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हमें छूने की हिमाकत मत करना दीदी, हम हैं ATOM BOMB: ओवैसी की पार्टी ने दी ममता को चेतावनी

असद्दुदीन ओवैसी के नेतृत्व वाले इस्लामी संघठन ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल ने फैसला किया है कि साल 2021 में होने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव में वे अपनी दावेदारी रखेंगे।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामिक संगठन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी से तय करने को कहा है कि वे AIMIM को दोस्त समझती हैं या फिर दुश्मन।

बता दें पार्टी ने राज्य में अभी तक कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा है और न ही यहाँ इनकी आधिकारिक रूप से कोई कमेटी है। लेकिन हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता असीम वकार ने अपनी ताकत का बखान करते हुए बयान जरूर दिया, “ये सच है कि तादाद में कम हैं, लेकिन हमें छूना मत। हम ATOM BOMB हैं। दीदी! हमें आपकी दोस्ती भी कुबूल और आपकी दुश्मनी भी। आपको तय करना है कि आप हमें दोस्त समझते हो या फिर दुश्मन।”

हालाँकि, जिस ट्विटर अकॉउंट से वकार ने ये बयान दिया है, वो सत्यापित नहीं हैं, लेकिन फिर भी ये बयान इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि वकार के इस अकॉउंट को ओवैसी द्वारा खुद फॉलो किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार बंगाल में राज्य सरकार द्वारा संचालित नजरूल मंच ऑडिटोरियम में AIMIM के बंगाल कार्यकर्ताओं की मीटिंग आखिरी समय में कैंसिल होने के बाद AIMIM और TMC के बीच तनाव बढ़ गया है। नजरुल मंच के अधिकारियों ने इस मामले पर बात करने से इंकार कर दिया है क्योंकि ये ऑडिटोरियम सूचना एवं संस्कृति मंत्रालय के अधीन है जिसकी मुखिया खुद ममता बनर्जी हैं।

हालाँकि, इससे पहले AIMIM ने धर्मताल में 28 जुलाई को अपने कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक की थी। जहाँ AIMIM के महाराष्ट्र एमएलए वारिस पठान भी मौजूद थे। इस दौरान असीम वकार ने घोषणा करते हुए कहा था कि इस्लाम यहूदियों के ख़िलाफ़ अपने शुरुआती दौर से संघर्ष कर रहा है। यहाँ उन्होंने भीड़ को जोर से ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाने को भा कहा, ताकि उसकी आवाजें अमेरिका और इजराइल तक पहुँच सके।

वहीं, भाजपा बंगाल ईकाई के महासचिव सांतनु बासु ने इस पूरे मामले पर बयान देते हुए कहा है कि एआईएमआईएम केवल चुनावी समझ के लिए टीएमसी के साथ सौदेबाजी कर रही है।

गौरतलब है अगर बंगाल की राजनीति में AIMIM अपने किस्मत आजमाती है तो राज्य की राजनीति के साथ टीएमसी की राजनीति में भी बहुत बदलाव देखने को मिलेगा। क्योंकि बंगाल में मुस्लिमों की तादाद बहुत ज्यादा है और टीएमसी मुख्यत: इन्हें ही अपना वोट बैंक समझती हैं। ऐसे में अगर मुस्लिमों के सामने AIMIM जैसा इस्लामिक संगठन विकल्प के रूप में मौजूद होगा तो निसंदेह ही वे उसे वोट देंगे। इस तरह AIMIM के आने से बंगाल में मतदाताओं के वोट बँटने की संभावना बढ़ जाएगी। बता दें प्रदेश में हिंदुओं पर पहले से ही समर्थन देने के लिए भाजपा के रूप में विकल्प मौजूद है, जिसका असर हमने लोकसभा चुनाव में देखा है।

शिवरात्रि: काँवड़ चढ़ाने गई लड़कियों से आसिफ, नोमान, इसराइल, जुबैर, नईम, हाशिम ने की छेड़छाड़, मारपीट

हरियाणा के नूंह शहर के भूतेश्वर मंदिर में मंगलवार को शिवरात्रि के अवसर पर काँवड़ चढ़ाने के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवकों द्वारा लड़कियों को छेड़ने का मामला सामने आया। जानकारी के मुताबिक जब लड़कियों के परिजनों ने इसका विरोध किया तो आसिफ, हुसैन, नोमान, इसराइल, जुबैर, सुब्बे, नईम और हाशिम ने उनसे मारपीट की।

इस मारपीट में एक युवक के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। जबकि अन्य घायलों का इलाज मेडिकल कॉलेज नल्हड़ में चल रहा है।

इस मामले की शिकायत वार्ड 7 में रहने वाले मनोज कुमार ने महिला पुलिस थाने में करवाई। जिसके बाद आरोपित इसराइल को गिरफ्तार कर लिया गया। अन्य आरोपित फिलहाल अभी फरार है। पुलिस के मुताबिक उनकी तलाश की जा रही है।

पूरे घटनाक्रम में मनोज, अमित सिंह, सागर मेहरा, परवेश आदि को चोटें आईं हैं, जिसके बाद मेवात के दूसरे समुदाय के लोगों में गुस्सा रोष बना हुआ है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले पर नूंह थाना प्रभारी महेंद्र सिंह ने बताया है यहाँ कुछ लड़कियों के साथ सड़क पर जाते समय छेड़छाड़ होने की बात सामने आई। जिसके मद्देनजर महिला थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जाँच की जा रही है। थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

यूपी की पाकिस्तान वाली गली: हम भारतीय, मोदी जी बदल दीजिए हमारे मुहल्ले का नाम

देश की राजधानी से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक मोहल्ला है “पाकिस्तान वाली गली”। यहॉं के निवासियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मोहल्ले का नाम बदलने की गुहार लगाई है। यहॉं कि निवासियों का कहना है कि नाम की वजह से उन्हें सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित होना पड़ता है।

असल में, विभाजन के दौरान कुछ लोग पाकिस्तान से आकर यहॉं बस गए थे, जिसके कारण इस गली का नाम ‘पाकिस्तान वाली गली’ पड़ गया। यहॉं रह रहे लोगों का कहना है कि उनके पूर्वज पाकिस्तान से आकर बस गए थे, इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।

एक निवासी ने बताया, “हम भारतीय हैं। बहुत पहले हमारे चार पूर्वज यहॉं आकर बसे थे। लेकिन, अब भी हमारे आधार कार्ड पर पाकिस्तान वाली गली लिखा हुआ है। हम इस देश का हिस्सा हैं तो फिर क्यों हमें पाकिस्तान के नाम पर अलग किया जा रहा।”

निवासियों का कहना है कि वे रोजगार और अपने बच्चों के लिए शिक्षा चाहते हैं। स्थानीय निवासी भूपेश कुमार ने बताया, “आधार कार्ड दिखाने के बावजूद हमें काम नहीं मिलता। हमने अपने बच्चों की शिक्षा पर बहुत पैसे खर्च किए हैं, लेकिन फिर भी उनको नौकरी नहीं मिलती। हम बेहद परेशान हैं। हम पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस कॉलोनी का नाम बदलने और रोजगार की मांग कर रहे हैं।”

एक अन्य निवासी ने बताया, “लोग हमसे बहुत बुरा बर्ताव करते हैं, जैसे हम दूसरे देश के हों। यह सब ‘पाकिस्तान वाली गली’ नाम के कारण हो रहा है। हमें उम्मीद है कि पीएम मोदी तक हमारी गुहार पहुॅंची तो वे इस मामले पर एक्शन जरूर लेंगे।”

इस मोहल्ले में करीब 60-70 घर हैं और यहॉं के निवासी चाहते हैं कि उनके मोहल्ले का नाम सरकार बदल दे ताकि अपने ही देश में खुद को उपेक्षित और अलग-थलग महसूस न करें।

गायों को बचाने के लिए अकेले ही जूझा गोपाल, तस्करों ने गोली मारकर की हत्या

हरियाणा के पलवल में सोमवार (जुलाई 28, 2019) की शाम करीब 7:30 बजे कुछ गो तस्करों ने एक गो रक्षक की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक का नाम गोपाल है और वह होडल थाना क्षेत्र के गाँव सोंदहद के निवासी थे। इसके अलावा सोशल मीडिया से प्राप्त जानकारी के मुताबिक वे तीन बच्चियों के भी पिता थे।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के मुताबिक घटना के बाद मृतक के परिजनों ने बताया कि गोपाल गौ रक्षक दल से जुड़े हुए थे। वह पहले भी कई गायों को तस्करों की पकड़ से छुड़ा चुके थे। उन्हें सोमवार (जुलाई 29, 2019) को किसी ने सूचना दी थी कि कुछ लोग गाय की तस्करी कर रहे हैं। जिसके बाद अपनी बाइक लेकर निहत्थे ही वे गायों को बचाने के लिए तस्करों का पीछा करने लगे। परिणाम स्वरुप रास्ते का रोड़ा बनता देख गो तस्करों ने उन्हें गोली मार दी और वहीं उनकी मौत हो गई।

इस घटना के बाद गोपाल के शव को पलवल के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ देखते ही देखते ही देखते बाहर भीड़ जमा हो गई। तनाव की आशंका देखते हुए अस्पताल के बाहर पुलिस को तैनात किया गया है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखा और मामले की जाँच शुरू कर दी। पुलिस के मुताबिक आरोपितों को पकड़ने की कोशिश जारी है।

नाम क्यों बदलना चाहते हैं राहुल गॉंधी, फोन पर अपिरिचित क्यों कहते हैं- झूठा

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी का हमनाम होना मध्य प्रदेश के इंदौर में रहने वाले एक युवक के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। नाम की वजह से लोग उन्हें शक की नजर से देखते हैं। नाम के कारण न कोई सिम कार्ड देने को तैयार है और न ही लोन मिल रहा। मजबूरन, अब वे अपना उपनाम बदलने पर विचार कर रहे हैं।

इंदौर के राहुल गॉंधी ने बताया कि सरकारी दस्तावेज बनवाते वक्त उन्हें अधिकारी शक की नजर से देखते हैं। उन्होंने बताया, “मेरे पास अधार कार्ड है। लेकिन, जब सिम कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या लोन वगैरह के लिए आवेदन करता हूँ तो मना कर दिया जाता है। नाम की वजह से मेरे आधार कार्ड को लोग फर्जी बता देते हैं।”

उन्होंने बताया कि उनका पारिवारिक उपनाम मालवीय था। बीएसएफ में कार्यरत उनके पिता को अच्छे आचरण की वजह से साथी ‘गाँधी’ कहकर पुकारते थे। बाद में पिता ने इसे ही उपनाम बना लिया और इस तरह राहुल मालवीय से गॉंधी हो गए।

बकौल राहुल जब वे किसी अपरिचित को फोन कर अपना नाम बताते हैं तो वे उन्हें झूठा समझ लेते हैं। यहॉं तक कि लोग उन्हें ‘पप्पू’ भी कहते हैं, जिसका अक्सर इस्तेमाल कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष का उपहास उड़ाने के लिए किया जाता है।

कहानी उधम सिंह की जिन्होंने जलियाँवाला का बदला लंदन में अंग्रेज़ को गोली मार कर लिया था

सरदार उधम सिंह (26 दिसम्बर 1899 से 31 जुलाई 1940) का नाम भारत की आज़ादी की लड़ाई में पंजाब के क्रान्तिकारी के रूप में दर्ज है। उन्होंने जलियाँवाला बाग कांड के समय पंजाब के गर्वनर जनरल रहे माइकल ओ’ ड्वायर को लन्दन में जाकर गोली मारी। (नोट: कुछ लोग ओ’ड्वायर को जनरल डायर समझ लेते हैं। जनरल डायर ने गोलियाँ चलाने का हुक्म दिया था, वहीं माइकल ओ’ड्वायर ने जनरल डायर को जलियाँवाला बाग़ में ऐसा करने का आदेश दिया था। डायर बाद में पैरालिसिस से मारा गया।)

कैसे मारा ओ’ड्वायर को

उधम सिंह अप्रैल 1919 को घटित जलियाँवाला बाग नरसंहार के प्रत्यक्षदर्शी थे। राजनीतिक कारणों से जलियाँवाला बाग में मारे गए लोगों की सही संख्या कभी सामने नहीं आ पाई। इस घटना से वीर उधम सिंह तिलमिला गए और उन्होंने जलियाँवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर माइकल ओ डायर को सबक सिखाने की प्रतिज्ञा ले ली। अपने मिशन को अंजाम देने के लिए उधम सिंह ने विभिन्न नामों से अफ्रीका, नैरोबी, ब्राजील और अमेरिका की यात्रा की। सन 1934 में उधम सिंह लंदन पहुँचे और वहाँ 9, एल्डर स्ट्रीट कमर्शियल रोड पर रहने लगे। वहाँ उन्होंने यात्रा के उद्देश्य से एक कार खरीदी और साथ में अपना मिशन पूरा करने के लिए छह गोलियों वाली एक रिवाल्वर भी खरीद ली। भारत का यह वीर क्रांतिकारी माइकल ओ’ड्वायर को ठिकाने लगाने के लिए उचित वक्त का इंतजार करने लगा।

उधम सिंह को अपने सैकड़ों भाई-बहनों की मौत का बदला लेने का मौका 1940 में मिला। जलियाँवाला बाग हत्याकांड के 21 साल बाद 13 मार्च 1940 को रायल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के कऑक्सटन हाल में बैठक थी, जहाँ माइकल ओ’ड्वायर भी वक्ताओं में से एक था। उधम सिंह उस दिन समय से ही बैठक स्थल पर पहुँच गए। अपनी रिवॉल्वर उन्होंने एक मोटी किताब में छिपा ली। इसके लिए उन्होंने किताब के पृष्ठों को रिवॉल्वर के आकार में उस तरह से काट लिया था, जिससे ओ’ड्वायर की जान लेने वाला हथियार आसानी से छिपाया जा सके।

बैठक के बाद दीवार के पीछे से मोर्चा सँभालते हुए उधम सिंह ने माइकल ओ’ड्वायर पर गोलियाँ दाग दीं। दो गोलियाँ माइकल ओ’ड्वायर को लगी जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई। उधम सिंह ने वहाँ से भागने की कोशिश नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी। उन पर मुकदमा चला। 4 जून 1940 को उधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फाँसी दे दी गई।


उधम सिंह खुद का नाम मोहम्मद सिंह आजाद लिखते थे 

विदेशों में वे फ्रैंक ब्राजील और बावा सिंह के नाम से रहते रहे, अपनी निजी डायरी में वे अपना नाम सिर्फ मोहम्मद सिंह आजाद (एमएस आजाद) ही लिखते थे। अपने हस्तलिखित पत्रों में उन्होंने एमएस आजाद के नाम के हस्ताक्षर किए थे।

सरदार उधम सिंह के अंतिम शब्द

उधम सिंह के शब्दों में उनके समय के क्रांतिकारियों, करतार सिंह सराभा और भगत सिंह, की प्रतिध्वनि सुनाई देती है। ओ’ड्वायर को मारने से पहले उन्होंने कहा था:

“मुझे फर्क नहीं पड़ता, मरने से मुझे कोई समस्या नहीं है। बुढ़ापे तक इंतज़ार करने का क्या मतलब है? उससे कुछ नहीं होनेवाला। मरना ही है तो जवानी में मरना बेहतर है। ये बेहतर है क्योंकि मुझे पता तो है कि मैं क्या कर रहा हूँ!”

थोड़ी देर रुकने के बाद उन्होंने फिर कहा: “मैं अपनी मातृभूमि के लिए मर रहा हूँ।”

13 मार्च 1940 को दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा था:

“मैंने अपना विरोध जताने के लिए गोली चलाई थी। मैंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के भारत में लोगों को भूख से मरते हुए देखा है। मैंने ही वो किया (गोली चलाई)… पिस्तौल तीन या चार बार चली। मैं अपने विरोध के लिए माफ़ी नहीं माँगूँगा। ऐसा करना मेरा कर्म था। थोड़ा और बढ़ा दो (मेरी सज़ा)। सिर्फ इसलिए कि मैंने अपनी मातृभूमि के लिए ये विरोध किया, मुझे इस सज़ा से कोई समस्या नहीं। दस, बीस या पचास साल या कि मुझे टाँग ही दो (फाँसी पर)… मैंने अपना कर्म किया है।”

जब जज एटकिन्सन ने पूछा कि उन्हें ‘क्यों ना उन्हें कानून के मुताबिक़ सज़ा दी जाए ‘, तो उन्होंने कहा:

मैं कहता हूँ ब्रिटिश साम्राज्यवाद का नाश हो। तुम कहते हो भारत में शांति नहीं है! हमारे हिस्से सिर्फ ग़ुलामी है। तथाकथित सभ्यताओं की पीढ़ी दर पीढ़ी ने हमारे हर तरह के घटिया और नीच क़िस्म के अत्याचार किए। तुम्हें बस ये करना है कि अपना इतिहास पलट कर पढ़ लो। अगर तुम्हारे अंदर रत्ती भर भी मानवीय शालीनता है, तो तुम्हें शर्म से मर जाना चाहिए। जिस क्रूरता और रक्तपिपासु प्रवृति के तथाकथित बुद्धिजीवी हैं और खुद को सभ्यताओं का शासक कहते फिरते हैं, वो दोगले हैं…”

जस्टिस एटकिन्सन: मैं तुम्हारे राजनैतिक भाषण को नहीं सुनने वाला। अगर इस केस से जुड़ी कुछ काम की बात हो, तो कहो।

उधम सिंह: मुझे ये कहना है। मैं विरोध करना चाहता हूँ।
(उधम सिंह ने अपने हाथों में पकड़े काग़ज़ के पन्नों को लहराकर कहा)

जस्टिस एटकिन्सन: क्या वो अंग्रेज़ी में है?

उधम सिंह: मैं तो पढ़ रहा हूँ तुम्हें बख़ूबी समझ में आएगा।

जस्टिस एटकिन्सन: मुझे बेहतर समझ में आएगा अगर तुमने मुझे वो पढ़ने को दे दिया।

उधम सिंह: मैं चाहता हूँ कि पूरी ज्यूरी इसे सुने।

जस्टिस एटकिन्सन: तुम ये जान लो कि तुम जो भी कह रहे हो, उसमें से कुछ भी प्रकाशित नहीं किया जाएगा। जो भी कहना है केस के संदर्भ में संक्षिप्त रूप में कहो। चलो, बोलो।

उधम सिंह: मैं विरोध कर रहा हूँ। यही मेरा मानना है। मैं तो उस भाषण के संदर्भ में निर्दोष हूँ। ज्यूरी को उस भाषण को लेकर बहलाया गया है। मैं अब इसे पढ़ रहा हूँ।

जस्टिस एटकिन्सन: ठीक है, पढ़ो। और ध्यान रहे उतना ही बोलो कि ‘क्यों ना तुम्हारे ऊपर कानून के हिसाब से सज़ा सुनाई जाए।’

उधम सिंह: (चिल्लाते हुए) मुझे सज़ा से कोई लेना-देना नहीं। ये मेरे लिए कोई मतलब नहीं रखता। मुझे मौत या किसी अन्य चीज़ से फ़र्क़ नहीं पड़ता। मुझे रत्ती भर भी चिंता नहीं है। मैं एक उद्देश्य के लिए मर रहा हूँ। (कटघरे पर ज़ोर-ज़ोर से हाथ मारकर आवाज़ करते हुए उधम सिंह बोलते रहे) हम इस ब्रिटिश साम्राज्य से त्रस्त हैं। (धीमी आवाज़ में पढ़ना जारी रहा) मुझे मरने से डर नहीं लगता। मुझे तो मरने पर गर्व है, गर्व है कि मैं अपने देश को आज़ाद करा पाऊँगा। मुझे आशा है कि जब मैं चला जाऊँगा तो मेरे जैसे हज़ारों मेरी जगह लेंगे और तुम्हारे जैसे घटिया कुत्तों को अपने देश से निकाल बाहर करेंगे; देश को आज़ाद कराएँगे।

मैं एक अंग्रेज़ी ज्यूरी के समक्ष हूँ। मैं एक अंग्रेज़ी कोर्ट में हूँ। तुम लोग भारत जाते हो, और जब वहाँ से आते हो तो तुम्हें पुरस्कार दिया जाता है और हाउस ऑफ कॉमन्स में चुना जाता है। जब हम इंग्लैंड में आते हैं, तो हमें मौत की सज़ा सुनाई जाती है!

मेरा कोई मतलब था ही नहीं; लेकिन मैं इसे भी स्वीकार करूँगा। मुझे इसके किसी भी हिस्से से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। लेकिन जब तुम्हारे जैसे नीच कुत्ते भारत आएँगे, तो एक समय आएगा जब तुम्हारा भारत से सफ़ाया हो जाएगा। तुम्हारा सारा ब्रिटिश साम्राज्यवाद चकनाचूर कर दिया जाएगा।

भारत की सड़कों पर मशीनगनें हजारों गरीब औरतों और बच्चों को मार देती है, ताकि तुम्हारे तथाकथित प्रजातंत्र और ईसाइयत का ध्वज लहराता रहे।

तुम्हारा व्यवहार, तुम्हारा व्यवहार– मैं ब्रिटिश सरकार की बात कर रहा हूँ। मुझे ब्रिटिश लोगों से कोई रंजिश नहीं है। मेरे तो भारत की अपेक्षा ज्यादा अंग्रेज़ मित्र यहाँ हैं। मुझे इंग्लैंड के मज़दूरों से सहानुभूति है। मैं इस साम्राज्यवादी सरकार के ख़िलाफ़ हूँ।

आप लोग तो स्वयं पीड़ित हैं, जो मज़दूर हैं। हर कोई इन गंदे कुत्तों से पीड़ित है; ये पागल जानवर हैं। भारत (में) सिर्फ ग़ुलामी है। क़त्लेआम, लाशों के टुकड़े करना, तबाही फैलाना – यही ब्रिटिश साम्राज्यवाद है। लोग इन बातों को अख़बारों में नहीं पढ़ते। हमें पता है कि भारत में क्या हो रहा है।

जस्टिस एटकिन्सन: मैं अब और नहीं सुनने वाला।

उधम सिंह: तुम और नहीं सुनना चाहते क्योंकि तुम मेरे भाषण को सुनते-सुनते थक गए हो, क्यों? मुझे अभी और भी बहुत कुछ कहना है।

जस्टिस एटकिन्सन: मैं उस बयान से एक भी शब्द और नहीं सुनने वाला।

उधम सिंह: तुमने पूछा कि मुझे और क्या कहना है। मैं कह रहा हूँ। क्योंकि तुम लोग नीच हो। तुम्हें ये नहीं सुनना कि तुम भारत में क्या कर रहे हो।

फिर उधम सिंह ने अपनी ऐनक जेब में रखी और तीन शब्द हिन्दुस्तानी में कहे। और फिर ज़ोर से चिल्लाकर कहा ‘डाउन विथ ब्रिटिश इम्पीरियलिज़्म, डाउन विथ ब्रिटिश डर्टी डॉग्स!’ फिर जब वो जाने के लिए मुड़े तो सॉलिसिटर की टेबल पर थूक दिया। जब वो कठघरे से बाहर आ गए तो जज ने प्रेस से कहा:

“मैं प्रेस को ये निर्देश देता हूँ कि इस बयान का कोई भी हिस्सा रिपोर्ट ना किया जाए जो कि अभियुक्त ने कटघरे से कहा। क्या आप समझ रहे हैं, प्रेस के मेम्बरान?”

(इस लेख का कुछ हिस्सा विकिपीडिया से लिया गया है। साथ ही, कोर्ट रूम के भीतर की जिरह का अनुवाद अजीत भारती ने अंग्रेज़ी से हिन्दी में किया है।)

9 साल की मुस्लिम बच्ची से महीनों अब्बू ने किया बलात्कार, माँ की शिकायत पर हुआ गिरफ्तार

गुजरात के अहमदाबाद में बाप-बेटी के पाक रिश्ते को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ वटवा क्षेत्र के रहने वाले एक 32 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति पर उसकी पत्नी ने आरोप लगाया है कि उसका शौहर पिछले 4 महीने से अपनी 9 वर्ष की बेटी के साथ लगातार दुष्कर्म कर रहा है।

महिला के मुताबिक शनिवार (जुलाई 27, 2019) को वह खरीददारी करने बाजार गई थी, लेकिन जब घर लौटी तो सामने वाले कमरे में उसे कोई नहीं दिखा। उसने दूसरे कमरे में जाकर देखा तो वहाँ उसका शौहर बेटी के साथ दुष्कर्म कर रहा था।

महिला को देखते ही आरोपित पिता उसके आगे हाथ-पैर जोड़ने लगा। लेकिन महिला ने उसे पीटा और बेटी को अपने घर लेकर चली गई। पुलिस को दिए बयान में बच्ची ने बताया कि पिछले 4 महीने से उसके साथ ये सब हो रहा था। पिता उसे मुँह न खोलने के लिए धमकी देता था कि अगर उसने किसी को बताया तो वो उसका गला घोंट देगा

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वटवा पुलिस थाने के प्रभारी एचवी सिसारा ने मंगलवार को इस मामले के बारे में बताया कि माँ की तहरीर पर बेटी का मेडिकल चेकअप करवाया गया । जिसके बाद मेडिकल रिपोर्ट्स में भी बच्ची के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई।

वटवा पुलिस ने आरोपित मुस्लिम व्यक्ति पर पॉक्सो एक्ट और आईपीसी की धारा 376 के तहत मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले में एसएफएल टीम द्वारा जाँच जारी है।

CCD के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ का नेत्रवती नदी किनारे मिला शव, व्यापार में घाटे से थे परेशान

सोमवार से लापता चल रहे कैफे कॉफी डे के संस्थापक और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएस कृष्णा के दामाद वीजी सिद्धार्थ की लाश उल्लाल के निकट नेत्रवती नदी किनारे मिली। उनका शव वहाँ मौजूद स्थानीय मछुआरों ने निकाला। मेंगलुरु के विधायक यूटी खादर के मुताबिक सिद्धार्थ के मित्र और संबंधियों ने उनके शव की पुष्टि की। पुलिस पोस्टमार्टम के बाद सिद्धार्थ का शव उनके परिवार को सौंप देगी।

जानकारी के मुताबिक स्थानीय मछुआरों ने ही पुलिस को नदी किनारे शव होने की सूचना दी थी। जिसके बाद पुलिस वहाँ पहुँची और संदेह जताते हुए कहा कि ये शव वीजी सिद्धार्थ का प्रतीत हो रहा है। उन्होंने बताया, “हमें आज सुबह लाश मिली। इसकी पहचान के लिए हमने परिवार के सदस्यों को सूचित कर दिया है। अभी शव को पोस्टमार्टम के लिए वेनलॉक हॉस्पिटल ले जा रहे हैं।”

गौरतलब है वीजी सिद्धार्थ के गायब होने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि उन्होंने नेत्रवती नदी के पुल पर से छलांग लगा दी होगी क्योंकि सोमवार को अपने ड्राइवर के साथ नेत्रवती नदी के पुल पर पहुँचने के बाद वह अकेले निकल पड़े थे। इस दौरान उन्होंने पुल घूमने की इच्छा जताई थी। लेकिन डेढ़ घंटे बाद भी जब वह अपनी गाड़ी के पास नहीं पहुँचे तो ड्राइवर ने उनकी चिंता में खोजबीन शुरू कर दी। उनका मोबाइल भी बंद आ रहा था।

इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। ड्राइवर के बयान पर मंगलुरु में एफआईआर दर्ज की गई। ड्राइवर ने बताया कि सिद्धार्थ हसन जिले में स्थित सकलेशपुर के लिए निकले थे लेकिन वे मंगलुरु चले गए। इसके बाद माना गया कि उन्होंने नदी से छलांग लगा दी।

आयकर विभाग ने किया आरोपों को खारिज

बता दें विजय सिद्धार्थ बीते दिनों बिजनेस में होते घाटे से काफ़ी परेशान थे। उन्होंने अपने कर्मचारियों और अधिकारियों के नाम लिखी चिट्ठी में देनदारों का अत्यधिक दबाव होने की बात कही थी और बताया था कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया। इसके अलावा उन्होंने असत्यापित पत्र में आयकर विभाग के पूर्व डीजी पर आय संबंधी जाँच के दौरान काफ़ी प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया था। हालाँकि हालिया बयान में आयकर विभाग ने अपनी जाँच के दौरान उन्हें प्रताड़ित करने के आरोपों से इंकार कर दिया और बताया कि उनकी जाँच के दौरान उद्योगपति ने अपने और अपने प्रतिष्ठानों पर छापों के बाद कुछ आय छिपाकर रखना स्वीकार किया था।

विभाग ने अपनी ओर से जारी बयान में कहा कि उन्होंने जो किया वो आयकर कानून के प्रावधानों के अनुरूप किया। उनके मुताबिक सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे पत्र की सत्यता को प्रमाणित नहीं किया जा सकता क्योंकि सिद्धार्थ का हस्ताक्षर ‘‘उससे मेल नहीं खाता’’ जो कंपनी के वार्षिक रिपोर्ट के रूप में विभाग के पास उपलब्ध हैं।

छात्रों को सेना में अधिकारी बनाने के लिए ‘आर्मी स्कूल’ खोलेगा संघ, यह है पूरी योजना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर प्रदेश में डिफेन्स परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष स्कूल खोलेगा। संघ के शैक्षिक अंग विद्या भारती के तत्वाधान में खोले जाएँगे। इस स्कूल का नाम पूर्व सरसंघचालक राजेंद्र सिंह के नाम पर ‘रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर’ रखा जाएगा।

पूर्व-सैनिक ने दी ज़मीन

भूतपूर्व सैनिक और बुलन्दशहर के किसान राजपाल सिंह ने इस स्कूल के लिए संघ को 20,000 स्क्वायर मीटर की अपनी ज़मीन दान की है। इस ज़मीन को एक ट्रस्ट, राजपाल सिंह जनकल्याण सेवा समिति, को सुपुर्द की गई है। इस स्कूल की इमारत में तीन-मंजिला हॉस्टल, अकादमिक बिल्डिंग, दवाखाना, स्टाफ सदस्यों के लिए रिहायशी विंग और एक बड़ा स्टेडियम होंगे। प्रोजेक्ट का कुल लागत ₹40 करोड़ होगा।

यह स्कूल आवासीय प्रकार का होगा। लड़कों वाले विंग का निर्माण पिछले अगस्त में ही शुरू हो चुका है। सीबीएसई पाठ्यक्रम का पालन करने वाले इस स्कूल में छठी से बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई होगी। बकौल पश्चिम उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में विद्या भारती उच्च शिक्षा संगठन के क्षेत्रीय संयोजक अजय गोयल, “यह एक प्रयोग है जो देश में पहली बार हो रहा है। अगर यह सफ़ल रहा तो इसे देश के कई स्थानों पर दोहराया जा सकता है।”

वीरगति प्राप्त जवानों के बच्चों के लिए आरक्षण

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पहले बैच के लिए विवरण पुस्तिका (प्रोस्पेक्टस) लगभग तैयार है और अगले महीने से स्कूल में भर्ती के लिए आवेदनपत्र स्वीकार होने लगेंगे। गोयल के अनुसार छठी कक्षा के पहले बैच में 160 छात्र होंगे। वीरगति को प्राप्त जवानों के बच्चों के लिए 56 सीटें (35%) आरक्षित होंगी।

पूर्व सैन्य अधिकारी देंगे सुझाव

इसके अतिरिक्त संघ सितंबर में सेवानिवृत्त अफसरों में मिल कर इस स्कूल को बेहतर बनाने के लिए सुझाव लेगा। गोयल के अनुसार कई सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी संघ और अनुषांगिक संगठनों के सम्पर्क में हैं। मीटिंग की तारीख हफ्ते भर में निर्धारित हो जाएगी। विवरण पुस्तिका के अनुसार देश में सैन्य अफसरों की न्यूनतम अर्हता पूरी करने वाले युवाओं की कमी के चलते सेनाएँ जनबल की कमी से जूझ रहीं हैं। यहाँ तक कि सैनिक स्कूलों का नेटवर्क भी आवश्यकता पूरी नहीं कर पा रहा है।

लीडरलेस जैश: अनंतनाग में पुलवामा के मास्टरमाइंड फयाज पंजू, शौकत को सुरक्षाबलों ने किया ढेर

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में सुरक्षाबलों ने आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में बड़ी कामयाबी हासिल की। यहाँ मंगलवार (जुलाई 30, 2019) को सुरक्षाबलों ने पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड समेत दो खूँखार आतंकियों को मार गिराया।

जानकारी के मुताबिक 14 फरवरी को CRPF काफ़िले पर हुए हमले की साजिश में शामिल फयाज़ पंजू के साथ सुरक्षाबलों ने उसके साथी शानू शौकत को भी मुठभेड़ में ढेर कर दिया। पंजू जैश का शीर्ष का कमांडर था।

इन दोनों आतंकियों पर हुई कार्रवाई के बाद भारतीय सेना ने ट्वीट के जरिए इस बड़ी कामयाबी की सूचना दी। उन्होंने अपने ट्वीट में लीडरलेस जैश का दावा किया। साथ ही बताया कि आतंकियों के शव के साथ उनके हथियारों को भी बरामद कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अनंतनाग के बिजबहेड़ा में आतंकियों के होने की सूचना मिलने के बाद एनकाउंटर शुरू किया गया था, जिसमें पंजू अपने एक साथी के साथ मारा गया। पंजू पुलवामा के खूंखार आतंकी हमले में शामिल था, जिसमें 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे। इसके अलावा वह 12 जून को अनंतनाग में सीआरपीएफ पर हुए आतंकी हमले में भी शामिल था, जिसमें हमारे 5 जवानों ने अपनी जानें गँवाईं थी।

सुरक्षाबलों द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद भी अभी क्षेत्र में और आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। इसलिए इलाके में सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर रखी है और तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।