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40 वर्षों बाद जल-समाधि से निकाले गए भगवान: देश-विदेश से पहुँचे लाखों श्रद्धालु, सिर्फ़ 48 दिन होंगे दर्शन

भारत विविधताओं का देश है और यहाँ प्राचीन काल से ऐसी-ऐसी परम्पराएँ चली आ रही हैं, जो हर क्षेत्र को अलग-अलग पहचान देती हैं। इसी क्रम में आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहाँ के मुख्य देवता 40 वर्षों में सिर्फ़ 1 बार दर्शन देते हैं। पिछली बार उन्होंने 1979 में दर्शन दिया था, तब श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। अब जब 2019 में वह निकले हैं, उनके दर्शन के लिए लाखों लोग पहुँच रहे हैं। हम जिस मंदिर की बात कर हैं, उसका नाम है- भगवान वरदराजा स्वामी मंदिर। यह मंदिर तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित है।

और जिस देवता की बात हम कर रहे हैं, उनका नाम है- भगवान अति वरदार। अति वरदार प्रत्येक 40 वर्षों में 1 बार दर्शन देकर वापस जल समाधि में चले जाते हैं। यहाँ तक कि विदेशों से भी उनके दर्शन के लिए लोग आते हैं। हम उनकी चर्चा अभी इसीलिए कर रहे हैं, क्योंकि अभी वह समय आया है जब भगवान अति वरदराज को जल समाधि से निकाला गया है और इस ख़ुशी में वहाँ ‘कांची अति वरदार महोत्सव’ चल रहा है। 19 अगस्त तक लोग उनके दर्शन कर सकेंगे, जिसके बाद वह वापस मंदिर के पवित्र तालाब में रख दिए जाएँगे।

ताजा महोत्सव के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन देने भगवान अति वरदार 40 वर्षों बाद 2059 में ही प्रकट होंगे। इस बार भी जब उनकी मूर्ति को पवित्र तालाब से निकाला गया, तब हज़ारों की संख्या में भक्तगण इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए वहाँ मौजूद थे। तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ख़ुद विशेष पूजा-अर्चना का गवाह बनने के लिए वहाँ उपस्थित थे। प्रतिमा को फूल-माला पहना कर मंदिर प्रांगण में घुमाया गया और फिर वसंत मंडप में स्थापित किया गया।

48 दिनों तक चलने वाली दर्शन की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने पूरी व्यवस्था की है। ढाई हज़ार से भी अधिक पुलिसकर्मियों की देखरेख में महोत्सव चल रहा है। दर्शन के लिए मुफ्त से लेकर अलग-अलग मूल्य तक के टोकन जारी किए गए हैं। हालाँकि, भगवान अति वरदार की 40 वर्षीय जल समाधि के पीछे स्थानीय तौर पर कई कहानियाँ प्रचलित हैं लेकिन इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। भगवान की मूर्ति अंजीर के पेड़ की लकड़ी से बनी हुई है।

कहते हैं, 16वीं शताब्दी में मुग़ल आक्रमण के दौरान 9 फ़ीट की इस प्रतिमा को तालाब में छिपा दिया गया था। एक बहुत ही प्रचलित कथा है कि माँ सरस्वती यहाँ नाराज़ होकर आई थीं, तब यहाँ अंजीर के जंगल हुआ करते थे। पीछे से भगवान ब्रह्मा उन्हें मनाने आए और अश्वमेध यज्ञ किया। सरस्वती ने नदी के रूप में इस यज्ञ को भंग करने का प्रयास किया, तब यज्ञ वेदी की अग्नि से प्रकट हुए भगवान विष्णु (अति वरदराजा) ने उनका क्रोध शांत किया।

मुग़ल आक्रमण का दौर बीतने के बाद इस प्रतिमा को पूजा के लिए वापस निकाला गया था, लेकिन मान्यता है कि प्रतिमा 48 दिनों बाद फिर अपने-आप वापस तालाब में चली गई। मान्यता है कि देवगुरु बृहस्पति तालाब के भीतर विष्णु की आराधना करते हैं। तब से अब तक हर 40 वर्ष बाद ही इस प्रतिमा को दर्शन हेतु निकाला जाता है। मंदिर के पास स्थित वेगवती नदी को ही सरस्वती का रूप माना गया है।

एयर स्ट्राइक इफ़ेक्ट: आतंकी संगठनों को नहीं मिल रहे कश्मीरी युवा, भर्ती में 40% व घुसपैठ में 43% की कमी

पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक ने आतंकी संगठनों की कमर तोड़ दी है। आतंकी संगठनों को भर्ती के लिए कश्मीरी युवा नहीं मिल रहे। संसद में सरकार ने बताया है कि स्थानीय युवकों की भर्ती में 40% की कमी आई है। बीते साल के मुकाबले सीमा पार से घुसपैठ में 43% की कमी आई है। ये आँकड़े इस साल के शुरुआती 6 महीने के हैं। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा है कि सुरक्षा बलों के प्रयासों और सरकार की इच्छाशक्ति के कारण इस वर्ष घुसपैठ में कमी आई है।

संसद में सरकार द्वारा पेश किए गए आँकड़ों के अनुसार:

  • पाकिस्तान से होने वाले घुसपैठ में 43% कमी आई है।
  • आतंकी हमलों में 28% कमी आई है।
  • आतंकी संगठनों में स्थानीय युवकों की भर्ती में 40% कमी आई है।
  • आतंकियों के सफाए में 22% की बढ़ोतरी हुई है।

बता दें कि पुलवामा में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। जवाबी कार्रवाई में भारत ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक किया था। हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद का हाथ सामने आने के बाद भारतीय वायुसेना ने इस आतंकी संगठन के सबसे बड़े कैम्प को निशाना बनाया और सैंकड़ों आतंकी मार गिराए थे। मोदी सरकार शुरू से कहती आ रही है कि आतंकवाद पर उसकी नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा है कि सरकार पाकिस्तान में स्थित आतंकवाद की जड़ों को निशाना बनाने में यकीन रखती है। बीते दिनों उन्होंने जम्मू-कश्मीर का दौरा कर सुरक्षा-व्यवस्था का जायजा लिया था। उन्होंने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से भी हालात पर चर्चा की थी। शाह ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर बंकरों के निर्माण में तेज़ी लाने की भी बात कही थी।

बिहार: अब गया में पसरा चमकी बुखार का खौफ, 6 बच्चों की मौत

बिहार के मुजफ्फरपुर में 145 से अधिक मासूमों की मौत के बाद अब गया में ‘चमकी बुखार’ से 6 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। सभी मौतें जिले के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई हैं।
अस्पताल अधीक्षक वीके प्रसाद ने बताया कि 2 जुलाई के बाद से ये मामले सामने आए हैं। 6 बच्चों की मौत की उन्होंने पुष्टि की है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दो जुलाई के बाद से अस्पताल में 22 बच्चे भर्ती किए गए हैं। इनमे से 14 में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी AES के लक्षण पाए गए हैं।

प्रसाद ने बताया, ” 2 जुलाई से अब तक अस्पताल में 22 मरीज भर्ती किए गए हैं। शुरुआती लक्षण AES के लग रहे हैं। लेकिन जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आती मुकम्मल तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।”

बता दें मौसम में बदलाव के कारण मुजफ्फरपुर में AES के मामलों में कमी देखी गई है। लेकिन, गया में नए मामले सामने आने से प्रशासन सकते में है। बिहार में अब तक 180 से अधिक बच्चे चमकी बुखार के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का ख़त्म होगा एकाधिकार, जलियाँवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक बिल लोकसभा में पेश

सोमवार (जुलाई 8, 2019) को लोकसभा में कॉन्ग्रेस के विरोध के बीच जलियाँवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) विधेयक, 2019 पेश किया गया। इस विधेयक को लाने का मकसद जलियाँवाला बाग मैमोरियल ट्रस्ट को गैर राजनीतिक रूप देना है। इस विधेयक में ट्रस्टी के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष को हटाकर उसके स्थान पर लोकसभा में मान्यता प्राप्त विरोधी दल के नेता या उस स्थिति में सदन में सबसे बड़े एकल विरोधी दल के नेता को ट्रस्टी बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।

यह विधेयक नॉमिनेटेड ट्रस्टी के कार्यकाल को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार को और अधिक शक्ति प्रदान करता है, जो कि अब तक ट्रस्ट स्मारक का प्रबंधन ही करता है। इस विधेयक का उद्देश्य ट्रस्ट में किसी विशेष राजनैतिक दल के प्रभुत्व को खत्म करना है। इस विधेयक के पारित होने के बाद कॉन्ग्रेस का इसके स्थाई ट्रस्टी के तौर पर एकाधिकार समाप्त हो जाएगा।

इस विधेयक को केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने लोकसभा में पेश किया, जिसका कॉन्ग्रेस ने जबर्दस्त तरीके से विरोध किया। कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने इस का विरोध करते हुए कहा कि यह देश की विरासत के साथ खिलवाड़ है। देश के इतिहास व उसकी विरासत के साथ विश्वासघात नहीं होना चाहिए। थरूर ने कहा कि जब से स्मारक बनाया गया तब से ही कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को स्मारक का पदेन ट्रस्टी बनाया गया है। कॉन्ग्रेस ने इस ट्रस्ट के लिए पैसा जुटाया था।

कॉन्ग्रेस के विरोध का जवाब देते हुए संस्कृति मंत्री ने कहा कि इतिहास की बात कर रहे कॉन्ग्रेस सदस्य रिकॉर्ड पलट कर देख लें। कॉन्ग्रेस ने पिछले 40-50 वर्षों में स्मारक के लिए कुछ भी नहीं किया है। साथ ही पटेल ने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस सदस्य विधेयक पर चर्चा के दौरान अपने सवाल उठा सकते हैं। उनके सारे सवालों के जवाब दिए जाएँगे। प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि विधेयक फरवरी में लोकसभा में पारित हो गया था, लेकिन राज्यसभा में पारित नहीं हो सका था, इसलिए सरकार फिर से इसे लोकसभा में लेकर आई है। बता दें कि, वर्तमान में
जलियाँवाला बाग ट्रस्ट में कुल नौ ट्रस्टी हैं। जिसमें प्रधानमंत्री के बाद दूसरे नंबर के ट्रस्टी भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष होते हैं।

VHP ने जारी की एंटी-हिन्दू हेट क्राइम की सूची, कहा- इतिहास बताता है रक्तपात किसकी प्रवृत्ति है

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने सोमवार (जुलाई 08, 2019) को बयान जारी कर पत्रकारों और ‘सेक्युलर’ नेताओं के गठजोड़ पर हिन्दुओं के खिलाफ दंगे भड़काने की साजिश का आरोप लगाया है। विहिप के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर जारी इस बयान में आरोप लगाया गया है कि यह गठजोड़ न केवल समुदाय विशेष के डरे हुए होने का झूठा नैरेटिव बना रहा है, बल्कि कट्टरपंथियों को उकसा कर हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा कराना भी इसका ध्येय है। विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल को इस लिखित बयान में हस्ताक्षरकर्ता बताया गया है।

‘हिन्दू शांतिप्रिय न होते तो इतने मंदिर तोड़े जाने पर…’

अंग्रेजी और हिंदी में जारी बयान में विहिप ने सवाल किए हैं कि क्या ये लोग (खान मार्केट पत्रकार, सेक्युलर गैंग आदि) आगामी चुनावों को प्रभावित करने के लिए देश को दंगों की आग में झोंकना चाहते हैं? परिषद ने समुदाय विशेष के नेताओं से मंदिरों को तोड़ने निकले जिहादी तत्वों पर रोक लगाने की पहले के लिए भी अपील की। यह भी कहा कि अगर हिन्दू समाज शांतिप्रिय न होता तो मंदिरों में होने वाले हमलों की इतनी घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया क्या होती, इसकी कल्पना की जा सकती है।

अपने संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन के हवाले से परिषद ने कहा कि पूरी दुनिया जानती है मॉब-लिंचिंग हिन्दुओं का स्वभाव नहीं है। ‘सम्प्रदाय विशेष’ पर कटाक्ष करते हुए विहिप ने यह भी कहा कि इतिहास और वर्तमान की घटनाएँ स्पष्ट कर देतीं हैं कि गैर-मतावलम्बी का रक्तपात किसकी प्रवृत्ति और मज़हबी कर्त्तव्य हैं। मजहबी नेताओं को भी इतिहास से सीख लेने की नसीहत देते हुए उन्होंने पूछा कि हिंसक कार्यवाही से उनका क्या भला होगा?

5-6 अर्धसत्य ही समूचा आधार

हिन्दू संस्था ने यह आरोप लगाए कि 5-6 घटनाओं के अर्धसत्य को आधार बना कर जिस प्रकार हिन्दू-विरोधी माहौल बनाया जा रहा है, वह एक राष्ट्र-विरोधी षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत होता है। परिषद ने पत्रकारिता के समुदाय विशेष और ‘सेक्युलर’ राजनीतिज्ञों से पूछा है कि अगर मस्जिदों पर ऐसे ही हमले होते तो कथित अल्पसंख्यक समाज, इन पत्रकारों और नेताओं की क्या प्रतिक्रिया होती। इन सभी से विहिप ने यह भी पूछा कि जिहादियों के कारनामों पर पर्दा डालकर और हिन्दू समाज को बदनाम कर आखिर वे देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं

‘मॉब लिंचिंग और साम्प्रदायिक हत्या हिन्दुओं की भी होती है… उस पर चुप्पी क्यों?’

विहिप ने चावड़ी बाजार (दिल्ली) के दुर्गा मंदिर, अटाली (हरियाणा), मुजफ्फरनगर आदि का उदाहरण देकर दावा किया कि हिंसक भीड़ द्वारा हमले के शिकार असल में हिन्दू और उनके धार्मिक स्थल हैं। उन्होंने इसे हिन्दुओं को उकसाने वाली कार्यवाही बताया। गुरुग्राम, बेगूसराय, कानपुर आदि में समुदाय विशेष पर भीड़ द्वारा हमले की घटनाओं के नकली निकलने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इनके नकली निकलने पर भी दुष्प्रचार जारी रखना ऐसा करने वालों के इरादे साफ कर देता है।

हिन्दुओं की मॉब-लिंचिंग का मामला उठाते हुए विहिप ने यह भी पूछा कि लिबरल गैंग आखिर इस पर चुप क्यों रहता है? कश्मीर में पंडितों के सामूहिक हत्याकाण्ड को हिन्दुओं की मॉब-लिंचिंग का सबसे बड़ा उदाहरण विहिप ने बताया। अन्य जिन घटनाओं का उसने ज़िक्र किया, वह थीं अरुण माहौर की हत्या, दिल्ली में ध्रुव त्यागी और अंकित सक्सेना की हत्याएँ आदि। विहिप ने पूछा कि दादरी को अपना ‘तीर्थ स्थल’ बनाने वाले पत्रकार इन घटनाओं पर चुप्पी क्यों साध लेते हैं? विहिप ने हिन्दू-विरोधी हिंसक घटनाओं का एक नमूना संग्रह भी ट्वीट किया।

‘बिहारी खा जाते हैं हमारी नौकरी, इसे रोकने के लिए MP के मूल निवासियों को 70% आरक्षण’

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार प्रदेश के युवाओं को बड़ी सौगात देने पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार (जुलाई 09, 2019) को विधानसभा में एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह जानकारी दी। निजी क्षेत्र की नौकरियों में सरकार राज्य के युवाओं को 70% आरक्षण देगी और इसके लिए जल्द ही कानून लाया जाएगा।

मंगलवार को विधानसभा में एक सवाल पर कॉन्ग्रेस और बीजेपी विधायकों की नोकझोंक के बीच मुख्यमंत्री ने सदन को यह जानकारी दी। कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश की गुजरात या पश्चिम बंगाल से तुलना नहीं हो सकती क्योंकि उन राज्यों में वहीं की भाषा में पेपर होते हैं।

स्थाई निवासियों को देगी प्राथमिकता

सीएम कमलनाथ ने मध्य प्रदेश विधानसभा में कहा कि निजी क्षेत्रों में राज्य के स्थाई निवासियों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। नई औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन योजना में आरक्षण के प्रावधान को रखा गया है। उन्होंने बताया कि औद्योगिक इकाई के शुरू होने पर इसे लागू किया जाएगा। इसके मुताबिक, कुल रोजगार का 70% मध्य प्रदेश के स्थाई निवासियों को ही देना होगा।

‘यूपी-बिहार के प्रवासी कामगार MP के लोगों की नौकरियों पर कब्जा जमा लेते हैं’

पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को मिली जीत के तुरंत बाद कमलनाथ ने कहा था कि मध्य प्रदेश की नौकरियाँ अन्य राज्य के लोगों के पास जा रही हैं। उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग मध्य प्रदेश की नौकरियों पर कब्जा जमा लेते हैं और उनकी सरकार इसे रोकने के लिए प्राथमिकता से काम करेगी।

ग़रीबों को 5 रुपए में नहीं मिल रहा खाना: शिवराज की ‘दीनदयाल रसोई’ पर कमलनाथ सरकार में ताला

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही पिछली भाजपा सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का बुरा हाल है। अब पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान सरकार की ‘दीनदयाल अंत्योदय रसोई’ पर भी ग्रहण लग गया है। इस योजना के तहत ग़रीबों को केवल 5 रुपए में भोजन मुहैया कराया जाता था। भोपाल में यह योजना अप्रैल 2017 में शुरू की गई थी।

भोपाल के सुल्तानिया अस्पताल के सामने स्थित दीनदयाल रसोई पर भी कई दिनों से ताला लटका हुआ है। कहा जा रहा है कि यह रसोई पिछले एक महीने से बंद पड़ी है। इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। सफाई में सरकार ने योजना की समीक्षा की बात कही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रसोई बंद होने से गरीब बेहद नाराज हैं। कई ग़रीबों ने बताया कि सस्ता खाना न मिलने के कारण उन्हें समोसे और पकौड़े खा कर पेट भरना पड़ रहा है।

शिवराज ने कहा है कि कॉन्ग्रेस से ग़रीबों का सुख नहीं देखा जाता है। इसलिए, कमलनाथ ग़रीबों के मुँह से निवाला छीन रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। इस योजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पूर्व सीएम ने कहा, “ग़रीब और मजदूरी करने वाला व्यक्ति काम की तलाश में शहर आता है। उसकी कमाई कम होती है। यदि वह अपनी कमाई होटल में खाना खाने पर ख़र्च करने लगे तो परिवार कैसे पालेगा? इसी को ध्यान में रखते हुए यह योजना शुरू की गई थी।

भोपाल के अलावा इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित राज्य के कई अन्य शहरों में भी यह योजना शुरू की गई थी। प्रदेश के खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि सरकार इस योजना को नए सिरे से शुरू करेगी और बेहतर तरीके से इसका संचालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार आम आदमी को भोजन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

रिज़वान ने दी सुहागरात की वीडियो वायरल करने की धमकी, विरोध करने पर किया अप्राकृतिक सेक्स

दहेज़ की लालच में एक युवक इतना गिर गया कि उसने अपनी ही पत्नी को बदनाम करने की ठान ली। उत्तर प्रदेश के बरेली में एक महिला ने अपने पति के ख़िलाफ़ ‘निजता का उल्लंघन (ब्रीच ऑफ प्राइवेसी)’ और उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया है। महिला ने अपने पति पर आरोप लगाया है कि उसने दोनों के बीच अंतरंग पलों का वीडियो बना लिया और फिर उसके सहारे ब्लैकमेल करने लगा। बारादरी पुलिस थाने में महिला ने अपने पति रिज़वान के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है।

महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसने वीडियो बनाने का विरोध किया लेकिन पति ने आश्वासन दिया था कि वह वीडियो को डिलीट कर देगा। लेकिन, बाद में उसकी नीयत में खोट आ गई और वह उस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देने लगा। पुलिस ने आरोपित रिज़वान के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 377 (अप्राकृतिक सेक्स) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने स्थानीय ठेकेदार से अक्टूबर 2018 में शादी की थी। सुहागरात के दिन ही उसके पति ने पीड़िता के साथ बिताए अंतरंग पलों को अपने फोन के कैमरे में क़ैद कर लिया। महिला की आपत्ति के बाद उसने वीडियो को डिलीट कर देने का भरोसा दिया। इसके कुछ दिनों बाद जब पीड़िता ने देखा कि ये वीडियो अभी भी उसके पति के फोन में पड़े हुए थे, तो उसने ख़ुद से उन्हें डिलीट करने की कोशिश की। लेकिन, रिज़वान ने पीड़िता के साथ जबरन अप्राकृतिक सेक्स किया और फिर से एक वीडियो शूट कर लिया।

इसके बाद पीड़िता ने अपने ससुराल वालों से मदद की गुहार लगाई। इसके बावजूद उसके साथ बुरा सलूक जारी रहा और ससुराल वालों ने भी रिज़वान का ही पक्ष लिया। पति द्वारा बार-बार मिल रही वीडियो वायरल करने की धमकी के बीच महिला ने अपने मायके वालों को बदनामी के डर से कुछ भी नहीं बताया। 30 जून को जब रिज़वान ने फिर से उसकी पिटाई की, तब वह अपने घर पहुँची और फिर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई। उससे पहले पीड़िता के देवर ने भी उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश की थी।

पुलिस ने बताया कि इस मामले की जाँच जल्द ही शुरू होगी और प्रथम दृष्टया महिला की शिकायत सही लग रही है। यह भी पता चला है कि पीड़िता को ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया था। ससुराल वालों ने उसे धमकी दी थी कि अगर मायके वालों को इस बात की जानकारी दी तो वो उसके भाई की हत्या करा देंगे। बाद में पति के मनाने के बाद वह ससुरवाल वापस आई लेकिन उसका पति अब भी नहीं सुधरा था और उसने फिर से वही हरकतें चालू कर दी। आरोपित के ख़िलाफ़ आईटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

बॉलीवुड हीरोइन ने कॉन्ग्रेस नेताओं को बताई हार की वजह, पत्र लिख कर पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप

मुंबई कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा के रविवार (जुलाई 7, 2019) को इस्तीफा देने के बाद से मुंबई कॉन्ग्रेस में अंतर्कलह खुलकर सामने आने लगी है। मिलिंद देवड़ा के इस्तीफे के बाद सोमवार (जुलाई 8, 2019) को मुंबई के पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष संजय निरूपम ने ट्विटर के जरिए उन पर निशाना साधा तो वहीं, अभिनत्री से राजनेता बनी उर्मिला मातोंडकर ने लोकसभा चुनाव में अपनी हार का ठीकरा स्थानीय नेताओं पर फोड़ा है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं पर सहयोग न करने का आरोप लगाया है।

जानकारी के मुताबिक, उत्तर-मुंबई से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी रहीं उर्मिला मातोंडकर ने पत्र लिखकर पार्टी कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने 16 मई को 9 पेजों का एक पत्र मुंबई के तत्कालीन कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा को लिखा था। जिसमें उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ न देने, कमजोर प्लानिंग, प्रचार तंत्र की नाकामी के साथ चुनाव प्रचार के लिए नियुक्त चीफ कॉर्डिनेटर सन्देश कोंडविलकर, दूसरे पदाधिकारी भूषण पाटिल को जिम्मेदार ठहराया है। ये दोनों नेता पूर्व मुंबई कॉन्ग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम के नजदीकी हैं।

उर्मिला ने अपने पत्र में इन दोनों नेताओ का नाम लेते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर इन दो नेताओं ने लोगों तक पहुँचने में कोताही बरती है। उर्मिला का कहना है कि कोंडविलकर जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को जुटाने में असफल रहे। वहीं, भूषण पाटिल जैसे अन्य प्रमुख पदाधिकारी ब्लॉक स्तर और वार्ड स्तर पर पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक, प्रचारसभा, पदयात्रा आयोजित करने में विफल रहे, जिसकी वजह से जनता पार्टी के एजेंडे को समझ नहीं पाई और उनके साथ जुड़ नहीं पाई। इसके साथ ही उर्मिला ने कोंडविलकर और पाटिल पर राजनीतिक परिपक्वता, अनुशासन की कमी और बेवजह विवाद पैदा करने का भी आरोप लगाया।

उर्मिला ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कड़ी मेहनत की, लेकिन कॉन्ग्रेस संगठन की तरफ से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उर्मिला ने शिकायती पत्र में लिखा कि केंद्रीय कार्यालय में पर्याप्त जगह नहीं थी। निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के कार्यालय नहीं बनाए गए। प्रचार सामग्री का वितरण उचित तरीके से नहीं किया गया, जिसके कारण मतदाताओं तक उनकी बात सही ढंग से नहीं पहुँची।

उर्मिला ने कोंडविलकर पर उनके परिवारवालों को बुलाने और चुनाव अभियान के लिए पैसे माँगने का भी आरोप लगाया। साथ ही कोंडविलकर ने कॉन्ग्रेस के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल से बात करने के बारे में भी उनके परिवारवालों से पूछा। मातोंडकर ने सन्देश कोंडविलकर, और भूषण पाटिल पर जिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अशोक सुत्राले के प्रति अनादर करने का आरोप लगाया और साथ ही उन्होंने पार्टी के बेहतर और उज्जवल भविष्य के लिए दोनों नेताओं के खिलााफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए संगठनात्मक स्तर पर बदलाव की माँग की थी।

3 तलाक, हलाला का आश्वासन और हत्या: अब्बास के अवैध संबंधों के कारण आरिफा के 2 बच्चे हुए अनाथ

राजस्थान के अलवर जिले से एक साथ तीन तलाक, हलाला और हत्या का मामला सामने आया है। यहाँ तिजारा क्षेत्र के गाँव पलासली में एक मुस्लिम व्यक्ति ने अवैध संबंधों के चलते अपनी पत्नी को तीन तलाक देकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद मृतका के पिता ने अपने दामाद सहित अन्य ससुराल वालों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया है।

जागरण में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

जानकारी के मुताबिक डीडारा गाँव के रहने वाले उमरदीन ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया है कि उनकी पुत्री का निकाह 2011 में रीति-रिवाजों के साथ पलासली निवासी अब्बास के साथ किया गया था। आरिफा के 2 बच्चे भी हैं। लेकिन 2 साल पहले अब्बास ने उनकी पुत्री से दूरी बना ली, जिसके कारण उनके बीच अच्छे संबंध भी नहीं थे।

एफआईआर में उमरदीन ने अपने दामाद अब्बास पर आरोप लगाया है कि उसके किसी और से अवैध संबंध थे, जिसके बारे में अब्बास के पिता ईसब, माँ सुफेदी और चाचा दीनू को भी जानकारी दी गई थी, लेकिन उस दौरान उन लोगों ने अब्बास से बात करने का विश्वास दिलाकर मामले को शांत कर दिया, और फिर डेढ़ साल पहले पूरे परिवार की मिलीभगत से आरिफा को उसके पति ने तलाक दे दिया।

जब मामले ने तूल पकड़ा तो पंचायत में अब्बास के परिजनों ने आरिफा के घरवालों को आश्वासन दिया कि वह आरिफा का हलाला करवाकर 4 महीने बाद दोबारा अब्बास से उसका निकाह करवा देंगे। जिसके चलते वह अपने मायके ही रह रही थी, लेकिन जब 2 दिन पहले वह अपने ससुराल आई तो उसकी मौत हो गई।

पुलिस के मुताबिक अब्बास ने 7 जुलाई की सुबह 7 बजे अपने पुत्र फतेह मोहम्मद को कॉल की और कहा कि आरिफा की हालत खराब है, ‘तुम लोग आ जाओ।’ जिसके बाद आरिफा के घर वाले जब कर उसके ससुराल पहुँचे तो वहाँ उसे मृत पाया। उसके शरीर पर चोट के निशान थे और उसके शरीर से खून निकल रहा था।

दर्ज की गई शिकायत में आरिफा के ससुराल वालों पर उससे मारपीट कर हत्या करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने अब्बास, उसके पिता ईसब, माँ सुफेदी के अलावा दीनू और अफसाना के खिलाफ़ धारा 143, 302 में मामला दर्ज किया है। साथ ही शव का पोस्टमॉर्टम कराके परिजनों को सौंप दिया।