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मायावती के भाई की ₹400 करोड़ की संपत्ति जब्त: क्लर्क से ₹1316 करोड़ के मालिक बनने की कहानी

मायावती के परिवार के ख़िलाफ़ चल रहे बेनामी संपत्ति के मामलों में आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार (जुलाई 18, 2019) को आयकर विभाग ने बसपा सुप्रीमो के भाई व भाभी के एक क़ीमती प्लॉट को जब्त किया है, जिससे मायावती की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस प्लॉट की क़ीमत 400 करोड़ रुपए से अभी अधिक बताई जा रही है। नोएडा में स्थित ये प्लॉट 7 एकड़ का है। इसे जब्त करने का आदेश मंगलवार (जुलाई 16, 2019) को ही जारी किया जा चुका है।

मायावती के भाई आनंद कुमार और भाभी विचित्र लता के ख़िलाफ़ पहले से ही कई मामले चल रहे हैं। मायवती के भतीजे को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कई मंचों पर बसपा की तरफ से अहम भूमिका में देखा गया, जिसके बाद यह कयास लगने शुरू हो गए थे कि बसपा में उन्हें भविष्य में और बड़ी भूमिका दी जा सकती है। मायवती ने हाल ही में अपने भाई आनंद कुमार को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया था और भतीजे आकाश को नेशनल कोऑर्डिनेटर।

कभी नोएडा प्राधिकरण में क्लर्क के पद पर कार्यरत रहे आनंद कुमार की संपत्ति तब से अचानक बढ़नी शुरू हो गई, जब मायावती ने सत्ता संभाली। आनंद कुमार पर फ़र्ज़ी कम्पनियाँ बना कर करोड़ों रुपए के लोन लेने का भी आरोप है। 2007 में जब मायावती ने अपनी पार्टी को मिली पूर्ण बहुमत के बाद सत्ता संभाली, उसके बाद उनके भाई आनंद ने एक के बाद एक कुल 49 नई कम्पनियाँ खोलीं। 2014 में उनकी संपत्ति 1316 करोड़ रुपए आँकी गई थी।

इतना ही नहीं, आनंद पर रियल एस्टेट में निवेश कर करोड़ों का अवैध मुनाफा कमाने का भी आरोप है। इस मामले में इनकम टैक्स विभाग और प्रवर्तन निदेशालय, दोनों सरकारी एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं। उनके घर एवं दफ्तरों पर कई बार छापे पड़ चुके हैं। नोटबंदी के दौरान भी उनके बैंक खाते में धोखाधड़ी की बातें सामने आई थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भविष्य में आनंद कुमार की कई अन्य सम्पत्तियों को भी जब्त किया जा सकता है।

कुल मिला कर देखें तो मायावती के भाई की संपत्ति में 2007 से लेकर 2014 तक 7 वर्षों में 18,000% की वृद्धि दर्ज की गई। तमाम आरोपों के बावजूद मायावती द्वारा आनंद कुमार को पार्टी में अहम पद देना चर्चित विषय बना हुआ है।

गाँजा फूँक कर की हत्या, लगाए अल्लाहु अकबर के नारे, फिर भी जज ने नहीं माना दोषी

अल्लाहु अकबर के नारे लगाकर एक यहूदी महिला की हत्या करने वाले मुस्लिम पर मुकदमा नहीं चलेगा। फ्रांस के एक जज ने कहा है कि हत्या के वक्त आरोपित गाँजे के नशे में था, इसलिए उसे अपराध का जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

65 साल की सारा हलीमी की हत्या 3 अप्रैल 2017 को उनके फ्लैट में घुसकर 29 साल के कोबिली त्राउरे ने कर दी थी। कथित तौर पर महिला को तीसरी मंजिल स्थित फ्लैट की खिड़की से नीचे फेंकने से पहले उसने कुरान की आयतें पढ़ीं थी और हलीमी को “शैतान” कहा था। हत्या करने के बाद वह चिल्ला रहा था,”मैंने शैतान को मार दिया।”

हत्या को अंजाम देने से पहले उसने करीब एक घंटे तक सारा को फ्लैट में बंधक बना रखा था और इस दौरान पुलिस दरवाजे पर खड़ी होकर उसे समझाने की कोशिश कर रही थी। हत्या के बाद उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया था।

लेकिन, फ्रांसीसी न्यायिक व्यवस्था में जज ऑफ इन्क्वायरी को यह फैसला करना होता है कि आरोपी पर अभियोग चलाया जा सकता है या नहीं। जज ऑफ इन्क्वायरी के फैसले को यहूदियों के संगठन सीआरआइएफ के अध्यक्ष फ्रांसिस खालिफत ने आश्चर्यजनक और अनुचित बताया है। उन्होंने बताया कि आरोपी के खिलाफ अभियोग चलाने के लिए वे अपील करेंगे।

ताजा फैसले के बाद त्राउरे को मानसिक उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है या ड्रग रिहैबिलेटेशन प्रोग्राम में शामिल किया जा सकता है या फिर उसे रिहा कर दिया जाएगा।

इस मामले में अभियोग चलाने में हो रही देरी को लेकर यहूदी संगठनों ने कई बार प्रदर्शन भी किया था। उनका आरोप था कि त्राउरे को अभियोग से बचाने के लिए मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है।

मई में फ्रांस के पूर्व पुलिस कमिश्नर और फ्रांस ब्यूरो ऑफ विजिलेंस के संस्थापक सैमी गोजलान ने कहा था कि जिस तरीके से सारा मामले की जांच की जा रही है, उससे लगता है कि फ्रांस में यहूदियों के खिलाफ होने वाले अपराधों से सही तरीके से नहीं निबटा जा रहा।

सारा की बेटी ने बताया कि उनकी मॉं की हत्या करने से दो साल पहले त्राउरे ने उसे “नीच यहूदी” कहा था।

गाय के पैर बाँध मो. अंसारी ने किया दुष्कर्म, नारियल तेल के साथ गाँव वालों ने रंगे हाथ पकड़ा: देखें Video

मंगलौर से गाय के साथ दुष्कर्म का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। मंगलौर मिरर की खबर के मुताबिक यहाँ मोहम्मद अंसारी नाम के एक शख्स को खेत में गाय के साथ अप्राकृतिक सेक्स करते हुए ग्रामीणों द्वारा देखा गया। ग्रामीणों के मुताबिक अंसारी ने पहले गाय के पाँवों को रस्सी से बाँधा और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया।

अंसारी को रंगे हाथों पकड़ने के बाद जब गाँव के लोग उससे पूछताछ कर रहे थे तो उसकी कमीज की जेब से नारियल तेल की बोतल भी मिली, जिसे उसने दुष्कर्म को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया था। साथ ही जब वह पकड़ा गया, तब उसकी कमीज पर गोबर के भी निशान थे।

बता दें कि इस पूरी घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें स्पष्ट देखा जा सकता है कि मूलत: झारखंड का रहने वाला अंसारी किस बेशर्मी के साथ अपने कुकर्म को स्वीकार रहा है। इस वीडियो में गाँव वाले अंसारी से कहते नजर आ रहे हैं, “हम गाय को अपनी माँ की तरह पूजते हैं और तुम उसके साथ सेक्स कर रहे हो।”

इस वीडियो में गाँव वाले उससे पूछते हैं कि वो यहाँ कितनी बार आया है, जिसके जवाब में वह ‘एक बार आया हूँ’ कहता है। ग्रामीण उससे पूछते हैं कि क्या तुम ये सब अपनी बहन के साथ भी करते हो?

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि अंसारी पहले गाँव वालों से माफ़ी माँगता है और फिर उनकी सख्ती देखकर रोने लगता है।

इसके बाद गुस्साए गाँव वालों ने अंसारी से गाय के पाँव छूकर माफी माँगने को कहा, लेकिन जैसे ही अंसारी वहाँ पहुँचा, गाय उसे देखकर डर गई और वहाँ से भाग गई। गाय की व्यथा देखकर गाँव वाले मोहम्मद अंसारी पर भड़के और उससे बोले, “ये भाग रही है क्योंकि ये तुमसे डर गई है। देखो, तुमने क्या किया कि बेचारा जानवर भी भाग रहा है, उसे लग रहा है कि तुम वही सब करने दोबारा आए हो।”

कावोर पुलिस ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया है कि जिस समय अंसारी दुष्कर्म को अंजाम दे रहा था उस समय गाँव वालों ने उसे रंगे हाथों पकड़ा। पुलिस ने उसके ख़िलाफ़ मामले को दर्ज कर लिया है।

गौरतलब है कि किसी गाय के साथ दुष्कर्म करने का ये पहला मामला नहीं है। आए दिन पशुओं पर दिखाई जाने वाली ऐसी बर्बता की खबरें हमें सुनने को मिलती रहती हैं। कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश में छोटू खान ने गाय के साथ दुष्कर्म किया था।

हनुमान चालीसा पाठ में शामिल हुईं इशरत जहां: घर खाली करने और जान से मारने की मिली धमकी

सामूहिक हनुमान चालीसा में शामिल होने पर ट्रिपल तलाक़ की याचिकाकर्ता इशरत जहां को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ़ उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है तो दूसरी तरफ उनके मकान मालिक मनाजीर हुसैन ने उन्हें घर खाली करने का फ़रमान सुना दिया है। पश्चिम बंगाल के हावड़ा में इशरत जहां किराए के घर में रहती हैं।

दरअसल, इशरत जहां मंगलवार (16 जुलाई 2019) को डबसन रोड स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर में पाठ में शामिल हुईं थी। इसके अगले ही दिन यानी बुधवार (17 जुलाई 2019) को दोपहर के समय उनके घर के बाहर भीड़ जमा हो गई। उनके ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की और घर छोड़ने को कहा। उनके मुस्लिम पड़ोसियों ने इशरत के बुरखा (हिजाब) पहनकर हनुमान चालीसा के पाठ में शामिल होने पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि तुम्हें हनुमान चालीसा के पाठ में शामिल होने की क्या ज़रूरत थी? इससे हमारे मुस्लिम समाज की बदनामी हो रही है। इस घटना से इशरत काफ़ी डरी हुई हैं और अपनी सुरक्षा को लेकर काफ़ी चिंतित हैं।

जब भीड़ इशरत के घर पर हंगामा कर रही थी तो हालात इतने गंभीर हो गए थे कि उन्हें पुलिस-प्रशासन की मदद माँगनी पड़ गई थी। उनकी शिक़ायत के आधार पर FIR दर्ज हो गई है। गोलाबाड़ी पुलिस स्टेशन में दायर इशरत की शिक़ायत के अनुसार, बुधवार को जब वह अपने बच्चे के स्कूल से घर लौट रही थीं, तो नंद घोष रोड पर मुस्तफा अंसारी और उनके मकान मालिक मनजिर हुसैन के साथ सौ से अधिक लोगों ने उन्हें बीच रास्ते में रोका। इशरत ने आरोप लगाया कि अंसारी और उनके मकान मालिक हुसैन के नेतृत्व में भीड़ ने उन पर उंगली उठाई और उन्हें हनुमान चालीसा कार्यक्रम में भाग लेने पर धमकी दी। उन्होंने घर खाली करने और इलाक़े को छोड़ने के लिए भी कहा।

इशरत ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह एक धर्मनिरपेक्ष देश की नागरिक हैं और उन्हें किसी भी धर्म को निभाने और कहीं भी जाने की पूरी आज़ादी है। उन्होंने बताया कि उन्हें ट्रिपल तलाक़ मामले में याचिकाकर्ता बनने के बाद से ही जान से मारने की धमकी मिल रही है।

इशरत के अनुसार, “हर कोई कह रहा था कि मुझे खुद घर छोड़ देना चाहिए वर्ना वे मुझे घर से ज़बर्दस्ती बेदखल कर देंगे। मुझे जान से मारने की धमकियाँ भी मिल रही हैं। मैं सुरक्षा की माँग करती हूँ। मैं अपने बेटे के साथ अकेले रहती हूँ ऐसे में मेरे साथ कभी भी कुछ भी हो सकता है।”

ग़ौरतलब है कि पश्चिम बंगाल हावड़ा की रहने वाली इशरत जहां को उनके शौहर ने तीन तलाक़ दे दिया था। इसके बाद से ही उन्होंने तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ लड़ाई शुरू कर दी थी। इससे नाराज़ ससुरालियों और कट्टरपंथियों ने उन्हें सरेआम बहुत अपमानित किया। इस वजह से कट्टरपंथी तबका उन्हें उस इलाक़े से बाहर करने में लगा हुआ है।

इशरत जहां ने प्रशासन से सुरक्षा के साथ-साथ अपने रहने के लिए उचित व्यवस्था की माँग की है। बता दें कि इशरत जहां सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाली उन पाँच याचिकाकर्ताओं में से एक हैं, जिनकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक़ को असंवैधानिक करार दिया था।

आजम खान ने एक-एक इंच जमीन खरीदी है तो दिखाएँ कागज वरना गिरफ्तार हों: अब्दुल सलाम

समाजवादी पार्टी से रामपुर के सांसद आजम खान और पूर्व सीओ आलेहसन पर किसानों की जमीन कब्जाने के आरोप में पुलिस ने बुधवार (जुलाई 17, 2019) को एक साथ 8 मामले दर्ज किए। जानकारी के मुताबिक अभी तक जमीन हड़पने के मामले में इन दोनों पर कुल 13 मामले दर्ज हो चुके हैं।

दरअसल, ये मामला मझरा आलियागंज ग्राम का है। यहाँ गाँव वालों ने अजीमनगर थाने में शिकायत दर्ज करवाते हुए आजम खान पर आरोप लगाया है कि उन्होंने समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान जमीन का बैनामा कराने का उन पर दबाव बनाया और जब गाँव वालों ने ऐसा नहीं किया तो तत्कालीन सीओ आलेहसन ने उन्हें अजीमनगर थाने में बंद कर दिया। इतना ही नहीं गाँव वालों को स्मैक रखने के केस में जेल भेजने की धमकी भी दी गई।

बाद में उनकी जमीनों को जौहर यूनिवर्सिटी में मिला लिया गया और इसकी चार दिवारी करवा दी गई। गाँव वालों ने जब अपनी जमीने वापस माँगने का प्रयास किया तो उन्हें डरा धमका कर भगा दिया गया।

जमीन मिलने की आस न दिखने पर ग्रामीणों ने मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की माँग की। अमर उजाला की खबर के मुताबिक पुलिस ने हनीफ, मतलूब, नब्बू, जुम्मा, नासिर, नाजिम, मुस्तकीम, शरीफ की तहरीर के आधार सांसद आजम खान और पूर्व सीओ आलेहसन के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 384, 447, 506 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। और फिलहाल अभी पुलिस अपनी जाँच में जुटी है। पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा की मानें तो इस संबंध में पुलिस जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आजतक के मुताबिक पुलिस अधीक्षक ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि रामपुर के थाना अजीम नगर में आजम खान और उनके सहयोगी आलेहसन के खिलाफ जमीन हड़पने के आरोपों में किसानों की तहरीरों के आधार पर अब तक कुल 13 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। जिनमें किसानों के साथ मारपीट और जबरन धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

खबर के अनुसार पुलिस अधीक्षक का कहना है कि आजम खान और आलेहसन ने किसानों की जमीन को अवैध तरीके से लिया और उन पर कई हजार हेक्टेयर जमीन हासिल करने के लिए जाली कागजात पर साइन करने का दबाव डाला। जब किसानों से ऐसा करने से इनकार किया तो जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया। फिलहाल पुलिस टीम आरोपों की जाँच कर रही है, जिसके बाद इसमें अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि इस मामले पर जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलाम ने भी किसानों की जमीन कब्जाने के आरोप में सांसद आजम खां और पूर्व सीओ आलेहसन को गिरफ्तार किए जाने की माँग की है। उन्होंने मंगलवार (जुलाई 16, 2019) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि आजम खान की ओर से दावा किया जाता है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी की एक-एक इंच जमीन खरीदी है तो इसकी रजिस्ट्री क्यों नहीं दिखा रहे हैं। सलाम का कहना है कि आजम सरकार और जिला प्रशासन को वह रजिस्ट्री के कागजात दिखाएँ और अगर रजिस्ट्री नहीं है तो जमीन पर से कब्जा छोड़ें।

TMC नेता द्वारा राम कथा आयोजन से पार्टी हैरान-परेशान, BJP ने की तारीफ़

पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान के बीच ‘जय श्री राम’ का नारा आए दिन सुर्ख़ियों में बना रहता है। ऐसे में अगर यह ख़बर सामने आए कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता राम कथा का आयोजन करा रहे हैं, तो भला किसे अश्चर्य नहीं होगा। ‘जय श्री राम’ के नारे पर लगातार बढ़ता विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच TMC नेता मदन मित्रा ने आगामी 24 जुलाई को राम कथा का आयोजन कराने का निर्णय लिया है।

एक तरफ़ राम कथा के आयोजन की इस ख़बर से ख़ुश बीजेपी ने इस क़दम की तारीफ़ की है, तो वहीं दूसरी तरफ़ मित्रा के इस आयोजन पर तृणमूल हैरान-परेशान है। ख़बर के अनुसार, TMC नेता मदन मित्रा अपने गृहक्षेत्र भोवनीपुर में न केवल पूजा-पाठ करवाएँगे, बल्कि दुर्गा पूजा के दौरान देवी दुर्गा के साथ भगवान श्री राम और देवी सीता की मूर्ति भी स्थापित करवाएँगे। मित्रा का कहना है कि वो यह सब किसी राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक भारतीय नागरिक होने के नाते करवा रहे हैं।

मित्रा के अनुसार, “हमारे संविधान की प्रस्तावना धर्मनिरपेक्षता के बारे में बात करती है। उन्होंने (बीजेपी ने) भगवान राम को एक वस्तु के रूप में घटा दिया है, जिससे वे अपने हिंदुत्व के अजेंडे को बेच सकें।” साथ ही उन्होंने इस बात पर भी दु:ख व्यक्त किया कि उन्हें तब बेहद दु:ख होता है जब कोई पार्टी और उसके कार्यकर्ता राम के नाम पर हमले करते हैं। हालाँकि मित्रा के समर्थकों की मानें तो TMC पार्टी की तरफ़ से इस निर्णय के प्रति कोई अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिलने से वे काफ़ी आहत हैं और इसीलिए अब उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भोवनीपुर में अपना आधार मज़बूत करने का मन बना लिया है।

उनके समर्थकों का कहना है कि ऊपरी तौर पर तो मित्रा को पार्टी ने अपना समर्थन दिया है क्योंकि लोकसभा चुनाव में पार्टी को यहाँ हार का मुँह देखना पड़ा था। मित्रा ने राम कथा के आयोजन पर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि इस आयोजन का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि राम के नाम पर राजीति केवल बीजेपी ही करती आई है।

कॉन्ग्रेस के पूर्व MLA ने की महिला के घर में घुसकर बदसलूकी, विरोध करने पर बुरे अंजाम की धमकी

हरियाणा के पूर्व कॉन्ग्रेस विधायक फूल सिंह खेड़ी पर बबीता (बदला हुआ नाम) नाम की महिला के घर में घुसकर उससे बदसलूकी करने और धमकी देने का आरोप लगा है। खबरों के मुताबिक ये मामला जींद का है, जहाँ हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित एक घर में घुसकर पूर्व विधायक ने महिला के साथ बदसलूकी की और विरोध करने पर बुरा अंजाम भुगतने की धमकी भी दी।

जानकारी के अनुसार 13 जुलाई की सुबह बबीता नाम की महिला अपने घर में अकेली थी। तभी गुहला चीका के पूर्व कॉन्ग्रेसी विधायक फूल सिंह खेड़ी उसके घर में घुस आए और उसके साथ बदसलूकी करनी शुरू कर दी। महिला ने जब इसका विरोध किया तो पूर्व विधायक ने उसके साथ गाली-गलौच किया और उसे बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दी।

हरियाणा एक्सप्रेस के मुताबिक पूर्व विधायक और पीड़िता के बीच रुपयों की लेन-देन को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि पूर्व विधायक द्वारा पीड़िता को दिया चेक भी एक बार बाउंस हो गया था, जिसका मामला कोर्ट में विचाराधीन है। फिलहाल बदसलूकी के मामले में पूर्व विधायक के बबीता के घर में घुसने की सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। ये फुटेज सबूत के तौर पर पुलिस को भी मुहैया करवाई गई है।

महिला की शिकायत के आधार पर मामले को सिविल लाइन थाना पुलिस ने फूल सिंह खेड़ी के ख़िलाफ़ विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज कर लिया है। इसके बाद मामले की जाँच की जा रही है।

मंदिर के सामने भाला मारकर गौहत्या: अकबर, जाफर, जुल्फिकार और फरियाद पर मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश नोएडा के गौतम बुद्ध नगर जिले के दनकौर थाना क्षेत्र में पुलिस ने बुधवार को (जुलाई 18, 2019) खेत में घुसी गाय की हत्या के मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। खबरों के मुताबिक अकबर, जाफर, जुल्फिकार और फरियाद पर आरोप है कि इन्होंने मंदिर के सामने एक गाय को भाला मारा, जिसके कारण उस गाय की मौत हो गई।

जनसत्ता में प्रकाशित खबर के मुताबिक दनकौर थाने के प्रभारी निरीक्षक समरेश कुमार सिंह ने बताया है कि ये आरोपित अच्छेजा बुर्ज गाँव के रहने वाले हैं और इन पर ग्रामीण भगवान दास ने मुकदमा दर्ज करवाया है। इसके बाद इन 4 आरोपितों में से 3 की गिरफ्तारी हुई जबकि इनका एक साथी 1 फरार है। पुलिस फरार आरोपित की तलाश में जुटी है।

जानकारी के अनुसार खेत में घुसी गाय को देखकर इन्होंने पहले उसे धारदार हथियार लेकर भगाया और फिर गाँव में एक धार्मिक स्थल के पास उसे घेरकर मारना शुरू कर दिया। घटना में गाय की मौके पर ही मौत हो गई। इस बीच ग्रामीणों को देखकर चारों आरोपित फरार हो गए। लेकिन बाद में पुलिस 3 को गिरफ्तार करने में कामयाब रही।

बता दें कि इस घटना के बाद गाँव में 2 समुदायों के बीच तनाव शुरू हो गया था लेकिन मौक़े पर पहुँच कर पुलिस ने मामले को शांत करवा दिया।

गौरतलब है कि इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के गोंडा में खेत की रखवाली करते समय असगर अली नाम के शख्स पर गाय को भाले से मारने का आरोप लगा था। जिसके बाद पुलिस ने उस पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था और मामला 2 समुदायों का होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से विशेष पुलिस बल की तैनाती भी की थी। बाद में आरोपित को जेल भेज दिया गया था।

तख्ती गैंग, मौलवी क़ुरान पढ़ाने के बहाने जब रेप करता है तो कौन सा मज़हब शर्मिंदा होगा?

उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले मौलाना ने 9 साल की बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया। यह घटना इतने चुपके से सामने आई है कि मेनस्ट्रीम मीडिया को अपने दफ्तर से विवेकाधीन अवकाश लेना पड़ा। आनन-फानन में छुट्टियाँ घोषित कर कर्मचारियों को घर भेज दिया गया।

हर दूसरी घटना में ‘दलित-हिन्दू-जय श्री राम’ के नारे तलाशने वाले कद्दावर जर्नलिस्ट भी कविता करते नजर आने लगे। इस सबके अलावा एक और बड़े गैंग ने अपने-अपने क्षेत्र में नकार दिए जाने के बाद सामाजिक मुद्दों पर अभिव्यक्ति प्रकट करने की जिम्मेदारी अपनाई थी। लेकिन वो भी आज नदारद ही चल रहा है। इन सबके अंतर्ध्यान होने की बड़ी वजह है। बड़ी वजह यह है कि नौ साल की बच्ची का बलात्कार करने वाला एक मौलवी है, जिसे बच्ची के माँ-बाप ने रोजाना घर पर इसलिए बुलाया था, ताकि वो उनकी बच्ची को ‘दीनी तालीम’ यानी, नमाज पढ़ना और उर्दू सिखा सके।

यह बात सही है कि दुष्कर्म/अपराध करने वालों का कोई मजहब नहीं होता है। अपराध सामाजिक घटनाओं, परिवेश और कुछ विक्षिप्त मानसिक प्रवृत्ति की ही परिणीति होती है। लेकिन हमने देखा है कि एक वर्ग है जो इन विषयों पर ‘अच्छी बातें’ तो खूब करना जाता है, लेकिन वह उसे अपनाने से बचता है। इस तख्ती-गैंग और आदर्श लिबरल-गैंग ने हमारे सामने अनेक उदाहरण पेश किए हैं, जिनसे हमें यह प्रमाण मिलते हैं कि अपराध का भी मजहब होता है।

मौलाना मोहम्मद अफजल नाम का यह बलात्कारी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नमाज पढ़ाने का काम करता है। यदि सोशल मीडिया पर दिन-रात हिन्दुओं के प्रतीकों को अपमानित करने के लिए कमर कस कर बैठे इस आदर्श लिबरल गैंग का ही अनुसरण किया जाए, तो क्या आज हमें नमाज से लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बोर्ड पर कॉन्डोम नहीं लटका देने चाहिए?

हर दूसरी घटना में भगवा और हिन्दू प्रतीकों को घुसेड़ देने वाले लोगों को क्या बलात्कारी मौलाना की हरकत में हरा रंग नजर नहीं आ रहा है? क्या ‘दीनी तालीम’ सीखाने वाले इस मौलवी को अदालत द्वारा सजा के रूप में सार्वजानिक स्थान पर उस तालीम का विरोध करने के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए, जिसका सहारा लेकर उसने अपनी विक्षिप्त मानसिकता का शिकार एक नाबालिग को बनाया है?

हर दूसरे झूठे नैरिटिव को अपने मीडिया प्रमुखों के जरिए फैलाकर खुद तख्ती उठाने वाले इस गिरोह को अगर आज 9 साल की बच्ची का बलात्कार करने वाले मौलाना का विरोध करने के लिए तख्तियों की कमी पड़ रही है, तो मैं अपनी सुन्दर हैंडराइटिंग में दर्जन भर या आवश्यकतानुसार उन्हें तख्तियाँ सप्लाई करवाने के लिए तैयार हूँ। वो कैंडल, जिन्हें यह तख्ती गैंग सुविधानुसार छुपा कर रख लेता है, मैं वो भी उपलब्ध करवाने के लिए तैयार हूँ। बशर्ते, वो 9 साल की बच्ची के बलात्कार की घटना को बलात्कार करने वाले मौलवी की धार्मिक पहचान से बढ़कर समझने का हौसला दिखा सकें।

लेकिन हम सब जानते हैं कि उनके लिए यह नामुमकिन है। बात चाहे हस्तमैथुन और ऑर्गेज़्म के जरिए महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाली स्वरा भास्कर की हो या फिर उन्हीं के जैसी काम के अभाव में सोशल मीडिया पर एक्टिविस्ट्स बने फिर रहे अन्य मीडिया गिरोह हों, सब जानते हैं कि उन्हें कब कैंडल बाहर निकालनी है और किन घटनाओं का विरोध करना है।

हालात ये हैं कि मेरे जैसे किसी आम व्यक्ति को यदि किसी अपराध में शामिल आरोपित के बारे में जानना हो, तो मैं सिर्फ इन गिने-चुने दोहरे व्यक्तित्व के धनी लोगों की प्रतिक्रिया देखकर भी जान सकता हूँ। सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का दावा करने वाले ये लोग किस प्रकार से हर दूसरी घटना में मनगढंत तरीके से हिन्दूवादी संगठनों को अपमानित करते आए हैं, इसका उदाहरण हम देखते आए हैं।

यह भी पढ़िए: मदरसे में पढ़ने गई थी 8 साल की बच्ची, मौलवी ने किया बलात्कार

जिस तरह से कठुआ में हुई रेप की घटना के बाद यह मीडिया गिरोह और तख्तीबाज अपने अपने बिलों से बाहर निकलकर एक घटना में ‘मंदिर-हिन्दू-पुजारी’ जैसे शब्दों को गढ़ने का प्रयास कर रहे थे, इस तरह से आज हमें कहना चाहिए कि दीनी तालीम के नाम पर बलात्कार करने वाले एक मौलवी के मजहब का रंग हरा था और जिस तालीम को सिखाने के नाम पर उसने यह घिनौना कृत्य किया है, उसके बारे में ज्यादा कुछ कहने की गुंजाइश बाकी रह ही नहीं जाती है।

यह भी पढ़िए: AMU की मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले मौलाना ने 9 साल की बच्ची को बनाया हवस का शिकार

मेनस्ट्रीम मीडिया अपनी बोई हुई फसल काटने के लिए बाध्य है। उसने बिना सोचे समझे 1,000 में से किसी एक अपराध में हिन्दू या फिर ‘जय श्री राम’ के नारे का बहाना बनाकर अपनी विषैली मानसिकता को शांत करने का प्रयास किया लेकिन समाज अब उसका भुगतान एक लम्बे समय तक करता रहेगा। सवाल भी किए जाएँगे, कोई उनका जवाब देने के लिए बाध्य हो या न हो।

सवाल पूछने के शौक़ीन अब दोतरफा संवाद के इस दौर में सवालों से बौखलाने भी लगे हैं। उनकी भड़ास अब उपहास में तब्दील हो चुकी है। आप उत्पात और उपद्रव की सीमा सोच भी नहीं सकते हैं कि इसी देश-काल-वातावरण में तब क्या हो रहा होता अगर यही घटना किसी दूसरे समुदाय से जुड़ी होती। लेकिन आज कोई उपद्रव, हो-हल्ला नहीं होगा। आज उनके प्राइम टाइम में गोबर से गैस बनाने की विधि सिखाई जानी तय की गई होगी। या हो सकता है कि अम्बानी इस समय देश में कौन-कौन से प्रोजेक्ट चला रहे हैं इस पर भी विश्लेषण देखने को मिल जाए। लेकिन, ‘मौलवी-नमाज-AMU’ ये शब्द आज शब्दकोश से मिटा दिए जाएँगे।

फिलहाल, मौलवी को POCSO Act के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन उस तालीम और उस जगह के बारे में अवश्य सोचते रहिए, जहाँ-जहाँ से ये शख्स गुजरा था। जहाँ-जहाँ 9 साल की बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने वाला मौलाना मोहम्मद अफजल दीनी तालीम के नाम पर नमाज पढ़ाता और उर्दू सिखाता था। उन सभी संस्थाओं, चाहे वो घर हो या यूनिवर्सिटी हो, सबको शक की नजर से देखना शुरू कर दीजिए। सुरक्षित रहने का यही उपाय है कि हम रंगों की पहचान करना सीख सकें, ठीक उसी तरह जिस तरह से तख्ती-गैंग और मेनस्ट्रीम मीडिया ने पहचाना है।

‘लेफ्ट वाले सनकी और पागल, पसंद नहीं देश तो छोड़ दो न!’

अपने देश की चार डेमोक्रैट सांसदों पर निशाना साधते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट किया है। एक साथी सांसद की बातों को उद्धृत करते हुए ट्वीट में उन्होंने चार सांसदों को निशाने पर रखने के साथ-साथ विपक्षी डेमोक्रैटिक पार्टी की भी आलोचना की है और उन्हें ‘पागल’ करार दिया है। साथ ही अमेरिका को न पसंद करने वाले अमेरिकियों को देश छोड़ देने की भी सलाह दी है।

‘इन्हें लगता है कि सभी नस्लभेदी और दुष्ट हैं’

चार अमेरिकी सांसदों अलेक्सांद्रिया ओकेशिओ-कोर्टेज़, इल्हान उमर, राशिदा तलैब और आयना प्रेस्ली का नाम लिए बिना ट्रम्प ने लुइसियाना के सीनेटर जॉन केनेडी की बातों को ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “चार अमेरिकी महिला सांसदों को लगता है कि अमेरिका का जन्म घृणास्पद है, आज हम पहले से अधिक घृणास्पद हैं, और हम सभी नस्लवादी और दुष्ट हैं। मेरे विचार में वे सभी लेफ्ट वाले सनकी हैं।” अपने तीखे हमलों के लिए अमेरिका ही नहीं, पूरी दुनिया में जाने जाने वाले ट्रम्प यहीं पर नहीं रुके, बल्कि उन्होंने यह भी लिखा कि बाकियों को इन्हें नज़रंदाज़ करना चाहिए। “यह इतने मूर्ख हैं कि इन्हीं के लिए शैम्पू की बोतल जैसी सरल चीज़ पर भी इस्तेमाल करने का तरीका लिखा जाता है।”

ट्रम्प ने केनेडी को उद्धृत करते हुए चारों सांसदों पर अपनी ही डेमोक्रेटिक पार्टी को बर्बाद करने का भी आरोप लगाया। उनके ट्वीट के अनुसार इन चारों महिलाओं ने पार्टी को अति वामपंथ की ओर धकेल दिया है। ट्रम्प ने इस बात से भी नाराज दिखे कि डेमोक्रेटिक पार्टी के सभी राष्ट्रपति प्रत्याशी के बीच इन चारों महिला संसद की हाँ-में-हाँ मिलाने की होड़ लगी है।