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कृष्ण-अर्जुन जैसे मोदी-शाह: ‘मिशन कश्मीर’ पर रजनीकांत ने दी बधाई

सुपरस्टार रजनीकांत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की तारीफ़ की है। सुपरस्टार ने अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए ख़ुशी जाहिर की है। बता दें कि रजनीकांत इससे पहले भी मोदी सरकार द्वारा देशहित में लिए गए निर्णयों की प्रशंसा करते रहे हैं। उन्होंने नोटबंदी के दौरान भी प्रधानमंत्री को बधाई दी थी। हाल ही में मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद रजनीकांत ने भाजपा की तारीफ की थी।

रजनीकांत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तुलना कृष्ण एवं अर्जुन की जोड़ी से की है। द्वापर युग में महाभारत के युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी बने थे। सुपरस्टार ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि इन दोनों में अर्जुन कौन है और कृष्ण कौन, इसका जवाब यही दोनों नेता दे सकते हैं। रजनीकांत के सम्बोधन के दौरान अमित शाह भी मंच पर मौजूद थे। रजनीकांत ने कहा, “मिशन कश्मीर के लिए आपको बधाई।

अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त करने वाले निर्णय के बाद राज्य को मिले विशेषाधिकार खत्म हो गए और इसके पुनर्गठन का रास्ता साफ़ हो गया। जहाँ जम्मू कश्मीर विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) होगा, वहीं लद्दाख विधायिका रहित यूटी होगा।

रजनीकांत ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की पुस्तक के विमोचन के दौरान यह बात कही। नायडू ने राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति के रूप में अपने दो वर्ष के कार्यकाल के अनुभवों को इस पुस्तक में पेश किया है। रजनीकांत ने कार्यक्रम के दौरान अमित शाह द्वारा संसद में दिए गए ताज़ा भाषण को भी विलक्षण बताया। शाह ने अनुच्छेद 370 पर संसद में विस्तृत तरीके से अपनी बात सामने रखी थी और उनका भाषण सोशल मीडिया पर खूब सर्कुलेट हुआ था।

क्या मौजूद हैं राम के वंशज: जयपुर की राजकुमारी ने कहा- हॉं, हम हैं

जयपुर की राजकुमारी और राजसमंद से बीजेपी सांसद दीया कुमारी ने शनिवार (अगस्त 10, 2019) को कहा कि भगवान राम के वंशज पूरी दुनिया में मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि उनका परिवार भगवान राम के पुत्र कुश से संबद्ध है। उनका कहना है कि जयपुर के पूर्व राजा और उनके पिता महाराजा भवानी सिंह कुश की 307वीं पीढ़ी के थे।

बीजेपी संसद ने इस बात का सबूत भी पेश किया। उन्होंने एक पत्रावली दिखाई, जिसमें भगवान राम के वंश के सभी पूर्वजों का नाम क्रम से लिखा हुआ है। इसी पत्रावली में 209वें वंशज के रूप में सवाई जयसिंह और 307वें वंशज के रूप में दीया के पिता महाराजा भवानी सिंह का नाम लिखा हुआ है।

दरअसल, अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने रामलला के वकील से जिज्ञासावश पूछा था कि भगवान राम का कोई वंशज अयोध्या या दुनिया में कही हैं? इस पर वकील का कहना था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। 

इसी बात का जवाब देने के लिए दीया कुमारी आगे आईं और उन्होंने खुद को और अपने परिवार को भगवान राम का वंशज बताया। उन्होंने कहा कि ये इतिहास की खुली किताब की तरह है। साथ ही दीया ने कहा कि राम मंदिर मामले की सुनवाई तेजी से हो और इस पर कोर्ट जल्द अपना फैसला सुनाए।

वहीं, सिटी पैलेस संग्रहालय के अनुसार, कच्छवाहा वंश काे भगवान राम के बेटे कुश के नाम पर कुशवाहा वंश भी कहा जाता है। इसकी वंशावली के मुताबिक 62वें वंशज राजा दशरथ, 63वें वंशज भगवान राम और 64वें वंशज कुश थे।

ये रिश्ता क्या कहलाता है: वो 7 मौके जब पाकिस्तानी प्रोपगेंडा के काम आया NDTV

राष्ट्रीय हितों को लेकर लंबे अरसे से एनडीटीवी का नजरिया पेचीदगी भरा रहा है। इस न्यूज चैनल से जुड़े पत्रकारों की सरहद पार के हुक्मरान और आतंकी आका हौसलाअफजाई करते रहते हैं। पाकिस्तान उनके बयानों को भारत विरोधी प्रोपगेंडा को हवा देने के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है। ऐसे 7 घटनाओं पर एक नजर,

जब रवीश कुमार बने मोहरा

एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर रवीश कुमार ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद जर्मन मीडिया हाउस डॉयचे वेले (डीडब्ल्यू) को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि भारतीय मीडिया बेरोजगारी जैसे मसलों की बजाए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को तूल दे रही है ताकि सत्ताधारी दल को चुनावी फायदा हो सके। पाकिस्तानी मीडिया ने इस बयान का हवाला देकर भारत पर युद्धोन्माद पैदा करने का आरोप लगाया।

बरखा दत्त की कारगिल कवरेज

बरखा दत पर कारगिल की लड़ाई के दौरान भारतीय हितों की अनदेखी कर रिपोर्टिंग का आरोप है। कथित तौर पर उनकी रिपोर्टों से भारतीय सेना की पोजीशन उजागर हुई। लेफ्टिनेंट जनरल मोहिंदर पुरी ने अपनी किताब ‘कारगिल: टर्निंग द टाइड’ में में इसका ब्यौरा दिया है।

पठानकोट पर मॉंगनी पड़ी माफी

पठानकोट एयरबेस पर हमले के दौरान एनडीटीवी ने संवेदनशील जानकारियॉं सार्वजनिक कर दी। इनमें एयरबेस पर मौजूद आयुध की जानकारी भी शामिल थी। इसका इस्तेमाल आतंकी नुकसान पहुॅंचाने के लिए कर सकते थे। केन्द्र सरकार ने इस रिपोर्टिंग के कारण एनडीटीवी के प्रसारण पर एक दिन का प्रतिबंध लगा दिया था। हालॉंकि बाद में सरकार ने फैसला वापस ले लिया लेकिन इसके लिए न्यूज चैनल को अदालत में माफी मॉंगनी पड़ी थी।

पुलवामा हमले का महिमामंडन

पुलवामा हमले के बाद एनडीटीवी की डिप्टी एडिटर निधि सेठी ने फेसबुक पोस्ट से जैश को महिमामंडित किया था। हैशटैग #HowstheJaish के साथ वीरगति को प्राप्त हुए जवानों का मजाक उड़ाते हुए टिप्पणी की। मामले के तूल पकड़ने पर चैनल ने निधि को सस्पेंड कर दिया था।

35A पर ‘पुलिस विद्रोह’ का झूठा दावा

सुप्रीम कोर्ट जब 35-ए से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, उसी समय एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि जाँच एजेंसियों ने चेटावनी दी है कि अगर शीर्ष अदालत ने 35-ए को रद्द किया, तो कश्मीर में पुलिस बगावत करेगी। हालाँकि, इसकी पुष्टि में कोई तथ्य पेश नहीं किया गया था।

दरअसल, एनडीटीवी के एक पत्रकार ने एक इंटरव्यू के दौरान जम्मू कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद्य से पुलिस बगावत को लेकर सवाल किया था। जवाब में वैद्य ने कहा कि पुलिस बल के लिए कर्तव्य पहले है। पत्रकार ने दोबारा दूसरे तरीके से यही सवाल किया। इसके जवाब में डीजीपी ने कहा कि हर इंसान का अपना एक नजरिया होता है, लेकिन एक पुलिस वाले के लिए कर्तव्य पहले है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सभी सम्मान करते हैं। डीजीपी के इनकार के बावजूद एनडीटीवी ने बिना किसी पुख्ता सबूत के सनसनीखेज हेडलाइन चलाया।

कश्मीर पर एनडीटीवी के एजेंडे को पाकिस्तान का समर्थन

एनडीटीवी ने पिछले दिनों अनुच्छेद 370 और 35-ए के लेकर एक रिपोर्टिंग की थी। पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी ने उसी रिकॉर्डिंग को शेयर करते हुए चैनल की बातों का समर्थन किया। इस वीडियो क्लिप में एक पत्रकार श्रीनगर से रिपोर्ट करते हुए दावा करता है कि वो और उसकी टीम एक बूढ़े और अंधे व्यक्ति से मिले थे। उस व्यक्ति ने उनसे कहा कि नई दिल्ली में कहा जा रहा है कि कश्मीर में हर कोई जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने से खुश है। मगर कर्फ्यू हटने के बाद वहाँ के लोग बता देंगे कि वो कितने खुश हैं। पत्रकार का इशारा हिंसा की तरफ था, मगर माइक और कैमरा होते हुए भी उन्होंने उस बूढ़े शख्स को नहीं दिखाया। उन्होंने सिर्फ दावा किया कि एक व्यक्ति ने ऐसा कहा।

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत को बदनाम किया

एनडीटीवी की एडिटोरियल डायरेक्टर ने संस्थान की वेबसाइट पर एक कॉलम पोस्ट किया जो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे पर यूनेस्को में उनके संबोधन पर आधारित था। ‘लेट जर्नलिज्म थ्राइव- टेलीविज़न एंड मीडिया फ़्रीडम’ शीर्षक से लिखे गए इस आर्टिकल में वो भारत में प्रेस से जुड़े स्वतंत्रता, चुनौतियों, विकल्पों, खतरों और हिंसा के बारे में बात करती हैं। कॉरपोरेट्स और सरकार के अप्रत्यक्ष सेंसरशिप के बारे में बात करते हुए, गजेंद्र सिंह की आत्महत्या को महिमामंडित करते इसे भारत में किसानों की दुर्दशा का प्रतीक बताया।

कश्मीर या कैशमीर: एक आपको लँगोट में पहुँचा सकती है, दूसरी अमीर बहुत अमीर बना सकती है

कश्मीर पर लागू अनुच्छेद 370 में मूलभूत संशोधन किए गए हैं और विचित्र-विचित्र प्रतिक्रियाओं से समाचार जगत आच्छादित है। पाकिस्तान ने 15 अगस्त को इसके विरोध मे काला दिवस मनाने की घोषणा की है। भारत सरकार ने इसके उपलक्ष्य में अच्छे पड़ोसी होने के नाते काला दिवस के शुभ अवसर पर एक वरिष्ठ पत्रकार और एक विफल नेता की सेवाएँ एक शुभंकर के नाते उपलब्ध कराने की पेशकश की है।

भारत का मानना है कि प्रश्नवाचक चिन्ह के साथ और विपक्ष के टटपूँजिया नेताओं को टैगित कर के समाचार प्रस्तुत करने की विधा के यह प्रणेता पत्रकार एक शुभंकर के रूप मे 1982 के एशियाई खेलों के शुभंकर अप्पू से अधिक लोकप्रिय होने का माद्दा रखते हैं। भारत सरकार का यह मानना है कि आतंकवाद और निर्धनता के तिमिर मे धँसी पाकिस्तान सरकार को काला दिवस के स्थान पर पाकिस्तानी राष्ट्रीय विचार के अनुकूल काली दशाब्दी मनानी चाहिए और संभव हो तो कराची में भारत में नरसंहार और ड्रग स्मग्लिंग के महानायक के बँगले के निकट ऐसे महान पत्रकारों के लिए प्लॉट काटने चाहिए।

बहरहाल, ज्ञानी लोग अनुच्छेद 370 पर निर्बाध रूप से चर्चा कर रहे हैं कि किस प्रकार 1948 में कश्मीर का भारत ने आधिकारिक विलय चार वर्ष पश्चात 1952 में आई 370 और छह वर्ष पश्चात आई 35-ए पर निर्भर था। छह वर्ष इन धाराओं के अभाव मे विलय उसी प्रकार रहा जैसे नेता विहीन काँग्रेस और दिशाविहीन वर्तमान भारतीय विपक्ष। क्योंकि मैं व्यंग्य लेखक हूँ, मेरा ज्ञान सीमित है, इसलिए कैसे पहले आया निर्णय बाद मे आई धारा पर निर्भर है, इस पर मैं नहीं जाऊँगा। वैसे भी यह लेख वाशिंगटन पोस्ट मे छप कर कौन सा मुझे रैमन मैग्सेसे पुरस्कार दिलाने वाला है, जिस पर राहुल गाँधी अति-उत्साहित होकर तीन-तीन बधाई संदेश भेजें और प्रणब दा के भारत रत्न के आने तक शुभकामनाओं का स्टॉक ही समाप्त हो जाए। मेरा सीमित ध्येय बस ऑपइंडिया के दीर्घकेशीय संपादक को चाय पानी (और शैंपू) का प्रलोभन दे कर ऑपइंडिया मे इस लेख को छपवाना है।

सो मेरा विश्लेषण कश्मीर निर्णय के पश्चात भारतीय बुद्धिजीवी समाज के वर्ग-विभाजन तक सीमित है। इस विषय पर विगत दिनों मैंने बहुत शोध किया है। इस शोध के आधार पर निर्धन हिंदी लेखक होने के बावजूद मुझे डॉक्टर नहीं तो कम से कम कम्पाउंडर की मानद उपाधि मिल ही जानी चाहिए। झुमरी तलैया विश्वविद्यालय से कम्पाउंडर साकेत सूर्येश नाम से संबोधित होने का सुख प्रदान करवाने का नैतिक दायित्व हमारे भाजपा आईटी सेल के फोकटिये कार्यकर्ता होने के नाते लाँछन के कारण श्री अमित मालवीय पर आयद होता है। एक अच्छा लेखक दो पंक्ति के सार को दो पुस्तकों का विस्तार दे सकता है।

इसी परंपरा में ‘मोदी राज ने अनुच्छेद 370 पर बुद्धिजीवी वर्ग विभाजन’ पर मैं कम्पाउंडर की मानद उपाधि के प्रलोभन पर 300 पृष्ठ का शोध प्रकाशित करके श्री रामचंद्र गुहा सरीखे विद्वानों की दीर्घा में स्वयं को स्थापित करने की सामर्थ्य रखता हूँ। इस भूमिका का लब्बोलुबाब यह है कि समाज में वर्ग भेद का प्रमुख सूचक भाषा और उच्चारण का भेद है। यह हम संस्कृत और प्राकृत के समय से देखते हैं। आज भी भारतीय समाज कश्मीर के मुद्दे पर दो भागों में बँट गया है। एक हमारे जैसा अल्पशिक्षित वर्ग है जो उसे कश्मीर कहता है, दूसरा अतिशिक्षित कान्वेंट शिक्षित अभिभावकों की कान्वेंट शिक्षित संतानों का वर्ग है जो इसे भारत के इस भू-भाग को कैशमीर कह कर संबोधित करता है।

पहले वर्ग के अनुसार यह वह भूमि है जहाँ मानव समाज की स्थापना हिंदू ऋषि कश्यप ने की। दूसरे वर्ग के अनुसार वहाँ आज तक ऋषि कश्यप के नाम की नेम प्लेट तक नहीं मिली है और इसलिए इस स्थान का नाम कैशमीर उचित है, क्योंकि यह 1947 के बाद से पाकिस्तान को विश्व भर से और भारत के वर्ग विशेष को पाकिस्तान से कैश उपलब्ध कराता रहा है। अपने शोध मे मैंने इस ओर ध्यान दिलाने का भी प्रयास किया है कि अनुचछेद 370 में संशोधन के समर्थन में खड़ा वर्ग उसे कश्मीर और विरोध में खड़ा पूर्व गृहमंत्री वाला समुदाय इसे कैशमीर कह कर संबोधित करता है। कहीं न कहीं, मूनमून सेन की चाय और शेहला रशीद की हाय के बीच बँटे भारतीय समाज के मूल में कैश और कश्यप का यही भेद है।

जैसे कश्मीर एक भू-भाग नहीं सोच है, जो कैराना से केरल तक जाती है, कैशमीर भी एक सोच है जो दस जनपथ दिल्ली से क्लिफ्टन रोड कराची तक फैली है। एक सोच आपको प्राचीन ऋषियों के समान न्याय के पक्ष हमें लँगोट में पहुँचा सकती है, वहीं दूसरी सोच आपको कैश देकर अमीर बहुत अमीर बना सकती है। इस मूल भेद को जब हम समझ जाएँगे, कश्मीर समस्या स्वत: सुलझ जाएगी। इसी प्रयास मे मेरा शोध इस महान राष्ट्र के चिंतकों की सेवा मे समर्पित है जो पेटीएम कर के इसकी प्रति प्राप्त कर सकते हैं।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद का स्कीम ग़ैर-गाँधियों के लिए नहीं: ‘माँ-बेटे की गुलामी’ पर ट्विटर यूजर्स की मसखरी

कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के साथ-साथ कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार ने भी राहुल गाँधी की जगह लेने के लिए सोनिया गाँधी को कॉन्ग्रेस पार्टी के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में चुनने के लिए कड़ी मेहनत की। इस बात से सोशल मीडिया पर यूज़र्स आश्चर्य में हैं और जमकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

मीम मैराथन की शुरुआत भाजपा के सोशल मीडिया प्रभारी अमित मालवीय के साथ शुरू हुई, जिसमें उन्होंने राहुल गाँधी के इस्तीफे के बाद उनकी माँ सोनिया गाँधी को अध्यक्ष चुनने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी के सदस्यों पर कटाक्ष किया। उन्होंने हालिया फिल्म ‘इंदु सरकार’ के लोकप्रिय संवाद का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें एक डॉयलाग है, “तुम लोग ज़िंदगी भर माँ-बेटे की ग़ुलामी करते रहोगे।”

जल्द ही, यह मीम सोशल मीडिया पर छा गया। कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने सोनिया गाँधी को पार्टी प्रमुख के रूप में पुनः चुने जाने पर कटाक्ष करने के लिए द मम्मी रिटर्न्स ट्रेन्ड शुरू किया और लिखा, “सत्ता को जहर कहने वाली कॉन्ग्रेस की राजमाता फिर वापस अध्यक्ष बन गईं!”

सोनिया गाँधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके सदस्यों की स्थिति पर अपनी राय व्यक्त करने के लिए यूज़र्स ने बॉलीवुड हस्तियों की इमेज का भी सहारा लिया।

सोनिया गाँधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा से संबंधित मसखरे अंदाज़ में मीम भी यूज़र्स ने पोस्ट किए।

कुछ यूज़र्स ने कॉन्ग्रेस के इस प्रकरण को राजनीतिक हास्य का जामा पहनाया।

दरअसल, कल शाम (10 अगस्त) को कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) द्वारा अपना नाम रखे जाने के बाद सोनिया गाँधी अंतरिम अध्यक्ष के रूप में काम करेंगी। कथित तौर पर CWC ने राहुल गाँधी से इस्तीफ़ा वापस लेने पर ज़ोर दिया था। लेकिन देर रात, CWC ने राहुल गाँधी के इस्तीफ़े को स्वीकार कर लिया। आख़िरकार एक महीने बाद आधिकारिक तौर पर राहुल गाँधी का अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया गया और सोनिया गाँधी को ‘अंतरिम अध्यक्ष’ बना दिया गया। यह प्रस्ताव ग़ुलाम नबी आज़ाद, पी चिदंबरम और आनंद शर्मा द्वारा पेश किया गया जिसे पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का समर्थन प्राप्त था।

ख़बरों के अनुसार, कॉन्ग्रेस के भीतर कुछ लोगों का मानना ​​है कि पार्टी अध्यक्ष के रूप में अगर कोई ग़ैर-गाँधी पद पर आसीन होगा तो पार्टी टूट जाएगी। बता दें कि पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा जैसे नाम भी इस दौड़ में शामिल थे।

सदस्यता अभियान चलाने पर BJP नेत्री फरहीन के शौहर को घर में घुसकर पीटा

अलीगढ़ में बीजेपी नेत्री फरहीन मोहसिन के शौहर मोहम्मद मोहसिन को कुछ बदमाशों ने घर में घुसकर पीटा। बताया जाता है कि फरहीन द्वारा बीजेपी का सदस्यता अभियान चलाए जाने से नाराज मुहल्ले के ही कुछ लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया। फरहीन भाजपा की अल्पसंख्यक मोर्चा की महानगर मंत्री हैं। बकौल फरहीन, हमलावरों ने जान से मारने की धमकी देते हुए मुसलमानों को भाजपा का सदस्य नहीं बनाने की चेतावनी भी दी।

दैनिक जागरण में छपी ख़बर

फरहीन मोहसिन ने समाचार एजेंसी ANI को बताया, “मुझे जान से मारने की धमकी दी गई और काम रोकने को कहा गया है। इसी के चलते मेरे शौहर की जमकर पिटाई कर दी गई।”

अलीगढ़ (सिटी) के एडिशनल एसपी अभिषेक ने बताया, “फरहीन मोहसिन ने बीजेपी का सदस्यता अभियान चलाने पर कुछ लोगों द्वारा धमकी देने और मारपीट की शिकायत दर्ज कराई है। मामला दर्ज कर ज़रूरी कार्रवाई की जा रही है।”   

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के अनुसार फरहीन ने अपने घर में ही पार्टी का दफ्तर बना रखा है। आठ अगस्त की रात वह पति मोहम्मद मोहसिन के साथ दफ्तर में बैठी थीं, तभी मुहल्ले के आमिर, रिजवान चाहत, अल्तमस और फराज वहॉं पहुॅंचे। इनलोगों ने धमकाते हुए 25 हजार रुपए मॉंगे। कुछ देर बाद वे दोबारा 10 लोगों के साथ लौटे और मोहसिन के साथ मारपीट की।

ग़ौरतलब है कि बीजेपी ने सदस्यता अभियान 9 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। अब 20 अगस्त तक सदस्यता अभियान चलेगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संसद सत्र की वजह से सदस्यता अभियान के कार्यक्रमों में सांसद हिस्सा नहीं ले पा रहे थे, इसलिए इसको बढ़ाने का फ़ैसला किया गया है।

नेहरू की महाभूल: “कुछ दिन और सीजफायर की घोषणा नहीं होती तो पूरा कश्मीर भारत का होता’

आर्टिकल 370 को लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कॉन्ग्रेस पर करारा हमला किया है। उन्होंने कहा है कि जो महाभूल पंडित नेहरू ने कश्मीर को लेकर किया था उसे सुधारने का काम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने किया है। उन्होंने ट्वीट किया है, “डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर के लिए बलिदान दिया। उस समय कश्मीर में प्रवेश करने के लिए परमिट लगता था और उन्होंने बिना परमिट प्रवेश किया। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि कश्मीर आज सभी बेड़ियों से मुक्त हो गया है।”

कुछ मीडिया रिपोर्टों और न्यूज एजेंसी एजेंसी एएनआई के मुताबिक कश्मीर का हवाला देते हुए शिवराज ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को अपराधी भी बताया। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में मीडिया से बात करते हुए शिवराज ने इसकी दो वजहें बताई। उन्होंने कहा, “जब भारतीय फौज कश्मीर से पाकिस्तानी कबाइलियों को खदेड़ते हुए आगे बढ़ रही थी, ठीक उसी वक्त नेहरू ने संघर्ष विराम का ऐलान कर दिया। इस वजह से कश्मीर का एक-तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में रह गया। यदि कुछ दिन और सीजफायर की घोषणा नहीं होती, तो पूरा कश्मीर भारत का होता।”

उन्होंने आगे कहा, “जवाहर लाल नेहरू का दूसरा अपराध अनुच्छेद 370 था। भला एक देश में कैसे दो निशान, दो विधान (संविधान) और दो प्रधान अस्तित्व में हो सकते हैं? यह केवल देश के साथ अन्याय नहीं बल्कि अपराध भी है।”

अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर शिवराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का जो वीडियो पोस्ट किया है उसमें वे आर्टिकल 370 पर अलग-अलग राय को लेकर भी कॉन्ग्रेस पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस आज बिखर चुकी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुरली देवड़ा जैसे कॉन्ग्रेस नेता केन्द्र सरकार के फैसले का समर्थन कर रहे हैं।

गौरतलब है कि, केंद्र सरकार ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम-2019 के तहत राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया है। 31 अक्टूबर को दोनों केन्द्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आएँगे। जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी किए जाने के बाद से ही भाजपा नीत केन्द्र सरकार की नीयत पर कॉन्ग्रेस सवाल उठा रही है। हालॉंकि इस मसले पर मोदी सरकार के खिलाफ हमलावर रुख उलटे कॉन्ग्रेस को ही भारी पड़ रहा है और पार्टी के भीतर से ही इसके खिलाफ आवाज उठ रही है। इस मसले पर कॉन्ग्रेस में विभाजन स्पष्ट दिख रहा है।

J&K: ‘प्रदर्शन और फायरिंग की खबरें झूठी, 6 दिनों में नहीं चली 1 भी गोली’

बकरीद से पहले जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने की ओर अग्रसर हैं। प्रशासन ने एक बार फिर राज्य में विरोध-प्रदर्शनों और फायरिंग की घटनाओं को सिरे से नकार दिया है। राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने लोगों से मनगढंत ख़बरों पर यकीन नहीं करने को कहा है। साथ ही बताया है कि कश्मीर में पिछले छह दिनों में गोलीबारी की कोई घटना नहीं हुई है।

पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बताया, “पथराव की मामूली घटना जिससे तत्काल निपट लिया गया था, को छोड़ कर किसी तरह की अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं है।”

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के बयान के बाद राज्य की स्थिति के संबंध में स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने यह बात कही। राहुल ने नई दिल्ली में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा था कि कश्मीर की स्थिति बेहद ख़राब है।

राहुल गाँधी के बयान के कुछ ही मिनट बाद श्रीनगर पुलिस ने ट्वीट किया कि स्थिति शांतिपूर्ण है। ट्वीट में कहा गया, “घाटी में स्थिति आज सामान्य थी। किसी अप्रिय घटना की ख़बर नहीं मिली। कुछ चुनिंदा स्थानों पर प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाए गए थे।” 

कश्मीर के आईजी एसपी पाणि ने भी पुलिस फायरिंग की ख़बरों को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, “कुछ इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस फायरिंग का दावा किया गया है, जो पूरी तरह गलत है। ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। पिछले एक हफ्ते से घाटी में शांति है।” इससे पहले केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने भी ऐसी ख़बरों को मनगढ़ंत और आधारहीन करार दिया था। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि शुक्रवार को श्रीनगर में 10,000 लोगों द्वारा विरोध-प्रदर्शन करने का दावा गलत है। जुमे के मौके पर श्रीनगर और बारामूला में छिटपुट प्रदर्शन हुए थे, लेकिन इनमें 20 से ज्यादा लोग नहीं थे।  

अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निष्क्रिय किए जाने से पहले सरकार ने कुछ एहतियातन कदम उठाए थे। इनमें धारा 144 लागू करना, अतिरिक्त बलों की तैनाती, इंटरनेट और मोबाइल सेवा बंद करने जैसे कदम शामिल थे। अब जम्मू इलाके से धारा 144 हटा ली गई है और अन्य जगहों पर भी प्रतिबंधों में ढील दी जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल खुद हालात पर नजर बनाए हुए हैं और राज्य में डेरा डाल रखा है। यहाँ तक कि शुक्रवार को उन्होंने ज़िहादियों का गढ़ माने जाने वाले अनंतनाग का दौरा कर स्थानीय लोगों से बातचीत की थी। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लगातार सुरक्षा हालात की समीक्षा कर रहे हैं। राज्यपाल सतपाल मलिक के अनुसार, बकरीद के लिए प्रशासन ने राज्य में सभी आवश्यक इंतज़ाम कर लिए हैं।

पाकिस्तान में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा तोड़ी, मौलाना गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी किए जाने के बाद से पाकिस्तान की सेना और सरकार जो बौखलाहट दिखा रही है उसका फायदा वहाँ के असामाजिक तत्वों ने उठाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में लाहौर स्थित महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने की घटना सामने आई है।

इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि, महाराजा रणजीत सिंह की 9 फुट ऊँची प्रतिमा का अनावरण लाहौर किले में इसी साल जून में किया गया था। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ ईशनिंदा कानून के तहत मामला दर्ज किया है। जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार किया गया मौलाना खैम रिज्वी तहरीक-लब्बैक नाम के संगठन से जुड़ा है। बता दें कि, महाराजा रणजीत सिंह सिख साम्राज्य के नेता थे जिन्होंने 19 वीं शताब्दी में उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर में शासन किया था।

किले की देखरेख करने वाली अर्ध सरकारी संगठन वर्ल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथॉरिटी ने बकरीद के बाद प्रतिमा ठीक कराने की बात कही है।

Male Rape: 11 साल के मासूम के साथ 15 साल के सीनियर की दरिंदगी, देहरादून आवासीय स्कूल की घटना

देहरादून के एक आवासीय स्कूल (residential school, boarding school) में 11 वर्षीय छात्र के साथ समलैंगिक बलात्कार की घटना प्रकाश में आई है।

मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि पिछले शनिवार (3 अगस्त) की बताई जा रही इस घटना की जानकारी तब मिली, जब पीड़ित छात्र ने अपने घर वालों को इसके बारे में बताया। इसके बाद घटना की FIR लिखी गई है, और आरोपित छात्र को स्कूल से निष्कासित कर दिया गया है।

कमरे में ले जाकर पहले मारपीट

मीडिया से बात करते हुए SHO सीबी सिंह ने बताया कि पीड़ित के बयान के अनुसार 15-वर्षीय आरोपित लड़का उसे एक कमरे में ले गया। वहाँ पहले उसके साथ मारपीट की, और बाद में बलात्कार। घटना की FIR देहरादून के रायपुर में तब कराई गई जब दिल्ली के रहने वाले छठी कक्षा के पीड़ित छात्र ने अपने माँ-बाप को इस घटना के बारे में बताया।

आरोपित के खिलाफ मामला आईपीसी की धारा 377 के अंतर्गत दर्ज किया गया है, और उसे स्कूल से निकाल दिया गया बताया जा रहा है। टाइम्स नाउ न्यूज़ के मुताबिक घटना की पुलिस को रिपोर्ट स्कूल प्रबंधन द्वारा क्यों नहीं दर्ज कराई गई, इसकी भी जाँच हो रही है। आरोपित दसवीं कक्षा का छात्र और हरियाणा का निवासी बताया जा रहा है

स्थानीय मीडिया के मुताबिक देहरादून के एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने घटना पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं