Home Blog Page 5671

FaceApp: Privacy के इस नंगे नाच में 15 करोड़ लोगों के चेहरे व डिटेल्स का कोई माई-बाप नहीं

आजकल आपने फेसऐप का नाम ज़रूर सुना होगा। यह एक ऐसा एप्लीकेशन है, जिसके द्वारा आप अपने चेहरे में मनचाहा बदलाव कर ख़ुद को बदले हुए रूप में देख सकते हैं। आप गंजे होंगे तो कैसे दिखेंगे, आप बूढ़े होंगे तो कैसे दिखेंगे- यह ऐप सब कुछ बताता है। सिनेमा सेलेब्स से लेकर क्रिकेट खिलाड़ियों तक, न सिर्फ़ भारत बल्कि विदेश में भी लोग इस ऐप के दीवाने हो रहे हैं। इस एप्लीकेशन को एक रशियन कम्पनी ने डिजाइन किया है। अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ पोर्टल्स में इसे लेकर चिंता ज़ाहिर की जा चुकी है। चिंता का कारण है लोगों की प्राइवेसी। एक ऐसी विदेशी कम्पनी को आपके डिटेल्स मिल रहे हैं, जिसके साथ आपका कोई कागज़ी समझौता नहीं है।

सबसे पहले तथ्य की बात कर लेते हैं। आँकड़ों की मानें तो फेसऐप के पास 15 करोड़ लोगों के चेहरे, नाम व अन्य डिटेल्स हैं। उम्र वाली फ़िल्टर के लिए वायरल हो रहे इस ऐप के यूजर एग्रीमेंट की बात करें तो इसके पास ‘कभी न ख़त्म होने वाला’ और ‘जिसमें बदलाव न हो सके’, ऐसा लाइसेंस है। इस रॉयल्टी-फ्री लाइसेंस के मुताबिक़, यह ऍप्लिकेशन आपके डिटेल्स के साथ कुछ भी कर सकता है, उसका मनचाहा प्रयोग कर सकता है। सबसे बड़ी बात यह कि उससे जो कमाई होगी, आपको उसके रुपए भी नहीं मिलेंगे।

अब आते हैं भारत सरकार के ‘आधार’ की ओर। जब आधार कार्ड को तमाम सरकारी योजनाओं में मैंडेटरी किया गया था ताकि योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचे, तब लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था। ‘हम अपने बायोमेट्रिक डिटेल्स किसी को क्यों दें?’, ‘हमारी पुतलियों का विवरण लेकर सरकार न जाने क्या कर दे’, ‘सरकार को हमारे प्राइवेट डिटेल्स में दिलचस्पी है’, ‘हमारे इन डिटेल्स का ग़लत इस्तेमाल हुआ तो?’ जैसे कई सवाल पूछे गए थे। ये सवाल उन देश की सरकार से पूछे जा रहे थे, जो लगभग 130 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। आधार कार्ड मंत्रियों से लेकर उच्चाधिकारियों तक के बने, लेकिन प्राइवेसी की चिंता कुछेक पत्रकारों व ज़रूरत से ज्यादा जागरूकता दिखाने वाले सेलेब्स को ही हुई।

आज जब फेसऐप इतना वायरल हो रहा है और लोगों को यह तक नहीं पता कि यह किस देश की कम्पनी है, इसके सर्वर कहाँ-कहाँ हैं, इसका मालिकाना हक़ किन-किन लोगों व कंपनियों के पास है और उनके डिटेल्स को लेकर यूजर एग्रीमेंट में क्या लिखा है- सभी कथित सामाजिक कार्यकर्ता गहरी नींद में हैं और सुसुप्त अवस्था में ध्यानमग्न हैं। जैसे ही सरकार जन-कल्याणकारी योजनाओं में ग़रीबों, मजदूरों व किसानों को लाभ पहुँचाने के लिए आधार के उपयोग पर बात करेगी, ये सभी लग जाएँगे। आधार से देश को करोड़ों की बचत हुई है और योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचा है, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हाल में में संसद में अपना आधार कार्ड दिखाते हुए ये बातें समझाई थीं।

फेसऐप का हक़ रखने वाली कम्पनियाँ मेटाडाटा को छाँट कर अलग रख रही हैं। ‘द वर्ज’ के अनुसार, ऐसा कई अन्य सोशल ऐप्स व अन्य ऐप्स भी कर रहे हैं लेकिन फेसऐप का रुख ज्यादा आक्रामक हो सकता है। विशेषज्ञों ने इस ओर ध्यान दिलाया है कि फेसऐप तो डिवाइस में रख कर भी उन फोटोज को फ़िल्टर कर सकता है जिसे यूजर द्वारा चुना गया हो, फिर भी उन फोटोज को सर्वर पर क्यों अपलोड किया जाता है? इसका मतलब है कि कम्पनी उन फोटोज को अपने सर्वर में सुरक्षित रख रही है। फेसऐप का इस बारे में क्या कहना है? कम्पनी का कहना है कि यूजर के निवेदन पर उनसे जुड़ा डाटा हटाया जा सकता है।

कम्पनी का कहना है कि यूजर एक प्रक्रिया के तहत निवेदन कर सकता है कि उससे जुड़े डाटा को हटा दिया जाए। लेकिन साथ ही कम्पनी यह भी कहती है कि अभी टीम ‘ओवरलोडेड’ है। और सबसे बड़ी बात कि साइबर छेड़खानी करने वालों का अड्डा बन चुके रूस के एप्पलीकेशन पर विश्वास करना मुश्किल है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जिस तरह से रूसी साइबर माफियाओं, हैकरों द्वारा छेड़खानी की गई, उससे जुड़े कई मुक़दमें यूएसए की अदालतों में चल रहे हैं और वहाँ की जाँच एजेंसियाँ भी सकते में हैं। कम्पनी ने हालाँकि यह भी दावा किया है कि डाटा को रूस नहीं भेजा जा रहा है।

जबकि ‘टर्म्स एंड कंडीशन’ वाले कॉलम को इस तरह की भाषा में लिखा जाता है कि यूजर बिना समाय गँवाए उसे टिक कर के आगे बढ़ जाए। उसमें साफ़-साफ़ लिखा है कि जहाँ कम्पनी की फैसिलिटी हो वहाँ पर डाटा ट्रांसफर किया जा सकता है। कहाँ पर फैसिलिटी है? रूस में? उस सेक्शन में उनका पता भी रूस वाला ही है। एक और बड़ी बात यह भी है कि अधिकतर मामलों में फेसऐप को यूजर सिर्फ़ एक फोटो की जगह पूरी गैलरी एक्सेस करने की अनुमति दे देते हैं। गैलरी में तो आपके और आपके परिजनों व मित्रों के कई फोटोज होते हैं? इससे फ़र्क़ नहीं भी पड़ता तो आपके बैंक डिटेल्स और आईडी कार्ड जैसी चीजों के स्क्रीनशॉट्स भी तो होते हैं।

अंत में, जो बातें ऊपर हिंदी में लिखी हैं, उसे अंग्रेजी में उसके ओरिजिनल शब्दों में देखिए। फेसऐप के टर्म्स में लिखा है:

आपके यूजर कंटेंट को कहीं भी किसी भी रूप में प्रयोग में लाया जा सकता है

इसीलिए जो चीजें भारतीय कंपनियों के मालिकाना हक़ में है, उससे जुड़े विवाद के लिए आप अदालत जा सकते हैं। लेकिन, विदेशी कंपनियों का मालिकाना हक वाले ऐप्स (जिनका सर्वर भी भारत में नहीं है) से जुड़े विवाद में आप कहाँ जाएँगे? अगर भारत में इसे प्रतिबंधित कर दिया जाए, गूगल इसे प्ले स्टोर से हटा डी- फिर भी यह उपलब्ध रहेंगी और लोग इसे डाउनलोड करने में सक्षम रहेंगे। इसीलिए, कम से कम ‘प्राइवेसी’ वाले टर्म्स ज़रूर पढ़ लें। और हाँ, भारत सरकार के ख़िलाफ़ आधार के विरोध में मोर्चा खोलने वाले लोगों से जरूर पूछें कि फेसऐप को लेकर उनकी चिंता क्या है?

बाकी आधार और फेसऐप में अंतर है। आधार जन-कल्याण के लिए हैं, फेसऐप मनोरंजन के लिए। आधार के डाटा की ज़िम्मेदारी भारत सरकार के पास है जबकि फेसऐप का मालिकाना हक़ रूस की एक प्राइवेट कम्पनी के पास। आधार में आप जब चाहें तब अपने विवरण में बदलाव कर सकते हैं (सही बदलाव), फेसऐप में आपका डाटा के एक बार सर्वर पर जाने के बाद आपको पता ही नहीं चलता कि वह डिलीट हुआ भी या नहीं। आधार से सम्बंधित शिकायतों के निवारण के लिए स्थानीय से लेकर उच्च-न्यायिक स्तर तक कई सुविधाएँ हैं, जबकि फेसऐप के स्तर पर कुछ गड़बड़ियाँ होती हैं तो आप शायद ही कुछ कर सकें। जिस मामले में अमेरिका कुछ न कर पाया हो, उस मामले में आप कहाँ हैं- ख़ुद सोचिए।

15 दिन में 4 गोल्ड मेडल: हिमा दास ने फिर लहराया जीत का परचम, किया देश का नाम रोशन

भारत की स्टार एथलीट हिमा दास का शानदार प्रदर्शन जारी है। उन्होंने पिछले 15 दिन में अपना चौथा गोल्ड मेडल जीतकर अपनी विलक्षण प्रतिभा का प्रदर्शन किया। महिलाओं की 200 मीटर रेस में हिमा ने चेक रिपब्लिक में चल रहे टबोर एथलेटिक्स मीट में बुधवार (17 जुलाई 2019) को एक और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।

आपको बता दें कि 19 साल की हिमा दास ने यह दौड़ मात्र 23.25 सेकंड में पूरी कर ली थी। वहीं, नेशनल रिकॉर्ड होल्डर मोहम्मद अनस ने भी 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल जीता है। उन्होंने 45.40 सेकंड में अपनी रेस पूरी की।

हाल ही में, हिमा दास ने असम में बाढ़ पीड़ितों को अपनी आधी सैलरी डोनेट कर दी थी और साथ ही अन्य सक्षम लोगों से मदद करने की अपील भी की थी। इस जीत के मौक़े पर सोशल मीडिया पर देशवासियों ने उन्हें अपने-अपने शब्दों में बधाईयाँ दीं।

हिमा दास ने इससे पहले तीन गोल्ड मेडल जीते, वो इस प्रकार हैं:

  • पहला गोल्ड मेडल: 2 जुलाई 2019 को हिमा ने पोजनान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में 200 मीटर रेस में हिस्सा लिया था। उन्होंने 23.65 सेकंड में उस रेस को पूरा कर पहला गोल्ड मेडल जीता था।
  • दूसरा गोल्ड मेडल: 7 जुलाई 2019 को पोलैंड में कुटनो एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर रेस को 23.97 सेकंड में पूरा कर दूसरा गोल्ड अपने नाम किया था।
  • तीसरा गोल्ड मेडल: 13 जुलाई को चेक रिपब्लिक में हुई क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स में महिलाओं की 200 मीटर रेस को 23.43 सेकंड में पूरा कर तीसरा गोल्ड मेडल अपने जीता।

Fact Check: जाधव केस में शशि थरूर ने की थी सुषमा स्वराज की मदद?

क्या शशि थरूर ने कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ड्राफ्ट तैयार करने में भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और इस मामले में भारत की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे की मदद की थी? यह प्रश्न आज इस वजह से उठा है, क्योंकि ABP न्यूज़ के एक पत्रकार ने
ऐसा दावा किया है। ABP न्यूज़ के सीनियर कोरेस्पोंडेंट आदेश रावल ने यह बात कही है।

आदेश रावल अपने ट्वीट में लिखते हैं –

दरअसल, ये ट्वीट बुधवार (जुलाई 18, 2019) को कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय को लेकर किया गया था। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस मुहैया कराने के साथ-साथ उनकी फाँसी की सज़ा पर रोक लगा दी है। पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जाधव को मौत की सज़ा सुनाई थी। इंटरनेशनल कोर्ट ने इस निर्णय की समीक्षा करने का भी आदेश दिया।

पत्रकार आदेश रावल ने अपने ट्वीट में लिखा हमें शशि थरूर को भी धन्यवाद देना चाहिए, क्योंकि सुषमा स्वराज के मार्गदर्शन में उन्होंने शुरुआत में जाधव वाले मामले में भारत की तरफ से ड्राफ्ट तैयार किया था। आदेश रावल के मुताबिक़, इंटरनेशनल कोर्ट का जो भारत के पक्ष में निर्णय आया है, उसका क्रेडिट थरूर को भी जाता है। जबकि, यह पूरी तरह ग़लत है। अपने ट्वीट के जरिए आदेश रावल ने झूठ फैलाया है।

आपको बता दें कि इससे पहले भी अप्रैल 2017 में ऐसी ही ख़बर आई थी, जब कहा गया था कि कुलभूषण जाधव को फाँसी की सज़ा दिए जाने के विरोध में भारत द्वारा तैयार प्रस्ताव में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने थरूर की मदद ली थी। जब सुषमा के सामने यह सवाल आया तो उन्होंने इसे मीडिया में प्लांट की गई ख़बर बताया था। उन्होंने कहा था कि ये ख़बर बिलकुल झूठी है और दुष्टतापूर्वक प्लांट की गई है। सुषमा स्वराज ने कहा था:

“भारतीय विदेश मंत्रालय में टैलेंट की कमी नहीं है। मुझे मेरे योग्य व सक्षम सचिवों का सहयोग हर विषय पर मिलता रहता है।”

लेखक साकेत सूर्येश ने एबीपी न्यूज़ के पत्रकार को डाँट पिलाते हुए झूठ न फैलाने की सलाह दी। उन्होंने सुषमा स्वराज के बयान का स्क्रीनशॉट लगाते हुए ट्वीट किया कि एक प्रमुख चैनल के पत्रकार को फेक न्यूज़ नहीं फैलाना चाहिए।

भाई-बहन के साथ डूबा 3 महीने का अर्जुन, तीनों एक ही चिता पर जले, पर साहेब हैं कि मानते नहीं

बिहार पर बाढ़ का कहर टूटने के बाद से ही डूब कर लोगों के मरने की लगातार खबरें आ रही हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे हैं। इन बच्चों में 3 महीने का अर्जुन भी है। मंगलवार को बागमती की उपधारा में अपने भाई-बहन के साथ वह डूब कर मर गया।

अर्जुन के शव निकालने की तस्वीर मुझे मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड के एक स्थानीय पत्रकार ने कल दोपहर में भेजी थी। रात को ऑफिस से घर पहुँचने के बाद जब आँखें मूंदे, दोनों हाथ ऊपर उठाए अर्जुन की तस्वीर देखी तो दहल गया। तब तक यह तस्वीर सोशल मीडिया में भी वायरल हो चुकी थी।

आज जब मुजफ्फरपुर के शिवाईपट्टी थाना के शीतलपट्टी गाँव के अर्जुन, उसके 10 वर्षीय भाई राजकुमार और 12 वर्षीय बहन ज्योति के डूब मरने की कहानी लिखने बैठा हूँ तो शब्द नहीं मिल रहे हैं। लेकिन, ‘सुशासन बाबू’ के अफसरों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सरकार को चौतरफा थू-थू से बचाने के लिए वे एक नई थ्योरी गढ़ने में लग गए हैं।

इसके मुताबिक अर्जुन और उसके भाई-बहन की मौत बाढ़ में डूबने से नहीं हुई, बल्कि उसकी माँ ने बच्चों के साथ आत्महत्या करने की कोशिश की। एनडीटीवी के मुताबिक अर्जुन की माँ रीना देवी के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है।

पति से हुआ विवाद तो पानी में बच्चों को फेंका

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक डीएम ने कहा है,”ग्रामीणों और रीना की 7 साल की बच्ची ने जो बताया उसके मुताबिक रीना देवी का अपने पति के साथ विवाद हुआ था। इसके बाद रीना ने बच्चों को पानी में फेंक दिया था। गाँव वालों ने जब देखा तो उन्होंने बच्चों और रीना देवी को पानी से बाहर निकाला। इस मामले में कोई मुआवजे का ऐलान नहीं किया गया है, क्योंकि यह एक अपराध का मामला है। इसका बाढ़ से कोई लेना-देना नहीं है। इसे हत्या करने का प्रयास माना जा सकता है।”

डीएम के इस दावे की चुगली स्थानीय अखबारों की रिपोर्ट करते हैं। प्रभात खबर ने 17 जुलाई को प्रकाशित रिपोर्ट में बताया है कि रीना देवी अपने चार बच्चों को लेकर मंगलवार की दोपहर नदी किनारे कपड़े धोने गई थी। इसी दौरान नहाते वक्त अपने तीन बच्चों को डूबते देख उन्हें बचाने के लिए अर्जुन के साथ नदी में छलॉंग लगा दी। ग्रामीणों ने रीना और उसकी आठ साल की बेटी राधा को बचा लिया। बाकी तीन के शव बरामद हुए। अर्जुन का शव सबसे आखिर में बरामद हुआ।

आप वीडियो में देख सकते हैं कि मछुआरों ने इन शवों को निकाला।

कहाँ थे गोताखोर?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि बाढ़ से प्रभावित इलाके में जब घंटों बच्चों के शव की तलाश की जा रही थी तो प्रशासन के गोताखोर कहॉं थे? उसका बचाव दल कहॉं था? यदि आप स्थानीय अखबारों पर नजर डालें तो पता चलेगा कि जिनकी डूबने से मौत हुई है, उनमें से ज्यादातर के शव स्थानीय लोगों ने ही अपनी जान जोखिम में डालकर तलाशे हैं। इनमें से कुछ के शव तो 48 घंटे बाद मिले। लेकिन, इसका जवाब देने के लिए कोई अधिकारी तैयार नहीं है। बिहार सरकार के आँकड़ों की ही माने तो 17 जुलाई की शाम छह बजे तक 67 लोगों की बाढ़ में मौत हो चुकी थी।

अर्जुन के पिता थे पंजाब में, फिर पत्नी से कैसे हुआ झगड़ा

प्रभात खबर की रिपोर्ट यह भी बताती है कि घटना के वक्त अर्जुन के पिता पंजाब में थे। घटना की खबर मिलने के बाद उन्होंने घर की ट्रेन पकड़ी। अब ऐसे में सवाल उठता है कि जब वे घर पर ही नहीं थे तो उनका अपनी पत्नी से विवाद कैसे हो गया? खबरों के मुताबिक यह पिता बच्चों की मौत से इतना टूट चुका है कि उनको मुखाग्नि देने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। अंत में तीनों बच्चों को एक ही चिता पर लिटा कर दादी ने अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की।

प्रभावित 47 लाख, राहत शिविर 137

बिहार सरकार बाढ़ से प्रभावित अपनी जनता के लिए कितनी फिक्रमंद है उसका अंदाजा इन आँकड़ों से लगाइए। यह बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग का डाटा है जो उन्होंने खुद अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर रखा है। बाढ़ से 12 जिलों की करीब 47 लाख की आबादी प्रभावित है। लेकिन, इनके लिए अब तक केवल 137 राहत शिविर और 1116 सामुदायिक रसोई ही खोले गए हैं। राहत शिविरों में रहने वालों की संख्या करीब 1.15 लाख है। मधुबनी जिले की करीब 3.5 लाख प्रभावित आबादी के लिए केवल 4 राहत शिविर हैं, तो शिवहर की 1.69 लाख प्रभावित आबादी के लिए केवल 7।

राहत और बचाव के काम में जुटे एमएसयू कार्यकर्ता

एमएसयू जैसे संगठनों के भरोसे राहत कार्य

छह दिन बाद भी राहत और बचाव का काम मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन (एमएसयू), मानव कल्याण केंद्र जैसी संस्थाओं के भरोसे ही है। बाढ़ में खुद की परवाह नहीं करते हुए इन संगठनों के कार्यकर्ता राहत सामग्री लेकर पीड़ितों तक पहुॅंच रहे हैं। एमएसयू प्रभावित इलाकों में सामुदायिक रसोई भी चला रहा है।

सरकार बहादुर देगी छह हजार

सरकार बहादुर ने ऐलान कर दिया है कि पीड़ितों के खाते में छह हजार राहत के पहुॅंच जाएंगे। यह दूसरी बात है कि प्रभावित इलाकों में सैकड़ों ऐसे लोग मिल जाएँगे जिन्हें पिछली राहत भी अब तक नहीं मिली है। क्यूंकि, उनका हक़ नेताओं-अधिकारियों-ठेकेदारों के उसी गिरोह ने हड़प लिया, जो हर साल तटबंधों की मजबूती के नाम पर करीब 600 करोड़ रुपए का बजट डकार जाते हैं।

बाढ़ से बेहाल है असम और ब्रांड एम्बेस्डर प्रियंका चोपड़ा मदद की बजाए सिर्फ़ दुआएँ भेज रही हैं!

असम में इन दिनों बाढ़ के कारण बिहार जैसे हालात हैं। देश के कोने-कोने से लोग अपने सामर्थ्य अनुसार इन दोनों राज्यों में बाढ़ पीड़ितों को मदद पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में एक ओर जहाँ बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने असम बाढ़ पीड़ितों के लिए 2 करोड़ रुपए की मदद की है, वहीं 15 दिन में 4 गोल्ड जीतने वाली हिमा दास ने भी अपनी आधी सैलरी बाढ़ राहत कोष में दान दे दी। लेकिन इस बीच प्रियंका चोपड़ा जैसी सेलेब्रटी जिन्हें असम टूरिज्म ने अपनी ब्रांड एम्बेस्डर चुना, उनकी तरफ से कोई मदद अब तक नहीं आई है।

मीडिया खबरों की मानें तो असम में बाढ़ के कारण अब तक 15 से ज्यादा लोग अपनी जानें गँवा चुके हैं और इस आपदा के कारण इस समय 43 लाख जिंदगियाँ प्रभावित हैं। इतना ही नहीं, इस बाढ़ में काजीरंगा नेशनल पार्क के काफ़ी तादाद में जानवर भी मारे गए हैं, लेकिन फिर भी असम की ब्रांड एम्बेस्डर ने इस पर अब तक मदद के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ाए हैं। हालाँकि, उन्होंने इस मुद्दे पर बात करने/ ट्वीट करने/ पोस्ट करने के अलावा सोशल मीडिया को अपने से जुड़ी अन्य जानकारियाँ देने के लिए खूब उपयोग किया।

इस दौरान प्रियंका ने ट्विटर पर अपने फोटो शूट की तस्वीरें अपलोड की, मैग्जीन में कवर पेज बनने पर थैंक यू कहा।

वैकेशन की छुट्टियों पर पति द्वारा खींची तस्वीरें शेयर की और दुती चंद को उनकी जीत के लिए शुभकामनाएँ भी दीं।

उन्होनें इस बीच अपने एक मेकओवर की वीडियो शेयर की और बताया कि वह 10 जून को लॉस एजेंल्स में बतौर ब्यूटीकॉन की अम्बेस्डर के रूप में आ रही हैं। जिसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें आड़े हाथों ले लिया। इस वीडियो को शेयर करने के बाद लोग उन पर सवाल उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि शायद वो भूल गई हैं कि वो असम टूरिज्म की ब्रांड एम्बेस्डर भी हैं। राज्य के प्रति उनकी चिंता कहाँ है?

13 तारीख को प्रियंका के इस पोस्ट के बाद लोगों की तीखी प्रतिक्रिया आई और असम की ब्रांड एम्बेस्डर को राज्य के लिए आखिरकार 16 जुलाई को एक ट्वीट लिखना पड़ा। लेकिन इस ट्वीट में भी उन्होंने केवल असम बाढ़ प्रभावित लोगों को ऐसा संदेश लिखा, जिसे पढ़कर सोशल मीडिया पर यूजर्स का गुस्सा भड़क उठा और उनकी पोस्ट पर लोग अपनी नाराजगी जताने लगे।

दरअसल, उन्होंने राज्य की ब्रांड एम्बैसडर होने के बावजूद पीड़ितों की मदद की बजाए, ट्विटर पर प्रार्थना संदेश के साथ लोगों को एक लिंक दिया और अनुरोध किया कि लोग प्रभावित लोगों की मदद के लिए वहाँ (लिंक पर) डोनेट करें।

इसे देखकर यूजर्स उन पर भड़के और उनसे कहा, “आप भूल रही हैं कि आप असम की ब्रांड एम्बेसडर हैं। बाढ़ प्रभावितों के लिए लोगों से मदद की गुहार वाला आपका ये ट्वीट बेहद शर्मनाक है। हमें ऐसे ब्रांड एम्बेस्डर नहीं चाहिए। बिलकुल निराशाजनक।”

उनके इस ट्वीट पर किसी ने उन्हें बताया कि उन लोगों को इन डोनेशन लिंक के बारे में पहले से पता है, लेकिन वो ये बताएँ कि उन्होंने बतौर ब्रांड एम्बेस्डर असम के लोगों के लिए कितने रुपए डोनेट किए?

तो किसी ने उनकी यूएस के बीच पर खींची गई तस्वीरों को आधार बनाकर उनके ऊपर तंज कसा। यूजर ने प्रियंका से पूछा, “सच में…!! आप जिंदा हैं..? हमें लगा आप यूएस के बीच पर अपनी छुट्टियों का आनंद ले रही हैं।”

कुछ लोग सोशल मीडिया पर प्रियंका के समर्थन में भी आए और कहा कि प्रियंका पर सवाल उठाने वाले लोग नहीं जानते कि वो देश में नहीं हैं। उन्होंने असम के लिए बहुत किया और उन पर ऐसे सवाल नहीं उठाने चाहिए।

यहाँ सोचने वाली बात है कि आज जब राज्य इतनी बड़ी आपदा से ग्रस्त है और लाखों लोग उससे प्रभावित हैं तो फिर क्या ऐसे में असम टूरिज्म की ब्रांड एम्बेस्डर होने के नाते वाकई प्रियंका को सिर्फ़ प्रार्थना संदेश के साथ लोगों को दान के लिए लिंक शेयर करना चाहिए? या फिर खुद बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के लिए मदद पहुँचानी चाहिए जैसे अक्षय कुमार और हिमा दास ने किया।

गाँजा कारोबारी विक्की खान ने अपने गुंडों के साथ किया पुलिस पर हमला, MP में लूटे हथियार

मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था दिन पर दिन चरमराती जा रही है। हालत ये हो गई है कि अब वहाँ अपराधी पुलिसकर्मियों पर भी हमला करने से नहीं चूक रहे। हालिया मामला सतना जिले का है। जहाँ कुछ बदमाशों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया और उनके हथियार लेकर फरार हो गए। हमले में 2 पुलिस वालों को चोटें भी आई हैं, जिसके कारण उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

खबरों के अनुसार, ये बदमाश सतना जिले के कोलगाँव थाना क्षेत्र में ट्रक चालकों से वसूली कर रहे थे, तभी ट्रक ड्राइवरों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस वहाँ पहुँची तो पुलिस और बदमाशों के बीच झड़प हो गई और अपराधियों ने पुलिस वालों पर हमला कर दिया।

हमले में शामिल 7 अपराधी इस दौरान पुलिसकर्मियों से उनके हथियार, वायरलेस सेट समेत अन्य सामान लूटकर फरार हो गए। पुलिस वालों पर हुए इस हमले के बाद पूरे शहर में हड़कंप मचा हुआ है। हमले में दो पुलिस वालों (संदीप नामदेव और मनोज सिंह) के घायल होने की खबर है।

एसपी ने मामले पर एक्शन लेते हुए पूरे शहर में नाकाबंदी कर दी है। घटनास्थल पर आला अधिकारियों ने पहुँचकर घायल जवानों को बिरला अस्पताल में भर्ती करवाया। वरिष्ठ डॉक्टरों की मौजूदगी में घायल पुलिस वालों को उपचार दिया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक मनोज सिंह की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिस कारण उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है।

इन अपराधियों की संख्या अभी तक 7 बताई जा रही है, जिसमें एक का नाम विक्की खान है। विक्की के बारे में बता दें कि वह शातिर बदमाश होने के साथ-साथ गाँजे का भी कारोबारी है। उसके और उसके साथियों की तलाश में पुलिस जगह-जगह छापेमारी कर रही है।

विक्की खान (तस्वीर साभार:सतना पत्रिका का फेसबुक पेज)

Pak ने माँगे 50000 AK राइफल्स तो रूस ने दिखाया ठेंगा, भारत ने ली राहत की साँस

रूस ने पाकिस्तान द्वारा कलाश्निकोव राइफलों की माँग ठुकरा दी है। पाकिस्तान ने इन राइफलों की ख़रीद के लिए रूस से निवेदन किया था, जिसे नकार दिया गया है। नए जनरेशन की इन कलाश्निकोव राइफल्स (जिन्हें AK भी कहा जाता है) अब पाकिस्तान को रूस से नहीं मिलेंगी। साथ ही रूस ने भारत को आश्वस्त किया है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का रक्षा व्यापार नहीं किया जाएगा। ‘द प्रिंट’ ने रक्षा विभाग के सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारत को इस विषय में इस वर्ष की शुरुआत में ही सूचित कर दिया गया था।

पाकिस्तान ने एके सीरीज की 50,000 राइफल्स ख़रीदने के लिए रूस के पास प्रस्ताव भेजा था। पाकिस्तान इस क़दम के द्वारा रूस के साथ सैन्य संबंधों को मजबूत करना चाहता था। हालाँकि, पाकिस्तान ने राइफल के किन मॉडल्स की माँग की थी, यह स्पष्ट नहीं है। पाकिस्तान के इस क़दम से भारत को भी हैरानी हुई थी क्योंकि पाकिस्तानी सेना सामान्यतः चीन निर्मित एके-56 राइफल का ही प्रयोग करती है।

चीन निर्मित एके-56 राइफल्स एके-47 का चाइनीज वर्जन है। यह वजन में एके-47 से हल्का होता है। जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के पास से ऐसे कई एके-56 राइफल्स जब्त किए जा चुके हैं। रूस को इस बात की भी चिंता थी कि पाकिस्तान को दिए जाने वाले हथियार आतंकियों के हाथ लग सकते हैं। भारत ने भी रूस के समक्ष इस चिंता को रखा था, जिस पर रूस की तरफ से पाकिस्तान के साथ सैन्य व्यापार न करने का आश्वासन आया।

भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियाँ इस बात पर कड़ी नज़र रखी है कि पाकिस्तान द्वारा रूस के साथ सैन्य व रक्षा समझौतों के प्रयासों की दिशा में क्या प्रगति हो रही है? पाकिस्तान के ऐसे कई प्रयासों को भारतीय एजेंसियाँ रोक चुकी हैं। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने रूस से उन्नत एयर डिफेंस तकनीक ख़रीदने का भी प्रयास किया था। 2015 में पाकिस्तान ने रूस से 4 Mi-35M हैलीकॉप्टर ख़रीदे थे, जो डिलीवर किए जा चुके हैं। 2016 में दोनों देशों की सेनाओं ने संयुक्त युद्धाभ्यास भी किया था। भारत इस घटनाक्रम पर पूरी नज़र रखी हुई थी।

बछड़े से लेकर गर्भवती बकरी तक का रेप करने वाला अज़हर, ज़फर और छोटे ख़ान: लिस्ट लंबी है

एक ख़बर आई है कि मंगलौर में मोहम्मद अंसारी नाम के एक शख्स को खेत में गाय के साथ अप्राकृतिक सेक्स करते हुए ग्रामीणों द्वारा देखा गया। ग्रामीणों के मुताबिक अंसारी ने पहले गाय के पाँवों को रस्सी से बाँधा और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। गुस्साए गाँव वालों ने अंसारी से गाय के पाँव छूकर माफी माँगने को कहा, लेकिन जैसे ही अंसारी वहाँ पहुँचा, गाय उसे देखकर डर गई और वहाँ से भाग गई।

गौर करने लायक है कि अंसारी को रंगे हाथों पकड़ने के बाद जब गाँव के लोग उससे पूछताछ कर रहे थे तो उसकी कमीज की जेब से नारियल तेल की बोतल भी मिली, जिसे उसने दुष्कर्म को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया था। साथ ही जब वह पकड़ा गया, तब उसकी कमीज पर गोबर के भी निशान थे। लेकिन, क्या आपको पता है कि पशुओं के साथ बर्बरता दिखाने का यह पहला मामला नहीं है बल्कि पिछले साल से लेकर अब तक ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें पशुओं के साथ यौन बर्बरता दिखाई गई और आरोपित मुस्लिम समुदाय से आने वाले लोग रहे।

सबसे पहले बात करते हैं जुलाई 2018 में हरियाणा के मेवात में घटी घटना की। उस समय एक गर्भवती बकरी का इस दरिंदगी से बलात्कार किया गया कि उस निरीह पशु की मौत हो गई। हारून और जफ़र सहित कुल 8 लोगों ने मिल कर उस बकरी का गैंगरेप किया था। बकरी के मरने की वजह उसके प्राइवेट पार्ट्स में अत्यधिक ब्लीडिंग और शॉक को बताया गया।

अक्टूबर 2018 में बागपत के तिलवाड़ा गाँव में एक बछड़े के साथ बलात्कार किए जाने की घटना सामने आई थी। बछड़े की मौत के बाद पुलिस ने आईपीसी 377 (अप्राकृतिक संबंध) और 429 (जानवर के साथ क्रूरता) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी। मुस्लिम समुदाय से आने वाला आरोपित नाबालिग था। बछड़े को इस बर्बरता के कारण कई आंतरिक घाव हो गए थे, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद गाँव में भी तनाव का माहौल व्याप्त हो गया था।

अगस्त 2018 में एक मामला मध्य प्रदेश के राजगढ़ से भी आया था। छोटे ख़ान नामक व्यक्ति एक गाय का बलात्कार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। उसकी गिरफ़्तारी के बाद उसके परिवार वालों ने एसपी से मिल कर आरोप लगाया कि संपत्ति विवाद के कारण ख़ान को फँसाया जा रहा है। यह बहस का मुद्दा है कि जिस भी समाज में इस तरह की घटनाएँ हो रही हैं, वहाँ लोगों को, खासकर युवाओं को किस तरह की शिक्षाएँ दी जा रही हैं? जिस समाजिक परिवेश में व्यक्ति रहता है या अपना अधिकतर समय गुजारता है, उसकी हरकतें भी उसी अनुरूप हो जाती हैं।

ऊपर के तीन उदाहरण सिर्फ 2018 से हैं। ऐसा कुछ 2017 में भी हुआ होगा, 2016 में भी। मानसिकता साल और महीने नहीं देखती। ऐसे लोग घृणित सोच के होते हैं और इन्हें जो करना होता है, वो करते हैं। बेटियों-बच्चियों को बुरी नजर से बचाते-बचाते अब लोगों को अपने पशु-मवेशियों को भी बचाना होगा।

गालीबाज एक्टर एजाज़ ख़ान गिरफ़्तार, Tik-Tok पर बनाया था भड़काऊ व सांप्रदायिक वीडियो

सांप्रदायिक और विवादस्पद वीडियो बनाने के मामले में मुंबई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अभिनेता एजाज खान को गिरफ्तार कर लिया है। अभिनेता एजाज ख़ान ने टिक-टॉक ऐप पर भड़काऊ वीडियो बना कर पोस्ट किया था। एजाज ख़ान ने हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा की बात की थी और सोशल मीडिया पर वह भड़काऊ और विवादास्पत पोस्ट्स के लिए कुख्यात हैं। मुंबई पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की थी। एजाज ख़ान को अब अदालत में पेश किया जाएगा।

एजाज ख़ान ने उसी TikTok ‘सेलिब्रिटी’ के साथ यह विवादस्पद वीडियो बनाया था जिसके खिलाफ तबरेज़ अंसारी की मौत के बदले में हिंसा भड़काने के आह्वान को लेकर FIR दर्ज की गई थी। एजाज़ खान की TikTok प्रोफाइल पर शेयर किए गए इस वीडियो में वह मुंबई पुलिस का मज़ाक उड़ाते नज़र आए थे। इसमें उनके साथ Team07 का एक सदस्य भी नज़र आया था। डायलॉग में जब पुलिस अफसर का किरदार कुछ अपराधियों को पुलिस की गाड़ी में बैठने को कहता है तो अपराधियों में से एक पुलिस वाले पर धौंस जमाता है।


एजाज़ खान के विवादस्पद वीडियो का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी वह पायल रोहतगी को खरी-खोटी सुनाने में सारी दुनिया के एक दिन मुस्लिम बनने की बात कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने एक दूसरे वीडियो में 40 करोड़ वैध-अवैध समुदाय विशेष के लोगों के सड़क पर उतर कर समूचे देश को बंद कर देने की बात भी कही थी।

देश छोड़ भागने की फिराक में था दाऊद इब्राहिम का भतीजा, मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के भतीजे रिजवान कासकर को मुंबई पुलिस ने बुधवार की रात गिरफ्तार किया। वह दाउद के छोटे भाई इकबाल कासकर का बेटा है। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किए गए रिजवान को ठाणे जेल में रखा गया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रिजवान को फिरौती माँगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वह देश छोड़कर भागने की ​फिराक में था।

क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दो दिन पहले अहमद रजा वडारिया को गिरफ्तार किया गया था। वह दाऊद के गुर्गे फहीम मचमच का करीबी है। अधिकारी ने बताया, “उससे पूछताछ के दौरान रिजवान कासकर का नाम सामने आया। उसे देश छोड़कर भागने की कोशिश करते हुए मुंबई एयरपोर्ट से पकड़ा गया।”

इससे एक दिन पहले ही मुंबई पुलिस ने छोटा शकील के करीबी सहयोगी को पकड़ा था।