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ये रिश्ता क्या कहलाता है: बरखा दत्त के ट्वीट्स से हिन्दुस्तान को अमानवीय-हिंसक बता रहा PAK

मशहूर पत्रकार बरखा दत्त के लिए सरहद पार से खुशखबरी आई है। भारत के पत्रकारिता जगत में विश्वसनीयता हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहीं बरखा को पाकिस्तान के अतिरिक्त इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (Addl IGP) ने ‘आईएसआई’ मार्का सर्टिफिकेट दिया है।

पाकिस्तान के Addl IGP डॉ. जमील अहमद ने ‘बेचारे कश्मीरियों के मानवाधिकार का हनन’ के अपने प्रोपगेंडा को हवा देने के लिए हिन्दुस्तान की सरकार को ‘अमानवीय’ करार देने वाले बरखा दत्त के ट्वीट को शेयर किया है। यह प्रोपगेंडा भारत के खिलाफ पाकिस्तान वर्षों से चला रहा है और बरखा के बयान कई मौकों पर उनके काम आए हैं।

‘फ़ोन लाइन खोलो, वरना तुममें इंसानियत नहीं’

ट्विटर पर साकिब यट्टू नामक कश्मीरी ने ट्वीट कर शिकायत की थी कि पाँच दिन से उन्हें अपने घर वालों की कोई खोज-खबर नहीं मिल पा रही है। उनकी अपनी माँ से आखिरी बार बात 4 अगस्त की रात को हुई थी। उसको आगे बढ़ाते हुए बरखा ने इस ‘information blockade’ (सूचनाओं की नाकेबंदी) को ‘अमानवीय’ करार दिया।

गौरतलब है कि आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी करने से पहले जम्मू-कश्मीर में एहतियातन कई कदम उठाए गए थे। इसी कड़ी में फोन और इंटरनेट सेवा भी बंद की गई थी।

सूचना गतिरोध मानवाधिकार हनन

बरखा दत्त ने पाकिस्तान को वही मौका दे दिया जिसकी वह सदैव तलाश में रहता है- दुनिया को यह दिखाने की कि हिंदुस्तान भी उसी की तरह हिंसक और अमानवीय है। जमील अहमद, जो कि सुक्कुर में पाकिस्तान के Addl IGP बनने से पहले CIA के कराची-प्रमुख रह चुके हैं (उनके ट्विटर bio के अनुसार), ने निम्न ट्वीट किया:

उन्होंने बरखा दत्त के ट्वीट के आधार पर हिंदुस्तान पर कश्मीर में गंभीर मानवाधिकार हनन करने का आरोप लगाया और हिन्दुस्तान के ‘पढ़े-लिखे, संयमित और सेक्युलर तत्वों’ से बरखा की बात सुनने और हिन्दुस्तान के खिलाफ आवाज़ उठाने की अपील की।

और यह पहली बार भी नहीं है। बरखा के पाकिस्तानी मुरीदों में हाफ़िज़ सईद जैसा खूँखार जिहादी भी शामिल है, और बरखा अनेक बार पाकिस्तानियों के एजेंडे को हवा, आवाज़ और विश्वसनीयता दे चुकीं हैं। जिहादी बुरहान वानी को ‘हेडमास्टर का बेटा’ बताकर उसके लिए सहानुभूति पैदा करने की कोशिश भी बरखा ने ही की थी।

यह भी ध्यान देने की बात है कि ये वही बरखा दत्त हैं जो पुलवामा आतंकी हमले के बाद पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को शांति का मसीहा साबित करने की पुरजोर कोशिश करती देखीं गई थीं।

तीन तलाक: अपराध बनने के बाद पहली गिरफ्तारी, WhatsApp पर दिया था तलाक

दिल्ली के आजाद मार्केट से पुलिस ने एक व्यक्ति को तीन तलाक देने के मामले में गिरफ्तार किया है। आरोपित के खिलाफ मुस्लिम महिला (प्रोटेक्शन ऑफ राइट ऑफ मैरिज) एक्ट 2019 के सेक्शन 4 के तहत केस दर्ज किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाले कानून के अमल में आने के बाद इस मामले में यह पहली गिरफ्तारी है।

नार्थ दिल्ली की डीसीपी नुपुर शर्मा ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा है कि शुक्रवार (अगस्त 8, 2019) को 29 वर्षीय रायमा याहिया ने बाड़ा हिंदू राव में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में रायमा ने कहा कि 24 नवंबर 2011 को उसका निकाह अतीर शमीम के साथ हुआ था। 23 जून को शमीम ने उसे व्हाट्सएप पर तीन तलाक दे दिया और साथ ही फतवा भी भेजा था। जिसके बाद मामला दर्ज कर शमीम को गिरफ्तार कर लिया गया।

https://www.youtube.com/watch?v=vDliG2miiA0

गौरतलब है कि तीन तलाक़ को अपराध बनाने वाले बिल पर हाल ही में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हस्ताक्षर किया था। 19 सितंबर 2018 के बाद जितने भी मामले तीन तलाक से संबंधित आए हैं, उन सभी का निपटारा इसी कानून के तहत किया जाएगा। कानून में इसके लिए कैद की सजा का प्रावधान भी है।

Fact Check: CM खट्टर ने नहीं दिया कश्मीर से लड़कियाँ लाने वाला बयान, देखें वीडियो

मीडिया ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बयान को ग़लत तरीके से पेश किया। खट्टर ने हरियाणा में सुधरते लिंगानुपात की बात करते हुए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की सफलता की चर्चा की। इस दौरान मीडिया ने सीएम के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर इसे विवादित बयान बताया। कई मीडिया पोर्टल्स ने ख़बर प्रकाशित किया कि खट्टर ने कश्मीर से लड़कियों को बहू बना कर लाने की बात कही है। आपको बता दें कि यह फेक न्यूज़ है। न मुख्यमंत्री ने ऐसा कुछ कहा है और न ही उनके बयान का यह अर्थ था। आइए आपको बताते हैं कैसे मीडिया ने इस बयान के साथ छेड़छाड़ कर इसे पेश किया।

सबसे पहले जानते हैं कि मुख्यमंत्री ने कहा क्या था? लिंगानुपात व ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ की बात करते हुए खट्टर ने कहा कि हरियाणा का नाम पहले बदनाम था और यह बेटी मारने वाले प्रदेश के रूप में कुख्यात हो गया था। बेटियों को बचाने के लिए चलाई गई विभिन्न योजनाओं की सफलता पर बात करते हुए खट्टर ने बताया कि पहले हरियाणा में लिंगानुपात 850 था, अर्थात प्रति 1000 लड़कों पर 850 लड़कियों का अनुपात। वहीं अगर ताज़ा आँकड़ों की बात करें तो यह बढ़ कर 933 हो गया है, जो दिखाता है कि इस मामले में हरियाणा बड़े सुधार की ओर अग्रसर है।

लिंगानुपात के 850 ने 933 होने को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक बहुत बड़ा परिवर्तन बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी बुजुर्ग या नौजवान इस बात को समझ सकता है कि लिंगानुपात घटने पर भविष्य में बहुत बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा, क्योंकि लड़कियों की संख्या कम हो जाएगी और लड़कों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाएगी। इसके बाद अब मुख्यमंत्री के उस बयान पर आते हैं, जिसे लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सीएम ने कहा,

“हमारे धनखड़ जी ने कहा कि बिहार से (बहुएँ) लानी पड़ेंगी। अब कुछ लोग कह रहे हैं कि कश्मीर खुल गया, अब वहाँ से लेकर आएँगे। ‘मजाक’ की बातें अलग हैं। लेकिन समाज में लिंगानुपात ठीक होगा तो संतुलन बैठेगा।”

वीडियो को ध्यान से देखें और सुनें: खट्टर ने कुछ भी विवादित नहीं कहा, मीडिया ने ग़लत ख़बर चलाई

इस बयान को आप ऊपर संलग्न की गई वीडियो में भी सुन सकते हैं। दरअसल, खट्टर ने हरियाणा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ओपी धनखड़ के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बिहार और हरियाणा के बीच एक सामाजिक गठबंधन के द्वारा हरियाणा में लिंगानुपात सुधारने की बात कही थी। ऐसा उन्होंने हरियाणा में बिहारी लड़कियों की ट्रैफिकिंग रोकने का निदान सुझाते हुआ कहा था।

अब देखिए कैसे खट्टर के इस बयान को लेकर उन पर निशाना साधा गया। खट्टर ने साफ़-साफ़ कहा कि ‘लोग ऐसा कह रहे हैं’ और ऐसे बयानों को ‘मजाक की बातें’ भी कहा लेकिन कई लोगों ने उन्हें ऐसे निशाना बनाना शुरू कर दिया, जैसे उन्होंने ही कश्मीर से लड़कियाँ लाने की बात कही हो। शेखर गुप्ता की ‘द प्रिंट’ की कॉरेस्पोंडेंट ज्योति यादव ने हरियाणा की लिंगानुपात को लेकर पूरे हरियाणा को ही निशाने पर लिया और वहाँ के लोगों को भला-बुरा कहा।

स्क्रॉल ने भी खट्टर के इस बयान को ग़लत तरीके से पेश किया, जिसे दक्ष प्रोपेगंडाबाज अशोक स्वेन ने शेयर करते हुए आरोप लगाया कि आरएसएस के लोग कश्मीरी लड़कियों को ‘सेक्स स्लेव’ बनाना चाहते हैं।

स्क्रॉल की फेक ख़बर के आधार पर अशोक स्वेन ने लगाया बड़ा आरोप

स्क्रॉल की इस ख़बर को हामिद मीर और अरशद शरीफ जैसे पाकिस्तानी पत्रकारों ने भी शेयर किया। कर्नाटक यूथ कॉन्ग्रेस नेता श्रीवत्स ने इस फेक न्यूज़ के आधार पर लिखा कि जनता को खट्टर जैसे नेताओं को नकार देना चाहिए।

‘द हिन्दू’ जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों ने भी फेक न्यूज़ को अपनी वेबसाइट पर जगह दी

जेएनयू के विवादित छात्र नेता उम्र खालिद भी पीछे नहीं रहे और उन्होंने लिखा कि खट्टर जैसे मुख्यमंत्री के रहते हमें ट्रॉल्स की कोई ज़रूरत ही नहीं है।

‘इंडिया टुडे’ ने भी फैलाया फेक न्यूज़

कॉन्ग्रेस नेता तहसीन पूनावाला तो एक क़दम और आगे बढ़ गए। उन्होंने सीएम खट्टर को ‘घिनौनी और विकृत मानसिकता वाला व्यक्ति’ बता दिया। कॉन्ग्रेस नेता ने एक मुख्यमंत्री को उस बयान के लिए अपशब्द कहे, जो बयान उन्होंने दिया ही नहीं था।

गिरोह विशेष के सदस्यों के कुछ अन्य ट्वीट्स पर नजर डालिए। बिना सच जाने और ख़बर की सच्चाई की पुष्टि किए बिना उन्होंने फेक न्यूज़ के आधार पर सीएम खट्टर को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। ये रहे ट्वीट्स:

कई मीडिया संस्थानों व पत्रकारों ने खट्टर के बयान को अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन से जोड़ा और संघ से लेकर भाजपा तक की मानसिकता पर सवाल खड़े किए। कॉन्सपिरेसी थ्योरी के एक्सपर्ट्स ने एक से बढ़ कर एक झूठ का सहारा लिया और अपनी मानसिकता का परिचय दिया। लेकिन, वीडियो के सामने आने के बाद उनकी पोल खुल गई।

वासिफ और वसाफ की हवस का शिकार बनी नाबालिग पीड़िता ने की खुदकुशी

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक नाबालिग रेप पीड़िता ने तानों से तंग आकर ख़ुदकुशी कर ली। पीड़िता का शव फंदे से लटका पाया गया। जब पुलिस ने उसे उतारने की कोशिश की तो परिजनों और पुलिस के बीच विवाद हो गया। पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए लोगों ने करीब डेढ़ घंटे तक हंगामा किया।


ख़बर के अनुसार, एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल, सीओ अनवरगंज सैफुद्दीन बेग पुलिस फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को शांत करवाया। उसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

कानपुर के रायपुरवा निवासी एक कारपेंटर की 13 वर्षीय नाबालिग लड़की को 13 जुलाई की रात सगे भाई वासिफ और वसाफ अगवा कर ले गए थे। उन्होंने अपने दोस्त श्यामू उर्फ़ सम्मू के साथ मिलकर नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। अगले दिन पीड़िता जब घर पहुँची तो उसने परिजनों को आपबीती सुनाई। इसके बाद परिजन उसे थाने ले गए।

परिजनों के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। कई चक्कर लगाने के बाद 27 जुलाई को रायपुरवा पुलिस न FIR दर्ज की, लेकिन आरोपितों को गिरफ़्तार नहीं किया। शुक्रवार (9 अगस्त) को क़रीब साढ़े आठ बजे जब घर के सभी सदस्य बाहर थे तो पीड़िता ने कमरे में जाकर दुपट्टे का फंदा बनाकर फाँसी लगा ली।

एसएसपी अनंत देव ने बताया कि पुलिस ने उन दो महिलाओं को गिरफ़्तार कर लिया है जिन्होंने पीड़िता को दुष्कर्म की बात पर ताना मारा था। उन्होंने बताया कि शायद पीड़िता ने महिलाओं द्वारा चिढ़ाए जाने और आरोपितों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई न होने से आहत होकर यह कदम उठाया। फ़िलहाल, दोनों महिलाएँ हिरासत में हैं और पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

कॉन्ग्रेस नेता अपराधियों से भी बदतर: झारखंड प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार का इस्तीफा

झारखंड के प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने शुक्रवार (अगस्त 9, 2019) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सोनिया और राहुल गॉंधी सहित 10 कॉन्ग्रेस नेताओं को भेजे अपने इस्तीफे में उन्होंने पार्टी के अपने सहयोगियों को अपराधियों से भी बदतर बताया है।

कुमार ने कहा है कि उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी को आगे ले जाने के लिए काफी ईमानदारी से कोशिश की। झारखंड में पार्टी की कमान संभालने की बाद वे पार्टी को एकीकृत और जिम्मेदार तरीके से आगे ले जाना चाहते थे, लेकिन चंद लोगों के निहित स्वार्थों के कारण ऐसा नहीं कर सके।

राजनीति में आने से पहले बतौर आईपीएस अधिकारी के अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए इस्तीफे में उन्होंने कहा है, “मैं पुलिस वीरता पुरस्कार के सबसे कम उम्र के विजेताओं में से एक हूँ। जमशेदपुर में माफिया का सफाया किया। मैं आत्मविश्वास से कह सकता हूँ सबसे खराब से खराब अपराधी भी मेरे इन सहयोगियों से बेहतर दिखते हैं।”

डॉ. अजय ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि प्रदेश के अधिकांश नेता पार्टी के प्रति वफादार नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि पार्टी के कुछ नेता जैसे सुबोध कांत सहाय, रामेश्वर उरांव, प्रदीप बलमुचू, चंद्रशेखर दुबे, फुरकान अंसारी और कई अन्य वरिष्ठ नेता केवल राजनीतिक पदों को हथियाने में लगे हैं। व्यक्तिगत लाभ के लिए पार्टी हित को ताक पर रखने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इनका सहयाेग न मिलने के बावजूद 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने पिछले चुनाव की अपेक्षा 12 फ़ीसदी ज्यादा वोट हासिल किया था।

इस्तीफे में उन्होंने पार्टी कार्यालय में खुद पर हमला करवाने और गुंडों को रखने का आरोप भी प्रदेश के नेताओं पर लगाया है। उन्होंने कहा है कि सुबोधकांत सहाय जैसे तथाकथित कद्दावर नेता का प्रदेश पार्टी मुख्यालय में किन्नरों को उत्पात मचाने के लिए प्रोत्साहित करना बेहद स्तरहीन और घटिया हरकत थी। उन्होंने कहा कि तथाकथित वरिष्ठ नेता इन कामों के लिए तो पैसे खर्च करते हैं, लेकिन उनमें से एक भी 5,000 रुपए प्रति माह पार्टी हित में योगदान करने के लिए तैयार नहीं हैं।

साथ ही उन्होंने कहा है कि झारखंड के सभी वरिष्ठ नेता केवल अपने परिवारों के लिए लड़ते हैं। एक नेता अपने लिए बोकारो और बेटे के लिए पलामू से सीट चाहते हैं। एक नेता को भाई के लिए हटिया सीट चाहिए। दूसरा नेता घाटशिला से बेटी के लिए और खूंटी से खुद के लिए सीट चाहता है। एक अन्य नेता जामताड़ा से बेटे के लिए और मधुपुर से बेटी के लिए सीट चाहते हैं। एक नेता अब तक लड़े तमाम चुनाव हार कर भी गुमला से टिकट चाहते हैं। ये नेता आलाकमान की सहमति से बने गठबंधन का तभी तक समर्थन करते हैं जब तक उनकी अपनी सीट सुरक्षित रहती है।

Article 370: ब्रिटिश MP ने लेबर पार्टी के मुस्लिम सांसदों को बताया हिन्दू-विरोधी

ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को पत्र लिख कर अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार के फैसले को भारत का आंतरिक मुद्दा बताया है। सांसद ने लिखा है कि हम किसी अन्य देश के आंतरिक मसलों में हस्तक्षेप नहीं करते और भारत जैसे मित्र देशों के आंतरिक मुद्दों में तो बिलकुल नहीं। बॉब ने लिखा कि भारत सरकार ने देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार देने का निर्णय लिया है और क्या एक लोकतान्त्रिक देश में इस निर्णय का विरोध करना उचित है? उन्होंने इस बात पर नाराज़गी जताई कि लेबर पार्टी के कुछ सांसद इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं।

सांसद बॉब ने याद दिलाया कि अनुच्छेद 370 हटाना भाजपा का चुनावी वादा था और उसे अपने घोषणा-पत्र के वादों को पूरा करने का पूरा हक है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि यह मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल है और लेबर पार्टी के सांसदों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह अबकी वह पिछली बार से भी अधिक मजबूत बहुमत लेकर सत्ता में आए हैं। सांसद बॉब ने पूछा कि क्या एक लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अपने वादे पूरा करने का अधिकार नहीं है?

बॉब ब्लैकमैन ने लिखा है कि भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 का प्रावधानों को ख़त्म करने और जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन करने से सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी और राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने लिखा,

“70% बौद्ध जनसंख्या वाले लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित करना यह दिखाता है कि भारत सभी धर्मों व सम्प्रदायों के प्रति सहिष्णु रुख रखता है। लेबर पार्टी हिन्दू-विरोधी और भारत-विरोधी पार्टी बन गई है, जो विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र से हमारे संबंधों को बिगाड़ना चाहती है। हजारों कश्मीरी पंडितों को इस्लाम कबूल न करने पर या तो मार डाला गया था या फिर अपनी मातृभूमि से निकाल दिया गया। इस त्रासदीपूर्ण इतिहास को नजरअंदाज किए बिना भारत सरकार पर ‘जमीन छीनने’ और ‘हिन्दू नागरिकों को बसाने’ जैसे भड़काऊ आरोप लगाए जा रहे हैं।”

बता दें कि कुछ सांसदों ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को पत्र लिख कर भारत सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने ब्रिटेन को भारत, कश्मीर और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की सलाह देते हुए लिखा था कि भारत कश्मीर पर कब्ज़ा करने का प्रयास कर रहा है। इन सांसदों ने मॉब लॉन्चिंग का भी रोना रोया और लिखा कि कश्मीर को नई दिल्ली ने गुलाम बना लिया है। पत्र लिखने वाले सांसदों में खालिद महमूद, फैसल राशिद, शबाना महमूद, मोहम्मद राशिद व अन्य शामिल थे।

इन मुस्लिम सांसदों ने भारत सरकार पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिम बहुल कश्मीर में हिन्दुओं को बसा कर राज्य को हिन्दू बहुल बनाना चाहती है। संसद बॉब ब्लैकमैन ने इन मुस्लिम सांसदों के पत्र पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि कंजर्वेटिव पार्टी को लेबर पार्टी की विभाजनकारी नीति से बचना चाहिए और एकता को बढ़ावा देना चाहिए। बॉब ने सिख, यहूदी व जैन का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग सम्प्रदायों का सम्मान करने का और उन्हें बढ़ावा देने का भारत का पुराना इतिहास रहा है।

Article 370: जम्मू में धारा-144 हटते ही पटरी पर लौटी ज़िंदगी, स्कूल-कॉलेज पहुँचे छात्र

जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को ख़त्म करने और इसे दो हिस्से में विभाजित कर केंद्र शासित प्रदेश बनाने के सरकार के फ़ैसले के बाद अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। शुक्रवार (9 अगस्त) की शाम को जम्मू से धारा-144 (चार से अधिक लोगों के एक साथ होने पर रोक) हटा दी गई थी। इससे पहले घाटी की स्थानीय मस्जिदों में जुम्मे की नमाज के लिए कर्फ़्यू में ढील दी गई थी।

जम्मू ज़िले की सुषमा चौहान ने बताया कि धारा-144 के आदेश को जम्मू म्यूनिसिपल से वापस ले लिया गया है। बता दें कि गत 5 अगस्त को वहाँ धारा-144 लगाई गई थी। 

आज (10 अगस्त) जम्मू की सड़कों पर आम दिनों की तरह हलचल देखने को मिली, बच्चे बसों से स्कूल जाते दिखे। फ़िलहाल, सभी गतिविधियाँ सामान्य हैं, लेकिन फिर भी प्रशासन की नज़र हालात पर लगातार बनी हुई है। इंटरनेट सेवाएँ अभी भी बंद हैं।

राज्यपाल सत्यपाल मलिक के अनुसार, श्रीनगर के लोग बकरीद मना सकें इसके लिए प्रशासन ने राज्य में सभी आवश्यक इंतज़ाम कर लिए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में दो महीने का राशन है, पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी का स्टॉक मौजूद है। जम्मू में बकरीद की तैयारियों को लेकर आज दुकानें, बाज़ार खुल गए हैं।

कुमारस्वामी थे CM, टेप में अहमद पटेल का नाम, लेकिन शेखर गुप्ता की नज़र में येदियुरप्पा दोषी

एडिटर्स गिल्ड वाले शेखर गुप्ता ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को उस मामले में घसीटने की कोशिश की है, जिसमें कहीं उनका नाम भी नहीं है। जिस मामले में कॉन्ग्रेस नेताओं पर आरोप लगे हैं, ‘द प्रिंट’ के शेखर गुप्ता ने उसे भाजपा नेता येदियुरप्पा का स्कैंडल बता डाला। जब लोगों ने उनसे पूछा कि इस पूरी ख़बर में येदियुरप्पा का नाम कहाँ है, तो वह चुप्पी साध गए।

दरअसल, ‘न्यूज़ 18 कन्नड़’ ने एक ऑडियो टेप जारी किया है जो 6 महीने पुराना है। इस टेप में कर्नाटक के आईपीएस अधिकारी भास्कर राव किसी फराज नामक व्यक्ति से बात कर रहे हैं, ताकि वह बेंगलुरू के पुलिस कमिश्नर बन सकें। इस क्लिप में फराज कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल का नाम लेकर कहता है कि वह भूपिंदर हुड्डा से मिलने में व्यस्त हैं, उनके लौटते ही वह राव की पैरवी करेगा।

इस टेप में कॉन्ग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल का भी नाम आता है। फराज इस टेप में बार बार ‘AP साहब’ का नाम लेता है और ‘राहुल जी’ से मिलने की बात भी करता है। इस ऑडियो टेप में फराज कहता है कि जेडीएस सुप्रीमो एचडी देवगौड़ा और अहमद पटेल की काफ़ी अच्छी बनती है, इसीलिए अहमद पटेल के कहने से काम हो जाएगा। इस टेप में केवल कॉन्ग्रेस नेताओं का ही नाम सामने आता है लेकिन शेखर गुप्ता ने अपनी ट्वीट में न जाने कहाँ से येदियुरप्पा को ब्लेम कर दिया।

ये ऑडियो टेप असत्यापित है, अर्थात ‘न्यूज़ 18 कन्नड़’ अथवा ‘द प्रिंट’ ने इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं की है, अतः ऑपइंडिया भी इसकी पुष्टि नहीं करता। लेकिन, जिस ऑडियो टेप में कॉन्ग्रेस नेताओं की मदद से पिछले दरवाजे से कमिश्नर बनाए जाने की बात सामने आ रही है, उसमें येदियुरप्पा दोषी कैसे? यह येदियुरप्पा का स्कैंडल कैसे हुआ? यह ऑडियो टेप भी 6 महीने पुराना है, अर्थात उस समय एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री थे और राज्य में जेडीएस-कॉन्ग्रेस की गठबंधन सरकार थी।

उन्नाव रेप केस: ड्राइवर-क्लीनर के होंगे ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट, CBI को मिली इजाजत

उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की कार को टक्कर मारने वाले ट्रक चालक आशीष कुमार पाल और क्लीनर मोहन श्रीवास का नार्को टेस्ट और ब्रेन मैपिंग होगी। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सुब्रत पाठक ने CBI को ड्राइवर और क्लीनर के नार्को टेस्ट, ब्रेन मैपिंग टेस्ट और ब्रेन फिंगर प्रिन्टिंग टेस्ट कराने की अनुमति दे दी है। आरोपितों की जाँच कराने की अनुमति CBI ने शुक्रवार (09 अगस्त) को माँगी थी।

ख़बर के अनुसार, CBI के डिप्टी एसपी राम सिंह ने बताया कि इस मामले की विवेचना के लिए ट्रक ड्राइवर और क्लीनर का टेस्ट कराया जाना बेहद ज़रूरी है। इसके मद्देनज़र सुनवाई करते हुए विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने यह आदेश दिया। इसके अलावा कोर्ट ने दोनों आरोपितों को 14 अगस्त तक CBI कस्टडी में भी भेज दिया है।

ग़ौरतलब है कि दुष्कर्म पीड़िता और उनके वकील 28 जुलाई को रायबरेली में एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हादसे में पीड़िता के दो रिश्तेदार की मौत हो गई थी। इसके बाद 30 जुलाई को पीड़िता के चाचा महेश सिंह ने एक्सीडेंट के मामले में बीजेपी से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत अन्य के ख़िलाफ़ हत्या, हत्या की साज़िश, हत्या की कोशिश और जानमाल की धमकी की धाराओं में FIR दर्ज कराई थी।

बता दें कि दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को कुलदीप सिंह सेंगर के ख़िलाफ़ रेप के मामले में आरोप तय किए थे।

Article 370: रूस भी भारत के साथ, कहा- संवैधानिक दायरे में मोदी सरकार का फैसला

जम्मू-कश्मीर के ताज़ा घटनाक्रम पर रूस ने पाकिस्तान को करारा झटका देते हुए भारत के क़दम का समर्थन किया है। रूस के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि जम्मू कश्मीर पर भारत द्वारा लिया गया निर्णय भारतीय संविधान के अनुरूप है।

इससे पहले इस मसले पर तालिबान ने पाकिस्तान को लताड़ा था और चीन ने भी निराश किया था। रूस के ने कहा है कि उसने भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्ते सामान्य रखने का लगातार समर्थन किया है। तथ्यों की गहन पड़ताल करने के बाद वह इस फैसले पर पहुँचा है कि भारत ने अपने संविधान के दायरे में रहते हुए फैसला किया है। साथ ही उसने दोनों देशों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से द्विपक्षीय मसलों को सुलझाने की सलाह दी और आशा जताई कि हालत सामान्य हो जाएँगे। रूस ने कहा है, “उसे उम्मीद है कि जम्मू -कश्मीर पर ताजा निर्णय के बाद भारत और पाकिस्तान इलाके में हालात बिगड़ने नहीं देंगे।”

रूस का खुलकर साथ आना पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने में लगे भारत की कूटनीतिक जीत भी है। बता दें कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त कर विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया है। राज्य को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का निर्णय लिया गया है। जहाँ जम्मू कश्मीर विधायिका सहित यूटी होगा वहीं लद्दाख विधायिका रहित यूटी होगा।

पाकिस्तान ने भारत के इस निर्णय पर आपत्ति जताई और वहाँ की संसद में इसे लेकर बहस भी हुई। उसने संयुक्त राष्ट्र में शिकायत करने की धमकी दी है। हालाँकि, UNSC उसकी प्रतिक्रिया पर टिप्पणी से इनकार कर चुका है।