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हमारा विश्वास क़ुरान में, RSS इसके उलट है: इमरान ने ख़ुद को घोषित किया ‘कश्मीर का प्रतिनिधि’

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अपने देश को सम्बोधित करते समय ऐसे-ऐसे बयान दिए, जो भारत में एक ख़ास वर्ग द्वारा बार-बार दुहराए जाते हैं। उनके बयान में कुछ भी नया नहीं था। हाँ, इस्लामिक देशों द्वारा भारत को समर्थन दिए जाने से वह ख़फ़ा और निराश दिखे। उनके बयान में वही आरएसएस, भाजपा, नेहरू और गाँधी थे। पाक पीएम ने कहा कि उनका देश कुरानशरीफ में विश्वास रखता है जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसकी उलटी विचारधारा पर चलता है।

महात्मा गाँधी की हत्या के लिए भी इमरान ख़ान ने आरएसएस को ज़िम्मेदार ठहराया। हालाँकि, उनका यह बयान तथ्यों से परे है क्योंकि संघ का राष्ट्रपिता की हत्या में कोई रोल नहीं था। भारत में ‘गिरोह विशेष’ के कई लोग भी यही रोना रोते हैं। इसके बाद उन्होंने संघ के बारे में कई झूठे दावे किए। इमरान ने कहा कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद संघ की पकड़ मजबूत होती चली गई। जबकि, सच्चाई यह है कि आजादी से पहले भी संघ के कैडर ने अंग्रेजों से लोहा लिया था, जिस कारण ब्रिटिशर्स ने उसे प्रतिबंधित कर दिया था।

इमरान ख़ान ने दावा किया कि संघ हिन्दुओं के अलावा बाकी सभी लोगों को दोयम दर्जे का नागरिक मानता है। उन्होंने यह भी झूठ बोला कि पिछली सरकारों ने आरएसएस को ‘आतंकवादी संगठन’ मान कर प्रतिबंधित कर दिया था। कुल मिला कर देखें तो राष्ट्र को सम्बोधित करने के नाम पर इमरान ने पाकिस्तान की कूटनीतिक खामियों को छिपाने के लिए संघ और भाजपा को जम कर गालियाँ दी। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटा कर ‘बहुत बड़ी ग़लती’ कर दी है और ‘कश्मीर की आज़ादी’ के लिए रास्ते खोल दिए हैं।

इमरान ख़ान ने कहा कि पश्चिमी मीडिया भारत की आलोचना कर रहा है। यह अजीब है कि कूटनीतिक स्तर पर पूरी तरह फेल हो चुका एक देश का मुखिया मीडिया रिपोर्ट्स में ही अपनी ख़ुशी ढूँढ रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि वैश्विक संस्थाएँ शक्तिशाली का ही साथ देती हैं लेकिन आज 125 करोड़ मुस्लिम यूएन की तरफ देख रहे हैं। यहाँ यह बताना ज़रूरी है कि पाकिस्तान की जनसंख्या 20 करोड़ के क़रीब है। ऐसे में इमरान अपने आप को 105 करोड़ अतिरिक्त लोगों का नुमाइंदा किस आधार पर बता रहे हैं, यह कहना मुश्किल है।

इतना ही नहीं, इमरान ने ख़ुद को कश्मीर की जनता का प्रतिनिधि भी घोषित कर डाला। उन्होंने वैश्विक समुदाय को धमकी देते हुए कहा कि अगर परमाणु युद्ध हुआ तो कोई नहीं जीतेगा लेकिन दुनिया को इसके दुष्प्रभाव झेलने पड़ेंगे। कश्मीर पर पाकिस्तान की कूटनीतिक जीत का दावा करते हुए इमरान ने कहा कि वे इस मसले के अंतरराष्ट्रीयकरण में सफल रहे हैं। इमरान ख़ान का यह सम्बोधन झूठ, विरोधाभासी, खोटी धमकियों और बहानों से भरा पड़ा है।

ये बडे साँड़ों के खेल है, ग्रामसिंहों का नहीं: ट्रम्प-मोदी की जुगलबंदी पर कुमार विश्वास ने इमरान खान को दिखाया आईना

फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की जुगलबंदी पर मंचीय कवि और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता कुमार विश्वास ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर निशाना साधा है। पाकिस्तान को ‘ग्रामसिंह’ (गीदड़) की संज्ञा देते हुए नसीहत दी कि अगर पाकिस्तान पीछे नहीं हटा तो बलूचिस्तान खोना पड़ सकता है।

हिंदुस्तान-पाकिस्तान के मुद्दों में तीसरे को तंग क्यों करना?

प्रधानमंत्री मोदी G7 देशों के सम्मेलन में भाग लेने फ्रान्स पहुँचे हुए हैं। इस शिखर सम्मेलन के इतर उन्होंने ट्रम्प के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की। ट्रम्प भी इसी सम्मेलन के लिए आए हुए थे। इसी दौरान मोदी ने यह बयान दिया कि हिंदुस्तान-पाकिस्तान के सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं, इसीलिए हम अन्य देशों को उन्हें लेकर ‘परेशान’ नहीं करते।

मोदी का यह बयान और इसका समय बहुत महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान के जम्मू-कश्मीर को लेकर हिंदुस्तान-विरोधी प्रोपेगंडा पर ट्रम्प से बात करने की खबरें आने के बाद से मोदी देश में विपक्षी दलों और आलोचकों के निशाने पर थे, जो उनसे पूछ रहे थे कि क्या ट्रम्प से इमरान खान की ‘शिकायत’ कर मोदी हिंदुस्तान की वह स्थिति बदलने की ओर अग्रसर हैं, जिसके अंतर्गत हिंदुस्तान कश्मीर समेत सभी विवादित भौगोलिक मुद्दों पर तीसरे पक्षों के दखल के खिलाफ रहता है। मोदी के इस बयान को पाकिस्तान पर कटाक्ष के साथ-साथ उस हलके को लक्षित करके भी दिया गया माना जा रहा है।

विश्वास की चुटकी

इस बीच मंचीय कवि और हिंदी के पूर्व प्राध्यापक डॉ. कुमार विश्वास ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट कर पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री इमरान खान की चुटकी ली। उन्होंने कटाक्ष किया कि यह दो ‘बड़े साँड़ों’ (हिंदुस्तान और अमेरिका) का खेल है, और इसमें “फ़ालतू की सहभागिता” की कीमत ‘गीदड़’ पाकिस्तान को बलूचिस्तान के रूप में चुकानी पड़ सकती है।

कुमार विश्वास ने ट्वीट किया, “मोदी और ट्रम्प दोनों मिलकर तुम्हारा “वो ही” बना रहे हैं इमरान साहब जो तुम समझ रहे हो। कहा था ना, ज़्यादा टाँग मत अड़ाओ! ये बडे साँड़ों के खेल है, ग्रामसिंहों का नहीं, फ़ालतू की सहभागिता “बलूचिस्तान” छिनवा देगी।

J&K में लोगों से मिलकर लौटे NC के 2 सांसद, कॉन्ग्रेस के ‘लोकतंत्र की हत्या’ वाले आरोप की निकली हवा

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने और राज्य के पुनर्गठन का निर्णय लिए जाने के बाद विपक्षी दलों ने जम कर राजनीति की। कॉन्ग्रेस ने तो इसे अंतरराष्ट्रीय मसला तक बता दिया। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के साथ कई विपक्षी नेतागण श्रीनगर पहुँचे लेकिन उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेज दिया गया। राज्यपाल सत्यपाल मलिक का कहना है कि ये नेता राजनीति करने यहाँ आए थे और इससे माहौल बिगड़ सकता था।

इसके बाद विपक्षी दलों ने यह कहना शुरू कर दिया कि जम्मू कश्मीर में सबकुछ ठीक नहीं है। हालाँकि, बसपा सुप्रीमो मायावती ने इन नेताओं को फटकार लगाते हुए केंद्र सरकार को समय देने की बात कही। नवीन पटनायक की बीजद, चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और जगन रेड्डी की वाईएसआरसीपी सही कई विपक्षी दलों ने अनुच्छेद 370 पर संसद में सरकार का साथ भी दिया था। लेकिन, क्या आपको पता है कि जम्मू कश्मीर में कुछ विपक्षी नेता न सिर्फ़ घूम रहे हैं बल्कि लोगों से मिल भी रहे हैं।

ये नेतागण केंद्र सरकार और भाजपा के ख़िलाफ़ बयान भी दे रहे हैं लेकिन उन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार नहीं किया। इससे विपक्षी पार्टियों के आरोपों की पोल भी खुल जाती है। मोदी सरकार पहले से ही कहती आ रही है कि जम्मू कश्मीर को 2 परिवारों के चंगुल से मुक्त कराना है।

अब्दुल्ला परिवार की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के 2 सांसदों ने जम्मू कश्मीर का दौरा किया और अब वे दिल्ली लौट आए हैं। दोनों नेताओं ने पूरी सक्रियता से घाटी में लोगों से मुलाक़ातें की। एनसी के वरिष्ठ नेताओं मोहम्मद अकबर लोन और जस्टिस (रिटायर्ड) हसनैन मसूदी ने कश्मीर का दौरा किया।

दोनों नेताओं ने एनसी के श्रीनगर स्थित मुख्यालय में बैठकें की और सिविल सोसाइटी से संवाद किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, केंद्र सरकार कुछ स्थानीय नेताओं के माध्यम से जनता से संवाद कर हालात को सामान्य बनाए रखने की जुगत में लगी है। इसके लिए स्थानीय नेताओं की मदद ली जा रही है। हालाँकि, यह भी याद होना चाहिए कि अकबर लोन कभी पाकिस्तान का समर्थन कर चुके हैं और विधानसभा में भारत-विरोधी नारेबाजी भी कर चुके हैं।

असलम ने प्रमोद को क्रूरता से मार डाला, दो को जख्मी किया लेकिन उर्दू मीडिया मॉनिटर ने कहा ‘वो खुद को बचा रहा था’

मध्य प्रदेश के असलम ने समीर खान के साथ मिलकर मध्य प्रदेश में एक की जान ले लेता है और दो को घायल कर देता है, वो भी बकरे हलाल करने वाले हथियारों से, और पत्रकारिता के समुदाय विशेष द्वारा इसमें ज़बरदस्ती ‘मॉब-लिंचिंग’ का एंगल निकाल लिया जाता है।

मध्य प्रदेश के चंदेरी थाना क्षेत्र के डुंगासरा गाँव में राखी वाले दिन शाम को चार युवक गोविंद कुशवाह, जानू उर्फ प्रमोद, नंदलाल कोली और संजू परमार सोनाई गाँव जा रहे थे। अधिकाँश मीडिया आउटलेट्स के अनुसार डुंगासरा गाँव के पास सड़क किनारे स्थित दुकान पर पर वे जब गुटखा लेने के लिए रुके तो वहीं पर मुंगावली निवासी असलम और पुरा निवासी समीर खान भी खड़े थे जिन्होंने इन चारों पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। एक की मौके पर मौत हो गई, दो को अस्पताल में पहुँचाया गया, और एक गोविन्द किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहा। हमले का कारण लल्लनटॉप जैसे बड़े समाचार पोर्टलों, पत्रिका और भास्कर जैसे बड़े समाचारपत्रों से लेकर स्थानीय मीडिया तक निजी रंजिश ही बता रहे हैं।

लेकिन इस बीच उर्दू मॉनिटर नामक (नाम से ही झुकाव समझा जा सकता है) अख़बार और कारवाँ डेली नामक पोर्टल (जिसका कारवाँ मैगज़ीन से कोई सरोकार नहीं है) मामले को नया ‘एंगल’ देने के लिए ज़बरदस्ती मारे गए युवकों पर ही पकड़े गए आरोपित असलम और फ़रार समीर पर हमला करने का आरोप लगा रहे हैं। उनके अनुसार जिन युवकों की हत्या हुई, उनमें से एक ने असलम की बहनों को छेड़ा था, जिसके चलते कहासुनी हुई, और उसका बदला बाद में लेने के लिए तीनों पीड़ितों और गोविन्द ने असलम पर टेम्पो में हमला कर दिया। ‘सेल्फ़-डिफेंस’ में असलम को उन्हें मारना और घायल करना पड़ा, और ग्रामीणों ने पहले तो असलम की मॉब-लिंचिंग की कोशिश की और बाद में उसे हत्या के झूठे आरोप में पुलिस के सामने फँसा दिया।

फेक न्यूज़ फ़ैलाने में एक हो चुका है गिरफ़्तार

निजी रंजिश के इस मामले को मॉब-लिंचिंग और हिन्दू-मुस्लिम एंगल से प्रस्तुत करना साफ़ तौर पर साम्प्रदायिक तनाव फ़ैलाने का प्रयास है। और इसमें गुना निवासी अंसार मिर्ज़ा को आईपीसी की धारा 550(2) के तहत गिरफ्तार भी किया गया 17 अगस्त को। इसके बावजूद इसी महीने की 21 तारीख को कारवाँ डेली में उर्दू मॉनिटर के हवाले से यही चीज़ प्रकाशित की गई है।

‘निजी रंजिश; बेवजह फैलाई जा रही कम्युनल एंगल की बात’

ऑपइंडिया ने इस मामले में मध्य प्रदेश पुलिस में इस मामले की जाँच कर रहे इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर से बात की है। उन्होंने ऑपइंडिया से यह साफ कहा कि मामला किसी प्रकार की साम्प्रदायिकता या भीड़-हत्या का नहीं है, और यह बातें ज़बरदस्ती फैलाई जा रहीं हैं। मामला निजी रंजिश का है, जिसमें मृतक प्रमोद रायकवार और आरोपित के घर आगे-पीछे ही हैं। यही नहीं, डेली कारवाँ की मृतकों की संख्या भी गलत है। उन्होंने तीन मृतक बताए थे, जबकि पुलिस ने जो ऑपइंडिया को बताया, उसके अनुसार मृतक फ़िलहाल केवल प्रमोद है। बाकी दोनों में एक ठीक हो गया है और उसे अस्पताल से भी छुट्टी मिल गई है, और एक अभी भी अस्पताल में है।

नोट- स्टोरी पुलिस के जाँच अधिकारी से बात करने के बाद अपडेट की गई है।

‘भाभीजी’ ने किया मीका सिंह का समर्थन, कहा- मैं पाकिस्तान में परफॉर्म करूँगी, रोक सको तो रोक लो

लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘भाभीजी घर पर हैं’ का टाइटल किरदार निभा चुकीं शिल्पा शिंदे ने गायक मीका सिंह का खुल कर समर्थन किया है। बता दें कि पाकिस्तान में परफॉर्म करने को लेकर मीका सिंह पहले से ही सवालों के घेरे में हैं। उन्हें ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न सिने एम्प्लॉयीज (FWICE) ने प्रतिबंधित भी कर दिया है। शिल्पा शिंदे ने इन दोनों ही संस्थाओं को खरी-खोटी सुनाई। बिग बॉस 11 की विजेता रह चुकीं शिल्पा के इस बयान को लेकर लोगों से उनसे नाराज़गी जताई।

शिल्पा शिंदे ने कहा कि अगर पाकिस्तान उन्हें परफॉर्म करने के लिए बुलाता है और वहाँ उनका स्वागत किया जाता है तो वह वहाँ ज़रूर जाएँगी। शिंदे ने चुनौती देते हुए कहा, “मैं पाकिस्तान जाऊँगी। रोक सको तो रोक लो।” शिंदे ने कहा कि पाकिस्तान में इतने अच्छे गायक होने के बावजूद मीका को वहाँ परफॉर्म करने के लिए बुलाया गया, यही बड़ी बात है।

मीका सिंह द्वारा पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के सम्बन्धी के कार्यक्रम में परफॉर्म करने के बाद उपजे विवाद पर अपनी राय रखते हुए शिल्पा शिंदे ने कहा:

“मैं सभी देशभक्तों से पूछना चाहती हूँ कि क्या आपने नुसरत फ़तेह अली ख़ान को सुनना बंद कर दिया है? वे एक लीजेंड थे। क्या आप भारत-पाक क्रिकेट मैच का लुत्फ़ नहीं उठाते? कला की कोई सीमा नहीं होती है इसे राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए कला एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है। मैं अभी भी अपने पाकिस्तानी दोस्तों से बातें करती हूँ और वे मेरे जन्मदिन पर मुझे कढ़ाईदार सूट गिफ्ट के रूप में देते हैं। “

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए इंटरव्यू में शिल्पा शिंदे ने कहा कि पाकिस्तान भी कभी भारत का ही हिस्सा हुआ करता था और वहाँ की जनता भी शांति चाहती है। उन्होंने इंग्लैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि अंग्रेजों ने भारतीयों के साथ नौकरों जैसा व्यवहार किया लेकिन फिर भी वहाँ जाकर अच्छा करने वालों को गर्व की नज़र से देखा जाता है।

जमात-उल-मुजाहिद्दीन का कुख्यात आंतकवादी एजाज़ अहमद गिरफ़्तार, बड़े हमले की रच रहा था साज़िश

कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की टीम ने बिहार के गया शहर से बांग्लादेश के आंतकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन (JMB) के एक कुख्यात आतंकी को गिरफ़्तार किया है। उसका नाम एजाज़ अहमद है। पुलिस ने उसके पास से भारी मात्रा में जिहादी दस्तावेज़ ज़ब्त किए हैं। STF की टीम को लम्बे समय से उसकी तलाश थी।

ख़बर के अनुसार, आतंकी अहमद लम्बे समय से बिहार के गया में अपना वेश और नाम बदलकर रह रहा था। STF सूत्रों के अनुसार गया में बैठ कर वह किसी बड़े हमले का षणयंत्र रच रहा था। विश्वसनीय सूत्रों से मिली सूचना के आधार पर छापेमारी कर रविवार (25 अगस्त) की रात उसे गिरफ़्तार किया गया। STF की टीम एजाज़ को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाएगी। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बता दें कि एजाज़ अहमद पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के पारुई इलाक़े का निवासी है। उसके बारे में पता चला है कि वो काफ़ी समय से आतंकवादी संगठन JMB के लिए काम कर रहा था। संगठन के आला नेताओं के साथ मिलकर काम कर रहा था। उसका मुख्य कार्य इस आतंकी संगठन से युवाओं को जोड़ना था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वो लगातार JMB के आतंकवादियों के संपर्क में था। उन्होंने जानकारी दी कि अहमद पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले, 12 अगस्त को बर्दवान धमाके के मुख्य आरोपी जहीरुल शेख़ को इंदौर से गिरफ्तार कर लिया है। समाचार एजेंसी UNI के मुताबिक मंगलवार (13 अगस्त) को एक आधिकारिक कथन इस आशय से जारी किया गया था। कोलकाता स्थित NIA स्पेशल कोर्ट में उसे प्रस्तुत करने के लिए NIA ने इंदौर के न्यायिक मजिस्ट्रेट से उसकी ट्रांज़िट रिमांड हासिल की थी।

30 तक CBI की हिरासत में ही रहेंगे चिदंबरम, कल ED मामले की सुनवाई

सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की कस्टडी 4 दिनों के लिए बढ़ा दी है। वे 30 अगस्त तक कस्टडी में रहेंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से चिदंबरम की कस्टडी 5 दिन बढ़ाने की माँग की थी। मेहता ने अदालत को बताया कि पूछताछ अभी अधूरी है और इसीलिए उनका कुछ और दिन कस्टडी में रहना ज़रूरी है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय ईडी के धन शोधन मामले में चिदंबरम की गिरफ्तारी से संरक्षण की अवधि मंगलवार तक के लिए बढ़ा दी। कल फिर से इस मामले की सुनवाई होगी।

सीबीआई कोर्ट को मेहता ने बताया कि आईएनएक्स मीडिया से जुड़े इस केस में ईडी की जाँच से भी कुछ नए सवाल उभरे हैं, जिनका जवाब ज़रूरी है। इस मामले में किसी बड़ी साज़िश की ओर इशारा करते हुए मेहता ने कहा कि सीबीआई ने 7 देशों को पत्र लिख कर अहम जानकारियाँ माँगी है। हालाँकि, चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने दावा किया कि पूछताछ बकवास के सिवा कुछ और नहीं है।

सिब्बल ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि सीबीआई कोई डॉक्यूमेंट नहीं दिखा रही है और बिना सबूत पूछताछ कर रही है। मेहता ने सिब्बल के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पूछताछ के दौरान चिदंबरम डॉक्युमेंट्स को पढ़ने में ही एक घंटा लगा देते हैं। चिदंबरम पर आईएनएक्स मीडिया से रिश्वत लेकर उसे एफआईपीबी अप्रूवल देने का आरोप है।

पी चिदंबरम को बुधवार (अगस्त 21, 2019) को उनके जोरबाग़ स्थित आवास से गिरफ़्तार किया गया था। चिदंबरम द्वारा घर का दरवाजा बंद कर लेने के कारण सीबीआई को दीवार फाँद कर उन्हें गिरफ़्तार करने जाना पड़ा था। उसके बाद उन्हें अदालत द्वारा कस्टडी में भेज दिया गया था। अब सीबीआई उन्हें इस मामले के अन्य आरोपितों के साथ बिठा कर पूछताछ करेगी।

नेपाल के रास्ते पाकिस्तान से लाए नकली नोट: आलम अंसारी गिरफ्तार, दाऊद से जुड़े तार

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नकली नोटों के कारोबार से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने आलम अंसारी को गिरफ्तार कर 5.50 लाख रुपए के नकली नोट बरामद किए हैं। पाकिस्तान में छपे नोट नेपाल के रास्ते देश में लाए गए थे।

अंसारी नेपाली नागरिक है। एनसीआर, बिहार और देश के अन्य हिस्सों में नकली नोट खपाए जा रहे थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आलम ने स्पेशल सेल को बताया है कि उसे नकली नोटों की खेप नेपाल में अब्दुल रहमान, सज्जाद और शेर मोहम्मद ने दी थी। उन्होंने कहा था कि नोट पाकिस्तान से दाऊद इब्राहिम ने भेजी है।

बिहार के रक्सौल में एक सिंडिकेट इसी काम में लगा था। आलम 5 साल से इस धंधे में लगा है। 2016 में नोटबंदी के बाद जाली नोटों के कारोबार पर रोक लगी थी। लेकिन, बीते एक साल में फिर से इस धंधे में तेजी दिख रही है।

गौरतलब है कि, सरहद पार पाकिस्तान और बांग्लादेश से नकली नोट आने के मामले में पुलिस ने इससे पहले चार आरोपितों मोहम्मद जसीम अंसारी, मोहम्मद आफताब आलम, मोहम्मद सोहेल आलम और समरेज आलम को गिरफ्तार किया था। आरोपितों के पास से 2-2 हजार रुपए के कुल 84 हजार रुपए के नकली नोट बरामद किए गए थे। पूछताछ में सामने आया था कि चारों युवक 2000 रुपए का नोट देकर दुकानदारों से कम कीमत का सामान लेते थे और बदले में असली रकम जमा कर रहे थे।

जिहादियों के बाद अब नक्सलियों पर अमित शाह की गड़ी नज़र, ममता बनर्जी ने बनाई दूरी

जिहादियों की कमर पर 370 हटा कर सीधी चोट करने के बाद अब गृह मंत्री अमित शाह की नज़र नक्सलियों पर जा टिकी है। लोक सभा में गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी द्वारा नक्सलियों के बच्चों की भर्ती स्वीकारने के बाद शाह ने अपने कार्यकाल की पहली अंतरराज्यीय नक्सल-रोधी काउन्सिल की बैठक की अध्यक्षता की है। इसमें नक्सल-प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शीर्ष नागरिक और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया था।

अखरी नामौजूदगी

370 पर अपने असहयोगात्मक रुख के विपरीत कॉन्ग्रेस-शासित मध्य-प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों (क्रमशः कमलनाथ और भूपेश बघेल) की मौजूदगी ने जहाँ इस मुद्दे पर पार्टी की गंभीरता और इसपर राजनीति न करने की लाइन पर बल दिया, वहीं नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से लगभग हर मुद्दे पर टकराव का रुख अख्तियार कर रहीं ममता बनर्जी इस गंभीर समस्या पर भी केंद्र के साथ खड़ीं नज़र नहीं आईं। उन्होंने इस बैठक में अपनी जगह राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव को भेजा। इसके अतिरिक्त तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी अपने निजी दौरे का हवाला देकर दूर रहे।

मीडिया में इसके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गायब रहने को लेकर भी चर्चाएँ हो रहीं हैं, जिनके राज्य का गढ़चिरौली आज भी नक्सली हिंसा के गढ़ों में से एक माना जाता है। बताया जा रहा है कि फडणवीस आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए ‘महाजनादेश यात्रा’ में व्यस्त होने के चलते बैठक में शामिल होने में असमर्थ रहे। उनका भी प्रतिनिधित्व उनके राज्य के डीजीपी ने ही किया।

मौतें 60% घटीं, लेकिन 10 जिले अब भी दो-तिहाई हिंसा कर रहे

गृह मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक 2009-13 के मुकाबले 2014-18 में नक्सली हिंसा में हुई मौतों का आँकड़ा 60.4% गिरकर 3,326 से 1,321 पर आ चुका है। गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी के लोकसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक सरकार के सतत प्रयास से नक्सली हिंसा का दायरा अब सिकुड़ने लगा है और यह केवल 60 जिलों में ही बचा है। लेकिन उन्होंने एक चिंताजनक बात यह भी बताई कि 60 में से 10 जिलों में दो-तिहाई हिंसा होती है।

गृह मंत्री ने सोमवार (26 अगस्त) को हुई इस बैठक में चल रहे नक्सली अभियानों का जायज़ा लेने के साथ-साथ नक्सल-प्रभावित इलाकों में विकास योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। उनके साथ बैठक में यूपी, ओडिशा, बिहार, एमपी, छत्तीसगढ़, झारखण्ड के मुख्यमंत्री शामिल हुए। 2015 में स्वीकृत किए गए National Policy and Action Plan में वामपंथी आतंक से लड़ने के लिए एक साथ सामाजिक-आर्थिक-कानूनी आदि कई मोर्चों पर काम करने की रणनीति तैयार हुई थी।

पाक राष्‍ट्रपति आरिफ अल्वी को ट्विटर ने भेजा नोटिस, कश्‍मीर पर फेक वीडियो किया था शेयर

कश्मीर मुद्दे पर बौखलाया पाकिस्तान अब नीचता पर उतर आया है। पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति डॉक्‍टर आरिफ अल्‍वी घाटी का माहौल बिगाड़ने के लिए जम्‍मू कश्‍मीर के हालातों पर फेक वीडियो ट्वीट किया है। मगर इस ट्वीट को करके वो खुद फँस गए हैं। इस फेक वीडियो के लिए आरिफ अल्वी को ट्विटर की तरफ से नोटिस भेजा गया है। 

इस नोटिस के बाद पाकिस्‍तान के मंत्री कह रहे हैं कि ट्विटर भी अब भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगा हुआ है। बता दें कि 5 अगस्‍त को जब भारत सरकार ने जम्‍मू कश्‍मीर से आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी करने का फैसला किया था, उसके बाद भी ट्विटर ने फेक ट्वीट करने वालों पर एक्‍शन लिया था और अब इसमें पाकिस्तानी राष्ट्रपति का नाम भी जुड़ गया है। पाकिस्तानी मीडिया की तरफ से इसकी जानकारी दी गई।

पाकिस्‍तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन माजरी ने इस पूरे मसले पर ट्वीट किया है। माजरी ने ट्विटर द्वारा भेजे गए ईमेल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा है, “ट्विटर वाकई में मोदी सरकार का मुखपत्र बन गया है। उन्‍होंने हमारे राष्‍ट्रपति को नोटिस भेजा है। यह बहुत ही बुरा और बेतुका है।”

बता दें कि, 24 अगस्‍त को अल्‍वी ने एक वीडियो शेयर किया था जो विदेशी मीडिया की तरफ से जारी किया गया था। इस वीडियो को अल्‍वी ने श्रीनगर में जारी विरोध प्रदर्शन के जरिए कश्मीर के हालात दिखाने की कोशिश की थी। अल्‍वी ने भारत को जम्‍मू कश्‍मीर पर अप्रत्‍यक्ष पर धमकी भी दी है। राष्‍ट्रपति अल्‍वी ने कहा है कि जम्‍मू कश्‍मीर से आर्टिकल 370 हटाकर और राज्‍य के विशेष दर्जे को खत्‍म करके भारत आग से खेल रहा है। डॉक्‍टर अल्‍वी का कहना है कि यह एक ऐसी आग है जो भारत में धर्मनिरपेक्षता को जलाकर खाक कर देगी। अल्‍वी ने कहा कि भारत की सरकार को अगर यह लगता है कि आर्टिकल 370 को हटाकर वह यहाँ के हालात सुधार सकती है, तो वह जिंदगी भर मूर्ख बने रहना चाहते हैं।

रविवार (अगस्त 25, 2019) को इमरान सरकार में दूरसंचार मंत्री मुराद सईद ने भी कहा था कि उन्‍हें ट्विटर की ओर से एक नोटिस भेजा गया है, जिसमें भारतीय कानूनों के उल्‍लंघन का हवाला दिया गया है। गौरतलब है कि, कश्मीर को लेकर फेक न्यूज़ शेयर करने की वजह से पाकिस्‍तान में कई सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद किया गया है। ट्विटर की तरफ से 5 अगस्‍त के बाद से 200 पाकिस्‍तानी अकाउंट्स को सस्‍पेंड किया जा चुका है। पाकिस्‍तान सेना के मीडिया विंग आईएसपीआर के मेजर जनरल आसिफ गफूर इस पूरे विवाद के पीछे भारत का हाथ बताया था।