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चलती बस में महिला का वीडियो बनाना मोहम्मद ख़ान को पड़ा महँगा, लोगों ने की कुटाई, हुआ गिरफ़्तार

चलती बस में 35 वर्षीय महिला का वीडियो बनाने वाले एक शख़्स को कोलकाता पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। दरअसल, वो महिला रविवार (30 जून) की सुबह अपने पति और बेटी के साथ बस से जा रही थी, अचानक उसकी नज़र अपने पीछे वाली सीट पर बैठे शख़्स पर गई जो उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था।

ख़बर के अनुसार, 24 वर्षीय मोहम्मद ख़ान को मुचीपारा पुलिस स्टेशन द्वारा गिरफ़्तार किया गया है। आरोपित ख़ान हावड़ा के उलुबेरिया का निवासी है और उसे भारतीय दंड संहिता की धारा-354 के तहत गिरफ़्तार किया गया।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, महिला रविवार सुबह धूलगढ़-सियालदह मार्ग पर एक निजी बस में सवार हुई थी। आरोपित ख़ान उसके सामने बैठ गया। एक सह-यात्री ने महिला को सूचित किया कि आरोपित उसकी तस्वीरें ले रहा है।

महिला ने कहा:

“सह-यात्रियों में से एक ने पहली बार देखा कि वह आदमी मेरी तस्वीरें ले रहा था। जब हमने उसे तस्वीरें दिखाने की माँग की, तो उसने इनकार कर दिया। लेकिन हमें उसके सेल फोन पर तस्वीरें मिलीं। इसलिए मैंने 100 नंबर डायल कर दिया और पुलिस से मदद माँगी।”

महिला ने जब कॉल किया तो उस समय बस लेनिन सरानी पर वेलिंगटन क्रॉसिंग से आगे निकल गई। कंट्रोल रूम के एक अधिकारी ने तुरंत सियालदह ट्रैफिक गार्ड के प्रभारी अधिकारी को बस रोककर इस मामले पर कार्रवाई करने को कहा। महिला के फोन करने के कुछ ही मिनटों के भीतर पुलिस ने आरोपित को पकड़ लिया।

पुलिस के पहुँचने से पहले ही यात्रियों ने सार्वजनिक रूप से आरोपित को पीटना शुरू कर दिया था।  यह जानने पर कि पुलिस को बुलाया गया है, आरोपित मोहम्मद ख़ान दया की भीख माँगते हुए उस महिला के पैरों पर गिर गया। लेकिन वहाँ मौजूद महिलाओं ने उसे सबक सिखाने का फ़ैसला किया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

पुलिस के मुताबिक़, NRS अस्पताल के सामने बस को रोका गया था। आरोपी को यात्रियों ने सौंप दिया था लेकिन उसका दोस्त भागने में क़ामयाब रहा। फ़िलहाल युवक को मुचीपारा पुलिस थाने ले जाया गया है। इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की जा रही है।

DMK ने ठुकराई कॉन्ग्रेस की माँग, पूर्व PM मनमोहन सिंह को राज्यसभा भेजने से किया इनकार

डीएमके ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के लिए एक राज्यसभा सीट देने से इनकार कर दिया है। बता दें कि कई दिनों से मीडिया में ऐसी ख़बरें चल रही थीं कि कॉन्ग्रेस ने तमिलनाडु की अपनी सहयोगी द्रविड़ पार्टी से पूर्व पीएम के लिए एक राज्यसभा सीट की माँग की थी। मनमोहन सिंह का राज्यसभा में कार्यकाल ख़त्म हो गया है और अभी संसद के दोनों सदनों में से किसी में भी पूर्व प्रधानमंत्री सदस्य के रूप में उपस्थित नहीं है। एचडी देवेगौड़ा भी लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। कॉन्ग्रेस के लिए मनमोहन सिंह का संसद में रहना ज़रूरी है क्योंकि अर्थनीति व अन्य कठिन विषयों पर मोदी सरकार को घेरने के लिए उनके चेहरे का उपयोग किया जाता है।

पिछले 5 वर्षों में अर्थव्यवस्था और अन्य जटिल विषयों पर कॉन्ग्रेस की तरफ़ से मनमोहन सिंह ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। अतः, पार्टी उन्हें हर हाल में संसद में रखना चाहती है। तमिलनाडु में इसी महीने राज्यसभा की 6 सीटों के लिए मतदान होना है। आँकड़ों की बात करें तो इनमें से 3 सीटें डीएमके के खाते में जा सकती हैं, वहीं बाकी की 3 सीटों पर राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी एआईडीएमके के जीतने की उम्मीद है। ऐसे में, कॉन्ग्रेस ने डीएमके को 3 में से 1 सीट डॉक्टर सिंह के लिए माँगी थी, जिसे डीएमके द्वारा ठुकरा दिए जाने की बात सामने आई है।

दरअसल, डीएमके ने 3 में से 1 सीट एमडीएमके संस्थापक वाइको को देने का निर्णय लिया है। वाइको तमिलनाडु के पुराने नेता हैं और डीएमके ने उन्हें पहले ही 1 सीट देने का वादा किया था। बाकी की 2 सीटों पर डीएमके के ही उम्मीदवार होंगे। ऐसे में कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि कॉन्ग्रेस डॉक्टर सिंह को राजस्थान से राज्यसभा भेज सकती है। चूँकि, राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष और वयोवृद्ध नेता मदन लाल सैनी का हाल ही में निधन हो गया था, इससे राजस्थान में एक राज्यसभा सीट खाली हुई है।

डीएमके द्वारा आख़िरी समय पर अपना निर्णय बदलने से कॉन्ग्रेस भी हैरान नज़र आ रही है क्योंकि डीएमके प्रमुख स्टालिन विपक्षी नेताओं में शायद एकमात्र प्रमुख नेता थे जिन्होंने राहुल गाँधी की प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी का खुल कर समर्थन किया था। उन्होंने कई बार राहुल को पीएम उम्मीदवार बनाए जाने की वकालत की थी। ऐसे में, लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद उसी तरह का रुख अख्तियार करना कॉन्ग्रेस के लिए चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि भाजपा ने भी अपना मिशन दक्षिण शुरू कर दिया है।

तेलंगाना और आंध्र में कॉन्ग्रेस पार्टी पहले ही अपना अस्तित्व लगभग खो चुकी है और केरल में वामपंथियों ने राहुल गाँधी द्वारा वायनाड से चुनाव लड़ने को वामपंथी दलों के ख़िलाफ़ लड़ाई के रूप में देखा था। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सत्ताधारी पार्टी ज़रूर है लेकिन सबसे बड़े दल भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए वो एचडी कुमारस्वामी की पार्टी के समर्थन में है जबकि जेडीएस के पास काफ़ी कम सीटें हैं।

‘मंदिर में प्रतिमाएँ तोड़ीं, लगाए ‘अल्लाहु-अकबर’ के नारे’: स्थानीय लोगों में गुस्सा, तनाव के बीच वीडियो वायरल

दिल्ली के चाँदनी चौक इलाक़े में मुस्लिम समाज के लोगों पर मंदिर में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया पर लोगों ने कई वीडियो शेयर किए, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोग हंगामा करते दिखाई दे रहे हैं। दिल्ली सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा ने 2 वीडियो ट्वीट कर लिखा, “ये पाकिस्तान नहीं बल्कि दिल्ली के चावड़ी बाजार का हिन्दू मंदिर हैं। यह घटना कल की है, जब धर्म विशेष की भीड़ ने मंदिर में घुसकर वहाँ की मूर्तियों को तोड़ा है। यह काम बदमाशों या गुंडों ने नहीं बल्कि सैकड़ो स्थानीय लोगों की भीड़ ने किया है। उन्होंने अपने धर्म के नारे लगाते हुए मंदिर तोड़ा डाला।

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग जब मंदिर पहुँचे तो उन्होंने दिखाया कि कैसे माँ काली व अन्य प्रतिमाओं के आगे लगाए गए ग्लास को तोड़ डाला गया है। इसके अलावा भगवान गणेश की प्रतिमा को भी विखंडित कर दिया गया। भगवान शिव की प्रतिमा को तोड़ डाला गया। कपिल मिश्रा ने इसी घटना से जुड़ी एक अन्य वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “दिल्ली के हौजकाजी में कल रात एक मंदिर पर पत्थर बरसाए गए और तोड़-फोड़ की गई। पहले पूरे इलाक़े में अफवाह फैलाई गई कि एक मुस्लिम लड़के की मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) हुई है, जबरदस्ती जय श्री राम बुलवाया है। इस अफवाह के बाद संप्रदाय विशेष की मॉब जमा हुई और उस मॉब ने पहले मंदिर में और उसके बाद थाने में हंगामा किया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले साज़िश के तहत यह अफवाह फैलाई गई कि एक मुस्लिम व्यक्ति की भीड़ द्वारा हत्या (मॉब लिंचिंग) कर दी गई है और उससे जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया है। इसके बाद गुस्साई मुस्लिम मॉब मंदिर में घुस आए और उन्होंने प्रतिमाओं को विखंडित करने के साथ-साथ मंदिर में तोड़-फोड़ की।

इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस थाने के सामने बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गई और सभी ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए देखे जा सकते हैं। मॉब ने वहाँ इस्लामी नारे लगाते हुए जम कर हंगामा बड़पाया।

जायरा वसीम के मज़हब को आधार बनाकर बॉलीवुड छोड़ने पर शिवसेना-BJP ने की आलोचना

दंगल और सीक्रेट सुपरस्टार फेम एक्ट्रेस जायरा वसीम के धर्म को आधार बनाकर एक्टिंग छोड़ने का फैसला तूल पकड़ता जा रहा है। धर्म को आधार बनाकर जायरा के ऐक्टिंग छोड़ने के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है। जहाँ कुछ लोगों ने इस फैसले को सही बताया है तो वहीं कुछ लोगों ने इस गलत ठहराया है। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेस के नेता उमर अब्दुल्ला ने जायरा के फैसले का समर्थन करते हुए फैसले का सम्मान करने की सलाह दी है, तो वहीं शिवसेना और भाजपा ने इसकी आलोचना की है। 

शिवसेना ने जायरा के फैसले में धर्म को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। शिवसेना की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने एक के बाद कई ट्वीट कर धर्म के आधार पर एक्टिंग छोड़ने के फैसले की आलोचना की। प्रियंका ने ट्वीट कर लिखा, “यदि आपकी आस्था आपको आकर्षित कर रही है, तो आप इसका पालन कर सकते हैं, लेकिन कृपया धर्म को आधार बनाकर अपने करियर का फैसला ना करें। यह आपके धर्म को असहिष्णु बताता है, जबकि हकीकत में ऐसा नहीं है। यह जायरा वसीम के धर्म लिए भी एक बड़ा प्रतिगामी कदम है और इस गलत धारणा को और पुष्ट करता है कि इस्लाम में सहिष्णुता की जगह नहीं है।”

अपने अगले ट्वीट में प्रियंका ने कहा, “हिंदी सिनेमा में इसी आस्था के लोगों ने सफलता के कई कीर्तिमान गढ़े हैं, क्या उन्हें धर्म के बारे में पता नहीं है? कुछ ने जायरा के फैसले की विनोद खन्ना के उस फैसले के साथ बराबरी की है। जब विनोद खन्ना ने कहा था कि उनका धर्म उनके करियर के चुनाव करने के दौरान आड़े आ रहा है?”

इसके अलावा, प्रियंका ने एक और ट्वीट करते हुए कहा कि जो लोग इसकी तुलना नुसरत जहाँ के फतवे से कर रहे हैं, वो बिल्कुत गलत हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जायरा ने जब से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा है, तभी से वो कश्मीरी कट्टरपंथियों के निशाने पर रही हैं।

भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने भी धर्म के आधार पर एक्टिंग छोड़ने के फैसले को दबाव में लिया हुआ फैसला बताया। उन्होंने भी इस बात का जिक्र किया कि जायरा लगातार कट्टरपंथी समूहों के निशाने पर थीं। बता दें कि, जायरा वसीम ने रविवार (जून 30, 2019) को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पोस्ट लिखकर इस बात की जानकारी दी थी कि वो एक्टिंग छोड़ रही हैं। 5 साल पहले फिल्म इंडस्ट्री में आने का उनका फैसला गलत था। ये उन्हें अल्लाह के रास्ते से दूर ले जा रहा है।

कॉन्ग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं, दिग्गज़ विधायक आनंद सिंह ने दिया इस्तीफ़ा

कर्नाटक की राजनीति में बग़ावती तेवर जारी है। एक बार फिर कॉन्ग्रेस-जेडीएस को बड़ा झटका लगा है। कॉन्ग्रेस से विजयनगर के विधायक आनंद सिंह ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफ़ा स्पीकर के आर रमेश को सौंपा है।

ऐसा माना जा रहा है कि अन्य विधायक भी उनके नक्शेक़दम पर चल सकते हैं। आनंद सिंह ने अपना इस्तीफ़ा ऐसे समय में दिया जब मुख्यमंत्री कुमारस्वामी भारत में न होकर अमेरिका में हैं। आगामी 8 जुलाई तक उनके वापस आने की संभावना है। 

इससे पहले लोकसभा चुनाव में क़रारी हार के एक दिन बाद ही कर्नाटक में राज्य कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व पर भरोसा जताया गया था। इसके अलावा, यह भी कहा गया था कि कॉन्ग्रेस और जेडीएस के बीच गठबंधन जारी रहेगा। लेकिन उसके बाद के घटनाक्रम पर नजर डालें तो ऐसा कुछ भी प्रतीत नहीं हो रहा है।

ख़बर के अनुसार, कॉन्ग्रेस नेता परमेश्वर ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया था कि वो राज्य सरकार को अस्थिर करने की कोशिश में जुटी हुई है। बीजेपी की ख़िलाफ़त करते हुए उन्होंने कहा था कि राज्य में सत्तारुढ़ गठबंधन उनके मंसूबों को सफल नहीं होने देगा। उन्होंने कहा था कि सभी विधायक एक साथ हैं और गठबंधन कुमारस्वामी के नेतृत्व के तहत काम करना जारी रखेगा और राज्य में कॉन्ग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार को कोई ख़तरा नहीं है।

बता दें कि आनंद सिंह उस समय चर्चा में आए थे जब उनके साथी विधायक कांपली गणेश ने रिसॉर्ट में उनकी पिटाई कर दी थी। रिसॉर्ट में कॉन्ग्रेस के सभी विधायकों को भाजपा में शामिल होने से रोकने के लिए ठहराया गया था। दरअसल, आनंद सिंह पिछले साल ‘ऑपरेशन लोटस’ में पकड़े गए भाजपा विधायकों में से एक थे।

जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा यह पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि उन्हें भाजपाा नेतृत्व ने ‘ऑपरेशन लोटस’ में शामिल न होने का निर्देश दिया है क्योंकि उनका मानना है कि राज्य की गठबंधन सरकार ख़ुद ही गिर जाएगी। वहीं, दूसरी तरफ़ आनंद सिंह का इस्तीफ़ा यह सवाल खड़ा करता है कि क्या ‘ऑपरेशन लोटस’ अभी भी जारी है।

चोरी के शक़ में शैनुल शेख की पीटकर हत्या, पश्चिम बंगाल के मालदा में तनाव

पश्चिम बंगाल में मालदा ज़िले के बैशनभनगर और कलियाचक क्षेत्र में तनाव का महौल है। ख़बर है कि रविवार (30 जून) को एक युवक को इतनी बुरी तरह से पीटा कि उसकी मौत हो गई। उस युवक पर शक़ था कि वो बाइक चोरी में शामिल था। 

ख़बर के अनुसार, मृतक की पहचान 24 वर्षीय शैनुल शेख के रूप में हुई है। इलाक़े में प्रदर्शन उस समय शुरू हुआ जब शैनुल के शव को उसके गृहनगर बैशनभनगर लाया गया। जानकारी के अनुसार, शेख को निजी अंगों, आँखों और कानों में गंभीर चोटें आई हुईं थी। उसे मालदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के एसएसकेएम अस्पताल में भेजा गया था, जहाँ उसकी मौत हो गई।

शैनुल शेख के परिवार में उसकी माँ और पत्नी के अलावा एक छ: महीने की बेटी भी है। शेख की माँ सूफ़िया ने बताया:

“वो परिवार में अकेला कमाने वाला शख़्स था। वो ईंट के भट्टे पर काम करता था। बुधवार (25 जून) को कुछ लोगों ने उसे बाहर बुलाया और बाद में हमें पता चला कि उसकी बुरी तरह से पिटाई की गई है।”

इसके अलावा शेख की पिटाई किए जाने का एक वीडियो भी सामने आया है, इसे देखने के बाद लोगों में ग़ुस्सा और बढ़ गया। हत्या के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 34 को जाम कर दिया और कलियाचक में दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों में जमकर तोड़-फोड़ की। इसके अलावा यह भी पता चला है कि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी बसों में भी तोड़-फोड़ की है। हालात इतने विकट हो गए कि पुलिस को स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए हवाई फायरिंग तक करनी पड़ गई। पुलिस ने इस बात की जानकारी दी कि इस घटना के संबंध में एक शख़्स को गिरफ़्तार किया गया है।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया:

“अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले प्रदर्शनकारयों ने कलियाचक क्षेत्र में NH 34 पर प्रदर्शन किया। वो एक युवक की मौत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे। क्षेत्र में भारी मात्रा में पुलिस बलों को तैनात किया गया है। राज्य की स्थिति फ़िलहाल शांतिपूर्ण है।”

कॉन्ग्रेस नेता और सुजापुर के विधायक इशा ख़ान चौधरी ने शैनुल शेख के परिवार वालों से मुलाक़ात की और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा:

“परिवार के सदस्य और निवासी बैशनभनगर पुलिस स्टेशन पर प्रदर्शन के लिए शव को ले जाना चाहते हैं। मैंने उन्हें अंतिम संस्कार के लिए मनाया है और प्रदर्शन बंद करने के लिए कहा। हम चाहते हैं कि शेख को मारने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जाए। मैंने पुलिस से कहा है कि इस बात की जाँच की जाए कि यह सामुदायिक हिंसा थी या नहीं।”

भारत के वीर: पुलवामा हमले के बाद वीरगति को प्राप्त जवानों के परिवार वालों के लिए 12 गुना ज्यादा दान

पुलवामा आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ जवानों के वीरगति को प्राप्त होने के बाद से ‘भारत के वीर’ फंड में बड़ी मात्रा में दान किया जा रहा है। 14 फरवरी को हुए अटैक में 40 वीरों के बलिदान के बाद पूरे देश में जवानों के लिए डोनेशन में काफी वृद्धि दर्ज की गई है। खबर के मुताबिक, इस साल 18 जून तक ₹242.15 करोड़ की सहायता राशि मिल चुकी है। वीरों के लिए दिए जाने वाले डोनेशन में 12 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

बता दें कि 2017 के मध्य में ‘भारत के वीर फंड’ की स्थापना गई थी। फंड की स्थापना के बाद उसी साल उसमें कुल ₹6.40 करोड़ जमा हुए थे। इसके बाद साल 2018 में इस फंड में ₹19.43 करोड़ जमा किए गए, लेकिन इस साल फंड में जमा हुई राशि इससे काफी अधिक है।

‘भारत के वीर’ फंड में जमा होने वाली राशि को सीधे वीरों के परिवार तक पहुँचाया जाता है। इस साल 18 जून तक ₹14.20 करोड़ की राशि वीरगति को प्राप्त जवानों के परिवारों को मदद के तौर पर दी जा चुकी है। 2018 में  ₹6.58 करोड़ और 2017 में ₹11 करोड़ की राशि मदद के तौर पर इस फंड से दी गई थी।

भारत के वीर फंड में स्वैच्छिक तौर पर डोनेशन दिया जा सकता है। इस पोर्टल पर वीरगति को प्राप्त जवानों की डिटेल्स होती हैं और सीधे उनके परिवार की भी मदद की जा सकती है। यहाँ डोनेशन देने के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर के साथ यूपीआई के जरिए भी पेमेंट किया जा सकता है। शहीदों के लिए बनाए गए इस पोर्टल पर दान में पुलवामा हमले के बाद लोगों ने काफी सक्रियता दिखाई है। ‘भारत के वीर’ के जरिए वीरों की मदद करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक ने यूपीआई पेमेंट गेटवे की शुरुआत की, ताकि लोग आसानी से योगदान कर सकें। इसके साथ ही पेटीएम ने भी जवानों के परिजनों को दान देने के लिए ‘CRPF Wives welfare Association’ नाम की एक अलग विंडो बनाई थी। 

पिछले सप्ताह राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने ‘भारत के वीर’ पोर्टल के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले 2 साल से इस पोर्टल के जरिए वीरगति को प्राप्त जवानों के परिवार को सीधे तौर पर मदद मिलती है। पोर्टल लॉन्च होने के बाद से अब तक कुल ₹31.78 करोड़ की मदद जवानों के परिवार को मिल चुकी है। इसके साथ ही राय ने जानकारी देते हुए कहा कि अब तक 267 सुरक्षाकर्मियों के परिजनों को ₹16.27 करोड़ की धनराशि वितरित की गई है, जिसका विवरण पोर्टल पर अपलोड किया गया था। उन्होंने बताया कि इसमें से ₹11.11 करोड़ सीआरपीएफ के वीरगति को प्राप्त जवानों को,  ₹3.30 करोड़ बीएसएफ को, ₹1.69 करोड़ असम राइफल्स को और ₹17.76 लाख सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों के परिवार वालों को दिया गया।

पुलवामा हमले के बाद से भारत के वीर पोर्टल पर आम नागरिकों द्वारा चंदा देने की संख्या में काफी अधिक वृद्धि हुई है। गौरतलब है कि 14 फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले को अपना निशाना बनाया था और इस हमले में 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इसके बाद से डोनेशन में लगभग 12 गुना अधिक वृद्धि दर्ज की गई। पोर्टल के बनने के बाद से अब तक कुल ₹267.98 करोड़ की रकम इसमें शहीदों के परिवार के लिए इकट्ठा की जा चुकी है।

हिस्ट्रीशीटर इरफ़ान ने किया नवविवाहिता शोभा का अपहरण, सदमे में पिता की हार्ट अटैक से मौत

राजस्थान में 5 पाँच दिन पहले मोनू पठान (इरफान) नाम के हिस्ट्री शीटर ने बंदूक की नोक पर नवविवाहित शोभा का अपहरण किया था। जिसके मद्देनजर शोभा के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन कार्रवाई करने की बजाय पुलिस मामले में लापरवाही दिखाती रही। अपहरण के पाँचवे दिन तक पुलिस की टाल-मटोली से परेशान पिता को जब अपहर्ताओं ने मामले को वापस लेने की धमकी दी, तो वह सदमें में आ गए, और दिल का दौरा पड़ने से शनिवार (जून 29, 2019) सुबह उनकी मौत हो गई।

खबरों के अनुसार परिजनों का कहना है कि पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं करने के सदमें को वह सह नहीं सके। उन्हें निजी अस्पताल भी ले जाया गया, लेकिन उन्हें वहाँ मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों ने साइलेंट हार्ट अटैक को उनकी मौत का कारण बताया है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी नहीं आई है।

नवलकिशोर (शोभा के पिता) की मौत की खबर सुनते ही उनके परिजन, दोस्त और सामाजिक संगठन सुबह 9 बजे एमबीएस के पोस्टमार्टम रूम पहुँच गए और वहाँ बहुत हंगामा किया। शोभा को ढूँढने और आरोपित की गिरफ्तारी की माँग पर उन्होंने नवलकिशोर के शव को उठाने से भी इंंकार कर दिया।

परिजनों ने इस दौरान परिवार के लिए 50 लाख रुपए (कुछ खबरों के अनुसार) की सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग की। उन्होंने आईजी के दफ्तर के सामने सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। जिसके बाद नयापुरा डीएसपी ऑफिस में पुलिस प्रशासन व मृतक के परिजनों के बीच करीब दोनों घंटे तक बातचीत हुई, लेकिन इस बातचीत का कोई निष्कर्ष नहीं निकला और प्रदर्शन जारी रहा। फिर, प्रशासन ने जब परिजनों की कुछ माँगों पर सहमति जताई तब जाकर मामला शांत हुआ।

बता दें परिजनों के प्रदर्शन में भाजपा सांसद संदीप शर्मा उनका पूरा साथ दे रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अगर 24 घंटे में बदमाशों को नहीं पकड़ा गया तो वह आंदोलन करेंगे। इस मामले के बाद से ही प्रदेश के लोग प्रशासन से नाराज है। ट्विटर पर इस मामले में कहा जा रहा है कि कॉन्ग्रेस ने पूरा प्रदेश अपराधियों को सौंप दिया है। 5 दिन हो चुके हैं इस घटना को, लेकिन पुलिस ने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया। यूजर्स इस मामले में नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप करने की माँग कर रहे हैं।

वहीं, टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक एएसपी ने आश्वासन दिया है आरोपित को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस ने लड़की को बचाने और आरोपित को गिरफ्तार करने के लिए 4-5 लोगों की टीम को अनुमानित जगह पर भेजा गया है, साथ ही मोनू पठान (इरफान) के घरवालों और दोस्तों से पूछताछ जारी है।

मीम मामला: प्रियंका शर्मा की रिहाई में देरी क्यों – पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट का अवमानना नोटिस

उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को अवमानना नोटिस जारी किया है। ममता बनर्जी का मीम पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार भाजपा कार्यकर्ता प्रियंका शर्मा की रिहाई में देरी को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सोमवार (जुलाई 1, 2019) को यह नोटिस जारी किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूछा है कि मई में उसके आदेश के तुरंत बाद प्रियंका शर्मा को रिहा क्यों नहीं किया गया? प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रियंका शर्मा के भाई राजीब शर्मा द्वारा दायर अवमानना याचिका पर राज्य सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह का वक्त दिया है। भाजपा युवा मोर्चा की नेता प्रियंका शर्मा ने मई में फेसबुक पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से संबंधित एक मीम पोस्ट किया था। इसके बाद प्रियंका को 10 मई को  गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 500 और सूचना एवं प्रौद्योगिकी कानून के प्रावधानों के आरोपों में मामला दर्ज किया गया था।

यह गिरफ्तारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेता की शिकायत पर हुई थी। शीर्ष अदालत की अवकाश पीठ ने 14 मई को प्रियंका शर्मा को तत्काल जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले माफी माँगने की शर्त पर बेल देने की बात कही थी, लेकिन बाद में स्पष्ट किया कि जमानत के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं है। प्रियंका शर्मा के भाई राजीब शर्मा ने न्यायालय में दायर याचिका में आरोप लगाया कि 14 मई के आदेश के बावजूद उनकी बहन की जेल से रिहाई में 24 घंटे से ज्यादा की देरी की गई।

किसी सांसद के रिश्तेदार को नहीं मिलेगा टिकट: UP उपचुनाव की तैयारी में जुटी BJP का फैसला

लोकसभा में शानदार जीत हासिल करने के बाद अब भाजपा उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनाव की तैयारियों में जुट गई है। पार्टी की जीत के लिए बीजेपी ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में पार्टी ने उपचुनाव के संबंध में एक अहम फैसला लिया है। खबर के मुताबिक, बीजेपी इस बार नए कार्यकर्ताओं को टिकट देने के मूड में है। इसलिए पार्टी ने इन उपचुनावों में जीते हुए सांसदों के बेटे-बेटियों या रिश्तेदारों को टिकट नहीं देने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि इस बार उपचुनाव में सभी सीटों पर नए कार्यकर्ताओं को टिकट दिया जाएगा।

हाल ही में बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक में ये फैसला लिया गया है। बता दें कि यूपी में कुल 12 सीटों पर उपचुनाव होने हैं। जानकारी के मुताबिक, सांसद बनने के बाद खाली हुई सीटों पर कई सांसद अपने परिजनों को उतारने की तैयारी में थे। पार्टी ने इसे भाँपते हुए साफ कर दिया कि किसी भी जीते हुए सांसद के किसी भी रिश्तेदार को टिकट नहीं दिया जाएगा। पार्टी के इस फैसले ने इन लोगों के इरादों पर पानी फेर दिया।

भारतीय जनता पार्टी यूपी की सभी सीटों के साथ-साथ रामपुर विधानसभा सीट पर काफी जोर लगा रही है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को रामपुर विधानसभा सीट का प्रभारी बनाया गया है। यूपी में 12 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिए भाजपा ने 11 सीटों पर जहाँ एक-एक मंत्री को लगाया है, तो वहीं हारी हुई सीट जलालपुर जीतने के लिए दो मंत्रियों की तैनाती की गई है।