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J&K: श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी बसीर अहमद गिरफ्तार, ₹2 लाख का था इनाम

दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल ने जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकी बसीर अहमद को गिरफ्तार किया है। इस आतंकी पर दिल्‍ली पुलिस ने ₹2 लाख का इनाम रखा था। मुखबिर की सूचना पर स्पेशल सेल ने मंगलवार (जुलाई 16, 2019) को श्रीनगर से बसीर अहमद को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस की टीम द्वारा लगातार उससे पूछताछ की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, आतंकियों को पकड़ने के लिए सुरक्षाबलों ने उत्तरी कश्मीर में दो जगह तलाशी अभियान चलाया। इसी कड़ी में बिछरवारा, कुपवाड़ा और हाजिन बांडीपोर में भी तलाशी ली। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने जैश-ए-मुहम्मद के एक आतंकी बशीर अहमद को श्रीनगर में पकड़ा। 

गौरतलब है कि फरवरी 2007 में दिल्ली पुलिस ने बशीर अहमद, फैयाज अहमद लोन और अब्दुल मजीद बाबा को एक पाकिस्तानी आतंकी शाहिद गफूर संग दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर पकड़ा था। पुलिस ने दावा किया था कि यह सभी सुरक्षाबलों के साथ हुए मुठभेड़ के बाद पकड़े गए हैं। ये लोग दिल्ली में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने वाले थे।

सात अगस्त 2013 में दिल्ली की एक अदालत ने शाहिद गफूर को सजा सुनाई थी और बशीर, फैयाज व अब्दुल मजीद को रिहा कर दिया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने बशीर, फैयाज व अब्दुल मजीद को भी दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। कुछ सालों बाद इस मामले में जमानत मिलने के बाद बशीर हाई कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था। कई बार पेशी से नदारद रहने पर कोर्ट ने उसके खिलाफ गैरजमानती वॉरंट जारी किया था। बशीर के दोनों साथियों फैयाज और अब्दुल मजीद को दिल्ली पुलिस पहले ही श्रीनगर से पकड़ चुकी है और पुलिस ने बशीर को भी पकड़ लिया है।

बिहार: पानी के लिए हाहाकार, चमकी बुखार और अब बाढ़, गिरोह को था इसी का इंतजार

जिस राज्य में नेताओं-अधिकारियों-ठेकेदारों का गिरोह विपदा की प्रतीक्षा करता हो, गिद्ध की तरह नजर जमाए बैठा हो कि घर-बार उजड़े, तैरते-उफनाते इंसानों-जानवरों के शव दिखें, ताकि वह राहत और बचाव के नाम पर माल कूट सके, उस राज्य की नियति भला और क्या हो सकती है!

ताज्जुब नहीं कि आम चुनावों के बाद बिहार ने पहली सुर्खियां पानी के लिए तरसते लोगों के कारण बटोरी। फिर आया चमकी बुखार जिसने करीब 200 बच्चों की जान ली। और अब पानी का सैलाब। ऐसा सैलाब जिसे रोक पाना तो मुमकिन नहीं था, लेकिन जिसकी आशंका सबको थी। जिसकी आहट से हर साल लोग सहमे रहते हैं।

सरकारी मशीनरी भी इससे अनजान नहीं। इसलिए, उसने भी आदेश निकाले। लेकिन, बचाव की कोई तैयारी नहीं की गई। क्योंकि, जान-माल का कम नुकसान इन गिद्धों को पेट भरने की खुराक नहीं दे पाता। और जब एक चुनाव से निपटे हों और अगले साल फिर चुनाव में जाना हो तो खजाना भरा होना चाहिए, ​हम-आप तो मरने के लिए ही पैदा हुए हैं।

आदेश पर अमल कौन करे?

आपदा प्रबंधन विभाग ने 3 मई 2019 को बिहार के सभी जिलाधिकारियों एक पत्र भेजा। यह पत्र हर साल अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में जारी होता है और जून के आखिर तक इसमें दिए गए दिशा-निर्देशों को पूरा करना होता है। इनमें कंट्रोल रूम बनाना, नावों का इंतजाम, गोताखोरों की बहाली, राहत केंद्र के लिए जगह, राशन, दवा, मोबाइल टीम, तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वगैरह जैसे काम शामिल हैं। यदि प्रशासन ने इन निर्देशों को लेकर थोड़ी भी गंभीरता दिखाई होती तो हालात उतने भयावह नहीं होते जितने आज दिख रहे हैं।

लेकिन, 15 साल के ‘जंगलराज’ के बाद से जारी करीब डेढ़ दशक के ‘सुशासन’ में ये निर्देश रूटीन से ज्यादा महत्व नहीं रखते। अब चूॅंकि हर साल बाढ़ से पहले तटबंधों की मजबूती के नाम पर करोड़ों का वारा-न्यारा होता है, सो बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के केन्द्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने 13 जुलाई तक सभी तटबंध सुरक्षित होने का बुलेटिन जारी किया। जबकि तटबंध टूटने शुरू हो चुके थे। 14 जुलाई को तटबंध टूटने की बात विभाग ने तब मानी जब सोशल मीडिया में कटाव, गॉंवों के टापू बनने और सैकड़ों लोगों के फंसे होने के वीडियो की बाढ़ आ गई।

टीओआई में प्रकाशित इंटरव्यू

बांध से पानी बहे तो कोई क्या करेगा

14 जून को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित इंटरव्यू में बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने दावा किया है कि सरकार बाढ़ के हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। इतना ही नहीं अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कर सरकार ने 1-7 जून तक बाढ़ सुरक्षा सप्ताह भी मनाया था। जब सारे दावों की पोल खुल गई तो 15 जून को झा ने कहा कि ‘बांध से जब पानी बहेगा तो कोई क्या करेगा’।

24 घंटे तक बहाव के बीच पेड़ पर फँसे रहे

सीतामढ़ी के बाढ़ प्रभावित पंचायत सिंहवाहिनी की मुखिया रितु जायसवाल ने अपने फेसबुक पेज पर 13 जुलाई की शाम 6 बजकर 23 मिनट पर लिखा, “मुझे जिले के नरगा दक्षिणी पंचायत के गांव हरदिया से मदद के लिए फोन आ रहे है। भीषण बहाव में सुबह 8 बजे से 8 लोग पेड़ पर फँसे हैं। ग्रामीण सुबह से अधिकारियों को फोन कर रहे हैं पर कोई सुन नहीं रहा। मैंने अभी पटना आपदा प्रबंधन विभाग को इसकी सूचना दी है। उन्होंने तत्काल एनडीआरएफ की टीम भेजने का भरोसा दिलाया है।”

हरदिया में पेड़ पर फॅंसा ग्रामीण

तो क्या एनडीआरएएफ की टीम पहुॅंची? रितु ने 14 जुलाई की सुबह 9 बजकर 44 मिनट पर किए गए पोस्ट में बताया है, “आपदा को लेकर सीतामढ़ी जिले के एसी कमरे से बैठ कर जारी किए गए हाई अलर्ट के जमीनी हकीकत को जानिए। रात भर हम ग्रामीण अधिकारियों के साथ फोन पर थे। सुबह नतीजा ये निकला की एनडीआरएफ और एसडीआरएफ तमाम कोशिशों के बाद भी नहीं पहुँच पाई। आखिरकार, ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए बांस जोड़-जोड़ कर लगभग हिम्मत हार चुके 24 घंटे से पेड़ पर फँसे हुए ग्रामीण को आज सुबह 6 बजते-बजते बचा लिया और उसके बाद एनडीआरएफ को सूचित भी किया कि हमने बचा लिया है अब आने की ज़रूरत नहीं है सर। इसके बाद ग्रामीणों पर झूठ बोलने का आरोप लगाया गया और एफआईआर करने की धमकी दी गई। सदर एसडीओ मुकुल गुप्ता ने विकट परिस्थिति में लड़ रहे ग्रामीणों को एफआईआर की धमकी दे पीड़ित व्यक्ति को बाढ़ के इस भयावह हालात में जिला कार्यालय आने को कहा। इसकी सूचना भी मैंने पटना दी। वहॉं से फटकार लगने के बाद वो माने।”

रितु काफी चर्चित मुखिया हैं और अपने पंचायत की सूरत बदलने को लेकर उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। रितु ने फेसबुक पर बताया है कि बाढ़ 2017 से ज्यादा प्रलयकारी है और उनका पंचायत पूरी तरह तबाह हो चुका है।

नरूआर भी नहीं पहुॅंची एनडीआरएफ की टीम

बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित गॉंवों में झंझारपुर का नरूआर भी है। इस गॉंव में अचानक आए तेज बहाव में कई लोग बह गए जिनका अब तक पता नहीं चल पाया है। यहॉं बचाव के काम में जुटी मानव कल्याण केंद्र संस्था के पंकज झा ने ऑपइंडिया को बताया कि उनकी टीम को गाँव में एक बूढ़ी महिला के घर में फँसे होने की सूचना मिली। महिला का मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ था। सूचना मिलने के बावज़ूद एनडीआरएफ की टीम गाँव नहीं पहुँची। आखिर में स्थानीय लोगों ने खुद जोखिम उठा महिला को अगली सुबह बचाया।

फिर भी नहीं सुधरे

आपदा के 72 घंटे बाद राज्य सरकार ने पीड़ितों के लिए 196 राहत केंद्र और 644 सामुदायिक रसोई खोलने का दावा किया है। पर आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि मधुबनी में तीन ही राहत केंद्र खुले हैं, जबकि वहां के 15 प्रखंड बाढ़ प्रभावित हैं। सीतामढ़ी में भी प्रभावित इलाके का दायरा इतना ही बड़ा है, लेकिन वहॉं 148 राहत केंद्र खोल दिए गए हैं। बाढ़ से राज्य के 12 जिलों के करीब 26 लाख लोग पीड़ित हैं। जो काम 30 जून तक हो जाने चाहिए थे, वे अब हो भी रहे हैं तो इतने छोटे स्तर पर कि इसका कोई मतलब नहीं।

कंधे पर बोरी लादे डीएम

सो, अब कंधे पे बोरी लादे या हाफ पैंट पहनकर पानी में खड़े अधिकारियों की तस्वीर दिखे तो लहोलोहाट मत हो जाइएगा। असल में इनके लिए आप जानवरों जैसे ही हैं। यकीन न हो तो नेपाल से सटे जयनगर के पास बाढ़ के पानी में साथ-साथ तैरते जानवरों और इंसानों के इस वीडियो को देख लें।

वैसे, फिर से यह सारा दोष नेपाल के मत्थे मढ़ा जाएगा। लेकिन, बता दूॅं कि नेपाल किसी बराज से पानी नहीं छोड़ता। नेपाल से राज्य में आने वाली केवल दो नदियों गंडक और कोसी पर बराज है। दोनों की डोर बिहार के जल संसाधन विभाग के हाथों में ही है और पटना से आदेश के बाद ही बराज के फाटक खुलते हैं। इस विभाग के मुखिया वही संजय झा हैं जो बाढ़ आने से पहले दावा कर रहे थे कि सरकार अबकी बार पूरी तरह तैयार है।

‘अपने पालतू कुत्ते को कंट्रोल करें’- TDP सांसद ने पार्टी चीफ चंद्रबाबू नायडू को दी धमकी

तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। बीते दिनों पार्टी से 4 राज्यसभा सदस्यों के जाने के बाद अब एक और सांसद ने पार्टी और लोकसभा सदस्यता छोड़ने की धमकी दी है। विजयवाड़ा से टीडीपी सांसद केसिनेनी श्रीनिवास नानी ने पार्टी छोड़ने की धमकी देते हुए ट्विटर पर लिखा, “चंद्रबाबू यदि आप पार्टी में मेरे जैसे लोगों को नहीं चाहते हैं, तो आप मुझे बता सकते हैं। मैं संसद सदस्य के रूप में और पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दूँगा। अगर आप चाहते हैं कि मेरे जैसे लोग बने रहें, तो कृपया अपने पालतू कुत्ते को नियंत्रित करें।”

केसिनेनी के इस ट्वीट में ‘पेट डॉग’ शब्द का इशारा टीडीपी नेता और आंध्र प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बुद्धा वेंकन्ना की तरफ था। जिसके बाद इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वेंकन्ना ने कहा कि वो हमेशा चंद्रबाबू नायडू के वफादार रहेंगे। उन्होंने एक पिछड़ी और कमजोर जाति के व्यक्ति को एमएलसी की सीट दी है, जिसे वो विश्वास का नाम देना चाहते हैं। वेंकन्ना ने कहा कि केसिनेनी ने उनकी वफादारी का जो नाम (पेट डॉग) दिया है, उसे वो स्वीकार करते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो चंद्रबाबू नायडू और पार्टी के लिए ट्विटर वॉर खत्म कर रहे हैं।

बुद्धा वेंकन्ना, पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के काफी करीबी माने जाते हैं और बीते कई दिनों से टीडीपी के इन दोनों नेताओं की ट्विटर पर जंग जारी है। ये दोनों ही नेता एक दूसरे पर सत्तारूढ़ वाईएसआर कॉन्ग्रेस पार्टी को समर्थन देने की योजना बनाने को लेकर आरोप लगा रहे हैं। हाल ही में वेंकन्ना ने वाईएसआरसीपी के नेता विजय साई रेड्डी से मुलाकात की थी, जिसके बाद से ये खबरें और तेज हो गई थीं। टीडीपी के चार राज्यसभा सदस्यों के पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद चंद्रबाबू नायडू के लिए यह एक गंभीर संकेत हो सकता है।

गौरतलब है कि पिछले महीने टीडीपी के चार राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हो गए थे। टीडीपी सांसद वाईएस चौधरी, सीएम रमेश, टीजी वेंकटेश और जी मोहनराव ने राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू से मुलाकात की थी और टीडीपी से अपने इस्तीफे सौंपे थे। वेंकैया नायडू को संबोधित अपने पत्र में इन सांसदों ने कहा था कि वे नरेंद्र मोदी के शानदार नेतृत्व से प्रेरित और उत्साहित हुए हैं और अपने समूह का विलय बीजेपी में कर रहे हैं।

एक हिंदू लड़की मुस्लिम Live-In पार्टनर के द्वारा मार दी जाती है और तापसी पन्नू को मजाक सूझ रहा है!

चश्मेबद्दूर, पिंक और बेबी जैसी फिल्मों से बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने वाली तापसी पन्नू सोशल मीडिया पर अक्सर सक्रियता से किसी भी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए दिखाई पड़ती हैं, लेकिन इस बार एक बर्बर हत्या की घटना पर ट्वीट करना उन्हें महंगा पड़ गया। और ऐसा होता भी क्यों न? तापसी ने हत्या जैसे गंभीर मामले पर ‘व्यंग्य’ कसने का प्रयास किया, वो भी सिर्फ़ ‘कबीर सिंह’ फिल्म के डायरेक्टर के प्रति अपनी कुंठा निकालने के लिए!

तापसी ने 15 जुलाई को एक न्यूज पोर्टल की खबर को रिट्वीट किया। खबर थी- नागपुर में एक बॉयफ्रेंड ने अपनी 19 साल की गर्लफ्रेंड की कर दी हत्या, क्योंकि उसे लड़की के कैरेक्टर पर शक था। तापसी ने इसे शेयर करते हुए लिखा, “क्या पता वो एक-दूसरे से पागलों की तरह प्यार करते हों और ऐसा करना उसके लिए सच्चे प्यार पर मुहर लगाने जैसा था।”

तापसी पन्नू के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

तापसी के इस ट्वीट से स्पष्ट था कि यहाँ उन्होंने घटना की ओट में फिल्म कबीर सिंह के डायरेक्टर संदीप वांगा के उस बयान पर तंज कसा है। जिसमें उन्होंने कहा था कि वो प्यार ही क्या जिसमें थप्पड़ मारने की आजादी न हो। जिस पर सोशल मीडिया यूजर्स ने संदीप की बहुत आलोचना की थी, लेकिन उनके सफाई देने पर मामला लगभग शांत हो गया था। अब ऐसे में तापसी द्वारा किसी बर्बर हत्या की घटना पर कसा ‘तंज’ भी यूजर्स को अखर गया और यूजर्स ने तापसी को ट्विटर पर ही आड़े हाथों ले लिया।

एक यूजर ने लिखा- एक हिंदू लड़की को उसके मुस्लिम बॉयफ्रेंड द्वारा बर्बर तरीके से मार दिया जाता है और तुम्हें मजाक सूझ रही है। अगर यह उल्टा होता तो फेविकॉल पी के शांत बैठी रहती। मौत पर व्यंग्य करके इंसान गिरने की सीमा से भी परे होकर गिर जाता है।

तापसी को उनके तंज पर जमकर ट्रोल किया गया। जिसके बाद उन्होंने वैधानिक चेतावनी लिखते हुए दोबारा पोस्ट किया, “जिन लोगों के पास व्यंग्य की समझ नहीं है, वो प्लीज मेरा ट्वीट इग्नोर करिए। शुक्रिया।”

तापसी द्वारा माफ़ी की उम्मीद लगाए बैठे यूजर्स को जब इस तरह का जवाब मिला तो उनके सपोर्टर भी उन पर भड़क उठे और उन्हें जमकर सुनाया। किसी ने उन्हें समझाया कि हत्या जैसी घटना पर व्यंग्य करना सही नहीं है। तो किसी ने कहा, “एक लड़की मार दी गई और तुझको मज़ाक सूझ रहा है, ज्ञान पेल रही है किसी की लाश पर, शर्म तो बेच कर पहले ही खा गई हो… थोड़ी सी इंसानियत भी नहीं है तुममें… तेरे घर पर कोई मरे ना तब ये sarcasm दिखाना लोगो को…”

हत्या की घटना पर दी गई व्यंग्य प्रतिक्रिया पर एक यूजर ने उनके लिए dumb शब्द का प्रयोग किया और पूछा कि हत्या के बाद आखिर कोई कैसे व्यंग्य ट्वीट कर सकता है।

प्रशांत नाम के ट्विटर यूजर ने तो यहाँ तक लिखा, “मैं चाहता हूँ कि तुम्हारा प्रेमी भी तुम्हें इसी तरह प्रेम करे। बुरा मत मानना, मैं भी व्यंग्य कर रहा हूँ।”

कई यूजर ने तापसी पर इल्जाम लगाया कि वे व्यंग्य के जरिए उस हत्यारे को डिफेंड करने की कोशिश कर रही है, जिसने प्यार के नाम पर 19 साल की लड़की को मार दिया।

चेहरे को कुचला, हाथ को किया क्षत-विक्षत… उभरती मॉडल ख़ुशी परिहार का बॉयफ्रेंड अशरफ़ शेख़ गिरफ़्तार

बाढ़ से बेहाल मिथिलांचल में जान-माल भगवान भरोसे, राहत-बचाव की तो पूछिए मत

बिहार के अधिकतर इलाके भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं। कोसी, कमला, बागमती, गंडक, महानंदा समेत राज्य की सभी बड़ी नदियां उफान मार रही हैं। सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, मोतिहारी, अररिया समेत कई जिलों में जगह-जगह तटबंध टूटने के कारण स्थिति बेहद भयावह है। खासकर, ग्रामीण इलाकों की। मधुबनी, सीतामढ़ी और दरभंगा में तो दर्जनों गांव ऐसे हैं जो टापू बन चुके हैं। इन गांवों के चारों तरफ बाढ़ का पानी है और सड़क संपर्क समाप्त हो गया है।

इस तरह के विकट हालात में भी राहत और बचाव का कार्य कुछ व्यक्तियों और सामाजिक संस्थानों के भरोसे ही चल रहा है। हालाँकि आपदा के 72 घंटे बाद राज्य सरकार ने पीड़ितों के लिए 196 राहत केंद्र और 644 सामुदायिक रसोई खोलने का दावा किया है। इनमें 148 केंद्र सीतामढ़ी जिले में खोले गए हैं और मधुबनी में केवल तीन। जबकि, मधुबनी और सीतामढ़ी दोनों जिलों के 15-15 प्रखंड बाढ़ प्रभावित हैं। सरकार की तरफ से बताया गया है कि एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की 26 टुकड़ियां लोगों को बचाने में जुटी है।

लेकिन, प्रभावित इलाकों से आ रही ख़बरें कुछ अलग ही तस्वीर पेश करते हैं। बचाव के काम में जुटी मानव कल्याण केंद्र संस्था के पंकज झा ने ऑपइंडिया को बताया कि अभी भी पीड़ित सरकारी मदद के इंतजार में हैं।

उन्होंने बताया कि उनकी टीम को झंझारपुर के नरुआर गाँव में एक बूढ़ी महिला के घर में फँसे होने की सूचना मिली। महिला का मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ था। जानकारी होने के बावज़ूद एनडीआरएफ की टीम गाँव नहीं पहुँची। आखिर में स्थानीय लोगों ने खुद जोखिम उठा महिला को बचाया।

पंकज झा और उनके साथी मुख्यतः झंझारपुर इलाक़े में बचाव-कार्य में लगे हुए हैं। यहाँ का नरुआर गाँव बाढ़ से ज्यादा प्रभावित है। इस गाँव के कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

पंकज झा ने बताया कि समय बीतने के साथ-साथ अन्य प्रबुद्ध जन भी राहत कार्य के लिए सामने आए हैं। इनमें कई वरिष्ठ नागरिक भी हैं, जिनके अनुभवों का लाभ बचाव-कार्य में जुटे लोगों को मिल रहा है।

पंकज झा व उनके अन्य साथी
रात में भी नहीं रुकता है बचाव व राहत कार्य
बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्रियाँ

स्थानीय प्रशासन के सहयोग के बारे में पूछने पर पंकज झा ने बताया कि उनके साथ बचाव-कार्य कर रहे लोग स्थानीय प्रशासन पर ही निर्भर नहीं हैं। हालाँकि, उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि मेडिकल कैम्प के डॉक्टरों व एनडीआरएफ टीम का अब पूरा सहयोग मिल रहा है। उन्हें अभी तक स्थानीय प्रशासन की मदद की ज़रूरत नहीं पड़ी है। उन्होंने इस बात पर ख़ुशी जताई कि उनके पास इस बचाव कार्य के लिए मानव संसाधन की कमी नहीं है।

अपने साथियों संग राहत सामग्रियाँ जुटाने व पीड़ितों तक पहुँचाने में लगे पंकज झा

पंकज झा ने कहा कि चूँकि वे लोग आधिकारिक भूमिका में नहीं हैं, स्थानीय प्रशासन द्वारा बाढ़ से पहले क्या तैयारियाँ की गई थीं- इस बारे में उन्हें कोई ख़ास जानकारी नहीं है।

बिहारी पत्रकारों, नीतीश कुमार की काहिली को डिफेंड कर रहे हो? इसी बाढ़ में डूब क्यों नहीं जाते?

बालिका गृह कांड किस स्तर का होगा, और उसमें किस स्तर के लोग अपराधी होंगे इसका अंदाजा आप इस बात से ही लगा सकते हैं कि मीडिया में इसकी फॉलोअप स्टोरी नहीं मिलती और सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेकर बिहार सरकार को लताड़ लगानी पड़ती है कि इस पर बात आगे क्यों नहीं बढ़ रही। एक ऐसा भयावह कांड जो भारत के हर जिले के हर ऐसे शेल्टर होम या बालिका गृह की कहानी हो सकती है, वो कुछ दिनों के लिए राष्ट्रीय खबर बनी, लेकिन फिर चर्चा से गायब हो गई। मैं कोई आँकड़े नहीं दूँगा क्योंकि उसकी ज़रूरत नहीं है। बच्चियों को सहारा देने के नाम पर उनका यौन शोषण व्यवस्थित तरीके से करवाने की भयावहता शायद आँकड़ों की मोहताज नहीं।

चमकी बुखार या इन्सेम्फलाइटिस से मरे हुए सौ से ज्यादा बच्चों ने भारतीय मीडिया की ड्रामेबाजी तो देख ली, लेकिन जिनसे सवाल होने थे, जो फॉलोअप किया जाना था वो नहीं किया गया। लगातार एंकर स्वयं ही सर्वज्ञ बन कर बताते रहे कि किसका इलाज होना चाहिए, किसका नहीं, लेकिन नितीश फिर बच गए। सामर्थ्यवान हमेशा ही पीछे हटते रहे और सोशल मीडिया ने अपने स्तर से बहुत कोशिश की। ये मुद्दा भी बहुत भयावह था, लेकिन नितीश को क्लीन चिट मिल गई।

शिक्षकों की सैलरी का मुद्दा तो जब से पैदा हुआ हूँ तब से चल ही रहा है। बिहार के स्कूलों में आख़िर शिक्षक किस मोटिवेशन से पढ़ाएगा अगर आप उसकी सैलरी साल और छः महीने पर देंगे? शिक्षकों के प्रति लालू भी उदासीन था, नीतीश भी कुछ अलग नहीं। अब प्रदेश के हजारों शिक्षक पटना पहुँच कर घेराव करने की बातें कर रहे हैं। शिक्षा का संकट भले ही स्वास्थ्य और बाढ़ से भयावह न हो, लेकिन कम भयावह भी नहीं। पत्रकार लोग बस इसकी रिपोर्टिंग करते हुए खानापूर्ति करके डेट बता देते हैं कि हड़ताल कब होगी। ये कभी मुद्दा बन ही नहीं पाया।

उसके बाद का मुद्दा वो मुद्दा है जो हर साल बिहार को तबाह कर जाता है, लेकिन सरकार ज्यों की त्यों बनी रहती है। विभागों से ‘सारे तटबंध सही हैं’ का लेख हर महीने फाइलों में खिसकता रहता है, लेकिन बारिश होते ही दस जगहों से वह टूटते हैं, और वही फाइल ये सूचना देती है कि टूट गई। आखिर कौन बनाता है यह रिपोर्ट? हर महीने दुरुस्त रहने वाला तटबंध अचानक से टूट कैसे जाता है? फाइलों में तो तटबंध हमेशा दुरुस्त ही रहेंगे, क्योंकि फाइल में पानी नहीं घुसता।

उसके बाद अगर आप इस बाढ़ की रिपोर्टिंग देखिएगा तो पता चलेगा कि लोग छः कॉलम में जलमग्न, जलराशि, मंजर, भयावह स्थिति आदि शब्दों का प्रयोग कर फोटो छाप देते हैं और बताते हैं कि कितना इलाका चपेट में आया हुआ है। इसके आगे की बात गायब हो जाती है। बिहारी पत्रकार, जो कि पत्रकारिता के उद्योग में रैंडमली ढेला तीन बार फेंकने पर एक बार अपने सर पर तो लेगा ही, वो ज्ञान दे रहा है कि इसमें जिम्मेदारी कलेक्टर कि है। ये वही पत्रकार हैं जो अपनी राजनैतिक विचारधारा से विपरीत विचार रखने वाले लोगों से घोड़े की टाँग टूटने पर इस्तीफा माँग लेते हैं।

ये वही पत्रकार समूह है जो गौरी लंकेश की हत्या पर दिल्ली के प्रेस क्लब में जरूर शिरकत करता है लेकिन बिहार के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या पर चुप रहता है। यही कारण है कि नीतीश को ऐसे दिखाया जाता है जैसे उनके बिना बिहार बंद हो जाएगा या फिर वो जो कर रहे हैं वही सर्वोत्तम समाधान है। बिहार में बाढ़ का आना तय है, ये बात सबको पता है लेकिन इसका समाधान कुछ नहीं।

समाधान शायद इसलिए नहीं है क्योंकि बाढ़ सरकारी महकमे के अफसरों और नेताओं के लिए उत्सव है। ये वो समय है जब राहत पैकेज के रूप में भ्रष्टाचार का पैकेज आता है। आखिर लगभग पंद्रह साल से सत्ता में रही पार्टी इस समस्या का कोई हल ढूँढने में विफल क्यों रही है? अगर कोसी द्वारा अपने पुराने बहाव क्षेत्र में वापस आने वाले साल को छोड़ दिया जाए, तो बाकी के हर साल एक ही समस्या कैसे आ जाती है? इस पर हवाई दौरा करने से क्या होता है? या हम यह मान लें कि दुनिया के किसी इलाके में, या भारत के ही किसी भी इलाके में बाढ़ को लेकर कोई सही समाधान नहीं आया है?

पत्रकारों का शायद सबसे बड़ा प्रतिशत बिहारियों का होगा लेकिन सारे अख़बारों पर महज ‘कहाँ क्या हुआ, कितने लोग मरे, कितने बह गए, किस जिले का कितना हिस्सा डूबा और मुख्यमंत्री ने आज क्या बयान दिया’ यही चल रहा है। कौन ज़िम्मेदारी लेगा, तटबंध कैसे टूट गए, हर साल बचाव कार्य का कितना पैसा कहाँ गया, इसका ब्यौरा नहीं दिखता। आख़िर बाढ़ में राहत पैकेज का करोड़ों रूपया हर साल किस हालत में बहा दिया जाता है कि अगले साल फिर वही समस्या हो जाती है?

पता नहीं इन लोगों को नीतीश ने घुट्टी पिला रखी है या ये भूल गए कि बिहार के ही हैं और बाढ़ की भयावहता से दूर भले हैं, अनजान नहीं, इसलिए उनकी ज़िम्मेदारी बनती है कि इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाया जाए और सवाल पूछे जाएँ। लेकिन राजनैतिक उथल-पुथल के दिनों में शायद नितीश के पाला बदलने के अंदेशे में ये समझ नहीं पा रहे हैं कि विरोध करें तो किन शब्दों में करें। कई लोग जो भाजपा के मुखर विरोधी रहे हैं वो भी ‘सॉफ़्ट’ हो गए हैं और बता रहें हैं कि नेताओं को छोड़ कर बाकी सब ज़िम्मेदार हैं। संस्थानों की विचारधारा के हिसाब से चलने की बात और है, लेकिन फेसबुक पर पोस्ट तो लिखे जा सकते हैं?

हर स्तर पर सिर्फ सूचनाएँ देना लेकिन किसी भी तरीके से नेतृत्व को ज़िम्मेदार न ठहराना, बल्कि डिफेंड करने लगना अलग स्तर की धूर्तता है। इतना जोड़-घटाव तो लोग चुनाव के समय भी नहीं करते जितना हमारे बिहारी पत्रकार शायद इस आपदा के वक्त कर रहे हैं जो हर स्तर पर बिहार को शब्दशः और वैसे भी भीतर से ही काटे जा रही है।

कर्नाटक में 4-5 दिन में आ जाएगी BJP की सरकार: येदियुरप्पा का दावा

कर्नाटक में सत्ता में बने रहने के लिए जहाँ कॉन्ग्रेस-जेडीए गठबंधन संख्या बल की गणित से जूझ रहा है, वहीं बीजेपी की कर्नाटक इकाई के प्रमुख बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार (जुलाई 15, 2019) को कहा कि उन्हें अगले 4-5 दिन में सरकार बनाने का पूरा भरोसा है। येदियुरप्पा ने पत्रकारों से कहा, “मैं इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि अगले चार से पाँच दिन में राज्य में बीजेपी की सरकार आ जाएगी। बीजेपी, कर्नाटक को अच्छा प्रशासन देगी।” साथ ही, येदियुरप्पा ने दावा किया है कि कुमारस्वामी राज्य की गठबंधन सरकार को बचाने में नाकाम रहेंगे।

आप लोगों ने मोदी को वोट दिया है, इसीलिए समस्या लेकर भी मोदी के पास जाओ

येदियुरप्पा ने यह दावा ऐसे समय में किया है, जब विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने मुख्यमंत्री कुमारस्वामी द्वारा दिए गए विश्वास मत के प्रस्ताव पर 18 जुलाई को चर्चा का वक्त दिया है। कुमारस्वामी की सरकार 16 विधायकों के इस्तीफा देने के बाद अधर में लटकी है। पिछले साल ऐसी ही परिस्थितियों में इस्तीफा देने वाले येदियुरप्पा ने कहा, “कुमारस्वामी मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रह पाएँगे। ये बात वो भी जानते हैं। मुझे लगता है कि वो एक अच्छे भाषण के बाद इस्तीफा दे देंगे।”

गौरतलब है कि, कर्नाटक में 224 सदस्यीय विधानसभा में 105 सीटें हासिल कर के सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी भाजपा की तरफ से विश्वास मत के दौरान जरूरी आँकड़े नहीं जुटा पाने के बाद येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वहीं, अगर इस बार 16 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार हो जाता है, तो गठबंधन का आँकड़ा मौजूदा 116 से घटकर 100 ही रह जाएगा।

‘बाँटनी होगी कुरान’- जमानत के लिए कोर्ट के इस शर्त को मानने से ऋचा भारती ने किया इनकार

राँची की एक अदालत ने ग्रैजुएशन की छात्रा ऋचा भारती को कुरान बाँटने की शर्त पर जमानत दे दी है। ऋचा पर आरोप है कि उन्होंने फेसबुक पर सांप्रदायिक (लेकिन आपत्तिजनक) पोस्‍ट किया था। इस संबंध में अंजुमन कमिटी ने पोस्ट को आपत्तिजनक और धार्मिक भावना को आहत करने वाला बताते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज कराया था।

सशर्त जमानत देते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऋचा को विभिन्‍न संस्‍थाओं को कुरान की 5 प्रतियाँ बाँटनी होंगी। न्‍यायिक मैजिस्‍ट्रेट मनीष सिंह ने ऋचा को निर्देश दिया कि वह कुरान की एक कॉपी अंजुमन कमिटी और 4 अन्‍य कापियाँ विभिन्‍न स्‍कूलों और कॉलेजों को बाँटेंगी। साथ ही उसकी रशीद लेनी होगी।

कोर्ट ने इसके लिए ऋचा को 15 दिनों का समय दिया है। हालाँकि कोर्ट ने इस कार्य में (कुरान की 5 प्रतियाँ बाँटने) स्थानीय पुलिस को ऋचा की मदद करने का भी निर्देश दिया।

ऋचा भारती ने कोर्ट के आदेश को मानने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि आज कुरान बाँटने का आदेश दिया गया है, कल को इस्लाम स्वीकार करने या नमाज पढ़ने का आदेश देंगे तो वह कैसे स्वीकार किया जा सकता है। ऋचा ने अपने तर्क को आगे बढ़ाते हुए यह भी कहा कि क्या किसी समुदाय विशेष के व्यक्ति को सजा के तौर पर दुर्गा पाठ करने या हनुमान चालीसा पढ़ने का आदेश कोर्ट ने सुनाया है?

क्या है पूरा मामला

राँची के पिठोरिया से ग्रेजुएशन पार्ट थ्री में पढ़ाई करने वाली ऋचा भारती पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए धर्म-विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इससे समुदाय विशेष के लोग आहत हो गए थे। इसकी प्रतिक्रिया में अंजुमन कमिटी पिठोरिया ने उनकी पोस्ट को आपत्तिजनक और धार्मिक भावना को आहत करने वाला बताते हुए एफआईआर दर्ज कराया था। स्थानीय पुलिस ने अंजुमन कमिटी की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 2 घंटे के भीतर ऋचा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

FB पोस्ट पर बवाल: लड़की को जेल लेकिन संप्रदाय-विशेष के लोग अब भी बाहर

पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई से स्थानीय लोग गुस्से में आ गए थे। उनका कहना था कि ऋचा को दो घंटे के अंदर जेल भेज दिया गया, जबकि उसी पोस्ट पर कई गंभीर टिप्पणी करने वाले बाहर हैं। थानेदार द्वारा बिना जाँच-पड़ताल किए ऋचा को जेल भेजने के खिलाफ शनिवार (जुलाई 13, 2019) को जनाक्रोश भड़क गया था। लोग उन्हें रिहा करने और थानेदार पर कार्वाई की माँग कर रहे थे।

ऋचा भारती के समर्थन में विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस, बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच के राँची जिला के पदाधिकारी भी थाना पहुँचे थे। लोगों ने थानेदार पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि अगर जिस धर्म को लेकर लड़की ने टिप्पणी की है, तो उसी धर्म के लोगों ने प्रतिक्रिया में लड़की के धर्म को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की है। ऐसे में जब मामला दोनों तरफ से था तो फिर कार्रवाई एकतरफा क्यों की गई?

‘प्रदेश में कमलनाथ सरकार को हिलाने वाला कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ, मिला तो कर देंगे 3 टुकड़े’

कमलनाथ सरकार के दो मंत्रियों द्वारा भाजपा के लिए विवादस्पद बयान दिया गया है। खबरों के मुताबिक एक ओर जहाँ झाबुआ में लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह ने भाजपा की मानसिकता की तुलना ‘कुत्तों’ से की है वहीं, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ़ अकील ने भाजपा के लिए कहा है कि अगर किसी ने गड़बड़ की तो वे पार्टी के 3 तुकड़े कर देंगे।

एबीपी के अनुसार, एक दिन के दौरे पर झाबुआ पहुँचे सज्जन सिंह ने कहा, “बीजेपी कह रही है कि कुत्तों को स्थानांतरित कर दिया गया है। ये ठीक लगता अगर वे इसे ‘डॉग स्कॉड’ कहते। लेकिन, उन्होंने कहा कि ‘कुत्तों’ को स्थानांतरित कर दिया गया। उनकी मानसिकता कुत्तों जैसी है। क्या करें!”

वहीं मंत्री आरिफ़ अकील के मुताबिक, प्रदेश में उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है। आरिफ़ अकील ने कहा, “प्रदेश में कमलनाथ सरकार को हिलाने वाला कोई माई का लाल पैदा ही नहीं हुआ। अगर किसी ने ज्यादा गड़बड़ की तो हम बीजेपी के तीन टुकड़े कर देंगे।”

कमलनाथ ने की रीमा और जया की छुट्टी

गौरतलब है कि बीते दिनों कमलनाथ सरकार ने प्रदेश से 46 स्निफर डॉग्स का स्थानांतरण किया था। जिसके बाद भाजपा ने उन पर निशाना साधा था। बीजेपी ने कहा था कि कमलनाथ सरकार का तबादले के अलावा प्रदेश के हित के किसी भी अन्य विषय पर ‘फोकस’ नहीं है। वहीं कर्नाटक की हालिया स्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर भी सवाल उठ रहे थे। क्योंकि मध्य प्रदेश में भी कॉन्ग्रेस पूर्ण बहुमत में न होकर सपा, बसपा एवं निर्दलीय विधायकों के समर्थन से टिकी हुई है। इन दोनों घटनाओं पर ही कमलनाथ सरकार के मंत्रियों का ये विवादस्पद बयान आया है।

पश्चिम बंगाल में फिर भड़की हिंसा: 50 देशी बम बरामद, 2 गिरफ्तार, धारा 144 लागू

लोकसभा चुनाव और उसके बाद तक कई राजनीतिक हिंसाओं का गवाह रहे पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले के भाटपाड़ा और कांकिनारा क्षेत्र में एक बार फिर से हिंसा हुई। सोमवार (जुलाई 15, 2019) सुबह 10 बजे से अपराधियों ने कांकीनाड़ा और भाटपाड़ा के एक अस्पताल समेत विभिन्न इलाकों में बमबाजी की। इसमें कई लोग घायल हो गए। अस्पताल के सामने बम फेंकने से मरीजो में दहशत है, तो वहीं स्थानीय लोग भी इस घटना से काफी डरे हुए है। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

दरअसल, ये हिंसा शुक्रवार (जुलाई 13, 2019) को उस वक्त शुरू हुई, जब कांकीनारा में 30 वर्षीय संदिग्ध अपराधी प्रभु शॉ की एक इनकाउंटर में मौत हो गई। प्रभु शॉ की मौत के बाद अगले दिन भाटपारा पुलिस स्टेशन के नजदीक बम फेंके गए, जिसमें 8 लोग घायल हो गए थे।

धमाके के बाद बैरकपुर पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के नेतृत्व में रात भर इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान पुलिस को कांटापुकुर इलाके में 50 से भी ज्यादा जिंदा बम और बम बनाने का सामान मिला। पुलिस ने बमों को खाली स्थान पर ले जाकर निष्क्रिय कर दिया। हालात को देखते हुए मौके पर जगदल थाने की पुलिस को अतिरिक्त बलों का सहारा लेना पड़ा और रैपिड एक्शन फोर्स का सहारा लेना पड़ा। वहाँ के मौजूदा हालात को देखते हुए स्थिति पर नियंत्रित करने के लिए धारा 144 लगा दी गई है।

वहीं, घटना से गुस्साए लोगों ने भाटपाड़ा नगरपालिका व अस्पताल में घुसकर जम कर हंगामा किया। लोगों ने काकिनारा रेलवे स्टेशन पर रेल मार्ग को अवरुद्ध कर विरोध प्रदर्शन किया। 2 घंटे से अधिक समय तक रेल अवरोध होने की वजह से बैरकपुर-नैहाटी डिवीजन में ट्रेन सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई। कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, जबकि कुछ ट्रेनें देर से चलीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस के सामने ही अपराधी बम चला रहे  हैं और पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही। हालाँकि, बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट के डिप्टी कमिश्नर (जोन 1) अजॉय ठाकुर ने कहा, ‘‘कुछ बदमाशों ने सोमवार को तीन जगहों पर बम फेंके लेकिन स्थिति अब नियंत्रण में है।’’