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बम की धमकी मिलने के बाद एयर इंडिया का प्लेन फाइटर जेट्स की सुरक्षा में लंदन में उतरा

मुंबई से नेवार्क जाने वाली एयर इंडिया की एक फ्लाइट में बम होने की धमकी के कारण लंदन में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ गई। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-191 ने आज सुबह 4.49 बजे मुंबई से उड़ान भरी थी, लेकिन उत्तरी आयरलैंड के हवाई क्षेत्र के बाद यह वापस मुड़ गई और लंदन के स्टैनस्टेड हवाई अड्डे पर स्थानीय समयानुसार लगभग 10.15 बजे सावधानीपूर्वक लैंडिंग हुई।


Flight path of AI191 on flightradar24

ख़बर के अनुसार, एयर इंडिया की बोइंग 777-337 (ER) फ्लाइट AI-191 ने मुंबई से उड़ान भरी थी, जो अमेरिका के नेवार्क जा रही थी। यूके के रक्षा मंत्रालय ने कहा, “ब्रिटिश फाइटर जेट्स की सुरक्षा में एयर इंडिया के प्लेन को स्टैनस्टेड एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया गया।” ट्वीट के मुताबिक, गुरुवार (27 जून) को सुबह मिली धमकी के बाद फ्लाइट को लंदन डायवर्ट कर दिया गया था। स्टैनस्टेड एयरपोर्ट पर प्लेन को एसेक्स पुलिस की निगरानी में स्थानीय समयानुसार सुबह 10.15 बजे लैंड कराया गया।

एयर इंडिया ने भी अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट के ज़रिए प्लेन की लैंडिंग की जानकारी दी थी। हालाँकि, बाद में उस ट्वीट को डिलीट कर दिया गया।


एयर इंडिया द्वारा डिलीट किया गया ट्वीट

इमरजेंसी लैंडिंग और लड़ाकू विमानों की मौजूदगी के कारण लंदन के स्टैनस्टेड हवाई अड्डे को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया। हवाई अड्डे के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने बाद में पुष्टि की कि एयर इंडिया की उड़ान के उतरने के बाद हवाई अड्डे को फिर से खोला गया। स्टैन्स्टेड एयरपोर्ट ने ट्विटर पर लिखा, “एयर इंडिया के प्लेन को सुरक्षाबल की निगरानी में रखा गया है। इस घटना के कारण जो भी स्थितियाँ बनी और जो परेशानियाँ हुईं उसके लिए हम माफ़ी चाहते हैं। आपके धैर्य और सहनशीलता के लिए धन्यवाद।”

ख़बरों के मुताबिक़, एयर इंडिया के विमान को एस्कॉर्ट करने के लिए रॉयल एयर फोर्स के दो टाइफून जेट को उतारा गया था। डर्बीशायर पुलिस ने ट्वीट कर जानकारी दी कि लोगों ने जो धमाके की आवाज सुनी है, वह रॉयल एयर फ़ोर्स के लड़ाकू विमानों की आवाज़ थी।

खाना दिया, छत दी, लेकिन वोट BJP को… अब समस्या लेकर मोदी के पास जाओ: कुमारस्वामी, Siddaramaiah

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने लोकसभा चुनावों में राज्य में भाजपा की जीत के लिए जनता पर खुन्नस निकालना शरू कर दिया है। रायचूर जिले में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुमारस्वामी को अचानक से गुस्सा आ गया। विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को कुमारस्वामी ने कहा कि आपलोगों ने मोदी को वोट दिया है इसीलिए मैं आपकी समस्या नहीं हल करूँगा। कुमारस्वामी आजकल ‘विलेज स्टे’ का कार्यक्रम चला रहे हैं, जिसमें वो अलग-अलग गाँवों में जाकर रुक रहे हैं। अभी यह भी ख़बर आई थी कि एक गाँव में कुमारस्वामी के 24 घंटे के कार्यक्रम के दौरान 1 करोड़ रुपए ख़र्च कर दिए गए।

इसी तरह अभी कर्नाटक में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया ने भी लोगों पर ताना मारा। बादामी में एक सभा को सम्बोधित करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि हमनें आपको छत दी, खाना दिया और आप लोगों ने मोदी को वोट दे दिया। सिद्धारमैया ने पूछा कि उन्हें इस बात का कारण नहीं पता है कि लोग भाजपा को वोट क्यों देते हैं? उन्होंने कहा, “हमनें पंचायत भवन बनवाया, आपको खाना दी, छत दी, लेकिन आप लोगों ने वोट भाजपा को दे दिया। मैं हैरान हूँ। आख़िर आपने ऐसा क्यों किया?

कुमारस्वामी ने अपना गुस्सा थर्मल पावर प्लांट के प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को दिखाते हुए उन्हें अपनी समस्याएँ लेकर मोदी के पास जाने की सलाह दी। कर्मचारियों के पास अपनी गाड़ी की खिड़की से झाँकते हुए कुमारस्वामी ने उन्हें ताना मारा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से पूछा कि क्या उन लोगों को लाठीचार्ज की ज़रूरत है? कुमारस्वामी ने पूछा कि क्या मुझे आप लोगों का सम्मान करना चाहिए? कर्नाटक भाजपा के सचिव रवि कुमार ने कहा कि कुमारस्वामी द्वारा प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करवाने की धमकी देना अनुचित है। कुमारस्वामी की आक्रामकता पर भी सवाल खड़े किए।

विधायक अरविन्द लिम्बावली ने सीएम का विरोध करते हुए कहा, “जरा एचडी कुमरस्वामी का दम्भ तो देखिए। अगर आप जनता की समस्याओं को नहीं सुन सकते तो आपको राज्य का मुख्यमंत्री बनने को किसने कहा? कन्नड़ लोगों ने न तो आपको वोट दिया और न ही आपको मुख्यमंत्री बनने को कहा। कृपया इस्तीफा देकर इस राज्य का भला करें। आप किसी लायक नहीं हैं।”

सांसद शोभा करंदलजे ने कुमारस्वामी के इस कृत्य को बेशर्मी भरा बताया। वहीं कुमारस्वामी ने कहा कि उनका ‘ग्राम वास्तव्य’ काफ़ी सुपरहिट हो रहा है और 2006 में मुख्यमंत्री रहते भी उन्होंने ऐसा ही प्रोग्राम चलाया था।

गैर-गाँधी नेताओं ने भी किया है पार्टी का नेतृत्व, राहुल जाना चाहते हैं तो जाने दो: कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता

कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद पर राहुल गाँधी बने रहेंगे या नहीं, यह एक ऐसा मुद्दा बनता जा रहा है जिसका शायद ही कोई अंत हो। अब असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने बुधवार (जून 26, 2019) को बयान दिया है कि यदि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बने नहीं रहना चाहते हैं, तो उनका विकल्प बिना कोई देर किए ढूँढना चाहिए। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर अड़े राहुल गाँधी ने बुधवार को अपने 51 सांसदों की माँग भी ठुकरा दी थी। राहुल ने कहा था कि वह अब पार्टी अध्यक्ष नहीं रहेंगे।

‘कई बार गैर-गाँधी नेताओं ने भी पार्टी का नेतृत्व किया’

तरुण गोगोई ने कहा, “इस समस्या का हल हम सभी को जल्द कर लेना चाहिए। हम चाहते हैं कि राहुल अध्यक्ष पद पर बने रहें। गाँधी परिवार आजादी के बाद से कॉन्ग्रेस का नेतृत्व कर रहा है। हालाँकि, कई बार गैर-गाँधी नेताओं ने भी पार्टी का नेतृत्व किया है, लेकिन ऐसी स्थिति में हमें गाँधी परिवार के समर्थन की आवश्यकता होगी।”

यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी बुधवार को राहुल गाँधी के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। उनकी माँग थी कि राहुल कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद न छोड़ें। उन्होंने राहुल से अपना इस्तीफा वापस लेने की माँग की। हालाँकि, दूसरी ओर राहुल अपने फैसले पर अडिग नजर आ रहे हैं। पार्टी के 51 सांसदों ने भी उनसे इस्तीफा वापस लेने का आग्रह किया था।

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने भी कहा था कि गैर-गाँधी भी कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष बन सकता है, लेकिन गाँधी परिवार को पार्टी में सक्रिय रहना होगा। अगर राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष बने रहते हैं तो अच्छा रहेगा, लेकिन उनकी इच्छाओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए। वे संकट के वक्त पार्टी को संभालने में मदद कर सकते हैं।

रामलिंगम हत्याकांड में NIA ने अहमद शाली को किया गिरफ़्तार, PFI से हैं संबंध

एक बड़ी कार्रवाई के तहत, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने एक्टिविस्ट रामलिंगम की हत्या मामले में तमिलनाडु के थेंकासी के 51 वर्षीय निवासी शाली उर्फ़ ​​म्यान अहमद शाली नाम के एक आरोपित को गिरफ़्तार किया है। शाली को एर्नाकुलम से गिरफ़्तार किया गया था।

नवभारत टाइम्स की ख़बर के अनुसार, तमिलनाडु के तंजावुर में ‘धर्मान्तरण के एक कार्यक्रम’ में पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) एवं सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं का विरोध करने वाले 42 वर्षीय रामलिंगम की हत्या के मामले में NIA ने एक आरोपित को गिरफ़्तार किया है।

आरोपित अहमद शाली ने कथित रूप से हिंदू कार्यकर्ता रामलिंगम की बेरहमी से हत्या कर दी थी क्योंकि उन्होंने इलाक़े में जबरन धार्मिक धर्मांतरण को रोकने का प्रयास किया था। NIA के अनुसार, म्यान अहमद शाली नियमित रूप से इस्लामवादी संगठनों PFI और SDPI की बैठकों में शामिल होता था जहाँ मतांतरण की साजिश रची जाती थी। इस बैठक में रामलिंगम के ख़िलाफ़ हमले की योजना भी बनाई गई थी।

इससे पहले, NIA ने कहा था कि साज़िशकर्ताओं का मकसद केवल रामलिंगम की निर्मम हत्या तक ही सीमित नहीं था, बल्कि साम्प्रदायिक तनाव पैदा करना भी था। NIA ने यहाँ तक ​​कहा कि रामलिंगम की हत्या एक आतंकी गतिविधि थी, क्योंकि उन्हें मुस्लिम उपदेशकों द्वारा धर्म-परिवर्तन का विरोध करने के लिए मारा गया था। ज़्यादातर आरोपी PFI संगठन के थे।

NIA के प्रवक्ता ने बताया कि गिरफ़्तार आरोपित को एर्नाकुलम में NIA की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा और ट्रांजिट रिमांड पर उसे चेन्नई ले जाया गया है जहाँ NIA की विशेष अदालत में उसे पेश किया जाएगा। शुरू में यह मामला तंजावुर ज़िले के तिरुविदईमरुदुर पुलिस थाने में दर्ज किया गया था लेकिन फिर इसे NIA ने अपने हाथों में ले लिया। इससे पहले मई में NIA ने हत्या के सिलसिले में मोहम्मद फारुक नामक एक और PFI सदस्य को गिरफ़्तार किया था। इस मामले को NIA द्वारा लिए जाने से पहले तमिलनाडु पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ़्तार किया था।

कमलनाथ का नया क़ानून: गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों को 10 साल तक की जेल, ₹50000 तक जुर्माना

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार ने गोहत्या के नाम पर होने वाली कथित गुंडई के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाने शुरू कर दिए हैं। बता दें कि राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान भी गायों की देखभाल और सुरक्षा एक अहम मुद्दा थी। तब कॉन्ग्रेस ने हर ग्राम पंचायत में एक गौशाला खोलने का निर्णय लिया था। लेकिन, ताज़ा ख़बर के अनुसार, अब अगर कोई गोहत्या के नाम पर हिंसा करता है तो उसे 6 महीने से लेकर 3 साल तक की सज़ा दी जा सकती है। साथ ही 25 हज़ार से लेकर 50 हज़ार रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इस संशोधित विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा

मध्य प्रदेश गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम-2004 में संशोधन कर राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है। वर्ष 2004 में भाजपा सरकार के दौरान राज्य में गोकशी को रोकने के लिए यह क़ानून बनाया गया था। राज्य पशुपालन विभाग के मंत्री लखन सिंह यादव ने बताया कि सरकार एक्ट में संशोधन करने जा रही है और इसे जल्द ही कैबिनेट की मंज़ूरी के लिए रखा जाएगा। राज्य में विधानसभा का मानसून सत्र 8 जुलाई से शुरू हो रहा है। इसके अलावा इस प्रस्ताव में भीड़ द्वारा की गई हिंसा को लेकर भी सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं।

अगर गोरक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा हत्या की जाती है तो इस तरह के मामलों में 1 वर्ष से लेकर 5 वर्ष तक की सजा दी जा सकती है। अगर कोई एक बार से ज्यादा ऐसे अपराधों में शामिल होता है तो उसे दोगुनी सज़ा दी जाएगी। मंत्री ने इस बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए कहा कि अगर कोई बार-बार इस तरह के अपराधों में शामिल होता है तो उसे 10 वर्ष तक की सजा दी जा सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिवनी जिले में पिछले महीने गोमांस ले जाने के संदेह में एक मुस्लिम महिला और पुरुष को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया था, जिसके बाद सरकार इस तरह के मामलों में लगाम लगाने के लिए यह संशोधन कर रही है।

इससे पहले कमलनाथ सरकार ने गायों को लेकर आने-जाने वाले नियमों में बदलाव कर यह सुनिश्चित करने की बात कही थी कि अगर किसान गायों को लेकर आवागमन करते हैं तो गोरक्षक उन्हें परेशान न करें। ऐसे किसानों और व्यापारियों को पुलिस न रोके, इसके लिए भी नियम बनाने की ख़बरें आई थीं।


तबरेज़ की बीवी को AAP से नौकरी, अंकित के पिता अब तक कर रहे केजरीवाल के ‘न्याय’ का इंतजार

अंकित सक्सेना के पिता से किए असफल वादे के बाद अब दिल्ली में आप सरकार ने तबरेज़ की पत्नी से वादा किया है कि वह उसे रोजगार देंगे। दरअसल खबरों के मुताबिक आप विधायक अमानतुल्लाह खान की अध्यक्षता वाले दिल्ली वक्फ बोर्ड के पैनल ने गुरुवार (जून 27, 2019) को तबरेज की पत्नी को ₹5 लाख और एक सरकारी नौकरी देने का फैसला किया है

अमानतुल्लाह खान ने बताया, “हम तबरेज़ की पत्नी को ₹5 लाख का चेक भेजने की कोशिश कर रहे हैं, हो सकता इस चेक को देने मैं खुद जाऊँ, हम उन्हें वक्फ बोर्ड में नौकरी भी देंगे और कानूनी मदद भी करेंगे।”

हैरानी की बात यह है कि दिल्ली वक्फ बोर्ड का यह फैसला उस समय लिया गया है, जब दिल्ली सरकार को अंकित सक्सेना के पिता को मुआवजा न देने के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। ये वही अंकित सक्सेना है, जिसे समुदाय विशेष की लड़की से प्यार करने पर लड़की के घरवालों ने बीच सड़क पर बेरहमी से मार दिया था।

अंकित के पिता यशपाल सक्सेना ने हाल ही में वादा न पूरा करने के लिए दिल्ली सरकार के प्रति अपनी गहरी नाराज़गी जताई थी। उन्होंने बताया था कि किस तरह दिल्ली सरकार ने उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा न देकर नाउम्मीद किया।

अंकित के पिता ने शिकायत करते हुए कहा था, “हमें बताया गया कि हमें एक अच्छा वकील और वित्तीय मदद मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बेटे के दम पर ही हमारा परिवार चलता था जो चला गया। मुझे दिल का दौरा पड़ा है और मेरी पत्नी को 3 ऑपरेशन से गुजरना पड़ा है। पड़ोसी हमारी थोड़ी मदद करते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा था कि हमें 5 लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा, बाद में उन्होंने कहा कि वह हमारी और मदद करेंगे लेकिन बाद में उन्होंने कुछ नहीं किया। मैं टूट गया हूँ। “

ऐसे में कपिल मिश्रा ने दोनों मामलों में अरविंद केजरीवाल की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए पूछा है, “केजरीवाल सरकार झारखंड में जिस चोर को पब्लिक ने मार डाला उसके परिवार को पाँच लाख रुपये और चोर की बीबी को सरकारी नौकरी दे रही हैं क्योंकि वो एक मुसलमान हैं, ध्रुव त्यागी और अंकित सक्सेना की हत्या दिल्ली में हुई पर उन्हें एक रुपया नहीं दिया क्योंकि वो हिन्दू हैं।”

10 गलियाँ हुईं सुनसान, 125 हिन्दू परिवारों के पलायन के बाद मेरठ बन रहा दूसरा कैराना

अब उत्तर प्रदेश का मेरठ नया कैराना बन रहा है। यहाँ से हिन्दू पलायन करने को मज़बूर हैं। स्थिति भयावह है क्योंकि लोग अपने घरों को छोड़-छाड़ कर जा रहे हैं और अपनी संपत्ति को औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। कैराना में हिन्दुओं के पलायन की ख़बर राष्ट्रीय मुद्दा बनी। दैनिक जागरण ने आज (गुरुवार, जून 27, 2019) को एक विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की है। हम आपको संजीव तोमर की इस व्यापक रिपोर्ट की मुख्य बातें बताते हैं, जिससे आप भी सोचने को विवश हो जाएँगे।

लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के भीतर आने वाले प्रह्लाद नगर में कुल 125 परिवारों द्वारा पलायन की ख़बरें सामने आई हैं। यह मुस्लिम बहुल इलाक़ा है, जहाँ 425 बहुसंख्यक परिवार रहते थे। मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुँच चुकी है। लोगों का साफ़ कहना है कि एक विशेष समुदाय के लोगों द्वारा ऐसी परिस्थितियाँ पैदा की गई कि वे पलायन को मजबूर हुए।

स्थिति यह है कि स्थानीय पार्षद भी लाचार नज़र आ रहे हैं। भाजपा पार्षद जीतेन्द्र पाहवा ने अधिकारियों को स्थिति से बार-बार अवगत कराया लेकिन अभी तक कोई ठोस क़दम नहीं उठाया गया है। बूथ अध्यक्ष महेश मेहता ने नमो ऐप पर शिकायत की है। पीएमओ ने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय को उचित क़दम उठाने को कहा है।

इसके बाद हरकत में आए मुख्यमंत्री कार्यालय ने मेरठ के डीएम व वरिष्ठ एसपी को विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। पार्षद पाहवा ने आरोप लगाया कि पुलिस सिर्फ़ खानापूर्ति कर रही है। मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि संसद सत्र के बाद मेरठ पहुँचते ही वे इस मामले को देखेंगे। सांसद ने स्वीकार किया कि कुछ शरारती तत्वों द्वारा सामाजिक ताना-बाना बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

सांसद अग्रवाल ने कहा कि वे इस सम्बन्ध में अधिकारियों से बात करेंगे। मेरठ के जिलाधिकारी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा रिपोर्ट माँगे जाने की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि अगर ऐसा है तो स्थानीय थाना व प्रशासन से बातचीत कर के सीएमओ को सही जानकारी से अवगत कराया जाएगा।

एसएसपी ने कहा कि पुरानी शिकायतों को खंगाल कर यह देखने की कोशिश की जाएगी कि उन मामलों में पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है, और उसके बाद सीएमओ को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। स्थानीय लोगों ने कहा कि बहू-बेटियों का बाहर बैठना तक दूभर हो गया है क्योंकि उन पर अश्लील कमेंट किए जाते हैं। यह सिलसिला आज से नहीं, बल्कि पिछले 5-6 वर्षों से चला आ रहा है।

स्थानीय जनता को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार से उम्मीद है कि वो सब ठीक कर देगी। पब्लिक का कहना है कि किसी भी सांप्रदायिक तनाव वाली घटना के बाद पुलिस तो आती है लेकिन फिर 2-3 दिन बाद हालात वही हो जाते हैं। समुदाय विशेष के शरारती तत्व स्टंटबाजी, लूटपाट, छेड़छाड़ जैसी हरकतें कर के लोगों को परेशान करते हैं।

विधायक सोमेंद्र तोमर ने कहा कि कॉलोनी में गेट लगाने को कहा गया है। सीओ कोतवाली ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा एक्शन में आने के बाद पिकेट लगा दिया गया है, जहाँ दो पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। वहाँ नियमित जाँच की जाएगी। इसके अलावा एंटी-रोमियो स्क्वाड को भी काम पर लगा दिया गया है।

स्थानीय लोगों ने कहा कि पुलिस सिर्फ़ अस्थायी पिकेट लगाती है, जिसे एक दिन बाद हटा लिया जाता है। लगभग हर रोज़ लोग मकान बेचने को विवश हैं और आए दिन लोगों के पलायन की ख़बर आ रही है। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि छात्राएँ स्कूल और ट्यूशन तक नहीं जा पा रही हैं और स्थिति भविष्य में विकराल रूप ले सकती है।

लोगों ने कहा कि थोड़ी-थोड़ी सी बात पर शरारती तत्व भीड़ लगा देते हैं और हुड़दंग चालू कर देते हैं। समुदाय विशेष के लोग बहुसंख्यकों के मकान के सामने अपनी गाड़ी खड़ी कर देते हैं और मना करने पर गाली-गलौज करते हैं। एक स्थानीय महिला ने कहा कि विरोध करने पर वो कहते हैं कि यह सब उनका अधिकार है। पलायन से दस गलियाँ अब तक सुनसान हो गई हैं।

चैन्नई एक्सप्रेस की गायिका ने फैलाई फर्जी खबर, UP पुलिस ने दिखाया आईना

शाहरुख़ खान की फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस में ‘तितली’ गाना गाने वाली गायिका चिन्मयी श्रीपाद उत्तर प्रदेश पुलिस के खिलाफ फर्जी खबर फैलाते हुए पकड़ी गईं। दरअसल मामला यह है कि चिन्मयी ने ट्विटर पर एक न्यूज़ रिपोर्ट का लिंक शेयर किया जिसमें कहा गया था कि एक 37 वर्षीय महिला के साथ गैंगरेप हुआ और जब वह पुलिस के पास शिकायत लेकर गई तो शिकायत दर्ज कराने के एवज में पुलिस अधिकारी ने उसके साथ सेक्स की माँग की।

चिन्मयी श्रीपाद का ट्वीट जो अब डिलीट कर दिया गया है।

चिन्मयी ने यह ट्वीट करने की जल्दीबाजी में यह भी ध्यान नहीं दिया कि उक्त घटना 2017 की है न कि 2019 की। दूसरी बात यह कि जिस केस की बात चिन्मयी कर रही थीं वह अपने परिणाम तक पहुँच चुका है और उस महिला की सच्चाई भी सामने आ चुकी है जिसकी बात न्यूज़ रिपोर्ट में कही जा रही थी। 

चिन्मयी के ट्वीट पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने आकर जवाब दिया। पुलिस ने भी ट्वीट कर केस से संबंधित तथ्य रखे और बताया कि उक्त घटना रामपुर में हुई थी। एक महिला ने अमीर अहमद और सत्तार अहमद पर गैंगरेप का आरोप लगाया था। रामपुर के गंज पुलिस थाने के सब इंस्पेक्टर जय प्रकाश ने जाँच के दौरान पाया कि महिला द्वारा लगाए गए आरोप गलत और फर्जी थे। इसके बाद अधिकारी जय प्रकाश ने गैंगरेप फाइल बंद कर दी।

गैंगरेप का आरोप झूठा सिद्ध होने के बाद महिला ने सब इंस्पेक्टर से बदला लेने की ठानी। महिला ने अपने एक अन्य मित्र मोहम्मद रफ़ी के साथ मिलकर जय प्रकाश के विरुद्ध षड्यंत्र रचा। महिला ने जय प्रकाश के खिलाफ केस दर्ज कराने का षड्यंत्र रचा कि जब वह गैंगरेप की शिकायत दर्ज करने आई थी तब इसके एवज में जय प्रकाश ने उसके साथ संभोग की माँग की थी।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने जब महिला द्वारा जय प्रकाश पर लगाए आरोपों की जाँच की तो पाया कि महिला ने जय प्रकाश पर फर्जी केस करने के लिए आवाज बदल कर कॉल की थी। महिला के मित्र मोहम्मद रफ़ी ने पुलिस के सामने कबूल किया था कि उसने महिला के साथ मिलकर जय प्रकाश से बदला लेने के लिए षड्यंत्र रचा था। 

उत्तर प्रदेश पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल द्वारा सारे तथ्य रखे जाने के बावजूद चिन्मयी श्रीपाद ने पुलिस की जाँच प्रक्रिया को ही कठघरे में रखना चाहा। जिसपर पुलिस ने उत्तर दिया कि महिला आरोप लगाती थी उसे सब इंस्पेक्टर से फोन आते थे, लेकिन जब उन फोन कॉल की जाँच की गई तो नंबर महिला के मित्र मोहम्मद रफ़ी का पाया गया। जिसके बाद मामले की पूरी सच्चाई सामने आई।

केजरीवाल की ‘फ्री मेट्रो राइड’ हुई साइड, केंद्र ने प्रपोज़ल की बात पर किया एक्सपोज़

केंद्र और दिल्ली सरकार एक बार फिर आमने-सामने है, और इस बार वजह है राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में महिलाओं को दी जाने वाली ’फ्री मेट्रो राइड’ के रूप में केजरीवाल सरकार की लोकलुभावन चुनावी योजना।

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी से आज लोकसभा में टीएमसी सांसद सौगता रॉय ने फ्री दिल्ली मेट्रो योजना पर सवाल पूछा था। जिसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के पास दिल्ली मेट्रो में महिलाओं फ्री सेवा से जुड़ा कोई प्रस्ताव नहीं है।  

कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा में पूछे गए एक अन्य सवाल के जवाब के रूप में, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि केंद्र सरकार का कोई विचार नहीं है कि दिल्ली मेट्रो में किसी को भी मुफ्त सवारी मिलनी चाहिए। बता दें कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों के स्वामित्व में है, जिसमें दोनों पक्षों का इस सार्वजनिक मेट्रो परिवहन सेवा में प्रत्येक 50% स्टैक हैं।

बता दें कि इससे पहले हरदीप सिंह पुरी और ‘मेट्रोमैन’ व लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन के प्रधान सलाहकार इंजीनियर ई श्रीधरन ने केजरीवाल के फ्री मेट्रो योजना पर विरोध जताया था। इस सम्बन्ध में 10 जून को श्रीधरन ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर कहा था, “दिल्ली सरकार के प्रस्ताव पर सहमत न हों। जब मेट्रो शुरू हुई थी तब यह निर्णय लिया गया था कि किसी को भी यात्रा के लिए मेट्रो में किसी तरह की कोई छूट नहीं दी जाएगी। दिल्ली मेट्रो केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार का संयुक्त उपक्रम है। कोई एक हिस्सेदार किसी एक हिस्से को रियायत देने का एकतरफा निर्णय नहीं ले सकता है।” इसके आलावा भी उन्होंने फ्री मेट्रो राइड से होने वाले अन्य नुकसान को गिनाते हुए, इस योजना को भविष्य के लिए त्राषद बताया था।

उन्होंने दोबारा सिसोदिया के लिखे पत्र का जवाब देते हुए लिखा था, “यहाँ तक कि मेट्रो का अपना स्टाफ और प्रबंध निदेशक भी जब यात्रा करते हैं तो टिकट खरीदते हैं। इस योजना में 1566 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान व्यक्त किया गया था। और यह भी कहा गया कि यह खर्च साल दर साल बढ़ता ही जाएगा, क्योंकि मेट्रो बढ़ेगी और किराए बढ़ेंगे। समाज के एक हिस्से को रियायत दी जाएगी, तो बाद में दूसरे भी रियायत देने की माँग करेंगे जैसे कि छात्र, विकलांग, वरिष्ठ नागरिक आदि जो कि इस रियायत के ज़्यादा हकदार हैं। दिल्ली की यह बीमारी देश की दूसरी मेट्रो में भी फैलती जाएगी। इस कदम से दिल्ली मेट्रो अक्षम और कंगाल हो जाएगी। अगर दिल्ली सरकार महिला यात्रियों की मदद करना ही चाहती है तो उनके खातों में सीधा पैसा डाल दे।”

वहीं इससे पहले केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी मेट्रो के फ्री राइड पर आपत्ति दर्ज करते हुए बयान दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि बीजेपी पूरी तरह से महिलाओं के प्रति समर्पित है। हमलोग महिलाओं के लिए कुछ भी करेंगे, जो संभव है। उन्होंने कहा कि योजनाएँ इस तरह से नहीं बनाई जाती है कि पहले घोषणा करें फिर प्रोपोजल तैयार करें।

पुरी ने इससे पहले अपने एक बयान में यह भी कहा कि केजरीवाल पहले भी प्रक्रिया का पालन किए बिना ही लोकलुभावनी योजनाओं की घोषणा करते रहे हैं। गौरतलब है कि केजरीवाल की कई बार दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर से ठन चुकी है जिसके बाद वे आरोप लगाते रहे हैं कि केंद्र सरकार उन्हें काम नहीं करने दे रही है।

फैक्ट चेक: TikTok वीडियो बनाने के लिए यूज़र कर रहा है दिल्ली पुलिस की गाड़ी का इस्तेमाल?

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक एर्टिगा कार पर दिल्ली पुलिस लिखा हुआ है और कार में पुलिस का सायरन (बेकन लाइट) लगी हुई है। टिकटॉक नामक एप्प के इस वीडियो में बिना कमीज पहने हुए एक शख्स चलती हुई कार से उतरता है और फिर दिल्ली पुलिस की उसी कार की छत पर चढ़ जाता है।

इस वीडियो को देखकर लोगों ने दिल्ली पुलिस की लापरवाही को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी और विरोध व्यक्त किया। कुछ ट्विटर यूज़र्स ने दिल्ली पुलिस से शिकायत करते हुए लिखा कि यह शर्मनाक है, करदाताओं के रुपयों का इस तरह से गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

ट्विटर यूज़र की इस शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने संज्ञान लेते हुए जाँच करने का भरोसा दिलाया।

इस यूज़र ने यह वीडियो टिकटॉक पर पोस्ट करने के लिए बनाया था, जो काफी वायरल होने के बाद लोगों के नजर में आया। शख्स कार के ऊपर चढ़कर कोई स्टंट कर रहा था। वीडियो में जो कार नजर आ रही है, इस तरह की गाड़ी अक्सर दिल्ली पुलिस के ACP प्रयोग करते हैं।

क्या है सच्चाई?

टिकटॉक वीडियो में गाड़ी का जो नम्बर है, वो एक एर्टिगा कार है और जेपी शर्मा के नाम पर रजिस्टर्ड है। यह वाहन एक ठेकेदार का है, जिसे पुलिस ने कॉन्ट्रैक्ट पर ले रखा था। इस टिकटॉक वीडियो पर दिल्ली पुलिस जाँच कर रही है। पुलिस पीआरओ मधुर वर्मा का कहना है कि दिल्ली पुलिस को कॉन्ट्रैक्ट पर गाड़ियाँ दी जाती हैं। जेपी शर्मा नाम के कांट्रेक्टर की ये गाड़ी है, जिसे दिल्ली पुलिस के इस्तेमाल के लिए लगाया गया था। जो शख्स इस पर स्टंट कर रहा है उसका नाम रवि है, जो जेपी शर्मा का ड्राइवर है। स्टंट कब बनाया गया है इसकी जाँच की जा रही है।

पुलिस ने इस मामले में कहा, “टिकटॉक वीडियो क्लिप में स्टंट करने वाला शख्स कोई पुलिसवाला नहीं है। ठेकेदार को नियम के उल्लंघन के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”