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उन्नाव रेप: सड़क हादसे में नया खुलासा, टक्कर मारने वाला ट्रक सपा नेता के भाई का – CBI करेगी जाँच!

उन्नाव रेप पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसे में एक नया खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है जिस ट्रक से एक्सीडेंट हुआ है, वह समाजवादी पार्टी नेता नंदू पाल के बड़े भाई देवेंद्र पाल का ट्रक है। इस हादसे के बाद से ललौनी थाना क्षेत्र के मुत्तौर गाँव के रहने वाले देवेंद्र पाल के घर पर ताला बंद है। पुलिस ने इस एँगल से जाँच शुरू कर दी है और उनकी खोज जारी है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक फतेहपुर के सपा नेता व पूर्व जिला सचिव नंदू पाल का कहना है कि इस मामले को साजिश बताकर बेवजह तूल दिया जा रहा है। ये महज एक हादसा है। सपा नेता की मानें तो वे कुलदीप सेंगर को जानते तक नहीं हैं, सिर्फ़ नाम सुना है।

सपा नेता नंदू का अपने बड़े भाई के ट्रक को लेकर कहना है कि जिस दिन हादसा हुआ, उस दिन ट्रक में लदा मोरंग रायबरेली में उतारने के बाद फतेहपुर लौट रहा था। ट्रक को ओती गाँव के निवासी सूरजपाल का सबसे छोटा बेटा आशीष कुमार चला रहा था।

इसके अलावा ट्रक के नंबर प्लेट में कालिख लगाने की वजह पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह सब केवल फाइनेंसर की नजरों से बचने के लिए किया गया था। अगर इसके बाद भी साजिश की आशंका है तो सरकार इसकी सीबीआई जाँच करवा ले, जिससे सच्चाई साफ़ हो जाए।

मुख्यमंत्री ने दिए CBI जाँच के आदेश

गौरतलब है कि इस हादसे के बाद पीड़िता के परिवार द्वारा सीबीआई जाँच की माँग की जा रही थी, जिसके मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (जुलाई 29, 2019) को इस मामले में सीबीआई जाँच के लिए सिफारिश दे दी है। इसके संबंध में केंद्र सरकार को एक औपचारिक पत्र भी भेजा गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने भी रात में एसपी की रिपोर्ट, फॉरेंसिक जाँच में की गई अब तक की पड़ताल, हत्या की एफआईआर आदि से जुड़े अन्य दस्तावेज मँगवाए हैं।

MLA कुलदीप सेंगर समेत 10 पर हुआ हत्या का मुकदमा दर्ज

बता दें कि इससे पहले इस रोड एक्सीडेंट मामले में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, उनके भाई मनोज सिंह सेंगर और 8 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी। इस नए खुलासे के बाद मामला संदेह वाली स्थिति बनी हुई है। अब आगे की जाँच में खुलासा होगा कि यह घटना सच में कोई हादसा है या फिर साजिश।

लेकिन फिलहाल रेप पीड़िता के चाचा की तहरीर पर कुलदीप सिंह सेंगर समेत 10 नामजद और 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 506, 120B के तहत यह मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR में कुलदीप सिंह सेंगर, मनोज सिंह सेंगर, विनोद मिश्र, हरिपाल मिश्र, नवीन सिंह, कोमल सिंह, अरुण सिंह, ज्ञानेन्द्र सिंह, रिंकू सिंह और एडवोकेट अवधेश सिंह समेत 15-20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया है।

जानकारी के लिए बता दें कि आरोपित विधायक कुलदीप सेंगर उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। कुलदीप सेंगर ने अपनी राजनीति की शुरुआत कॉन्ग्रेस पार्टी से की थी। लेकिन, वर्ष 2002 में विधानसभा चुनाव के वक्त वो कॉन्ग्रेस का हाथ छोड़कर हाथी (बसपा) के साथ चल दिए। तब बसपा के टिकट पर कुलदीप ने चुनावी मैदान में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को बड़े अंतर से हराया था। 2007 में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने कुलदीप सिंह सेंगर को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उसके बाद वो 2007 से 2017 तक समाजवादी पार्टी में रहे।

फातिमा के तीन बच्चों के साथ सुसाइड कांड में नया मोड़, दो बेटियों संग रेप की हुई पुष्टि, पिता अकरम पर शक

पुणे के भोसरी इलाके में रविवार को एक किराए के फ्लैट से एक 28 वर्षीय महिला और उसके तीन बच्चों का शव फाँसी पर लटकता हुआ मिला था। जिसे देखकर पहले यह अनुमान लगाया गया था कि महिला फातिमा ने पहले अपने तीनों बच्चों अलीफिया (9) ज़ेबा (7) जियान (5) की हत्या की और फिर खुद आत्महत्या कर ली। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद इस पूरे मामले में एक बड़ा ट्विस्ट आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 9 और 7 साल की दो बेटियों के साथ हत्या से पहले रेप किया गया था। जिसके बाद पुलिस ने महिला के पति अकरम को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक की रहने वाली 28 वर्षीय महिला फातिमा अपने फल विक्रेता पति अकरम के साथ कुछ दिन पहले भोसरी के तलेगांव दाभाड़े स्थित नूर मोहल्ला में रहने आई थी। यहाँ वह किराए के मकान में परिवार के साथ रह रही थी। पुलिस ने बताया कि हिरासत में लिया गया शख्स पहले फल विक्रेता के तौर पर काम करता था। कर्नाटक से आने के बाद वह काम की तलाश में था। फातिमा के पिता की भी मौत हाल ही में हुई थी। जिसे लेकर भी वह तनाव में थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रारंभिक जाँच में यह भी सामने आया है कि अकरम-पत्नी फातिमा के बीच पैसे को लेकर अक्सर झगड़ा होता रहता था। पति काम खोजने की बात कह कर बाहर चला गया। शाम को जब वह लौटा तो उसके 9 साल, 7 साल की बेटी और पाँच साल के बेटे और पत्नी का शव नायलोन की रस्सी से फाँसी पर लटका हुआ मिला था। बच्चों और पत्नी के शव अलग-अलग कमरों में थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह कहा जा रहा है कि जब पति घर लौटा तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी आवाज लगाने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला। तो उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस के आने के बाद अंदर का दरवाजा खोला गया तो देखा कि चारों के शव लटके हुए थे। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था।

पुलिस का कहना था कि शुरूआती दौर में मामला आत्महत्या का लग रहा था लेकिन अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बेटियों अलीफिया और ज़ेबा से रेप की पुष्टि होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब मामला रेप और हत्या का ज़्यादा लग रहा है। फिर भी पुलिस का कहना है कि नए सिरे से इस आत्महत्या/हत्या के कारणों का पता लगाया जा रहा है। जाँच जारी है। पति को हिरासत में लेकर नए सिरे से पूछताछ की जा रही है।

विदिशा बालियान ने जीता Miss Deaf World 2019 का ताज, यह ख़िताब जीतने वाली पहली भारतीय

ज़ेहन में अगर कुछ कर दिखाने का जज़्बा हो, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। फिर चाहे आसमान की बुलंदी पर पहुँचना हो या फिर हो ‘मिस डेफ वर्ल्ड-2019’ का ख़िताब जीतना हो। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है यूपी की 21 वर्षीय विदिशा बलियान ने। अपनी कमज़ोरी को दरकिनार कर उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से दुनिया को दिखा दिया कि जीत कैसे हासिल की जाती है… नाम कैसे रोशन किया जाता है…और इतिहास कैसे रचा जाता है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुज़्ज़फ़रनगर शहर की विदिशा बालियान को मिस डेफ वर्ल्ड 2019 का ताज पहनाया गया। इस ख़िताब को जीतने वाली वो पहली भारतीय हैं। इस अंतर्राष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता का आयोजन 22 जुलाई को दक्षिण अफ्रीका के मंबेबेला में हुआ था।

विदिशा बालियान एशियन एकेडमी ऑफ़ फिल्म एंड टेलीविज़न की मॉडलिंग स्टूडेंट हैं। यूँ तो वो मुज़्ज़फ़रनगर की हैं लेकिन फ़िलहाल उनका परिवार गाज़ियाबाद में रहता है। उन्हें गुरुग्राम और नोएडा के ट्रेनर्स ने सौंदर्य प्रतियोगिता के लिए ट्रेन्ड किया था।

इस कॉन्टेस्ट के फ़ाइनल राउंड में भाग लेने वाले 16 देशों में से 11 फाइनलिस्ट चुने गए, जिनमें से विदिशा बालियान विजयी रहीं। उन्होंने पीठ में चोट लगने के बावजूद इस प्रतियोगिता में हिस्सा भाग लिया। इस प्रतियोगिता में एक दक्षिण अफ्रीकी महिला दूसरे नंबर की विजेता रहीं।

विदिशा अपनी जीत से काफ़ी उत्साहित दिखीं और उन्होंने कई तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर की। अपनी एक तस्वीर पर उन्होंने कैप्शन लिखा कि इस ख़िताब को जीतना सपना सच होने जैसा है। उन्होंने लिखा कि बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो अपनी सुनने की क्षमता खो चुके हैं पर वे बेहद टैलेंटेड हैं और मौक़े डिज़र्व करते हैं।

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विदिशा के बारे में बता दें कि वो बचपन से ही श्रवण-बाधित थीं। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के बारे में उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास हासिल करने और अपने व्यक्तित्व को विकसित करने के लिए प्रतियोगिता में भाग लेने की प्रेरणा मिली। इस प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से, मैं बधिर समुदाय को उनकी प्रतिभा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करना चाहती हूँ और इस बात से परेशान नहीं होना चाहिए कि उनके पास क्या है ।”

इस प्रतियोगिता में विदिशा ने तांडव पर परफॉर्म किया था। उन्होंने अपनी परफ़र्मेंस की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर कीं। उन्होंने लिखा, “तांडव, भगवान शिव का एक शानदार नृत्य है। मुझे छोटी उम्र में ही नृत्य से लगाव था। हालाँकि मैं स्पष्ट रूप से ताल, धुन या आवाज़ नहीं सुन सकती थी। लेकिन, नृत्य करने के लिए अपने दिल और आत्मा में संगीत की आवश्यकता होती है।”

इसके अलावा, विदिशा एक पूर्व अंतरराष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने डीफ्लेम्पिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। जैसा कि उनके इंस्टाग्राम पोस्ट पर लिखा गया है, विदिशा ने डिफ्लैम्पिक्स में 5वीं रैंक हासिल की थी जिसके बाद उन्हें पीठ में गंभीर चोट लगी थी। उसके बाद उन्होंने सौन्दर्य प्रतियोगिता में भाग लेने का फ़ैसला कर लिया। उनके फ़ैसले का परिणाम आज हम सबके सामने है, जो तालियों का हक़दार हैं।

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While being crowned as miss Deaf World would be etched in my memory for lifetime, the win was extra special to me for many reasons. . . As a hearing-impaired child, from not hearing the doorbell to being ignored by people, I’ve seen it all. But after seeing a meteoric rise in my sports career as a tennis player who earned the 5th rank in ‘Deaflympics’, tennis became as important as breathing. And then life’s another blow – a severe back injury left my hopes fractured. . . . Unable to see a reason to live, I didn’t give up because of the strength my family gave me. And in time, I was shown another way – Miss Deaf India. A novice to the world of beauty and fashion, I learnt what was needed and won the title. . . I am blessed with a quality – if I put my mind to something then I don’t measure efforts or time, I give it my all. Whether it’s dancing, basketball, swimming, tennis or yoga, I never slack in my efforts. Maybe as a disabled child I learnt to overcompensate by my hard work to overcome my ability to listen properly. . . . By the grace of the universe, after the Miss Deaf India contest, we crossed paths with Wheeling Happiness, an NGO who empowers disabled people. . . . Thank you for each and every person who contributed in this victory. The crown is ours. ? . . Stylist: @ganeshvyas #blog #fromtheheart #missdeafworld2019 #southafrica #winner #wheelinghappiness #disabled #hearingimpaired #positivevibes

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फैक्ट चेक: जवान अमानुल्लाह को लुटेरों ने मारा, लिबरल गैंग ने दिया सांप्रदायिक एंगल, बताया मॉब लिंचिंग

न्यूज एजेंसी पीटीआई ने रविवार (जुलाई 28, 2019) को बताया कि अमेठी में एक सेवानिवृत्त आर्मी ऑफिसर की मौत हो गई। जिसके बाद जल्द ही ये खबर फैला दिया गया कि आर्मी ऑफिसर की भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। लोगों ने इसे मॉब लिंचिंग से जोड़कर पेश किया।

इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गालीबाज कॉन्ग्रेस समर्थक और रॉबर्ट वाड्रा के रिश्तेदार तहसीन पूनावाला ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में सेवानिवृत्त सेना अधिकारी अमानुल्ला भी मॉब लिंचिग का शिकार हुए हैं। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिग को रोकने का एकमात्र उपाय “रासुका या मानव सुरक्षा कानून” को लाना है।

भारतीय बेरोजगार कामरेडों के नायक सीताराम येचुरी ने भी भारतीय राजनीति में प्रासंगिकता खोने के बाद अपने खाली समय का आनंद लेते हुए उसी फर्जी खबर को हवा दी। उन्होंने ‘नफरत फैलाने’ और उन्हें (मॉब लिंचिंग करने वाले को) बचाने के नाम पर भाजपा पर निशाना साधा।

इसके अलावा सस्पेंडेड ब्यूरोक्रेट आशीष जोशी ने भी बिना खबर की पूर्ण सत्यता को जाने इसे मॉब लिंचिंग का नाम देकर फर्जी खबर फैलाने की कोशिश की। बता दें कि, इन्होंने AAP से बगावत करने वाले नेता कपिल मिश्रा को अपने निजी लेटरहेड के जरिए अपनी धौंस दिखाते हुए धमकी दी थी।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस के ट्रोल और समर्थक, जो कि स्मृति ईरानी को नीचा दिखाने का एक मौका नहीं छोड़ते हैं, उन्होंने काफी देर कर दी। लोकसभा चुनाव 2019 में अमेठी में राहुल को हार का मुँह देखना पड़ा था, जिसके बाद से अमेठी से शानदार जीत हासिल करने वाली स्मृति ईरानी पर लगातार निशाना साधते रहते हैं। अमेठी में घटित इस घटना पर वे स्मृति ईरानी के खिलाफ अपना विरोध दिखाने में थोड़ा पीछे रह गए।

वहीं, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले और दलितों की तुलना जानवरों से करने वाले पत्रकार प्रशान्त कनौजिया ने भी इस घटना को साम्प्रदायिक रंग देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रोपेगेंडा फैलाया। कनौजिया ने लिखा, “उत्तर प्रदेश के अमेठी में सेना से रिटायर्ड कैप्टेन अमानुल्लाह का मॉब लिंचिंग हो गया। अब सेना से प्यार नहीं है, बस मुसलमानों से नफ़रत है। शुरुआत एहसान जाफरी से हुई, अंत अब तुम्हारे घर होगा अगर अब आवाज़ न उठाई।”

इस फर्जी घटना को न सिर्फ ए-ग्रेड ट्रोल्स और पत्रकारों ने फैलाया, बल्कि इस्लामिक कट्टरपंथियों ने भी इस झूठी खबर को खूब भुनाया।

हालाँकि, सच्चाई इससे बिल्कुल परे है और वो ये है कि आर्मी कैप्टन अमानुल्लाह खान रविवार को अमेठी में मृत पाए गए थे। उनके घर पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने हमला किया था। इसी दौरान उनकी मौत हुई, न कि मुस्लिम होने की वजह से उनकी मॉब लिंचिंग की गई। 

पुलिस ने बताया कि गोर्डियन के पुरवा गाँव में रात के 2 बजे कैप्टन अमानुल्लाह और उनकी पत्नी अमीना सो रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि घर के बाहर कुछ लोग कुछ सामान उठा रहे हैं। जब उन्होंने इसके लिए उन्हें टोका और अन्य ग्रामीणों को भी जगाने की कोशिश करने लगे, तो हमलावरों ने उन्हें बाँध दिया और अमानुल्लाह को लाठी से मारना शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारी प्रहलाद सिंह ने बताया कि कैप्टन के सिर पर काफी गंभीर चोट आई थी।  

अमेठी के पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने कहा कि मृतक और उसकी पत्नी अपने नव-निर्मित घर के बरामदे में सो रहे थे। तभी कुछ चोरों ने घर के बाहर एक खाली पड़े इलाके में ठेकेदार की सड़क निर्माण सामग्री चोरी करने की कोशिश की और जैसे ही अमानुल्लाह ने शोर माचाया, चोरों ने उन्हें मार डाला। हालाँकि, ये तथ्य प्रोपेगेंडा फैलाने वाले नहीं मानेंगे, क्योंकि उनका एजेंडा तो पहले से ही तय होता है।

Pak गेंदबाज़ मोहम्मद आमिर ने अपने देश को माना आतंकी देश! ट्विटर पर हुई छीछालेदर

टेस्ट क्रिकेट से महज़ 27 साल की उम्र में संन्यास लेने वाले पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद आमिर की अब ब्रिटेन जाने की ख़बर सामने आ रही है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक़, आमिर की पत्नी नरगिस मलिका जो ब्रिटेन की नागरिक हैं, उन्होंने पहले से ही पति के वीज़ा के लिए आवेदन कर दिया है।

इस पर पाकिस्तान के खेल पत्रकार साज सादिक ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा, “समझ में नहीं आता है कि क्यों कुछ लोग मोहम्मद आमिर के ब्रिटिश पासपोर्ट के लिए आवेदन को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बता रहे हैं। वह इसके लिए आवेदन करने का हक़दार है और इसका मतलब यह नहीं है कि वह पाकिस्तान के लिए खेलना बंद कर देगा।”

इस ट्वीट के बाद उनके एक फैन ने लिखा, “मुझे लगता है कि उन्हें (मोहम्मद आमिर) आतंकी देश को छोड़ देना चाहिए।” आमिर ने अपने फैन के ट्वीट को लाइक करके एक नए विवाद को न्योता दे दिया। 

इससे पहले की बात आगे बढ़ती आमिर ने उस ट्वीट को अनलाइक कर दिया। लेकिन ऐसा करना उनके लिए कारगर साबित नहीं हो सका क्योंकि तब तक कई यूज़र्स ने मोहम्मद आमिर का यह स्क्रीनशॉट ले लिया था। अब यह स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसे देखकर लोग आमिर को ख़ूब खरी-खोटी सुना रहे हैं। बता दें कि आमिर को स्पॉट फ़िक्सिंग के मामले में पाँच साल के लिए बैन कर दिया गया था। बैन के बाद आमिर ने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में वापसी की थी।

वहीं, अगर मोहम्मद आमिर के संन्यास लेने की बात की जाए तो उनके इस फ़ैसले को कई लोग हज़म नहीं कर पाए। सोशल मीडिया पर उनके संन्यास की ख़बर पर तमाम यूज़र्स ने प्रतिक्रियाएँ दीं। इनमें पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ वसीम अकरम भी शामिल हैं, जिन्होंने लिखा, “मेरे लिए मोहम्मद आमिर का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेना थोड़ा अचंभे में डालने वाला है, क्योंकि 27-28 की उम्र में आप अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं और टेस्ट क्रिकेट में किए गए प्रदर्शन के आधार पर ही आपका आकलन किया जाता है। यह सबसे बड़ा फॉर्मेट है।”

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान रमीज राजा के अनुसार, “आमिर का 27 की उम्र में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेना निराशाजनक है। उनका यह निर्णय पाकिस्तान क्रिकेट के लिए अच्छा नहीं है जो टेस्ट क्रिकेट को बेहतर करने के बारे में सोच रहा है। यह समय खेलने का था पीछे हटने का नहीं।”

शामली के दो मदरसों पर छापा: मौलाना हफीउल्ला, वासिफ और असरफ के साथ 4 विदेशी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में इन दिनों मदरसों में होने वाली अवैध गतिविधियाँ पुलिस के निशाने पर है। पिछले दिनों बिजनौर में पुलिस ने मदरसे पर छापेमारी कर हथियारों की खेप बरामद की थी, तो अब शामली पुलिस ने सोमवार (जुलाई 29, 2019) को दो मदरसों पर छापा मार कर चार विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए चारों विदेशी नागरिक मदरसे में मौलवी और छात्र बनकर रहते थे और मूल रुप से ये म्यांमार के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इनके पास से संदिग्ध वीजा और पासपोर्ट मिले हैं।

पुलिस ने आरोपितों को संरक्षण देने के आरोप में तीन मदरसा संचालकों- मौलाना हफीउल्ला, कारी वासिफ व मौलवी असरफ हुसैन को भी गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने मेडिकल परीक्षण के लिए भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक, ये सभी विदेशी नागरिक कई सालों से शामली के मदरसों में पढ़ा रहे थे। फिलहाल मामले की जाँच की जा रही है और गिरफ्तार किए गए आरोपितों से स्थानीय पुलिस, खुफिया विभाग और एटीएस की टीम पूछताछ कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, ये संदिग्ध विदेशी जलालाबाद के मदरसों में छिपकर रह रहे थे। इनमें से एक अब्दुल मजीद जलालाबाद के मदरसा अशरफिया में बतौर मौलवी बच्चों को पढ़ाता था, जिसने नौमान अली नाम के एक शख्स को बतौर छात्र अपने पास रखा हुआ था। इसके अलावा अब्दुल मजीद ने जलालाबाद के मदरसा मिफ्ताउल उलूम में भी छात्रों के रूप में रिजवान और फुरकान को रखा हुआ था। ये भी यहाँ पर अवैध रुप से रह रहे थे। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया है।

अब्दुल मजीद और उसके साथ रहने वाले नौमान के बारे में मदरसा अशरफिया के कारी वासिफ सब कुछ जानते थे। इसके अलावा मदरसा मिफ्ताउल उलूम के मौलाना हफीउल्ला को भी अपने यहाँ पढ़ रहे दोनों छात्रों के विदेशी होने और यहाँ अवैध रूप से ठहरने की जानकारी थी। पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 समेत विदेशी अधिनियम की धारा 14 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपितों के कब्जे से भारतीय नागरिकता के दस्तावेज, भारतीय रुपए, म्यांमार करेंसी, एटीएम, फोन भी बरामद किए गए हैं। 

दूरदर्शन में गुणवत्ता पर जोर – क्रिएटिव हेड से लेकर बड़े पैमाने पर विशेषज्ञों की होगी नियुक्ति: जावड़ेकर

हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि दूरदर्शन के कार्यक्रमों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जल्द ही एक क्रिएटिव हेड की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी महकमा तो रहेगा लेकिन क्रिएटिव कामों के लिए बड़े पैमाने पर विशेषज्ञ नियुक्त किए जाएँगे। ये सब सरकारी प्रसारणकर्ता दूरदर्शन के आधुनिकीकरण के तहत किया जा रहा है।

जावड़ेकर गुरुवार 25 जुलाई, 2019 को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में दूरदर्शन के सभी आठ स्टूडियो और यहाँ डीडी केंद्र के अर्थ स्टेशन में वीडियो वॉल्स का उद्घाटन करने के उपलक्ष्य पर बोल रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय प्रसारणकर्ता दूरदर्शन विश्वसनीयता का पर्याय है।

तीन वर्षीय योजना के अंतर्गत स्थापित की गई वीडियो वॉल की स्थापना में 10.75 करोड़ की लागत आई है और यह अंतर्राष्ट्रीय प्रसारणकर्ताओ के स्टूडियो के समकक्ष है। वीडियो वॉल की शुरुआत से सेट को जमीनी रूप से खड़ा करने में लगने वाले समय में काफी बचत होगी। इससे कार्यक्रम की आवश्यतानुसार स्टूडियो सेट में लाइव/रिकार्ड किए गए वीडियो और ग्राफिक्स आदि प्रयोग किए जा सकेंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तीन साल की कार्य योजना के तहत दूरदर्शन के ढाँचे को आधुनिक बनाने के लिए उसे आवश्यक मदद दी गई है।

जावेडकर ने अधिकारियों से डीडी फ्री डिश को मौजूदा 3.25 करोड़ परिवारों से पाँच करोड़ परिवारों तक बढ़ाने की ओर काम करने के लिए भी कहा। साथ ही इस सम्बोधन में उनका विशेष बल दूरदर्शन की प्रोग्रामिंग को बढ़ाने और उच्च गुणवत्ता वाले कार्यक्रम बनाने के लिए जल्द ही क्रिएटिव हेड की नियुक्ति पर अधिक था।

इसी कार्यक्रम के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव अमित खरे ने कहा, “सरकार दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो का हरसंभव तरीके से समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकारी सेवा प्रसारणकर्ता समकालीन उद्योग के मानकों के हिसाब से सेवाएँ उपलब्ध करा सके और भारत के कोने-कोने तक अपनी पहुँच सुनिश्चित कर सके।”

प्रसार भारती के अध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश ने दूरदर्शन के प्रयासों की सराहना की और कहा कि हाल फिलहाल में प्रभावशाली और अर्थपूर्ण कार्यक्रम बनाए गए है। ऐसे कार्यक्रम बनाए गए जिन्होंने सरकार की अहम योजनाओं को हर घर तक पहुँचाया।

उन्नाव रेप पीड़िता एक्सीडेंट: MLA कुलदीप और उसके भाई मनोज समेत 25 पर हत्या का मुकदमा दर्ज

उन्नाव रेप केस की पीड़िता के रायबरेली के गुरबख्शगंज में एक ट्रक के पीड़िता की कार को टक्कर मारने के मामले में उनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश जैसी कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। रोड एक्सीडेंट के मामले में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, उनके भाई मनोज सिंह सेंगर और 8 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

फिलहाल, सेंगर और उनका भाई मनोज पहले से ही जेल में हैं। रेप पीड़िता के चाचा की तहरीर पर कुलदीप सिंह सेंगर समेत 10 नामजद और 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 506, 120B के तहत यह मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR में कुलदीप सिंह सेंगर, मनोज सिंह सेंगर, विनोद मिश्र, हरिपाल मिश्र, नवीन सिंह, कोमल सिंह, अरुण सिंह, ज्ञानेन्द्र सिंह, रिंकू सिंह और एडवोकेट अवधेश सिंह समेत 15-20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस घटना के बाद, उन्नाव गैंगरेप केस में आरोपित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। बता दें कि रविवार को कार के ट्रक की चपेट में आने के चलते पीड़िता की चाची समेत दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि पीड़िता और वकील गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में उसका गहन इलाज चल रहा है। योगी सरकार ने घायलों के इलाज और हरसंभव मदद की घोषणा की है।

किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ के ट्रॉमा सेण्टर इंचार्ज ने बताया कि पीड़िता और उनके वकील वेंटिलेटर पर हैं। उनकी हालत क्रिटिकल लेकिन स्टेबल है।

सड़क हादसे के बाद जहाँ एक ओर विपक्षी पार्टियाँ प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा कर रही हैं, वहीं पीड़िता के परिजन भी इसे हादसा मानने को तैयार नहीं थे। उनका आरोप है कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के इशारे पर ही इस घटना को अंजाम दिया गया है।

कॉन्ग्रेस, सपा, बसपा और फिर बीजेपी

जानकारी के लिए बता दें कि आरोपित विधायक ने उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे और कुलदीप सिंह सेंगर ने बांगरमऊ से चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की। इससे पहले 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने उन्नाव की ही भगवंतनगर सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी।

वैसे, कुलदीप सिंह सेंगर ने राजनीति की शुरुआत कॉन्ग्रेस पार्टी से की थी। लेकिन, जब वर्ष 2002 में विधानसभा चुनाव आए, तो कुलदीप सिंह कॉन्ग्रेस का हाथ छोड़कर हाथी के साथ चल दिए। कुलदीप ने चुनावी मैदान में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को बड़े अंतर से हराया था। बाहुबली की छवि होने की वजह से 2007 से पहले बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने कुलदीप सिंह सेंगर को बाहर का रास्ता दिखा दिया। कुलदीप सिंह सेंगर ने सपा के टिकट पर बांगरमऊ से जीत दर्ज की थी। आरोपित का राजनीतिक इतिहास पहले से ही विवादित रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की बहन का कहना है, “उनके परिवार को लगातार धमकियाँ मिल रही थीं। उनके ऊपर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था। विधायक की साजिश थी कि पीड़िता और गवाह की हत्या कर मामले को ही खत्म कर दिया जाए।”

CBI जाँच की माँग

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की बहन ने सरकार से माँग की है कि दुर्घटना जाँच सीबीआई से हो। इस बीच रायबरेली जेल में बंद पीड़िता के चाचा ने लिखित तहरीर देते हुए इस मामले को भी मुख्य मामले के साथ जोड़कर सीबीआई को जाँच सौंप देने की अपील की है। अभी तक इस मामले में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके परिवारवालों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कॉन्ग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई के घर IT का छापा, ₹200 करोड़ की विदेशी सम्पत्ति ज़ब्त

आयकर विभाग ने हरियाणा कॉन्ग्रेस के नेता कुलदीप बिश्नोई और उनके परिवार के ख़िलाफ़ छापेमारी की। आयकर विभाग ने इस बात की औपचारिक तौर पर पुष्टि की है कि छापेमारी में कुलदीप बिश्नोई की कंपनी और परिवार की विदेश में क़रीब ₹200 करोड़ की सम्पत्ति के बारे में पता चला है।

इससे पहले, हरियाणा के हिसार ज़िले में शुक्रवार (26 जुलाई) को आयकर विभाग के छापे के बाद शनिवार को दिल्ली में भी रेड की कार्रवाई ख़त्म हो गई। कार्रवाई ख़त्म होने के बाद कुलदीप विश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई ने अधिकारियों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देते हुए आंकड़े साझा किए। भव्य ने बताया कि इस दौरान 10 इंस्पेक्टर्स ने उनसे लगभग 89 घंटे में 146 सवाल पूछे।

ख़बर के अनुसार, आयकर विभाग के अधिकारियों ने टैक्स चोरी से जुड़े मामले में बिश्नोई के हरियाणा के हिसार, मंडी आदमपुर और गुरूग्राम समेत कुल 13 स्थानों पर 23 जुलाई को छापेमारी की थी। इसमें कई बेनामी सम्पत्तियों समेत करोड़ों रुपए के लेन-देन, चल-अचल सम्पत्तियों से संबंधित डील के बारे में जानकारी और सबूत मिले हैं।

इसके अलावा आयकर विभाग को यूएई और पनामा में कुलदीप बिश्नोई की कंपनी के शेयर के बारे में पता चला है जिसके दस्तावेज़ भी बरामद किए गए हैं। कुलदीप बिश्नोई के बारे में बता दें कि वो पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत भजन लाल के बेटे हैं। छापेमारी के दौरान आयकर विभाग के अधिकारियों ने इस बात की भी जानकारी दी कि वित्तीय लेन-देन के दस्तावेज़ों के अलावा बैंक खाता नंबर और कई अन्य सम्पत्तियों से संबंधित दस्तावेज़ भी बरामद किए गए हैं। साथ ही सर्च ऑपरेशन में अधिकारियों ने बिश्नोई के कम्प्यूटर और लैपटॉप को भी ज़ब्त किया था।

ग़ौरतलब है कि हरियाणा के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई विधायक हैं, जबकि उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई भी राज्य विधानसभा में हांसी सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं। दोनों पति-पत्नी ने 2014 के विधानसभा चुनाव में हरियाणा जनहित कॉन्ग्रेस के उम्मीदवारों के रूप में जीत हासिल की थी। बाद में 2016 में पार्टी का कॉन्ग्रेस में विलय हो गया था। उनके बेटे भव्य बिश्नोई ने हाल ही में कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर हिसार संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था।

मस्जिद में पढ़ने गई 8 साल की मासूम के साथ अश्लील हरकत, इमाम मुनीर अहमद गिरफ्तार

बरेली जिले के नवाबगंज की एक मस्जिद में 8 साल की मासूम छात्रा के साथ अश्लील हरकतें करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि मस्जिद गई आठ साल की छात्रा के साथ वहीं के इमाम ने बुरी नीयत से दबोच लिया और फिर अश्लील हरकतें करने लगा। इसके बाद इमाम ने बच्ची को डरा धमकाकर घर भेज दिया। बच्ची घर में डरी-सहमी गुमसुम रहने लगी और वह रोती रही। परिजनों द्वारा बार-बार पूछने पर बच्ची ने दो दिन इसके बारे में बताया। मासूम के साथ अश्लील हरकत होने से लोग भड़क उठे और मजिस्द पहुँच गए। हालाँक‍ि तब तक आरोपित इमाम मस्जिद से फरार हो चुका था।

इसके बाद बच्ची के पिता ने आरोपित इमाम मुनीर अहमद के खिलाफ थाना नवाबगंज में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और सोमवार (जुलाई 29, 2019) को उसे रामपुर जनपद से गिरफ्तार कर लिया। दरअसल, ये घटना नवाबंगज के दयालपुर कस्बा में चौपला वाली मस्जिद की है।

मस्जिद में कस्बे के ही एक व्यक्ति की 8 वर्षीय बच्ची अरबी भाषा पढ़ने जाती थी। शुक्रवार (जुलाई 26, 2019) को जब बच्ची मस्जिद में गई तो बच्ची को अकेला देख वहाँ के इमाम मुनीर अहमद ने छेड़छाड़ की। 2 दिन बाद जब मासूम ने इसके बारे में बताया तो सब हैरान और आक्रोशित हो गए। इसी आक्रोशित भीड़ को आता देखकर आरोपित इमाम मुनीर अहमद मस्जिद छोड़कर फरार हो गया। हालाँकि, अब वह पुलिस के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है।