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दिल्ली का ‘बदला’ पटना में: नीतीश के मंत्रिमंडल विस्तार में BJP के लिए कोई जगह नहीं

बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से किनारा कर लिया था। नीतीश कुमार का कहना था कि चूँकि उन्हें सिर्फ़ एक कैबिनेट सीट ऑफर की जा रही थी, जिसे लेने के लिए उनकी पार्टी में कोई इच्छुक नहीं था। हालाँकि, नीतीश ने पूरी मजबूती के साथ राजग में रहने व केंद्र सरकार को सहयोग करने की बात कही। अब उन्होंने दिल्ली की राजनीति का जवाब पटना में दिया है। आज रविवार (जून 2, 2019) को मुख्यमंत्री ने पटना में मंत्रिमंडल विस्तार किया, जिसमें भाजपा से किसी को भी शामिल नहीं किया गया। कुल 8 नए मंत्री बनाए गए, जिनमें लोजपा के पशुपति कुमार पारस के सांसद बन जाने के बाद खाली हुई जगह भी शामिल है, लेकिन भाजपा के अलावा लोजपा के भी किसी भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया।

विश्लेषक मान कर चल रहे हैं कि दिल्ली में भाजपा द्वारा नीतीश को केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक सीट ऑफर करने का बदला नीतीश ने पटना में भाजपा को मंत्रिमंडल विस्तार से महरूम कर लिया है। नीतीश कुमार का मानना था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में सांसदों की संख्या के हिसाब से गठबंधन दलों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए लेकिन नीतीश कुमार के अनुसार भाजपा ने सिर्फ़ प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व का ऑफर दिया, जिसे उनकी पार्टी ने स्वीकार नहीं किया। इसके ठीक 2 दिन बाद हुए बिहार मंत्रिमंडल विस्तार में नीतीश ने भाजपा के एक भी नेता को मंत्री नहीं बनाया।

ताजा मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बिहार में कुल मंत्रियों की संख्या 33 हो गई है। नए मंत्रियों में अशोक चौधरी, नरेन्द्र नारायण यादव, श्याम रजक, संजय झा, रामसेवक सिंह, लक्ष्मेशेवर राय, नीरज कुमार और बीमा भारती शामिल हैं। इनमें से 5 ऐसे नेता हैं, जिन्हें पहली बार मंत्री बनाया गया है। राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल लालजी टंडन ने इन मंत्रियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। ताजा लोकसभा चुनाव में जदयू ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से पार्टी को 16 सीटों पर जीत मिली।। भाजपा अपने कोटे के सभी 16 सीट जीतने में सफल रही। वहीं लोजपा के खाते में 6 सीटें आईं।

नीतीश मंत्रिमंडल में 2 महादलित मंत्री शामिल किए गए हैं। महादलित समुदाय को साधने के लिए नीतीश पहले भी कोशिश करते रहे हैं। नीतीश ने कहा कि चूँकि भाजपा कोटे का कोई भी सीट खाली नहीं था इसलिए सिर्फ जदयू कोटे की सीटों को भरा गया है, भाजपा के साथ कोई विवाद नहीं है। उप मुख्यमंत्री व भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट कर कहा कि नीतीश ने भाजपा कोटे से किसी को मंत्री बनाए जाने की पेशकश की, लेकिन पार्टी ने इसे भविष्य में करने का निर्णय लिया।

साक्षी महाराज ने ममता पर लगाया हिरण्यकश्यप के खानदान का होने का आरोप

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस का रामभक्तों पर कहर चुनाव के बाद भी जारी है। लेकिन, इसी बीच भाजपा नेता साक्षी महाराज ने एक टिप्पणी कर के इस विवाद को नई हवा दे दी है। पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनावों में हार का सामना करने वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस के जख्मों पर नमक छिड़कते हुए बीजेपी ने जय श्री राम लिखकर दस लाख पोस्टकार्ड भेजने का फैसला किया है। वहीं, बीजेपी के सांसद साक्षी महाराज ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हिरण्य कश्यप की खानदान का बताया है।

‘हिरण्यकश्यप ने जय श्रीराम बोलने पर जेल में डाल दिया था’

भाजपा के सांसद साक्षी महाराज ने कहा, “बंगाल का नाम आते ही त्रेतायुग की याद आती है। जब राक्षस राज हिरण्यकश्यप ने ‘जय श्री राम’ बोलने पर अपने बेटे को जेल में डाल कर यातनाएँ दी थीं। बंगाल में ममता भी यही कर रही हैं। ‘जय श्री राम’ बोलने पर जेल में डाल रही हैं और यातनाएँ दे रही हैं। ममता कहीं हिरण्यकश्यप के खानदान की तो नहीं हैं?”

इसके आगे बीजेपी सांसद ने कहा, “ममता का शासन अलगाववाद से कम नहीं है, इससे बंगाली आहत हैं और इसका खामियाजा ममता को भुगतान ही पड़ेगा। विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनेगी, उनकी तानाशाही चलने वाली नहीं है।”

ममता को भेजेंगे जय श्री राम लिखा कार्ड

इससे पहले पश्चिम बंगाल से बीजेपी के नवनिर्वाचित सांसद अर्जुन सिंह ने कहा कि हमने मुख्यमंत्री के आवास पर 10 लाख पोस्टकार्ड भेजने का निर्णय किया है, जिन पर जय श्री राम लिखा होगा। तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक रह चुके अर्जुन सिंह आम चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए थे। उन्होंने यह बात बीजेपी कार्यकर्ताओं के समूह पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने के बाद कही जो उस स्थान के बाहर प्रदर्शन के दौरान जय श्री राम के नारे लगा रहे थे, जहाँ तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता बैठक कर रहे थे।

1947 में ही दे दी गई थी हिस्सेदारी, मामला खत्म हो गया: ओवैसी के बयान पर BJP का पलटवार

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के ‘किरायेदार नहीं हिस्सेदार’ वाले बयान की भाजपा ने कड़ी निंदा की है। भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के प्रवक्ता माधव भंडारी ने इस बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा, “उन्हें सोच समझकर बोलना चाहिए। उनको किसी ने किरायेदार नहीं कहा, लेकिन हिस्सेदारी की भाषा बोलेंगे तो हिस्सेदारी 1947 में दे दी तो मामला ख़त्म हो गया।”

इससे पहले, शनिवार (1 जून) को असदुद्दीन ओवैसी के ‘किरायेदार नहीं हिस्सेदार’ वाले बयान पर  केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज करते हुए कहा था, “ये जो सेक्युलरिज्म के लिए सियासी सूरमा हैं, इन्होंने देश के अल्पसंख्यकों, विशेष तौर से मुस्लिमों को किरायेदार बना रखा था, हिस्सेदार नहीं बनाया था। मोदी जी ने देश के 130 करोड़ लोगों को विकास का हिस्सेदार बनाया।”

दरअसल, शुक्रवार (1 जून) को हैदराबाद में मक्का मस्जिद पर लोगों को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था,“अगर कोई ये समझ रहा है कि हिन्दुस्तान के वज़ीर-ए-आज़म 300 सीट जीत कर, हिन्दुस्तान पे मनमानी करेंगे, ये नहीं हो सकेगा। वज़ीर-ए-आज़म से हम कहना चाहते हैं, संविधान का हवाला देकर, असदुद्दीन ओवैसी आपसे लड़ेगा, मज़लूमों के इंसाफ़ के लिए लड़ेगा।”

इसके अलावा, ओवैसी ने कहा था कि हिन्दुस्तान को आबाद रखना है, हम हिन्दुस्तान को आबाद रखेंगे। हम यहाँ पर बराबर के शहरी हैं, किरायेदार नहीं हैं हिस्सेदार रहेंंगे।

ख़बर के अनुसार, ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भी कहा था, “भारत का क़ानून, संविधान हमें इजाज़त देता है कि हम अपने धर्म का पालन करें।” उन्होंने कहा, “जब भारत के प्रधानमंत्री मंदिर जा सकते हैं तो हम भी गर्व के साथ मस्जिद जा सकते हैं।” इससे पहले ओवैसी ने बाबा रामदेव के उस बयान की कड़ी निंदा की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि देश की आबादी नियंत्रित करने के लिए तीसरे बच्चे पैदा करने वालों से वोट का अधिकार छीन लेना चाहिए। इस बयान की आलोचना करते हुए ओवैसी ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी से वोट का अधिकार केवल इसलिए नहीं छीन लेना चाहिए क्योंकि वो अपने माता-पिता की तीसरी संतान हैं।

अपने ट्वीट में ओवैसी ने लिखा था, “लोगों को असंवैधानिक बातें कहने से रोकने के लिए कोई क़ानून नहीं है, लेकिन रामदेव के विचारों पर अनुचित ध्यान क्यों दिया जाता है? वह अपने पेट के साथ कुछ कर सकते हैं या अपने पैरों को घुमा सकते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि नरेंद्र मोदी अपना वोट देने का अधिकार सिर्फ़ इसलिए खो दें, क्योंकि वह तीसरी संतान हैं।”


शूरवीरों के सम्मान में, राजनाथ सिंह सियाचिन में: रक्षा मंत्री के रूप में पहला दौरा

भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह का केंद्रीय रक्षा मंत्री के रूप में पहला दौरा सियाचिन का होगा। ये रक्षा मंत्री के रूप में उनका पहला अधिकारिक दौरा होगा। इस दौरान उनके साथ थलसेना प्रमुख जनरल विपिन रावत भी होंगे। राजनाथ सिंह ने पिछली मोदी सरकार में 5 वर्षों तक गृह मंत्री का ज़िम्मा संभाला था। नई सरकार में उन्हें रक्षा मंत्री का ज़िम्मा सौंपा गया है और गृह मंत्री के रूप में उनकी जगह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कार्यभार संभाला।राजनाथ सियाचिन ग्लेशियर के दौरे पर सोमवार (जून 2, 2019) को जाएँगे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बाहर रक्षा बेस पर भी यह उनकी पहली यात्रा है।

सियाचिन दौरे के दौरान राजनाथ वहाँ स्थित वार मेमोरियल पर जवानों को श्रद्धांजलि देंगे और वहाँ तैनात जवानों से मुलाकात करेंगे। रक्षा मंत्री सियाचिन की कठिन परिस्थितियाँ और वहाँ मौजूद रक्षा चुनौतियों का जायजा लेंगे और इस सम्बन्ध में जवानों से जानकारी भी लेंगे। इससे पहले तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारामन ने भी सियाचिन का दौरा किया था। उन्होंने वहाँ तैनात जवानों संग दशहरा का पर्व मनाया था। उनसे पहले जुलाई 2018 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने सियाचिन का दौरा किया था। पर्रीकर ने सियाचिन ग्लेशियर का हवाई सर्वे भी किया था।

हिमालयन रेंज में मौजूद सियाचिन दुनिया का सबसे ऊँचा युद्ध क्षेत्र है। रणनीतिक रूप से भारत के लिए यह काफ़ी महत्वपूर्ण है लेकिन उतना ही दुर्गम भी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1984 से लेकर अब तक पिछले 35 वर्षों में 900 के करीब जवान वहाँ वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं। अधिकतर जवान यहाँ मौसम की मार और हिमस्खलन के कारण वीरगति को प्राप्त हो जाते हैं। यहाँ औसत 1000 सेंटीमीटर बर्फ गिरती है। यहाँ का न्‍यूनतम तापमान माइनस 50 डिग्री (-140 डिग्री फॉरेनहाइट) तक हो जाता है।

‘लव-स्टोरी’ पर ‘जय श्री राम’ बदनाम: मजलिस बचाओ तहरीक नेता द्वारा मुस्लिम लड़के की पिटाई की झूठी खबर

ओवैसी की पार्टी (AIMIM) के पूर्व नेता और मजलिस बचाओ तहरीक के नेता अमजद उल्लाह खान ने ट्विटर पर तस्वीरें शेयर करते हुए भाजपा और आरएसएस पर आरोप लगाया है कि उनके कार्यकर्ताओं ने तेलंगाना के करीमनगर में जय श्री राम न बोलने पर एक मुस्लिम लड़के की पिटाई कर दी थी। इसे दूसरे सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा भी शेयर किया जा रहा है।

अमजद का ये आरोप बिल्कुल निराधार है, क्योंकि तेलंगाना के करीमनगर के पुलिस कमिश्नर ने मुस्लिम व्यक्ति का एक वीडियो शेयर करते हुए साफ किया कि उस लड़के को निजी कारणों की वजह से पिटाई की गई है। इसका कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है।

उन्होंने बताया कि ये सांप्रदायिक मामला नहीं, बल्कि लव-स्टोरी का मामला है और पिछले कुछ दिनों से एक किशोर लड़की को परेशान करने के लिए लड़के को पीटा गया है। पुलिस ने उन 5 लोगों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिन्होंने उसकी पिटाई की थी। इसके साथ ही, उस मुस्लिम लड़के के पिता ने ये भी बात स्वीकारी है कि इसमें उनके बेटे की गलती थी, जिसकी वजह से उसकी पिटाई की गई और उन्होंने इस बात के लिए माफी भी माँगी। साथ ही उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि इस घटना का कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं था।

इस घटना की सच्चाई के सामने आने के बाद लोगों ने मामूली सी घटना को सांप्रदायिक रंग देकर नफरत फैलाने के लिए अमजद उल्लाह खान को निशाने पर ले लिया। लोगों ने उससे फेक खबर को डिलीट करने के लिए कहा।

आए दिन मामूली सी मारपीट की घटना को कुछ लोग सांप्रदायिक रंग देने का भरपूर प्रयास करते हैं। अभी पिछले दिनों 25 मई को गुरुवार की रात कथित तौर पर एक मुस्लिम युवक (बरकत अली) की टोपी फेंकने और जबरन जय श्री राम बुलवाने का मामला सामने आया था। मगर, जब पुलिस ने इसकी तहकीकात की, तो पता चला कि मुस्लिम युवक के साथ मारपीट हुई थी। लेकिन इस दौरान न तो किसी ने उसकी टोपी फेंकी और न ही उसकी शर्ट फाड़ी गई। जाँच के दौरान सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद ये बात निकल कर सामने आई कि दो युवकों के बीच कहासुनी के बाद हाथापाई हुई और इस दौरान मुस्लिम युवक की टोपी गिर गई, जिसे उसने खुद ही उठाकर अपनी जेब में रखा, किसी दूसरे ने उसकी टोपी को हाथ तक नहीं लगाया। इस मामले में भी पुलिस ने कहा था कि शराब के नशे में की गई मामूली सी मारपीट की घटना को कुछ असामाजिक तत्व सांप्रदायिकता का रंग देने का प्रयास कर रहे हैं।

अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर कॉन्ग्रेस विधायक, ट्रैक्टर चालक की मौत का मामला

राजस्थान कॉन्ग्रेस के विधायक और पूर्व पुलिस महानिदेशक हरीश मीणा अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। उनका आरोप है कि उनके विरोध प्रदर्शन के बावजूद राज्य सरकार उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही जिन्होंने कथित तौर पर एक ट्रैक्टर-चालक की टोंक में बुधवार को पीट-पीट कर (लिंचिंग कर) हत्या कर दी थी। उनका धरना तीन दिन से जारी है। उनकी माँग भजनलाल मीणा नामक ट्रैक्टर-चालक को न्याय दिलाने की है, जिनकी संदेहास्पद स्थितियों में टोंक के लक्ष्मीपुरा गाँव में मौत हो गई थी।

भजनलाल की लाश के साथ धरना, भाजपा भी कूदी मैदान में

हरीश मीणा को भाजपा नेताओं का भी समर्थन मिलने लगा है। भाजपा के राज्यसभा सांसद किरोड़ीमल मीणा ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों की माँगें 5 जून तक पूरी नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। राजस्थान विधानसभा के उप नेता विपक्ष और भाजपा विधायक राजेंद्र राठौर ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अशोक गहलोत की राज्य सरकार के दिन अब गिनती के हैं क्योंकि उनके खुद के विधायकों को अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठना पड़ रहा है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी ने भी आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस सरकार जान बूझकर मामला दबाने की कोशिश कर रही है। जहाँ पुलिस भजनलाल मीणा की मौत को दुर्घटनावश बता रही है वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी हत्या में पुलिस का हाथ है। हरीश मीणा भजनलाल के पार्थिव शरीर और उनके परिवारजनों के साथ नगरफोर्ट गाँव में धरने पर बैठे हैं

J&K: रमज़ान में नहीं रोका गया ‘ऑपेरशन’, अब तक 100 आतंकी हुए ‘न्यूट्रल’

रमज़ान के दौरान आतंकवाद विरोधी अभियानों को रोकने के लिए कश्मीर के राजनीतिक दलों की माँग को इस बार नज़रअंदाज कर दिया गया। हिंदुस्तान टाइम्स के हवाले से खबर है कि सुरक्षा बलों ने इस अवधि के दौरान कश्मीर में 23 स्थानीय और विदेशी आतंकवादियों का सफाया कर दिया है। जम्मू कश्मीर में 2019 में मारे गए आतंकवादियों की संख्या 100 से अधिक हो गई है। इसके परिणामस्वरूप पिछले शुक्रवार (31 मई) को जमात-उल-विदा के दौरान घाटी में बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण मज़हबी सभाएँ सम्पन्न हुईं।

पिछले साल घाटी में आतंकरोधी अभियानों की शुरुआत न होने के कारण, रमज़ान महीने के दौरान केवल 11 आतंकवादी मारे गए थे और वह भी कुपवाड़ा और हंदवाड़ा ज़िलों में। ख़बर के अनुसार, ईद-उल-फितर त्योहार के बाद, घाटी में बढ़ती हिंसा और कट्टरपंथ का हवाला देकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 19 जून, 2018 को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) से अपना समर्थन वापस ले लिया था जिससे जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार टूट गई थी।

हालाँकि, पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती चाहती थीं कि सेना इस साल भी रमज़ान के दौरान आतंकरोधी अभियान न चलाए, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने इस माँग को नज़रअंदाज़ कर दिया। शुक्रवार तक सुरक्षा बलों द्वारा 23 आतंकवादियों को मार गिराया गया था, जिसमें अल-क़ायदा से जुड़े आतंकवादी संगठन अंसार ग़ज़ावत-उल-हिंद का खूंखार आतंकी ज़ाकिर मूसा भी शामिल था। घाटी के शोपियाँ, पुलवामा, अवंतीपोरा, सोपोर, कुलगाम और अनंतनाग इलाक़ों में अन्य आतंकी मारे गए।

आतंकवाद-विरोधी अभियानों में कोई कसर न छोड़े जाने के अलावा सुरक्षा बलों ने यह भी सुनिश्चित किया कि विदेशी आतंकवादियों को रमज़ान महीने के दौरान फिर से संगठित होने और योजना बनाने का कोई मौका ना मिल सके।

इमरान खान को नहीं है प्रोटोकॉल और नियम की तमीज़, सऊदी ने रद की कैबिनेट मीटिंग

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की एक ‘बेहूदा’ हरकत की वजह से उनके देश को अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी और कूटनीतिक झटके का सामना करना पड़ रहा है। सऊदी के राजा किंग सलमान से अपनी बात अधूरी छोड़ इमरान आगे चल दिए। बताया जा रहा है कि इसके बाद किंग सलमान और उनकी कैबिनेट के साथ इमरान की बैठक रद्द कर दी गई।

अपनी बात कहकर चल पड़े इमरान, देखते रह गए अनुवादक और किंग सलमान

सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो के अनुसार इमरान खान सऊदी के दरबार में पहुँचे और किंग सलमान से उन्होंने कुछ बोला। अभी किंग सलमान का जवाब देना तो दूर, उनके शाही अनुवादक ने इमरान की बात का अनुवाद भी नहीं किया था कि पाकिस्तानी पीएम ने सर हिलाकर उन दोनों को इशारा किया और चल पड़े। किंग सलमान और उनके अनुवादक देखते रह गए।

इस पर पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने पाकिस्तानी सेना की कथित ‘पीएम सेलेक्शन कमेटी’ को सलाह दी कि आगे से वे जिसे भी पीएम चुनें, उसे कम-से-कम प्रोटोकॉल के नियम सिखा दें। यह आम धारणा है पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के बारे में कि उनका जनता ने निर्वाचन नहीं बल्कि सेना ने ‘चुनाव’ किया था, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को सत्ता से दूर रखने के लिए।

सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी ही ले रहे मजे

इमरान खान की इस हरकत पर पाकिस्तानी ही उनके सबसे ज्यादा मजे ले रहे हैं।

पाकिस्तान ने की नीच हरकत, भारतीय हाई कमीशन में अतिथियों का किया अपमान

पाकिस्तान भारतीय उच्चायोग की इफ्तार पार्टी में पाकिस्तानी अधिकारियों ने नापाक हरकत को अंजाम दिया है। भारतीय उच्चायोग की तरफ से रमजान के मौके पर इस्लामाबाद के सेरेना होटल में शनिवार (जून 1, 2019) को इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। इसमें शामिल होने के लिए कई मोहमानों को न्यौता दिया गया था। जानकारी के मुताबिक, पार्टी में आने वाले मेहमानों के साथ पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों और पाकिस्तानी जवानों ने बदसलूकी की। कई मेहमानों को बाहर ही रोक दिया गया उनकी बार-बार जाँच की गई। सैकड़ों मेहमानों को डरा-धमकाकर वापस भेज दिया गया और जब भारतीय अधिकारियों और मेहमानों ने इस बात का विरोध किया तो उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और अपशब्द भी कहे गए।

इस पूरे घटनाक्रम पर पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया ने खेद जताया है। एक वीडियो में अजय ने पार्टी में उपस्थित लोगों का शुक्रिया अदा करने के साथ ही माफी भी माँगते हुए नज़र आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं उन लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ, जो यहाँ आए हैं, खासकर उन मेहमानों का जो कराची और लाहौर से यहाँ पहुँचे हैं। साथ ही माफी भी माँगता हूँ कि लोगों को अंदर आने में काफी परेशानी हुई और कई दोस्त यहाँ तक नहीं आ सके हैं। इसके साथ ही बिसारिया ने पाकिस्तान की इस हरकत पर कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों का इस प्रकार का व्यवहार न केवल राजनयिक आचरण और सभ्य व्यवहार के बुनियादी मानदंडों का उल्लंघन करता है, बल्कि वे द्विपक्षीय संबंधों के प्रति ‘काउंटर-प्रोडक्टिव’ हैं।   

वैसे ये पहला मामला नहीं है, जब पाकिस्तान ने ऐसा किया है। इससे पहले भी कई बार देखा गया है कि भारतीय राजनयिकों को परेशान करने के लिए उनके घरों की बिजली काटने या पानी रोकने जैसी हरकतें की गई हैं। पुलावामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच का तनाव बढ़ गया है। अभी हाल हाल ही में जब 30 मई को नरेंद्र मोदी ने पीएम पद की शपथ ली थी तो पाकिस्तान को न्यौता नहीं दिया गया था। ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान इस बात से बौखलाया हुआ है और अपनी बौखलाहट व भड़ास वो इस तरह की नापाक हरकत करके निकाल रहा है, जो कि बेहद निंदनीय है।

कॉन्ग्रेस IT सेल की प्रमुख दिव्या स्पंदना के ट्वीट गायब, क्या छोड़ दिया हाथ का साथ?

कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया प्रमुख दिव्या स्पंदना, जिसे रम्या के नाम से भी जाना जाता है, ने अपने ट्विटर अकाउंट से सारे ट्वीट्स डिलीट कर दिए हैं। ब्लू टिक के साथ स्पंदना के वेरीफाइड ट्विटर अकाउंट पर कोई भी ट्वीट दिखाई नहीं दे रहा है। इसके साथ ही दिव्या ने अपने अकाउंट में से बायो भी डिलीट कर दिया है, जिसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया प्रमुख होने की बात लिखी थी। ऐसे में अब कयास लगाने शुरू हो गए हैं कि क्या उन्होंने ‘हाथ’ का साथ छोड़ दिया है।

हालाँकि, अभी तक न तो पार्टी की तरफ से और न ही दिव्या की तरफ से किसी तरह की कोई आधिकारिक जानकारी दी गई है। समाचार एजेंसी एएनआई का कहना है कि उन्होंने इस बारे में कॉन्ग्रेस पार्टी से बात करने की कोशिश की, लेकिन पार्टी ने दिव्या के ट्वीट डिलीट करने पर किसी तरह की कोई टिप्पणी देने से इनकार कर दिया। वैसे, देखा जाए तो लोकसभा चुनाव में भाजपा से करारी शिकस्त के बाद से कॉन्ग्रेस मीडिया से बचती हुई नज़र आ रही है और पार्टी ने तो स्पष्ट तौर पर अपने प्रवक्ताओं को किसी न्यूज डिबेट में शामिल होने से भी मना कर दिया है।

दिव्या स्पंदना के ट्विटर अकाउंट का स्क्रीनशॉट

जानकारी के अनुसार, दिव्या ने पिछले साल अक्टूबर में पार्टी से नाराज होकर कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया था। हालाँकि, कुछ दिनों बाद वो वापस ट्विटर पर आ गई और फिर से अपने ट्विटर अकाउंट के बायो में खुद को कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया प्रमुख लिखा। अब एक बार फिर से स्पंदना ने अपने ट्वीट्स और बायो को डिलीट कर दिया है। ऐसा लग रहा है कि वो पार्टी से नाराज चल रही है। गौरतलब है कि, दिव्या ने इससे पहले अपने अकॉउंट पर ट्वीट करते हुए मीम शेयर किया था। उन्होंने लिखा था कि मोदी को वोट देने वाले तीन लोगों में एक आदमी बेवकूफ़ होता है, बिल्कुल बाक़ी दोनों की तरह।