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महाभारत के प्रसंगों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं देवदत्त पटनायक: 33 ट्वीट कर IIM के पूर्व छात्र ने खोली पोल

देवदत्त पटनायक को आपने अक्सर टीवी पर ‘हिन्दू मिथोलॉजी’ पर बड़े-बड़े भाषण देते हुए देखा होगा और साथ ही लोगों के सवालों का जवाब देते हुए भी। ट्विटर पर अभिनव अग्रवाल ने पटनायक के प्रोपेगेंडा की पोल खोलते हुए उनकी पुस्तकों के कई ऐसे अंश निकाले, जो या तो ग़लत हैं या फिर उन्हें तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। अभिनव अग्रवाल ने पटनायक की पुस्तकों के अंश और ओरिजिनल धर्म-ग्रन्थ से समान विषयों की तुलना कर दिखाया कि पटनायक ने तथ्यों को छेड़छाड़ कर पेश किया है। इसके लिए उन्होंने पटनायक के परामर्श से लिखी गई किताब ‘The Illustrated Mahabharata’ का उदाहरण दिया।

  1. देवदत्त पटनायक लिखते हैं कि गांधारी ने अपने बच्चे को शरीर से बाहर निकालने के लिए अपनी दासियों को अपने पेट पर लोहे की छड़ से वार करने को कहा लेकिन गीताप्रेस के किसी भी पुस्तक में ऐसा कोई प्रसंग नहीं है। महाभारत के अनुसार, गांधारी ने ख़ुद से अपने पेट पर मारा और क्षणिक गुस्से में ‘Self-Abortion’ किया।
  2. सत्यवती राजा शांतनु की पत्नी थी। देवदत्त लिखते हैं कि पांडवों और कौरवों के बीच सार्वजनिक रूप से लड़ाई देखने के पश्चात उन्होंने महल छोड़ने के निर्णय लिया। लेकिन, महाभारत की मानें तो सत्यवती ने ऋषि व्यास के कहने पर ऐसा किया। व्यास ने सत्यवती को ऐसा करने को कहा ताकि उन्हें अपने ही वंश की दुर्गति न देखनी पड़े।
  3. पटनायक ने लिखा है कि इंद्र जैसे ही कर्ण के सम्मुख आए और उसके कवच-कुंडल की माँग की, कर्ण ने तुरंत उन्हें निकाल कर सौंप दिया। जबकि महाभारत की मानें तो कर्ण ने पहले कवच-कुंडल देने से मना कर दिया। बाद में अदला-बदली में उसने इसे दे दिया।
  4. ययाति और देवयानी के मामले में पटनायक ने तो हद कर दी। उन्होंने लिखा कि ययाति ने देवयानी का हाथ पकड़ लिया और परंपरा के अनुसार उन्हें शादी करने को बाध्य होना पड़ा। देवदत्त ने ‘परंपरा’ की तानाशाही दिखाने के लिए ऐसा लिखा है। जबकि सच्चाई यह है कि देवयानी ख़ुद ययाति से शादी करना चाहती थीं और उन्होंने अपने पिता से साफ़-साफ़ कह दिया था कि उन्हें कोई और व्यक्ति पति के रूप में स्वीकार्य नहीं है।
  5. देवदत्त पटनायक लिखते हैं कि जयद्रथ वध के बाद द्रोणाचार्य काफ़ी गुस्से में थे और उन्होंने अपनी सेना को सूर्यास्त के बाद भी लड़ते रहने का आदेश दिया। महाभारत के अनुसार, दुर्योधन ने द्रोण को खरी-खोटी सुनाई और इसके बाद द्रोण ने दुर्योधन से पूछा, “तुम सबके आस-पास रहते भी जयद्रथ की मृत्यु कैसे हो गई? तुम लोगों ने तो उसे बचाने की प्रतिज्ञा ली थी और अर्जुन को घेर भी रखा था?
  6. देवदत्त पटनायक लिखते हैं कि महाभारत में शिखंडी को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया है। यह झूठ है क्योंकि महाभारत में एक पूरा का पूरा अध्याय शिखंडी के ऊपर है। इसका नाम है अम्बोपाख्यान, जिसमें खुद भीष्म ने कई चीजें बताई हैं। अर्थात, शिखंडी और उसके किरदार के बारे में सब कुछ बताया गया है।
  7. एक ही पुस्तक में दो अलग-अलग स्थानों पर पटनायक ने विरोधाभाषी बातें लिखी हैं। एक जगह उन्होंने लिखा है कि बुजुर्गों की दुर्दशा ऐसी है कि उनके बच्चे-बच्चियाँ उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते। वहीं दूसरी तरफ ख़ुद को ही काटते हुए पटनायक लिखते हैं कि समाज में बुजुर्गों का प्रभुत्व है।
  8. परशुराम-भीष्म की लड़ाई पर तथ्यों को ग़लत तरीके से पेश करते हुए पटनायक ने लिखा है कि चूँकि भीष्म को मारना असंभव था, परशुराम ने हार स्वीकार कर ली। जबकि, परशुराम के हार मानने का कारण यह था कि भीष्म ने एक घातक अस्त्र निकाल लिया था, जिसे उन्होंने बाद में देवताओं की सलाह के बाद वापस ले लिया।

हालाँकि, देवदत्त पटनायक ने अभिनव अग्रवाल के इस ट्विटर थ्रेड का जवाब देते हुए लिखा कि इस पुस्तक को उनके परामर्श से लिखा गया है लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह लिखा नहीं है। इसके बाद अभिनव ने उनकी अन्य पुस्तकों का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने कई जगह ऐसे ही तथ्यों से छेड़छाड़ की है। उनकी किताब ‘जया’ में भी गांधारी वाले झूठ का वर्णन है। सत्यवती वाली कहानी भी ‘जया’ में हूबहू है।

(यह पूरा का पूरा लेख अभिनव अग्रवाल द्वारा देवदत्त पटनायक की पुस्तक पढ़े जाने के बाद उसमें निकाली गई खामियों पर आधारित है।)

अयोध्या: बाबर का वंशज रखना चाहता है राम मंदिर की पहली ईंट, कहा- शांति दूत बनाकर भेजो कश्मीर

अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई के बीच बाबर के वंशज ने एक बड़ा दावा किया है। खुद को मुगल साम्राज्य के अंतिम शासक बहादुर शाह जफर का वंशज बताने वाले याकूब हबीबुद्दीन तुसी ने अयोध्या में राम मंदिर की पहली ईंट रखने की ख्वाहिश जताई है। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से खुद को शांति दूत बनाकर जम्मू-कश्मीर भेजने की अपील की है।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में तुसी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की इच्छा जताते हुए कहा कि हमारा परिवार उसकी पहली ईंट रखेगा और हम मंदिर की नींव के लिए सोने की शिला दान करेंगे। तुसी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर खुद को अयोध्या मामले में पक्षकार बनाने की भी अपील की थी।

तुसी के मुताबिक जिस जमीन को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है उसके मालिकाना हक का कागज किसी के पास नहीं हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि मुगल वंशज होने की हैसियत से उन्हें अदालत में अपनी बात रखने का मौका मिले।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित तुसी का बयान

उन्होंने कहा कि बाबर ने अपने सैनिकों को नमाज पढ़ने की जगह देने के लिए बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। यह स्थान सिर्फ सैनिकों के लिए था और किसी के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि मैं इस विवाद में नहीं पड़ना चाहता कि वहॉं मस्जिद से पहले क्या था। लेकिन, यदि हिन्दू उस स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं तो मैं उनकी भावना का सम्मान करूंगा।

तुसी ने कहा कि इस जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा कोई दस्तावेज उनके पास नहीं है। लेकिन, मुगल वंश के उत्तराधिकारी की हैसियत से वे इस जमीन के अधिकारी माने जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि यह जमीन उन्हें मिलती है तो वह इसे मंदिर निर्माण के लिए दान कर देंगे।

वहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे एक पत्र में तुसी ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने के फैसले की सराहना की है। पत्र में उन्होंने कहा है, “मेरी लोकप्रियता, मेरी विरासत और जम्मू-कश्मीर में मेरी पहचान को देखते हुए मैं कश्मीर में प्रत्यक्ष रूप से शांति संदेश फैलाने के लिए जनता और सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता हूँ।”

CBI करेगी कुमारस्वामी सरकार के दौरान हुई फोन टैपिंग के आरोपों की जाँच: CM येदियुरप्पा ने लिया फैसला

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कुमारस्वामी सरकार के दौरान फोन टैपिंग स्कैंडल मामले की जाँच की जिम्मेदारी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का फैसला किया है। येदियुरप्पा ने रविवार (अगस्त 18, 2019) को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सभी दल के नेताओं ने फोन टैपिंग मामले में उच्चस्तरीय जाँच की माँग की थी, इसलिए उन्होंने इस केस की जाँच सीबीआई से कराने का फैसला लिया है।

येदियुरप्पा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ‘‘टेलीफोन टैपिंग के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता सिद्दरमैया समेत कई नेताओं ने कहा कि इसकी जाँच होनी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए, इसलिए मैंने सीबीआई जाँच का आदेश देने का फैसला किया है।”

गौरतलब है कि अयोग्य करार दिए गए जद (एस) विधायक ए एच विश्वनाथ ने पिछले सप्ताह एच डी कुमारस्वामी की सरकार पर फोन टैप करने और उनके समेत 300 से अधिक नेताओं की जासूसी कराने के आरोप लगाए। इसके बाद येदियुरप्पा ने यह घोषणा की है। सिद्दरमैया, एम. मल्लिकार्जुन खड़गे और गठबंधन सरकार में गृह मंत्री रहे एम बी पाटिल समेत कॉन्ग्रेस नेताओं ने जाँच की माँग की है, जबकि पार्टी के एक अन्य अहम नेता और पूर्व मंत्री डी के शिवकुमार ने आरोपों को खारिज कर दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार समेत कई भाजपा नेताओं ने कुमारस्वामी पर अपनी सरकार बचाने के लिए इस प्रकरण के पीछे होने का आरोप लगाया है। विधानसभा में विश्वास मत हारने के बाद पिछले महीने गठबंधन सरकार गिर गई थी। कुमारस्वामी ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘मुझे फोन टैप करके कुर्सी बचाने की कोई जरूरत नहीं है। इस मामले में कुछ लोगों ने मेरे खिलाफ जो आरोप लगाए हैं, वे सच्चाई से परे हैं।”

नेहरू के कारण चीनी सेना हमारे क्षेत्र में घुसती गई और हम पीछे हटते गए: लद्दाख के सांसद

लद्दाख के लोकप्रिय सांसद जाम्यांग सेरिंग नामग्याल अनुच्छेद 370 पर संसद में दिए गए जोशीले भाषण के कारण पूरे देश में छा गए थे और जिस तरह से उन्होंने अब्दुल्ला व मुफ़्ती परिवार पर निशाना साधते हुए लद्दाख की जनता की राय सामने रखी, उससे सोशल मीडिया पर उनकी खूब चर्चा हुई। इसके बाद लद्दाख पहुँचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वह अपने संसदीय क्षेत्र में तिरंगे के साथ नाचते नज़र आए थे। अब नामग्याल ने कॉन्ग्रेस सरकार पर रक्षा नीतियों में क्षेत्र की अनदेखी करने का बड़ा आरोप लगाया है।

नामग्याल ने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार की ग़लत नीतियों की वजह से ही चीन ने डेमचोक सेक्टर तक के इलाक़े पर कब्ज़ा कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने तनावपूर्ण स्थितियों में भी तुष्टिकरण को अपनी प्राथमिकता बनाए रखा और न सिर्फ़ कश्मीर को बर्बाद किया बल्कि लद्दाख को भी काफी क्षति पहुँचाई। पीटीआई को दिए गए इंटरव्यू में लद्दाख के सांसद ने कहा:

“पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ‘फॉरवर्ड पॉलिसी’ अपनाई जिसमें कहा गया कि हमें एक-एक इंच चीन की ओर बढ़ना चाहिए। इसके कार्यान्वयन के दौरान यह ‘बैकवर्ड पॉलिसी’ बन गई। चीनी सेना लगातार हमारे क्षेत्र में घुसपैठ करती चली गई और हम लगातार पीछे हटते चले गए। यही वजह है कि अक्साई चीन पूरी तरह से चीन के नियंत्रण में है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवान डेमचोक ‘नाला’ तक पहुँच गए क्योंकि लद्दाख को कॉन्ग्रेस के 55 वर्षों के शासन में रक्षा नीतियों में उचित तवज्जो नहीं मिली।”

भारत और चीन सीमा को लेकर कई वर्षों से विवाद चलता आ रहा है और चीन की विस्तारवादी नीति के कारण उसके कई पड़ोसियों से सम्बन्ध अच्छे नहीं हैं। चीन ने गुलाम कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर रखा है, जिसे अक्साई चीन के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा शक्‍सगम घाटी के बड़े हिस्से पर भी चीन का अवैध कब्ज़ा है। नामग्याल ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने पथराव करने वालों को खुश किया और अलगाववादियों को संरक्षण दिया।

नामग्याल ने कहा कि लद्दाख में एक डिग्री कॉलेज है जो कश्मीर विश्वविद्यालय के तहत आता है। इससे हर काम के लिए छात्रों को श्रीनगर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अगर कश्मीर में कोई दिक्कत हो तो लद्दाखी छात्रों को भी पाठ्यक्रम पूरा करने में 3 की जगह 5 साल लग जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बोधि भाषा के शिक्षकों के पदों को कश्मीरी भाषा के शिक्षकों के पदों में परिवर्तित कर दिया गया।

कश्मीरी औरतें जो हवस और जहन्नुम झेलने को मजबूर हैं

‘ग़र फ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मीं अस्त, हमीं अस्त ओ हमीं अस्त ओ हमीं अस्त’- यह कहकर किसी ने कश्मीर को स्वर्ग बताया था। जिसने भी यह कहा था उसको शायद यह इल्म नहीं था कि आने वाले समय में आज़ादी की चाह रखने वाले कुछ कश्मीरी ही कश्मीर को नर्क बना देंगे। दहशतगर्द तंज़ीमों के साए में रहने वाली औरतों के लिए तो कम से कम कश्मीर जहन्नुम से कम नहीं। प्रोफेसर कविता सूरी ने अपनी पुस्तक Voices Unheard में उन कश्मीरी औरतों की कहानियाँ लिखी हैं जिनका जीवन आतंक के साए में जीते जी नर्क बन गया।

अनंतनाग में रहने वाली हसीना बानो की ज़िंदगी खुशहाल थी। पिता डाक विभाग में काम करते थे और हसीना अपनी माँ के साथ घर के कामों में हाथ बंटाती थीं। फिर एक दिन हसीना की माँ अल्लाह को प्यारी हो गई और बाप के कंधे पर बेटी की ज़िम्मेदारियों का आसमान टूट पड़ा। धीरे-धीरे पाल पोस कर बाप ने बेटी को बड़ा किया और एक दिन कारपेंटरी का काम करने वाले मोहम्मद अमीन शाह के साथ हसीना का निकाह हो गया।

हसीना ने सोचा कि अब खुशियाँ उसका दामन नहीं छोड़ेंगी लेकिन कुछ ही सालों बाद अमीन शाह ने घर परिवार छोड़कर दहशतगर्दी की राह पकड़ ली। वह आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन में शामिल होकर ‘तहरीक़’ की खूनी मुहीम का हिस्सा बन गया। अमीन ने बंदूक उठाई थी तो अंत भी एक दिन वैसा ही हुआ। सुरक्षा बलों के हाथों अमीन मारा गया और पीछे रह गई हसीना बानो और उसकी बेटियाँ। आज हसीना किसी तरह अपनी बेटियों को पाल रही हैं। कश्मीर में ऐसी न जाने कितनी औरतें हैं जिन्होंने दहशतगर्दी के कारण अपने पति, बेटे और बाप खोए हैं।

शहज़ादा युसूफ बेग़म का निकाह इदरीस खान से हुआ था। इदरीस खान जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के सरगना यासीन मलिक का दाहिना हाथ हुआ करता था। सन 1995 में इदरीस मारा गया और पीछे छोड़ गया अपनी बीवी शहज़ादा और दो बेटियाँ। आज शहज़ादा कहती है, “मेरे शौहर ने यासीन मलिक के लिए जान दे दी लेकिन पार्टी (JKLF) ने उसके लिए कुछ नहीं किया।” शहज़ादा के ससुरालवालों ने भी उसे बुरे वक़्त में घर से निकाल दिया था। उस वक़्त कोई भी आज़ादी चाहने या दिलाने का दिलासा देने वाला उसकी मदद के लिए नहीं खड़ा हुआ था।  

ऐसी अनेकों कहानियाँ हैं जब किसी कश्मीरी औरत का बाप, बेटा, भाई या शौहर दहशतगर्द बन सुरक्षाबलों के हाथों मारा जाता है तब उन औरतों का साथ निभाने के लिए कोई खड़ा नहीं होता। ऐसी औरतें दहशतगर्दों के हाथों बलात्कार, हिंसा समेत हर तरह के सितम का शिकार होती हैं। बाइस साल की गुलशन बानो के दो भाई हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन में शामिल होकर आतंकी बन गए थे। उनके मारे जाने के बाद गुलशन को सिलाई कढ़ाई कर मात्र ₹1000 महीने पर परिवार चलाने को मजबूर होना पड़ा था।

ज़िंदगी केवल उनकी ही बर्बाद नहीं होती जिनके परिवार के मर्द दहशतगर्द बनते हैं। आतंकियों के हाथों मारे गए लोगों के परिवारवालों की भी सुनने वाला कोई नहीं होता। कुलसुम जान के बाप अब्दुल जब्बार डार कुपवाड़ा में कॉन्ग्रेस के जिला अध्यक्ष थे जब उन्हें 1996 में गोली मार दी गई थी। डार की मौत के बाद उनकी दिव्यांग पत्नी और बच्चों को देखने वाला कोई नहीं था।

दहशतगर्दों ने केवल मर्दों को आतंकी ही नहीं बनाया, उन्होंने सैकड़ों कश्मीरी लड़कियों को अपनी हवस का शिकार भी बनाया। डोडा ज़िले की रहने वाली चौबीस साल की शमा बेगम का अंत 2006 में बड़ा भयानक हुआ था। जावेद इक़बाल उर्फ़ जीशान नामक हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन का एक आतंकवादी शमा का पीछा करता था और उसे अपनी हवस मिटाने का ज़रिया समझता था। जब शमा ने अपना शरीर उसे सौंपने से इनकार किया तो जीशान ने उसके परिवार को मार डालने की धमकी दी। आखिरकार उस दरिंदे ने बेबस शमा का दो महीने तक बलात्कार किया और एक दिन जब वह सुरक्षा बलों से भाग रहा था तब शमा उसके सामने आ गई। जीशान ने पुलिस का ध्यान भटकाने के लिए शमा को ऊंचाई से नीचे फेंक दिया जिसके कारण उसकी मौत हो गई।     

दहशतगर्दी के शुरुआती दिनों में आतंकियों को हीरो समझा जाता था। उन्हें मुजाहिद कहकर सम्मान भी दिया जाता था। लोग अपनी बेटियों की शादी इनसे करवाते थे लेकिन जब ये मुजाहिद निकाह के साल दो साल बाद ही अपनी बीवियों को छोड़ सीमापार चले जाने लगे तब कश्मीरियों को यह एहसास हुआ कि आज़ादी की बंदूक थामे ये लड़ाके असल में जिस्म को नोचने वाले भेड़िये हैं।

डोडा की ही रहने वाली मरियम बेगम का भाई अब्दुल लतीफ हरक़त-उल-मुजाहिदीन का आतंकवादी था। एक दिन हिंसा और आज़ादी के खोखले वादों से ऊबकर उसने बंदूक छोड़ने की ठानी। लेकिन उसके दहशतगर्द आकाओं ने उसे ऐसे नहीं छोड़ा। उन्होंने उसकी मासूम छोटी बहन मरियम और पिता को भी पकड़ लिया। आतंकियों ने उन दोनों को बंदूक के बट से बेइंतहा मारा और जलती सिगरेट से दागा। उन्होंने बाप बेटी को अब्दुल के सरेंडर करने का कसूरवार ठहराया और ऐसा टॉर्चर किया कि शैतान की भी रूह काँप गई। मरियम के साथ बलात्कार करने के बाद बाप बेटी के नाक और कान काटकर मरने के लिए छोड़ दिया गया। वह तो ईश्वरीय कृपा से पेट्रोलिंग करती सेना की एक टुकड़ी पहुँच गई, जिसके बाद मरियम की जान बची।

प्रोफेसर कविता सूरी ने कश्मीरी महिलाओं की तकलीफों पर लिखी अपनी पुस्तक में कश्मीर में चल रही वेश्यावृत्ति पर भी लिखा है। इसका कारण भी दहशतगर्दी ही है। जो औरतें विधवा हो जाती हैं और लड़कियाँ अनाथ हो जाती हैं उन्हें मजबूरन जिस्मफरोशी के धंधे में उतरना पड़ता है। इसका एक कारण इस्लामी चरमपंथी विचारधारा को थोपना भी है। लश्कर-ए-जब्बार और दुख्तरन-ए-मिल्लत जैसे संगठन ज़बरदस्ती बुर्क़े और हिज़ाब को थोपने पर आमादा हैं। इस प्रकार की घुटन और दबाव के कारण भी विधवा औरतें मनोवैज्ञानिक विरोधस्वरूप इस पेशे से जुड़ जाती हैं।

J&K पर चलाया प्रोपगेंडा तो सस्पेंड हुए कई हैंडल्स: पाक ने ट्विटर के भारतीय कर्मचारियों को बताया जिम्मेदार

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता और अफवाह फैलाने के लिए कुख्यात आसिफ गफूर ने ट्विटर पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उन्होंने ट्विटर पर ट्विटर के ख़िलाफ़ ट्वीट करते हुए यह रोना रोया है। बता दें कि हाल ही में भारत सरकार ने ट्विटर को कई ऐसे एकाउंट्स की सूची सौंपी थी, जिनके द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही थीं। इन हैंडल्स द्वारा जम्मू कश्मीर में खून-खराबे की झूठी ख़बर फैलाई जा रही थी। इनमें कश्मीरी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के नाम से भी हैंडल था। गृह मंत्रालय ने ट्विटर से इन पाकिस्तानी प्रोपेगंडा चलाने वाले हैंडल्स को बंद करने को कहा था।

पाकिस्तान के मेजर जनरल आसिफ गफूर ने बताया कि उनके कई ट्विटर हैंडल्स सिर्फ़ इसीलिए बंद कर दिए हैं क्योंकि उनके द्वारा ‘कश्मीर के समर्थन में’ ट्वीट्स किए जा रहे थे। गफूर ने लिखा कि पाकिस्तान ने इन एकाउंट्स को सस्पेंड किए जाने का मामला ट्विटर के समक्ष उठाया है। गफूर ने इन सबके लिए ट्विटर में कार्यरत भारतीय कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया। गफूर के अनुसार, “ट्विटर में कार्यरत भारतीय कर्मचारियों के कारण पाकिस्तानी एकाउंट्स सस्पेंड किए जा रहे हैं।”

साथ ही गफूर ने ट्विटर पर ऐसे लोगों को उन एकाउंट्स के बारे में जानकारी देने को कहा, जिनके एकाउंट्स सस्पेंड हुए हों या जो ऐसे किसी अकाउंट के बारे में जानते हों। इसके बाद पाकिस्तानी लोगों ने रिप्लाई में कई भारत-विरोधी हैंडल्स के सस्पेंड होने की बात बताई। तलत नामक महिला ने बताया कि पिछले 2 दिनों के भीतर उसके 4 एकाउंट्स सस्पेंड किए गए हैं। उन्होंने लिखा कि इन सारे एकाउंट्स का प्रयोग कश्मीर से सम्बंधित ट्वीट्स करने के लिए किया जा रहा था।

कई पाकिस्तानी यूजर्स ने ऐसे एकाउंट्स की झड़ी लगा दी, जिन्हें ट्विटर ने सस्पेंड कर दिया गया है। इससे पता चलता है कि भारत के ख़िलाफ़ एजेंडा चलाने में पाकिस्तान ने ट्विटर का पूरी तरह से ग़लत इस्तेमाल किया है और सोशल मीडिया पर मिली लिबर्टी का ग़लत फायदा उठाया है। भारत के स्वतंत्रता दिवस के दिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान सहित वहाँ के कई नेताओं ने अपनी प्रोफाइल पिक्चर को काला कर लिया था। ट्विटर पर भारत विरोधी प्रोपेगंडा चलाए जाने के कारण ही गृह मंत्रालाय ने कम्पनी को इस सम्बन्ध में कार्रवाई करने को कहा था।

भूटान में छात्रों से रूबरू हुए PM मोदी, कहा- आपकी पुरानी पीढ़ी को भारतीयों ने पढ़ाया है

दो दिवसीय भूटान यात्रा के आखिरी दिन रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहॉं के छात्रों से रूबरू हुए। भूटान के रॉयल यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करते उन्होंने अंतरिक्ष और डिजिटल भुगतान जैसे नए क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग का प्रस्ताव भी रखा।

मोदी ने कहा कि भूटान के छात्रों में असाधारण चीजें करने की क्षमता है। छात्रों से लगन से काम कर अपने देश को ऊंचाइयों पर ले जाने को कहा। उन्होंने कहा, “विश्व आज पहले से कई अधिक अवसर मुहैया कराता है। आप में असाधारण चीजें करने की क्षमता है जो भावी पीढ़ी को प्रभावित करेगी। अपनी रुचि को पहचानें और पूरे जुनून के साथ उसपर काम करें।”

मोदी ने भूटान के साथ प्राचीन रिश्तों को याद करते हुए कहा कि मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में साझेदारी है। उन्होंने कहा, “आपके 130 करोड़ भारतीय दोस्त सिर्फ़ आपके आगे बढ़ने पर गौरवान्वित ही नहीं होंगे बल्कि आपकी प्रशंसा भी करेंगे। वे आपको भागीदार बनाएँगे, आपके साथ अपने ज्ञान को साझा करेंगे और आपसे सीखेंगे।”

उन्होंने कहा कि भारत और भूटान के बीच एक ख़ास रिश्‍ता है, दोनों ऐसे पड़ोसी देश हैं जो एक-दूसरे की परंपरा को समझते और उसका सम्मान करते हैं।

उन्होंने कहा, “भूटान का संदेश खुशहाल मानवता है। खुशी सद्भाव से मिलती है और दुनिया इसके साथ बहुत अधिक ख़ुश रह सकती है। यह नासमझ नफ़रत पर हावी होगी। यदि लोग ख़ुश हैं, तो सद्भाव होगा।”

उन्होंने कहा कि भूटान ने सद्भाव, एकता और करुणा को समझा है। उन्होंने कहा,

“मैं कल उन प्यारे बच्चों के बीच से निकला जो मेरे स्वागत के लिए सड़कों पर खड़े थे। मैं हमेशा उनकी मुस्कुराहट को याद रखूँगा।”

भूटानी प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग के एक फेसबुक पोस्ट को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस पोस्ट ने मेरे दिल को छू लिया। इस पोस्ट में उन्होंने उनकी पुस्तक ‘एग्ज़ाम वारियर्स’ का उल्लेख किया था और परीक्षार्थियों को इसे पढ़ने की सलाह दी थी। पीएम मोदी ने बताया कि यह पुस्तक उन्होंने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से प्रेरित होकर लिखी थी।

इसके अलावा उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया कि 20वीं शताब्दी में, कई भारतीय शिक्षक के रूप में भूटान आए। उन्होंने कहा, “पुरानी पीढ़ी के अधिकांश भूटानी नागरिकों का कभी न कभी एक भारतीय शिक्षक रहा होगा।”

भूटान की ख़ूबसूरती की तारीफ़ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो एक बार भूटान आ जाएगा वो यहाँ की नेचुरल ब्यूटी और यहाँ के लोगों की सादगी से ज़रूर प्रभावित होगा।

भूटान दौरे पर पहुँचे पीएम मोदी ने अपने देश के संदर्भ में कहा कि भारत ग़रीबी से तेज़ी से लड़ रहा है, जिससे जल्द ही इससे निजात पाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि भूटान और भारत का आपसी रिश्ता काफ़ी अच्छा है और उन्होंने संभावना जताई है कि दोनों देश आगे भी इसी तरह एक-दूसरे का साथ देते रहेंगे।

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (अगस्त 17, 2019) को भूटान पहुँचे थे। इस मौके पर भारत और भूटान के बीच हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट, नॉलेज नेटवर्क, मल्टी स्पेशलिएटी हॉस्पिटल, स्पेस सैटेलाइट, रूपे कार्ड के इस्तेमाल समेत कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। प्रधानमंत्री मोदी की इस भूटान यात्रा को दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में निरंतर किए जा रहे प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

राजस्थान: हरीश जाटव के नेत्रहीन पिता के शव के साथ सड़क पर उतरे लोग, पुलिस से झड़प

राजस्थान में मजहबी भीड़ की पिटाई के कारण जान गॅंवाने वाले युवक हरीश जाटव के नेत्रहीन पिता रत्तीराम के शव के साथ भिवाड़ी में लोगों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों की पुलिस से झड़प हो गई।

जाटव मामले की पुलिसिया जॉंच से परेशान होकर उसके पिता ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद उसके परिवार के लोगों ने न्याय नहीं मिलने पर आत्मदाह करने की चेतावनी प्रशासन को दी थी। जाटव के परिजन और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस मॉब लिंचिंग के मामले को दबाने में जुटी है।

राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस घटना को लेकर प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा है, “सरकार एक तरफ तो मॉब लिंचिंग पर कानून लाकर दिखावा कर रही, दूसरी ओर हरीश जाटव हत्याकांड को दबाने में लगी।”

हरीश जाटव के परिजन जल्द न्याय नहीं मिलने पर आत्मदाह की तैयारी में हैं। परिजनों का दावा है कि पुलिस के काम करने के तरीके से परेशान होकर ही रत्तीराम ने आत्महत्या की। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अलवर पुलिस मॉब लिंचिंग के इस मामले को एक्सीडेंट साबित करने पर तुली हुई है।

गत 16 जुलाई को हरीश जाटव बाइक पर सवार होकर अलवर के भिवाड़ी से अपने गाँव झिवाणा जा रहा था। रास्ते में फलसा गाँव में हरीश की बाइक से एक महिला को टक्कर लग गई थी। इसके बाद महिला के परिजनों ने हरीश की जमकर पिटाई की। वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। इलाज के दौरान 18 जुलाई को हरीश की मौत हो गई। हरीश के परिजन इसे मॉब लिंचिंग की घटना बता रहे, वहीं अलवर एसपी ने प्रेसवार्ता कर हरीश की मौत को एक एक्सीडेंट करार दिया।

इस मामले में पुलिस की कथित लापरवाही और हरीश के नेत्रहीन पिता की आत्महत्या के बाद दलित समाज के लोग टपूकड़ा में एकत्रित हो गए थे और आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने पर जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने की चेतावनी दी थी।

मामला सामने आने के बाद बसपा और भाजपा के नेता भी टपूकड़ा में हैं। दलित समाज के आक्रोश को देखते हुए पुलिस फोर्स तैनात की गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दलित समाज के प्रमुख लोगों को समझाने के प्रयास में जुटे है।

राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को फिर चेताया, कहा- अब गुलाम कश्मीर पर होगी बात

बीते दिनों परमाणु हथियार पर भारत की नीति में भविष्य में बदलाव की बात कह पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी को फिर से चेताया है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान से अब अगर बात हुई तो गुलाम कश्मीर पर होगी।

वे हरियाणा के पंचकूला में सभा को संबोधित कर रहे थे। राजनाथ सिंह ने कहा, “जम्मू-कश्मीर में विकास के लिए आर्टिकल 370 के प्रावधान खत्म किए गए हैं। हमारा पड़ोसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दरवाजे खटखटा रहा है और कह रहा है कि भारत ने गलती की है। पाकिस्तान से बात तभी होगी जब वह आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करेगा। यदि बातचीत हुई तो गुलाम कश्मीर पर होगी।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने यह कहा था कि भारत बालाकोट हमले से भी बड़ी तैयारी कर रहा है। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान के पीएम ने वह मान लिया है जो भारत ने बालाकोट में किया था।

गौरतइससे पहले रक्षा मंत्री ने शुक्रवार (अगस्त 16, 2019) को कहा था कि विषम परिस्थितियों में भारत परमाणु हथियारों को ‘पहले इस्तेमाल न करने’ की अपनी नीति में बदलाव कर सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि पर दिए इस बयान से पाकिस्तान सहमा हुआ है।

राजनाथ सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “पोखरण वह क्षेत्र है, जिसने भारत को परमाणु शक्ति बनाने के लिए अटल जी के दृढ़ संकल्प को देखा और अभी तक पहले इस्तेमाल न करने की नीति के सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्ध है। भारत ने इस सिद्धांत का कड़ाई से पालन किया है। भविष्य में क्या होता है यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है।”

मेजर सुरेंद्र पूनिया को पाकिस्तान से मिली धमकी, कहा- डर क्या होता है मालूम नहीं

मेजर सुरेन्द्र पूनिया (सेवानिवृत्त) ने शनिवार (17 अगस्त) को गृह मंत्रालय से धमकी भरे कॉल और संदेश आने की ऑनलाइन शिक़ायत की है। उन्हें भारत-पाक मुद्दों पर ट्वीट बंद करने की चेतावनी देते हुए धमकी दी गई है।

मेजर पूनिया ने धमकी भरे संदेश के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं, जिसमें अज्ञात नंबर से उन्हें बदनाम करने की धमकी दी गई है। इसके जवाब में पूनिया ने लिखा है कि ‘बलिदान’ उनके रेजीमेंट का प्रतीक है और डर क्या होता है यह उन्हें नहीं मालूम।

मेजर पूनिया ने वोडाफोन को टैग किए ट्वीट में उन्होंने सेवा प्रदाता कंपनी से गोपनीयता उल्लंघन के बारे में सवाल पूछते हुए अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

उन्होंने कहा है कि कॉल करने वाले ने उन्हें धमकी दी है कि अगर उन्होंने भारत-पाकिस्तान से संबंधित ट्वीट करने बंद नहीं किए तो वो उनकी अश्लील वीडियो उनके पड़ोसियों के बीच वायरल कर देगा।