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घर के बाहर बिस्किट का रैपर देख आसिफ और अली ने कर दी साजिद की हत्या

दिल्ली के गाँधी नगर इलाके में सिर्फ़ एक बिस्किट के रैपर के कारण आसिफ और अफसर नाम के दो भाईयों ने अपने पड़ोसी साजिद की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। इस घटना में साजिद के 2 भाई (सलमान और आबिद) भी घायल हुए। पुलिस ने मुख्य आरोपित आसिफ उर्फ शब्बू को पकड़ लिया है जबकि अफसर अली की तलाश जारी है।

घटना दिल्ली के सीलमपुर में नानक बस्ती की गली नं-4 में रविवार की रात 8-8:30 बजे घटी। बताया जा रहा है कि पूरे मामले में साजिद की हत्या केवल बीच-बचाव करने के कारण हुई।

जानकारी के मुताबिक शब्बू के घर के बाहर बिस्किट का रैपर पड़ा था। जिसे देखकर शब्बू और उसकी माँ नसीमा साजिद के भतीजे पर भड़क उठे। जब साजिद की माँ ने इसका विरोध किया तो शब्बू उनके साथ गाली-गलौच पर उतर आया। इस बीच साजिद का भाई आबिद वहाँ पहुँचा और उसने कहा कि उनके परिवार ने कूड़ा नहीं डाला है। लेकिन शब्बू नहीं माना और कैंची से हमला करने लगा। हालाँकि उस समय पड़ोसियों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया। बाद में पुलिस कंट्रोल रूम को फोन करके घटना की सूचना दी गई। लेकिन जब पुलिस ने परिवार से संपर्क करना चाहा तो वहाँ से कोई रिस्पांस नहीं आया।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर

झगड़े के बाद डर से साजिद की माँ अपने दोनों बच्चों को लेकर सीमापुरी अपने रिश्तेदार के घर चली गई। लेकिन जब शाम को 7 बजे वह घर लौटी तो दोनों भाई आसिफ और अफसर वहीं थे। उन्होंने दोबारा गाली-गलौच शुरू की और फिर आबिद और सलमान पर हमला कर दिया। दोनों भाइयों ने जैसे-तैसे अपनी जान बचाने के लिए घर में घुसे तो वह भी उनके पीछे घर में घुस गए। इसी बीच साजिद घर लौट आया। उसने आसिफ और अफसर को घर से बाहर निकालकर दरवाजा बंद करने की कोशिश की, लेकिन तब तक शब्बू ने उसे चाकू घोंप दिया।

दोनों भाइयों ने साजिद पर चाकू और कैंची से कई वार किए। जिसकी वजह से वह जख्मी हो गया। उसे गंभीर हालत में नजदीक अस्पताल ले जाया गया , लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि डॉक्टर साजिद को नहीं बचा पाए। वहीं, सलमान और आबिद को प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी गई हैं। बता दें पुलिस ने आसिफ उर्फ शब्बू को गिरफ्तार कर लिया है जबकि अफसर उर्फ़ काले अभी पुलिस की पकड़ से फरार है।

राष्ट्रपति के विरोध में लिखी 190 पन्नों की किताब, 188 पेज खाली, वजह जान हैरान रह जाएँगे

ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो पर लिखी एक किताब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। इसके पीछे बड़ी ही रोचक वजह है। दरअसल, ‘बोलसोनारो विश्वास और सम्मान के लायक क्यों हैं’ नामक इस किताब के लेखक विलियम थम्स ने 190 पेज की इस किताब में 188 पन्ने खाली छोड़ दिए हैं। यानी कि उन्होंने सिर्फ दो पन्नों पर ही लिखी है। लेखक ने इस तरह से राष्ट्रपति के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शित किया है। थम्स के विरोध के इस अनोखे तरीके की हर तरफ चर्चा हो रही है।

नवभारत टाइम्स में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

थम्स ने कहा कि उनकी ये पुस्तक साल की शुरुआत में प्रकाशित हुई थी, लेकिन बुधवार (अगस्त 14, 2019) को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों का ध्यान इस तरफ गया। उन्होंने बताया कि उनको ये आइडिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर छपी ऐसी ही एक किताब से आया। 2016 में लेखक डेविड किंग ने ट्रम्प के ऊपर ऐसी ही किताब लिखी थी। जिसका नाम था- ‘ क्यों ट्रंप विश्वास, सम्मान और प्रशंसा के लायक हैं?’ इसके अलावा वर्ष 2017 में लेखक माइकल जे नोल्स ने ट्रंप पर 266 पेज की खाली पन्नों की किताब लिखी थी। जिसका टाइटल था-‘लोकतंत्र के लिए वोट का कारण: एक विस्तृत गाइड।’ थम्स का कहना है कि उन्होंने ‘बोलसोनारो विश्वास और सम्मान के लायक क्यों हैं’, इसका जवाब इसलिए नहीं दिया क्योंकि वो (जेयर बोलसोनारो) किसी चीज के लायक नहीं है। इसके साथ ही उन्होंंने 188 पेज खाली छोड़ने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि वो चाहते हैं कि लोग विवादित नेता के बारे में अपनी खुद की राय बताएँ।

वहीं, किताब के जिन दो पन्नों पर लिखा गया हैै, वो भी बेहद ही मजेदार चीजें लिखी गईं हैं। बता दें कि किताब के इन दो पन्नों पर लिखी गई है कि यह किताब घंटों तक की गई मेहनत का नतीजा है। दरअसल, ब्राजील की अर्थव्यवस्था काफी बुरे दौर से गुजर रही है और अमेजन के जंगलों की कटाई की वजह से बोलसोनारो की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना भी हो चुकी है। बोलसोनारो ने जनवरी में राष्ट्रपति पद की शपथ लेते हुए कहा था कि वो वहाँ के जुर्म और भ्रष्टाचार को खत्म करेंगे, मगर अभी भी ब्राजील की स्थिति जस की तस है।

हालाँकि, अभी तक इस किताब पर राष्ट्रपति का कोई बयान नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे ढेर सारे रिव्यू मिल रहे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग ऐप अमेज़ॉन पर महज कुछ ही घंटों में गुरुवार (अगस्त 15) को लगभग 300 लोगों ने अपने रिव्यू पोस्ट किए। कुछ ने थम्स के इस तरीके का समर्थन किया तो वहीं कुछ ने इसे दुखद बताया। एक यूजर ने इस कदम का समर्थन करते हुए “देश को बदलने वाले व्यक्ति के बारे में सबसे अच्छा और सबसे व्यापक विश्लेषण”। वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “दुखद है कि गंभीर लोग अपना पैसा और समय बर्बाद कर रहे हैं।”

यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल को राहत देने से SC का इनकार, 6 महीने में पूरी होगी सुनवाई

तहलका मैगज़ीन के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने यौन उत्पीड़न के आरोप ख़ारिज करने संबंधी उनकी याचिका को ख़ारिज कर दिया है। साथ ही तेजपाल के ख़िलाफ़ ट्रायल जारी रखते हुए निचली अदालत को 6 महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया है।

तेजपाल ने अपनी याचिका में ख़ुद के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के मामले को रद्द करने की माँग की थी। तेजपाल पर आरोप है कि उन्होंने साल 2013 में गोवा के एक पाँच सितारा होटल के एलिवेटर के अंदर महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न किया था। तेजपाल ने ख़ुद पर लगे आरोपों से इनकार किया है। ग़ौरतलब है कि तरुण तेजपाल को अपराध शाखा ने 30 नवंबर 2013 को गिरफ़्तार किया था। मई 2014 से वे ज़मानत पर बाहर हैं।

2017 में गोवा की अदालत से आरोप तय हो जाने के बाद तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख़ किया था। हाई कोर्ट ने भी आरोप खारिज करने की उनकी याचिका नामंजूर कर दी थी।

9 साल की बच्ची ने बताया: अम्मी को बड़ी अम्मी, कौसर व निदा ने पकड़ा, दिलशाद, आस मोहम्मद और रईस ने जलाया

दिल्ली के हज़रतगंज निजामुद्दीन बस्ती के कोट मोहल्ला में रहने वाली 32 वर्षीय यास्मीन को ससुराल में जलाए जाने का मामला सामने आया है। इस दौरान महिला 80 फ़ीसदी तक जल गई, जिसे दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। यास्मीन को जलाने का आरोप उसके जेठ-जेठानियों पर है।

ख़बर के अनुसार, जेठ-जेठानी ने प्रॉपर्टी और पैसों के विवाद को लेकर महिला पर मिट्टी का तेल डालकर उसे ज़िंदा जलाने की कोशिश की। ऐसा करते देख पीड़िता की तीनों बेटियाँ मौक़े पर पहुँची और अपनी माँ को जलता देख उन पर पानी डालने के लिए घरवालों से गिड़गिड़ाती रहीं। लेकिन, किसी का दिल नहीं पसीजा और महिला 80 फ़ीसदी तक जल गई। बाद में पुलिस को कॉल की गई।

दैनिक समाचार पत्र नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर

साउथ-ईस्ट-दिल्ली के डीसीपी चिन्मय विश्वाल ने बताया कि हज़रत निज़ामुद्दीन थाने में FIR दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है। यह घटना 16 अगस्त के शाम की है। फ़िलहाल अब तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हो सकी है। जानकारी के अनुसार, 32 वर्षीय यास्मीन का निक़ाह 10 साल पहले आमिर से हुआ था। चार साल पहले उसकी मौत हार्ट-अटैक से हो गई थी। शौहर की मौत के बाद यास्मीन पर ससुराल वालों ने ज़ुल्म ढाना शुरू कर दिया। यास्मीन की तीन बेटियाँ हैं, इनमें सबसे बड़ी बेटी 9 साल, दूसरी 8 साल और तीसरी 5 साल की है।

यास्मीन के मायकेवालों का कहना है कि जब तक आमिर जीवित था तब तक किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन उसकी मौत के बाद पैसों को लेकर आए दिन घर में क्लेश होने लगा। ससुराल वाले उसको महीने के 10 हज़ार रुपए बतौर खर्च देते थे, इससे उसकी तीनों बेटियों का गुज़ारा नहीं हो पाता था। 

यास्मीन की बड़ी बेटी को शुगर की समस्या है, ऐसे में जब वो खर्च बढ़ाने की बात कहती तो ससुराल वाले उससे नाराज़ हो जाते और उसे प्रताड़ित करते। बात मारपीट तक पहुँच जाती। हद तो तब बढ़ गई जब ससुराल वालों को यह लगने लगा कि कहीं वो प्रॉपर्टी में हिस्सा न माँग ले तो उसके ससुराल वालों ने उसे ज़िंदा जलाकर मार देने का षणयंत्र रचा।

यास्मीन की बड़ी बेटी ने बताया कि जब वो ट्यूशन से घर लौटी तो उसने देखा कि आग में जल रही उसकी अम्मी को बड़ी अम्मी, कौसर और निदा ने पकड़ रखा था। पीड़िता की तीनों बच्चियों ने मिलकर किसी तरह आग बुझाई। यास्मीन ने अपनी बेटी को बताया कि उसे उसके शौहर के भाइयों आस मोहम्मद, मोहम्मद दिलशाद और रईस ने अपनी बीवियों के साथ मिलकर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। 


नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर

पुलिस ने घटना-स्थल का जब मुआयना किया तो अपनी प्राथमिक जाँच में पाया कि फर्श पर मिट्टी के तेल की बोतल, पानी और तेल बिखरा हुआ था। अधजले कपड़े भी बरामद किए जिनसे मिट्टी के तेल की बदबू आ रही थी। पुलिस ने यह बात भी स्पष्ट की कि मामला प्रॉपर्टी विवाद का है, फ़िलहाल जाँच की जा रही है।

शेहला रशीद के ख़िलाफ़ क्रिमिनल कंप्लेन, तत्काल गिरफ़्तारी के लिए SC में याचिका

जम्मू-कश्मीर पर अफवाह फैलाने वाले ट्वीट करने को लेकर जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद पर शिंकजा कसता जा रहा है। उनके दावों को सेना द्वारा बेबुनियाद करार देने के बाद वकील आलोक श्रीवास्तव में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

श्रीवास्तव ने शेहला के खिलाफ सेना और सरकार के खिलाफ झूठ फैलाने और गुमराह करने का आरोप लगाते हुए आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही उसकी तत्काल गिरफ्तारी की मॉंग की है।

ग़ौरतलब है कि शेहला रशीद ने रविवार (18 अगस्त) को जम्मू-कश्मीर के हालात को लेकर एक के बाद एक कई ट्वीट किए थे। अपने ट्वीट में शेहला ने अफ़वाह फैलाई थी कि जम्मू-कश्मीर में हालात बेहद ख़राब हैं। शेहला ने ख़राब हालात का हवाला देते हुए सशस्त्र बलों पर कश्मीरियों को प्रताड़ित करने का झूठा आरोप मढ़ा था। लेकिन, भारतीय सेना ने उनके इन फ़र्ज़ी दावों की पोल खोल कर रख दी। भारतीय सेना ने शेहला के दावों को बेबुनियादी करार देते हुए कहा है कि असामाजिक तत्व और संगठन लोगों को भड़काने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे हैं।

शेहला रशीद के बारे में बता दें कि वो IAS से नेता बने शाह फैसल के साथ जम्मू-कश्मीर में अपनी राजनीतिक इच्छाएँ पूरी करने की ताक में हैं। शाह फैसल वही नेता हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्क्रिय किए जाने के बाद ‘बदला’ लेने की धमकी दी थी। उन्हें पिछले दिनों दिल्ली एयरपोर्ट पर उस समय रोक लिया गया था जब वे देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल वे श्रीनगर में नजरबंद हैं। बताया जाता है कि वे भारत सरकार के फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए देश छोड़कर जा रहे थे।

इससे पहले जम्मू के डिविजनल कमिश्नर संजीव वर्मा ने कहा था कि अफवाह फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया था कि ऐसे कुछ लोगों के बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है।

मुरारी बापू ने CM कमलनाथ को दी आत्मदाह की धमकी, कहा- BJP के खिलाफ माहौल बनाने का मिले इनाम

साल 2018 में मध्यप्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के समय कॉन्ग्रेस के लिए बढ़-चढ़ कर प्रचार करने वाले आचार्य देव मुरारी बापू ने सोमवार (अगस्त 19, 2019) को राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ को आत्मदाह करने की धमकी दी है। दरअसल, वृंदावन के संत आचार्य देव मुरारी बापू अपनी दूसरी माँगों के साथ राज्य के गौ संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष न बनाए जाने को लेकर नाराज हैं। वह अब कमलनाथ सरकार की सत्ता में भागीदारी की बात कर कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक राम मंदिर न्यास के अध्यक्ष अब अपने लिए मंत्री का दर्जा माँग रहे हैं। उन्होंने सीधी धमकी दी है कि पद नहीं मिलने पर वह सुसाइड कर लेंगे। उनकी मानें तो चुनाव में बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने का उन्हें इनाम मिलना चाहिए और उन्हें गौ संवर्धन बोर्ड का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने रविवार (अगस्त 18, 2019) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मैंने पिछले साल नवंबर में मध्यप्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस को समर्थन देकर उसके पक्ष में प्रचार किया था। संतों के समर्थन के बिना मध्यप्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार नहीं बन सकती थी। लेकिन कॉन्ग्रेस सरकार हमारी बात नहीं सुन रही है।”

खबर का स्क्रीनशॉट

इस दौरान उन्होंने बताया कि उन्होंने कमलनाथ से माँग की थी कि 15 अगस्त तक मध्यप्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड में उनकी नियुक्ति की जाए ताकि वह गौ सेवा कर सकें, लेकिन उनकी यह माँग अनसुनी कर दी गई। जिस कारण वे बेहद आहत हैं और इसलिए मुख्यमंत्री निवास के सामने आत्महत्या करेंगे। उनका कहना है कि इस सरकार ने संतों की मांगों को नहीं मानने से उनके मान-सम्मान को गिराया है।

उनकी मानें तो उन्होंने साल 2018 में कमलनाथ और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के कहने पर 15 जिलों में वहाँ की भाजपा सरकार के खिलाफ़ प्रचार किया था, लेकिन कमलनाथ सरकार ने सत्ता संभालने के बाद केवल 2 हिंदू धार्मिक नेताओं को ही जिम्मेदारी दी। एक कम्प्यूटर बाबा और दूसरे स्वामी सुबोधानंद जबकि उन्हें दरकिनार कर दिया गया। बता दें आचार्य देव मुरारी बापू ने भाजपा से अपनी जान को खतरा बताते हुए वाई श्रेणी की सुरक्षा की भी माँग की है।

354 करोड़ के बैंक घोटाले में कमलनाथ के बहन, बहनोई और भाँजे रतुल पुरी पर FIR

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 354 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भाँजे एवं मोजरबेयर के पूर्व कार्यकारी निदेशक रतुल पुरी और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों ने रविवार (अगस्त 18, 2019) को बताया कि यह मुकदमा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से दायर 354 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले मामले में दर्ज किया गया है।

CBI ने जिन पर मुकदमा दर्ज किया है, उनमें रतुल पुरी के अलावा कंपनी मोजर बिअर इंडिया लिमिटेड (एमबीआईएल), कंपनी के प्रबंध निदेशक दीपक पुरी (रतुल के पिता), कंपनी की पूर्णकालिक निदेशक नीता पुरी (रतुल की माँ और कमलनाथ की बहन) के साथ ही कंपनी के अन्य निदेशक संजय जैन और विनीत शर्मा का नाम भी शामिल है।

अधिकारियों ने बताया कि इन पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार के आरोप हैं। सेंट्रल बैंक ने एक बयान में बताया कि रतुल ने 2012 में कार्यकारी निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि उनके माता-पिता निदेशक मंडल में बने रहे।

खबर के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने के बाद जाँच एजेंसी ने दिल्ली में ओखला इंडस्ट्रियल एरिया स्थिर मोजर बिअर के ऑफिस और न्यू फ्रेंड्स कॉलेनी स्थित पुरी आवास समेत 6 जगहों पर छापे मारे। यह कंपनी कॉम्पैक्ट डिस्क (सीडी), डीवीडी और सॉलिड स्टोरेज उपकरणों का निर्माण करती है। यह मामला सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज किया गया। बैंक ने शिकायत में आरोप लगाया कि कंपनी 2009 से विभिन्न बैंकों से लोन ले रही थी और कई बार पुनर्भुगतान की शर्तों में बदलाव करा चुकी थी। 

बैंक का आरोप है कि कंपनी ने विभिन्न बैंकों से लगभग 1,962 करोड़ रुपए की विभिन्न प्रकार की ऋण सुविधाएँ ली। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने नवंबर 2011 तक कंपनी को 332 करोड़ रुपए से अधिक की क्रेडिट सुविधा दी थी। साथ ही बैंक ने आरोप लगाया कि कंपनी ने सीडीआर के तहत किए गए वादों को पूरा नहीं किया जिसके बाद बैंक ने उससे खाते वापस ले लिए गए और 29 नवंबर 2014 को लोन अकाउंट को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति घोषित कर दिया गया।

बैंक का कहना है कि जब कंपनी कर्ज का भुगतान करने में असमर्थ रही तो एक फॉरेन्सिक ऑडिट किया गया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने खाते को 20 अप्रैल 2019 को ‘फर्जी’ घोषित कर दिया। बैंक का दावा है कि कंपनी और उसके निदेशकों ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से फंड जारी कराने के लिए नकली और जाली दस्तावेजों का प्रयोग किया।

बैंक की शिकायत है कि कंपनी ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से अनुमति लिए बिना सहायक कंपनियों की ओर से 2051.87 करोड़ रुपए की कॉर्पोरेट गारंटी दी। एमबीआईएल ने 29 नवंबर, 2014 को अनुचित तरीके से बैंक को 354.51 करोड़ रुपए का नुकसान पहुँचाया, जिससे कंपनी को गैरकानूनी तरीके से लाभ हासिल हुआ।

गौरतलब है कि, पिछले दिनों आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध कानून, 1988 की धारा 24 (तीन) के तहत रतुल पुरी और उनके पिता दीपक पुरी की दिल्ली के पॉश इलाके में 300 करोड़ रुपए के बंगले और चार करोड़ डॉलर की एफडीआई राशि जब्त कर ली थी।

मस्जिद और मदरसों में आतंकियों के छिपे होने की आशंका, बेंगलुरु हाई अलर्ट पर

आतंकी हमले के अंदेशे को देखते हुए कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु हाई अलर्ट पर है। खुफिया अधिकारियों ने शहर के मस्जिदों, मदरसों और ‘अन्य धार्मिक जगहों’ पर आतंकियों के छिपे होने की आशंका जताई है।

खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक संदिग्ध केरल से बेंगलुरु में दाखिल हुए हैं और माना जा रहा है कि वे शहर के ‘धार्मिक स्थानों’ में छिपे हो सकते हैं। आतंकी हमले को लेकर इंटेलीजेंस इनपुट मिलने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने हाई अलर्ट घोषित किया है।

बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने शहर में सुरक्षा कड़ी करने और सतर्कता बढ़ाने के आदेश दिए हैं। सभी मातहतों को अपने-अपने इलाकों के प्रमुख स्थानों मसलन, विधानसभा सौध, विकास सौध, हाई कोर्ट, रेलवे स्टेशनों, बेंगलुरु मेट्रो, बस स्टेशन, स्कूल, होटल, बाजार सहित भीड़भाड़ वाली सभी जगहों पर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

हाल ही में, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने बर्धवान विस्फोट मामले में आतंकी हबीबुर रहमान शेख (28) को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसने रामनगर क्षेत्र में दो इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस (IEDs) लगाने की बात क़बूल की थी। हबीबुर रहमान, बांग्लादेश स्थित आतंकी संगठन जमात-उल मुजाहिदीन से जुड़ा है। उसे डोड्डाबल्लापुर से गिरफ़्तार किया गया था। उसने एक स्थानीय मस्जिद में शरण ली थी।

10 जुलाई को, हबीबुर रहमान द्वारा किए गए क़बूलनामों के आधार पर, NIA ने बेंगलुरु से पाँच गड़े हुए हैंड ग्रेनेड, एक-टाइमर डिवाइस, तीन इलेक्ट्रिक सर्किट, संदिग्ध विस्फोटक पदार्थ, IED और रॉकेट बनाने में उपयोग किए जाने वाले घटक ज़ब्त किए थे।

TV 9 के अनुसार, दो संदिग्धों को बेंगलुरु शहर के बगलगल्ट इलाक़े के एक ‘धार्मिक स्थल’ से गिरफ़्तार किया गया था। NIA के अधिकारियों ने दो आतंकवादियों को बेंगलुरु के सोलडेवनहल्ली इलाक़े के पास एक मदरसे से पकड़ा था।

उन्नाव रेप पीड़िता: ट्रक को सामने से आते देखा, बचने के लिए रिवर्स गियर लगाया… फिर भी रौंद डाला

उन्नाल रेप मामले की पीड़िता इस समय दिल्ली के एम्स में भर्ती है। 28 जुलाई को हुए सड़क हादसे के बाद से उसकी हालत गंभीर है। डॉक्टर उसकी रिकवरी के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। पूरा देश जानना चाहता है कि आखिर उस दिन सड़क पर क्या हुआ? क्या वाकई विधायक कुलदीप सेंगर की साजिश ने पीड़िता को अस्पताल के बिस्तर पर पहुँचा दिया या फिर हकीकत में यह कोई हादसा था?

इन अटकलों के बीच हादसे को लेकर पीड़िता का एक बयान सामने आया है। दरअसल, पीड़िता ने अपने एक रिश्तेदार को बताया है कि आखिर उस दिन क्या हुआ था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता ने रिश्तेदार को बताया कि 28 जुलाई को जब वह कार से रायबरेली जा रहे थे, तो NH-21 पर उसने सामने से एक ट्रक को आते देखा। जिसके बाद कार चला रहे पीड़िता के वकील ने उसे हर संभव कोशिश करके जाने का रास्ता दिया, लेकिन शायद ट्रक के निशाने पर वो कार थी, जिसमें पीड़िता अपनी दो रिश्तेदारों और अपने वकील के साथ बैठी थी।

पीड़िता की मानें तो वकील ने रिवर्स गियर लेकर ट्रक के रास्ते में न आने की पूरी कोशिश की लेकिन ट्रक चालक ने इसके बावजूद उनकी कार को रौंद डाला। वकील की भी हालत गंभीर है और उनका भी एम्स में इलाज चल रहा है। हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी।

लड़की के रिश्तेदार ने बताया कि उसने जब पीड़िता से पूछा कि उस दिन क्या हुआ था तो उसने कहा कि उसने उस दिन एक ट्रक को सीधे आता देखा, जिसने कुछ ही देर में उन्हें कुचल दिया। पीड़िता ने बताया, “मैंने ट्रक को सामने से आते देखा। ट्रक को इस तरह से आते हुए देखकर हम डर गए। हमने अलार्म भी बजाया था, जब हमें महसूस हुआ कि ट्रक को जिस तरह से चलाया जा रहा था उसमें कुछ असामान्य है।” 

रिश्तेदार के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि कार चला रहे वकील ने रिवर्स गियर में कार डालकर ट्रक के रास्ते से बचने की कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो सके, क्योंकि ट्रक बिल्कुल उन्हीं की तरफ मुड़ गया और फिर यह हादसा हो गया। पीड़िता की हालत अभी भी नाजुक है। बीच-बीच में होश में आने पर ये जानकारियाँ उसने रिश्तेदार के साथ साझा की।

मामले की जाँच कर रही सीबीआई को आधिकारिक तौर पर यह बयान नहीं दिया गया है। जानकारी के मुताबिक पीड़िता ने एम्स पहुँचे सीबीआई अधिकारियों से मिलने से मना कर दिया।

परिजन की मानें तो लड़की का विश्वास यूपी सरकार के बाद अब सीबीआई से भी उठ चुका है। क्योंकि उसने पहले ही सीबीआई को बोला था कि उसकी जान को खतरा है लेकिन तब भी उसकी सुरक्षा के मद्देनजर कदम नहीं उठाए गए। इसके अलावा उसका कहना है कि राज्य सरकार ने उसका मामला सीबीआई को अप्रैल महीने में सौंपा था, लेकिन जाँच एजेंसी उससे लगातार वहीं पुराने सवाल-जवाब पूछती रही और उसे न्याय दिलाने में असफल रही।

दुआ करिए जीते जी POK को भी भारत में मिलता देख लें: MOS जितेंद्र सिंह

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार (अगस्त 18, 2019) को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने पर बयान देते हुए जल्द ही POK के भारत में मिलने की कामना की। उन्होंने कहा कि अब जनता को पाक अधिकृत कश्मीर को भारत में मिलते देखने की दुआ करनी चाहिए।

भाजपा नेता ने पार्टी मुख्यालय में जम्मू-कश्मीर की वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक स्थिति पर एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “हम खुशकिस्मत हैं कि यह (जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा रद्द किया जाना) हमारे जीवनकाल में हुआ।”

उन्होंने इस दौरान मोदी सरकार द्वारा लिए गए फैसले को तीन पीढ़ियों के बलिदान का निष्कर्ष बताया। उन्होंने कहा, “यह हमारी तीन पीढ़ियों के बलिदान के कारण संभव हुआ।”

जम्मू-कश्मीर पर लिए फैसले पर बात करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र का फैसला संवैधानिक प्रावधानों के तहत ”व्यापक अनुसंधान” के बाद लिया गया है और यह किसी भी कानूनी चुनौती का सामना कर सकता है।

सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी किए जाने को लेकर बात रखते हुए कहा, ”रातों रात कुछ भी नहीं होता है।” उनकी मानें तो व्यापक अध्य्यन एवं अनुसंधान के बाद ही इस विषय के जानकारों ने इस विधेयक का मसौदा तैयार किया है।

खबरों के मुताबिक केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा, “इस ऐतिहासिक कदम के बाद, आइए हम पाक अधिकृत कश्मीर(POK) को पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त कराने और इसे संसद में (1994 में) सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के अनुरूप देश का अभिन्न हिस्सा बनाने की सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते हैं।”

उन्होंने इसी बीच लोगों से दुआ करने को कहा कि वह प्रार्थना करें कि वे अपने जीवनकाल में पीओके को देश में मिलता हुआ देख पाएँ और साथ ही लोगों को बिना किसी रोक-टोक के मुजफ्फराबाद जाते देख पाएँ।

बता दें इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की गिरफ्तारी पर विपक्ष की आलोचनाओं को भी खारिज किया और कहा, “ये लोग जिम में पसीना बहा रहे हैं, किताबें पढ़ रहे हैं और हॉलीवुड मूवी देख रहे हैं।”