बात-बात पर मामला झगड़े, मारपीट और यहाँ तक कि हत्या तक पहुँच जाना आम हो चला है। ताजा मामला तमिलनाडु का है और कहानी दो दोस्त, शोएब पाशा और नबी की है। दोनों किसी जगह मिलते हैं लेकिन एक दोस्त का दूसरे को गले लगाने से इनकार करना इतनी बड़ी वजह बन गई कि दो को छुरा घोंप दिया गया। घटना बेंगलुरु के मावली इलाके में एलबीएफ रोड की है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरा मामला कुछ यूँ है कि जब नबी ने शोएब को गले लगाने की कोशिश की, तो शोएब ने नबी की बदबूदार साँसों के कारण उसे धक्का दे दिया। यह बात नबी के दिल पर लग गई। फिर क्या था, नबी ने शोएब को गाली देना शुरू कर दिया जिसके कारण दोनों के बीच झगड़ा होने लगा जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। टकराव बढ़ने पर नबी ने चाकू निकाला और सीधा शोएब के पेट में घोंप दिया।
मामला यहीं शांत नहीं हुआ। जब घायल शोएब ने अपने भाई शाहिद को मदद के लिए बुलाया, तो नबी ने भागने से पहले ही उसे भी चाकू मार दिया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या की कोशिश) के तहत नबी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
फिलहाल, ऑटोमोबाइल के सामान की दुकान पर काम करने वाले नबी को मंगलवार (जुलाई 2, 2019) को गिरफ्तार कर लिया गया और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इस बीच, खबर यह है कि शोएब और उसके भाई शाहिद का निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है और वो खतरे से बाहर है। सोचिए, साँसों की महक भी कितना बवाल कर सकती है। चाकूबाजी से हवालात तक का सफर तय हो गया इस छोटी सी वजह से।
इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इस्तीफा दे दिया, जो कि बीजेपी के स्टार प्रचारक भी कहे जाते हैं। इस्तीफे की उन्होंने काफी वजहें बताई हैं। हालाँकि राहुल गाँधी के इस्तीफ़े से भाजपा में शोक की लहर दौड़ गई है। मोदी जी ने कहा- नहीं कर सकूँगा कभी मन से माफ।
हैदराबाद के राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर टॉलीवुड अभिनेता शिवाजी को हिरासत में ले लिया गया। शिवजी पर TV9 के सीईओ के साथ मिल कर वित्तीय धोखाधड़ी करने का आरोप है। उन पर आरोप है कि उन्होंने TV9 के तत्कालीन सीईओ रवि प्रकाश के साथ मिल कर बोगस डॉक्यूमेंट्स बनाए और फिर उसके आधार पर शेयर्स की ख़रीद-बेच में गड़बड़ियाँ की। जब गिरफ्तारी हुई, उस वक्त अभिनेता शिवाजी एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अमेरिका जा रहे थे।
हालाँकि, उनके ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस जारी होने के कारण एयरपोर्ट पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया और बाद में उन्हें साइबराबाद पुलिस को सौंप दिया गया। साइबर क्राइम पुलिस ने उन्हें छोड़ने से पहले 2 घंटे तक पूछताछ की। इस मामले में आगे की जाँच के लिए अभिनेता शिवाजी को 11 जुलाई को फिर से पुलिस के समक्ष पेश होने को कहा गया है।
अभिनेता शिवाजी और TV9 के तत्कालीन सीईओ रवि प्रकाश धोखाधड़ी के इस मामले में मुख्य साज़िशकर्ता हैं और उन पर आरोप है कि दोनों ने फ़र्ज़ी काग़ज़ातों के आधार पर TV9 के 40,000 शेयर्स पर कब्ज़ा कर लिया। अलांदा मीडिया एंटरटेनमेंट ग्रुप ने दोनों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया है, जिसमें उन पर वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। अलांदा ही TV9 की संचालक कम्पनी है। अभिनेता शिवाजी को पिछले कुछ महीनों में 3 बार पुलिस ने समन किया लेकिन वह एक बार भी पुलिस के समक्ष पेश नहीं हुए थे।
इसके बाद उनके ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस जारी किया गया। हाल ही में उन्होंने अपने ऊपर लगे एफआईआर को रद्द करने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया था। शिवाजी ने अदालत को बताया कि उन्होंने TV9 के सीईओ रहे रवि प्रकाश को 40,000 कम्पनी के शेयर्स ख़रीदने के लिए 20 लाख रुपए दिए थे। पुलिस का मानना है कि शिवाजी को रवि प्रकाश द्वारा ही खड़ा किया गया था ताकि वे कम्पनी के मैनेजमेंट में मनमाफिक बदलाव कर सकें।
— Abhinay Deshpande|అభినయ్ देशपांडे (@AbhinayTheHindu) July 3, 2019
इसके बाद रवि प्रकाश को TV9 के सीईओ पद से हटा दिया गया। अदालत उन्हें गिरफ़्तारी से राहत प्रदान कर चुकी है और 9 जुलाई से पहले उनके ख़िलाफ़ किसी प्रकार की कार्रवाई करने पर रोक लगा दी थी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्यूरोक्रेसी को साफ़ करने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल करते हुए यूपी सरकार ने भ्रष्ट अधिकारीयों के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा क़दम उठाया। कुल मिला कर देखा जाए तो पिछले 2 वर्षों में 600 अधिकारियों पर गाज गिराई जा चुकी है। इनमें से 200 ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें योगी सरकार ने जबरन रिटायर कर दिया। बाकि के 400 अधिकारियों पर अन्य कार्रवाई भी की गई है। यूपी सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा विशेष जानकारी देते हुए बताया:
“योगी सरकार ने पिछले 2 साल में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जो कार्रवाई की है, वह देश में अब तक किसी भी प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए क़दम से बहुत बड़ी है। यूपी सरकार ने 200 से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों को जबरन रिटायरमेंट दिया है। 100 से अधिक अधिकारी अभी भी सरकार के रडार पर हैं। यह पहली सरकार होगी जिसने 600 से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में कार्रवाई कर एक नजीर पेश की है।”
योगी सरकार लगातार भ्रष्ट व अक्षम अधिकारियों को चिह्नित करने में लगी हुई है। सभी विभागों में भ्रष्ट, सुस्त व काम न करने वाले अफसरों की सूची तैयार की जा रही है और उन पर सिलसिलेवार तरीके से कार्रवाई की जा रही है। जो भी दोषी पाए जा रहे हैं, उन्हें सीधा सेवा से बाहर कर दिया जा रहा है। जिन 400 अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है, उनका प्रमोशन रोक दिया गया है। अर्थात अब उन्हें सेवा में प्रोन्नति नहीं मिलेगी।
जानने लायक बात यह भी है कि इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बावजूद अभी 100 से भी अधिक ऐसे अधिकारी हैं, जिन पर सरकार की नज़र है। इन सुस्त अधिकारियों को सरकार ने अभी अपने राडार पर रखा है और इन पर कार्रवाई की गाज कभी भी गिर सकती है। इनमें से अधिकतर आईएएस और आईपीएस अधिकारी हैं। इसीलिए, इस पर निर्णय केंद्र सरकार को लेना है। योगी सरकार ने ऐसे अधिकारियों की सूची बना कर मोदी सरकार के पास भेज दी है।
#Breaking 600 से ज़्यादा अधिकारियों पर गिरी यूपी सरकार की गाज़…भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार ने की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, यूपी सरकार ने 200 से ज़्यादा कर्मचारियों और अधिकारियों को जबरन किया रिटायर, 200 से अधिक अधिकारी अब भी सरकार के रडार पर@myogiadityanath@UPGovtpic.twitter.com/lHBzau3wge
— Zee Uttar Pradesh Uttarakhand (@ZEEUPUK) July 3, 2019
योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक में ही यह साफ़ कर दिया था कि विभागीय रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाए जाएँगे, उन्हें बख़्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अपनी कार्य पद्धति सुधारने की नसीहत देते हुए पूछा कि ई-ऑफिस के मामले में 2 साल बीत जाने के बावजूद शत-प्रतिशत कार्य क्यों नहीं हो पा रहा है? उन्होंने अधिकारियों को सही समय पर निर्णय लेने व जहाँ भी ज़रूरत पड़े, सख़्त कार्रवाई करने की सलाह दी।
घर में कोई मर गया है, आपको अंतिम संस्कार के लिए राज्य सरकार से मिलने वाली 2000 रुपए की वित्तीय सहायता चाहिए, मिल जाएगी – बस 200 रुपए निकालिए।
उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन चाहिए, लग जाएगी – बस 500 से 600 रुपए निकालिए।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाना है, 1.20-1.35 लाख रुपए की सहायता राशि चाहिए, मिल जाएगी – बस 10000 से 25000 तक निकालिए।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर में शौचालय बनवाना है, उसके लिए 12000 रुपए की सहायता राशि चाहिए, मिल जाएगी – बस 900 से 2000 तक रुपए निकालिए।
MGNREGS मतलब ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम करना है, हर दिन कमाना है, हो जाएगा – बस हर दिन 20 से 40 रुपए देना होगा।
ये बस कुछ उदाहरण हैं। पश्चिम बंगाल के लोग (खासकर गाँवों के) अब तक इन ‘दरों’ को सरकारी दर समझते थे। आदत हो गई थी। इंडियन एक्सप्रेस के रविक भट्टाचार्य और शांतनु चौधरी की ग्राउंड रिपोर्ट में इस ‘आदत’ या ‘सरकारी दर’ का खुलासा इस कदर हुआ है कि न सिर्फ ग्रामीण बल्कि तृणमूल के कुछ नेताओं ने भी इन विभिन्न योजनाओं के लिए अलग-अलग ‘दर’ की बात स्वीकारी है।
इंडियन एक्सप्रेस ने पश्चिम बंगाल में ‘कट मनी’ कल्चर के खुलासे के लिए कुल 12 गाँवों के लोगों से बातचीत की। ये 12 गाँव हुगली, वर्धमान और बीरभूम में हैं। इन गाँव के लोगों और तृणमूल के स्थानीय नेतों ने यह माना कि राज्य या केंद्र सरकार की किसी भी योजना का लाभ उठाने के लिए उन्हें ‘निर्धारित दर’ चुकाना ही होता है। यह ‘दर’ 200 रुपए से लेकर 25000 रुपए तक फिक्स है।
MGNREGS के तहत कट मनी का खेल
पश्चिम बंगाल में साल 2011 में जब तृणमूल सत्ता में आई उसके बाद ‘कट मनी’ का प्रचलन आम हो गया। यह इस तरीके से माँगा जाना शुरू हुआ कि ग्रामीणों को पता ही नहीं चला कि यह घूस है बल्कि इसे वे हाल के दिनों तक ‘सरकारी दर’ ही समझते रहे। उन्हें अपने ठगे जाने की बात तब समझ आई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले महीने अपने नेताओं से ‘कट मनी’ लौटाने को कहा। और वो भी क्यों! इसलिए नहीं कि उन्हें जनता से प्यार है, बल्कि इसलिए क्योंकि उनकी पार्टी की छवि को धूमिल हो चुकी है और राज्य में भाजपा से उन्हें कड़ी टक्कर मिल रही है।
शौचालय में भी कट मनी की सोच
जब राज्य की मुख्यमंत्री खुद अपने नेताओं से गैर-कानूनी तरीके से लिए गए पैसों को लौटाने की बात कहती हैं तो जिनके हक के पैसे लिए गए, जो ठगे गए, उनका गुस्सा होना लाजिमी है। यह गुस्सा वैसे तो पूरे बंगाल में है लेकिन वर्धमान, बीरभूम, हुगली, मालदा, मुर्शिदाबाद, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर जिलों में यह ज्यादा है। क्योंकि ये जिले आर्थिक रूप से पिछड़े हैं और शायद यहाँ इस तरीके की पार्टी के स्तर वाली ठगी बड़े स्तर पर हुई होगी।
सर के ऊपर छत चाहिए तो कट मनी
जहाँ तृणमूल के कुछ नेता नाम न छापने की शर्त पर यह स्वीकार कर रहे हैं कि ‘कट मनी’ राज्य भर में एक सच्चाई बन चुकी है, वहीं कुछ इसे भाजपा की साजिश बता रहे हैं। वर्धमान के वरिष्ठ टीएमसी नेता स्वपन देबनाथ की मानें तो भाजपा ही उनके ‘ईमानदार’ नेताओं के घरों के बाहर विरोध प्रदर्शन करवा रही है।
स्वपन देबनाथ की राय से उलट जमीनी सच्चाई हालाँकि कुछ और ही कहानी बयाँ कर रही है। नाम न छापने की शर्त पर हुगली के एक स्थानीय अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हर एक योजना के लिए एक तय दर है। इस सिस्टम में स्थानीय नेताओं से लेकर पंचायत सदस्यों तक का नेटवर्क है। यह सिस्टम छिटपुट शुरू तो हुई थी लेफ्ट वालों की सरकार में लेकिन अब यह पूरी तरह से एक हो गई है।”
दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाक़े में मंदिर में तोड़फोड़ मचाने के मामले में पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ़्तार किया है, उनमें से एक ऐसा आरोपित भी है, जिस पर पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज हैं। गिरफ़्तार आरोपितों में से मोहम्मद ज़ुबैर और मोहम्मद अनस में से एक ऐसा है, जो पहले भी चोरी-चकारी के आरोप में गिरफ़्तार हो चुका है। ख़बर के अनुसार मंदिर में अब पहले की भाँति पूजा-अर्चना शुरू हो चुकी है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। पुलिस ने पूरे क्षेत्र को किले में तब्दील कर दिया है और सादे ड्रेस में भी निगरानी के लिए जवानों को तैनात किया गया है। गिरफ़्तार आरोपितों में एक नाबालिग भी शामिल है।
The two men arrested for vandalizing temple in Delhi have been identified as Mohammed Zubair and Mohammed Anus. Third is a minor in borderline age group. At least one of the two has a criminal record, was arrested for theft etc earlier, police sources say. #HauzQazi
दरअसल, रविवार (जून 30, 2019) की रात समुदाय विशेष के कुछ लोग घुस आए और उन्होंने तोड़-फोड़ मचाई। उन्होंने भगवान शिव, भगवान गणेश व अन्य देवताओं की प्रतिमाओं को विखंडित कर दिया। यह घटना हौज़ काजी की है। यह घटना का वीडियो पूरे सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें देखा जा सकता है कि मंदिर में प्रतिमाओं के आगे लगे ग्लास तक को नहीं बख़्शा गया और उसे भी तोड़ डाला गया। इसके बाद समुदाय के लोगों ने भड़काऊ एवं उत्तेजक नारे लगाए। उन्होंने ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए सड़कों पर भी आतंक पैदा किया।
कल मंगलवार को हालात को सामान्य करने के लिए पुलिस अधिकारियों ने अमन कमिटी की बैठक बुलाई, जिसमें समाज के कई प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए। इस बैठक में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। समुदाय विशेष के प्रतिनिधि ने मंदिर को दोबारा बनवाए जाने की बात कही। हिन्दू समाज के प्रतिनिधि ने पुलिस को सकारात्मक रोल निभाने के लिए धन्यवाद अदा किया। भाजपा नेता विजय गोयल और आम आदमी पार्टी नेता इमरान हुसैन ने भी बैठक में हिस्सा लिया। पुलिस ने बाकियों की भी गिरफ़्तारी का आश्वासन दिया है।
हालाँकि, दिल्ली के चाँदनी चौक स्थित हौजकाजी के एक मंदिर में पत्थर बरसाने और तोड़ फोड़ करने वाले समुदाय विशेष के लोगों को आम आदमी पार्टी के विधायक इमरान हुसैन का समर्थन होने की बात सामने आई है। एक चश्मदीद ने बताया कि नशे में धुत कुछ दूसरे समुदाय के युवक उनके घर के नीचे इकट्ठा हो गए थे और जब आस-पास के लोगों ने उन्हें मंदिर के अंदर जाने से रोकने की कोशिश की तो उन्होंने करीब 400 लोगों को हमला करने के लिए बुला लिया। चश्मदीद का कहना है कि इस दौरान आप विधायक इमरान हुसैन भी वहाँ आए और उन्होंने इस्लामी भीड़ का समर्थन किया।
बच्चा-बच्चा जानता है कि चांदनी चौक से दो बार सांसद रहते हुए हमने किसी धर्म का भेदभाव करे बिना सब के काम किए, पर मुझे दुःख है कि कुछ मुस्लिम लोगों ने दुर्गा माता मंदिर में तोड़फोड़ की, लेकिन इससे ज्यादा दुःख इस बात का है कि केजरीवाल जी अपनी वोट बैंक की राजनीति के चलते चुप बैठ गए।
केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की चुप्पी पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल वोट बैंक की राजनीति के कारण इस घटना को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण योजना पर कैंची चलाई है। दरअसल, शिवराज सिंह चौहान ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सरकारी ख़र्चे पर बुज़ुर्गों को तीर्थ यात्रा कराने की योजना तैयार की थी। इस योजना के अमल में आने के बाद से अभी तक क़रीब सवा सात लाख लोग इसका लाभ उठा चुके हैं। अब कमलनाथ के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने इस योजना के पर कतर डाले हैं। मध्य प्रदेश सरकार की ‘तीर्थ दर्शन योजना’ अब एक तरह से अधर में लटक गई है। इसी योजना ने वरिष्ठ नागरिकों के बीच शिवराज सिंह चौहान की छवि मजबूत की थी।
इसके लिए 2018 और 2019 के बजट की तुलना करते हैं। 2018 में भाजपा सरकार ने इस योजना के लिए 200 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था। जबकि 2019 के बजट में इस योजना के बजट को 30 गुना कम कर दिया गया। इस वर्ष इस योजना के लिए सिर्फ़ 6 करोड़ रुपए ही आवंटित किए गए हैं। कमलनाथ सरकार का यह निर्णय आश्चर्यजनक है क्योंकि मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में एक बड़ी और महत्वकांक्षी योजना के लिए इतना कम बजट आवंटित करना नई राज्य सरकार की ‘बदले की भावना’ को दिखाती है।
हाँ, जब उत्तर प्रदेश में कुम्भ का आयोजन हुआ था, तब कमलनाथ सरकार ने मध्य प्रदेश के 4 अलग-अलग शहरों से तीर्थ-दर्शन ट्रेनों की व्यवस्था की थी, लेकिन उसके बाद से ऐसी कोई ट्रेन नहीं चलाई गई। आर्थिक तंगी और किसानों की क़र्ज़माफ़ी का हवाला देते हुए सरकार ने तीर्थ दर्शन से जुड़ी योजना के बजट में भारी कटौती की है। शिवराज सरकार की यह योजना 60 वर्ष से ऊपर की आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए थी। 2012 में शुरू की गई इस योजना का लाभ उन लोगों को मिला, जो करदाता नहीं थे। यह योजना इतनी लोकप्रिय हुई कि पड़ोस की छत्तीसगढ़ सरकार ने भी ‘तीरथ बरत’ योजना की शुरुआत की।
अब केंद्र सरकार ने भी ‘प्रवासी भारतीय तीर्थदर्शन योजना’ की शुरुआत की है, जिसकी रूपरेखा शिवराज सरकार की योजना से मिलती-जुलती है। शिवराज सरकार ने जगन्नाथपुरी, द्वारका, रामेश्वरम और बद्रीनाथ जैसे तीर्थ स्थानों की यात्रा सरकारी ख़र्च पर कराने की व्यवस्था की थी, जो अब मध्य प्रदेश में शायद संभव नहीं हो पाएगा। पिछले 8 वर्षों में इस योजना पर 700 करोड़ से भी अधिक की राशि ख़र्च की गई थी। इस योजना को धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग द्वारा चलाया जाता था। तीर्थ यात्रा के लिए सरकार स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था करती थी।
अब तक हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णोदेवी, शिर्डी, गया, काशी, अमृतसर, तिरुपति, सम्मेद शिखर, श्रवण बेलगोला वेलगणि चर्च (नागपट्टम), गंगासागर कामाख्या देवी, गिरनारजी, पटना साहिब, उज्जैन, चित्रकूट, महेश्वरुर और अजमेर शरीफ के लिए लोगों को तीर्थ यात्रा का लाभ सरकार दिला चुकी है। यात्रियों को ट्रेन में भोजन, बीमा और उपचार सहित सभी बेसिक सुविधाएँ भी सरकार ही मुहैया कराती थी। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस सम्बन्ध में चुप्पी साध रखी है। मीडिया रिपोर्ट्स का यह भी मानना है कि सरकार खानापूर्ति के लिए जुलाई में एक ट्रेन चला सकती है।
जम्मू कश्मीर के हंदवारा में एक शिक्षक द्वारा छात्र को कुल्हाड़ी से काट डालने की धमकी दी गई। इस मामले से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई कर दोषियों को सज़ा दिलाने की बात कही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि शिक्षक हाथ में कुल्हाड़ी लिए हुए है और छात्र को काट डालने की धमकी दे रहा है। गुरु-शिष्य के रिश्ते को बदनाम करने वाली इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने आक्रोश जताया। शिक्षक ने धमकी देने से पहले छात्र की बुरी तरह पिटाई भी की।
ये घटना उत्तरी कश्मीर के हंदवारा स्थित वागत गाँव की है। शिक्षक ने बच्चे की इतनी पिटाई की कि वह ज़मीन पर लेट गया। इसके बाद उसने कुल्हाड़ी हाथ में लेकर उसे मारने की धमकी दी और डराया भी। अभी तक इसके पीछे के कारणों का पता नहीं चला है। इस घटना के बारे में अधिक जानकारी देते हुए एक कश्मीर पुलिस अधिकारी ने कहा:
“हमने इस मामले की जाँच शुरू कर दी है और जल्द ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। आज एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जिसमें एक बच्चे को एक पुरुष जमीन पर लिटाए हुआ दिख रहा है, और दूसरे हाथ में कुल्हाड़ी पकड़े हुए है, उसे धमकी दे रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह घटना फ्यूचर एजुकेशन इंस्टिट्यूट वगत मगाम में हुई है।”
घटना का वायरल वीडियो, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोग आक्रोशित हो गए
इस घटना का संज्ञान लेते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर लिया है और मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की गई है। आगे की क़ानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस तैयारी में जुटी है। स्थानीय लोगों ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग की है। लोगों का कहना है कि शिक्षकों द्वारा इस तरह का व्यवहार करने से बच्चों के दिमाग पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।
दो मॉब लिंचिंग, दो हत्याएँ, दोनों में हत्यारों के झुण्ड पर आरोप- लेकिन दोनों पर मीडिया गिरोह की अलग-अलग कवरेज। तबरेज़ अंसारी की मौत पर रुदाली करने वाले सभी मीडिया गिरोहों में मंगरू की वैसी ही मौत पर सन्नाटा है। क्योंकि मंगरू की मौत में ‘एंगल’ नहीं है। वह मजहब विशेष का नहीं था, जनजातीय था- और न ही उसे मारने वाले तथाकथित ‘अपर कास्ट’ वाले। बल्कि मारने वाले तो पत्रकारिता के समुदाय विशेष के प्रिय समुदाय विशेष के थे- नाम था साजिद, आज़म और रमज़ान।
शायद इसीलिए ‘tabrez’ या ‘tabrez ansari’ के नाम से सर्च करने पर खबरों का अंबार लग जा रहा है, और वहीं ‘mangru’, ‘mangru lynching’, ‘magru’ आदि कुछ भी लिख कर देख लीजिए- खबर या ‘न्यूज़’ ढूँढ़ने को आप तरस जाएँगे। तबरेज़ पर चार-चार एंगल से लिखवाने वालों ने या तो मंगरू की मौत को कवर करना ही ज़रूरी नहीं समझा, और अगर लिखा भी गूगल की ‘सर्च अल्गोरिथम’ और ‘न्यूज़ अल्गोरिदम’ को ‘गेम’ कर अपने ही कोरम पूरा करने वाले लेखों को ‘दफ़ना’ दिया।
एक-एक इमेज को देखिए। ध्यान से। क्लिक करके देखिए। केवल एक ऑपइंडिया के अलावा किसी भी और की मंगरू खान की कवरेज नहीं मिलेगी आपको। टेलीग्राफ़ का एक लेख भूले-भटके आया भी तो उसकी भाषा देखिए। ‘duo’, ‘two youths’। और अब इसे अख़लाक़ से लेकर तबरेज़ तक हर उस मॉब लिंचिंग से तुलना कीजिए, जिसमें हिन्दुओं के हाथों दूसरे मजहब की, या कथित अपर कास्ट हिन्दुओं के हाथों दलित हिन्दुओं की पिटाई हुई है।
चूँकि वह ‘नैरेटिव’ में फिट हो सकने वाली घटना नहीं थी, यह ‘डरा हुआ शांतिप्रिय’ के फर्जीवाड़े का समर्थन नहीं करती, इसलिए पत्रकारिता का समुदाय विशेष मंगरू की हत्या पर चुप है।
यह चुप्पी तब भी थी जब…
यह चुप्पी केवल आज की नहीं है, केवल मंगरू के मामले में नहीं है। यह हर उस मामले में ओढ़ा गया सन्नाटा है, जब ‘डरा हुआ शांतिप्रिय’ कोई अपराध करता है, और भुक्तभोगी कोई हिन्दू होता है।
कालीचक याद है, जब करीब तीन लाख कट्टरपंथियों ने ऐसी आगजनी की कि दंगे जैसे हालात हो गए थे? तब किसी मीडिया गिरोह के न्यूज़रूम ने ‘क्या समुदाय विशेष वाले कट्टर हो रहे हैं?’ का सवाल नहीं पूछा। उसी साल (2016) में बंगाल के कुछ समुदाय विशेष वालों ने ईद से एक दिन पहले ही ईद का जुलूस निकालना शुरू कर दिया, ताकि हिन्दुओं को मार्गशीर्ष पूर्णिमा मनाने से रोका जा सके। आपत्ति जताने पर हिन्दुओं के घर जला डाले गए और ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगे। वायर ने कितने लेख छापे इस पर?
बाड़मेर के कट्टरपंथियों ने एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति को, एक दलित को केवल इसलिए मौत के घाट उतार दिया कि उसने हिन्दू होकर एक दूसरे मजहब की लड़की से प्रेम करने की जुर्रत की थी। कहाँ था तब पत्रकारिता का समुदाय विशेष? तमिलनाडु के कुम्भकोणम में रामालिंगम की हत्या कर दी गई। इस बर्बरतापूर्ण हत्या में रामलिंगम के रात में घर लौटते वक़्त कुछ अज्ञात लोगों ने उसके हाथ काट दिए जिससे अत्यधिक रक्स्राव से रामालिंगम की मृत्यु हो गई। एक गर्भवती महिला को केवल इसलिए उसके परिवार ने (जिसमें उसकी माँ भी थी) ज़िंदा जला दिया क्योंकि वह हिन्दू लड़के से शादी कर उसके बच्चे की मॉं बनने वाली थी।
ऐसी घटनाएँ दर्जनों हैं– मैं गिना-गिना कर थक जाऊँगा, आप लिंक खोलकर पढ़ते-पढ़ते। इन सब घटनाओं में लेकिन जो चीज़ समान है, वह है मीडिया का सन्नाटा। कहीं मजहब विशेष में फैले कट्टरपंथ पर चर्चा करना तो दूर, कभी इन घटनाओं के अस्तित्व पर ही मौन साध लिया जाता है, कभी इनमें ‘कम्यूनल एंगल’ का होना नकारा जाता है, कभी यह ज्ञान दिया जाता है कि कुछ लोगों की करनी से करोड़ों लोगों को नहीं तौलना चाहिए। लेकिन जहाँ कहीं मामला ‘पलटने’ की ‘महक’ भर आ जाए, भूखे लकड़बग्घे की तरह झपटते हुए पत्रकारिता का समुदाय विशेष अपना ही ज्ञान बिसरा जाता है।
‘आआआह… हिन्दू फ़ासीवाद’
चाहे मेरठ के एक कॉलेज की मजहब विशेष की छात्रा मज़हबी उत्पीड़न का संदेहास्पद दावा करे, घटना रोड रेज में हुई मारपीट की हो (जो दिल्ली-एनसीआर का एक कुरूप और निंदनीय पर बिलकुल ‘सेक्युलर’ सच है), या एक ‘शांतिप्रिय’ ने ही दूसरे ‘शांतिप्रिय’ को भूमि-विवाद में मार दिया हो- मीडिया गिरोह ने हर उस घटना में हिन्दुओं को बदनाम करने का भरसक प्रयास किया है, जहाँ समुदाय विशेष ‘विक्टिम’ हो। न उस समय न्याय का सिद्धांत ज़रूरी रहा, न ये याद रखना ज़रूरी समझा कि मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए। यहाँ तक कि घटनाओं के फ़र्ज़ी निकलने पर भी प्रपंच बंद नहीं हुआ।
हत्या हत्या होती है, निंदनीय और दंडनीय होती है
कानून का फैसला आने के पहले तक कोई भी यकीन के साथ नहीं कह सकता कि तबरेज़ अंसारी को चोर होने के कारण मार डाला गया या उसके मजहब के कारण- जुनैद के मामले में आखिर यही हुआ था; सीट-विवाद में हुई हत्या को बेवजह साम्प्रदायिक ‘एंगल’ दे दिया गया था। और मीडिया गिरोह ने ‘अलिखित’ नियम स्थापित कर दिया था कि समुदाय विशेष की तो जान इतनी कीमती है कि उसमें ‘रिलिजियस एंगल’ ज़मीन खोद कर लाया जाए, अगर मामले को खोदने भर से न मिले; लेकिन एक हिन्दू की जान की इतनी कीमत नहीं है कि मज़हबी कारण से भी उसका क़त्ल होने पर मज़हबी कारण को उजागर किया जाए।
हर इंसान की जान इस देश के संविधान में बराबर आँकी गई है। बेहतर होगा कि मीडिया गिरोह दोगलापन बंद कर उस संविधान की कम-से-कम इस एक बात को खुद मानना शुरू कर दे, जिस संविधान का हवाला दे वह हर समय हर असहमति का गला ‘आप तो संविधान के ख़िलाफ़ हैं मतलब’ कह कर दबाता रहता है।
TV9 भारतवर्ष नाम का एक न्यूज़ चैनल अपने फेक और फर्जी मीडिया रिपोर्ट्स के कारण हर दिन नए अध्याय जोड़ रहा है। हाल ही में TV9 भारतवर्ष द्वारा एक वीडियो दिखाया गया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की अर्थव्यवस्था पर बातचीत करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने गए थे।
TV9 भारतवर्ष द्वारा ‘कॉन्ग्रेस-वादी’ पत्रकार सुप्रिया भरद्वाज की एक ऐसी रिपोर्ट शेयर की गई जिसमें दावा किया गया था कि पीएम मोदी भूतपूर्व पीएम मनमोहन सिंह से मिलने उनके निवास पर गए थे। इस रिपोर्ट में इस मीटिंग की ‘एक्सक्लूसिव’ रिपोर्टिंग का भी दावा किया गया था।
यह न्यूज़ रिपोर्ट कल ही सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनल पर जारी की गई। इसमें पत्रकार सुप्रिया भरद्वाज ने दावा किया है कि पीएम मोदी और मनमोहन सिंह ने देश की अर्थव्यवस्था पर चर्चा की। हालाँकि, दुखद घटना यह है कि अब यह वीडियो डिलीट कर दिया गया है।
क्या है सच्चाई?
ट्विटर यूज़र अंकुर सिंह ने इस वीडियो की सच्चाई सामने लाते हुए बताया कि TV9 भारतवर्ष ने यह निहायत ही झूठा दावा 2014 के एक पुराने वीडियो के द्वारा किया है। इसके साथ ही अपने ट्वीट में अंकित ने यह भी लिखा है कि राहुल गाँधी की चहेती पत्रकार सुप्रिया भरद्वाज 2014 के एक पुराने वीडियो क्लिप को एक्सक्लूसिव बताकर फेक न्यूज़ चलाने का काम कर रही हैं।
Fake news peddler @TV9Bharatvarsh cooked up entire story of Modi meeting Manmohan Singh using a 2014 clip.
पीएम मोदी भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कई बार मिलते रहे हैं। मई 2015 में मनमोहन सिंह भी प्रधानमंत्री मोदी से मिलने 7 RCR गए थे। हालाँकि, TV9 भारतवर्ष द्वारा शेयर की गई वीडियो क्लिप मई 2014 की है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण के अगले दिन मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी से मिलने उनके उनके आवास पर गए थे। यह मात्र एक शिष्टाचार भेंट थी। यह वीडियो क्लिप उसी दिन की थी, जो कि पीएम मोदी के ही यूट्यूब चैनल पर शेयर की गई थी।
सिर्फ TV9 भारतवर्ष ही नहीं, कॉन्ग्रेस के ही एक एडवोकेट और सचिव जीतेन्द्र बघेल द्वारा भी 2014 का यही वीडियो ये कहते हुए शेयर किया गया कि पीएम मोदी मनमोहन सिंह के घर उनसे यह पूछने गए थे कि “भारत की GDP कैसे बढ़ाई जाए?”
जीतेन्द्र बघेल के इस झूठे दावे की पोल @pokershash नाम के ट्विटर यूज़र ने खोली-
2014 का विडीओ है। थोड़ा कम झूठ फैलाओ। और कांग्रेस जैसे गँवार ही बजट से GDP को जोड़ सकते है ??? pic.twitter.com/EuwbBHumaR
यह हास्यास्पद है कि अपने फेक नैरेटिव को दिशा देने के लिए हर समय लालायित रहने वाले मीडिया गिरोहों की तरह ही TV9 भारतवर्ष न्यूज़ चैनल एक 5 साल पुराने वीडियो को ताजा और एक्सक्लूसिव बताकर आज शेयर करता है। शायद यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा हो कि मनमोहन सिंह एक विशेषज्ञ हैं जो भारत की अर्थव्यवस्था को अन्य किसी भी अर्थशास्त्री से ज्यादा जानते हों। लेकिन इसके लिए एक शिष्टाचार भेंट के वीडियो का सहारा लेना मीडिया की विश्वसनीयता को ही दर्शाता है।