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‘हम मुस्लिम हैं, डर शब्द हमारी डिक्शनरी में नहीं, 27 फरवरी को याद रखा जाए’

अनुच्‍छेद-370 (Article-370) को निष्प्रभावी कर जम्‍मू-कश्‍मीर को दो केंद्रशासित राज्‍यों में बाँटने के मोदी सरकार के फैसले से बौखलाया पाकिस्‍तान बयानबाजी से बाज नहीं आ रहा। बृहस्पतिवार (अगस्त 08, 2019) को इस मसले पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस करते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फ़ैसल ने कहा कि भारत अपने नागरिकों के मानवाधिकारों का हनन और संयुक्त राष्ट्र संघ की उपेक्षा कर रहा है।

मोहम्मद फ़ैसल ने कहा कि भारत ने ऐसा कर दक्षिण एशिया की स्थिरता और शांति को जोखिम में डाल दिया है। एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते उन्होंने कहा, “भारत ने ऐसा कर दक्षिण एशिया की स्थिरता और शांति को जोखिम में डाल दिया है। यह लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया है और दुनिया भर से लोग बोल भी रहे हैं। इसके लिए लंबा संघर्ष करना होगा, ये सात दशक का क़िस्सा है कोई दो-चार बरस की बात नहीं है। मामला तो अभी चलेगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर नोटिस ले रहा है।”

कश्मीर में भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती और युद्ध की आशंका को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मोहम्मद फ़ैसल ने कहा, “हम मुस्लिम हैं और डर शब्द हमारी डिक्शनरी में नहीं है। इसको निकाल दें। हम डरते नहीं। 27 फ़रवरी को याद रखा जाए, फिर डर की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। हिन्दुस्तान जो भी करना चाहता है उसका जवाब पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति और संसद ने बुधवार को दे दिया है।’

बालाकोट में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई के बाद 27 फ़रवरी को जब पाकिस्तान ने भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की थी तो भारतीय मिग ने उसके विमानों को खदेड़ दिया था। इस दौरान एक मिग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और पाकिस्तान ने भारतीय पायलट अभिनन्दन को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था।

‘सैन्‍य कार्रवाई पर विचार नहीं’

पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री एसएम कुरैशी ने कहा कि पकिस्तान सरकार भारत के साथ बने मौजूदा हालात से निपटने के लिए कूटनीतिक विकल्‍पों पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा अनुच्‍छेद-370 हटाने के खिलाफ कानूनी विकल्‍पों पर भी विचार किया जा रहा है। उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया कि पाकिस्‍तान सैन्‍य कार्रवाई के बारे में विचार नहीं कर रहा है।

370 पर फैसले के अगले ही दिन पाकिस्‍तान के नेताओं ने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की धमकी भी दी थी। लेकिन, भारत के रुख से डरा पाकिस्‍तान अब कूटनीति के जरिए हालात से निपटने की बातें कर रहा है। इमरान खान और नरेंद्र मोदी सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में भाग लेंगे और संभावना है कि दोनों नेता अपने संबोधन में कश्मीर को प्रमुखता देंगे।

जम्मू-कश्मीर: कल से खुलेंगे स्कूल-कॉलेज, कर्मचारियों को काम पर लौटने का आदेश

जम्मू-कश्मीर में हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। राज्य के मुख्य सचिव ने श्रीनगर स्थित सचिवालय सहित डिस्ट्रिक्ट और डिविजनल लेवल के सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से काम पर लौटने को कहा है।

सांबा जिला प्रशासन ने कहा है कि शुक्रवार से सभी शैक्षणिक संस्थान खुल जाएँगे। इनमें निजी और सरकारी दोनों तरह के शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं।

गौरतलब है कि आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी करने से पहले राज्य के शैक्षणिक संस्थानों को एहतियातन बंद कर दिया गया था। मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन बंद कर धारा 144 लागू कर दी गई थी। सुरक्षा कारणों से अतिरिक्त जवानों की भी तैनाती की गई है। हालॉंकि फिलहाल सुरक्षा बलों की तैनाती में कटौती के कोई संकेत नहीं मिले हैं। कई जगहों पर अब भी आंशिक प्रतिबंध लागू हैं। शुक्रवार से राहत दिए जाने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल सुरक्षा हालात की समीक्षा के लिए खुद घाटी में हैं। उनका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वे कश्मीरियों के साथ खाना खाते और बतियाते नजर आ रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने भी बुधवार को कुपवाड़ा और बारामूला सेक्टर में सुरक्षा हालात का जायजा लिया था।

अमेरिका ने पाक को चेताया: भारत को न दिखाओ तेवर, आतंकियों पर कसो नकेल

कश्मीर में आर्टिकल 370 के निष्प्रभावी होने से बौखलाए पाकिस्तान को हर मोर्चे पर मात ही मिल रही है। वह पहले दिन से ही मसले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने की बात कह रहा। उसे उम्मीद थी कि शायद कुछ अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति मिल जाए। लेकिन, अमेरिका ने उसे नसीहत देते हुए कहा है कि भारत को तेवर दिखाने की बजाय वह अपनी जमीन पर पल रहे आतंकियों पर नकेल कसे।

जानकारी के मुताबिक इस संबंध में अमेरिका के 2 बड़े नेताओं ने पाकिस्तान से कहा है कि वह भारत के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई से बचे और अपनी सरजमीं पर चलने वाले आंतकी गुटों के ख़िलाफ़ सख्त एक्शन ले। दरअसल, अनुच्छेद 370 निष्क्रिय किए जाने के विरोध में पाकिस्तान ने कल (अगस्त 7, 2019) भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को वापस भेज दिया और भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को सीमित कर लिया था। जिसके बाद अमेरिकी सांसद रॉबर्ट मेनेनडेज और इलियट इनजेल ने बयान जारी कर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है।

रॉबर्ट मेनेनडेज सीनेट की फॉरेन रिलेशंस कमेटी के सदस्य हैं, वहीं इलियट इनजेल हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष हैं।


रॉबर्ट मेनेंडेज(बाएँ) और इलियट इनजेल (दाएँ)

दोनों नेताओं ने कहा है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के पास मौक़ा है कि वह अब दिखाए कि उसके लिए सभी नागरिक महत्वपूर्ण हैं और वह उनके अधिकारों की रक्षा करेंगे। इन अधिकारों में दोनों नेताओं ने विधानसभा की स्वतंत्रता का अधिकार रखने का भी जिक्र किया।

जनसत्ता की रिपोर्ट की मानें तो अमेरिकी नेताओं ने कहा है, “पारदर्शिता और राजनीतिक भागीदारी लोकतंत्र का स्तंभ है और हमें उम्मीद है कि भारत सरकार इन सिद्धांतों का पालन करेगी।”

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अन्य देशों की सहायता माँगने के मद्देनजर पाकिस्तान ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान से भी फोन पर बात की थी।

जब कश्मीरी बैंड की लड़कियों को रेप की धमकी मिलती रही, CM अब्दुल्ला पलट कर कठमुल्लों की गोद में बैठ गए

श्रीनगर के राजबाग में एक स्कूल है, प्रेजेंटेशन कॉन्वेंट, जिसके कॉन्वेंट नाम से अंदाजा हो गया होगा कि इसे इसाई मिशनरी चलाते हैं। यह कोई इतिहास में प्रसिद्ध, 19वीं शताब्दी का स्कूल हो ऐसा नहीं है। 2009 तक यह सेकेंडरी स्कूल था, उसके बाद ही हायर सेकेंडरी स्कूल बना है। अब आप कह सकते हैं कि मेरी आज की कहानी इतिहास में बहुत पीछे नहीं जाती। जब मिशनरी स्कूल है तो जाहिर है इसके अन्दर व्यवस्था उतनी कट्टरपंथी नहीं थी, जितना कि लड़कियों के लिए बाकी के कश्मीर में होता था। यहाँ लड़कियाँ संगीत भी सीख सकती थीं।

इसी स्कूल में नोमा, अनीका और फराह हसन ने मिलकर एक म्यूजिक बैंड शुरू कर रखा था। ये लोग अक्सर रॉक म्यूजिक गाते-सुनते थे। रॉक की ख़ास बात ही यही होती है कि वो सत्ता का विरोधी भी होता है। इस लिहाज से सोचा जाए तो प्रगाश नाम के उनके इस बैंड को अलगाववादी ताकतों का समर्थन मिलना चाहिए था। लेकिन, हकीकत की जमीन पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। जब 2012 में इस रॉक बैंड ने अपना पहला सार्वजनिक प्रदर्शन किया तो वो श्रीनगर का ही “बैटल ऑफ़ बैंड्स” का आयोजन था। ये रॉक का एक खास आयोजन होता है जिसमें जनता की आवाज से जीत हार का फैसला होता है।

10 दिसम्बर 2012 को जब प्रगाश ने इस मुकाबले में हिस्सा लिया तो मौजूद श्रोताओं ने एक स्वर से इसकी जीत घोषित की। अफ़सोस की लड़कियों का जीतना कठमुल्लों को रास नहीं आया। धमकियाँ मिलने लगीं। चोट पहुँचाने या कत्ल की नहीं, ये किशोरियों को दी जा रही बलात्कार की धमकियाँ थीं। आखरी खलीफा ऑट्टोमन के दौर में हर राज्य के लिए एक मुफ़्ती का जो इस्लामिक चलन आया था उसके हिसाब से बने राज्य के मुख्य मुफ़्ती ने लड़कियों के खिलाफ फतवा जारी कर दिया। जब 370 लागू हो तो लड़कियाँ राज्य से भागकर भी कहाँ जातीं? भागती भी तो पूरा खानदान लेकर भागती क्या?

3 फ़रवरी 2013 को जारी किए गए इस इस्लामिक फतवे के बाद लड़कियों की आवाज़ पर बूट पड़ गई थी। उस दौर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुरू में तो किशोरियों के समर्थन की बात की थी मगर बाद में वो कायरों की तरह पलट गए और प्रगाश के समर्थन के अपने ट्वीट भी डिलीट कर डाले। शुरुआत में इस मामले में बलात्कार की धमकियाँ देने के लिए तीन लोगों की गिरफ्तारियाँ हुई थी। मगर बाद में उमर अब्दुल्ला को याद आया कि वो मजहबी पहले और मुख्यमंत्री बाद में हैं। जब सरकार ने सुरक्षा देने से भी इनकार कर दिया हो तो लड़कियाँ कितनी देर टिकती? इस्लामिक कट्टरपंथ से संगीत हार गया और बैंड चुपचाप, खामोश हो गया।

इस दौर में कश्मीर में कोई म्यूजिक बैंड नहीं होता था ऐसा बिलकुल नहीं है। कम से कम दर्जन भर म्यूजिक बैंड रहे होंगे तभी तो “बैटल ऑफ़ बैंड्स” में मुकाबला हो रहा था। उन्हें दिक्कत लड़कियों के बैंड से थी। आखिर नोमा नज़ीर गिटार बजा कर गाएगी क्यों? आखिर फराह दीबा ड्रम कैसे बजा सकती है? आखिर अनीका खालिद गिटार क्यों बजाए? उमर अब्दुल्ला के ट्वीट डिलीट करने और कठमुल्लों के फतवे, बलात्कार की धमकियों से जो दसवीं की लड़कियों का बैंड बंद हुआ था, उसके नाम प्रगाश का मतलब भी “रौशनी” ही होता है।

कश्मीर में जब तक 370 था तबतक लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु के बाद ही हो, ऐसा कोई कानून नहीं चलता था। बाल विवाह भी होता था इसलिए करीब दस साल पहले दसवीं में पढ़ने वाली ये बच्चियाँ आज कहाँ होंगी ये तो पता नहीं। संभव है कि कठमुल्लों के खौफ़ से इनके परिवारों ने जल्दी-जल्दी इनकी शादी करके कहीं और भेज दिया हो। आज इनका जिक्र इसलिए क्योंकि कभी-कभी कुछ दोमुँहे, जो इनकी आवाज दबाए जाने पर चुप रह गए थे, वो पूछते हैं कि तुम्हें जो डल झील में छठ मनाने की छूट मिल गयी, उसके बदले में कश्मीरियों को क्या मिला?

ऐसे दोमुँहों को हम याद दिला दें कि हम बिहार में रहते हैं। यह वो राज्य है जहाँ मैथली ठाकुर जैसी बच्चियों के गाने पर उन्हें जबरन चुप कराने के कोई फतवे नहीं दिए जाते। संगीत के लिए यहाँ कोई बलात्कार की धमकी दे, तो उसे सुधारने के लिए शुद्ध “गांधीवादी” तरीके ही इस्तेमाल किए जाएँगे। अगर हमारे पास वहाँ जाने का अधिकार है तो बदले में हम भी प्रगाश को बिहार आकर गाने का आमंत्रण देते हैं। इतने वर्षों में “प्रगाश” की छूटी हुई म्यूजिक प्रैक्टिस, रियाज़ से क्या हुआ होगा उससे कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता। गाने के बोल समझ में आए न आए। टूटे फूटे उच्चारण पर हमने लद्दाख वाले सांसद के लिए तालियाँ तो बजाई ही हैं न? आपके गाने पर इससे ज्यादा बजाई जाएँगी।

बाकी आमंत्रण सिर्फ प्रगाश के लिए हो ऐसा भी नहीं है, वादी की सभी बच्चियों के लिए लागू होगा। लड़कों के गाने पर उन्हें वैसे भी दिक्कत नहीं थी, लड़कियों को अगर कट्टरपंथियों से दिक्कत हो तो वहाँ गाने के बदले यहाँ आकर गाना। यहाँ हम तारीफ ही करेंगे।

राम मंदिर पर नवंबर तक फैसला संभव, अब सुप्रीम कोर्ट में हफ्ते के पॉंचों दिन सुनवाई

अयोध्या मामले में पिछले तीन दिनों से सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट (SC) ने फैसला लिया है कि संविधान पीठ अब से इस मामले की सप्ताह के पाँचो दिन सुनवाई करेगी। आमतौर पर संविधान पीठ सिर्फ़ तीन (मंगलवार, बुधवार और गुरुवार) दिन मामले की सुनवाई करती है। लेकिन, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने परंपरा से हटते हुए यह फैसला लिया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही कि 17 नवंबर को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के रिटायर होने से पहले इस मामले में फैसला आ सकता है।

इससे पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने राम लला विराजमान की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन से जानना चाहा कि इस मामले में एक पक्षकार के रूप में क्या ‘राम जन्मस्थान’ कोई वाद दायर कर सकता है। पीठ ने जानना चाहा, “क्या जन्म स्थान को कानूनी व्यक्ति माना जा सकता है। जहां तक देवताओं का संबंध है तो उन्हें कानूनी व्यक्ति माना गया था।”

पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। पीठ के सवाल के जवाब में परासरन ने कहा, “हिन्दू धर्म में किसी स्थान को उपासना के लिए पवित्र स्थल मानने के लिए वहॉं मूर्तियों का होना जरूरी नहीं है। नदी और सूर्य की भी पूजा होती है और जन्म स्थान को भी कानूनी व्यक्ति माना जा सकता है।”

इस दौरान जस्टिस बोबडे ने उत्तराखंड के हालिया फैसले का हवाला दिया उत्तराखंड उच्च न्यायालय के एक फैसले का भी जिक्र किया जिसमे पवित्र गंगा नदी को एक कानूनी व्यक्ति माना गया है जो मुकदमे को आगे बढ़ाने की हकदार है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में कि निर्मोही अखाड़ा की ओर से सुशील जैन ने सुनवाई के दूसरे दिन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सामने बड़ी रोचक दलीलें रखी थी। सुनवाई के दूसरे दिन सर्वोच्च न्यायालय ने जब निर्मोही अखाड़ा से अयोध्या में रामजन्मभूमि पर कब्जे के सबूत माँगे तो इस पर हिंदू परिवार ने दावा किया कि उसने 1982 में की एक डकैती में पैसों के साथ उन रिकॉर्डों को खो दिया है। अब उनके पास काेई रिकाॅर्ड नहीं है।

इसके बाद जब मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने फिर पूछा कि अगर आपके पास इस मुद्दे से जुड़े कोई दूसरे सबूत हैं तो वे पेश करें। इस पर निर्मोही अखाड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सुशील जैन ने कहा कि राम जन्मभूमि देवताओं की भूमि बन गई है। यह स्थान हिंदुओं के लिए पूजा स्थल बन गया है। इसके साथ ही कहा कि वाल्मीकि रामायण में तीन स्थानों पर उल्लेख है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। 

सुशील कुमार जैन ने सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि पूजा और प्रार्थना में बाधा ने उन्हें सिविल सूट दायर करने के लिए मजबूर किया। यह मालिकाना हक नहीं बल्कि कब्जे की लड़ाई है। 

सबरीमाला मंदिर में चोरी-छिपे घुसने वाली महिला की बेटी का जबरन धर्म परिवर्तन, पति ने ही…

स्कूल के जमाने में ऐसा होता था कि जो सबक याद न हो उसे बार बार दोहराने को कहा जाता था। पढ़ाई से छुट्टी तभी मिलती थी जब सबक याद हो जाए। इस मामले में कुछ शायर उल्टा सोचते हैं, वो कहते हैं कि –

मकतब ए इश्क का दस्तूर निराला देखा,
उसको छुट्टी न मिली जिसको सबक याद हुआ!

(*मकतब – स्कूल, पाठशाला)

जीवन शायरी के हिसाब से नहीं चलता, यहाँ जो आप नहीं सीखेंगे, वो बार-बार दोहराया जाएगा। नमूने के तौर पर पृथ्वीराज चौहान की कहानी को लीजिए। इस जानी-मानी कहानी में घोरी जब पृथ्वीराज से हारा तो राजा पृथ्वीराज उसे जिन्दा भाग जाने देते हैं।

बाद में जब घोरी जीत जाता है तो वो कोई दरियादिली दिखाने की बेवकूफी नहीं करता। चंदबरदाई की रचना के मुताबिक काफी यातनाओं से पीड़ित, अंधे कर दिए गए पृथ्वीराज शब्दभेदी बाण से घोरी को मार गिराते हैं। इस कहानी से वैसे तो दुश्मन को अधमरा न छोड़ने की सीख दी जाती है। “घर का भेदी लंका ढाए” कहकर जयचंद की याद भी दिलाई जाती है, मगर इस कहानी में बीच का एक हिस्सा और भी है। पृथ्वीराज पर जीत पाते ही घोरी रुका नहीं था। उसने सबसे पहले जयचंद का ही सफाया किया था।

अब जब अपनों का साथ छोड़कर परायों से हाथ मिलाने का ये नतीजा याद आ गया हो तो कहानियों के दौर से वापस आज के युग में लौटते हैं। आक्रमणकारियों ने हाल ही में दक्षिण भारत के सबरीमाला मंदिर पर चढ़ाई की थी। हजारों श्रद्धालुओं ने डटकर इन हमलावरों का मुकाबला भी किया था। इन हमलावरों का साथ देने वाले घर के भेदियों में से प्रमुख थी बिन्दु थनकम कल्याणी नाम की एक महिला। अक्टूबर 2018 की बाईस तारीख को इस दस्यु ने जबरन सबरीमाला मंदिर में घुसने की असफल कोशिश की थी।

इसने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया नाम के एक मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन और अपने पति पर अब अपनी बेटी को अगवा करके उसका धर्म परिवर्तन कर डालने का आरोप लगाया है। उसने कहा है कि उसके पति ने चंद नोटों के बदले अपनी बेटी का धर्म परिवर्तन करवाना स्वीकार कर लिया। पहले तो वो बेटी को छुट्टी के बहाने अपने साथ ले गया और फिर लौटाने से इनकार कर दिया। बिन्दु का कहना है कि इसी बीच बेटी का स्कूल भी बदलवा कर एक मुस्लिम स्कूल में भर्ती करवा दिया गया है।

अब उसकी बेटी बुर्के में स्कूल जाती है और उसे बेटी से मिलने से रोकने के लिए एसडीपीआई के गुंडे छोड़ दिए गए हैं। बारह साल की उनकी बेटी भूमि से उन्हें चार महीने से मिलने नहीं दिया गया। सबरीमाला में घुसने की कोशिश करने वाली बिन्दु थनकम कल्याणी का कहना है कि उनके पति ने भी उन्हें मारा पीटा है। वो राज्य के कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगा रही हैं। ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि कॉमरेड मुख्यमंत्री उनकी कितनी मदद करेंगे।

बाकी पृथ्वीराज – जयचंद – घोरी की कहानी में से जयचंद का क्या हुआ था, ये याद रखना भी जरूरी है। इतिहास खुद को दोहराता रहता है वाली जो कहावत है, वो यूँ ही तो नहीं बनी होगी न?

मेरे राज्य में नई तकनीकों में निवेश करिए: मुकेश अम्बानी से बोले CM कमलनाथ

कॉन्ग्रेस नेताओं की कथनी और करनी में कितना बड़ा फर्क है यह आए दिन दिखता ही रहता है। जिस अम्बानी और रिलायंस परिवार को कोसते कॉन्ग्रेसी अघाते नहीं उनकी पैरवी करते कॉन्ग्रेस सांसद
कपिल सिब्बल अदालत में नजर आते हैं। अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को लेकर मुंबई में रिलायंस इंडस्ट्री के चेयरमैन मुकेश अम्बानी से मुलाकात की है।

कमलनाथ ने अम्बानी से मुलाक़ात कर मध्य प्रदेश में औद्योगिक संभावनाओं पर चर्चा की। कमलनाथ ने अम्बानी से मध्य प्रदेश में निवेश करने और उद्योग स्थापित करने का आग्रह किया। अम्बानी ने भी राज्य में ग्लोबल लॉजिस्टिक हब स्थापित करने का आश्वासन दिया। बैठक के दौरान अम्बानी ने कहा कि मध्य प्रदेश में ब्रिटेन और साउथ कोरिया से ज्यादा डेटा की खपत होती है और वह नई तकनीकों का प्रयोग महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण हेतु करने के इच्छुक हैं।

रिलायंस का लॉजिस्टिक हब मुंबई और बेंगलुरू में पहले से ही है। अगर मध्य प्रदेश में इसे स्थापित किया जाता है तो यह राज्य के लिए बड़ी बात होगी। कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश में फ़ूड प्रोसेसिंग, डेटा प्रोसेसिंग और एनर्जी प्रोसेसिंग का हब बनने की क्षमता है। कमलनाथ ने अम्बानी से आग्रह किया कि वह राज्य में नई-नई तकनीकों में निवेश करें। कमलनाथ ने कृषि क्षेत्र के विकास के लिए भी रिलायंस से भागीदार बनने का आग्रह किया।

मुकेश अम्बानी के अलावा कमलनाथ अन्य उद्योगपतियों से भी मुलाक़ात करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के हर जिले के लिए अलग-अलग तरीके से निवेश की योजनाएँ तैयार की जा रही हैं।

समझौता एक्सप्रेस बंद: सीमा पर ट्रेन छोड़ भागा पाकिस्तानी ड्राइवर-गार्ड, भारतीय फिल्मों पर भी प्रतिबंध

आर्टिकल 370 के निष्प्रभावी होने से बौखलाए पाकिस्तान ने गुरुवार को समझौता एक्सप्रेस का परिचालन बंद कर दिया। भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन पर भी रोक लगा दी है। हालाँकि भारत के कदम से वह कितना डरा-सहमा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तानी ड्राइवर और गार्ड समझौता एक्सप्रेस के साथ भारतीय सीमा में दाखिल होने का हौसला नहीं जुटा पाए। सीमा पर ही ट्रेन छोड़ दोनों भाग खड़े हुए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज पाकिस्तान से समझौता एक्सप्रेस को वापस आना था, लेकिन पाकिस्तान ने उसे वाघा बॉर्डर पर रोक दिया। इससे कई लोग सीमा पर फॅंस गए। पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रसीद अहमद ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि जिन लोगों ने पहले से टिकट खरीद रखा है वे अपने पैसे वापस ले सकते हैं। यह ट्रेन हफ्ते में दो दिन चलती है।

पाकिस्तान की इस घटिया हरकत से 62 मुसाफिर रास्ते में फँस गए। सीमा से ट्रेन लाने के लिए भारत ने अपना गार्ड और ड्राइवर भेजा है। अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन के सुपरिटेंडेंट अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि आज (अगस्त 8, 2019) पाकिस्तान से समझौता एक्सप्रेस को भारत आना था लेकिन इस दौरान पाकिस्तान से संदेश आया कि भारतीय रेल अपने ड्राइवर और क्रू मेंबर को भेज कर ट्रेन को बॉर्डर से ले जाए।

कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा: थूक कर चाटने वाली कॉन्ग्रेसी परम्परा के नए वाहक बने अधीर रंजन

लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी अब अपने ही बयान से पलट गए हैं। अधीर रंजन ने लोकसभा में जोर-जोर से चिल्ला कर जो बातें कही थीं, बाहर मीडिया के सामने वह उसके ठीक विपरीत सुर में राग अलापते नज़र आ रहे हैं। संसद में उन्होंने कहा था कि चूँकि जम्मू कश्मीर मामले को संयुक्त राष्ट्र देख रही है, ऐसे में भारत इससे सम्बंधित विधेयक कैसे ला सकता है? बता दें कि पाकिस्तान का भी कमोबेश इस मामले में यही रुख है और वह जम्मू कश्मीर को द्विपक्षीय मसला बताता है।

देशद्रोह क़ानून: थूक कर चाटने का नाम है कपिल सिब्बल

अब अधीर रंजन चौधरी ने अपने पुराने बयान से मुकरते हुए कहा है कि जम्मू कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा है। वह पाकिस्तान द्वारा भारत के साथ व्यापार ख़त्म करने वाली ख़बर पर टिप्पणी कर रहे थे। अधीर रंजन ने कहा कि उन्हें पहले से ही इस बात का अंदेशा था कि पाकिस्तान इस तरह का क़दम उठा सकता है।अब उन्होंने कहा है कि कश्मीर को लेकर कौन सा क़ानून पारित किया जाएगा, यह निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार हमारे देश के पास है।

संसद में उन्होंने पूछा था कि जिस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र देख रहा है, उस पर भारत सरकार क़ानून कैसे बना सकती है? वहीं अब संसद के बाहर उन्होंने कहा है कि यह अधिकार पूर्णतया भारत सरकार के पास है। संसद में उन्होंने कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बताया था, लेकिन अब मीडिया के सामने वह इसे भारत का आंतरिक मुद्दा बता रहे हैं (जो कि सही है और भारत का स्टैंड भी है)। आख़िर अधीर रंजन को ये समझने में इतने दिन क्यों लग गए? अगर उन्हें यह पता था तो संसद में बयान देकर उन्होंने पाकिस्तान के रुख को क्यों आगे बढ़ाया?

अधीर रंजन ने प्रधानमंत्री के उस बयान को याद किया जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि कश्मीर समस्या का हल गोली से नहीं बल्कि वहाँ की जनता को गले लगाने से होगा। अधीर रंजन ने कहा कि आज उसके ठीक विपरीत हो रहा है और जम्मू अक्ष्मीर को एक कंसंट्रेशन कैम्प में बदल दिया गया है। वैसे भी ज्योतिरादित्य सिंधिया, कर्ण सिंह और दीपेंद्र हुड्डा जैसे बड़े नेताओं ने अनुच्छेद 370 पर कॉन्ग्रेस के रुख के उलट जाकर केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत किया है।

AAP-कॉन्ग्रेस एक-दूसरे पर थूक कर चाटने की रेस में, बीच में कूदे 4 महान दरबारी पक्षकार

‘भागो बिहारी इधर से, कल दिखे तो मारूँगा और जला डालूँगा’ – J&K में प्रवासियों को धमकी

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निष्फल होने के बाद बिहार के अधिकतर प्रवासियों को वहाँ के समुदाय विशेष के स्थानीय लोगों द्वारा डरा-धमका कर भगाया जा रहा है। विडंबना यह कि इन प्रवासी कर्मियों में अधिकतर दूसरे मजहब वाले ही हैं। राहुल पंडिता द्वारा ओपन मैग्जीन में लिखे गए लेख में इस संबंध में बताया गया है कि बिहार के प्रवासी इन दिनों हड़बड़ी में कश्मीर को हजारों की तादाद में छोड़ने के लिए मजबूर हैं।

जानकारी के मुताबिक एक 56 वर्षीय व्यक्ति सुरेंद्र महतो बताते हैं कि वहाँ के स्थानीय लोगों ने उन्हें गाली दी और वहाँ से जाने के लिए मजबूर किया। महतो की मानें तो उन्हें ऐसा नहीं करने पर मार देने की धमकी भी दी गई।

वहीं, 25 वर्षीय असलम बताते हैं कि श्रीनगर में रहने वाले कुछ स्थानीय लोगों ने उनसे मारपीट की और उनका बैग लेकर कहा, “भागो बिहारी इधर से।”

एक दूसरे प्रवासी का कहना है कि पिछली रात एक स्थानीय कश्मीरी उनके पास आया और कहा, “अगर तुम मुझे कल दिखे तो मैं तुम्हें मारूँगा और केरोसीन से जला दूँगा।”

गौरतलब है कि इनमें से अधिकतर प्रवासी कश्मीर की ओर वहाँ के ठंडे मौसम के कारण रुख करते हैं, साथ ही उनका मानना होता है कि वो कश्मीर में अन्य जगहों के मुताबले ज्यादा बचत कर पाएँगे। लेकिन कश्मीर में जीवनयापन की संभावनाएँ ढूँढने वाले लोगों की ऐसी दुर्दशा देखकर कश्मीरी अलगाववाद के काले सच का पता चलता है, जो नस्लीय और धार्मिक वर्चस्व का एक विषैला मिश्रण है।