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मुझसे पूछा ‘हिन्दू हो?’ फिर उठा ले गई मंदिर तोड़ने वाली भीड़ – 17 वर्षीय केशव लौटा घर

चाँदनी चौक में मुस्लिम भीड़ द्वारा दुर्गा मंदिर तोडने, मंदिर में पेशाब करने जैसी घटनाओं के कई रहस्यमयी पहलू एक-एक कर जब सामने आए तो पता चला कि घटना के बाद से 17 साल का एक हिंदू किशोर केशव गायब हो गया था।

सुदर्शन न्यूज़ के अनुसार केशव घर पहुँच चुका है। सुदर्शन न्यूज़ से बात करते हुए केशव ने बताया कि घटना की रात वो दुर्गा मंदिर गली में खड़ा था, जहाँ 4-5 युवकों ने उसे आकर पूछा कि क्या वो हिन्दू है? अपनी पहचान हिन्दू बताने के बाद उन लड़कों ने केशव को थप्पड़ मारे और उसके साथ बदतमीजी की।

हालाँकि, ये देखकर एक मुल्ला जी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन लड़कों ने उन्हें भी वहाँ से चले जाने को कहा। केशव रात 10 बजे के लगभग गली में खड़ा था जब उसको वहाँ से खींचकर ले जा रहे थे। इसके बाद केशव वहाँ से अपनी पहचान छुपाने के लिए चेहरे पर कपड़ा लपेटकर भाग निकला।

चाँदनी चौक में दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ करने वाली रात ही केशव अपने घर वापस लौटकर नहीं आया था जिससे उसकी माँ चिंतित थी। मंदिर से गायब केशव की माँ ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज करवाई थी।

एफआईआर के मुताबिक, दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ और गली में रहने वाले हिंदुओं की पिटाई करने के बाद मुस्लिमों की उन्मादी भीड़ मोना के घर में घुस गई और उसके बेटे को पीटने लगी। जब मुस्लिमों की भीड़ घर में घुसी और उसके बेटे को अगवा किया तब मोना आराम कर रही थी। केशव सक्सेना नामक इस युवा की बाद में कोई खबर नहीं लगी। इस नाबालिग के माता-पिता मोना और देवेंद्र गुस्से और सदमे में हैं।

कल ही केशव की माँ ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “मैंने पुलिस से बात करने की कोशिश की और उन्हें भरोसा दिलाया की उनकी बात सामने रखूँगी।” उन्होंने कहा, “हमारी बात कोई नहीं बता रहा। मेरा 17 साल का बेटा घटना वाले दिन से गायब है। मुस्लिमों की भीड़ उसे अगवा कर ले गई।” जब ऑपइंडिया एडिटर घटनास्थल पर पहुँचे तो इस घटना के तीन दिन बीत चुके थे और अभी तक भी केशव का कोई सुराग नहीं मिला था। जिससे एक बार सर सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की भी आशंका थी।

राहुल गाँधी ने दिया इस्तीफ़ा, मोदी जी ने कहा- नहीं कर सकूँगा कभी मन से माफ़

पूरा देश को इस्तीफे का इन्तजार था धोनी का, लेकिन इस्तीफ़ा आया है कॉन्ग्रेस के राजपरिवार से। एक बार फिर राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और साबित कर दिया है कि वो वाकई में जिम्मेदारियों से और पार्टी अध्यक्ष पद की एक्टिंग करते हुए दुखी हो चुके हैं। जिस तरह से साबू को जब गुस्सा आता है, तब किसी ग्रह पर ज्वालामुखी फूटता है, ठीक उसी तरह से जब राहुल गाँधी को जब इस्तीफ़ा आता है, तब किसी ना किसी ग्रह पर ज्वालामुखी फूटता है।

राहुल गाँधी का यह इस्तीफ़ा तब सामान्य घटना होती अगर इस से सिर्फ राहुल गाँधी अकेले प्रभावित हो रहे होते। जबकि उनके एक इस्तीफे पर कई ऐसे लोगों का भविष्य टिका है, जो राहुल गाँधी के दम पर विश्वविजय के अभियान का सपना देख रहे थे।

प्रसिद्ध इतिहासकार (कम कहानीकार ज़्यादा) नामचन्द्र गुहा ने नाम न बताने की शर्त पर कहा है कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी अगले चुनाव से पहले-पहले ब्रेग्जिट से बागी राष्ट्रों के शीर्ष नेतृत्व से भी लगातार सम्पर्क बनाकर चल रहे हैं और सम्भावनाएँ हैं कि ‘पतंजलि यूरोपियन संघ’ की स्थापना कर के कम से कम 4 महाद्वीपों को इसकी सदस्यता की शपथ दिलवाकर वहाँ भी अपनी सरकार बनाने का दावा करने वाले हैं। लेकिन यह सब तभी संभव हो पाता अगर कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में राहुल गाँधी एक अमर ज्योति की तरह डटकर खड़े रहते और कॉन्ग्रेस की नाव डुबोने में भाजपा की कंधे से कन्धा मिलाकर मदद करते।

इस बार जिस दृढ़निश्चय के साथ राहुल गाँधी अपने इस्तीफे के फैसले पर अड़े हुए हैं, उससे भाजपा और तमाम गाँधी परिवारविरोधी शक्तियों में निराशा की लहर छाई हुई है। राहुल गाँधी का आज का इस्तीफे वाला ट्वीट पढ़ने के बाद से भाजपा कार्यकर्ता एक दूसरे से खुलकर बात नहीं कर रहे हैं और किसी भी सवाल का जवाब सिर्फ ‘जय श्री राम’ कहकर ही दे रहे हैं।

कुछ कार्यकर्ताओं का तो यहाँ तक भी कहना है कि अब वो केदारनाथ की ध्यान गुफा जाकर ही जीवनयापन करेंगे क्योंकि राहुल गाँधी के इस्तीफे के बाद से अब राजनीति में ‘फन’ गायब हो जाएगा। उन्हें आज भी राहुल गाँधी की वो प्रतिज्ञा याद है, जिसमें उन्होंने वायदा किया था- “मैं ये मजा पूरे देशवासियों को देना चाहता हूँ।”

कुछ गुप्त सूत्रों का तो यह भी कहना है कि इस इस्तीफे के पीछे जो कारण है वह असल में यह है कि राहुल गाँधी अब उस BHEL के मोबाइल की तलाश में जा रहे हैं, जिसका जिक्र उन्होंने अपनी चुनावी रैलियों में किया था।

शेयर मार्केट में गिरे आलू से सोना बनाने वाली मशीन के भाव

राहुल गाँधी के इस इस्तीफे का प्रभाव इतना शक्तिशाली था कि इसका असर सिर्फ भाजपा कार्यालय तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि शेयर मार्केट में भी इसके हलके झटके महसूस किए गए। टीशर्ट और बनियान बेचकर पत्रकारिता में अपनी जड़ें स्थापित करने वाली वेबसाइट ‘दी झोलाटॉप’ के मशहूर व्यर्थशास्त्री ने इस मामले की पड़ताल करते हुए पाया कि उन लोगों ने अब ‘आलू से सोना मशीन मेकर्स-ब्रदर्स’ वाली कम्पनी से हाथ खींच लिए हैं, जिन्हें यकीन था कि आज नहीं तो कल, यह मशीन राहुल गाँधी जी के नेतृत्व में जनता को सौंप दी जाएगी। लेकिन गरीब आदमी के लिए यह स्वप्न देखने वाले युगपुरुष के इस्तीफे के बाद यह कम्पनी डूबने के कगार पर है और शेयर मार्किट से भी समाचार ठीक नहीं आ रहे हैं।

मोदी जी नहीं कर पाएँगे कभी दिल से माफ़

राहुल गाँधी के इस्तीफे देने की घटना से पीएम मोदी विशेष तौर पर दुखी हैं। जब राहुल गाँधी के इस्तीफे पर उनकी क्या जानने के लिए मीडियाकर्मी उनके आवास पर पहुँचे, तो मोदी जी ने कहा- “हालाँकि, यह राहुल गाँधी जी का व्यक्तिगत मसला है। फिर भी, देशहित के ऊपर उन्होंने अपना व्यक्तिगत हित रखा है, जिसके लिए मैं उन्हें दिल से कभी माफ़ नहीं कर पाउँगा।”

यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी जी जब भी किसी को दिल से माफ़ नहीं कर पाते हैं तो कुछ समय बाद ही वह व्यक्ति संसद में शपथ लेते हुए देखा जाता है। हो सकता है कि राहुल गाँधी पर भी इसी तरह से कोई कृपा बरसे और वो आजीवन नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देते नजर आएँ।

अमित शाह ने बुलाई उच्चस्तरीय आपात बैठक

राहुल गाँधी के इस्तीफे की खबर से कार्यकर्ताओं के गिरे हुए मनोबल को देखकर अमित शाह ने तुरंत एक्शन लेते हुए एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए विशेष मोटिवेशनल सेशन चलाए जाएँगे। साथ ही कुछ ऐसे मोटिवेशनल गुरुओं के द्वारा भाषण दिलवाए जाएँगे, जो हाईस्कूल में छात्रों के फेल होने पर उन्हें ‘चिल’ करने की नसीहत देते हैं।

कॉन्ग्रेस के नए पार्टी अध्यक्ष को देखकर फूट-फूटकर रोए आडवाणी जी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कॉन्ग्रेस ने युवा की जगह अब महा-वरिष्ठ अध्यक्ष को नेतृत्व देने का फैसला ले लिया है और यह नाम है- मोतीलाल वोरा। हालाँकि वोरा जी का इस बात पर यह कहना है कि उन्हें तो इस बारे में कोई जानकारी तक नहीं है। अब कॉन्ग्रेस की जिम्मेदारी तो यही बनती है कि वो किसी भी तरह से वोरा साहब को कम से कम 2024 चुनाव की दहलीज तक अध्यक्ष पद पर बने रहने को मजबूर कर सकें। एक झलक कॉन्ग्रेस के संभावित अध्यक्ष जी पर –

मीडिया के सूत्रों ने मोतीलाल वोरा को बना दिया है कॉन्ग्रेस अध्यक्ष, हालाँकि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है

फिलहाल तो मीडिया के सूत्रों की बात को वोरा जी ने दबा दिया है लेकिन यदि वाकई में मोती लाल वोरा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष इस अवस्था में बनते हैं, तो ये देखकर भाजपा की मार्गदर्शक मंडली में बैठे लाल कृष्ण आडवाणी जी को अभी भी अपनी पार्टी बदलने पर विचार करना चाहिए।

चमकी से मर रहे बच्चे और विधानसभा में आम बाँट रही नीतीश सरकार

बिहार में चमकी बुखार से बच्चों की मौत को लेकर कठघरे में घिरी नीतीश कुमार की सरकार ने एक नए विवाद को न्योता दे दिया है। बिहार विधानसभा में आम और उसके पौधे बाँटने को लेकर सरकार की तीखी आलोचना हो रही है। विपक्षी दल राजद के सदस्यों ने आम और उसके पौधे लेने से मना कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता राबड़ी देवी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि एक तरफ राज्य में कुपोषण से बच्चे मर रहे हैं, दूसरी ओर सरकार आम और उसके पौधे बाँट रही है। उनके नेतृत्व में विधानसभा के बाहर विपक्षी दल के विधायकों ने प्रदर्शन भी किया।

हालाँकि, राज्य सरकार ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा है कि पर्यावरण के प्रति जागरुकता फैलाने के मकसद से ऐसा किया गया।

बिहार सरकार में मंत्री श्याम रजक ने बताया कि लोगों को ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से आम के पौधे बाँटे गए। उन्होंने कहा, “पर्यावरण खतरे में है। आम के पौधे इसलिए बाँटे गए कि लोग और पेड़ लगाए और हम इस समस्या से निजात पा सकें।”

बिहार में फिलहाल विधानसभा का मॉनसून सत्र चल रहा है। बुधवार को कृषि मंत्रालय का बजट सदन में रखा गया। ऐसा कहा जा रहा है कि सदन में जब भी किसी विभाग का बजट पेश किया जाता है तो संबंधित विभाग की तरफ से सदन के सदस्यों के बीच कुछ उपहार वितरित किए जाने की परंपरा रही है।

उल्लेखनीय है कि इन दिनों बिहार एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से जूझ रहा है। आम बोलचाल की भाषा में इसे चमकी बुखार भी कहते हैं। इसके कारण राज्य में अब तक करीब दो सौ बच्चों की मौत हो चुकी है।

वाह कॉन्ग्रेसी बघेल जी वाह! महिलाओं के दुपट्टे से भी आपको खतरा है क्या?

क्या किसी को महिलाओं के दुपट्टे और बुजुर्गों की पगड़ी से भी खतरा हो सकता है? या सत्ता मिलाने के बाद जनता को उसकी औकात बताने की साजिश? क्योंकि ऐसी ही एक हरकत कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्री ने की है। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने बुधवार को ‘मुख्यमंत्री जन चौपाल’ कार्यक्रम के तहत जनता से रूबरू होने के लिए मुख्यमंत्री निवास पर आम लोगों को आमत्रित किया था। सीएम आवास के भीतर जाने से पहले लोगों के दुपट्टा और पगड़ी उतरवा लिए गए। इस मसले पर बीजेपी छत्तीसगढ़ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने आवास के बाहर ढेर सारी रखी गई दुपट्टा-पगड़ी की तस्वीर को शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस पर हमला किया। बीजेपी ने सीएम भूपेश बघेल से सवाल किया कि दुपट्टा-पगड़ी से भी आपकी सुरक्षा को खतरा है क्या?

बीजेपी ने कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री को निशाने पर लेते हुए ट्विटर पर लिखा, ”वाह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी! छत्तीसगढ़ के मान-सम्मान का प्रतीक है दुपट्टा-पगड़ी, लेकिन जन चौपाल में आपसे मिलने आए लोगों की शिकायतें सुनने से पहले उनके गमछे-पगड़ी को सीएम हाऊस में उतरवाकर यूँ टाँग दिया! दुपट्टा-पगड़ी से भी आपकी सुरक्षा को खतरा है क्या?”

हालाँकि, बीजेपी द्वारा कॉन्ग्रेस की खिचाई के बाद, इस पर कॉन्ग्रेस के छत्तीसगढ़ ट्विटर अकाउंट ने माफी माँगते हुए ट्वीट पर जवाब दिया और लिखा- ”जैसे ही सूचना मिली, दुपट्टा-पगड़ी उतरवाना बंद कर दिया गया है। हम ग़लतियों को तत्काल सुधारते हैं। सुरक्षाकर्मियों ने एहतियात के नाम पर ग़लती की। जनता और जनप्रतिनिधि के बीच का यह खूबसूरत रिश्ता प्यार और विश्वास पर कायम होता है।”

बता दें कि मंगलवार (जुलाई 2, 2019) को सीएम भूपेश बघेल और कॉन्ग्रेस छत्तीसगढ़ ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री जन चौपाल की घोषणा की थी। जिसमें सीएम बघेल ने लिखा था, ”मैं जनता का मुख्यमंत्री हूँ। प्रत्येक जगह अपनी जनता से मिलना चाहता हूँ, चाहे वह मेरा निवास ही क्यों न हो! मुख्यमंत्री निवास पर आप सबका स्वागत करता हूँ।”

पता नहीं क्यों कॉन्ग्रेस अक्सर छीछालेदर के बाद ही सबक लेती है। जब सुरक्षा जाँच के बाद औरतों-पुरुषों को अंदर जाने की इजाजत मिली तो महिलाओं के दुपट्टे और पुरुषों के पगड़ी से भी भला क्या खतरा? खैर, कॉन्ग्रेस ने अपनी गलतियों के लिए माफ़ी माँग ली है। लेकिन सोशल मीडिया पर अपनी भद्द पिटवाने के बाद।

मॉब लिंचिंग के विरोध में सड़कों पर उतरे 1 लाख कट्टरपंथी: कहा- ‘कोई और कौम होता तो पलटवार कर चुका होता’

झारखण्ड में भीड़ द्वारा तबरेज अंसारी की हत्या के विरोध में मालेगाँव में 1 लाख लोग सड़कों पर उतरे। मालेगाँव की सड़कें और पूरा का पूरा क्षेत्र उनके विरोध प्रदर्शन का गवाह बना। ये सभी मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ कड़े क़ानून बनाने की माँग लेकर सड़कों पर उतरे थे। रैली के आयोजकों ने कहा कि तबरेज का मारा जाना ‘फाइनल ट्रिगर’ है और अब विरोध का समय आ गया है। नीचे संलग्न की गई वीडियो में आप 1 लाख की मजहबी भीड़ द्वारा विरोध प्रदर्शन करते हुए देख सकते हैं।

इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन जमियत उलेमा ने किया। उन्होंने कहा कि वे संविधान को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे हैं। संगठन के लोगों ने कहा कि वे बदला नहीं चाहते क्योंकि वे हिंसा में विश्वास नहीं रखते हैं। उन्होंने क़ानून के नियमों पर भरोसा करने का दावा किया।

हालाँकि, जिन लोगों ने वहाँ भाषण दिया, उनमें से कई के भाषण उत्तेजक थे तो कई ने शांति बनाए रखने की अपील की। मौलवियों ने कहा कि अगर समुदाय की तरह किसी और को निशाना बनाया गया होता तो वे अभी तक पलटवार कर चुके होते। एक मौलवी ने कहा कि अब चीजें बर्दाश्त से बाहर हो रही हैं। एक मौलवी ने भाषण देते हुए कहा कि मॉब लिंचिंग आतंकवाद है जो सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से अपील की कि वह सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिख कर उन्हें कर्तव्यों की याद दिलाएँ। साथ ही लोगों ने मॉब लिंचिंग के पीड़ितों के परिवारों को 50 लाख रुपए देने की माँग की। एक मौलवी ने कवि फ़याज़ की पंक्ति पढ़ी- “अगर आज निशाने में हम हैं, तो दूसरों लोगों को ख़ुश नहीं होना चाहिए।

हलाला जायज, एक्टिंग हराम, क्या ऐसे तरक्की करेगा हिंदुस्तान का मुसलमान: जायरा पर कॉन्ग्रेसी सिंघवी

जायरा वसीम के बॉलीवुड छोड़ने के फैसले के बहाने कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस्लामी कट्टरपंथियों को निशाने पर लिया है। एक ट्वीट में उन्होंने कहा है, ‘हलाला जायज, एक्टिंग हराम, क्या ऐसे तरक्की करेगा हिंदुस्तान का मुसलमान।’ इस मामले पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा ​है कि यदि हर भारतीय मुसलमान इसी आधार पर फैसला लेने लगे तो क्या होगा। सिंघवी का यह रुख चौंकाने वाला है।

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शरीयत के अनुसार निकाह-हलाला की परंपरा में तीन तलाक पाने वाली महिला हलाला के बाद फिर से पुराने पति से निकाह कर सकती है। इसके तहत महिला किसी गैर पुरुष से शादी से कर संबंध बनाती है और फिर उससे तीन तलाक लेकर दोबारा पहले पति से निकाह करती है। अमूमन, इस तरह की शादियाँ पति के परिवार के किसी पुरुष सदस्य के साथ ही होती है। इनमें पति का पिता और भाई भी शामिल रहते हैं।

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जायरा वसीम ने चंद दिनों पहले फिल्मों से तौबा करने की घोषणा करते हुए कहा था कि बॉलीवुड उन्हें इस्लाम से दूर ले जा रहा था। छह पन्नों के पत्र में उन्होंने अपने फैसले के पीछे की वजहों का जिक्र करते हुए कुरान का भी उल्लेख किया था। इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया में बहस छिड़ी हुई है और कई लोगों ने उनके फैसले की आलोचना की है।

2019 के आम चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस ने तीन तलाक विरोधी बिल को खत्म करने का वादा किया था। इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने “क्या बर्बर ‘निकाह-हलाला’ आपकी आत्मा को नहीं झकझोरता?” शीर्षक से एक ब्लॉग लिखा था।

हालाँकि, जायरा के ऐलान के बाद ऐसी खबरें आईं थी कि उनका अकाउंट हैक कर लिया गया है। लेकिन, बाद में खुद जायरा ने इसका खंडन किया। इससे साफ है कि धर्म में अपनी आस्था और गहरी करने के लिए उन्होंने पूरी तरह सोच-समझकर यह फैसला लिया है।

‘भारत में अकल्पनीय हिंसा और पीड़ा होने वाली है’: कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल का इस्तीफा

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सार्वजानिक तौर पर अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी व देश की जनता को धन्यवाद देते हुए इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से अपना बयान जारी किया। उस बयान के मुख्य अंश को हम आपके सामने रख रहे हैं:

“कॉन्ग्रेस पार्टी की सेवा करना एक अच्छा अनुभव रहा। इतना प्यार देने के लिए संगठन और जनता के प्रति मैं कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। पार्टी अध्यक्ष होने के नाते मैं 2019 लोकसभा चुनावों में हार की जिम्मेदारी लेता हूँ और जवाबदेही तय करना पार्टी के आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी है। पार्टी की हार के लिए सभी ज़िम्मेदार लोगों पर जवाबदेही तय होगी और मेरे लिए यह सही नहीं होगा कि ख़ुद पद पर बना रहूँ और दूसरों की जवाबदेही तय करूँ। मेरे कई साथियों ने मुझसे कहा है कि आप नए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को नामित करें। हालाँकि, मेरे द्वारा नया कॉन्ग्रेस अध्यक्ष चुना जाना ग़लत होगा। एक नए अध्यक्ष की ज़रूरत है और मुझे पता है कि पार्टी सही निर्णय लेगी।”

“इस्तीफा देने के तुरंत बाद मैंने कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी से कहा कि कुछ लोगों की एक टीम बनाई जाए, जो नए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की तलाश करे। मैंने उन्हें सारी शक्ति दे दी है और उनके इस कार्य में पूरा सहयोग भी कर रहा हूँ। मेरी लड़ाई किसी राजनीतिक सत्ता के लिए नहीं है और न ही भाजपा से मैं घृणा करता हूँ, मेरे शरीर का कण-कण भारत की समरसता को समर्पित है। भाजपा से भारत के विचार को ख़तरा है और इसीलिए मैं उनसे असहमत रहता हूँ। भारत के संविधान पर आक्रमण हो रहा है और यह देश की मूलभूत संरचना के ख़िलाफ़ है।”

“मैं लड़ाई से हट नहीं रहा हूँ। कॉन्ग्रेस के एक सिपाही और देश के बेटे के रूप में मैं अंतिम साँस तक लड़ता रहूँगा। हमारा चुनाव प्रचार अभियान सभी धर्मों एवं सम्प्रदायों बीच भाईचारा, सहिष्णुता और सम्मान का प्रतीक रहा। मैंने व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री व आरएसएस के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी। मैं समय-समय पर अकेला भी पड़ गया लेकिन लड़ता रहा क्योंकि मैं भारत से प्यार करता हूँ। अगर वित्तीय संसाधनों पर किसी पार्टी विशेष का एकछत्र कब्ज़ा हो तो कोई चुनाव निष्पक्ष हो ही नहीं सकता। अब भारत में सभी सरकारी संगठन न्यूट्रल नहीं रहे हैं और हमारी लड़ाई सबके ख़िलाफ़ थी।”

“संघ भारत के सभी संवैधानिक संगठनों की संरचना में अपने हिसाब से बदलाव करने में सफल हो गया है। लोकतंत्र ख़तरे में है। सत्ता पर इस तरह से कब्ज़ा अकल्पनीय हिंसा और दर्द को जन्म देगा। किसानों और युवाओं को सबसे ज्यादा दिक्कतें आएँगी। प्रधानमंत्री के जीत जाने से उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप हट नहीं जाते। कॉन्ग्रेस पार्टी को अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए बदलाव से गुज़रना ज़रूरी है। मैं पार्टी के लिए हमेशा उपस्थित रहूँगा, अपनी सलाह और सेवाओं के साथ।”

ग्राउंड रिपोर्ट हौज़ काज़ी: एक तोड़ा गया मंदिर, एक गायब हिन्दू लड़का, एक समुदाय की बिखरी आस्था

चाँदनी चौक की गलियों से जब मेरा रिक्शा गुजर रहा था, तो मैं सोच रही थी कि दुर्गा मंदिर में तोड़-फोड़ वाली घटना को कहीं ज्यादा बढ़ा-चढ़ा कर तो नहीं पेश किया गया! क्योंकि गलियाँ खामोश नहीं थीं, दुकानें और बिजनेस ऐसे चल रहे थे जैसे कुछ हुआ ही न हो। जो लोग आवाजाही करते दिख रहे थे, वो अन्य दिन की भाँति ही थे। केवल एक चीज, जिसने यह संकेत दिया कि कुछ दिन पहले यहाँ कुछ न कुछ तो हुआ है, वह थी- सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों की उपस्थिति।

मैंने अपने रिक्शावाले से पूछा कि यहाँ क्या हुआ था। उसने पहली बार में, धीरे से, केवल इतना कहा कि मोहम्मडन और हिंदुओं के बीच कुछ लड़ाई हुई थी। मैंने उससे पूछा कि लड़ाई किस बारे में थी? “मुझे नहीं पता,” उन्होंने कहा। फिर भी “कई अफवाहें हैं कि कैसे हिंदुओं ने एक मुस्लिम व्यक्ति को मार डाला।”

साइकिल रिक्शा हमें वहाँ तक ले गया जहाँ तक बैरिकेड्स लगे थे। इसके बाद, हमें लगभग 1 किलोमीटर तक पैदल चलना था। जब तक कि मैं उस संकरी गली तक नहीं पहुँच गई, जिसे ‘गली दुर्गा मंदिर वाली’ कहा जाता है। मैं ऐसी जगह खड़ी थी जिसे ‘लाल कुआँ’ कहा जाता था। जब मैंने ‘गली दुर्गा मंदिर वाली’ की ओर चलना शुरू किया, तो माहौल बदलता गया। मैं अपनी पीठ के पीछे घूरती निगाहों को महसूस कर सकती थी। गलियाँ इस्लामी भीड़ से भरी हुई थीं और चारों ओर खड़े लोग आपस में फुसफुसा कर बात कर रहे थे, तनाव कम था।

क्या कहते हैं इलाके के मुस्लिम

इस पूरे घटनाक्रम में दूसरे मजहब द्वारा बताई गई कहानी हिन्दुओं के बयानों से बिलकुल ही अलग है। दूसरे मजहब ने एक ‘हिन्दू हलवाई’ को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इनकी कहानी में समुदाय विशेष के लोगों ने न तो मंदिर तोड़ा, न मूर्तियाँ और ये पूरी लड़ाई, जो कि एक पार्किंग को लेकर शुरु हुई थी, वो लड़ाई उस हलवाई के कारण बढ़ी जो इलाके में तनाव पैदा करना चाहता था।

इलाके के समुदाय विशेष के लोग कहते हैं कि हिन्दुओं ने स्वयं ही दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ मचाई ताकि इलाके के बहुसंख्यक मुस्लिमों को फँसाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दुओं और दूसरे मजहब के बीच किसी भी प्रकार का तनाव नहीं था और ये पूरी घटना जबरदस्ती बनाई गई है। उन्होंने कहा कि मंदिर पर कोई पत्थरबाजी भी नहीं हुई और हिन्दुओं ने दूसरे समुदाय को फँसाने को लिए मंदिर के पास पत्थर रख दिए ताकि लगे कि मुस्लिमों ने पत्थर फेंके हैं।

थोड़ी दूर और चलने पर पुलिस द्वारा लगाया गया दूसरा बैरिकेड नजर आता है जिसके पीछे इलाके के हिन्दू विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। दुर्गा मंदिर वाली गली के बाहर ही इलाके के बड़े-बुजुर्ग आगे की योजना पर बात कर रहे थे।

हिन्दुओं का क्या कहना है

उस गली में, जिसमें यह हमला किया गया और मुस्लिम भीड़ द्वारा मंदिर तोड़ा गया, रहने वाले लोगों ने मुस्लिम लोगों द्वारा किए जा रहे दावे को नकारा है। वे एक सीसीटीवी कैमरे की ओर इशारा करते हैं और कहते हैं कि पथराव और मंदिर पर हुए हमले के पर्याप्त वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं।

उनमें से एक ने जले हुए पर्दे और देवताओं के मूर्तियों को दिखाया जो टूटे और बिखड़े पड़े थे। ध्वस्त किए गए पूजा स्थल दिखाते हुए उन्होंने एक गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा भी किया। निवासियों ने आरोप लगाया कि पुलिस दुर्गा मंदिर में हुई तोड़फोड़ को दबाने के लिए तोड़ी गई मूर्तियों को नई मूर्तियों से बदलने के लिए प्रयासरत है।

दिल्ली पुलिस द्वारा बदलने के लिए लाई गई नई मूर्तियाँ

निवासियों ने यह भी दावा किया कि मुस्लिम भीड़ ने न केवल दुर्गा मंदिर की मूर्तियों को तोड़ा, बल्कि दुर्गा मंदिर में पेशाब भी किया। उन्होंने बताया कि गली के मुहाने पर कई सौ लोगों की भीड़ जमा थी और अगर वे शटर को नीचे नहीं खींचते तो इलाके के हिंदू जरूर मारे जाते। यहाँ तक कि गली की दोनों तरफ खड़ी इमारतों की छतों से भी पथराव हुआ। साथ ही, भीड़ ने न केवल पथराव किया बल्कि उन पर हमले के लिए तलवारों से भी लैस थे।

लोगों का कहना है कि उस रात तनाव कम नहीं हुआ था। वास्तव में, इसके बाद भी भीड़ गली का चक्कर लगा रही थी और कई बार हमला करने के लिए तैयार थी, लेकिन हिन्दुओं ने अपने बचाव के लिए क्रिकेट बैट और ऐसे ही अन्य साधन लिए ताकि हमले की स्थिति में वो अपना बचाव तलवारों से लैस मुस्लिम भीड़ से कर सकें।

लोगों का कहना है कि पुलिस ने हिन्दुओं को चुप रहने और प्रतिक्रिया ना करने को कहा। दुर्गा मंदिर गली में रहने वाले एक निवासी ने कहा कि यह पहली बार नहीं है, जब मुस्लिमों ने हिन्दुओं पर अटैक किया हो। कुछ महीने पहले भी कुछ मुस्लिम लोगों ने मिलकर हिन्दू लड़कों के साथ हिंसक घटना को अंजाम दिया था, उस समय भी मुस्लिम भीड़ ने उन पर पथराव किया था।

जबकि कई लोग यह दावा भी कर रहे हैं कि बहुत पहले से ही चाँदनी चौक के हिन्दू और मुस्लिम शांतिपूर्वक तरीके से रहते आए हैं। हालाँकि, कई अन्य लोगों का कहना है कि आपस में मनमुटाव और रंजिश की घटनाएँ समय के साथ बढ़ी हैं। वे कहते हैं, इसका कारण यह है कि पहले इस इलाके में हिंदू संख्या में अधिक थे और अब, उनकी संख्या घट गई है। एक निवासी ने यह भी दावा किया है कि ‘उनका’ उद्देश्य उस पूरी गली को अपने कब्जे और नियंत्रित में लेना है, जहाँ हिंदू निवास करते हैं।

हमले की रात

हमले की जगह से पुलिस स्टेशन महज चंद मिनटों की दूरी पर है। लेकिन, स्थानीय लोगों के मुताबिक हमले की रात पीसीआर वैन को मौके पर पहुँचने में घंटा भर लग गया। जब कुछ पत्रकार मौके पर जाने की कोशिश कर रहे थे तो उन्हें चाँदनी चौक के कुछ लोगों ने बताया कि वह गली बेवड़ों का अड्डा है और वहाँ किसी तरह का तनाव नहीं है।

घटना के बाद से हिंदू गली से महज कुछ दूर स्थित लाल कुँआ की तरफ लोगों को नहीं जाने दिया जा रहा। वहाँ रह रहे दूसरे मजहब वालों का आरोप है कि हिंदुओं ने मस्जिद के पास बाइक रैली निकाली और उकसाने के लिए ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। हिंदू इन आरोपों को नकार रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में यह कहा गया है कि इसल्मी भीड़ को इकट्ठा करने के लिए ह्वाट्सएप मैसेज फॉरवर्ड किए गए।

हिंदुओं का कहना है कि इस घटना के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उनकी खबर नहीं ली। केवल हर्षवर्धन ही उनका हाल जानने पहुँचे (जब तक यह संवाददाता मौके पर था)। उनका कहना है कि यदि मुस्लिमों की पिटाई हुई होती तो केजरीवाल उनके पास जरूर जाते।

हिंदू युवक गायब

गली के लोगों से बात करने के दौरान मुझे अचानक ही ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘जय श्री राम’ के नारे सुनाई पड़े। हालात को काबू में रखने के लिए दो पुलिसकर्मी तैनात थे।

घटना के बाद से 17 साल के एक हिंदू युवा के गायब होने की बात सामने आने के बाद से फिर से तनाव बढ़ने का अंदेशा है। गायब युवक की माँ मुझे एफआईआर की कॉपी के साथ मिली।

मैंने उनसे बात करने की कोशिश की और उन्हें भरोसा दिलाया की उनकी बात सामने रखूँगी। उन्होंने कहा, ‘हमारी बात कोई नहीं बता रहा।’ मोना ने मुझे बताया उसका 17 साल का बेटा घटना वाले दिन से गायब है। उसने बताया, ‘मुस्लिमों की भीड़ उसे अगवा कर ले गई।’ जब मैं इलाके में पहुँची तो इस घटना के तीन दिन बीत चुके थे और अभी तक इस लड़के का कोई सुराग नहीं मिला था।

FIR की कॉपी

एफआईआर के मुताबिक, दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ और गली में रहने वाले हिंदुओं की पिटाई करने के बाद मुस्लिमों की उन्मादी भीड़ मोना के घर में घुस गई और उसके बेटे को पीटने लगी। जब मुस्लिमों की भीड़ घर में घुसी और उसके बेटे को अगवा किया तब मोना आराम कर रही थी। केशव सक्सेना नामक इस युवा की बाद में कोई खबर नहीं लगी। इस नाबालिग के माता-पिता मोना और देवेंद्र गुस्से और सदमे में हैं।

‘अल्लाहु अकबर’ के नारों की शोर मंद पड़ने और तनाव घटने के बाद देवेंद्र की चिंताएँ बढ़ने लगी है। वे कहते हैं, “**, मैं अपनी जान दे दूँगा। मेरा बेटा चला गया, अब मैं और मेरी पत्नी जी कर क्या करेंगे।” भीड़ में से एक आदमी कहता है, “तुम्हारे और तुम्हारी पत्नी के जान देने से तुम्हारे बेटे का क्या भला होगा।” देवेंद्र के साथ खड़े एक अन्य व्यक्ति का कहना है, “आखिर! हम कर भी क्या सकते हैं। हम हिंदू होने की सजा भुगत रहे हैं।” लोग इस कदर नाराज हैं कि उनकी भावनाएँ आसानी से भड़काई जा सकती है।

एक अन्य व्यक्ति ने बताया “कोई हमें दबा नहीं सकता। यदि तुम जान दोगे तो हम भी मरेंगे और उन सब को साथ लेकर भी जाएँगे।”

अचानक गायब युवक की माँ खड़ी होती हैं और उसकी सूनी आँखे शोला उगलने लगती हैं। वह कहती हैं, “कोई मुझे बताएगा मेरा बेटा कहाँ है। उसने कुछ खाया-पीया नहीं और न ही सोया है। मैंने एफआईआर भी दर्ज करवाई है। अब मैं किससे फरियाद करूँ। उन्होंने मंदिर को तोड़ा और मेरे बेटे को अगवा कर ले गए।”

पिता दोबारा दहाड़ते हुए कहते हैं, “मेरे हवाले उन चार लोगों को कर दो जो उस रात गली में आए थे और मैं उनसे सच्चाई उगलवा लूँगा।”

जब माँ ने 2 पुलिस अधिकारियों से, जो कि वहाँ पर मौजूद थे, तो उनमें से एक पुलिसवाले का कहना था, “आपका बेटा सुरक्षित है।”

पुलिसवाले के इस चिंतित माँ ने कहा, “तुम्हें कैसे पता कि वह ठीक है? क्या वो आपके पास है? क्या आप जानते हैं कि वह कहाँ है?” पुलिसवाले ने कहा कि अगर उन्हें पता होता तो वे पहले ही लड़के को बरामद कर लेते। किसी को भी वास्तव में समझ नहीं आया कि पुलिसवाले ने क्यों कहा कि वह ठीक है, या अब तक क्या जाँच की गई है?

हिन्दू, पुलिस के बर्ताव से खुश नहीं थे। वहीं, जब इससे पहले समुदाय विशेष के पास पहुँचे, तो वो दिल्ली पुलिस की जमकर तारीफ कर रहे थे।

हिन्दू: एक परेशान अल्पसंख्यक

संवाददाताओं के नजर आते ही मुस्लिम भीड़ ने वो तख्तियों लहरानी शुरू कर दीं, जिन पर लिखा था कि मुस्लिम शांति और अमन चाहते हैं। हालाँकि, यह वही भीड़ थी, जो बाद में हिंदुओं के साथ ‘अल्लाहू-अकबर’ के नारों से सामना कर रही थी।

इलाके के हिंदुओं से बात करते हुए, उनकी दुर्दशा का वर्णन करते हुए, उन्होंने बार-बार जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में, अधिकांश दुकानें मुस्लिमों की थीं और कुछ ही हिंदुओं की थीं। हिंदू बार-बार जोर देकर कहते हैं कि मुस्लिम चाहते हैं कि हिंदू इस इलाके को छोड़ दें और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि छोटी गली में भी समुदाय विशेष का कब्जा हो। यहाँ तक किसमुदाय विशेष वाले अब उस हलवाई का भी आर्थिक रूप से बहिष्कार कर रहे हैं, जो पार्किंग वाले विवाद में शामिल था।

वह हलवाई जिसका मुस्लिम बहिष्कार कर रहे हैं (तस्वीर -एक वहीं के एक व्यक्ति द्वारा व्हाट्स अप किया गया )

चुप्पी साधे, संवेदनहीन मीडिया

इस तनाव भरे माहौल के बीच, जब मैं वहाँ मौजूद थी, और गायब बच्चे के माता-पिता रो रहे थे, एक टीवी चैनल का पत्रकार भी वहाँ उपस्थित था। यह देखना विचित्र था कि जब माँ-बाप अपने बच्चे के किडनैप होने की बात पर रो रहे थे, वो टीवी रिपोर्टर वहाँ से चलता बना। उसका वहाँ से जाना इस रोते माता-पिता के उन आरोपों की पुष्टि करता है जहाँ वो बताते हैं कि इन सब बातों के बीच उनके बेटे के गायब होने की बात पूरी तरह से उपेक्षित रही।

मीडिया अक्सर अपने चमकीले टावरों के आरामदेह स्टूडियो से रिपोर्टिंग करने में व्यस्त रहता है। उनकी यही अभिजात्यता उन्हें ऐसे मामलों की गंभीरता समझने से रोकती है जहाँ एक रोते माता-पिता के गायब बच्चे की खबर सामने देखकर भी रिपोर्टर अपने कैमरामैन के साथ निकल जाता है। दुखी पिता जिस भाषा और शैली में सच्चाई बोल रहे थे वो शब्द शायद कई टीवी एंकरों को परेशान कर सकते हैं। उस पिता की बातों को सुनने और समझने के लिए इन अभिजात्य पत्रकारों को अपने चमकीले टावरों से कई सौ सीढ़ियाँ उतरनी होंगी, जो शायद संभव नहीं।

शायद यही कारण है हिन्दू खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं। शायद इसीलिए वो कहते हैं कि उनके साथ ऐसे मौकों पर VHP और बजरंग दल के वही कार्यकर्ता खड़े रहे जिन्हें ‘छुटभैया’ कहकर नकार दिया जाता है। शायद यही वो कारण है कि चमकीले टावरों में बैठा पत्रकार ट्विटर पर ही सारा ज्ञान दे देता है कि ये तो बस ‘एक मामूली विवाद’ है। एक मामूली विवाद जहाँ हिन्दुओं का कहना है कि उस हलवाई को पीटा गया और उसके घर की स्त्रियों के साथ बदसलूकी की गई।

खबरों के अनुसार गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर से बात की है और कमिश्नर ने बताया है कि अब स्थिति सामान्य है। उन्होंने बताया कि चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं। लेकिन उस 17 साल के लड़के के गायब होने पर कहीं भी, कुछ भी नहीं कहा जा रहा।

इस अनुभव ने मुझे अंदर तक झकझोड़ दिया है। मेरे पास कहने को कुछ बचा नहीं है कि किन विशेषणों से ऐसी घटनाओं की बात करूँ। मीडिया पूरी तरह से नाकाम रहा है। जिन लोगों ने अपना बच्चा खो दिया उन्हीं पर लांछन लगाए जा रहे हैं। जिस हिंसक भीड़ ने मंदिर को तोड़ा वही ऐसे दिखाए जा रहे हैं जैसे वो कितने समझदार हैं जो मामला सुलझाना चाहते हैं। इस बच्चे के गायब होने की खबर किसी मीडिया में नहीं है। मीडिया के एक हिस्से ने यह तय कर लिया है कि हिन्दू तो कभी पीड़ित हो ही नहीं सकता और दूसरा समुदाय तो वो समुदाय है जो शांतिपूर्ण तरीके से विवाद सुलझाना चाहता है। सच्चाई अक्सर अनवरत बहते आँसुओं और चिल्लाती हुई उन आवाज़ों में खो जाती है जो टीवी स्टूडियो के ऊँचे टावरों तक कभी पहुँच नहीं पाते।

मर चुकी माँ को जगाने की कोशिश, दूध पीने की कोशिश: नन्हे गैंडे का Video Viral

मारी गई माँ को जगाने की कोशिश करते बच्चे को देखने से ज्यादा हृदयविदारक क्या हो सकता है! चाहे वह बच्चा गैंडे का ही क्यों न हो। शिकारियों के हाथों मारे गए अपनी माँ की देह में जान फूँकने की कोशिश करते नन्हें गैंडे के इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों को झकझोर दिया है। हजारों बार यह वीडियो देखा चा जुका है और सैकड़ों बार रिट्वीट किया गया है।

भारतीय वन सेवा के अधिकारी प्रवीण कासवान ने मंगलवार को ट्विटर पर यह वीडियो पोस्ट किया और देखते ही देखते सोशल मीडिया में यह वायरल हो गया। अधिकारी ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “शिकार! सींग के लिए शिकारियों के हाथों मारी गई अपनी माँ को जगाने की कोशिश करता नन्हा गैंडा। खौफनाक और आँख खोलने वाला।”

बेहद भावुक कर देने वाले इस वीडियो में देखा जा सकता है कि नन्हा गैंडा जमीन पर मृत पड़ी माँ को जगाने की लगातार कोशिश कर रहा है। उसे समझ में नहीं आ रहा कि उसकी माँ के शरीर में कोई हरकत हो क्यों नहीं रही है। वह माँ का दूध पीने की कोशिश करता भी नजर आता है। सींग के लिए उसकी माँ की हत्या कर शिकारियों ने इस नन्हे से बच्चे को बेसहारा कर दिया है।

वीडियो में एक व्यक्ति की आवाज भी सुनाई पड़ रही है। वह कहता है, “यह क्या है। यह देखना बेहद खौफनाक है। कोई नहीं चाहता कि ऐसा फिर हो।”

सुसाइड नोट में IIT छात्र ने लिखा- ‘एक ही जिंदगी मिली है, जीना मत भूल जाना’

तेलंगाना के संगारेड्डी में इंजीनियरिंग के छात्र ने पंखे से लटककर जान दे दी। इसमें पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। आईआईटी हैदराबाद में फाइनल इयर के एक स्‍टूडेंट ने मंगलवार (जुलाई 02, 2019) को अपने हॉस्टल के कमरे में फाँसी लगाकर आत्‍महत्‍या कर ली। मार्क एंड्रयू चार्ल्‍स नाम का यह छात्र उत्तर प्रदेश के वाराणसी का रहने वाला था। आत्‍महत्‍या से पहले मार्क 8 पन्‍नों का एक सुसाइड नोट छोड़ गए हैं, जिसे पढ़कर लगता है कि शायद खराब नंबरों और अच्‍छी नौकरी न मिल पाने की आशंका की वजह से मार्क ने यह कदम उठाया है।

आत्महत्या से पहले मार्क ने जो ‘सुसाइड नोट‘ छोड़ा है, उसमें लिखा है, “मेरे पास नौकरी नहीं है, शायद मिलेगी भी नहीं। कोई भी किसी लूजर को नौकरी नहीं देता। अपनी ग्रेड शीट देखकर हैरान हूँ। हर किसी की तरह मेरे भी सपने थे। लेकिन अब सब खत्‍म है। ये सारी पॉजिटिव बातें, हमेशा मुस्‍कुराना, लोगों से कहना कि मैं ठीक हूँ, जबकि मैं ठीक नहीं हूँ।”

संगारेड्डी के पुलिस उपाधीक्षक पी श्रीधर रेड्डी ने बताया कि छात्र मार्क एंड्रयू चार्ल्स (20 साल) सोमवार रात करीब 11 बजे हॉस्टल के अपने कमरे में गए। उन्होंने बताया कि मार्क के नहीं दिखने पर मंगलवार दोपहर उनके मित्रों ने जब उनके कमरे का दरवाजा तोड़ा तो वह पँखे से लटके मिले। डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहे मार्क ने कुछ दिन पहले ही अंतिम वर्ष की परीक्षा दी थी और अंतिम प्रजेन्टेशन की तैयारी कर रहे थे, जो 5 जुलाई को होने वाली थी।

संगारेड्डी के डीएसपी श्रीधर रेड्डी के मुताबिक, “आमतौर पर दोपहर 12 बजे तक सभी स्‍टूडेंट अपने कमरों से निकल आते हैं। लेकिन जब मार्क मंगलवार 2 बजे तक नहीं निकले, तो उनके दोस्‍तों को शक हुआ और वे उन्‍हें आवाज लगाने लगे। जब कोई जवाब नहीं मिला तो दरवाजा तोड़ दिया गया, अंदर उन्‍हें छत से लटके हुए मार्क दिखाई दिए।”

पुलिस को मार्क एंड्रयू चार्ल्स की डायरी में एक सुसाइड नोट लिखा मिला है, जिसमें छात्र ने लिखा है कि शायद उसे अच्छे अंक न मिलें और दुनिया में असफलता का कोई भविष्य नहीं है। पुलिस का कहना है कि संभवत: अवसाद के कारण उन्होंने यह कदम उठाया हो। इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया है।

गौरतलब है कि इसी साल 31 जनवरी को मकैनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष के छात्र एम अनिरुद्ध ने भी छात्रावास भवन से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इस प्रकार यह इस संस्थान में इस साल की दूसरी ऐसी घटना है।

‘सोचा नहीं था कि ऐसे निराश करूँगा’

अपने सुसाइड नोट में मार्क ने अपने परिवार और दोस्‍तों से माफी माँगते हुए लिखा है, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस तरह आपको निराश करूँगा। मैं इस काबिल नहीं हूँ कि आप लोग मुझे याद करें।”

मेडिकल कॉलेज को दान किया शरीर

मार्क ने इस नोट में आगे लिखा है, “घर से दूर दो साल, सबसे अच्‍छे इंस्टिट्यूट में, मेरे चारों तरफ बेहतरीन लोग थे, लेकिन मैंने सब बर्बाद कर दिया।” मार्क ने अपने परिवार से अनुरोध किया है कि उनके शरीर को दफनाने की जगह किसी मेडिकल कॉलेज को दान कर दें। साथ ही यह भी लिखा है कि उनकी लाश देश के भावी डॉक्‍टरों के किसी काम तो आएगी।

‘हर एक पल को जीना, एक ही जिंदगी मिली है’

अपने जीवन के आखिरी दो महीनों को जीवन का सबसे अच्‍छा समय बताते हुए मार्क ने दोस्‍तों से माफी माँगी है। वहीं, दोस्‍तों से अपील की है, ‘आईटी इंडस्‍ट्री में जिंदगी बर्बाद न करें‘, “अंकित, रज्‍जो, आईटी में काम करते-करते अपनी लाइफ मत भूल जाना। हर एक पल को जीना। एक ही जिंदगी मिली है।”