने भारतीय सेना पर रात में कश्‍मीर के लोगों के घरों में घुसने, गैर-कानूनी रूप से लड़कों को उठाने, घरों में छानबीन करने, चावलों में तेल मिलाने, शोपियाँ में कश्‍मीरी लड़कों को बंधक बनाकर दहशत फैलाने जैसे कई आरोप लगाए थे। शेहला ने जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद-370 हटाने को लेकर 18 अगस्‍त को ट्वीट कर इन आरोपों को लगाया था। शेहला के सेना पर लगाए ऐसे कई आरोपों के बाद सोशल मीडिया पर काफी हंगामा हुआ था। शेहला इससे पहले भी कई फेक न्यूज़ फैलाने सहित सेना पर कई आरोप लगा चुकी हैं।

शेहला ने अपने एक दूसरे ट्वीट्स में लिखा, “लोग कह रहे हैं कि जम्मू और कश्मीर पुलिस के पास क़ानून व्यवस्था का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें शक्तिहीन कर दिया गया है। सब कुछ अर्धसैनिक बलों के हाथों में है। सीआरपीएफ के जवान की शिक़ायत पर एक SHO का ट्रांसफर कर दिया गया था। SHO डंडे के साथ दिखे उनके पास सर्विस रिवाल्वर नहीं देखी गई।”

यहाँ तक कि भारतीय सेना ने भी शेहला के इन आरोपों को बेबुनियाद और मनगढंत बताया था। भारतीय सेना के बयान के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने शेहला रशीद पर फर्जी खबरें पोस्ट करने का आरोप लगाते हुए आपराधिक मामला दर्ज करने के साथ गिरफ्तारी की माँग भी की थी।

शेहला के खिलाफ आईपीसी की धारा 124-A के तहत देशद्रोह, 153A के तहत धर्म भाषा के आधार पर नफ़रत फैलाना, 153 में उपद्रव कराने के आशय से कोई काम करना, 504 के तहत शांति भंग करने के आशय से कोई काम करना और 505 के तहत अफवाह फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। अब इस मामले में दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल शेहला रशीद से पूछताछ करेगी।


शेहला रशीद फिलहाल आईएएस से नेता बने शाह फैसल के साथ जम्मू-कश्मीर की राजनीति में स्थापित होने की कोशिश कर रही हैं। शाह फैसल वही नेता हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्क्रिय किए जाने के बाद ‘बदला’ लेने की धमकी दी थी। उन्हें पिछले दिनों दिल्ली एयरपोर्ट पर उस समय रोक लिया गया था जब वे देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल वे श्रीनगर में नजरबंद हैं। बताया जाता है कि वे भारत सरकार के फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए देश छोड़कर जा रहे थे

कॉन्ग्रेसी विचारधारा के शिक्षकों को मिलेगी प्राइम पोस्टिंग: गहलोत सरकार ने खुलेआम किया ऐलान

राजस्थान में गहलोत सरकार ने गुरुवार (सितंबर 5, 2019) को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को भी भाजपा और कॉन्ग्रेस का बताकर दो गुटों में विभाजित कर दिया। ये विभाजन राज्य के शिक्षा मंत्री राज्यमंत्री गोविंद डोटासरा द्वारा किया गया। उन्होंने खुलेआम इस बात का ऐलान सबके सामने किया कि अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा वाले शिक्षकों को प्राइम पोस्टिंग से हटाया जाएगा और कॉन्ग्रेस का समर्थन करने वाले शिक्षकों को न्याय दिलवाया जाएगा।

शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी कार्यालय में गुरुवार को आयोजित शिक्षक पुरस्कार वितरण समारोह में भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार के शासन काल में राजनीतिक आधार पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया गया और उन्हें स्थानांतरण करके दूर भेजा गया, उनसे दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि बीजेपी राज में यह निश्चित था कि जो व्यक्ति RSS से है, वह तो जयपुर और डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर पर रहेगा और जो कॉन्ग्रेस का कार्यकर्ता है वह 100 या फिर 500 किलोमीटर दूर जाएगा। इसलिए अब वह कॉन्ग्रेस समर्थित शिक्षकों को जल्द से जल्द 100 फीसदी न्याय दिलवाएँगे।

शिक्षा मंत्री के इस ऐलान के बाद वहाँ मौजूद शिक्षकों ने जिंदाबाद के नारे लगाए और शिक्षा मंत्री ने सबको संबोधित करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का स्पष्ट रूप से ये कहना है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को राजनीतिक आधार पर बहुत प्रताड़ित किया गया है। उनको न्याय मिलना चाहिए। इसलिए उन्होंने निर्देश दिए हैं कि कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं की ट्रांसफर पोस्टिंग का अच्छे से ख्याल रखा जाए।

गौरतलब है कि राजस्थान में गहलोत सरकार के आने के बाद से जो स्थिति बनी है, वो किसी से छिपी नहीं है। कानून व्यवस्था से लेकर प्रशासन तक की हालत चरमराई हुई है। दलित से लेकर महिला और किसान तक उनकी राजनीतिक लड़ाइयों के कारण प्रताड़ित हो रहे हैं। ऐसे में अब उन्होंने शिक्षकों को दो हिस्सों में बाँटकर राज्य की शिक्षा प्रणाली पर भी सवाल उठा दिया है।

राजस्थान में गहलोत सरकार आने के बाद वहाँ की क्या हालत है, इसे आप इस लिंक पर क्लिक करके विस्तार से पढ़ सकते हैं।- न दलित सुरक्षित न महिला, राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार बनते ही चौपट हुई कानून-व्यवस्था

केजरीवाल जी… मेरा इस्तीफा स्वीकार करो क्योंकि AAP अब खास आदमी पार्टी बन गई है

अलका लांबा ने आज (6 सितंबर 2019) आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। दिल्ली के चांदनी चौक की विधायक अलका लांबा और उनकी पूर्व की राजनीतिक पार्टी AAP में काफी दिनों से नहीं बन रही थी। इसी हफ्ते वो सोनिया गाँधी से भी मिलने गई थीं। तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि वो कभी भी AAP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे सकती हैं।

अलका लांबा ने ट्विटर पर लिखा, “AAP को गुड बाय कहने का समय आ गया है। पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पिछले 6 साल के सफर में काफी कुछ सीखने को मिला।”

दिल्ली के चांदनी चौक इलाके की विधायक अलका लांबा ने बाद में एक और ट्वीट किया। इसमें उन्होंने अरविंद केजरीवाल को संबोधित करके लिखा, “अरविंद केजरीवाल जी, आपके प्रवक्ताओं ने आपकी इच्छा के अनुसार पूरे अहंकार के साथ मुझसे कहा था कि पार्टी ट्विटर पर भी मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लेगी। इसलिए कृपया “आम आदमी पार्टी”, जो अब “ख़ास आदमी पार्टी” बन चुकी है, की प्राथमिक सदस्यता से मेरा इस्तीफा स्वीकार करें।”

अलका लांबा ने इस साल अगस्त की शुरुआत में ही कहा था कि वो AAP से इस्तीफा देने का फैसला कर चुकी हैं। तब उन्होंने यह भी बताया था कि आने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में वह स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगी। हालाँकि सोनिया गाँधी से उनके आवास पर मुलाकात के बाद ऐसा होगा, इसकी कम ही गुंजाइश है। फिर भी एक मँझे हुए नेता की तरह उन्होंने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। मतलब लांबा का राजनीतिक ऊँट किसी भी करवट बैठ सकता है। नीचे के दो ट्वीट से आपको अंदाजा लग जाएगा कि कॉन्ग्रेस हो या बीजेपी, उनके लिए दोनों पार्टियों में अपना भविष्य दिख रहा है।

इस्तीफा देने वाले मुद्दे पर तब AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने अलका लांबा को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि वह और उनकी पार्टी उनका (अलका) इस्तीफा ट्विटर पर भी स्वीकार करने के लिए तैयार है।

आपको बता दें कि AAP और अलका लांबा के बीच इस खटास की शुरुआत लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद हुई। चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद लांबा ने AAP की कड़ी आलोचना की थी। तब उन्होंने पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जवाबदेही भी माँगी थी। इसके बाद उन्हें AAP सदस्यों के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप से निकाल दिया गया था।

हॉस्टल में शराब पीकर केयरटेकर करता था बच्चियों से बदसलूकी, टीचर भी नहीं लेते थे एक्शन

बिहार के जहानाबाद झिले से एक शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ बोर्डिंग में रहने वाली लड़कियों ने हॉस्टल के केयरटेकर पर शराब पीकर उन्हें धमकाने और मारपीट करने का आरोप लगाया है

लड़कियों का कहना है कि उनके हॉस्टल का केयरटेकर हॉस्टल में शराब पीता था और उनसे दुर्व्यव्हार करता था। इसके अलावा बच्चियों ने बताया है कि एक बार तो वह लेट होने पर एक बच्ची की पिटाई भी कर चुका है।

पुलिस ने मामले की सूचना मिलते ही केस को दर्ज कर लिया है और जिले के डीएम नवीन कुमार ने भी बताया है कि एनजीओ की ओर से काम करने वाले केयरटेकर पर हॉस्टल में शराब पीकर लड़कियों से बदसलूकी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में जाँच शुरू हो गई है और सरकार को एनजीओ के खिलाफ पत्र भी लिखा गया है।

डीएम के मुताबिक अब वहाँ कुछ सुरक्षा नियम भी बनाए गए हैं। जिसके तहते सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने के लिए एक दीवार का निर्माण किया जाएगा और सीसीटीवी कैमरा लगाए जाएँगे। और सिर्फ़ महिला कर्मचारियों को ही हॉस्टल में रहने की अनुमति दी जाएगी

जानकारी के मुताबिक इस मामले के संबंध में एसपी को पत्र भी लिखा गया है और कहा गया कि हॉस्टल के पास पुलिस फोर्स बढ़ाई जाए।

गौरतलब है कि इस मामले के संबंध में एक बच्ची के मुताबिक उसने केयरटेकर की शिकायत अपने टीचर से भी की थी लेकिन टीचर ने एक्शन लेने की बजाए बच्ची को धमका दिया कि अगर वह केयरटेकर की शिकायत करती है तो उसके हॉस्टल से निकाल दिया जाएगा और उसके बाद उसके माता- पिता भी कुछ नहीं कर पाएँगे।

वहीं, दूसरी छात्रा की मानें तो वो बताती है कि केयरटेकर मेस में शराब पीता था। ऐसे में जब एक दिन एक लड़की को खाने के लिए देरी हो गई तो उसने मेस में लंच माँगा, लेकिन केयरटेकर ने गुस्से में उसकी पिटाई कर दी और खाना देने से भी मना कर दिया।