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मरीदास vs डीएमके: मदुरै के इंजीनियर के तर्कों से 70 साल पुरानी हिन्दू विरोधी द्रविड़ पार्टी की छूटी कँपकँपी

तमिलनाडु में भाजपा का समर्थन या फिर ख़ुद के हिन्दू जड़ों पर गर्व करना द्रविड़ पार्टियों को उतना ही अखरता है, जितना ओवैसी को हिन्दुओं से चिढ़ है। आज हम आपको तमिलनाडु के एक ऐसे इंजीनियरिंग के बारे में बताने जा रहे हैं, जो न सिर्फ़ डीएमके के हर एक नैरेटिव की अपने मजबूत तर्कों से धज्जियाँ उड़ाते रहे हैं, बल्कि हिंदुत्व के लिए तमिलनाडु में एक ऐसी मशाल जला रहे हैं, जिसकी अग्नि से उपजे प्रकाश भर को देख कर ब्राह्मणों को गाली देकर सत्ता भोगने वाली डीएमके की कँपकँपी छूट जाती है। इस शख्स का नाम है- मरीदास एम।

मरीदास तमिलनाडु की आंतरिक व राजनीतिक मुद्दों पर लेख लिखते रहे हैं। वो अपनी बात कहने के लिए अधिकतर तमिल भाषा का प्रयोग करते हैं। उन्हें डीएमके नेताओं द्वारा ‘ब्राह्मणवादी’ ठहराया जा चुका है। फेसबुक से लेकर यूट्यब पर उन्होंने अपने विचारों से जनता को इतना प्रभावित किया कि डीएमके हिल उठी। बस यही ताज़ा विवाद की जड़ भी है। आम जनता की मरीदास के बारे में क्या राय है, इसके बारे में हम बात करेंगे लेकिन उससे पहले इस पूरे मसले को समझते हैं कि आख़िर ट्विटर पर ‘I Support Mridhas’ का कारण क्या है?

सुपरस्टार रजनीकांत को अपनी पुस्तक की प्रति भेंट करते मरीदास

तमिलनाडु में कई बार सत्ता में रही कॉन्ग्रेस की सहयोगी पार्टी डीएमके ने चेन्नई के पुलिस कमिश्नर को मरीदास के ख़िलाफ़ पत्र लिख कर उन पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया। इस लम्बे-चौड़े पत्र में मरीदास के सोशल एकाउंट्स का विवरण दे कर उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की माँग की गई। आख़िर एक ऐसे व्यक्ति में क्या है कि डीएमके जैसी बड़ी पार्टी उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग कर रही है? ब्लॉग लिखने और यूट्यब वीडियो बनाने वाला व्यक्ति, जो नेता भी नहीं है, उससे डीएमके को कैसा डर? इसके लिए डीएमके की शिकायत वाले पत्र को देखना ज़रूरी है।

डीएमके ने आरोप लगाया है कि मरीदास पार्टी के ख़िलाफ़ ग़लत ख़बरें फैलाते हैं। पार्टी के अनुसार, मरीदास सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का प्रयोग कर के लोगों को बरगलाते हैं। डीएमके ने मरीदास की वेबसाइट, फेसबुक हैंडल और यूट्यूब पेज का विवरण पुलिस कमिश्नर को देते हुए आरोप लगाया कि वह सांप्रदायिक प्रोपगेंडा फैलाते हैं। अब यह पूछने वाली बात नहीं है कि अधिकतर विपक्षी पार्टियों के लिए सांप्रदायिक की परिभाषा क्या है?

हिन्दुओं को ख़त्म कर देने की बात करने वाला ओवैसी का भाई सांप्रदायिक नहीं है। चंद्रबाबू नायडू मुस्लिम बहुल इलाक़ों में प्रचार के लिए फ़ारुख़ अब्दुल्ला को बुलाते हैं और नमाज रूम बनवाने की घोषणा करते हैं लेकिन वह सांप्रदायिक नहीं हैं। कॉन्ग्रेस खुलेआम मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करती है लेकिन यह सांप्रदायिक नहीं है। इस मामले में भी डीएमके के लिए मरीदास इसीलिए सांप्रदायिक हैं ,क्योंकि वह कृष्ण जन्माष्टमी से लेकर अन्य हिन्दू पर्व-त्योहारों पर बधाई देते हैं,मिशनरी की पोल खोलते हैं।

मरीदास की ‘साम्प्रदायिकता’: वह अपनी हिन्दू जड़ों पर गर्व क्यों करते हैं?

डीएमके ने अपनी शिकायत में लिखा है कि अपने यूट्यब वीडियो में मरीदास एक बड़े टीवी स्क्रीन के सामने इस तरह से खड़े होते हैं, जिससे लोगों को लगता है कि वह कोई बहुत बड़े विशेषज्ञ हैं। शायद सांप्रदायिक का टैग हटाने के लिए मरीदास को डीएमके से पूछना पड़ेगा कि वे किस आकार के टीवी के सामने खड़े होकर अपनी बात रखें। डीएमके ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने और जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर राज्य का विशेषाधिकार वापस लिए जाने का विरोध किया था। मरीदास ने पार्टी के इसी क़दम के विरोध में वीडियो बनाया था, जिससे डीएमके नाराज़ है।

डीएमके ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस वीडियो के द्वारा वह समाज में शांति को भंग करना चाहते हैं, विभिन्न सम्प्रदायों के बीच वैमनस्य फैला कर उन्हें भड़काने की कोशिश कर रहे हैं और मुस्लिमों एवं नॉन-मुस्लिमों के बीच लड़ाई करवाना चाहते हैं। अब सवाल उठता है कि इस वीडियो में मरीदास ने क्या कहा था? मरीदास ने कहा था कि डीएमके द्वारा जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार के निर्णय का विरोध करना आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और हिज़्बुल मुजाहिद्दीन को समर्थन देने वाला क़दम है।

उन्होंने सवाल पूछा था कि क्या डीएमके ने भारत सरकार के फ़ैसले का विरोध करने के लिए पाकिस्तान से रुपए लिए हैं या फिर पार्टी का आतंकी संगठनों के साथ समझौता हुआ है, जिसके तहत अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में बयान दिया गया? अब आपको बता देते हैं कि डीएमके प्रमुख स्टालिन ने अपने बयान में क्या कहा था। स्टालिन ने सरकार के फ़ैसले का विरोध करते हुए इसे असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और संघीय ढाँचे के ख़िलाफ़ लिया गया निर्णय बताया था। अपनी शिकायत में भी डीएमके यह जताना नहीं भूलती कि जम्मू-कश्मीर एक मुस्लिम बहुल राज्य है और इसीलिए पार्टी का आतंकी संगठनों से समझौता होने की बात फैलाई जा रही है।

डीएमके को इस बात से भी दिक्कत है कि मरीदास स्वदेशी जगाओ आंदोलन के नाम पर लोगों से दान में फंड्स माँगते हैं। पार्टी का अजीबोगरीब तर्क है कि ‘बेचारे निर्दोष लोग’ रुपए देते हैं और उन रुपयों का इस्तेमाल अपराध करने के लिए किया जाता है। डीएमके कुछेक पैनल कोड गिना कर कहती है कि मरीदास द्वारा पार्टी पर आरोप लगाना अपराध है। डीएमके ने एक आम आदमी के ख़िलाफ़ न सिर्फ़ शिकायत की, बल्कि शिकायत की कॉपी को अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर भी पोस्ट किया। इसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं:

डीएमके ने मरीदास के ख़िलाफ़ लगाए कई आरोप

पूरी पार्टी की बात तो छोड़ दीजिए, अगर भाजपा के किसी सदस्य ने भी किसी ऐसे व्यक्ति के ख़िलाफ़ एक एफआईआर भी दर्ज कराई होती जिसने देश विरोधी बयान दिया हो, तो आज पूरा विपक्ष सड़क पर उतर कर लोकतंत्र की हत्या होने की बात कहता और अभिव्यक्ति की आज़ादी के हनन का रोना रोता। लेकिन, जैसे एचडी कुमारस्वामी की सरकार द्वारा अपने परिवार के बारे में लिखने पर संपादक पर कार्रवाई हो जाती है और विपक्षी कहते हैं, इस मामले में भी अभिव्यक्ति की आज़ादी तेल लेने ही चली गई है। ब्लॉग लिखने, यूट्यब वीडियो बनाने और फेसबुक पोस्ट लिखने से एक 70 वर्ष पुरानी पार्टी डर गई है।

अगर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मरीदास के बारे में पब्लिक ओपिनियन खंगाला जाए तो पता चलता है कि लोग उन्हें एक गंभीर व्यक्ति मानते हैं, जिनकी तर्कों में दम तो होता ही है, साथ ही तथ्य भी पुष्ट होते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि तमिलनाडु में जो काम भाजपा का पूरा संगठन मिल कर नहीं कर पा रहा है, वह काम मरीदास अकेले कर रहे हैं क्योंकि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक हैं और अपनी बात जनता तक सीधे पहुँचा रहे हैं।कुछ लोगों का कहना है कि वह राजग सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों का पॉजिटिव पक्ष रखते हैं और इससे देश को क्या फायदा होगा, यह समझाते हैं।

मरीदास का सीधा मानना है कि नंबर सच बोलते हैं और इसीलिए वह किसी भी नैरेटिव को काटने के लिए आँकड़ों का इस्तेमाल करते हैं, डेटा निकालते हैं। वह ऐसे मीडिया संस्थाओं को आतंकवादियों का ही एक अलग रूप मानते हैं जो हिन्दुओं में बँटवारा पैदा करने के लिए दलितों पर शोषण की झूठी ख़बरें चलाने हेतु भ्रामक हेडलाइंस बनता है। वह सुपरस्टार रजनीकांत के प्रशंसक हैं और उन्हें तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं। रजनीकांत ने उन्हें मिलने का समय भी दिया था और मरीदास ने अपनी पुस्तक की एक कॉपी रजनी को सौंपी।

अब बस इंतजार है इस बात का है कि जिस एक व्यक्ति के पीछे देश की 70 वर्ष पुरानी शक्तिशाली द्रविड़ पार्टी लगी हुई है, क्या उसकी सुरक्षा की गारंटी सरकार लेगी? द्रविड़ पार्टियों के आक्रामक समर्थक उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाएँगे, क्या डीएमके यह सुनिश्चित करेगी? या फिर, क्या राजनीतिक दल इसका विरोध करेंगे कि किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ सिर्फ़ इसीलिए पुलिस प्रशासन से शिकायत न की जाए या कार्रवाई न की जाए क्योंकि वह ब्लॉग लिख कर और वीडियो बना कर पूछता है। इंतजार उन कथित एक्टिविस्ट्स का भी है, जो कहते हैं कि लोकतंत्र में सवाल पूछना पेट भरने से भी ज्यादा ज़रूरी है।

दफनाने की प्रक्रिया पर लड़े चर्च के 2 गुट, परेशान परिवार ने आयुर्वेदिक कॉलेज को दान कर दिया शरीर

एक वृद्ध महिला की मौत के बाद दफनाए जाने को लेकर चर्च के दो गुट इस तरह लड़ बैठे कि परिवार ने तंग आकर दफनाने का विचार ही त्याग दिया। दोनों गुटों की लड़ाई को देखते हुए परिवार ने मृत शरीर को एक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज को दान देने का निर्णय लिया। दरअसल, शुक्रवार को 86 वर्षीय सारा वर्के की मृत्यु हो गई। त्रिपुनिथुरा निवासी सारा एर्नाकुलम स्थित सेंट जॉन चर्च की सदस्य थी। चर्च के नियम के मुताबिक़, मृतक के परिवार को अधिकार है कि वह ‘फैमिली ग्रेव’ में अपने मृत रिश्तेदार को दफनाए।

सारा का परिवार जैकोबाइट ईसाई है। लेकिन चर्च के ऑर्थोडॉक्स गुट ने परिवार की बात न मानते हुए जैकोबाइट पादरी से अंतिम क्रिया-कर्म की प्रक्रिया संपन्न कराने से मना कर दिया। रूढ़िवादी गुट अड़ गया कि वह किसी जैकोबाइट पादरी द्वारा अंतिम क्रिया-कर्म नहीं कराने देगा। तनाव को देखते हुए परिवार ने मृतक के देह-दान का निर्णय लिया और मृत शरीर को आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया, जहाँ इसका इस्तेमाल रिसर्च के लिए किया जाएगा।

परिवार का पहना है कि वे चर्च की आंतरिक लड़ाई का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे और तनाव नहीं बढ़ाना चाहते थे। मार्च में हाई कोर्ट भी कह चुका है कि जैकोबाइट और ऑर्थोडॉक्स, दोनों ही गुटों के लोगों को चर्च में जाने, प्रार्थना में हिस्सा लेने और मृत रिश्तेदारों को दफनाने का बराबर का अधिकार है और इसमें भेदभाव नहीं किया जा सकता। लोगों ने आरोप लगाया है कि दफनाने का अधिकार छीन कर चर्च का ऑर्थोडॉक्स गुट लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन कर रहा है।

विवाद होने और लोगों द्वारा विरोध किए जाने के बावजूद ऑर्थोडॉक्स गुट के प्रवक्ता ने कहा कि चर्च में किसी जैकोबाइट पादरी द्वारा अंतिम क्रिया-कर्म संपन्न कराने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

गुजरात पुलिस की गिरफ्त में नक्सली नेता कोबाड गाँधी, देशद्रोह के मामले में 23 साथी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार

कुख्यात नक्सली नेता कोबाड गॉंधी को गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। देशद्रोह के नौ साल पुराने एक मामले में उसके 23 साथी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। मामला दक्षिणी गुजरात में नक्सली गतिविधियों को फैलाने से जुड़ा है।

इस मामले में गॉंधी सहित 25 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इनमें से एक अभी भी फरार है। गॉंधी झारखंड के हजारीबाग जेल में बंद था। उसे स्थानांतरण वारंट पर गुजरात पुलिस सूरत लेकर आई है।

पुलिस उपाधीक्षक सीएम जडेजा के मुताबिक़, 68 साल के माओवादी विचारक को न्यायिक मजिस्ट्रेट एचआर ठकोर की कोर्ट में पेश किया गया था। उन्होंने उसे सूरत ग्रामीण पुलिस के हवाले कर दिया।

पुलिस उपाधीक्षक ने बताया कि 2010 में सूरत ज़िले की कामरेज पुलिस ने दक्षिण गुजरात में नक्सल गतिविधियों का प्रचार करने के लिए गाँधी समेत 25 के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई थी। कोबाड गाँधी से पहले, इस मामले में 23 आरोपित गिरफ़्तार किए जा चुके हैं। फ़िलहाल, सीमा हिरानी नाम की एक आरोपित पुलिस की गिरफ़्त से दूर है।

ख़बर के अनुसार, ओडिशा में पकड़े गए नक्सलियों ने बयान दिया था कि दक्षिण गुजरात में नक्सली गतिविधियों को फैलाने का काम चल रहा है। इस बयान के आधार पर दक्षिण गुजरात में FIR दर्ज की गई थी। कोबाड गाँधी की रिमांड पर लेकर पुलिस यह दक्षिण गुजरात में नक्सली गतिविधियों को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका को लेकर पूछताछ करेगी।

J&K: खानाबदोश गुज्जरों को आतंकियों ने किया अगवा, 1 को गोलियों से छलनी किया

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने खानाबदोश गुज्जर समुदाय के जिन दो लोगों को अगवा किया था, उनमें से एक की गोली मार कर हत्या कर दी है। दोनों सोमवार को अगवा किए गए थे। दूसरे व्यक्ति की तलाशा जारी है।

आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में इस तरह की यह पहली घटना है। इससे पहले पत्थरबाजों के हमले में एक स्थानीय ट्रक ड्राइवर की मौत हो गई थी।

ख़बर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि राजौरी ज़िले के अब्दुल क़ादिर कोहली और श्रीनगर के खोनमोह इलाक़े के मंजूर अहमद का त्राल के जंगलों से शाम को 7:30 बजे अपहरण कर लिया। इसके बाद सुरक्षा बलों ने दोनों की तलाश शुरू कर दी। तलाश करने पर एक शख़्स का शव मिला है, जबकि दूसरे की तलाश अभी भी जारी है।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 तो हटाए जाने के बाद प्रदेश में यह इस तरह की पहली घटना है। इससे पहले, 20 अगस्त को उत्तरी-कश्मीर के बारामूला ज़िले में हुई मुछभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का एक आतंकवादी ढेर हो गया था और एक विशेष अधिकारी की भी मृत्यु हो गई गई थी। इसके अलावा एक पुलिस उप-निरीक्षक भी घायल हो गए थे।  

ISIS का हैदराबादी इंजीनियर: छुट्टी के बहाने बीवी-बच्चों को लेकर गया सीरिया, मरने के बाद भटक रहा परिवार

हैदराबाद से सीरिया जाकर आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हुए व्यक्ति का परिवार वहीं पर फँस गया है। आतंकी तो मारा गया लेकिन उसकी पत्नी और 4 बच्चे भारत वापस लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हैदराबाद टोलीचौकी के इंजीनियर रहे उक्त आतंकी की मौत 2018 में एक एयर स्ट्राइक में हो गई। फिलहाल उसके बीवी-बच्चे संयुक्त राष्ट्र के एक रिफ्यूजी कैम्प में रह रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, फँसे हुए परिवार को भारत लाने का प्रयास किया जा रहा है।

एनआईए और तेलंगाना पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस सेल ने हैदराबाद में स्थित मृत आतंकी के रिश्तेदारों से जानकारियाँ जुटाई है। हैदराबाद के इस परिवार के पास भारतीय पासपोर्ट है, लेकिन वे पिछले 2 दशकों से सऊदी अरब में रह रहे थे। पति ने पत्नी (जो कि उसकी कजन बहन भी है) से झूठ बोला कि वो परिवार को छुट्टियों पर पर्यटन के लिए लेकर जा रहा है। असल में वह आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल होने जा रहा था।

जब दोनों ने सीरिया का रुख किया, तब उनके 2 बच्चे थे। बाकी दोनों बच्चों का जन्म सीरिया में ही हुआ। महिला को पता भी नहीं था कि उसका पति छुट्टियों के बहाने सीरिया लेकर चला जाएगा। उन्होंने सऊदी से दुबई और फिर सीरिया तक की यात्रा की। आतंकी ने हैदराबाद में अपने भाई को ईमेल भेज कर बताया था कि वह परिवार सहित सीरिया शिफ्ट हो गया है और उसने आईएसआईएस ज्वाइन कर लिया है।

हैदराबाद में रह रहे इस परिवार के रिश्तेदारों को शुरू में लगा कि पूरा परिवार ही एयर स्ट्राइक में मारा गया लेकिन एक दिन आतंकी की बीवी ने फोन कर अपनी व्यथा सुनाई। रिश्तेदारों ने कहा कि आतंकी ने अपनी पत्नी को धोखे में रखा और उसे सच्चाई का पता तब पता चला, जब वे सीरिया पहुँचे। सीरिया का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र अभी भी वहाँ की सरकार के नियंत्रण में नहीं है और रिफ्यूजी कैम्पों में रह रहे भारतीयों का विवरण विदेश मंत्रालय भी जुटा रहा है।

‘नमामि गंगे’ का मुरीद हुआ चीन, कहा- मोदी सरकार की ​परियोजना अनुकरणीय

भारत सरकार की ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम से चीन भी गदगद है। चीन ने ‘नमामि गंगे’ को अनुकरणीय बताया है। बता दें कि मोदी सरकार ने ‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ के तहत गंगा नदी की सफाई के लिए कई अहम निर्णय लिए। जिन राज्यों से गंगा नदी गुजरती है, उन्हें भी इस मिशन में शामिल किया गया है। भारत की पौराणिक नदी की स्वच्छता के लिए लोगों जागरूक करने का अभियान भी चलाया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नदी की सफाई के लिए बजट को चार गुना करते हुए पर 2019-2020 तक नदी की सफाई पर 20,000 करोड़ रुपए खर्च करने की केंद्र की प्रस्तावित कार्य योजना को मंजूरी दी हुई है। चीन ने कहा है कि पानी से सम्बंधित परियोजनाओं में जनता की भागीदारी काफ़ी महत्वपूर्ण और ज़रूरी होती है। ख़ासकर, जब मामला जल-संरक्षण और पर्यावरण से जुड़ा हो। चीन के अधिकारियों ने कहा कि भारत ने ‘नमामि गंगे’ के तहत जो किया है, वह अनुकरणीय है।

चीनी अधिकारियों ने कहा कि भारत ने गंगा की स्वच्छता हेतु न सिर्फ़ एक व्यापक तंत्र के निर्माण में सफलता पाई है बल्कि साधु-संतों सहित जनता को भी इस मिशन में भागीदार बना कर नदी की सुरक्षा सुनिश्चित की है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय में अंतरराष्ट्रीय सहकारिता विभाग के डायरेक्टर जनरल यु सिंगजुन ने कहा कि भारत ने इस मामले में अच्छा उदाहरण पेश किया है।

उन्होंने अपने देश की नदियों के बारे में बात करते हुए कहा कि वे भी काफ़ी प्रदूषित हैं लेकिन चीन उनकी साफ़-सफाई करने और पर्यायवरण को स्वच्छ रखने के लिए हर संभव क़दम उठा रही है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव 2014 से ही गंगा नदी की स्वच्छता की बात करते रहे हैं और वाराणसी दौरे के दौरान वह कई बार गंगा आरती में भाग ले चुके चुके हैं। उनके वाराणसी से संसद बनने के बाद काशी के घाटों की सूरत ही बदल गई है।

J&K: बाहर नहीं भेज सकते सेब, आतंकियों ने बागान में घुस मालिक को धमकाया

आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद से जम्मू-कश्मीर के हालात नियंत्रण में है। स्थिति क़ाबू में रखने के लिए सरकार ने आतंक-प्रभावित क्षेत्रों में पैनी नज़र बना रखी है। लेकिन, आतंकियों को यह रास नहीं आ रहा और वे माहौल बिगाड़ने के लिए नई साजिशें रच रहे हैं।

इस कड़ी में अब आतंकी कश्मीर में फल और सब्जी व्यापारियों को धमकाने लगे हैं। सोमवार को आतंकी शोपियां के एक सेब बाग में दाखिल हुए और उसके मालिक को धमकी देते हुए कहा कि वह सेब बाहर नहीं भेजा जा सकता। जम्मू-कश्मीर सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के आधिकारिक ट्विटर हैंडल @diprjk ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।

जिस वक्त आतंकी बाग में घुसे थे सेब गाड़ी में लोड किया जा रहा था। आतंकियों ने बागान मालिक को धमकी देने के बाद गाड़ी में रखे सेब नीचे उतरवा दिए।

ट्वीट के अनुसार, घाटी में आर्थिक युद्ध छेड़ने के लिए आतंकवादियों द्वारा किया गया यह अपनी तरह का पहला प्रयास है। यह कश्मीर में शांति प्रक्रिया को बाधित करने का नया तरीका है। जहाँ एक तरफ लोग आतंकवाद से जूझ रहे क्षेत्र में शांति और विकास की एक नई सुबह की शुरुआत कर सरकार के साहसिक कदम का समर्थन कर रहे है, वहीं इस तरह की गतिविधियाँ वहाँ की शांति में खलल डालने के प्रयास का हिस्सा हैं।

कुछ अराजक तत्व घाटी में फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने और फ़र्ज़ी ‘क्लैंपडाउन स्टोरीज’ को गढ़ कर डर का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदेश में हालात सामान्य करने में केंद्र सरकार हर संभव प्रयास कर रही है, जिसमें वो सफल भी रही है।

फूट डालो-राज करो की साजिश: मुगल लेकर आए छुआछूत, अंग्रेजों ने गढ़ा ‘दलित’

भारत में छुआछूत की समस्या को लेकर अक्सर बहस होती रहती है और यह आज़ादी के काफ़ी पहले से चली आ रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा है कि भारत में छुआछूत की समस्या इस्लाम के आने के बाद शुरू हुई। उन्होंने ‘दलित’ शब्द पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने एक साज़िश के तहत समाज को बाँटने के लिए इस शब्द का अविष्कार किया। गोपाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आरएसएस एक ऐसा समाज चाहता है, जहाँ कोई जात-पात नहीं हो अर्थात जातिविहीन समाज हो।

उन्होंने छुआछूत को लेकर एक कहानी भी सुनाई। बकौल कृष्ण गोपाल, सिंध के अंतिम हिन्दू राजा दाहिर की पत्नियाँ जब जौहर करने जा रही थीं, तब उन्होंने ‘म्लेच्छ’ शब्द का प्रयोग किया था। रानियों का मानना था कि अगर उन्होंने जल्द से जल्द जौहर कर अपने प्राण नहीं त्यागे तो ‘म्लेच्छ’ लोग (इस्लामिक आक्रांता) आकर उन्हें छू देंगे। आरएसएस नेता ने बताया कि ये भारत में छुआछूत की पहली घटना थी और इससे पता चलता है कि यह सब क्षेत्र में इस्लाम के उद्भव के साथ शुरू हुआ।

उन्होंने भारतीय ग्रंथों से उदाहरण देते हुए कहा कि प्राचीन काल में ऊँची और नीची जातियाँ तो थीं लेकिन छुआछूत नहीं था। उन्होंने कहा कि गौ का माँस खाने वालों को अछूत माना जाता था। उन्होंने कहा कि अम्बेडकर भी ऐसा ही मानते थे। गोपाल ने कई ऐसे उदाहरण गिनाए, जिनके कारण कभी ‘फॉरवर्ड’ जाति के लोग रहे आज ‘बैकवर्ड’ हो गए हैं। उन्होंने कहा:

“आज मौर्य जाति के लोग ‘बैकवर्ड’ कहलाते हैं लेकिन कभी वे ‘फॉरवर्ड’ थे। बंगाल में पाल लोग राजा हुआ करते थे लेकिन आज वे भी ‘बैकवर्ड’ कहलाते हैं। इसी प्रकार भगवान बुद्ध की जाति शाक्य भी आज ओबीसी श्रेणी में आती है। हमारे समाज में ‘दलित’ शब्द था ही नहीं। ये ब्रिटिश आक्रांताओं की ‘फूट डालो और राज करो’ की साज़िश का एक हिस्सा था। यहाँ तक कि हमारी संविधान सभा ने भी ‘दलित’ शब्द का प्रयोग करने से मना कर दिया। भारत में इस्लामिक शासनकाल एक ‘अन्धकार युग’ था लेकिन हमारी आध्यात्मिक जड़ों के कारण हम किसी तरह बचे रहे।”

संघ पदाधिकारी गोपाल कृष्ण ने इतिहास से उदाहरण देते हुए कहा कि चन्द्रगुप्त मौर्य पहले शूद्र थे लेकिन बाद में चल कर अखंड भारत के सम्राट बने। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी शूद्र थे लेकिन बाद में एक महान ऋषि हुए। गोपाल कृष्ण ने नास्तिकों की बढ़ती संख्या पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हिन्दू जीवन पद्धति और वेदांत में ही उन्हें उनके सवालों का उत्तर मिल सकता है।

सहकारी बैंक घोटाला: शरद पवार के भतीजे अजित पवार पर कसा शिकंजा, 76 अन्य पर भी FIR

महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) घोटाला मामले में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मुखिया शरद पवार के भतीजे और राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उनके अलावा इस मामले में 76 अन्य लोगों के खिलाफ भी बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार सोमवार को मामला दर्ज किया गया।

सामाजिक कायर्कर्ता सुरेंद्र अरोड़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने गुरुवार को पॉंच दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।

कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार के दौरान अजित पवार 10 नवम्बर 2010 से 26 सितम्बर 2014 तक उप मुख्यमंत्री रहे थे। एक अधिकारी ने बताया कि अन्य आरोपियों में पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी के नेता जयंत पाटिल और राज्य के 34 जिलों में बैंक इकाई के अधिकारी शामिल हैं।

अधिकारी ने कहा, “आर्थिक अपराध शाखा की शिकायत पर एमआरए मार्ग थाने में मामला दर्ज किया है।” धारा 420 (ठगी और बेईमानी), 409 (नौकरशाह या बैंकर, व्यवसायी या एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वासहनन), 406 (आपराधिक विश्वासहनन के लिए सजा), 465 (धोखाधड़ी के लिए सजा), 467 (मूल्यवान चीजों की धोखाधड़ी) और 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र की सजा)के तहत मामला दर्ज किया गया है।

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति एस के शिंदे की पीठ ने 22 अगस्त को कहा कि मामले में आरोपियों के खिलाफ ‘ठोस साक्ष्य’ हैं और ईओडब्ल्यू को पांच दिनों के अंदर प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। एमएससीबी को 2007 और 2011 के बीच 1000 एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

छात्रों को बेल्ट से पीटा, कैब ड्राइवरों पर लाठीचार्ज: कमलनाथ की पुलिस पर उठे सवाल

छात्रों से लेकर कैब ड्राइवरों तक, मध्य प्रदेश में कई लोगों को सिर्फ़ इसीलिए पुलिस की बर्बरता का शिकार बनना पड़ा क्योंकि वे अपनी माँगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। पहली घटना इंदौर की है, जहाँ कैब ड्राइवर्स ओला और उबर जैसे एग्रीगेटर के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आरोप था कि कम्पनियाँ उनसे ज्यादा कमीशन ले रही हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने ख़ुद को जलाने की भी कोशिश की। पुलिस ने कैब ड्राइवरों पर जम कर लाठियाँ बरसाईं

कैब ड्राइवरों का कहना था कि ओला और उबर जैसी कम्पनियाँ उन्हें कम बुकिंग दे रही हैं लेकिन ज्यादा कमीशन वसूल रही हैं। उनका कहना था कि इससे उनकी प्रॉफिट पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कलेक्ट्रेट परिसर में चालक संघ के प्रदर्शन के दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

दूसरी घटना विदिशा की है, जहाँ छात्र-छात्रों को पुलिस के गुस्से का शिकार बनना पड़ा। विदिशा स्थित त्योंदा थाना की पुलिस ने छात्रों को डंडों व बेल्ट से पीटा। इस दौरान कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। सिरनोटा गाँव स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र अपने स्कूल की समस्याओं के निदान की माँग लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। जब उन्होंने चक्काजाम का प्रयास किया, तब पुलिस ने उनके साथ मारपीट की।

प्रभारी मंत्री हर्ष यादव ने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों ने छात्रों के साथ मारपीट की है, उन पर कार्रवाई की जाएगी। छात्रों का कहना था कि स्कूल में 10 में से 8 शिक्षकों का तबादला होने के बाद सिर्फ़ 2 शिक्षक बचे हैं। स्कूल की छत से बरसात के दौरान पानी भी टपकता है।