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‘शिवभक्त’ तेज प्रताप यादव के बाउंसरों ने की काँवड़ियों की पिटाई, महिला रिपोर्टर से बदसलूकी

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव हमेशा अपनी हरकतों से मीडिया की सुर्खियों में बने रहते हैं। कभी कृष्ण कन्हैया की वेश-भूषा धारण करके बाँसुरी बजाने वाले तेजप्रताप सावन के दिनों में शिव की भक्ति में लीन हैं। लेकिन इस वक्त उनका ये रूप चर्चा का विषय नहीं है बल्कि उनके बाउंसरों द्वारा काँवड़ियों से मारपीट मीडिया हेडलाइन है।

जी हाँ, घटना रविवार (जुलाई 29, 2019) की है। जब तेज प्रताप यादव झारखंड के देवघर स्थित बाबाधाम में भगवान शिव का जलाभिषेक करने निकले। जानकारी के मुताबिक, इस दौरान उनके समर्थकों ने जमकर बवाल काटा और उनके कई बाउंसरों ने श्रद्धालुओं को भी बुरी तरह पीटा। इतना ही नहीं, इस दौरान महिला मीडियाकर्मी से भी बदसलूकी की गई।

बताया जा रहा है कि जलाभिषेक के लिए निकला तेज प्रताप यादव का काफिला चानन के पास रास्ते के जाम में फँस गया था कि तभी तेज प्रताप समेत उनके सभी समर्थक गलत तरफ से अपना काफ़िला निकालने लगे। जब अन्य श्रद्धालुओं ने इसका विरोध किया तो तेज प्रताप के समर्थकों ने काँवड़ियों से मारपीट शुरू कर दी।

इस कड़ी में मीडिया खबरों के अनुसार एक हिंदी चैनल की पीसीआर वैन और गाड़ी ने भी तेज प्रताप के काफ़िले को ओवरटेक करना चाहा, लेकिन तेजप्रताप के बाउंसरों ने अपनी गाड़ी से उतरकर प्रेस की गाड़ी के ड्राइवर को तमाचा मार दिया। जब वैन में मौजूद महिला रिपोर्टर ने उन्हें समझाने की कोशिश की तो उनके साथ भी बाउंसरों ने बदसलूकी की।

ये हंगामा बांका के समीप करीब आधी रात तक चलता रहा। हंगामें के दौरान तेज प्रताप भी काफिले में मौजूद थे, लेकिन बीच-बचाव करने की बजाए वे बस से उतर स्कॉर्पियों में बैठकर चले गए, जबकि उनके बाउंसरों ने बवाल जारी रखा।

J&K की मस्जिदों पर गृह मंत्रालय की नजर: माँगी सभी मस्जिदों, मौलवियों और फंडिंग की जानकारी

जम्मू-कश्मीर के मस्जिद इस समय गृह मंत्रालय की निगरानी पर हैं। टाइम्स नॉउ की खबर के मुताबिक राज्य के सभी जिलों से वहाँ स्थित मस्जिदों के प्रशासन की जानकारी माँगी गई है।

गृह मंत्रालय ने राज्य के सभी जिले के पुलिस अधिकारियों को सभी मस्जिदों से जुड़ी जरूरी जानकारी भेजने के निर्देश दिए हैं। जिसमें इन मस्जिदों के लोकेशन और प्रशासन की सूचना भी शामिल है।

इसके अलावा गृह मंत्रालय ने मस्जिद के मौलवियों, मस्जिद की फंडिग और मस्जिद के संचालन का भी ब्यौरा माँगा है। गृह मंत्रालय ने कहा, “प्रारूप के अनुसार उच्च अधिकारी कार्यालय के पर्फोमा के मुताबिक अपने संबंधित क्षेत्राधिकार में आने वाले मस्जिद और उनके प्रशासन की जानकारी तुरंत भेजें।”

इस निर्देश के बाद मजहबी धर्मगुरूओं ने इसका विरोध किया है और इसे मजहब में दखलअंदाजी बताया है। हालाँकि गवर्नर के सलाहकार ने टाइम्स नॉउ से बातचीत में ऐसे किसी भी ऑर्डर के जारी होने की बात को खारिज किया है जबकि चैनल के मुताबिक दूसरे एक अन्य पुलिस ऑर्डर में ऐसा निर्देश जारी होने की बात है।

बता दें कि जम्म-कश्मीर राज्य में मस्जिदें बहुत लंबे समय से सवालों के घेरे में हैं क्योंकि उनमें से कुछ ऐसे शक्ति केंद्र हैं, जहाँ से अलगाववादी गतिविधियाँ प्रसारित होती हैं। जबकि इसके अलावा कुछ मस्जिदों को लेकर माना जाता है कि वे आतंकी अभियानों के लिए धन मुहैया कराने के लिए एक मोर्चे के रूप में इस्तेमाल होते हैं और साथ ही यहाँ शुक्रवार की नमाज के बाद मुस्लिम बच्चों को मज़हबी उपदेश के माध्यम से राज्य के ख़िलाफ़ हथियार उठाने को उकसाया जाता है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा लिए गए इस एक्शन का सिर्फ़ यही उद्देश्य है कि इबादत करने वाले धार्मिक स्थलों का आतंकवादियों द्वारा गलत इस्तेमाल न किया जाए। क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथियों और वाहबियों ने पिछले कुछ सालों से मस्जिदों को सुरक्षाबल और देश के नागरिकों के ख़िलाफ़ होने वाली आतंकी गतिविधियों के लिए प्रभावित किया है।

‘कुरान प्रगतिशील, हिंदू धर्म हद से ज्यादा दकियानूसी’ – स्क्रीनशॉट से हुआ इरा त्रिवेदी के झूठ का पर्दाफ़ाश

इन दिनों योग प्रशिक्षक इरा त्रिवेदी अपने सबसे बुरे दिनों से गुज़र रही हैं। दरअसल, उन्होंने एक झूठे आँकड़े को आधार बनाकर बताया था कि गाय का माँस प्रोटीन का सबसे बेहतर स्रोत होता है। इरा के गौ माँस के प्रचार के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनका काफ़ी विरोध किया था, जिसके चलते दूरदर्शन ने अपने योग कार्यक्रम ‘योग विद इरा त्रिवेदी’ से उनकी छुट्टी कर दी। हालाँकि, दूरदर्शन ने अपने इस योग कार्यक्रम में इरा की जगह यामिनी मुथाना को जगह दी है। ऑपइंडिया ने पहले अपनी एक ख़बर के ज़रिए इस मामले पर जानकारी दी थी।

काफ़ी हो-हल्ला के बाद, इरा त्रिवेदी ने माफ़ी माँगते हुए ट्वीट किया कि वो शुद्ध शाकाहारी हैं और हिंदू धर्म का सम्मान करती हैं। इरा के इस ट्वीट के बाद भी जब लोगों का ग़ुस्सा शांत नहीं हुआ, तो उन्होंने झूठ का सहारा लिया।

एक नई मनगढंत कहानी गढ़ते हुए इरा त्रिवेदी ने अपने ख़ुद के उस ट्वीट को अस्वीकार कर दिया, जिसमें उन्होंने लिखा था, “कुरान प्रगतिशील है, जबकि आधुनिक हिंदू धर्म प्रतिगामी (पीछे ढकेलने वाला) है।”

अपने ट्विटर अकाउंट को पाक-साफ़ साबित करने के बाद, इरा त्रिवेदी अब लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रही हैं कि जिस ट्वीट में उन्होंने क़ुरान को प्रगतिशील और आधुनिक हिंदू धर्म को प्रतिगामी बताया, वह एक फ़ेक ट्वीट है। हालाँकि, जैसा कि कहा जाता है, इंटरनेट कभी कुछ नहीं भूलता। ऐसा ही कुछ इरा त्रिवेदी के साथ भी हुआ जिससे उनके दावे की पोल खुल गई।

बता दें कि इरा त्रिवेदी ने ख़ुद को पाक-साफ़ घोषित करने के लिए जिस ट्वीट का इस्तेमाल किया, उसकी सच्चाई से यूज़र्स ने ही उन्हें अवगत करा दिया। दरअसल, वो ट्वीट 2017 का था, जिस पर समय और तारीख़ दोनों स्पष्ट हैं।

इसके अलावा, कई लोगों ने इरा त्रिवेदी को बताया कि मूल ट्वीट लिंक भी मौजूद है। इससे यह बात साफ़ हो गई कि इरा त्रिवेदी ने अपनी टाइमलाइन से उस ट्वीट को ख़ुद ही डिलीट किया था।

इरा त्रिवेदी द्वारा हटाए गए ट्वीट के इतर सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें इस बात का का भी सबूत दे डाला, जिसमें वो (इरा त्रिवेदी) हिन्दू धर्म को कोसती नज़र आईं।

‘जय श्री राम नहीं बोले तो हमको मारा’ – वो 10 घटनाएँ जिनके सहारे ‘लिबरल मीडिया’ ने चलाया प्रोपेगेंडा

देश में इन दिनों एक ट्रेंड सा चल रहा है कि कहीं भी कोई झगड़ हो तो उसे साम्प्रदायिक बना दिया जाता है। इतना ही नहीं, उसमें जय श्री राम का मसाला जोड़कर हिन्दुओं को बदनाम करने की कोशिश की जाती है। हालाँकि, हिन्दू भी इस बात से हैरान-परेशान हैं कि आखिर वह कौन लोग हैं जो ‘जय श्री राम’ का नारा हिन्दुओं को तो लगाने की इजाज़त नहीं दिला पा रहे हैं, और समुदाय विशेष से लगवाए जा रहे हैं। देश में रोजाना किसी न किसी जगह से अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादती और उनसे जबरन जय श्री राम का नारा लगवाने की खबरें आती हैं। इन खबरों को मीडिया में उछाला जाता है, सोशल मीडिया पर फैलाया जाता है, लेकन पुलिस जब गहनता से जाँच करती है, तो अधिकतर मामला झूठा, फर्ज़ी और मनगढ़ंत निकलता है। हम आपको ऐसी ही 10 घटनाएँ बता रहे हैं, जिनमें इसी तरह की साजिश रचकर जबर्दस्ती का साम्प्रदायिक एंगल ठूँसा गया।

29 जुलाई, चंदौली: खालीद ने किया आत्मदाह, मीडिया ने फैलाया झूठ

आज तक और इंडिया टुडे ने खबर चलाई कि उत्तर प्रदेश के चंदौली गाँव में खालीद ने जय श्री राम नहीं बोला, तो उसे आग में झोंक दिया गया। मगर चंदौली के एसपी संतोष कुमार सिंह ने इस बारे में बयान जारी करते हुए कहा कि पुलिस ने खालीद के बयानों में विरोधाभास पाया है। उन्होंने बताया कि एक चश्मदीद के बयान के मुताबिक, खालीद को किसी समूह ने आग में नहीं झोंका, बल्कि उसने खुद ही आग लगाई थी। उन्होंने कहा कि बच्चा जिस तरह से अलग-अलग लोगों को अलग-अलग बयान दे रहा है, उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे उसे किसी ने ये सारी बातें सिखाई हैं। एसपी ने बताया कि बच्चा जिस दो गाँवों के बारे में बात कर रहा है, वो दोनों गाँव अलग- अलग दिशाओं में स्थित है और जिस जगह के बारे में वो बता रहा है वहाँ की सीसीटीवी फुटेज में वो कहीं भी नहीं है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि खालीद किसी के सिखाने पर ये बयान दे रहा है।

21 जुलाई, औरंगाबाद: शेख आमेर ने समुदाय में नाम उँचा करने के लिए बोला झूठ

शेख आमेर ने आजाद चौक से बजरंग चौक की तरफ जाते वक्त एक कार वाले से मामूली सा विवाद हो गया। आमेर ने उन लोगों को सबक सिखाने का सोचा और एक ही दिन पहले शहर के हुडको कॉर्नर पर घटी घटना को याद करते हुए उसने जय श्री राम न बोलने पर पिटाई की झूठी कहानी बनाई और पुलिस में शिकायत कर दी। शिकायत दर्ज कराने के एक दिन बाद ही आमेर अपने बयान से पलट गया। उसने अपना बयान वापस लेते हुए कहा कि उसने अपने समुदाय के सदस्यों के बीच अपना कद बढ़ाने और उससे झगड़ा करने वाले लोगों को सबक सिखाने के लिए मनगढ़ंत कहानी के आधार पर पुलिस से शिकायत की।

20 जुलाई, औरंगाबाद: नहीं किया भीड़ ने मजबूर

इमरान इस्माइल पटेल ने दावा किया कि रात को भीड़ ने घर लौटते समय पकड़ कर मारपीट की और जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया। वहीं न केवल पुलिस बल्कि इमरान को बचाने वाले चश्मदीद ने भी उसके दावे की तस्दीक करने से साफ़ मना कर दिया है। पुलिस के अनुसार यह एक निजी रंजिश के चलते हुई हाथापाई थी।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि न केवल ‘हमसे जय श्री राम बुलवाया जा रहा है’ के दावों की बाढ़ आ रही है, बल्कि अधिकाँश दावे गलत भी साबित हो रहे हैं? अगर दावे सही साबित होते तो माना जा सकता था कि चाहे किसी के बहकावे में, चाहे हिन्दूफ़ोबिक राज्य-व्यवस्था से ऊबकर हिन्दू भड़क उठे हैं। लेकिन चूँकि लगभग सारे दावे भी गलत साबित हो रहे हैं, तो ऐसा भी नहीं है।

14 जुलाई, मुज़फ़्फ़रनगर: न दाढ़ी नोंची, न राम-नाम बुलवाया

इमाम इमलाकुर रहमान जब अपने साथ मारपीट की बात पर मुज़फ़्फ़रनगर में FIR करने पहुँचे तो न ही मामले में कोई जय श्री राम था, और न ही उन्होंने दाढ़ी नोंचे जाने की बात अपनी FIR में कही। लेकिन जब तक वह मामले की पूरी FIR करने बागपत पहुँचे (जहाँ का मामला था), यह सब चीज़ें बागपत FIR में अतिरिक्त आ गईं थीं। न केवल इन्हें एसपी ने ख़ारिज किया, बल्कि अंदेशा भी जताया कि साम्प्रदायिक एंगल जानबूझकर जोड़ा गया ताकि मामले में त्वरित कार्रवाई हो।

12 जुलाई, उन्नाव: जुमे तक अगर काज़ी साहब की बात न मानी तो…

क्रिकेट खेलने में स्थानीय लड़कों से हुए हुए विवाद और झगड़े को लेकर मदरसे के बच्चे जब काज़ी निसार मिस्बाही के पास पहुँचे तो क़ाज़ी साहब खुद ही ‘स्पिनर’ निकले। न केवल मदरसे के बच्चों से जबरन जय श्री राम बुलवाए जाने का ‘स्पिन’ उन्होंने मामले में लगा दिया, बल्कि धमकी भी दी कि अगर जुमे तक उनके बताए चार ‘दोषियों’ को उसी जुमे तक न पकड़ा गया तो ‘जो एक्शन कहीं भी नहीं हुआ, वो होगा‘। वह बात और है कि न केवल पुलिस की जाँच में यह मामला भी साम्प्रदायिक रूप से खोखला निकला, बल्कि फिर भी प्रदेश के प्रमुख सचिव (सूचना) तक को मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलानी पड़ गई।

5 जुलाई, कानपुर: नशे में हुई लड़ाई पर झूठ

ऑटो-ड्राइवर आतिब पर हमला बेशक हुआ, ईंट-पत्थर से मारकर उसे मरणासन्न भी बिलकुल किया गया, लेकिन यहाँ भी जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर करने की बात झूठ निकली। पुलिस जाँच के अनुसार यह एक नशे में हुई हाथापाई थी, जिसकी परिणति आतिब को शौचालय में बाँधकर पीटने के रूप में हुई।

29 जून, कूच बिहार: आप्सी मियाँ की करनी हिन्दुओं के सर

आप्सी मियाँ ने अपने हममज़हब असगर को कान पकड़ कर उठक-बैठक लगाने और जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया। और लिबरल गिरोह ने हिन्दुओं को जिम्मेदार ठहराने में समय नहीं लगाया। यह भी ध्यान नहीं दिया कि कुछ बिहार पश्चिम बंगाल में है- जहाँ हिन्दू खुद भी अगर जय श्री राम बोलें तो हो सकता है उन्हें गोली मारी जा सकती है। ऐसे में एक हिन्दू भला दुसरे मजहब वाले से जय श्री राम बुलवाएगा?

23 जून, दिल्ली: चश्मदीदों ने मोमिन के आरोप को बताया झूठा

रोहिणी, सेक्टर-20 के मदरसे में पढ़ाने वाले मोहम्मद मोमिन ने आरोप लगाया कि जय श्री राम बोलने से इंकार करने पर कुछ लोगों ने उनकी कार को टक्कर मार दी। पुलिस ने जाँच की लेकिन एक भी चश्मदीद गवाह ने मोमिन की बात का समर्थन नहीं किया। घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज से भी आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।

2 जून, करीमनगर: ‘मजनूँ’ की पिटाई बनी ‘जय श्री राम’

किसी समय ’15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो’ का दावा करने वाले अकबरुद्दीन ओवैसी की AIMIM के नेता रहे और आजकल ‘मजलिस बचाओ’ से जुड़े अमजद उल्लाह खान ने दावा किया कि भाजपा-संघ के लोगों ने एक दूसरे समुदाय के किशोर को पीटा क्योंकि उसने जय श्री राम कहने से मना कर दिया था। करीमनगर के कमिश्नर ने साफ किया कि उनकी जाँच में ऐसा कुछ नहीं निकला, और यह निजी कारणों से हुई हिंसा थी- यह लड़का किसी किशोरी को तंग करने को लेकर उस लड़की के पक्ष के लोगों के हाथों पिटा था। यही नहीं, पिटने वाले लड़के के भी अपने बेटे की गलती मानते हुए माफ़ी माँगी।

28 मई, गुरुग्राम: बरकत का दावा निकला झूठा

मोहम्मद बरकत ने दावा किया कि गुरुग्राम में कुछ हिन्दुओं ने उसे घेर कर मारा, उसकी इस्लामी गोल टोपी फेंक दी और ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए मजबूर किया। हरकत में आई गुरुग्राम पुलिस ने 15 लोगों को हिरासत में लिया, 50 के करीब सीसीटीवी फुटेज खंगालीं, और अंत में इस नतीजे पर पहुँची कि बरकत अली के साथ मार-पीट तो हुई, लेकिन न ही उसकी टोपी किसी ने ‘फेंकी’ और न ही जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया गया। यही नहीं, स्वराज्य संवाददाता स्वाति चतुर्वेदी की जाँच में तो शक की सूई इस ओर भी घूमी कि बरकत को किसी ने सिखाया-पढ़ाया तो नहीं था इस घटना को साम्प्रदायिक रंग देने के लिए।

तो कारण क्या है आखिर?

एक कारण यह हो सकता है कि हिंसा-पीड़ितों को यह सुस्त और निकम्मी पुलिस और प्रशासन व्यवस्था को हरकत में लाने का आसान तरीका दिख रहा हो। ऐसे तो न पुलिस किसी की गाड़ी को टक्कर लगने या किसी के साथ मारपीट होने की FIR भी लिखने वाली, जाँच तो दूर की बात है। लेकिन अगर वही पीड़ित “हाय, मुझे मेरी मर्ज़ी के खिलाफ ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए मजबूर किया गया” रो दे, तो हिन्दुओं को दुष्ट, साम्प्रदायिक दानव के रूप में दिखाने के लिए तैयार बैठे मीडिया गिद्ध उसके केस को चमका देंगे, ‘ऊपर’ से प्रेशर होगा और पुलिस मामला तेजी से निपटाने के लिए मजबूर हो जाएगी।

दूसरा कारण ऐसे आरोपों के उफनने का यह है कि लिबरल गैंग के पास हिन्दुओं के खिलाफ बोलने के लिए और कोई आधार नहीं बचा है। न ही कोई हनुमान चालीसा पढ़ते हुए छाती पर बम बाँधकर धमाके कर रहा है, न ही ‘जय श्री राम’ बोलकर कहीं 26/11, 9/11 जैसे हमले कर रहा है। साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ चल रहे मामलों की दिशा भी उनके बाइज़्ज़त बरी होने की दिशा में बढ़ती दिख रही है। ऐसे में हिन्दू आतंकवाद का शिगूफ़ा छेड़ने के लिए कुछ तो चाहिए। बम धमाके न सही, ‘ज़बरदस्ती जय श्री राम बुलवाया जा रहा है’ ही सही! बंदूक लेकर कथित हिन्दू आतंकवादी सड़कों पर भले नहीं उतर रहे, लेकिन लोगों को बीफ़ करी खाने भी तो नहीं मिल रही!

ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस आखिर क्या कर रही है इस झूठे नैरेटिव को काटने के लिए। आज हर जिले की पुलिस का अपना ट्विटर अकाउंट है, जो अमूमन ट्विटर द्वारा ब्लू-टिक से सत्यापित भी किया होता है। क्यों नहीं किसी भी मामले में साम्प्रदायिक एंगल न होने की बात पक्के तौर पर स्थापित होते ही जिले/राज्य की पुलिस का अकाउंट कुछ शब्दों का ट्वीट या एक दस से तीस सेकंड का वीडियो डाल ऐसी बातों का खण्डन कर देता है? अगर पुलिस सोशल मीडिया में आ रही खबरों के आधार पर किसी अपराध का स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार रखती है, तो किसी भी समुदाय के खिलाफ दुर्भावनावश या निहित स्वार्थ के अंतर्गत चलाए जा रहे नैरेटिव को तोड़ने के लिए ऐसा ट्वीट करना पुलिस की जिम्मेदारी क्यों नहीं है?

12 अगस्त, रात 9 बजे, डिस्कवरी चैनल: 180 देशों में दिखेगा यह शो, भारतीय राजनीति में पहली बार

जल्द ही हम सबको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक नया चेहरा देखने को मिलने वाला है। दरअसल, 12 अगस्त को रात 9 बजे डिस्कवरी चैनल के मशहूर शो ‘मैन वर्सेज वाइल्ड’ में प्रधानमंत्री मोदी बेयर ग्रिल्स के साथ नए अनुभवों को जीते हुए नजर आने वाले हैं।

इस दौरान प्रधानमंत्री मशहूर शो होस्ट के साथ उनके शो में विशाल प्राकृतिक विविधता और प्रकृति संरक्षण उपायों के बारे में भी चर्चा करेंगे। इसकी जानकारी खुद बेयर ग्रिल्स ने इंटरनैशनल टाइगर्स डे के मौक़े पर ट्वीट के जरिए दी है। उन्होंने अपने ट्वीट में पीएम मोदी के साथ बिताए समय की एक प्रमोशनल वीडियो को भी साझा किया है।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है, “180 देशों के लोग जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनदेखे पहलू से परिचित होंगे। पीएम मोदी बताएँगे कि कैसे भारत में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान और भौगोलिक परिवर्तनों के लिए काम हो रहा है। मैन Vs वाइल्ड में मेरे साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डिस्कवरी पर 12 अगस्त को देखें।”

वैसे को पीएम मोदी परिवेश के हिसाब से खुद को परिस्थितियों में ढाल लेने के लिए पहचाने जाते हैं। लेकिन, बेयर ग्रिल्स द्वारा पोस्ट की गई प्रमोशनल वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अलग ही अंदाज में नजर आ रहे हैं। वे बेयर ग्रिल्स के साथ एक-एक लम्हे को खास अनुभव में बदलने के लिए खुशमिजाजी के साथ चर्चा करते नजर आ रहे हैं।

वे वीडियो में स्पोर्ट्स ड्रेस में हैं और बेयर के साथ नाव से नदी पार करते हुए, जंगल घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। हम देख सकते हैं कि इस वीडियो में प्रधानमंत्री बेयर ग्रिल्स को शिकार और दूसरे कार्यों के लिए जंगल में मौजूदा चीजों से उपकरण बनाते हुए भी देख रहे हैं।

गौरतलब है कि विश्व भर में मशहूर इस शो में दुनिया की जानी-मानी कई हस्तियाँ अभी तक अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुकी हैं। अब इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम शामिल हो गया है। इससे पहले इस शो में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी भाग ले चुके हैं। जहाँ उन्होंने अलास्कन फ्रंटियर पर चढ़ाई करते हुए शो किया था। इसमें ओबामा ने मौसम परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों और वन्य जीवों के संरक्षण पर चर्चा की थी। जिसकी झलक आप नीचे वीडियो में देख सकते हैं।

बिजली बिल माँगने घर पहुँचे लोगों को बाँधकर रखे जनता: झामुमो सांसद

झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष और राजमहल संसदीय क्षेत्र के सांसद विजय हांसदा ने बिजली बिल को लेकर विवादित बयान दिया है। पिछले कुछ दिनों से झामुमो द्वारा झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए संसद में जमकर हंगामा किया जा रहा है। इसी बीच पाकुड़ा परिसदन में ग्रामीणों एवं कार्यकर्ताओ की समस्याँ सुनने पहुँचे विजय हांसदा ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बिजली बिल न दें और यदि कोई बिजली बिल माँगने आए तो उसे बाँध कर बैठा दें।

इस दौरान हांसदा ने कहा कि रघुवर सरकार 24 घंटे बिजली देने का दावा कर रही है और उपभोक्ताओं को नियमित बिजली नही मिल पा रही और बिजली दर में भी बढ़ोत्तरी की गई है। उनका कहना है कि जो सरकार 24 घंटे बिजली नहीं दे सकती, उसे बिजली बिल लेने का भी हक नही है। एक घंटा बिजली लेने और पैसा देने के लिए जनता नहीं बैठी है। अनियमित बिजली आपूर्ति में सुधार की माँग को लेकर सदन और सड़क दोनों जगह झामुमो ने आवाज उठाई, पर सरकार है जो कुछ सुन ही नही रही। अब पब्लिक के पास एक ही रास्ता बच गया है कि जो कोई घर में बिजली बिल का भुगतान माँगने पहुँचे, उसे बाँधकर बैठाया जाए।  

उन्होंने इसके लिए सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि एक घंटा बिजली देने से अच्छा है कि बिजली काट ही देना चाहिए। ग्रामीणों एवं उनके समर्थकों द्वारा लगातार ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में बिजली आपूर्ति सही तरीके से नहीं किए जाने के मामले को उनके समक्ष रखने पर उन्होंने ये बातें कहीं। सांसद हांसदा ने कहा कि लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष दोनो का होना जरूरी है।

गौरतलब है कि, झारखंड विधानसभा में शुक्रवार (जुलाई 26, 2019) को एक बार फिर मुख्य विपक्षी दल ‘झारखंड मुक्ति मोर्चा’ ने झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया था, जिसकी वजह से विधानसभा की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी थी। राज्य विधानसभा की कार्यवाही जैसे ही प्रारंभ हुई, मुख्य विपक्षी झामुमो ने विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सदन के बाहर प्रदर्शन किया और राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार में डूबे होने का आरोप लगाया और इन मामलों की जाँच सदन की समिति से कराने की माँग की।

इस मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई उत्तर न मिलने पर झामुमो सदस्य अध्यक्ष के आसन के समक्ष आ गए और नारेबाजी करने लगे। जिसके बाद मामला शांत न होता देखकर विधानसभाध्यक्ष दिनेश उरांव ने विधानसभा की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी।

बीवी-भतीजे को बनाया अपना स्टाफ: MP के विधायकों के लिए क्लर्क का काम करेंगे सरकारी मास्टर!

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों का तंत्र पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। अब राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की किल्लत और ज्यादा होगी। क्यों? क्योंकि अब वहाँ के अध्यापकों को राज्य के नवनिर्वाचित विधायकों के पर्सनल स्टाफ और क्लर्क के तौर पर नियुक्त किया गया है। सरकारी आँकड़ें बताते हैं कि राज्य के 4500 से ज्यादा स्कूलों में एक भी नियमित शिक्षक नहीं हैं। ऐसे में सभी मानदंडों को दरकिनार करते हुए, उसे ताक पर रखते हुए, जो शिक्षक हैं भी, उन्हें भी दूसरे काम पर लगा दिया गया है।

खबर के मुताबिक, राज्य के 10 नए विधायकों ने अपने स्टाफ में क्लर्क के तौर पर सरकारी स्कूल के शिक्षकों की नियुक्ति की है। बताया जा रहा है कि क्लर्क के रूप में नियुक्त इन शिक्षकों का वेतन भी विधायक ही तय करेंगे। बता दें कि इस शिक्षकों की नियुक्ति विधायक के स्टाफ के तौर पर होने की वजह से अब अनूपपुर जिले के सरकारी स्कूल की प्राथमिक शिक्षिका प्रेमवती सिंह मार्को को स्कूल जाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह अपने पति फुंदलाल सिंह मार्को के साथ क्लर्क के पद पर तैनात हैं, जो कि पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस के विधायक हैं और चूँकि प्रेमवती अपने विधायक पति की क्लर्क की हैं, तो उनका वेतन उनके पति ही तय करेंगे।

इसी तरह, कटनी के बड़वारा से कॉन्ग्रेस विधायक ने अपने चचेरे भाई रघुराज सिंह को अपने पर्सनल स्टाफ रूप में तैनात किया है। हाल ही में नियुक्त किए गए 10 शिक्षकों में से यह सिर्फ दो शिक्षकों की कहानी है, जिन्हें 10 विधायकों के साथ पर्सनल स्टाफ़ के तौर पर काम पर लगाया गया है। इनमें से 9 विधायक कॉन्ग्रेस के हैं जबकि एक बीजेपी के। ये पोस्टिंग उन नियमों का उल्लंघन करते हुए की गई है, जो किसी भी गैर-शिक्षण कार्य के लिए शिक्षकों की तैनाती पर रोक लगाते हैं।

बता दें कि शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के तहत सरकारी शिक्षकों को गैर-शिक्षण कार्यों के लिए नियुक्त किया जाना प्रतिबंधित है। इसको लेकर जनरल ऐडमिनिस्ट्रेटिव डिपार्टमेंट (जीएडी) ने 1995 में एक निर्देश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि कलेक्टर इस बात की जाँच करेंगे कि विधायक द्वारा वांछित क्लर्क मानदंडों के अनुसार हैं या नहीं। 

स्कूल शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश के 2,644 प्राइमरी स्कूल और 1,918 मिडिल स्कूल बिना नियमित शिक्षक के चल रहे हैं। एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बताया कि इन सभी स्कूलों में एक भी नियमित शिक्षक नहीं हैं। यहाँ पर बच्चों की पढ़ाई गेस्ट टीचर से करवाई जाती है। अगस्त 2005 में, जीएडी ने जिला कलेक्टरों को एक पत्र जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि शिक्षकों को विधायकों/सांसदों के क्लर्क के रूप में प्रतिनियुक्त किया जा रहा है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। इसलिए कलेक्टरों को 1995 में इस संबंध में विभाग द्वारा जारी किए गए मानदंडों का पालन करना चाहिए।

शिक्षकों की विधायक के पर्सनल स्टाफ को तौर पर नियुक्ति के बारे में विधायक फुंदलाल सिंह मार्को से पूछा गया कि क्या स्कूलों में शिक्षकों की कमी होने के बावजूद शिक्षकों को गैर-शिक्षण कार्य के लिए नियुक्त करना सही है? तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि ये सही है या नहीं, यह जेनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट से पूछा जाना चाहिए, जिसने पोस्टिंग की थी। जानकारी के मुताबिक, मार्को के अलावा मुरली मोरवाल, दिलीप सिंह गुर्जर, प्रताप ग्रेवाल, बिशु लाल सिंह, कमलेश गौड़ जाटव, बनवारी लाल शर्मा, विजय राघवेन्द्र सिंह, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और भाजपा विधायक लीना जैन को क्लर्क के तौर पर शिक्षक उपलब्ध कराए गए हैं।

जब टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस मामले में जीएडी मंत्री डॉ गोविंद सिंह से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि कुछ मामले ही ऐसे होते हैं, जहाँ अपवाद हो जाते हैं। यहाँ पर दो चीजें हैं, जिनमें से पहली बात ये है कि क्लर्कों की कमी है और दूसरा प्रावधान ये है कि कोई भी शिक्षक किसी विधायक का क्लर्क तभी बन सकता है जब वो इसके लिए अपनी सहमति दे। साथ ही उन्होंने कहा कि जहाँ तक एक विधायक की पत्नी को उनके पर्सनल स्टाफ के रूप में नियुक्त करने का सवाल है, तो ये उनकी संज्ञान में नहीं है। ये नियुक्ति उनके द्वारा नहीं की गई है। हालाँकि, उन्होंने इस पर गौर करने की बात कही।

तुम कोई राजा हो… छोटे-मोटे कर्मचारी… तुम हमारी भीख पर टिके हो: मेनका गाँधी

उत्तरप्रदेश के सुल्तानपुर से भाजपा सांसद मेनका गाँधी एक बार फिर अपने बिगड़े बोल के कारण सुर्खियों में आईं हैं। जानकारी के मुताबिक मेनका सुल्तानपुर दौरे के अंतिम दिन कलेक्ट्रेट में जिले के सभी अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहीं थीं। इस दौरान उन्हें सबसे ज्यादा शिकायतें बिजली विभाग से मिलीं। जिसके बाद उन्होंने इलाके में विद्युत समस्या पर सवाल खड़ा करते हुए बिजली विभाग के एसडीओ को न सिर्फ़ खरी खोटी सुनाई बल्कि उन्हें जमकर ज़लील भी किया और साथ ही कार्यशैली में सुधार लाने की चेतावनी भी दे डाली।

दरअसल, मेनका गाँधी ने इस बैठक में एक गाँव में बिजली व्यवस्था को लेकर की गई शिकायत पर कई सवाल-जवाब किए। उन्होंने कहा उनके पास 4 से 5 हजार शिकायतें आतीं है, जिसमें सबसे ज्यादा शिकायत बिजली विभाग की होती है।

इस दौरान उनका सब्र बिजली विभाग के एसडीओ पर टूट पड़ा और उन्होंने अधिकारी को एक बात पर तो ये तक कह दिया, “तुम कोई राजा हो…छोटे-मोटे कर्मचारी…तुम हमारी भीख पर टिके हो।”

गौरतलब है इस बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और मेनका गाँधी को अपने बिगड़े बोलों के कारण फिर मीडिया के साथ ही सोशल मीडिया पर भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

जय श्री राम न बोलने पर युवक को जिंदा जलाया: मीडिया गिरोह ने खबर के नाम पर फिर परोसा ‘जहर’

उत्तर प्रदेश के चंदौली से आज सुबह एक 17 साल के मुस्लिम बच्चे को जय श्री राम न बोलने पर आग में झोंकने की खबर आई। खबर चलाई किसने – आजतक और इंडिया टुडे ने, वो भी बिना पूरी सच्चाई जाने ही! एक ही मीडिया समूह की दोनों वेबसाइटों पर इसे हेट क्राइम का एँगल दिया गया।

जब हमने इसकी सच्चाई जानने के लिए आगे खबर का फॉलोअप किया तो पता चला कि एएनआई ने इस घटना के संबंध में चंदौली के एसपी का बयान अपने ट्विटर पर ट्वीट किया है, जिसमें वे बताते नजर आ रहे हैं कि पुलिस ने बच्चे के बयानों में विरोधाभास पाया है। उनके मुताबिक एक चश्मदीद के बयान के अनुसार बच्चे को किसी समूह ने नहीं, बल्कि बच्चे ने खुद ही आग लगाई थी। मतलब ये मामला आत्मदाह का प्रतीत होता है।

जानकारी के मुताबिक खालीद नाम का यह बच्चा इस समय काशी के कबीर चौरा अस्पताल में भर्ती है। 45 प्रतिशत झुलसने के कारण उसकी स्थिति गंभीर है। पुलिस का मामले पर कहना है कि बच्चे ने खुद अपने आप को आग लगाई। वो अलग-अलग लोगों को अलग-अलग बयान दे रहा है। जिससे मामले में संदेह वाली स्थिति बनी हुई है। पुलिस के मुताबिक बच्चे को देखकर लग रहा है जैसे उसे किसी ने ये सारी बातें सिखाई हैं, क्योंकि जिस जगह के बारे में बच्चा बता रहा है वहाँ की सीसीटीवी फुटेज में वो कहीं भी नहीं है।

चंदौली के एसपी संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, पीड़ित बच्चे ने दो अलग बयान दिए हैं। पहले नाबालिग ने कहा कि वह महाराजपुर गाँव की ओर जा रहा था कि तभी वहाँ उसे 4 लोग मिले, जो उसे घसीटकर खेत में ले गए और आग लगा दी। उसके बाद उसने कहा घटना छतल गाँव की है, जो महाराजपुर से 1.5-2 किलोमीटर दूर है। बाद में उसे बीएचयू भेजा गया, जहाँ उसने फिर बयान बदला और बताया कि 4 लोग मोटरसाइकल पर आए और उसे अगवा करके हतीजा गाँव ले गए। पुलिस का इन बयानों को दर्ज करने के बाद संदेह इसलिए गहराया क्योंकि ये गाँव अलग-अलग दिशाओं में स्थित हैं।

खैर पुलिस द्वारा मामले की सच्चाई का पर्दाफाश करने के बाद पता चल चुका है कि बच्चा जय श्री राम का नारे वाली बात भी झूठ बोल रहा है, लेकिन सबसे तेज होने की होड़ में ‘इंडिया टुडे’ और उससे जुड़ा ‘आज तक’ जो हड़बड़ी दिखा रहे हैं, वो उनकी विश्वसनीयता पर एक सवालिया निशान है।

इंडिया टुडे ने हेड लाइन तो बदली लेकिन हेटक्राइम को दर्शाता अपना यूआरएल बदलना भूल गया

फिलहाल, इंडिया टुडे की वेबसाइट ने अपनी इस गलती को हेडलाइन का एँगल बदलकर सुधारने की कोशिश की है, लेकिन यूआरएल अब भी वही हेट क्राइम वाला ही है। वहीं आज तक ने भी अपनी हेडिंग से जय श्री राम को हटाकर पाठकों के सामने खुद को सबसे साफ़ दिखाने का प्रयास किया है। लेकिन दुनिया डिजिटल है और लोग मीडिया गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए स्क्रीनशॉट का उपयोग बखूबी करना जान गए हैं।

आजतक द्वारा एक घंटे में बदली गई हेडलाइन का स्क्रीनशॉट

कर्नाटक: येदियुरप्पा ने साबित किया बहुमत, विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने तत्काल प्रभाव से सौंपा इस्तीफा

कर्नाटक में लंबे समय से चल रहे सियासी संकट पर आज विराम लग गया है। कर्नाटक विधानसभा में मुख्यमंत्री येदियुरप्पा सरकार को बहुमत प्राप्त हो गया है। इस दौरान विपक्ष ने मत विभाजन की माँग नहीं की। इसी के साथ सरकार अपने आगे के कामकाज में जुट गई है। राज्य में फ़िलहाल, 207 विधायकों वाली विधानसभा है, जिसमें बहुमत के लिए 104 का आंकड़ा चाहिए था और बीजेपी के पास 105 विधायक हैं।

सदन में मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा कि वो किसी के ख़िलाफ़ बदले की राजनीति के साथ काम नहीं करते हैं, आगे भी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार किसानों के लिए काम करना चाहती है, इसलिए मैं सभी से अपील करता हूँ कि सरकार के विश्वास मत प्रस्ताव का समर्थन करें।”

इससे पहले जेडीएस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सदन में बोलते हुए कहा, “मैं 14 महीने तक सरकार में रहा। मुझे आपके (बीएस येदियुरप्पा) सवालों के जवाब देने की कोई बाध्यता नहीं है। मुझे अपनी अंतरात्मा की आवाज का जवाब देने की जरूरत है। पिछले 14 महीनों से सब कुछ दर्ज किया जा रहा था। लोग जानते हैं कि मैंने क्या काम किया है।”

वहीं, सिद्धरमैया ने कहा, “हमें उम्मीद है कि आप (बीएस येदियुरप्पा) मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है। आप बागियों के साथ हैं, क्या आप एक स्थिर सरकार दे सकते हैं? यह नामुमकिन है, मैं इस अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करता हूँ क्योंकि इसका कारण सरकार का असंवैधानिक और अनैतिक होना है।”

एक और नाटकीय घटनाक्रम में कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष रमेश कुमार ने तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद उन्होंने सदन के सभी सदस्यों और कर्मचारियों का धन्यवाद किया।