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भू माफिया आजम खान पुत्र, Suar MLA अब्दुल्ला गिरफ्तार, जाँच में बाधा डालने का आरोप

समाजवादी पार्टी नेता से भूमाफिया बने सांसद आजम खान के MLA बेटे अब्दुल्ला आजम को पुलिस की कार्रवाई में बाधा डालने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। मुद्दा यह है कि मदरसा आलिया से चोरी हुई किताबों के मामले में आज दूसरे दिन भी पुलिस जौहर यूनिवर्सिटी में छापेमारी कर रही थी। इसी दौरान पुलिस की कार्रवाई में बाधा डालने के लिए अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी पहुँचे तो सीओ सिटी उन्हें जाँच में बाधा पहुँचाने के आरोप में गिरफ्तार कर अपने साथ गए।

बता दें कि अब्दुल्ला आजम Suar से विधायक हैं। एसपी डॉ. अजय पाल ने बताया कि काम में बाधा डालने की वजह से उन्हें हिरासत में लिया गया है। कल पुलिस ने जौहर यूनिवर्सिटी से चोरी की 2000 किताबों को बरामद किया था।

कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह भी दावा है कि गलत और कोडेड दस्तावेजों की सहायता से पासपोर्ट बनवाने के मामले में उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया है। हालाँकि, उनकी गिरफ्तारी क्यों की गई है? इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

सरकारी और किसानों की कई कृषि योग्य भूमि पर अवैध कब्जे के आरोपों का सामना कर रहे आजम खान के यूनिवर्सिटी में मंगलवार को पुलिस जमीन की पैमाइश कराने पहुँची थी। यहाँ पर उसने लाइब्रेरी में भी छानबीन शुरू की। जहाँ एक मदरसे से चोरी की गई हज़ारों किताबें प्राप्त हुई हैं।

पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला आजम के खिलाफ पहले से यूपी पुलिस ने धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया था। बता दें कि पूर्व मंत्री के बेटे की तहरीर पर यह एफआईआर दर्ज की गई है। अब्दुल्ला आजम खान का पासपोर्ट जब्त करने की माँग भी की जा रही है।

बता दें कि हाल ही में भू-माफिया घोषित होने के बाद आज़म खान को एक बाद एक कई झटके लग रहे हैं। उनके खिलाफ जमीन अतिक्रमण के 26 से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं दूसरी ओर रामपुर ज़िला प्रशासन ने जौहर ट्रस्ट को लीज पर दी गई 2 बिल्डिंगों- मदरसा आलिया और दारुल अवाम की लीज को निरस्त करने की संस्तुति शासन से की है।

इसके आलावा हाल ही में बीजेपी की महिला सांसद पर की गई टिप्‍पणी के लिए भी आजम खान की काफी फजीहत हुई और उन्‍हें अपनी विवादित टिप्‍पणी के लिए लोकसभा में सांसद रमा देवी से माफी माँगनी पड़ी थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस के मुताबिक, पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला आजम खान पर FIR आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 के तहत मामला दर्ज किया गया था। बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने शिक्षण दस्तावेजों और पासपोर्ट में अलग-अलग जन्मतिथि दर्ज करवाने की शिकायत की थी।

J&K: फारूक अब्दुल्ला पर ED ने कसा शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को पूछताछ की। मामला राज्य क्रिकेट एसोसिएशन में वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। पूछताछ ईडी के चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में हुई। इस मामले में जनवरी में भी फारूक से पूछताछ की गई थी।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक भारी सुरक्षा के बीच फारूक ED दफ्तर करीब 11 बजे पहुँचे। उनके वकील को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान दफ्तर के बाहर कड़ी सुरक्षा थी और किसी को भी ई़डी कार्यालय परिसर में जाने की अनुमति नहीं दी गई।

गौरतलब है साल 2012 में 2 पूर्व क्रिकेटरों ने एक पीआईएल दायर की थी। इसके मुताबिक बीसीसीआई ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ (जेकेसीए) को 113 करोड़ रुपए राज्य में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए दिए थे। कथित तौर पर इसमें से 43 करोड़ रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर हेरफेर किए गए। इस दौरान फारूक जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष थे।

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में सीबीआई को जाँच के आदेश दिए। CBI ने गत वर्ष जुलाई में फारूक के अलावा तीन और लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की थी। जिन अन्य तीन के खिलाफ़ चार्जशीट दायर की गई उनमें क्रिकेट एसोसिएशन के तत्कालीन मुख्य सचिव मोहम्मद सलीम, कोषाध्यक्ष अहसान अहमद मिर्जा और जम्मू-कश्मीर बैंक के कर्मचारी बशीर अहमद मिसगार शामिल हैं।

कंगाल पाकिस्तान: इमरान ने दिया नान और रोटी की कीमतें कम करने का हुक्म

डूबने के कगार पर पहुॅंच चुके पाकिस्तान में खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही है। इस बीच, प्रधानमंत्री इमरान खान ने नान और रोटी की कीमतें कम करने का हुक्म दिया है। उन्होंने इस आदेश को तत्काल लागू करने को कहा है।

इमरान की विशेष सहायक फिरदौस आशिक अवान ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया, “प्रधानमंत्री इमरान खान ने नान और रोटी की बढ़ती कीमतों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है और उन्हें उनकी पुरानी दरों पर वापस लाने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है।”

डॉन ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक संघीय कैबिनेट की बैठक में पीएम के हस्तक्षेप के बाद नान और रोटी की कीमतों में कमी लाने का निर्णय लिया गया। बैठक के बाद पत्रकारों को अवान ने बताया, “कैबिनेट बैठक से अलग प्रधानमंत्री ने गैस, नान और रोटी की कीमतों को लेकर भी एक बैठक की।” उन्होंने बताया कि इसका मकसद गैस टैरिफ कम करना था, खासकर तंदूरवालों के लिए।

गौरतलब है कि गैस और आटे की कीमत बढ़ने के कारण पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में नान 12 से 15 रुपए में बेचा जा रहा है। पहले नान की कीमत 8-10 रुपए थी। इसी तरह 7-8 रुपए में मिल रही रोटी अब 10-12 रुपए में बेची जा रही है।

CRPF के खोजी कुत्ते एजॉक्सी ने ढूँढा भूस्खलन में दबा युवक, जवानों ने खोदकर निकाला: देखें वीडियो

सीआरपीएफ ने जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर भूस्खलन में दबे एक व्यक्ति को निकाल कर उसकी जिन्दगी बचाई है। सीआरपीएफ अधिकारियों के अनुसार यह युवक बीती रात हुए भूस्खलन की चपेट में आकर मलबे में दबा हुआ था। 

बुधवार (जुलाई 31, 2019) को जब सीआरपीएफ द्वारा हाईवे का निरीक्षण किया गया तो उस दौरान CRPF के डॉग स्क्वाड के एजॉक्सी ने मलबे में संदिग्ध वस्तु होने के संकेत दिए। जमीन से निकाले गए व्यक्ति का नाम प्रदीप कुमार है। सीआरपीएफ की टीम जब माइल स्टोन 147 के निकट से गुजरी तो एजॉक्सी भौंकने लगा और अपने ट्रेनर को वह जबरदस्ती सड़क के दूसरे किनारे ले गया। वहाँ पर पथरीली मिट्टी और कंकरीट के ढेर में युवक दबा पड़ा था।

सीआरपीएफ ने जब मलबा हटाया तो उसमें एक युवक दबा मिला। जिसे तत्काल सीआरपीएफ ने रेस्क्यू कर अस्पताल पहुँचाया।

हाईवे से जो वीडियो सामने आया है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह लगातार ऊपर से पत्थरों की बारिश हो रही है। घाटी में इसी तरह के मौसम की वजह से अभी अमरनाथ यात्रा को रद्द कर दिया गया है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर काफी लंबा जाम लगा हुआ है, स्थानीय प्रशासन फँसे हुए लोगों को निकालने में जुटा हुआ है।

Zomato वालो, हलाल के समय ‘Food has no Religion’ कहाँ गया?

ट्विटर पर एक और सांस्कृतिक लड़ाई शुरू हो गई है। फ़ूड डिलीवरी सर्विस Zomato ने ट्विटर पर खाने के साथ-साथ ज्ञान देना भी शुरू कर दिया है। आज जोमैटो ने बताया कि खाने का कोई मज़हब नहीं होता, बल्कि खाना अपने आप में मज़हब होता है।

जोमैटो के एक ग्राहक ने खाने की डिलीवरी लेने से मना कर दिया क्योंकि खाना पहुँचाने वाला समुदाय विशेष से था, और श्रावण के महीने में वह गैर-हिन्दू के हाथ से खाना नहीं स्वीकार करना चाहता था। इसपर कैंसलेशन फ़ीस काटना ज़ोमाटो का हक़ था, जो उन्होंने काटी। लेकिन साथ ही पलट कर ‘ज्ञान’ देना शुरू कर दिया कि खाने का कोई मज़हब नहीं होता, बल्कि खाना अपने आप में मज़हब होता है।

इतना नैतिक ज्ञान बघारना काफी नहीं था जोमैटो के लिए। उसके संस्थापक दीपिंदर गोयल ने भी नैतिक शिक्षा की क्लास ट्विटर पर लेनी शुरू कर दी। उनके अनुसार वह ‘idea of india’ के प्रति गौरवान्वित हैं और अपने ग्राहकों और साझीदारों की विभिन्नता का भी उन्हें गर्व है। साथ ही उनके कथित ‘मूल्यों’ के आड़े आने वाले किसी भी ग्राहक का बिज़नेस छोड़ने में उन्हें कोई अफ़सोस नहीं है।

खोखले मूल्य

जोमैटो के तथाकथित मूल्य कितने खोखले हैं, इसकी नज़ीर यह है कि जब एक ख़ास मजहब वाले ने गैर-हलाल खाने के लिए शिकायत की, तो जोमैटो उसके चरणों में गिर गया। उस समय उसके ‘मूल्य’ हवा हो गए, जबकि हलाल गैर-हलाल का मुद्दा भी उतना ही मज़हब और आस्था का विषय है, जितना खाना पहुँचाने वाले का हिन्दू होना या न होना।

जिन्हें लग रहा है कि यह एकतरफ़ा राजनीति है, उन्हें यह याद दिलाया जाना ज़रूरी है कि संघियों का आर्थिक बहिष्कार करने की अपीलें भी हुईं हैं इस देश में, और उस समय आज ‘राजनीतिकरण मत करो’ बोलने वाले हमेशा की तरह नदारद थे।

मैं उस व्यक्ति ने जो ट्वीट किया उससे सहमति नहीं रखता। लेकिन तथ्य यह भी है कि ऐसी चीज़ों से निपटने का एक प्रोफेशनल तरीका होता है, सोशल मीडिया पर ज्ञान बाँटने और नैतिकता के ठेकेदार बनने का काम कॉर्पोरेट कंपनियों का नहीं होता।

अलवर में गो तस्करों ने ग्रामीणों पर चलाई गोली, सलीम गिरफ्तार

राजस्थान के अलवर जिले में गो तस्करों ने ग्रामीणों पर फायरिंग की। हमले में जीतनराम नाम के ग्रामीण के सीने में गोली लगी। उनका भतीजा रामजीत भी घायल हो गया। इसके बाद अन्य ग्रामीणों ने एक तस्कर को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई की। 2 अन्य तस्कर फरार हो गए।

तस्कर की पहचान सलीम खान के रूप में हुई है। गुस्साए ग्रामीणों द्वारा पिटाई के बाद उसकी हालत गंभीर बनी हुई है, उसे अलवर के राजीव गाँधी सामान्य अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी छाती और सिर में गंभीर चोटें आई हैं। जिस कारण उसका सीटी स्कैन करवाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस मामले में पुलिस ने बताया कि अलवर के कठूमर थाना क्षेत्र के गाँव पत्थर पहाड़ी में मंगलवार (जुलाई 30, 2019) की रात 3 तस्कर कच्चे रास्ते से 10-15 गायों को ले जा रहे थे। आस-पास के ग्रामीणों ने पूछताछ की तो गो तस्करों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसमें 25 वर्षीय युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।

घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है। मामले की सूचना मिलते ही अलवर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह सहित कई अधिकारी अस्पताल पहुँचे और घटना के बारे में जानकारी ली। खबर के मुताबिक तस्करों को पकड़ने के लिए टीम भेज दी गई है।

डेरेक ‘नो ब्रेन’: न तो विधेयक पिज़्ज़ा है और न ही संसद चुंगी का अखाड़ा

क्या भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यह सोचा भी होगा कि संसद की त्वरित और जनता के मुद्दों के लिए समर्पित कार्यवाही भी एक दिन इसमें बैठे कुछ लोगों के लिए आपत्ति का विषय बन जाएगी? लेकिन ऐसा हो रहा है। देश के कुछ ऐसे नेता और सांसद, जिन्होंने वर्षों तक संसद को नारेबाजी और काम न होने का अड्डा बनाकर रखा था, अब इसकी प्रभावशाली कार्यप्रणाली से असहज नजर आने लगे हैं।

संसद में तेजी से पारित किए जा रहे विधेयकों को लेकर विपक्ष द्वारा आपत्‍ति जताई जा रही है। केंद्र सरकार के इस रवैये पर नाराजगी जताने वालों में से एक नाम तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद Derek-No Brain डेरेक ओ ब्रायन का भी है। डेरेक ओ ब्रायन संसद की क्रियाविधि से इतने हैरान हैं कि उन्हें एक विधेयक पास होने और पिज्जा डिलीवरी में अंतर समझ नहीं आ रहा है।

विवादित बयान देकर सस्ती लोकप्रियता बटोरने से ज्यादा डेरेक ओ ब्रायन की शायद ही कोई विशेष पहचान है। डेरेक ने एक ट्वीट में केंद्र सरकार पर निशाना साधने की कोशिश जरूर की है लेकिन इससे सिर्फ यही तथ्य सामने आता है कि वो किस तरह के सिस्टम के अभ्यस्त हैं और उनकी आपत्ति क्या हो सकती है?

डेरेक ने ट्वीट करते हुए लिखा है, “संसद को विधेयकों की समीक्षा करानी चाहिए। हम पिज्‍जा डिलीवर कर रहे हैं या विधेयकों को पारित कर रहे हैं?”

जब सरकार संवैधानिक दायरे में रह कर, तय तरीके से, तय समय में, वोटिंग के जरिए बिल पास करा रही है तो एक हिस्से को इससे समस्या क्या है? डेरेक की आपत्ति का मूल बेहद खोखला है। उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या किसी तरह का कोई गलत बिल पास हुआ है? क्या संसद में ऐसा कोई प्रावधान है कि निश्चित समय सीमा में ही कोई बिल पास हो? क्या सांसदों ने कुछ सवाल किए जिसका जवाब नहीं दिया गया? क्या विरोधी सांसद अपीजमेंट के चक्कर में बिलों को रोकना नहीं चाहते?

अगर सरकार तेज़ी से काम कर रही है तो उसका स्वागत होना चाहिए न कि फर्जी नैरेटिव तैयार करने के लिए सांसदों द्वारा अख़बारों में लेख लिख कर लोगों में भ्रम फैलाना चाहिए।

डेरेक ओ ब्रायन के बयान का सीधा सा मतलब यही है कि वे अब संसद की कार्यवाही पर ही सवाल उठा रहे हैं। पहले इन्होंने तरह-तरह के फर्जी घोटालों की ख़बरें उड़ाई, फिर सबूत माँगते रहे, आतंकियों को डिफेंड किया, मोदी फिर भी जीत गया तो अब ईवीएम पर रोने के बाद सीधे संसद पर ही सवाल उठा रहे हैं।

दरअसल, डेरेक का वास्तविक दर्द यह है कि उन्हें संसद की सामान्य प्रक्रियाओं की आदत ही नहीं है। जनता के पैसों पर संसद सत्र को बेवजह नारेबाजी का अखाड़ा और चुंगी में तब्दील करने वालों के लिए पिज्जा डिलीवर करने और एक विधेयक के पास होने में शायद ही कोई अंतर पता चल पाए।

इस विधेयक को समय से पास कर लेने से आम आदमी को तो यही सन्देश मिलता है कि यह सरकार वर्षों से शोषण का शिकार होती आ रही महिलाओं और आम आदमी के मुद्दों के प्रति कितनी संवेदनशील है। इसके लिए यदि सरकार को विधेयक पास करने के लिए ‘पिज्जा डिलीवरी’ स्पीड से भी काम करना पड़े तो इसमें कोई बुराई नहीं है। बुराई महत्वपूर्ण संस्थाओं के विरुद्ध फर्जी नैरेटिव तैयार कर उनकी छवि को जनता की नज़रों में खराब करने का प्रयास करना और अविश्वास पैदा करना है।

संसद चलाने का कुल बजट प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपए होता है, इसका मतलब यह है कि प्रतिदिन की कार्यवाही पर लगभग 6 करोड़ रुपए खर्च हो जाते हैं। सबसे साधारण शब्दों में इसका मतलब यह हुआ कि यदि भारत की संसद एक मिनट चले, तो जनता की कमाई का लगभग 2.5 लाख रुपया खर्च हो जाता है। इस तरह से हम जान सकते हैं कि जनता के पैसों का इस्तेमाल कुछ लोग सिर्फ सदन में बैठकर हो-हल्ला करने में व्यर्थ करना चाहते हैं और किसी विधेयक के पास हो जाने पर वे बौखला जाते हैं।

ब्रायन ने अपने बयान के बचाव में जिस तुलनात्मक ग्राफ को दिखाया है, वो बेहद फर्जी और अविश्वसनीय है जिसे एक मनगढंत तुलना से ज्यादा कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। इसमें प्रतिशत अंकों में दिखाया गया है कि अलग-अलग लोकसभा के दौरान कितने बिलों पर चर्चा की गई, लेकिन यह कहीं भी नहीं लिखा गया है कि यह तुलना किस आँकड़ें को किस संदर्भ में रखकर की गई है।

फिलहाल तो डेरेक ओ ब्रायन को यही सलाह दी जा सकती है कि वो पिज़्ज़ा-बर्गर-पॉपकॉर्न खाकर कुछ आत्मविश्लेषण कर लें। क्योंकि लगता नहीं है कि पूर्ववर्ती सरकारों की तरह ही यह सरकार भी उनके काम करने की शैली को जरा भी भाव देने वाली है। विशेषकर तब, जब आपकी संख्या मात्र 22 पर सिमट कर रह गई हो। शायद आरामपरस्ती का समय अब इतिहास बन गया है। डेरेक ओ ब्रायन को जय श्री राम।

CCD संस्थापक ने स्वीकारी थी काले धन की बात: IT विभाग

CCD संस्थापक वीजी सिद्धार्थ की मौत के मामले में IT (आयकर) विभाग के दावे से नया मोड़ आ गया है। IT विभाग ने कहा है कि उसके पास सिद्धार्थ का जो हस्ताक्षर, वह सोशल मीडिया पर चल रहे उनके कथित पत्र के हस्ताक्षर से अलग है। साथ ही विभाग ने जाँच के दौरान सिद्धार्थ को प्रताड़ित करने के आरोपों से भी इनकार किया है। विभाग के अनुसार पूर्व विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के दामाद ने अपनी आय के कुछ हिस्से को छिपाने का आरोप भी स्वीकारा था

मालूम हो कि सोमवार से लापता चल रहे सिद्धार्थ का लाश उल्लाल के निकट नेत्रवती नदी किनारे मिला। उनका शव वहाँ मौजूद स्थानीय मछुआरों ने निकाला।

‘भरसक कोशिश की लेकिन…’

जिस पत्र की बात हो रही है, वह दावे के अनुसार उन्होंने CCD के निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स) को लिखा था। इसमें वह लाभप्रद बिज़नेस का मॉडल खड़ा नहीं कर पाने के लिए निदेशक मंडल से माफ़ी माँग रहे हैं। पत्र में उन्होंने लिखा है कि भरसक कोशिश करते रहने के बाद आज (पत्र लिखते समय) वह हार मान रहे हैं, क्योंकि एक निजी इक्विटी पार्टनर उन्हें (सिद्धार्थ को) शेयर दोबारा खरीदने (‘buy back’) के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिसे आंशिक रूप से पूरा करने के लिए 6 महीने पहले उन्होंने एक मित्र से बड़ी रकम उधार ली थी। इसके अलावा अन्य देनदारों के भी भीषण दबाव की बात उन्होंने पत्र में कही है।

इस पत्र में वीजी सिद्धार्थ ने पूर्व आयकर महानिदेशक पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस मामले में 2017 में 4 दिन की छापेमारी के बाद आयकर विभाग को, रिपोर्टों के मुताबिक, तब बड़ी सफ़लता हाथ लगी थी जब सिद्धार्थ ने CCD की ₹650 करोड़ की छिपी आय का खुलासा किया था। इस मामले में आयकर विभाग ने सिद्धार्थ के 46 लाख निजी शेयर इन देनदारियों से अटैच किए थे। इसके अलावा सिद्धार्थ का दावा है कि CCD की माइंडट्री के साथ डील में भी आयकर विभाग ने उनके शेयर अटैच करके अड़ंगा लगाया था। 

RSS का आर्मी स्कूल : गुंडों की पार्टी सपा चिढ़ी, कहा-मॉब लिंचिंग सिखाएंगे

आम धारणा रही है कि उत्तर प्रदेश में जब-जब सपा की सरकार बनती है गुंडई का बोलबाला हो जाता है। सपा के खिलाफ एक बार बसपा ने नारा दिया था-चढ़ गुंडे की छाती पर…। महिलाओं को लेकर सपा नेता कैसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं यह जगजाहिर है। दुष्कर्म के आरोपियों का बचाव करते हुए इस पार्टी के पितृ पुरुष मुलायम सिंह यादव एक बार कह चुके हैं ‘लड़के हैं, गलती हो जाती है’।

अब जिस पार्टी का चाल-चरित्र ऐसा हो वह 1925 से राष्ट्र निर्माण में जुटी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के ‘आर्मी स्कूल’ खोलने की पहल की विरोध तो करेगा ही। सपा ने अपने समर्थकों को निराश नहीं करते हुए कहा है कि संघ द्वारा उत्तर प्रदेश में आर्मी स्कूल खोलना शक पैदा करता है। साथ ही कहा है कि संघ संविधान के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर साज़िश रचना चाहता है।

सपा के अनुसार संघ की विचारधारा विभाजनकारी है। आज़ादी की लड़ाई में उसकी भूमिका नकारात्मक थी और आज भी आज़ादी की लड़ाई के मूल्यों से उसका कोई लेना-देना नहीं है। संघ ऐसे संस्थान केवल राजनीतिक फायदे के लिए खोलना चाहता है, जहाँ सद्भाव भंग करने और मॉब-लिंचिंग करने के तरीके सिखाए जाएँगे।

संघ खोल रहा है ‘रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर प्रदेश में डिफेन्स परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष स्कूल ‘रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर’ खोल रहा है। इस स्कूल की इमारत में तीन-मंजिला हॉस्टल, अकादमिक बिल्डिंग, दवाखाना, स्टाफ सदस्यों के लिए रिहायशी विंग और एक बड़ा स्टेडियम होगा। प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹40 करोड़ है।

यह स्कूल आवासीय होगा। लड़कों के विंग का निर्माण पिछले अगस्त में ही शुरू हो चुका है। सीबीएसई पाठ्यक्रम का पालन करने वाले इस स्कूल में छठी से बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई होगी। बकौल पश्चिम उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में विद्या भारती उच्च शिक्षा संगठन के क्षेत्रीय संयोजक अजय गोयल, “यह एक प्रयोग है जो देश में पहली बार हो रहा है। अगर यह सफ़ल रहा तो इसे देश के कई स्थानों पर दोहराया जा सकता है।”

समाजवादियों का योगदान क्या है?

आरएसएस पर सवाल उठाने से पहले समाजवादी पार्टी को यह सोचना चाहिए कि देश में उनका क्या योगदान हा है? गुंडई यूपी में उसके राज की पहचान रही, महिलाओं को लेकर उसके नेता कैसे बयान देते हैं यह सबको पता है। वहीं, हम अगर संघ को देखे तो उनके पोर्टफोलियो में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्य, अपने स्वयंसेवकों में अनुशासन लाना और देश में राष्ट्र-प्रेम की भावना को जगाए रखना शामिल है। आरोप भले लगे हों, लेकिन आज तक कोई साबित नहीं कर पाया कि संघ कभी राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहा हो। ऐसे में समाजवादियों को ‘रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर’ पर सवाल उठाने से पहले अपना रिकॉर्ड झाँक कर देखना चाहिए।

उन्नाव रेप पीड़िता ऐक्सीडेंट: जहॉं ट्रक ने मारी थी टक्कर वहॉं पहुॅंची सीबीआई

उन्नाव रेप पीड़िता की गाड़ी को टक्कर मारने के मामले में सीबीआई हरकत में आ गई है। जॉंच एजेंसी की तीन सदस्यीय टीम ने बुधवार को रायबरेली में उस जगह पर जॉंच की, जहॉं 28 जुलाई को ऐक्सीडेंट हुआ था। हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी, जबकि पीड़िता और उसके वकील की हालत गंभीर बनी हुई है।

इस मामले में सीबीआई ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर सहित 10 लोगों के खिलाफ नामजद और 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया है। रेप और पीड़िता के पिता की पिटाई का मामला सामने आने के बाद से सेंगर जेल में है।

पीड़िता के परिजनों ने कार ऐक्सीडेंट को साजिश बताते हुए मामले की सीबीआई जॉंच की मॉंग की थी। बताया जा रहा है कि पीड़िता और उसके परिजनों को सेंगर और उसके समर्थक लगातार धमकी दे रहे थे। जिस ट्रक ने कार में टक्कर मारी थी उसके नंबर प्लेट पर कालिख पुती थी। ट्रक का मालिक एक सपा नेता का भाई है। सेंगर सपा में भी रह चुका है।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने पीड़िता का पत्र नहीं मिलने के मामले में रजिस्ट्रार से जवाब मॉंगा है। वे कल इस मामले की सुनवाई करेंगे। पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट भी तलब की गई है। गोगोई ने कहा है, “हम प्रयास करेंगे कि पीड़िता के लिए इस विध्वंसकारी माहौल में कुछ बेहतर किया जा सके।” गौरतलब है कि पीड़ित परिवार ने 12 जुलाई को चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखकर सेंगर से मिल रही धमकियों का जिक्र किया था।