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साथी पत्रकार का आरोप- कापड़ी ने अपनी फिल्म बेचने के लिए दुधमुँही बच्ची को गोद लेने का ‘नाटक’ किया

पत्रकार विनोद कापड़ी ने कुछ दिन पहले दावा किया था कि वो और उनकी पत्नी साक्षी जोशी कूड़ेदान में पड़ी मिली एक बच्ची को गोद लेंगे। लेकिन अब एक दूसरे पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने यह आरोप लगाया है कि यह महज़ साक्षी की नेटफ्लिक्स फिल्म ‘पीहू’ के प्रमोशन का स्टंट था। गौरतलब है कि ‘पीहू’ भी माँ द्वारा पैदा होते ही त्यागी गई एक बच्ची के जीवन पर आधारित है।

ट्विटर पर जड़े आरोप

अभिषेक ने ट्विटर पर ट्वीट-शृंखला में यह दावा किया कि न केवल कापड़ी का बच्ची को गोद ले चुके होने का दावा गलत था, बल्कि इसको लेकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जो ‘हाइप’ बना, वह भी कापड़ी द्वारा ही ‘प्लांटेड स्टोरीज़’ थीं। नागौर, जहाँ यह बच्ची मिली थी, के अधिकारियों ने यह साफ कर दिया कि औपचारिकताएँ अभी शुरू नहीं हुईं हैं, और एक समिति बनेगी, जो बच्ची को गोद लेने वाले माँ-बाप का निर्धारण करेगी।

कूड़े से बच्ची को ग्रामीणों ने बचाया, कापड़ी ने नाम रख दिया?

नागौर के निकट बरनेल गाँव में ग्रामीणों ने एक नवजात बच्ची को कूड़े में से निकाल कर नागौर, राजस्थान के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया था। लेकिन कुछ मीडिया हाउसों ने यह खबर चला दी कि बच्ची को बचाने वाले ही कापड़ी दम्पति थे। जैसे ही बच्ची के मिलने की खबर मीडिया में फैली, विनोद कापड़ी ने ट्वीट कर दिया कि वे इस बच्ची को गोद लेना चाहते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया यूज़र्स से उन्हें मामले की विस्तारपूर्वक जानकारी देने की भी अपील की। जल्दी ही कापड़ी दम्पति ने नागौर के अस्पताल पहुँच बच्ची को भी देखा, और नागौर के जिलाधिकारी से मिल कर बच्ची के गोद लिए जाने के बाबत क़ानूनी प्रक्रिया की भी जानकारी ली।

कापड़ी की पत्नी साक्षी जोशी ने तो उस बच्ची को ‘हमारी बेटी’ सम्बोधित करते हुए ट्वीट भी करना शुरू कर दिया।

विनोद कापड़ी ने और आगे जाकर लड़की का नाम भी रख दिया- ‘पीहू’। यही नाम कापड़ी की पत्नी साक्षी जोशी की कुछ दिन पहले नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म का भी था।

लेकिन अभिषेक उपाध्याय के मुताबिक कापड़ी ने अभी तक कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं की है बच्ची को गोद लेने के लिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विनोद कापड़ी ने केवल बच्ची के साथ फोटो खिंचवाने आदि के बहाने ‘पीहू’ फिल्म के प्रचार के लिए अस्पताल का रुख किया था।

अभिषेक उपाध्याय ने यह भी जोड़ा कि बच्चे को गोद लेना एक शांत प्रक्रिया होती है, ताकि बड़े होकर बच्चे को अपने गोद लिए हुए होने को लेकर किसी असहज स्थिति का सामना न करना पड़े। अतः अगर कापड़ी दम्पति का सच में बच्ची को गोद लेने का इरादा होता, तो वे इतना शोर-शराबा न करते। वह तो बस वाहवाही लूटकर मौके से गायब हो गए।

कापड़ी दावा, हमने प्रक्रिया शुरू कर दी है

वहीं पत्रकार शेफ़ाली वैद्य द्वारा इस मामले में आड़े हाथों लिए जाने के बाद विनोद कापड़ी ने दावा किया है कि उन्होंने बच्चे गोद लेने के इच्छुक दम्पति के तौर पर पंजीकरण 18 जून को करा लिया था। लेकिन यहाँ उनके सामने सवाल यह है कि जब उन्होंने 18 जून को प्रक्रिया प्रारम्भ मात्र की, तो 16 जून से ही वह किस आधार पर बच्ची को गोद ‘ले लेने’ का दम भर रहे थे?

PUBG खेलने से रोका तो छोटे भाई ने की बड़े भाई मोहम्मद शेख की हत्या

टेक्नोलॉजी के साथ सामाजिक ट्रेंड्स और व्यवस्थाएँ तेजी से बदल रही हैं और इसी का नतीजा है कि आए दिन हमें इसके अलग-अलग परिणाम देखने को मिल रहे हैं। महाराष्ट्र के ठाणे से ऑनलाइन गेम PUBG को लेकर एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ पर PUBG खेलने से मना करने पर 15 साल के किशोर ने कथित तौर पर अपने बड़े भाई मोहम्मद शेख (19 साल) की हत्या कर दी। 

वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक ममता डिसूजा ने बताया कि पीड़ित मोहम्मद शेख ने शनिवार (जून 29, 2019) सुबह जब छोटे भाई को अपने मोबाइल फोन पर पबजी खेलने से मना किया तो वो क्रोधित हो गया। डिसूजा ने बताया कि किशोर ने गुस्से में आकर अपने बड़े भाई मोहम्मद शेख का सिर दीवार पर दे मारा और फिर उस पर लगातार कैंची से हमला किया। शेख को सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डिसूजा ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

PUBG की बुरी लत को लेकर इस तरह की घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। तेलंगाना में पिछले महीने, एक 16 वर्षीय लड़के को जब उसके माता-पिता ने अधिकतर समय फोन पर बिताने के लिए डाँटा तो उसने आत्महत्या कर ली। इस गेम के बुरे प्रभाव के मद्देनजर गुजरात के कई शहरों में PUBG बैन कर दिया गया है। गौरतलब है कि, PUBG गेम पर प्रतिबंध लगने के बावजूद इसे खेलने के आरोप में गुजरात पुलिस ने 15 मार्च को राजकोट में 10 छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें से 6 कॉलेज के छात्र भी शामिल थे।

60000 जवान, CCTV कैमरे और आधुनिक तकनीक: अमरनाथ यात्रियों के लिए तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था

अमरनाथ यात्रा के दौरान सरकार इस बार वो सारी व्यवस्थाएँ कर रही हैं, जिससे आतंकियों के मंसूबों को नाकाम किया जा सके। हाल ही में ख़ुफ़िया इनपुट आई थी कि आतंकी अमरनाथ धाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को निशाना बना सकते हैं। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई अहम निर्णय लिए। अमरनाथ यात्रा को सफलता से संचालित करने के लिए सुरक्षा बलों के 60,000 जवानों को लगाया गया है। बालटाल और पुलगाम रूट में इन जवानों को तैनात किया जाएगा। रविवार (जून 30, 2019) को श्रद्धालुओं का पहला जत्था जम्मू स्थित बेस कैम्प से रवाना हुआ

अमरनाथ यात्रा के दौरान लगभग 4000 फ़ीट की ऊँचाई पर जाना होता है, इसीलिए यह काफ़ी कठिन यात्रा भी होती है। सुरक्षा के लिए अधिकतर सीआरपीएफ के जवानों को लगाया गया है और जम्मू कश्मीर पुलिस के जवान भी लगाए गए हैं। सीआरपीएफ के आईजी रविदीप सहाय ने कहा कि यह यात्रा उन लोगों के लिए एक बड़े कार्यक्रम की तरह है और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि इसके लिए भारतीय सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस कंधे से कन्धा मिला कर काम कर रही है।

सीआरपीएफ आईजी ने बताया कि रात के समय भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी जाएगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी किस्म की दिक्कत न आए। यात्रा की सुगमता के लिए केंद्र सरकार ने इस बार तकनीक का भी सहारा लिया है। सभी गाड़ियों को रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग (RFI) से सुसज्जित किया गया है। इससे सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धालुओं की सही लोकेशन पता चलते रहेगी। मानवरहित एरिअल व्हीकल (UAVs) का भी सहारा लिया जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं की पूरी स्थिति पता चलती रहेगी। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों का भी प्रयोग किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि इस यात्रा में आतंकवाद ही एक चिंता है, चिंताएँ और भी हैं।

मौसम की समस्या का भी यात्रियों को अक्सर सामना करना पड़ता है, इसके लिए ‘कस्टमाइज़्ड वेदर अपडेट’ तकनीक का सहारा लिया गया है। इससे मौसम में होने वाले संभावित बदलावों की जानकारी तुरंत मिल पाएगी। जुलाई व अगस्त के दौरान बारिश का मौसम रहता है और मॉनसून के कारण यात्रियों को हर कैम्प में प्रत्येक 3 घंटे के अंतराल पर मौसम की जानकारी मिलती रहेगी। यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर ‘माउंटेन रेस्क्यू टीम’ को स्टैंडबाय पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत उनकी मदद मिल सके। इससे पता चलता है कि सरकार और सुरक्षा बल हर मोर्चे पर काम कर रहे हैं और तैयारी रख रहे हैं।

श्रद्धालुओं के आराम करने व भोजन करने के लिए विभिन्न पड़ाव बनाए गए हैं, जहाँ वे रुक कर विश्राम कर सकते हैं। सुरक्षा और मौसम को लेकर कड़े इंतजाम के अलावा यात्रियों की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

बहन की पढ़ाई से थी जलन, टीचर के साथ मिलकर चचेरे भाइयों ने किया बहन का बलात्कार

एक आठवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा (16 वर्षीया) के साथ उसके चार चचेरे भाइयों द्वारा दो साल तक बलात्कार किए जाने की ख़ौफ़नाक घटना सामने आई है। यह घटना उत्तर प्रदेश के बरेली ज़िले की है जहाँ चार भाइयों ने टीचर के साथ मिलकर अपनी ही बहन का बलात्कार सिर्फ़ इसलिए किया क्योंकि वो पढ़ने में अव्वल थी। 

ख़बर के अनुसार, बरेली ज़िले के सीतापुर में इस्लामिया स्कूल के अंदर बनाया गया बलात्कार का वीडियो सामने आया है जिससे इस बात की पुष्टि हो गई। बलात्कार संबंधी वीडियो जब परिवार के व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजा गया तब इस बात का ख़ुलासा हुआ। आरोपित पीड़िता के पिता को उनकी बेटी का वीडियो वायरल करने की लगातार धमकी देते हुए दुष्कर्म कर रहे थे।

पीड़िता के पिता ने पुलिस थाने में आरोपितों के ख़िलाफ़ शिक़ायत की। पिता की तहरीर पर पुलिस ने दो चचेरे भाई समेत पाँच आरोपितों पर मुक़दमा दर्ज कराया है। 16 साल छात्रा ने भी बताया कि दो साल में कई बार उसके भाइयों और टीचर ने उसका रेप किया।

इस मामले में एडिशनल एसपी (उत्तर) मधुवन कुमार सिंह ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा, “बच्ची को बेहोश करने के बाद भाई और टीचर बारी-बारी से उसका रेप करते थे और वीडियो भी बनाते थे।” सिंह ने इस बात की भी जानकारी दी कि इस मामले में एक आरोपित को गिरफ़्तार किया जा चुका है। उन्होंने बताया, “हमने शिक़ायत का संज्ञान लिया है और हम जल्द से जल्द मजिस्ट्रेट के सामने उसका बयान दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।”

उत्तर प्रदेश में महिलाओं खासकर नाबालिग लड़कियों के ख़िलाफ़ आपराधिक हमलों की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इस महीने की शुरुआत में, उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में युवा लड़कियों के ख़िलाफ़ अपराध के कम से कम पाँच मामले सामने आए हैं। 11 जून 2019 को वरिष्ठ पुलिस और गृह विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक में, उत्तर प्रदेश के सीएम, योगी आदित्यनाथ ने राज्य में अपराधियों के बीच ‘डर पैदा करने’ में विफल रहने के लिए पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों भी लिया था। इसके अलावा उन्होंने पुलिस विभाग को फ़टकार लगाते हुए एंटी रोमियो दस्ते को सक्रिय करने का आदेश दिया था।

इससे पहले वडोदरा में एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा 14 साल की दसवीं कक्षा की छात्रा के साथ न सिर्फ़ बार-बार बलात्कार करने बल्कि इस कुकृत्य को मोबाइल फोन में रिकॉर्ड करने की ख़बर सामने आई थी। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी ख़बर के अनुसार, कथित तौर पर इमरान उस छात्रा को विभिन्न धार्मिक स्थलों पर ले गया और उसका धर्म-परिवर्तन (इस्लाम में) कराने में लगा रहा। 19 वर्षीय तौसीफ़ इमरान ख़ान जिसने नाबालिग का यौन शोषण किया, वो 12वीं कक्षा का छात्र था और मंझलपुर का रहने वाला था। उसके ख़िलाफ़ POCSO अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

TRS विधायक के भाई की गुंडागर्दी, पुलिस और महिला वन रक्षकों को बुरी तरह पीटा

तेलंगाना में सत्तारूढ़ पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी सामने आई है। टीआरएस के कार्यकर्ताओं ने आसिफाबाद जिले में वृक्षारोपण के लिए पहुँचे पुलिस दल और वन रक्षकों की टीम पर हमला बोल दिया। दरअसल, सरकार राज्य में ट्री प्लांटेशन का काम कर रही है। इसके लिए वन विभाग के सहयोग से ट्री प्लांटेशन कराया जा रहा है। इसी दौरान राज्य के आसिफाबाद जिले में कुछ लोगों ने पुलिस और वन विभाग की टीम पर हमला कर दिया। 

हमलावरों ने महिला वन रक्षकों को भी नहीं बख्शा। महिला वनकर्मियों के साथ भी मारपीट की। जान बचाने के लिए वन अधिकारी ट्रैक्टर पर चढ़ गई, लेकिन कार्यकर्ताओं ने उसे वहाँ भी नहीं बख्शा। उसके ऊपर लाठी-डंडों से लगातार वार करते रहे। वह जोर-जोर से दर्द से कराह रही थीं और फिर बेहोश हो गईं। घटनास्थल पर मौजूद दूसरे अधिकारियों ने किसी तरह महिला अधिकारी को बचाया।

ये घटना शनिवार (जून 29, 2019) की है। इसका वीडियो भी सामने आया है। इस हमले में वन विभाग की एक अधिकारी अनीता बुरी तरह से घायल हो गईं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पीड़ित अनीता ने आरोप लगाया है कि हमलावरों का नेतृत्व टीआरएस के विधायक कोनेरु कोनप्पा के भाई कृष्णा कर रहे थे। कृष्णा के नेतृत्व में टीआरएस कार्यकर्ताओं ने वनकर्मियों और पुलिसकर्मियों पर हमला किया। बता दें कि, आरोपित कृष्णा खुद जिला परिषद का चेयरपर्सन है।

जानकारी के मुताबिक, अनीता अपने स्टाफ के साथ सिरपुर कागजनगर ब्लॉक के सरसला गाँव पहुँची थीं। यहाँ उन्हें हरिता हरम वृक्षारोपण अभियान के तहत बीस एकड़ जमीन पर खुदवाई करवानी थी। अनीता ने अपने स्टाफ से काम शुरू करने को कहा। तभी कृष्णा कुछ स्थानीय लोगों के साथ वहाँ पहुँचे और उन्होंने वन विभाग के लोगों को खुदाई करने से रोका। उनका कहना था कि जमीन गाँव वालों की है और वहाँ पौधे नहीं लगाए जा सकते। अनीता ने लोगों को समझाने का प्रयास किया लेकिन वे उनकी एक भी सुनने को तैयार नहीं थे और फिर जैसे ही वन विभाग के लोगों ने खुदाई का काम शुरू किया तो लोगों ने अनीता पर डंडों से हमला कर दिया। अनीता का आरोप है कि कृष्णा राव ने उनके बाल पकड़कर उन्हें खींचा। वो जान बचाकर ट्रैक्टर के ऊपर चढ़ गईं, लेकिन लोगों ने वहाँ भी उनके ऊपर ताबड़तोड़ डंडे बरसाए।

लिबरल गिरोह ने की पेट्रोल पंप कर्मचारियों को नीचा दिखाने की कोशिश, मिला सही जवाब

आईसीसी ने एक जैसे रंग वाली जर्सी पहनने वाली टीमों को अलग कलर वाली जर्सी पहनने के लिए कहा है, ताकि मैच के दौरान सभी खिलाड़ी एक जैसे न दिखें। आईसीसी ने भारत की जर्सी का रंग भी बदलने को कहा और कलर चुनने के लिए बीसीसीआई को छूट दी। बीसीसीआई ने फाइनली केसरिया रंग की जर्सी का चयन किया है। आज रविवार (जून 30, 2019) को चल रहे मैच में भारत इंग्‍लैंड के खिलाफ अपनी नियमित नीली जर्सी की जगह केसरिया जर्सी पहनकर उतरेगा। लेकिन कुछ लोगों को इस रंग से भी आपत्ति हुई है और उनमें से ही एक नाम झूठे आँकड़ों की मदद से सरकार विरोधी प्रोपेगैंडा चलाने वाले ध्रुव राठी का भी है।

ध्रुव राठी ने नई जर्सी पहने हुए इंडियन क्रिकेट टीम के खिलाडियों को ट्वीट करते हुए लिखा, “ये तो पेट्रोल पम्प वालों की तरह दिख रहे हैं।

इसके बाद इंडियन आयल के पेट्रोल पम्प कर्मियों ने भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी का मज़ाक उड़ाने वालों को करारा जवाब दिया है। पेट्रोल पम्प कर्मचारियों ने कहा कि टीम इंडिया द्वारा इस जर्सी को पहनना उनके लिए गर्व की बात है और मज़ाक उड़ाने वालों को नज़रअंदाज़ करना चाहिए। नीचे संलग्न की गई वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे टीम इंडिया की नई जर्सी के बारे में पेट्रोल पम्प कर्मी अपनी राय रख रहे हैं।

टीम इंडिया की नई जर्सी का मज़ाक बनाने वालों को पेट्रोल पम्प कर्मचारों का करारा जवाब

पेट्रोल पम्प कर्मचारियों ने टीम इंडिया की नई जर्सी को ‘प्रेट्रोल पम्प वालों’ की तरह बताने वालों को जवाब देते हुए कहा कि जब ये जर्सी पहन कर टीम इंडिया खेलने उतर रही है, ऐसे समय में उन्हें भी गर्व की अनुभूति हो रही है।

कर्मचारियों ने कहा कि इंडियन आयल की जर्सी पहन कर अगर भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी खेलते हैं तो इससे न सिर्फ़ कम्पनी का, बल्कि उनका भी नाम होता है।

इंडियन ऑइल के कर्मचारियों की इस करारी जवाबी प्रतिक्रिया से किसी भी प्रोफेशन का मज़ाक बनाने वाले लोगों को सबक मिल ही गया होगा। देश में लैंगिक और धार्मिक समानता की बात करने वाले भूल जाते हैं कि प्रोफेशन कोई भी हो, किसी व्यक्ति को उसके जॉब की वजह से हेय दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।

मदरसा शिक्षक ने क़ुरान की आयतें याद न होने पर बच्चे को उलटा लटका कर पीटा, गिरफ़्तार

रावलपिंडी के एक मदरसे में शिक्षक ने एक बच्चे को उलटा टाँग कर उसकी पिटाई की। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षक को गिरफ़्तार कर लिया गया है। नाबालिग को उलटा लटका कर पीटने के मामले में पाकिस्तान पुलिस ने उक्त मदरसे के शिक्षक को गिरफ़्तार किया। पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने इस फुटेज के वायरल होने के कुछ ही घंटों के अंदर मदरसे की लोकेशन का पता लगाया और शिक्षक नूर मोहम्मद को धर दबोचा। पीड़ित नाबालिग व उसके पिता को भी पुलिस ने ज़रूरी पूछताछ के लिए थाने बुलाया।

शुरुआती जाँच से पता चला है कि ये घटना पिछले वर्ष सर्दियों के दौरान की है। इस घटना के बाद पीड़ित पक्ष और मदरसे के बीच समझौता हो गया था, जिसके बाद पुलिस में कोई शिकायत नहीं की गई थी। कहा जा रहा है कि इस मदरसे का सम्बन्ध एक ऐसे व्यक्ति से है, जो आतंकवाद से जुड़ा हुआ है। पाकिस्तान सरकार ऐसे व्यक्तियों को चौथी अनुसूची में रखती है।

मई में तहरीक-ए-इंसाफ के नेतृत्व वाली सरकार ने 30,000 मदरसों में बड़े बदलाव करने की घोषणा की थी और कई ऐसे चैप्टर सिलेबस से हटाए गए थे, जिससे घृणा फैलती हो। इसके अलावा मदरसों में अंग्रेजी भाषा पर ज्यादा ज़ोर देने की बात भी कही गई थी।

इस्लाम के आधुनिकीकरण की वकालत करने वाली और इस्लामी रूढ़िवादिता का विरोध करने वाले इमाम तौहीदी ने ट्विटर पर इस वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें तो बचपन में मदरसे के शिक्षक उँगलियों के बीच पेन्सिल फँसा कर सज़ा देते थे, अब वे क़ुरान की आयतें याद न होने पर उलटा लटका कर मारते हैं। इमाम ने कहा कि आजकल मदरसों में यह आम बात हो गई है।

इजराइली शराब की बोतलों पर महात्मा गाँधी, PM मोदी और नेतन्याहू को पत्र लिख जताई गई आपत्ति

इजराइल की एक कम्पनी द्वारा शराब की बोतलों पर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की तस्वीर लगा कर बेचे जाने का मामला सामने आया है। माका ब्रेवरी नामक कम्पनी द्वारा शराब की बोतल पर गाँधीजी की तस्वीर लगाने का मामला सामने आने के बाद कई लोगों ने आपत्ति जताई है। केरल स्थित महात्मा गाँधी नेशनल फाउंडेशन के चेयरमैन एबी जे जोस ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिकायत दर्ज कराई है। जोस ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी पत्र लिख कर इस मामले से अवगत कराया है। उन्होंने शराब की बोतलों से गाँधीजी की तस्वीरों को हटाए जाने के साथ-साथ कम्पनी पर भी कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है

इस तस्वीर में महात्मा गाँधी को टी-शर्ट, स्टाइलिश काला चश्मा और ओवरकोट पहने हुए दिखाया गया है, जिस पर गाँधीवाड़ी संस्था ने आपत्ति जताई है। जोस का कहना है कि गाँधी की तस्वीर को यह सब पहनाना उनका मज़ाक बनाने के समान है। अमित की वेबसाइट ‘हिपस्ट्रॉरी डॉट कॉम’ पर भी इस तस्वीर को दिखाया गया है और कहा जा रहा है कि इसे अमित द्वारा ही डिज़ाइन किया गया है। जोस ने दावा किया कि इस वेबसाइट पर कई ऐसी चीजें बिक रही हैं, जिसमें गाँधीजी का मज़ाक उड़ाया गया है।

बता दें कि गाँधीजी शराब के प्रयोग के ख़िलाफ़ थे और शराब पीने के ख़िलाफ़ उन्होंने अभियान भी चलाया था। 30 जनवरी को उनकी पुण्यतिथि पर और 2 अक्टूबर को उनके जन्मदिवस पर पूरे भारत में शराबबंदी रहती है और शराब के सारे दुकानों को बंद रखा जाता है। ऐसे में गाँधी की तस्वीर लगा कर शराब बेचना सचमुच ग़लत है। महात्मा गाँधी पूरे देश में शराब पर प्रतिबन्ध की वकालत करते रहे थे। गाँधी जी का कहना था कि अल्कोहल लेने के बाद व्यक्ति किसी जानवर की तरह हो जाता है और वो अपनी पत्नी और बहन में भी फ़र्क़ महसूस करने में विफल होता है। इसीलिए, यह ग़लत है।

बिहार और छत्तीसगढ़ में शराब के ख़िलाफ़ चले अभियानों में गाँधीजी की शिक्षा का हवाला दिया गया। ऐसे में, सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी तस्वीर लगा कर शराब बेचने को अनुचित बताया। दरअसल, कम्पनी ने कई ऐतिहासिक महान व्यक्तित्व के तस्वीर लगा कर अलग-अलग बियर की बोतलें जारी की, जिनमें से एक में महात्मा गाँधी की भी तस्वीर है।

रिहा हुए आकाश विजयवर्गीय, कहा- शर्मिंदा नहीं, ईश्वर दोबारा बल्लेबाजी करने का अवसर न दें

भोपाल की स्पेशल कोर्ट से शनिवार (जून 29, 2019) को जमानत मिलने के बाद भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय रविवार (जून 30, 2019) को जेल से रिहा हो गए। जेल से बाहर आने के बाद आकाश ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जेल में उनका समय अच्छा बीता। साथ ही बीजेपी विधायक ने कहा कि वह जनता की सेवा करते रहेंगे। आकाश ने कहा कि उनका कण-कण पल-पल जनता के लिए है।

जानकारी के मुताबिक, भोपाल की विशेष अदालत ने शनिवार को ही आकाश को जमानत दे दी थी, मगर लॉकअप के तय समय तक स्थानीय जेल प्रशासन को जमानत का अदालती आदेश नहीं मिल पाने के कारण उन्हें जेल में लगातार चौथी रात गुजारनी पड़ी। जेल से बाहर आने पर आकाश ने कहा, “मैं जनता की सेवा करता रहूंँगा। जेल में समय अच्छा बीता है। ऐसी स्थिति में जब पुलिस के सामने ही किसी महिला को घसीटा जा रहा था, मैं कुछ और करने की नहीं सोच सकता था। इसलिए मैंने जो कुछ भी किया उसे लेकर शर्मिंदा नहीं हूँ। हाँ, मैं भगवान से जरूर प्रार्थना करूँगा कि वह दोबारा मुझे ‘बल्लेबाजी’ करने का अवसर ना दे।”

जेल से बाहर आने पर समर्थकों ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया। इससे पहले शनिवार शाम जमानत मिलने की खुशी में उनके समर्थकों ने भाजपा कार्यालय के बाहर हवाई फायरिंग भी की थी। इंदौर नगर निगम के अधिकारी की बल्ले से पिटाई और बिजली कटौती को लेकर बिना अनुमति प्रदर्शन करने के मामले में जज सुरेश सिंह ने आकाश को ₹70 हजार के मुचलके पर जमानत दी।

गौरतलब है कि बुधवार (जून 26, 2019) को इंदौर-3 विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए आकाश विजयवर्गीय ने शहर के गंजी कम्पाउंड क्षेत्र में एक जर्जर भवन ढहाने की मुहिम के विरोध के दौरान बढ़े विवाद के बाद आकाश ने नगर निगम के एक अधिकारी को क्रिकेट के बैट से पिटाई कर दी थी, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

पानी जिसे मोदी जी याद कर रहे हैं, पानी जो देश से गायब होता जा रहा है

बिहार से लेकर चेन्नई तक और जोहान्सबर्ग से दिल्ली तक पीने के पानी की किल्लत हो रही है। मोदी जी ने मंत्रालय बना दिया है। नितीश कुमार बाढ़ के इंतजार में हैं, और बाकी जनता लगातार पानी बर्बाद करने में जुटी हुई है। मंत्रालय तो इस देश में तीन-तीन हैं इस समस्या को लेकर, लेकिन पानी धरती के नीचे से गायब होता जा रहा है।

हाल ही में रवीश कुमार ने इस विषय पर लिखा भी और प्राइम टाइम शो भी किया जो कि बहुत अच्छी बात है क्योंकि बाकी एंकर तो वो भी नहीं कर रहे। रवीश कुमार ने फेसबुक पोस्ट में बिहार के पानी की किल्लत पर सबमर्सिबल पम्प पर लिखा कि कैसे पानी की बर्बादी हो रही है, लेकिन जब मैंने जानकार लोगों से इस पर जानकारी इकट्ठी करनी शुरु की तो पता चला कि पम्प लगाना तो बस कई भयावह कारणों में से एक ही कारण है।

इस सिलसिले में जब मैं उत्सुकतावश जानने के लिए लोगों को तलाशने लगा तो आजादी के एक साल पूर्व जन्मे, आईआईटी खड़गपुर से 1968 में बीटेक, और बाद में साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी से पीएचडी किए हुए डॉ दिनेश मिश्रा जी से बातचीत हुई जो जल संरक्षण से लेकर पानी से जुड़े कई अन्य विषयों पर जमीनी स्तर पर दशकों से कार्य कर रहे हैं। इन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी हैं।


डॉ दिनेश मिश्रा जी से बातचीत

बातचीत से पता चला कि मानवीय लोभ, सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार, अवैज्ञानिक जीवनशैली और बेकार की नीतियों ने हमारे बीच का जलसंकट पैदा किया है जो अब इस स्थिति में पहुँच गई है कि लोग सड़कों पर पानी के लिए मार-पीट करने लगेंगे।

डॉ मिश्रा ने इस बात को पौराणिक संदर्भ देते हुए कहा, “हमारे पुराणों में, धर्मग्रंथों में हमेशा इन बातों को जगह दी गई है कि जितना संसाधन हम उपयोग करते हैं, उसी अनुपात में हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए भी तैयार करके जाना चाहिए। आप देखेंगे कि पहले के राजा, या धनाढ्य लोग कुआँ, नहरें, झील, सरोवर आदि खुदवाते थे और उसके एवज में यह कहा जाता था कि इसका पुण्य मिलता है। इसे आप धार्मिक दृष्टिकोण से न भी देखें तो भी, सामान्य बुद्धि यही कहती है कि जल के स्रोतों की व्यवस्था को गंभीरता से देखा जाता था।”

उसी बात पर आज की आम जनता को लाते हुए उन्होंने कहा कि आज हमने जमीन की सीमाएँ तो बना दी हैं, लेकिन उसके नीचे के जल पर तो कोई रेखा है नहीं। जिसके पास पैसे हैं, वो आपके हिस्से का भी पानी पम्प से खींच रहा है। कोई उससे ज्यादा अमीर होगा तो वो उसके भी हिस्से का खींचेगा।

“सरकारों ने इस समस्या को एक समग्र रूप से देखने की जगह और भयावह ही बना दिया है। आपको जल संरक्षण पर काम करना चाहिए, लेकिन आप पम्प लगवाने को प्रोत्साहित कर रहे हैं! और उसमें भी लेटलतीफी तो देखिए कि जब क्राइसिस हो जाती है, तब ये जगते हैं, फिर टेंडर निकलता है, फिर पाइप खरीदी जाती है, पम्प लाए जाते हैं, बिजली की व्यवस्था होती है, और तब तक बारिश आ जाती है। फिर सब लोग इस आपदा को भूल जाते हैं। यही चक्र के रूप में चलता रहता है।”

आज मोदी जी ने इस संदर्भ में बात करते हुए हैशटेग भी दिया है, और लोगों से पानी के इस्तेमाल पर अपनी समझदारी को ‘जनशक्ति और जलशक्ति’ से जोड़ते हुए फोटो अपलोड करने को कहा है। आशा है कि मोदी जी का यह अभियान ‘बेटी बचाओ’ और ‘स्वच्छता अभियान’ की तरह ही जागरुकता लाए, लेकिन इसमें सरकारों के मंत्रालयों के एक साथ काम करने पर ही कुछ बेहतर निकल कर आएगा।

इसी संदर्भ में डॉ दिनेश मिश्रा कहते हैं, “यहाँ तो तीन-तीन मंत्रालय हैं, लेकिन कोई मंत्रालय या उसके इंजीनियर की एक भी रिकॉर्डेड मीटिंग हुई हो, ऐसा मुझे नहीं लगता। जल संसाधन मंत्रालय है, लघु सिंचाई विभाग है और आपदा प्रबंधन विभाग है। इन तीनों का काम पानी से संबंधित है, लेकिन इनके इंजीनियरों ने कभी साथ बैठ कर बात नहीं की होगी कि पानी के संकट को आने से पहले ही कैसे रोका जाए। पहला मंत्रालय कुछ नहीं करता, तो दूसरा एक्शन में आता है, लेकिन वो भी कुछ नहीं करता और बात ‘आपदा’ बन जाती है।”

आखिर क्या कारण हैं कि पानी जमीन के नीचे से गायब होता जा रहा है? जब बाढ़ से इतना पानी आता है तो आखिर वो कहाँ जाता है? “हमने बाँध बनवा दिए हैं, तो उससे जो पानी, जिस मात्रा में खेतों, नहरों, जलाशयों के माध्यम से जमीन में जाता था, उसकी मात्रा कम हो गई है। दूसरी बात यह है कि अब हमारे मुहल्ले, गाँवों के घर, गलियाँ आदि सब पक्की होती जा रही हैं। हम पानी को जमीन पर गिरते ही, बाहर भेजने लगते हैं।”

“ऐसे में पानी बारिश से गिरता जरूर है, लेकिन वो बह कर नदी में चला जाता है, और वहाँ से समुद्र में। पानी को जमीन से रिस कर ग्राउंड वाटर बनने में सालों लगते हैं। हमारी जीवनशैली बदल रही है जिसमें पानी का उपभोग तो लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसको रीचार्ज करने के लिए हमने कुछ नहीं किया है।”

इसी बावत मुझे ध्यान आया कि एक महिला ने जमीन में जगह-जगह पाइप लगा कर बरसात के पानी को सीधे जमीन के नीचे पहुँचाने की तकनीक का भी इस्तेमाल किया था। ये एक नई तकनीक थी क्योंकि जमीन के नीचे पानी के उतरने में सालों लगते हैं, और उस चक्कर में जिस तेजी से आपदा आई है, उतना समय हमारे पास है नहीं।

अगर लोग बारिशों में जिस बोरवेल, या बोरिंग से पम्प आदि लगाते हैं, उसी के साथ एक ऐसी व्यवस्था कर लें कि बरसात में पानी सीधा एक सामान्य फिल्टरेशन के बाद (पाइप पर जाली लगा दें) सीधे नीचे जाता रहे, तो भी समस्या पर कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है। साथ ही, अगर सरकारें सड़कों और फुटपाथ के किनारे ऐसी व्यवस्था करे कि पानी ग्राउंड वाटर को कृत्रिम रूप से रीचार्ज कर सके तो भी इस संकट से राहत मिल सकती है।

डॉ दिनेश मिश्रा सरकारों के उदासीन रवैये को लेकर काफी निराश दिखे क्योंकि उन्होंने लगातार इसी विषय पर काम किया है, “आप यह देखिए कि सरकारों ने सिंचाई की जिम्मेदारी खुद पर ले ली। पहले गाँव के लोग इन बातों पर बैठ कर विचार करते थे कि सिंचाई कैसे की जाए, कुओं का संरक्षण कैसे हो, तालाब को मरने न दिया जाए। फिर सरकार बीच में आ गई। योजनाएँ बन गईं, और अकाउंटिबिलटी शून्य है।”

“जब सारी चीजें सरकार अपने हाथों में ले लेती है तो आम जनता उस तरह से संसाधनों का ध्यान नहीं रख पाती जैसे पहले रखती थी। पहले वो उन्हें अपनी संपदा समझती थी, अब वो सरकारी हो गई। लोग पंप से खेत पटाने लगे, तालाबों की ज़रूरत खत्म होने लगी, तो वो सूखने लगे। कुओं को लोगों ने मूंदना शुरु कर दिया। सारा पानी नीचे से आने लगा, लेकिन नीचे जाने की व्यवस्थाएँ बंद हो गईं।”

जब हमने डॉ मिश्रा से कहा कि अब तो नया मंत्रालय भी बन गया है, तो वो बहुत उत्साहित नहीं दिखे, “मंत्रालय तो पहले भी थे, योजनाएँ भी हैं लोकिन जब तक आप जिम्मेदारी फिक्स नहीं करेंगे, मंत्रालय तो मंत्री, सेक्रेटरी, इंजीनियर जुटाने का जरिया बन कर रह जाएगा। लोगों को शामिल करने से पहले सरकार को इस आपदा को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए।”

“एक कहावत है कि इस बार के हथिया से अगले साल के रोहिणी नक्षत्र की बारिश का अंदाजा हो जाता है। लेकिन सरकारें हर साल आपदा के इंतजार में रहती हैं। अगर आपको लोगों की परेशानी से इतना मतलब है तो आप आपदा के आने से तीन महीने पहले से ही क्यों काम शुरु नहीं करते? जागरुकता के लिए सरकार क्या करती है? अगर पक्की छतों के मकान और सीमेंट की सड़कों की गलियाँ बन रही हैं तो लोगों को जल संरक्षण के बारे में, बारिश के पानी को जमा करके, धरती में भेजने के लिए कौन प्रोत्साहित करेगा?”

पानी से जुड़े कई धार्मिक पर्वों को एक तरह का जागरुकता अभियान बताते हुए डॉ मिश्रा ने बताया कि कुम्भ मेला या गंगा दशहरा जैसे पर्व में लोग स्वयं ही आते हैं। उसका एक प्रयोजन हुआ करता था। अब सरकारों को इस पर युद्धस्तर पर जुड़ना चाहिए ताकि जनशक्ति से लेकर सरकार के मंत्री तक, मंत्रालयों के बीच सामंजस्य बिठा कर, इस संकट का निवारण करें। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो जिसके पास पैसा होगा वो गहरा बोरिंग करता जाएगा और पानी खींचता रहेगा। गरीब पानी के लिए या तो गंदा पानी पीने को मजबूर होंगे, या फिर प्यास से मरेंगे।